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खण्ड - अ
( फहुविकल्ऩीम प्रश्न )
ननदे श : प्रश्न सॊख्मा 1 से 20 फहुविकल्ऩीम हैं । ननम्नलरखखत प्रश्नों भें प्रत्मेक के
चाय-चाय िैकल्ल्ऩक उत्तय ददए गए हैं । उनभें से सही विकल्ऩ चुनकय क्रभिाय उत्तय ऩत्रक
ऩय अॊककत कयें ।
1. 'कॊकार' ककस विधा की यचना है ?
(A) नाटक
(B) आत्भ-कथा
(C) उऩन्मास
(D) ये खाचचत्र
2. 'िैशारी भें िसन्त' ककसका नाटक है ?
(A) उऩेन्रनाथ अश्क
(B) जमशॊकय प्रसाद
(C) सेठ गोविन्द दास
(D) रक्ष्भी नायामण लभश्र
3. जमशॊकय प्रसाद ककस मुग के रेखक हैं ?
(A) बायतेन्द-ु मग
ु
(B) शुक्र-मुग
(C) द्वििेदी-मग
ु
(D) शुक्रोत्तय-मुग
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4. ऐनतहालसक उऩन्मासकाय हैं
(A) भुॊशी प्रेभचन्द
(B) जैनेन्र
(C) िन्ृ दािनरार िभाा
(D) पणीश्िय नाथ ये णु
5. शक्
ु रोत्तय - मग
ु की सभमािचध है
(A) सन ् 1918 से 1936 तक
(B) सन ् 1843 से 1900 तक
(C) सन ् 1900 से 1918 तक
(D) इनभें से कोई नहीॊ
6. 'आश्रमदाताओॊ की प्रशॊसा' ननम्न भें से ककस कार / िाद की विशेषता यही है ?
(A) यीनतकार की
(B) छामािाद की
(C) बल्क्तकार की
(D) प्रगनतिाद की
7. सुलभत्रानन्दन ऩॊत ककस मुग के प्रभुख कवि हैं ?
(A) प्रमोगिाद
(B) प्रगनतिाद
(C) छामािाद
(D) नई कविता
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8. खडी फोरी के प्रथभ भहाकाव्म के यचनमता हैं
(A) जमशॊकय प्रसाद
(B) भैचथरीशयण गुप्त
(C) याभधायी लसॊह 'ददनकय'
(D) अमोध्मा लसॊह उऩाध्माम 'हरयऔध'
9. "याभ की शल्क्त ऩज
ू ा" ककसकी यचना है ?
(A) भैचथरीशयण गुप्त
(B) सम
ू क
ा ान्त त्रत्रऩाठी 'ननयारा'
(C) भहादे िी िभाा
(D) सुलभत्रानॊदन ऩॊत
10. "आॉगन के ऩाय द्िाय" ककसकी यचना है ?
(A) चगरयजाकुभाय भाथुय
(B) बिानीप्रसाद लभश्र
(C) सल्चचदानॊद हीयानॊद िात््मामन 'अऻेम '
(D) धभािीय बायती
11. 'फज्रऩाखण' भें सभास है
(A) फहुव्रीदह
(B) द्िन्द्ि
(C) कभाधायम
(D) तत्ऩुरुष
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12. 'द्िन्द्ि' सभास की ऩरयबाषा है
(A) ल्जसभें दोनों ऩद प्रधान हों
(B) ल्जसभें उत्तय ऩद प्रधान हो
(C) ल्जसभें प्रथभ ऩद प्रधान हो
(D) जहाॉ दोनों से हटकय तीसया अथा ननकारा जाम
13. 'फादर' का ऩमााम है
(A) िारयद
(B) जरचध
(C) िारयज
(D) नीयज
14. 'कृतऻ' का विरोभ है
(A) कृतघ्न
(B) ऩाऩी
(C) उऩकृत
(D) दष्ु ट
15. "चौयाहा" का तत्सभ है
(A) चतुऩद
ा
(B) चतुष्ऩथ
(C) नतयाहा
(D) इनभें से कोई नहीॊ
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16. 'कणा' का तद्बि है
(A) कान
(B) कऩाट
(C) नाक
(D) इनभें से कोई नहीॊ
17. जो ईश्िय भें विश्िास न यखता हो उसे कहते हैं
(A) आल््तक
(B) नाल््तक
(C) िाचार
(D) दॊ बी
18. 'सुयेश' का सॊचध-विचछे द है
(A) सुय + ईश
(B) सुया + ईश
(C) सुय + एष
(D) इनभें से कोई नहीॊ
19. 'ऩमाॊलस' शब्द भें विबल्क्त औय िचन हैं
(A) प्रथभ एिभ ् द्वितीमा विबल्क्त, फहुिचन
(B) तत
ृ ीमा विबल्क्त, एकिचन
(C) ऩॊचभी विबल्क्त, फहुिचन
(D) इनभें से कोई नहीॊ
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20. "ऩठे मभ ्" भें िचन औय ऩुरुष है
(A) उत्तभ ऩुरुष, एकिचन
(B) भध्मभ ऩुरुष, फहुिचन
(C) अन्म ऩरु
ु ष, द्वििचन
(D) इनभें से कोई नहीॊ
खण्ड - फ
( िणानात्भक प्रश्न )
1. ददमे गमे गद्माॊश को ऩढ़कय उसके नीचे ददमे गमे प्रश्नों के उत्तय दील्जए :
कुसॊग का ज्िय सफसे बमानक होता है । मह केिर नीनत औय सदिवृ त्त का ही नाश नहीॊ
कयता, फल्ल्क फुद्चध का बी ऺम कयता है । ककसी मुिा ऩुरुष की सॊगनत मदद फुयी होगी
तो उसके ऩैयों भें फॉधी चक्की के सभान होगी , जो उसे ददन-ददन अिननत के गड्ढे भें
चगयाती जामेगी औय मदद अचछी होगी तो सहाया दे ने िारी सुदृढ़ फाहु के सभान होगी ,
जो उसे ननयन्तय उन्ननत की ओय उठाती जामेगी ।
(i) उऩमक्
ुा त गद्माॊश का सन्दबा लरखखए ।
(ii) गद्माॊश के ये खाङ्ककत अॊश की व्माख्मा कील्जए ।
(iii) कुसॊग का क्मा प्रबाि होता है ?
अथिा
जहाॉ-जहाॉ हभाये नैनतक लसद्धान्तों का िणान आमा है , अदहॊसा को ही उनभें भुख्म ्थान
ददमा गमा है । अदहॊसा का दस
ू या नाभ मा दस
ू या रूऩ त्माग है औय दहॊसा का दस
ू या रूऩ मा
नाभ ्िाथा है जो प्राम् बोग के रूऩ भें हभाये साभने आता है । ऩय हभायी सभ्मता ने
बोग बी त्माग से ही ननकारा है औय बोग बी त्माग भें ही ऩामा है । श्रनु त कहती है -
"तेन त्मक्तेन बञ्
ु जीथा्"। इसी के द्िाया हभ व्मल्क्त व्मल्क्त के फीच का वियोध , व्मल्क्त
औय सभाज के फीच का वियोध , सभाज औय सभाज के फीच का वियोध , दे श औय दे श के
फीच का वियोध लभटाना चाहते हैं । हभायी सायी नैनतक चेतना इसी तत्त्ि से ओत-प्रोत है ।
(i) उऩमक्
ुा त गद्माॊश का सन्दबा लरखखए ।
(ii) ये खाङ्ककत अॊश की व्माख्मा कील्जए ।
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(iii) हभाये नैनतक लसद्धान्तों भें ककस चीज को प्रभुख ्थान ददमा गमा है ? इसका
दस
ू या रूऩ क्मा है ?
2. ददमे गमे ऩद्माॊश ऩय आधारयत प्रश्नों के उत्तय दील्जए :
सनु न सन्
ु दय फैन सध
ु ायस साने , समानी हैं जानकी जानी बरी ।
नतयछे करय नैन दै सैन नतन्हें सभुझाइ कछू भुसकाइ चरी ।।
तुरसी तेदह औसय सोहैं सिै अिरोकनत रोचन राहु अरी ।
अनयु ाग-तडाग भें भानु उदै विगसी भनो भॊजर
ु कॊज करी ।।
(i) उऩमक्
ुा त ऩद्माॊश का सन्दबा लरखखए ।
(ii) ये खाङ्ककत अॊश की व्माख्मा कील्जए ।
(iii) उऩमक्
ुा त कविता भें कौन-सा अरङ्काय एिभ ् छन्द है ?
अथिा
चीॊटी को दे खा ?
िह सयर, वियर कारी ये खा,
तभ के तागे-सी जो दहर-डुर
चरती रघु ऩद ऩर-ऩर लभर-जर
ु ,
िह है वऩऩीलरका ऩाॉनत ।
दे खो ना, ककस बाॉनत
काभ कयती िह सतत !
कन-कन कनके चुनती अवियत ।
(i) उऩमक्
ुा त ऩॊल्क्तमों का सन्दबा लरखखए ।
(ii) ये खाङ्ककत अॊश की व्माख्मा कील्जए ।
(iii) उऩमक्
ुा त कविता से क्मा लशऺा प्राप्त होती है ?
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3. (क) ददमे गमे सॊ्कृत गद्माॊशों भें से ककसी एक का सन्दबा सदहत दहन्दी भें अनुिाद
कील्जए :
एषा नगयी बायतीम सॊ्कृते् , सॊ्कृत बाषामाश्च केन्र - ्थरभ ् अल््त । इत् एि
सॊ्कृत िाङ्भम्म, सॊ्कृतेश्च आरोक् सिात्र प्रसत
ृ ् । भग
ु र मि
ु याज् , दाया लशकोह्
अत्रागत्म बायतीम-दशान-शा्त्राणाभ ् अध्ममनभ ् अकयोत । स् तेषाभ ् ऻानेन तथा
प्रबावित् अबित ्, मत ् तेन उऩननषदाभ ् अनुिाद् ऩायसी बाषामाभ ् कारयत् ।
अथिा
विश्ि्म स्रष्टा ईश्िय् एक एि इनत बायतीम सॊ्कृते् भूरभ ् । विलबन्न भतािरल्म्फन्
विविधै् नागालब् एकभ ् एि ईश्ियभ ् बजन्ते । अल््न् इन्र् , कृष्ण्, कयीभ:, यहीभ्
ल्जन्, खि्त्, अल्राह् इत्मादीनन नाभानन एक्म एि ऩयभात्भन् सल्न्त । तभ ् एि
ईश्ियभ ् जना् गुरु् इत्मवऩ भन्मन्ते । अत् सिेषाभ ् भतानाभ ् सभबाि् सम्भानश्च
अ्भाकभ ् सॊ्कृते् सॊदेश् ।
(ख) ददमे गमे सॊ्कृत श्रोकों भें से ककसी एक का सॊदबासदहत दहन्दी भें अनुिाद
कील्जए:
ककॊल््ित ् प्रिसतो लभत्रभ ,् ककॊल््ित ् लभत्रभ ् गहृ े सत्
आतुय्म च ककभ ् लभत्रभ ,् ककॊल््ित ् लभत्रभ ् भरयष्मत्
अथिा
भॊगरभ ् भयणभ ् मत्र विबूनतमान्न बूषणभ
कौऩीनभ ् मत्र कौशेमभ ् काशी के नोऩभामते ।
4. (क) ननम्नलरखखत रेखकों भें से ककसी एक रेखक का जीिन-ऩरयचम दे ते हुए उसकी
एक प्रभुख यचना का उल्रेख कील्जए :
(i) याभचन्र शुक्र
(ii) जमशॊकय प्रसाद
(iii) डॉ० याजेन्र प्रसाद ।
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(ख) ननम्नलरखखत कविमों भें से ककसी एक का जीिन ऩरयचम दे ते हुए उसकी एक प्रभुख
यचना का उल्रेख कील्जए :
(i) सयू दास
(ii) सुलभत्रानन्दन ऩन्त
(iii) याभ नये श त्रत्रऩाठी ।
5. ददए गमे सॊ्कृत प्रश्नों भें से ककन्हीॊ दो प्रश्नों का सॊ्कृत भें उत्तय दील्जए :
(i) िायाणसी नगयी कुत्र ल््थता अल््त ?
(ii) विश्ि्म िष्टा क् अल््त ?
(iii) वऩता क्भात ् उचचतय् अल््त ?
6. (क) 'हा्म' अथिा 'करुण यस की ऩरयबाषा लरखते हुए उसका एक उदाहयण दील्जए ।
(ख) 'रूऩक' अथिा 'उत्प्रेऺा' अरङ्काय की ऩरयबाषा लरखकय उसका एक उदाहयण
लरखखए।
(ग) 'दोहा' अथिा 'चौऩाई' छन्द के रऺण लरखकय उसका एक उदाहयण दील्जए ।
7. ननम्नलरखखत रोकोल्क्तमों एिभ ् भुहाियों भें से ककसी एक का अथा फताते हुए उसको
अऩने िाक्म भें प्रमोग कील्जए ।
(i) हाथ कॊगन को आयसी क्मा ?
(ii) उल्टा चोय कोतिार को डाॉटै ।
(iii) अधजर गगयी छरकत जाम ।
8. ननम्नलरखखत भें से ककसी एक विषम ऩय ननफॊध लरखखए :
(i) विऻान : ियदान मा अलबशाऩ
(ii) प्रदष
ू ण सभ्मा: कायण औय ननिायण
(iii) अनुशासन का भहत्त्ि
(iv) भेया वप्रम कवि ।