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NCERT
SOLUTIONS
CLASS - 12th
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Book : Manovigyan Ncert Solutions | Chapter - 2 Psychology
Class : 12th
Subject : Psychology
Chapter : 2
Chapter Name : आ मा एवं यि त व
Q1 आ मा या है ? आ मा क भारतीय अवधारणा पा चा य अवधारणा से कस कार भ न है ?
Answer. भारतीय सां कृ त संदभ म आ म का व लेषण अनेक मह वपण ू प को प ट करता है जो पा चा य
सां कृ तक संदभ म पाए जाने वाले प से भ न होते ह। भारतीय और पा चा य अवधारणाओं के म य एक
मह वपण ू अंतर इस त य को लेकर है क आ म और दस ू रे अ य के बीच कस कार से सीमा रे खा नधा रत क
गई है । पा चा य अवधारणा म यह सीमा रे खा अपे ाकृत ि थर और ढ़ तीत होती है । दस
ू र तरफ, भारतीय
अवधारणा म आ म और अ य के म य सीमा रे खा ि थर ना होकर प रवतनीय कृ त क बताई गई है । इस कार
एक ण म यि त का आ मा अ य सब कुछ को अपने म अंत न हत करता हुआ मांड म वल न होता हुआ
तीत होता है । कंतु दस
ू रे ण म आ मा अ य सबसे पण ू तया व नव तत होकर यि तगत हाथ म( उदाहरणाथ,
हमार यि तगत आव यकताएं एवं ल य) पर क त होता हुआ तीत होता है । पा चा य अवधारणा आ मा और
अ य मनु य और कृ त तथा आ म न ठा और व तु न ठ के म य प ट वीभाजन करती हुई तीत होती है ।
पा चा य सं कृ त म आ मा और समह ू को प ट प से प रभा षत सीमा रे खाओं के साथ दो भ न इकाइय के
प म वीकार कया गया है । यि त समह ू का सद य होते हुए भी अपनी यि त का बनाए रखता है । भारतीय
सं कृ त म आ मा को यि त के अपने समह ू से पथ
ृ क नह ं कया जा सकता है , बि क दोन सामंज य पणू
सहअि त व के साथ बने रहते ह। दस
ू र तरफ पा चा य सं कृ त म दोन के बीच एक दरू बनी रहती है । यह
कारण है क अनेक पा चा य सं कृ तय का तवाद और अनेक ए शयाई सं कृ तय का सामू हकतावाद
सं कृ त के प म वशेषीकरण कया जाता है ।
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Q2 प रतोषण के वलंब से या ता पय है ? इसे य वय क के वकास लए मह वपण
ू समझा जाता है ?
Answer. हम ायः अपनी कुछ आव यकताओं क संतिु ट को वलं बत अथवा आ थ गत कर दे ते ह।
आव यकताओं के प रतोषण को वलं बत अथवा आ थ गत करने के यवहार को सीखना ह आ म नयं ण कहा
जाता है । दरू गामी ल य क ाि त के लए आप नयं ण एक मह वपण ू भू मका नभाती है । भारतीय सां कृ तक
परं पराएं हम कुछ ऐसे ह भावी उपाय दान कराती है , िजनसे आ म नयं ण का वकास होता है ( उदाहरणाथ,
त अथवा रोजा म उपवास करना और सांसा रक व तओ ु ं के त अनासि त का भाव रखना)। आ म नयं ण के
लए अनेक मनोवै ा नक तकनीक सझ ु ाए गई है । अपने यवहार का े ण एक तकनीक है िजसके वारा आ म
के व भ न प को प रव तत, प रमािजत अथवा सश त करने के लए आव यक सच ू नाएं ा त होती ह। आ मा
अनद ु े श एक अ य मह वपण ू तकनीक है । हम पराया अपने आप को कुछ करने तथा मनोवां छत तर के से यापार
करने के लए अनद ु े श दे ते ह। ऐसे अनद ु े श आ म नयमन म भावी होते ह। आ म बलन एक तीसर तकनीक है
इसके अंतगत ऐसे यवहार तत ु होते ह िजनके प रणाम सख ु द होते ह। उदाहरणाथ, य द आपने अपनी पर ा म
अ छा न पादन कया है तो आप अपने म के साथ फ म दे खने जा सकते ह। यह तकनीके लोग वारा
उपयोग म लाई जाती ह और आ म नयमन तथा आ म नयं ण के संदभ म अ यंत भावी पाई गई ह।
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Q3 यि त व को आप कस कार प रभा षत करते ह? यि त व के अ ययन के मख
ु उपागम कौन से ह?
Answer. यि त व श द ायः हमार दै नं दनी चचा अथवा बातचीत म कट होता है । यि त व का शाि दक
अथ लै टन श द परसोना से लया गया है । परसोना उस मख ु ोटे को कहते ह िजसे अपनी मख
ु पस जा को बदलने
के लए रोमन नाटक म अ भनेता उपयोग म लाते थे। एक सामा य जन के लए यि त व का ता पय
सामा यतया यि त के शार रक एवं बा य प से होता है । मनोवै ा नक श द म यि त व से ता पय उन
व श ट तर क से है िजनके वारा यि तय और ि थ तय क त अनु या क जाती है । श द यि त व इस
अथ म अन य एवं सापे प से ि थर गण
ु से है जो एक समयाव ध म व भ न ि थ तय म यि त के यवहार
को व श टता दान करते ह।
यि तय के यवहार म पाई जाने वाल भ नता तथा संग त को समझने के लए और उसक या या करने के
लए अनेक उपागम एवं स धांत वक सत कए गए ह। यह स धांत मानव यवहार के व भ न मॉडल पर
आधा रत है । येक स धांत यि त व के कुछ प पर ह काश डालता है , सभी प पर नह ं। मनोवै ा नक
ने यि त व के प और वशेषक (शीलगण ु ) उपागम के म य वभेद कया है :
प उपागम (type approach) यि त के े त यवहार परक वशेषताओं के कुछ यापक व प का पर ण
कर मानव यि त व को समझने का यास करता है ।
इसके वपर त वशेषक उपागम (trait approach) व श ट मनोवै ा नक गण
ु पर बल दे ता है िजसके आधार पर
यि त और ि थर प म भ न होते ह।
अंतः या मक उपागम (interactional approach) के अनस
ु ार ि थ तपरक वशेषताएं हमारे यवहार को
नधा रत करने म मह वपण
ू भू मका नभाती है ।
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Q4 यि त व का वशेषक उपागम या है ? यह कैसे प उपागम से भ न है ?
Answer. प उपागम यि त के े त यवहारपरक वशेषताओं क कुछ यापक व प का पर ण कर
मानव यि त व को समझने का यास करता है येक यवहार पर एक व प यि त व के कसी एक कार को
इं गत करता है िजसके अंतगत उस व प क यवहारपरक वशेषता क समानता के आधार पर यि तय को
रखा जाता है । ाचीनकाल से ह लोग को यि त व के प म वग कृत करने का यास कया गया है । ीक
च क सक ह पो े स ने एक यि त व का प व ान ता वत कया जो लइ ू ड और यमू र पर आधा रत
है । उ ह ने लोग को चार प म वग कृत कया है ( जैसे- उ साह , लैि मक, ववाद तथा कोपशील)। भारत म
भी एक स ध आयव ु दक ंथ चरक सं हता ने लोग को वात, प , एवं कफ तीन वग म तीन यम ू रल त व ,
िज ह दोष कहते ह, के आधार पर वग कृत कया है ।
जब क वशेषक उपागम मु यतः यि त व के आधारभत ू घटक के वणन अथवा वशेषीकरण से संबं धत होता है ।
यह स धांत यि त व का नमाण करने वाले मल ू त व क खोज करता है । मनु य यापक प से मनोवै ा नक
गणु म भ नताओं का दशन करते ह, फर भी उनको यि त व व लेषक के लघु समह ू म सि म लत कया जा
सकता है । वशेषक उपागम हमारे दै नक जीवन के सामा य अनभु व के बहुत नजद क है । उदाहरण के लए, जब
हम यह जान लेते ह क कोई यि त सामािजक है तब हम यह मान लेते ह क वह यि त ना केवल सहयोग,
म ता और सहायता करने वाला होगा बि क सामािजक घटक से यु त यवहार द शत करने म भी व ृ होगा।
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अथात कह सकते ह वशेषक उपागम व श ट मनोवै ा नक गण
ु पर बल दे ता है िजसके आधार पर यि त संगत
और ि थर प म भ न होते ह।
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Q5 ायद ने यि त व क संरचना क या या कैसे क है ?
Answer. ाइड के अनस ु ार यि त व के ाथ मक संरचना मक त व तीन है - इदम ् या इड(id), अहं (ego),
पराहम(superego)। यह त व अचेतन म ऊजा के प म होते ह और इनके बारे म लोग वारा कए गए यवहार
के तर क से अनम
ु ान लगाया जा सकता है ।
इड- यह यि त क मल ू व ृ क ऊजा का ोत होता है । इसका संबध ं यि त क आ दम आव यकताओं,
कामइ छाओं और आ मक आवेगो क ता का लक तिु ट से होता है । यह सख ु े सा- स धांत(pleasure principle)
पर काय करता है िजसका यह अ भ ह होता है सखु क तलाश करते ह और क ट का प रहार करते ह। ाइड के
अनसु ार मनु य क अ धकांश मल ू व ृ क ऊजा कामक ु होती है , और शेष ऊजा आ मक होती है । इड को नै तक
मू य , समाज और दसू रे लोग क कोई परवाह नह ं होती है ।
अहं - इसका वकास इड से होता है और यह यि त क मल
ू व ृ क आव यकताओं क संतिु ट वा त वकता के
धरातल पर करता है । यि त व क यह संरचना वा त वकता स धांत(reality principle) से संचा लत होती है
और ाय: इड को यवहार करने के उपयु त तर क क तरफ न द ट करता है ।
पराहम- पराहम को समझने का और इसक वशेषता बताने का सबसे अ छा तर का यह है क इसको मान सक
काय क नै तक शाखा के प म जाना जाए। पराहम, इड और अहं को बताता है क व श ट अवसर पर इ छा
वशेष क संतिु ट नै तक है अथवा नह ं।
इस कार यि त के काय के प म ाइड का वचार था क मनु य का अचेतन तीन त पध शि तय अथवा
ऊजाओं से न मत हुआ है । कुछ लोग म इड, पराहम से अ धक बल होता है तो कुछ अ य लोग मपराहम इड से
अ धक बल होता है ।इड, पराहम और अहं क सापे शि त येक यि त क ि थरता का नधारण करती है ।
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Q6 हा न क अवसाद क या या अल े ड एडलर क या या से कस कार भ न है ?
Answer. एडलर के स धांत को यि ट या यि तक मनो व ान के प म जाना जाता है । उनका आधारभत ू
अभी ह यह है क यि त का यवहार उ दे य पण ू होता है । हम म से येक म चयन करने एवं सजन करने क
मता होती है । हमारे यि तगत ल य ह हमार अ भ ेरणा के ोत होते ह। जो ल य हम सरु ा दान करते ह
और हमार और पया तता क भावना पर वजय ा त करने म हमार सहायता करते ह, वह हमारे यि त व के
वकास म मह वपण ू भू मका नभाते ह। एडलर के वचार से येक यि त अपया तता और अपराध क
भावनाओं से सत होता है । इसे हम ह नता मनो ं थ (inferiority complex) के नाम से जानते ह। जो
बा याव था म उ प न होती है । इस मनोव ृ पर वजय ा त करना इ टतम यि त व वकास के लए
आव यक है ।
वह कैरे न हा न जो क ायड क एक अ य अनय ु ायी थी, िज ह ने ाइड के आधारभत ू स धांत से भ न एक
स धांत वक सत कया। उ ह ने मानव सम ृ ध और आ म स ध पर बल दे ते हुए मानव जीवन के एक
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आशावाद ि टकोण को तत ु कया। उ ह ने यह तक तत ु कया क मनोवै ा नक वकार बा याव था क
अव ध म व ु ध अ त यि तक संबध ं (disturbed interpersonal relationship) के कारण उ प न होते ह।
य द माता- पता का अपने ब च के त यवहार उदासीन, हतो सा हत करने वाला और अ नय मत होता है तो
ब चा असरु त महसस ू करता है िजसके प रणाम व प एक ऐसी भावना िजसे मल ू दिु चंता (basic anxiety)
कहते ह, उ प न होती है । इस दिु च ता के कारण माता- पता के त ब चे म एक गहन अमष और मल ू
आ ामकता घ टत होती है । अ य धक भु व अथवा उदासीनता का दशन कर एवं अ य धक अथवा अ यंत कम
अनमु ोदन दान कर माता- पता ब च म एकाक पन और और सहायता क भावनाएं उ प न करते ह जो उनके
व थ वकास म बाधक होती है ।
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Q7 यि त व के मानवतावाद उपागम क मख
ु त ि त या है ? आ म स ध से मै लो का या ता पय था?
Answer. मानवतावाद स धांत मु यतः ायड के स धांत के यु र म वक सत हुए। यि त व के संदभ म
मानवतावाद प रपे के वकास म काल रोजस और अ ाहम मै लो ने वशेष प से योगदान कया है । रोजस
वारा ता वत सवा धक मह वपण ू वचार एक पण ू त: कायशील यि त (fully functioning person) का है ।
उनका व वास है क यि त व के वकास के लए संतिु ट अ भ ेरक शि त है । लोग अपनी मताओं,
संभा यताओं और तभाओं को संभव सव कृ ट तर के से अ भ य त करने का यास करते ह। यि तय म एक
सहज व ृ होती है जो उ ह अपने वंशागत कृ त क स ध या ाि त के लए न द ट करती है । मानव यवहार
के बारे म रोजस ने दो आधारभत ू अ भ ह न मत कए ह। एक यह क यवहार ल यो मख ु और साथक होता है
और दस ू रा यह क लोग( जो क सहज प से अ छे होते ह) सदै व अनक ु ू ल तथा आ म स ध वाले म यवहार का
चयन करगे।
वह म लो ने आ म स ध क लि ध के प म मनोवै ा नक प से व थ लोग क एक व तत ृ या या द ।
उ ह ने बताया आ म स ध वह अव था होती है िजसमे लोग अपनी संपण ू सं
भ ा यता को वक सत कर चक
ु े होते
ह। मै लो ने मनु य आशावाद और सकारा मक ि टकोण वक सत कया है । इसके अंतगत मानव म ेम, हष
और सज ृ ना मक काय को करने क संभा यता होती है । मनु य अपने जीवन को व प दे ने म और आ म स ध
को ा त करने म वतं माने गए ह। अ भ ेरनाओं, जो हमारे जीवन को नय मत करती है , के व लेषण के वारा
आ म स ध को संभव बनाया जा सकता है । हम जानते ह क जै वक, सरु ा और आ मीयता क आव यकता पशु
और मनु य दोन म पाई जाती ह। अतएव कसी यि त का मा इन आव यकताओं क संतिु ट म संल न होना
उसे पशओ ु ं के तर पर ले आता है । मानव जीवन क वा त वक या ा आ मस मान और आ म स ध जैसी
आव यकताओं के अनस ु रण से आरं भ होती है । मानवतावाद उपागम जीवन के सकारा मक प के मह व पर बल
दे ता है ।
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Q8 यि त व मू यांकन म यु त क जाने वाल मख
ु े ण व धय का ववेचन कर। व धय के उपयोग से
हम कस कार क सम याओं का सामना करना पड़ता है ?
Answer. लोग को जानने, समझने और उनका वणन करने का काय ऐसा है िजससे दै नं दनी जीवन म येक
यि त संबध
ं होता है हम अपने यि तगत जीवन म अपने पव ू अनभु व , े ण , वातालाप और दसू रे लोग से
ा त सच
ू नाओं पर व वास करते ह। इस उपागम के आधार पर दसू र को समझना अनेक कारक से भा वत हो
सकता है जो हमारे नणय को अ तरं िजत कर व तु न ठता को कम कर सकते ह। इस लए यि त व का
व लेषण करने के लए हम अपने यास को अ धक औपचा रक प से संग ठत करने क आव यकता होती है ।
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कसी यि त के यि त व क समझ के लए सोउ दे य औपचा रक यास को यि त व मू यांकन कहा जाता
है ।
मू यांकन का ता पय उन याओं से है िजनका उपयोग कुछ वशेषताओं के आधार पर लोग के मू यांकन या
उनके म य वभेदन के लए कया जाता है । मू यांकन का ल य लोग के यवहार को यन ू तम ु ट और
अ धकतम प रशु धता के साथ समझना और उनक भ व यवाणी करना होता है । मू यांकन म कसी ि थ त
वशेष म यि त सामा यतया कौन सा यवहार करता है और कैसे करता है हम यह समझने का यास करते ह।
हमार समझ को उ नत करने के अ त र त, मू यांकन नदान, श ण, थानन, परामश और अ य उ दे य के
लए भी बहुत उपयोगी है ।
मनोवै ा नक ने व भ न तर क से यि त व का मू यांकन करने का यास कया है । सामा यता सबसे अ धक
उपयोग क जाने वाल तकनीक के अंतगत मनो म तक पर ण(psychometric tests), आ म तवेदन
माप(self report measures), ेपी तकनीक(projective techniques), और यवहारपरक
व लेषण(behavioural analysis) आते ह।
इन तकनीक के मल ू व भ न सै धां तक उ मख ु ताओं म है इस लए यह तकनीक यि त व के व भ न प पर
काश डालती है ।
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Q9 संर चत यि त व पर ण से या ता पय है ? यापक प से उपयोग कए गए दो संर चत यि त व
पर ण कौन से ह?
Answer. ेपी तकनीक का वकास अचेतन अ भ ेरणाओं और भावनाओं का मू यांकन करने के लए कया
गया है । यह तकनीक अ भ ह पर आधा रत है क कम संर चत अथवा असंर चत उ द पक अथवा यि तय को
उस ि थ त पर अपनी भावनाओं, इ छाओं और आव यकताओं को ेपण करने का अवसर दान करता है ।
वशेष वारा इन ेपण क या या क जाती है । व भ न कार क ेपी तकनीक वक सत क गई है ।
िजनम यि त व के मू यांकन के लए व भ न कार क उ द पक साम य और ि थ तय का उपयोग कया
जाता है । इनम से कुछ तकनीक म उ द पको के साथ यो य को अपने सा थय को बताने क आव यकता होती
है , च को दे खकर कहानी लखनी होती है , कुछ म आरे ख वारा अ भ यि त अपे त होती है और कुछ म
उ द पक के एक बह ृ त समु चय म से उ द पक का वरण करने के लए कहा जाता है । यापक प से उपयोग
कए जाने वाले दो संर चत यि त व पर ण है :
1. रोशा म सल म प र ण
2. कथानक सं य ण पर ण
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Q10 या या क िजए क ेपी तकनीक कस कार यि त व का मू यांकन करती है ? कौन से यि त व के
ेपी पर ण मनोवै ा नक वारा यापक प से उपयोग म लाए गए ह?
Answer. यि त व मू यांकन के िजन तकनीक का वणन सामा य प से होता है वे सब य तकनीके ह
िजनम यि त से सीधे उसके बारे म सच
ू नाएं ा त करके उसके यि त व के बारे म जानकार ा त करने का
यास कया जाता है , और वह यि त प ट प से जानता है क उसके यि त व का मू यांकन कया जा रहा है ।
इन ि थ तय म लोग ायः आ मचेतन का अनभ ु व करते ह और अपनी नजी या अंतरं ग भावनाओं, वचार और
अ भ ेरणाओं को य त करने म हच कचाते ह। वे जब भी ऐसा करते ह तो ायः सामािजक ि ट से वांछनीय
तर के के यवहार करने का यास करते ह। ेपी तकनीक का वकास अचेतन अ भ ेरणाओं और भावनाओं का
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मू यांकन करने के लए कया गया है । यह तकनीक अ भ ह पर आधा रत है क कम संर चत अथवा असंर चत
उ द पक अथवा ि थ त यि तय को उस ि थ त पर अपनी भावनाओं, इ छाओं और आव यकताओं को ेपन
करने का अवसर दान करता है । वशेष वारा इन ेपण क या या क जाती है । व भ न कार क ेपी
तकनीक वक सत क गई है । िजनम यि त व के मू यांकन के लए व भ न कार के उ द पक साम ीय और
ि थ तय का उपयोग कया जाता है । इनम से कुछ तकनीक उ द पक के साथ यो य को अपने साहचय को
बताने क आव यकता होती है ।
म सल म पर ण को मनोवै ा नक वारा उपयोग कया गया है । रोशा पर ण म इसका इ तेमाल हुआ है जो
यापक प से स ध है । यह पर ण हमन रोशा वारा वक सत कया गया था।
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Q11 अ रहं त एक गायक बनना चाहता है , इसके बावजदू क वह एक च क सक के एक प रवार से संबध ं रखता
है । य य प उसके प रवार के सद य दावा करते ह क वे उसको ेम करते ह कंतु वह उसक जीवनव ृ त को ढ़ता
से अ वीकार कर दे ते ह। काल रॉजस क श दवल का उपयोग करते हुए अ रहं त के प रवार वारा द शत
अ भव ृ य का वणन क िजए।
Answer. छा वयं कर।
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