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क ा- 11
वा ण य वग
यवसाय अ ययन
100 अंक
भाग-1. यवसाय के आधार- भारांश
इकाई-1
(i) यवसाय क कृ त और उ दे य 18
(ii) यवसा यक संगठन क कृ त
(i) नजी, सावज नक एवं भूम डल य उप म 16
(i) यवसाय क उभरती प ध तयाँ 16
भाग-2. यवासा यक संगठन, व एवं यापार-
इकाई-4
(i) कंपनी नमाण 16
(ii) यावसा यक व के ोत
इकाई-5
(i) लघु यापार 16
(ii) आंत रक यापार
(i) अंतरा य यापार-1 18
योग 100
भाग-1- यवसाय का आधार-
इकाई-1 18 अंक
(i) यवसाय क कृ त एवं उ दे यः-
यवसाय क अवधारणा, यवसा यक याओं क वशेषताएं – यवसाय
पेशा एवं रोजगार म अ तर, यवसा यक याओं का वग करण – उ योग,
वा ण य, यापार एवं यापार क सहायक याएं, यवसाय के उ दे य।
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(ii) यवसा यक संगठन के कृ तः-
एकल वा म व – आशय, ल ण, गुण एवं सीमाएं।
संयु त ह द ु प रवार यवसाय - आशय, ल ण, गुण एवं सीमाएं।
साझेदार - आशय, ल ण, गुण, सीमाएं, कार, संलेख, पंजीकरण तथा
साझेदार के कार।
सहकार स म तयाँ - आशय, ल ण एवं कार।
संयु त पूंजी कंपनी - आशय, ल ण, गुण तथा सीमाएं, सावज नक एवं
नजी कंपनी।
इकाई-2 16 अंक
(i) नजी, सावज नक एवं भूम डल य उप मः-
नजी एवं सावज नक े - सावज नक े के उ यम के व प –
वभागीय उप म, वैधा नक नगम, सरकार कंप नयाँ।
भम
ू डल य उप म – वशेषताएँ, संयु त उप म।
इकाई-3 16 अंक
(i) यवसाय क उभरती प ध तयाँ:-
ई- यवसाय, ई- यवसाय बनाम ई-कॉमस, ई- यवसाय का काय े , ई-
यवसाय के लाभ एवं सीमाएँ। ऑनलाइन लेन-दे न। ई- यवसाय जो खम।
बा य ो तकरण (Outsourcing) – संक पना/अवधारणा, काय े एवं
आव यकता।
भाग-2- यवसा यक संगठन व एवं यापार –
इकाई-4 16 अंक
(i) कंपनी नमाण:-
कंपनी का वतन, समामेलन एवं यवसाय का ार भ, पूंजी अ भदान,
मख
ु लेख – सीमा नयम एवं अंतः नयम।
(ii) यवसा यक व के ोतः-
यवसा यक व का अथ, कृ त, एवं मह व। कोष के ोत का वग करण।
व श ट व ीय सं थाएं, अ तरा य व ीयन।
इकाई-5 16 अंक
(i) लघु यवसाय:-
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लघु यवसाय का अथ तथा कृ त, भारत म लघु यवसाय क भू मका,
सम याएँ। सरकार वारा ा त लघु यवसा यक सहायताएँ (सं थागत
सहयोग)।
(ii) आंत रक यापारः-
प रचय, थोक यापार एवं थोक व े ताओं क सेवाएँ। फुटकर यापार,
फुटकर यापा रय क सेवाएँ।
फुटकर यापार के कार – मणशील फुटकर व े ता एवं थायी दक
ु ानदार
( वभागीय भंडार, ंख
ृ लाब ध भंडार, डाक आदे श गहृ , उपभो ता सहकार
भंडार, सुपर बाजार, व य मशीन)। इं डयन चबर ऑफ कॉमस ए ड
इ ड का आंत रक यापार के संवधन म भू मका।
इकाई-6 18 अंक
(i) अ तरा य यापार-1:-
अ तरा य यापार का अथ, घरे लू यवसाय एवं अ तरा य यवसाय म
अ तर, अ तरा य यवसाय के काम।
आयात एवं नयात यापार – आशय, लाभ, सीमाएं।
संयु त उप म – लाभ एवं हा नयाँ।
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भाग-1. यवसाय के आधार-
(ii) यवसा यक सेवाएँ –
सेवाओं क कृ त एवं कार, ब कंग – आशय, बक के कार, वा ण यक
बक के काय, ई-ब कंग, बीमा – आधारभत
ू स धा त काय एवं कार।
स ेषण सेवाएँ – डाक सेवा, टे ल कॉम सेवा, प रवहन। भंडारण एवं भंडार
गह
ृ के कार।
(ii) यवसाय का सामािजक उ रदा य व एवं यवसा यक नै तकताः-
सामािजक उ रदा य व – अवधारणा, आव यकता, प एवं वप म तक।
सामािजक उ रदा य व के कार। दष
ू ण के कार। पयावरण संर ण म
यवसाय क भू मका।
यवसा यक नै तकता – अवधारणा एवं त व।
भाग-2. यवासा यक संगठन, व एवं यापार-
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(ii) अ तरा य यापार-2:-
आयात- नयात या, आयात- नयात म यु त होने वाले मुख लेख। व व बक एवं
व व बक के काय तथा इसक सहयोगी सं थाएँ।