aglasem.com
Home Schools Admission Career Mock Test PDF Docs Playground
ClassChoose class
StateSelect state

NCERT Solutions Class 9 Hindi Chapter 6 रीढ़ की हड्डी

AglaSem पर कक्षा 9 हिंदी पाठ 6 रीढ़ की हड्डी (गंगा) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 6 (Ganga).
NCERT Solutions Class 9 Hindi Chapter 6 रीढ़ की हड्डी - Page 1 of 44

About NCERT Solutions Class 9 Hindi Chapter 6 रीढ़ की हड्डी

NCERT Solutions Class 9 Hindi Chapter 6 रीढ़ की हड्डी is available here for free download. Published by NCERT for Class 9, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (44 pages). Candidates preparing for Class 9 can use NCERT Solutions Class 9 Hindi Chapter 6 रीढ़ की हड्डी to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

How can I download NCERT Solutions Class 9 Hindi Chapter 6 रीढ़ की हड्डी?

Open this page and click the Download button to save NCERT Solutions Class 9 Hindi Chapter 6 रीढ़ की हड्डी as a PDF. It is completely free on AglaSem Docs.

Is NCERT Solutions Class 9 Hindi Chapter 6 रीढ़ की हड्डी free to download?

Yes. NCERT Solutions Class 9 Hindi Chapter 6 रीढ़ की हड्डी can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

How many pages does NCERT Solutions Class 9 Hindi Chapter 6 रीढ़ की हड्डी have?

NCERT Solutions Class 9 Hindi Chapter 6 रीढ़ की हड्डी contains 44 pages, which you can read online or download together as a single PDF.

Where can I find more Class 9 study material?

You can find more Class 9 question papers, sample papers, syllabus, and answer keys on AglaSem Docs.

NCERT Solutions Class 9 Hindi Chapter 6 रीढ़ की हड्डी – Text

Read the full text of this solution below — useful to quickly search, copy and reference the content online without downloading the PDF.

📄 View text version (44 pages)

Page 1

F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा9

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 6: रीढ़ क ह ीी

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — गंगा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

100 – 119 13 32 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 43 pages

Page 2

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 9 · हद · गं गा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 6: रीढ़ क ह ी
NCERT कक्षा 9 हद क पाठ्यपुस्तक गंगा के गद्य खंड के पाठ 6 रीढ़ क ह ी के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह जगद शचंद्र माथुर (1917–1978)
का सन् 1939 म लखा गया एकांक है, जो परंपरागत ववाह-व्यव ा, ववाह म लेन-दे न और पढ़ - लखी लड़क के प्र त समाज क रू ढ़गत सोच पर
तीखा व्यंग्य करता है। पृष्ठ 100 से 119 तक अभ्यास के वे सभी शीषक — रचना से संवाद (मेरे उत्तर मेरे तक, मेरी समझ मेरे वचार), वधा से
संवाद (एकांक क पड़ताल, रंग- नदश, मेरी टप्पणी), वषय से संवाद (तुलना और वचार), सृजन (एकांक का वस्तार), भाषा से संवाद
(व्याकरण क बात — मेरे शब्द, भाषा म मुहावरे, संदभ म शब्द), ग त व धयाँ (आप भी संवाददाता), भाषा संगम और खोजबीन — शीषक-दर-
शीषक, प्रश्न-दर-प्रश्न हल कए गए ह। ‘एकांक क पड़ताल’ के दस बदु उदाहरण स हत ता लका म भरकर दए गए ह।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

गंगा (कक्षा 9) 100 – 119

खं ड प्रश्न

13 32

माध्यम

हन्द

मेरे उत्तर मेरे तक — पृष्ठ 113 और 114
अभ्यास › रचना से संवाद › मेरे उत्तर मेरे तक

रचना से सं वाद मे रे उत्तर मे रे तक

प्र.1 नम्न ल खत प्रश्न के सट क उत्तर चु नए और यह भी बताइए क आपको ये उत्तर उपयुक्त क्य लगते ह? 1.
एकांक ‘रीढ़ क ह ी’ का शीषक कसका प्रतीक है? (क) शरीर के एक आवश्यक अंग का (ख) व्य क्त क
ऊँचाई के आधार का (ग) आत्म-सम्मान और नै तक दृढ़ता का (घ) शारी रक श क्त और प रश्रम का

उत्तर

सट क उत्तर — (ग) आत्म-सम्मान और नै तक दृढ़ता का।

यह उत्तर क्य उपयुक्त है: एकांक का अं तम और सबसे तीखा वाक्य ही शीषक क व्याख्या कर दे ता है — “घर
जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा क आपके लाडले बेटे के रीढ़ क ह ी भी है या नह — यानी बैकबोन, बैकबोन!”
शंकर के शरीर म रीढ़ क ह ी तो है ही; उमा जो नह पाती वह है च रत्र क सीध। इसी बात क तैयारी लेखक पहले
ही कर दे ता है — रंग- नदश म शंकर का प रचय है “झुक कमर इनक खा सयत है”, और गोपालप्रसाद स्वयं बेटे को
टोकते ह — “झुककर क्य बैठते हो? ब्याह तय करने आए हो, कमर सीधी करके बैठो। तुम्हारे दोस्त ठ क कहते ह
क शंकर क ‘बैकबोन’...” वाक्य वह टू ट जाता है, पर बात पूरी हो जाती है। इसके ठ क उलट उमा है, जसका
मस्तक उठ जाता है — “उसके स्वर म तल्लीनता आ जाती है, यहाँ तक क उसका मस्तक उठ जाता है।” झुक
कमर बनाम उठा हुआ मस्तक — यही इस एकांक का प्रतीक- वधान है। इस लए ‘रीढ़ क ह ी’ ह ी का नह ,
आत्म-सम्मान और नै तक दृढ़ता का प्रतीक है।

Page 1 of 43

Page 3

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

वकल्प सही / कारण
ग़लत

(क) शरीर के एक ग़लत यह शब्द का शब्दकोशीय अथ है, प्रतीकाथ नह । य द शीषक केवल ह ी क बात करता तो एकांक म
आवश्यक अंग का कोई व्यंग्य ही न बचता — और उमा का वाक्य मज़ाक नह , चोट है।

(ख) व्य क्त क ग़लत एकांक म कह भी कसी पात्र क लंबाई-ऊँचाई चचा का वषय नह है। चचा का वषय है ‘कमर
ऊँचाई के आधार का सीधी’ रखना, जो मुद्रा है, ऊँचाई नह ।

(ग) आत्म-सम्मान सही ✓ ‘बैकबोन’ अंग्रेज़ी म भी दृढ़ता और स्वा भमान का मुहावरा है। शंकर का होस्टल-प्रसंग पर चुप रह
और नै तक दृढ़ता जाना और सफ़ “बाबूजी, च लए।” कह पाना इसी दृढ़ता के अभाव का प्रमाण है।
का

(घ) शारी रक श क्त ग़लत शारी रक ताकत क बात एकांक म आती ज़रूर है — गोपालप्रसाद क ‘कचौ ड़याँ’ और ‘बालाई’
और प रश्रम का वाली शेखी — पर वह हास्य का प्रसंग है। उमा शंकर क ताकत पर नह , उसक कायरता पर उँ गली
रखती है — “न आपके पुत्र क तरह ताक-झाँककर कायरता दखाई है।”

प्र.2 2. ‘रीढ़ क ह ी’ एकांक म कस पर व्यंग्य कया गया है? (क) पात्र क नधनता और लाचारी पर (ख) पात्र क
भाषा और हास्य पर (ग) ववाह और अ शक्षा पर (घ) समाज क अनु चत मान्यताओं पर

उत्तर

सट क उत्तर — (घ) समाज क अनु चत मान्यताओं पर।

यह उत्तर क्य उपयुक्त है: एकांक का हर बड़ा संवाद कसी-न- कसी सामा जक मान्यता को पकड़कर उसका
मज़ाक उड़ाता है। गोपालप्रसाद कहते ह — “हम ज्यादा पढ़ - लखी लड़क नह चा हए... बस हद से हद मै क-पास
होनी चा हए” और उसे तक का जामा पहनाते ह — “मोर के पंख होते ह, मोरनी के नह ; शेर के बाल होते ह, शेरनी
के नह ।” यही आदमी ‘सुंदरता ज़रूरी है, चाहे पाउडर लगाकर हो’ कहता है और ‘खूबसूरती पर टै क्स’ का चुटकुला
सुनाता है। दूसरी ओर प्रेमा क मान्यता है — “मेरी समझ म तो ये पढ़ाई- लखाई के जंजाल आते नह ।” और
रामस्वरूप क मान्यता यह है क बेट का बी.ए. होना छपाने क चीज़ है। ये सब व्य क्त क नह , समाज क गढ़
हुई मान्यताएँ ह — और लेखक क चोट ठ क इन्ह पर है। पुस्तक क भू मका भी यही कहती है क एकांक
“परंपरागत ववाह क व्यव ा और स्त्रय क शक्षा को लेकर रू ढ़गत सोच पर चोट करती है।”

Page 2 of 43

Page 4

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

वकल्प सही / कारण
ग़लत

(क) पात्र क नधनता ग़लत कोई पात्र नधन है ही नह । गोपालप्रसाद स्वयं कहते ह — “मकान-वकान से है सयत भी बुरी नह
और लाचारी पर मालूम होती।” घर म नौकर है, हारमो नयम और सतार ह, नाश्ते म मठाई-नमक न-फल-चाय-टोस्ट
ह। लाचारी है भी तो सामा जक है, आ थक नह ।

(ख) पात्र क भाषा ग़लत भाषा और हास्य यहाँ व्यंग्य के औज़ार ह, नशाना नह । ‘पौडर-वौडर’, ‘टोस्ट-वोस्ट’ पर हम हँसते
और हास्य पर ज़रूर ह, पर हँसी का लक्ष्य पात्र क बोली नह , उसक सोच है।

(ग) ववाह और ग़लत एकांक ववाह-सं ा के वरुद्ध नह है, वह ववाह क मंडी के वरुद्ध है। और वह अ शक्षा पर
अ शक्षा पर (उलटा व्यंग्य नह करता — वह उन लोग पर व्यंग्य करता है जो लड़क क शक्षा को दोष मानते ह। यानी
भी) यह वकल्प बात को ठ क उलटकर रख दे ता है।

(घ) समाज क सही ✓ ‘ऊँची तालीम सफ़ मद के लए है’, ‘लड़क सुंदर होनी चा हए’, ‘ज़्यादा पढ़ लड़क नखरे करेगी’
अनु चत मान्यताओं — ये तीन मान्यताएँ एकांक म नाम लेकर तोड़ी जाती ह।
पर

प्र.3 3. “घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा क आपके लाडले बेटे के रीढ़ क ह ी भी है या नह ” यह वाक्य शंकर क
कस छ व को उजागर करता है? (क) नै तक साहस क कमी और चा र त्रक दुबलता (ख) अनुभव और ववेक
क कमी (ग) चा र त्रक दृढ़ता और शारी रक दुबलता (घ) उदासीनता और एकाक पन

उत्तर

सट क उत्तर — (क) नै तक साहस क कमी और चा र त्रक दुबलता।

यह उत्तर क्य उपयुक्त है: यह वाक्य उमा उस क्षण कहती है जब वह शंकर का पछला कारनामा उजागर कर चुक
है — “अभी पछली फरवरी म ये लड़ कय के होस्टल के इद- गद क्य घूम रहे थे, और वहाँ से कैसे भगाए गए थे!”
इस आरोप पर शंकर एक शब्द भी अपने बचाव म नह कहता; वह केवल इतना कह पाता है — “बाबूजी, च लए।”
जो व्य क्त अपना पक्ष तक नह रख सकता, उसम नै तक साहस कहाँ? उमा इसी को ‘कायरता’ कहती है — “न
आपके पुत्र क तरह ताक-झाँककर कायरता दखाई है।” लेखक ने पहले ही संकेत दे दया था — शंकर “खीस
नपोरने वाले नौजवान म से है”, उसक “आवाज़ पतली है और ख सयाहट-भरी”, वह उमा को “आँख छपाकर”
दे खता है, और अपने ववाह तक के बारे म उसक कोई राय नह — हर बात उसका पता बोलता है। यही चा र त्रक
दुबलता है।

Page 3 of 43

Page 5

as e
कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
वकल्प सही / कारण

a se
coकm
ग़लत

. होस्टल-प्रसंग पर चुप्पी, पता के पीछे छपना, आँख चुराना,a
g l
s eचाmर त्रक
(क) नै तक साहस
कमी a
सही ✓ और अंत म बना कुछ कहे चले

gl
aदुबलता
और जाना — चार प्रमाण एक ही ओर संकेत करते ह।

co m
. ag
(ख) अनुभव और ववेक ग़लत शंकर बी.एससी. कर चुका है और मे डकल कॉलेज का छात्र है; ‘टै क्स’ जैसे वषय पर टप्पणी

e m
as
क कमी भी करता है। उसम अनुभव या समझ क कमी नह — कमी साहस क है। उमा भी उसक

g l
बु द्ध पर नह , उसके आचरण पर प्रश्न उठाती है।

(ग) चा र त्रक दृढ़ता और ग़लत
a
यह वकल्प दोन बात उलट दे ता है। चा र त्रक दृढ़ता तो उसम है ही नह ; और शारी रक दुबलता
शारी रक दुबलता
co m
(एक साल क बीमारी) पर एकांक व्यंग्य नह करता — उसे तो गोपालप्रसाद स्वयं सफ़ाई के

em.
रूप म पेश करते ह।

m l as
m .co
(घ) उदासीनता और ग़लत
a g
शंकर उदासीन नह है — वह उमा को “आँख छपाकर” दे खता है, हँसी म साथ दे ता है,

l a se
एकाक पन बातचीत म शा मल होता है। और एकाक पन का तो प्रसंग ही नह ; वह पूरे समय पता के साथ

a g है।

m a s
m .co agl
l a se
प्र.4 4. “जी हाँ, म कॉलेज म पढ़
a g
ँ। मने बी.ए. पास कया है।” उमा क दृ ष्ट म शक्षा प्राप्त करने का सही अथ है?
(क) बड़ी-बड़ी ड ी प्राप्त करना (ख) कॉलेज म पढ़ना और नौकरी पाना (ग) माता- पता और प त को प्रसन्न

m
रखना (घ) आत्मबल और स्वतंत्र वचार रखना

. co
e m
m l as
.co a g
उत्तर

se m
a
सट क उत्तर — (घ) आत्मबल और स्वतंत्र वचार रखना।

ag l
se m
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: उमा अपनी डग्री का बखान नह करती — वह उसे तभी बताती है जब उसे अपने

com
सम्मान क रक्षा करनी पड़ती है, और उसी साँस म जोड़ दे ती है — “कोई पाप नह कया, कोई चोरी नह क ... मुझे
g l a
m . a
e
asउसके साथ क्या हो रहा है — “जब कुस -मेज बकती है तब दुकानदार
अपनी इज्जत— अपने मान का खयाल तो है।” यानी उसके लए शक्षा का प्रमाण डग्री का काग़ज़ नह , वह दृ ष्ट है
जो उसे यह दे खने क श क्त दे ती है lक
a g
कुस -मेज से कुछ नह पूछता, सफ खरीदार को दखला दे ता है।” और वह साहस जो उसे बड़ के सामने, अपने ही
घर म, यह कहने दे ता है — “क्या वे बेबस भेड़-बक रयाँ ह, जन्ह कसाई अ
co m
तरह दे ख-भालकर खरीदते ह?”

m .
e
ध्यान द जए, पूरा दृश्य इसी वरोध पर टका है: घर के सब लोग चुप ह (“रामस्वरूप चुप”), केवल पढ़ - लखी
m l as
.co g
लड़क बोल पाती है। यही आत्मबल और स्वतंत्र वचार है।
m a
l a se
ag
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 4 of 43

Page 6

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

वकल्प सही / कारण
ग़लत

(क) बड़ी-बड़ी डग्री ग़लत य द डग्री ही लक्ष्य होती तो उमा उसे शुरू म ही गव से बताती। वह तो अंत तक चुप रहती है —
प्राप्त करना “(चुप)”, “उसी तरह गदन झुकाए” — और डग्री का उल्लेख भी सफ़ाई के रूप म करती है,
शेखी के रूप म नह ।

(ख) कॉलेज म पढ़ना ग़लत नौकरी क बात एकांक म लड़के वाले उठाते ह — “कोई नौकरी तो करानी नह ।” उमा इस बदु
और नौकरी पाना पर एक शब्द भी नह कहती; उसका पूरा वरोध सम्मान के प्रश्न पर है, आजी वका के प्रश्न पर
नह ।

(ग) माता- पता और ग़लत यह तो ठ क वही सोच है जसे उमा तोड़ती है। पता के इशारे (“रामस्वरूप इशारे के लए खाँसते
प त को प्रसन्न रखना ह”) और आदे श (“जवाब दो, उमा!”) के बावजूद वह वही कहती है जो सच है।

(घ) आत्मबल और सही ✓ “हल्क ले कन मजबूत आवाज़ म” — यह रंग- नदश ही उत्तर है। शक्षा ने उसे ऊँची आवाज़
स्वतंत्र वचार रखना नह , मज़बूत आवाज़ द है।

प्र.5 5. गोपालप्रसाद और रामस्वरूप म क्या-क्या समानताएँ ह? (क) दोन प्रग तशील ह और रू ढ़य को नकारते ह।
(ख) दोन दखावे और परंपरा के शकार ह। (ग) दोन शक्षा और रू ढ़य के समथक ह। (घ) दोन संगीत और
स्वा दष्ट भोजन के प्रेमी ह।

उत्तर

सट क उत्तर — (ख) दोन दखावे और परंपरा के शकार ह।

यह उत्तर क्य उपयुक्त है: दोन पढ़े - लखे ह, दोन आधु नक दखना चाहते ह, और दोन अंततः परंपरा के आगे
झुक जाते ह।
दखावा — रामस्वरूप का पूरा घर एक ‘सेट’ क तरह सजाया जाता है — तख्त, धुली हुई चादर, कोने क दरी,
हारमो नयम और सतार, गुलदस्ते क झाड़-प छ, मक्खन के लए भागदौड़, “ वलायती चाय पसंद है या
हदुस्तानी?” और बेट के लए पाउडर तक — प्रेमा के शब्द म, “आजकल तो लड़क कतनी ही सुंदर हो, बना
ट म-टाम के भला कौन पूछता है?” — पर आदे श रामस्वरूप का ही था, “ज़रा ठ क-ठाक करके नीचे लाना।” उधर
गोपालप्रसाद पुराने ज़माने क शेखी बघारते ह — “बारह घंटे क ‘ स टग’ हो गई, बारह घंटे!” — और अपनी
आधु नकता का प्रमाण यह दे ते ह क वे वक ल ह और सभा-सोसाइ टय म जाते ह।
परंपरा के शकार — रामस्वरूप को गोपालप्रसाद के “द कयानूसी खयाल पर” गुस्सा आता है, फर भी वे कहते ह
— “क्या करूँ, मजबूरी है। मतलब अपना है” — और बेट क डग्री छपा जाते ह। गोपालप्रसाद खुले-आम कहते ह
— “ऊँची तालीम भी ऐसी चीज म से एक है” जो “ सफ मद के लए” ह। दोन क सबसे बड़ी समानता यही है क
दोन लड़क को व्य क्त नह , सौदे क चीज़ मानते ह — एक बेचने क तैयारी करता है, दूसरा नाप-तोल करता है।
इसी लए उमा दोन को एक ही वाक्य म लपेट लेती है — “हमारी बेइज्जती नह होती जो आप इतनी दे र से नाप-तोल
कर रहे ह?”

Page 5 of 43

Page 7

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

वकल्प सही / कारण
ग़लत

(क) दोन प्रग तशील ग़लत रू ढ़ को नकारता तो कोई भी नह । रामस्वरूप उससे डरते ह और गोपालप्रसाद उसे तक दे कर सही
ह और रू ढ़य को ठहराते ह।
नकारते ह।

(ख) दोन दखावे सही ✓ दखावे का प्रमाण — सजा हुआ कमरा, पाउडर, झूठ; परंपरा का प्रमाण — ‘मै क तक पढ़ ’ का
और परंपरा के सौदा और जायचा मलाने क रस्म।
शकार ह।

(ग) दोन शक्षा और ग़लत यह वकल्प आधा सच जोड़कर बनाया गया है। गोपालप्रसाद लड़ कय क शक्षा के समथक ह ही
रू ढ़य के समथक (छलावा नह — “क्या लड़क क पढ़ाई और लड़ कय क पढ़ाई एक बात है?” और रामस्वरूप बेट को
ह। वकल्प) पढ़ाकर भी उस शक्षा को छपाते ह, इस लए वे भी व्यवहार म उसके समथक नह ठहरते। अतः
‘ शक्षा के समथक’ दोन क साझी वशेषता नह है।

(घ) दोन संगीत और ग़लत यह बात पाठ से ही कट जाती है। गोपालप्रसाद गीत बीच म ही रुकवा दे ते ह — “नह -नह साहब,
स्वा दष्ट भोजन के काफ है” — और खाने से इनकार करते ह — “नाश्ता ही तो करना था साहब, कोई पेट तो भरना
प्रेमी ह। था नह ... टोस्ट-वोस्ट म खाता भी नह ।” यह वकल्प वैसे भी बहुत छोट बात है, च रत्र क
समानता नह ।

प्र.6 6. इस एकांक क संवाद शैली मुख्यतः कैसी है? (क) औपचा रक और शुष्क (ख) स्वाभा वक और व्यंग्यपूण (ग)
काव्यात्मक और प्रश्नात्मक (घ) भावुक और सं क्षप्त

उत्तर

सट क उत्तर — (ख) स्वाभा वक और व्यंग्यपूण।

यह उत्तर क्य उपयुक्त है: स्वाभा वक इस लए क संवाद ठ क वैसे ही ह जैसे उस समय का शहरी मध्यवग बोलता
था — हद , उदू और अंग्रेज़ी घुली- मली — “इधर तशरीफ़ लाइए”, “यह सब आप क्या तकल्लुफ़ करते ह!”,
“‘ बजनेस’ क बातचीत हो जाए”, “‘वीक-एंड’ म चला आया था”, “एकाध साल का ‘मा जन’ रखता हूँ।”
बोलचाल के पुनरुक्त युग्म भी वैसे ही ह — ‘पौडर-वौडर’, ‘टोस्ट-वोस्ट’, ‘प टग-व टग’, ‘इनाम- वनाम’ — और हर
पात्र क अपनी अलग लय है: रामस्वरूप का ‘हँ-हँ-हँ’, शंकर का ‘जी...’, प्रेमा क झुँझलाहट।
व्यंग्यपूण इस लए क लगभग हर हँसी के नीचे एक चोट छपी है — “खूबसूरती पर टै क्स!”, “मोर के पंख होते ह,
मोरनी के नह ”, “बाप सेर है तो लड़का सवा सेर”, और सबसे बढ़कर वह अं तम पं क्त जसम रतन नाश्ते का
मक्खन लेकर आता है — “बाबूजी, मक्खन!” — जब सौदा टू ट चुका है। यही दो गुण मलकर इस एकांक क शैली
बनाते ह।

Page 6 of 43

Page 8

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

वकल्प सही / कारण
ग़लत

(क) औपचा रक और ग़लत औपचा रकता है ज़रूर, पर वह स्वयं हँसी का वषय है — “आप तो मुझे काँट म घसीटने लगे।”
शुष्क शुष्क तो यह भाषा कह भी नह ; वह मुहावर और चुट कय से भरी है।

(ख) स्वाभा वक सही ✓ बोलचाल क सहज हदुस्तानी + हर संवाद म छपी चोट। यही एकांक को मंच पर जीवंत बनाती है।
और व्यंग्यपूण

(ग) काव्यात्मक और ग़लत पूरे एकांक म काव्य केवल एक जगह है — मीरा का गीत ‘मेरे तो गरधर गोपाल दूसरो न कोई’ —
प्रश्नात्मक और वह उद्धत है, संवाद नह । प्रश्न भी ह, पर वे व्यंग्य के प्रश्न ह, दाश नक नह ।

(घ) भावुक और ग़लत भावुकता केवल अं तम दृश्य म आती है, जब उमा क “खामोशी सस कय म तबद ल हो जाती है।”
सं क्षप्त और संवाद सं क्षप्त तो ह ही नह — गोपालप्रसाद के पुराने ज़माने वाले भाषण कई-कई पं क्तय के
ह।

मेरी समझ मेरे वचार — पृष्ठ 114
अभ्यास › रचना से संवाद › मेरी समझ मेरे वचार

रचना से सं वाद चचा

प्र.1 नीचे दए गए प्रश्न पर कक्षा म चचा क जए और उनके उत्तर ल खए— 1. बाबू रामस्वरूप समाज म आधु नक
व्यवहार का दखावा करते ह, जब क उनके वचार रू ढ़वाद ह। इस अंतद्वद्व के उदाहरण एकांक म से खोजकर
ल खए। (संकेत– उमा के साथ उनका व्यवहार, ववाह के लए दखावे करना कतु इन प्रयास को छपाने क
चेष्टा करना आ द।)

उत्तर

बाबू रामस्वरूप का अंतद्वद्व यह है क उनका दमाग नई पीढ़ के साथ है और उनके पैर पुरानी व्यव ा म गड़े हुए ह। वे जानते ह
क क्या ठ क है, पर करते वही ह जो समाज को स्वीकार है। एकांक म इसके प्रमाण कदम-कदम पर बखरे ह —

Page 7 of 43

Page 9

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

एकांक म से उदाहरण यह कस द्वं द्व को दखाता है

बेट को बी.ए. तक पढ़ाया — प्रेमा क शकायत है, “तुम्ह ने उसे पढ़ा- लखाकर इतना सर यह उनका आधु नक पक्ष है। उस ज़माने
चढ़ा रखा है।” म बेट को कॉलेज भेजना छोट बात न
थी।

पर उसी पढ़ाई को छपा गए — गोपालप्रसाद अंत म कहते ह, “आपक लड़क बी.ए. पास है यही सबसे बड़ा प्रमाण है। जस उपल
और आपने मुझको कहा था क सफ मै क तक पढ़ है।” पर गव होना चा हए था, उसे उन्ह ने दोष
क तरह छपाया।

“गुस्सा तो मुझे बहुत आता है इनके द कयानूसी खयाल पर... मगर लड़क चाहते ह ऐसी क एक ही साँस म वरोध और समपण।
ज्यादा पढ़ - लखी न हो।” — और तुरंत बाद, “क्या करूँ, मजबूरी है। मतलब अपना है।” वचार म वे रू ढ़ के वरुद्ध ह, व्यवहार म
उसके साथ।

बेट के लए पाउडर भजवाना — “आजकल तो लड़क कतनी ही सुंदर हो, बना ट म-टाम के वे भी लड़क को दखाने क चीज़ मान
भला कौन पूछता है? इसी मारे मने तो पौडर-वौडर उसके सामने रखा था।” (यह बात प्रेमा कहती रहे ह — वही सोच जस पर वे दूसर को
है, पर व्यव ा रामस्वरूप क है — “अ ा तो उमा को जैसे हो तैयार कर लो!”) द कयानूसी कहते ह।

पूरे कमरे क सजावट — तख्त, धुली चादर, दरी, हारमो नयम- सतार, गुलदस्ते क झाड़-प छ, दखावा। घर को कुछ घंट के लए वह
नाश्ता, मक्खन के लए दौड़। बना दे ना जो वह रोज़ नह है।

पर इस दखावे को छपाने क चेष्टा — प्रेमा को डाँटना, “तुम्ह कतई अपनी जबान पर काबू नह दखावा करना और फर दखावे को भी
है... उन सब लोग के सामने जक्र और ढं ग से होगा। मगर तुम तो अभी से सब-कुछ उगले दे ती छपाना — दोहरा पाखंड, जो द्वं द्व का
हो।” सबसे साफ़ लक्षण है।

बेट के गुण क ‘प्रदशनी’ — “सुनाओ तो उमा एकाध गीत सतार के साथ”, “यह जो तसवीर पता बेट क बोली लगाते से जान पड़ते
टँ गी हुई है, कुत्ते वाली, इसी ने ख ची है”, “ सलाई तो सारे घर क इसी के जम्मे रहती है, यहाँ ह। उमा का ‘कुस -मेज’ वाला उलाहना
तक क मेरी कमीज भी।” इसी दृश्य से नकलता है।

गोपालप्रसाद के स्त्री- वरोधी मज़ाक म साथ दे ना — “जी हाँ, और मद के दाढ़ होती है, औरत के जस सोच से वे भीतर-ही-भीतर लड़ रहे
नह ...! हूँ... हूँ... हँ...!” ह, उसी पर हँसकर वे उसे मान्यता दे दे ते
ह।

नणायक क्षण म चुप्पी — गोपालप्रसाद पूछते ह, “क्या तुम कालेज म पढ़ हो?” और रंग- नदश बेट अकेले लड़ रही है और पता एक
है — “(रामस्वरूप चुप)”। शब्द नह बोलते। यह उनका द्वं द्व हार म
बदल जाता है।

नष्कष — रामस्वरूप बुरे आदमी नह ह; वे कमज़ोर आदमी ह। उनक आधु नकता बेट को पढ़ाने तक जाती है,
उसके पक्ष म खड़े होने तक नह । इसी लए एकांक म ‘रीढ़ क ह ी’ का प्रश्न केवल शंकर पर लागू नह होता —
रामस्वरूप क रीढ़ भी उतनी ही झुक हुई है, और यह चोट लेखक ने बहुत चुपचाप क है।

Page 8 of 43

Page 10

as e
कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
2. ‘रीढ़ क ह ी’ का संदभ दो अलग-अलग पात्र के लए भन्न- भन्न अथ म आया है, उनक पहचान क जए
e
प्र.2

m l as
.co
और ल खए।

a g
se m
g l a
a
उत्तर

एकांक म ‘रीढ़ क ह ी / बैकबोन’ शब्द दो बार आता है — दोन बार शंकर के बारे म, पर बोलने वाले अलग ह और अथ

com
बलकुल अलग।

e m . ag
पहला संदभ
g l as दूसरा संदभ

कौन गोपालप्रसाद — अपने बेटे शंकर से
a उमा — गोपालप्रसाद से, शंकर के बारे म

com
कहता है

“घर जाकर ज़रा यह पताem
.
a s
coबैठmो। तुम्हारे दोस्त ठ क कहते ह क शंकर क ‘बैकबोन’...”
पंिक्त
लाडले बेटे के रीढ़lक ह ी भी है या नह — यानी
“झुककर क्य बैठते हो? ब्याह तय करने आए हो, कमर सीधी करके लगाइएगा क आपके

. g
बैकबोन, बैकaबोन!”
e m
g l as
a अथ शारी रक — बैठने क मुद्रा, झुक हुई कमर। रंग- नदश भी यही नै तक — च रत्र क दृढ़ता, आत्म-सम्मान, अपनी

m a s
कहता है — “झुक कमर इनक खा सयत है।” बात पर खड़े होने का साहस।

em
. c o agl
s
कहने झुँझलाहट और चता — पता को डर है क लड़का ‘पसंद’ न तीखा व्यंग्य — वही ताना, वही शब्द, अब च रत्र पर।

l a
दोहराना उन्ह भी अखरता है। ag
का भाव आएगा। वाक्य वे बीच म ही तोड़ दे ते ह, क्य क दोस्त का ताना उमा पता को उन्ह के ह थयार से उत्तर दे ती है।

पभाव
co m
.
दृश्य का एक छोटा-सा हास्य-प्रसंग। एकांक का चरम- बदु — इसके तुरंत बाद परदा

e m
as
गरने क तैयारी हो जाती है, और यही वाक्य शीषक

m l
.co g
बन जाता है।

em a
a s
a gl यह शल्प क्य सुंदर है: लेखक एक ही शब्द को शरीर से च रत्र तक ले जाता है। पहली बार वह मज़ाक जैसा
लगता है, दूसरी बार वह घाव कर दे ता है। नाटक क भाषा म इसे अथ- वस्तार कहगे — शब्द वही रहता है, संदभ
se m
com g l a
. a
बदलने से उसका आकार कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है क उमा का यह वाक्य केवल शंकर पर नह , उस पूरे
m
ase
समाज पर लागू हो जाता है जो लड़क का मोल-भाव करता है पर अपने बेटे के आचरण पर कोई प्रश्न नह उठाता।

agl
ध्यान द जए: कुछ वद्याथ तीसरा संदभ भी जोड़ते ह — बाबू रामस्वरूप, जो बेट के पक्ष म एक शब्द नह बोल

. com
पाते और अंत म “कुस पर धम से बैठ जाते ह।” शब्द भले उनके लए न आया हो, पर ‘रीढ़ क ह ी’ का प्रश्न उन

m a s em नष्कष है, पाठ का शब्द
gl
पर भी उतना ही खड़ा होता है। ऐसा उत्तर लखते समय स्पष्ट कर द जए क यह आपका
. cनहo । a
a s em
agl c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 9 of 43

Page 11

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 3. “मेरी समझ म तो ये पढ़ाई- लखाई के जंजाल आते नह ।” प्रेमा क इस सोच से उस समय क स्त्री- शक्षा क
स्थ त के वषय म क्या पता चलता है?

उत्तर

प्रेमा का यह एक वाक्य सन् 1939 के आसपास क स्त्री- शक्षा क पूरी तस्वीर ख च दे ता है। उससे पाँच बात साफ़ होती ह —

1. लड़क क पढ़ाई ‘जंजाल’ यानी झंझट मानी जाती थी। उसे उपल नह , घर के लए खड़ी क गई एक मुसीबत समझा
जाता था। प्रेमा का तक भी यही है — “सारे जतन करके तो हार गई। तुम्ह ने उसे पढ़ा- लखाकर इतना सर चढ़ा रखा है।”
यानी शक्षा को लड़क के ‘ बगड़ने’ का कारण माना जाता था।
2. शक्षा क एक ‘हद’ तय थी। प्रेमा को आदश वही ज़माना लगता है जब — “‘आ-ई’ पढ़ ली, गनती सीख ली और बहुत हुआ
तो ‘स्त्री-सुबो धनी’ पढ़ ली।” यानी अक्षर- ान, हसाब और घर-गृह ी क शक्षा दे ने वाली एक पुस्तक — इससे आगे लड़क
के लए कुछ ज़रूरी नह समझा जाता था। यही ‘हद’ गोपालप्रसाद भी बाँधते ह — “बस हद से हद मै क-पास होनी चा हए।”
3. शक्षा का मूल्य ववाह के बाज़ार से तय होता था। प्रेमा क असली शकायत यही है — “इं स ही पास करा लेते— लड़क
अपने हाथ रहती, और इतनी परेशानी न उठानी पड़ती।” अथात् पढ़ाई अ या बुरी इससे तय नह होती थी क लड़क क्या
बन गई, ब ल्क इससे क रश्ता आसानी से मला या नह ।
4. यह सोच केवल पुरुष क नह थी। सबसे चुभने वाली बात यही है क ऐसा कहने वाली एक स्त्री और एक माँ है। रू ढ़ तब
सबसे मज़बूत होती है जब वह जनके वरुद्ध है, उन्ह के मन म बैठ जाए। प्रेमा के लए बेट क पढ़ाई गव नह , बोझ है — और
इसका कारण यह नह क वह नदयी है, ब ल्क यह क उसने अपने चार ओर कभी कोई दूसरा उदाहरण दे खा ही नह ।
5. स्त्री के पास अपनी उपल को सही ठहराने क भाषा नह थी। प्रेमा ‘स्त्री-सुबो धनी’ क तुलना बी.ए.–एम.ए. से करती है
— “सच पूछो तो ‘स्त्री-सुबो धनी’ म ऐसी-ऐसी बात लखी ह— ऐसी बात क क्या तुम्हारी बी.ए., एम.ए. क पढ़ाई म ह गी।”
यह तुलना ही बताती है क उस समय स्त्री के लए ‘ ान’ का अथ केवल गृह ी चलाने का ान था।

पीछे का सच: पुस्तक क भू मका स्वयं बताती है क “उस समय भारतीय समाज म शक्षा और अन्य कायक्षेत्र म
स्त्रय को समान अवसर नह मलते थे।” प्रेमा क सोच उसी असमानता क उपज है। इसी लए एकांक उसे
खलना यका नह बनाता — वह भी उसी व्यव ा क शकार है, बस उसे इसका पता नह ।

आज से जो ड़ए: आज इसी वाक्य को उलटकर प ढ़ए — जस पढ़ाई को प्रेमा ‘जंजाल’ कहती है, वही उमा को वह
आवाज़ दे ती है जससे वह पूरे कमरे को चुप करा दे ती है। एकांक का उत्तर प्रेमा के वाक्य म नह , उमा क उप त
म है।

प्र.4 4. लेखक ने ‘रीढ़ क ह ी’ शब्द को एकांक के शीषक के रूप म क्य चुना होगा? य द आप इस एकांक का
दूसरा शीषक रखना चाह, जो इसक मुख्य बात को दशाए, तो वह क्या होगा और क्य ?

उत्तर

लेखक ने यह शीषक क्य चुना होगा — चार कारण:

1. यह एकांक के चरम- बदु का शब्द है। अ ा शीषक वह से उठाया जाता है जहाँ रचना अपने शखर पर होती है। उमा का
अं तम वार यही है — “यानी बैकबोन, बैकबोन!” परदा गरने से ठ क पहले बोला गया वाक्य दशक के कान म सबसे दे र तक
गूँजता है।

Page 10 of 43

Page 12

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

2. यह शब्द एक साथ दो अथ ढोता है। शरीर म रीढ़ क ह ी शरीर को सीधा खड़ा रखती है; च रत्र म ‘रीढ़ क ह ी’ आदमी को
सीधा खड़ा रखती है। लेखक इसी दुहरेपन का लाभ उठाता है — पहली बार शब्द शंकर क झुक कमर के लए आता है, दूसरी
बार उसके झुके च रत्र के लए।
3. यह पूरे एकांक क कसौट बन जाता है। शीषक पढ़ते ही दशक हर पात्र को इसी तराज़ू पर तौलने लगता है — शंकर क रीढ़
नह है; रामस्वरूप क रीढ़ झुक जाती है (“रामस्वरूप चुप”); गोपालप्रसाद के पास अकड़ है, रीढ़ नह ; और रीढ़ केवल उमा म
है, जसका “मस्तक उठ जाता है।” एक शब्द से लेखक ने पूरे पात्र-मंडल को नाप दया।
4. यह व्यंग्य को धार दे ता है। ‘स्त्री- शक्षा’ या ‘ ववाह क समस्या’ जैसा सीधा शीषक उपदे श जैसा लगता। ‘रीढ़ क ह ी’ शरीर-
व ान का शब्द है, जसे नै तक अथ म मोड़ दे ने से हँसी और चोट दोन एक साथ पैदा होती ह — और व्यंग्य क यही श क्त है।

नमूना उत्तर — मेरा सुझाया शीषक: ‘कुस -मेज़ नह ’

क्य : एकांक क सबसे कद्र य पं क्त उमा क यह है — “जब कुस -मेज बकती है तब दुकानदार कुस -मेज से कुछ
नह पूछता, सफ खरीदार को दखला दे ता है।” पूरा एकांक इसी एक रूपक पर टका है — लड़क को दुकान के
सामान क तरह सजाना, दखाना, नापना-तोलना। ‘कुस -मेज़ नह ’ शीषक उसी रूपक को उठाता है और साथ ही
उमा का इनकार भी बोल दे ता है — म वस्तु नह हूँ। यह शीषक एकांक क मुख्य बात (स्त्री क मनुष्यता) को सीधे
पकड़ता है, जब क ‘रीढ़ क ह ी’ उसके प रणाम (च रत्र क परख) को पकड़ता है।

कुछ और साथक वकल्प, कारण स हत —

संभा वत आधार-पं क्त यह क्या उभारेगा
शीषक

नाप-तोल “हमारी बेइज्जती नह होती जो आप इतनी दे र से ववाह के लए लड़क दे खने क पूरी रस्म का व्यंग्यपूण नाम।
नाप-तोल कर रहे ह?” छोटा, तीखा और मंच पर याद रह जाने वाला।

खरीदार “ये जो महाशय मेरे खरीदार बनकर आए ह...” ध्यान लड़के वाल क भू मका पर टकेगा — ववाह एक खरीद है,
संबंध नह ।

हद से हद “बस हद से हद मै क-पास होनी चा हए।” स्त्री- शक्षा पर लगाई गई ‘हद’ ही मुख्य वषय बन जाएगी —
मैिटक व्यंग्य और भी सीधा हो जाएगा।

मस्तक उठ “उसके स्वर म तल्लीनता आ जाती है, यहाँ तक यह शीषक नषेध क जगह उमा क जीत पर बल दे गा —
जाता है क उसका मस्तक उठ जाता है।” सकारात्मक, पर व्यंग्य क धार कम हो जाएगी।

शीषक चुनने क कसौट : कोई भी शीषक सुझाते समय तीन बात जाँ चए — (1) क्या वह रचना क मुख्य
समस्या को छू ता है? (2) क्या वह पाठ के भीतर से उठाया गया है, बाहर से चपकाया हुआ नह ? (3) क्या वह
रचना पढ़ने के बाद और गहरा लगने लगता है? ‘रीढ़ क ह ी’ तीन कसौ टय पर खरा उतरता है — इसी लए वह
अब तक बदला नह गया।

एकांक क पड़ताल — पृष्ठ 114 और 115

Page 11 of 43

Page 13

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

अभ्यास › वधा से संवाद › एकांक क पड़ताल

वधा से सं वाद ता लका

प्र.1 आप जानते ही ह क ‘रीढ़ क ह ी’ एक एकांक है। एकांक म भी एक कहानी ही होती है, ले कन एकांक क
रूपरेखा कहानी से थोड़ी अलग होती है। आगे ‘रीढ़ क ह ी’ एकांक से संबं धत कुछ बदु दए गए ह। एकांक म
से इन बदुओं से संबं धत एक-एक उदाहरण ढूँ ढ़कर ल खए। 1. एकांक का नाम 2. लेखक का नाम 3. पात्र 4.
प रवेश/दे श-काल 5. रंग- नदश/मंच- नदश 6. संवाद- नदश 7. समस्या 8. संवाद 9. मुख्य वचार 10. समाधान/
प रणाम

उत्तर

नीचे पुस्तक के दस बदु एकांक से लए गए वास्त वक उदाहरण स हत भरे गए ह। हर पं क्त म पहले बदु का उत्तर है, फर पाठ
का प्रमाण।

Page 12 of 43

Page 14

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

क्र. बदु ‘रीढ़ क ह ी’ म उदाहरण

1. एकांक ी का रीढ़ की ह ी — शीषक एकांक ी की अंितम पंिक्त से आया है: “यानी बैक बोन, बैक बोन!”
नाम

2. ले खक का जगदीशचंद माथुर (जन्म 1917, शाहजहाँपरु — िनधन 1978)। एकांक ी की रचना सन् 1939 में। अन्य पिस द्ध नाट -
नाम कृ ितयाँ — भोर का तारा, कोणाक, ओ मेरे सपने।

3. पात्र कु ल छह पात्र — उमा (लड़ की), रामस्वरूप (लड़ की का िपता), पेमा (लड़ की की माँ), शंक र (लड़ का), गोपालपसाद
(लड़ के का िपता), रतन (राम स्वरूप का घरे ल ू सहायक )। पुस्तक में यह सूची ‘पात्र पिरचय’ शीषक से पहले ही दे दी गई
है — एकांक ी की यही पहचान है िक पात्र थोड़ े होते है।ं

4. पिरवेश / सन् 1939 के आसपास का एक मध्यवग य शहरी भारतीय घर, और समय एक ही िदन की कु छ घिड़ याँ। पमाण —
दे श-काल “मामूल ी तरह से सजा हुआ एक कमरा”; सवारी के िलए ताँग ा (“ताँग ेवाला जानता था”); “चार पैसे में ढे र -सी बालाई
आती थी”; लखनऊ का मेिडकल कॉले ज; ‘इंटेंस ’, ‘मैिटक ’, ‘स्त्री-सुबोिधनी’ जैसे उस युग के शब्द।

5. रंग -िनदश / एकांक ी का आरंभ ही रंग-िनद श से होता है — “(मामूल ी तरह से सजा हुआ एक कमरा। अंद र के दरवाजे से आते हुए
मंच-िनदश िजन महाशय की पीठ नजर आ रही है, वे अधे ड़ उम के मालूम होते है।ं एक तख्त को पकड़ े हएु पीछे की ओर चलते-
चलते कमरे में आते है।ं तख्त का दू स रा िसरा रतन ने पकड़ रखा है।)” दू स रा उदाहरण — पात्र-पिरचय दे ता िनद श:
“उनका लड़ का कु छ खीस िनपोरने वाले नौजवानों में से है। आवाज़ पतली है और िखिसयाहट-भरी। झुक ी कमर इनकी
खािसयत है।”

6. संवाद- संवाद के ठीक पहले कोष्ठक में िदया वह िनद श जो बताता है िक पंिक्त कैसे बोली जाए — “(ज़ रा तेज आवाज़ में) और
िनदश क्या करे ग ा?”; “(हल्की ले िकन मजबूत आवाज़ में) क्या जवाब दू ँ बाबू जी!”; “(ताव में आकर ) बाबू राम स्वरूप, आपने
मेरी इज्जत उतारने के िलए मुझे यहाँ बुल ाया था?”; “(ज़ रा रूखी आवाज़ मे)ं ज़ रा मुँह तो खोलना चािहए।”; “(जोशीली
आवाज़ मे)ं और पढ़ ाई का यह हाल था...”

7. समस्या िववाह के बाज़ ार में पढ़ ी-िलखी लड़ की का ‘दोषी’ हो जाना — और इसीिलए िपता का उसकी िशक्षा िछपाना। पाठ का
पमाण — “हमें ज्यादा पढ़ ी-िलखी लड़ की नही ं चािहए। मेम साहब तो रखनी नही,ं कौन भुगतेगा उसके नखरों को। बस
हद से हद मैिटक -पास होनी चािहए ” और रामस्वरूप की िववशता — “क्या क रूँ , मजबूरी है। मतलब अपना है।”

8. संवाद एकांक ी पूरी तरह संवादों पर चलती है; ले खक बीच में कु छ नही ं समझाता। उदाहरण — गोपालपसाद : “अरे , मद ं का
काम तो है ही पढ़ ना और कािबल होना... जनाब, मोर के पंख होते है,ं मोरनी के नही;ं शेर के बाल होते है,ं शेरनी के नही ं।”
और उसका उ त्तर — उमा : “क्या लड़ िकयों के िदल नही ं होता? क्या उनके चोट नही ं लगती?”

9. मुख्य िवचार लड़ की कोई वस्तु नही,ं एक व्यिक्त है; और िशक्षा उसका दोष नही,ं उसका बल है। यह िवचार एक ही उपमा में खुल
जाता है — “जब कु स -मेज िबकती है तब दुक ानदार कु स -मेज से कु छ नही ं पूछता, िसफ खरीदार को िदखला दे ता
है।”

10. समाधान / िरश्ता टू ट जाता है। गोपालपसाद क्रोध में उठ खड़ े होते है ं — “बस हो चुक ा। बाबू रामस्वरूप, आपने मेरे साथ दगा
पिरणाम िकया... लाइए , मेरी छड़ ी कहाँ है?” उमा उ न्हे ं अंितम चोट दे ती है (“बैक बोन, बैक बोन!”), िपता “कु स पर धम से बैठ
जाते है”ं , उमा की “खामोशी िससिकयों में तबदील हो जाती है”, और रतन का “बाबूजी, मक्खन!” कहते ही परदा िगर
जाता है। यानी समाधान व्यावहािरक नही,ं नैितक है — सौदा टू टा, पर उमा का आत्म-स म्मान बचा रहा।

Page 13 of 43

Page 15

as e
कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी
a g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
एकांक और कहानी का अंतर — यही ता लका सखा रही है: कहानी म लेखक स्वयं बोलता है, दृश्य बदलता

m a s emसे बोलता है:
l चरम- बदु तक जाती
रहता है और समय वष तक फैल सकता है। एकांक म लेखक ग़ायब रहता है — वह केवल दो रास्त
संवाद और रं.गc-oनदश। इसी लए एकांक म एक ही ान, थोड़े पात्र, एक ही समस्या और g
m a
हुई ग sतeहोती है। ‘रीढ़ क ह ी’ इसका आदश उदाहरण है — एक कमरा, छह पात्र, एक बैठक, और लगभग एक
सीधे

a
aघंgटlे क घटना।

co m
e m . ag
as
लखते समय ध्यान र खए: बदु 5 और 6 को वद्याथ प्रायः एक मान लेते ह। अंतर याद र खए — रंग- नदश मंच,
ान, प्रवेश-प्र
a g l
ान और वातावरण बताता है (कमरा कैसा है, कौन कैसे आता है); संवाद- नदश बताता है क कोई
पं क्त कस स्वर और भाव से बोली जाए। दोन कोष्ठक म और तरछे अक्षर म छपते ह, पर उनका काम अलग-

co m
अलग है।

e m.
m l as
.co a g
sem— पृष्ठ 115
a
agl
रंग- नदश
अभ्यास › वधा से संवाद › रंग- नदश

m a s
.co agl
वधा से सं वाद मं च न

a s em
प्र.1
a gतl करने का समय है। अपने समूह के साथ मलकर एकांक के कसी एक दृश्य
अब इस एकांक को कक्षा म प्रस्तु
का चुनाव क जए। उसक तैयारी क जए और कक्षा म उसे प्रस्तुत क जए। (संकेत– (i) समूह बनाइए और
उ चत हाव-भाव द्वारा उस दृश्य का अ भनय क जए। (ii) आप अपनी आवश्यकता के अनुसार दए गए रंग-
co m
m .
se
नदश म प रवतन भी कर सकते ह।)

c o m g l a
उत्तरm. a
l a seकरने वाली ग त व ध है, पर तैयारी कागज़ पर होती है। नीचे पहले तरीका दया गया है, फर एक दृश्य का पूरा नमूना मंचन-
ag यह

se m
प्रारूप, जसे आप ज्य -का-त्य या बदलकर काम म ले सकते ह।

com g l a
. a
तैयारी के पाँच चरण
m
ase
agl
1. दृश्य चु नए — ऐसा हस्सा ली जए जसम कोई मोड़ हो। तीन अ े वकल्प ह: (क) आरंभ का दृश्य — रामस्वरूप, प्रेमा और
रतन क तख्त-दरी वाली भागदौड़ (हास्य से भरा); (ख) चाय-नाश्ते का दृश्य — ‘ बजनेस’ क बातचीत और ‘खूबसूरती पर
टै क्स’ (व्यंग्य से भरा); (ग) चरम दृश्य — उमा का पान लेकर आना से लेकर “बैकबोन, बैकबोन!” तक (सबसे प्रभावशाली)।

co m
.
2. भू मकाएँ बाँ टए — छह पात्र के अलावा दो और भू मकाएँ र खए: एक नदशक (जो रंग- नदश पढ़कर मंच सजाए) और एक

e m
as
प्रॉम्प्टर (जो भूली पं क्त फुसफुसाकर बताए)।
m l
.co a g
3. रंग- नदश को मंच म बद लए — पाठ के नदश से केवल तीन चीज़ चा हए: एक तख्त (कक्षा क दो बच जोड़कर उस पर

s e m चादर), दो-तीन कु सयाँ, और एक मेज़ जस पर गुलदस्ता तथा चाय क े हो। सतार-हारमो नयम न ह तो गत्ते का सतार बना
agla ली जए या केवल गीत गा द जए — पुस्तक ने स्वयं छू ट द है क “आप अपनी आवश्यकता के अनुसार दए गए रंग- नदश म

.c
m
प रवतन भी कर सकते ह।”

m a s e
co agl
4. संवाद- नदश पर मेहनत क जए — यही अ भनय क कुंजी है। उमा क पं क्त “हल्क ले कन मजबूत आवाज़ म” बोलनी है,

m .
se
चल्लाकर नह । रामस्वरूप का ‘हँ-हँ-हँ’ हर बार घबराहट के साथ। शंकर हर बार आँख झुकाकर और कमर झुकाकर बैठे —

l a
agक जए — पहला केवल संवाद पढ़कर, दूसरा ग त और भाव के साथ। प्रवेश-प्र ान के रास्ते
यही उसका पूरा च रत्र है।
5. दो पूवाभ्यास (rehearsal)

m
पहले ही तय कर ली जए, क्य क इस एकांक म ‘अंदर का दरवाज़ा’ और ‘बाहर का दरवाज़ा’ अलग-अलग ह।

. co
e m
m l as
.co a g
Page 14 of 43

Page 16

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

नमूना उत्तर — मंचन-प्रारूप (चुना गया दृश्य: उमा का प्रवेश से लेकर परदा गरने तक)

तत्व हमारी योजना

मंच-सज्जा मंच के बाएँ कोने म तख्त, उस पर दरी और चादर; उसके पास गत्ते का सतार। दा हनी ओर तीन कु सयाँ और बीच म मेज़,
जस पर चाय क े और गुलदस्ता। पीछे द वार पर कुत्ते वाली तसवीर टँ गी हो (उसका संवाद म ज़क्र आता है)। दो प्रवेश-
द्वार — बाएँ ‘अंदर का दरवाज़ा’, दाएँ ‘बाहर का’।

पकाश सामान्य सफ़ेद प्रकाश। उमा के गाने के समय उस पर एक हल्का घेरा (spot) और शेष मंच थोड़ा मंद — इससे उसका
“मस्तक उठ जाना” दखेगा। अं तम वाक्य “बैकबोन, बैकबोन!” पर एक क्षण के लए सब कुछ ठहरा द जए, फर परदा।

वेशभूषा उमा — सादगी के कपड़े, बना ंगार, सोने क रम वाला चश्मा (कागज़ का बना ली जए — यह दृश्य का सबसे बड़ा
‘धमाका’ है)। रामस्वरूप — कुता-धोती। गोपालप्रसाद — कोट और हाथ म बत/छड़ी। शंकर — कमीज़-पतलून, कंधे झुके
हुए। रतन — साधारण कुता, हाथ म कटोरी।

मुख्य क्षण (1) उमा तश्तरी लए, गदन झुकाए प्रवेश करे; गोपालप्रसाद आँख गड़ाकर और शंकर आँख छपाकर दे ख। (2) चेहरा
(blocking) उठते ही चश्मा दखे — दोन एक साथ च ककर “चश्मा!!!” कह। (3) गीत के बीच उमा क आँख शंकर से मल और वह
अचानक रुक जाए। (4) “कुस -मेज” वाले संवाद पर उमा खड़ी हो जाए और पहली बार सीधे गोपालप्रसाद क ओर दे खे।
(5) अंत म गोपालप्रसाद छड़ी ढूँ ढ़कर तेज़ी से जाएँ, रामस्वरूप कुस पर धम से बैठ, और रतन मक्खन लेकर आ जाए।

ध्विन आरंभ म तख्त रखे जाने क आवाज़, बीच म कवाड़ पर दस्तक, और उमा का मीरा-भजन — ‘मेरे तो गरधर गोपाल दूसरो
न कोई’। कोई पाश्व-संगीत आवश्यक नह ; इस एकांक क ताक़त चु प्पय म है।

अविध लगभग 8–10 मनट — कक्षा क प्रस्तु त के लए यही उपयुक्त है।

रंग- नदश इतने ज़रूरी क्य ह: पुस्तक स्वयं कहती है क रंग- नदश से “एकांक क पृष्ठभू म क रचना क गई है,
जहाँ से एकांक आगे बढ़ती है” और उससे पाठक तथा नदशक को “ ान, प रवेश, सामा जक त आ द के
वषय म सट क जानकारी” मलती है। यहाँ ‘मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा’ इन तीन शब्द म ही प रवार
क आ थक त बता दे ता है — न ग़रीब, न रईस, ब ल्क वह मध्यवग जसे ‘ दखाना’ पड़ता है। यही कारण है क
आगे चलकर चादर धोबी से मँगाई जाती है और मक्खन के लए भागदौड़ होती है।

Try This: प्रस्तु त के बाद कक्षा से तीन प्रश्न पू छए — (1) कस पात्र क मुद्रा सबसे ज़्यादा याद रह गई? (2)
कौन-सी पं क्त सुनकर सबसे ज़्यादा चुभन हुई? (3) य द आप नदशक होते तो कौन-सा रंग- नदश बदलते और
क्य ? इन उत्तर से पता चलेगा क आपका मंचन कतना सफल रहा।

मेरी टप्पणी — पृष्ठ 115 और 116

Page 15 of 43

Page 17

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

अभ्यास › वधा से संवाद › मेरी टप्पणी

वधा से सं वाद ले ख न

प्र.1 “जी हाँ, जाइए, जरूर चले जाइए। ले कन घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा क आपके लाडले बेटे के रीढ़ क
ह ी भी है या नह — यानी बैकबोन, बैकबोन!” उपयुक्त वाक्य को ध्यान से प ढ़ए। यह वाक्य उमा द्वारा शंकर पर
क गई एक टप्पणी है जो एक व्यंग्य क तरह है। अब आप उमा द्वारा शंकर के लए कही गई उपयुक्त बात पर
अपने वचार प्रस्तुत करते हुए इस पर एक सं क्षप्त टप्पणी ल खए।

उत्तर

पुस्तक ने टप्पणी क तीन वशेषताएँ बता द ह — सं क्षप्तता (कम शब्द म मुख्य बदु), स्पष्टता (सरल, स्पष्ट और तकपूण भाषा)
और व्य क्तपरकता (अपने वचार और सुझाव)। अ टप्पणी इन्ह तीन को एक साथ नभाती है। नीचे पहले ढाँचा, फर पूरी
लखी हुई टप्पणी द गई है।
टप्पणी का ढाँचा (चार वाक्य-समूह)

1. संदभ — वाक्य कसने, कससे, कस मौके पर कहा।
2. अथ — वाक्य का शब्दाथ और उसका असली (व्यंग्याथ) अथ।
3. अपनी राय — यह वाक्य उ चत है या नह , और क्य (यही ‘व्य क्तपरकता’ है)।
4. नष्कष/सुझाव — इससे पाठक को क्या नई दृ ष्ट मलती है।

नमूना उत्तर — टप्पणी

‘बैकबोन, बैकबोन!’ — एक वाक्य जो पूरे समाज से पूछा गया है
यह वाक्य उमा ने उस क्षण कहा है जब बाबू गोपालप्रसाद रश्ता ठु कराकर, छड़ी उठाकर, ‘दगा’ का आरोप लगाते
हुए घर से नकल रहे ह। ऊपर से दे खने पर यह एक लड़क का पलटवार भर लगता है। पर ध्यान द जए — उमा उन्ह
रोकती नह , गड़ गड़ाती नह ; वह केवल एक प्रश्न उनके हाथ म थमा दे ती है और उसे घर तक ले जाने को कहती है।
वाक्य का शब्दाथ शरीर से जुड़ा है, पर अथ च रत्र से। शंकर क रीढ़ क ह ी तो है ही; जो नह है वह है नै तक
साहस। जस लड़के पर लड़ कय के होस्टल के आसपास मँडराकर वहाँ से भगाए जाने का आरोप लगता है, वह एक
शब्द म उसका खंडन नह करता — बस इतना कहता है, “बाबूजी, च लए।” जो अपने आचरण का उत्तर तक नह दे
सकता, वह कसी लड़क का जीवन-साथी कैसे बनेगा? उमा का व्यंग्य ठ क इसी जगह चोट करता है, और इसी लए
वह कड़वा होने पर भी अनु चत नह लगता।
मेरे वचार से यह टप्पणी उमा क असभ्यता नह , आत्मरक्षा है। पूरे दृश्य म उसे ‘वस्तु’ क तरह दे खा, सुना, नापा
और तोला गया — चश्मे पर सवाल हुआ, चाल पर सवाल हुआ, गाना करवाया गया, सलाई और प टग गनाई गई,
पर एक बार भी यह नह पूछा गया क वह क्या सोचती है। जब कोई पक्ष उसक ओर से बोलने को तैयार न हो —
पता तक “चुप” रह जाएँ — तब बोलना ही एकमात्र रास्ता बचता है। एक बात और जो ग
ँ ी: यह वाक्य सफ़ शंकर
के लए नह है। जस घर म बेट क डग्री छपानी पड़े, उस घर के मु खया क रीढ़ भी उतनी ही झुक है।
इस एक वाक्य से एकांक अपने शीषक तक पहुँच जाता है और पाठक को एक नई कसौट मल जाती है — व्य क्त
क परख उसक डग्री, कमाई या रूप से नह , उसके भीतर क सीध से होनी चा हए। यही ‘रीढ़ क ह ी’ का असली
अथ है।

Page 16 of 43

Page 18

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

लखते समय ध्यान र खए: टप्पणी न तो कहानी का सारांश है, न भाषण। (1) उसे 100–150 शब्द म र खए।
(2) आरंभ म संदभ द जए, वरना पाठक को पता ही नह चलेगा क बात कस बारे म है। (3) अपनी राय अवश्य
द जए, पर उसे पाठ के प्रमाण से जो ड़ए — जैसे यहाँ “बाबूजी, च लए” और “(रामस्वरूप चुप)” से जोड़ा गया
है। (4) नजी दोषारोपण से ब चए; टप्पणी व्य क्त पर नह , उसके आचरण पर होनी चा हए।

तुलना और वचार — पृष्ठ 116
अभ्यास › वषय से संवाद › तुलना और वचार

वषय से सं वाद तु ल ना

प्र.1 1. “गोपालप्रसाद : भला पू छए इन अक्ल के ठे केदार से क क्या लड़क क पढ़ाई और लड़ कय क पढ़ाई एक
बात है।” एकांक म उन पं क्तय को खो जए जहाँ एकांक के पात्र के व्यवहार म लड़ कय तथा लड़क के प्र त
भन्न- भन्न दृ ष्ट अ भव्यक्त हुई है। अब यह भी ल खए क आप इस भन्नता को कस प्रकार समझते ह?

उत्तर

एकांक म यह भेदभाव कसी एक पात्र तक सी मत नह है — वह घर के भीतर भी है और बाहर भी। नीचे पाठ क वे पं क्तयाँ द गई
ह जहाँ लड़के और लड़क को अलग-अलग तराज़ू पर तौला गया है।

Page 17 of 43

Page 19

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

प्रसंग लड़के के लए लड़क के लए

िशक्षा “अरे, मद का काम तो है ही पढ़ना और “हमें ज्यादा पढ़ ी-िलखी लड़ की नही ं चािहए ... बस हद से हद मैिटक -पास होनी
का बल होना।” / “जब आपने अपने चािहए।” / “कु छ बाते ं दुिनया में ऐसी है ं जो िसफ मद ं के िलए है।ं और ऊँ ची
लड़क को बी.ए., एम.ए. तक पढ़ाया तालीम भी ऐसी चीजों में से एक है।”
है...”

पढ़ ाई का पढ़ाई से लड़का ‘का बल’ बनता है। पढ़ ाई से लड़ की ‘िबगड़ ’ जाती है — “मेम साहब तो रखनी नही,ं कौन भुगतेगा
पिरणाम उसके नखरों को।” और माँ के शब्दों में — “तुम्ही ं ने उसे पढ़ ा-िलखाकर इतना
िसर चढ़ ा रखा है।”

रूप-रंग शंकर के रूप पर एक शब्द नह । उसक “लड़ की का खूबसूर त होना िनहायत जरूरी है। कै से भी हो, चाहे पाउडर वगैर ह
बीमारी और एक साल का पछड़ना भी लगाए , चाहे वैसे ही।” / “आजकल तो लड़ की िकतनी ही सुंद र हो, िबना टीम-
क्षमा योग्य है — “यह शंकर एक साल टाम के भला कौन पूछता है?” यहाँ तक िक चश्मे तक पर सफ़ ाई दे नी पड़ ती है —
बीमार हो गया था।” “पढ़ ाई-वढ़ ाई की वजह से तो नही ं है कु छ?”

परीक्षा शंकर से कुछ नह पूछा जाता। उसके बारे उमा को बैठाया जाता है, चाल दे खी जाती है (“चाल में तो कु छ खराबी है नही”),
ं
िकसकी म उसका पता बोलता है। गाना गवाया जाता है, पेंिटंग-िसलाई-इनाम िगनवाए जाते है ं — और चुप रहने पर
डाँट पड़ ती है, “ज़ रा मुँह तो खोलना चािहए।”

भिवष्य मे डकल कॉलेज, डग्री, पेशा। “कोई नौकरी तो करानी नही ं। ” — और िपता भी तुर ंत हामी भरते है,ं “नौकरी
का तो कोई सवाल ही नही ं उठता।”

आचरण होस्टल वाले प्रसंग पर शंकर से कोई प्रश्न उसी क्षण गोपालपसाद का पश्न लड़ की की ओर मुड़ जाता है — “लड़ िकयों के
की जाँच नह पूछा जाता। होस्टल में?... क्या तुम काले ज में पढ़ ी हो?” यानी लड़ के का दोष भुल ा िदया गया
और लड़ की की िशक्षा ही अपराध बन गई।

मज़ाक — “खूबसूर ती पर टैक्स !... हर एक औरत पर यह छोड़ िदया जाए िक वह अपनी
तक में भेद खूबसूरती के ‘गेड’ के मािफ़ क अपने ऊपर टैक्स तय कर ले ।” और “मद के
दाढ़ ी होती है, औरत के नही...!”
ं — हँस ी भी स्त्री की क़ ीमत आँक ने से ही
िनकलती है।

इस भन्नता को म कस प्रकार समझता/समझती ँ

Page 18 of 43

Page 20

as e
कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
1. यह ‘ भन्नता’ नह , असमानता है — जसे प्रकृ त का नाम दे दया गया है। गोपालप्रसाद का सबसे चालाक

o m l a se
को प्राकृ तक.c नयम क तरह पेश करते ह, ता क उस पर प्रश्न ही न उठाया जा सके। परaपंgख और बाल जन्म से
तक यही है — “मोर के पंख होते ह, मोरनी के नह ; शेर के बाल होते ह, शेरनी के नह ।” वे एक सामा जक नयम

a s em
a2.glइस सोच के भीतर ही एक वरोधाभास है। वही लोग अपने बेट को एम.ए. तक पढ़ाना चाहते ह और अपने
मलते ह, शक्षा नह — शक्षा द जाती है या रोक जाती है। यह तुलना इसी लए झूठ है।

co m
बेट क प त्नय को मै क से आगे नह । पर हर पढ़ - लखी बहू कसी क बेट है और हर बेट कसी क बहू बनेगी।

em .
यानी वे एक ऐसा समाज चाहते ह जसम आधे लोग श क्षत ह और आधे नह — जो असंभव है। रामस्वरूप का ag
झूठ इसी असंभव माँग क पैदाइश है।
g l as
a
3. असली डर योग्यता का नह , बराबरी का है। गोपालप्रसाद क आप त्त यह नह क लड़क पढ़े गी तो घर नह

co
चला पाएगी; उनक आप त्त यह है क वह “अंग्रेजी अखबार पढ़ने लग और ‘पा ल टक्स’ वगैरह पर बहस करने
m
लग तब तो हो चुक गृह
e m.
ी।” यानी डर यह है क पढ़ - लखी स्त्री बहस कर सकेगी — अपनी राय रख सकेगी।
m l as
.co g
और एकांक का अंत बता दे ता है क यह डर सच था: उमा बहस करती है, और सौदा टू ट जाता है।
4. e a
m बड़ा अन्याय दोहरा मानदं ड है। जस दृश्य म लड़के पर लड़ कय के होस्टल के आसपास घूमने और वहाँ
a s सबसे

agl से भगाए जाने का आरोप लगता है, उसी दृश्य म सवाल लड़क से पूछा जाता है क वह कॉलेज म क्य पढ़ । लड़के
का आचरण माफ़, लड़क क योग्यता अपराध — यही उस समाज का च रत्र है, और लेखक ने इसे बना एक शब्द

om a s
. c agl
उपदे श दए दखा दया है।

a s
5. मेरा नष्कष: शक्षा कसी क ‘आवश्यकता’emके हसाब से नह , हर मनुष्य के अ धकार के रूप म मलनी चा हए।
agl चा हए क उससे रश्ता आसानी से मलेगा या नह , ब ल्क यह क वह
लड़क क पढ़ाई का उ े श्य यह नह होना
अपने ववेक से जीवन के नणय ले सके — ठ क वैसे ही जैसे उमा ने उस दन लया।

co m
m .
o m l a se
m .c2. “मुझे अपनी इज्जत, अपने मान का खयाल तो है। ले कन इनसे पू छएaकg ये कस तरह अपना मुँह छपाकर
e
las भागे थे।” एकांक म उमा अपने अ धकार और वचार खुलकर व्यक्त करती है। इससे उमा के व्य क्तत्व के वषय
प्र.2

ag
m
म क्या-क्या पता चलता है? आपके वचार से उसके व्य क्तत्व म ये वशेषताएँ कैसे आई ह गी? (संकेत– शक्षा,

a se
com l
प रवार का व्यवहार आ द)

. a g
m
ase
agl
उत्तर

उमा के व्य क्तत्व क वशेषताएँ — पाठ के प्रमाण स हत

co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

com
m .
m ase
.co


a g l Page 19 of 43

Page 21

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

वशेषता एकांक से प्रमाण

आत्म-सम्मान “मुझे अपनी इज्जत— अपने मान का खयाल तो है।” वह न गड़ गड़ाती है, न सफ़ाई दे ती है; वह केवल अपनी जगह
बताती है।

संयम और धै य यह उसका सबसे कम दे खा जाने वाला गुण है। वह पूरे दृश्य म चुप रहती है — “(चुप)”, “उसी तरह गदन झुकाए”।
पता खाँसकर इशारा करते ह, फर भी वह नह बोलती। वह तभी बोलती है जब बात सम्मान पर आ जाती है।

िववेक और तक - वह गाली नह दे ती, उपमा दे ती है — “जब कुस -मेज बकती है तब दुकानदार कुस -मेज से कुछ नह पूछता, सफ
शिक्त खरीदार को दखला दे ता है।” यह पढ़े - लखे मन क भाषा है।

साहस वह अपने ही घर म, अपने पता के मेहमान के सामने, उस समय बोलती है जब पता तक “चुप” ह। यह साहस ही उसे
शंकर के ठ क वपरीत खड़ा कर दे ता है।

िनभ क वह शंकर का सच सबके सामने रख दे ती है — “अभी पछली फरवरी म ये लड़ कय के होस्टल के इद- गद क्य घूम रहे
स्पष्टवािदता थे, और वहाँ से कैसे भगाए गए थे!”

नैितक स्वच्छता “कोई पाप नह कया, कोई चोरी नह क , और न आपके पुत्र क तरह ताक-झाँककर कायरता दखाई है।” वह अपने
पक्ष को अपने आचरण पर खड़ा करती है, डग्री पर नह ।

सादगी रंग- नदश — “सादगी के कपड़े।” माँ का रखा पाउडर वह छू ती तक नह — “उसे तो इन चीज से न जाने कस जनम
क नफरत है।”

गण
ु -संपन्नता सतार और गायन म नपुण (“स्वर से जा हर है क गाने का अ ा ान है”), चत्रकला जानती है, घर-भर क सलाई
करती है। यानी वह वद्रोह के लए वद्रोह नह करती — वह सचमुच योग्य है, और यही उसके पक्ष को मज़बूत बनाता है।

संवेद नशीलता वह पत्थर नह है। सब चले जाने पर “उसक खामोशी सस कय म तबद ल हो जाती है।” यही आँसू उसे स ा और
मानवीय बनाते ह — बहादुरी का अथ भावहीन होना नह है।

ये वशेषताएँ उसम कैसे आई ह गी

1. शक्षा — सबसे बड़ा कारण यही है। वह बी.ए. पास है और कॉलेज म, संभवतः छात्रावास के वातावरण म, पढ़ है। कॉलेज ने
उसे केवल वषय नह दए — उसने उसे तुलना करने क दृ ष्ट द । इसी लए वह अपने साथ हो रहे व्यवहार को पहचान पाती है
और उसे एक उपमा म बाँधकर सबके सामने रख दे ती है। जो अपनी त को नाम दे सकता है, वही उससे लड़ सकता है।
2. पता का आधा-अधूरा साथ — रामस्वरूप ने बेट को पढ़ाया — यह छोट बात नह । उस माहौल म पली लड़क के लए
कताब, सतार और रंग-तू लका साधारण चीज़ थ । पर उन्ह पता ने उसक शक्षा छपाई और उसे प्रदशनी क तरह बैठाया।
इस वरोधाभास ने उसे यह भी सखा दया क जो सम्मान माँगे बना नह मलता, उसे माँगना पड़ता है।
3. माँ क उलट सोच — प्रेमा रोज़ यही कहती रही होगी क पढ़ाई ‘जंजाल’ है और लड़क को ‘राह पर’ आना चा हए। घर म
रोज़ मलने वाले इस वरोध ने उमा के तक क धार तेज़ क होगी — जन वचार को रोज़ काटना पड़े, वे मन म और साफ़ हो
जाते ह।
4. अपनी योग्यता का भरोसा — जो लड़क गा सकती है, चत्र बना सकती है और घर क सलाई सँभाल सकती है, उसका
आत्म वश्वास कसी क स्वीकृ त पर नह टकता। ध्यान द जए — उसका “मस्तक उठ जाता है” गाते समय, बोलने से पहले।
कला ने उसे वह ऊँचाई पहले ही दे द थी।
5. उस दन का अपमान — कारण नह , चगारी — चश्मे पर सवाल, चाल क जाँच, गाने का आदे श, इनाम क पूछताछ —
एक के बाद एक अपमान ने केवल वह क्षण दया जसम भीतर का बना-बनाया आत्म-सम्मान फूट पड़ा। स्वभाव पहले से था;
अवसर उस दन मला।

Page 20 of 43

Page 22

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

सोचने क बात: उमा कसी का अपमान नह करती — वह केवल वही लौटाती है जो उस पर फका गया था।
गोपालप्रसाद ‘इज्जत’ शब्द पहले बोलते ह (“आपने मेरी इज्जत उतारने के लए मुझे यहाँ बुलाया था?”), और उमा
वही शब्द उन्ह को लौटा दे ती है (“हमारी बेइज्जती नह होती...?”)। यही उसके च रत्र का शखर है — वह बराबरी
क भाषा बोलती है, बदले क नह ।

एकांक का वस्तार — पृष्ठ 116
अभ्यास › सृजन › एकांक का वस्तार

सृ ज न कल्पना

प्र.1 “रतन : बाबूजी, मक्खन! (सब रतन क तरफ दे खते ह और परदा गरता है।)” 1. एकांक के अंत म रतन कहता
है— “बाबूजी, मक्खन...” और परदा गर जाता है। लेखक ने इस संवाद से एकांक का अंत क्य कया होगा?
(संकेत– हास्य, व्यंग्य, टप्पणी आ द)

उत्तर

यह एकांक का सबसे चतुर वाक्य है — दे खने म सबसे मामूली, असर म सबसे गहरा। लेखक ने इसे अंत के लए क्य बचाकर रखा,
इसके पाँच कारण ह।

1. मक्खन पूरे एकांक म चलता आ रहा है — यह उसका ठकाना है। बीच म प्रेमा कहती है, “मगर हाँ, मक्खन? मक्खन तो
आया ही नह ।” रामस्वरूप झुँझलाते ह, “तुम्ह भी कस वक्त याद आई है।” रतन को दौड़ाया जाता है, वह दे र करता है तो डाँट
पड़ती है — “गया नह मक्खन लाने?... सब चौपट कर दया।” और गोपालप्रसाद टोस्ट से इनकार कर दे ते ह — “टोस्ट-वोस्ट म
खाता भी नह ।” यह छोटा-सा सूत्र नाटक-भर चलकर अंत म आ पहुँचता है — ठ क तब, जब उसक कोई ज़रूरत नह
बची। रचना- शल्प म इसे कहते ह क लेखक ने अपना हर धागा बाँध दया।
2. हास्य — भारी दृश्य के बाद अचानक हल्कापन। दशक अभी-अभी उमा क सस कयाँ सुन रहा था; तनाव चरम पर था। ऐसे
म रतन का भोला-सा वाक्य हँसी छु ड़ा दे ता है। नाट्य-कला म इस यु क्त को तनाव-मु क्त कहते ह — दशक हँसता है, पर
हँसते-हँसते उसे बात चुभ भी जाती है।
3. व्यंग्य — पूरे आयोजन पर एक चोट। तख्त, दरी, धुली चादर, हारमो नयम, सतार, समोसे, चाय, टोस्ट, पाउडर — यह सारा
तामझाम कस लए था? एक लड़क को ‘ बकाऊ’ दखाने के लए। अब सौदा टू ट चुका है और मक्खन आ पहुँचा है। यह वाक्य
चुपचाप कह दे ता है क जस दखावे पर इतना श्रम लगा, उसका मोल शून्य था। यही एकांक का प्र त-व्यंग्य है।
4. टप्पणी — और वह भी सबसे छोटे आदमी के मुँह से। रतन घर का सबसे कमज़ोर पात्र है; उसे दन-भर ‘उल्लू’ और ‘भीगी
बल्ली’ कहा गया। अं तम वाक्य उसी को मलता है। जो पूरे नाटक म डाँट खाता रहा, वही अनजाने म सबसे स ी टप्पणी कर
जाता है। लेखक उपदे श नह दे ता — वह एक अनजान आदमी से सच कहलवा दे ता है।
5. एकांक का अंत ऐसा ही होना चा हए — तीखा, छोटा और अचानक। य द लेखक अंत म रामस्वरूप से प ात्ताप का
भाषण दलवाते या उमा से उपदे श, तो रचना नाटक न रहकर प्रवचन बन जाती। इसके बजाय रंग- नदश है — “सब रतन क
तरफ दे खते ह और परदा गरता है।” सब एक-दूसरे से आँख नह मला पा रहे, इस लए सबक नज़र एक कटोरी मक्खन पर
टक जाती है। इस एक क्रया म उस घर क पूरी श मदगी बना एक शब्द के आ जाती है।

Page 21 of 43

Page 23

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

सार: ‘बाबूजी, मक्खन!’ हास्य, व्यंग्य और टप्पणी — तीन एक साथ है। हास्य ऊपर क परत है, व्यंग्य बीच क ,
और टप्पणी सबसे नीचे: इस घर म सबसे ज़रूरी चीज़ मक्खन नह थी, रीढ़ क ह ी थी — और वह कसी के
पास नह थी, सवाय उमा के।

प्र.2 2. एकांक म य द परदा दोबारा उठ जाए तो अगला दृश्य क्या होगा? अनुमान लगाइए और ल खए।

उत्तर

यह कल्पना का प्रश्न है, पर कल्पना भी नयम से चलती है। अगला दृश्य लखते समय तीन शत नभानी चा हए —

पात्र अपने स्वभाव से बाहर न जाएँ — रामस्वरूप अचानक क्रां तकारी नह बन सकते; उन्ह पहले क्रोध आएगा, फर
पछतावा। प्रेमा पहले डरेगी, फर बेट क ओर झुकेगी। उमा न चल्लाएगी, न माफ़ माँगेगी।
वही प रवेश और वही शैली रहे — वही कमरा, वही बोलचाल क हदुस्तानी, वही व्यंग्य क हल्क परत।
रंग- नदश और संवाद- नदश अवश्य द जए — नाट्य-रूप म लखे बना यह ‘अगला दृश्य’ नह , केवल सारांश बन जाएगा।

नमूना उत्तर — दृश्य दो

Page 22 of 43

Page 24

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

(वही कमरा। कुछ ही मनट बाद। चाय क े मेज़ पर वैसी ही पड़ी है, प्याले आधे भरे। रतन मक्खन क कटोरी लए
दरवाज़े म खड़ा है, न भीतर आता है न बाहर जाता है। रामस्वरूप कुस पर बैठे ह, सर हाथ म। उमा तख्त पर बैठ
है, आँख प छ चुक है। प्रेमा उसके पास खड़ी है।)
प्रेमा : (रतन को दे खकर, झुँझलाकर) अब खड़ा-खड़ा क्या दे ख रहा है? रख दे भीतर। (रतन जल्द से भीतर चला
जाता है।)
रामस्वरूप : ( सर उठाकर, दबी हुई आवाज़ म) सब खत्म। महीन क बातचीत... और एक पल म...
प्रेमा : मने कहा था न, इस लड़क क ज़बान...
उमा : (शांत, वही हल्क ले कन मजबूत आवाज़) ज़बान मेरी नह थी, माँ। शब्द उन्ह के थे। मने तो सफ लौटा दए।
रामस्वरूप : (भड़ककर) लौटा दए! और जो घर क इज्जत गई, वह कौन लौटाएगा?
उमा : बाबूजी, आपने उनसे कहा था क म मै क तक पढ़ हूँ। इज्जत उसी दन गई थी। मुझे तो बस आज पता
चला।
(रामस्वरूप कुछ कहने को होते ह, पर चुप रह जाते ह। थोड़ी दे र कमरे म सन्नाटा। बाहर से कसी ताँगे क घंट सुनाई
दे ती है।)
प्रेमा : (धीरे से, पहली बार बेट के सर पर हाथ रखते हुए) तूने ठ क कहा या गलत, यह म नह जानती। पर तू काँप
नह रही थी — यह मने दे ख लया।
उमा : (हँसने क को शश करते हुए) डर तो लगा था, माँ। पर चुप रहती तो जीवन-भर लगता।
रामस्वरूप : (उठकर खड़क के पास जाते ह, बाहर दे खते हुए) तो अब क्या करेगी?
उमा : बाबूजी, शहर के कन्या वद्यालय म अध्या पका क जगह खाली है। म कल आवेदन भेज दूँ ?
प्रेमा : (च ककर) नौकरी! लोग क्या कहगे?
उमा : वही, जो आज कह रहे ह, माँ। कहने वाले तो चुप बैठने पर भी कहते ह।
(रामस्वरूप मुड़ते ह। कुछ पल बेट को दे खते रहते ह, जैसे पहली बार दे ख रहे ह ।)
रामस्वरूप : (धीमे, लगभग स्वयं से) भेज दे ... और हाँ, इस बार सच लखना — बी.ए. पास।
(रतन भीतर से आता है, हाथ खाली।)
रतन : बाबूजी, मक्खन रख आया।
रामस्वरूप : (पहली बार बना डाँटे, थक हुई हँसी के साथ) ठ क कया रे। आज उसका कोई काम नह ।
(उमा मुस्कराकर सतार उठाती है और वही अधूरा छू टा गीत फर से छे ड़ दे ती है। परदा गरता है।)

Page 23 of 43

Page 25

as e
कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
दूसरे संभव मोड़ (आप इनम से कोई भी चुन सकते ह):

m as e
c o g l
अंत मmवे.तय करते ह क अब कोई रश्ता उमा क सहम त के बना नह दे खा जाएगा।
प ात्ताप का दृश्य — रामस्वरूप बेट से क्षमा माँगते ह और स्वीकार करते ह क झूठ उन्ह ने डर से बोला था।

e a
as
agl शां त से इनकार कर दे ती है। यह मोड़ व्यंग्य को और तीखा कर दे गा।
गोपालप्रसाद का लौटना — कुछ दन बाद वे यह कहकर लौटते ह क उन्ह अब कोई आप त्त नह — और उमा

o m
c ag
शंकर का अकेले आना — शंकर बना पता के आकर क्षमा माँगता है। यह मोड़ करुण भी है और साथक भी,
.
m खुलती है। पर सावधान — इसे बहुत आसान मत बनाइए,
s e
क्य क इसम ‘रीढ़ क ह ी’ पाने क एक संभावना
वरना उमा का संघष हल्का पड़ जाएगा। la
ag
याद र खए — जो भी मोड़ चुन, अंत म उमा का आत्म-सम्मान बचा रहना चा हए, क्य क वही इस एकांक क धुरी

co m
m.
है।

m as e
.co a g l
s em
a gla क बात — मेरे शब्द — पृष्ठ 117
व्याकरण
अभ्यास › भाषा से संवाद › व्याकरण क बात › मेरे शब्द

m a s
m .co agl
भाषा से सं वाद शब्द क बात

l a se
प्र.1 a g
एकांक म पाँच ऐसे शब्द चुनकर रेखां कत कर ली जए जो आपके लए बल्कुल नए थे। उन शब्द वाले वाक्य
अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए। अब उन शब्द के अथ अपने अनुमान से ल खए। इसके बाद उनके अथ

co m
.
शब्दकोश म से दे खकर ल खए।

se m
उत्तर .c o m g l a
m a
l a seग त व ध आपको संदभ से अथ नकालना सखाती है — भाषा सीखने का सबसे उपयोगी कौशल। तरीका यह है:
ag
यह

se m
1. पाठ पढ़ते हुए जो शब्द अटकाए, उसे प सल से रेखां कत कर ली जए।

com
2. शब्दकोश तुरंत मत खो लए। पहले पूरा वाक्य ल खए और सो चए — यह शब्द कसने कहा, कस भाव म कहा, आगे-पीछे
g l a
m . a
e
as -सामने ल खए। जहाँ अनुमान ठ क नकले, वहाँ अपनी पीठ थपथपाइए; जहाँ न
क्या हो रहा है? उसी से अनुमान लगाइए।

g l
नकले, वहाँ दे खए क कस संकa
3. अब शब्दकोश दे खए और दोन अथ आमने
े त को आपने चूक दया।

m
4. अंत म हर शब्द से अपना एक वाक्य बनाइए — शब्द तभी अपना होता है जब वह आपके वाक्य म आ जाए।

. co
e m
as
नमूना उत्तर — मेरे पाँच नए शब्द
m l
m .co a g
l a se
ag
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 24 of 43

Page 26

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

शब्द एकांक का वाक्य मेरा अनुमान (संदभ शब्दकोश का अथ
से)

दिकयानूस ी “गुस्सा तो मुझे बहुत आता है इनके ‘पढ़े - लखे होकर भी’ के पुराने िवचार का, पुराना। (अनुमान सही
द कयानूसी खयाल पर। खुद पढ़े - लखे वरोध से लगा क इसका िनकला। )
ह, वक ल ह... मगर लड़क चाहते ह अथ है — पुरानी, पछड़ी
ऐसी क ज्यादा पढ़ - लखी न हो।” सोच।

िफतरती “आवाज़ से मालूम होता है क काफ ‘अनुभवी’ के साथ आया चालबाज, पकृ ितगत। (अनुमान आधा सही —
अनुभवी और फतरती महाशय ह।” है, इस लए लगा — बहुत शब्द में केवल चतुर ाई नही,ं चालाकी का
हो शयार, दु नयादार। नकारात्मक भाव भी है, जो आगे गोपालपसाद के
व्यवहार से िसद्ध हो जाता है।)

तक ल्लुफ़ “गोपालप्रसाद : यह सब आप क्या नाश्ते क तैयारी दे खकर बनावट, िशष्टाचार। (अनुमान सही — यहाँ अथ है
तकल्लुफ़ करते ह!” / “रामस्वरूप : कहा गया है, इस लए लगा ‘औपचािरकता’। )
तकल्लुफ़ कस बात का!” — इतना आदर-सत्कार
क्य ।

मुखाितब “(शंकर क तरफ मुखा तब होकर) ‘तरफ होकर’ और उसके संबोधन करने वाला, बात करने वाला। (अनुमान
आपका क्या खयाल है, शंकर बाबू?” बाद सीधे प्रश्न — इस लए सही। )
लगा, कसी क ओर
मुड़कर बात करना।

जायचा “और जायचा (जन्मपत्र) तो मल ही कोष्ठक म ही संकेत दे जन्मपत्री। (िववाह तय करते समय वर-वधू की
गया होगा?” दया गया है — जन्म से जन्मपित्रयाँ िमलाने की पुर ानी रीित। रामस्वरूप
जुड़ा कोई काग़ज़। का उत्त र — “ठाकु र जी के चरणों में रख िदया”
— इस र स्म पर भी हल्का व्यग्ं य है। )

अब मेरे अपने वाक्य

द कयानूसी — बे टय को खेल के मैदान से दूर रखना आज भी कुछ लोग क द कयानूसी सोच है।
फतरती — उस फतरती दुकानदार ने मीठ बात म उलझाकर पुराना माल थमा दया।
तकल्लुफ़ — अपने घर आए हो, तकल्लुफ़ छोड़ो और आराम से बैठो।
मुखा तब — प्रधानाचाय मंच से पूरी सभा को मुखा तब हुए।
जायचा — पं डत जी ने दोन के जायचे मलाकर ववाह क त थ तय क ।

Tip: इस एकांक म नए शब्द क तीन खान ह — (1) उदू-फ़ारसी के शब्द जो शष्टाचार से जुड़े ह (तशरीफ़,
तकल्लुफ़, नहायत, मा फ़क, अज़, मुखा तब); (2) पुराने घरेलू शब्द (तख्त, नाँद जैसी चीज़, डाट, करीना,
जायचा); (3) अं ेज़ी से आए शब्द जो पात्र क आधु नक दखने क को शश बताते ह ( बजनेस, मा जन, वीक-एंड,
ग्रेड, टै क्स, बैकबोन)। पाँच शब्द चुनते समय तीन खान से चु नए — तब आपक सूची पूरे एकांक क भाषा का
न ा बन जाएगी।

भाषा म मुहावरे — पृष्ठ 117

Page 25 of 43

Page 27

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

अभ्यास › भाषा से संवाद › व्याकरण क बात › भाषा म मुहावरे

भाषा से सं वाद मु हावरे

प्र.1 एकांक म से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दए गए ह। इन वाक्य म जहाँ-जहाँ मुहावरे आए ह, उन्ह पहचानकर
रेखां कत क जए। इन मुहावर का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर ल खए— 1. “उनके पीछे -पीछे भीगी
बल्ली क तरह रतन आ रहा है— खाली हाथ।”

उत्तर

मुहावरा — भीगी बल्ली क तरह (होना/आना)। अथ — डरकर, सहमकर, बलकुल दब्बू बनकर।

वाक्य म इसका काम: यह पं क्त एक रंग- नदश से आई है, संवाद से नह — इसी लए यह और भी सट क है। रतन
धोती के बजाय चादर न ला पाने पर डाँट खा चुका है और अब माल कन के पीछे -पीछे खाली हाथ लौट रहा है।
‘भीगी बल्ली’ शब्द- चत्र म वह पूरा दृश्य आ जाता है — झुके कंधे, धीमे कदम, नज़र नीची। ध्यान द जए, इसी
पं क्त म एक और मुहावरा छपा है — खाली हाथ (लौटना), अथात् बना कुछ पाए वापस आना।

मेरे नए वाक्य

शीशा टू टते ही शरारती ब ा भीगी बल्ली क तरह कोने म जा खड़ा हुआ।
कक्षा म इतनी बहस करने वाला मोहन प्रधानाचाय के सामने भीगी बल्ली बन जाता है।
मेला बंद हो चुका था, इस लए हम खाली हाथ लौट आए।

प्र.2 2. “ले कन वह तुम्हारी लाडली बेट तो मुँह फुलाए पड़ी है।”

उत्तर

मुहावरा — मुँह फुलाना। अथ — रूठ जाना, नाराज़ होकर बोलचाल बंद कर दे ना।

वाक्य म इसका काम: प्रेमा शकायत के स्वर म कहती है क उमा तैयार होने से इनकार करके लेट हुई है — “मेरा
कहना था क आँचल म मुँह लपेटकर लेट गई।” यहाँ मुहावरा माता- पता क दृ ष्ट दखाता है: उन्ह बेट का वरोध
केवल बचकाना रूठना लगता है। पर आगे चलकर एकांक सद्ध कर दे ता है क वह रूठना नह , असहम त थी।
यही इस मुहावरे का व्यंग्य है — बड़ ने एक गंभीर इनकार को ‘मुँह फुलाना’ कहकर हल्का कर दया।

मेरे नए वाक्य

मनपसंद खलौना न मलने पर छोट बहन दन-भर मुँह फुलाए बैठ रही।
ट म म जगह न मलने से वह मुँह फुला बैठा, जब क उसे और अभ्यास करना चा हए था।

Page 26 of 43

Page 28

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 3. “और तुम उसक माँ, कस मज क दवा हो?”

उत्तर

मुहावरा — कस मज क दवा होना। अथ — कसी काम का न होना, बलकुल बेकार होना (व्यंग्य म पूछा जाने वाला प्रश्न)।

वाक्य म इसका काम: ‘मज’ का अथ है रोग और ‘दवा’ उसका इलाज। यानी सीधा अथ हुआ — “तुम कस
बीमारी का इलाज हो?”, और लक्ष्य-अथ हुआ — “तुम कसी काम क नह हो।” रामस्वरूप यह वाक्य झुँझलाहट म
पत्नी से कहते ह, क्य क वे बेट को ‘तैयार’ नह करा पाईं। यह मुहावरा उनके स्वभाव क भी चुगली करता है — घर
म वे रोब जमाते ह, और उन्ह मेहमान के सामने ‘हँ-हँ-हँ’ करके झुक जाते ह।

ध्यान द जए: यह मुहावरा तीखा है और कसी व्य क्त को नीचा दखाता है। इसका प्रयोग अपने वाक्य म सावधानी
से क जए — कसी साथी के लए नह , कसी बेकार पड़ी वस्तु या व्यव ा के लए।

मेरे नए वाक्य

जो नल एक बूँद पानी न दे , वह कस मज क दवा है?
ऐसी योजना कस मज क दवा होगी जसम गाँव का नाम ही न हो!

प्र.4 4. “तुम्ह ने उसे पढ़ा- लखाकर इतना सर चढ़ा रखा है।”

उत्तर

मुहावरा — सर चढ़ाना। अथ — अत्य धक लाड़-प्यार दे कर ढ ठ बना दे ना, मुँहज़ोर कर दे ना। (इसी प रवार का दूसरा रूप है —
सर चढ़ना, यानी स्वयं ढ ठ हो जाना।)

वाक्य म इसका काम: यह एकांक का सबसे अथपूण मुहावरा-प्रयोग है, क्य क यहाँ ‘ सर चढ़ाने’ का कारण कोई
शरारत नह — पढ़ाई बताई गई है। प्रेमा क दृ ष्ट म बेट को पढ़ाना ही उसे बगाड़ दे ना है। इसी वाक्य के साथ वह
जोड़ती है — “मेरी समझ म तो ये पढ़ाई- लखाई के जंजाल आते नह ।” इस तरह एक साधारण मुहावरा उस पूरे युग
क सोच का प्रमाण बन जाता है। और एकांक के अंत तक आते-आते हम दे ख लेते ह क जसे माँ ‘ सर चढ़ना’
कहती है, वह असल म सर उठाना है — “उसका मस्तक उठ जाता है।”

मेरे नए वाक्य

हर ज़द पूरी करके नाना जी ने पोते को कुछ ज़्यादा ही सर चढ़ा रखा है।
प्रशंसा अ है, पर वह सर चढ़ जाए तो सीखना रुक जाता है।

Page 27 of 43

Page 29

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

प्र.5 5. “मगर तुम तो अभी से सब-कुछ उगले दे ती हो।”

उत्तर

मुहावरा — (सब-कुछ) उगल दे ना। अथ — छपाई हुई बात कह दे ना, भेद खोल दे ना।

वाक्य म इसका काम: रामस्वरूप डरे हुए ह क प्रेमा मेहमान के सामने कह यह न बता दे क उमा बी.ए. पास है।
इसी लए वे पहले ही चेतावनी दे दे ते ह — “तुम्ह कतई अपनी जबान पर काबू नह है।” मुहावरे का चुनाव दे खए:
‘उगलना’ शब्द अपने आप म बताता है क जो बात कही जा रही है वह नगली हुई, यानी दबाई हुई है। यह से
एकांक का वह झूठ शुरू होता है जो अंत म पकड़ा जाता है — “आपने मुझको कहा था क सफ मै क तक पढ़
है।”

मेरे नए वाक्य

दो ही प्रश्न म उसने सारी योजना उगल द ।
जन्म दन क तैयारी गुप्त रखनी थी, पर छोटे भाई ने सब कुछ उगल दया।

प्र.6 6. “यह ली जए, आप तो मुझे काँट म घसीटने लगे।”

उत्तर

मुहावरा — काँट म घसीटना। अथ — अत्य धक प्रशंसा या शष्टाचार से कसी को संकोच और असमंजस म डाल दे ना; बहुत
ल ज्जत कर दे ना।

वाक्य म इसका काम: गोपालप्रसाद ने अभी-अभी कहा था — “जैसा मेरा काम, वैसा आपका काम... ब ल्क य
क हए क मने आपके लए खासी परेशानी कर द ।” रामस्वरूप इस पर तुरंत यह मुहावरा उछाल दे ते ह। यह उस
समय क औपचा रक शष्टाचार-भाषा का नमूना है, जसम बड़प्पन दखाने के लए दोन पक्ष अपने को छोटा
बताते ह। लेखक इसी बनावट वनय पर हँसता है — क्य क यह पूरी मीठ बातचीत आगे चलकर ‘ बजनेस’ म
बदल जाती है।

मेरे नए वाक्य

सबके सामने इतनी तारीफ़ करके आपने तो मुझे काँट म घसीट दया।
छोट -सी मदद के लए इतना धन्यवाद मत द जए, मुझे काँट म मत घसी टए।

प्र.7 7. “बाबू रामस्वरूप, आपने मेरी इज्जत उतारने के लए मुझे यहाँ बुलाया था?”

उत्तर

मुहावरा — इज्जत उतारना। अथ — अपमा नत करना, सबके सामने मान-मदन करना।

Page 28 of 43

Page 30

as e
कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी
a g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
वाक्य म इसका काम: यह एकांक का सबसे व्यंग्यपूण मुहावरा-प्रयोग है। गोपालप्रसाद ‘इज्जत’ क दुहाई उस

m a s emउन्ह लौटा दे ती है
gl ही मुहावरे को दो पक्ष
समय दे ते ह जब वे स्वयं घंटे-भर से एक लड़क क नाप-तोल कर रहे थे। और उमा ठ क यही शब्द
co हमारी बेइज्जती नह होती जो आप इतनी दे र से नाप-तोल कर रहे ह?”aएक
— “जी हाँ, .और
m
के मुँहsमe रखकर लेखक दखा दे ता है क इस समाज म ‘इज्जत’ कसक गनी जाती है और कसक नह ।
a
agl
m
मेरे नए वाक्य

. co ag
em
सबके सामने चल्लाकर उसने अपने ही मत्र क इज्जत उतार द ।

g l as
कसी क गलती अकेले म बताइए — भरी सभा म इज्जत उतारना ठ क नह ।
a

co m
em.
8. “ले कन इनसे पू छए क ये कस तरह अपना मुँह छपाकर भागे थे।”

as
प्र.8

m l
.co a g
a s em
gमुlहावरा — मुँह छपाकर भागना। अथ — ल ज्जत होकर, नज़र न मला पाने क
उत्तर

a त म भाग जाना।

om a s
. c agl
वाक्य म इसका काम: यह मुहावरा एकांक के प्रतीक- वधान से जुड़ जाता है। शंकर का प रचय ही आँख छपाने
से हुआ था — वह उमा को “आँख छपाकर”eताक
s m रहा था। अब उमा उसक पुरानी घटना याद दलाकर वही मुद्रा
a
gl बात — इस आरोप के बाद वह फर वही करता है: “बाबूजी, च लए।”
a
सबके सामने रख दे ती है। और सबसे बड़ी
यानी मुहावरा केवल पछली घटना का वणन नह करता, वह इसी क्षण मंच पर फर से घट रहा है। ‘मुँह छपाना’

co m
.
और ‘रीढ़ क ह ी न होना’ — दोन एक ही बात के दो नाम ह।

e m
m l as
.co a g
मेरे नए वाक्य

a s em
g l
चोरी पकड़ी जाते ही वह मुँह छपाकर भाग खड़ा हुआ।
a जो सच बोलता है उसे कभी मुँह छपाकर भागना नह पड़ता।

se m
com g l a
m . a
ase
agl

co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 29 of 43

Page 31

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

दोहराव के लए — एक नज़र म आठ मुहावरे

मुहावरा अथ कसने कहा

भीगी बल्ली क तरह डरकर, सहमकर रंग- नदश (रतन के लए)

मुँह फुलाना रूठ जाना प्रेमा (उमा के लए)

कस मज क दवा होना कसी काम का न होना रामस्वरूप (प्रेमा से)

सर चढ़ाना लाड़ दे कर ढ ठ बना दे ना प्रेमा (उमा के लए)

उगल दे ना भेद खोल दे ना रामस्वरूप (प्रेमा से)

काँट म घसीटना अ धक शष्टाचार से संकोच म डालना रामस्वरूप (गोपालप्रसाद से)

इज्जत उतारना अपमा नत करना गोपालप्रसाद (रामस्वरूप से)

मुँह छपाकर भागना ल ज्जत होकर भाग जाना उमा (शंकर के लए)

Tip: मुहावरा कभी अकेला नह लखा जाता — उसे वाक्य म और क्रया के साथ ढालकर ल खए (‘मुँह फुलाना’
नह , ‘वह मुँह फुलाए बैठ है’)। परीक्षा म यही दे खा जाता है क आपने मुहावरे को सही रूप म और सही प्रसंग म
चलाया है या नह ।

संदभ म शब्द — पृष्ठ 117
अभ्यास › भाषा से संवाद › व्याकरण क बात › संदभ म शब्द

भाषा से सं वाद कहावत

प्र.1 “बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।” एकांक म इस कहावत का प्रयोग रामस्वरूप द्वारा गोपालप्रसाद और शंकर क
नकारात्मक प्रवृ त्त का उल्लेख करने के लए कया गया है। ले कन इस कहावत का प्रयोग सकारात्मक अथ म भी
कया जा सकता है। अब आप इस नए प्रयोग से वाक्य बनाकर ल खए।

उत्तर

कहावत का अथ: ‘सेर’ पुराना बाट (लगभग 933 ग्राम) है और ‘सवा सेर’ उससे भी भारी। कहावत का अथ हुआ — बेटा अपने
पता से भी एक कदम आगे है। यह कहावत तटस्थ है; उसका रंग संदभ से तय होता है।

Page 30 of 43

Page 32

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

प्रयोग अथ उदाहरण

नकारात्मक पता जतना चालाक/ रामस्वरूप प्रेमा से — “बाप सेर है तो लड़का सवा सेर। बी.एससी. के बाद लखनऊ म ही तो
(एकाक
ं ी में) रू ढ़वाद है, बेटा उससे पढ़ता है मे डकल कॉलेज म। कहता है क शाद का सवाल दूसरा है, तालीम का दूसरा।”
भी बढ़कर है यानी पता को कम पढ़ बहू चा हए और बेटा भी वही चाहता है — ब ल्क उसने इसके लए
तक तक गढ़ लया है।

सकारात्मक पता के गुण बेटे म और नीचे िदए गए वाक्य
(नया पयोग) भी नखरकर आए ह

नमूना उत्तर — सकारात्मक अथ म मेरे वाक्य

पता जी गाँव के अ े वैद्य थे और बेटा तो अब जला अस्पताल का सबसे भरोसेमंद डॉक्टर है — सच है, बाप सेर है तो
लड़का सवा सेर।
रामू काका ने पचास पेड़ लगाए थे, उनके बेटे ने पूरा बाग खड़ा कर दया — बाप सेर तो लड़का सवा सेर।
चाचा जी राज्य स्तर तक कब ी खेले थे और उनका बेटा रा ीय ट म म चुन लया गया; लोग ठ क ही कहते ह — बाप सेर है तो
लड़का सवा सेर।
मास्टर जी ने गाँव म पहला स्कूल खोला था, और उनक बेट ने उसी गाँव म कॉलेज खुलवा दया — बाप सेर है तो बेट सवा
सेर।

यहाँ सीखने क बात: कहावत के शब्द नह बदलते, उसका भाव संदभ से बदलता है। यही बात व्यंग्य क भी है —
गोपालप्रसाद और शंकर के लए यह कहावत कड़वी है, क्य क जस बात म वे ‘आगे’ ह वह गुण नह , अवगुण है।
इसी लए वाक्य बनाते समय पहले तय क जए क आप प्रशंसा कर रहे ह या चुटक ले रहे ह, और उसी के अनुसार
वाक्य का शेष भाग ग ढ़ए।

Did you know? अं तम पं क्त म मने जान-बूझकर ‘लड़का’ क जगह ‘बेट ’ रखा है। कहावत समाज के साथ
बदलती ह — और इस एकांक का पूरा संदेश यही है क जो बात बेटे के लए कही जाती है, वह बेट के लए भी
उतनी ही सच होनी चा हए।

आप भी संवाददाता — पृष्ठ 117 और 118
अभ्यास › ग त व धयाँ › आप भी संवाददाता

ग त व धयाँ साक्षात्कार

प्र.1 1. मान ली जए क आप एक संवाददाता ह और आपको उमा क कहानी का पता चलता है। अब आप उमा तथा
अन्य पात्र का साक्षात्कार लेकर उनका पक्ष दशक के सामने प्रस्तुत क जए।

उत्तर

अ े साक्षात्कार क तैयारी — पाँच नयम

1. हर पात्र से उसी का पक्ष पू छए, अपना नणय मत सुनाइए। संवाददाता का काम राय दे ना नह , राय नकलवाना है।
2. प्रश्न छोटे र खए और उत्तर लंबा आने द जए। ‘हाँ/नह ’ म समट जाने वाले प्रश्न मत पू छए।

Page 31 of 43

Page 33

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

3. हर प्रश्न म पाठ का कोई तथ्य र खए — तभी उत्तर टाला नह जा सकेगा (जैसे ‘मै क’ वाला झूठ, चश्मे वाला प्रसंग, होस्टल
वाली घटना)।
4. सबसे कमज़ोर पात्र — रतन — को भी अवश्य बोलने द जए। अ पत्रका रता क यही पहचान है।
5. अंत म संतु लत समापन क जए — कसी को खलनायक घो षत कए बना, प्रश्न दशक के सामने छोड़ द जए।

नमूना उत्तर — साक्षात्कार (कायक्रम का नाम: ‘आपका पक्ष’)

Page 32 of 43

Page 34

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

संवाददाता: नमस्कार। आज हम उस घर म ह जहाँ कल शाम एक ववाह क बातचीत टू ट गई। हमारे साथ ह इस घर
क बेट , उमा। उमा जी, कल जो हुआ, उस पर आपको अफ़सोस है?
उमा: अफ़सोस इस बात का है क इतने वष तक चुप रही। कल जो कहा, वह दे र से कहा। पर कहा — यही राहत है।
संवाददाता: आपने कहा था — “जब कुस -मेज बकती है तब दुकानदार कुस -मेज से कुछ नह पूछता।” इतनी
कड़ी बात?
उमा: कड़ी लगी होगी, पर झूठ नह थी। सुबह से मुझे तैयार कया जा रहा था — पाउडर, कपड़े, बैठने क जगह,
गीत। मेरी चाल दे खी गई, मेरा चश्मा दे खा गया। एक बार भी कसी ने यह नह पूछा क म क्या सोचती हूँ। दुकान म
सामान से भी कोई नह पूछता।
संवाददाता: आपक शक्षा को छपाया गया था। पता से आपक शकायत है?
उमा: शकायत नह , दुख है। उन्ह ने ही तो मुझे पढ़ाया। जस दन उन्ह ने मुझे कॉलेज भेजा था, उस दन वे बहुत
बड़े आदमी थे। जस दन उन्ह ने मेरा बी.ए. छपाया, उस दन छोटे हो गए।
संवाददाता: अब आगे?
उमा: पढ़ाना चाहती हूँ। मुझे लगता है, अगली उमा को इतनी दे र तक चुप न रहना पड़े — इसका इंतज़ाम कक्षा से ही
होगा।

संवाददाता: बाबू रामस्वरूप, आपने लड़के वाल से कहा था क आपक बेट मै क तक पढ़ है। क्य ?
रामस्वरूप: (कुछ दे र चुप) दे खए, बात कड़वी है पर सच है — बाज़ार म जो चीज़ ‘माँग’ म नह , उसे कोई नह
लेता। मुझे लगा, ब्याह हो जाए, बाक बात बाद म। म गलत था। बेट ने कल मुझे यही आईना दखाया।
संवाददाता: पर आप स्वयं तो इन वचार को ‘द कयानूसी’ कहते थे।
रामस्वरूप: कहता था, और कहता रहूँगा। पर कहने और खड़े होने म फ़क है। कल जब बेट बोल रही थी, म चुप
था। वही मेरी सबसे बड़ी गलती है।

संवाददाता: प्रेमा जी, आपने कहा था क पढ़ाई- लखाई ‘जंजाल’ है। आज भी यही मानती ह?
प्रेमा: मने अपने ज़माने म जो दे खा, वही कहा। लड़क पढ़ जाए तो रश्ता मु श्कल — यह डर था, दुश्मनी नह । पर
कल जब वह बोली, तो मने पहली बार दे खा क मेरी बेट काँप नह रही थी। म तो जीवन-भर काँपती रही हूँ। अब
सोचती हूँ, शायद जंजाल पढ़ाई नह थी।

संवाददाता: बाबू गोपालप्रसाद, आपने कहा क आपके साथ ‘दगा’ हुआ। पर बेट के पढ़े होने म दगा क्या है?
गोपालप्रसाद: बात तय हुई थी मै क क , नकली बी.ए.। हमारे यहाँ बात का मोल होता है।
संवाददाता: और आपके पुत्र पर लगे आरोप का क्या? उस पर आपने एक भी प्रश्न नह पूछा।
गोपालप्रसाद: (असहज होकर) वह... वह लड़क क बात है। हम चलते ह।

संवाददाता: शंकर जी, आप कुछ कहना चाहगे? कल आपने केवल इतना कहा था — “बाबूजी, च लए।”
शंकर: (धीमे स्वर म, सर झुकाए) जी... मुझसे तो कसी ने कुछ पूछा ही नह था। न वहाँ, न घर पर।
संवाददाता: पर आप चाहते तो बोल सकते थे।
शंकर: (चुप)

संवाददाता: रतन, तुम दन-भर उस कमरे म आते-जाते रहे। तुम्ह क्या लगा?

Page 33 of 43

Page 35

as e
कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co
रतन: साहब, म तो मक्खन लेने भागा था। लौटा तो सब खत्म हो चुका था। हाँ, एक बात कहूँ? बीबी जी जब गा रही
m
थ न, तब सबसे अ ा लग रहा था। और जब बोल , तब सबसे स ा।
se m.
o m
c इस घर म कल कसी ने कुछ नह तोड़ा — बस एक झूठ टूटा। सवाल l a
gयह नह क रश्ता क्य
संवाददाता:.दशको, a
m
se यह है क एक लड़क क डग्री छपाने क ज़रूरत ही क्य पड़ी। जब तक इसका उत्तर नह मलता, हर
टू टlा;aसवाल
g म एक उमा चुप बैठ रहेगी। नमस्कार।
aघर

. com ag
कक्षा म कैसे क जए: सात वद्याथ — एक संवe
s m छह पात्र। संवाददाता के पास कागज़ का माइक हो। हर
a
agl को ‘संपादक’ बनाइए, जो अंत म बताए क कस उत्तर म सबसे
ाददाता,
साक्षात्कार 1–2 मनट का र खए। एक वद्याथ
ज़्यादा दम था और क्य ।

co m
se m.
o m l a
c ली जए क आप उमा के घर से रपो टग कर रहे ह जब उसके घर म शंaकgर आया था। इस पूरे घटनाक्रम
प्र.2 m 2. .मान
l a se को जीवंत प्रसारण (लाइव रपोट) क तरह प्रस्तुत क जए।
ag
m a s
coअभी agl
उत्तर

m .
as e
लाइव रपोट साक्षात्कार से अलग होती है। इसम आप जो हो रहा है उसे वतमान काल म, क्रम से और दृश्य- चत्र ख चते हुए
बताते ह। पाँच बात ध्यान र खए —
a g l
वतमान काल म बो लए — “अब वे भीतर आ रहे ह”, “अभी-अभी दरवाज़े पर दस्तक हुई है।”

co m
.
समय क मुहर लगाइए — “शाम के लगभग पाँच बजे ह...”

e m
as
जो दख रहा है उसे बताइए — कमरे क सजावट, चेहरे के भाव, हाथ क छड़ी। यही श्रोता क आँख है।
m l
.co a g
राय और तथ्य को अलग र खए — “मुझे लगता है” कहकर ही राय द जए।

se m
l a
अंत म नष्कष नह , सूचना द जए — और एक प्रश्न छोड़ द जए।

ag नमूना उत्तर — जीवंत प्रसारण

se m
com g l a
m. a
ase
agl

co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 34 of 43

Page 36

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

[दृश्य 1 — बाहर से] नमस्कार। म इस समय शहर के एक साधारण-से मकान के बाहर खड़ा हूँ। भीतर एक बैठक
होने जा रही है — लड़क दे खने क । थोड़ी दे र पहले एक ताँगा यहाँ रुका था और उससे दो सज्जन उतरे — बाबू
गोपालप्रसाद, हाथ म बत, और उनके पुत्र शंकर, जो सर झुकाए पीछे -पीछे चल रहे थे।
[दृश्य 2 — भीतर क हलचल] भीतर क तैयारी दे खए। एक तख्त अभी-अभी बछाया गया है, उस पर धोबी के
यहाँ से आई ताज़ा धुली चादर डाली गई है। कोने म हारमो नयम और सतार रख दए गए ह। मेज़ पर गुलदस्ता है,
जसे अभी-अभी झाड़न से साफ़ कया गया। और सु नए — घर का सहायक रतन इस समय दौड़कर मक्खन लेने
गया है, क्य क नाश्ते म वही एक चीज़ रह गई थी। इस घर म आज सब कुछ सामान्य से थोड़ा ज़्यादा दख रहा है।
[दृश्य 3 — बातचीत] बातचीत शुरू हो चुक है। पहले पुराने ज़माने क बात — कचौ ड़याँ, बारह घंटे क पढ़ाई,
‘उस ज़माने का मै क’। हँसी हो रही है। और अब... अब स्वर बदल गया है। बाबू गोपालप्रसाद ने कहा है — “अ ा
तो साहब, फर ‘ बजनेस’ क बातचीत हो जाए।” जी हाँ, दशको, आपने ठ क सुना — इस बैठक को यहाँ ‘ बजनेस’
कहा जा रहा है।
[दृश्य 4 — शत] शत साफ़ रखी जा रही ह — लड़क सुंदर होनी चा हए, और पढ़ - लखी बहुत नह , “हद से हद
मै क-पास”। तक भी दया जा रहा है — “मोर के पंख होते ह, मोरनी के नह ।” लड़क के पता इस पर सहम त म
सर हला रहे ह, हालाँ क कुछ ही दे र पहले वे इन्ह वचार को ‘द कयानूसी’ कह चुके थे।
[दृश्य 5 — प्रवेश] और अब... लड़क भीतर आ रही है। पान क तश्तरी हाथ म है, गदन झुक हुई, कपड़े बलकुल
सादे । कमरे म एक क्षण के लए सन्नाटा है। ...और यह क्या! तश्तरी दे ते समय उसका चेहरा उठा है और — चश्मा!
दोन मेहमान एक साथ च क उठे ह। सफ़ाई द जा रही है क आँख दुखने आ गई थ । स्पष्ट है, यहाँ चश्मा भी पढ़ाई
का सबूत माना जा रहा है।
[दृश्य 6 — परीक्षा] अब लड़क से गीत सुनाने को कहा गया है। वह सतार उठाकर मीरा का पद गा रही है — ‘मेरे
तो गरधर गोपाल दूसरो न कोई’। स्वर बहुत सधा हुआ है। दे खए, गाते-गाते उसका सर धीरे-धीरे उठ रहा है... और
अचानक वह रुक गई है। उसक आँख शंकर क आँख से मल गई थ । गीत बीच म ही छू ट गया।
[दृश्य 7 — मोड़] प्रश्न जारी ह — प टग? सलाई? इनाम? और अब वह चुप है, बलकुल चुप। पता खाँसकर
इशारा कर रहे ह। मेहमान अधीर हो रहे ह। और... और वह बोल पड़ी है! सु नए उसके शब्द — “जब कुस -मेज
बकती है तब दुकानदार कुस -मेज से कुछ नह पूछता, सफ खरीदार को दखला दे ता है।” दशको, कमरे म सन्नाटा
छा गया है।
[दृश्य 8 — व ोट] अब बात तेज़ी से बगड़ रही है। लड़क ने मेहमान के पुत्र पर एक पुराना आरोप सबके सामने
रख दया है। लड़का बस इतना कह रहा है — “बाबूजी, च लए।” और लड़क ने स्वीकार कर लया है क उसने
बी.ए. पास कया है। बाबू गोपालप्रसाद खड़े हो गए ह, छड़ी ढूँ ढ़ रहे ह, ‘दगा’ शब्द इस्तेमाल कर रहे ह।
[दृश्य 9 — अं तम वार] और जाते-जाते लड़क का आ ख़री वाक्य — “घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा क
आपके लाडले बेटे के रीढ़ क ह ी भी है या नह — यानी बैकबोन, बैकबोन!” दोन मेहमान बाहर नकल चुके ह।
पता कुस पर बैठ गए ह। लड़क चुप है — पर यह चुप्पी अब सस कय म बदल रही है।
[समापन] और ठ क इसी क्षण, दशको, घर का सहायक रतन मक्खन लेकर लौटा है और कह रहा है — “बाबूजी,
मक्खन!” सब उसक ओर दे ख रहे ह। जस मक्खन के लए दनभर दौड़ लगी, वह अब आया है — जब उसका
कोई काम नह । यहाँ से, आपका संवाददाता, इस एक प्रश्न के साथ वदा लेता है: आज इस कमरे म परीक्षा
कसक हो रही थी — लड़क क , या हम सबक ?

Page 35 of 43

Page 37

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

Tip: लाइव रपोट लखते समय हर अनु े द के आगे कोष्ठक म दृश्य का नाम लख ली जए, जैसा ऊपर कया गया
है। इससे क्रम नह टू टता और प्रस्तु त के समय आप सीधे उसी बदु पर लौट सकते ह। और सबसे ज़रूरी — जो
पाठ म नह है, उसे मत जो ड़ए। रपोट का बल कल्पना से नह , ब्योरे क स ाई से आता है।

भाषा संगम — पृष्ठ 118
अभ्यास › भाषा संगम

भाषा सं ग म भारतीय भाषाएँ

प्र.1 “मक्खन वाले क दुकान दूर है” — नीचे ‘मक्खन’ शब्द के लए सं वधान क आठव अनुसूची म स म्म लत कुछ
भारतीय भाषाओं म प्रयुक्त शब्द क सूची द गई है। मक्खन ( हद ); नवनीतम् (संस्कृत); मक्खण (पंजाबी);
मक्खन (उदू); ठॅ न्य (कश्मीरी); मखणु ( सधी); लोणी (मराठ ); माखण, नवनीत (गुजराती); लोणी (क कणी);
नौनी, माखन (नेपाली); माखन, ननी (बांग्ला); माखन (अस मया); माखोन (म णपुरी); लहुणी, मक्खन
(ओ ड़आ); वेन्नै (तेलुगु); वॆण्णॆय् (त मल); वॆण्ण (मलयालम); वॆण्णे (कन्नड़)। इनके अ त रक्त य द आप
‘मक्खन’ शब्द को कसी और भाषा म भी जानते ह तो उस भाषा म भी ल खए।

उत्तर

पुस्तक क सूची म 18 भाषाएँ ह। नीचे उनके अ त रक्त कुछ और भाषाओं और बो लय के शब्द दए गए ह, जो हमारे वद्यालय के
ब ने अपने घर से पूछकर इक े कए —

भाषा / बोली ‘मक्खन’ के लए शब्द

भोजपुरी मक्खन / माखन

अवधी माखन

बज माखन (‘माखनचोर’ शब्द इसी से बना है)

मैिथली मक्खन / नवनीत

मगही माखन

राजस्थानी (मारवाड़ ी) माखण

हिरयाणवी माखन

छत्तीसगढ़ ी माखन

डोगरी मक्खन

तुल ु बॆण्णॆ

अंगेज़ी butter (बटर)

Page 36 of 43

Page 38

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

सूची को केवल प ढ़ए मत — उसम एक नयम खो जए। ध्यान से दे खए तो ये सारे शब्द तीन कुल म बँट जाते
ह:

नवनीत-कुल — संस्कृत नवनीतम् से नकले शब्द — नवनीत (गुजराती, मै थली), ननी (बांग्ला), नौनी
(नेपाली)। ‘नवनीत’ का शब्दाथ ही है ‘अभी-अभी नकाला हुआ’।
माखन-कुल — मक्खन, माखन, माखण, मखणु, माखोन, लहुणी के साथ चलने वाला ‘मक्खन’ — यह पूरे
उत्तर, प म और पूव भारत म फैला हुआ है।
वेण्ण-कुल — वेन्नै (तेलुगु), वॆण्णॆय् (त मल), वॆण्ण (मलयालम), वॆण्णे (कन्नड़), बॆण्णॆ (तुलु) — चार -पाँच
द्र वड़ भाषाओं म लगभग एक ही शब्द।

इसके अलावा मराठ और क कणी का लोणी तथा ओ ड़आ का लहुणी आपस म मलते-जुलते ह — यानी पड़ोसी
भाषाएँ शब्द भी बाँट लेती ह। इतनी दूर-दूर क भाषाओं म एक ही चीज़ के लए मलते-जुलते शब्द होना बताता है
क हमारी भाषाएँ अलग-अलग होकर भी एक ही प रवार-वृक्ष क शाखाएँ ह।

Try This: कक्षा म एक चाट बनाइए जसके बीच म ‘मक्खन’ लखा हो और चार ओर सबक मातृभाषा के शब्द।
फर उन्ह ऊपर बताए तीन कुल के रंग से घेर द जए — भाषा का न ा अपने आप बन जाएगा।

प्र.2 उपयुक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा म भी ल खए। (“मक्खन वाले क दुकान दूर है”)

उत्तर

यह प्रश्न हर वद्याथ के लए अलग है — आपको अपनी मातृभाषा म लखना है। नीचे कई भाषाओं म यही वाक्य दया गया है,
ता क आप अपनी भाषा का वाक्य मलाकर दे ख सक और यह भी समझ सक क तुलना कैसे क जाती है।

Page 37 of 43

Page 39

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

भाषा “मक्खन वाले क दुकान दूर है”

िहंद ी मक्खन वाले क दुकान दूर है।

भोजपुरी मक्खन वाला के दुकान दूर बा।

अवधी माखन वाले क दुकान दूर अहै।

मैिथली मक्खन वला के दोकान दूर अ छ।

राजस्थानी माखण आळा री दुकान दूर है।

हिरयाणवी माखन आळे क दुकान दूर सै।

छत्तीसगढ़ ी माखन वाला के दुकान दू रहा हे।

मराठी लोणी वकणाऱ्याचे दुकान लांब आहे.

गुजराती માખણવાળાની દુ કાન દૂ ર છે . (माखणवाळानी दुकान दूर छे ।)

पंजाबी ਮੱ ਖਣ ਵਾਲੇ ਦੀ ਦੁਕਾਨ ਦੂਰ ਹੈ। (मक्खण वाले द दुकान दूर है।)

बांग्ला মাখনওয়ালার দাকান দূের। (माखनवालार दोकान दूरे।)

नेपाली नौनी बेच्नेको पसल टाढा छ।

उदू ‫( ﻣﮑﮭﻦ والﮯ ﮐﯽ دﮐان دور ﮨﮯ۔‬मक्खन वाले क दुकान दूर है।)

संस्कृ त नवनीत वक्रेतुः आपणः दूरे अ स्त।

अंगेज़ी The butter-seller’s shop is far away.

अब तीन बात मलाकर दे खए —

1. क्रया कहाँ आती है? लगभग हर भारतीय भाषा म वाक्य के अंत म — है, बा, अ छ, सै, आहे, છે , ਹੈ , अ स्त।
अंग्रेज़ी म क्रया बीच म आ जाती है (is far away)। भारतीय भाषाओं क यह साझी बनावट अपने आप म
एक खोज है।
2. ‘वाला’ कस- कस रूप म मलता है? वाला / वला / आळा / आळे / ওয়ালা / ‫ — واﻟﮯ‬एक ही प्रत्यय,
थोड़ी-सी ध्व न बदलकर, आधे भारत म फैला हुआ।
3. ‘दूर’ लगभग सब जगह ‘दूर’ ही है — केवल नेपाली म ‘टाढा’ और मराठ म ‘लांब’ भी चलता है।

इसी लए ‘भाषा संगम’ केवल अनुवाद का खेल नह है — यह दे खने का तरीका है क हमारी भाषाएँ अलग-अलग
होकर भी एक-दूसरे क पड़ोसी ह।

Page 38 of 43

Page 40

as e
कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी
a g l AglaSem · NCERT Solutions

अपनी भाषा के लए: य द आपक मातृभाषा ऊपर नह है, तो घर के बड़ से पूछकर वाक्य ल खए और उसके
. com
m a s eे m
coद वार पर टाँग द जए — यही आपक कक्षा का ‘भाषा संगम’ होगा। agl
नीचे दे वनागरी म उ ारण भी लख द जए, ता क दूसरी भाषा के साथी भी उसे पढ़ सक। कक्षा क सारे वाक्य एक
.
em
चाट पर लगाकर

a s
agl

co m
ag
खोजबीन — पृष्ठ 118
m .
अभ्यास › खोजबीन
as e
खोजबीन प रयोजना a g l

co m
e m.
नीचे दए गए लक का प्रयोग करके आप एकांक वधा और रीढ़ क ह ी एकांक के वषय म और अ धक जान-

as
प्र.1

m l
.co g
समझ सकते ह— एकांक ; रीढ़ क ह ी

m a
l a se
g
a पुस्तक ने यहाँ दो वषय सुझाए ह और उनके लए लक (QR कोड) दए ह। इन्ह केवल देख लेना पयाप्त नह — दे खकर नोट
उत्तर

m a s
.co agl
बनाइए। नीचे दोन के लए यह दया गया है क क्या खोजना है और कक्षा म क्या लाना है।

se m
वषय क्या खोज / दे ख
g l a कक्षा म क्या प्रस्तुत कर
a
1. एकांक क प रभाषा और उसके तत्व — कथावस्तु, पात्र, संवाद, एक तुलना-चाट बनाइए — बाईं ओर ‘कहानी’,
एकांक दे श-काल/प रवेश, भाषा-शैली, उ े श्य और रंग- नदश। यह भी
co m
दाईं ओर ‘एकांक ’, और आठ पं क्तय म अंतर।

m .
e
( वधा) दे खए क एकांक नाटक से कस तरह अलग है (एक अंक, एक ही साथ म कसी एक और एकांक का नाम, उसका

m l as
.co के प्रमुख एकांक कार — भुवनेश्वर (कारवाँ), रामकुमार वमा g
समस्या, थोड़े पात्र, कम समय, तेज़ ग त, च काने वाला अंत)। हद लेखक और उसक एक-पं क्त क समस्या ल खए।

m a
l a se (द पदान, रेशमी टाई), उपद्रनाथ ‘अश्क’, वष्णु प्रभाकर और

ag जगद शचंद्र माथुर स्वयं।

se m
omह — रामस्वरूप l a
2. ‘रीढ़ इसका मंचन या पाठ (audio) सु नए और ध्यान द जए क एक समीक्षा-पचा (लगभग 150 शब्द) ल खए —

. c a g
sem आवाज़’, उमा क ‘हल्क
क ह ी’ कलाकार संवाद- नदश को स्वर से कैसे नभाते प्रस्तु त म कौन-सा दृश्य सबसे प्रभावी लगा, कस

ले कन मजबूत आवाज़’। यहla
एकांक का ‘हँ-हँ-हँ’, गोपालप्रसाद क ‘जोशीली पात्र का अ भनय सबसे सट क था, और य द आप

agशचंद्र माथुर क अन्य कृ तय — भोर का
भी दे खए क नदशक ने मंच-सज्जा म नदशक होते तो क्या बदलते। साथ म एक पोस्टर
क्या बदला। साथ ही जगद बनाइए जस पर एकांक का नाम, पात्र-सूची और

m
तारा, कोणाक, ओ मेरे सपने — के बारे म प ढ़ए। वह एक पं क्त हो जो आपके अनुसार पूरे एकांक
का सार है।
. co
se m
o m l a
g से एकांक -संग्रह ली जए और
m .cखोजबीन का तरीका: केवल इंटरनेट पर मत रु कए। (1) वद्यालय के पुस्aतकालय
l a se
ag एक और एकांक प ढ़ए। (2) घर के बड़ से पू छए क उनके समय म ववाह तय करने क रस्म कैसी होती थी —

.c
m
उत्तर लखकर लाइए; यह इस पाठ का सबसे जीवंत ‘ ोत’ होगा। (3) हर ोत का नाम अपनी कॉपी म लख

m a s e
co agl
ली जए — यही आपक संदभ-सूची होगी।

m .
as e
a g l

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 39 of 43

Page 41

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

क्य कर: ‘रीढ़ क ह ी’ को पूरी तरह समझने के लए यह जानना ज़रूरी है क यह एकांक है — यानी लेखक के
पास न पन्न का वस्तार था, न कई दृश्य क छू ट। उसे सब कुछ एक कमरे म, एक बैठक म और लगभग एक घंटे म
कहना था। जब आप यह जान लगे, तब समझ आएगा क हर संवाद कतना नपा-तुला है और अं तम पं क्त —
“बाबूजी, मक्खन!” — कतनी सोच-समझकर वहाँ रखी गई है।

अध्याय — एक नज़र म
रचनाकार — जगद शचंद्र माथुर का जन्म सन् 1917 म शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदे श म हुआ और शक्षा इलाहाबाद वश्व वद्यालय
से हुई। वे इं डयन स वल स वस म भी चय नत हुए। बहार राज्य के शक्षा स चव, आकाशवाणी के महा नदे शक तथा सूचना
और प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त स चव जैसे प्रशास नक पद पर काम करते हुए भी वे आजीवन सा हत्य-सृजन म स क्रय रहे।
सन् 1978 म उनका नधन हुआ।
प्रयाग म अध्ययन के दौरान ही उन्ह ने लखना आरंभ कर दया था और उस समय क च चत प त्रकाओं चाँद तथा रूपाभ म
उनके नाटक-एकांक छपने लगे थे। हद नाटक और रंगमंच के वकास म उनके एकां कय और नाटक क महत्वपूण
भू मका रही है। ऐ तहा सक नाटक के साथ-साथ उन्ह ने सामा जक समस्याओं से जुड़े एकांक भी लखे। प्रमुख कृ तयाँ —
भोर का तारा, कोणाक, ओ मेरे सपने, शारद या, पहला राजा, दस तस्वीर, जन्ह ने जीना जाना। संपूण रचनाएँ जगद शचंद्र
माथुर रचनावली (चार खंड) म संक लत ह। कोणाक उनका सवा धक च चत और मं चत नाटक है।
वधा — ‘रीढ़ क ह ी’ एक एकांक है, यानी एक ही अंक म, एक ही ान पर, लगभग एक ही समय म पूरी होने वाली
नाट्य-रचना। इसम कहानी क तरह कथावस्तु तो होती है, पर वह संवाद और रंग- नदश के सहारे आगे बढ़ती है — लेखक
बीच म आकर कुछ नह समझाता। एकांक म एक ही समस्या उठाई जाती है, पात्र थोड़े होते ह, और अंत प्रायः च काने वाला
या व्यंग्य-भरा होता है। इस एकांक म ये सब लक्षण साफ़ दखाई दे ते ह।
कथावस्तु — बाबू रामस्वरूप के घर उनक बेट उमा को ‘दे खने’ के लए बाबू गोपालप्रसाद अपने बेटे शंकर के साथ आने
वाले ह। तख्त बछता है, दरी और चादर माँगी जाती है, हारमो नयम- सतार नीचे लाए जाते ह, नाश्ता सजता है — पूरा घर एक
प्रदशनी म बदल जाता है। बातचीत ‘ बजनेस’ पर आते ही स्पष्ट हो जाता है क लड़के वाल को सुंदर, कम पढ़ - लखी लड़क
चा हए। उमा पान लेकर आती है, गाती है, चुप रहती है — और जब उससे इनाम- वनाम पूछे जाते ह तो वह फूट पड़ती है।
उसके एक-एक वाक्य से बात खुल जाती है क वह बी.ए. पास है। रश्ता टू ट जाता है और गोपालप्रसाद क्रोध म उठकर चले
जाते ह।
पात्र — उमा इस एकांक क कद्र य पात्र है — श क्षत, आत्मसम्मानी, अपनी बात कहने का साहस रखने वाली नई स्त्री क
प्र त न ध। रामस्वरूप पढ़े - लखे तो ह, पर समाज के दबाव म झूठ बोलते ह — यही उनका अंतद्वद्व है। प्रेमा स्वयं स्त्री होकर
भी स्त्री- शक्षा को ‘जंजाल’ मानती है। गोपालप्रसाद वक ल ह, सभा-सोसाइ टय म जाते ह, पर बहू ‘हद से हद मै क-पास’
चाहते ह — यही एकांक का सबसे बड़ा पाखंड है। शंकर मे डकल का छात्र है, फर भी अपनी कोई राय नह रखता। रतन
घरेलू सहायक है और उसी के मुँह से एकांक क अं तम, सबसे चुभती हुई पं क्त नकलती है।
मूल संवेदना — एकांक ववाह को खरीद-फरोख्त के रूपक से पकड़ता है। उमा का वाक्य — “जब कुस -मेज बकती है
तब दुकानदार कुस -मेज से कुछ नह पूछता, सफ खरीदार को दखला दे ता है।” — पूरे एकांक का सार है। लड़क को वस्तु
मानने वाली इसी दृ ष्ट पर लेखक चोट करता है, और साथ ही उस मान्यता पर भी क ऊँची शक्षा ‘ सफ मद के लए’ है।
शीषक और व्यंग्य — ‘रीढ़ क ह ी’ शब्द एकांक म दो बार, दो अथ म आता है — पहले गोपालप्रसाद शंकर क झुक
कमर पर टोकते ह (शारी रक अथ), और अंत म उमा वही शब्द लौटाकर शंकर के च रत्र पर प्रश्न खड़ा कर दे ती है — “यानी
बैकबोन, बैकबोन!” शरीर से च रत्र तक क यही छलाँग एकांक का चरम- बदु है और शीषक क साथकता भी।
भाषा-शैली — संवाद बोलचाल क सहज हदुस्तानी म ह, जनम उदू-फ़ारसी (तशरीफ़, तकल्लुफ़, नहायत, फतरती,
मा फ़क) और अंग्रेज़ी ( बजनेस, मा जन, वीक-एंड, टै क्स, ग्रेड, बैकबोन) दोन घुले- मले ह। ‘पौडर-वौडर’, ‘टोस्ट-वोस्ट’,

Page 40 of 43

Page 42

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

‘प टग-व टग’ जैसे पुनरुक्त शब्द-युग्म पात्र क मध्यवग य बोली को जीवंत कर दे ते ह। मुहावरे (भीगी बल्ली, मुँह फुलाना,
सर चढ़ाना, काँट म घसीटना) और कहावत ‘बाप सेर है तो लड़का सवा सेर’ संवाद म व्यंग्य क धार भर दे ते ह।
अभ्यास क्या माँगता है — पुस्तक यहाँ केवल कथा नह पूछती। मेरे उत्तर मेरे तक म वकल्प के साथ तक माँगा गया है;
वधा से संवाद म एकांक क रूपरेखा के दस बदु (पात्र, प रवेश, रंग- नदश, संवाद- नदश, समस्या, समाधान आ द) पाठ से
उदाहरण दे कर भरने ह और एक दृश्य का मंचन करना है; मेरी टप्पणी म टप्पणी-लेखन सखाया गया है; सृजन म एकांक
का आगे का दृश्य कल्पना से लखना है; और ग त व धयाँ म संवाददाता बनकर साक्षात्कार तथा लाइव रपोट तैयार करनी है।

Page 41 of 43

Page 43

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग

अधेड़ आधी उम का, ढलती उम का “ जन महाशय क पीठ नजर आ रही अधेड़ उम्र म भी उन्ह ने नई भाषा
है, वे अधेड़ उम्र के मालूम होते ह।” सीखनी शुरू कर द ।

तख्त लकड़ी की बड़ी चौकी, िसंहासन “अब तख्त को उधर मोड़ दे ... उधर।” दादा जी दोपहर म आँगन के तख्त
पर ही लेटते ह।

गंदुमी गेहएु ँ रंग का “गंदुमी रंग, छोटा कद।” उसका गंदुमी रंग और बड़ी-बड़ी
आँख सबका ध्यान ख चती थ ।

डाट टेक , अटकाव “क्य रतन, तेरे कान म डाट लगी है शोर से बचने के लए उसने कान
क्या?” म डाट लगा ली।

जंजाल झंझट, झमेल ा, संस ार का बखेड़ा “मेरी समझ म तो ये पढ़ाई- लखाई के बेकार क चीज खरीदकर उसने घर
जंजाल आते नह ।” को जंजाल बना लया।

ठठोली हँस ी, पिरहास “हटो भी! तुम्ह ठठोली ही सूझती रहती गंभीर सभा म ठठोली अ नह
है।” लगती।

करीने/करीना ढं ग , क्रम, मेल , समानता “उमा से कह दे ना क ज़रा करीने से उसने अपनी कताब बड़े करीने से
आए।” अलमारी म सजाईं।

द कयानूसी पुर ाने िवचार का, पुर ाना “गुस्सा तो मुझे बहुत आता है इनके बे टय को न पढ़ाना आज भी कुछ
द कयानूसी खयाल पर।” लोग क द कयानूसी सोच है।

तालीम िशक्षा “कहता है क शाद का सवाल दूसरा तालीम पाकर ही कोई अपने पैर
है, तालीम का दूसरा।” पर खड़ा हो सकता है।

चौपट नष्ट, चारों ओर से खुल ा हुआ “गया नह मक्खन लाने?... सब चौपट एक भूल ने महीन क मेहनत
कर दया।” चौपट कर द ।

दस्तक खटखटाना, हाथ का हलका आघात या “(प्रेमा जाती है। ... कवाड़ पर आधी रात को दरवाज़े पर दस्तक
धक्का, ताली दस्तक।)” सुनकर सब च क उठे ।

फतरती चालबाज, पकृ ितगत “मालूम होता है क काफ अनुभवी फतरती आदमी क मीठ बात म
और फतरती महाशय ह।” मत आइए।

खीस नपोरना / इस तरह हँस ना िक दाँत िदखाई दे ं, बेढंग ी “उनका लड़का कुछ खीस नपोरने गलती पकड़ी जाने पर वह बस
खीस नकालना हँस ी हँस ना वाले नौजवान म से है।” खीस नपोरता रह गया।

खा सयत/खासीयत ु , पभाव, पकृ ित, स्वभाव
िवशेषता, ग ण “झुक कमर इनक खा सयत है।” इस म के बतन क खा सयत
यह है क पानी ठं डा रहता है।

तशरीफ़ आदर, सम्मान, महत्व “हँ-हँ, इधर तशरीफ़ लाइए— इधर।” आप तशरीफ़ र खए, वे अभी आते
ही ह गे।

Page 42 of 43

Page 44

कक्षा 9 हद अध्याय 6 रीढ़ क ह ी AglaSem · NCERT Solutions

शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग

मा जन सीमा, िकनारा “जी, एकाध साल का ‘मा जन’ रखता समय का थोड़ा मा जन रखकर घर
हूँ।” से नक लए।

बालाई ऊपर का िहस्सा “यह हाल था क चार पैसे म ढे र-सी दूध क बालाई नकालकर उसने
बालाई आती थी।” मलाई-रोट बना ली।

तकल्लुफ़ बनावट, िशष्टाचार “यह सब आप क्या तकल्लुफ़ करते अपने घर म तकल्लुफ़ क क्या
ह!” ज़रूरत है?

मा फ़क अनुकू ल, अनुस ार “अपनी खूबसूरती के ‘ग्रेड’ के मा फ़क यह काम मेरे मा फ़क नह है।
अपने ऊपर टै क्स तय कर ले।”

मुखा तब संबोधन करने वाला, बात करने वाला “(शंकर क तरफ मुखा तब होकर) वे मेरी ओर मुखा तब होकर बोले।
आपका क्या खयाल है, शंकर बाबू?”

नहायत अत्यिधक, अत्यंत, बहुत ज्यादा “लड़क का खूबसूरत होना नहायत यह नहायत ज़रूरी काम है, इसे
जरूरी है।” टाला नह जा सकता।

जायचा जन्मपत्री “और जायचा (जन्मपत्र) तो मल ही पं डत जी ने दोन के जायचे
गया होगा?” मलाकर तारीख तय क ।

अज़ िनवेद न, पाथना, चौड़ाई “नह साहब, वह तो मने अज़ कया मेरी बस इतनी अज़ है क एक बार
न।” सुन ली जए।

अधीर धै य रिहत, उतावला, आकु ल, दृ ढ़ता रिहत “गोपालप्रसाद अधीर हो उठते ह और प रणाम सुनने के लए वह अधीर
रामस्वरूप सकपकाते ह।” हुआ जा रहा था।

एकांक एक ही अंक में पूर ी होने वाली नाट -रचना “आप जानते ही ह क ‘रीढ़ क ह ी’ हमारी कक्षा ने वा षकोत्सव म एक
एक एकांक है।” एकांक प्रस्तुत कया।

रंग- नदश / मंच- कोष्ठक में िदया वह िनदश जो मंच-सज्जा, “(मामूली तरह से सजा हुआ एक रंग- नदश पढ़े बना नदशक मंच
नदश पात्रों की गित और भाव-भंिगमा बताता है कमरा।...)” नह सजा सकता।

Page 43 of 43

Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 9
TypeSolution
Pages44
Languagehindi
Updated19 Sep 2026