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HALF YEARLY EXAM
QUESTION
PAPER
ORIGINAL EXAM PAPERS
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HALF YEARLY EXAMINATION, 2024-25
HINDI CORE
Time – 3:00 Hrs. Class – XII M.M. : 80
Date – 12.09.2024 (Thursday)
Name of the student _______________________________________________Section _____
सामा य नदश –
1. दए गए नदश का पालन करते हु ए सभी खंड के न का उ र दे ना अ नवाय है |
2. यथासंभव सभी न के उ र मानु सार ल खए |
.1 न न ल खत ग यांश पर आधा रत बहु वक पी/लघू र य न के सवा धक उपयु त वक प चु नकर
ल खए-
पि चमी स यता मु ख मोड़ रह है। वह एक नया आदश दे ख रह है। अब उसक चाल बदलने लगी है।
वह कल क पू जा को छोड़कर मनु य क पू जा को अपना आदश बना रह है। इस आदश को दशाने वाले
दे वता रि कन और टॉल टॉय आ द ह। पा चा य दे श म नया भात होने वाला है। वहाँ के गंभीर वचार
वाले लोग इस भात का वागत करने के लए उठ खड़े हु ए ह। भात होने के पू व ह उसका अनु भव कर
लेने वाले प य क तरह इन महा माओं को इस नए भात का पू व ान हु आ है और हो य न? इंजन
के प हए के नीचे दबकर वहाँ वाल के भाई-बहन उनक सार जा त पस गई, उनके जीवन के धु रे टू ट
गए, उनका सम त धन घर से नकलकर एक ह दो थान म एक हो गया।
साधारण लोग मर रहे ह, मज़दू र के हाथ-पाँव फट रहे ह, लहू बह रहा है। सद से ठठु र रहे ह। एक तरफ
द र ता का अखंड रा य है. दू सर तरफ अमीर का चरम य। परं तु अमीर भी मान सक दु ःख से
वम दत है। मशीन बनाई तो गई थीं मनु य का पेट भरने के लए मज़दू र को सु ख दे ने के लए परं तु
वे काल -काल मशीन ह काल बनकर उ ह ं मनु य का भ ण कर जाने को लए मु ख खोल रह ह।
भात होने पर ये काल काल बलाएँ दू र ह गी। मनु य के सौभा य का सू य दय होगा। शोक का वषय
यह है क हमारे और अ य पू व दे श म लोग को मज़दू र से तो लेशमा भी ेम नह ं है, पर वे तैयार
कर रहे ह पू व त काल मशीन का आ लं गन करने क । पि चम वाल के तो म गले पड़ी हु ई बहती नद
भी काल कमल हो रह है। वे छोड़ना चाहते ह, परं तु काल कमल उ ह नह ं छोड़ती। दे खगे पू व बाले इस
कमल को छाती से लगाकर कतना आनंद अनु भव करते ह। य द हमम से हर आदमी अपनी दस
अँगु लय क सहायता से साहसपू व क अ छ तरह काम करे तो हम मशीन क कृ पा से बढ़े हु ए प र म
वाल को वा ण य के जातीय सं ाम म सहज ह पछाड़ सकते ह। सू य तो सदा पू व ह से पि चम क
ओर जाता है , पर आओ पि चम से आने वाल स यता के नए भात को हम पू व से भेज। इंजन क वह
मज़दू र कस काम क जो ब च , ि य और कार गर को ह भू खा नंगा रखती है और केवल सोने चाँद ,
लोहे आ द धातु ओं का ह पालन करती है। पि चम को व दत हो चु का है क इनसे मनु य का दु ःख दन
पर दन बढ़ता है।
(i) ‘पा चा य दे श म नया भात होने वाला है।’ पंि त म रे खां कत पद का आशय हो सकता है ? (1)
(क) नई रोशनी (ख) नया वचार (ग) नया सवेरा (घ) नई उ न त
(ii) संदभ के अनु सार ग यांश म ‘ वम दत’ श द का सट क अथ या हो सकता है? (1)
(क) दबी हु ई (ख) ला न पू ण (ग) ई या पू ण (घ) पीड़ा पू ण
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(iii) मनु य के सौभा य का सू य दय कब होगा ? (1)
(क) मज़दू र वारा ां त करने से (ख) मशीन के हट जाने से
(ग) सभी लोग को काम मलने से (घ) मानवीय द ताओं को मह व मलने से
(iv) रि कन और टॉल टॉय कौन थे? (1)
(v) ग यांश के अनु सार पू व दे श क सम या या है? (2)
(vi) ग यांश के अनु सार साधारण लोग य मर रहे ह? (2)
(vii) मशीन को ‘काल मशीन’ कहना कस बात क ओर संकेत करता है? (2)
.2 न न ल खत प यांश पर आधा रत बहु वक पी/लघू र य न के सवा धक उपयु त वक प चु नकर
ल खए-
कु ती कोई भी लड़े
डोल बजाता है सम ह
िजसके सधे हाथ
भर दे ते ह जोश पू रे दं गल म
उछलने लगती है म ट पू रे अखाड़े क
ताक धना- धन.... ताक धना- धन
झाँकने लगते ह लोग
एक-दू सरे के क ध के ऊपर से
उचक-उचक कर
बहु त गहरा है र ता सम और ढोल का....
जैसे साँस और धड़कन का
ढोल खामोश है तो खामोश है
अखाड़े क माट
खामोश ढोल को जगाएँगे
हाथ सम के
ढोल बजेगा जागेगा अखाड़ा
जागेगी माट अखाड़े क
माट ह तो है
जो वीकारती है सभी को
अ छे ह या बु रे
हर प म।
(i) ‘ढोल बजाता है सम ह ’ पंि त म ‘ह ’ या इं गत करता है ? (1)
(क) एक आदत (ख) मह व (ग) आड बर (घ) ेम
(ii) कु ती म जोश कब भर आता है? (1)
(क) जब हारता हु आ पहलवान जीतता है
(ख) जब दोन पहलवान बराबर क ट कर वाले होते ह
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(ग) जब कु ती वारा रा य वजेता तय होता है
(घ) जब सम वारा ढोल बजाया जाता है
(iii) दं गल या होता है? (1)
(क) वकास दशनी (ख) ौढ़ श ा क (ग) कु ती तयो गता (घ) वा य-यं का कार
(iv) माट वारा अ छे -बुरे को वीकारने का या ता पय है? (1)
(v) ढोल तथा अखाड़े क माट म या समानता बताई गई है? (2)
(vi) सम का ढोलक बजने पर आसपास या हलचल हो जाती है? (2)
.3 न न ल खत वषय म से कसी एक वषय पर लगभग १२० श द म रचना मक लेख ल खए- (6)
(क) डिजटल यु ग और यु वा
(ख) पर ा के तनाव और इसे रोकने के उपाय
(ग) उ च श ा हे तु यु वाओं का वदे श पलायन
.4 कसी स ध कंपनी से ा त नौकर के ताव को वीकार करने हे तु उसी कंपनी के कायकार नदे शक
को प ल खए। (5)
अथवा
कसी रा य समाचार-प के संपादक को प लखकर अपने नगर म पौधारोपण का मह व का शत
करने का अनु रोध क िजए।
.5 (अ) न न ल खत न म से क ह ं चार न के उ र लगभग ४० श द म ल खए- (8)
(क) मी डया को लोकतं का चौथा त भ य कहा जाता है?
(ख) मु त मा यम क कोई दो खू बयाँ ल खए।
(ग) रे डयो समाचार लेखन के लए कोई दो बु नयाद बात ल खए।
(घ) ट . वी. ख़बर कन चरण म आगे बढ़ती ह – ल खए ।
(ङ) वलोम तू पी प ध त समाचार संरचना के लए कतनी कारगर है ?
(ब) समाचार लेखन के छ: ककार से समाचार का ढांचा कैसे तैयार कया जाता है? व तार से समझाइए।
अथवा
वशेष लेखन के मु ख े का उ लेख करते हु ए बताइए क उनम वशेष ता कैसे ा त क जा सकती
है? (3)
.6 न न ल खत प यांश पर आधा रत बहु वक पी न के सवा धक उपयु त वक प चु नकर ल खए- (5)
म नज उर के उ गार लए फरता हू ँ म जला दय म अि न, दहा करता हू ँ
म नज उर के उपहार लए फरता हू ँ सु ख-दु ःख दोन म म न रहा करता हू, ँ
है यह अपू ण संसार न मु झको भाता म व न का संसार लए फरता हू ँ।
जग भव-सागर तरने को नाव बनाए म भव-भौज पर म त बहा करता हू ँ।।
(1) क व के व न का संसार कैसा है?
(क) यथाथ (ख) संतु ट (ग) ढ गी (घ) डरावना
(ii) न न ल खत कथन पर वचार करते हु ए प यांश के अनु सार सह कथन को चय नत कर ल खए-
(क) मृ तय क नाव म क व एक या ी है।
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(ख) क वता म ‘अि न’ प रवतन क इ छा का तीक है।
(ग) यथाथ संसार से क व को कोई सरोकार नह ं है ।
(घ) सु ख-दु ःख का असर क व पर सदै व होता है।
(iii) का यांश म ‘उर’ से ता पय है-
(क) दय (ख) इ छा (ग) मृ त (घ) आवेश
(iv) न न ल खत कथन और कारण को यानपू व क प ढ़ए और सह वक प चु नकर ल खए-
कथन (A) : यथाथ को वीकार नह ं करने से क व के व न अधू रे रहे गए ह।
कारण (R) : क पना और वा त वकता म सामंज य क कमी होने से क व को संसार अधू रा महसू स होता
है।
(क) कथन (A) सह है , कारण (R) गलत है।
(ख) कथन (A) सह नह ं है , कारण (R) सह है।
(ग) कथन (A) तथा कारण (R) दोन सह ह, क तु कारण (R) उसक सह या या नह ं करता।
(घ) कथन (A) सह है तथा कारण (R) दोन सह ह, कारण (R) कथन (A) क सह या या करता है।
(v) भव-मौज म म त बहने से ता पय या है?
(क) सांसा रक सु ख पी लहर (ख) मौज-म ती करना
(ग) व न म उपजी सु ख-दु ःख क लहर (घ) नाव जैसी बहने वाल भावु कता
.7 (अ) न न ल खत न को यानपू व क पढ़कर क ह ं दो न के उ र लगभग 60 श द म ल खए- (6)
(क) यि त पर शंसा का या भाव पड़ता है ? ‘बात सीधी थी’क वता के आधार पर ल खए ।
(ख) ‘क वता के बहाने’ के आधार पर क वता के असी मत त व को प ट क िजए।
(ग) ‘कैमरे म बंद अपा हज’ क वता म मी डया क संवेदनह नता कस तरह उजागर हु ई है?
(ब) न न ल खत न को यानपू व क पढ़कर क ह ं दो न के उ र लगभग ४० श द म ल खए- (4)
(क) ‘ दन ज द -ज द ढलता है’ क वता म क व के पैर श थल य पड़ जाते ह?
(ख) ‘उषा’ के जादू को प ट करते हु ए ल खए ।
(ग) ‘पतंग’ क वता म ब च का ज म के साथ कपास ले आने का आशय या है ?
.8 न न ल खत ग यांश पर आधा रत बहु वक पी न के सवा धक उपयु त वक प चु नकर ल खए- (5)
मने मन म कहा, ठ क। बाज़ार आमं त करता है क आओ मु झे लू टो और लू टो । सब भू ल जाओ, मु झे
दे खो। मेरा प और कसके लए है? म तु हारे लए हू ँ। नह ं कुछ चाहते हो, तो भी दे खने म या हज है।
अजी आओ भी, इस आमं ण म यह खू बी है क आ ह नह ,ं आ ह तर कार जगाता है। ले कन ऊँचे
बाज़ार का आमं ण मू क होता है और उससे चाह जगती है। चाह मतलब अभाव। चौक बाजार म खड़े
होकर आदमी को लगने लगता है क उसके अपने पास काफ नह ं है; और चा हए, और चा हए। मेरे यहाँ
कतना प र मत है और यहाँ कतना अतु लत है, ओह! कोई अपने को न जाने तो बाज़ार का यह चौक
उसे कामना से वकल बना छोड़े। वकल य , पागल। असंतोष, तू मा और ई या से घायल करके मनु य
को सदा के लए यह बेकार बना डाल सकता है।
(i) ग यांश म यु त ‘अतु लत’ श द का समानाथ श द हो सकता है-
(क) अ रहंत (ख) अथाह (ग) अभाव (घ) अ य
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(ii) ग यांश का क य भाव है-
(क) बाज़ार के कार बताना (ख) बाज़ार न जाने क सलाह
(ग) मनु य क तृ णा को इं गत करना (घ) मनु य पर बाज़ार के जादू का असर
(iii) न न ल खत कथन पर वचार करते हु ए ग यांश के अनु सार सह कथन को चय नत कर ल खए-
(क) जब मनु य बेचैन हो जाता है तब वह बाज़ार क ओर उ मु ख हो जाता है।
(ख) जब मनु य तु लना करने लगता है तब असंतोष, तृ णा और ई या के भाव मनु य म उभरते ह।
(ग) जब मनु य को बाज़ार आमं त करता है तब मनु य क याकुलता इसका कारण होती है।
(घ) जब मनु य बाज़ार का तर कार करता है तब वह इसका सह लाभ ले पाता है।
(iv) बाज़ार का आमं ण क, ‘आओ मु झे लू टो’ से या आशय है ?
(क) बाज़ार लु ट जाना चाहता है। (ख) बाज़ार के पास बहु त यादा व तु एँ ह।
(ग) बाज़ार केवल खु द का प दखाना चाहता है। (घ) बाज़ार आक षत करना चाह रहा है।
(v) आ म नयं ण न होने क दशा म बाज़ार हमार या दशा कर सकता है?
(क) र ते ख़तम कर सकता है (ख) बीमार कर सकता है
(ग) याकुल बना सकता है (घ) घमंडी बना सकता है
.9 (अ) न न ल खत न को यान से पढ़कर क ह ं दो न के उ र लगभग ६० श द म ल खए- (6)
(i) ‘भि तन अ छ है , यह कहना क ठन होगा य क उसम दु गु ण का अभाव नह’-ं ले खका ने ऐसा य
कहा होगा?
(ii) बाजा पन या होता है ? कस कार के लोग बाज़ार को साथकता दान करते ह?
(iii) इ दरसेना सबसे पहले गंगा मैया क जय य बोलती है? न दय का भारतीय सामािजक,सां कृ तक
परं परा म या मह व है?
(ब) न न ल खत न को यानपू व क पढ़कर क ह ं दो न के उ र लगभग ४० श द म ल खए- (4)
(i) पंचायत वारा भि तन क बेट पर ज़बरन प त थोपने क घटना पर अपनी त या ल खए।
(ii) बाज़ार का जादू चढ़ने और उतरने पर लोग पर या भाव पड़ता है ?
(iii) लेखक इ दर सेना पर पानी फके जाने का समथक य नह ं था? उसने या बोलकर जीजी क बात का
वरोध कया?
.10 न न ल खत न को यानपू व क पढ़कर क ह ं दो न के उ र लगभग १०० श द म ल खए- (10)
(i) ‘जू झ’ कहानी के शीषक क साथकता बताते हु ए इसका उ दे य ल खए।
(ii) यशोधर बाबू क प नी समय के साथ ढल सकने म सफल होती है, ले कन यशोधर बाबू असफल रहते ह।
ऐसा य?
(iii) स वर वै डं ग’ कहानी का मु ख पा वतमान म जीता है, कं तु अतीत को आदश मानता है। इससे उसके
यवहार म या- या वरोधाभास दखाई पड़ते ह? सोदाहरण उ लेख क िजए।
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Notes
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