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NCERT
SOLUTIONS
CLASS - 12th
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Book : Manovigyan Ncert Solutions | Chapter - 9 Psychology
Class : 12th
Subject : मनो व ान
Chapter : 9
Chapter Name : मनोवै ा नक कौशल का वकास
Q1 एक भावी मनोवै ा नक बनने के लए कौन-कौन सी स मताएँ आव यक होती है ।
Answer. हम अ सर लगता है क बु ध, ह नता मनो ं थ, अन यता संकट, मान सक बाधाओं, अ भव ृ ,
दबाव, सं ेषण बाधाओं के बारे म बात करने वाले या उसका नदान करने वाले मनोवै ा नक होते ह। यहां पर
शौ कया और यावसा यक मनोवै ा नक के अंतर प ट होने चा हए। कुछ मनोवै ा नक शोध के मा यम से
सै धां तक न पण क खोज करते ह जब क कुछ अ य हमारे त दन क याओं और यवहार से संबं धत
रहते ह। यह जानना मह वपण ू है क शोध कौशल के अलावा वै ा नक के लए कौनसी स म बताए ह जो
आव यक है । इसके अंतगत ान के वे े आते ह िजसको श ा और श ण परू ा करने के बाद यवसाय म
आने से पवू कसी मनोवै ा नक को जानना चा हए। ये श क याद करने वाले एवं शोध करने वाले सभी के लए
ज र है जो छा से, यापार से, उ योग से और बह ृ र समदु ाय के साथ परामश क भू मका म होते ह।
Q2 कौन-से सामा य कौशल सभी मनोवै ा नक के लए आव यक होत है ?
Answer. आधारभत ू कौशल या स मता िजनको मनोवै ा नक ने पहचाना है और जो एक भावी मनोवै ा नक
बनने के लए आव यक है , उनको तीन े णय म बांटा जा सकता है । पहला- सामा य कौशल, दस
ू रा- े ण
कौशल, तीसरा- व श ट कौशल है । यह कौशल मल
ू तः सामा य व प के ह और इनक आव यकता सभी कार के
मनोवै ा नक को होती है चाहे उनक वशेष ता का े कोई भी हो। इन कौशल म यि तक और बौ धक
कौशल दोन शा मल होते ह। यह जाती है क कसी भी कार का यवसा यक श ण उन व या थय को नह ं
दया जाना चा हए, िजनम इन कौशल का आभाव हो। इन कौशल का श ण ा त कर लेने के बाद ह कसी
व श ट े म व श ट श ण दे कर उन कौशल अ म वकास कया जा सकता है ।
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Q3 सं ेषण को प रभा षत क िजए। सं ेषण या का कौन-सा घटक सबसे मह वपण
ू है ? अपने उ र को
ासं गक उदाहरण से पु ट क िजए।
Answer. सं ेषण या से हमारा ता पय यह है क सं ेषण एक सचेतन या अचेतन, सा भ ाय या अन भ ेत
या है िजसम भावनाओं तथा वचार को वा चक या अवा चक संदेश म भेजा या हण कया और समझा जा
सकता है । अथात अ छा करने के लए आपको न पछ ू ना आना चा हए, उ र दे ना आना चा हए, वचार का
सारांश बनाना आना चा हए तथा अपने समक ीय एवं अ यापक से भावी ढं ग से अंतः या करना आना चा हए।
सं ेषण या आकाि मक( बना कसी आशय के), अ भ यि तपरक ( यि त क सांवे गक ि थ त से जड़ ु ी) या
वा पटुता (स ेषण के व श ट ल य से जड़
ु ी) हो सकती है । मानव सं ेषण अ तरा यि तक, अ त यि तक
अथवा सावज नक तर पर हो सकता है ।
Q4 उन स मताओं के समु चय का वणन क िजए िजनको एक मनोवै ा नक प र ण का संचालन करते समय
अव य यान म रखना चा हए?
Answer. यह जानना मह वपण
ू है क शोध कौशल के अलावा एक मनोवै ा नक के लए कौन-सी स मताएं ह
जो एक मनोवै ा नक के लए मह वपण
ू है । कुछ दशाएं और स मताएं ऐसी ह जो मनोवै ा नक के लए
अंतरा य तर पर आव यक मानी जाती ह।
इसके अंतगत ान के े आते ह, िजसको श ा और श ण परू ा करने के बाद यवसाय म आने से पहले
कसी मनोवै ा नक को जानना चा हए। यह श क , याद करने वाले एवं शोध करने वाले सभी के लए ज र ह
जो छा से, यापार से, लोग से और बेहतर समद
ु ाय के साथ परामशन उनक भू मकाओं म होते ह। यह माना जा
रहा है क मनो व ान म मताओं को वक सत करना, उनको अमल म लाना और उनका मापन करना क ठन है ,
य क व श ट पहचान और मू यांकन क कसौट ऊपर आम सहम त नह ं बन पाती है ।
आधारभतू कौशल या स मता िजनको मनोवै ा नक ने पहचाना है और जो एक भावी मनोवै ा नक बनने के
लए आव यक है , उन को तीन े णय म बांटा गया है । पहला- सामा य कौशल, दस
ू रा- े ण कौशल, तीसरा-
व श ट कौशल।
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Q5 परामश सा ा कार का व श ट ा प या है ?
Answer. एक सा ा कार दो या अ धक यि तय के बीच एक उ दे यपण ू वातालाप है िजसम न उ र ा प
या फॉमट का अनस ु रण कया जाता है । सा ा कार अ य कार के वातालाप को क तलु ना म अ धक औपचा रक
होता है का एक पव
ू नधा रत उ दे य होता है तथा उसक संरचना क त होती है ।
एक मनोवै ा नक के प म वक सत होने के लए आव यक है क परामश एवं नदशन के े म भी स मता हो।
इन स मताओं को वक सत करने के लए मनोवै ा नक को उ चत श ा और श ण कुशल पयवे ण म दया
जाना चा हए। गलत यवसाय म जाने के प रणाम काफ गंभीर हो सकते ह। परामश म सहायता ा त संबध ं होता
है िजसम सि म लत होता है वह जो मदद चाह रहा है , जो मदद दे रहा है या दे ने का इ छुक है , जमानत दे ने म
स म हो या श त हो और ऐसी ि थ त म हो जहां मदद लेना और दे ना सहज हो।
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Q6 परामश से आप या समझते ह? एक भावी परामशदाता क वशेषताओं का वणन क िजए।
Answer. सा ा कार क योजना, सेवाथ एवं परामशदाता के दरबार का व लेषण तथा सेवाथ के ऊपर पड़ने वाले
वकासा मक भाव के नधारण के लए परामश एक णाल तत
ु करता है । एक परामशदाता इस बात म
अ भ च रखता है क वह सेवाथ क सम याओं को उसके ि टकोण और भावनाओं को यान म रखकर समझ
सके।इसमे सम या से जड़ु ी वा त वक त य या व तु न ठ त य मह वपण ू होते ह और यह अ धक मह वपण ू
होता है क सेवाथ वारा वीकार क गई भावनाएं कैसी ह। उनको लेकर काम कया जाए। इसम यि त तथा वह
सम या इस कार प रभा षत करता है इस को यान म रखा जाता है । भावी सहायक क वशेषताओं के प म,
श त सहायक होने के कारण परामशदाता क िज मेदार बनती है क वह सु नि चत कर क उसके परामश से
सेवाथ को लाभ हो तथा उसके च क सा परक उ दे य हा सल हो सके। यादातर ि थ तय म, परामश या
क सफलता, परामशदाता क यो यता, अ भव ृ , कौशल, यि तगत गण ु एवं उसके यवहार पर नभर करती है ।
इनम से कोई भी याद सभी परामश क भा वता को बढ़ा सकते ह या सहायता म को अ भावी बना सकते ह।
इसम सि म लत ह- मा णकता, दस ू र के त सकारा मक आदर, त नभ ु ू त क यो यता तथा
पन
ु रवा य व यास।
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Q7 या आप इस कथन से सहमत ह क एक भावी परामशदाता होने के लए उसका यावसा यक प से
श त होना अ नवाय है ? अपने तक के समथन म कारण तत
ु क िजए।
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Answer. छा वयं कर।
Q8 एक सेवाथ -परामशदाता संबध
ं के नै तक मानदं ड या ह?
Answer. अ धकतर लोग जो परामशदाता से मदद दे ते ह उनके भावी संबध ं बेहद कम होते ह या उनका परू तरह
अभाव होता है । हाँला क, यवहार म प रवतन से सामािजक अवलंबन के एक नेटवक से आता है , इसके लए ज र
है क सेवाथ दस ू रे यि तय से अ छा संबधं वक सत करने पर यान द। परामश संबध ं वह मा यम है िजससे
इसका ारं भ कया जा सकता है । सभी क तरह परामशदाता भी पण ू नह ं होते ह, आने वाल दस
ू र क तलु ना म
वा य एवं सहायक संबध ं का वकास करने क वशेषताओं म श ण ा त होते ह।
परामश म से वापी के लए एक से अ धक प रणाम क अपे ा होती है , जो एक साथ ह घ टत होते ह। सेवाथ म
होने वाले भावी यवहार प रवतन बहुप ीय होते ह। इसको इस प म दे खा जा सकता है क सेवाथ अ धक
िज मेदार ले, नह ं अंत ि ट वक सत कर, व भ न कार के यवहार कर तथा अ धक भावी संबध ं वक सत
करने का यास कर।
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Q9 अपने एक म के यि तगत जीवन के एक ऐसे प क पहचान क िजए िजसे वह बदलना चाहता ह। अपने
म क सहायता करने के लए, मनो व ान के एक व याथ के प म वचार करके उसके सम या के समाधान
या नराकरण के लए एक काय म ता वत क िजए।
Answer. छा वयं कर।
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