MP CPCT 08 Aug 2021 Question Paper Hindi Typing Shift 3 – Text
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Computer Proficiency Certification Test
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Question Paper Name : INSCRIPT 08th August 2021 Shift 3
Subject Name : Inscript
Creation Date : 2021-08-08 20:32:38
Duration : 25
Calculator : None
Magnifying Glass Required? : No
Ruler Required? : No
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Mock
Group Number : 1
Group Id : 2549892794
Group Maximum Duration : 10
Group Minimum Duration : 10
Show Attended Group? : No
Edit Attended Group? : No
Break time : 1
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Mandatory Break time : Yes
Group Marks : 0
Is this Group for Examiner? : No
Hindi Mock
Section Id : 2549894314
Section Number : 1
Section type : Typing Test
Mandatory or Optional : Mandatory
Number of Questions : 1
Number of Questions to be attempted : 1
Section Marks : 0
Enable Mark as Answered Mark for Review and Clear Response : Yes
Sub-Section Number : 1
Sub-Section Id : 2549894355
Question Shuffling Allowed : No
Question Number : 1 Question Id : 25498941129 Question Type : TYPING TEST
Key Value
Form CPCTHINMOINS5
एक बार की बात है, अकबर और बीरबल शिकार पर जा रहे थे। अभी कु छ समय हुआ था कि उन्हें एक हिरण दिखा। जल्दबाजी में तीर निकलते हुए
अकबर अपने हाथ पर घाव लगा बैठा। अब हालात कु छ ऐसे थे कि अकबर बहुत दर्द में था और गुस्से में भी।
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Actual
Group Number : 2
Group Id : 2549892795
Group Maximum Duration : 15
Group Minimum Duration : 15
Show Attended Group? : No
Edit Attended Group? : No
Break time : 0
Group Marks : 0
Is this Group for Examiner? : No
Hindi Typing Test
Section Id : 2549894315
Section Number : 1
Section type : Typing Test
Mandatory or Optional : Mandatory
Number of Questions : 1
Number of Questions to be attempted : 1
Section Marks : 0
Enable Mark as Answered Mark for Review and Clear Response : Yes
Sub-Section Number : 1
Sub-Section Id : 2549894356
Question Shuffling Allowed : No
Question Number : 2 Question Id : 25498941130 Question Type : TYPING TEST
Key Value
Form CPCTHINTYINS5
चट्टानों को काटकर बनाए गए अजंता गुफा मंदिर व मठ, अजंता गांव के समीप, उत्तर-मध्य महाराष्ट्र , पश्चिमी भारत में स्थित हैं, जो अपनी भित्ति
है औ र्वो
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चित्रकारी के लिए विख्यात है। औरं गाबाद से १०७ किलोमीटर पूर्वोत्तर में वगुर्ना नदी घाटी के २० मीटर गहरे बाएं छोर पर एक शिक्षा के आग्नेय पत्थरों
का परतों को खोखला करके ये मंदिर बनाए गए हैं। लगभग तीस गुफाओं के इस समूह की खुदाई पहली शताब्दी ई. पू. और सातवीं शताब्दी के बीच
दो रूपों में की गई थी, चैत्य और विहार। यद्यपि इन मंदिरों की मूर्तिकला, खासकर चैत्य स्तंभों का अलंकरण आकर्षक है, लेकिन अजंता क गुफाओं
का मुख्य आकर्षण भित्ति चित्रकारी है। इस चित्रों में धार्मिक अाख्यानों और देवताओं का जितनी प्रचुरता और जीवंतता के साथ चित्रण किया गया है,
वह भारतीय कला के क्षेत्र में विशिष्ट है। अजंता की गुफाएं करूणामय भावनाओं से भरी हुई शिल्पकला और चित्रकला से ओतप्रोत हैं, जो मानवीय
इतिहास में कला के उत्कृ ष्ट ज्ञान और अनमोल समय को दर्शाती हैं। ये गुफाएं सजावटी रुप से तराशी गई हैं, फिर भी इनमें एक शांति और अध्यात्म
झलकता है तथा ये दैवीय ऊर्जा और शक्ति से भरपूर हैं। ईसा पूर्व दू सरी शताब्दी में आरं भ करते हुए और छठवीं शताब्दी तक जारी रखते हुए महाराष्ट्र
में औरमगाबाद शहर से लगभग १०७ किलोमीटर की दू री पर अजंता की वे गुफाएं पर्वत को काट कर विशाल अश्र्व-नाल के आकार में बनाई गई हैं।
अजंता में २९ गुफाओं का एक झुंड वास्तुकला, गुफा चित्रकला और शिल्प चित्रकला के उत्कृ ष्तम उदाहरणों में से एक है। इन गुफाओं में चैत्य कक्ष या
मठ हैं जिनका उपयोग भिक्षुओं द्वारा ध्यान लगाने और अद्ययन करते के लिए किया जाता था। गुफाओं की दीवारों तथा छतों पर बनाई गई ये तस्वीरें
बोधिसत्व के पिछले जन्म से संबंधित विविध कहानियों का चित्रण करती हैं। ये शिल्पाकलाओं और तस्वीरों को प्रभावशाली रुप में प्रस्तुत करती है
जबकि वे समय के असर से मुक्त है। अजंता गुफा-चित्रों की चमकी हजार से अधिक वर्ष बीतने के बाद भी आधुनिक समय के लिए आश्चर्य का विषय
है। चावल के मांड, गोंद और अन्य कु छ पत्तियों तथा वस्तुओं का सम्मिश्रण कर आविष्कृ त किए गए रं गों से ये चित्र बनाए गए। लगभग हजार साल तक
भूमि में दबे रहे और १८१९ में पुनः उत्खनन कर इन्हें प्रकाश में लाया गया। हजार वर्ष बीतने पर भी इनका रं ग हल्का नहीं हुआ, खराब नहीं हुआ,
चमक यथावत बनी रही। कहीं कु छ सुधारने या आधुनिक रं ग लगाने का प्रयत्न हुआ तो वह असफल ही हुआ। रं गों और रे खाओं की यह तकनीक आज
भी गौरवशाली अतीत की याद दिलाती है। ब्रिटिश संशोधक मि. ग्रिफिव कहते हैं अजंता में जिन चितेरों ने चित्रकारी की है, वे सृजन के शिखर पुरूष
थे। अजंता में दीवारों पर जो लंबरूप लाइनें कू ची सहज ही खींची गयी हैं वे अचंभित करती हैं। वास्तव में यह आश्चर्यजनक कृ तित्व है। परन्तु जब छत
की सतह पर संवारी क्षितिक के समानान्तर लकीरें , उनमें संगत घुमाव, मेहराव की शक्ल में एकरूपता के दर्शन होते हैं और इसके सृजन की हजारों
जटिलताओं पर ध्यान जाता है, तब लगता है वास्तव में यह विस्मयकारी आश्चर्य और कोई चमत्कार है।