Page 1
प्रतिदर्श प्रश्न पत्र 2020- 21 तिषय- त िंदी ‘अ’ (कोड-002)
कक्षा- 10 अिंक योजना
तनर्ाशरिि समय- 3 घिंटे अतर्किम अिंक – 80
सामान्यतनदेर्:-
अंक योजना का उद्देश्य मल ू यांकन को अधिकाधिक वस्तुधनष्ठ बनाना है|
खंड-अ में धिए गए वस्तुपरक प्रश्नों के उत्तरों का मल ू यांकन धनधििष्ट अंक योजना के आिार पर ही धकया जाए|
खंड-ब में वर्िनात्मक प्रश्नों के अंक योजना में धिए गए उत्तर-धबंिु अंधतम नहीं हैं| ये सझ ु ावात्मक एवं सांकेधतक हैं|
यधि परीक्षार्थी इन सांकेधतक धबंिओ ु ं से धिन्न, धकंतु उपयक्त
ु उत्तर िे तो उसे अंक धिए जाएँ|
मल ू यांकन कायि धनजी व्याख्या के अनसु ार नहीं, बधलक अंक-योजना में धनधििष्ट धनिेशानसु ार ही धकया जाए|
खिंड – अ िस्िुपिक- प्रश्नों के उत्ति
प्रश्न क्रम सख्िं या उत्ति अिंक तिभाजन
प्रश्न 1. प्रश्न सख्िं या 1 में तदए गए गद्ािंर्-I पि आर्ारिि प्रश्नों के उत्ति:- 5x1=5
(1) IV. पररवार का आकार बढी हुई समृधि के सार्थ घटता है इस तथ्य को समझने के धिये िो वैकधलपक धसिांत 1
प्रस्तुत करना।
(2) IV. इसकी िधवष्यवार्ी पधिमी िेशों में औद्योधगक क्ांधत के समय जीधवत कुछ िोगों द्वारा की गई र्थी। । 1
(3) I. यह पहिे अनच्ु छे ि में वधर्ित घटना के धिए एक वैकधलपक स्पष्टीकरर् प्रस्तुत करता है। 1
(4) IV. औद्योधगक अर्थिव्यवस्र्थाओ ं में मजिरू ों की बढती मांग। 1
(5) IV. एक ऐसा जीव जो मैिानों और झीिों में कई प्राधर्यों का धशकार बनता है। 1
अथवा
प्रश्न सख्िं या 1 में तदए गए गद्ािंर्-II पि आर्ारिि प्रश्नों के उत्ति:- 5x1=5
(1) II. धवज्ञान धशक्षा को िागू करने के प्रयासों को धवफि धकया है। 1
(2) IV. नकरात्मक 1
(3) I.1950-60 1
(4) III. प्रत्यक्ष अनिु व की कमी 1
(5) III. क्या छात्र अपने ज्ञान को ताधकि क रूप से िागू कर सकते हैं? 1
प्रश्न 2. प्रश्न सख्िं या 2 में तदए गए पद्ािंर्-I पि आर्ारिि प्रश्नों के उत्ति:- 5x1=5
(1) IV. गाँव के बच्चों की ियनीय िशा का वर्िन। 1
(2) II. गाँव में धशशु जन्म हेतु पयािप्त िाइयाँ नहीं हैं। 1
(3) I. कुपोधित, धखन्न तर्था अधशधक्षत हैं। 1
(4) II. वे बच्चों की िशा की ओर िोगों का ध्यान आकधिित करना चाहते हैं। 1
(5) III. घास तर्था पौिों की तरह पैिा हो रहे हैं तर्था मर रहे हैं। 1
अथवा
प्रश्न सख्िं या 2 में तदए गए पद्ािंर्-II पि आर्ारिि प्रश्नों के उत्ति:- 5x1=5
(1) II. हर हाि में कायि करने की प्रेरर्ा। 1
(2) III. जीवन संसािनों के धिए यर्थार्थि में रहकर प्रयत्न करना होगा। 1
(3) I. यधि तुम जीवन की कष्टतम पररधस्र्थधत झेि िोगे तो जीवन तुम्हारे बधििान की प्रशसं ा करे गा। 1
(4) III. अपने हाि की परवाह ना करते हुए सकारात्मक िाव से कायि करते रहना। 1
(5) III. वे उसे िक्ष्य प्राधप्त के मागि से धवचधित कर सकते हैं। 1
प्रश्न 3. प्रश्न सख्िं या 21 से 25 में से तकन् ीं 4 प्रश्नों के उत्ति:- 1+1+1+1=4
Page 2
(1) III. संयक्तु वाक्य| 1
(2) II. जो धवद्यार्थी पररश्रमी होता है, वह अवश्य सफि होता है| 1
(3) I. प्रयश बाज़ार गया और वहाँ से सेब िाया| 1
(4) IV. धवशेिर् आधश्रत उपवाक्य| 1
(5) III. प्रातःकाि होते ही सरू ज की धकरर्ें चमक उठीं| 1
प्रश्न 4. प्रश्न सख्िं या 26 से 30 में से तकन् ीं 4 प्रश्नों के उत्ति:- 1+1+1+1=4
(1) III. कतृि वाच्य| 1
(2) IV. हमसे इस खि ु े मैिान में िौड़ा जा सकता है| 1
(3) IV. समु न से जलिी नहीं उठा जाता| 1
(4) IV. नेताजी ने िेश के धिए अपना सब कुछ त्याग धिया| 1
(5) III. हमें िोखा धिया जा रहा है| 1
प्रश्न 5. प्रश्न सख्िं या 31 से 35 में से तकन् ीं 4 प्रश्नों के उत्ति:- 1+1+1+1=4
(1) III. व्यतििाचक सज्ञिं ा, एकिचन, पुत्लिंग, किाश कािक| 1
(2) IV. अव्यय,कालिाचक तक्रया तिर्ेषण, ‘घूमने जािा ै’तक्रया की तिर्ेषिा| 1
(3) II. अकमशक तक्रया, ब ुिचन, पुत्लिंग, ििशमान काल, किशत िाच्य| | 1
(4) II. गुणिाचक तिर्ेषण, ब ुिचन, पुत्लगिं , ‘फूल तिर्ेष्य का तिर्ेषण| 1
(5) III. मध्यम परुु षिाचक सिशनाम, स्त्रीतलगिं /पतु ्लगिं , एकिचन, कमश कािक| 1
प्रश्न 6. प्रश्न सख्िं या 36 से 40 में से तकन् ीं 4 प्रश्नों के उत्ति दीतजए- 1+1+1+1=4
(1) III. रौद्र रस | 1
(2) I. शांत रस| 1
(3) I. वीर रस| 1
(4) IV. श्रृंगार रस| 1
(5) III. जगु प्ु सा| 1
प्रश्न 7. गद्ािंर् के प्रश्नों के उत्ति:- 4x1=4
(1) III. वे सच्चे सािओ ु ं जैसा ही उत्तम आचार-धवचार रखते र्थे| 1
(2) I. जीवन के धसिांतों और आिशों का गहराई से अपने आचरर् में पािन करना| 1
(3) II. वे कबीर की धवचारिारा से प्रिाधवत र्थे| 1
(4) IV. कबीरपर्थं ी मठ में| 1
(5) III. कबीर|
प्रश्न 8. प्रश्नों के उत्ति स ी तिक्प चनु कि तलतखए 2x1=2
(1) III. चश्मे बेचने वािा| 1
(2) I. उन्होंने प्रामाधर्क अंग्रेज़ी-धहन्िी शब्िकोश तैयार धकया| 1
प्रश्न 9. पद्ािंर् के प्रश्नों के उत्ति:- 5x1=5
(1) III. श्रीकृ ष्र् के प्रधत अपने एकधनष्ठ प्रेम के कारर्| 1
(2) I. श्रीकृ ष्र् के धिए| 1
(3) II. उिव के योग ज्ञान को| 1
(4) IV. कड़वी ककड़ी के समान| 1
(5) II. धजनका मन धस्र्थर नहीं है| 1
प्रश्न 10. प्रश्नों के उत्ति स ी तिक्प चुनकि तलतखए- 2x1=2
(1) II. िक्ष्मर् को कम आयु का बािक जानकर| 1
(2) IV. वस्त्रों-आििू र्ों को| 1
Page 3
खिंड 'ब' िणशनात्मक प्रश्नों के सभ िं ातिि उत्ति सक िं े ि
प्रश्न क्रम सख्िं या उत्ति अिंक तिभाजन
प्रश्न 11. प्रश्नों के उत्ति लगभग 25-30 र्ब्दों में 2x4=8
(i) हाििार साहब की कलपना र्थी धक कै प्टन प्रिावशािी व्यधक्तत्व का स्वामी होगा पर उनकी कलपना के धवपरीत 2
कै प्टन अत्यंत बढू ा, कमज़ोर और िंगड़ा आिमी र्था| ऐसा धनििन, बढू ा तर्था कमज़ोर-सा व्यधक्त िी िेशिधक्त
से ओत-प्रोत हो सकता है यह िेखकर हाििार साहब अवाक् रह गए|
(ii) िगत जी का मानना र्था धक आत्मा परमात्मा का अंश है| वह सिा परमात्मा से धमिने के धिए तड़पती है, जब 2
व्यधक्त मरता है, तो आत्मा परमात्मा से धमि जाती है| उसकी तड़पन समाप्त हो जाती है, इसधिए िगत जी
अपनी पतोहू को उत्सव मनाने की बात कह रहे र्थे|
(iii) िेखक कुछ समय पहिे नवाब साहब द्वारा रखे गए खीरे खाने के आमंत्रर् को ठुकरा चक ु े र्थे, अतः अब 2
आत्मसम्मान धनिाना आवश्यक समझने के कारर् उन्होंने खीरा खाने से इक ं ार कर धिया|
(iv) िेखक ने फ़ािर काधमि बलु के की उपधस्र्थधत को िेविार की छाया के सदृश्य इसधिए कहा है क्योंधक फ़ािर का 2
धवशाि व्यधक्तत्व धमिने वािों को शांधत, सक ु ू न, आशीवािि,प्यार एवं अपनत्व से िर िेता र्था|
प्रश्न 12. प्रश्नों के उत्ति लगभग 60-70 र्ब्दों में 2x3=6
(i) बाििों के माध्यम से यवु ाओ ं को संबोिन | 2
सामाधजक परंपराओ ं में पररवतिन की अपेक्षा |
नारी सि ु ि गर्ु ों और संस्कारों को अपनाते हुए कमजोररयों से मक्त ु होना |
सामाधजक बििाव के धिए व्यधक्तगत सोच में बििाव िाना आवश्यक है |
(ii) फागनु मास में चारों ओर प्राकृ धतक सौंियि और उलिास धिखाई पड़ता है| सरसों के पीिे फूिों की चािर धबछ 2
जाती है| िताएँ और डाधियाँ रंग-धबरंगे फूिों से सज जाती हैं| पयािवरर् स्वयं प्रफुधलित हो उठता है|
(iii) सिा में परशरु ाम और िक्ष्मर् के मध्य बहुत तीखी नोक-झोंक हो गई| परशरु ाम तो स्विाव से क्ोिी र्थे ही| 2
िक्ष्मर् ने बािक होने पर िी अपने व्यंग्य-वचनों से उनके क्ोि को िड़का धिया| िक्ष्मर् द्वारा बहुत तीखे
कटाक्ष करने पर सिा में एकधत्रत िोग ‘हाय-हाय’ कहने िगे|
प्रश्न 13. 3 प्रश्नों में से तकन् ीं 2 प्रश्नों के उत्ति लगभग 40-50 र्ब्दों में 3+3-=6
(i) ‘माता का अँचि’ पाठ में िोिानार्थ और उसके साधर्थयों के खेि सामधू हक रूप से धमि जि ु कर खेिे जाते र्थे| 3
उनके खेिने की सामग्री बच्चों द्वारा स्वयं धनधमित की जाती र्थी| घर की अनपु योगी वस्तु ही उनके खेि की
सामग्री बन जाती र्थी जबधक आज प्िाधस्टक के धखिौने और इिैक्राधनक धखिौनों का प्रचिन है| खेि-
सामग्री में आए अंतर ने बच्चों के नैधतक मलू यों को िी प्रिाधवत धकया है| वतिमान समय में बच्चों द्वारा जो खेि
खेिे जाते हैं, उन्होंने बच्चों को एकाकी बना धिया है| उनमें सहयोग, सहिाधगता, सामाधजकता जैसे गर्ु िीरे -
िीरे समाप्त होते जा रहे हैं|
(ii) सरकारी तंत्र में जॉजि पचं म की नाक िगाने को िेकर जो धचतं ा और बिहवासी धिखाई िेती है, वह उनकी 3
गि ु ाम मानधसकता को िशािती है| उनके मन में आज िी अग्रं ेजों की गि ु ामी और स्वामीिधक्त बसी हुई है| उन्हें
अग्रं ेजों के मान-सम्मान की धचतं ा अपने मान-सम्मान से अधिक है| इस तरह सरकारी तंत्र अपनी मानधसक
गि ु ामी और चाटुकाररता को िशािता है|
(iii) ‘कटाओ’ पर धकसी िक ु ान का न होना उसके धिए वरिान है| यधि इस स्र्थान पर िक ु ानें होती तो व्यापाररक 3
गधतधवधियाँ बढ जाती, वाहनों का आवागमन बढता धजससे प्रििू र् तर्था तापमान बढ जाता| िारत के अन्य
प्राकृ धतक स्र्थानों को वरिान बनाने में यवु ा नागररक की िधू मका- वहाँ स्वच्छता का धवशेि ध्यान रखें,
साविजधनक वाहनों का प्रयोग करें ,वृक्षों को न काटें, नधियों के जि को िधू ित न करें ,प्राकृ धतक संसािनों का
िरुु पयोग न करें , िोगों कोपयािवरर् के धविय में जागरूक करें |
प्रश्न 14. 3 में से तकसी 1 तिषय पि तदए गए सक िं े ि-तबन्दुओ िं के आर्ाि पि एक अनच्ु छे द (लगभग 80-100 5x1=5
र्ब्द-सीमा)
िधू मका - 1 अंक
धवियवस्तु - 3 अंक
Page 4
िािा - 1 अंक
प्रश्न 15. 5x1=5
2 में से तकसी 1 तिषय पि पत्र
आरंि और अतं की औपचाररकताएँ - 1 अक
ं
धवियवस्तु - 3 अक ं
िािा - 1 अकं
प्रश्न 16. 5x1=5
2 में से तकसी 1 तिषय पि तिज्ञापन (लगभग 25-50 र्ब्द-सीमा)
धवियवस्तु - 2 अंक
प्रस्तुधत - 2 अंक
िािा - 1 अंक
प्रश्न 17. 2 में से तकसी 1 तिषय पि सदिं ेर् लेखन (लगभग 100-120 र्ब्द-सीमा) 5x1=5
रचनात्मक प्रस्तुधत -2
धवियवस्तु -2
िािा -1