MP CPCT 07 Aug 2021 Question Paper Hindi Typing Shift 1 – Text
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Computer Proficiency Certification Test
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Question Paper Name : REMINGTON GAIL 07th August 2021 Shift 1
Subject Name : Remington GAIL
Creation Date : 2021-08-07 16:41:22
Duration : 25
Calculator : None
Magnifying Glass Required? : No
Ruler Required? : No
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Scratch Pad Required? : No
Rough Sketch/Notepad Required? : No
Protractor Required? : No
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Highlighter : No
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Mock
Group Number : 1
Group Id : 2549892769
Group Maximum Duration : 10
Group Minimum Duration : 10
Show Attended Group? : No
Edit Attended Group? : No
Break time : 1
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Mandatory Break time : Yes
Group Marks : 0
Is this Group for Examiner? : No
Hindi Mock
Section Id : 2549894285
Section Number : 1
Section type : Typing Test
Mandatory or Optional : Mandatory
Number of Questions : 1
Number of Questions to be attempted : 1
Section Marks : 0
Enable Mark as Answered Mark for Review and Clear Response : Yes
Sub-Section Number : 1
Sub-Section Id : 2549894326
Question Shuffling Allowed : No
Question Number : 1 Question Id : 25498940715 Question Type : TYPING TEST
Key Value
Form CPCTHINMOREM1
एक बार की बात है, अकबर और बीरबल शिकार पर जा रहे थे। अभी कु छ समय हुआ था कि उन्हें एक हिरण दिखा। जल्दबाजी में तीर निकलते हुए
अकबर अपने हाथ पर घाव लगा बैठा। अब हालात कु छ ऐसे थे कि अकबर बहुत दर्द में था और गुस्से में भी।
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Actual
Group Number : 2
Group Id : 2549892770
Group Maximum Duration : 15
Group Minimum Duration : 15
Show Attended Group? : No
Edit Attended Group? : No
Break time : 0
Group Marks : 0
Is this Group for Examiner? : No
Hindi Typing Test
Section Id : 2549894286
Section Number : 1
Section type : Typing Test
Mandatory or Optional : Mandatory
Number of Questions : 1
Number of Questions to be attempted : 1
Section Marks : 0
Enable Mark as Answered Mark for Review and Clear Response : Yes
Sub-Section Number : 1
Sub-Section Id : 2549894327
Question Shuffling Allowed : No
Question Number : 2 Question Id : 25498940716 Question Type : TYPING TEST
Key Value
Form CPCTHINTYREM1
संवेदनशीलता ही अभिव्यक्ति का कारण है। शरीर के विभिन्न क्रिया कलापों में इसी के विविध रूप दिखाई देते हैं। जब व्यक्ति प्रसन्न होता है तो वह
है है
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मुस्कराता एवं हंसता है। आंखों व चेहरे पर वह भाव झलक उठता है। अत: अंगों को देखकर किसी की अभिव्यक्ति प्रत्येक मनुष्य में ही नहीं, जानवरों
तक में होती है, भले ही उसके स्वरूप में भिन्नता हो। हंसने का आंसू से भी गहरा संबंध माना गया है। विशेषज्ञों का मत है कि संवेदना परिपक्व एवं
स्थायी होते जाने पर भाव गंभीर होते जाते एवं क्रियाकलापों में परिवर्तन दिखाई देने लगता है। प्रेम, सहानुभूति एवं भक्ति इसी की उन्नत अवस्थाएं हैं।
हंसना या मुस्कराना अंतर अभिव्यक्ति का स्वरूप है। ये सूक्ष्म मनोभाव हैं। अभी तक कोई भी मनोवैज्ञानिक हंसने वाले इस विचार को सही ढंग से
प्रतिपादित नहीं कर पाया है। यह उम्र के साथ बदलता है। मुस्कराना एवं हंसना संवेदनशीलता की तीव्रता पर निर्भर करता है। हंसने के दौरान बच्चे
का संपूर्ण शरीर हिलता है। इसी प्रकार एं थ्रोपायड बंदरों में देखा गया है। यही नहीं, शरीर के कु छ संवेदनशील अंगों का स्पर्श करने पर भी हंसी आती
है। सात वर्ष के बच्चे के इन विशिष्ट अंगों का स्पर्श करने पर उसकी मांसपेशियों में तीव्र परिवर्तन होता है। कु छ लोगों में इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप
उनके शरीर के रोंगटे उभर जाते हैं। कांख, अंगूठे की पोर एवं पैर के तलवे को काफी संवेदनशील बताया गया है, ये संवेदनशील अंग हैं, जिनका स्पर्श
करने पर हंसी आती है। हसने पर आंखों की मांसपेशियों में होने वाले परिवर्तनों का गहन अध्ययन किया है। उनके अनुसार पांच माह के बच्चे को जब
उसकी मां हंसाती है तो उसका मस्तिष्क सक्रिया हो उठता है, बच्चों की आंखों की चमक अधिक हो जाती है, परं तु मां के स्थान पर किसी अजनबी
चेहरे के होने पर भी बच्चे की आंखों में विशेष चमक होती है। निराशा या अन्य अवस्था में आंखों की चमक अधिक हो जाती है, परन्तु मां के स्थान पर
किसी अजनबी चेहरे के होने पर बच्चे की आंखें वह भाव प्रदर्शित नहीं कर पाती हैं। इसी तरह नवदंपत्ति की आंखों में भी विशेष चमक होती है।
निराशा या अन्य अवस्था में आंखों की मांसपेशिया उतनी सक्रिया व सजग नहीं हो पाती। जिससे वह मूलभाव दृष्टिगोचर नहीं होता है। इसका कारण
स्पष्ट करते हुए डचीन ने कहा है कि प्रसन्नता अति सूक्ष्म अभिव्यक्ति है, जिसे उसी क्षण देखा जा सकता। वैज्ञानिक जगत में इसे डचीन मुस्कराहट के
नाम से जाना जाता है। इस दौरान भौहें नीचे झुक जाती हैं। तेज व चमकीली आंखें प्रसन्न व हर्षित मन:स्थिति की द्योतक हैं। अधिक हंसने पर आंखों में
आंसू आ जाते हैं। यद्यपि यह रोने पर भी होता है, परं तु इस समय आंखें चमकने की बजाय धुंधली दिखाई देती हैं। तनाव के समय भी आंखें बुझी बुझी
सी रहती है। तनाव की अवस्था में आंखों की पुतली खून एवं अन्य द्रव्यों से भर जाती है। क्रोध या उत्तेजना की स्थिति में ये और भी लाल हो उठती है।
यह संभवत: अत्यधिक स्नायु ऊर्जा के प्रवाह के कारण होता है, परं तु जब व्यक्ति प्रसन्न होता है तो यह ऊर्जा उल्लास बनकर आंसू के रूप में टपकने
लगती है।