Page 1
F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा9
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 5: आ खरी च ान तक
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — गंगा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
84 – 99 16 44 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 54 pages
Page 2
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 9 · हद · गं गा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 5: आ खरी च ान तक
NCERT कक्षा 9 हद क पाठ्यपुस्तक गंगा के गद्य खंड के पाठ 5 आ खरी च ान तक के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह मोहन राकेश (1925–1972)
का यात्रा-वृत्तांत है, जसम लेखक अरब सागर, हद महासागर और बंगाल क खाड़ी के संगम-स्थल कन्याकुमारी म सूयास्त, रात और सूय दय —
तीन को अपनी चेतना से भोगता है। पृष्ठ 84 से 99 तक अभ्यास के सभी शीषक — रचना से संवाद (मेरे उत्तर मेरे तक, मेरी समझ मेरे वचार), वधा
से संवाद (यात्रा का वृत्तांत), वषय से संवाद (यात्रा और खोज, मेरे दे श क धरती, हस्त शल्प कौशल, मलकर चल), सृजन (प्रकृ त क ओर, अनुभव
क साझेदारी, चचा-प रचचा), भाषा से संवाद (व्याकरण क बात — क्रया- वशेषण क पहचान और रेखांकन, आओ नए वाक्य बनाएँ, ग त व धयाँ,
भाषा संगम), झरोखे से और खोजबीन — शीषक-दर-शीषक, प्रश्न-दर-प्रश्न हल कए गए ह। पुस्तक क अधूरी और खाली ता लकाएँ भी यहाँ पूरी
भरकर द गई ह।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
गंगा (कक्षा 9) 84 – 99
खं ड प्रश्न
16 44
माध्यम
हन्द
मेरे उत्तर मेरे तक — पृष्ठ 90 और 91
अभ्यास › रचना से संवाद › मेरे उत्तर मेरे तक
रचना से सं वाद मे रे उत्तर मे रे तक
प्र.1 नम्न ल खत प्रश्न के सट क उत्तर चु नए और यह भी बताइए क आपको ये उत्तर उपयुक्त क्य लगते ह? 1.
लेखक ने सूयास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से दे खा? (क) ववेकानंद च ान से (ख) अरब सागर क ओर के ऊँचे
ट ले से (ग) प मी क्ष तज से (घ) सड हल से
सट क उत्तर — (ख) अरब सागर क ओर के ऊँचे ट ले से।
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: लेखक सूयास्त दे खने के लए पहले सड हल पर ही पहुँचा था, पर वहाँ रुका नह ।
कारण उसने स्वयं बताया है — “सड हल से सामने का पूरा वस्तार तो दखाई दे रहा था, पर अरब सागर क तरफ
एक और ऊँचा ट ला था जो उधर के वस्तार को ओट म लए था। सूयास्त पूरे वस्तार क पृष्ठभू म म दे खा जा सके,
इसके लए म कुछ दे र सड हल पर रुका रहकर आगे उस ट ले क तरफ चल दया।” इसके बाद वह एक के बाद एक
कई ट ले पार करता है और अंत म जस ट ले पर पहुँचकर “खुला वस्तार सामने फैला दखाई दे गया”, उसी पर
बैठकर उसने सूय को पानी म डू बते दे खा — “सूय का गोला पानी क सतह से छू गया… धीरे-धीरे वह पूरा डू ब
गया।” इस लए सूयास्त का मनोहारी दृश्य उसने अरब सागर क ओर के उसी ऊँचे ट ले से दे खा।
Page 1 of 54
Page 3
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) ववेकानंद चट्टान से ग़लत ववेकानंद चट्टान पर लेखक अगली सुबह गया था और वहाँ से उसने सूय दय दे खा —
“सूय दय। हम आठ आदमी ‘ ववेकानंद चट्टान’ पर बैठे थे।” सूयास्त वहाँ से नह दे खा गया।
(ख) अरब सागर क सही ✓ पाठ म कारण और यात्रा दोन स्पष्ट लखे ह — सड हल से आगे बढ़कर, कई ट ले पार करके,
ओर के ऊँचे ट ले से जस ऊँचे ट ले पर पूरा खुला वस्तार मला, वह से।
(ग) प च्छमी क्ष तज से ग़लत प च्छमी क्ष तज वह दशा है जसम सूय डू ब रहा था — “प च्छमी क्ष तज म सूय धीरे-धीरे
नीचे जा रहा था।” वह दे खने का स्थान नह , दे खी जाने वाली चीज़ है।
(घ) सड हल से ग़लत सड हल पर तो लेखक “कुछ दे र रुका रहकर” आगे बढ़ गया, क्य क वहाँ से अरब सागर वाला
वस्तार ओट म था। जो टो लयाँ वह रुक गईं, उन्ह ने अधूरा दृश्य दे खा; लेखक ने पूरा।
प्र.2 2. “म कुछ दे र भूला रहा क म म ही हूँ।” यह कथन लेखक क कस मनः स्थ त को दशाता है? (क) मौन हो
जाना (ख) व स्मत हो जाना (ग) भ्र मत हो जाना (घ) आशं कत होना
सट क उत्तर — (ख) व स्मत हो जाना।
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: यह वाक्य उस क्षण का है जब लेखक तीन समुद्र के संगम पर खड़ा है और तीन ओर
क्ष तज तक केवल पानी है। उसके ठ क पहले क पं क्त है — “म दे ख रहा था और अपनी पूरी चेतना से महसूस कर
रहा था — श क्त का वस्तार, वस्तार क श क्त।” और आगे — “तीन ओर के क्ष तज को आँख म समेटता म
कुछ दे र भूला रहा क म म हूँ, एक जी वत व्य क्त, दूर से आया यात्री, एक दशक। उस दृश्य के बीच म जैसे दृश्य का
एक हस्सा बनकर खड़ा रहा — बड़ी-बड़ी चट्टान के बीच एक छोट -सी चट्टान।” यह प्रकृ त क भव्यता के आगे
वस्मय क अवस्था है, जसम दे खने वाला और दृश्य का भेद ही मट जाता है। ऐसी ही स्थ त को सा हत्य म
वस्मय- वमुग्धता कहा जाता है।
Page 2 of 54
Page 4
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) मौन हो ग़लत मौन तो केवल बाहरी लक्षण है। लेखक चुप ज़रूर है, पर वाक्य उसक भीतरी दशा बताता है — अपने
जाना अलग अ स्तत्व का भूल जाना। मौन से इतनी बात नह नकलती।
(ख) व स्मत सही ✓ ‘श क्त का वस्तार, वस्तार क श क्त’ और ‘दृश्य का एक हस्सा बनकर खड़ा रहा’ — दोन वस्मय क
हो जाना ही अ भव्य क्तयाँ ह।
(ग) भ्र मत हो ग़लत भ्रम का अथ है ग़लत समझ लेना या रास्ता भटक जाना। लेखक भ्र मत नह है — वह जानता है क वह
जाना कहाँ है; बस उस क्षण अपने ‘म’ का भान भूल जाता है। भ्रम म आनंद नह होता, यहाँ आनंद है।
(घ) आशं कत ग़लत आशंका (डर) इस वाक्य के बाद आती है — “जब अपना होश हुआ, तो दे खा क मेरी चट्टान भी तब तक
होना बढ़ते पानी म काफ घर गई है। मेरा पूरा शरीर सहर गया।” यानी डर वस्मय के टू टने पर पैदा हुआ,
वस्मय के समय नह ।
प्र.3 3. “मने, सफ मने उस चोट को पहली बार सर कया हो।” इस कथन म कौन-सा भाव व्यक्त होता है? (क)
करुणा (ख) वनम्रता (ग) आत्मीयता (घ) संतु ष्ट
सट क उत्तर — (घ) संतु ष्ट।
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: पूरा वाक्य ही ‘संतुष्ट’ शब्द से शुरू होता है — “अपने प्रयत्न क साथकता से संतुष्ट
होकर म ट ले पर बैठ गया — ऐसे जैसे वह ट ला संसार क सबसे ऊँची चोट हो, और मने, सफ मने, उस चोट को
पहली बार सर कया हो।” इससे पहले लेखक ने थकान झेली है — “जल्द -जल्द चलते हुए मने एक के बाद एक
कई ट ले पार कए। टाँग थक रही थ पर मन थकने को तैयार नह था।” जब श्रम का फल मल गया — खुला
वस्तार सामने आ गया — तब जो भाव जागा, वह प रश्रम के सफल होने क संतु ष्ट है। ‘ सफ मने’ म हल्का-सा
गव भी है, पर वह गव भी संतोष से ही उपजा है, इस लए मूल भाव संतु ष्ट ही है।
वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) करुणा ग़लत करुणा दूसरे के दुःख से उपजती है। यहाँ न कोई दुःखी पात्र है, न दया का प्रसंग।
(ख) वनम्रता ग़लत ‘ सफ मने’ पर बल वनम्रता का उलटा है। वनम्र व्य क्त अपनी उपल को इस तरह अकेला अपना नह
कहता।
(ग) ग़लत आत्मीयता कसी व्य क्त या स्थान से जुड़ाव का भाव है। इस वाक्य म लेखक का संबंध ट ले से नह ,
आत्मीयता अपने प्रयत्न के प रणाम से है।
(घ) संतु ष्ट सही ✓ वाक्य का अपना शब्द ‘संतुष्ट होकर’ ही इसे प्रमा णत करता है — क ठन चढ़ाई के बाद लक्ष्य मलने का
संतोष।
Page 3 of 54
Page 5
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक
a g l AglaSem · NCERT Solutions
ध्यान द जए: यहाँ लेखक ने एक अ तशयो क्त जान-बूझकर रखी है। रेत का एक ट ला ‘संसार क सबसे ऊँची
. com
m a s em
agl
चोट ’ नह होता। पर उपल का सुख नाप का मोहताज नह होता — यही बात यह अ तशयो क्त कहती है।
. co
e m
g l as
a 4. “श क्त का वस्तार, वस्तार क श क्त” वाक्य म वणन है— (क) बलखाती लहर का (ख) सागर क
प्र.4
co m
ag
व्यापकता का (ग) सूयास्त के दृश्य का (घ) प मी क्ष तज का
m .
ase
a g l
सट क उत्तर — (ख) सागर क व्यापकता का।
c o m
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: इस पदबंध के ठ क बाद क पं क्त स्वयं इसक व्याख्या कर दे ती हैm .
क्ष तज तकom पानी-ही-पानी था, फर भी सामने का क्ष तज, हद महासागर का, अपेक्षयाla s e — “तीन तरफ से
. c a g अ धक दूर और अ धक
a s emजान पड़ता था। लगता था क उस ओर दूसरा छोर है ही नह ।” यानी लेखक जस चीज़ को ‘चेतना से महसूस’
गहरा
a gl कर रहा है, वह कसी एक लहर या एक क्षण का दृश्य नह , ब ल्क तीन समुद्र का असीम फैलाव है। ‘श क्त का
वस्तार’ का अथ है — समुद्र क श क्त दूर-दूर तक फैली हुई है; और ‘ वस्तार क श क्त’ का अथ है — यह फैलाव
m a s
.co agl
अपने-आप म एक श क्त है, जो दे खने वाले को छोटा कर दे ती है। दोन मलकर व्यापकता का ही बोध कराते ह।
se m
l a
वकल्प सही /
ग़लत
ag
कारण
. com
emदूरी और असीमता का बोध है।
(क) बलखाती ग़लत बलखाती लहर का वणन अलग वाक्य म है — “बलखाती लहर रास्ते क नुक ली चट्टान से कटती हुई
om a s
gl
लहर का आती थ ।” वह एक नकट का, ब्योरेवार दृश्य है; ‘श क्त का वस्तार’
. c a
m सागर क
ase
सही ✓
agl
(ख) अगली ही पं क्त ‘ क्ष तज तक पानी-ही-पानी’ और ‘दूसरा छोर है ही नह ’ कहकर इसे सद्ध कर दे ती
व्यापकता का है।
se m
com a
(ग) सूयास्त के दृश्य ग़लत सूयास्त का प्रसंग वृत्तांत म बहुत बाद म, दूसरे ट ले पर आता है। यह वाक्य तो पहले ही अनुच्छेद म,
का
.
आ खरी चट्टान को दे खते समय आया है।
a g l
e m
s तीन दशाओं के क्ष तज क है, केवल प च्छमी क नह — “तीन ओर के क्ष तज को
यहाँa
(घ) प च्छमी
क्ष तज का
ग़लत
g l
a आँख म समेटता…”। एक दशा चुनना पूरे अथ को छोटा कर देगा।
बात
co m
m .
as e
शल्प क बात: ‘श क्त का वस्तार, वस्तार क श क्त’ म वही दो शब्द उलटकर दोहराए गए ह। इस यु क्त से वाक्य
m l
.co a g
म एक लय और चक्र बन जाता है — जैसे लहर आकर लौटती है और फर आती है। यही कारण है क यह पदबंध
s e m पूरे वृत्तांत का सूत्रवाक्य बन गया है और पुस्तक ने इसे ‘जीवन-दशन’ के खाने म रखा है।
agla
.c
s e m
m a
em . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 4 of 54
Page 6
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
प्र.5 5. लेखक क कन्याकुमारी क यात्रा का वणन पढ़कर कहा जा सकता है क— (क) यह कन्याकुमारी के मौसम
को प्रमुखता से व णत करता है। (ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभू तय से जोड़ता है। (ग) यह केवल यात्रा के
रोमांच पर क द्रत है। (घ) इसम कन्याकुमारी का काल्प नक वणन मलता है।
सट क उत्तर — (ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभू तय से जोड़ता है।
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: इस वृत्तांत म हर बाहरी दृश्य के साथ-साथ लेखक क भीतरी दशा भी दज है — यही
‘जीवंत अनुभू त’ है। तीन उदाहरण दे खए:
दृश्य + वस्मय — “तीन ओर के क्ष तज को आँख म समेटता म कुछ दे र भूला रहा क म म हूँ।”
दृश्य + उदासी — अपने पैर के नशान दे खकर — “लगा जैसे रेत पहली बार उन नशान से टू टा हो। इससे मन
म एक सहरन भी हुई, हल्क उदासी भी घर आई।”
दृश्य + भय — “एक लहर मेरे पैर को भगो गई, तो सहसा मुझे खतरे का एहसास हुआ।”
और अंत म तो अनुभू त यथाथ से टकराकर वडंबना बन जाती है — “म अब भी आँख से बीच क दूरी नाप रहा था
और मन म बस का टाइम-टे बल दोहरा रहा था। तीसरी बस नौ चालीस पर, चौथी…”। इस लए यह केवल जगह का
ववरण नह , अनुभू त का वृत्तांत है।
वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) मौसम को प्रमुखता से ग़लत मौसम का अलग से कोई वणन नह है। हवा, धूप और अँधेरा जहाँ आते भी ह, वहाँ वे दृश्य
व णत करता है। का हस्सा ह — वषय नह ।
(ख) यह यात्रा को जीवंत सही ✓ हर दृश्य के साथ वस्मय, रोमांच, उदासी, भय या संतोष जुड़ा हुआ है। पुस्तक ने भी इसे
अनुभू तय से जोड़ता है। ‘आत्मानुभू त व भावनाएँ’ के खाने म रखा है।
(ग) केवल यात्रा के रोमांच पर ग़लत ‘केवल’ शब्द इसे ग़लत बना दे ता है। रोमांच है — लहर से बचकर दौड़ना, चट्टान पर चढ़ना
क द्रत है। — पर साथ म बेकारी के आँकड़े, मं दर क घं टयाँ, शंख-मालाएँ बेचती युव तयाँ और अपनी
क्षुद्रता का बोध भी है।
(घ) काल्प नक वणन मलता ग़लत वणन पूरी तरह वास्त वक है — केप होटल, बाथ टक, सड हल, ववेकानंद चट्टान, गवनमट
है। गेस्ट हाउस, आठ हजार क आबाद , बस का टाइम-टे बल। कल्पना केवल उपमाओं म है,
तथ्य म नह ।
मेरी समझ मेरे वचार — पृष्ठ 91
Page 5 of 54
Page 7
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
अभ्यास › रचना से संवाद › मेरी समझ मेरे वचार
रचना से सं वाद चचा
प्र.1 नीचे दए गए प्रश्न पर कक्षा म चचा क जए और उनके उत्तर ल खए— 1. या त्रय का समूह सूयास्त का दृश्य
दे खने के लए सड हल क ओर बढ़ता जा रहा था ले कन लेखक सड हल पर पहुँचकर कुछ दे र रुकने के बाद
दूसरे ट ले क ओर बढ़ने लगा। उसके ऐसा करने के पीछे मूल कारण क्या था?
मूल कारण यह था क सड हल से सूयास्त अधूरा दखाई दे ता था। लेखक को अधूरा दृश्य स्वीकार नह था — वह सूयास्त को
पूरे समुद्र वस्तार क पृष्ठभू म म दे खना चाहता था।
लेखक ने स्वयं यह बात लखी है — “सड हल से सामने का पूरा वस्तार तो दखाई दे रहा था, पर अरब सागर क तरफ एक और
ऊँचा ट ला था जो उधर के वस्तार को ओट म लए था। सूयास्त पूरे वस्तार क पृष्ठभू म म दे खा जा सके, इसके लए म कुछ दे र सड
हल पर रुका रहकर आगे उस ट ले क तरफ चल दया।” यानी सड हल पर एक ऊँचा ट ला अरब सागर क ओर का दृश्य ढके हुए
था।
पर इसके पीछे एक दूसरा, गहरा कारण भी है — लेखक का स्वभाव। सड हल पर भीड़ थी : “आठ-दस नवयुव तयाँ, छह-सात
नवयुवक और दो-तीन गाँधी टो पय वाले व्य क्त”, रेशमी कपड़े, बैर क परोसी हुई कॉफ । उस रंगीन जमघट के बीच लेखक अपने
को इस तरह दे खता है — “उनसे कुछ दूर पर एक रंगहीन बदु, म, ज्यादा दे र अपनी जगह स्थर नह रह सका।” उसे सूयास्त एक
सामा जक आयोजन क तरह नह , अकेले क अनुभू त क तरह चा हए था।
क्य यह बात महत्वपूण है: यही नणय पूरे वृत्तांत का मोड़ है। य द लेखक सड हल पर रुक जाता तो न कई ट ले
पार करने का श्रम होता, न ‘टाँग थक रही थ पर मन थकने को तैयार नह था’ जैसा वाक्य, न ‘प्रयत्न क साथकता’
का संतोष, न लौटते समय अनाम रंग वाली रेत और लहर से भागने का रोमांच। भीड़ के साथ रुक जाने पर दृश्य
मलता है, भीड़ से अलग चल पड़ने पर अनुभव मलता है — यही अंतर एक साधारण पयटक और एक यात्रा-लेखक
म होता है।
चचा के लए: कक्षा म यह प्रश्न र खए — क्या हर बार भीड़ से अलग चलना ठ क होता है? लेखक को इसका मूल्य
भी चुकाना पड़ा : लौटते समय अँधेरा घर आया, रास्ता क ठन हो गया और वह चट्टान से टकराकर घायल होते-होते
बचा। यानी अलग रास्ता चुनने म जो खम भी होता है — उसे जानकर चुनना ही समझदारी है।
प्र.2 2. लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोग के वषय म क्या-क्या बताया?
लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोग को केवल ‘दृश्य’ क तरह नह दे खा — उनक जी वका और उनक ववशता दोन दज
क । मुख्य बात ये ह—
श क्षत बेकारी — साथ बैठे ग्रेजुएट नवयुवक ने बताया क कन्याकुमारी क आठ हजार क आबाद म कम-से-कम चार-
पाँच सौ श क्षत नवयुवक बेकार ह, जनम सौ के लगभग ग्रेजुएट ह।
उनका ‘मुख्य धंधा’ — लेखक के शब्द म — “उनका मुख्य धंधा है नौक रय के लए अ ज़याँ दे ना और बैठकर आपस म
बहस करना।”
Page 6 of 54
Page 8
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
छोटे -मोटे काम — वह ग्रेजुएट स्वयं वहाँ फोटो-एलबम बेचता था; बाक नवयुवक भी वैसे ही छोटे -मोटे काम करते थे।
भूख और वचार साथ-साथ — उसका मा मक वाक्य — “हम लोग सी पय का गूदा खाते ह और दाश नक सद्धांत पर बहस
करते ह।” और — “इस चट्टान से इतनी प्रेरणा तो हम मलती ही है।” कहते-कहते उसने वह से एक सीपी तोड़कर उसका गूदा
मुँह म डाल लया।
मल्लाह — चार मल्लाह उन्ह एक छोट -सी मछु आ नाव म ववेकानंद चट्टान तक ले गए। नाव क्या थी — “रबड़ पेड़ के तीन
तन को साथ-साथ जोड़ लया गया था, बस।” वे नीचे क नुक ली चट्टान और ऊपर क ऊँची लहर से बचाते हुए नाव खे रहे थे।
फेरी लगाती युव तयाँ — “दो स्थानीय नवयुव तयाँ उन्ह अपनी टोक रय से शंख और मालाएँ दखला रही थ ” — यानी घरेलू
स्तर का हस्त शल्प ही उनक जी वका थी।
धा मक जीवन — कन्याकुमारी के मं दर म पूजा क घं टयाँ बजत ; भक्त क मंडली अंदर जाने से पहले मं दर क द वार को
प्रणाम करती; घाट पर बहुत-से लोग उगते सूय को अ य दे ने के लए एक त्रत रहते।
सेवा म लगे लोग — गवनमट गेस्ट हाउस के बैरे सरकारी मेहमान को सूय दय और सूयास्त, दोन समय क कॉफ पलाते थे।
इनसे बनता क्या है: इन ब्योर को एक साथ र खए तो एक पूरा सामा जक चत्र उभरता है — एक ऐसा प्र सद्ध
पयटन-स्थल जहाँ स दय तो अपार है, पर स्थानीय युवाओं के लए काम नह । लेखक ने इस वरोधाभास को
एक ही वाक्य म बाँध दया है — कडल-काक “वहाँ क बेकारी क समस्या और सूय दय क वशेषता, इन दोन से
बे-लाग” तैर रहे थे। पक्षी दोन से न लप्त ह; मनुष्य नह हो सकता। यही वह जगह है जहाँ यह यात्रा-वृत्तांत सुंदर
वणन से आगे बढ़कर सामा जक दस्तावेज़ बन जाता है।
प्र.3 3. “अपने प्रयत्न क साथकता से संतुष्ट होकर म ट ले पर बैठ गया” इस पं क्त म ‘प्रयत्न क साथकता’ से क्या
अ भप्राय है?
‘प्रयत्न क साथकता’ का अथ है — कए गए प रश्रम का साथक हो जाना, यानी मेहनत का ठ क वही फल मल जाना
जसके लए मेहनत क गई थी।
लेखक का प्रयत्न क्या था? सूयास्त को पूरे खुले वस्तार क पृष्ठभू म म दे खना। इसके लए उसने क्या कया? सड हल क भीड़ और
आराम छोड़ा, रेत पर अकेले कदम घसीटे , और — “जल्द -जल्द चलते हुए मने एक के बाद एक कई ट ले पार कए। टाँग थक रही
थ पर मन थकने को तैयार नह था।” हर ट ले पर पहुँचकर आगे एक और ऊँचा ट ला नकल आता था, फर भी वह लौटा नह ।
और अंत म — “सचमुच एक ट ले पर पहुँचकर वह खुला वस्तार सामने फैला दखाई दे गया… सूय तब पानी से थोड़ा ही ऊपर
था।” यही वह क्षण है जहाँ प्रयत्न ‘साथक’ हुआ : समय पर भी पहुँच गया और दृश्य भी पूरा मला। इसी संतोष म वह बैठ जाता है
— “ऐसे जैसे वह ट ला संसार क सबसे ऊँची चोट हो, और मने, सफ मने, उस चोट को पहली बार सर कया हो।”
‘सफलता’ और ‘साथकता’ म अंतर: सफलता का नाप बाहरी होता है — कतना ऊँचा, कतना बड़ा। साथकता
का नाप भीतरी होता है — जो चाहा था, वह मला या नह । रेत का वह ट ला कोई पवत-चोट नह था, इस लए
यह ‘बड़ी सफलता’ नह थी; पर लेखक के लए वह पूरी तरह साथक था। इसी लए वह अ तशयो क्त म उसे ‘संसार
क सबसे ऊँची चोट ’ कह दे ता है।
Page 7 of 54
Page 9
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
अपने जीवन से जो ड़ए: जस दन आप बहुत दे र तक अभ्यास करके कोई एक क ठन प्रश्न स्वयं हल कर लेते ह,
उस दन जो संतोष होता है — वह अंक से नह आता, ‘प्रयत्न क साथकता’ से आता है। लेखक भी ठ क यही कह
रहा है।
प्र.4 4. यात्रा-वृत्तांत म आए उन दृश्य के वषय म ल खए जनका अनुभव लेखक के लए बल्कुल नया था।
वृत्तांत म तीन-चार ऐसे दृश्य ह जन्ह लेखक ने स्वयं ‘पहले कभी न दे खा हुआ’ कहा है या जनका वणन ही उनक नवीनता प्रमा णत
कर दे ता है।
दृश्य पाठ का प्रमाण वह नया क्य था
1. तट की “यूँ पहले भी समुद्र-तट पर कई-कई रंग क रेत यह वह अकेला दृश्य है जसे लेखक ने शब्द म ‘पहले कभी नह
अनाम रंगों दे खी थी — सुरमई, खाक , पीली और लाल। मगर दे खा’ कहा है। रंग इतने थे क उनके नाम ही नह थे — इसी लए
वाली रे त जैसे रंग उस रेत म थे, वैसे मने पहले कभी कह क वह उन्ह ‘काली घटा और घनी लाल आँधी को मलाकर रेत के
रेत म नह दे खे थे। कतने ही अनाम रंग थे वे। एक- आकार म ढाल दे ने’ जैसी कल्पना से समझाता है। उसका मन
एक इंच पर एक-दूसरे से अलग…” हुआ क हर रंग क थोड़ी-थोड़ी रेत साथ रख ले, पर कोई उपाय न
था — इस लए उदास मन से आगे बढ़ गया।
2. तीन समुद ों “तीन तरफ से क्ष तज तक पानी-ही-पानी था… अरब सागर, हद महासागर और बंगाल क खाड़ी — तीन एक
के संगम पर लगता था क उस ओर दूसरा छोर है ही नह ।” और साथ केवल यह दखते ह। इस दृश्य ने लेखक के अपने अ स्तत्व
खड़ े होकर — “म कुछ दे र भूला रहा क म म हूँ।” के बोध तक को हला दया; ऐसा अनुभव उसे पहले नह हुआ
दे खा गया था।
िवस्तार
3. सूय का “पानी पर दूर तक सोना-ही-सोना ढु ल आया। पर समुद्र म डू बता सूय पहाड़ या मैदान के सूयास्त से बलकुल अलग
पानी में डू बना वह रंग इतनी जल्द -जल्द बदल रहा था क कसी होता है — रंग पानी पर ‘बहते’ ह। रंग का नाम न रख पाना ही
और रंगों का भी एक क्षण के लए उसे एक नाम दे सकना बताता है क अनुभव नया था।
पल -पल असंभव था… जहाँ सोना बह रहा था, वहाँ अब लहू
बदलना बहता नजर आने लगा… वह लहू भी धीरे-धीरे
बजनी और बजनी से काला पड़ गया।”
4. रबड़ के “नाव क्या थी, रबड़ पेड़ के तीन तन को साथ-साथ ऐसी क ी नाव म, नुक ली चट्टान और ऊँची लहर के बीच सौ-
तीन तनों वाली जोड़ लया गया था, बस।” और — “जब चट्टान पर सवा-सौ गज समुद्र पार करना उसके लए पहला अनुभव था —
मछु आ नाव में पहुँच गए, तो डर मेरी टाँग म उतर गया क्य क वहाँ इसी लए उसने ‘चेतना को स्थ गत रखने’ और ‘डर को दखावट
समुद पार बैठे हुए भी वे हल्के-हल्के काँप रही थ ।” उदासीनता से ढकने’ क को शश क ।
करना
5. रे त पर “मने उस रेत पर दूर तक बने अपने पैर के नशान यहाँ नयापन दृश्य का नह , अनुभू त का है — पहली बार कसी
अपने ही पैरों को दे खा। लगा जैसे रेत पहली बार उन नशान से अछू ती जगह पर अपना चह्न छोड़ने का सुख और उसे बगाड़ दे ने
के िनशान टू टा हो। इससे मन म एक सहरन भी हुई, हल्क का हल्का अपराध-बोध, दोन एक साथ।
उदासी भी घर आई।”
Page 8 of 54
Page 10
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
ध्यान दे ने क बात: इन पाँच म से केवल दो असाधारण ह (तीन समुद्र का संगम, क ी नाव)। बाक तीन तो रेत,
m a s em को दज ही
gl
सूरज और अपने पैर के नशान जैसी साधारण चीज़ ह। यात्रा-वृत्तांत क कला यही है — वह असाधारण
. co को भी पहली बार दे खना सखा दे ता है। a
em
नह करता, साधारण
a s
agl
co m
ag
5. यात्रा-वृत्तांत से ऐसे दो अंश चुनकर ल खए जससे लेखक क मान सक दृढ़ता और हार न मानने क प्रवृ त्त
.
प्र.5
em
as
का पता चलता है।
a g l
नीचे दो अंश और उनका व ेषण दया गया है। (तीसरा अंश वकल्प के रूप म जोड़ दया गया है, ता क आप अपनी पसंद का चुन
co m
सक।)
se m.
m l a
m .co agकैसे सद्ध होती है
ase
अंश प्रसंग इससे दृढ़ता
aglअंश 1 सूयास्त दे खने के लए सड यहाँ शरीर और मन का द्वं द्व साफ़ शब्द म है और
s
“जल्दी-जल्दी चलते हुए मैंने एक के बाद एक कई हल से आगे बढ़ते हुए, जब मन जीतता है। सूय डू बने ही वाला है, समय कम है,
m a
coनकल agl
टीले पार िकए। टाँगें थक रही थी ं पर मन थकने
ऊँचा ट .ला
हर ट ले के बाद एक और रास्ता अनजान है — फर भी लेखक लौटता नह ।
को तैयार नही ं था। हर अगले टीले पर पहचु ँ ने पर
लगता िक शायद अब एक ही टीला और है, उस पर as e m आता है। ‘एक के बाद एक कई ट ले’ म बार-बार क नराशा
पहचु ँ कर पिच्छमी िक्षितज का खुल ा िवस्तार अवaश्यgl
और बार-बार क नई को शश, दोन बँधी हुई ह।
नजर आएगा।”
co m
अंश 2
m .
e
लौटते समय ज्वार बढ़ रहा है, यह दृढ़ता का अ धक प रपक्व रूप है। लेखक
omजाने के िलए पानी में उतरना
“च ान पानी के अंद र तक चली गई थी — उसे
cआगे
तट सकुड़कर तीन-चार फुट
g l as
अपना डर छपाता नह — ‘साहस नह हुआ’ लख
. a
eआवmश्यक था। पर उस समय पानी की तरफ पाँव
बचाकर रह गया है, ऊपर खड़ी रेत दे ता है। पर डर मानकर बैठ भी नह जाता; जो रास्ता
a s
agl बढ़नोकोंाने कापर पैमेररारखता
द वार क तरह है और सामने बचा है (चट्टान क नोक) उसी से ऊपर चढ़ जाता है।
साहस नही ं हुआ। मैं च ान की चट्टान रास्ता रोके खड़ी है। हार न मानने का अथ नडर होना नह , डरते हुए
m
िकसी तरह उसके ऊपर पहचु ँ
se
भी रास्ता नकाल लेना है।
com a
गया।”
. a g l
s e mसूय दय देखने के लए क
े a
अंश 3 (िवक ल्प)
“म ल्लाह नाव को उस तरफ ला रहे थे, तो मैंनl
ी डर के बावजूद यात्रा से पीछे न हटना और डर को
a
आसमान की तरफ दे खते हुए उतनी दे र अपनी
g मछु आ नाव म ववेकानंद
चट्टान तक जाते हुए।
अपने ऊपर हावी न होने दे ना — यह भी मान सक
दृढ़ता ही है।
चेतना को स्थिगत रखने की चेष्टा की थी, अपने
com
.
अंद र के डर को िदखावटी उदासीनता से ढक
e m
as
रखना चाहा था।”
m l
.co a g
m दोन अंश को जो ड़ए: पहले अंश म दृढ़ता लक्ष्य पाने के लए है (सूयास्त दे खना), दूसरे म स्वयं को बचाने के
l a se
ag लए। यानी लेखक क यह प्रवृ त्त सुख के समय भी काम करती है और संकट के समय भी। यही कारण है क पुस्तक
.c
s e m
m a
ने ‘रोमांच व संघष’ को यात्रा-वृत्तांत का एक अलग तत्व माना है।
e m . co agl
g l as
यात्रा का वृत्तांत — पृष्ठ 91 और 92
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 9 of 54
Page 11
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
अभ्यास › वधा से संवाद › यात्रा का वृत्तांत
वधा से सं वाद ता लका
प्र.1 मोहन राकेश का ‘आ खरी च ान तक’ यात्रा-वृत्तांत केवल स्थान- चत्रण नह है ब ल्क इसम प्रकृ त का सजीव
रूपांकन, मानव-जीवन और समाज क झलक तथा आत्मानुभू त का गहरा समन्वय मलता है। नीचे यात्रा-वृत्तांत
के प्रमुख तत्व / वशेषताओं को कुछ प्रमुख बदुओं के माध्यम से दशाया गया है। इन्ह पढ़कर यात्रा-वृत्तांत क
रचना-प्र क्रया को समझने का प्रयास क जए। (1. दृश्य-वणन 2. आत्मानुभू त व भावनाएँ 3. सांस्कृ तक प रप्रेक्ष्य
4. जीवन-दशन 5. शैलीगत वशेषताएँ 6. रोमांच व संघष)
पुस्तक ने छह खान म केवल संकेत-शब्द दए ह। नीचे उन्ह छह तत्व को पाठ क पं क्तय से भरकर दया गया है — यही
‘रचना-प्र क्रया को समझना’ है।
Page 10 of 54
Page 12
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
तत्व पुस्तक के बदु पाठ से प्रमाण (पूरा भरा हुआ)
1. दृ श्य-वणन समुद्र, चट्टान; लहर का च ान — “समुद्र के अंदर से उभरी स्याह चट्टान म से एक पर खड़ा होकर…”। लहर —
चत्रण; रंग, आकाश, रेत “बलखाती लहर रास्ते क नुक ली चट्टान से कटती हुई आती थ जससे उनके ऊपर चूरा बूँद
का जीवंत चत्रण क जा लयाँ बन जाती थ ।” रंग — “पानी पर दूर तक सोना-ही-सोना ढु ल आया… जहाँ सोना
बह रहा था, वहाँ अब लहू बहता नजर आने लगा… वह लहू भी धीरे-धीरे बजनी और बजनी से
काला पड़ गया।” रेत — “ कतने ही अनाम रंग थे वे। एक-एक इंच पर एक-दूसरे से अलग…”
2. वस्मय, रोमांच, भय, वस्मय — “म कुछ दे र भूला रहा क म म हूँ।” अ स्तत्व का बोध — “उस दृश्य के बीच म
आत्मानुभिू त आत्म-संवेदना; अपने जैसे दृश्य का एक हस्सा बनकर खड़ा रहा — बड़ी-बड़ी चट्टान के बीच एक छोट -सी
व भावनाएँ अ स्तत्व का बोध; प्रकृ त चट्टान।” उदासी — “इससे मन म एक सहरन भी हुई, हल्क उदासी भी घर आई।” भय —
से संवाद “एक लहर मेरे पैर को भगो गई, तो सहसा मुझे खतरे का एहसास हुआ।” संतोष — “अपने
प्रयत्न क साथकता से संतुष्ट होकर म ट ले पर बैठ गया।”
3. ववेकानंद चट्टान; ववेकानंद च ान — “वह चट्टान, जस पर कभी स्वामी ववेकानंद ने समा ध लगाई थी।”
सास्ं कृ ितक स्थानीय लोग, नवयुवक, शक्षा और बेकारी — “आठ हजार क आबाद म कम-से-कम चार-पाँच सौ श क्षत
पिरपक्ष्े य शक्षा; धा मक परंपराएँ नवयुवक ऐसे ह जो बेकार ह। उनम से सौ के लगभग ग्रेजुएट ह।” धा मक परंपरा —
(मं दर, अ य) “कन्याकुमारी के मं दर म पूजा क घं टयाँ बज रही थ … घाट पर बहुत-से लोग उगते सूय को
अ य दे ने के लए एक त्रत थे।” हस्त शल्प — “दो स्थानीय नवयुव तयाँ उन्ह अपनी टोक रय
से शंख और मालाएँ दखला रही थ ।”
4. जीवन- श क्त का वस्तार, सूत्रवाक्य — “अपनी पूरी चेतना से महसूस कर रहा था — श क्त का वस्तार, वस्तार क
दशन वस्तार क श क्त; श क्त।” मनुष्य क लघुता — “उस पूरे कैनवस म एक तरफ छटके हुए कुछ बदुओं क
आत्म-चेतना; तरह। उनसे कुछ दूर पर एक रंगहीन बदु, म।” क्षणभंगुरता — “वह रंग इतनी जल्द -जल्द
क्षणभंगुरता व उदासी बदल रहा था क कसी भी एक क्षण के लए उसे एक नाम दे सकना असंभव था।” वडंबना
— “म… मन म बस का टाइम-टे बल दोहरा रहा था। तीसरी बस नौ चालीस पर, चौथी…”
5. शैल ीगत सजीव, प्रवाहपूण भाषा; उपमा — “हवा समुद्र क तरह उस रेशम म भी लहर पैदा कर रही थी।” रूपक — “उस पूरे
िवशेषताएँ दृश्यात्मकता; रूपक, कैनवस म…” (पूरा दृश्य = चत्रफलक)। मानवीकरण — “सूय का गोला जैसे एक बेबसी म
उपमा, प्रतीक; रंग का पानी के लावे म डू बता जा रहा था”; “झुरमुट, स्याह पड़कर, जैसे लगातार सर धुन रहे थे और
भावात्मक प्रयोग हाथ-पैर पटक रहे थे।” क्रयाहीन वाक्य-शैली — “रात केप होटल का लॉन। अँधेरे म हद
महासागर को काटती कुछ स्याह लक र — एक पौधे क टह नयाँ।” रंग का भाव — सोना =
वैभव, लहू = वदाई क पीड़ा, स्याही = शून्यता।
6. रोमांच व लहर से संघष; अँधेरे म लहर से संघष — “एक ऊँची लहर से बचकर इस तरह दौड़ा जैसे सचमुच वह मुझे अपनी
संघ ष भटकने का भय; सुर क्षत लपेट म लेने आ रही हो।” भटकने का भय — “मन म डर समाने लगा क क्या अँधेरा होने से
लौटने क चता पहले म उन सब ट ल को पार करके जा सकूँगा?” लौटने क चता — “अचानक खयाल
आया क मुझे वहाँ से लौटकर भी जाना है। इस खयाल से ही शरीर म कँपकँपी भर गई।”
च ान से टकराना — “वक्त पर अपने को संभालने क को शश क , फर भी उससे टकरा
गया। घुटने पर हल्क खर च आ गई।”
Page 11 of 54
Page 13
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
यात्रा-वृत्तांत क पहचान — इन छह तत्व से क्या सीख:
ववरण और अनुभू त का अंतर। ‘सूय डू ब गया’ — यह ववरण है। ‘सूय का गोला जैसे एक बेबसी म पानी के
लावे म डू बता जा रहा था’ — यह अनुभू त है। यात्रा-वृत्तांत ववरण से शुरू होकर अनुभू त पर टकता है।
आत्मपरकता (उत्तम पुरुष)। पूरा पाठ ‘म’ म है। लेखक दृश्य के बाहर खड़ा तटस्थ वणनकार नह , दृश्य के
भीतर खड़ा भोक्ता है — “दृश्य का एक हस्सा बनकर खड़ा रहा।”
बब- वधान। पाठ म चार तरह के बब ह — दृश्य बब (सोना-लहू-बजनी), श्रव्य बब (गूँजती हुई तेज हवा,
पूजा क घं टयाँ), स्पश बब (एक लहर मेरे पैर को भगो गई; रंग को “पैर से मसल दया”), स्वाद बब
(सीपी का गूदा)।
यथाथ का प्रवेश। कोरा स दय यात्रा-वृत्तांत को पयटन- ववर णका बना दे ता है। बेकारी के आँकड़े और बस का
टाइम-टे बल इसे सा हत्य बनाते ह।
प्र.2 अपनी कसी यात्रा को इन बदुओं के माध्यम से समझाइए।
पहले तरीका, फर पूरा भरा हुआ नमूना उत्तर।
तरीका (क्या करना है):
1. एक ऐसी यात्रा चु नए जो एक ही दन या दो दन क हो। बहुत लंबी यात्रा म ब्योरे बखर जाते ह।
2. छह खान को अलग-अलग कागज़ पर ल खए और स्मृ त से केवल ठोस चीज़ भ रए — रंग, आवाज़, गंध,
नाम, संख्याएँ। ‘बहुत सुंदर था’ जैसे वाक्य कसी खाने म न ल खए।
3. खाना 2 (आत्मानुभू त) म कम-से-कम एक ऐसी भावना ल खए जो सुखद न हो — डर, थकान, उदासी,
झुँझलाहट। इसी से लेखन स ा लगता है।
4. खाना 3 (सांस्कृ तक प रप्रेक्ष्य) म वहाँ के लोग क जी वका ज़रूर ल खए — केवल मं दर- कला नह ।
5. अंत म हर खाने से एक-एक वाक्य लेकर उन्ह जोड़ द जए — आपका यात्रा-वृत्तांत तैयार है।
Page 12 of 54
Page 14
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर — यात्रा : चोपता से तुंगनाथ (रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड), अक्टू बर क एक सुबह
तत्व मेरी यात्रा म
1. दृश्य-वणन चोपता म बुरांश और दे वदार के जंगल क कतार, जनके बीच से धूप छन-छनकर ज़मीन पर सक्क -जैसे गोल
टु कड़े बना रही थी। तीन कलोमीटर क पक्क पगडंडी, दोन ओर घास के छोटे -छोटे बुग्याल। ऊपर पहुँचते-
पहुँचते पेड़ खत्म और केवल भूरी घास; बादल नीचे रह गए और सफेद रुई क तरह घाट म भरे हुए दखे। सामने
चौखंबा क बफ धूप म पहले सोने जैसी, फर दोपहर म साद सफेद हो गई।
2. आत्मानुभू त पहले कलोमीटर म उत्साह, दूसरे म साँस फूलने पर झुँझलाहट, और तीसरे म एक अजीब चुप्पी। जब बादल नीचे
व भावनाएँ रह गए तो लगा जैसे म ज़मीन से कटकर कह और खड़ा हूँ। लौटते समय घुटन म दद के साथ-साथ यह संतोष
भी था क जो सोचा था, वह कर लया।
3. सांस्कृ तक तुंगनाथ पंच केदार म से एक है और संसार के सबसे ऊँचे शव-मं दर म गना जाता है। स दय म यहाँ क डोली
प रप्रेक्ष्य मक्कूमठ ले जाई जाती है — पुजारी ने बताया क यह परंपरा पी ढ़य से चली आ रही है। रास्ते म चाय क दो
दुकान थ ; एक चलाने वाले लड़के ने कहा क वह ग मय म यहाँ दुकान लगाता है और स दय म नीचे ऊखीमठ म
मज़दूरी करता है — छह महीने का काम, बारह महीने का पेट।
4. जीवन-दशन चढ़ाई पर सबसे बड़ी बाधा ढलान नह , यह सोच थी क ‘अभी कतना बाक है’। जस क्षण मने गनना बंद
कया, चलना आसान हो गया। और ऊपर पहुँचकर यह भी समझ आया क जस बफ को हम दूर से चमकता
हुआ चमत्कार मानते ह, वहाँ रहने वाल के लए वह हर साल क मु श्कल है।
5. शैलीगत मने वणन म रंग का क्रम रखा — हरा (जंगल) → भूरा (घास) → सफेद (बफ) → सुनहला (लौटती धूप)। घंट ,
वशेषताएँ हवा और अपनी ही साँस — तीन आवाज़ को अलग-अलग दज कया। बादल के लए ‘रुई’ क उपमा और
पगडंडी के लए ‘पहाड़ के माथे पर खची लक र’ का रूपक इस्तेमाल कया।
6. रोमांच व आ खरी आधा कलोमीटर म हल्क बूँदाबाँद शुरू हो गई और पत्थर फसलने लगे। एक जगह पैर फसला भी,
संघष पर कनारे क चट्टान पकड़कर सँभल गया। लौटते समय अँधेरा होने का डर था, इस लए हम बना रुके उतरे —
और ठ क सूयास्त के समय चोपता पहुँच गए।
अब इन्ह जोड़कर बना एक अनु े द: उस सुबह चोपता म दे वदार के बीच से छनती धूप ज़मीन पर सक्के-जैसे
गोल टु कड़े बना रही थी। पहले कलोमीटर म उत्साह था, दूसरे म साँस फूलने क झुँझलाहट, और तीसरे म एक ऐसी
चुप्पी जसम अपनी ही साँस सबसे तेज़ आवाज़ थी। जस क्षण मने ‘अभी कतना बाक है’ गनना छोड़ा, चलना
आसान हो गया। ऊपर बादल नीचे रह गए थे और चौखंबा क बफ धूप म सोने-सी चमक रही थी; पर चाय बेचते उस
लड़के का यह वाक्य उसी चमक के बीच खड़ा रहा — “छह महीने का काम है साहब, पेट तो बारह महीने का है।”
यात्रा और खोज — पृष्ठ 92
Page 13 of 54
Page 15
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक
a g l AglaSem · NCERT Solutions
अभ्यास › वषय से संवाद › यात्रा और खोज
co m
e m.
m as
वषय से सं वाद ता लका
.co a g l
a s em
gl
सं सार म बहुत से लोग ने लंबी-लंबी यात्राएँ क ह और अपनी यात्रा से अ जत ान और अनुभव से समाज को
a
प्र.1
समृद्ध कया है। पुस्तकालय एवं शक्षक क सहायता से कुछ महत्वपूण यात्रा-वृत्तांत और उनके लेखक के वषय
m
म जानकारी एक त्रत क जए और ल खए। आपक सहायता के लए एक संकेत नीचे दया गया है। (यात्रा-वृत्तांत
. co
/ स्थान / रचनाकार — कन्नर दे श म | हमाचल प्रदे श म स्थत कन्नौर | राहुल सांकृत्यायन)
ag
em
g l as
a
पुस्तक ने ता लका क केवल पहली पं क्त भरकर द है। नीचे वही ता लका पूरी भरकर द गई है — पहले हद के प्रमुख यात्रा-
co m
m.
वृत्तांत, फर कुछ प्राचीन यात्री जनके ववरण से भारत का इ तहास लखा गया।
m as e
.co a g l
eदेmश म
यात्रा-वृत्तांत स्थान रचनाकार
a s
a gl कन्नर हमाचल प्रदे श म स्थत कन्नौर राहुल सांकृत्यायन
s
मेरी ितब्बत यात्रा
m a
तब्बत राहुल सांकृत्यायन
em
. c o agl
s
मेरी ल ाख यात्रा ल ाख (जम्मू-कश्मीर/ल ाख क्षेत्र) राहुल सांकृत्यायन
a
glघुमक्कड़ी का दशन ( कसी एक स्थान का नह )
घुमक्कड़ -शास्त्र यात्रा a
और राहुल सांकृत्यायन
आिखरी च ान तक
co m
.
कन्याकुमारी तथा द क्षण भारत (त मलनाडु ) मोहन राकेश
e m
m l as
.co
अरे यायावर रहेगा याद ?
g
यूरोप तथा अन्य दे श क यात्राएँ अज्ञेय (स दानंद हीरानंद वात्स्यायन)
eएकmबूदँ सहसा उछली a
a s
gl
यूरोप अज्ञेय
a
m
चीड़ ों पर चाँद नी
se
यूरोप तथा पहाड़ी अंचल नमल वमा
comऔर आसपास का अंचल) g l a
. a
sem
धुंध से उठती धुन हमाचल प्रदे श ( शमला नमल वमा
यूरोपla
ag
पैरों में पंख बाँधकर रामवृक्ष बेनीपुरी
ठे ले पर िहमालय
m
हमालय (नैनीताल–कौसानी अंचल) धमवीर भारती
. c o
िहमालय-पवास / िहमालयनो पवास
s e m कालेलकर
a
हमालय क्षेत्र काका
. comकी डायरी agl
m
ase
आवारा दे श- वदे श क यात्राएँ यशपाल
agl c
अब वे यात्री, जनके ववरण से इ तहास लखा गया —
m .
m a s e
em . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 14 of 54
Page 16
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
यात्री कब और कहाँ से क्या दज कया
मेगस्थनीज़ ईसा पूव चौथी शताब्द , यूनान से; चंद्रगुप्त मौय इं डका — पाट लपुत्र नगर, मौय प्रशासन और भारतीय समाज का
के दरबार म ववरण।
फ़ ा ान पाँचव शताब्द , चीन से; चंद्रगुप्त तीय के बौद्ध वहार , नालंदा-पाट लपुत्र और जनजीवन का ववरण।
काल म
े नसागं सातव शताब्द , चीन से; हषवधन के काल म सी-यू-क — नालंदा वश्व व ालय, कन्नौज सभा और तत्कालीन भारत
का चत्र।
अल - ग्यारहव शताब्द , मध्य ए शया से कताब-उल- हद (तहक क-ए- हद) — भारतीय ज्ञान, ग णत, ज्यो तष
िबरूनी और समाज का अध्ययन।
इब्न बतूता चौदहव शताब्द , मोरक्को से; मुहम्मद बन र ा — दल्ली, डाक-व्यवस्था, बाज़ार और नगर-जीवन का ववरण।
तुगलक के काल म
यात्रा ‘खोज’ कैसे बनती है: ऊपर क दोन ता लकाएँ एक ही बात कहती ह — यात्री वह दे खता है जो वहाँ रहने
वाले के लए इतना सामान्य हो चुका है क दखता ही नह । इसी लए मौयकालीन पाट लपुत्र का सबसे अच्छा ववरण
एक यूनानी ने लखा, और कन्याकुमारी क बेकारी का सबसे मा मक वाक्य दल्ली से गए एक लेखक ने दज कया।
यात्रा-वृत्तांत इसी लए सा हत्य भी है और सामा जक दस्तावेज़ भी।
कैसे खोज: व ालय के पुस्तकालय म ‘यात्रा-वृत्तांत’ या ‘संस्मरण’ शीषक वाला खाना दे खए। हर पुस्तक के लए
एक काड बनाइए जसम चार बात ह — पुस्तक का नाम, लेखक, स्थान, प्रकाशन-वष — और एक ऐसा वाक्य
उता रए जो आपको सबसे अच्छा लगा। यही आपक अपनी ‘संदभ-सूची’ बनेगी।
मेरे दे श क धरती — पृष्ठ 93
अभ्यास › वषय से संवाद › मेरे दे श क धरती
वषय से सं वाद मान चत्र
प्र.1 कन्याकुमारी भारत के त मलनाडु राज्य म स्थत एक तट य शहर है जसके प्राकृ तक स दय का चत्रण पाठ म
हुआ है। 1. भारत के समुद्र तट पर स्थत अन्य राज्य के नाम तथा उनक अव स्थ त को भारत के मान चत्र पर
च त क जए।
भारत क मुख्य भू म क तटरेखा गुजरात से शुरू होकर प म बंगाल तक जाती है। प को मलाकर भारत क कुल तटरेखा
लगभग 7,516 कलोमीटर लंबी है। तट पर स्थत नौ राज्य और चार संघ राज्य क्षेत्र ह।
Page 15 of 54
Page 17
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
क्रम राज्य / संघ राज्य क्षेत्र कौन-सा समुद्र अव स्थ त (कहाँ है)
1 गुजरात अरब सागर सबसे उत्तर-प म म; कच्छ क खाड़ी और खंभात क
खाड़ी इसी के तट पर। भारत के कसी भी राज्य से लंबी
तटरेखा।
2 महारा अरब सागर गुजरात के द क्षण म, क कण तट।
3 गोवा अरब सागर महाराष्ट्र और कनाटक के बीच; सबसे छोटा तट य राज्य।
4 कन टक अरब सागर कनारा तट।
5 के रल अरब सागर मालाबार तट; प मी तट का द क्षणतम राज्य,
कन्याकुमारी के पड़ोस तक।
6 तिमलनाडु बंगाल क खाड़ी, हद महासागर और प्राय प का द क्षणी सरा; कन्याकुमारी इसी राज्य म
(कन्याकुमारी के पास) अरब सागर है। कोरोमंडल तट।
7 आंध पदे श बंगाल क खाड़ी त मलनाडु के उत्तर म, पूव तट।
8 ओिडशा बंगाल क खाड़ी पूव तट; चल्का झील और कोणाक इसी तट पर।
9 पिश्चम बंगाल बंगाल क खाड़ी सबसे उत्तर-पूव म; गंगा-डेल्टा और सुंदरबन।
10 दादरा और नगर हवेल ी तथा अरब सागर गुजरात और महाराष्ट्र के तट पर बखरे हुए भाग।
दमन और दीव (सं.रा.क्षेत्र)
11 पुद ुच्चेरी (सं.रा.क्षेत्र) बंगाल क खाड़ी और अरब सागर पुदु ेरी और कराइकल त मलनाडु के तट पर, यनम
आंध्र प्रदे श के तट पर, माहे केरल के तट पर।
12 ल क्ष ीप (सं.रा.क्षेत्र) अरब सागर केरल के प म म प्रवाल प का समूह।
13 अंडमान और िनकोबार ीप बंगाल क खाड़ी दे श के द क्षण-पूव म; भारत का द क्षणतम बदु इं दरा
समूह (सं.रा.क्षेत्र) पॉइंट यह (ग्रेट नकोबार) है।
मान चत्र पर च त करते समय ये चार बात ध्यान र खए:
1. पहले दो तट अलग-अलग रंग से भ रए — प मी तट (गुजरात से केरल तक, अरब सागर) और पूव तट
(त मलनाडु से प म बंगाल तक, बंगाल क खाड़ी)।
2. तीन जल-रा शय के नाम अवश्य ल खए — अरब सागर (प म), बंगाल क खाड़ी (पूव), हद महासागर
(द क्षण)।
3. प्राय प के सरे पर कन्याकुमारी को तारे से च ह्नत क जए और ल खए — ‘तीन का संगम-स्थल’।
4. प-समूह को भू लए मत — लक्ष प को प म म और अंडमान- नकोबार को पूव म अलग खाने (inset) म
दखाइए।
Page 16 of 54
Page 18
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
याद रखने का सरल क्रम: प म से द क्षण होते हुए पूव क ओर — गु–म–गो–क–के–त–आ–ओ–प (गुजरात,
महाराष्ट्र, गोवा, कनाटक, केरल, त मलनाडु , आंध्र प्रदे श, ओ डशा, प म बंगाल)।
प्र.2 2. यात्रा करना सभी को अ ा लगता है। आपके मन म भी कुछ जगह को दे खने क इ ा अवश्य हुई होगी।
अपनी पसंद क उन जगह क सूची नीचे दए गए शीषक के अनुसार बनाइए। (पयटन स्थल / राज्य जहाँ वह
स्थत है / पवतीय-समुद्र -मैदानी-अन्य क्षेत्र / जलवायु / घूमने का अनुकूल समय)
पुस्तक ने ता लका खाली छोड़ी है। नीचे वही ता लका पूरी भरकर द गई है — इसम हर तरह का क्षेत्र (पवतीय, समुद्र , मैदानी,
मरुस्थलीय, पठारी, वन) आ जाए, इसका ध्यान रखा गया है। आप इसे दे खकर अपनी पसंद क सूची बना सकते ह।
Page 17 of 54
Page 19
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
पयटन स्थल राज्य जहाँ वह पवतीय / समुद्र / जलवायु घूमने का अनुकूल
स्थत है मैदानी / अन्य क्षेत्र समय
क न्याकु मारी त मलनाडु समुद्र (तीन सागर का उष्ण-आद्र, वष भर अक्टू बर से माच
संगम) लगभग एक-सा तापमान
िशमला हमाचल प्रदे श पवतीय शीतोष्ण; स दय म माच से जून ( हमपात के
हमपात लए दसंबर–जनवरी)
ले ह–ल ाख ल ाख (संघ राज्य पवतीय (शीत-मरुस्थल) अत्य धक ठं डी और जून से सतंबर (शेष
क्षेत्र) शुष्क; बहुत कम वषा महीन म दर बंद)
गोवा (कलंगटु , गोवा समुद्र उष्ण-आद्र; जून– सतंबर नवंबर से फरवरी
पणजी) तेज़ मानसून
पुरी और कोणाक ओ डशा समुद्र उष्ण-आद्र; चक्रवात क अक्टू बर से फरवरी
आशंका (रथयात्रा आषाढ़ म)
जैस लमेर राजस्थान मरुस्थलीय अत्यंत गम-शुष्क ग्रीष्म, नवंबर से फरवरी
ठं डी रात
आगरा (ताजमहल ) उत्तर प्रदे श मैदानी अ त गम ग्रीष्म, ठं डा शीत अक्टू बर से माच
वाराणसी उत्तर प्रदे श मैदानी (गंगा तट) गम ग्रीष्म, आद्र वषा, अक्टू बर से माच (दे व
ठं डा शीत द पावली का तक म)
काज़ ीरंगा रा ीय असम वन एवं मैदानी (ब्रह्मपुत्र आद्र, भारी वषा नवंबर से अप्रैल (मानसून
उ ान घाट ) म उ ान बंद)
खजुराहो मध्य प्रदे श पठारी (बुंदेलखंड) गम-शुष्क ग्रीष्म, सुहावना अक्टू बर से माच
शीत
अंडमान (पोट अंडमान और समुद्र ( पीय) उष्ण-आद्र, भारी वषा दसंबर से अप्रैल
ब्ले यर , हैवलॉक ) नकोबार प समूह
ऋिषके श उत्तराखंड पवतीय-तराई (गंगा तट) सुहावना; ग्रीष्म म ठं डा, सतंबर से नवंबर तथा
वषा म भूस्खलन फरवरी से मई
‘घूमने का अनुकूल समय’ तय करने का नयम: तीन बात दे खए — (1) मौसम : अत्य धक गम , बफ़ या
मानसून वाले महीने छो ड़ए; (2) पहुँच : पहाड़ म दर और वन्य-उ ान वषा-ऋतु म बंद रहते ह; (3) आयोजन :
रथयात्रा, दे व द पावली या पुष्कर मेला जैसे अवसर उस स्थान को बलकुल बदल दे ते ह। और यह भी याद र खए क
जस समय भीड़ सबसे कम हो, वही समय अकसर दे खने के लए सबसे अच्छा होता है — ठ क वैसे ही जैसे लेखक
भीड़ वाली सड हल छोड़कर आगे बढ़ गया था।
Page 18 of 54
Page 20
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
3. कन्याकुमारी क भौगो लक स्थ त, प रवेश, महत्वपूण पयटन स्थल एवं जन-जीवन का वणन करते हुए बताइए
e
प्र.3
m l as
.co
क वहाँ क स्थ त आपके राज्य अथवा शहर/गाँव से कस प्रकार भन्न है?
a g
se m
g l a
a
क. भौगो लक स्थ त — कन्याकुमारी भारत के त मलनाडु राज्य के सबसे द क्षणी छोर पर बसा तट य शहर है। यही भारत क
com
मुख्य भू म का द क्षणतम बदु है। यहाँ तीन जल-रा शयाँ मलती ह — प म म अरब सागर, पूव म बंगाल क खाड़ी और
m .
द क्षण म हद महासागर। पाठ म लेखक ने ठ क यही बात लखी है — “अरब सागर, हद महासागर और बंगाल क खाड़ी — इन
ag
तीन के संगम-स्थल-सी वह चट्टान…”।
l a se
agऊँची-ऊँची लहर, रेत के ट ले (सड हल), दूर-दूर हटकर उगे ना रयल के झुरमुट,
ख. प रवेश — समुद्र म से उभरी हुई स्याह चट्टान,
तट के साथ-साथ चलती सूखी पहा ड़य क ंखला, और तट पर बछ कई-कई रंग वाली रेत। यहाँ का सबसे बड़ा आकषण है —
co m
m.
एक ही स्थान से समुद्र म सूय दय और सूयास्त दोन दे खा जा सकना। पाठ क पहली ही पं क्त यही कहती है — “कन्याकुमारी।
m a se
सुनहले सूय दय और सूयास्त क भू म।”
o
ग. महत्वपूणcपयटन स्थल —
. a g l
m
sववेeकानंद स्मारक च ान — तट से सौ-सवा-सौ गज भीतर समुद्र म; इसी पर स्वामी ववेकानंद ने समा ध लगाई थी।
g l a
a कन्याकुमारी (भगवती अम्मन) मं दर — “मं दर क लाल और सफेद लक र”, जनक चचा पाठ म है।
m a s
.co agl
तरुवल्लुवर क वशाल प्र तमा — पड़ोस क चट्टान पर (यह लेखक क यात्रा के बहुत बाद, सन् 2000 म बनी)।
se m
सड हल, गांधी स्मारक मंडपम और सूयास्त- बदु।
g l a
a
घ. जन-जीवन — मछली पकड़ना और नाव खेना (चार मल्लाह), शंख-मालाओं जैसे हस्त शल्प बेचना (दो स्थानीय नवयुव तयाँ),
होटल-गेस्ट हाउस म सेवा-काय (बैरे), फोटो-एलबम बेचना — यही मुख्य जी वकाएँ ह। और इनके पीछे है श क्षत बेकारी : “आठ
co m
हजार क आबाद म कम-से-कम चार-पाँच सौ श क्षत नवयुवक ऐसे ह जो बेकार ह।” साथ ही मं दर क घं टयाँ, सूय को अ य और
m .
e
भक्त क मंड लयाँ — धा मक जीवन भी उतना ही जीवंत है।
m l as
m .co a g
l a se
ag
se m
com g l a
m . a
ase
agl
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 19 of 54
Page 21
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
नमूना तुलना (मेरे शहर — मेरठ, उत्तर प्रदे श — से भन्नता):
बदु कन्याकुमारी मेरा शहर (गंगा-यमुना का मैदान)
धरातल समुद्र तट, चट्टान, रेत के ट ले, पीछे पहा ड़याँ समतल जलोढ़ मैदान; न समुद्र, न पहाड़
जल- ोत तीन समुद्र — पर पीने का मीठा पानी दुलभ नहर, नलकूप और गंगा क सहायक न दयाँ
जलवायु वष भर लगभग एक-सी उष्ण-आद्र; ऋतुएँ धुँधली तीखी ऋतुएँ — भीषण गम , वषा, कड़ी सद
जी वका मत्स्य-पालन, पयटन, हस्त शल्प, होटल-सेवा खेती (गन्ना, गेहूँ), खेल-सामग्री और कची जैसे लघु
उ ोग, व्यापार
भाषा त मल तथा मलयालम; पयटन के कारण अंग्रेज़ी और हद , खड़ी बोली तथा उदू
हद भी
भोजन चावल, ना रयल, मछली, इमली — सांभर, अप्पम, गेहूँ क रोट , दाल, दही, सरस का साग, गुड़
मीन-कुळं बु
दन क सूय दय-सूयास्त पर टक ; ज्वार-भाटा दनचया तय मंडी, बस-अ ा और खेत के काम पर टक
लय करता है
सबसे बड़ा अंतर: कन्याकुमारी म क्ष तज तीन ओर है और वह पानी का है; मेरे मैदानी शहर म क्ष तज खेत और
मकान से कटा हुआ है। इसी एक अंतर से वहाँ का जीवन-बोध बदल जाता है — जो व्य क्त रोज़ असीम समुद्र
दे खता है, उसके लए अपनी दूरी और अपनी सीमा का अथ अलग होता है।
उत्तर लखते समय: अपने शहर/गाँव का नाम लेकर ल खए और तुलना कम-से-कम चार बदुओं पर क जए —
धरातल, जलवायु, जी वका और भोजन/भाषा। केवल ‘वहाँ समुद्र है, यहाँ नह ’ लखना अधूरा उत्तर है; बताइए क
उस अंतर से लोग के काम और दनचया म क्या फ़क पड़ता है।
प्र.4 4. इस यात्रा-वृत्तांत म कन्याकुमारी म स्थत च ान को आ खरी च ान कहा गया है। पुस्तकालय या अन्य ोत
तथा समाज व ान के अपने शक्षक से बातचीत करके पता लगाइए क वतमान समय म भारत का अं तम छोर
(द क्षणतम बदु) कसे माना जाता है। उस स्थान के वषय म ल खए।
वतमान म भारत का द क्षणतम बदु ‘इं दरा पॉइंट’ है — जो कन्याकुमारी म नह , ब ल्क अंडमान और नकोबार द्व प समूह
के ग्रेट नकोबार द्व प के द क्षणी सरे पर है। कन्याकुमारी भारत क मुख्य भू म (स्थल-भाग) का द क्षणतम बदु है — और
लेखक ने भी बहुत सावधानी से यही लखा है : “म दे र तक भारत के स्थल-भाग क आ खरी चट्टान को दे खता रहा।”
Page 20 of 54
Page 22
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
बदु कन्याकुमारी इं दरा पॉइं ट
क्या है भारत क मुख्य भू म का द क्षणतम छोर स म्पूण भारत का दिक्षणतम िबंद ु
कहाँ त मलनाडु , प्राय प का सरा ग्रेट नकोबार प, अंडमान और नकोबार प समूह
अक्षांश (लगभग) 8° उत्तर लगभग 6°45′ उत्तर — यानी भूमध्य रेखा के और पास
पुराने नाम — पग्मे लयन पॉइंट, पारसन पॉइंट
इं दरा पॉइंट के वषय म जानने योग्य बात —
यह ग्रेट नकोबार प के द क्षणी सरे पर है और यहाँ एक प्रकाश-स्तंभ (लाइट हाउस) बना है। यहाँ से इंडोने शया का सुमात्रा
प लगभग डेढ़ सौ कलोमीटर ही दूर है।
सन् 2004 के हद महासागर के सुनामी म यह क्षेत्र बुरी तरह प्रभा वत हुआ और यहाँ क भू म कुछ मीटर नीचे धँस गई;
प्रकाश-स्तंभ का नचला भाग पानी म डू ब गया।
ग्रेट नकोबार म ग्रेट नकोबार बायो यर रज़व है, जहाँ वशाल केकड़ा, नकोबारी मेगापोड और चमड़े-पीठ वाला वशाल
कछु आ पाए जाते ह। यहाँ शो ेन और नकोबारी जनजा तयाँ रहती ह।
यह क्षेत्र संर क्षत है, इस लए सामान्य पयटक यहाँ बना अनुम त नह जा सकते।
तो क्या पाठ का शीषक ग़लत है? बलकुल नह । ‘आ खरी चट्टान’ लेखक के लए दो अथ रखती है — भौगो लक
(स्थल-भाग क अं तम चट्टान) और भावात्मक (जहाँ से आगे केवल असीम जल है, यानी जहाँ मनुष्य क सीमा
समाप्त होती है)। दूसरा अथ ही वृत्तांत क आत्मा है — इसी लए लेखक वहाँ खड़े होकर स्वयं को ‘बड़ी-बड़ी चट्टान
के बीच एक छोट -सी चट्टान’ अनुभव करता है।
याद र खए (परीक्षा के लए चार छोर): उत्तर — इं दरा कॉल (ल ाख, सया चन के पास); द क्षण — इं दरा
पॉइंट (ग्रेट नकोबार); पूव — क बथू क्षेत्र (अरुणाचल प्रदे श); प म — गुहार मोती (कच्छ, गुजरात)। और मुख्य
भू म का द क्षणी छोर — कन्याकुमारी।
प्र.5 5. इंटरनेट या अन्य कन्ह माध्यम से पता लगाइए क आ खरी च ान म व णत कन्याकुमारी के ववेकानंद
स्मारक च ान के स्वरूप म कस प्रकार का वस्तार हुआ है? (संकेत– तरुवल्लुवर क प्र तमा इत्या द)
मोहन राकेश ने जस चट्टान को दे खा था, वह लगभग नंगी चट्टान थी — “चट्टान तट से सौ-सवा-सौ गज आगे समुद्र के बीच जाकर
है”, जहाँ पहुँचने का साधन केवल मल्लाह क क ी मछु आ नाव थी। आज वहाँ का स्वरूप बहुत बदल चुका है।
Page 21 of 54
Page 23
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
क्या जुड़ा कब ववरण
िववेक ानंद रॉक सन् 1970 चट्टान पर बना स्मारक, जो एकनाथ रानाडे के प्रयत्न से दे श भर के जन-सहयोग से बना। इसम दो मुख्य
मेमोिरयल भाग ह — ववेकानंद मंडपम (जहाँ स्वामी जी क काँसे क प्र तमा है) और श्रीपाद मंडपम (जहाँ दे वी
कन्याकुमारी के चरण- चह्न माने जाते ह)। भीतर ध्यान-मंडपम भी है, जहाँ लोग मौन बैठ सकते ह।
स्थापत्य म दे श के अलग-अलग अंचल क मं दर-शै लयाँ मलाई गई ह।
ितरुवल्लुवर 1 जनवरी पड़ोस क चट्टान पर त मल संत-क व तरुवल्लुवर क वशाल पाषाण-प्र तमा। कुल ऊँचाई 133 फुट —
की पितमा 2000 38 फुट का आधार-मंडप और उस पर 95 फुट क मू त। यह 133 क संख्या तरुक्कुरल के 133 अध्याय
क प्रतीक है। शल्पी — वी. गणप त स्थप त।
नौका (फे री) स्मारक अब सरकारी फेरी नय मत रूप से या त्रय को तट से चट्टान तक ले जाती है। मोहन राकेश को जस ‘रबड़
से वा बनने के पेड़ के तीन तन ’ वाली नाव म जाना पड़ा था, उसक अब आवश्यकता नह रही।
बाद से
िववेक ानंद कें द 1972 से स्मारक के साथ जुड़ी सेवा-संस्था, जो शक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण वकास के काम करती है। स्मारक के
प रसर म प्रदशनी और पुस्तकालय भी ह।
पयटक बाद के घाट, टकट-घर, प्रतीक्षालय, प्रकाश-व्यवस्था और सुरक्षा-रे लग। समुद्र म तेज़ लहर के दन म फेरी बंद
सुिवधाएँ वष म कर द जाती है।
इस बदलाव को कैसे दे ख: इस प्रश्न का उत्तर केवल सूची नह है — एक वचार भी है। स्मारक बनने से वह चट्टान
सुलभ हो गई : आज हज़ार लोग वहाँ जा पाते ह। पर उसी के साथ वह एकांत भी चला गया जसम मोहन राकेश ने
‘श क्त का वस्तार, वस्तार क श क्त’ महसूस कया था और जसम कभी ववेकानंद ने तीन दन ध्यान लगाया था।
वकास सु वधा दे ता है और एकांत ले लेता है — कसी भी तीथ या प्राकृ तक स्थल के बारे म यह प्रश्न हमेशा बना
रहेगा। कक्षा म इसी पर दो पक्ष बनाकर चचा क जए।
खोजने का तरीका: ‘ ववेकानंद रॉक मेमो रयल’ और ‘ तरुवल्लुवर स्टै चू’ पर पयटन वभाग तथा भारत सरकार के
सूचना- ोत दे खए। जो भी तथ्य ल, उसके साथ वष ल खए और ोत का नाम अपनी कॉपी म दज क जए — यही
अच्छ खोजबीन का ढं ग है।
हस्त शल्प कौशल — पृष्ठ 93 और 94
Page 22 of 54
Page 24
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
अभ्यास › वषय से संवाद › हस्त शल्प कौशल
वषय से सं वाद प रयोजना
प्र.1 1. कसी भी स्थानीय शल्पकार से बात करके नम्न ल खत बदुओं पर जानकारी संगृहीत क जए। यह काय दो-
दो के जोड़े म क जए— ( शल्प का नाम / यह काय कब से कर रहे ह? / इसका प्र शक्षण कहाँ से लया? / शल्प
नमाण म घर क म हलाओं क साझेदारी / प्रयुक्त सामग्री, तकनीक, लागत और वपणन / औपचा रक
संस्थागत प्र शक्षण)
यह साक्षात्कार (इंटरव्यू) पर आधा रत प रयोजना है। पहले तरीका, फर पूरा भरा हुआ नमूना।
साक्षात्कार का तरीका:
1. जोड़ी म बाँट ली जए — एक साथी प्रश्न पूछे, दूसरा उत्तर लखे। बाद म दोन मलकर ता लका भर।
2. पहले अनुम त ली जए। अपना प रचय द जए, बताइए क यह व ालय का काय है, और पू छए क फ़ोटो
लेना ठ क रहेगा या नह ।
3. काम के समय मत जाइए। शल्पकार का समय ही उसक कमाई है। पहले पूछ ली जए क कब सु वधा होगी।
4. बंद प्रश्न मत पू छए। ‘क्या काम अच्छा चलता है?’ के बदले पू छए ‘ पछले महीने कतने टु कड़े बके और कहाँ
बके?’
5. ठोस आँकड़े ली जए — क े माल का दाम, एक टु कड़ा बनने म लगने वाला समय, बक्र का दाम। इनसे ही
असली स्थ त समझ आती है।
6. अंत म धन्यवाद द जए और तैयार रपोट क एक प्र त उन्ह दखाइए/द जए।
Page 23 of 54
Page 25
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
नमूना उत्तर — साक्षात्कार : श्री राम कशोर प्रजाप त, आयु 52 वष, ग्राम बरगदही (मूँज और बाँस क
m as e
l
टोकरी- शल्प)
m .co a g
l a se
g
बदु प्राप्त जानकारी
a शल्प का नाम मूँज घास और बाँस की टोकरी, डिलया, दउरी तथा सजावटी कटोरदान बनाना।
co m
यह काय कब से कर रहे
em .
लगभग 35 वष से। बारह वष क अवस्था से पता के साथ बैठना शुरू कया था। यह उनका पैतृक शल्प
ag
l as
ह? है — तीन पी ढ़य से।
इसका प्र शक्षण कहाँ से a g
कसी संस्था से नह — घर पर, पता और दाद से दे खकर सीखा। उन्ह ने कहा, “हमने कताब से नह ,
om
लया? हाथ से सीखा है।”
बहुत बड़ी, पर प्रायः अनदे खी। मूँज को साफ़ करना, धूप म सुखाना, रंगना और गूm
. c
m
शल्प नमाण म घर क
घर क म हलाएँ करती ह। पत्नी और बड़ी बहू दन म पाँच-छह घंटे यही lकरती s e
a ह। बक्र के समय बाज़ार
ँथना — यह सारा काम
. co
म हलाओं क साझेदारी
a g
se m प्रायः पुरुष जाते ह, इस लए कमाई का हसाब उनके नाम नह चढ़ता।
l a
ag प्रयुक्त सामग्री मूँज (सरपत) घास, कासा, बाँस क खप याँ, सुतली और रंग। मूँज नद के कनारे से काटकर लाई
s
जाती है; बाँस बाज़ार से।
com→ सुखाना → रंगना → बाँस क खप ी के गोल ढाँचे पर सूए a
घास को भगोकर मुलायम .करना
em agl
(आँकड़ी) से लपेटs
तकनीक
a
l टकर गूँथना। एक मझोली टोकरी म लगभग छह घंटे लगते ह। कोई मशीन नह —
काgकाम।
सब हाथ a
-लपे
लागत
co m
एक मझोली टोकरी म क ा माल लगभग ₹40–50 और श्रम छह घंटे। बनाकर वे इसे ₹150 से ₹200
m .
e
म बेचते ह।
m l as
m .co a g
se
वपणन ( बक्र ) मुख्यतः साप्ता हक हाट और शाद -ब्याह के मौसम म स्थानीय ऑडर। कभी-कभी बचौ लया थोक म
l a
₹100 प्र त टोकरी म ले जाता है और शहर म ₹350 म बेचता है। ऑनलाइन बक्र का अनुभव नह है;
ag स्माटफ़ोन बेटे के पास है।
se m
o m l a
औपचा रक संस्थागत नह लया। दो वष पहले जला उ ोग कद्र से एक श वर क सूचना आई थी, पर काम छोड़कर सात दन
.c a g
m
प्र शक्षण जाना संभव नह हुआ। कारीगर पहचान-पत्र बन चुका है।
l a se
नष्कष (जो हमने समझा): इसgशल्प म क ठनाई कौशल क नह , बाज़ार क है। जो टोकरी वे ₹150 म बेचते ह,
a
वही शहर म ₹350 क बकती है — यानी सबसे बड़ा लाभ बचौ लये को जाता है। य द यह प रवार सीधे शहर के
co m
.
ग्राहक तक पहुँच सके, तो उसी मेहनत म कमाई दोगुनी हो सकती है।
e m
m l as
.co a g
a s em
agl 2. ड जटल खरीददारी और ई-वा णज्य कुट र उद्योग को बढ़ावा दे ने म कस प्रकार उपयोगी है?
c
प्र.2
m .
s e
. com a gla
m बड़ी द वार गरा दे ता है — बाज़ार तक पहुँच क द वार। पहले कारीगर क
ई-वा णज्य कुट र उद्योग के सामने खड़ीeसबसे
s
a
agl सामान सर पर या साइ कल पर ले जा सकता था; अब उसका सामान देश- वदेश के ग्राहक
पहुँच वह तक थी जहाँ तक वह अपना
तक पहुँच सकता है।
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 24 of 54
Page 26
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
लाभ यह कैसे काम करता है
1. िबचौिलया हट जाता है कारीगर सीधे ग्राहक को बेचता है, इस लए बीच का मुनाफ़ा उसी को मलता है। ऊपर वाले नमूने म ₹150 क
टोकरी शहर म ₹350 क बकती थी — यह अंतर सीधे कारीगर क कमाई बन सकता है।
2. बाज़ ार असीिमत हो जाता साप्ता हक हाट म सौ ग्राहक आते ह; ऑनलाइन मंच पर लाख । मौसमी मंद का असर भी घटता है, क्य क
है कसी-न- कसी क्षेत्र म माँग बनी रहती है।
3. सरकारी मंच उपल ब्ध है ं GeM (सरकारी खरीद), ODOP (एक जला एक उत्पाद), तथा बड़े मंच के वशेष कायक्रम — कारीगर
को पंजीकरण, फ़ोटो और सूची बनाने म सहायता दे ते ह।
4. िडिजटल भुग तान से पूँजी UPI से तुरंत भुगतान मलता है — उधार क लंबी प्रतीक्षा नह । लेन-दे न का ड जटल रकॉड बनने से बक-
घूमती है ऋण मलना भी आसान होता है।
5. पहचान और कहानी सोशल मी डया पर बनाने क प्र क्रया का वी डयो डालने से उत्पाद को ‘हाथ का बना’ होने क पहचान मलती
िबकती है है। GI टै ग (जैसे मधुबनी चत्रकला, चंदेरी साड़ी) वाले उत्पाद क माँग और दाम, दोन बढ़ते ह।
6. दाम अपने हाथ में कारीगर अपने उत्पाद क क मत स्वयं तय करता है और ग्राहक क प्र त क्रया सीधे पढ़ पाता है, जससे वह
डज़ाइन सुधार सकता है।
7. घर से काम — मिहलाओं जो म हलाएँ बाज़ार नह जा पात , वे घर बैठे स्वयं-सहायता समूह के माध्यम से बेच सकती ह। इससे कमाई
के िलए िवशेष लाभ पर उनका अपना नयंत्रण बनता है।
पर एक संतु लत उत्तर यह भी बताएगा क क ठनाइयाँ क्या ह: ड जटल साक्षरता का अभाव, गाँव म कमजोर
इंटरनेट, अच्छ फ़ोटो और पै कग क ज़रूरत, टू ट-फूट और वापसी ( रटन) का नुकसान, मंच का कमीशन, और
कु रयर क पहुँच। इस लए केवल इंटरनेट पहुँचा दे ना काफ़ नह — कारीगर को प्र शक्षण, पैके जग और ऋण क
सहायता भी चा हए। तभी ई-वा णज्य कुट र उ ोग के लए सचमुच वरदान बनेगा।
प्र.3 3. हस्त शल्प कला को बढ़ावा दे ने के लए सरकार द्वारा कए जा रहे प्रयास क जानकारी इक ा क जए और
अपनी कक्षा म उस पर चचा क जए।
हस्त शल्प का काम भारत म खेती के बाद सबसे बड़ा रोज़गार दे ने वाला क्षेत्र माना जाता है, इस लए सरकार के प्रयास कई स्तर पर
चलते ह। नीचे उन्ह चार वग म बाँटकर दया गया है।
Page 25 of 54
Page 27
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
वग प्रमुख प्रयास कारीगर को क्या
मलता है
1. संस्थागत वस्त्र मंत्रालय के अधीन वकास आयुक्त (हस्त शल्प) का कायालय; हस्त शल्प नयात नी त, पंजीकरण,
ढाँचा संवधन प रषद (EPCH); राज्य स्तर पर हस्त शल्प वकास नगम। नयात म सहायता और
कारीगर पहचान-पत्र।
2. पिशक्षण रा ीय हस्त शल्प वकास कायक्रम; अंबेडकर हस्त शल्प वकास योजना (समूह बनाकर नया कौशल, आधु नक
और कौशल वकास); डज़ाइन और तकनीक के श वर; पीएम वश्वकमा योजना (2023) — इसम बढ़ई, औज़ार और नई
लोहार, कुम्हार, टोकरी-बुनकर स हत 18 पारंप रक शल्प को प्र शक्षण, प्र शक्षण-भत्ता, डज़ाइन क समझ।
औज़ार खरीदने के लए सहायता और रयायती ऋण दया जाता है।
3. बाज़ ार दस्तकार हाट, सूरजकुंड अंतररा ीय शल्प मेला, राज्य ए ो रयम; ODOP (एक जला बना बचौ लये के
और िवपणन एक उत्पाद); GeM पर पंजीकरण; ई-वा णज्य मंच से जोड़ने के कायक्रम; भौगो लक बक्र , ब्रांड-पहचान
संकेतक (GI) टै ग — जैसे मधुबनी चत्रकला, चंदेरी वस्त्र, चन्नापटना खलौने। और बेहतर दाम।
4. स म्मान शल्प गुरु पुरस्कार तथा रा ीय हस्त शल्प पुरस्कार; कारीगर के लए बीमा और पशन प्र तष्ठा, सामा जक
और सुरक्षा योजनाएँ; मुद्रा ऋण तथा स्वयं-सहायता समूह को ऋण। सुरक्षा और कायशील
पूँजी।
कक्षा-चचा के लए तीन प्रश्न:
1. योजनाएँ इतनी ह, फर भी हमारे क्षेत्र का कारीगर उन तक क्य नह पहुँच पाता? (उत्तर म जानकारी का अभाव,
कागज़ी प्र क्रया, काम छोड़कर जाने का नुकसान — ये बदु उभरने चा हए।)
2. हाथ के बने सामान का दाम मशीन के बने सामान से अ धक क्य होता है, और क्या यह उ चत है?
3. हम व ाथ क्या कर सकते ह? — व ालय म शल्प-मेला लगाना, उपहार के रूप म स्थानीय हस्त शल्प दे ना,
कारीगर के काम का वी डयो बनाकर उनक बक्र म सहायता करना।
पाठ से जो ड़ए: कन्याकुमारी म शंख-मालाएँ बेचती वे “दो स्थानीय नवयुव तयाँ” इसी परंपरा का हस्सा ह। और
वह बैठा वह ग्रेजुएट नवयुवक जो फोटो-एलबम बेचकर गुज़ारा करता है — वही बताता है क य द स्थानीय
हस्त शल्प को सही बाज़ार और उ चत दाम मले, तो वह केवल कला नह , श क्षत युवाओं के लए रोज़गार भी बन
सकता है।
मलकर चल — पृष्ठ 94
Page 26 of 54
Page 28
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
अभ्यास › वषय से संवाद › मलकर चल
वषय से सं वाद समावे श न
प्र.1 आपक कक्षा म कुछ वशेष आवश्यकता वाले साथी भी ह गे जन्ह अपने दै नक जीवन म अनेक तरह क
समस्याओं से जूझना पड़ता होगा। 1. ऐसे सा थय को अगर कसी यात्रा पर जाना हो तो उनके समक्ष कस प्रकार
क चुनौ तयाँ आ सकती ह?
चुनौ तयाँ हर साथी के लए अलग होती ह, इस लए उन्ह आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग दे खना चा हए। ध्यान द जए —
अ धकतर क ठनाइयाँ व्य क्त क नह , वातावरण क बनाई हुई होती ह।
साथी क आवश्यकता यात्रा म आने वाली चुनौ तयाँ
चलने-िफरने में किठनाई बस-रेल म ऊँचे पायदान; प्लेटफ़ॉम पर लफ़्ट या रप का न होना; होटल के कमरे और शौचालय का सँकरा
(व्हीलचेयर या बैस ाखी) दरवाज़ा; रेत, चट्टान, सीढ़ दार घाट और मं दर क ऊँची सी ढ़याँ; नाव पर चढ़ना-उतरना। इस पाठ के
कन्याकुमारी जैसे स्थल पर तो रेत के ट ले और नुक ली चट्टान ही सबसे बड़ी बाधा बन जाएँगी।
दृ िष्टबािधत साथी अनजान जगह म दशा-बोध का न होना; सूचना-पट्ट केवल दे खकर पढ़े जाने वाले होते ह (ब्रेल या ध्व न-सूचना
नह ); भीड़ म बछड़ जाने का डर; असमतल और खुले ग वाले रास्ते; प्रदशनी या स्मारक का ‘ सफ़ दे खा जा
सकने वाला’ होना — छू कर समझने क व्यवस्था न होना।
श्रवणबािधत साथी बस/रेल क उ ोषणाएँ केवल बोलकर होती ह; प्लेटफ़ॉम बदलने या समय बदलने क सूचना छू ट जाती है;
गाइड क बात समझ न आना; आपात स्थ त म सायरन सुनाई न दे ना; सांके तक भाषा जानने वाले का न
होना।
वाणी-संबंधी किठनाई टकट, भोजन या सहायता माँगने म असु वधा; लोग का धैय न रखना और बीच म ही बात काट दे ना।
बौिद्धक अथवा स्वलीनता दनचया के अचानक बदलने से घबराहट; भीड़, तेज़ आवाज़ और चमकती रोशनी से बेचैनी; लंबी प्रतीक्षा; शांत
(ऑिट म़ ) संबंध ी होकर बैठने क जगह का न होना।
आवश्यकता
सभी के िलए साझा दवाइय और उपकरण को समय पर पहुँचाना; भीड़ म अलग होने का डर; लोग क घूरती नज़र और अवां छत
चुनौितयाँ दया; और सबसे बड़ी बात — पहले से यह जानकारी न मल पाना क जस स्थान पर जा रहे ह, वहाँ
सुगम्यता क कतनी व्यवस्था है।
मूल बात: जस दन बस म रप लग जाता है, उसी दन ‘चल न पाना’ यात्रा क बाधा नह रह जाता। इस लए समस्या
को इस तरह कहना चा हए — “रास्ता सबके लए नह बना, इस लए क ठनाई है”, न क “उन्ह क ठनाई है”।
Page 27 of 54
Page 29
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 2. उनक व शष्ट आवश्यकताओं को ध्यान म रखकर कुछ ऐसे सुझाव द जए जो उनक यात्रा को सहज बनाने म
उपयोगी ह ।
सुझाव को तीन चरण म बाँ टए — यात्रा से पहले, यात्रा के दौरान, और व्यवहार के स्तर पर।
क. यात्रा से पहले (सबसे ज़रूरी चरण)
जस स्थान पर जाना है, वहाँ क सुगम्यता क जाँच पहले कर ली जए — रप, लफ़्ट, सुलभ शौचालय, बैठने क जगह।
रेल- टकट म दव्यांगजन क सु वधा वाली सीट/कोच पहले से बुक क जए और स्टे शन पर व्हीलचेयर क माँग दज करा
द जए।
जोड़ीदार व्यवस्था (बडी सस्टम) बनाइए — हर साथी के साथ एक न त सहपाठ , जो पूरे समय साथ रहे।
यात्रा-कायक्रम क एक प्र त बड़े अक्षर म तथा चत्र-संकेत के साथ बनाइए, ता क हर साथी जान सके क आगे क्या होगा।
दनचया पहले से पता होना घबराहट कम करता है।
दवाइयाँ, अ त रक्त बैटरी, श्रवण-यंत्र, छड़ी क मरम्मत का सामान — सूची बनाकर र खए।
ख. यात्रा के दौरान
दृ ष्टबा धत साथी के लए — रास्ते का बोलकर वणन क जए (“चार सी ढ़याँ नीचे, फर दाएँ मुड़ना है”)। स्मारक क स्पश-
प्र तकृ त या मॉडल हो तो उसे छू ने द जए। कोहनी पकड़कर आगे मत ख चए — अपनी कोहनी थमा द जए और उन्ह चलने
द जए।
श्रवणबा धत साथी के लए — हर सूचना लखकर या फ़ोन पर टाइप करके द जए; बोलते समय मुँह दखाई दे ता रहे; समूह
म कोई एक सदस्य भारतीय सांके तक भाषा के बु नयाद संकेत सीख ले।
चलने म क ठनाई वाले साथी के लए — हर एक-डेढ़ घंटे म वश्राम-ठहराव र खए; रास्ता ऐसा चु नए जसम सी ढ़याँ कम
ह ; व्हीलचेयर के लए ढलान वाला रास्ता पहले दे ख ली जए।
स्वलीनता या बौ द्धक आवश्यकता वाले साथी के लए — भीड़ के समय से ब चए, एक शांत जगह तय र खए जहाँ बेचैनी
होने पर बैठा जा सके, और अचानक कायक्रम मत बद लए।
सबके लए — पहचान-पत्र गले म, उस पर शक्षक का फ़ोन नंबर; और मलने का एक न त स्थान तय, ता क बछड़ने पर
वह पहुँचा जा सके।
ग. व्यवहार के स्तर पर (सबसे कम खच, सबसे अ धक असर)
सहायता करने से पहले पू छए — “म क्या मदद कर सकता हूँ?” बना पूछे हाथ पकड़ लेना सहायता नह , हस्तक्षेप है।
बात उन्ह से क जए, उनके साथ आए व्य क्त से नह ।
व्हीलचेयर, छड़ी या श्रवण-यंत्र उनके नजी स्थान का हस्सा ह — बना अनुम त उन्ह मत छु इए।
धैय र खए। जल्दबाज़ी सबसे बड़ी बाधा है।
बड़ा संदभ: भारत सरकार का सुगम्य भारत अ भयान (Accessible India Campaign) ठ क यही काम
करता है — सावज नक भवन , प रवहन और वेबसाइट को सबके लए उपयोगी बनाना। और दव्यांगजन
अ धकार अ ध नयम, 2016 सुगम्यता को दया नह , अ धकार मानता है। यही दृ ष्ट आपके सुझाव म भी दखनी
चा हए।
Page 28 of 54
Page 30
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक
a g l AglaSem · NCERT Solutions
m
प्र.3
m .co
3. अपने द्वारा दए गए सुझाव पर वद्यालय के वशेष शक्षा शक्षक के साथ चचा क जए और सम झए क
आपके द्वारा सुझाए गए उपाय कतने प्रभावी ह तथा उनम और क्या बदलाव कए जा सकतेeह?
c o m g l as
m . a
उत्तर as
e
l
agक्रयात्मक
यह काय है — इसम आपको अपने सुझाव को जाँच के लए कसी वशेषज्ञ के सामने रखना है।
co m
कैसे क जए:
e m . ag
g l as
a
1. अपने सारे सुझाव एक कागज़ पर तीन खान म ल खए — सुझाव, कस साथी के लए, क्या चा हए (लागत/
समय/व्य क्त)।
co m
m.
2. वशेष शक्षा शक्षक से समय लेकर म लए और हर सुझाव पर तीन प्रश्न पू छए — क्या यह व्यावहा रक है?
क्या यह सम्मानजनक है? इसम क्या जोड़ा जाए?
m as e
.co
3. उनक हर टप्पणी को सुझाव के सामने ही लख ली जए — उसे मटाइए मत। सुधरे हुए सुझाव को नीचे नए रंग
a g l
a s eसेmल खए।
a gl 4. अंत म एक अं तम सूची बनाइए और उसे कक्षा के सूचना-पट्ट पर लगाइए।
m a s
m.co agl
se
नमूना उत्तर — हमारी चचा म क्या नकला:
g l a
हमारा सुझाव
aशक्षक क टप्पणी सुधरा हुआ रूप
अपनी कोहनी आगे कीिजएc,oवे m
. उसे पकड़ ेंगे और
emंगे — िदशा वे स्वयं महसूस
“दृ ष्टबा धत साथी का हाथ “उन्ह ख चए मत। यह सहायता कम,
करे ंगे। las
आधा कदम पीछे चले
m
पकड़कर चलगे।” नयंत्रण अ धक लगता है।”
. co ag
m
e “श्रवणबा धत साथी को सब बाद म
g l as
a
“बाद म बताना छू ट जाने जैसा ही है। समूह के मोबाइल पर एक साझा संदे श-समूह
बता दगे।” सूचना उसी समय चा हए।” बनाइए ; हर उद् घ ोषणा तुरंत टाइप कर दीिजए।
se m
com g l a
.
पूरे समूह की चाल धीमी रिखए और माग ऐसा
a
“व्हीलचेयर वाले साथी को सबसे “सबसे पीछे रखना अलग कर दे ना है।
m
ase
पीछे रखगे ता क सु वधा रहे।” वे भी समूह के बीच म चल।” चुिनए िजसमें सीिढ़ याँ न हों; साथी बीच में रहे।ं
“मं दर क सी ढ़य पर उन्ह उठाकर agl“उठाना अं तम उपाय है और असुर क्षत पहले से पता कीिजए िक रै ंप या िल ़ ट कहाँ है; न
ले जाएँगे।” भी। पहले वैक ल्पक रास्ता खो जए।” हो तो वहाँ का काय म बदल दीिजए , साथी को
m
क्र
co
नही ं।
m .
m as e
.co a g l
हमने जो सबसे बड़ी बात सीखी: हमारे अ धकतर सुझाव ‘मदद’ के इरादे से बने थे, पर उनम से कई नणय हमारे
a s em हाथ म रख रहे थे। शक्षक ने कहा — “सहायता वह है जसम दूसरा व्य क्त अपने काम का स्वामी बना रहे।”
agl
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 29 of 54
Page 31
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 4. प्राप्त सुझाव के वषय म कक्षा के वशेष आवश्यकता वाले सा थय से भी चचा क जए और उनक राय
जानने का प्रयास क जए।
यह पूरी ग त व ध का सबसे महत्वपूण चरण है — और अकसर सबसे अ धक छू टने वाला भी। अब तक हमने सा थय के बारे म
बात क ; अब हम सा थय से बात करनी है।
कैसे बात क जए:
1. अलग बुलाकर नह , सामान्य ढं ग से। उन्ह ‘ वषय’ मत बनाइए। बातचीत ऐसे शुरू क जए — “हम कक्षा-
यात्रा क योजना बना रहे ह, तुम्ह क्या ठ क लगेगा?”
2. उनक बात पूरी सु नए। वाक्य बीच म मत पूरा क जए, चाहे बोलने म समय लगे।
3. वही पू छए जो वे बदल सकते ह — कहाँ रुकना है, कतनी दे र चलना है, कौन-सी जगह छोड़ी जा सकती है।
4. ‘न’ को भी स्वीकार क जए। हो सकता है वे कसी सुझाव को अनावश्यक या असहज बताएँ — वही सबसे
मूल्यवान जानकारी है।
5. जो तय हो, उसे लखकर पूरी कक्षा को सुनाइए, ता क नणय साझा हो जाए।
नमूना उत्तर — हमारे सा थय ने क्या कहा:
आ दत्य (व्हीलचेयर का प्रयोग करते ह): “मुझे सबसे बुरा तब लगता है जब सब मुझे उठाने के लए इकट्ठा हो
जाते ह। मुझे यह चा हए क जगह पहले से दे ख ली जाए। और यह मत सो चए क म थक जाऊँगा — पूछ
ली जए, म बता दूँ गा।”
रुखसाना (दृ ष्टबा धत ह): “मुझे रास्ते का वणन अच्छा लगता है, पर बार-बार ‘सँभलकर, सँभलकर’ कहने से
घबराहट होती है। एक बार बता द जए क आगे क्या है — म सँभाल लूँगी। और अगर कह कोई चीज़ छू कर
दे खने को मल जाए, तो वह जगह मुझे सबसे अच्छ लगती है।”
न तन (श्रवणबा धत ह): “जब सब हँसते ह और मुझे पता ही नह चलता क कस बात पर — तब सबसे
अकेला लगता है। कसी एक साथी का काम यही हो क वह मुझे साथ-साथ बताता रहे। और गाइड जब बोले,
तब कोई मेरे लए लख दे ।”
इन राय से हमारी योजना म तीन बदलाव हुए — (1) यात्रा से पहले स्थान क सुगम्यता क जाँच अ नवाय कर
द गई; (2) हर साथी के लए एक न त ‘जोड़ीदार’ तय हुआ, जो सूचना और बातचीत दोन साझा करेगा; (3)
कायक्रम म एक ऐसा स्थान जोड़ा गया जहाँ चीज़ छू कर दे खी जा सक (संग्रहालय का स्पश-खंड)।
सीखने क बात: जनके लए योजना बन रही हो, उनसे पूछे बना बनी योजना अधूरी रहती है। इसी सोच का सूत्र है
— “हमारे बारे म, हमारे बना कुछ नह ” (Nothing about us, without us)।
प्रकृ त क ओर — पृष्ठ 94
Page 30 of 54
Page 32
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
अभ्यास › सृजन › प्रकृ त क ओर
सृ ज न ले ख न
प्र.1 क्या आपने कभी सूय दय और सूयास्त के समय का दृश्य दे खा है? अगर नह तो एक दन सुबह जल्द उठकर
उगते सूरज क ला लमा को दे खए और अस्त होते सूय के साथ शाम का भी आनंद ली जए। अब इन दोन दृश्य
क तुलना करते हुए अपने अनुभव का वणन क जए।
यह दे खकर लखने का काम है, याद से लखने का नह । इस लए पहले दे खने का तरीका, फर तुलना क ता लका, फर पूरा
नमूना उत्तर।
दे खते समय क्या-क्या दज क जए:
1. समय ल खए। कब आकाश हल्का हुआ, कब सूय क पहली करण दखी, कब पूरा गोला ऊपर आया — तीन
का समय। यही ब्योरा आपके वणन को स ा बनाएगा।
2. रंग का क्रम ल खए, केवल ‘लाल’ मत ल खए। मोहन राकेश ने सूयास्त म यही कया — सोना → लहू →
बजनी → काला।
3. आवाज़ भी ल खए। सुबह च ड़य , घं टय और झाड़ू क आवाज़; शाम म लौटते पक्षी, बतन और वाहन क
आवाज़।
4. अपना मन भी ल खए। दृश्य के साथ क्या भाव उठा — यही सबसे ज़रूरी है, क्य क दृश्य सबको एक-सा
दखता है, भाव सबका अपना होता है।
बदु सूय दय सूयास्त
रंग का क्रम स्याही → धूसर → हल्का गुलाबी → केस रया → सुनहला सुनहला → केस रया → लाल (‘लहू’) → बजनी → काला
→ सफ़ेद-चमक ला
गत अँधेरा धीरे-धीरे खुलता है; उजाला फैलता जाता है उजाला जल्द -जल्द समटता है; अँधेरा एकाएक घर आता
है
आवाज़ बढ़ती हुई — पक्षी, घं टयाँ, दूध वाला, ब क आवाज़ घटती हुई — लौटते प क्षय का अं तम शोर, फर सन्नाटा
हवा और ठं डी, नम, हल्क ; ओस दखती है दन क गरमी लए हुए, फर धीरे-धीरे ठं डी
तापमान
मन का भाव आरंभ, ताज़गी, उत्साह, आशा पूणता, थकान, शां त और हल्क उदासी
पाठ म “छोटे -छोटे प क तरह समुद्र म बखरी चट्टान क ओट “सूय का गोला जैसे एक बेबसी म पानी के लावे म डू बता जा
से सूय उ दत हो रहा था।” — साथ म मं दर क घं टयाँ और रहा था।” — साथ म स्याही फैलना और झुरमुट का ‘ सर
अय धुनना’
Page 31 of 54
Page 33
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर — ‘एक ही दन के दो छोर’
सुबह पाँच बजकर बीस मनट पर म छत पर पहुँचा तो लगा क जल्द आ गया हूँ। आकाश अभी काला ही था और
पूरब म केवल एक हल्क धुँधली लक र थी — जैसे कसी ने काले कागज़ पर उँ गली से एक रेखा प छ द हो। फर
वह लक र चौड़ी हुई, धूसर से गुलाबी हुई, और अचानक केस रया। पीपल के पेड़ पर पहली च ड़या बोली, फर दस,
फर इतनी क गनती छू ट गई। ठ क पाँच बजकर सतालीस मनट पर सूय का ऊपरी कनारा दखा — इतना छोटा-
सा क उसे दे खकर वश्वास ही नह हुआ क यही पूरे दन को जलाएगा। दो मनट म वह पूरा ऊपर आ गया और
उसक ओर दे खना क ठन हो गया। नीचे गली म झाड़ू क आवाज़ आने लगी, कसी घर म लोटा-बाल्ट बजी, और
दन शुरू हो गया।
उसी दन शाम को म फर उसी छत पर गया। इस बार सब उलटा था। सूय प म म इतना बड़ा और इतना नरम था
क उसे बना आँख झपकाए दे खा जा सकता था। नीचे खेत पर पहले सोना बछा, फर वह सोना गहराकर लाल हो
गया। मुझे मोहन राकेश क वह पं क्त याद आई — “कुछ क्षण पहले जहाँ सोना बह रहा था, वहाँ अब लहू बहता
नजर आने लगा।” सचमुच वैसा ही था। लौटते प क्षय क कतार ऊपर से नकल और उनका शोर कुछ दे र म शांत हो
गया। फर रंग बजनी हुआ और फर सब कुछ स्याही म डू ब गया। सूय दय म दे र लगी थी; सूयास्त एक झटके म बीत
गया।
दोन दे खकर मुझे एक बात समझ म आई। सूय दय दे खने पर मन म यह भाव आता है क आगे बहुत कुछ करना है;
सूयास्त दे खने पर यह क जो बीत गया, वह लौटे गा नह । पहला उत्साह दे ता है, दूसरा ठहराव। और सबसे बड़ी बात
— दोन एक ही सूरज ह, बस हमारे खड़े होने क जगह और समय बदल जाता है। शायद इसी लए पाठ म
कन्याकुमारी को ‘सुनहले सूय दय और सूयास्त क भू म’ कहा गया है — वहाँ एक ही स्थान से जीवन के दोन छोर
दे खे जा सकते ह।
अनुभव क साझेदारी — पृष्ठ 95
अभ्यास › सृजन › अनुभव क साझेदारी
सृ ज न यात्रा-सं स्मरण
प्र.1 वधा से संवाद के अंतगत आपने दए गए बदुओं के माध्यम से यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्व के वषय म जाना और
समझा। इन तत्व को ध्यान म रखकर आप भी अपने घूमे हुए कसी प्रय स्थान के अनुभव पर एक यात्रा-संस्मरण
ल खए।
यहाँ पूरा यात्रा-संस्मरण लखना है — ता लका नह । इस लए पहले लखने का ढाँचा, फर एक पूरा नमूना।
Page 32 of 54
Page 34
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
यात्रा-संस्मरण लखने के छह नयम:
1. ‘म’ म ल खए। यह नबंध नह , अनुभव है। पूरा पाठ ‘आ खरी चट्टान तक’ भी उत्तम पुरुष म ही है।
2. पूरी यात्रा मत ल खए — एक दन या एक दृश्य चु नए। मोहन राकेश ने भी केवल एक शाम, एक रात और
एक सुबह ली है।
3. वह से शुरू क जए जहाँ दृश्य शुरू होता है, टकट और तैयारी से नह । पाठ क पहली पं क्त दे खए —
“कन्याकुमारी। सुनहले सूय दय और सूयास्त क भू म।”
4. हर दृश्य के साथ एक भाव जो ड़ए। केवल ‘क्या दखा’ नह , ‘क्या लगा’ भी।
5. वहाँ के लोग को जगह द जए। एक संवाद ज़रूर र खए — जैसे उस ग्रेजुएट नवयुवक का वाक्य पूरे वृत्तांत
को बदल दे ता है।
6. अंत उपदे श से मत क जए। एक चत्र या एक छोट -सी बात पर छोड़ द जए — पाठ का अंत भी बस के
टाइम-टे बल पर होता है, कसी सीख पर नह ।
नमूना उत्तर — यात्रा-संस्मरण : ‘पहाड़ पर एक दन’ (चोपता–तुंगनाथ, उत्तराखंड)
चोपता म सुबह के छह बजे थे और ठं ड ऐसी थी क साँस भाप बनकर आगे-आगे चल रही थी। दे वदार के जंगल म से
धूप छनकर आ रही थी और ज़मीन पर सक्क जैसे गोल-गोल टु कड़े बना रही थी। पगडंडी पत्थर क थी, चौड़ी और
सीधी ऊपर चढ़ती हुई — जैसे कसी ने पहाड़ के माथे पर एक लक र ख च द हो।
पहले कलोमीटर तक म दौड़ता-सा चला। दूसरे कलोमीटर म साँस फूलने लगी और मन ने पहली बार कहा — लौट
चलो। म एक पत्थर पर बैठ गया। तभी एक बुजग म हला पीठ पर घास का बड़ा गट्ठर लादे मेरे पास से नकल , बना
रुके, बना हाँफे। उन्ह ने मुझे दे खकर हँसकर कहा, “धीरे चलो बेटा, पहाड़ भागता थोड़े ही है।” वह वाक्य पूरे रास्ते
मेरे साथ रहा।
उसके बाद मने गनना छोड़ दया क कतना बाक है, और तब चढ़ाई सचमुच आसान हो गई। तीसरे कलोमीटर म
पेड़ खत्म हो गए और केवल भूरी घास बची। मुड़कर दे खा तो बादल हमसे नीचे रह गए थे — घाट म सफ़ेद रुई क
तरह भरे हुए। उस क्षण मुझे वही लगा जो मोहन राकेश को कन्याकुमारी क चट्टान पर लगा था — क म दृश्य दे ख
नह रहा, दृश्य का एक छोटा-सा हस्सा बन गया हूँ।
तुंगनाथ का मं दर पत्थर का, छोटा और बहुत पुराना है। पुजारी जी ने बताया क स दय म जब बफ़ गरती है तो
दे वता क डोली नीचे मक्कूमठ ले जाई जाती है और छह महीने मं दर बंद रहता है। बाहर चाय क एक दुकान थी।
दुकान चलाने वाले लड़के ने केतली चढ़ाते हुए कहा, “गम म यहाँ, जाड़े म नीचे मज़दूरी। छह महीने का काम है
साहब, पेट तो बारह महीने का है।” उसक चाय बहुत मीठ थी और बात बहुत कड़वी।
लौटते समय हल्क बूँदाबाँद शुरू हो गई और पत्थर फसलने लगे। एक जगह मेरा पैर फसला भी, पर कनारे क
चट्टान हाथ आ गई। घुटने म हल्क खर च आई, बस। हम बना रुके उतरते रहे क्य क अँधेरा होने का डर था। ठ क
उस समय चोपता पहुँचे जब सामने के पहाड़ क चोट पर आ ख़री धूप ठहरी हुई थी — पहले सुनहली, फर गुलाबी,
फर कुछ भी नह ।
बस अभी तक नह आई थी। म दुकान क बच पर बैठकर घुटने क खर च दे खता रहा और मन म सोचता रहा क
अगली बस कब आएगी।
Page 33 of 54
Page 35
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक
a g l AglaSem · NCERT Solutions
इस नमूने म छह तत्व कहाँ ह: दृश्य-वणन — धूप के गोल टु कड़े, बादल क रुई, ढलती धूप के रंग।
. com
m परंपरा,
आत्मानुभू त — उत्साह, झुँझलाहट, वस्मय, संतोष। सांस्कृ तक प रप्रेक्ष्य — पंच केदार, डोलीeक
s
m
coजीवन-दशन — “ गनना छोड़ते ही चलना आसान हो गया”। शैलीगतagवशे a
l षता — उपमा
.
eजैmसे टुकड़े), रूपक (पहाड़ के माथे पर लक र), रंग का क्रम। रोमांच व संघष — फसलन, खर च, अँधेरे
मौसमी रोज़गार।
a s
aसेglपहले लौटने क दौड़। और अंत भी पाठ क तरह एक छोटे-से सांसा रक ब्योरे पर छोड़ा गया है।
( सक्क
co m
e m . ag
g l as
a
चचा-प रचचा — पृष्ठ 95
अभ्यास › सृजन › चचा-प रचचा
co m
m.
सृ ज न प रचचा
m as e
c o
. हम समृद्ध करती ह’ वषय पर कक्षा म एक प रचचा आयो जत क जए।
a g l
प्र.1 m
as e
‘यात्राएँ
a g l
s
m a
.co agl
प रचचा वाद- ववाद नह है। वाद- ववाद म जीतना होता है, प रचचा म समझ बढ़ानी होती है।
se m
g l a
प रचचा कैसे आयो जत कर:
a
1. एक संचालक चु नए, जो समय दे खे और सबको बोलने का अवसर दे ।
com
2. कक्षा को तीन समूह म बाँ टए — पक्ष, वपक्ष और प्रश्नकता। हर वक्ता को दो मनट।
m .
o m l a se
3. हर तक के साथ एक उदाहरण दे ना अ नवाय क जए — पाठ से, इ तहास से या अपने जीवन से।
4..अं a gऔर कक्षा मलकर एक साझा
c त म संचालक दोन पक्ष के सबसे मजबूत तीन-तीन बदु श्यामपट्ट पर लखे
se m
a
agl
नष्कष बनाए।
se m
com g l a
m. a
पक्ष — यात्राएँ समृद्ध करती ह वपक्ष / सीमाएँ — जन पर सोचना चा हए
l a seहै। मेगस्थनीज़,
aे gयात्रा- ववरण से ही
ान का वस्तार: पुस्तक बताती है, यात्रा दखाती यात्रा और पयटन एक नह : केवल फ़ोटो ख चकर लौट आना समृद्ध
े नसांग, अल- बरूनी और इब्न बतूता क नह करता। पाठ क सड हल पर बैठ वह भीड़ भी सूयास्त दे ख रही
m
प्राचीन भारत का बहुत-सा इ तहास लखा गया। थी, पर अनुभव लेखक को मला — जो आगे बढ़ा।
. c o
s e m सबके पास यात्रा का साधन नह ।
m a नह , वह समृद्ध नह ’ — अन्यायपूण
सहनशीलता: दूसरी भाषा, भोजन और री त दे खकर यह समझ खच और अवसर क असमानता:
. co
बनती है क ‘अलग’ का अथ ‘ग़लत’ नह होता।
a g l
इस लए यह कहना क ‘जो घू मा
e m
as
है।
a g l
.c
आत्म- ान: अनजान जगह म हम अपने डर, धैय और सीमा को पयावरण क क मत: भीड़ बढ़ने से पहाड़ म कचरा, जल-संकट और
पहचानते ह। लेखक ने यही जाना — “अपने अंदर के डर को तट का क्षरण बढ़ता है।
s e m
m a
. co agl
दखावट उदासीनता से ढक रखना चाहा था।”
se m
l a
agक आबाद म चार-पाँच सौ
यथाथ से भट: यात्रा सुंदरता ही नह , समाज का सच भी दखाती है स्थानीय जीवन पर दबाव: पयटन से रोज़गार मलता है, पर दाम भी
— जैसे कन्याकुमारी क “आठ हजार बढ़ते ह और स्थानीय संस्कृ त ‘ बकाऊ दखावा’ बन सकती है।
श क्षत बेकार”।
com
m .
m as e
.co
a g l Page 34 of 54
Page 36
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर — प रचचा का प्रारं भक वक्तव्य (संचालक के लए):
“सा थयो, आज का वषय है — ‘यात्राएँ हम समृद्ध करती ह’। पर पहले एक प्रश्न : समृ द्ध से हमारा अथ क्या है?
य द केवल यह क हमने कतनी जगह दे ख , तो हवाई अ े पर बैठा हर यात्री सबसे समृद्ध व्य क्त होता। हमारे पाठ म
लेखक भी कन्याकुमारी गया और सड हल पर बैठे दजन लोग भी वह थे। पर वृत्तांत लेखक ने लखा, उन लोग ने
नह । अंतर कहाँ था? अंतर इसम था क लेखक ने केवल सूयास्त नह दे खा — उसने रेत के रंग गने, अपने पैर के
नशान दे खे, और उस युवक क बात सुनी जो सीपी का गूदा खाकर दशन पर बहस करता है। तो आज क प रचचा
म हम यह तय करने क को शश कर क यात्रा कब हम समृद्ध करती है और कब केवल थका दे ती है। पहले पक्ष
के वक्ता आमं त्रत ह।”
साझा नष्कष का नमूना: यात्रा अपने-आप म समृद्ध नह करती; दे खने क तैयारी समृद्ध करती है। जो व्य क्त
खुली आँख, खुले कान और थोड़े धैय के साथ जाता है, वह अपने ही मुहल्ले क गली से भी उतना ही पा सकता है
जतना कोई दूसरा कन्याकुमारी से।
प्र.2 “एक लहर मेरे पैर को भगो गई तो सहसा मुझे खतरे का एहसास हुआ।” यात्रा के दौरान कई बार ऐसी
अप्रत्या शत चुनौ तयाँ सामने आ जाती ह। ऐसी कसी स्थ त का सामना करने के लए व्य क्त म कन गुण का
होना आवश्यक है? अपने सहपा ठय के साथ मलकर इस वषय पर चचा क जए।
इस प्रश्न का सबसे अच्छा उत्तर पाठ के भीतर ही मलता है — क्य क उस लहर के बाद लेखक ने जो कया, उसी म सारे गुण दखाई
दे ते ह।
Page 35 of 54
Page 37
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
आवश्यक इसका अथ पाठ म लेखक ने यह कहाँ दखाया
गुण
1. सजगता संकट के पहले संकेत को “एक लहर मेरे पैर को भगो गई, तो सहसा मुझे खतरे का एहसास हुआ। म जल्द -
पहचान लेना जल्द चलने लगा।” — उसने पहली लहर को ही चेतावनी मान लया, पानी घुटन तक
आने क प्रतीक्षा नह क ।
2. त्विरत िनणय- पूरी जानकारी न होने पर भी “ नणय तुरंत करना था, इस लए बना और सोचे म रेत पर बैठकर नीचे तट क तरफ
क्षमता समय रहते चुनाव कर लेना फसल गया।” — उसने ट ल वाला लंबा रास्ता छोड़कर तट का न त रास्ता चुना।
3. व्यावहािरक छोटे -छोटे सही कदम, जो “मने जूता उतारकर हाथ म ले लया।” और चट्टान न पार कर पाने पर — “म चट्टान
बुिद्ध बड़ी बाधा टाल दे ते ह क नोक पर पैर रखता कसी तरह उसके ऊपर पहुँच गया।”
4. धै य और डर को स्वीकार करना, पर “अपने अंदर के डर को दखावट उदासीनता से ढक रखना चाहा था।” — डर था,
आत्म-संयम उससे संचा लत न होना घबराहट म कोई मूखतापूण कदम नह उठाया।
5. साहस के बहादुरी और लापरवाही का “पर उस समय पानी क तरफ पाँव बढ़ाने का मेरा साहस नह हुआ।” — गहरे पानी म
साथ िववेक अंतर जानना उतरना बहादुरी नह , जो खम होता; उसने दूसरा रास्ता चुना।
6. पूव-तैयारी ज्वार-भाटा, मौसम और यही गुण लेखक म कम था — “अचानक खयाल आया क मुझे वहाँ से लौटकर भी
लौटने के समय क जाना है।” य द वह ज्वार का समय जानता, तो यह संकट आता ही नह ।
जानकारी
7. सहयोग - समूह म हो तो अकेले नणय सूय दय वाले प्रसंग म वह आठ लोग और चार मल्लाह के साथ गया — इसी लए वह
भावना न लेना, साथ रहना यात्रा सुर क्षत रही।
चचा म यह प्रश्न ज़रूर उठाइए: इनम सबसे बड़ा गुण कौन-सा है? कई साथी ‘साहस’ कहगे। पर पाठ को ध्यान से
प ढ़ए — लेखक बचा साहस से नह , सजगता और तुरंत नणय से। संकट म सबसे बड़ा खतरा घबराहट है, और
घबराहट का इलाज साहस नह , स्पष्ट सोच है।
व्यावहा रक बात: कक्षा म एक ‘सुरक्षा-सूची’ बनाइए जो हर यात्रा म काम आए — कसी को बताकर नकलना,
मौसम और ज्वार का समय दे ख लेना, लौटने का समय पहले तय कर लेना, पानी और टॉच साथ रखना, समूह से
अलग न होना, और सबसे ज़रूरी — अँधेरा होने से पहले लौट आना।
प्र.3 य द आपके पास भी कोई ऐसा अनुभव हो तो उसे अपने सहपा ठय के साथ साझा क जए।
यह अनुभव सुनाने का काम है। सुनाते समय तीन बात ध्यान म र खए — घटना छोट हो, ब्योरे स े ह , और अंत म यह बताइए
क आपने उससे क्या सीखा।
Page 36 of 54
Page 38
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
सुनाने का ढाँचा (चार वाक्य म तैयारी):
1. कब और कहाँ? — समय और जगह एक वाक्य म।
2. अचानक क्या हुआ? — वह क्षण जब स्थ त बदली।
3. आपने क्या कया? — यही उत्तर का मुख्य भाग है।
4. अब पीछे मुड़कर क्या लगता है? — क्या और बेहतर कया जा सकता था?
नमूना उत्तर — मेरा अनुभव
पछली ग मय म हम पाँच लोग गाँव के पास वाली नद पर गए थे। पानी घुटन तक ही था और बीच म एक रेत का
टापू बना हुआ था, जहाँ हम बैठकर बात करने लगे। कसी को ध्यान नह रहा क ऊपर बाँध से पानी छोड़ा जाता है।
अचानक मेरे चचेरे भाई ने कहा क पानी बढ़ रहा है। पहले हम वश्वास नह हुआ, पर दो मनट म ही वह टापू आधा
रह गया था और पानी का बहाव तेज़ हो गया था। सबसे छोटा साथी घबराकर रोने लगा और भागकर उसी तरफ जाने
लगा जहाँ पानी गहरा था। मने उसका हाथ पकड़कर रोका।
हमने तय कया क सब एक-दूसरे का हाथ पकड़कर, बहाव के आर-पार सीधे नह , ब ल्क थोड़ा तरछा चलते हुए
उसी कनारे लौटगे जधर से आए थे — क्य क वह रास्ता हम पता था। चप्पल हमने हाथ म ले ल ता क पैर पत्थर
पर टके रह। तीन-चार मनट म हम कनारे पर थे। उतरने के बाद दे खा तो वह पूरा टापू पानी म डू ब चुका था।
अब सोचता हूँ तो लगता है क हम बचे इस लए नह क हम बहादुर थे, ब ल्क इस लए क हमने जाना-पहचाना
रास्ता चुना और अलग-अलग नह भागे। और गलती यह हुई थी क हमने वहाँ जाने से पहले कसी बड़े से पूछा ही
नह था क पानी कब छोड़ा जाता है। पाठ पढ़ते समय जब मने लेखक क यह पं क्त पढ़ — “ नणय तुरंत करना
था, इस लए बना और सोचे म रेत पर बैठकर नीचे तट क तरफ फसल गया” — तो मुझे उसी दन क याद आ गई।
व्याकरण क बात — क्रया- वशेषण क पहचान और रेखांकन — पृष्ठ 95
अभ्यास › भाषा से संवाद › व्याकरण क बात › क्रया- वशेषण क पहचान और रेखांकन
भाषा से सं वाद व्याकरण
प्र.1 नीचे दए गए वाक्य को ध्यानपूवक पढ़कर उनम क्रया- वशेषण पद क पहचान क जए तथा दए गए उदाहरण
के अनुसार ल खए। (उदाहरण— वाक्य: म जल्द -जल्द चलने लगा। | क्रया- वशेषण: जल्द -जल्द | क्रया,
जसक वशेषता बताई जा रही है: ‘चलने लगा’ क्रया क वशेषता) (क) बल खाती लहर रास्ते क नुक ली
च ान से कटती हुई आती थ ।
वाक्य क्रया- वशेषण क्रया, जसक वशेषता बताई जा रही है
बल खाती लहर रास्ते क नुक ली चट्टान से कटती हुई आती थ । कटती हुई ‘आती थ ’ क्रया क वशेषता
Page 37 of 54
Page 39
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
यह क्रया- वशेषण क्य है: वाक्य क मुख्य क्रया है ‘आती थ ’। प्रश्न क जए — लहर कैसे आती थ ? उत्तर
मलेगा — कटती हुई। जो पद क्रया के ढं ग (री त) का उत्तर दे ता है, वही री तवाचक क्रया- वशेषण कहलाता है।
यहाँ ‘कटती हुई’ लहर के आने का ढं ग बता रहा है, इस लए यह री तवाचक क्रया- वशेषण है।
सावधानी — ‘बल खाती’ को क्रया- वशेषण मत मा नए। ‘बल खाती’ कसक वशेषता बता रहा है? लहर क
— और लहर संज्ञा ह। संज्ञा क वशेषता बताने वाला पद वशेषण होता है, क्रया- वशेषण नह । पहचान का सूत्र
यही है — प्रश्न ‘कैसी लहर?’ का उत्तर = वशेषण; प्रश्न ‘कैसे आती थ ?’ का उत्तर = क्रया- वशेषण।
प्र.2 (ख) या त्रय क कतनी ही टो लयाँ उस दशा म जा रही थ ।
वाक्य क्रया- वशेषण क्रया, जसक वशेषता बताई जा रही है
या त्रय क कतनी ही टो लयाँ उस दशा म जा रही थ । उस िदशा में ‘जा रही थ ’ क्रया क वशेषता
यह क्रया- वशेषण क्य है: मुख्य क्रया है ‘जा रही थ ’। प्रश्न क जए — टो लयाँ कहाँ / कधर जा रही थ ? उत्तर
— उस दशा म। जो पद क्रया के स्थान या दशा का बोध कराए, वह स्थानवाचक क्रया- वशेषण कहलाता है।
सावधानी — ‘ कतनी ही’ क्रया- वशेषण नह है। ‘ कतनी ही’ बता रहा है क टो लयाँ कतनी थ — यानी यह
संज्ञा ‘टो लयाँ’ क संख्या बता रहा है। इस लए यह संख्यावाचक (अ न त) वशेषण है। एक ही वाक्य म
वशेषण और क्रया- वशेषण दोन हो सकते ह — दे खना यह है क पद कससे जुड़ा है।
प्र.3 (ग) म दे र तक भारत के स्थल-भाग क आ खरी च ान को दे खता रहा।
वाक्य क्रया- क्रया, जसक वशेषता बताई जा रही
वशेषण है
म दे र तक भारत के स्थल-भाग क आ खरी चट्टान को दे खता दे र तक ‘दे खता रहा’ क्रया क वशेषता
रहा।
यह क्रया- वशेषण क्य है: मुख्य क्रया है ‘दे खता रहा’। प्रश्न क जए — कब तक दे खता रहा? उत्तर — दे र तक।
जो पद क्रया के समय या अव ध का बोध कराए, वह कालवाचक क्रया- वशेषण कहलाता है।
Page 38 of 54
Page 40
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
तीन वाक्य को एक साथ दे खए — क्रया- वशेषण के चार भेद:
m as e
.co कस प्रश्न का उत्तर a g l
em
भेद पाठ से उदाहरण
a s
a glकालवाचक कब? कब तक? कतनी
बार?
दे र तक … दे खता रहा; “अब मुहल्ले-मुहल्ले के हसाब से बता रहा था”
co m
m . ag
स्थानवाचक कहाँ? कधर? उस दशा म जा रही थ ; “नीचे तट क तरफ फसल गया”
a e हुई आती थ ; “जल्द -जल्द चलने लगा”; “धीरे-धीरे कम होती जा रही
sकटती
री तवाचक कैसे? कस ढं ग से?
ag l
थी”
co m
m.
प रमाणवाचक कतना? कतनी मात्रा म? “बहुत रूखी, बीहड़ और वीरान लग रही थी”; “काफ घर गई है”
m as e
.co
पहचान का सबसे सरल तरीका: पहले वाक्य क क्रया ढूँ ढ़ए। फर उससे चार प्रश्न क जए — कब? कहाँ?
a g l
se m
l a
कैसे? कतना? — जस शब्द से इनम से कसी का उत्तर मले, वही क्रया- वशेषण है।
a g
m a s
m .co agl
se
आओ नए वाक्य बनाएँ — पृष्ठ 96
अभ्यास › भाषा से संवाद › आओ नए वाक्य बनाएँ la
ag
भाषा से सं वाद शब्द क बात
co m
m .
as e
om बनाइए। 1. तीन तरफ से क्ष तज तक पानी-पानी था।
.cवाक्य g l
पाठ से चुनकर कुछ वाक्य नीचे ता लका म दए गए ह। इन वाक्य म रेखां कत शब्द का अथ बताते हुए उनसे नए
a
प्र.1
se m
g l a
a
m
अथ com l a se
. a g
m
पाठ का वाक्य रेखां कत नया वाक्य
as e
l
शब्द
g
तीन तरफ से क्ष तज िक्षितज a वह स्थान जहाँ धरती (या जल) और आकाश खेत क मेड़ पर खड़े होकर हमने क्ष तज
m
तक पानी-पानी था। मलते हुए दखाई दे ते ह; दृ ष्ट-सीमा तक फैली हुई पीली सरस दे खी।
. co
e m
m l as
.co a g
शब्द को ठ क से सम झए: क्ष तज कोई वास्त वक रेखा नह है — वह केवल हमारी आँख क सीमा है। जैसे-जैसे
s e m हम आगे बढ़ते ह, वह भी आगे खसकता जाता है। इसी लए इस पाठ म क्ष तज केवल भूगोल नह , एक प्रतीक भी
agla बन जाता है — “लगता था क उस ओर दूसरा छोर है ही नह ।”
.c
s e m
m a
m . co
और वाक्य बनाकर दे खए: ‘ वज्ञान ने मनुष्य के ज्ञान का क्ष तज बहुत वस्तृत कर दया है।’ — यहाँ ‘ क्ष तज’
e agl
लाक्ष णक अथ म है, यानी ‘सीमा/दायरा’।
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 39 of 54
Page 41
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 2. पीछे दाईं तरफ दूर-दूर हटकर ना रयल के झुरमुट नजर आ रहे थे।
पाठ का वाक्य रेखां कत अथ नया वाक्य
शब्द
पीछे दाईं तरफ दूर-दूर हटकर झुरमुट समूह, मंडली; पास-पास उगे पेड़ या झाड़ बाँस के झुरमुट म बैठ च ड़य
ना रयल के झुरमुट नजर आ रहे जनक डा लयाँ मलकर कुंज-सा बना रही का शोर दोपहर तक चलता रहा।
थे। ह
ध्यान द जए: ‘झुरमुट’ केवल ‘बहुत-से पेड़’ नह होता। इसम यह भाव भी छपा है क पेड़ इतने पास-पास ह क
उनक डा लयाँ आपस म मलकर एक छाया-भरा घेरा बना दे ती ह। इसी लए पाठ म जब वे झुरमुट अँधेरे म स्याह पड़
जाते ह, तो लेखक को लगता है — “जैसे लगातार सर धुन रहे थे और हाथ-पैर पटक रहे थे।” य द पेड़ अलग-अलग
खड़े होते तो यह मानवीकरण बन ही नह पाता।
प्र.3 3. दूर तक एक रेत क लंबी ढलान थी।
पाठ का वाक्य रेखां कत अथ नया वाक्य
शब्द
दूर तक एक रेत क लंबी ढलान नीचे क ओर झुक हुई सतह; पहाड़ी क ढलान पर बनी सीढ़ दार खेती दूर से हरी
ढलान थी। उतार, ढाल सी ढ़य जैसी लगती है।
‘ढलान’ का उलटा शब्द है ‘चढ़ाई’। दोन एक ही रास्ते के दो नाम ह — जधर से आप चल, उधर के हसाब से
नाम बदल जाता है। पाठ म यह ढलान बहुत काम क चीज़ बनती है : “ नणय तुरंत करना था, इस लए बना और
सोचे म रेत पर बैठकर नीचे तट क तरफ फसल गया।” यानी जो ढलान दे खने म सुंदर लग रही थी, वही लौटते समय
बचने का रास्ता बन गई।
Page 40 of 54
Page 42
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 4. प मी तट के साथ-साथ सूखी पहा ड़य क एक ंखला दूर तक चली गई थी।
पाठ का वाक्य रेखां कत अथ नया वाक्य
शब्द
प च्छमी तट के साथ-साथ सूखी ृ ला
शंख क ड़य क लड़ी; एक के बाद एक हमालय पवत- ंखला भारत क
पहा ड़य क एक ंखला दूर तक चली जुड़ी हुई चीज़ का क्रम, सल सला उत्तरी सीमा पर एक द वार क तरह
गई थी। खड़ी है।
शब्द का मूल भाव: ‘ ंखला’ का शा ब्दक अथ है ज़ंजीर — यानी अलग-अलग क ड़याँ, पर आपस म जुड़ी हुई।
इसी लए यह शब्द पहाड़ के लए भी चलता है और घटनाओं के लए भी : ‘घटनाओं क एक पूरी ंखला’,
‘व्याख्यान- ंखला’। पाठ म यह पहा ड़य के अकेले खड़े न होकर एक लंबे क्रम म फैले होने का बोध कराता है,
जससे वीरानी का प्रभाव और बढ़ जाता है।
वतनी पर ध्यान: इसे ‘श्रृंखला’ नह , ंखला लखा जाता है — श् + ऋ। पुस्तक म भी यही रूप छपा है।
प्र.5 5. सामने फैली रेत के कारण बहुत रूखी, बीहड़ और वीरान लग रही थी।
पाठ का वाक्य रेखां कत अथ नया वाक्य
शब्द
सामने फैली रेत के कारण बहुत रूखी, बीहड़ ऊबड़-खाबड़, वकट, दुगम — ऐसा चंबल के बीहड़ इलाक तक सड़क
बीहड़ और वीरान लग रही थी। स्थान जहाँ चलना क ठन हो पहुँचाने म वष लग गए।
तीन वशेषण एक साथ क्य : लेखक ने पहा ड़य के लए तीन शब्द एक साथ रखे ह — रूखी, बीहड़ और
वीरान। तीन अलग-अलग बात कहते ह : ‘रूखी’ = ह रयाली नह ; ‘बीहड़’ = ज़मीन ऊबड़-खाबड़, चलना क ठन;
‘वीरान’ = कोई रहने वाला नह । तीन मलकर एक ऐसा चत्र बनाते ह जो सूयास्त क सुनहली चमक के ठ क
वपरीत खड़ा है — और यही वरोध दृश्य को गहरा बनाता है।
अभ्यास: इन पाँच शब्द को लेकर एक छोटा-सा अनुच्छेद ल खए, जसम आप अपने ही कसी दे खे हुए स्थान का
वणन कर — “ क्ष तज तक फैला खेत, दूर एक झुरमुट, बीच म एक ढलान, पीछे पहा ड़य क ंखला और उसके
आगे बीहड़ ज़मीन…”। इससे शब्द केवल याद नह ह गे, काम म आना भी आ जाएगा।
Page 41 of 54
Page 43
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
ग त व धयाँ — पृष्ठ 96
अभ्यास › भाषा से संवाद › ग त व धयाँ
भाषा से सं वाद गतवध
प्र.1 1. कल्पना क जए क आप अपने प रवार के साथ कह घूमने गए ह। वहाँ आपक भट एक ऐसे यात्री से होती है
जसे आपक सहायता क आवश्यकता है ले कन आप दोन एक-दूसरे क भाषा से अप र चत ह। ऐसे म उस
अनजान यात्री क सहायता आप कैसे करगे?
पहली बात — घबराइए मत। भाषा संप्रेषण का एक साधन है, अकेला साधन नह । मनुष्य के पास कम-से-कम पाँच और साधन ह,
और वे सब भाषा से पुराने ह।
साधन कैसे काम ल
1. मुख-मुद ा और पहले मुस्कराइए और सर हलाकर आश्वस्त क जए। घबराया हुआ यात्री सबसे पहले यही दे खता है क सामने वाला
स्वर मत्र है या नह । स्वर धीमा और शांत र खए — चल्लाने से भाषा समझ म नह आ जाती।
2. संके त (इशारे ) बहुत-से इशारे लगभग सावभौ मक ह — हाथ से खाने का संकेत, पानी पीने का संकेत, घड़ी क ओर इशारा करके
समय पूछना, हाथ फैलाकर दशा बताना, हथेली से ‘रु कए’ कहना।
3. िचत्र बनाना कागज़ पर बस, रेल, होटल, अस्पताल या डॉक्टर का सरल चत्र बना द जए। ब े यह सबसे अच्छा कर लेते ह। नक्शा
बनाकर उस पर ‘आप यहाँ ह’ का नशान लगाना बहुत काम आता है।
4. िलखा हुआ और स्थान का नाम, बस-नंबर, समय और दाम अंक म लख द जए। अंक अंतरराष्ट्रीय होते ह। दूरी बताने के लए कागज़
अंक पर ‘2 km’ लख दे ना बोलने से अ धक स्पष्ट है।
5. मोबाइल का अनुवाद ऐप (जैसे भा षणी या अन्य अनुवाद सेवाएँ) म बो लए या टाइप क जए और स्क्र न दखा द जए। मान चत्र ऐप
सहारा खोलकर गंतव्य का नाम दखा दे ना सबसे तेज़ उपाय है।
6. तीसरे व्यिक्त आस-पास दे खए — बस-अ े का कमचारी, दुकानदार, पु लसकम या कोई व ाथ उस भाषा को जानता हो सकता
की सहायता है। बड़े स्थल पर पयटक सूचना कद्र होता ही है।
7. साथ चलकर जब समझाना क ठन हो, तो बताइए मत — साथ ले जाइए। यह सबसे भरोसेमंद उपाय है, वशेषकर तब जब कोई खो
िदखाना गया हो या बीमार हो।
Page 42 of 54
Page 44
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर:
पछले वष हम प रवार के साथ मदुरै गए थे। स्टे शन के बाहर एक बुजग म हला अपना थैला थामे खड़ी थ और
परेशान दख रही थ । मने पास जाकर पूछा तो वे त मल म कुछ कहने लग और मुझे एक शब्द भी समझ नह आया।
पहले मने मुस्कराकर सर हलाया ता क उन्ह लगे क म सुन रहा हूँ। फर मने अपनी कॉपी नकालकर उस पर एक
बस और एक रेलगाड़ी बनाई और उनक तरफ प सल बढ़ा द । उन्ह ने बस पर उँ गली रख द । फर मने कागज़ पर
लखा — ‘?’ और उन्ह ने अपने थैले से एक पच नकालकर द , जस पर उनके गाँव का नाम लखा था। मने वह
नाम मोबाइल के मान चत्र म डाला और स्क्र न उन्ह दखाई — उन्ह ने सर हलाकर ‘हाँ’ कहा।
इसके बाद मने पास खड़े एक ऑटो-चालक से पूछा, जो थोड़ी हद जानता था। उसने बताया क वह बस पीछे वाले
स्टड से जाती है। हम उन्ह वह तक छोड़ आए और बस म बैठा भी दया। बस चलते समय उन्ह ने हाथ जोड़कर कुछ
कहा — मुझे उसका एक शब्द भी समझ नह आया, पर अथ पूरा समझ आ गया।
सीखने क बात: संप्रेषण म शब्द का हस्सा सबसे छोटा होता है। धैय, मुस्कान और साथ चलकर दखा दे ना — ये
तीन ‘भाषाएँ’ हर जगह चलती ह। और यही कारण है क पुस्तक ने इस ग त व ध को ‘भाषा से संवाद’ के अंतगत
रखा है — ता क हम जान सक क भाषा जोड़ती है, पर उसका न होना अलग नह करता।
प्र.2 2. पधारो म्हारे दे श — अपने क्षेत्र के महत्वपूण पयटन स्थल क एक सूची बनाइए और उनक वशेषताओं को
ध्यान म रखकर एक ववर णका ( ॉशर) तैयार क जए।
ववर णका (ब्रॉशर) वज्ञापन नह , उपयोगी सूचना है। अच्छा ब्रॉशर वह है जसे पढ़कर कोई अजनबी सचमुच यात्रा क योजना बना
सके।
ॉशर म ये छह चीज़ अवश्य ह :
1. आकषक शीषक और एक पं क्त का प रचय — जैसे ‘पधारो म्हारे दे श’ के नीचे एक वाक्य।
2. स्थल क सूची — हर स्थल के बारे म दो-तीन पं क्तयाँ; क्या दे खने योग्य है, यह स्पष्ट हो।
3. कैसे पहुँच — नकटतम रेलवे स्टे शन, बस-अ ा, हवाई अ ा और दूरी।
4. कब आएँ — अनुकूल महीने और प्रमुख मेले/उत्सव।
5. क्या खाएँ और क्या ले जाएँ — स्थानीय व्यंजन तथा हस्त शल्प (इससे स्थानीय कारीगर को लाभ होता है)।
6. सूचना और सावधानी — ठहरने के वकल्प, संपक नंबर, और ‘कचरा न फैलाएँ’ जैसी अपील।
बनावट: A4 कागज़ को तीन भाग म मो ड़ए (तीन-मोड़ वाला ब्रॉशर)। सामने का पन्ना — नाम और चत्र; भीतर के
पन्ने — स्थल; पछला पन्ना — नक्शा, कैसे पहुँच और संपक।
Page 43 of 54
Page 45
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
नमूना ववर णका — ‘पधारो म्हारे बुंदेलखंड’ ( जला झाँसी और आसपास)
m as e
.co g l
पधारो म्हारे बुंदेलखंड
पत्थर के कले, ताल-तलैया और वीरता क कहा नयाँ a
se m
g l a
a पयटन स्थल क्या वशेष है कतनी
m
दूर
. c o ag
झाँसी का कला
s em
रानी लक्ष्मीबाई का कला; ऊँची प्राचीर से पूरा शहर दखता है। शाम का ध्व न-
a
शहर के
a g l
प्रकाश कायक्रम अवश्य दे ख। भीतर
रानी लक्ष्मीबाई पाक और 1857 के संग्राम से जुड़ी वस्तुए,ँ अस्त्र-शस्त्र और मू तयाँ। 2 क.मी.
co m
m.
संग्रहालय
m as e
.co g l
ओरछा बेतवा के कनारे जहाँगीर महल, राजा राम मं दर और राजाओं क छत रयाँ। नद 18 क.मी.
a
sem
के कनारे सूयास्त सबसे सुंदर।
a
agl बरुआ सागर पुराना ताल और कला; पक्षी दे खने के लए अच्छा स्थान। 24 क.मी.
m a s
.co agl
दे वगढ़ गुप्तकालीन दशावतार मं दर और जैन मं दर का समूह; प्राचीन शल्प के लए 125
em
प्र सद्ध। क.मी.
a s
agl मुख्य रेल-माग पर है; नकटतम हवाई अ ा ग्वा लयर। बस-अ े से
कैसे पहुँच — झाँसी जंक्शन दल्ली–भोपाल
ओरछा के लए हर आधे घंटे म साधन मलता है।
co m
.
कब आएँ — अक्टू बर से माच। ग्रीष्म म भीषण गरमी पड़ती है। झाँसी महोत्सव (फरवरी) म लोक-नृत्य और शल्प-
e m
m as
मेला लगता है।
.co a g l
m ले जाएँ — स्थानीय पीतल के बतन, बाँस और मूँज क टोक रयाँ — इन्ह कारीगर से सीधे खरी दए।
क्या खाएँ — बुंदेली कढ़ -भात, बरा, महेरी और गुड़ क खीर।
a s eक्या
agl ध्यान रख — कले और मं दर क द वार पर कुछ न लख, प्ला स्टक बाहर लेकर आएँ, और स्थानीय गाइड क
सेवा लेकर स्थानीय रोज़गार को सहारा द।
se m
com g l a
. a
संपक — पयटक सूचना कद्र, झाँसी जंक्शन।
m
ase
agl
अपना ॉशर बनाते समय: केवल प्र सद्ध स्थल मत ल खए। एक ऐसा स्थान भी जो ड़ए जसे बाहर के लोग नह
जानते — कोई पुराना बावड़ी, कोई मेला, कोई शल्प। यही आपके ब्रॉशर को दूसर से अलग बनाएगा — क्य क वह
co m
m .
e
जानकारी केवल आपके पास है।
m l as
m .co a g
l a se
ag भाषा संगम — पृष्ठ 96 और 97
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 44 of 54
Page 46
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
अभ्यास › भाषा से संवाद › भाषा संगम
भाषा से सं वाद भाषा सं ग म
प्र.1 “ऊँची-ऊँची लहर से बचाते हुए मल्लाह नाव को ला रहे थे” — ‘नाव’ शब्द के लए सं वधान क आठव अनुसूची
म स म्म लत कुछ भारतीय भाषाओं म प्रयुक्त शब्द क सूची द गई है। इनके अ त रक्त य द आप ‘नाव’ शब्द को
कसी और भाषा म भी जानते ह तो उस भाषा म भी ल खए।
पहले पुस्तक क अपनी सूची, फर उसम जोड़े गए शब्द।
भाषा ‘नाव’ के लए शब्द भाषा ‘नाव’ के लए शब्द
हद नाव नेपाली नाउ, नौका, डु ा
संस्कृत नौ, नौका बांग्ला नाओ, नौका
पंजाबी बेड़ी अस मया नाओ
उदू कश्ती, नाव म णपुरी ह
कश्मीरी नाव ओ ड़आ नौका, नाआ
सधी बेड़ी, कश्ती तेलुगु पडव, नाव
मराठ होड़ी, नाव त मल ओडम्
गुजराती नाव, होडी मलयालम तो ण
क कणी बहड़ी कन्नड़ दो ण
इनके अ त रक्त कुछ और भाषाएँ और बो लयाँ —
Page 45 of 54
Page 47
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
भाषा / बोली शब्द टप्पणी
भोजपुरी नाव, ड गी छोट नाव के लए ‘ड गी’ और बड़ी के लए ‘नाव’।
मैिथली नाव, ड गा कोसी-क्षेत्र म ‘ड गा’ अ धक प्रच लत है।
अवधी / बघे ल ी नाव, ड गी —
छ ीसगढ़ ी ड गा, नाव —
बज नाव, नैया भ क्त-काव्य म ‘नैया’ जीवन का प्रतीक बन गया — ‘भव-सागर क नैया’।
राजस्थानी / मारवाड़ ी नाव, बेड़ो पंजाबी ‘बेड़ी’ से मलता-जुलता।
हिरयाणवी नाव, कश्ती —
डोगरी बेड़ी पंजाबी के नकट।
संस्कृ त (अन्य शब्द ) तर णः, तरी, पोतः ‘तर ण’ का अथ है — जो तार दे , पार लगा दे ।
फ़ ारसी / अरबी कश्ती / सफ़ ना उदू और सधी म ‘ कश्ती’ इन्ह से आया।
अंगेज़ी boat, ferry ‘navy’, ‘naval’ और ‘navigation’ शब्द भी उसी मूल से ह जससे संस्कृत ‘नौ’।
सूची से क्या दखता है — दो प रवार, दो जड़:
नाव, नाओ, नाउ, नौका, नाआ, नाव — ये सब संस्कृत के ‘नौः’ से नकले ह। रोचक बात यह है क लै टन
का navis और अंग्रेज़ी का navy भी इसी प्राचीन मूल से जुड़े ह — यानी यह शब्द हज़ार वष पुराना है।
तो ण (मलयालम), दो ण (कन्नड़), ओडम् (त मल) — ये द्र वड़ भाषा-प रवार के अपने शब्द ह, संस्कृत से
नह आए। तेलुगु म दोन मलते ह — ‘पडव’ अपना, और ‘नाव’ उधार लया हुआ।
कश्ती, बेड़ी, बहड़ी — ये प मोत्तर भारत म फ़ारसी-अरबी संपक से आए या उसी क्षेत्र म वक सत हुए शब्द
ह।
यानी एक ही चीज़ के लए भारत म तीन अलग-अलग शब्द-परंपराएँ साथ-साथ चलती ह — और यही ‘भाषा संगम’
का असली अथ है। जस तरह कन्याकुमारी म तीन सागर मलते ह, उसी तरह भारत क भाषाओं म कई धाराएँ
मलती ह।
प्र.2 उपयुक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा म भी ल खए।
मूल वाक्य ( हद ) — “ऊँची-ऊँची लहर से बचाते हुए मल्लाह नाव को ला रहे थे।”
नीचे इसी वाक्य के कुछ भाषाओं/बो लय म रूप दए गए ह। आप अपनी मातृभाषा म इसी तरह ल खए — और य द आपक
मातृभाषा हद ही है, तो अपने घर क बोली (भोजपुरी, अवधी, ह रयाणवी, बुंदेली, ब्रज, मालवी…) म ल खए।
Page 46 of 54
Page 48
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
भाषा / बोली वाक्य
भोजपुरी ऊँच-ऊँच लहरन से बचावत मल्लाह नाव के ले आवत रहल।
अवधी ऊँची-ऊँची लहरन से बचाइ के मल्लाह नाव लइ आवत रहेन।
मैिथली ऊँच-ऊँच लह र सँ बचाबैत मल्लाह नाव अनैत रह थ।
बुंदे ल ी ऊँची-ऊँची लहरन ते बचाउत भए मल्लाह नाव लाउत हते।
हिरयाणवी ऊँची-ऊँची लहरां तै बचांदे होए मल्लाह नाव नै ल्या रे थे।
राजस्थानी (मारवाड़ ी) ऊँची-ऊँची लहरां सूँ बचावतां थकां मल्लाह नाव नै ल्यावै हा।
पंजाबी उ ीआं-उ ीआं ल हरां त बचांदे होए मल्लाह बेड़ी नूँ ला रहे सन।
मराठी उं च उं च लाटांपासून वाचवत खलाशी होडी आणत होते.
गुजराती ऊँची-ऊँची लहेरोथी बचावता खलासीओ होडी लावी र ा हता.
बांग्ला उँ चु-उँ चु ढे उ थेके बाँ चये मा झरा नाओ नये आस छलो.
संस्कृ त उन्नताभ्यः तर े भ्यः रक्षन्तः ना वकाः नौकाम् आनय न्त स्म।
अनुवाद करते समय दो बात ध्यान र खए:
1. शब्द-दर-शब्द मत बद लए। हर भाषा क अपनी वाक्य-रचना और अपनी क्रया-प्रणाली होती है। मराठ म
‘मल्लाह’ के लए ‘खलाशी’ और ‘नाव’ के लए ‘होडी’ अ धक स्वाभा वक है।
2. अपने घर क भाषा को कमतर मत सम झए। जो शब्द केवल आपक बोली म है, वही सबसे मूल्यवान है —
क्य क वह कसी और सूची म नह मलेगा।
और यह भी दे खए क ऊपर क ता लका म ‘नाव’ के लए तीन अलग शब्द आ गए — नाव, बेड़ी, होडी। एक ही
वाक्य, ग्यारह रूप — यही भारत क भाषाई व वधता है।
कक्षा क ग त व ध: श्यामपट्ट पर यही एक वाक्य ल खए और कक्षा के हर व ाथ से उसक मातृभाषा या बोली म
एक-एक पं क्त लखवाइए। पूरी कक्षा क सूची को एक चाट पर लगाकर द वार पर टाँग द जए — यही आपक
अपनी ‘भाषा संगम’ क भ त्त-प त्रका होगी।
झरोखे से — पृष्ठ 97 और 98
Page 47 of 54
Page 49
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
अभ्यास › झरोखे से — ‘प्रयाग : 1976’ ( नमल वमा)
झरोखे से तु ल ना
प्र.1 आपने ‘आ खरी च ान तक’ रचना पढ़ जो द क्षण भारत क यात्रा पर आधा रत है। आइए, अब पढ़ते ह हद के
प्र सद्ध रचनाकार नमल वमा का कुंभ मेले पर आधा रत यात्रा-वृत्तांत का एक अंश (प्रयाग : 1976)। — कुंभ मेले
के बारे म यह अंश आपको रोचक लगा? अब इस यात्रा-वृत्तांत को इंटरनेट, पुस्तकालय से ढूँ ढ़कर पूरा प ढ़ए।
हाँ, यह अंश रोचक है — और उसका कारण यह नह क इसम कुंभ का वणन है, ब ल्क यह क इसम कुंभ का ‘वणन’ है
ही नह । नमल वमा भीड़, स्नान और अखाड़ का ब्योरा दे ने के बजाय एक अकेले आदमी क न द टू टने से शुरू करते ह, और पूरा
मेला उसी आदमी क आँख-कान से हम तक पहुँचता है।
अंश कस बात से रोचक बनता है —
आरंभ ही ध्व न से होता है, दृश्य से नह — “मुँह अँधेरे सीट सुनाई दे ती है — घनी न द म सुराख बनाती हुई।” न द म
‘सुराख’ बनना — यह बब ही पाठक को जगा दे ता है।
दशा-भ्रम का स ा चत्र — “एक क्षण पता नह चलता, म कहाँ हूँ, कस जगह हूँ, कौन-सा समय है?” — कसी अनजान
जगह म जागने पर सबका यही अनुभव होता है।
अनोखी उपमाएँ — “आँख खुलती ह, तो ढे स-सा अँधेरा गटगट पीने लगती ह, जैसे मुँह क प्यास आँख बुझा रही ह।” अँधेरे
को पीना — यह असाधारण कल्पना है।
श्रव्य बब — “बाहर एक फुसफुसाता हुआ शोर है — रगती हुई आवाज़ का रेला — जैसे हजार पैर रेत को थपथपाते हुए चल
रहे ह।” पूरा जन-सैलाब बना एक भी आदमी दखाए खड़ा हो जाता है।
चाँद का मानवीकरण — “पू णमा का पूरा चाँद, इलाहाबाद के कले पर ऊँघता हुआ… एक गोल, सफेद, मुरझाई बद जसे
सफ एक अँगुली से प छा जा सकता था।”
आत्म- वडंबना — “न म तीथयात्री लगता हूँ, न कल्पवासी — म उसे आधा हप्पी, आधा जप्सी-सा दखाई दे ता हूँगा — जो
अपने पाप-पुण्य को एक डफल बैग म समेटकर कुंभ मेले म भटकता है।” लेखक अपने ऊपर ही हँसता है।
छोटा-सा संवाद, बड़ी-सी बात — चौक दार कहता है — “पु लस… या त्रय को रास्ता दखाना पड़ता है — बेचारे अँधेरे म
भटक जाते ह।” एक वाक्य म पूरे मेले का प्रबंध और उसक करुणा, दोन आ गए।
दोन यात्रा-वृत्तांत क तुलना —
Page 48 of 54
Page 50
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
बदु ‘आ खरी च ान तक’ — मोहन राकेश ‘प्रयाग : 1976’ — नमल वमा
m as e
स्थान
.co
कन्याकुमारी — तीन सागर का संगम
a g l
प्रयाग — तीन न दय का संगम (कुंभ मेला)
a s emआँख — रंग, रेखा, वस्तार
aइंgद्रयl
प्रधान कान — सीट , फुसफुसाहट, भजन, काँपता स्वर
m
.co ag
समय सूयास्त से सूय दय तक — उजाले से उजाले तक ‘मुँह अँधेरे’ — रात के अं तम पहर म
प्रकृ त के वराट के आगे मनुष्य क लघुता sem
a
agl
दृ ष्ट जन-समूह के बीच व्य क्त का अकेलापन
भाषा चत्रात्मक; रंग क श्रृंखला — सोना, लहू, बजनी, बबात्मक और वाक्य-खंड म चलती; ‘ढे स-सा अँधेरा’, ‘आवाज़ का
com
स्याही रेला’
दोन म लेखक ‘म’ है, दोन तीथ-स्थल पर ह, दोन म स्थानीय आदमी से एक छोटा-सा संवाद पूरे e
.
mांत का कद्र बन जाता है
m a s
l देने के बजाय स्थान का
co(कन्याक
समानता वृत्त
. a g
em अनुभव देते ह।
ु मारी म ग्रेजुएट नवयुवक, प्रयाग म आश्रम का चौक दार), और दोन ही स्थान का ‘ ववरण’
a s
agl
m a s
नमल वमा के बारे म जान ली जए: नमल वमा (1929–2005) ‘नई कहानी’ आंदोलन के प्रमुख रचनाकार थे।
.co
उपन्यास — वे दन, लाल ट न क छत, एक चथड़ा सुख, रात का रपोटर, अं तम अरण्य। यात्रा-वृत्तांत — चीड़ पर
m agl
l a se
चाँदनी, हर बा रश म, धुंध से उठती धुन। उन्ह सा हत्य अकादमी पुरस्कार (कव्वे और काला पानी) तथा ानपीठ
पुरस्कार मला। a g
co m
m .
se
पूरा पढ़ने के लए तरीका: व ालय के पुस्तकालय म नमल वमा के यात्रा-वृत्तांत का संग्रह माँ गए। पढ़ते समय
o m l a
बाद.cही आपको दखने लगेगा क नमल वमा का ‘ध्व न’ वाला खाना सबसे भराag
एक कॉपी म तीन खाने बनाइए — दृश्य, ध्व न, भाव — और हर पन्ने से एक-एक वाक्य उनम उता रए। दो-तीन पन्ने
e m
as वाला। यही दो लेखक क शैली का अंतर है — और यही जानना ‘ वधा से संवाद’ करना है।
हुआ है और मोहन राकेश का ‘दृश्य’
agl
se m
com g l a
m . a
ase
खोजबीन — पृष्ठ 98
agl
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 49 of 54
Page 51
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
अभ्यास › खोजबीन
खोजबीन प रयोजना
प्र.1 इस यात्रा-वृत्तांत म उ ल्ल खत ‘आ खरी च ान’ को ‘ ववेकानंद च ान’ के नाम से भी जाना जाता है। युवाओं के
लए प्रेरणा ोत के रूप म ववेकानंद के जन्म दवस 12 जनवरी को भारत म ‘रा ीय युवा दवस’ तथा ‘रा ीय
युवा सप्ताह’ के रूप म मनाया जाता है। रा ीय युवा सप्ताह के एक हस्से के रूप म भारत सरकार द्वारा प्रत्येक
वष ‘रा ीय युवा महोत्सव’ का आयोजन कया जाता है। ववेकानंद के जीवन, लेखन और सामा जक काय के
वषय म पुस्तकालय और इंटरनेट से खोजकर प ढ़ए और कक्षा म चचा क जए। (कुछ लक — स्वामी ववेकानंद
: युवाओं के लए स े आदश और मागदशक; स्वामी ववेकानंद : आध्या त्मक वै ा नक — प्रेस सूचना ब्यूरो,
भारत सरकार)
खोजबीन का अथ है — केवल पढ़ लेना नह , ब ल्क पढ़कर नोट बनाना और कक्षा म रखना। नीचे तीन खान म यह दया गया है
क क्या खोजना है और कक्षा म क्या प्रस्तुत करना है।
वषय क्या खोज / जान कक्षा म क्या प्रस्तुत कर
1. जीवन जन्म 12 जनवरी 1863, कोलकाता; मूल नाम नरद्रनाथ दत्त। पता वश्वनाथ एक समय-रेखा (टाइमलाइन) बनाइए
दत्त, माता भुवनेश्वरी दे वी। दशन और तकशास्त्र के अध्ययन के बाद रामकृष्ण — 1863 से 1902 तक — जसम
परमहंस से भट और उन्ह को गुरु मानना। संन्यास के बाद पूरे भारत क पैदल पाँच मोड़ अं कत ह : रामकृष्ण से भट,
यात्रा — इसी यात्रा के अंत म सन् 1892 के दसंबर म वे कन्याकुमारी पहुँचे भारत-भ्रमण, कन्याकुमारी क चट्टान,
और समुद्र म स्थत उसी चट्टान पर तीन दन ध्यानमग्न रहे, जहाँ उन्ह ‘भारत के शकागो, रामकृष्ण मशन क स्थापना।
उत्थान’ का संकल्प मला। नधन 4 जुलाई 1902, बेलूर मठ — मात्र 39 वष
क आयु म।
2. ले खन प्रमुख ग्रंथ — राजयोग, कमयोग, ज्ञानयोग, भ क्तयोग; पत्र और व्याख्यान उनके पाँच कथन चुनकर एक भ त्त-
और िवचार (भारत का भ वष्य, कोलंबो से अल्मोड़ा तक)। सबसे प्र सद्ध वाक्य — “उठो, प त्रका बनाइए और हर कथन के नीचे
जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।” उनका बल तीन दो पं क्तय म ल खए क वह आज के
बात पर था — आत्म वश्वास, नभयता और सेवा। व ाथ के लए क्या अथ रखता है।
3. 11 सतंबर 1893 को शकागो क वश्व धम संसद म उनका भाषण, जसका कक्षा म एक सं क्षप्त प रचचा क जए
सामािजक आरंभ ‘अमे रका के बहनो और भाइयो’ से हुआ। सन् 1897 म रामकृष्ण — ‘आज के युवा के लए ववेकानंद
काय और मशन क स्थापना — शक्षा, च कत्सा और आपदा-राहत के काम। उनका मत का सबसे ज़रूरी संदेश कौन-सा है?’ दो
पभाव था क धम का अथ केवल पूजा नह , द रद्रनारायण क सेवा है। सन् 1984 से समूह बनाइए : एक ‘आत्म वश्वास’ का
भारत सरकार ने उनके जन्म दवस को रा ीय युवा दवस घो षत कया; 12– पक्ष ले, दूसरा ‘सेवा’ का।
16 जनवरी रा ीय युवा सप्ताह और हर वष रा ीय युवा महोत्सव।
Page 50 of 54
Page 52
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
खोजबीन का ढं ग: केवल इंटरनेट पर मत रु कए।
1. पुस्तकालय से रामकृष्ण मशन ारा प्रका शत ववेकानंद क कोई एक छोट पुस्तक ली जए और उसका एक
अध्याय प ढ़ए।
2. सरकारी और संस्थागत ोत (जैसे प्रेस सूचना ब्यूरो) को प्राथ मकता द जए — जो लक पुस्तक ने दए ह, वे
इसी कारण दए गए ह।
3. हर ोत का नाम, लेखक और त थ अपनी कॉपी म ल खए। यही आपक संदभ-सूची होगी।
4. जो तथ्य दो अलग-अलग ोत म एक-सा मले, उसी को अं तम मा नए।
पाठ से जो ड़ए — यही इस खोजबीन का असली उ े श्य है: मोहन राकेश उसी चट्टान पर खड़े होकर लखते ह
— “हर तरफ से पानी क मार सहती हुई स्वयं भी समा धस्थ-सी लग रही थी।” उन्ह चट्टान म स्थरता दखी। और
उसी चट्टान क ओर दे खकर वह बेकार ग्रेजुएट नवयुवक कहता है — “इस चट्टान से इतनी प्रेरणा तो हम मलती ही
है।” उसे उसम आशा दखी। एक ही पत्थर, दो अलग अथ — और दोन अथ उस व्य क्त से बने जो कभी वहाँ तीन
दन ध्यान लगाकर बैठा था। इसी लए ववेकानंद को जाने बना यह पाठ अधूरा रह जाता है।
अध्याय — एक नज़र म
रचनाकार — मोहन राकेश का जन्म सन् 1925 म अमृतसर, पंजाब म हुआ। वे हद सा हत्य के बहुमुखी रचनाकार थे —
कहानी, उपन्यास, नाटक, डायरी-लेखन और यात्रा-वृत्तांत, सभी वधाओं म उन्ह ने लखा। नाटक — आषाढ़ का एक दन,
लहर के राजहंस, आधे-अधूर;े उपन्यास — अंधेरे बंद कमरे, अंतराल, न आने वाला कल; कहानी-संग्रह — क्वाटर तथा अन्य
कहा नयाँ, नए बादल, वा रस तथा अन्य कहा नयाँ; डायरी — मोहन राकेश क डायरी; और यात्रा-वृत्तांत — आ खरी च ान
तक। आषाढ़ का एक दन पर उन्ह संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मला। कुछ समय उन्ह ने सा रका प त्रका का संपादन भी
कया। सन् 1972 म मात्र 48 वष क अल्पायु म उनका नधन हो गया।
वधा — यह पाठ यात्रा-वृत्तांत है, कहानी नह । इसम न कोई गढ़ा हुआ कथानक है, न पात्र का संघष। जो कुछ है, वह है —
एक स्थान, एक यात्री, और उस यात्री क चेतना पर उस स्थान क पड़ती छाप। यही कारण है क पूरा वृत्तांत उत्तम पुरुष (‘म’)
म लखा गया है और घटनाओं का क्रम घड़ी के क्रम से चलता है — सूयास्त → रात → सूय दय।
कथ्य (क्या-क्या घटता है) — लेखक केप होटल के आगे बने बाथ टक के बाईं ओर समुद्र से उभरी स्याह चट्टान म से एक पर
खड़ा होकर भारत के स्थल-भाग क आ खरी च ान को दे खता है — वही चट्टान जस पर कभी स्वामी ववेकानंद ने
समा ध लगाई थी। तीन समुद्र का वस्तार दे खकर वह क्षण-भर को भूल जाता है क वह स्वयं एक अलग व्य क्त है। होश आने
पर दे खता है क उसक अपनी चट्टान पानी म घर चुक है।
फर वह सूयास्त दे खने प च्छम क ओर चल पड़ता है। या त्रय क टो लयाँ सड हल पर रुक जाती ह, पर लेखक वहाँ नह
रुकता — क्य क अरब सागर क ओर एक और ऊँचा ट ला पूरे वस्तार को ओट म लए है। वह एक के बाद एक कई ट ले पार
करता है — “टाँग थक रही थ पर मन थकने को तैयार नह था।” अंत म खुला वस्तार सामने आ जाता है और वह ‘प्रयत्न क
साथकता’ से संतुष्ट होकर बैठ जाता है, मानो उसने संसार क सबसे ऊँची चोट सर कर ली हो।
सूयास्त का चत्र — सूय पानी को छू ता है और “पानी पर दूर तक सोना-ही-सोना ढु ल” आता है; डू बते ही वहाँ “लहू
बहता नजर आने” लगता है; फर वह लहू बजनी और बजनी से काला पड़ जाता है। दृश्यपट पर स्याही फैल जाती है और
ना रयल के झुरमुट ‘ सर धुनते’ से लगते ह। लौटते समय तट क अनाम रंग वाली रेत उसे रोक लेती है — ऐसे रंग उसने
Page 51 of 54
Page 53
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
पहले कह नह दे खे थे। फर ज्वार आता है, तट सकुड़ता है, लेखक दौड़ता है, चट्टान से टकराता है, कसी तरह उस पर चढ़ता
है — और पाता है क उस पार तो सौ फुट का खुला तट है और लोग टहल रहे ह।
सूय दय और मनुष्य — अगली सुबह लेखक आठ आद मय के साथ ववेकानंद च ान पर बैठा है, जहाँ तक चार मल्लाह
एक छोट -सी मछु आ नाव म उन्ह लाए ह। यह वृत्तांत का सबसे मा मक मोड़ आता है — साथ बैठा ग्रेजुएट नवयुवक बताता
है क कन्याकुमारी क आठ हजार क आबाद म चार-पाँच सौ श क्षत बेकार ह, जनम सौ के लगभग ग्रेजुएट ह। वह स्वयं
फोटो-एलबम बेचता है। उसका वाक्य — “हम लोग सी पय का गूदा खाते ह और दाश नक सद्धांत पर बहस करते ह”
— पूरे वृत्तांत को स दय से उठाकर यथाथ पर ला खड़ा करता है।
मूल संवेदना — यह वृत्तांत दो चीज़ को एक साथ रखता है — प्रकृ त क भव्यता और मनुष्य क क्षुद्रता व ववशता। एक
ओर तीन समुद्र का संगम और ‘श क्त का वस्तार, वस्तार क श क्त’; दूसरी ओर बेकारी के आँकड़े, सीपी का गूदा, और अंत
म लेखक के मन म दोहराया जाता बस का टाइम-टे बल — “तीसरी बस नौ चालीस पर, चौथी…”। कडल-काक इन दोन से
‘बे-लाग’ तैरते रहते ह। यही वडंबना इस रचना क आत्मा है।
भाषा-शैली — भाषा सजीव, प्रवाहपूण और चत्रात्मक है। लेखक रंग से चत्र बनाता है (सोना, लहू, बजनी, स्याही,
सुरमई, खाक ), उपमा और रूपक गढ़ता है (‘उस पूरे कैनवस म छटके हुए बदुओं क तरह’, ‘बड़ी-बड़ी चट्टान के बीच एक
छोट -सी चट्टान’), प्रकृ त का मानवीकरण करता है (‘सूय का गोला जैसे एक बेबसी म पानी के लावे म डू बता जा रहा था’),
और रात के दृश्य को क्रयाहीन वाक्यांश म उतारता है — “रात केप होटल का लॉन। अँधेरे म हद महासागर को काटती कुछ
स्याह लक र— एक पौधे क टह नयाँ।” यही रेखा चत्र-सी शैली इसे साधारण ववरण से अलग करती है।
अभ्यास क्या माँगता है — मेरे उत्तर मेरे तक म वकल्प चुनने के साथ तक भी दे ना है। वधा से संवाद म यात्रा-वृत्तांत के छह
तत्व (दृश्य-वणन, आत्मानुभू त व भावनाएँ, सांस्कृ तक प रप्रेक्ष्य, जीवन-दशन, शैलीगत वशेषताएँ, रोमांच व संघष) से अपनी
यात्रा को जाँचना है। वषय से संवाद इसे भूगोल, हस्त शल्प और समावेशी यात्रा से जोड़ता है; सृजन म यात्रा-संस्मरण और
प रचचा है; भाषा से संवाद म क्रया- वशेषण, शब्द-अथ और भाषा संगम है; और झरोखे से म नमल वमा का कुंभ-वृत्तांत
तुलना के लए रखा गया है।
Page 52 of 54
Page 54
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
स्याह / सयाह काला, श्याम “समुद्र के अंदर से उभरी स्याह चट्टान बादल इतने स्याह थे क दोपहर
म से एक पर खड़ा होकर…” म ही शाम-सी लगने लगी।
चट्टान िशला, बड़ा पत्थर “भारत के स्थल-भाग क आ खरी नद के बीच खड़ी चट्टान पर
चट्टान को दे खता रहा।” बगुला बैठा था।
समा धस्थ / समािध में िस्थत; मनोयोग, तपस्या “हर तरफ से पानी क मार सहती हुई पताजी सुबह-सुबह समा धस्थ
समा ध स्वयं भी समा धस्थ-सी लग रही थी।” होकर बैठ जाते ह।
चेतना बुिद्ध-िववेक से काम ले ना, सावधान होना, होश में “अपनी पूरी चेतना से महसूस कर रहा संगीत सुनते ही उसक चेतना
आना था।” जैसे कह और चली गई।
क्ष तज वह स्थान जहाँ धरती और आकाश िमलते हुए “तीन तरफ से क्ष तज तक पानी-ही- खेत क मेड़ पर खड़े होकर
िदखाई दे ते है;ं दृ िष्ट-सीमा पानी था।” हमने क्ष तज तक फैली फ़सल
दे खी।
सहरन कं पन, िसहरने की िक्रया “इससे मन म एक सहरन भी हुई, ठं डी हवा लगते ही दे ह म
हल्क उदासी भी घर आई।” सहरन दौड़ गई।
पृष्ठभू म पहले की बाते;ं पीछे की भूिम या पीछे का दृ श्य “पृष्ठभू म म कन्याकुमारी के मं दर क फ़ोटो क पृष्ठभू म म पूरा कला
लाल और सफेद लक र चमक रही दखाई दे रहा है।
थ ।”
झुरमुट समूह, मंडली; पास-पास उगे पेड़ या झाड़ िजनकी “दूर-दूर हटकर उगे ना रयल के बाँस के झुरमुट म च ड़य का
डािलयाँ िमलकर कुं ज-सा बना रही हों झुरमुट नजर आ रहे थे।” शोर मचा हुआ था।
बीहड़ ऊबड़-खाबड़, िवकट, िवभक्त “सामने फैली रेत के कारण बहुत चंबल के बीहड़ इलाक म
रूखी, बीहड़ और वीरान लग रही सड़क बनाना क ठन काम था।
थी।”
म द्धम / मद्धम मध्यम, कम अच्छा, मंद ा “द क्षण-पूव के क्ष तज म एक जहाज लालटे न क म द्धम रोशनी म
क म द्धम-सी रोशनी।” दाद कहानी सुनाती थ ।
महुआ / महुवा एक पिसद्ध पेड़ िजसके फू ल-फल खाने और (शब्द-संपदा म दया गया शब्द; पाठ चैत म महुआ के फूल पूरे जंगल
लकड़ी ईंध न तथा इमारती काम में आती है म ‘मछु आ नाव’ आया है) को महका दे ते ह।
सीपी / सी पयाँ शंख-घोंघे की जाित का जलचर पाणी, िजसका “हम लोग सी पय का गूदा खाते ह ब े तट पर बखरी रंग- बरंगी
शरीर िकश्तीनुम ा दोहरे खोल में िछपा होता है और और दाश नक सद्धांत पर बहस करते सी पयाँ बटोर रहे थे।
िजसके भीतर मोती बनता है ह।”
दाश नक दशनशास्त्र का जानकार, तत्ववे ा “…दाश नक सद्धांत पर बहस करते उसक बात म एक दाश नक
ह।” गहराई रहती है।
ओट आड़, रोक, शरण; परदे के िलए बनाई गई दीवार “छोटे -छोटे प क तरह समुद्र म वह द वार क ओट म खड़ा
बखरी चट्टान क ओट से सूय उ दत होकर सब सुनता रहा।
Page 53 of 54
Page 55
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 5 आ खरी चट्टान तक
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
m as e
.co l
हो रहा था।”
a g
se m पूजनीय, पूजा में दे ने योग्य वस्तु
l a
अय “घाट पर बहुत-से लोग उगते सूय को छठ पव म लोग नद म खड़े
a g अ य दे ने के लए एक त्रत थे।” होकर सूय को अ य दे ते ह।
mतैर रहे थे।”
कडल-काक पिक्षयों की एक पजाित (समुद ी जलकाग) “बहुत-से कडल-काक हमारे आस- लहर के बीच कडल-काक
coपास ag
m.
बना डरे तैरते रहते ह।
as e
बाइनाक्यूलज दू र बीन, ि नेत्र ी
a g l “…अपने बाइनाक्यूलज से सूय- मने बाइनाक्यूलज से पहाड़ी पर
दशन।” बने मं दर को दे खा।
c o m
.
सड हल बालूक ा टीला, रे त का टीला “यह वह ‘सड हल’ थी जसक चचा हवा चलते ही सड हल का
emआकार बदल जाता है।
as
म वहाँ पहुँचने के बाद से ही सुन रहा
m l
.co a g
था।”
se m
g l a
सुरमई हल्का नीला, सुर मे के रंग का “…सुरमई, खाक , पीली और लाल।” शाम के समय आकाश सुरमई
a हो जाता है।
m a s
.co रहे थे।” agl
सर धुनना शोक-पश्चाताप के वेग से िसर पीटना, मातम “स्याह पड़कर, जैसे लगातार सर धुन प रणाम दे खकर वह सर
em
करना, पछताना धुनता रह गया।
a s
बे-लाग
a gl का असर न
खरा, दो टू क (बात); िजस पर िकसी “वहाँ क बेकारी क समस्या और उसने बे-लाग शब्द म अपनी
हो सूय दय क वशेषता, इन दोन से बे- राय रख द ।
om
लाग।”
. cपहाड़ी
e m
com l as
ढलान नीचे की ओर झुक ी हुई सतह, उतार “वहाँ से दूर तक एक रेत क लंबी क ढलान पर चाय के
g
m. a
ढलान थी।” बागान फैले थे।
l a sंखeला
ag
किड़यों की लड़ी, िसलिसला, क्रमबद्ध समूह “प च्छमी तट के साथ-साथ सूखी हमालय पवत- ंखला भारत
पहा ड़य क एक ंखला दूर तक के उत्तर म फैली है।
se m
com a
चली गई थी।”
. a g l
m
ase
मल्लाह नाव खेने वाला, नािवक “चार मल्लाह थे जो एक छोट -सी मल्लाह ने पतवार सँभाली और
agl
मछु आ नाव म हम वहाँ लाए थे।” नाव कनारे लग गई।
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 54 of 54