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कक्षा 12 के विए पाठ्यक्रम
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टिप्पणी:
50 प्रश्नों िािे एक प्रश्न पत्र में से 40 प्रश्नों को हि करने की आिश्यकता होगी।
इकाई I: मनोिैज्ञावनक गुणों में बदिाि
इस इकाई का उद्देश्य यह अध्ययन करना है कक िोग अपनी विविन्न मनोिैज्ञावनक गुणों के
संबंध में कै से विन्न होते हैं।
मानि प्रकायों में व्यविगत विन्नताएं; मनोिैज्ञावनक विशेषताओं का आकिन; बुवि: बुवि में
व्यविगत विन्नताएं; बुवि के वसिांत; संस्कृ वत और बुवि; विशेष
योग्यताएं: योग्यता-प्रकृ वत, और मापन; सर्जनात्मकता; िािनात्मक बुवि।
इकाई II: आत्म एिं व्यवित्ि
यह इकाई व्यवि के मूलयांकन के प्रयास में विविन्न दृविकोणों के संदिज में स्ियं और व्यवित्ि
के अध्ययन पर कें कित है। व्यवित्ि के मूलयांकन पर िी चचाज की र्ाएगी। आत्म सम्मान,
आत्म-सक्षमता, और आत्म-वनयमन; संस्कृ वत एिं आत्म; व्यवित्ि की अिधारणा; प्रमुख दृविकोण —
प्रकार और विशेषता, मनोगवतक, मानितािादी, व्यिहारिादी, सांस्कृ वतक; व्यवित्ि का मूलयांकन:
आत्म-प्रवतिेदन माप, व्यिहारपरक विश्लेषण और प्रक्षेपी तकनीक।
इकाई III: र्ीिन की चुनौवतयों का सामना
यह इकाई दबाि की प्रकृ वत से संबंवधत है और दबाि के प्रवत प्रवतकक्रया व्यवि के दबािों के
मूलयांकन पर कै से वनिजर करती है। दबाि से वनपिने की रणनीवत से िी वनपिा र्ाएगा।
दबाि की प्रकृ वत, प्रकार और स्रोत; मनोिैज्ञावनक प्रकायज और स्िास््य पर दबाि; दबाि को
झेिना; सकारात्मक स्िास््य और कलयाण को बढािा देना।
इकाई IV: मनोिैज्ञावनक विकार
यह इकाई सामान्यता और अपसामान्यता की अिधारणाओं और प्रमुख मनोिैज्ञावनक विकारों पर
चचाज करती है। अपसामान्यता और मनोिैज्ञावनक विकारों की अिधारणाएं; विकारों का िगीकरण;
अपसामान्य व्यिहार अंतर्नजवहत कारक; प्रमुख मनोिैज्ञावनक विकार - दुश्चंता, कावयक,
विघिनकारी, मनोदशा,मनोविवक्षवि, विकासात्मक और व्यिहार-पदार्ज उपयोग संबंधी।
इकाई V: वचककत्सा उपागम
इस इकाई में मनोिैज्ञावनक विकारों के उपचार के विए विविन्न दृविकोणों के िक्ष्यों, तकनीकों
और प्रिािशीिता पर चचाज की गई है।
वचककत्सा की प्रकृ वत और प्रकक्रया: वचककत्सीय संबंध; उपचारों के प्रकार: मनोगवतक,
मानितािादी, संज्ञानात्मक, व्यिहार और र्ैि-वचककत्सा; िैकवलपक उपचार — योग, ध्यान; मानवसक
रूप से बीमार िोगों का पुनःस्र्ापन।
इकाई VI: अवििृवि एिं सामावर्क संज्ञान
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यह इकाई अवििृवियों के वनमाजण और पटरितजन, आरोपणात्मक प्रिृवियों पर सांस्कृ वतक प्रिाि
और सामावर्क-समर्जक व्यिहार को प्रिावित करने िािी वस्र्वतयों पर कें कित है।
सामावर्क व्यिहार की व्याख्या करना अवििृवि वनमाजण और गुणों के माध्यम से दूसरों के
व्यिहार की व्याख्या करना; सामुवहक अनुिूवत; स्कीमा और अवन्िवत; व्यिहार की प्रकृ वत और
घिक;
मनोिृवि वनमाजण और पटरितजन; दूसरों की उपवस्र्वत में व्यिहार; सामावर्क-समर्जक व्यिहार;
पूिाजग्रह और िेदिाि; पूिाजग्रह वनयंत्रण की युवियााँ।
इकाई VII: सामावर्क प्रिाि और समूह प्रक्रम
इकाई समूह की अिधारणा, उसके कायों और अनुरूपता, आज्ञाकाटरता और अनुपािन पर
सामावर्क प्रिाि की गवतशीिता से संबंवधत है। विविन्न द्वंद्व समाधान युवियााँ की िी चचाज
की र्ाएगी।
अनुरूपता, आज्ञाकाटरता, और अनुपािन; सहयोग और प्रवतस्पधाज; समूहों की प्रकृ वत और गठन; समूहों
के प्रकार; सामावर्क पहचान; व्यविगत व्यिहार पर समूह का प्रिाि; अंतर-समूह संघषज; द्वंद्व
समाधान युवियााँ।
इकाई VIII: मनोविज्ञान एिं र्ीिन
यह इकाई कु छ महत्िपूणज सामावर्क मुद्दों पर मनोिैज्ञावनक समझ के अनुप्रयोग पर कें कित है।
मानि-पयाजिरण संबंध; मानि व्यिहार पर पयाजिरणीय प्रिाि: शोर, प्रदूषण, िीड़, प्राकृ वतक
आपदाएं; पयाजिरण समर्जक व्यिहार को बढािा देना; मनोविज्ञान और सामावर्क सरोकार:
आक्रामकता, श्हंसा और शांवत, िेदिाि और गरीबी, स्िास््य, व्यिहार पर िेिीविर्न का
समाघात।
इकाई IX: मनोिैज्ञावनक कौशिों का विकास
इकाई व्यविगत सामावर्क विकास को सुगम बनाने के विए कु छ प्रिािी मनोिैज्ञावनक और
पारस्पटरक कौशि से संबंवधत है।
प्रिािी मनोिैज्ञावनक कौशि: अििोकन कौशि, साक्षात्कार कौशि, परीक्षण कौशि, परामशज
कौशि - सहानुिूवत, प्रामावणकता, सकारात्मक संबंध और संप्रेषण कौशि -श्रिण।