MP CPCT 22 Oct 2021 Question Paper Hindi Typing Shift 2 – Text
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Computer Proficiency Certification Test
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Question Paper Name : REMINGTON GAIL 22nd October 2021 Shift 2
Subject Name : Remington GAIL
Creation Date : 2021-10-22 18:33:56
Duration : 25
Calculator : None
Magnifying Glass Required? : No
Ruler Required? : No
Eraser Required? : No
Scratch Pad Required? : No
Rough Sketch/Notepad Required? : No
Protractor Required? : No
Show Watermark on Console? : No
Highlighter : No
Auto Save on Console? ( SA type of questions will be always auto saved ) : Yes
Mock
Group Number : 1
Group Id : 2549892950
Group Maximum Duration : 10
Group Minimum Duration : 10
Show Attended Group? : No
Edit Attended Group? : No
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Break time : 1
Mandatory Break time : Yes
Group Marks : 0
Is this Group for Examiner? : No
Hindi Mock
Section Id : 2549894590
Section Number : 1
Section type : Typing Test
Mandatory or Optional : Mandatory
Number of Questions : 1
Number of Questions to be attempted : 1
Section Marks : 0
Enable Mark as Answered Mark for Review and Clear Response : Yes
Sub-Section Number : 1
Sub-Section Id : 2549894631
Question Shuffling Allowed : No
Question Number : 1 Question Id : 25498941844 Question Type : TYPING TEST
एक बार की बात है, अकबर और बीरबल शिकार पर जा रहे थे। अभी कु छ समय हुआ था कि उन्हें एक हिरण दिखा। जल्दबाजी में तीर निकलते हुए
अकबर अपने हाथ पर घाव लगा बैठा। अब हालात कु छ ऐसे थे कि अकबर बहुत दर्द में था और गुस्से में भी।
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Actual
Group Number : 2
Group Id : 2549892951
Group Maximum Duration : 15
Group Minimum Duration : 15
Show Attended Group? : No
Edit Attended Group? : No
Break time : 0
Group Marks : 0
Is this Group for Examiner? : No
Hindi Typing Test
Section Id : 2549894591
Section Number : 1
Section type : Typing Test
Mandatory or Optional : Mandatory
Number of Questions : 1
Number of Questions to be attempted : 1
Section Marks : 0
Enable Mark as Answered Mark for Review and Clear Response : Yes
Sub-Section Number : 1
Sub-Section Id : 2549894632
Question Shuffling Allowed : No
Question Number : 2 Question Id : 25498941845 Question Type : TYPING TEST
क्रोध एक भयंकर शत्रु है। क्रोध में आकर मनुष्य अपना सर्वनाश कर बैठता है। जिस मनुष्य पर क्रोध का भूत सवार हो जाता है उसका विवेक ज्ञान नष्ट
हो जाता है। वह सुपथ को त्याग कु पथ को ग्रहण करता है और अन्त में नाश को प्राप्त होता है। क्रोधी व्यक्ति अन्धे और बहरे की तरह चेतन रहते हुए
भी अचेतन के समान कोई भी कर्त्तव्य स्थिर करने में असमर्थ होता है। क्रोधी मनुष्य को उचित अनुचित का ध्यान नहीं रहता। वह सदा डांवाडोल रहता
है, कभीकभी तो वह पागल होकर मर तक जाता है। क्रोधी मनुष्य शारीरिक, मानसिक, नैतिक या अध्यात्मिक किसी भी प्रकार की उन्नति नहीं कर
सकता। क्रोध दुर्भाग्य की तरह जिस पर सवार होता है उसका विनाश करके मानता है। यह लकवे की तरह उन्त में अंगों को शक्तिहीन करके देता है।
क्रोधावेश में प्रथम तो मनुष्य नशे की तरह उत्तेजित होता है और अपने अन्दर कई गुनी कार्यशक्ति अनुभव करने लगता है, किन्तु अन्त में क्रोध का
है है है
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नशा उतरते ही वह निर्बल हो जाता है। शराबी की तरह वह दुबलापतला हो जाता है, मस्तिष्क एवं विचार शक्ति क्षीण हो जाती है। यह क्षणभर का
आवेग दीर्घकालीन पश्चाताप का कारण बन जाता है। बाइबिल के मनुष्य क्रोधावस्था में शयन करना मानो वह विषधर सर्प को अपनी बगल में दबाकर
सोना है। सचमुच क्रोध विषधर से किसी प्रकार कम नहीं है। विषधर तो शरीरान्त करता है किन्तु क्रोध धीरे धीरे कष्ट पहुंचाता हुआ देह एवं आत्मा दोनों
का पतन करता है। इसका कष्ट चिरकालीन होता है। अत: यह सर्प से भी भयंकर शत्रु है। के लूलैंड के अरोली ने इस संबंध में कई तरह के परीक्षण
किये हैं। उनका कथन है कि क्रोध के कारण खून में शक्कर की अधिकता हो जाने से कु छ वह तेजाब पैदा हो जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए अत्यन्त
हानिकारक और घातक हैं। यही वजह है कि उन्नतिशील पाश्चात्य देशों में शारीरिक दण्ड की घृणित प्रथा स्कू लों से उठती जा रही है। किन्तु खेद है कि
हमारे देश में अब भी इस घातक दण्ड प्रणाली का लंबे समय से बोलबाला है जिसके फलस्वरूप बालक अपना विकास पूर्णरूपेण नहीं कर सकते,
आवश्यकता है कि मातापिता और शिक्षक इन नवीन गवेषणाओं से फायदा उठाकर बालकों को डराना या उन पर हाथ उठाना अक्षम्य अपराध
समझें। क्रोध से बचने का स्थायी और वास्तविक उपाय तो यही है कि हम क्रोध के कारण को मालून करने की कोशिश करें । क्रोध का आरम्भ या ता
मूर्खता से या दुर्बलता से अथवा मानव स्वभाव से अनभिज्ञता के कारण होता है। अब कोई व्यक्ति हमारा कहना नहीं मानता या हमारी इच्छा के
विपरीत काम करता है तो हम आपने से बाहर हो जाते हैं और उस पर बेतहाशा बरस उठते हैं। हम यह समझने की तकलीफ ही नहीं करते कि हमें
दू सरों को अपनी इच्छानुसार चलाने का क्या अधिकार है। हम अपने रोजमर्रा के अनुभव से भली प्रकार जान सकते हैं कि प्रत्येक मनुष्य की वृत्ति दू सरे
मनुष्य से भिन्न होती है, मनोविज्ञान की इस अटल अलवधारणा को समझ लें तो हम बहुत हद तक क्रोध के चंगुल में से बच सकते हैं और आनन्द से
जीवन व्यतीत कर सकते हैं।