Page 1
F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा9
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 7: म और मेरा दे श
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — गंगा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
120 – 142 20 51 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 69 pages
Page 2
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 9 · हद · गं गा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 7: म और मेरा दे श
NCERT कक्षा 9 हद क पाठ्यपुस्तक गंगा के गद्य खंड के पाठ 7 म और मेरा दे श के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह कन्हैयालाल मश्र ‘प्रभाकर’
(1906–1995) का एक नबंध है, जो प्रश्नोत्तर शैली म यह सद्ध करता है क नाग रक और दे श दो अलग चीज नह ह — दे श क हीनता और गौरव
का फल नाग रक को मलता है और नाग रक क हीनता तथा गौरव का फल दे श को। पृष्ठ 120 से 142 तक अभ्यास के वे सभी शीषक — रचना से
संवाद (मेरे उत्तर मेरे तक, मेरी समझ मेरे वचार, मेरे अनुभव मेरे वचार, मेरे प्रश्न), वधा से संवाद ( नबंध वधा क पहचान), वषय से संवाद
(चुनाव एवं आपके अनुभव, अ धकार और कतव्य), सृजन (हमारा पुस्तकालय, ेल ल प म पुस्तक, कृतज्ञता ज्ञापन, वज्ञापन, स्वच्छता और
आचरण), भाषा से संवाद (व्याकरण क बात — संदभ म शब्द, मलते-जुलते भाव वाले ‘शब्द-युग्म’, शब्द क क ड़याँ/ ंखला, भाषा संगम),
ग त व धयाँ, झरोखे से और खोजबीन — शीषक-दर-शीषक, प्रश्न-दर-प्रश्न हल कए गए ह। पुस्तक क अधूरी ता लकाएँ यहाँ पूरी भरकर द गई ह
और अंत म साथ-साथ पढ़ के अंतगत द गई रचना नमल जीत सह सेख पर भी अलग खंड दया गया है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
गंगा (कक्षा 9) 120 – 142
खं ड प्रश्न
20 51
माध्यम
हन्द
मेरे उत्तर मेरे तक — पृष्ठ 128 और 129
अभ्यास › रचना से संवाद › मेरे उत्तर मेरे तक
रचना से सं वाद मे रे उत्तर मे रे तक
प्र.1 नम्न ल खत प्रश्न के सट क उत्तर चु नए और यह भी बताइए क आपको ये उत्तर उपयुक्त क्य लगते ह? 1.
“एक दन आनंद क इस द वार म दरार पड़ गई”, इस पं क्त म रेखां कत शब्द ‘दरार’ कस ओर संकेत करता है?
(क) पूणता के भाव क तु ष्ट (ख) पारस्प रक संबंध टू टने क स्थ त (ग) पूणता के भाव पर प्रहार (घ) सुख-
सु वधाओं का अभाव
सट क उत्तर — (ग) पूणता के भाव पर प्रहार।
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: ‘द वार’ यहाँ ईंट-गारे क नह है। लेखक स्वयं आगे स्पष्ट कर दे ता है — “यह द वार थी
मान सक वचार क ; इस लए यह भूकंप भी कसी प्रांत या प्रदे श म नह उठा, मेरे मानस म ही उठा था।” जस
वचार क यह द वार थी, वह था अपनी पूणता का भाव — “म समझ रहा था क म अपने म अब पूरा हो गया ँ,
पूरा फैल गया ँ, पूरा मनुष्य हो गया ँ… वाह कैसी सुंदर, कैसी संग ठत और कैसी पूण है मेरी स्थ त!” लाला
लाजपत राय के एक वाक्य ने इसी भाव को तोड़ दया — “वह अनुभव ही तो वह भूकंप था, जसने मेरी पूणता को
एक ही ठसक म अपूणता क कसक से भर दया।” अतः ‘दरार’ पूणता के भाव पर पड़ी चोट का प्रतीक है।
Page 1 of 69
Page 3
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) पूणता के भाव ग़लत ‘तु ष्ट’ का अथ है संतोष, तृ प्त। दरार पड़ने से संतोष बढ़ा नह , टू टा। दरार के तुरंत बाद लेखक कहता
क तु ष्ट है — “मेरी स्थ त एकदम हीन है”। यह तु ष्ट का नह , अतृ प्त का वाक्य है।
(ख) पारस्प रक ग़लत ‘दरार’ शब्द का यह लाक्ष णक अथ होता तो है (पुस्तक ने ‘व्याकरण क बात’ म यही उदाहरण भी
संबंध टू टने क दया है — “उनके संबंध म दरार पड़ गई”), पर इस पं क्त म लेखक का कसी से संबंध नह टू टा।
स्थ त उसका नगर, पड़ोस, घर सब ज्य -का-त्य है; टू टा केवल उसका आत्म-संतोष है।
(ग) पूणता के सही ✓ द वार = पूणता का मान सक भाव; भूकंप = लालाजी का अनुभव; दरार = उस भाव पर पड़ी चोट।
भाव पर प्रहार तीन क ड़याँ पाठ म शब्दशः मौजूद ह।
(घ) सुख-सु वधाओं ग़लत सु वधाओं का अभाव था ही नह । लेखक कहता है — “ममता, सहारा, ज्ञान और आनंद के उपहार
का अभाव पाकर भी…”। यानी सब कुछ पाकर भी वह हीन अनुभव कर रहा है — कमी साधन क नह , गौरव
क है।
ध्यान द जए: नबंध क पूरी रचना ही रूपक पर टक है — द वार (पूणता का भाव) → भूकंप (लालाजी का
अनुभव) → दरार (आत्म-गौरव पर चोट)। तीन को अलग-अलग नह , एक ंखला के रूप म प ढ़ए, तभी उत्तर
स्वयं खुल जाता है।
प्र.2 2. नबंध म कहा गया है क “ऐसे प्रश्न का उत्तर दे ने म एक अपूव आनंद आता है।” लेखक को कस तरह के प्रश्न
का उत्तर दे ने म आनंद क अनुभू त होती है? (क) बात को वस्तार दे ने वाले प्रश्न का (ख) बात का नष्कष प्रस्तुत
करने वाले प्रश्न का (ग) बना कसी संदभ के पूछे गए प्रश्न का (घ) कसी क समझ का आकलन करने वाले
प्रश्न का
सट क उत्तर — (क) बात को वस्तार दे ने वाले प्रश्न का।
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: ‘अपूव आनंद’ वाली पं क्त से ठ क पहले लेखक स्वयं कारण गना दे ता है — “बड़े
महत्व का प्रश्न है। इस अथ म भी क यह बात को खलने का, आगे बढ़ने का अवसर दे ता है और इस अथ म भी
क ठ क समय पर पूछा गया है।” ‘बात का खलना’ और ‘आगे बढ़ना’ — यही तो वस्तार है। जो प्रश्न बातचीत का
दरवाज़ा और चौड़ा कर दे , लेखक को उसी का उत्तर दे ने म आनंद आता है। यही कारण है क आगे भी जब पाठक
पूछता है, तो लेखक कहता है — “वाह, खूब सवाल पूछा है आपने। सवाल क्या, बातचीत म आपने तो एक क मती
मोती ही जड़ दया यह।”
Page 2 of 69
Page 4
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) बात को वस्तार दे ने सही ✓ “बात को खलने का, आगे बढ़ने का अवसर दे ता है” — यह वाक्य सीधे इसी वकल्प का
वाले प्रश्न का पयाय है।
(ख) बात का नष्कष प्रस्तुत ग़लत नष्कष का अथ है बात को समेट दे ना। लेखक तो बात को खोलना चाहता है। नबंध म
करने वाले प्रश्न का नष्कष सबसे अंत म आता है — “ठ क मनुष्य को अपना मत द” — बीच के प्रश्न उसे रोकते
नह , उस तक पहुँचाते ह।
(ग) बना कसी संदभ के ग़लत लेखक ने प्रश्न क तारीफ़ ही इस लए क क वह “ठ क समय पर पूछा गया है”। समय और
पूछे गए प्रश्न का संदभ का ध्यान रखना ही प्रश्न का गुण बताया गया है — नःसंदभ प्रश्न उसका उलटा है।
(घ) कसी क समझ का ग़लत यह परीक्षा का प्रश्न होता है, बातचीत का नह । नबंध म पाठक लेखक को परखने नह ,
आकलन करने वाले प्रश्न समझने के लए पूछ रहा है। ऐसा कोई संकेत पाठ म नह है।
का
प्र.3 3. “अपने महान राष्ट्र क पराधीनता के द न दन म जन लोग ने अपने रक्त से गौरव के द पक जलाए”, इस
वाक्य म पराधीनता के दन को द न कहा गया है क्य क पराधीन भारत म— (क) भोजन, आवास और वस्त्र
जैसी मूलभूत सु वधाओं का अभाव था। (ख) लोग के आत्मसम्मान और गौरव क भावना का दमन होता था।
(ग) महत्वपूण नणय लेने क स्वतंत्रता थी। (घ) धा मक री त- रवाज को मनाने पर रोक लगाई जाती थी।
सट क उत्तर — (ख) लोग के आत्मसम्मान और गौरव क भावना का दमन होता था।
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: पूरे नबंध म पराधीनता क पीड़ा पेट क नह , माथे क बताई गई है। लाला लाजपत राय
का वाक्य ही प्रमाण है — “जहाँ भी म गया, भारतवष क गुलामी क लज्जा का कलंक मेरे माथे पर लगा रहा।”
‘लज्जा’ और ‘कलंक’ — दोन सम्मान से जुड़े शब्द ह। लेखक क अपनी शकायत भी यही है — “मेरा कह भी
और कोई भी अपमान कर सकता है — एक मामूली अपराधी क तरह और मुझे यह भी अ धकार नह क… अपील
या दया-प्राथना ही कर सकूँ।” और नष्कष तो और साफ़ है — “य द स्वग के भी सब उपहार और साधन ह , पर
उसका दे श गुलाम हो… तो वे सारे उपहार और साधन उसे गौरव नह दे सकते।” इसी लए वे दन ‘द न’ अथात
हीन, दयनीय, आत्मगौरव से रीते दन थे।
Page 3 of 69
Page 5
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
वकल्प सही / कारण
a se
comका
ग़लत
. l
agघर, पड़ोस, नगर, ज्ञान, सेवाएँ
अभावas
em
(क) मूलभूत सु वधाओं ग़लत नबंध यह बात कह नह कहता। उलटे , लेखक के पास
agl
— सब कुछ था; लालाजी संसार-भ्रमण कर रहे थे। कमी साधन क नह , सम्मान क थी।
(ख) आत्मसम्मान और गौरव सही ✓ ‘लज्जा का कलंक’, ‘अपमान’, ‘गौरव नह दे सकते’ — पाठ के ये तीन संकेत एक ही
co m
. ag
क भावना का दमन दशा म जाते ह।
se m
l a
agस्वतंत्रता होती तो दन ‘द न’ क्य कहलाते?
(ग) महत्वपूण नणय लेने क ग़लत यह वाक्य ही उलटा है। पराधीनता का अथ ही है नणय क स्वतंत्रता का न होना। य द
स्वतंत्रता थी
(घ) धा मक री त- रवाज पर ग़लत
co m
नबंध का वषय धम है ही नह । ‘म और मेरा दे श’ नाग रक के सम्मान, कतव्य और
em.
रोक अ धकार क बात करता है — धा मक प्र तबंध का कोई उल्लेख पूरे पाठ म नह है।
m l as
.co a g
a s emपर ध्यान: ‘द न’ का अथ है — गरीब, दयनीय, हीन। पर यहाँ यह वशेषण दन के लए आया है, लोग क
gl जेब के लए नह । इसी लए इसका सही अथ है — ऐसे दन जनम राष्ट्र का माथा झुका हुआ था।
शब्द
a
m a s
em
.co agl
a s
gl दे श कसी दूसरे दे श के अधीन हो। (ग) उनके नगर क शासन प्रणाली
4. नबंध के अनुसार मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नह कर सकते य द— (क) उन्ह वदे श
भ्रमण के अवसर न मल। (ख)aउनका
प्र.4
कमजोर हो। (घ) अ भव्य क्त क स्वतंत्रता का हनन होता हो।
co m
m .
as e
com l
. a g
se m
सट क उत्तर — (ख) उनका दे श कसी दूसरे दे श के अधीन हो।
g l a
a यह उत्तर क्य उपयुक्त है: यहाँ अनुमान लगाने क भी जरूरत नह — लेखक ने वाक्य लगभग इन्ह शब्द म
se m
m l a
लखा है — “ कसी मनुष्य के पास संसार के ही नह , य द स्वग के भी सब उपहार और साधन ह , पर उसका दे श
o
गुलाम हो या कसी भी दूसरे रूप म हीन हो तो.cवे सारे उपहार और साधन उसे गौरव नह दे सकते।” ‘गुलाम होना’
a g
m
e इसका जीवंत प्रमाण ह — साधन, यश, व्य क्तत्व, वश्व-भ्रमण सब
ही ‘ कसी दूसरे दे श के अधीन होना’ है।sलालाजी
l a
g क ही रहा।
उनके पास था, फर भी माथे परaकलं
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
com
m .
m as e
.co
a g l Page 4 of 69
Page 6
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) वदे श भ्रमण के ग़लत यह तो उलटा उदाहरण है। लालाजी को अवसर मला ही — “म अमे रका गया, इंग्लड गया, ांस
अवसर न मल गया” — फर भी गौरव नह मला। इससे सद्ध होता है क भ्रमण गौरव क शत नह है।
(ख) उनका दे श कसी सही ✓ “उसका दे श गुलाम हो… तो वे सारे उपहार और साधन उसे गौरव नह दे सकते” — पाठ का
दूसरे दे श के अधीन हो सीधा कथन।
(ग) नगर क शासन ग़लत नबंध म लेखक का नगर तो उसे सब कुछ दे रहा था — ममता, ज्ञान, सम्मान, सहारा। समस्या
प्रणाली कमजोर हो नगर क नह , राष्ट्र क स्थ त से जुड़ी है। नबंध बार-बार ‘दे श’ शब्द दोहराता है, ‘नगर’ को वह
पीछे छोड़ चुका है।
(घ) अ भव्य क्त क ग़लत यह भी पराधीनता का एक प रणाम हो सकता है, पर नबंध इसे कारण के रूप म नह गनाता।
स्वतंत्रता का हनन हो लेखक ने जो एक ही शत लखी है वह है — दे श का गुलाम या हीन होना। परीक्षा म वही उत्तर
सही होता है जो पाठ म लखा हो, जो केवल संभव हो वह नह ।
प्र.5 5. “पर उन दो घटनाओं म वह गाँठ इतनी साफ है”, इस वाक्य म रेखां कत शब्द ‘गाँठ’ कन दो बात को साथ
बाँधती है? (क) दे श और नाग रक (ख) दे श और सं वधान (ग) दे श और वदे श (घ) व्यवसाय और आजी वका
सट क उत्तर — (क) दे श और नाग रक।
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: उत्तर उसी वाक्य के दूसरे आधे भाग म लखा हुआ है — “उन दो घटनाओं म वह गाँठ
इतनी साफ है, जो नाग रक और दे श को एक साथ बाँधती है, क आप दो बड़ी-बड़ी पुस्तक पढ़कर भी उसे इतना
साफ नह दे ख सकते।” ‘दो घटनाएँ’ भी यही सद्ध करती ह — जापानी युवक ने फल भट कर अपने दे श का सर
ऊँचा कया, और चत्र चुराने वाले वद्याथ ने अपने दे श के मस्तक पर कलंक का ट का लगा दया। दोन बार काम
एक नाग रक ने कया और नाम दे श का हुआ — यही वह ‘गाँठ’ है। इसी को लेखक आगे प्रश्न-रूप म दोहराता है —
“दे श क हीनता और गौरव का ही फल उसे नह मलता, उसक हीनता और गौरव का फल भी उसके दे श को मलता
है?”
Page 5 of 69
Page 7
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) दे श और सही ✓ वाक्य म ही शब्दशः लखा है — “जो नाग रक और दे श को एक साथ बाँधती है”।
नाग रक
(ख) दे श और ग़लत सं वधान क चचा अभ्यास के ‘अ धकार और कतव्य’ शीषक म आती है, नबंध के इस प्रसंग म
सं वधान नह । दोन घटनाओं म कोई कानून नह , केवल एक-एक युवक का आचरण है।
(ग) दे श और वदे श ग़लत घटनाएँ वदे श (जापान) म घटती अवश्य ह, पर गाँठ दे श के बीच नह है। जापान तो केवल मंच है;
बँधे हुए ह युवक और उसका अपना दे श।
(घ) व्यवसाय और ग़लत नबंध का वषय ही नह । जापानी युवक ने तो दाम लेने से इनकार कर दया था — वह वक्रेता था
आजी वका ही नह , स्वामी जी क यह भूल थी।
प्र.6 6. प्रस्तुत नबंध म मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है? (क) लोकतां त्रक शासन व्यवस्था (ख) पा रवा रक
संबंध का महत्व (ग) व्य क्त और दे श का अंतसबंध (घ) दे श का महत्व और व्य क्त क उपेक्षा
सट क उत्तर — (ग) व्य क्त और दे श का अंतसबंध।
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: नबंध का शीषक ही ‘म और मेरा दे श’ है — ‘और’ ही उस संबंध का सेतु है। लेखक
स्वयं सारे तक का नचोड़ एक वाक्य म रख दे ता है — “बात यह है क म और मेरा दे श दो अलग चीज तो ह ही
नह ।” पूरी रचना इसी एक भाव के इद- गद बुनी गई है — पहले ‘म’ का वस्तार (घर → पड़ोस → नगर), फर उस
वस्तार म पड़ी दरार (दे श गुलाम है), फर दो घटनाओं से नाग रक और दे श क ‘गाँठ’, फर भावना का महत्व, और
अंत म कतव्य (ठ क मनुष्य को मत दे ना) तथा अ धकार (मेरा मत लए बना कोई कुरसी पर न बैठे)। ये सब एक ही
कद्र य भाव क शाखाएँ ह।
Page 6 of 69
Page 8
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) लोकतां त्रक शासन ग़लत चुनाव क चचा नबंध के अं तम अंश म आती है, और वह भी ‘कसौट ’ के रूप म — क नाग रक
व्यवस्था क समझ से दे श क उच्चता तोली जाए। यह मुख्य भाव का एक उदाहरण है, स्वयं मुख्य भाव
नह ।
(ख) पा रवा रक संबंध ग़लत घर और पड़ोस केवल आरं भक भू मका ह, जनके सहारे लेखक ‘म’ का दायरा बढ़ाता है। तीसरे
का महत्व ही अनुच्छेद म वह नगर तक और फर दे श तक पहुँच जाता है।
(ग) व्य क्त और दे श सही ✓ “म और मेरा दे श दो अलग चीज तो ह ही नह ” — यही नबंध का कद्र य वाक्य है, और शीषक भी
का अंतसबंध यही कहता है।
(घ) दे श का महत्व और ग़लत नबंध व्य क्त क उपेक्षा करता ही नह । वह साफ़ कहता है — “उसके एक नाग रक के रूप म
व्य क्त क उपेक्षा मेरा यह अ धकार भी है क अपने दे श के सम्मान का पूरा-पूरा भाग मुझे मले।” कतव्य और
अ धकार दोन बराबर तौले गए ह।
‘मुख्यतः’ शब्द पर ध्यान द जए: ऐसे प्रश्न म वह वकल्प चु नए जो पूरी रचना पर लागू हो, न क वह जो कसी
एक अनुच्छेद पर। वकल्प (क) दो अनुच्छेद पर लागू होता है, (ख) एक पर — पर (ग) पहली पं क्त से अं तम
पं क्त तक लागू होता है।
मेरी समझ मेरे वचार — पृष्ठ 129
अभ्यास › रचना से संवाद › मेरी समझ मेरे वचार
रचना से सं वाद चचा
प्र.1 नीचे दए गए प्रश्न पर कक्षा म चचा क जए और उनके उत्तर ल खए— 1. स्वामी रामतीथ फल दे ने वाले युवक
का उत्तर सुनकर मुग्ध क्य हो गए?
स्वामी रामतीथ इस लए मुग्ध हुए क्य क उस साधारण-से जापानी युवक ने फल का कोई दाम नह माँगा — उसने मूल्य के रूप म
केवल अपने दे श क प्र तष्ठा माँगी।
घटना यह थी क स्वामी जी जापान म रेल-यात्रा कर रहे थे, उन दन फल ही उनका भोजन था और एक दन उन्ह फल न मले।
स्टे शन पर भी न मलने पर उनके मुँह से नकल गया — “जापान म शायद अच्छे फल नह मलते!” प्लेटफ़ॉम पर खड़ा एक युवक,
जो अपनी पत्नी को रेल म बैठाने आया था, यह सुनकर अपनी बात बीच म छोड़कर भागा और कह दूर से ताजे फल क एक
टोकरी ले आया। स्वामी जी ने उसे फल बेचने वाला समझकर दाम पूछे, तो उसने लेने से इनकार कर दया और बहुत आग्रह पर कहा
— “आप इनका मूल्य दे ना ही चाहते ह तो वह यह है क आप अपने दे श म जाकर कसी से यह न क हएगा क जापान म अच्छे फल
नह मलते।”
Page 7 of 69
Page 9
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
मुग्ध होने के तीन कारण:
दे श-प्रेम क सजगता — युवक ने अपने दे श के वरुद्ध कही गई एक साधारण-सी बात को भी अनसुना नह
कया। उसे लगा क यह बात भारत तक जाएगी और जापान क छ व पर दाग रहेगा।
नःस्वाथ त्याग — उसने अपना काम छोड़ा, दूर तक दौड़कर फल लाए, अपने पैसे खच कए — और बदले म
एक पैसा नह लया। लाभ क जगह उसने केवल अपने दे श का नाम चुना।
छोटे काम म बड़ी भावना — फल क एक टोकरी कोई बड़ा काम नह है, पर उसके पीछे क भावना बहुत
बड़ी थी। लेखक का सूत्र — “महत्व कसी काय क वशालता म नह है, उस काय के करने क भावना म है” —
यह जी वत हो उठता है।
नबंध म इसका काम: लेखक ने यह घटना ‘अकेला चना क्या भाड़ फोड़े’ कहावत को झूठा सद्ध करने के लए द
है। एक अकेला, नाम-अनजान युवक भी अपने दे श का गौरव बढ़ा सकता है — यही इस प्रसंग का उ े श्य है, और
यही दे खकर स्वामी जी मुग्ध हुए।
प्र.2 2. जापान के युवक ने स्वामी रामतीथ को दए गए फल के मूल्य के रूप म क्या माँगा? आपके मन म उस युवक
के व्य क्तत्व क कौन-सी छ व उभरती है, यह भी ल खए।
उसने मूल्य के रूप म केवल एक वचन माँगा — “आप अपने दे श म जाकर कसी से यह न क हएगा क जापान म अच्छे फल
नह मलते।” न रुपया, न धन्यवाद, न प रचय — केवल इतना क उसके दे श के बारे म कोई बुरी बात दूसरे दे श तक न पहुँचे।
उसके व्य क्तत्व क छ व —
गुण घटना का वह अंश जससे यह गुण दखता है
पखर रा -पेमी अपने दे श के वषय म कही गई एक टप्पणी भी उसे बेचैन कर दे ती है; वह उसे तुरंत, अपने खच पर, ग़लत सद्ध करता
है।
तत्पर और कमशील “सुनते ही वह अपनी बात बीच म छोड़कर भागा और कह दूर से एक टोकरी ताजे फल लाया।” वह सोचता नह रहा,
दौड़ पड़ा — गाड़ी छू टने से पहले काम पूरा करना था।
िनःस्वाथ और दाम लेने से इनकार — “उसने दाम लेने से इनकार कर दया।” वह दान भी नह दे रहा, सौदा भी नह कर रहा; वह
स्वािभमानी अपने दे श क साख क रक्षा कर रहा है।
अितिथ-स त्कार में “ली जए, आपको ताजे फल क जरूरत थी” — इस वाक्य म कोई अहसान नह , केवल सहज सेवा-भाव है।
िवनम
दू रदश वह जानता है क एक यात्री क एक पं क्त कल कसी और दे श म हजार लोग क राय बन जाएगी। इस लए वह मूल्य
के रूप म वस्तु नह , वचन माँगता है।
Page 8 of 69
Page 10
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
सार म कह तो: वह ऐसा साधारण नाग रक है जसने अपने दे श को अपने से अलग नह माना। उसके लए ‘जापान
m a s emनाग रक और
gl
क बदनामी’ और ‘अपनी बदनामी’ म कोई अंतर नह था — और यही नबंध क कद्र य बात है क
. o नह ह।
cचीज a
em
दे श दो अलग
a s
agl
co m
ag
3. “बात यह है क म और मेरा दे श दो अलग चीज तो ह ही नह ।” स्वयं को दे श से अलग न मानने के पीछे क्या
.
प्र.3
e m
as
तक हो सकते ह, उदाहरण दे कर स्पष्ट क जए।
a g l
स्वयं को दे श से अलग न मानने के पीछे मुख्यतः पाँच तक दए जा सकते ह, और नबंध हर तक के साथ एक उदाहरण भी दे ता है।
co m
e m.
m l as
.co a g
तक उदाहरण / प्रमाण
a s em
glहै। मनुष्य अकेले नह बनता — घर, पड़ोस
1. व्य क्त का नमाण ही समाज से होता “अपने नगर म घूम- फरकर, वहाँ के वशाल समाज का संपक पा, वहाँ के सं चत ज्ञान-
a भंडार का उपयोग कर… एक मनुष्य से भरा-पूरा नगर बनकर म खड़ा हुआ था।” यही
s
और नगर उसे गढ़ते ह। सल सला आगे बढ़े तो नगर के बाद दे श आता है।
m a
2. दे श की िस्थित नागिरक के गौरव को तय .co
emक गुलामी क लज्जा का कलंक मेरे माथे पर लगा रहा।”
लाला लाजपत राय — “म अमे रका गया, इंग्लड गया, ांस गया… पर जहाँ भी म गया,
agl
a s
agl
करती है। दे श हीन हो तो व्यिक्त के सारे साधन भारतवष
बेक ार हो जाते है।ं
com
3. नागिरक का आचरण दे श की छिव तय जापानी युवक ने फल दे कर अपने दे श का सर ऊँचा कया; दूसरे दे श के वद्याथ ने
करता है। यह पहले तक का उलटा रास्ता है .
mदेश का कोई नवासी भीतर
पुस्तकालय क पुस्तक से चत्र नकालकर अपने दे श के मस्तक पर कलंक का ट का
लगाया — और पुस्तकालय के बाहर लख दया गया कeउस
m
— और यही ‘गाँठ’ है।
a s
m . co agl
नह आ सकता।
l a se4. अिधकार और कत य एक ही िस के के दो
ag
व् क् “जैसे म अपने सम्मान और साधन से अपने जीवन म सहारा पाता ँ, वैसे ही दे श के सम्मान
पहलू है।ं िजससे हम सुरक्षा और स म्मान पाते
m
और साधन से भी सहारा पाऊँ, यह मेरा अ धकार है” — और इससे पहले, “म कोई ऐसा
है,ं उसकी रक्षा करना भी हमारा ही काम है।
a se
com
काम न करूँ जससे मेरे दे श क स्वतंत्रता को… धक्का पहुँचे, यह मेरा कतव्य है।”
. एक युद्ध है और युद्ध म लड़ना ही तो काम नह होता” — सै नक, कसान, रसद a g l
e m
जोड़ है। ‘दे श’ का अथ के वल भौगोिलक सीमाlas पहुँचाने वाला और ‘जय बोलने वाला’, सब मलकर ही दे श बनते ह। दशक क ता लय से
5. दे श कोई अलग वस्तु नही,ं नागिरकों का ही “जीवन
नही,ं उसमें रहने वाले लोग है।ं ag “ खला ड़य के पैर म बजली लग जाती है”।
co m
m .
as e
अपने अनुभव से उदाहरण (नमूना): जब कोई भारतीय खलाड़ी ओलं पक म पदक जीतता है, तो पदक उसके
m l
.co a g
गले म पड़ता है पर तरंगा पूरे दे श का उठता है — और हम, जन्ह ने कुछ नह कया, गव अनुभव करते ह। इसके
a s em ठ क उलट, जब कोई यात्री वदे श म नयम तोड़ता है तो अख़बार उसका नाम नह , उसके दे श का नाम छापते ह।
agl यही ‘गाँठ’ रोज़ हमारे आस-पास दखती है।
.c
s e m
com gl a
m . a
नष्कष: व्य क्त और दे श का रश्ता माँ और संतान जैसा नह , अंग और शरीर जैसा है। अंग शरीर से अलग होकर न
a s eपूरा रहता है। इसी लए लेखक कहता है — “म अपने दे श का नाग रक ँ और
मानता ँ क म अपना दे शagँ।l”
जी वत रहता है, न शरीर उसके बना
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 9 of 69
Page 11
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
मेरे अनुभव मेरे वचार — पृष्ठ 129 और 130
अभ्यास › रचना से संवाद › मेरे अनुभव मेरे वचार
रचना से सं वाद अपनी बात
प्र.1 1. “दे श क हीनता और गौरव का ही फल उसे नह मलता, उसक हीनता और गौरव का फल भी उसके दे श को
मलता है”, अपने आस-पास के व भन्न उदाहरण के ारा इस पं क्त का भाव स्पष्ट क जए।
इस पं क्त का भाव है — नाग रक और दे श के बीच लेन-दे न दोन ओर से चलता है। दे श ऊँचा होगा तो नाग रक का सर ऊँचा
रहेगा; और नाग रक अच्छा काम करेगा तो दे श का सर ऊँचा होगा। यह एकतरफ़ा रास्ता नह , आने-जाने वाली सड़क है।
दशा अथ पाठ का उदाहरण हमारे आस-पास का उदाहरण
दे श → दे श क हीनता लाला लाजपत राय — “जहाँ भी म गया, आज भारतीय पासपोट ले क र कोई िवद्याथ िवदे श पढ़ ने
नाग रक या गौरव का फल भारतवष क गुलामी क लज्जा का कलंक जाता है तो उसे भारत की साख का लाभ िमलता है;
नाग रक को मेरे माथे पर लगा रहा।” भारत में बना टीका दुिनया के दजनों दे शों तक पहचु ँ ा,
मलता है। तो हर भारतीय ने उसका गौरव अनुभव िकया — यद्यिप
टीका उसने नही ं बनाया था।
नाग रक नाग रक क जापानी युवक ने फल भट कर दे श का सर कोई िखलाड़ ी ओलंिपक में पदक जीतता है तो पदक
→ दे श हीनता या गौरव ऊँचा कया; दूसरे दे श के वद्याथ ने चत्र उसके गले में और ितरंगा पूरे दे श का ऊपर जाता है।
का फल दे श को चुराकर दे श पर कलंक लगाया — “उस दे श इसके उलट, यिद कोई यात्री िवदे शी हवाई अ े पर
मलता है। का कोई नवासी इस पुस्तकालय म प्रवेश िनयम तोड़ ता है तो अख़बार उसके नाम से पहले उसके
नह कर सकता।” देश का नाम छापते है।ं
अपने मुहल्ले के तीन छोटे उदाहरण, जन्ह आप स्वयं दे ख सकते ह:
1. वद्यालय क छ व — एक कक्षा के दस वद्याथ अंतर- वद्यालय प्र तयो गता म अनुशा सत रहते ह, तो पूरे
वद्यालय क प्रशंसा होती है। एक वद्याथ बस म शोर मचाता है, तो लोग कहते ह — “फलाँ स्कूल के बच्चे ऐसे
ही ह।” यह ‘गाँठ’ का लघु रूप है।
2. गाँव/मुहल्ले का नाम — जस मुहल्ले म लोग कूड़ा नयत स्थान पर डालते ह, वह ‘साफ़ मुहल्ला’ कहलाता है
और वहाँ का हर नवासी उस नाम का लाभ उठाता है — मकान का कराया तक बढ़ जाता है।
3. यातायात — एक व्य क्त के ग़लत दशा म गाड़ी चलाने से पूरे चौराहे का जाम लगता है और सैकड़ लोग दे र से
पहुँचते ह। एक क लापरवाही का दं ड सबको मलता है।
भाव का सार: हम अपने आचरण को ‘ नजी मामला’ मानते ह, जब क वह नजी होता ही नह । हर काम पर दो नाम
लखे जाते ह — करने वाले का और उसके दे श का। इसी लए लेखक कहता है — “म अपना दे श ँ।”
Page 10 of 69
Page 12
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 (क) 2. “मुझे बहुत क अपने लए जरूरत पड़ती थी। म भी बहुत क जरूरत का उनके लए जवाब था।” (क)
प्रातःकाल से लेकर रा त्र तक आप अपने कन- कन काय म कस- कसका क्या सहयोग लेते ह और आप
दूसर को कस तरह का सहयोग दे ते ह? अपने अनुभव ल खए।
यह प्रश्न आपके अपने दन का लेखा-जोखा माँगता है। इसे लखने का सबसे अच्छा तरीका है — एक दन को समय के खंड म
बाँ टए और हर खंड के सामने दो कॉलम बनाइए: मने क्या लया और मने क्या दया। नीचे एक पूरा भरा हुआ नमूना उत्तर है; आप
इसे दे खकर अपने दन का ब्योरा ल खए।
नमूना उत्तर:
समय काय कसका सहयोग लेता ँ म क्या सहयोग दे ता ँ
प्रातः उठना, नल का पानी, जल-बोड के कमचारी, दूधवाले भैया, अख़बार अपना िबस्तर स्वयं समेटता हू,ँ छोटी बहन को
6–7 दूध, अख़बार डालने वाला बालक, माँ जो चाय बनाती ह जगाता हू,ँ दू ध का बतन ढककर रखता हू ँ
7–8 तैयार होना, नाश्ता माँ/ पताजी, बजली वभाग, गैस स लडर नाश्ते के बतन िसंक में रखता हू,ँ िबना जरूरत
पहुँचाने वाला पंखा-बत्ती बंद कर दे ता हू ँ
8– वद्यालय जाना र ा/बस चालक, सड़क पार कराने वाला कतार में चढ़ ता हू,ँ बुजगु को अपनी सीट दे ता हू,ँ
8.30 यातायात- सपाही सड़ क पर कचरा नही ं फे ं कता
8.30– कक्षा, पुस्तकालय, अध्यापक, सहपाठ जनसे नोट् स लेता ँ, कमजोर साथी को गिणत समझाता हू,ँ क क्षा-
2 खेल पुस्तकालयाध्यक्ष, सफ़ाई कमचारी, रसोइया मॉनीटर का काम करता हू,ँ पुस्तक समय पर
लौटाता हू ँ
2–5 घर लौटना, गृहकाय, बड़े भाई से संदेह- नवारण, इंटरनेट/पुस्तकालय, छोटे बच्चों को खेल में शािमल करता हू,ँ मैद ान
खेल मैदान का माली का सामान वापस रखता हू ँ
5–8 बाज़ार, संध्या-भोजन सब्ज़ीवाला, कराना दुकानदार, कसान जसने थैल ा घर से ले जाता हू,ँ दुक ानदार को खुले पैसे
क तैयारी अनाज उगाया दे ता हू,ँ माँ के साथ स ब्ज़ ी काटता हू ँ
8–10 पढ़ाई, प रवार से बजली, स् ट लाइट, रा त्र चौक दार, अस्पताल पानी की टोंटी बंद करता हू,ँ कू ड़ ा अलग-अलग
बातचीत, सोना क आपात सेवा जो जागती रहती है िडब्बों में डालता हू,ँ दादी को दवा दे क र सुल ाता हू ँ
इस ता लका से क्या नकलता है: एक दन म म कम-से-कम बीस-पच्चीस अनजान लोग पर नभर रहता ँ,
जनम से अ धकांश को म पहचानता तक नह — कसान, चालक, सफ़ाईकम , बजलीकम , डा कया। और उतने
ही लोग कसी-न- कसी रूप म मुझ पर नभर ह। यही लेखक का वाक्य है — “मुझे बहुत क अपने लए जरूरत
पड़ती थी। म भी बहुत क जरूरत का उनके लए जवाब था।”
लखने का तरीका: अपनी कॉपी म यही ता लका बनाइए, पर उसम असली नाम ल खए — अपने मुहल्ले के
दूधवाले का नाम, अपने बस चालक का नाम, अपनी सहेली का नाम। जब नाम लखे जाते ह तो यह अभ्यास सूची
नह रहता, कृतज्ञता बन जाता है।
Page 11 of 69
Page 13
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 (ख) (ख) उपयुक्त वाक्य म रेखां कत शब्द ‘बहुत ’ म कौन-कौन स म्म लत ह गे, अनुमान के आधार पर ल खए।
‘बहुत ’ शब्द लेखक ने जान-बूझकर खुला छोड़ा है। इसम वे सब आते ह जनके श्रम पर एक नाग रक का दन टका होता है —
चाहे हम उन्ह जानते ह या न जानते ह । अनुमान के आधार पर उन्ह पाँच घेर म बाँटा जा सकता है।
घेरा कौन-कौन स म्म लत
1. घर का घेरा माता- पता, भाई-बहन, दादा-दाद , घर म सहायता करने वाले लोग।
2. पड़ोस का घेरा पड़ोसी जन्ह ने ‘ममता-दुलार’ दया, मत्र, मुहल्ले के बड़े-बुजग, दूधवाला, अख़बार डालने वाला, सब्ज़ीवाला, दज ,
नाई, मोची, र ा-चालक।
3. वद्यालय का अध्यापक, सहपाठ , पुस्तकालयाध्यक्ष, चपरासी, सफ़ाई कमचारी, मध्याह्न-भोजन बनाने वाले, बस चालक और
घेरा प रचालक।
4. नगर /समाज का कसान और मज़दूर ( जनक ‘रसद’ से दे श चलता है), डॉक्टर-नस, पु लस, अ ग्नशमन कम , बजली-पानी-सफ़ाई
घे रा वभाग के कमचारी, डा कया, दुकानदार, चालक, इंजी नयर, वैज्ञा नक, कलाकार, पत्रकार।
5. दे श और उससे सीमा पर तैनात सै नक, न्यायाधीश, वे सब जन्ह ने ‘सं चत ज्ञान-भंडार’ बनाया — पुराने लेखक, आ वष्कारक,
परे का घे रा स्वतंत्रता सेनानी; और वे अन गनत लोग जन्ह हम कभी नह दे खगे पर जनके काम का लाभ रोज़ उठाते ह।
अनुमान का आधार क्या है: लेखक ने इसी अनुच्छेद म तीन घेरे स्वयं गनाए ह — “मेरा घर, मेरा पड़ोस, मेरा नगर
और म।” और आगे उसने “वहाँ के सं चत ज्ञान-भंडार” तथा “उसक सेवाओं का सहारा” जोड़ा है। ‘सं चत’ का
अथ है — पी ढ़य से जमा कया हुआ। इसका सीधा मतलब है क ‘बहुत ’ म केवल जी वत लोग नह , पहले हो
चुके लोग भी शा मल ह। इसी लए आगे चलकर वह इसी ‘बहुत ’ को ‘दे श’ नाम दे दे ता है।
Try This: कागज़ पर पाँच वृत्त एक-दूसरे के भीतर बनाइए — म, घर, पड़ोस, नगर, दे श। हर वृत्त म पाँच नाम
ल खए। जो चत्र बनेगा, वही इस नबंध का ढाँचा है।
प्र.2 (ग) (ग) रचनाकार को स्वयं के लए दूसरे लोग से कस प्रकार के सहयोग क आवश्यकता पड़ती होगी और वह
दूसर को कस प्रकार का सहयोग दे ता होगा, अनुमान के आधार पर ल खए।
कन्हैयालाल मश्र ‘प्रभाकर’ पेशे से पत्रकार और नबंधकार थे, स्वतंत्रता संग्राम म स क्रय थे और अनेक बार जेल गए। इसी प रचय
के आधार पर अनुमान लगाया जा सकता है क उनका लेन-दे न कस तरह का रहा होगा।
Page 12 of 69
Page 14
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
उन्ह कन- कन का सहयोग चा हए होगा वे दूसर को क्या दे ते ह गे
सूचना दे ने वाले — गाँव-नगर के लोग, आंदोलन के साथी, प्रत्यक्षदश , िवचार और िदशा — अपने पत्रों नया जीवन और िवकास के
जनसे उन्ह समाचार और घटनाएँ मलती थ । (इसी नबंध क सारी घटनाएँ माध्यम से वे पाठकों को घटनाओं का अथ समझाते थे; िनबंध
— जापान क , कमालपाशा क , नेहरू जी और कसान क — कसी-न- िलखकर वे साधारण नागिरक को उसका कतव्य और
कसी से सुनी या पढ़ हुई ह।) अिधकार बताते थे।
पत्र का तंत्र — मुद्रक, कंपो ज़टर, प्रूफ़ पढ़ने वाले, वतरक, हॉकर, कागज़ रोज़ गार और मंच — पत्र चलाकर उ न्होंने अनेक लोगों को
बेचने वाले — इनके बना एक भी अंक नह छपता। काम िदया और नए ले खकों को छपने का अवसर िदया —
संपादक का सबसे बड़ ा सहयोग यही होता है।
पुस्तकालय और पूवज लेखक — महाभारत का शल्य-कण प्रसंग, सािहत्य का भंडार — दीप जले शंख बजे, िजंदगी मुसकराई,
भामाशाह का उल्लेख, प्रेमचंद और चेखव के नाम — ये सब ‘सं चत ज्ञान- माटी हो गई सोना जैसे नौ-दस िनबंध -संगह दे क र उ न्होंने उसी
भंडार’ से आए ह। भंडार में अपना िहस्सा जोड़ िदया।
प रवार और साथी — बार-बार जेल जाने वाले व्य क्त का घर प रवार ही साहस और उदाहरण — जेल -यात्रा स्वीकार कर उ न्होंने
सँभालता है; आंदोलन के साथी संकट म सहारा बनते ह। दू स रों के िलए वह ‘गौरव का दीपक ’ जलाया िजसकी बात
इसी िनबंध में की गई है।
पाठक — लेखक का असली सहारा पाठक ही है। नबंध म वे स्वयं कहते ह आत्मीय संवाद — वे पाठक को ‘आप’ कहकर, उसका पश्न
— “क व-सम्मेलन और मुशायर क सारी सफलता दाद दे ने वाल पर ही सुनकर, उसकी तारीफ़ करके (“वाह, खूब सवाल पूछा है
नभर करती है।” आपने”) िलखते है ं — यानी वे पाठक को बराबरी का साथी
बनाते है,ं श्रोता भर नही ं।
अनुमान लगाते समय क्या ध्यान रख: ‘अनुमान’ का अथ मनगढ़ं त नह है। वह पाठ म दए संकेत (लेखक-
प रचय, नबंध क शैली, उसम आए उदाहरण ) से नकाला गया तकसंगत नष्कष होता है। ऊपर क हर पं क्त
कसी-न- कसी संकेत पर टक है — यही अच्छे अनुमान क पहचान है।
प्र.3 (क) 3. “सुना नह आपने क जीवन एक युद्ध है और युद्ध म लड़ना ही तो काम नह होता।” (क) उपयुक्त वाक्य
के रेखां कत अंश “युद्ध म लड़ना ही तो काम नह होता” के आधार पर ल खए क दे श क प्रग त, वकास
एवं सुरक्षा के प्र त हम सभी के क्या-क्या दा यत्व ह? अपने उत्तर को वस्तार दे ने के लए अपने घर या पास-
पड़ोस के बड़ और अध्यापक से चचा करके ल खए।
लेखक का तक यह है क युद्ध केवल मोच पर नह जीता जाता। “लड़ने वाल को रसद न पहुँचे तो वे कैसे लड़। कसान ही खेती न
उपजाए तो रसद पहुँचाने वाले क्या कर… युद्ध म जय बोलने वाल का भी महत्व है।” यानी हर काम क एक कड़ी है, और कोई कड़ी
छोट नह होती। दे श क प्रग त, वकास और सुरक्षा के लए हमारे दा यत्व भी इसी तरह बँटे हुए ह।
Page 13 of 69
Page 15
ase
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
क्षेत्र हमारा दा यत्व ‘युद्ध’ के रूपक म इसक जगह
m रहना; अफ़वाह न फैलाना और न मानना; आपदा-अभ्यास (mock as e
सुरक्षा
.codrill) म भाग लेना; सै नक और उनके प रवार का सम्मान करना; कसी भी
सतक
g l
‘लड़ ने वाले ’ के पीछे खड़ ा नागिरक -मोच
a
se m सं दग्ध वस्तु क सूचना देना।
g l a
a
अन्न और अन्न व्यथ न करना; पानी और बजली बचाना; स्थानीय वस्तुएँ खरीदकर ‘िकसान’ और ‘रसद ’ की कड़ ी
co m
. ag
संसाधन कसान-कारीगर को सहारा दे ना।
se m
शक्षा और
l a
जानते ह उसे दूसर को सखाना;gनरक्षर पड़ोसी को अक्षर-ज्ञान दे ना।
मन लगाकर पढ़ना — यही वद्याथ का सबसे बड़ा राष्ट्रीय कतव्य है; जो भावी से नापित और वैज्ञािनक तैयार करना
कौशल
a
बोध’ की रक्षा .com
स्वास्थ्य और घर, गली, वद्यालय और सावज नक स्थान साफ़ रखना; ट काकरण; रक्तदान से ना के िलए स्वस्थ जनसंख्या = ‘सौंद य-
em
स्वच्छता (बड़ ारा); पॉ लथीन का त्याग।
omईमानदारी से कर देना, बल लेना; यातायात- नयम मानना; सावज नक a s
नयम m
कर और
e
. c aयुglका खच जुटाने वाली कड़ ी
द्ध
l a s संप त्त क रक्षा करना।
ag मनोबल नराशा न फैलाना; अपने दे श क तुलना म उसे हीन सद्ध करने क आदत ‘जय बोलने वाले ’ — दशकों की तािलयों
a s
com
छोड़ना; अच्छे काम क सावज नक प्रशंसा करना। से “िखलािड़ यों के पैरों में िबजली लग
. agl
जाती है”
e m
g l asवष पर), सोच-समझकर मत देना, नार ‘से नापित’ चुनने का काम
के बहाव म न आना। a
लोकतंत्र मतदाता-सूची म नाम जुड़वाना (18
co m
m .
as e
बड़ और अध्यापक से चचा म क्या पूछ (और उत्तर म क्या जोड़):
m l
.co
m प्रायः मलता है — कुआँ-तालाब क सफ़ाई, श्रमदान, चौपाल पर ववाद सुलझाना।) a g
दादा/दाद से — “आपके समय म गाँव के लोग मलकर कौन-सा काम करते थे जो अब नह होता?” (उत्तर
l a se
ag पताजी/माताजी से — “आप अपने काम से दे श क प्रग त म क्या जोड़ते ह?” — हर काम क एक राष्ट्रीय
se m
m a
भू मका नकल आती है।
.c o a g l
m
अध्यापक से — “ वद्याथ का सबसे बड़ा राष्ट्रीय कतव्य क्या है ? ” — प्रायः उत्तर होता है , समय का सम्मान और
ईमानदारी।
l a se
g
इन तीन उत्तर को अपनी कॉपी aम ज्य -का-त्य उद्धत कर द जए — इससे आपका उत्तर पुस्तक से नकला हुआ
co m
नह , जीवन से नकला हुआ लगेगा, और अभ्यास यही चाहता है।
m .
m ase
.co a g l
a s emप्र.3 (ख)
gl
(ख) अपने पास-पड़ोस म वचरने वाले पशु-प क्षय क जीवनचया का अवलोकन क जए और अपने
a c
.
अवलोकन के आधार पर ल खए क आप उनके संघष को कस रूप म दे खते ह? (संकेत— आप अपनी
पाठ्यपुस्तक म द गई कहानी ‘दो बैल क कथा’ के मुख्य पात्र के अनुभव को भी आधार बना सकते ह।)
s e m
m a
m . co agl
l a se
यह प्रश्न पहले अवलोकन माँगता हैg, फर व्याख्या। इस लए उत्तर दो हस्स म ल खए — पहले ‘मने क्या दे खा’, फर ‘मुझे उसम
a
क्या दखा’।
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 14 of 69
Page 16
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
पहला हस्सा — अवलोकन (नमूना उत्तर):
प्राणी जीवनचया जो मने दे खी संघष जो उसम दखा
गली का सुबह कूड़ेदान के पास, दोपहर छाया म, शाम को अपने भोजन और सुरिक्षत जगह के िलए रोज़ की लड़ ाई; दू स रे
कुत्ता ‘इलाक़े’ क सीमा पर भ कता हुआ। बरसात म सी ढ़य के कु त्तों से क्षेत्र की रक्षा; मनुष्य की मार और गािड़ यों का भय।
नीचे दुबका।
गौरैया सुबह-शाम झुंड म; तनके, रुई और धागे ढोकर रोशनदान घर िसकु ड़ रहे है ं — रोशनदान बंद , पेड़ कम। घोंस ला
म घ सला बनाती है; चूज के लए दन म बी सय बार बनाने की जगह ढू ँढ़ना ही उसका सबसे बड़ ा संघ ष है। गम
आती-जाती है। में पानी की खोज।
बैल/भस भोर म हाँके जाना, दन-भर जुताई या गाड़ी, दोपहर म नाँद पिरश्रम पर उसका अपना वश नही;ं भोजन दू स रे की मज़
पर, रात को थान पर जुगाली। पर; काम बंद होते ही उसका ‘मूल्य’ िगर जाता है।
गाय/बछड़ा चौराहे पर खड़ी, पॉ लथीन म लपटा जूठन खाती हुई। भोजन तो िमलता है, पर वह उसे बीमार करता है — यह
सड़क पर आधुिनक शहर का नया पशु-संघ ष है।
च टयाँ पं क्त बनाकर अपने से कई गुना बड़ा दाना ढोती हुईं; अके ली ची ंटी दाना नही ं ढो सकती — संगठन ही उनकी
बरसात से पहले अंडे ऊपर ले जाती हुईं। शिक्त है। यही ‘अके ला चना क्या भाड़ फोड़ े’ का उ त्तर भी
है।
दूसरा हस्सा — म इन संघष को कस रूप म दे खता ँ:
मुझे इन सबका संघष जीवन के उसी युद्ध का एक और मोचा लगता है जसक बात इस नबंध म क गई है। तीन
बात साफ़ दखती ह —
संघष अकेले नह जीता जाता। च टयाँ पं क्त म, गौरैया झुंड म, कुत्ते समूह म — और ‘दो बैल क कथा’ म
हीरा-मोती संग ठत होकर ही साँड़ को हरा पाते ह — “साँड़ को भी संग ठत शत्रुओं से लड़ने का तजुरबा न था।”
पशु भी अपमान समझते ह, केवल भूख नह । गया के यहाँ हीरा-मोती को नाँद तो मली थी, फर भी “एक ने
भी उसम मुँह न डाला” — क्य क उन्ह बेचे जाने का अपमान खल रहा था। मने भी दे खा है क पीटा हुआ कुत्ता
दोबारा उस दरवाज़े पर नह जाता, चाहे वहाँ रोट ही क्य न रखी हो।
इनका बहुत-सा संघष हमारा बनाया हुआ है। कटे पेड़, बंद रोशनदान, सड़क पर फक पॉ लथीन, तेज़ गा ड़याँ
— ये प्राकृ तक क ठनाइयाँ नह , मनुष्य क दे न ह। इस लए इन्ह कम करना भी हमारा ही दा यत्व है।
Check it yourself: एक सप्ताह तक रोज़ पाँच मनट कसी एक प्राणी को दे खए और तीन पं क्तयाँ ल खए
— उसने क्या खाया, कहाँ रहा, कससे बचा। सात दन बाद आपके पास सचमुच का अवलोकन होगा, अनुमान नह
— और यही इस प्रश्न का असली उत्तर है।
Page 15 of 69
Page 17
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 (ग) (ग) इस नबंध म जीवन को युद्ध क्य कहा गया है? आप अपने घर के बड़ से इस वषय पर चचा करके उनके
और अपने वचार ल खए।
नबंध म जीवन को ‘युद्ध’ इस लए कहा गया है क्य क लेखक को यह सद्ध करना है क दे श के लए हर व्य क्त कुछ-न-
कुछ कर सकता है। पाठक ने आप त्त क थी — “अजी, भला एक आदमी अपने इतने बड़े दे श के लए कर ही क्या सकता है!…
जो बेचारा अपनी ही दाल-रोट क फक्र म लगा हुआ हो, वह क्या कर सकता है?” इसी का उत्तर दे ने के लए लेखक युद्ध का रूपक
उठाता है।
जीवन = युद्ध
युद्ध में लड़ ने वाला → सैिनक
लड़ ने वाले को अन्न पहुँच ाने वाला → रसद पहुँच ाने वाला
अन्न उपजाने वाला → िकसान
और हौसला बढ़ ाने वाला → ‘जय बोलने वाला’
∴ हर कड़ ी के िबना युद्ध रुक जाता है ⇒ हर नागिरक की भूिमका है
‘युद्ध’ रूपक के तीन अथ:
1. जीवन म नरंतर संघष है — रोट , शक्षा, सम्मान, अ धकार — कुछ भी बना लड़े नह मलता। लेखक स्वयं
जेल गए थे, इस लए यह उनका भोगा हुआ सत्य है।
2. युद्ध म काम बँटे होते ह — यही रूपक का असली प्रयोजन है। “युद्ध म लड़ना ही तो काम नह होता।” जो
व्य क्त स्वयं को छोटा समझकर हाथ पर हाथ रखे बैठा है, उसे यह याद दलाना है क उसका भी एक मोचा है।
3. युद्ध मनोबल से जीते जाते ह — इसी लए ‘जय बोलने वाले’ क चचा है, और आगे शल्य का उदाहरण है,
जसने कण के “सघन आत्म वश्वास म संदेह क तरेड़ डाल द ”। मनोबल तोड़ने वाला भी युद्ध का एक पात्र है
— नकारात्मक पात्र।
घर के बड़ से चचा — नमूना:
कससे पूछा उनका वचार
दादाजी (सेवा नवृत्त “जीवन युद्ध है, पर इसम शत्रु बाहर नह होता। आलस्य, डर और लालच — यही तीन शत्रु ह। जो इन तीन से रोज़
शक्षक) लड़ता है, वही जीतता है।”
माताजी “घर चलाना भी युद्ध है। इसम कोई पदक नह मलता, पर एक दन क चूक से पूरा घर लड़खड़ा जाता है। इस लए
घर के काम को छोटा मत समझो।”
पड़ोस के कसान चाचा “खेत म हर साल नया युद्ध है — कभी पानी नह , कभी ज़्यादा पानी। पर अन्न न उगे तो सपाही भी क्या करेगा?
इसी लए कसान भी सपाही ही है।”
Page 16 of 69
Page 18
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
मेरा अपना वचार: मुझे यह रूपक इस लए अच्छा लगा क यह कसी को दशक बनकर बैठने क छू ट नह दे ता।
य द जीवन युद्ध है तो तटस्थ कोई नह रह सकता — जो लड़ नह रहा, वह या तो रसद पहुँचा रहा है या शत्रु का
काम आसान कर रहा है। पर एक बात म जोड़ना चा ँगा — युद्ध म शत्रु मनुष्य होता है, जब क जीवन म शत्रु
प र स्थ त और अपनी ही कमज़ोरी होती है। इसी लए यह ऐसा युद्ध है जसम जीत सबक एक साथ हो सकती है।
प्र.3 (घ) (घ) दे श क भौगो लक सीमाओं क रक्षा सै नक करते ह। इसी तरह हमारे आस-पास हमारे जीवन को बेहतर
बनाने के लए अनेक लोग कायरत ह। ये कौन-कौन लोग ह और उनके लए आप क्या-क्या कर सकते ह?
ये वे लोग ह जन्ह लेखक ने ‘रसद पहुँचाने वाले’ और ‘जय बोलने वाले’ कहा है — बना जनके कोई नगर एक दन भी नह चल
सकता, और जनका नाम प्रायः कह नह छपता।
कौन वे क्या करते ह म उनके लए क्या कर सकता/सकती ँ
सफ़ाई कमचारी भोर म, हमारे उठने से पहले, कू ड़ ा सड़ क पर न फे ं कूँ ; गीला-सूखा कचरा अलग क रूँ ; उ न्हे ं नाम से
गली और ना लयाँ साफ़ करते बुल ाऊँ और धन्यवाद कहू;ँ त्योहार पर िवद्यालय की ओर से स म्मान
ह। करवाऊँ ।
कसान और मज़दूर अन्न उपजाते और भवन-सड़क थाली में अ न छोड़ ू ँ; स्थानीय उपज खरीदने में पिरवार को पेिरत क रूँ ;
न्न
बनाते ह। मज़ दू रों के बच्चों को पढ़ ने में सहायता क रूँ ।
डॉक्टर, नस, आशा और ट काकरण, प्रसव, महामारी — अस्पताल में शोर न क रूँ , कतार तोड़ ू ँ नही;ं टीकाकरण की सूचना पड़ ोस में
आँगनवाड़ी कायकता सबसे आगे रहते ह। फै लाऊँ ; स्वयं स्वच्छता के िनयम मानूँ तािक उनका बोझ घटे।
पु लस, अ ग्नशमन और अपराध, आग और आपदा म यातायात-िनयम मानू;ँ झूठी सूचना न दू ँ; आपात नंबर (112, 101, 108)
आपदा- मत्र जान जो खम म डालते ह। याद रखूँ और दू स रों को बताऊँ ।
शक्षक अगली पीढ़ गढ़ते ह — समय पर क क्षा में पहचु ँ ूँ, गृहकाय पूरा क रूँ , क क्षा को अनुशािसत रखने में
“सं चत ज्ञान-भंडार” आगे सहायता क रूँ — िशक्षक को इससे बड़ ा उपहार नही ं िमलता।
पहुँचाते ह।
बजली, जल-बोड और पानी, बजली, च और अब पानी-िबजली की बब दी रोकूँ ; िबल समय पर भरने की याद िदलाऊँ ;
डाक-कम कू रयर — रोज़ क जीवन- डािकये को गम में पानी पूछूँ।
रेखा।
चालक-प रचालक, हम वद्यालय, अस्पताल और कतार से चढ़ ू ँ, सीट का दुरुपयोग न क रूँ , गाड़ ी में कचरा न छोड़ ू ँ, िकराया
र ा और ऑटो चालक काम तक पहुँचाते ह। ठीक -ठीक दू ँ।
सै नक और उनके सीमाओं क रक्षा। शहीदों के पिरवारों के िलए िवद्यालय में कृ तज्ञता-पत्र िलखूँ; ‘वीरगाथा’
प रवार जैस ी पुस्तकें पढ़ कर क क्षा में सुनाऊँ — जैसे इसी पुस्तक में िनमल जीत
िसंह सेखों की गाथा दी गई है।
Page 17 of 69
Page 19
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
ध्यान दे ने क बात: इस सूची म ‘म क्या कर सकता ँ’ वाला खाना सबसे महत्वपूण है। उसम लखी हर बात छोट
है — कूड़ा सही जगह डालना, कतार म लगना, धन्यवाद कहना। पर नबंध का सूत्र यही है — “महत्व कसी काय
क वशालता म नह है, उस काय के करने क भावना म है।” बूढ़े कसान क पाव-भर शहद वाली हँ डया भी तो
छोट ही थी।
प्र.4 (क) 4. “अपने पड़ोस म खेलकर, पड़ो सय क ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।” (क) उपयुक्त पं क्त के आधार
पर ल खए क पास-पड़ोस के लोग म कस तरह के पारस्प रक संबंध रहे ह गे?
इस एक पं क्त से पड़ोस क पूरी तस्वीर खुल जाती है। ध्यान द जए क लेखक ने ‘पड़ो सय का सहयोग’ नह कहा — उसने
‘ममता-दुलार’ कहा है। ये दोन शब्द माता- पता और बड़े-बुजुग के लए प्रयोग होते ह। इसका अथ है क उस समय पड़ोस बड़े
प रवार का वस्तार था।
संबंध क पं क्त म उसका संकेत व्यवहार म वह कैसा दखता होगा
वशेषता
आत्मीयता और ‘ममता-दुलार’ — यह सेवा नह , स्नेह का शब्द है। पड़ोस का बच्चा भी ‘अपना बच्चा’ माना जाता; उसे डाँटने
अपनापन और दुलारने — दोन का अ धकार सबको था।
खुले ार ‘अपने पड़ोस म खेलकर’ — बच्चा घर क चारद वारी दरवाज़े दन-भर खुले रहते; बच्चे कसी भी आँगन म खेल
म नह , गली म बड़ा हुआ। सकते, कसी के भी घर पानी पी सकते थे।
सामूिहक ‘बड़ा हुआ था’ — यानी पालन-पोषण म पड़ोस क भी माता- पता के बाहर होने पर बच्चा पड़ोस म रह जाता;
िजम्मेद ारी भू मका थी। बीमारी, ववाह और मृत्यु — हर अवसर पर पूरा मुहल्ला
साथ खड़ा होता।
परस्पर िनभरता आगे क पं क्त — “मुझे बहुत क अपने लए जरूरत नमक-चीनी से लेकर सलाह तक का लेन-दे न; कोई हसाब
पड़ती थी। म भी बहुत क जरूरत का उनके लए नह रखा जाता था।
जवाब था।”
पारस्पिरक स म्मान “म अपने नगर के लोग का सम्मान करता था, वे भी बड़ को चाचा-ताऊ, बुआ-मौसी कहकर पुकारना; उम्र और
मेरा सम्मान करते थे।” काम — दोन का आदर।
नबंध म इसका महत्व: यह पं क्त केवल याद का चत्र नह है। लेखक इसी सीढ़ से आगे बढ़ता है — घर →
पड़ोस → नगर → दे श। जसने पड़ोस म ‘मेरा-तेरा’ मटाना सीख लया, उसी को यह बात समझ आएगी क “म
और मेरा दे श दो अलग चीज तो ह ही नह ।” दे श-प्रेम क पहली पाठशाला पड़ोस ही है।
पाठ क एक छोट -सी बात: पुस्तक म पाठ के भीतर यह वाक्य “पड़ो सय का ममता-दुलार पा” छपा है (पृष्ठ
121), जब क अभ्यास म इसे “पड़ो सय क ममता-दुलार पा” उद्धत कया गया है (पृष्ठ 130 और 135)। भाव
दोन म एक ही है; उत्तर लखते समय अभ्यास वाला ही रूप ल खए।
Page 18 of 69
Page 20
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
(ख) वतमान समय म ऐसे संबंध म कस तरह के प रवतन आए ह और इनके क्या कारण हो सकते ह?
e
प्र.4 (ख)
m l as
.co
ल खए।
a g
se m
g l a
a
आज पड़ोस बचा है, पर पड़ोसीपन घट गया है। मकान पास-पास ह, मन दूर-दूर।
. om
cअब ag
e m
पहले
g l as
a
दरवाज़े खुले रहते थे; बच्चे कसी भी घर म खेल लेते थे। दरवाज़ े बंद , कै मरे और इंटरकॉम; बच्चे के वल अपने फ़् लै ट में या मोबाइल
पर खेल ते है।ं
co m
m.
पड़ोसी का बच्चा भी ‘अपना’ था — डाँटने और दुलारने का ‘आप अपने बच्चे को दे िखए ’ — िनजता की सीमा-रे खा िखंच गई है।
m
अ धकार सबको था।
as e
. c o a g l
s e mम पूरा मुहल्ला उप स्थत। बधाई और शोक — दोनों संदे श मोबाइल पर; उपिस्थित की जगह सूचना ने
la
सुख-दुःख
ag
ले ली।
s
ज़रूरत क चीज़ पड़ोस से माँग ली जाती थ । दस िमनट में सब कु छ ऐप से घर आ जाता है — इसिलए माँगने का बहाना
mही समाप्त हो गया। a
m.co agl
l a se
g
शाम को चौपाल या चबूतरे पर बैठक। शाम टीवी और मोबाइल की स् ीन पर; ‘चौपाल ’ अब ऑनलाइन समूह बन
a
क्र
गया है।
co m
.
कारण —
se m
o m l a
m
c
.शहरीकरण ag है, इस लए न कोई जड़ जमती
se
और स्थानांतरण — नौकरी के लए बार-बार शहर बदलना पड़ता
g l a
a
है, न संबंध।
m
बहुमं ज़ला आवास — फ़्लैट म लफ़्ट है, आँगन नह । जहाँ साझा आँगन नह होता, वहाँ साझा जीवन भी नह
a se
com l
बनता।
. a g
m
ase
एकल प रवार और समय क कमी — माता- पता दोन कामकाजी; लौटने पर इतना समय ही नह बचता क
agl
पड़ोस म बैठा जाए।
तकनीक — मनोरंजन, बातचीत, खरीदारी — सब स्क्र न पर उपलब्ध। इससे सु वधा बढ़ , पर आमने-सामने क
co m
भट घट ।
m .
e
असुरक्षा और अ वश्वास — अपराध क खबर बढ़ने से अजनबी पर भरोसा घटा है; बच्च को ‘ कसी के घर मत
c o m g l as
.
जाना’ सखाया जाता है।
em a
s
प्र तस्पधा और दखावा — पड़ोसी अब साथी नह , तुलना का पैमाना बन गया है — कसक गाड़ी बड़ी,
l a
ag
कसके बच्चे के अंक अ धक।
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 19 of 69
Page 21
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
क्या कया जा सकता है (कुछ करने योग्य सुझाव): मुहल्ले क सफ़ाई या वृक्षारोपण का साझा कायक्रम; एक
साझा पुस्तक-अलमारी जसम सब पुस्तक रख और ल; त्योहार सामू हक रूप से मनाना; बुजग पड़ो सय से सप्ताह
म एक बार मलने जाना; और सबसे सरल — अपने पाँच पड़ो सय के नाम याद रखना। संबंध नाम से ही शुरू
होते ह।
प्र.5 5. “क्या सुरु च और स दय को आपके कसी काम से ठे स लगती है?” अपने घर/ वद्यालय के आस-पास,
सावज नक संसाधन और ऐ तहा सक महत्व के स्थान क स्वच्छता एवं स दय को बनाए रखने के लए आप और
आपके सहपाठ , संबंधी क्या-क्या करते ह?
लेखक ने इसे ‘स दय-बोध’ कहा है और चेतावनी द है — “य द आपका उत्तर हाँ है, तो आपके ारा दे श के स दय-बोध को
भयंकर आघात लग रहा है और आपके ारा दे श क संस्कृ त को गहरी चोट पहुँच रही है।” इस लए यह उत्तर केवल सूची नह , अपने
आचरण क जाँच है।
स्थान हम क्या करते ह क्या नह करते (और क्य )
घर और गली गीला-सूखा कचरा अलग-अलग िडब्बों में डालते है;ं घर घर का कूड़ा बाहर नह फकते — क्य क गली भी
का कू ड़ ा गली में नही,ं कू ड़ ा-गाड़ ी में दे ते है;ं त्योहारों के कसी का घर है।
बाद अपनी गली स्वयं साफ़ करते है;ं दरवाज़ े के सामने
एक गमला रखते है।ं
वद्यालय क क्षा में कागज़ के टुक ड़ े नही ं छोड़ ते; ‘बाल संस द ’/ बच और शौचालय क द वार पर कुछ नह लखते —
स्वच्छता-सिमित में बारी-बारी ड ूटी करते है;ं दीवार - यह वद्यालय क , यानी अपनी ही, संप त्त है।
पित्रका बनाते है;ं पानी की टोंटी बंद करते है;ं मध्याह्न -
भोजन के बाद अपना स्थान साफ़ करते है।ं
सावज नक कतार में लगते है;ं बस -रे ल में कचरा साथ ले क र उतरते ज़ीन -कोन म थूकते नह , न मेल -रेल म ‘ठे लमठे ल’
संसाधन (बस, रेल, है ं और िडब्बे में डालते है;ं पाक की बेचं और झूले ठीक - करते ह — नबंध म इन्ह दोन का नाम लया गया है।
पाक, अस्पताल) ठाक रखते है;ं सावजिनक नल बंद करते है।ं
ऐ तहा सक स्थान भमण से पहले िनयम पढ़ ते है;ं कचरा थैले में वापस लाते द वार पर अपना या कसी का नाम नह लखते —
है;ं िनद श-पि काओं का पालन करते है;ं ‘हेिरटेज वॉक ’ में पुस्तक ने संकेत म यही उदाहरण दया है। जो पत्थर
सहपािठयों को स्मारक की कहानी सुनाते है।ं सात सौ वष से खड़ा है, उस पर एक दन का नाम
लखना उसका अपमान है।
प्रकृ त पॉिलथीन की जगह कपड़ े का थैल ा; जन्मिदन पर एक पटाख और लाउडस्पीकर से ध्व न-प्रदूषण नह फैलाते
पौधा; नदी-तालाब में मूित-िवसजन के िनयमों का पालन; — शोर भी स दय-बोध पर चोट है।
पिक्षयों के िलए गम में पानी का सकोरा।
इन काम का दे श से क्या संबंध: लेखक कहता है क ये ‘छोट -छोट बात’ ही दे श क संस्कृ त बनाती ह। वदे शी
पयटक हमारे सं वधान क पं क्तयाँ पढ़कर नह , हमारी सड़क और स्मारक को दे खकर हमारी संस्कृ त क राय
बनाता है। इसी लए एक केले का छलका भी ‘ नजी मामला’ नह रह जाता।
Page 20 of 69
Page 22
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
Try This — तीन-सप्ताह क चुनौती: कक्षा म एक चाट लगाइए जसम तीन कॉलम ह — मने आज क्या साफ़
कया / मने आज क्या गंदा नह कया / मने आज कसे रोका। तीसरा कॉलम सबसे क ठन है और सबसे ज़रूरी भी।
प्र.6 6. “म कोई ऐसा काम न करूँ जससे मेरे दे श क स्वतंत्रता को, दूसरे शब्द म, उसके सम्मान को धक्का पहुँचे।”
दे श के सम्मान को धक्का न पहुँचे, इसके लए क्या कर और क्या नह कर? अपने-अपने समूह म इसक चचा
क जए और चचा से उभरे बदुओं को प्रातःकालीन सभा म पढ़कर सुनाइए।
यह समूह-काय है, इस लए उत्तर दो सू चय के रूप म बनाइए — ‘कर’ और ‘न कर’। नीचे एक पूरी तैयार सूची और प्रातःकालीन
सभा म पढ़ने योग्य नमूना भाषण दया गया है।
क्षेत्र क्या कर क्या न कर
वाणी अपने दे श की किमयों पर बात करते समय समाधान रेल , बस , क्लब और चौपाल पर अपने दे श को दूसरे दे श से
भी बताएँ; अच्छे कामों की चच उतने ही उ त्साह से हीन सद्ध करने क आदत न पाल — यही ‘श क्त-बोध’ पर
करे ं। चोट है।
आचरण कतार में लगें; समय का पालन करे ं; सावजिनक केले का छलका सड़क पर, घर का कूड़ा बाहर, ज़ीन -कोन म
संपित्त की रक्षा करे ं; कही ं भी हों, िनयम पढ़ कर माने।ं पीक — कुछ भी नह । स्मारक पर नाम न लख।
ईमानदारी परीक्षा में स्वयं िलखें; पुस्तकालय की पुस्तक समय नकल, चोरी और झूठ — जापान वाले वद्याथ का उदाहरण
पर, पूरी लौटाएँ; अपना काम अपने बल पर करे ं। याद रख, जसक एक चोरी से पूरे दे श पर बोड लग गया।
अंतरजाल तथ् य जाँचकर ही कु छ साझा करे ं; अच्छी भाषा िलखें; अफ़वाह और घृणा-भाषा न फैलाएँ; कसी भाषा, प्रदे श या
(इंटरनेट) अपने दे श की उपलिब्धयाँ साझा करे ं। समुदाय का मज़ाक न उड़ाएँ — यह भीतर से दे श को कमज़ोर
करता है।
प्रतीक और रा गान के समय सावधान खड़ े हों; ध्वज-संिहता तरंगे के कागज़-प्ला स्टक झंडे 15 अगस्त के बाद सड़क पर न
संस्कृ त जाने;ं अपनी भाषा और लोक -कला का स म्मान करे ं। छोड़ — यह सबसे आम और सबसे दुखद अनादर है।
नाग रकता 18 वष के होते ही मतदाता-सूची में नाम जुड़वाएँ; कर “मेरे एक मत से क्या होगा” — यह वाक्य न कह। लेखक इसी
ईमानदारी से भरे ं; िबल ले ं और दे ं। सोच को ‘जीवनशास्त्र का घोर अज्ञान’ कहता है।
Page 21 of 69
Page 23
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर — प्रातःकालीन सभा के लए (लगभग एक मनट):
“आदरणीय प्रधानाचाय महोदय, अध्यापकगण और मेरे प्यारे सा थयो! आज हमारे समूह ने एक प्रश्न पर वचार कया
— दे श के सम्मान को धक्का न पहुँचे, इसके लए हम क्या कर? हम उत्तर अपनी पाठ्यपुस्तक गंगा के नबंध ‘म
और मेरा दे श’ म मला। लेखक कन्हैयालाल मश्र ‘प्रभाकर’ कहते ह — ‘म और मेरा दे श दो अलग चीज तो ह ही
नह ।’
जापान के एक साधारण युवक ने केवल फल क एक टोकरी दे कर अपने दे श का सर ऊँचा कर दया, और एक
वद्याथ ने पुस्तकालय क पुस्तक से चत्र नकालकर अपने पूरे दे श पर प्र तबंध लगवा दया। दोन ने ‘छोटा’ काम
कया था — पर दे श का नाम दोन के साथ जुड़ गया।
इस लए हमारे समूह ने तय कया है क हम तीन काम करगे — पहला, कक्षा और गली म कचरा नयत स्थान पर ही
डालगे; दूसरा, परीक्षा म नकल नह करगे; और तीसरा, कह भी अपने दे श को हीन बताने वाली बात बना जाँचे न
कहगे, न आगे बढ़ाएँगे।
हमारा वश्वास है क जस दन हर वद्याथ ये तीन छोट बात मान लेगा, उस दन कोई बड़ी घोषणा कए बना ही
हमारे दे श का सम्मान बढ़ जाएगा। धन्यवाद!”
समूह-चचा कैसे चलाएँ: पहले हर सदस्य दो मनट म तीन बदु लखे — बोलने से पहले लखना ज़रूरी है, वरना
केवल मुखर लोग बोलते रह जाते ह। फर सारे बदु बोड पर लखकर उन्ह ‘कर/न कर’ म छाँ टए। अंत म मत लेकर
पाँच सबसे ज़रूरी बदु चु नए — यही सभा म पढ़े जाएँगे। इससे चचा भाषण नह , नणय बनती है।
मेरे प्रश्न — पृष्ठ 131
अभ्यास › रचना से संवाद › मेरे प्रश्न
रचना से सं वाद प्रश्न- नमाण
प्र.1 “ऐसे प्रश्न का उत्तर दे ने म एक अपूव आनंद आता है” — नबंध के उपयुक्त संदभ से आपके लए दो प्रश्न बनाए
गए ह— (क) रचनाकार को कस तरह के प्रश्न का उत्तर दे ने म आनंद आता है?
रचनाकार को उन प्रश्न का उत्तर दे ने म आनंद आता है जो दो शत पूरी करते ह — जो बात को आगे बढ़ाएँ और जो ठ क समय पर
पूछे जाएँ।
वह स्वयं यह कारण गनाता है — “बड़े महत्व का प्रश्न है। इस अथ म भी क यह बात को खलने का, आगे बढ़ने का अवसर
दे ता है और इस अथ म भी क ठ क समय पर पूछा गया है। ऐसे प्रश्न का उत्तर दे ने म एक अपूव आनंद आता है…”
Page 22 of 69
Page 24
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
प्रश्न का उसका अथ नबंध का उदाहरण
गुण
बात को ऐसा प्रश्न जो वषय को समेटे “क्या कोई भूकंप आया था, जससे द वार म दरार पड़ गई?” — इसी प्रश्न से लाला
खलाने नह , खोल दे — जससे नई लाजपत राय का पूरा प्रसंग खुलता है।
वाला बात नकल आए।
ठ क समय ऐसा प्रश्न जो प्रसंग के ठ क “मानस म भूकंप उठा था?” — यह प्रश्न ठ क उसी क्षण आता है जब लेखक ने ‘मान सक
पर पूछा उसी मोड़ पर आए जहाँ भूकंप’ कहा है।
गया पाठक क जज्ञासा जगी हो।
जो नई जसका उत्तर हाँ/ना म न “हम यह कैसे जान सकते ह क हमारा काम दे श के अनुकूल है या नह ?” — इस पर
दशा खोले दया जा सके। लेखक कहता है, “वाह, खूब सवाल पूछा है आपने… इसके उत्तर म सफ हाँ या ना से
काम न चलेगा, मुझे थोड़ा ववरण दे ना पड़ेगा।” और यह से ‘श क्त-बोध’ तथा ‘स दय-
बोध’ क चचा जन्म लेती है।
क्य : पूरा नबंध प्रश्नोत्तर शैली म है। य द प्रश्न अच्छे न होते तो नबंध आगे ही न बढ़ता। इस लए लेखक के लए प्रश्न
बाधा नह , सीढ़ है — और सीढ़ चढ़ाने वाले प्रश्न का उत्तर दे ने म ही आनंद आता है।
प्र.2 (ख) आपको कस तरह के प्रश्न को बूझना रोचक लगता है?
यह प्रश्न आपक अपनी रु च पूछता है, इस लए उत्तर पहले पुरुष म और उदाहरण स हत ल खए। नीचे एक पूरा नमूना उत्तर दया
गया है — आप इसम अपने पसंद के वषय और अपने अनुभव रखकर लख सकते ह।
नमूना उत्तर:
मुझे उन प्रश्न को बूझना सबसे रोचक लगता है जनका उत्तर पुस्तक म सीधे न मले, ब ल्क सोचकर नकालना पड़े।
मुख्यतः चार तरह के प्रश्न मुझे ख चते ह —
‘क्य ’ वाले प्रश्न। जैसे — हीरा-मोती को गया के यहाँ चारा तो मला था, फर उन्ह ने नाँद म मुँह क्य नह
डाला? ऐसे प्रश्न का उत्तर घटना म नह , पात्र के मन म होता है — और वही खोजना मज़ेदार है।
‘क्या होता, अगर…’ वाले प्रश्न। जैसे — य द उस जापानी युवक ने फल के दाम ले लए होते, तो क्या स्वामी
रामतीथ यह घटना जीवन-भर याद रखते? इससे समझ आता है क कसी काम को यादगार उसक भावना
बनाती है।
पहे लयाँ और ग णत के तक-प्रश्न। इनम उत्तर तक पहुँचने का रास्ता खुद बनाना पड़ता है, और एक ही उत्तर
पर दो रास्ते मल जाएँ तो और आनंद आता है।
वे प्रश्न जनके एक से अ धक उत्तर हो सकते ह। जैसे — ‘दे श’ कसे कह? भू म को, लोग को, या भाषा-
संस्कृ त को? ऐसे प्रश्न म कक्षा दो हस्स म बँट जाती है और बहस म हर पक्ष अपने तक खोजता है।
मुझे वे प्रश्न रोचक नह लगते जनका उत्तर केवल याद करके लखना हो — जैसे कोई त थ या नाम। ऐसे प्रश्न
जानकारी तो जाँचते ह, पर सोचने का अवसर नह दे ते।
Page 23 of 69
Page 25
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श
a g l AglaSem · NCERT Solutions
m
.co
लखते समय ध्यान रख: केवल ‘मुझे क ठन प्रश्न अच्छे लगते ह’ लख दे ना अधूरा उत्तर है। हर प्रकार के साथ एक
उदाहरण द जए — तभी उत्तर आपका अपना लगेगा, और अभ्यास का शीषक ही ‘मेरे प्रश्न’ है। em
c o m g l as
m . a
as e
a g l
प्र.3 अब इस नबंध के आलोक म नीचे द गई साम ी को पढ़कर तीन प्रश्न बनाइए और ल खए। — “यह सोचना
co m
ag
एकदम नराधार है क केवल संपन्न व्य क्त ही दे श क प्रग त और वकास म योगदान दे सकते ह। दे श क सुरक्षा
m .
se
का वषय हो अथवा ऐश्वय व संपन्नता का, सभी नाग रक का अपनी ही तरह से योगदान होता है। हम सब
l a
g नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।”
नाग रक अपने दे श का प्र त न धत्व करते ह। हम य द कुछ भी गलत करते ह तो उससे अपनी छ व ही धू मल नह
होती अ पतु अपने दे श क छ व परaभी
co m
se m.
o m l a
c नाग रक क गलती देश क छ व पर पड़ती है। सबसे अच्छे प्रश्न वही बनते हaजोgहर वचार पर एक-एक टके ह ।
पहले यह समझ ली जए क इस अनुच्छेद म तीन वचार ह — (1) योगदान के लए संपन्नता जरूरी नह , (2) हर नाग रक दे श का
प्र त न ध है, .(3)
m
sप्रश्नe (उत्तर स हत) —
g l a
a
तीन
m a s
.co agl
प्रश्न कस संभा वत उत्तर
m
वचार से
l a se
बना
a g
पश्न 1 — ‘दे श की पगित में के वल संप व्यिक्त
न्न पहला क्य क योगदान धन से नह , भावना और कतव्य-बोध से होता है।
om
ही योगदान दे सकते है’ं — इस धारणा को वचार उदाहरण — (i) जापान का साधारण युवक, जसने फल क टोकरी
अनुच्छे द ‘िनराधार’ क्यों कहता है? ‘मैं और मेरा
. c
emजसका उपहार कमालपाशा ने
दे कर अपने दे श का सर ऊँचा कर दया; (ii) तीस मील पैदल चलकर
m
दे श’ िनबंध से दो उदाहरण दे क र स्पष्ट कीिजए।
a s
agl
पाव-भर शहद लाने वाला बूढ़ा कसान,
. co
m
‘सव त्तम उपहार’ कहा।
l a seप न 2 — ‘हम सब नागिरक अपने दे श का
ag
श् दूसरा आशय यह क नाग रक जहाँ भी जाता है, अकेला नह जाता — उसके
पितिनिधत्व करते है’ं — इस कथन का आशय वचार साथ उसके दे श का नाम भी जाता है। यह नबंध क इस पं क्त से मेल
अपने शब्दों में िलिखए और बताइए िक यह िनबंध
se m
com a
खाता है — “म अपने दे श का नाग रक ँ और मानता ँ क म अपना
की िकस पंिक्त से मेल खाता है।
.
दे श ँ।”
a g l
e m
प न 3 — एक नागिरक के गलत आचरण से lदे a श s तीसरा
g
की छिव पर नकारा मक पभाव कै से पड़ ताaहै?
श् जापान म पढ़ने आए वदे शी वद्याथ ने पुस्तकालय क पुस्तक से दुलभ
त् वचार चत्र नकाल लए। उसे दे श से नकाला गया, पर दं ड यह नह रुका —
िनबंध में िदए गए उस उदाहरण की चच कीिजए पुस्तकालय के बाहर बोड पर लख दया गया क उस दे श का कोई
जो इस बात को सबसे स्पष्ट रूप से िस द्ध करता
co m
.
नवासी भीतर नह आ सकता। एक व्य क्त क चोरी ने पूरे राष्ट्र को वष
है।
e m
as
तक ‘लां छत’ कर दया।
m l
.co
m अच्छा प्रश्न कैसे बनाएँ — तीन कसौ टयाँ: a g
l a se
ag
.c
m
1. उत्तर एक शब्द म न हो। ‘क्या हर नाग रक दे श का प्र त न ध है?’ — यह कमज़ोर प्रश्न है, क्य क उत्तर ‘हाँ’ है।
m a s e
co agl
इसे बनाइए — ‘ कस अथ म हर नाग रक दे श का प्र त न ध है?’
m .
e
2. प्रश्न साम ी के भीतर से नकले। बाहर क जानकारी माँगने वाला प्रश्न इस अभ्यास का उ े श्य पूरा नह करता।
g l as
a
3. प्रश्न पाठ से जोड़े। नदश है — “इस नबंध के आलोक म”। इस लए हर प्रश्न म ‘ नबंध से उदाहरण दे कर’ जैसा
अंश जोड़ द जए; इससे प्रश्न गहरा हो जाता है।
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 24 of 69
Page 26
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
दो और प्रश्न, य द आप अ धक बनाना चाह: (क) ‘अपनी ही तरह से योगदान’ का क्या अथ है? अपने प रवार के
तीन सदस्य के योगदान बताकर समझाइए। (ख) क्या कसी एक नाग रक के अच्छे काम से भी दे श क छ व सुधरती
है? इस अनुच्छेद और नबंध — दोन के आधार पर अपना मत द जए।
वधा से संवाद — नबंध क पहचान — पृष्ठ 131 और 132
अभ्यास › वधा से संवाद
वधा से सं वाद नबं ध
प्र.1 1. ‘ नबंध’ का शा ब्दक अथ है— ‘बाँधना’ ( न+बंध)। अथात भली-भाँ त बँधा या गठा हुआ। यह गद्य क वह
वधा है जसम रचनाकार कसी वषय पर अपने अनुभव, वचार, दृ ष्टकोण और भावनाओं को ता कक,
भावनात्मक, क्रमबद्ध और सा ह त्यक रूप से प्रस्तुत करते ह। एक वधा के रूप म नबंध क कुछ वशेषताओं को
नम्न ल खत बदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है— ( वषय-क यता, वैय क्तकता, वचार प्रधानता एवं
भावनात्मकता, सजीवता/ चत्रात्मकता, ता ककता, प्रेरणात्मकता, सं क्षप्तता और स्पष्टता, सा ह त्यक स दय)।
उपयुक्त बदुओं से संबं धत संदभ ‘म और मेरा दे श’ नबंध से खोजकर ल खए।
पुस्तक ने आठ बदु एक चक्र के रूप म दए ह और हर बदु का संदभ पाठ से खोजने को कहा है। नीचे आठ बदुओं क पूरी भरी
हुई ता लका द गई है।
Page 25 of 69
Page 27
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
वशेषता उसका अथ ‘म और मेरा दे श’ से संदभ
वषय-क यता पूरा नबंध एक ही वषय िवषय है — व्यिक्त और दे श का अटू ट संबंध। आरंभ ‘मै’ं से , अंत ‘मेरा मत’ पर; और
के चार ओर घूमता है; बीच के सारे पसंग (लालाजी, जापान की दो घटनाएँ, कमालपाशा, नेहरू जी, शल्य-कण)
कोई प्रसंग वषय से बाहर इसी को िस द्ध करते है।ं कें द ीय वाक्य — “बात यह है िक मैं और मेरा दे श दो अलग चीजें
नह जाता। तो है ं ही नही ं।”
वैय क्तकता नबंधकार अपनी नजी आरंभ ही आत्मकथात्मक है — “मैं अपने घर में जनमा था, पला था।” आगे — “मैंने
अनुभू त, ‘म’ और अपने जो कु छ जीवन में अध्ययन और अनुभव से सीखा है, वह यही है…”, और “अपने अनुभव
ढं ग से बात कहता है। के आधार पर ही आपसे कह रहा हू”ँ । हर िनष्कष ले खक के अपने अनुभव की मुहर िलए
हुए है।
वचार प्रधानता नबंध वचार दे ता है, पर िवचार: “महत्व िकसी काय की िवशालता में नही ं है, उस काय के करने की भावना में
एवं भावनात्मकता सूखे तक से नह — है।” भावना: “कमालपाशा ने हँिडया को स्वयं खोला और उसमें से दो उँ गिलयाँ भरकर
भावना के साथ। चाटने के बाद तीसरी उँ गली शहद में भरकर बूढ़े के मुँह में दे दी, बूढ़ा िनहाल हो गया।”
— िवचार का पमाण भावना के दृ श्य से िदया गया है।
सजीवता / शब्द से आँख के सामने “एक जापानी युवक प्ले टफाम पर खड़ ा था… सुनते ही वह अपनी बात बीच में छोड़ कर
चत्रात्मकता चत्र खड़ा हो जाना। भागा और कही ं दू र से एक टोकरी ताजे फल लाया।” तथा — “िद ल्ली स्टेशन से उस
खाट को अपने कं धे पर रखे वह भारत के पधानमंत्री पंिडत नेहरू की कोठी पर पहचु ँ ा।”
दोनों दृ श्य पढ़ ते ही आँखों में उतर आते है।ं
ता ककता बात क्रम से, प्रमाण और ृ ला — “जीवन एक
‘अके ला चना क्या भाड़ फोड़ े’ को खंिडत करने की पूर ी तक -शंख
उदाहरण दे कर सद्ध क युद्ध है और युद्ध में लड़ ना ही तो काम नही ं होता। लड़ ने वालों को रसद न पहचु ँ े तो वे
जाती है। कै से लड़ ें। िकसान ही खेती न उपजाए तो रसद पहचु ँ ाने वाले क्या करे ं… युद्ध में जय
बोलने वालों का भी महत्व है।” एक कड़ ी दू स री से जुड़ती चली जाती है।
प्रेरणात्मकता पढ़ने वाला कुछ करने को “इसिलए मैं अपने दे श का िकतना भी साधारण नागिरक क्यों न हू,ँ अपने दे श के स म्मान
उठ खड़ा हो। की रक्षा के िलए बहुत कु छ कर सकता हू।ँ ” और अंत का आ ान — “जब भी कोई
चुनाव हो, ठीक मनुष्य को अपना मत दे ं।”
सं क्षप्तता और बात थोड़े म और साफ़- “मतलब साफ है, एकदम साफ — िक जहाँ एक युवक ने अपने काम से अपने दे श का
स्पष्टता साफ़ कही जाए। िसर ऊँ चा िकया था, वही ं एक युवक ने अपने दे श के मस्तक पर कलंक का ऐसा टीका
लगाया…” दो घटनाओं का पूरा िनष्कष एक ही वाक्य में। इसी तरह — “इस उ च्चता
और हीनता की कसौटी है चुनाव।”
सा ह त्यक स दय प्रतीक, रूपक, मुहावरे रूपक : “आनंद की इस दीवार में एक दरार पड़ गई”, “मानस में भूकं प”, “गौरव के
और लय से भाषा सुंदर दीपक जलाए ”, “संदे ह की तरे ड़”। मुहावरे /लोकोिक्तयाँ: “अके ला चना क्या भाड़
बनती है। फोड़ ”े , “ईंट का जवाब पत्थर से ”, “पानी ही उतर चुक ा है”। अितशयोिक्त: “दशकों की
तािलयों से िखलािड़ यों के पैरों में िबजली लग जाती है।” सुंद र वाक्यांश: “सौ लालों का
एक लाल ”।
यह ता लका बनाते समय क्या ध्यान रख: हर बदु के लए पाठ क पं क्त उद्धत क जए, केवल यह मत ल खए
क ‘ नबंध म ता ककता है’। संदभ का अथ ही प्रमाण है। और एक ही पं क्त दो वशेषताओं का उदाहरण हो सकती
है — जैसे ‘गौरव के द पक जलाए’ सा ह त्यक स दय भी है और प्रेरणात्मकता भी।
Page 26 of 69
Page 28
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 2. “क्या कोई भूकंप आया था, जससे द वार म दरार पड़ गई? बड़े महत्व का प्रश्न है… तो उत्तर यह है आपके प्रश्न
का...” नबंध के उपयुक्त अंश को ध्यान से दे खए। इसक पहली पं क्त म एक प्रश्न है और बाद के अंश म उसका
उत्तर दया गया है। आपने ध्यान दया होगा क यह पूरा नबंध इसी तरह क प्रश्नोत्तर शैली म लखा गया है। यह
प्रश्नोत्तर या संवादात्मक शैली इस नबंध क संरचना को वशेष बनाती है। इसी तरह क और भी अन्य वशेषताएँ
इस नबंध म से छाँटकर ल खए।
प्रश्नोत्तर शैली के अ त रक्त इस नबंध म कम-से-कम आठ और शल्पगत वशेषताएँ मलती ह। हर वशेषता का उदाहरण नीचे
दया गया है।
वशेषता पहचान उदाहरण
1. आत्मकथात्मक नबंध ‘म’ से शुरू होकर धीरे- “मैं अपने घर में जनमा था, पला था। अपने पड़ ोस में खेल कर … बड़ ा हुआ
(प्रथम-पुरुष) आरंभ धीरे ‘हम’ तक पहुँचता है। था।”
2. संबोधन और लेखक पाठक को सीधे ‘आप’ “अजी, भला एक आदमी अपने इतने बड़ े दे श के िलए कर ही क्या सकता
बोलचाल क कहकर पुकारता है, बीच-बीच म है!”; “लो, एक और बात बताता हू ँ आपको।”; “वाह, खूब सवाल पूछा है
आत्मीयता चुहल भी करता है। आपने।”; “क्यों जी, हम यह कै से जान सकते है…
ं ”
3. दृष्टांत/कथा-शैली हर वचार के साथ एक छोट पाँच दृ ष्टातं — जापान का फलवाला युवक , िचत्र चुराने वाला िवद्याथ ,
कहानी। कमालपाशा और बूढ़ा िकसान, नेहरू जी और खाट वाला िकसान, तथा
महाभारत का शल्य-कण पसंग।
4. प्रतीक और रूपक- अमूत बात को मूत चत्र म दीवार = पूणता का भाव; दरार = उस पर चोट; भूकं प = लालाजी का
योजना बदलना। अनुभव; गाँठ = नागिरक -दे श का बंधन; दीपक = बिलदान; तरे ड़ = संदे ह।
5. लोको क्त और कहावत को उठाकर उसका “अके ला चना क्या भाड़ फोड़ े— यह कहावत… सौ फीसदी झूठ है। ”; “ईंट
मुहावर का प्रयोग खंडन या पु ष्ट। का जवाब पत्थर से ”; “इनका तो पानी ही उतर चुक ा है”; “सौ लालों का
एक लाल ”।
6. उद्धरण-शैली दूसर के कथन ज्य -के-त्य दे ना, लालाजी — “मैं अमेिरका गया, इंग्लै ंड गया, फ ांस गया…”; जापानी युवक
जससे बात म प्रामा णकता आ — “आप अपने दे श में जाकर िकसी से यह न किहएगा…”; कमालपाशा
जाए। — “दादा, आज सव त्त म उपहार तुम ने ही मुझे भेटं िकया। ”
7. सूत्रात्मक/सुभा षत पूरे अनुच्छेद का नचोड़ एक “बड़ े से बड़ ा काय हीन है, यिद उसके पीछे अच्छी भावना नही ं है और छोटे से
वाक्य पं क्त म। छोटा काय भी महान है, यिद उसके पीछे अच्छी भावना है।”; “इस उ च्चता
और हीनता की कसौटी है चुनाव।”
8. आवृ त्त और समान गठन वाले छोटे वाक्य “मैं अपने घर में जनमा था, पला था। / अपने पड़ ोस में खेल कर … बड़ ा हुआ
लयात्मक वाक्य-रचना एक-के-बाद-एक, जससे गद्य म था। / अपने नगर में घूम-िफरकर… खड़ ा हुआ था।”; “मैं अमेिरका गया,
लय आ जाती है। इंग्लै ंड गया, फ ांस गया…”; “मेरा घर, मेरा पड़ ोस , मेरा नगर और मैं।”
9. प्रश्न से पाठक को नबंध पाठक से भी प्रश्न पूछता “क्या आप कभी के ला खाकर िछलका रास्ते में फे ं कते है…
ं ?” और िफर —
कठघरे म खड़ा करना है, केवल उत्तर नह दे ता। “यिद आपका उ त्त र हाँ है, तो आपके ारा दे श के सौंद य-बोध को भयंक र
आघात लग रहा है।”
Page 27 of 69
Page 29
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
ये सब मलकर क्या करते ह: नबंध का वषय गंभीर है — नाग रक का कतव्य और अ धकार। य द इसे केवल तक
से कहा जाता तो यह भाषण बन जाता। संवाद, दृष्टांत, मुहावरे और लय ने इसे बैठकर सुनी जाने वाली बात बना
दया है। यही इस नबंध का शल्प-स दय है।
प्र.3 3. नीचे कुछ वषय दए गए ह, आप इनम से कन वषय पर नबंध लखना चाहगे, कारण स हत ल खए— •
मेरा भारत मेरा गौरव • चाँद के साथ गपशप • जहाँ न पहुँचे र व वहाँ पहुँचे क व • गागर म सागर • यथा नाम तथा
गुण • दूध का दूध और पानी का पानी
पहले यह दे खए क छह वषय एक जैसे नह ह। इनम तीन प्रकार के नबंध छपे ह — वचारात्मक, कल्पनात्मक और सू क्त/
लोको क्त-आधा रत। वषय चुनने से पहले यह पहचान लेना ही आधा काम है।
वषय नबंध का प्रकार इसम क्या-क्या लखना पड़े गा
मेरा भारत मेरा वचारात्मक / भारत क भौगो लक व वधता, प्राचीन ज्ञान-परंपरा, स्वतंत्रता संग्राम, सं वधान, वज्ञान-
गौरव भावात्मक अंत रक्ष क उपल ब्धयाँ, ‘अनेकता म एकता’, और अंत म नाग रक का कतव्य।
चाँद के साथ कल्पनात्मक / ल लत चाँद से बातचीत के रूप म पूरा नबंध — संवाद शैली, कल्पना, हास्य; चाँद क दृ ष्ट से
गपशप पृथ्वी का वणन; चंद्रयान का उल्लेख।
जहाँ न पहुँचे र व सू क्त-आधा रत / कल्पना क श क्त; क व सूय से भी आगे — मन, भाव और भ वष्य तक पहुँचता है;
वहाँ पहुँचे क व सा ह त्यक काव्य के उदाहरण दे कर सद्ध करना।
गागर म सागर लोको क्त-आधा रत थोड़े शब्द म गहरी बात कहने क कला; दोहे, सू क्तयाँ, मुहावरे; बहारी के दोह और
कबीर क सा खय के उदाहरण।
यथा नाम तथा गुण लोको क्त-आधा रत / नाम और गुण का मेल — और बेमेल भी; इ तहास तथा जीवन से उदाहरण; हल्का
व्यंग्यात्मक व्यंग्य।
दूध का दूध और लोको क्त-आधा रत / सत्य-असत्य का नणय, न्याय, ववेक; न्यायालय, पंचायत और परीक्षा-मूल्यांकन के
पानी का पानी नै तक उदाहरण।
मेरा चयन — और कारण:
Page 28 of 69
Page 30
ase
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
पहली पसंद — ‘मेरा भारत मेरा गौरव’। कारण तीन ह। पहला, यह वषय ठ क उसी बात का वस्तार है जो हमने
m a s em राय, जापानी
co बूढ़ा कसान)। दूसरा, इसम केवल प्रशंसा नह करनी पड़ेगी; म यह aभीglलख सकूँगा क गौरव
अभी ‘म और मेरा दे श’ म पढ़ है — इस लए मेरे पास सामग्री भी है और उदाहरण भी (लाला लाजपत
.
emके लए नाग रक को क्या करना है — यानी नबंध म तक और प्रेरणा दोन आ सकगे। तीसरा, यह वषय
युवक, कमालपाशा,
बनाएsरखने
a
aमेgरlे अपने अनुभव से जुड़ा है — गणतंत्र दवस क झाँ कयाँ, अपने प्रदे श क लोक-कला, अपनी भाषा।
. com
दूसरी पसंद — ‘गागर म सागर’। कारण यह क मुझे दोहे और सू क्तयाँ पढ़ना अच्छा लगता है, और इस वषय म
ag
a s emसकूँगा क कैसे दो पं क्तय म पूरा जीवन-दशन आ जाता है।
l ध लंबा नह , सघन होना चा हए।
म कबीर, रहीम तथा बहारी के उदाहरण दे कर दखा
साथ ही यह वषय स्वयं ही सखाता है कagनबं
co m
em.
नमूना रूपरेखा — ‘मेरा भारत मेरा गौरव’:
m l as
.co
1. भू मका — भारत केवल भू म का टु कड़ा नह , एक जी वत सभ्यता है।
m ृ तक व वधता — हमालय से कन्याकुमारी तक; न दयाँ, ऋतुए,ँ वन। a g
a s eप्राक
gl 3. ज्ञान-परंपरा — शून्य, आयुवद, योग, नालंदा-तक्ष शला।
2.
a
s
4. अनेकता म एकता — बाईस से अ धक भाषाएँ, अनेक धम, एक सं वधान (यहाँ ‘भाषा संगम’ का ‘दे श’ शब्द
m a
.co agl
वाला उदाहरण दया जा सकता है)।
se m
l a
5. स्वतंत्रता सं ाम — “अपने रक्त से गौरव के द पक” जलाने वाले — लाला लाजपत राय, भगत सह, महात्मा
g
गांधी। a
6. आज का भारत — अंत रक्ष, च कत्सा, खेल और लोकतंत्र।
co m
.
7. मेरा दा यत्व — गौरव पाना अ धकार है, बनाए रखना कतव्य — “म कोई ऐसा काम न करूँ जससे मेरे दे श…
m
as e
comहार — “म और मेरा दे श दो अलग चीज तो ह ही नह ।” l
के सम्मान को धक्का पहुँचे।”
8..उपसं a g
a sem
agl
se m
m
co133 g l a
चुनाव एवं आपके अनुभव — पृष्ठ 132 और
m . a
भeव
अभ्यास › वषय से संवाद › चुनाव एवं आपके अनुs
a
वषय से सं वाद नाग रक-बोध
agl
. c om
s e m बनाकर दे श क उच्चता और
comहीनता को हम तोल सक?” रचनाकार के अनुसार इस प्रश्न का उत्तर हैa—glaनष्पक्ष चुनाव प्र क्रया। 1. जब कोई
प्र.1 “क्या कोई ऐसी कसौट भी बनाई जा सकती है, जससे दे श के नाग रक को आधार
.
as em चुनाव प्र क्रया आपके क्षेत्र म शुरू होती है तो कस तरह क ग त व धयाँ होती ह?
agl c
m .
s e
m a
. co agl
चुनाव क घोषणा होते ही पूरा क्षेत्र बदल-सा जाता है। ये ग त व धयाँ तीन चरण म बँट होती ह — चुनाव से पहले, चुनाव के दन
e m
as
और चुनाव के बाद।
a g l
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 29 of 69
Page 31
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
चरण क्या-क्या होता है
घोषणा और नवाचन आयोग त थ घो षत करता है और उसी क्षण से आदश आचार सं हता लागू हो जाती है। मतदाता-सूची का
तैयारी पुनरीक्षण होता है, नए नाम जुड़ते ह, बी.एल.ओ. घर-घर पच पहुँचाते ह। वद्यालय भवन मतदान-कद्र बनते ह और
शक्षक क ूट लगती है।
नामांकन और उम्मीदवार नामांकन भरते ह और अपनी संप त्त तथा शक्षा का ब्योरा दे ते ह। फर शुरू होता है प्रचार — घर-घर संपक,
प्रचार नुक्कड़ सभाएँ, रैली, जुलूस, पोस्टर-बैनर, गा ड़य पर लाउडस्पीकर, पच, और अब सोशल मी डया पर वी डयो। चुनाव-
चह्न सबक जुबान पर चढ़ जाते ह।
मतदाता- ‘स्वीप’ (SVEEP) जैसे अ भयान चलते ह — रंगोली, प्रभात-फेरी, मानव- ंखला, नारे, ‘वोटर सेल्फ प्वाइंट’, और
जागरूकता वद्यालय म शपथ — “कोई मतदाता न छू टे ।” (आपक पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 134 पर इसी तरह के एक ‘वोटर सेल्फ
प्वाइंट’ का चत्र भी दया गया है।)
मतदान का दन सावज नक अवकाश; मतदान-कद्र पर कतार; पहचान-पत्र क जाँच; ई.वी.एम. और वी.वी.पैट से मतदान; उँ गली पर
अ मट स्याही; सुरक्षा बल क तैनाती; और कद्र से सौ मीटर के भीतर प्रचार पर पूरी रोक।
मतगणना और मतगणना, प रणाम क घोषणा, वजय-जुलूस और मठाई; फर शपथ-ग्रहण। साथ ही सारे पोस्टर-बैनर उतारने और
उसके बाद द वार साफ़ करने का काम भी — जो प्रायः भुला दया जाता है।
नबंध से जो ड़ए: लेखक कहता है — “जहाँ के नाग रक गलत लोग के उत्तेजक नार या व्य क्तय के गलत
प्रभाव म आकर मत दे ते ह, वह हीन है।” ऊपर गनाई गई ग त व धय म से कुछ (जागरूकता अ भयान, घर-घर
संपक, ब्योरे का प्रकाशन) नाग रक को समझदार बनाती ह, और कुछ (उत्तेजक नारे, मुफ़्त वस्तुओं का प्रलोभन,
अफ़वाह) उसे बहकाती ह। कसौट यही है क नाग रक कन ग त व धय से प्रभा वत होता है।
Did you know? भारत म मतदान क न्यूनतम आयु 1989 म 61व सं वधान संशोधन ारा 21 वष से घटाकर
18 वष कर द गई थी। यानी आपक कक्षा के कई वद्याथ तीन-चार वष बाद ही इस ‘कसौट ’ पर खरे उतरने वाले
ह।
प्र.2 2. “जब भी कोई चुनाव हो, ठ क मनुष्य को अपना मत द”, आपके वचार से एक अच्छे उम्मीदवार म क्या-क्या
गुण होने चा हए?
लेखक ने ‘योग्य’ नह , ‘ठ क मनुष्य’ कहा है — यानी पहले वह अच्छा मनुष्य हो, तब नेता। एक अच्छे उम्मीदवार के गुण इन्ह दो
को टय म रखे जा सकते ह।
Page 30 of 69
Page 32
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
को ट गुण यह क्य जरूरी है
च रत्र के गुण ईमानदारी और स्वच्छ छिव जो सावज नक धन का रक्षक बनेगा, उस पर पहले भरोसा होना चा हए। उसके वरुद्ध
गंभीर आपरा धक मामले नह होने चा हए।
से वा-भाव और सुल भता चुनाव के बाद भी वह मलता रहे — जैसे कमालपाशा तीस मील चलकर आए बूढ़े से
मलने वश्राम के वस्त्र म ही नीचे उतर आए।
िनष्पक्षता वह जा त, धम, भाषा या दल दे खकर काम न करे। सं वधान क समता उसी से आरंभ
होती है।
साहस और उ त्तरदाियत्व गलती मानने और सुधारने का साहस; जो वादा कया, उसका हसाब दे ने क तत्परता।
काय-क्षमता के े की समझ
क्ष त्र वह जानता हो क उसके क्षेत्र म पानी, सड़क, वद्यालय, अस्पताल और रोज़गार क
गुण असली स्थ त क्या है।
िशक्षा और िवषय-ज्ञान कानून बनाने के लए वषय समझना पड़ता है — केवल भाषण दे ना पयाप्त नह ।
सबको साथ ले क र चलने ‘श क्त-बोध’ बढ़ाने वाला नेता वरोधी का भी सम्मान करता है, उसका मनोबल नह
की कला तोड़ता — शल्य जैसा साथी कोई नह चाहता।
दू रदृ िष्ट अगले चुनाव तक नह , अगली पीढ़ तक सोचने वाला — पयावरण, शक्षा और स्वास्थ्य म
नवेश करने वाला।
कन बात से प्रभा वत नह होना चा हए: उत्तेजक नारे; जा त-धम क अपील; मुफ़्त वस्तुओं या धन का प्रलोभन;
केवल भाषण-कला; और ‘सब ऐसे ही होते ह’ जैसी नराशा। लेखक ने इन्ह को ‘हीन दे श’ क पहचान बताया है।
Check it yourself: अगले चुनाव म उम्मीदवार क सूची लेकर एक ता लका बनाइए — नाम, शक्षा, पछले
पाँच वष का काम, और घोषणापत्र के तीन मुख्य वादे । यही ‘कसौट ’ को व्यवहार म उतारना है। भारत नवाचन
आयोग हर उम्मीदवार का शपथ-पत्र सावज नक करता है — वह सबके लए उपलब्ध है।
प्र.3 3. चुनाव से जुड़ा अपना कोई अनुभव ल खए। (संकेत— वद्यालय म कक्षा प्र त न ध का चुनाव)
यह अनुभव-लेखन है, इस लए इसे कहानी क तरह ल खए — त थ, स्थान, पात्र, घटनाक्रम और अंत म आपने क्या सीखा। नीचे
पूरा नमूना उत्तर दया गया है।
Page 31 of 69
Page 33
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर — ‘मेरी कक्षा का चुनाव’
पछले वष जुलाई म हमारी कक्षा म कक्षा-प्र त न ध का चुनाव हुआ। अध्या पका जी ने कहा क इस बार वे कसी को
नयुक्त नह करगी — कक्षा स्वयं चुनेगी। तीन नाम सामने आए — रो हत, सलमा और म।
हम दो-दो मनट बोलने का समय मला। रो हत ने कहा क वह जीतने पर सबको खेल के पी रयड म मैदान
दलवाएगा। सलमा ने कहा क वह पहले कक्षा का कोना-कोना साफ़ करवाएगी, फर हर सप्ताह एक ‘संदेह-घंटा’
रखवाएगी जसम जो पीछे रह गए ह वे बना संकोच पूछ सक। मने अपनी बारी म केवल यह कहा क म सबक बात
अध्या पका जी तक पहुँचाऊँगा।
मतदान गुप्त था — प चयाँ एक डब्बे म डाली गईं और मॉनीटर के सामने गनी गईं। सलमा को 21 मत मले, रो हत
को 12 और मुझे 9। पहले क्षण मुझे बुरा लगा, क्य क रो हत और म मत्र थे और मुझे लगा था क वह मुझे ही मत
दे गा। पर गनती के बाद अध्या पका जी ने एक बात कही जो मुझे आज तक याद है — “मत मत्रता का बदला नह
होता, वह जम्मेदारी स पना होता है।”
आगे जो हुआ उसने यह बात और पक्क कर द । सलमा ने सचमुच ‘संदेह-घंटा’ शुरू करवाया और तीन महीने म
हमारी कक्षा का ग णत का औसत बढ़ गया। मने तब समझा क जन्ह ने उसे मत दया, उन्ह ने नारे नह , काम क
योजना दे खी थी।
इस अनुभव से मने तीन बात सीख — पहली, अच्छा उम्मीदवार वादा नह , योजना दे ता है; दूसरी, गुप्त मतदान ही
सच्ची राय लाता है; और तीसरी, हारने वाले का काम भी समाप्त नह होता — मने पूरे वष सलमा के साथ मलकर
काम कया। लेखक ठ क ही कहते ह — “ जस दे श के नाग रक यह समझते ह क चुनाव म कसे अपना मत दे ना
चा हए और कसे नह , वह दे श उच्च है।”
लखते समय ध्यान र खए: अनुभव म एक असली मोड़ जरूर होना चा हए — कोई बात जो आपने पहले सोची
नह थी। ऊपर के नमूने म वह मोड़ है ‘ मत्र ने मुझे मत नह दया’। बना मोड़ के अनुभव केवल ववरण रह जाता है।
प्र.4 4. य द आप कसी सभा, क्लब आ द के चुनाव म उम्मीदवार ह तो आपके क्या-क्या मु े ह गे?
मु े वही अच्छे होते ह जो — (1) सचमुच क समस्या से नकल, (2) आपके अ धकार-क्षेत्र म ह , और (3) जन्ह पूरा हुआ या न
हुआ, दोन जाँचा जा सके। नीचे एक नमूना घोषणापत्र दया गया है, जसे आप वद्यालय क ‘बाल संसद’, सा ह त्यक क्लब या
मुहल्ले के पुस्तकालय-समूह — कसी के भी लए ढाल सकते ह।
नमूना उत्तर — मेरा घोषणापत्र ( वद्यालय क बाल संसद के लए)
Page 32 of 69
Page 34
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
क्रम मु ा म क्या करूँगा/करूँगी कब तक
1 व छ और सुंद र
स् च् हर कक्षा म गीला-सूखा कचरे के दो डब्बे; महीने के अं तम श नवार को ‘एक घंटा पहले दो
िवद्यालय श्रमदान’; शौचालय क साप्ता हक जाँच- रपोट। महीने
2 पुस्तकालय सबके िलए पुस्तकालय मध्यावकाश म भी खुला रहे; ‘एक वद्याथ – एक पुस्तक’ दान अ भयान; तीन महीने
फट पुस्तक क मरम्मत का दल।
3 पीछे रह गए सािथयों की सप्ताह म दो दन ‘सहपाठ - शक्षण’ — जो वषय म आगे ह वे आधा घंटा पढ़ाएँ। तुरंत
सहायता कसी का नाम सावज नक नह होगा।
4 पेयजल और स्वास्थ् य पानी क टं क क मा सक सफ़ाई क माँग; प्राथ मक च कत्सा पेट क जाँच; गम म एक महीना
छाया क व्यवस्था।
5 खेल और कला सबके खेल-सामग्री का र जस्टर ता क कुछ ही लोग उसे न घेर; लड़ कय के लए बराबर दो महीने
िलए मैदान-समय; वा षक द वार-प त्रका।
6 सुरक्षा और स म्मान ‘ शकायत-पेट ’ जसम बना नाम के पच डाली जा सके; चढ़ाने और ध स जमाने तुरंत
(bullying) के वरुद्ध कक्षावार संकल्प।
7 िहसाब दे ना हर तीन महीने पर प्राथना-सभा म प्रग त- रपोट पढ़कर सुनाऊँगा/सुनाऊँगी — जो हर तमाही
हुआ और जो नह हो पाया, दोन ।
यह घोषणापत्र अच्छा क्य है: इसम कोई ऐसा वादा नह है जो मेरे बस म न हो (जैसे ‘परीक्षा हटवा दूँ गा’ या
‘छु याँ बढ़वा दूँ गा’)। हर मु े के साथ समय-सीमा है, और अं तम मु ा ‘ हसाब दे ना’ है — यही लोकतंत्र क आत्मा
है। नबंध का वाक्य याद र खए — “मेरा अ धकार है क मेरा मत लए बना कोई भी आदमी… कसी अ धकार क
कुरसी पर न बैठ सके।” जो मत लेकर कुरसी पर बैठा है, उसका पहला कतव्य हसाब दे ना ही है।
अ धकार और कतव्य — पृष्ठ 133
अभ्यास › वषय से संवाद › अ धकार और कतव्य
वषय से सं वाद सं वधान
प्र.1 इस नबंध म कसी भी स्वतंत्र दे श म नाग रक के अ धकार और उसके कतव्य क बात क गई है। आपक
पाठ्यपुस्तक के प्रारं भक पृष्ठ पर भारतीय सं वधान म प्रदत्त मौ लक अ धकार और कतव्य दए गए ह। उसे पढ़कर
अपनी कक्षा म चचा क जए।
पहले नबंध क बात दे खए। लेखक अ धकार और कतव्य को अलग-अलग नह , एक ही वाक्य के दो हस्स क तरह रखता है —
Page 33 of 69
Page 35
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
कत व्य: “मुझे िनजी रूप में सारे संसार का राज्य भी क्यों न िमलता हो, मै ं कोई ऐसा काम न क रूँ िजससे मेरे दे श
as e
स् त्र com क् g l
.
की वतं ता को… ध का पहुँचे ”
m a
l a se
अिधकार: “साथ ही उसके एक नागिरक के रूप में मेरा यह अिधकार भी है िक अपने दे श के सम्मान का पूरा-पूरा
g
aभाग मझु े िमले”
co m
e m . ag
चुन ाव के संद भ में भी वही जोड़ ी —
g l as
a
कतव्य: “जब भी कोई चुन ाव हो, ठीक मनुष्य को अपना मत दे ं”
co m
m.
अिधकार: “मेरा मत िलए िबना कोई भी आदमी… िकसी अिधकार की कु रसी पर न बैठ सके ”
o m l a se
. a gच्छेद 51क के मूल कतव्य दए गए
अब सं वधान cक ओर दे खए। पाठ्यपुस्तक गंगा के प्रारं भक पृष्ठ पर सं वधान के भाग 4क, अनु
ह। se m
a
agl
m a s
m .co agl
l a se
a g
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a
se m
com g l a
m . a
ase
agl
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 34 of 69
Page 36
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
मौ लक अ धकार (भाग 3, अनुच्छेद 12–35) मूल कतव्य (भाग 4क, अनुच्छेद 51क)
1. समता का अ धकार (अनु. 14–18) — कानून के सामने सब बराबर; (क) सं वधान का पालन करे और उसके आदश , संस्थाओं, राष्ट्र
अस्पृश्यता का अंत। ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे।
2. स्वतंत्रता का अ धकार (19–22) — वाक्, सम्मेलन, संचरण, नवास (ख) स्वतंत्रता के लए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रे रत करने
और व्यवसाय क स्वतंत्रता; प्राण और दै हक स्वतंत्रता। वाले उच्च आदश को हृदय म संजोए रखे और उनका पालन
करे।
3. शोषण के वरुद्ध अ धकार (23–24) — बलात् श्रम और बाल-श्रम (ग) भारत क प्रभुता, एकता और अखंडता क रक्षा करे और
पर रोक। उसे अक्षुण्ण रखे।
4. धा मक स्वतंत्रता का अ धकार (25–28)। (घ) दे श क रक्षा करे और आ ान कए जाने पर राष्ट्र क सेवा
करे।
5. संस्कृ त और शक्षा संबंधी अ धकार (29–30) — अल्पसंख्यक (ङ) सब भारतवा सय म समरसता और समान भ्रातृत्व क
के हत तथा भाषा- ल प-संस्कृ त क रक्षा। भावना का नमाण करे; स्त्रय के सम्मान के वरुद्ध प्रथाओं का
त्याग करे।
6. संवैधा नक उपचार का अ धकार (32) — डॉ. आंबेडकर ने इसे (च) हमारी सामा सक संस्कृ त क गौरवशाली परंपरा का महत्व
सं वधान क ‘आत्मा’ कहा था; अ धकार छनने पर सीधे न्यायालय जाने समझे और उसका प ररक्षण करे।
का अ धकार।
( शक्षा का अ धकार — अनुच्छेद 21क — 86व संशोधन से जोड़ा गया: (छ) प्राकृ तक पयावरण क — वन, झील, नद और वन्य जीव
6 से 14 वष के बच्च को नःशुल्क और अ नवाय शक्षा।) स हत — रक्षा और संवधन करे तथा प्रा णमात्र के प्र त दयाभाव
रखे।
(ज) वैज्ञा नक दृ ष्टकोण, मानववाद और ज्ञानाजन तथा सुधार
क भावना का वकास करे।
(झ) सावज नक संप त्त को सुर क्षत रखे और हसा से दूर रहे।
(ञ) व्य क्तगत और सामू हक ग त व धय के सभी क्षेत्र म
उत्कष क ओर बढ़ने का सतत प्रयास करे।
(ट) माता- पता या संरक्षक 6 से 14 वष के अपने बच्चे को
शक्षा के अवसर दे ।
Page 35 of 69
Page 37
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
नबंध और सं वधान का मेल — यही चचा का असली वषय है:
लेखक क ‘स दय-बोध’ वाली बात (कूड़ा न फकना, थूकना नह , स्मारक न बगाड़ना) ठ क कतव्य (छ) और
(झ) है।
‘श क्त-बोध’ को चोट न पहुँचाना — यानी अपने दे श को हीन सद्ध करने क चचा न करना — कतव्य (ग) और
(ङ) से जुड़ता है।
‘ठ क मनुष्य को मत दे ना’ अनुच्छेद 326 के वयस्क मता धकार का सदुपयोग है।
और ‘मेरे सम्मान क रक्षा का मुझे, जहाँ भी म ँ, भरोसा रहे’ — यह अनुच्छेद 21 (प्राण और दै हक स्वतंत्रता)
तथा 32 (संवैधा नक उपचार) क ही भाषा है।
सबसे बड़ी बात यह क सं वधान ने अ धकार भाग 3 म और कतव्य भाग 4क म रखे ह — दोन एक ही पुस्तक म।
लेखक भी यही कहता है क ये दो अलग चीज नह ह।
कक्षा-चचा का तरीका: कक्षा को चार समूह म बाँ टए। हर समूह को दो-तीन मूल कतव्य द जए और क हए क वे
उनके लए (1) वद्यालय से एक उदाहरण, (2) मुहल्ले से एक उदाहरण और (3) इसी नबंध से एक पं क्त खोजकर
लाएँ। अंत म सारे उदाहरण एक चाट पर लगाइए — कक्षा के सामने सं वधान अचानक ‘ कताबी’ नह रह जाएगा।
हमारा पुस्तकालय — पृष्ठ 133
अभ्यास › सृजन › हमारा पुस्तकालय
सृ ज न चचा
प्र.1 आप अपने वद्यालय एवं सावज नक पुस्तकालय म जाते ह। हो सकता है, आपको कभी कोई पुस्तक फट हुई
मली हो या उसम से कुछ पृष्ठ गायब ह अथवा उसम पेन से नशान लगे ह — • ऐसा होने के पीछे क्या कारण हो
सकते ह?
इसके कारण दो तरह के होते ह — जान-बूझकर क गई हा न और असावधानी से हुई हा न। नबंध म दया गया जापान का
उदाहरण पहली को ट का है।
Page 36 of 69
Page 38
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
को ट कारण टप्पणी
जान-बूझकर ‘मुझे यही पष्ृ ठ चािहए ’ की स्वाथ-वृित्त — िचत्र , मानिचत्र , सूत्र या यही नबंध वाली घटना है — “ये चत्र इस युवक ने
पश्न-पत्र वाला प ा फाड़ ले ना।
न्न पुस्तक म से नकाल लए और पुस्तक वापस कर
आया।”
दू स रों को वंिचत करने की भावना — पितयोिगता में आगे रहने के यह चोरी से भी बुरा है, क्य क इसम कसी को
िलए प े हटा दे ना।
न्न नुकसान पहुँचाने का इरादा है।
पेन से रे खांक न और नोट िलखना — “मैं तो के वल जरूरी पंिक्त अगला पाठक उसी लक र को पढ़ने को मजबूर हो
दबा रहा हू।ँ ” जाता है; पुस्तक अपनी तटस्थता खो दे ती है।
बदले या शरारत की भावना — नाम िलखना, िचत्र बनाना, प े न्न ‘स दय-बोध’ पर वही चोट, जो द वार पर नाम लखने
मोड़ ना। से लगती है।
असावधानी ठू ँस -ठू ँस कर बस्ते में रखना, गीले हाथ, खाते-पीते पढ़ ना। जल्द टू टती है, पन्ने चपकते ह।
से
प ा मोड़ कर िनशान लगाना (bookmark के बजाय)।
न्न बार-बार मुड़ा पन्ना वह से फट जाता है।
पुस्तकालय की व्यवस्था की कमी — िजल्दबंद ी न होना, दीमक यह पाठक का नह , व्यवस्था का दोष है — और इसे
और नमी, अलमारी में ठू ँस कर रखना, समय पर मरम्मत न होना। भी ठ क कया जा सकता है।
छोटे भाई-बहनों के हाथ लग जाना, यात्रा में भीग जाना। घर ले जाई गई पुस्तक क जम्मेदारी लेने वाले क
होती है।
मूल कारण एक ही है: पाठक यह भूल जाता है क पुस्तकालय क पुस्तक सावज नक संप त्त है — यानी उसक
अपनी भी है और सबक भी। जो अपनी पुस्तक को फाड़कर नह रखता, वह पुस्तकालय क पुस्तक क्य फाड़ दे ता
है? क्य क वहाँ ‘मेरा’ का भाव नह जागता। नबंध इसी भाव को जगाना चाहता है — “म अपना दे श ँ।”
प्र.2 • ऐसा न हो, इसके लए क्या कया जा सकता है?
उपाय तीन स्तर पर करने ह गे — व्य क्त, पुस्तकालय और वद्यालय/समाज। केवल नयम लगाने से काम नह चलेगा; भाव
जगाना पड़ेगा।
Page 37 of 69
Page 39
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
स्तर क्या कया जाए
म स्वयं पुस्तक ले ने से पहले उसके प े िगनकर/दे खकर लूँ और लौटाते समय भी; कभी पेन से न िलखूँ — के वल अलग कागज़ पर
न्न
नोट बनाऊँ ; प ा मोड़ ने के बजाय पच लगाऊँ ; साफ़ हाथों से , िबना खाए -पीए पढ़ ू ँ; कवर चढ़ ाकर रखूँ; और यिद कोई प ा
न्न न्न
पहले से फटा है तो ले ते समय ही बता दू ँ।
पुस्तकालय पवेश-िनगम रिजस्टर और सद स्य-काड; िजल्दबंद ी और मरम्मत की मािसक व्यवस्था; बहमु ाँग वाली पुस्तकों की एक ‘के वल
पढ़ ने की पित’ (reference copy) जो बाहर न जाए ; दुल भ िचत्रों/मानिचत्रों की छायापित सुिवधा तािक िकसी को प ा फाड़ ने
न्न
की जरूरत ही न पड़ ;े दीमक -नमी से बचाव; और लौटाई गई पुस्तक की उसी समय जाँच।
वद्यालय/ िवद्यािथयों की ‘पुस्तक -िमत्र’ सिमित जो हर महीने फटी पुस्तकें जोड़ े; ‘पुस्तक -दान िदवस ’; पाथना-सभा में पुस्तकालय-िनयमों
समाज की चच ; अच्छी तरह पुस्तक लौटाने वाले पाठक का सावजिनक अिभनंद न (दंड से अिधक असर पशंस ा का होता है); और
जापान वाली घटना को क क्षा में पढ़ ाना — एक कहानी सौ उपदे शों पर भारी पड़ ती है।
ध्यान द जए: जुमाना अं तम उपाय है, पहला नह । पुस्तकालय भरोसे पर चलता है — वहाँ ताला हर पुस्तक पर
नह लगाया जा सकता। इस लए सबसे कारगर उपाय है — पाठक म यह भाव जगाना क यह पुस्तक उसक
अपनी है, और उसके बाद बी सय लोग क भी।
Page 38 of 69
Page 40
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
• आप पुस्तकालय म कन नयम का पालन करते ह, उन नयम का पालन करना क्य अ नवाय है? इस पर
e
प्र.3
m l as
.co
अपनी कक्षा म चचा क जए और ल खए।
a g
se m
g l a
a
m
नयम पालन क्य अ नवाय है
. c o
पु तकालय एकागताmका थान है। एक यि त की ऊँ ची आवाज़ बीस लोगों का यान तोड़ दे ती है — ag
seिवधा नही,ं बीस की हािन।
1. शां त बनाए रखना
यानी एक कीaअसु
स् स् व् क् ध्
ag l
2. र जस्टर म प्र व ष्ट और काड से इससे यह पता रहता है िक कौन-सी पुस्तक िकसके पास है। िहसाब न हो तो पुस्तक ‘खो जाती’ है
m
.co
पुस्तक लेना और अगला पाठक वंिचत रह जाता है।
m
seवाला अपना समय नही,ं
m l a
.co
पु तकालय की एक पित बीस पाठकों में बारी-बारी घूमती है। दे र करने
ag
3. न त त थ पर लौटाना स्
em
दू स रों का समय ले रहा होता है।
a s
gl4. पुस्तक पर कुछ न लखना, पन्ने न
a फाड़ना यह सावजिनक संपित्त है — मूल कतव्य (झ) इसी की रक्षा कहता है। और जापान वाली घटना
बताती है िक इसका दंड कभी-कभी पूरे दे श को भुगतना पड़ ता है।
गलत स्थान पर रखीcoपुस्m a s
5. पढ़ हुई पुस्तक यथास्थान रखना
िमले गी नहीeं।m
. तक ‘खोई हुई’ के बराबर हो जाती है — वह अलमारी में तो है, पर िकसी को
agl
l as
(या नधा रत े म)
6. खाना-पीना न ले जाना
g
aतेल, पानी और टुकड़ े प े खराब करते है ं और ची ंटी-कीड़ े बुलाते है।ं एक बूदँ चाय एक पूरे प े को
न्न न्न
om
पढ़ ने लायक नही ं छोड़ ती।
. c
s e mता का स मान।
यह वही ‘सु िच’ है िजसकी बात िनबंध करता है — दू स रों की एकाग
m la
7. मोबाइल मौन (silent) पर रखना रु म्
. co a g
e m
as
8. क्ष त क सूचना स्वयं दे ना ईमानदारी से बताई गई गलती सुधर जाती है; िछपाई गई गलती अगले पाठक के िसर आ पड़ ती है
a g l और उस पर आरोप लगता है।
se m
com g l a
.
इन सब नयम के पीछे एक ही सद्धांत है: पुस्तकालय ‘साझी संप त्त’ है, और साझी संप त्त तभी चलती है जब
e m a
s दे श है और पाठक उसका नाग रक।
हर व्य क्त अपने सुख से थोड़ा-सा त्याग करे — थोड़ी चुप्पी, थोड़ी सावधानी, थोड़ा अनुशासन। यही ‘म और मेरा
g l aछोटा
a
दे श’ का लघु रूप है: पुस्तकालय एक
. c om
कक्षा-चचा के लए एक प्रश्न: य द पुस्तकालय म कोई नयम-पालक न हो — न लाइ े रयन, न र जस्टर — तब भी
m से नभाए जाते ह।
क्या आप ये नयम मानगे? जो ‘हाँ’ कहता है, वह समझ गया क नयम डर से नह , eभाव
s
m a
m .co agl
l a se
ag
.c
m
ल
े ल प म पुस्तक — पृष्ठ 133
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 39 of 69
Page 41
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
अभ्यास › सृजन › ेल ल प म पुस्तक
सृ ज न पत्र-ले ख न
प्र.1 आपके वद्यालय म रोचक पुस्तक का भंडार है परंतु आपके ‘दृ ष्टबा धत’ सहपाठ स्वयं पढ़कर इनका आनंद नह
उठा पाते ह। प्रधानाध्यापक को ेल ल प म पुस्तक मँगवाने के संदभ म पत्र ल खए।
यह औपचा रक (कायालयी) पत्र है। इसम चार बात अवश्य होनी चा हए — (1) समस्या का स्पष्ट कथन, (2) माँग, (3) कारण/
लाभ, और (4) व्यावहा रक सुझाव क यह कैसे संभव है। नीचे पूरा नमूना पत्र दया गया है।
Page 40 of 69
Page 42
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर:
सेवा म,
प्रधानाध्यापक महोदय,
राजक य उच्चतर माध्य मक वद्यालय,
सहारनपुर, उत्तर प्रदे श
वषय — वद्यालय पुस्तकालय के लए ेल ल प म पुस्तक मँगवाने हेतु प्राथना-पत्र।
महोदय,
स वनय नवेदन है क म कक्षा नौ ‘अ’ का वद्याथ ँ और वद्यालय क पुस्तकालय-स म त का सदस्य भी ँ।
हमारे पुस्तकालय म कहानी, जीवनी, वज्ञान और खेल — सभी वषय क रोचक पुस्तक का अच्छा भंडार है,
जसका लाभ हम सब प्र त दन उठाते ह।
कतु हमारी कक्षा म तीन दृ ष्टबा धत सहपाठ ह। वे कक्षा म सबसे अ धक ध्यान से सुनते ह और उनके प्रश्न भी
सबसे अच्छे होते ह, पर पुस्तकालय क एक भी पुस्तक वे स्वयं पढ़कर नह पढ़ पाते। उन्ह हर बार कसी साथी क
प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इससे उनका आत्म वश्वास घटता है और पढ़ने का वह आनंद, जो अकेले पढ़ने म है, उन्ह
कभी नह मल पाता।
अतः आपसे वनम्र प्राथना है क वद्यालय पुस्तकालय के लए ेल ल प म कुछ पुस्तक मँगवाने क कृपा कर।
साथ ही य द संभव हो तो कुछ श्रव्य (ऑ डयो) पुस्तक तथा एक ‘स्क्र न रीडर’ युक्त संगणक भी उपलब्ध करा
दया जाए। हमने पता कया है क राष्ट्रीय दृ ष्टबा धताथ संस्थान (दे हरादून) तथा कुछ स्वयंसेवी संस्थाएँ वद्यालय को
ेल पुस्तक उपलब्ध कराती ह, और ‘सुगम्य पुस्तकालय’ जैसी ऑनलाइन सेवाएँ नःशुल्क ह।
हम वद्याथ भी इसम सहयोग दे ना चाहते ह। हमारी कक्षा ने नश्चय कया है क वा षकोत्सव म एक ‘पुस्तक-दान
स्टॉल’ लगाकर जो रा श एकत्र होगी, वह इसी काय म लगाई जाएगी। इसके अ त रक्त हम स्वेच्छा से पाठ्यपुस्तक
के अंश रकॉड करके श्रव्य-रूप म तैयार करने को भी तत्पर ह।
आशा है, आप हमारी इस प्राथना पर सहानुभू तपूवक वचार करगे। इससे हमारे सहपा ठय को न केवल पुस्तक
मलगी, ब ल्क यह भरोसा भी मलेगा क यह वद्यालय सबका है।
सधन्यवाद।
आपका आज्ञाकारी शष्य
अ.ब.स.
कक्षा — नौ ‘अ’, अनुक्रमांक — 17
दनांक — 12 अगस्त 20××
Page 41 of 69
Page 43
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
इस पत्र क तीन खू बयाँ, जन्ह आप अपने पत्र म भी र खए:
1. दया नह , अ धकार क भाषा। पत्र म यह नह लखा क ‘बेचारे बच्च पर तरस खाइए’, ब ल्क यह लखा क
उन्ह भी वही आनंद मलना चा हए जो सबको मलता है। यही सं वधान क समता का भाव है।
2. माँग के साथ समाधान। केवल माँगना आसान है; पत्र म ोत भी बताए गए और वद्या थय का अपना योगदान
भी।
3. ठोस ववरण। ‘कुछ बच्चे ह’ नह — ‘तीन सहपाठ ह’। संख्या और उदाहरण पत्र को वश्वसनीय बनाते ह।
Did you know? ेल ल प का आ वष्कार ांस के लुई ेल ने सन् 1824 म, केवल पंद्रह वष क आयु म कया
था। इसम छह उभरे हुए बदुओं (3 पं क्त × 2 स्तंभ) के अलग-अलग संयोजन से अक्षर बनते ह। भारत म हद
स हत अनेक भारतीय भाषाओं के लए भारती ेल का प्रयोग होता है।
कृतज्ञता ज्ञापन — पृष्ठ 133
अभ्यास › सृजन › कृतज्ञता ज्ञापन
सृ ज न ले ख न
प्र.1 “अपने महान राष्ट्र क पराधीनता के द न दन म जन लोग ने अपने रक्त से गौरव के द प जलाए...” दे श के
वकास म सभी का सहयोग होता है जो सीमा पर तैनात ह और जो दे श के भीतर ह, जैसे– अध्यापक, कसान,
श्र मक, कलाकार, वैज्ञा नक, अ भयंता आ द। इन सभी के अमूल्य योगदान के लए कृतज्ञता ज्ञापन तैयार करके
ल खए।
कृतज्ञता ज्ञापन धन्यवाद-पत्र से थोड़ा अलग होता है — इसम हम कसी एक उपकार का बदला नह चुकाते, ब ल्क सावज नक
रूप से यह स्वीकार करते ह क हमारा जीवन दूसर के श्रम पर टका है। इसे प्राथना-सभा म पढ़ा जा सकता है या वद्यालय क
द वार-प त्रका पर लगाया जा सकता है।
Page 42 of 69
Page 44
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर — कृतज्ञता ज्ञापन
“ जन हाथ से हमारा दन बनता है”
हम, राजक य उच्चतर माध्य मक वद्यालय के वद्याथ , आज यह कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्तुत करते ह —
हम आभारी ह उन सै नक के, जो हम से ढक चो टय और तपते रे गस्तान म रातभर जागते ह ता क हम चैन से
सो सक। हम जानते ह क हमारी न द उनक जागरण क क मत पर मलती है। फ्लाइंग ऑ फसर नमल जीत सह
सेख जैसे वीर, जन्ह ने छब्बीस वष क आयु म आकाश म अकेले लड़ते हुए प्राण दे दए, हम हर दन याद ह।
हम आभारी ह उन कसान के, जनके पसीने से हमारी थाली भरती है। उनके लए न र ववार होता है, न अवकाश।
हम प्र तज्ञा करते ह क अपनी थाली म अन्न का एक दाना भी व्यथ नह छोड़गे।
हम आभारी ह उन श्र मक के, जनके हाथ ने वह भवन खड़ा कया जसम हम पढ़ते ह, वह सड़क बनाई जस पर
हम चलते ह, और वह पुल बाँधा जससे हमारा गाँव नगर से जुड़ा।
हम आभारी ह अपने अध्यापक के, जो हम अक्षर ही नह , दृ ष्ट दे ते ह; और उन सफ़ाईक मय के, जो हमारे उठने
से पहले हमारी गली साफ़ कर चुके होते ह।
हम आभारी ह च कत्सक , नस , आशा और आँगनवाड़ी कायकताओं के, जन्ह ने महामारी के दन म अपने
घर से पहले हमारे घर क चता क ।
हम आभारी ह वैज्ञा नक और अ भयंताओं के, जन्ह ने हम ट का, बजली, रेल और अंत रक्ष तक पहुँचने का
साहस दया; और उन कलाकार के, जन्ह ने हम यह सखाया क जीवन केवल जीने का नह , सुंदर बनाने का भी
नाम है।
और हम आभारी ह उन अन गनत स्वतंत्रता सेना नय के, जन्ह ने “अपने रक्त से गौरव के द पक जलाए” और
उन्ह “घोर अंधकार और भयंकर बवंडर के झकझोर म” बुझने नह दया।
इन सबका ऋण हम धन से नह चुका सकते। हम इसे केवल आचरण से चुका सकते ह — अपना काम ईमानदारी से
करके, सावज नक संप त्त क रक्षा करके, अपने प रवेश को स्वच्छ रखकर, और अपने दे श के वषय म कोई हीन
बात बना जाँचे न कहकर।
क्य क जैसा हमारी पाठ्यपुस्तक का नबंध कहता है — “म और मेरा दे श दो अलग चीज तो ह ही नह ।”
— समस्त वद्याथ , कक्षा नौ
दनांक — 15 अगस्त 20××
Page 43 of 69
Page 45
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
कृतज्ञता ज्ञापन लखने का ढाँचा:
m as e
.co
1. शीषक — छोटा और भावपूण।
a g l
a s em
2. ‘हम आभारी ह…’ क आवृ त्त — हर वग के लए एक अनुच्छेद। यही आवृ त्त उसे लय और ग रमा दे ती है।
a g3.l हर वग के साथ एक ठोस चत्र — ‘ कसान’ लखकर मत रु कए; ‘ जनके लए न र ववार होता है, न अवकाश’
जो ड़ए।
. c om
4. प्र तज्ञा — कृतज्ञता तभी पूरी होती है जब उसके साथ कोई संकल्प हो।
ag
s e mतथा त थ।
a
5. समापन — एक उद्धरण या पं क्त, और हस्ताक्षर
agl
co m
em.
as
वज्ञापन — पृष्ठ 134
m l
.co
अभ्यास › सृजन › वज्ञापन
a g
a s em
a gl
सृ ज न वज्ञापन
m a s
.co agl
प्र.1 “ठ क मनुष्य को अपना मत द।” उपयुक्त पं क्त म चुनाव म योग्य उम्मीदवार को चुनने का संदेश दया गया है।
se m
आप भी चुनाव म योग्य उम्मीदवार को चुनने के लए एक आकषक वज्ञापन तैयार क जए।
g l a
उत्तर a
अच्छे वज्ञापन म पाँच चीज होती ह — आकषक शीषक, एक स्पष्ट संदेश, थोड़े-से शब्द, एक चत्र/प्रतीक और अंत म ‘क्या
co m
m .
e
करना है’ (call to action)। नीचे एक तैयार नमूना वज्ञापन दया गया है, जसे आप चाट पेपर पर बड़ा बनाकर लगा सकते ह।
m l as
m .co a g
l a se सोिचए, िफर दबाइए बटन
a g
m
एक मत — पाँच साल का फैसला
omय को अपना मत दे।ं ” l a se
“ठीक.cमनु a g
m
a—seकन्हैयालाल िमश्र ‘पभाकर’, ‘मैं और मेरा दे श’
ष्
agl
✓ यह देिखए ✗ यह नही ं
co m
• ईमानदारी और स्वच्छ छिव • उत्तेज क नारे और शोर
m .
a se
com • पानी, सड़ क, िवद्यालय, अस्पताल l
• िपछले पाँच साल का काम • जाित, धम, भाषा की अपील
m . ag पलोभन
ase
• पै सा, उपहार,
agl
• सबको साथ लेकर चलने की आदत • अफ़वाह और झूठे वीिडयो
• िहसाब देने का साहस • “मेरे एक वोट से क्या होगा”
.c
s e m
com a
?m
18 के हु एe
. agl
a s नाम जुड़वाइए · मतदान के िदन सबसे पहले पहुँिचए
agl
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 44 of 69
Page 46
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
नमूना वज्ञापन — बाईं ओर ‘यह दे खए’, दाईं ओर ‘यह नह ’, ऊपर आकषक शीषक और नीचे क्या करना है, यह स्पष्ट नदश।
वज्ञापन का ऊपर के नमूने म आप क्या बदल सकते ह
अंग
शीषक (नारा) “सोिचए , िफर दबाइए बटन” “नारा नह , काम दे खए”; “मत बकता नह , दया जाता है”;
“पहले जाँ चए, फर चु नए”
उपशीषक “एक मत — पाँच साल का फै सला” “आपक उँ गली क स्याही, आपके गाँव का भ वष्य”
उद्धरण पाठ की पंिक्त — “ठीक मनुष्य को अपना मत कोई और सू क्त, पर ोत अवश्य ल खए
दे ं।”
चत्र/प्रतीक दो सूिचयाँ — हरी (करे ं) और लाल (न करे ं) स्याही लगी उँ गली, ई.वी.एम., तराजू, या मतदान-कद्र क कतार
नदश “18 के हुए ? नाम जुड़वाइए · मतदान के िदन “अपने घर के पाँच लोग को साथ ले जाइए”
सबसे पहले पहिु ँ चए ”
वज्ञापन बनाते समय तीन नयम: (1) शब्द कम — पचास से अ धक शब्द वाला पोस्टर कोई नह पढ़ता। (2)
एक ही संदेश — दो बात कहने वाला वज्ञापन कुछ भी नह कहता। (3) कोई भी वास्त वक दल, चह्न या व्य क्त का
नाम मत ल खए — वज्ञापन ‘योग्य उम्मीदवार चुनने’ का है, कसी के पक्ष म नह ।
स्वच्छता और आचरण — पृष्ठ 134
अभ्यास › सृजन › स्वच्छता और आचरण
सृ ज न चचा
प्र.1 “क्या आप कभी केला खाकर छलका रास्ते म फकते ह...” नबंध के इस अंश को पुनः प ढ़ए। इस प्रकार के और
कौन-कौन से आचरण हो सकते ह जनसे दे श के स दय को आघात लगता है? इस वषय पर अपने अ भभावक ,
सहपा ठय और शक्षक के साथ चचा क जए। (संकेत— ऐ तहा सक या सावज नक स्थान पर अपना नाम
आ द लखना।)
पहले दे ख ली जए क लेखक ने स्वयं कौन-से आचरण गनाए ह — “केला खाकर छलका रास्ते म फकना, अपने घर का कूड़ा बाहर
फकना, मुँह से गंदे शब्द म गंदे भाव प्रकट करना, इधर क उधर, उधर क इधर लगाना, अपना घर-दफ्तर-गली गंदा रखना, होटल -
धमशालाओं म, ज़ीन म, कोन म पीक थूकना, उत्सव -मेल -रेल और खेल म ठे लमठे ल करना।” ध्यान द जए क इनम केवल
गंदगी नह है — गंद बात और चुगली भी शा मल ह। यानी लेखक के लए ‘स दय’ का अथ सफ़ाई से बड़ा है; वह सुरु च है।
Page 45 of 69
Page 47
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
क्षेत्र और कौन-से आचरण स दय-बोध पर आघात करते ह
ऐ तहा सक स्थल मारक की दीवार या स्तंभ पर अपना और िमत्र का नाम खोदना/िलखना; मूित या नक्काशी को छू कर िघसना;
स्
िनिषद्ध स्थान पर चढ़ कर से ल्फी ले ना; पिरसर में प्लािस्टक की बोतले ं और खाने के पैके ट छोड़ आना; िबना
अनुमित फ़् लै श कै मरा चलाना।
सावज नक स्थान दीवारों पर पोस्टर िचपकाना और चुनाव के बाद न हटाना; बस -रे ल की सीट काटना या उस पर िलखना; पाक के
फू ल तोड़ ना; सावजिनक नल खुल ा छोड़ ना; िबजली के खंभे पर तार लटकाना; शौचालय गंद ा छोड़ आना।
सड़क और यातायात गाड़ ी से बाहर कचरा या थूक फे ं कना; िबना कारण हॉन बजाना; लाल बत्ती पार करना; गलत जगह वाहन खड़ ा
करना; सड़ क पर मलबा डालना।
उत्सव और आयोजन दे र रात तक तेज़ लाउडस्पीकर; झाँक ी-जुल ूस के बाद कचरे का ढे र छोड़ जाना; प्लािस्टक के झंडे और सजावट
सड़ क पर फे ं क दे ना; पटाखों से धुआँ और शोर; नदी-तालाब में पूजा-सामगी और पॉिलथीन डालना।
प्रकृ त पयटन-स्थल और पहाड़ ों पर कचरा छोड़ ना; पेड़ की छाल पर नाम खोदना; पिक्षयों को शोर से भगाना; पालतू या
आवारा पशुओं के साथ ू रता।
क्र
वाणी और व्यवहार ( जसे गाली-गलौज और अपशब्द ; िकसी की भाषा, वेशभूषा, कद -रंग या पदे श का मज़ ाक ; चुगली और अफ़ वाह —
प्रायः भुला दया जाता है) ले खक ने इसे “इधर की उधर, उधर की इधर लगाना” कहा है; अंतरजाल पर िबना जाँचे झूठा संदे श आगे
बढ़ ाना; कतार तोड़ ना; बड़ ों और से वाकिमयों से रूखा व्यवहार।
ये सब ‘दे श के स दय’ पर आघात क्य ह: क्य क दे श कोई दूर क वस्तु नह — वह वही गली, वही स्टे शन, वही
स्मारक और वही बातचीत है जसम हम रोज़ रहते ह। लेखक साफ़ कहता है — “आपके ारा दे श क संस्कृ त को
गहरी चोट पहुँच रही है।” कसी दे श क संस्कृ त उसक कताब म नह , उसके सावज नक व्यवहार म दखती है।
चचा से जो नकला (नमूना): दादाजी ने कहा — “पहले घर क दे हरी तक झाड़ू लगती थी, अब घर क सीमा तक।
जो गली को अपना नह मानता, वह दे श को क्या मानेगा?” अध्या पका जी ने जोड़ा — “कचरा फकने वाला यह
सोचता है क कोई दे ख नह रहा। सभ्यता क असली परीक्षा यही है — जब कोई न दे ख रहा हो।” और मेरे सहपाठ
ने सबसे अच्छ बात कही — “हम स्मारक पर नाम इस लए लखते ह क हम याद रखे जाना चाहते ह; पर याद तो वे
रखे जाते ह जन्ह ने कुछ बनाया, जन्ह ने कुछ बगाड़ा वे नह ।”
व्याकरण क बात — संदभ म शब्द — पृष्ठ 134 और 135
अभ्यास › भाषा से संवाद › व्याकरण क बात › संदभ म शब्द
भाषा से सं वाद शब्द क बात
प्र.1 ‘दरार’, ‘गाँठ’ और ‘पानी’ शब्द के प्रयोग को दे खए — ये संदभ के अनुसार भन्न- भन्न अथ दे ते ह। अब अपनी
पाठ्यपुस्तक म से ऐसे अन्य शब्द छाँटकर ल खए जो संदभ के अनुसार भन्न- भन्न अथ दे ते ह ।
पहले पुस्तक के दए हुए तीन शब्द को एक साथ दे ख ली जए, फर पाठ्यपुस्तक से छाँटे हुए दस और शब्द नीचे ता लका म ह।
Page 46 of 69
Page 48
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
शब्द शा ब्दक/मूल अथ दूसरा (लाक्ष णक) अथ — और पाठ्यपुस्तक का संदभ
दरार द वार म पड़ी चटक/तरेड़/फाँक/टू टन — संबंध या भाव म पड़ी फूट — “एक दन आनंद क इस द वार म एक
(पुस्तक म “क्या कोई भूकंप आया था, जससे द वार म दरार पड़ गई।”; “भेदभाव क भावना सामा जक एकता म दरार डालती
दया हुआ) दरार पड़ गई।” है।”
गाँठ धागे-रस्सी का बंधन — “माला गूँथते समय जोड़ने वाला अदृश्य बंधन — “वह गाँठ इतनी साफ है, जो नाग रक और
(पुस्तक म धागे के एक सरे पर गाँठ बाँध द जए।” दे श को एक साथ बाँधती है।”
दया हुआ)
पानी जल — “बहुत प्यास लगी है, पानी द जए।” (i) लज्जा — “वह पानी-पानी हो गया।” (ii) बहुतायत — “चार ओर
(पुस्तक म पानी-पानी हो गया।” (iii) इज्जत/तेज — “इनका तो पानी ही उतर चुका
दया हुआ) है।”
िसर / शरीर का अंग मान-सम्मान — “एक युवक ने अपने काम से अपने दे श का सर ऊँचा
मस्तक कया था, वह एक युवक ने अपने दे श के मस्तक पर कलंक का ट का
लगाया।” (म और मेरा दे श)
माथा ललाट प्र तष्ठा का स्थान — “भारतवष क गुलामी क लज्जा का कलंक मेरे
माथे पर लगा रहा।”
आँख दे खने क इं द्रय राय, दृ ष्टकोण — “जाने कतने वष तक संसार क आँख म उसे
लां छत करता रहा।”
हाथ शरीर का अंग — “जीवन कोई आपके हाथ (i) ारा/माध्यम — “आपके हाथ दे श के सामू हक मान सक बल का
क गु ड़या थोड़े ही है” ास हो रहा है।” (ii) खो दे ना — “उससे भड़ना जान से हाथ धोना
है।” (दो बैल क कथा)
मुँह शरीर का अंग — “तीसरी उँ गली शहद म कहना, बोल पड़ना — “उनके मुँह से नकला— जापान म शायद अच्छे
भरकर बूढ़े के मुँह म दे द ” फल नह मलते!”
नाक शरीर का अंग — “उस नदयी ने हीरा क इज्जत, प्र तष्ठा — ‘नाक कटना’, ‘नाक ऊँची रखना’।
नाक पर खूब डंडे जमाए।” (दो बैल क
कथा)
दीपक / दीप जलने वाला दया ब लदान और गौरव का प्रतीक — “ जन लोग ने अपने रक्त से गौरव के
द पक जलाए और… उन द पक को बुझने से बचाते रहे।”
भूकं प धरती का काँपना भीतरी उथल-पुथल — “यह भूकंप भी कसी प्रांत या प्रदे श म नह उठा,
मेरे मानस म ही उठा था।”
तरे ड़ दरार (शब्द-संपदा का अथ) संदेह क हल्क रेखा — “कण के सघन आत्म वश्वास म संदेह क तरेड़
डाल द ।”
मानस मन, चत्त (i) मानसरोवर (झील) (ii) रामच रतमानस (ग्रंथ) — शब्द-संपदा म तीन
अथ एक साथ दए गए ह।
बात कथन, वाक्य — “उसने यह शब्द सुन लए… वषय/प्रसंग जो बढ़ता या खलता है — “यह बात को खलने का, आगे
अपनी बात बीच म छोड़कर भागा” बढ़ने का अवसर दे ता है।”
Page 47 of 69
Page 49
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
यह कैसे होता है — भाषा का नयम: जब कोई शब्द अपने मूल (अ भधा) अथ से हटकर कसी समानता या
संबंध के कारण नया अथ दे ने लगता है, तब उसे लक्षणा कहते ह। ‘द वार म दरार’ मूल अथ है; ‘आनंद क द वार म
दरार’ लक्षणा है — क्य क दोन म समानता यह है क जो अखंड लगता था, वह टू ट गया। इसी तरह ‘ सर’ ऊँचाई
का अंग है, इस लए वह सम्मान का प्रतीक बन गया।
Try This: एक शब्द चु नए — जैसे ‘आग’ — और तीन वाक्य बनाइए जनम उसका अथ बदलता जाए। (1) चूल्हे
म आग जल रही है। (2) उसके भाषण म आग थी। (3) दोन दल के बीच आग लगाने का काम अफ़वाह ने कया।
यही अभ्यास ‘बल’, ‘रंग’, ‘चाल’, ‘पेट’ और ‘ म ’ के साथ भी क जए।
व्याकरण क बात — मलते-जुलते भाव वाले ‘शब्द-युग्म’ — पृष्ठ 135
अभ्यास › भाषा से संवाद › व्याकरण क बात › मलते-जुलते भाव वाले ‘शब्द-युग्म’
भाषा से सं वाद शब्द-यु ग् म
प्र.1 “अपने पड़ोस म खेलकर, पड़ो सय क ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।” / “इस तरह एक मनुष्य से भरा-पूरा
नगर बनकर म खड़ा हुआ था।” — पहले वाक्य म ‘ममता-दुलार’ और दूसरे वाक्य म ‘भरा-पूरा’ शब्द मलता-
जुलता भाव दे रहे ह। ये शब्द-युग्म ह। … आप इस नबंध म से मलते-जुलते अथ वाले और पुनरुक्त (एक ही शब्द
को फर से कहना) शब्द-युग्म छाँटकर ल खए।
नबंध म तीन प्रकार के शब्द-युग्म मलते ह। नीचे उन्ह अलग-अलग छाँटकर, अथ और प्रयोग-पं क्त स हत दया गया है।
(1) मलते-जुलते अथ वाले शब्द-युग्म (पयायवाची/समानाथ युग्म)
Page 48 of 69
Page 50
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
शब्द-युग्म भाव नबंध क पं क्त
m as e
ममता-दुलार(पुस्तक म
.co
स्नेह और लाड़
a
“पड़ो सय क ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।”
g l
s em
दया हुआ)
a
gl रा(पुस्तक म दया
aभरा-पू संपूण, समृद्ध “एक मनुष्य से भरा-पूरा नगर बनकर म खड़ा हुआ था।”
हुआ)
co m
पास -पड़ ोस आस-पास का क्षेत्र
e m .“उनके प रवार, उनके पास-पड़ोस और उनके नगर ने…” ag
g l as
ज्ञ ान-भंडार a
ज्ञान का सं चत कोश “वहाँ के सं चत ज्ञान-भंडार का उपयोग कर”
com
घूम-िफरकर भ्रमण करके “अपने नगर म घूम- फरकर, वहाँ के वशाल समाज का संपक पा”
.
a s emहुआ हो”
com
दाल -रोटी
agl
साधारण भोजन, जी वका “जो बेचारा अपनी ही दाल-रोट क फक्र म लगा
.
m / सौंदय-बोध
शिक्तe-बोध
las
श क्त क और सुरु च क “एक श क्त-बोध और दूसरा स दय-बोध”
ag
समझ
s
मोती-हीरे
m a
बहुमूल्य रत्न “क्या उसम मोती-हीरे मले हुए थे?”
m.co“ कसी भी प्रकार के तोड़-फोड़ का काय होने पर…” agl
se
तोड़ -फोड़ ध्वंस
g l a
चाल -ढाल a
रहन-सहन का ढं ग शब्द-संपदा म ‘ठसक’ के अथ म — “चाल-ढाल का बनावट पन”
रीित-िरवाज
co m
.
परंपरा और प्रथा अभ्यास (पृष्ठ 128) — “धा मक री त- रवाज को मनाने पर रोक…”
em
com
कद -काठी, मुँहतोड़ ,
ताबड़ .तोड़
शरीर क बनावट / करारा /
दया”, “ताबड़तोड़ बमबारी” gl
as
‘साथ-साथ पढ़’ खंड म — “बहुत लंबी कद-काठ के थे”, “मुँहतोड़ जवाब
a
sem
लगातार
a
agl (2) पुनरुक्त शब्द-युग्म (एक ही शब्द दोहराया गया)
se m
com g l a
m . a
ase
agl
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 49 of 69
Page 51
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
शब्द-युग्म दोहराने से क्या नबंध क पं क्त
जुड़ा
छोटी-छोटी बहुलता — अनेक “हरएक छोट -छोट बात पर ध्यान दे ता ँ”
छोट बात
बड़ ी-बड़ ी / बड़ े-बड़ े बहुलता और बल “जाने दो बड़ी-बड़ी बात”; “दे श के बड़े-बड़े लोग, व ान और धनी
तरसते ह!”
पूरा-पूरा पूणता पर बल “अपने दे श के सम्मान का पूरा-पूरा भाग मुझे मले”
बार-बार पुनरावृ त्त “बार-बार के इस उल्लेख ने कण के सघन आत्म वश्वास म…”
चलते-चलते क्रया क नरंतरता “ली जए, चलते-चलते आपको इस प्रश्न का भी उत्तर दे ही दूँ ।”
अलग-अलग, िकन-िकन, िकस - वस्तार और व वधता अभ्यास म — “आप अपने कन- कन काय म कस- कसका क्या
िकसका, क्या-क्या सहयोग लेते ह?”
खील -खील पूरी तरह बखर जाना (दो बैल क कथा म) “भाड़ खील-खील ही नह हो गया” — यह पं क्त
इसी नबंध म भी आई है।
साथ-साथ, आस -पास सहचय और नकटता “साथ-साथ पढ़”; “अपने आस-पास के व भन्न उदाहरण के ारा…”
(3) वपरीत भाव वाले शब्द-युग्म — पुस्तक ने बताया है क युग्म “कभी वपरीत भाव भी दे ते ह”। नबंध म इनक भी भरमार है
—
युग्म नबंध क पं क्त
हीनता–गौरव “दे श क हीनता और गौरव का ही फल उसे नह मलता…”
उ च्चता–हीनता “दे श क उच्चता और हीनता को हम तोल सक?”
अिधकार–कतव्य “यह मेरा कतव्य है… यह मेरा अ धकार है।”
पूणता–अपूणता “मेरी पूणता को एक ही ठसक म अपूणता क कसक से भर दया।”
इधर-उधर “इधर क उधर, उधर क इधर लगाते ह”
दे श–िवदे श, हाँ–ना “इसके उत्तर म सफ हाँ या ना से काम न चलेगा”
शब्द-युग्म भाषा को क्या दे ते ह: पुस्तक स्वयं कहती है — “इस प्रकार के शब्द के प्रयोग से भाषा म सजीवता
आती है।” तीन काम ये करते ह — (1) बल (‘पूरा-पूरा भाग’ केवल ‘पूरा भाग’ से अ धक ज़ोर दे ता है), (2)
वस्तार (‘छोट -छोट बात’ यानी अन गनत बात), और (3) लय — पढ़ते समय वाक्य म एक थाप-सी बन जाती है,
जो इस नबंध क बोलचाल वाली शैली के बहुत अनुकूल है।
Page 50 of 69
Page 52
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
व्याकरण क बात — शब्द क क ड़याँ/ ख
ं ला — पृष्ठ 135
अभ्यास › भाषा से संवाद › व्याकरण क बात › शब्द क क ड़याँ/ ंखला
भाषा से सं वाद उपसग-प्रत्यय
प्र.1 “म सोचा करता था क मेरी मनुष्यता म अब कोई अपूणता नह रही।” उपयुक्त वाक्य के रेखां कत शब्द
‘अपूणता’ म उपसग और प्रत्यय दोन का ही प्रयोग च त कया गया है। इस प्रयोग को समझकर नीचे दए गए
शब्द म उपसग और प्रत्यय शब्द पहचानकर ल खए— अलौ कक, नरक्षरता, सम्मा नत, अनावश्यक,
अपमा नत, अ भमानी
पुस्तक म ता लका क केवल पहली पं क्त (‘अपूणता’) भरी हुई है। नीचे पूरी ता लका भरकर द गई है।
शब्द उपसग मूल शब्द प्रत्यय
अपूणता (पुस्तक म दया हुआ) अ पूण ता
अलौिकक अ लोक इक
िनरक्षरता िनर् अक्षर ता
स म्मािनत सम् मान इत
अनावश्यक अन् आवश्यक — (कोई पत्यय नही)ं
अपमािनत अप मान इत
अिभमानी अिभ मान ई
Page 51 of 69
Page 53
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
हर शब्द का व ेषण — क्य ऐसा बना:
अपूणता = अ ( नषेध) + पूण + ता (भाववाचक) → ‘पूण न होने का भाव’।
अलौ कक = अ ( नषेध) + लोक + इक → ‘लोक’ से ‘लौ कक’ बना (इक प्रत्यय लगने पर पहला स्वर बढ़
जाता है — ओ ⟶ औ), फर ‘अ’ लगकर ‘अलौ कक’ = जो इस लोक का न हो, अ त।
नरक्षरता = नर् (अभाव) + अक्षर + ता → ‘अक्षर-ज्ञान न होने का भाव’। ध्यान द जए, ‘ नः/ नर्’ का रूप
आगे आने वाले वण के अनुसार बदलता है ( नधन, नष्फल, नश्चय)।
सम्मा नत = सम् (भली-भाँ त) + मान + इत → ‘ जसे सम्मान दया गया हो’। ‘सम् + मान’ क सं ध से
‘सम्मान’ बनता है।
अनावश्यक = अन् ( नषेध) + आवश्यक → ‘जो आवश्यक न हो’। यहाँ ‘अ’ नह , ‘अन्’ लगा — क्य क आगे
स्वर (आ) है। नयम याद र खए: व्यंजन से आरंभ हो तो ‘अ’ (अपूण, असत्य); स्वर से आरंभ हो तो ‘अन्’
(अनावश्यक, अनु चत, अनादर)। इस शब्द म कोई प्रत्यय नह है।
अपमा नत = अप (बुरा, नीचे) + मान + इत → ‘ जसका मान घटाया गया हो’। ‘अप’ का यही अथ अपयश,
अपकार, अपशब्द म भी है।
अ भमानी = अ भ (अपनी ओर, वशेष) + मान + ई ( वशेषण बनाने वाला) → ‘ जसे अपने ही मान का अ धक
भान हो’, घमंडी।
ध्यान दे ने क बात: ‘मान’ एक ही मूल शब्द है, पर उपसग बदलते ही अथ बलकुल बदल जाता है — सम्मान
(आदर), अपमान (अनादर), अ भमान (घमंड), स्वा भमान (अपनी ग रमा का बोध)। इसी नबंध म ‘सम्मान’ और
‘अपमान’ दोन बार-बार आए ह — “म अपने नगर के लोग का सम्मान करता था” और “मेरा कह भी और कोई भी
अपमान कर सकता है”। एक ही मूल से बने दो शब्द, और दोन के बीच पूरा नबंध खड़ा है।
अभ्यास के लए और शब्द (इसी पाठ से): पराधीनता = परा + अधीन + ता · अपूव = अ + पूव · नदयी = नर्
+ दया + ई · प्र त न धत्व = प्र त + न ध + त्व · सुरु च = सु + रु च · कुरु च = कु + रु च · सव त्तम = सव +
उत्तम (सं ध) · तेजस्वी = तेजस् + वी · सा ह त्यक = सा हत्य + इक। (उपसग और प्रत्यय क जानकारी आपक
पाठ्यपुस्तक के ‘क्या लखूँ?’ पाठ म भी द गई है।)
ग त व धयाँ — पृष्ठ 136
Page 52 of 69
Page 54
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
अभ्यास › ग त व धयाँ
ग त व धयाँ प रचचा
प्र.1 ‘दे श मात्र एक भौगो लक सीमा क्षेत्र नह है।’ इस वषय पर प रचचा का आयोजन क जए और प रचचा म
उभरकर आए बदुओं क रपोट तैयार क जए। रपोट को पावर प्वांइट प्रस्तुतीकरण या चाट के माध्यम से कक्षा
म प्रस्तुत क जए।
यह तीन चरण का काम है — प रचचा कराना, रपोट बनाना, प्रस्तुत करना। तीन का तरीका और एक पूरा नमूना नीचे दया
गया है।
चरण 1 — प रचचा कैसे आयो जत कर
कक्षा को चार समूह म बाँ टए — भू म, जन, संस्कृ त-भाषा, मूल्य-सं वधान। हर समूह अपने पक्ष से तीन
तक तैयार करे।
एक संचालक और एक लेखक (जो बोड पर बदु लखता जाए) चु नए। हर वक्ता को दो मनट।
नयम — कसी क बात बीच म न काट; हर तक के साथ एक उदाहरण द; और अंत म हर समूह दूसरे समूह के
एक तक को स्वीकार करे। इससे प रचचा वाद- ववाद नह , साझी समझ बनती है।
चरण 2 — रपोट (नमूना)
Page 53 of 69
Page 55
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
प रचचा रपोट
m
वषय: ‘दे श मात्र एक भौगो लक सीमा क्षेत्र नह है।’
o l a se
c 20×× | स्थान: कक्षा नौ ‘अ’ | प्र तभागी: 38 वद्याथ , संचालन
दनांक: 22.अगस्त
a g— कक्षा प्र त न ध
se m
l a
g आए मुख्य बदु —
aउभरकर
co m
1. दे श = भू म + जन। य द दे श केवल भू म होता तो सीमाएँ बदलने से दे श बदल जाता। पर सीमाएँ बदलती रही ह
em .
और दे श क पहचान बनी रही है। नबंध का वाक्य — “म अपने दे श का नाग रक ँ और मानता ँ क म अपना ag
दे श ँ।”
g l as
a
2. दे श एक साझा स्मृ त है। स्वतंत्रता संग्राम, त्योहार, लोकगीत, महापुरुष — ये सब मान चत्र पर नह दखते, पर
com
दे श इन्ह से बनता है। “ जन लोग ने अपने रक्त से गौरव के द पक जलाए” — वे सीमा नह , स्मृ त ह।
e m.
3. दे श भाषाओं और संस्कृ तय का संगम है। एक ही शब्द ‘दे श’ बाईस भाषाओं म अलग-अलग ध्व नय म
m l as
.co g
मलता है (‘भाषा संगम’ दे खए) — पर भाव एक है। यही अनेकता म एकता है।
em a
s
4. दे श मूल्य से बनता है। सं वधान के मौ लक अ धकार और मूल कतव्य दे श को केवल भूखंड नह , एक वचन
a
gl बना दे ते ह।
a 5. दे श आचरण म दखता है। जापानी युवक ने फल दे कर और दूसरे दे श के वद्याथ ने चत्र चुराकर — दोन ने
m a s
c o agl
अपने-अपने दे श क प रभाषा गढ़ । दे श वही है जो उसके नाग रक करते ह।
.
m राय अमे रका, इंग्लड और ांस गए — पर उनका दे श उनके
s e
6. दे श प्रवासी के साथ भी जाता है। लाला लाजपत
aक्या क दे श सीमा म बंद नह रहता!
agl
माथे पर साथ गया। इससे बड़ा प्रमाण
असहम त के स्वर (जो रपोट म अवश्य दज होने चा हए): दो वद्या थय ने कहा क भौगो लक सीमा का महत्व
. c om
घटाया नह जाना चा हए — सीमा ही वह रेखा है जसक रक्षा म सै नक प्राण दे ते ह। कक्षा ने यह मानकर नष्कष
m a s
नकाला क सीमा दे श का शरीर है और जन, भाषा तथा मूल्य उसक आत्मा — दोन चा em
हए।
. co a gl
sem
a दो अलग चीज तो ह ही नह ।”
agl
नष्कष: दे श एक भौगो लक इकाई भी है, पर उससे कह अ धक वह एक सामू हक भावना है — “म और मेरा दे श
se m
com g l a
. a
रपोट प्रस्तुतकता: अ.ब.स., कक्षा नौ ‘अ’
m
ase
agl
चरण 3 — प्रस्तुतीकरण (स्लाइड/चाट क रूपरेखा)
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
com
m .
m ase
.co
a g l Page 54 of 69
Page 56
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
स्लाइड/चाट उस पर क्या हो
1. शीषक िवषय, क क्षा, ितिथ — और बीच में के वल एक पंिक्त: “दे श मात्र एक भौगोिलक सीमा क्षेत्र नही ं है।”
2. प्रश्न भारत का मानिचत्र और उस पर पश्न — “क्या यही पूरा भारत है?”
3–6. चार स्तंभ भूिम · जन · भाषा-संस्कृ ित · मूल्य — हर स्लाइड पर तीन-तीन िबंद ु और एक िचत्र।
7. प्रमाण पाठ की दो घटनाएँ — जापानी युवक और चोरी करने वाला िवद्याथ , आमने-सामने।
8. असहम त ‘सीमा का महत्व’ — िवरोधी तक को भी स्थान दीिजए ; यही अच्छी िरपोट की पहचान है।
9. नष्कष “सीमा शरीर है, नागिरक आ त्मा। ”
प्रस्तुतीकरण के तीन नयम: एक स्लाइड पर पचास से अ धक शब्द नह ; जो लखा है उसे पढ़कर मत सुनाइए,
उस पर बो लए; और अंत म कक्षा से एक प्रश्न पू छए — “आपके लए दे श का अथ क्या है?” प्रस्तु त तभी प रचचा
बनती है।
भाषा संगम — पृष्ठ 136
अभ्यास › भाषा से संवाद › भाषा संगम
भाषा से सं वाद भाषा सं ग म
प्र.1 “म अपने दे श का नाग रक ँ” — नीचे ‘दे श’ शब्द के लए सं वधान क आठव अनुसूची म स म्म लत कुछ
भारतीय भाषाओं म प्रयुक्त शब्द क सूची द गई है। … • इनके अ त रक्त य द आप ‘दे श’ शब्द को कसी और
भाषा म भी जानते ह तो उस भाषा म भी ल खए।
पहले पुस्तक क द हुई सूची एक बार व्यव स्थत रूप म दे ख ली जए —
Page 55 of 69
Page 57
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
भाषा ‘दे श’ के लए शब्द भाषा ‘दे श’ के लए शब्द
हद दे श नेपाली दे श, मुलुक, राष्ट्र
संस्कृत दे शः, क्षेत्रम् बांग्ला प्रदे श, अञ्चल, राज्य
पंजाबी दे स, दे श अस मया दे श, राज्य, प्रदे श
उदू ख़त्ता, इलाक़ा म णपुरी लैबाक, मफम, लम
कश्मीरी द श, मुलुँख ओ ड़आ दे श, राज्य, प्रदे श, अंचल
सधी दे शु, दे सु तेलुगु प्रदे शमु
मराठ दे श त मल इडम्, परदे शम्
गुजराती दे श, प्रदे श मलयालम दे शम्
क कणी दे श कन्नड़ दे श
अब कुछ और भाषाएँ और बो लयाँ जो ड़ए —
भाषा / बोली ‘दे श’ के लए शब्द
भोजपुरी, अवधी, बज, मैिथली, राजस्थानी, हिरयाणवी, दे स / दे श (इन सबमें रूप लगभग एक ही है — यही िहंद ी-पदे श की भािषक एकता
छत्तीसगढ़ ी का पमाण है)
डोगरी दे स
संथाली िदसोम
बोडो हादोर / हा (‘हा’ का अथ है भूिम)
अंगेज़ी country, nation, land
अरबी/फ़ ारसी से आए शब्द जो िहंद ी-उदू में चलते है ं मुल्क , वतन, सरज़ मीन
इस सूची से क्या दखता है — तीन बात:
1. एक ही मूल, अनेक रूप। संस्कृत ‘दे श’ से दे स, दे सु, द श, दे शम्, दे शमु, परदे शम् — सब नकले ह। ध्व न
बदली, अथ नह । यही भारतीय भाषाओं का साझा भंडार है।
2. कुछ भाषाओं ने अपने शब्द गढ़े । म णपुरी का ‘लैबाक’ और ‘लम’, बोडो का ‘हा’, संथाली का ‘ दसोम’ — ये
संस्कृत-मूल के नह ह। भारत म केवल एक भाषा-प रवार नह है।
3. कुछ शब्द बाहर से आकर अपने हो गए। उदू का ‘ ख़त्ता’ और ‘इलाक़ा’, कश्मीरी-नेपाली का ‘मुलुक/मुलुँख’
— अरबी-फ़ारसी से आए, पर आज उतने ही भारतीय ह जतना ‘दे श’।
इसी लए यह डब्बा ‘भाषा संगम’ कहलाता है — जहाँ अनेक भाषाएँ एक ही अथ पर आकर मलती ह।
Page 56 of 69
Page 58
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
Try This: कक्षा म जतनी मातृभाषाएँ ह, उतने कागज़ बनाइए और हर कागज़ पर ‘दे श’ लखकर एक चाट पर
लगाइए। फर एक-एक वद्याथ अपनी भाषा म उसका उच्चारण करके सुनाए। अंत म ग नए — कतने शब्द म ‘द’
क ध्व न सुनाई द ?
प्र.2 • उपयुक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा म भी ल खए। (वाक्य — “म अपने दे श का नाग रक ँ”)
नीचे यह वाक्य कुछ भारतीय भाषाओं म दे वनागरी लप्यंतरण के साथ दया गया है। आप इसम अपनी मातृभाषा क पं क्त जो ड़ए
और कक्षा म सबक पं क्तयाँ एक ही चाट पर लगाइए।
Page 57 of 69
Page 59
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श AglaSem · NCERT Solutions
भाषा “म अपने दे श का नाग रक ँ”
हद म अपने दे श का नाग रक ँ।
संस्कृ त अहं स्वदे शस्य नागिरकः अिस्म।
पंजाबी मैं आपणे दे स दा नागिरक हाँ।
उदू मैं अपने मुल्क का शहरी हू।ँ
भोजपुरी हम आपन दे स के नागिरक हईं।
मैिथली हम अपन दे स क नागिरक छी।
मराठी मी माझ्या दे शाचा नागिरक आहे।
गुजराती हंु मारा दे शनो नागिरक छु ं।
नेपाली म मेरो दे शको नागिरक ह।
ुँ
कोंक णी हांव म्हज्या दे शाचो नागिरक।
बांग्ला आिम आमार दे शेर नागिरक।
असिमया मइ मोर दे शर नागिरक।
ओिड़ आ मुँ मो दे शर नागिरक।
तेल ुग ु नेन ु ना दे श पौरुिडिन।
तिमल नान् एन् नाि न् कु िडमहन्।
क ड़
न्न नानु न दे शद पजे।
न्न
मलयालम ञान् ए न्ऱे राज्यित्तन्ऱे पौरनाण्।
अंगेज़ी I am a citizen of my country.
वाक्य लखकर ये तीन बात दे खए:
1. क्रया अंत म आती है। ‘ ँ’, ‘आहे’, ‘छु ं ’, ‘हुँ’, ‘अ स्म’ — लगभग हर भारतीय भाषा म वाक्य क्रया पर
समाप्त होता है, जब क अंग्रेज़ी म क्रया (am) बीच म आ जाती है।
2. ‘अपना’ का रूप बदलता है, भाव नह । अपने / आपणे / आपन / माझ्या / मारा / मेरो / म्हज्या / आमार /
मो — सब ‘अपना’ ही कह रहे ह।
3. ‘नाग रक’ शब्द अ धकांश भाषाओं म ज्य -का-त्य मलता है — त मल म ‘कु डमहन्’, तेलुगु म ‘पौरुडु ’,
उदू म ‘शहरी’ — पर ये भी उसी अथ के अपने-अपने शब्द ह।
Page 58 of 69
Page 60
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 7 म और मेरा दे श
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
ध्यान र खए: ऊपर के वाक्य दे वनागरी म लप्यंत रत ह, इस लए उच्चारण म थोड़ा अंतर रह सकता है। अपनी
m a s emउस भाषा को
gl है।
मातृभाषा क पं क्त उसी ल प म भी ल खए जसम वह भाषा लखी जाती है, और य द हो सके तो
co बड़े से एक बार जाँच करा ली जए — यही ‘भाषा संगम’ का असली अभ्यास
बोलने वाले .कसी
a
a s em
agl
m और 137 co ag
झरोखे से — लाला लाजपत राय के वचार — पृष्ठ 136
m .
अभ्यास › झरोखे से
as e
झरोखे से अ त रक्त पठन a g l
co m
se m.
प्र.1 इस नबंध म स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय का उल्लेख कया गया है। इसम नाग रक के कतव्य एवं
o m l a
.c नभरता’: “प्रग त का तात्पय है स्वतंत्रता क ओर प्रस्थान। तुम्हारे पूवजagने तुम्ह यही सखाया है क जैसे
अ धकार क बात क गई है। अब आप लाला लाजपत राय के नीचे दए गए कुछ वचार को प ढ़ए। —
m
se ही तुमम पर- नभरता पनपती है, स्वतंत्रता पलायन कर जाती है। य द पर- नभरता को पूणरूपेण नह त्याग सकते
‘आत्म
a
agl तो एक सीमा तक कम तो कर ही सकते हो। आत्म नभरता और आत्म वश्वास क आदत डालो, कसी को नाराज
s
करने या परेशान करने के इरादे से नह , वरन पुरुषाथ क भावना से ऐसा करो।” — यूरोप से भारत वापसी पर
m a
.co agl
स्वागत के अवसर पर (बंबई, 20 फरवरी 1920)
se m
g l a
a
भाव — लालाजी कहते ह क प्रग त और स्वतंत्रता एक ही दशा के दो नाम ह। जस क्षण कसी व्य क्त या राष्ट्र म पर- नभरता
. c om
(दूसर पर आ श्रत रहने क आदत) पनपती है, उसी क्षण स्वतंत्रता चुपचाप खसक जाती है। इस लए आत्म नभरता और
s e mअपने प रश्रम पर भरोसे क
आत्म वश्वास को आदत बनाना चा हए — और वह भी कसी के प्र त े ष से नह , ब ल्क पुरुषाथ यानी
भावना से।om
. c a gla
a s em
a gl वाक्यांश उसका आशय
se m
om a
जो कदम आपको अिधक स्वतंत्र बनाए , वही स च्ची पगित है। िजस िवकास से परावलंबन
l
“प्रग त का तात्पय है स्वतंत्रता क ओर प्रस्थान”
बढ़ े ,cवह
. पगित नही ं।
a g
e m
s परतं ता पहले बाहर नही,ं भीतर आती है — आदत बनकर। तब जंजीर की ज रत नही ं
“जैसे ही तुमम पर- नभरता पनपती है, स्वतंत्रlताa
पलायन कर जाती है” a g रहती।
त्र रू
m , पर आरंभ तो िकया ही
यह व्यावहािरक सलाह है। सब कु छ एक साथ नही ं छोड़ ा जाoसकता
c
.
“पूणरूपेण नह त्याग सकते तो एक सीमा तक
जा सकता है। यही ‘स्वदे शी’ का सहज रूप है। m
a se
कम तो कर ही सकते हो”
omको नाराज करने… के इरादे से नह , वरन
.“cकसी l
g ,ं अपने बल पर खड़ े होने का नाम है। यह घृणा
आ मिनभरता िकसी के िवरोध का नामaनही
m
ase पुरुषाथ क भावना से”
त्
agl
नही,ं आत्मबल की बात है।
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 59 of 69