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CBSE Class 10 Syllabus 2027 Hindi Course-B

Download the CBSE Class 10 Hindi Course-B Syllabus 2027 PDF for free at AglaSem. This official CBSE Class 10 Hindi Course-B curriculum for the 2026-27 academic session covers the complete course structure, unit-wise topics and weightage, marking scheme, and prescribed books. Use this latest CBSE Hindi Course-B syllabus to plan your board exam 2027 preparation, understand the question paper design, and focus on high-scoring topics — download the free PDF now.
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About CBSE Class 10 Syllabus 2027 Hindi Course-B

CBSE Class 10 Syllabus 2027 Hindi Course-B is available here for free download. Published by CBSE for Class 10, this syllabus can be viewed online or downloaded as a PDF (10 pages). Candidates preparing for Class 10 can use CBSE Class 10 Syllabus 2027 Hindi Course-B to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

How can I download CBSE Class 10 Syllabus 2027 Hindi Course-B?

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Is CBSE Class 10 Syllabus 2027 Hindi Course-B free to download?

Yes. CBSE Class 10 Syllabus 2027 Hindi Course-B can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

How many pages does CBSE Class 10 Syllabus 2027 Hindi Course-B have?

CBSE Class 10 Syllabus 2027 Hindi Course-B contains 10 pages, which you can read online or download together as a single PDF.

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CBSE Class 10 Syllabus 2027 Hindi Course-B – Text

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Page 1

FOR CBSE CLASS 10 SYLLABUS EXAM PREPARATION

CBSE Class 10 Syllabus
2027
Question Paper · Hindi
EXAM YEAR TYPE SUBJECT DETAILS

CBSE Class 10 Syllabus 2027 Question Paper Hindi Course B

Notes · Sample Papers · Previous Year Papers · Mock Tests

Page 2

्षितीय भाषा के प म ्ष दी
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्षिषय कोड - 085
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as क ा - 10िी (2026-27)
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रा र ीय ्षि ा नी्षत 2020 तथा क७ঈीय मा ममक मि঴ा बोडड ारा समय-समय पर द঴ता आधाररत मि঴ा,
कला समेमकत अमधगम, अनुभवा क अमधगम को अपनाने की ঋे रणा दी गई है , जो मि঴ामथडयोॠ की ঋमतभा
को उजागर करने, खेल-खेल म७ सीखने पर बल दे ने, आनॠदपूणड ৯ानाजडन और मव ाजडन के मवमवध तरीकोॠ को
अपनाने तथा अनुभव के ारा सीखने पर बल दे ती है।
द ता आधाररत ्षि ा से ता यड है सीखने और मू ाॠकन करने का एक ऐसा मिकोण, जो मि঴ाथी के
सीखने के ঋमतफल और मवषय म७ मविेष द঴ता को ঋा करने पर बल दे ता है। द঴ता वह ঴मता, कौिल,
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৯ान और मिकोण है , जो ्ि को वा मवक जीवन म७ कायड करने म७ सहायता करती है। इससे मि঴ाथी
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यह सीख सकते ह॰ मक ৯ान और कौिल को मकस ঋकार ঋा मकया जाए तथा उ ७ वा मवक जीवन की
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सम ाओॠ पर कैसे लागू मकया जाए। जीवनोपयोगी बनाना तथा वा मवक जीवन के अनुभवोॠ से पाठ को
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समृ करना ही द঴ता आधाररत मि঴ा है। इसके मलए उৡ रीय म ॠतन कौिल पर मविेष बल दे ने की
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आव कता है।
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कला समे्षकत अ्षधगम को मि঴ण अमधगम ঋमिया म७ सुमनमित करना अ मधक आव क है। कला के
सॠसार म७ क ना की एक अलग ही उडान होती है। कला एक ्ि की र ना क अमभ ्ि है। कला
समेमकत अमधगम से ता यड है - कला के मवमवध ॺपोॠ सॠगीत, नृ , नाटक, कमवता, रॠ गिाला, याআा, मूमतडकला,
आभूषण बनाना, गीत मलखना, नुজड नाटक, कोलाज, पो र, कला ঋदिडनी को मि঴ण अमधगम की ঋमिया
का अमभ मह ा बनाना। मकसी मवषय को आरॠ भ करने के मलए आइस ঍ेमकॠग गमतमवमध के ॺप म७ तथा
सामॠज पूणड समझ पैदा करने के मलए अॠतरमवषयक या बॽमवषयक पररयोजनाओॠ के ॺप म७ कला समेमकत
अमधगम का ঋयोग मकया जाना ामहए। इससे पाठ अमधक रो क एवॠ ঁा हो जाएगा। m
अनुभिा क अ्षधगम या आनुभ्षिक ाना जन का उ े
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िैम঴क वातावरण को मि঴ाथी क७मঈत बनाने
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के साथ-साथ यॠ मू ाॠकन करने , आलो ना क ॺप से सो ने, मनणडय लेने तथा ৯ान का मनमाडण कर
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उसम७ पारॠ गत होने से है। यहाफ़ मि঴क की भूममका सुमवधा ঋदाता व ঋे঴क की रहती है। ৯ानाजडन आनुभामवक
ag
৯ानाजडन, सहयोगा क तथा तॠআ ॺप से होता है और यह मि঴ामथडयोॠ को एक साथ कायड करने तथा यॠ
के अनुभव ारा सीखने पर बल दे ता है। यह मस ाॠत और वहार के बी की दू री को कम करता है।
भारत एक बॽभाषी दे ि है मजसम७ बॽत सी ঴ेআीय भाषाएफ़ र ी बसी है। भामषक और साॠ ृ मतक मि से मभ
होने के बावजूद भारतीय परॠ परा म७ बॽत कुछ ऐसा है जो एक दू सरे को जोडता है। यही कारण है मक
मातृभाषा के ॺप म७ अलग भाषा को पुने वाला मव ाथी जब दू सरी भाषा के ॺप म७ महॠदी का ुनाव करता
है तो उसके पास अमभ ्ि का एक रु आधार पहली भाषा के ॺप म७ पहले से ही मौजूद होता है। इसमलए
छठी से आठवीॠ क঴ा म७ सीखी ॽई महॠदी का मवकास भी वह तेजी से करने लगता है। आठवीॠ क঴ा तक वह
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महॠदी भाषा म७ सुनने, पुने, मलखने और कुछ-कुछ बोलने का अ ास कर ुका होता है। महॠदी की बात
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पमআकाएफ़ और मछटपुट र नाएफ़ पुना भी अब उसे आ गया है। इसमलए जब वह नवीॠ एवॠ दसवीॠ क঴ा म७ महॠदी
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पुे गा तो जहाफ़ एक ओर महॠ दी भाषा के मा म से सारे दे ि से जुडेगा वहीॠ दू सरी ओर अपने ঴ेআ और पररवेि
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को महॠदी भाषा के मा म से जानने की कोमिि भी करे गा, ভोॠमक मकिोरভ के इन बৡोॠ के मानमसक
g धरातल का मवकास मव सतर तक पॽफ़ ुका होता है ।
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्षि ण उ े

● दै मनक जीवन म७ महॠ दी म७ समझने -बोलने के साथ-साथ मलखने की ঴मता का मवकास करना।
● महॠ दी के मकिोर-सामह , अखबार व पमআकाओॠ को पढ़कर समझ पाना और उसका आनॠद
उठाने की ঴मता का मवकास करना।
● औप ाररक मवषयोॠ और सॠदभॵ म७ बात ीत म७ भाग ले पाने की ঴मता का मवकास करना।
● महॠ दी के िररए अपने अनुभव सॠसार को मलखकर सहज अमभ ्ि कर पाने म७ स঴म बनाना।
● सॠ ार के मवमभ मा मोॠ (मঋॠट और इलेঠरॉमनक) म७ ঋयुि महॠ दी के मवमभ ॺपोॠ को समझने
की यो৓ता का मवकास करना।
● क঴ा म७ बॽभामषक, बॽसाॠ ृ मतक सॠदभॵ के ঋमत सॠवेदनिील सकारा क सो बनाना।
● अपनी मातृभाषा और पररवेिगत भाषा को साथ रखकर महॠ दी की सॠर नाओॠ की समझ बनाना।
● सामामजक मु ोॠ पर समझ बनाना| (जामत, मलॠग तथा आमथडक मवषमता)
● कमवता, कहानी तथा घटनाओॠ को रो क ढॠ ग से मलखना ।
● भाषा एवॠ सामह को समझने एवॠ आ सात करने की द঴ता का मवकास।

्षि ण यु िया

● म तीय भाषा के ॺप म७ पढ़ाई जा रही महॠ दी भाषा का र ऐसा होना ामहए मक उसकी
गमत धीरे -धीरे बढ़ सके, इसके मलए महॠ दी अ ापकोॠ को बडे धीरज से अपने अ ापन
कायडिमोॠ को मनयोमजत करना होगा। मकसी भी म तीय भाषा म७ मनपुणता ঋा करने -कराने का
एक ही उपाय है -उस भाषा का लगातार रो क अ ास करना-कराना। ये अ ास मजतने
अमधक रो क, समिय एवॠ ঋासॠमगक होॠगे मव ामथडयोॠ की भामषक उपल्ि भी उतनी ही तेिी
से हो सकेगी। मुखर भामषक अ ास के मलए वाताड लाप, रो क कहानी सुनना-सुनाना, घटना-
वणडन, म আ-वणडन, सॠवाद, वाद-मववाद, अमभनय, भाषण ঋमतयोमगताएफ़ , कमवता पाठ और
अॠ ा঴री जैसी गमतमवमधयोॠ का सहारा मलया जा सकता है ।
● का भाषा के ममज से मव ाथी का परर य कराने के मलए िॺरी होगा मक मकताबोॠ म७ आए
का ाॠ िोॠ की लयब ঋ ुमतयोॠ के ऑमडयो-वीमडयो कैसेट तैयार मकए जाएफ़ । अगर आसानी से
कोई गायक/गा्षयका ममले तो क঴ा म७ म कालीन सामह के अ ापन-मि঴ण म७ उससे मदद
ली जानी ामहए।
● एनसीईआरटी ारा तैयार मकए गए अ्षधगम ्षतफल /सीखने -मसखाने की ঋमिया जो इस
पाਉ याड के साथ सॠल্क के ॺप म७ उपलि है , को मि঴क ारा ঴मता आधाररत मि঴ा
का लশ ঋा करने के मलये अमनवायड ॺप से इ ेमाल करने की आव कता है ।
● मानव सॠसाधन मवकास मॠআालय के मवमभ सॠगठनोॠ तथा तॠআ मनमाड ताओॠ ारा उपलि कराए
गए अ कायडिम/ई-सामঁी/ वृ म আोॠ और मसनेमा को मि঴ण-सामঁी के तौर पर इ ेमाल
करने की िॺरत है । इनके ঋदिडन के िम म७ इन पर लगातार बात ीत के िररए ्षसनेमा के
मा म से भाषा के योग की मवमििता की पह ान कराई जा सकती है और महॠ दी की
अलग-अलग छटा मदखाई जा सकती है ।
● क঴ा म७ मसूड एक पाਉपु क की उप्िमत से बेहतर होगा मक मि঴क के हाथ म७ मवमभ
ঋकार की पाਉसामঁी को मव ाथी दे ख७ और क঴ा म७ अलग-अलग मौकोॠ पर मि঴क उनका
इ ेमाल कर सक७।

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● भाषा लगातार ঁहण करने की मिया म७ बनती है , इसे ঋदमिडत करने का एक तरीका यह भी
है मक मि঴क खुद यह मसखा सक७ मक वे भी ि कोि, सा्ष कोि, सदभज थ की लगातार
मदद ले रहे ह॰ । इससे मव ामथडयोॠ म७ इनके इ ेमाल करने को लेकर त रता बढ़े गी। अनुमान
के आधार पर मनकटतम अथड तक पॽफ़ कर सॠतुि होने की जगह वे सटीक अथड की खोज
करने के मलए ঋेररत होॠगे। इससे ि ोॠ की अलग-अलग रॠ गत का पता लेगा, वे ि ोॠ के
बारीक अॠतर के ঋमत और सजग हो पाएफ़ गे।
● मभ ঴मता वाले मव ामथडयोॠ के मलए उपयुि मि঴ण-सामঁी का इ ेमाल मकया जाए तथा मकसी
भी ঋकार से उ ७ अ मव ामथडयोॠ से कमतर या अलग न समझा जाए।
● क঴ा म७ अ ापन को हर ঋकार की मवमवधताओॠ (मलॠग, धमड, जामत, वगड, भाषा आमद) के
ঋमत सकारा क और सॠ वेदनिील वातावरण मनममडत करना ामहए।

िण (सुनने) और िाचन (बोलने) की यो ताए
 ঋवाह के साथ बोली जाती ॽई महॠ दी को अथडबोध के साथ समझना।
● महॠ दी ि ोॠ का उम त उৡारण करना तथा महॠ दी के ाभामवक अनुतान का ঋयोग करना।
● सामा मवषयोॠ पर बात ीत करना और परर ाड म७ भाग लेना।
● महॠ दी कमवताओॠ को उम त लय, आरोह-अवरोह और भाव के साथ पढ़ना।
● सरल मवषयोॠ पर कुछ तै यारी के साथ दो- ार ममनट का भाषण दे ना।
● महॠ दी म७ ागत करना, परर य और ध वाद दे ना।
● अमभनय म७ भाग लेना।
िण तथा िाचन परी ा ेतु ्षदिा-्षनदे ि
● िण (सुनना) (2.5 अक): वमणडत या पमठत सामঁी को सुनकर अथडঁहण करना,
वाताड लाप करना, वाद-मववाद, भाषण, कमवता पाठ आमद को सुनकर समझना, मव ेषण
करना, मू ाॠ कन करना और तद् नुसार अमभ ्ि के ढॠ ग को समझना।
● िाचन (बोलना) (2.5 अक): भाषण, स र कमवता-पाठ, वाताड लाप और उसकी
औप ाररकता, कायडिम-ঋ ुमत, कथा-कहानी अथवा घटना सुनाना, परर य दे ना,
भावानुकूल सॠवाद-वा न।
िण (सुनना) एि िाचन (बोलना) कौिल:

 परी঴क मकसी ঋासॠमगक मवषय पर एक अनुৢेद का ि वा न करे गा। अनुৢेद त ा क
या सुझावा क हो सकता है । अनुৢेद लगभग 120 ि ोॠ का होना ामहए।
या

 परी঴क 1-1.5 ममनट का ঒ अॠि (ऑमडयो ्िप) सुनवाएगा। अॠि रो क होना
ामहए। क / घटना पूणड एवॠ ि होनी ामहए। वा क का उৡारण िु , ि एवॠ
मवराम म ोॠ के उम त ঋयोग समहत होना ामहए।
 परी঴ाथी ानपूवडक परी঴क/ऑमडयो ्िप को सुनने के पिात परी঴क ारा पूछे गए ঋ ोॠ
का अपनी समझ से मौ्खक अथवा कायडपআक के मा म से उ र द७ गे।

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कौिलो के अतरण का मू ाकन

(इस बात का मनिय करना मक ভा मव ाथी म७ ঒वण और वा न की मन मल्खत यो৓ताएफ़ ह॰ )
िण (सुनना) िाचन (बोलना)

1 पररम त सॠदभॵ म७ ঋयुि ि ोॠ और पदोॠ को 1 केवल अलग-अलग ि ोॠ और पदोॠ के ঋयोग
समझने की सामा यो৓ता है । की यो৓ता ঋदमिड त करता है ।
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2 छोटे सुसॠब कथनोॠ को पररम त सॠदभॵ म७ समझने 2 पररम त सॠदभॵ म७ िु ता से केवल छोटे सॠब . co
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की यो৓ता है ।
m कथनोॠ का सीममत ঋयोग करता है ।
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3 पररम त याla
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अपररम त दोनोॠ सॠदभॵ म७ कमथत सू ना 3 अपे঴ाकृत दीघड भाषण म७ जमटल कथनोॠaके ঋयोग
को aिgसमझने की यो৓ता है । की यो৓ता ঋदमिड त करता है ।

4 दीघड कथनोॠ को पयाड िु ता से समझता है और 4 अपररम त ्िमतयोॠ म७ मव ारोॠ को तामकडक ढॠ ग
मन षड मनकाल सकता है । से सॠगमठत कर धारा-ঋवाह ॺप म७ ঋ ु त करता
है ।

5 जमटल कथनोॠ के मव ार-मबॠदुओॠ को समझने और 5 उ े और ঒ोता के मलए उपयुि िै ली को
मव ेमषत करने की यो৓ता ঋदमिड त करने की अपना सकता है ।
঴मता है । m
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पठन कौिल s e
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पढ़ने की यो ताए ag
 महॠ दी म७ कहानी, मनबॠध, याআा-वणडन, जीवनी, पআ, डायरी आमद को अथडबोध के साथ
पढ़ना।
 पाਉव ु के सॠबॠध म७ मव ार करना और अपना मत ि करना।
 सॠदभड सामह को पढ़कर अपने काम के लायक सू ना एकআ करना।
 पमठत सामঁी के मवमभ अॠिोॠ का पर र सॠबॠध समझना।
 पमठत व ु का साराॠ ि तैयार करना।
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 भाषा, मव ार एवॠ िैली की सराहना करना।
m
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सामह के ঋमत अमभॹम का मवकास करना।

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e m ्षलखने की यो ताए las
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ag ● मलखते ॽए ाकरण-स त भाषा का ঋयोग करना।
● महॠ दी के पररम त और अपररम त ि ोॠ की सही वतडनी मलखना।
● मवराम म ोॠ का समुम त ঋयोग करना।
● लेखन के मलए समिय ( वहारोपयोगी) ि भॠडार की वृ् करना।
● ঋभावपूणड भाषा तथा लेखन-िैली का ाभामवक ॺप से ঋयोग करना।
● उपयुि अनुৢेदोॠ म७ बाफ़ टकर मलखना।

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Page 6

● ঋाथडना पআ, मनमॠআण पআ, बधाई पআ, सॠवेदना पআ, आदे ि पআ, ईमेल, एस.एम.एस आमद
मलखना और मवमवध ঋपআोॠ को भरना।
● मवमवध ঔोतोॠ से आव क सामঁी एकআ कर एक अभीि मवषय पर अनुछेद मलखना।
● दे खी ॽई घटनाओॠ का वणडन करना और उन पर अपनी ঋमतमिया ঋकट करना।
● पढ़ी ॽई कहानी को सॠवाद म७ तथा सॠवाद को कहानी म७ पररवमतडत करना।
● समारोह और गोमियोॠ की सू ना और ঋमतवेदन तैयार करना।
● मलखने म७ सृजना कता लाना।
● अनाव क काट-छाफ़ ट से ब ते ॽए सुपाਉ लेखन कायड करना
● दो मभ पाठोॠ की पाਉव ु पर म ॠतन करके उनके म की सॠब ता (अॠतसंबॠधोॠ) पर अपने
मव ार अमभ ि करने म७ स঴म होना।
● रटे -रटाए वाভोॠ के िान पर अमभ ्िपरक/ ्िमत आधाररत/ उৡ म ॠतन ঴मता वाले ঋ ोॠ
पर सहजता से अपने मौमलक मव ार ঋकट करना।

रचना क अ्षभ ि
अनु े द लेखन
● पू णजता – सॠबॠमधत मवषय के सभी प঴ोॠ को अनु ৢेद के सीममत आकार म७ सॠयोमजत करना।
● मब ता– मव ारोॠ को िमब एवॠ तकडसॠगत मवमध से ঋकट करना।
● ्षिषय-क्षित – ঋारॠ भ से अॠत तक अनु ৢेद का एक सूআ म७ बफ़धा होना।
● सामा्षसकता – अनाव क मव ार न दे कर सीममत ि ोॠ म७ यथासॠभव मवषय सॠ ब पूरी बात
कहने का ঋयास करना।

प लेखन

● अनौप ाररक पআ ारा पार ररक सॠबॠधोॠ मैআीपू णड भावोॠ को ि करने हे तु सरल,
सॠम঴ लेखन िैली का मवकास।
● औप ाररक पআोॠ ारा दै नॠमदनी जीवन की मवमभ ्िमतयोॠ म७ कायड , ापार, सॠवाद,
परामिड , अनुरोध तथा सुझाव के मलए ঋभावी एवॠ ि सॠঋेषण ঴मता का मवकास।
● सरल और बोल ाल की भाषा िैली, उपयुि, सटीक ि ोॠ के ঋयोग, सीधे-सादे ढॠ ग से
ि और ঋ ঴ बात की ঋ ुमत।
● ঋाॺप की आव क औप ाररकताओॠ के साथ सु ि, सुलझे और िमब मव ार
आव क;त , सॠम঴ ता और सॠपूणडता के साथ ঋभावी ঋ ुमत।
्षि ापन लेखन
(्षि ा्षपत ि ु / ्षिषय को कि म रखते ए)

● मव৯ामपत व ु के मवमिि गुणोॠ का उ ेख
● आकषड क ले खन िै ली
● ঋस्तुमत म७ नयापन, वतडमान से जु डाव तथा दू सरोॠ से मभन् नता
● मव৯ापन म७ आव कतानु सार नारे ( ोगन) का उपयोग
● मव৯ापन लेखन म७ बॉস, म আ अथवा रॠ ग का उपयोग अमनवायड नहीॠ है, मकॠतु समय होने पर
ঋ ु मत को ঋभावी बनाने के मलए इनका उपयोग मकया जा सकता है ।

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्षच -िणजन

(्षच म ्षदखाई दे र े /घटना को क नाि ि से अपने ि ो म ्षलखना)

● पररवेि की समझ
● सू঵ मववरणोॠ पर ान
● ानुकूल भाषा
● िमब ता और तारत ता
● ঋभाविाली अमभ ्ि
सिाद लेखन
(दी गई परर ि्षतयो के आधार पर सिाद लेखन)

● सीमा के भीतर एक दू सरे से जु डे साथड क और उ े पूणड सॠवाद
● पाআोॠ के अनु कूल भाषा िैली
● कोिक म७ विा के हाव भाव का सॠकेत
● सॠवाद ले खन के अॠत तक मवषय मु े पर वाताड
सूचना लेखन
(औपचाररक िैली म ाि ाररक ीिन से सब्षधत ्षिषयो पर आधाररत सूचना लेखन)

● सरल एवॠ बोधग भाषा
● मवषय की िता
● मवषय से जु डी सॠपूणड जानकारी
● औप ाररक मििा ार का मनवाड ह
ई-मेल लेखन
(्षि्षिध ्षिषयो पर आधाररत औपचाररक ई-मेल लेखन)

● सरल, मिि व बोधग भाषा
● मवषय से सॠब ता
● सॠम঴ कले वर, मकॠतु मवषयगत सॠपूणड जानकारी
● ावहाररक/कायाड लयी मििा ार व औप ाररकताओॠ का मनवाड ह
लघुकथा लेखन
(्षदए गए ्षिषय/िीषजक आ्षद के आधार पर रचना क सोच के साथ लघु कथा लेखन)
● मनरॠ तरता
● कथा कता
● ঋभावी सॠवाद/पाআानु कूल सॠवाद
● र ना कता, क नाि्ि का उपयोग
● मज৯ासा/रो कता
● उ े क७ঈीयता

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्ष दी पा म –ब

्षिषय कोड – 085

क ा 10िी (2026-27)
(2026-27)
(2025-26)

परी ा ेतु पा म ्षि्षनदे िन

खड भाराक m
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अप्षठतoबोध . co
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ख m ाररक याकरण
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ग gl पा पु तक एि पूरक पा पु तक 28a

घ
a रचना मक लेखन 22
 भाराक- 80 (िा्षषजक बोडज परी ा )+20 (आतररक परी ा)
्षनधाजररत समय- 3 घटे भाराक-80

िा्षषजक बोडज परी ा े तु भार ्षिभा न

खड – क (ब ्षिक ी )
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्षिषयि ु
.co उप भार कुल भार

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1 अपमठत ग ाॠ ि पर बोध, म ॠतन, मव ले षण, सराहना आमद पर बॽमवक पीय,
अमतलघू तरा मक एवॠ लघू तरा मक ঋ gl

अ
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दो अपमठत ग ाॠ ि लगभग 200 ि ोॠ के । 7+7 14

एक अॠकीय तीन बॽमवक ी ঋ (1x3=3) पूछे जाएफ़ गे
अमतलघू तरा मक एवॠ लघू तरा मक ঋ न (2×2=4) पूछे जाएफ़ गे

खड – ख ( याि ाररक याकरण)

2 ाकरण के मलए मनधाड ररत मवषयोॠ पर मवषयव ु का बोध, भामषक मबॠदु/ सॠर ना आमद पर
m
अमतलघू तरा मक/लघू तरा मक ঋ । (1x16)
m (कुल 20 ঋ पूछे जाएफ़ गे, मजनम७ से केवल 16 ঋ ोॠ के उ र दे ने होॠगे) .co
m .co s em
e (5 म७ से 4lঋa करने होॠगे)
las 1 पदबॠध (1x4=4)
ag
4 16

ag 2 र ना के आधार पर वा य ॺपाॠ तरण (1x4=4) (5 म७ से 4 ঋ करने होॠगे) 4

3 समास (1x4=4) (5 म७ से 4 ঋ करने होॠगे) 4

4 मु हावरे (1x4=4) (5 म७ से 4 ঋ करने होॠगे) 4

3 खड – ग (पा पु क एि पू रक पा पु तक)

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10
7
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अ ग खड (पा पु तक) 11

1 पिड (भाग-2) से मनधाड ररत पाठोॠ म७ से ग ाॠ ि के आधार पर मवषयव ु का ৯ान, 5
बोध, अमभ ्ि आमद पर एक अॠकीय पाफ़ ब ्षिक ी ঋ पूछे जाएफ़ गे। (1x5)

2 पिड (भाग-2) से मनधाड ररत पाठोॠ म७ से मवषयव ु का ৯ान, बोध, अमभ ्ि आमद 6
पर तीन ঋ पूछे जाएफ़ गे।(मवक समहत- 25-30 ि -सीमा वाले 4 म७ से 3 ঋ
करने होॠगे) (2x3)

ब का खड (पा पु तक) 11

1 पिड (भाग-2) से मनधाड ररत कमवताओॠ म७ से का ाॠ ि के आधार पर एक अॠकीय 5 28

पाफ़ ब ्षिक ी ঋ पूछे जाएफ़ गे (1x5)

2 पिड (भाग-2) से मनधाड ररत कमवताओॠ के आधार पर मव ामथड योॠ का का बोध 6
परखने हे तु तीन ঋ पूछे जाएफ़ गे। (मवक समहत-25-30 ि -सीमा वाले 4 म७ से
3 ঋ करने होॠगे) (2x3)

स पू रक पा पु क सचयन भाग – 2 6

सॠ यन (भाग-2) से मनधाड ररत पाठोॠ पर आधाररत दो ঋ पूछे जाएफ़ गे। (3x2) (मवक 6
समहत-50-60 ि -सीमा वाले 3 म७ से 2 ঋ करने होॠगे)

खड – घ (रचना मक लेखन)

i मवमभ मवषयोॠ और सॠदभो पर मव ामथड योॠ के तकडसॠगत मव ार ঋकट करने की ঴मता 5
को परखने के मलए सॠकेत-मबॠदुओॠ पर आधाररत समसाममयक एवॠ ावहाररक जीवन
से जु डे ॽए तीन मवषयोॠ म७ से मकसी एक मवषय पर लगभग 120 ि ोॠ म७ अनु छे द
ले खन (5×1)

ii अमभ ्ि की ঴मता पर क७मঈत औप ाररक मवषयोॠ म७ से मकसी एक मवषय पर लगभग 5
100 ि ोॠ म७ पআ (मवक प समहत) (5×1)
22
iii यावहाररक जीवन से सॠबॠमधत मवषयोॠ पर आधाररत लगभग 60 ि दोॠ म७ सू ना ले खन। 4
(मवक प समहत) (4×1)

iv मवषय से सॠबॠमधत लगभग 40 ि ोॠ के अॠतगडत मव৯ापन लेखन 3
(मवक प समहत) (3×1)

v मवमवध मवषयोॠ पर आधाररत लगभग 80 ि दोॠ म७ ई-मेल ले खन (5×1) 5
अथवा

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मदए गए मवषय/िीषड क आमद के आधार पर लगभग 100 ि दोॠ म७ लघुकथा लेखन
(5×1)

कुल 80

आतररक मू ाकन अक 20

अ साम्षयक आकलन 5

ब ब ्षिध आकलन 5

स पोटज फ़ो्षलयो 5

द िण एि िाचन 5

कुल 100

्षनधाजररत पु क:
1. िज, भाग–2, एन.सी.ई.आर.टी., नई मद ी ारा ঋकामित नवीनतम सॠ रण
2. सचयन, भाग–2, एन.सी.ई.आर.टी., नई मद ी ारा ঋकामित नवीनतम सॠ रण
❖ नोट : ्षन ्षल खत पाठो से न ी पू छे ाएगे ।

पा पु क िज, भाग-2

मबहारी-दोहे (पूरा पाठ)

महादे वी वमाड - मधुर-मधुर मे रे दीपक जल (पूरा पाठ)

अॠतोन ेखव- मगरमगट ( पूरा पाठ)
पू रक पु क सचयन, भाग-2

पु क म७ कोई पररवतडन नहीॠ। कोई भी पाठ नहीॠ हटाया गया है ।

क ा दसिी ेतु प का ्षि ृत ा प ानने के ्षलए कृपया बोडज िारा ारी आदिज प
दे ख।

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Document Details

Board / OrgCBSE
ExamClass 10
TypeSyllabus
Pages10
Languagehindi
Updated24 Sep 2026