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Computer Proficiency Certification Test
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Question Paper Name : REMINGTON GAIL 17th October 2021 Shift 1
Subject Name : Remington GAIL
Creation Date : 2021-10-17 14:28:41
Duration : 25
Calculator : None
Magnifying Glass Required? : No
Ruler Required? : No
Eraser Required? : No
Scratch Pad Required? : No
Rough Sketch/Notepad Required? : No
Protractor Required? : No
Show Watermark on Console? : No
Highlighter : No
Auto Save on Console? ( SA type of questions will be
Yes
always auto saved ) :
Mock
Group Number : 1
Group Id : 2549892938
Group Maximum Duration : 10
Group Minimum Duration : 10
Show Attended Group? : No
Edit Attended Group? : No
Break time : 1
Mandatory Break time : Yes
Group Marks : 0
Is this Group for Examiner? : No
Hindi Mock
Section Id : 2549894578
Section Number : 1
Section type : Typing Test
https://g01.tcsion.com/CAE/viewHtmlPDFAction.action 1/4
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10/25/21, 11:41 AM https://g01.tcsion.com/CAE/viewHtmlPDFAction.action
Mandatory or Optional : Mandatory
Number of Questions : 1
Number of Questions to be attempted : 1
Section Marks : 0
Yes
Sub-Section Number : 1
Sub-Section Id : 2549894619
Question Shuffling Allowed : No
Question Number : 1 Question Id : 25498941838 Question Type : TYPING TEST
एक बार की बात है, अकबर और बीरबल शिकार पर जा रहे थे। अभी कु छ समय हुआ था कि उन्हें एक हिरण
दिखा। जल्दबाजी में तीर निकलते हुए अकबर अपने हाथ पर घाव लगा बैठा। अब हालात कु छ ऐसे थे कि
अकबर बहुत दर्द में था और गुस्से में भी।
Actual
Group Number : 2
Group Id : 2549892939
Group Maximum Duration : 15
Group Minimum Duration : 15
Show Attended Group? : No
Edit Attended Group? : No
Break time : 0
Group Marks : 0
Is this Group for Examiner? : No
Hindi Typing Test
Section Id : 2549894579
Section Number : 1
Section type : Typing Test
Mandatory or Optional : Mandatory
Number of Questions : 1
https://g01.tcsion.com/CAE/viewHtmlPDFAction.action 2/4
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Number of Questions to be attempted : 1
Section Marks : 0
Yes
Sub-Section Number : 1
Sub-Section Id : 2549894620
Question Shuffling Allowed : No
Question Number : 2 Question Id : 25498941839 Question Type : TYPING TEST
कं बन, तमिल भाषा के ग्रंथ कं बरामायण के रचियता थे। इनका जन्म तमिलनाडु के चोल राज्य में तिरुवलुंपूर
नामक गांव में हुआ था। कं बन वैष्णव थे। उनके समय तक बारह प्रमुख आलवार हो चुके थे और भक्ति तथा
प्रपति का शास्त्रीय विवेचन करने वाले यामुन, रामानुज आदि की परं परा भी आरम्भ हो चुकी थी। कं बरामायण
का प्रचार-प्रसार के वल तमिलनाडु में ही नहीं, उसके बाहर भी हुआ। यह तमिल साहित्य की कृ ति एवं एक बृहत
ग्रंथ है। जनश्रुति के अनुसार कं बन का जन्म ईसा की नवीं शताब्दी में हुआ था। कु छ इनका समय बारहवीं
शताब्दी और कु छ नवीं शताब्दी मानते हैं। कं बन के वास्तविक नाम का पता नहीं है। कं बन उनका उपनाम था।
इनके माता-पिता का उनकी बाल्यावस्था में ही देहांत हो गया। अनाथ बालक को पालने वाला कोई नहीं था।
अर्काट जिले के सदैयप्प वल्लल नामक धनी किसान ने अपने बच्चों की देख-रे ख के काम के लिए अपने घर में
रख लिया। जब उन्होंने देखा कि उनके बच्चों के साथ कं बन भी अध्ययन में रुचि लेने लगा है तो सदैयप्प वल्लल
ने कं बन की शिक्षा का भी पूरा प्रबंध कर दिया। इस प्रकार कं बन को शिक्षा प्राप्त हुई और उनके अंदर से काव्य
की प्रतिभा प्रस्फु टित हो गई। कं बरामायण तमिल साहित्य की कृ ति एवं एक बृहत ग्रंथ है और इसके रचयिता
कं बन कविचक्रवर्ती की उपाधि से विभूषित हुए। इस ग्रंथ में छ: कांडों का विस्तार इसमें मिलता है। इससे
संबंधित एक उत्तरकाण्ड भी प्राप्त है, जिसके रचयिता कं बन के समसामयिक एक अन्य महाकवि माने जाते हैं।
पौराणिकों के कारण कं बरामायण में अनेक प्रक्षेप भी आ गए हैं, किं तु इन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है,
क्योंकि कं बन की सशक्त भाषा और विलक्षण प्रतिपादन शैली का अनुकरण शक्य नहीं है। कं बरामायण का
कथानक वाल्मीकि रामायण से लिया गया है, परं तु कं बन ने मूल रामायण का अनुवाद अथवा छायानुवाद न
करके , अपनी दृष्टि और मान्यता के अनुसार घटनाओं में कई परिवर्तन किए हैं। विविध परिस्थितियों के
प्रस्तुतीकरण, घटनाओं के चित्रण, पात्रों के संवाद, प्राकृ तिक दृश्यों के उपस्थापन तथा पात्रों की मनोभावनाओं
की अभिव्यक्ति में पदे-पदे मौलिकता मिलती है। तमिल भाषा की अभिव्यक्ति और संप्रेषणीयता को सशक्त
बनाने के लिए भी कवि ने अनेक नए प्रयोग किए हैं। छं दोविधान, अलंकार प्रयोग तथा शब्द नियोजन के माध्यम
से कं बन ने अनुपम सौंदर्य की सृष्टि की है। सीता राम का विवाह, शूर्पणखा प्रसंग, बालि वध, हनुमान द्वारा सीता
संदर्शन, मेघनाद वध, राम-रावण सं संग्राम आदि प्रसंग अपने-अपने काव्यात्मक सौंदर्य के कारण विशेष
आकर्षक हैं। प्रत्येक प्रसंग अपने में पूर्ण है और नाटकीयता से ओतप्रोत है। घटनाओं के विकास के सुनिश्चित
क्रम हैं। प्रत्येक घटना आरं भ, विकास और परिसमाप्ति में एक विशिष्ट शिल्प विधान लेकर सामने आती है।
वाल्मीकि ने राम के रूप में पुरुष पुरातन का नहीं, अपितु महामानव का चित्र उपस्थित किया था, जबकि कं बन
ने अपने युगादर्श के अनुरूप राम को परमात्मा के अवतार के साथ आदर्श महामानव के रूप में भी प्रतिष्ठित
किया। वैष्णव भक्ति तत्कालीन मान्यताओं और जनता की भक्तिपूत भावनाओं से संयुक्त रहकर इस महाकवि
ने राम के चरित्र को महत्तापूरित एवं परमपूर्णत्व समन्वित आयामों में प्रस्तुत किया जो सहज ग्राह्य होते हुए भी
अकल्पनीय रूप से मनोहर किं वा मनोरम था।
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