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NCERT Book Class 10 Science (विज्ञान) Chapter 9 प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन

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About NCERT Book Class 10 Science (विज्ञान) Chapter 9 प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन

NCERT Book Class 10 Science (विज्ञान) Chapter 9 प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन is available here for free download. Published by NCERT for Class 10, this books can be viewed online or downloaded as a PDF (20 pages). Candidates preparing for Class 10 can use NCERT Book Class 10 Science (विज्ञान) Chapter 9 प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

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NCERT Book Class 10 Science (विज्ञान) Chapter 9 प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन – Text

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Page 1

अध्याय 9
प्रकाश – परावर्तन तथा
अपवर्तन
ह म इस ससं ार में अपने चारों ओर अनेक प्रकार की वस्एतु ँ देखते हैं। तथापि, किसी अँधरे े
कमरे में हम कुछ भी देखने में असमर्थ हैं। कमरे को प्रकाशित करने पर चीजें दिखलाई देने
लगती हैं। वह क्या है जो वस्ओ तु ं को दृश्यमान बनाता है। दिन के समय सर्यू का प्रकाश वस्ओ तु ं
को देखने में हमारी सहायता करता है। कोई वस्तु उस पर पड़ने वाले प्रकाश को परावर्तित करती
है। यह परावर्तित प्रकाश जब हमारी आँखों द्वारा ग्रहण किया जाता है, तो हमें वस्ओ तु ं को देखने
योग्य बनाता है। हम किसी पारदर्शी माध्यम के आर-पार देख सकते हैं, क्योंकि प्रकाश इसमें से पार
(transmitted) हो जाता है। प्रकाश से सबं द्ध अनेक सामान्य तथा अद्भुत परिघटनाएँ हैं; जैसे–
दर्पणों द्वारा प्रतिबिंब का बनना, तारों का टिमटिमाना, इद्रं धनषु के संदु र रंग, किसी माध्यम द्वारा
प्रकाश को मोड़ना आदि। प्रकाश के गणु ों का अध्ययन इनके अन्वेषण में हमारी सहायता करे गा।
अपने चारों ओर कुछ सामान्य प्रकाशिक परिघटनाओ ं को देख कर हम यह निष्कर्ष निकाल
सकते हैं कि प्रकाश सरल रे खाओ ं में गमन करता प्रतीत होता है। यह तथ्य कि एक छोटा प्रकाश
स्रोत किसी अपारदर्शी वस्तु की तीक्ष्ण छाया बनाता है, प्रकाश के एक सरलरे खीय पथ की ओर
इगित
ं करता है, जिसे प्रायः प्रकाश किरण कहते हैं।

यदि प्रकाश के पथ में रखी अपारदर्शी वस्तु अत्यंत छोटी हो तो प्रकाश सरल रे खा में चलने की बजाय इसके किनारों
पर मड़ु ने की प्रवृत्ति दर्शाता है– इस प्रभाव को प्रकाश का विवर्तन कहते हैं। तब वह प्रकाशिकी, जिसमें सरलरे खीय
व्यवहार के आधार पर किरणों का उपयोग करते हैं, असफल होने लगती हैं। विवर्तन जैसी परिघटनाओ ं की व्याख्या
यह भी जानिए!

करने के लिए प्रकाश को तरंग के रूप में माना जाता है, जिसका विस्तृत अध्ययन आप उच्च कक्षाओ ं में करें गे। पनु :
20वीं शताब्दी के प्रारंभ में यह स्पष्‍ट हो गया कि प्रकाश की द्रव्य के साथ अन्योन्यक्रिया के विवेचन में प्रकाश का तरंग
सिद्धांत अपर्याप्‍त है तथा प्रकाश प्रायः कणों के प्रवाह की भाँति व्यवहार करता है। प्रकाश की सही प्रकृ ति के बारे में
यह उलझन कुछ वर्षों तक चलती रही जब तक कि प्रकाश का आधुनिक क्वांटम सिद्धांत उभर कर सामने नहीं आया,
जिसमें प्रकाश को न तो ‘तरंग’ माना गया न ही ‘कण’। इस नए सिद्धांत ने प्रकाश के कण सबं ंधी गणु ों तथा तरंग प्रकृ ति
के बीच सामजं स्य स्थापित किया।

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 10
TypeBooks
Pages20
Languagehindi
Updated22 Jul 2026