aglasem.com
Home Schools Admission Career Mock Test PDF Docs Playground
ClassChoose class
StateSelect state

NCERT Solutions Class 9 Sanskrit Parishisht 2 समासः

AglaSem पर कक्षा 9 संस्कृत परिशिष्ट 2 समासः (शारदा) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Appendix 2 (Sharada).
NCERT Solutions Class 9 Sanskrit Parishisht 2 समासः - Page 1 of 42

Finished viewing? Save it for later —

Download NCERT Solutions Class 9 Sanskrit Parishisht 2 समासः (PDF · 42 pages)
Downloaded 30 times

About NCERT Solutions Class 9 Sanskrit Parishisht 2 समासः

NCERT Solutions Class 9 Sanskrit Parishisht 2 समासः is available here for free download. Published by NCERT for Class 9, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (42 pages). Candidates preparing for Class 9 can use NCERT Solutions Class 9 Sanskrit Parishisht 2 समासः to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

How can I download NCERT Solutions Class 9 Sanskrit Parishisht 2 समासः?

Open this page and click the Download button to save NCERT Solutions Class 9 Sanskrit Parishisht 2 समासः as a PDF. It is completely free on AglaSem Docs.

Is NCERT Solutions Class 9 Sanskrit Parishisht 2 समासः free to download?

Yes. NCERT Solutions Class 9 Sanskrit Parishisht 2 समासः can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

How many pages does NCERT Solutions Class 9 Sanskrit Parishisht 2 समासः have?

NCERT Solutions Class 9 Sanskrit Parishisht 2 समासः contains 42 pages, which you can read online or download together as a single PDF.

Where can I find more Class 9 study material?

You can find more Class 9 question papers, sample papers, syllabus, and answer keys on AglaSem Docs.

NCERT Solutions Class 9 Sanskrit Parishisht 2 समासः – Text

Read the full text of this solution below — useful to quickly search, copy and reference the content online without downloading the PDF.

📄 View text version (42 pages)

Page 1

F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा9

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 13: प र शष्टम् २ — समासः

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — शारदा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

167 – 176 11 36 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 41 pages

Page 2

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 9 · सं स्कृ त · शारदा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 13: प र शष्टम् २ — समासः
यह पृष्ठ शारदा (कक्षा ९) का प र शष्टम् २ — समासः है — यह कोई पाठ नह , प र शष्ट (reference section) है, और पुस्तक इस पर कोई
अभ्यास नह दे ती; पृष्ठ 167 से 176 तक न कोई प्रश्न-संख्या है, न रक्त ान, न ‘अभ्यासाद् जायते स द्धः’ जैसा कोई खण्ड — हर ता लका दोन
ओर से भरी हुई छपी है, इस लए यहाँ ‘उत्तर कहाँ ह’ यह प्रश्न ही नह उठता। यह प र शष्ट सखाता है क दो या अ धक अथवान् पद मलकर एक
पद कैसे बनते ह — समास क प रभाषा, पूवपद-उत्तरपद, वग्रहवाक्य तथा उसके दो भेद (स्वपद वग्रह · अस्वपद वग्रह), केवलसमास और
वशेषसमास का वभाजन, ‘कौन-सा समास है’ यह तय करने क समासस्य नणयः व ध चार सा धत उदाहरण के साथ, और फर चार
वशेषसमास — तत्पुरुष ( वभ क्ततत्पुरुष षड् वध · कमधारय नवधा · द्वगु त्र वध · नञ्-प्रभृ त), द्वन्द्व (इतरेतर · समाहार), बहु ी ह (सामान्य षोढा
· वशेष नवधा) तथा अव्ययीभाव (बीस भेद) — हर भेद के लए समस्तपद और वग्रह क पूरी ता लका। छात्र इसे कसी पद का ‘ वग्रहं कुरुत’ या
‘समासस्य नाम लखत’ प्रकार का प्रश्न हल करने से पहले, तथा परीक्षा क पुनरावृ त्त म दे खते ह। नीचे पुस्तक क हर ता लका पूरी द गई है, हर
नयम क व्याख्या है, और साथ म स्पष्ट रूप से च ह्नत «अभ्यास के लए (स्वयं कर)» ब्लॉक भी ह — वे पुस्तक के नह , केवल स्वयं जाँच के लए
यहाँ जोड़े गए ह।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

शारदा (कक्षा 9) 167 – 176

खं ड प्रश्न

11 36

माध्यम

हन्द

समासः — यह प र शष्ट क्या दे ता है, और समास क प रभाषा — पृष्ठ 167
‘समसनं समासः भव त। समसनं नाम सङ् क्षेपणम् इत्यथः।’

प र शष्ट-प रचयः

१ प र शष्टम् २ ‘समासः’ म क्या है, और इसम अभ्यास क्य नह है?

शारदा के पृष्ठ 167 से 176 तक फैला यह भाग प र शष्ट है, पाठ नह । पाठ म कथा या ोक होते ह और अन्त म ‘अभ्यासाद्
जायते स द्धः’ के नीचे प्रश्न होते ह। इस प र शष्ट म एक भी प्रश्न नह है — न कोई क्रम-संख्या वाला प्रश्न, न रक्त ान, न कोई
खाली खाना। जो भी ता लका छपी है, उसम समस्तपद और वग्रह — दोन पहले से भरे हुए ह।
इसम क्रम से यह सब है —

Page 1 of 41

Page 3

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

पृष्ठ वषय

167 समास की पिरभाषा · समास िकन पदों में होता है · परस्पर अन्वय की शत · पूवपद -उ त्तरपद

168 समास के बाद िवभिक्त की पिक्रया (सीतापितः) · िवगहवाक्य · िवगह के दो भेद — स्वपदिवगह, अस्वपदिवगह

169 मुख्यतया समास िद्विवध — के वलसमास , िवशेषसमास · िवशेषसमास चतुध · समास स्य िनणयः · उदाहरण (१) और (२)

170 उदाहरण (३) और (४) · तत्पुरुष तथा द्वन्द्व की एक -पंिक्त पिरभाषा

171 बहुवीिह तथा अव्ययीभाव की पिरभाषा · िवभिक्ततत्पुरुषः षिड् वधः तािलका · कमधारयसमासः नवधा तािलका (आरम्भ)

172 कमधारय तािलका (शेष) · िद्वगुः समासः ित्रिवध तािलका · नञ्-पभिृ तः तत्पुरुषसमासः तािलका

173 द्वन्द्वसमासः — भेद -वृक्ष · इतरे तर द्वन्द्व तािलका · समाहार द्वन्द्व तािलका

174 बहवु ीिहसमासः — भेद -वृक्ष · सामान्यबहवु ीिह (षोढा) तािलका · िवशेषबहवु ीिह (नवधा) तािलका (आरम्भ)

175 िवशेषबहुवीिह तािलका (शेष) · अव्ययीभावसमासः — पिरभाषा तथा बीस भेद ों की तािलका (आरम्भ)

176 अव्ययीभाव तािलका (शेष, भेद १२–२०) — यही ं पिरिशष्ट समाप्त

तो पढ़ कैसे: इसे कहानी क तरह एक बार म मत प ढ़ए। पहले पृष्ठ 167–170 का सद्धान्त-भाग समझ ली जए —
समास क्या है, वग्रह क्या है, और कौन-सा समास है यह कैसे तय होता है। यह समझ म आ गया तो आगे क
सब ता लकाएँ अपने-आप खुल जाएँगी, क्य क हर ता लका बस उसी एक व ध के अलग-अलग रूप ह।

ध्यान द: इस पृष्ठ पर जहाँ भी «अभ्यास के लए (स्वयं कर)» लखा है, वे प्रश्न पुस्तक के नह ह — केवल आपक
स्वयं-जाँच के लए यहाँ जोड़े गए ह, उत्तर स हत।

२ समास कसे कहते ह — पुस्तक क अपनी प रभाषा तथा ‘महापुरुषः’ का उदाहरण क्या है?

पुस्तक का आर म्भक वाक्य ही प रभाषा है —

समसनं समासः भवित। समसनं नाम सङ् क्षेपणम् इत्यथ ः।

अथात् समास का अथ है संक्षेपण — बात को छोटा कर दे ना। इसके बाद पुस्तक वस्तार से कहती है —

Page 2 of 41

Page 4

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

अथ त् समासे अथयुक्तं पदद्वयं, पदत्रयम् अथवा अनेकपदं िमिलत्वा एकं पदं भवित।
यथा — ‘महा’ तथा ‘पुरुष’ इित अथयुक्तं पदद्वयम् अिस्त। तद् द्वयमिप िमिलत्वा एकपदं भवित महापुरुषः इित।
एवंिवधानाम् अथवतां पदानाम् एकीभवनमेव समासः।

हन्द अथ — समास म अथ रखने वाले दो पद, तीन पद अथवा अनेक पद मलकर एक ही पद बन जाते ह। जैसे ‘महा’ और
‘पुरुष’ — ये दो अथवान् पद ह; दोन मलकर एक पद बन गए — ‘महापुरुषः’। इस प्रकार अथवान् पद का एक हो जाना ही
समास है।

प रभाषा का अंश उसका आशय

समसनम् = सङ् क्षेपणम् समास का पयोजन संक्षेप है — ‘रा स्य नायकः’ चार अक्षर बचाकर ‘रा नायकः’ हो गया

अथयुक्तं पदद्वयम् जुड़ने वाले दोनों टुक ड़ े अपने-आप में अथवान् पद होने चािहए — के वल अक्षर या पत्यय नही ं

पदत्रयम् अथवा अनेक पदम् समास के वल दो पदों तक सीिमत नही ं — द्वन्द्व में चार-पाँच पद तक जुड़ सकते है ं

एकं पदं भवित पिरणाम एक ही पद होता है — इसीिलए िवभिक्त भी के वल एक बार, अन्त में लगती है

समास और स न्ध म अन्तर: स न्ध म केवल वण मलते ह और अथ नह बदलता ( वद्या + आलयः = वद्यालयः —
यह वण का मेल है)। समास म पद मलते ह, वभ क्तयाँ लुप्त हो जाती ह और एक नया पद बनता है, जसका अथ
खोलने के लए वग्रह करना पड़ता है। इसी लए स न्ध का ‘ वच्छे द’ होता है और समास का ‘ वग्रह’।

३ समास कन पद के बीच होता है — सुबन्त, परस्पर अन्वय और द्वन्द्व क वशेषता क्या है?

पुस्तक तीन बात क्रम से कहती है —
(क) समास सुबन्त के बीच होता है, और एक बार म दो के बीच —

समासः सामान्यतः परस्परं सुबन्तानां मध्ये भवित। तथैव समासः युगपत् द्वयोः द्वयोः सुबन्तयोः मध्ये भवित।
यथा — सीतायाः पितः = सीतापितः।

सुबन्त = जसके अन्त म सुप् ( वभ क्त) प्रत्यय लगा हो, अथात् नाम-पद। ‘सीतायाः’ (षष्ठी) और ‘प तः’ (प्रथमा) — दोन सुबन्त
ह, इस लए इनका समास हो सका। क्रयापद का समास नह होता।
(ख) द्वन्द्व म एक साथ बहुत-से सुबन्त का समास —

Page 3 of 41

Page 5

as e
कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
द्वन्द्वसमासे तु युगपत् बहूनां सुबन्तानां मध्ये समासः भवित।
m गुरुश्च = हिरहरगुरवः।
यथा — हिरश्चoहरश्च
c g l as
m . a
a s e
agl
यही द्वन्द्व क वशेषता है — बाक समास दो-दो पद को जोड़ते ह, द्वन्द्व एक साथ तीन-चार-पाँच को जोड़ लेता है।

m
(ग) सबसे बड़ी शत — परस्पर अन्वय —

. co ag
परस्परम् अिन्वतयोः (सम्बद्धयोः) सुबन्तयोः एवla
m
se भवित। यिद पदानां मध्ये परस्परम् अन्वयः (सम्बन्धः) न
ag
समासः
भवित तिह समासः अिप न भवित।

co m
e m.
m l as
.co g
वाक्य अन्वय है या नह समास?

m a
l a se
सः राज्ञ ः पुत्र ः (राजपुत्र ः) गच्छित। ‘राज्ञ ः’ का अन्वय सीधे ‘पुत्र ः’ से है हाँ —
a g राजपुत्रः

a s
com
भवित दशनं राज्ञ ः, पुत्र ः कृ षकस्य ‘राज्ञ ः’ का अन्वय ‘दशनम्’ से है, ‘पुत्र ः’ का ‘कृ षक स्य’ से — दोनों का आपस में नही ं
गच्छित। कोई स म्बन्ध नही ं
m . agl
gl ase
a
दूसरे वाक्य पर पुस्तक का अपना ववेचन यह है — ‘अत्र राज्ञः अन्वयः दशनम् इ त पदे न सह भव त। पुत्रः इत्यस्य अन्वयः
कृषकस्य इत्यनेन सह अ स्त। अतः अ स्मन् वाक्ये रा ः पुत्रः एतयोः मध्ये परस्परम् अन्वयः ना स्त अतः तयोः समासः अ प ना स्त।’

c o m
.
m छपे होने से जुड़े हुए
s e
यह नयम क्य जरूरी है: संस्कृत म पद का क्रम स्वतन्त्र है, इस लए दो पद केवल पास-पास

. comलए जाते। जुड़े वे तब ह जब अथ क दृ ष्ट से एक दूसरे को ख चता हो।
नह मान
a la कारण है क समास करने से
gयही
s m अन्वय दे खना पड़ता है — और इसी लए प र शष्टम् १ (अन्वयः) इस प र शष्ट से पहले रखा गया है।
eपहले
a
agl
se m
m पर वभ क्त का क्या होता है?
coबनने g l a
. a
em
४ पूवपद और उत्तरपद क्या ह — और समास

a s
agl
पूवपद-उत्तरपद (पृष्ठ 167–168) —
co m
m .
se
.समासे a glaपयुक्तं पदम् उत्तरपदम् इित।
com पूवपदम् उत्तरपदम् इित िद्विवधं भवित। पूव ं पयुक्तं पदं पूवपदम्, अनन्तरं
e m
as यथा — सीतापितः इत्यत्र ‘सीता’ इित पूव ं पयुक्तं, ‘पितः’ इित अनन्तरं पयुक्तम्। अतः अत्र ‘सीता’ इित पूवपदं,
agl c
‘पितः’ इित उत्तरपदं च भवित।
m .
s e
. c om a g la
s e mसमास क पहचान इसी पर टक है — कौन-सा पद प्रधान है, पूव या उत्तर।
a
ये दो नाम आगे बार-बार आएँगे, क्य क चार

agl (पृष्ठ 168) —
समास बनने पर वभ क्त क प्र क्रया

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 4 of 41

Page 6

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

समासे कृते पूवपदम् उत्तरपदं च पाितपिदकरूपेण िस्थतं भवित। तदनन्तरं समस्तात् पदात् िवभिक्तः योजनीया।

पुस्तक इसे चरण-दर-चरण दखाती है —

चरण क्या होता है

१. िवग हवाक्य सीतायाः पितः

२. दोनों पद िवभिक्त सिहत सीता + ङस् + पित + सु

३. दोनों िवभिक्तयों का लोप = सीतापित (ङस् तथा सु एतयोः लोपः) — अब यह के वल पाितपिदक है

४. समस्त पद से नयी िवभिक्त सीतापित + सु = सीतापितः

पुस्तक के अपने शब्द म — ‘अत्र ‘सीताप त’ इ त प्रा तप दकं समस्तपदं च, तस्मात् वभ क्तप्रत्ययः यो जतः। तदा सीताप तः इ त
रूपं भव त। एवमेव समास वषये सवत्र अवबोद्धव्यम्।’

यह चरण-३ ही सबसे महत्त्वपूण है: समास बनते ही भीतर क वभ क्तयाँ लुप्त हो जाती ह। इसी लए ‘सीताप तः’
को दे खकर यह नह पता चलता क भीतर षष्ठी थी या सप्तमी — वह तो वग्रह करने पर ही खुलता है। और इसी लए
तत्पुरुष के भेद के नाम वभ क्त के नाम पर रखे गए ह ( द्वतीयातत्पुरुष, तृतीयातत्पुरुष…) — वे बताते ह क लुप्त
हुई वभ क्त कौन-सी थी।

परीक्षा-सूत्र: समस्तपद म वभ क्त केवल एक बार, सबसे अन्त म लगती है। य द आपने ‘सीतायाःप तः’ जैसा
कुछ लखा तो वह समास नह , केवल दो पद ह जन्ह जोड़कर लख दया गया है।

वग्रहवाक्यम् तथा उसके दो भेद — स्वपद वग्रह और अस्वपद वग्रह — पृष्ठ 168–169
‘वृत्त्यथस्य अवबोधकं वाक्यं वग्रहः’

वग्रहः द्वधा

१ वग्रहवाक्य कसे कहते ह — पुस्तक क प रभाषा तथा उदाहरण क्या है?

पुस्तक क प रभाषा (पृष्ठ 168) —

िवगहवाक्यम् — वृत्त्यथस्य अवबोधकं वाक्यं िवगहः। वृित्तः नाम समासािदः। समासादेः अथ ं बोधियतुं यद् वाक्यम्
उच्यते तद् वाक्यं िवगहः इित व्यवि यते।

Page 5 of 41

Page 7

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

हन्द अथ — ‘वृ त्त’ का अथ है समास आ द (सं क्षप्त प्रयोग)। समास आ द का अथ समझाने के लए जो वाक्य कहा जाता है,
उसी को वग्रह कहते ह।
पुस्तक का उदाहरण —

‘रा नायकः’ इित समासः (समस्तपदम्)।

‘रा स्य नायकः’ इित िवगहवाक्यम्।

अत्र ‘रा ’ इित पूवपदं ‘नायकः’ इित उत्तरपदम्।

शब्द अथ पहचान

वृित्तः संिक्षप्त पयोग — समास , कृ त्, तिद्धत, एकशेष आिद जहाँ अथ दबा हुआ है

समस्तपदम् समास बन जाने के बाद का एक पद रा नायकः

िवग हः उसी दबे अथ को खोलकर कहने वाला वाक्य रा स्य नायकः

वग्रह ही उत्तर क कुंजी है: परीक्षा म ‘समासस्य नाम लखत’ पूछा जाए तो सीधे नाम मत सो चए — पहले वग्रह
ल खए। वग्रह म जो वभ क्त या जो शब्द (यस्य / येन / इव / एव / च / अन तक्रम्य) आएगा, वही भेद का नाम
बता दे गा। बना वग्रह के समास का नाम बताना अनुमान है, उत्तर नह ।

२ स्वपद वग्रह क्या है — नयम और उदाहरण द जए।

पुस्तक पृष्ठ 168 पर एक रेखा चत्र दे ती है —

िवगहः िद्वधा
१. स्वपदिवगहः | २. अस्वपदिवगहः

१. स्वपद वग्रहः — पुस्तक के शब्द म —

यिद समासस्य अथः समासे नाम समस्तपदे िवद्यमानैः पदैः एव विणतः भवित तिह सः स्वपदिवगहः भवित। तथा च —
‘समासघटकपदसिहतं वाक्यं स्वपदिवगहः’ इत्यथः। (स्वपदैः (समासपदैः) िवगहः।)

हन्द अथ — य द समास का अथ उन्ह पद से खुल जाए जो समस्तपद के भीतर मौजूद ह, तो वह स्वपद वग्रह है — यानी वग्रह
म कोई नया पद बाहर से नह लाना पड़ता।
पुस्तक का उदाहरण —

Page 6 of 41

Page 8

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

यथा — सुदामा कृष्णसखा अिस्त। कृष्णस्य सखा कृष्णसखा इित स्वपदिवगहः।

समस्तपद उसके भीतर के पद वग्रह क्या बाहर से पद लाना पड़ा?

कृ ष्णसखा कृ ष्ण + सखा कृ ष्णस्य सखा नही ं — के वल िवभिक्त (षष्ठी) जोड़ ी गई

रा नायकः रा + नायक रा स्य नायकः नही ं

वृक्षमूल म् वृक्ष + मूल वृक्षस्य मूल म् नही ं

पहचानने का सरल तरीका: वग्रह लखने के बाद उसे समस्तपद से मलाइए। य द वग्रह के सब शब्द समस्तपद म
भी दख रहे ह (केवल वभ क्त अलग है), तो वह स्वपद वग्रह है। तत्पुरुष, कमधारय और द्वन्द्व के अ धकांश
उदाहरण इसी को ट के ह।

३ अस्वपद वग्रह क्या है — और नत्यसमास से उसका क्या सम्बन्ध है?

२. अस्वपद वग्रहः — पुस्तक के शब्द म (पृष्ठ 168–169) —

यिद समासस्य अथः समासे नाम समस्तपदे िवद्यमानािन पदािन िवहाय अन्यैः पदैः विणतः भवित तिह सः
अस्वपदिवगहः भवित। तथा च — ‘समासघटकपदरिहतं वाक्यम् अस्वपदिवगहः’ इत्यथः। सामान्यतः अत्र एकं पदं
समासघटकमेव भवित। िनत्यसमासे अस्वपदिवगहः भवित।

हन्द अथ — य द वग्रह म समस्तपद के भीतर के पद को छोड़कर कोई नया पद बाहर से लाना पड़े, तो वह अस्वपद वग्रह है।
प्रायः एक पद तो समास का ही रहता है, दूसरा बाहर से आता है।
पुस्तक का उदाहरण (पृष्ठ 169) —

यथा — बालः यथामित काय ं करोित। मितम् अनित क्रम्य यथामित इित अस्वपदिवगहः। अत्र अनितक्रम्य इित
समासे अिवद्यमानं पदं वतते।

Page 7 of 41

Page 9

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

समस्तपद वग्रह बाहर से आया पद

यथामित मितम् अनितक्रम्य अनितक्रम्य — यह समास में कही ं नही ं है

यथाशिक्त शिक्तम् अनितक्रम्य अनितक्रम्य

पितिदनम् िदने िदने ‘पित’ का स्थान वीप्सा (िद्वरुिक्त) ने ले िलया

पीताम्बरः पीतम् अम्बरं यस्य सः (िवष्णुः) यस्य सः — बहवु ीिह में सदा बाहर का पद आता है

नत्यसमास से सम्बन्ध — जस समास का वग्रह उसके अपने ही पद से हो ही नह सकता, वह नत्यसमास कहलाता है — जैसे
यथाश क्त, अभ्य ग्न, प्र त दनम्। ऐसे समास म वग्रह सदा अस्वपद वग्रह ही होगा, क्य क अथ खोलने के लए बाहर का शब्द लाना
अ नवाय है।

क्य : ‘यथाम त’ म ‘यथा’ एक अव्यय है — उसका अपना कोई वभ क्त-रूप नह जससे वग्रह बन सके। अतः
उसका भाव (‘उल्लंघन कए बना’) व्यक्त करने के लए ‘अन तक्रम्य’ जैसा क्रयाथक पद बाहर से लाना ही पड़ता
है। अव्ययीभाव और बहु ी ह — इन दो समास म प्रायः अस्वपद वग्रह ही मलेगा, क्य क पहले म अव्यय है
और दूसरे म अथ ही बाहर के कसी पद का है।

अभ्यास के लए (स्वयं कर) — ये प्रश्न पुस्तक म नह ह। नीचे दए समस्तपद का वग्रह क जए और बताइए क
वह स्वपद वग्रह है या अस्वपद वग्रह। उत्तर ढँ ककर पहले स्वयं क जए।

१. गृहगतः — गृहं गतः। स्वपद वग्रह (दोन पद समास के भीतर ही ह)।
२. नमशकम् — मशकानाम् अभावः। अस्वपद वग्रह (‘अभावः’ बाहर से आया; ‘ नर्’ अव्यय है)।
३. नीलमेघः — नीलः मेघः। स्वपद वग्रह।
४. चक्रपा णः — चक्रं पाणौ यस्य सः। अस्वपद वग्रह (बहु ी ह है, ‘यस्य सः’ बाहर का)।
५. उपग्रामम् — ग्रामस्य समीपे। अस्वपद वग्रह (‘उप’ के ान पर ‘समीपे’ लाना पड़ा)।
६. रामकृष्णौ — रामः च कृष्णः च। स्वपद वग्रह (केवल ‘च’ जोड़ा गया, जो योजक अव्यय है)।

समास के मुख्य भेद — केवलसमासः तथा वशेषसमासः — पृष्ठ 169
‘मुख्यतया समासः द्व वधः — १. केवलसमासः २. वशेषसमासः’

समासस्य भे दाः

१ ‘मुख्यतया समासः द्व वधः’ — केवलसमास कसे कहते ह?

पुस्तक पृष्ठ 169 पर पहला बड़ा वभाजन दे ती है —

Page 8 of 41

Page 10

as e
कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
मुख्यतया समासः िद्विवधः —
m as e
१. के वलसमासः
.co a g l
se m
g l a
२. िवशेषसमासः
a

co m
१. केवलसमासः — पुस्तक के शब्द म —

e m . ag
युक्sतः केवलसमासः।
तत्पुरुषािदसंज्ञािभः िविनमुक्तः समाससंज्ञामात्रla
ag
यथा — पूव ं भूतः = भूतपूवः

. com
हन्द अथ — जो समास तत्पुरुष आ द कसी वशेष सं ा से मुक्त हो — अथात् जसे केवल ‘समास’ eहीm
m a s
gl
कहा जा सके, कोई

. o जा सके — वह केवलसमास है।
वशेष नाम न cदया
a
a s em
aglपद अथ

m a s
.co agl
तत्पुरुषािदसंज्ञ ािभः िविनमुक्तः तत्पुरुष, द्वन्द्व, बहवु ीिह, अव्ययीभाव — इनमें से िकसी नाम से रिहत

emही संज्ञा िमलती है
िजसे के वल ‘समासs’ इतनी
gla
समाससंज्ञ ामात्रयुक्तः

भूतपूवः
a
िवगह — पूव ं भूतः (जो पहले हुआ था) — यहाँ क्रम उलटा है, इसिलए िकसी िनयिमत तत्पुरुष में नही ं बैठता

. c om
m a s em‘भूतः’ बाद म। पर
‘भूतपूवः’ म उलट बात क्या है: वग्रह है ‘पूव भूतः’ — यानी वशेषण ‘पूवम्’ पहले और

. coबना ‘भूतपूवः’ — क्रम बदल गया। ऐसे समास को पा ण न क प रभाषाagमlकोई नय मत तत्पुरुषा द नाम
em
समास

g l as वशेषसमास से पड़ता है।
नह मलता, इस लए इन्ह केवलसमास कहा जाता है। परीक्षा म इनक संख्या बहुत कम है — असली काम
a
se m
com g l a
m . a
e
s चार का नाम, प्रधान पद और पहचान क्या है?
वशेषसमास कतने प्रकार का हैa—
२
a g l

c o m
.

s e m ४. अव्ययीभावसमासः
पुस्तक कहती है — वशेषसमासः चतुधा — १. तत्पुरुषसमासः २. द्वन्द्वसमासः ३. बहु ी हसमासः
औरcआगे
. glaसाथ रख देने पर पूरा ढाँचा साफ हो जाता
omपृष्ठ 170–171 पर प्रत्येक क एक-पं क्त प रभाषा भी दे देती है। चार कोaएक
as emहै —
agl c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

com
m .
m as e
.co


a g l Page 9 of 41

Page 11

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

समास पुस्तक क प रभाषा प्रधान पद पुस्तक का उदाहरण

तत्पुरुषः पायः उ त्तरपदाथपधानः उ त्तरपद रामस्य दू तः = रामदू तः (रामदू तः गच्छित)
तत्पुरुषसमासः

द्वन्द्वः पायः उभयपदाथपधानः द्वन्द्वसमासः दोनों पद राजेशश्च सुरेशश्च = राजेशसुरेशौ (राजेशसुरेशौ गामं
गच्छतः)

बहव
ु ीिहः पायः अन्यपदाथपधानः कोई तीसरा (बाहर का) पुस्तकं हस्ते यस्य सः = पुस्तकहस्तः (बालकः)
बहुवीिहसमासः पद

अव्ययीभावः पायः पूवपदाथपधानः पूवपद (जो अव्यय है) नगरस्य समीपम् = उपनगरम् (उपनगरं नदी पवहित)
अव्ययीभावसमासः

याद रखने का सूत्र —
पूवपद पधान → अव्ययीभाव

उत्तरपद पधान → त त्पुरु ष

दोनों पधान → द्वन्द्व

दोनों में से कोई नही ं, बाहर का पद पधान → बहुवीिह

‘प्रायः’ शब्द क्य लगाया गया: पुस्तक हर प रभाषा म ‘प्रायः’ या ‘प्रायेण’ कहती है, क्य क अपवाद ह — जैसे
समाहारद्वन्द्व (सं ाप रभाषम्) म दोन पद प्रधान नह रहते, ब ल्क उनका ‘समाहार’ (समूह) प्रधान हो जाता है और
समास नपुंसक लङ्ग एकवचन हो जाता है। इसी तरह उत्तरपद द्वगु (पञ्चगवधनः) बाहर से बहु ी ह जैसा दखता है।
‘प्रायः’ इसी छू ट का संकेत है।

यह भी ध्यान र खए: पुस्तक कमधारय और द्वगु को अलग समास नह मानती — वह स्पष्ट कहती है
‘कमधारयसमासः अ प तत्पुरुषसमासान्तगतः भव त’ तथा ‘ द्वगुसमासः अ प तत्पुरुषस्यैव भेदः’। इस लए मुख्य
समास चार ही ह; कमधारय, द्वगु और नञ्-प्रभृ त तत्पुरुष के भीतर आते ह।

अभ्यास के लए (स्वयं कर) — ये प्रश्न पुस्तक म नह ह। नीचे दए वाक्य म रेखां कत पद कौन-सा समास है —
केवल ‘प्रधान पद कौन’ पूछकर बताइए। उत्तर ढँ ककर पहले स्वयं क जए।

१. राजपुत्रः पठ त। — कः पठ त ? पुत्रः। उत्तरपद प्रधान → तत्पुरुष।
२. माता पतरौ वदतः। — कौ वदतः ? माता भी, पता भी। दोन प्रधान → द्वन्द्व।
३. दशाननः क्रुध्य त। — कः क्रुध्य त ? न दश, न आनन — रावणः। अन्यपद प्रधान → बहु ी ह।
४. सः प्र त दनं पठ त। — कथं पठ त ? ‘प्र त’ के अथ म, हर दन। पूवपद प्रधान → अव्ययीभाव।
५. भूतपूवः मन्त्री आगच्छ त। — वग्रह ‘पूव भूतः’, पर क्रम उलटा — कसी वशेष नाम म नह बैठता →
केवलसमास।

Page 10 of 41

Page 12

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

समासस्य नणयः — कौन-सा समास है, यह कैसे तय कर — पृष्ठ 169–170
‘यस्य पदस्य सम्बन्धः क्रयापदे न सह भव त तत् पदं प्रधानं भव त।’

समासस्य नणयः

१ पुस्तक समास पहचानने क कौन-सी व ध दे ती है — पूरा नयम क्रम से ल खए।

यह इस पूरे प र शष्ट का सबसे उपयोगी अंश है। पुस्तक के अपने शब्द म (पृष्ठ 169) —

पदेष ु कः समासः अिस्त इित ज्ञातुं पूवपदस्य उत्तरपदस्य च ज्ञानं सम्यक् भवेत।
् तदनन्तरं कस्य पदस्य पाधान्यमिस्त
इित ज्ञातव्यम्। तदथ ं समासघिटतपदस्य श्रवणानन्तरं तेन सह िकञ्चन ि यापदं योजयेत। क्र
् ततः िक्रयापदेन सह
क्र
पूवपदस्य सम्बन्धः अिस्त वा उत्तरपदस्य वा इित दष्टव्यम्। यस्य पदस्य सम्बन्धः ि यापदेन सह भवित तत् पदं
पधानं भवित। अगे िवद्यमानािन उदाहरणािन पिरशीलयामः।

हन्द म यही व ध, चरण म —

चरण क्या क जए

१ समस्तपद के पूवपद और उ त्तरपद ठीक -ठीक पहचािनए

२ उस पद के साथ कोई िक्रयापद जोड़ कर एक वाक्य बना लीिजए (रामदू तः गच्छित)

३ िवगह कीिजए और पूिछए — ‘कः गच्छित?’ — िक्रया का सीधा स म्बन्ध िकससे है?

४ िजस पद से िक्रया का सीधा स म्बन्ध बने, वही पधान — और पधान पद से समास का नाम िनकल आता है

िनणय-सारणी —
िक्रया का सम्बन्ध उत्तरपद से → त त्पुरु ष

िक्रया का सम्बन्ध दोनों पदों से → द्वन्द्व

िक्रया का सम्बन्ध िकसी से नही,ं िकसी बाहरी पद से → बहवु ीिह

िक्रया का सम्बन्ध पूवपद से → अव्ययीभाव

यह व ध काम क्य करती है: वाक्य म क्रया सदा प्रधान पद को ख चती है — कता या कम वही बनता है जो अथ
का केन्द्र है। समास ने भीतर क वभ क्तयाँ छपा द ह, पर क्रया जोड़ते ही यह छपाव खुल जाता है, क्य क क्रया
गौण पद से सीधा सम्बन्ध बना ही नह सकती। इसी लए पुस्तक कहती है — ‘तेन सह कञ्चन क्रयापदं योजयेत्’।

Page 11 of 41

Page 13

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

२ उदाहरणम् (१) रामदूतः तथा (२) राजेशसुरेशौ — पुस्तक का पूरा ववेचन क्या है?

उदाहरणम् — (१) रामदूतः (पृष्ठ 169)

रामदूतः गच्छित। अत्र ‘रामस्य दूतः गच्छित’ इित िवगहवाक्ये कः गच्छित ?
रामस्य दूतः गच्छित। अतः अत्र रामः न गच्छित अिपतु दूतः गच्छित इित स्पष्टम्।
तिह ‘राम’ इित पूवपदेन सह िक्रयापदस्य साक्षात् सम्बन्धः नािस्त। परं ‘दूत’ इित उत्तरपदेन सह िक्रयापदस्य
साक्षात् सम्बन्धः अिस्त। अतः अत्र उत्तरपदाथः पधानः इित िनश्चेत ुं शक्यते।

प्रश्न उत्तर नष्कष

कः गच्छित ? दू तः गच्छित — राम नही ं जा रहा उ त्तरपद ‘दू त’ पधान

तो कौन-सा समास ? उ त्तरपदाथपधान तत्पुरुषसमास (यहाँ षष्ठीतत्पुरुष)

उदाहरणम् — (२) राजेशसुरेशौ (पृष्ठ 169–170)

राजेशसुरेशौ फलं खादतः। राजेशश्च सुरेशश्च फलं खादतः। इित वाक्ये कस्य पदस्य पाधान्यम् अिस्त ?
िक्रयापदेन सह कस्य सम्बन्धः अिस्त ?
राजेशः खादित, सुरेशः अिप खादित। तिह अिस्मन् िवगहवाक्ये पूवपदम् उत्तरपदं चेित द्वयोः अिप साक्षात् सम्बन्धः
क्र
ि यापदेन सह अिस्त। अतः उभयपदाथः पधानः इित िनश्चयः।

प्रश्न उत्तर नष्कष

कौ खादतः ? राजेशः खादित, सुरेशः अिप खादित — दोनों दोनों पद पधान

तो कौन-सा समास ? उभयपदाथपधान द्वन्द्वसमास

दोन उदाहरण म अन्तर: पहले म क्रया ‘गच्छ त’ एकवचन है और केवल ‘दूतः’ से जुड़ती है — ‘रामः’ केवल यह
बताता है क दूत कसका है। दूसरे म क्रया ‘खादतः’ द्ववचन है — और यही सूचना दे रही है क कता दो ह, दोन
बराबर के। द्वन्द्व क सबसे बड़ी पहचान यही वचन है : दो पद ह तो द्ववचन (रामकृष्णौ), दो से अ धक ह तो
बहुवचन (रामकृष्णसुरेश गरीशाः)।

Page 12 of 41

Page 14

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

३ उदाहरणम् (३) पीताम्बरः तथा (४) उपनगरम् — पुस्तक का पूरा ववेचन क्या है?

उदाहरणम् — (३) पीताम्बरः (पृष्ठ 170)

पीताम्बरः पश्यित। पीतम् अम्बरं यस्य सः पीताम्बरः (िवष्णुः) इित वाक्ये कस्य पाधान्यम् ?
यः पीतम् अम्बरं (वस्त्रं) धरित सः इित अथः। तिह िक्रयापदेन सह कस्य पदस्य अन्वयः अत्र ?
पीतम् अम्बरं यस्य सः (िवष्णुः) ितष्ठित। तिह पूवपदं पीतं न ितष्ठित। उत्तरपदम् अम्बरं अिप न ितष्ठित। एवं तिह
अिस्मन् वाक्ये पूवपदस्यािप पाधान्यं नािस्त उत्तरपदस्यािप पाधान्यं नािस्त। समासवाक्यात् अन्यपदस्य ‘िवष्णःु ’ इित
पदस्य पाधान्यम् अिस्त। यः पीतम् अम्बरं धरित सः (िवष्णुः) इत्यथः।

प्रश्न उत्तर नष्कष

कः पश्यित / ितष्ठित ? न ‘पीतम्’ दे खता है, न ‘अम्बरम्’ — दे खता है िवष्णु दोनों पद अपधान

तो पधान कौन ? समास से बाहर का पद — िवष्णुः बहुवीिहसमास (अन्यपदाथपधान)

उदाहरणम् — (४) उपनगरम् (पृष्ठ 170)

उपनगरं नदी पवहित। अत्र िवगहवाक्यं भवित ‘नगरस्य समीपे’ इित। ‘नदी नगरस्य पवहित’ इित साक्षात् अन्वयः न
भवित। ‘नदी समीपे पवहित’ इित अन्वयः भवित। एवं तिह सामीप्याथसूचकम् ‘उप’ इित पदं पूवपदम् अिस्त। तथा
च पूवपदेन सह अत्र िक्रयापदस्य अन्वयः अिप भवित। एवं समासे पूव-पदस्य पाधान्यिमित ज्ञातव्यम्।

प्रश्न उत्तर नष्कष

कु त्र पवहित ? ‘समीपे’ पवहित — अथ त् ‘उप’ के अथ में पूवपद ‘उप’ पधान

‘नदी नगरस्य पवहित’ — क्या यह अन्वय बनता नही ं — उ त्तरपद ‘नगर’ से िक्रया का सीधा स म्बन्ध अव्ययीभावसमास
है ? नही ं (पूवपदाथपधान)

चार उदाहरण एक साथ दे खए: पुस्तक ने जान-बूझकर चार समास का एक-एक उदाहरण एक ही व ध से हल
कया है — रामदूतः (तत्पुरुष) · राजेशसुरेशौ (द्वन्द्व) · पीताम्बरः (बहु ी ह) · उपनगरम् (अव्ययीभाव)। प्रश्न हर बार
एक ही था — ‘ क्रया का सीधा सम्बन्ध कससे?’ — और चार अलग उत्तर से चार अलग समास नकल आए। यही
इस प र शष्ट क मुख्य शक्षा है।

Page 13 of 41

Page 15

as e
कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
चार समास क पुस्तक-प्रदत्त प रभाषा तथा उदाहरण एक साथ द जए।
e
४

m l as
.co a g
a s em
पृष्ठ g
a 170 l और 171 पर पुस्तक चार क एक-एक पं क्त क प रभाषा उदाहरण स हत देती है। ज्य -क -त्य —

m
.co ag
समासः पुस्तक क प रभाषा उदाहरणम्

पायः उ त्तरपदाथपधानः तत्पुरुषसमासः।se(पm
तत्पुरुषसमासः
l a ृ ठ 171 पर पुनः — पायेण रामस्य दू तः = रामदू तः। रामदू तः गच्छित।
ag )
ष्

उ रपदाथपधानः त पु षसमासः।
त्त त् रु

द्वन्द्वसमासः पायः उभयपदाथपधानः द्वन्द्वसमासः।
m
राजेशश्च सुरेशश्च = राजेशसुरेशौ
.c)o
em
(राजेशसुरे शौ ग ामं ग च्छतः

बहुवीिहसमासः om पायः अन्यपदाथपधानः बहुवीिहसमासः। a s
हस्lते यस्य सः = पुस्तकहस्तः
पुस्तकं g
m .c a
e
las
(बालकः)। कः सः पुस्तकहस्तः ?

ag अव्ययीभावसमासः पायः पूवपदाथपधानः अव्ययीभावसमासः। नगरस्य समीपम् = उपनगरम् (उपनगरं नदी
s
पवहित)
m a
m.co agl
हन्द म एक-एक पं क्त —
l a se
a g
तत्पुरुष — जसम बाद वाले पद का अथ मुख्य हो। ‘रामदूत’ म मुख्य बात दूत है, राम नह ।

m
द्वन्द्व — जसम दोन (या सब) पद का अथ बराबर मुख्य हो। वग्रह म ‘च’ आता है।

. co
m
बहु ी ह — जसम दोन म से कसी का नह , कसी तीसरे का अथ मुख्य हो। वग्रह म यस्य/येन/यस्मै/यस्मात्/य स्मन् …

m
सः आता है।
o l a se
m .c — जसम पहले वाले (अव्यय) पद का अथ मुख्य हो। समस्तपद प्रायःaनपुgंसक लङ्ग, एकवचन, अव्यय बन
se जाता है — उपनगरम्, प्र त दनम्, यथाश क्त।
अव्ययीभाव

a
agl
नाम का अथ भी याद र खए — ‘तत्पुरुष’ (तस्य पुरुषः) स्वयं षष्ठीतत्पुरुष का उदाहरण है; ‘द्वन्द्व’ का अथ है
se m
जोड़ा; ‘बहु ी ह’ (बहुः ी हः यस्य सः = जसके o m बहुत चावल ह ) स्वयं बहु ी ह है; और ‘अव्ययीभाव’ का अथ
c पास g l a
. a
a s em नह था वह अव्यय बन जाता है। हर समास का नाम ही उसका
agl
ही है ‘अनव्ययम् अव्ययं भव त’ — जो अव्यय
उदाहरण है।

co m
m .
m as e
.co
५ अभ्यास के लए (स्वयं कर) — नणय- व ध से समास पहचा नए
a g l
a s em
agl उत्तर
.c
s e m
. c o m
सूचना — ये प्रश्न पुस्तक म नह ह। शारदा का प र शष्टम् २ केवल नयम और ता लकाएँ दे ता है, कोई अभ्यास
a g la
s e
नह । नीचे के पद और उनके उत्तर केवलmस्वयं जाँच के लए यहाँ जोड़े गए ह। पहले उत्तर ढँ ककर, प्रत्येक पद के
साथ एक क्रयापद जो ड़ए औरlपूa छए ‘ क्रया का सीधा सम्बन्ध कससे?’
ag

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 14 of 41

Page 16

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

१. ग्रामगतः — ग्रामगतः बालकः अ स्त। कः गतः ? — जो गया वह ‘गत’ है, ग्राम नह गया। उत्तरपद प्रधान → तत्पुरुष ( वग्रह :
ग्रामं गतः — द्वतीयातत्पुरुष)।
२. माता पतरौ — माता पतरौ वदतः। कौ वदतः ? — माता भी, पता भी। उभयपद प्रधान → द्वन्द्व ( वग्रह : माता च पता च)।
ध्यान द जए — क्रया द्ववचन है।
३. चक्रपा णः — चक्रपा णः रक्ष त। कः रक्ष त ? — न चक्र रक्षा करता है, न हाथ; रक्षा करता है वष्णु। अन्यपद प्रधान →
बहु ी ह ( वग्रह : चक्रं पाणौ यस्य सः)।
४. यथाश क्त — सः यथाश क्त काय करो त। कथं करो त ? — श क्त का उल्लंघन कए बना, अथात् ‘यथा’ के अथ म। पूवपद
प्रधान → अव्ययीभाव ( वग्रह : श क्तम् अन तक्रम्य — अस्वपद वग्रह)।
५. नीलकण्ठः — दो उत्तर सम्भव ह, और यह व ध क परीक्षा है :
• य द अथ है ‘नीला कण्ठ’ (जैसे — नीलकण्ठः शोभते, कण्ठ क बात हो रही है) → कमधारय ( वशेषणपूवपद), वग्रह ‘नीलः
कण्ठः’।
• य द अथ है ‘ जसका कण्ठ नीला है, वह — शव’ (नीलकण्ठः प्रसीदतु) → बहु ी ह, वग्रह ‘नीलः कण्ठः यस्य सः ( शवः)’।
नणय वाक्य से होगा, पद से नह — यही पुस्तक क व ध सखाती है।
६. पञ्चवट — रामः पञ्चवट गच्छ त। वग्रह : पञ्चानां वटानां समाहारः। संख्या पूवपद म और समाहार का बोध → समाहार द्वगु
(जो तत्पुरुष का ही भेद है)।

सबसे आम भूल: छात्र समस्तपद दे खकर सीधे नाम लख दे ते ह। पर ‘नीलकण्ठः’ जैसे पद बना वाक्य के अ नण त
रहते ह। पहले वाक्य, फर वग्रह, तब नाम — पुस्तक का क्रम यही है।

तत्पुरुषसमासः — वभ क्ततत्पुरुषः षड् वधः — पृष्ठ 171
‘प्रायेण उत्तरपदाथप्रधानः तत्पुरुषसमासः।’

वभ क्ततत्पु रु षः

१ तत्पुरुष समास क पहचान क्या है — प्रधान पद कौन-सा, और वग्रह कैसे बनता है?

पहचान — पुस्तक क प रभाषा है — प्रायेण उत्तरपदाथप्रधानः तत्पुरुषसमासः। अथात् जसम उत्तरपद (बाद वाला पद)
प्रधान हो।

प्रश्न तत्पुरुष म उत्तर

पधान पद कौन ? उ त्तरपद — रामदू तः में ‘दू त’

िक्रया का सम्बन्ध िकससे ? उ त्तरपद से — ‘दू तः गच्छित’

िवग ह में पूवपद का क्या होता है ? उस पर कोई-न-कोई िवभिक्त पकट हो जाती है — रामस्य दू तः

समस्तपद का िलङ् ग-वचन ? उ त्तरपद के अनुस ार — वृक्षमूल म् नपुंस क , क्योंिक ‘मूल म्’ नपुंस क है

Page 15 of 41

Page 17

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

वग्रह क पद्ध त — तत्पुरुष का वग्रह करते समय पूवपद पर वही वभ क्त लगाइए जो अथ के अनुसार बनती है, और उत्तरपद को
प्रथमा म र खए :

गृहगतः → गृहं (िद्वतीया) गतः

नखिभ ः → नखैः (त ृत ीया) िभ ः

वृक्षमूलम् → वृक्षस्य (षष्ठी) मूलम्

पुस्तक तत्पुरुष के चार भेद दे ती है —

१. िवभिक्ततत्पुरु षः (षिड् वधः) २. कमधारयसमासः (नवधा)

३. िद्वगुः समासः (ित्रिवधः) ४. नञ्-पभ ृितः तत्पुरु षसमासः

‘तत्पुरुष’ नाम ही प रभाषा है: ‘तत्पुरुषः’ का वग्रह है ‘तस्य पुरुषः’ — उसका पुरुष। यहाँ प्रधान कौन है?
‘पुरुष’, अथात् उत्तरपद। ‘तस्य’ केवल इतना बताता है क कसका। इसी लए इस पूरे वग का नाम ही उसका सबसे
अच्छा उदाहरण बन गया।

२ वभ क्ततत्पुरुष के छह भेद कौन-से ह — पुस्तक क पूरी ता लका द जए।

पुस्तक पृष्ठ 171 पर लखती है — १. वभ क्ततत्पुरुषः षड् वधः — और नीचे यह ता लका दे ती है। पूरी ता लका ज्य -क -त्य
—

क्र.सं तत्पुरुषसमासः वग्रहवाक्यम् समासः (समस्तपदम्)

१. द्वतीयातत्पुरुषः गृहं गतः गृहगतः

२. तृतीयातत्पुरुषः नखैः भ ः नखिभ ः

३. चतुथ तत्पुरुषः गवे हतम् गोिहतम्

४. पञ्चमीतत्पुरुषः चोरात् भयम् चोरभयम्

५. षष्ठीतत्पुरुषः वृक्षस्य मूलम् वृक्षमूल म्

६. सप्तमीतत्पुरुषः काय कुशलः कायकु शलः

वभ क्त का नयम — कौन-सा भेद कौन-सी वभ क्त लेता है — यही इस ता लका क असली सूचना है :

Page 16 of 41

Page 18

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

भेद पूवपद पर कौन-सी वभ क्त का चह्न अथ और उदाहरण
वभ क्त

िद्वतीयातत्पुरुष िद्वतीया अम् / औ / शस् (‘को’) कम ग्रामं गतः = ग्रामगतः

ततृ ीयातत्पुरुष ततृ ीया टा / भ्याम् / भस् (‘से’, ‘के द्वारा’) करण ह रणा त्रातः = ह रत्रातः

चतुथ तत्पुरुष चतुथ ङे / भ्याम् / भ्यस् (‘के लए’) सम्प्रदान यूपाय दारु = यूपदारु

पञ्चमीतत्पुरुष पञ्चमी ङ स / भ्याम् / भ्यस् (‘से’ — अलग अपादान व्याघ्रात् भयम् =
होना, डर) व्याघ्रभयम्

षष्ठीतत्पुरुष षष्ठी ङस् / ओस् / आम् (‘का, क , के’) सम्बन्ध राजपुरुषः, रामदूतः

सप्तमीतत्पुरुष स प्तमी ङ / ओस् / सुप् (‘म’, ‘पर’) अ धकरण जले जातम् = जलजम्

प्रथमा-तत्पुरुष क्य नह है: ता लका द्वतीया से आरम्भ होकर सप्तमी पर समाप्त होती है — छह भेद। प्रथमा
इस लए नह , क्य क जब दोन पद प्रथमा म ह (नीलः मेघः) तो वह वभ क्ततत्पुरुष नह , कमधारय कहलाता है
— और कमधारय क अलग ता लका आगे है। सम्बोधन का समास होता ही नह । इसी लए ‘षड् वधः’।

ध्यान द — ‘गवे हतम् = गो हतम्’ म: ‘गो’ शब्द चतुथ एकवचन म ‘गवे’ बनता है, पर समास बनते ही वह
प्रा तप दक ‘गो’ के रूप म लौट आता है। यही ऊपर बताया गया नयम है — समास म दोन पद प्रा तप दक रूप
म रहते ह।

३ अभ्यास के लए (स्वयं कर) — वभ क्ततत्पुरुष

सूचना — ये प्रश्न पुस्तक म नह ह। पुस्तक क ता लका पहले से भरी हुई है। नीचे के अ त रक्त उदाहरण केवल
स्वयं जाँच के लए यहाँ जोड़े गए ह, उत्तर स हत।

(क) वग्रह क जए और भेद का नाम ल खए —

Page 17 of 41

Page 19

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

समस्तपदम् वग्रहः भेदः क्य

शरणागतः शरणम् आगतः िद्वतीयातत्पुरुष ‘शरण को’ आया — कम

धनहीनः धनेन हीनः ततृ ीयातत्पुरुष ‘धन से’ र हत — करण

िवद्यालयः िवद्यायै आलयः चतुथ तत्पुरुष ‘ वद्या के लए’ घर — सम्प्रदान

पापभीतः पापात् भीतः पञ्चमीतत्पुरुष ‘पाप से’ डरा — अपादान

दे वालयः दे वस्य आलयः षष्ठीतत्पुरुष ‘दे व का’ घर — सम्बन्ध

आत्मिवश्वासः आत्मिन िवश्वासः स प्तमीतत्पुरुष ‘अपने म’ वश्वास — अ धकरण

(ख) वग्रह से समस्तपद बनाइए —
१. सूयस्य करणः = सूय करणः (षष्ठी) २. गृहे कायम् = गृहकायम् (सप्तमी) ३. मृत्योः भयम् = मृत्युभयम् (पञ्चमी) ४.
रथेन गतः = रथगतः (तृतीया) ५. य ाय शाला = यज्ञशाला (चतुथ ) ६. सुखम् आप्तः = सुखाप्तः ( द्वतीया)।

जाँच का तरीका: हर बार अपने आप से पू छए — वग्रह म पूवपद पर कौन-सी वभ क्त आई? वही वभ क्त भेद
का नाम है। ‘ वद्यालयः’ को कोई-कोई षष्ठी ( वद्यायाः आलयः) भी मानते ह; पर ‘ जसके लए’ अथ स्पष्ट होने से
चतुथ अ धक उपयुक्त है — अथ ही नणायक है।

कमधारयसमासः — नवधा — पृष्ठ 171–172
‘कमधारयसमासः अ प तत्पुरुषसमासान्तगतः भव त। कमधारयसमासः नवधा।’

कमधारयः नवधा

१ कमधारय कसे कहते ह, और वह तत्पुरुष के भीतर क्य गना जाता है?

पुस्तक का वाक्य है — कमधारयसमासः अ प तत्पुरुषसमासान्तगतः भव त। कमधारयसमासः नवधा।
पहचान — कमधारय वह तत्पुरुष है जसम दोन पद एक ही वभ क्त म (प्रायः प्रथमा म) ह और उनम वशेषण- वशेष्य या
उपमान-उपमेय का सम्बन्ध हो।

Page 18 of 41

Page 20

as e
कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
प्रश्न कमधारय म उत्तर

m as e
.co
दोनों पदों की िवभिक्त ? एक ही (समानािधकरण) — नीलः मेघ ः — दोनों पथमा
a g l
se m
g l a िवशेषण–िवशेष्य, या उपमान–उपमेय, या अवधारणा (एक ही वस्तु के दो नाम)
a
दोनों में सम्बन्ध ?

पधान पद ? उ त्तरपद — इसीिलए तत्पुरुष के भीतर है
m
.c’o— िवभिक्त नही ं बदलती ag
sem
िवग ह में क्या जुड़ता है ? कु छ नही,ं या ‘इव’ / ‘एव’ / ‘इित
a
वभ क्ततत्पुरुष और कमधारय म अन्तर — agl

co m
m.
वभ क्ततत्पुरुष कमधारय

m दोनों पर एक ही िवभिlक्a
e
त s— नील ◌ः मेघ ◌ः
.co ag
िवग ह में िवभिक्त पूवपद पर अलग िवभिक्त — वृक्षस्य मूल म्

a s em
agl
सम्बन्ध कारक -स म्बन्ध (का, से , के िलए …) िवशेषण-स म्बन्ध (कै सा?)

राजपुरुषः (राजा का पुरुष) महापुरुषः (महान् पुरुष)
s
उदाहरण

m a
m .co agl
l a se
g
‘कमधारय’ नाम का अथ: इसम एक ही वस्तु दो ‘कम’ (भू मकाएँ) धारण करती है — मेघ ‘नीला’ भी है और ‘मेघ’
a
भी; नर ‘नर’ भी है और ‘व्याघ्र-सा’ भी। दोन पद एक ही वस्तु क बात कर रहे ह, इसी लए दोन क वभ क्त एक
रहती है। यही ‘समाना धकरण’ शब्द का अथ है — एक ही अ धकरण (आश्रय) वाले।

com
m .
m as e
.co a g l
a s e२m कमधारय के नौ भेद कौन-से ह — पुस्तक क पूरी ता लका द जए।

agl
se m
com — g l a
. a
em
पुस्तक क ता लका, नौ भेद, ज्य -क -त्य (पृष्ठ 171–172)

a s
agl

co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 19 of 41

Page 21

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

क्र.सं कमधारयसमासः वग्रहवाक्यम् समासः (समस्तपदम्)

१. वशेषणपूवपदः नीलो मेघः नीलमेघ ः

२. वशेषणोत्तरपदः वैयाकरणः खसू चः वैयाकरणखसूिचः

३. वशेषणोभयपदः शीतम् उष्णम् शीतोष्णम्

४. उपमानपूवपदः मेघ इव श्यामः मेघ श्यामः

५. उपमानोत्तरपदः नरः व्याघ्रः इव नरव्याघ ः

६. अवधारणापूवपदः वद्या इव धनम् िवद्याधनम्

७. सम्भावनापूवपदः आम्रः इ त वृक्षः आमवृक्षः

८. मध्यमपदलोपः शाक प्रयः पा थवः शाकपािथवः

९. मयूरव्यंसका दः अन्यो दे शः दे शान्तरम्

हर भेद क्या कह रहा है —

भेद पहचान अथ

१. िवशेषणपूवपद िवशेषण पहले , िवशेष्य बाद में नीला मेघ

२. िवशेषणोत्तरपद िवशेषण बाद में वैयाकरण जो ‘खसू च’ (आकाश म उँ गली दखाने वाला, अथात् व्यथ बड़बोला) है

३. िवशेषणोभयपद दोनों पद िवशेषण शीत और उष्ण — दोन गुण

४. उपमानपूवपद इव लगता है, उपमान पहले मेघ के समान श्याम

५. उपमानोत्तरपद इव लगता है, उपमान बाद में व्याघ्र के समान नर

६. अवधारणापूवपद दोनों एक ही वस्तु — रूपक वद्या ही धन है

७. सम्भावनापूवपद इित लगता है — ‘यह नाम का’ आम्र नामक वृक्ष

८. मध्यमपदलोप बीच का पद लुप्त शाक प्रय पा थव → ‘ प्रय’ लुप्त होकर शाकपा थवः

९. मयूर व्यंस कािद पदों का क्रम बदल जाता है अन्य दे श → दे शान्तरम् (‘अन्य’ आगे चला गया, रूप भी बदला)

Page 20 of 41

Page 22

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

पुस्तक क छपाई पर दो टप्प णयाँ (जैसा छपा है वैसा ही ऊपर दया गया है) —
• भेद ६ म पुस्तक ने वग्रह छापा है ‘ व ा इव धनम्’। ‘अवधारणा’ का अथ ही ‘एव’ है, अतः व्याकरण क दृ ष्ट से
यहाँ ‘ व ा एव धनम्’ अपे क्षत है (जैसे — पुरुषः एव व्याघ्रः = पुरुषव्याघ्रः)। ‘इव’ हो तो वह उपमान होगा,
अवधारणा नह । ऊपर ता लका म मु द्रत पाठ ही रखा गया है; परीक्षा म वग्रह लखते समय व ा एव धनम्
लखना अ धक सुर क्षत है और शक्षक से पु ष्ट कर ली जए।
• भेद ९ का नाम शास्त्रीय ग्रन्थ म ‘मयूरव्यंसका द’ ही है — यह एक आकृ तगण है, अथात् इसम ऐसे बहुत-से
समास आते ह जनका क्रम या रूप नयम से बाहर बदल जाता है।

‘शाकपा थवः’ को मध्यमपदलोप क्य कहते ह: पूरा अथ है ‘शाक प्रयः पा थवः’ — शाक जसे प्रय है, वह
राजा। समास बनने पर बीच का पद ‘ प्रय’ गायब हो गया और केवल ‘शाक + पा थव’ बचा। ऐसे समास का वग्रह
करते समय लुप्त पद को लौटाना पड़ता है, वरना अथ ‘शाक रूपी राजा’ जैसा गलत नकलेगा।

३ अभ्यास के लए (स्वयं कर) — कमधारय

सूचना — ये प्रश्न पुस्तक म नह ह। केवल स्वयं जाँच के लए, उत्तर स हत।

समस्तपदम् वग्रहः कमधारय का भेद

महापुरुषः महान् पुरुषः िवशेषणपूवपदः

पीताम्बरम् पीतम् अम्बरम् िवशेषणपूवपदः ( यान दीिजए — यही पद बहुवीिह में ‘पीता बरः = िव णुः’ हो जाता है)
ध् म् ष्

कृ ष्णसपः कृ ष्णः सपः िवशेषणपूवपदः

चन्द मुखी चन्द ः इव मुखं यस्याः यह कमधारय नही,ं बहवु ीिह है — क्योंिक पधान ‘वह स्त्री’ है

मुखचन्द ः मुखम् एव चन्द ः अवधारणापूवपदः (रूपक )

िसंहपुरुषः िसंहः इव पुरुषः उपमानपूवपदः

पुरुषिसंहः पुरुषः िसंहः इव उपमानोत्तरपदः

गङ् गानदी गङ् गा इित नदी स म्भावनापूवपदः

कृ ष्णश्वेतम् कृ ष्णं च श्वेतं च िवशेषणोभयपदः

Page 21 of 41

Page 23

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

ऊपर क चौथी पं क्त ही असली परीक्षा है: ‘चन्द्रमुखी’ म वग्रह के अन्त म ‘यस्याः’ आ गया — जैसे ही वग्रह म
यस्य/यस्याः/येन जैसा सवनाम आए, समझ ली जए क प्रधान पद समास के बाहर है, और वह बहु ी ह है,
कमधारय नह । कमधारय म ऐसा कोई सवनाम नह आता।

द्वगुः समासः तथा नञ्-प्रभृ तः तत्पुरुषसमासः — पृष्ठ 172
‘ द्वगुसमासः अ प तत्पुरुषस्यैव भेदः’ · ‘नञ्-समासः अ प तत्पुरुषस्यैव भेदः’

द्वगुः त्र वधः नञ् - प्रभृ तः

१ द्वगु समास कसे कहते ह — उसके तीन भेद और पुस्तक क ता लका द जए।

पुस्तक का वाक्य — द्वगुसमासः अ प तत्पुरुषस्यैव भेदः। एषः त्र वधः।
पहचान — द्वगु वह कमधारय है जसम पूवपद संख्यावाचक हो — द्व, त्र, चतुर्, पञ्च, सप्त, नव… और समास कसी समूह या
संख्या-सम्बद्ध अथ का बोध कराए।
पुस्तक क ता लका, ज्य -क -त्य —

क्र.सं समासः वग्रहवाक्यम् समस्तपदम्

१. समाहार द्वगुः त्रयाणां लोकानां समाहारः ित्रलोकी

२. त द्धताथ द्वगुः षण्णां मातॄणाम् अपत्यम् षाण्मातुरः

३. उत्तरपद द्वगुः पञ्च गावः धनं यस्य सः पञ्चगवधनः

भेद क्या होता है पहचान का शब्द

समाहारिद्वग ःु संख्या + समूह का बोध; समस्तपद पायः स्त्रीिलङ् ग (ङीप्) या नपुंस क एकवचन िवगह में समाहारः

तिद्धताथिद्वग ःु संख्यावाची पूवपद पर तिद्धत पत्यय का अथ (अपत्य, भाव आिद ) लगता है िवगह में अपत्यम् जैस ा तिद्धत-अथ

उत्तरपदिद्वग ःु िद्वगु स्वयं िकसी बड़ े समास का पूवपद बन जाता है िवगह में यस्य सः भी आ जाता है

तीन को खोलकर दे खए —

ित्रलोकी — त्रयाणां लोकानां समाहारः = तीन लोकों का समूह (स्वग, मत्य, पाताल)।
षाण्मातुरः — षण्णां मात ॄणाम् अपत्यम् = छह माताओं का पुत्र (काितकेय — कृित्तकाओं ने पाला था)।
पञ्चगवधनः — पञ्च गावः धनं यस्य सः = िजसका धन पाँच गाये ं है,ं वह।

Page 22 of 41

Page 24

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

तीसरा भेद ‘उत्तरपद द्वगु’ भ्रम पैदा करता है: ‘पञ्चगवधनः’ का वग्रह ‘यस्य सः’ से समाप्त होता है — तो क्या
यह बहु ी ह नह ? है, पर उसका पूवपद ‘पञ्चगव’ स्वयं एक द्वगु है, और चूँ क द्वगु यहाँ बड़े समास के उत्तरपद
के साथ जुड़ा है, इसे ‘उत्तरपद द्वगु’ कहा गया। ऐसे म त समास को चरण म खो लए — पहले भीतर का
समास, फर बाहर का।

२ नञ्-प्रभृ त तत्पुरुष समास क्या है — पुस्तक क पूरी ता लका द जए।

पुस्तक का वाक्य — नञ्-समासः अ प तत्पुरुषस्यैव भेदः। एषः पञ्च वधः।
‘नञ्-प्रभृ त’ का अथ है — ‘नञ् आ द’, अथात् वे तत्पुरुष जनका पूवपद कोई अव्यय या उपसग-जैसा अंश है : नञ् (न/अ/
अन्), कु, ग त, प्रा द (प्र, अ त, नर् आ द उपसग), उपपद, एकदे शी।
पुस्तक क ता लका, ज्य -क -त्य —

क्र.सं समासः वग्रहवाक्यम् समस्तपदम्

१. नञ्-तत्पुरुषः न धमः अधमः

२. कुतत्पुरुषः कु त्सतः पुत्रः कु पुत्रः

३. ग ततत्पुरुषः अशुक्लं शुक्लं कृत्वा शुक्लीकृ त्य

४. प्रा दतत्पुरुषः १. प्रगतः आचायः पाचायः
२. अ तक्रान्तः दे वम् अितदे वः
३. नष्कान्तः वाराणस्याः िनव राणिसः

५. उपपदतत्पुरुषः कुम्भं करो त इ त कु म्भकारः

६. एकदे शीतत्पुरुषः १. अध ग्रामस्य अधगामः
२. अह्नः पूवम् पूव ः

पुस्तक क गणना पर टप्पणी: शीषक-वाक्य म लखा है ‘एषः पञ्च वधः’ (यह पाँच प्रकार का है), कन्तु उसके
नीचे क ता लका म छह भेद छपे ह (नञ्, कु, ग त, प्रा द, उपपद, एकदे शी)। यह पुस्तक क गणना म वसंग त है।
ऊपर ता लका जैसी छपी है वैसी ही द गई है — कुल छह भेद। परीक्षा म पूछे जाने पर ता लका के छह भेद ही
ल खए और सङ् ख्या का उल्लेख न क जए।

हर भेद का आशय —

Page 23 of 41

Page 25

as e
कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
भेद पूवपद अथ

नm as e
नञ्-तत्पुरुष
.co
(व्यञ्जन से पहले अ, स्वर से पहले अन्) नषेध — अधमः, अनन्तः, असत्यम्
a g l
se m कु (= कु ित्सत, बुरा)
g l a नन्दा — कुपुत्रः, कुपथः
a
कु तत्पुरुष

गिततत्पुरुष गित-संज्ञक पद (ऊरी, शुक्ली, उरस् आिद — अव ा-प रवतन — शुक्लीकृत्य (सफेद बनाकर)

co m
ag
िच्व-पत्ययान्त सिहत)
m .
as e
l
प, अित, िनर्, िव, उप जैसे उपसग
g
पािदतत्पुरुष प्राचायः (आगे बढ़ा हुआ आचाय), अ तदे वः (दे व से बढ़ा हुआ),

a नवाराण सः (वाराणसी से नकला हुआ)

com
उपपदतत्पुरुष कम-पद , और उ त्तरपद कृ द न्त कुम्भकारः (घड़ा बनाने वाला), ग्रन्थकारः, जलदः

.
a s emपूव भाग)
comभाग बताने वाले
अध, पूव, अपर, उ त्तर — िकसी वस्तु का एक
agl
एकदे शीतत्पुरुष अधग्रामः (गाँव का आधा), पूवा ः ( दन का

m .
ase
agl छपाई क एक और बात: प्रा दतत्पुरुष के तीसरे उदाहरण म पुस्तक ने ‘ नष्कान्तः वाराणस्याः’ छापा है। मानक
m a s
agl
रूप ‘ नष्क्रान्तः वाराणस्याः’ है ( नर् + क्रम् → नष्क्रान्त = नकला हुआ)। ऊपर मु द्रत पाठ ही रखा गया है;
लखते समय ‘ नष्क्रान्तः’ ल खए।
m .co
l a se
a g
‘पूवा ः’ का ण कहाँ से आया: वग्रह है ‘अह्नः पूवम्’ — यहाँ ‘अहन्’ शब्द है। समास म अन्त्य ‘न्’ के पहले ‘र्’
या ‘ष्’ आ द होने पर तथा समासान्त- नयम से ‘अहन्’ का रूप ‘अह्न’ हो जाता है और ण-त्व हो जाता है — पूव +
co m
m .
as e
अह्न = पूवा ः। इसी तरह अपरा ः, मध्याह्नः।
m l
m .co a g
l a se
a g अभ्यास के लए (स्वयं कर) — द्वगु तथा नञ्-प्रभृ त
m
३

a se
. com a g l
m
ase

agl
सूचना — ये प्रश्न पुस्तक म नह ह। केवल स्वयं जाँच के लए, उत्तर स हत।

co m
(क) द्वगु —
m .
as e
com
.समस्तपदम् टप्पणी gl
a
sem
वग्रहः

a
agl ित्रभुवनम् त्र याणां भुवनानां समाहारः समाहार द्वगु — नपुंसक एकवचन
c
m .
m a s e
agl
पञ्चानां वटानां समाहारः
co
पञ्चवटी समाहार द्वगु — ङ प् से स्त्री लङ्ग

स प्तानाम् अह्नeांm
.
a s समाहारः
agण lं युगानां समाहारः
सप्ताहः समाहार द्वगु

चतुयगम्
ु चतु समाहार द्वगु

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 24 of 41

Page 26

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

(ख) नञ्-प्रभृ त —

समस्तपदम् वग्रहः भेदः

असत्यम् न स त्यम् नञ्-तत्पुरुषः

अनािदः न आिदः नञ्-तत्पुरुषः (स्वर से पूव ‘अन्’)

कु मागः कु ित्सतः मागः कु तत्पुरुषः

पधानम् पकृ ष्टं धानम् पािदतत्पुरुषः

ग न्थकारः गन्थं करोित इित उपपदतत्पुरुषः

अपरा ः अह्न ः अपरम् एकदे शीतत्पुरुषः

पहचान का सूत्र: य द पूवपद अ / अन् / कु / प्र / अ त / नर् / व / उप जैसा कोई अव्यय-अंश है, तो वह नञ्-
प्रभृ त तत्पुरुष है। य द पूवपद संख्यावाचक है, तो द्वगु। य द पूवपद वशेषण है, तो कमधारय। और य द पूवपद
पर वग्रह म वभ क्त प्रकट होती है, तो वभ क्ततत्पुरुष। — चार तत्पुरुष यह छँ ट जाते ह।

द्वन्द्वसमासः — इतरेतर तथा समाहार — पृष्ठ 173
‘प्रायः उभयपदाथप्रधानः द्वन्द्वसमासः। द्वन्द्वसमासस्य भेदद्वयम्।’

द्वन्द्वः

१ द्वन्द्व समास क पहचान क्या है, और पुस्तक का भेद-वृक्ष क्या दखाता है?

पहचान — प्रायः उभयपदाथप्रधानः द्वन्द्वसमासः। जसम दोन (या सब) पद का अथ बराबर प्रधान हो। वग्रह म हर पद के बाद
‘च’ आता है।
पुस्तक का भेद-वृक्ष (पृष्ठ 173) —

द्वन्द्वसमासः

१. इतरेत रद्वन्द्वसमासः २. समाहारद्वन्द्वसमासः
क. िद्वपदद्वन्द्वसमासः क. समाहारद्वन्द्वसमासः

ख. बहुपदद्वन्द्वसमासः ख. िनत्यसमाहारद्वन्द्वसमासः

Page 25 of 41

Page 27

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

इतरेतरद्वन्द्व समाहारद्वन्द्व

अथ पद अलग-अलग िगने जाते है ं सब िमलकर एक समूह बन जाते है ं

वचन पदों की िगनती के अनुस ार — िद्ववचन (दो) या बहुवचन (दो से अिधक ) सदा एकवचन

िलङ् ग अिन्तम पद के अनुस ार सदा नपुंस किलङ् ग

उदाहरण रामकृ ष्णौ, रामकृ ष्णसुरेशिगरीशाः संज्ञापिरभाषम्, पािणपादम्

वचन ही सबसे पक्क पहचान है: ‘रामकृष्ण◌ौ’ द्ववचन है — दो व्य क्त अलग-अलग ह। पर ‘पा णपादम्’
एकवचन नपुंसक है — हाथ और पैर अलग-अलग नह गने जा रहे, ‘हाथ-पैर’ एक समूह के रूप म लए गए ह।
इसी लए जहाँ ‘शरीर के अङ्ग’, ‘वाद्य’, ‘सेना’ जैसे समूह-बोधक अथ ह , वहाँ समाहार होता है।

२ इतरेतरद्वन्द्व तथा समाहारद्वन्द्व क पुस्तक क दोन ता लकाएँ पूरी द जए।

१. इतरेतरद्वन्द्वसमासः — पुस्तक क ता लका ज्य -क -त्य —

क्र.सं. समासस्य नाम वग्रहः समासः (समस्तपदम्)

क. द्वपदद्वन्द्वसमासः रामश्च कृष्णश्च रामकृ ष्णौ

ख. बहुपदद्वन्द्वसमासः रामश्च कृष्णश्च सुरेशश्च गरीशश्च रामकृ ष्णसुरेशिगरीशाः

२. समाहारद्वन्द्वसमासः — पुस्तक क ता लका ज्य -क -त्य —

क्र.सं. समासस्य नाम वग्रहः समासः (समस्तपदम्)

क. समाहारद्वन्द्वसमासः सं ा च प रभाषा च संज्ञापिरभाषम्

ख. नत्यसमाहारद्वन्द्वसमासः पाणी च पादौ च पािणपादम्

चार उदाहरण खोलकर —

Page 26 of 41

Page 28

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

समस्तपदम् कतने वचन क्य
पद

रामकृ ष्णौ दो िद्ववचन (औ) दो व्य क्त अलग-अलग — इस लए द्वपदद्वन्द्व

रामकृ ष्णसुरे शिगरीशाः चार बहुवचन (आः) दो से अ धक — इस लए बहुपदद्वन्द्व

संज्ञ ापिरभाषम् दो एकवचन, सं ा और प रभाषा — दोन मलकर ‘व्याकरण का एक वषय-समूह’
नपुंस क

पािणपादम् दो एकवचन, हाथ-पैर — शरीर के अङ्ग, समूह के रूप म; नत्य समाहार, अथात् यहाँ
नपुंस क इतरेतर हो ही नह सकता

‘ नत्यसमाहार’ का अथ: कुछ शब्द-जोड़ म समाहार के अ त रक्त कोई वकल्प है ही नह — शरीर के अङ्ग , सेना
के अङ्ग , वाद्य आ द का द्वन्द्व सदा समाहार ही होगा। ‘पा णपादम्’ को ‘पा णपादौ’ नह कहा जाता। ऐसे ही
‘माद ङ्गकवैण वकम्’, ‘हस्त्यश्वम्’। इसी लए इसे अलग भेद बनाया गया।

स न्ध क एक बात: वग्रह ‘रामः च कृष्णः च’ लखने पर वसग-स न्ध से ‘रामश्च कृष्णश्च’ बनता है ( वसग + च् →
श्च)। पुस्तक ने स न्ध-युक्त रूप ही छापा है। उत्तर लखते समय दोन म से कोई भी रूप मान्य है, पर स न्ध कर तो
ठ क कर।

३ अभ्यास के लए (स्वयं कर) — द्वन्द्व

सूचना — ये प्रश्न पुस्तक म नह ह। केवल स्वयं जाँच के लए, उत्तर स हत।

वग्रहः समस्तपदम् भेदः तथा कारण

माता च िपता च मातािपतरौ इतरे तर (िद्वपद ) — िद्ववचन

सूयः च चन्द ः च सूय चन्द मसौ इतरे तर (िद्वपद ) — यह एक िवशेष रूप है, ‘सूय ’ में दीघ हो जाता है

धमः च अथः च कामः च मोक्षः च धम थकाममोक्षाः इतरे तर (बहुपद ) — चार पद , अतः बहुवचन

अिहः च नकु लः च अिहनकु लम् समाहार — शत्रतु ा का जोड़ ा, एकवचन नपुंस क

मुखं च नािसका च मुखनािसकम् िनत्यसमाहार — शरीर के अङ् ग

राित्रः च िदवा च राित्रिन्दवम् समाहार — समय का समूह, एकवचन

Page 27 of 41

Page 29

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

स्वयं सो चए — ‘ह रहरगुरवः’ (पृष्ठ 167 का उदाहरण) कौन-सा द्वन्द्व है और उसका वग्रह क्या है ?
उत्तर — वग्रह : ह रश्च हरश्च गुरुश्च। तीन पद ह, अतः इतरेतर बहुपदद्वन्द्व, और समस्तपद बहुवचन ‘गुरवः’ म समाप्त होता है।

समाहार कब मान: तीन संकेत दे खए — (१) पद ऐसे ह जो स्वभाव से एक समूह बनाते ह (अङ्ग, वाद्य, सेना,
दशाएँ, वरोधी युगल); (२) समस्तपद नपुंसक एकवचन हो; (३) अथ ‘इन दोन का समूह’ हो, ‘ये दोन ’ नह ।
तीन मल तो समाहार, नह तो इतरेतर।

बहु ी हसमासः — सामान्य (षोढा) तथा वशेष (नवधा) — पृष्ठ 174–175
‘प्रायः अन्यपदाथप्रधानः बहु ी हः। बहु ी हसमासः द्वधा।’

बहु ी हः

१ बहु ी ह क पहचान क्या है — प्रधान पद कौन, और पुस्तक का भेद-वृक्ष क्या है?

पहचान — प्रायः अन्यपदाथप्रधानः बहु ी हः। जसम न पूवपद प्रधान हो, न उत्तरपद — ब ल्क समास से बाहर का कोई तीसरा
पद प्रधान हो।

प्रश्न बहु ी ह म उत्तर

पधान पद कौन ? अन्यपद — जो समास में िलखा ही नही ं गया

िवग ह कै से बनता है ? अन्त में यस्य / येन / यस्मै / यस्मात् / यिस्मन् / यं … सः आता है

िवग ह स्वपद है या अस्वपद ? सदा अस्वपदिवगह — ‘यस्य सः’ बाहर से आता है

समस्तपद क्या करता है ? वह पूरा-का-पूरा िवशेषण बन जाता है, और िजसका िवशेषण है उसी के िलङ् ग-वचन-िवभिक्त ले ता है

पुस्तक का भेद-वृक्ष (पृष्ठ 174) —

बहुवीिहसमासः

१. सामान्यबहुवीिहः (षड् भे द ाः) २. िवशेषबहुवीिहः (नव भे द ाः)

पुस्तक का उदाहरण — पुस्तकं हस्ते यस्य सः = पुस्तकहस्तः (बालकः)। कः सः पुस्तकहस्तः ? — प्रधान न पुस्तक है, न हाथ;
प्रधान वह बालक है जसके हाथ म पुस्तक है।

Page 28 of 41

Page 30

as e
कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः
a g l AglaSem · NCERT Solutions

‘बहु ी ह’ नाम ही उसका उदाहरण है: ‘बहु ी हः’ = ‘बहवः ीहयः यस्य सः’ — जसके पास बहुत चावल ह ,
. com
m a s emम आया ही नह ।
gl
अथात् धनी व्य क्त। यहाँ प्रधान न ‘बहु’ है, न ‘ ी ह’ — प्रधान वह व्य क्त है, जसका नाम समास
coपूरा स्वभाव है।
यही बहु ी ह.का
a
a s em
gl
aसबसे बड़ी सावधानी: एक ही समस्तपद कमधारय भी हो सकता है और बहु ी ह भी — पीताम्बरम् (पीला वस्त्र,

co m
ag
कमधारय) और पीताम्बरः ( जसका वस्त्र पीला है = वष्णु, बहु ी ह)। नणय अथ और वाक्य से होगा। पुस्तक ने पृष्ठ

m .
as e
170 पर यही उदाहरण लेकर पूरी नणय- व ध समझाई है।

a g l

co m
m.
२ सामान्यबहु ी ह के छह भेद — पुस्तक क पूरी ता लका द जए।

m as e
.co a g l
se m
g l a
a पर रखे गए ह, अथात् वग्रह म जो सवनाम आता है वह कस वभ क्त म है।
पुस्तक लखती है — १. सामान्यबहु ी हः पुनः षोढा — और नीचे यह ता लका दे ती है। इसके छह भेद के नाम वभ क्त के अथ

m a s
क्र.सं. समासनाम
em
वग्रहः
.co समासः (समस्तपदम्)
agl
a s
१. द्वतीयाथबहु ी हः
agl प्राप्तम् उदकं यं सः पाप्तोदकः (गामः)

m
पीतक्षीरः (िशशुः)
o
२. तृतीयाथबहु ी हः पीतं क्षीरं येन सः

द त्तपशुeः (m
. c
m
चतु यथबहु ी हः दत्तः पशुः यस्मै सः
a s िशवः)

agl
३.

४.m.
co
ase
पञ्चम्यथबहु ी हः उद्धतं जलं यस्मात् सः उ द्धतृ जलः (कू पः)

agl ५. षष्ठ्यथबहु ी हः पीतम् अम्बरं यस्य सः पीताम्बरः (िवष्णुः)

se m
com
बहुफ लः (वृक्षः)
g l a
. a
६. सप्तम्यथबहु ी हः बहू न फला न य स्मन् सः

सवनाम ही भेद का नाम बता दे ता है —las
em
ag
om
वग्रह म सवनाम वभ क्त भेद अथ

. c
s e mप्राप्त हुआ (गाँव)
com la
यम् / यं िद्वतीया िद्वतीयाथ जसको — प्राप्तोदकः = जसको जल

.येन a g
e m
as
ततृ ीया ततृ ीयाथ जसके द्वारा — पीतक्षीरः = जसने दूध पया ( शशु)

agl c
.
यस्मै चतुथ चतु यथ जसके लए — दत्तपशुः = जसके लए पशु दया गया ( शव)

s e m
m a
.co agl
यस्मात् पञ्चमी पञ्चम्यथ जससे — उद्धतजलः = जससे जल नकाला गया (कुआँ)

a s emषष्ठ थ
gl
यस्य षष्ठी जसका — पीताम्बरः = जसका वस्त्र पीला है ( वष्णु)
a
यिस्मन् स प्तमी स प्तम्यथ जसम — बहुफलः = जसम बहुत फल ह (वृक्ष)

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 29 of 41

Page 31

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

कोष्ठक म दया शब्द ही ‘अन्यपद’ है: ता लका के अ न्तम स्तम्भ म हर बार कोष्ठक म एक शब्द है — (ग्रामः),
( शशुः), ( शवः), (कूपः), ( वष्णुः), (वृक्षः)। यही वह ‘अन्यपद’ है जो प्रधान है और जो समास म लखा नह गया।
बहु ी ह का उत्तर लखते समय यह कोष्ठक-पद अवश्य ल खए — उसी से सद्ध होता है क आपने बहु ी ह समझा
है।

३ वशेषबहु ी ह के नौ भेद — पुस्तक क पूरी ता लका द जए।

पुस्तक लखती है — २. वशेषबहु ी हसमासः नवधा। पूरी ता लका ज्य -क -त्य (पृष्ठ 174–175) —

क्र.सं. समासनाम वग्रहः समासः (समस्तपदम्)

१. व्य धकरणः बहु ी हः चक्रं पाणौ यस्य सः चक्रपािणः

२. सङ् ख्योत्तरपदः बहु ी हः वशतेः समीपे ये स न्त ते उपिवंशाः

३. संख्योभयपदः बहु ी हः द्वौ वा त्रयो वा िद्वत्राः

४. सहपूवपदः बहु ी हः शष्येण सह वतत इ त सिशष्यः

५. व्य तहारलक्षणः बहु ी हः केशेषु केशेषु गृहीत्वा इदं युद्धं प्रवृत्तम् के शाके िश

६. दगन्तराललक्षणः बहु ी हः द क्षणस्याः पूवस्याः दशोः यदन्तरालम् दिक्षणपूव

७. नञथ-बहु ी हः अ वद्यमानः पुत्रः यस्य सः अपुत्रः

८. प्रा दबहु ी हः नगता कृपा यस्मात् सः िनष्कृ पः

९. उपमानपूवपदः बहु ी हः गजस्य आनन मव आननं यस्य सः गजाननः

हर भेद क वशेषता —

Page 30 of 41

Page 32

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

भेद क्या वशेष है

१. व्यिधकरण दोनों पद अलग-अलग िवभिक्त में — चक्रं (िद्वतीया) और पाणौ (स प्तमी)। सामान्य बहुवीिह में दोनों पायः एक िवभिक्त में
रहते है ं (पीतम् अम्बरम्)

२. सङ् ख्योत्तरपद उ त्तरपद संख्यावाची — ‘बीस के आस -पास जो है’ं = उपिवंशाः

३. संख्योभयपद दोनों पद संख्यावाची — ‘दो या तीन’ = िद्वत्राः (अिनिश्चत संख्या)

४. सहपूवपद पूवपद ‘सह’, जो समास में ‘स ’ हो जाता है — सिशष्यः (िशष्य के साथ)

५. व्यितहारलक्षण परस्पर आदान-पदान वाला युद्ध — बाल पकड़ -पकड़ कर लड़ ाई = के शाके िश (अव्यय)

६. दो िदशाओं के बीच की िदशा — दिक्षण और पूव के बीच = दिक्षणपूव (आग्नेय कोण)
िदगन्तराललक्षण

७. नञथ ‘अिवद्य मानः’ अथ त् अभाव — अपुत्र ः (िजसका पुत्र न हो)

८. पािद पूवपद उपसग — िनगता कृ पा यस्मात् = िनष्कृ पः (िनद य)

९. उपमानपूवपद िवगह में इव भी है और यस्य सः भी — गजाननः (गणेश)

दो पद पर ध्यान —
• भेद ४ म ‘वतत इ त’ ठ क ही छपा है — ‘वतते + इ त’ म यण्/अया द-स न्ध से ‘वतत इ त’ बनता है
(एचोऽयवायावः)। यह भूल नह , स न्ध है।
• भेद ७ का नाम पुस्तक ने ‘नञथ-बहु ी हः’ छापा है — यह ‘नञ् + अथ’ क स न्ध है, अथात् नञ् ( नषेध) के अथ
वाला बहु ी ह।

भेद १ और सामान्य बहु ी ह म अन्तर याद र खए: ‘पीताम्बरः’ म वग्रह के दोन पद प्रथमा म ह (पीतम् अम्बरम्)
— यह समाना धकरण बहु ी ह है। ‘चक्रपा णः’ म एक द्वतीया म और दूसरा सप्तमी म है — यह व्य धकरण है।
परीक्षा म यही दो नाम पूछे जाते ह, इस लए वग्रह लखते ही दोन पद क वभ क्त दे ख ली जए।

४ अभ्यास के लए (स्वयं कर) — बहु ी ह

सूचना — ये प्रश्न पुस्तक म नह ह। केवल स्वयं जाँच के लए, उत्तर स हत।

Page 31 of 41

Page 33

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

समस्तपदम् वग्रहः अन्यपदाथः (कौन प्रधान) भेदः

दशाननः दश आननािन यस्य सः रावणः षष्ठ थ

चन्द शेखरः चन्द ः शेखरे यस्य सः िशवः व्यिधकरण

लम्बोदरः ल म्बम् उदरं यस्य सः गणेशः षष्ठ थ

िनधनः िनगतं धनं यस्मात् सः कोई दिरद व्यिक्त पािद

सपत्नीकः पत्न्या सह वतते इित वह पुरुष सहपूवपद

अनपत्यः अिवद्यमानम् अपत्यं यस्य सः वह व्यिक्त नञथ

दण्डादिण्ड द ण्डै ः द ण्डै ः गृहीत्वा इदं युद्धं पवृत्तम् वह युद्ध व्यितहारल क्षण

उत्तरपिश्चमा उ त्तरस्याः पिश्चमायाः िदशोः यद न्तरालम् वह िदशा (वायव्य) िदगन्तरालल क्षण

स्वयं जाँ चए — ‘नीलकण्ठः’, ‘महात्मा’ और ‘पीताम्बरम्’ — इनम से कौन बहु ी ह है ?
उत्तर — नीलकण्ठः (नीलः कण्ठः यस्य सः = शवः) और महात्मा (महान् आत्मा यस्य सः = वह महापुरुष) बहु ी ह ह; पीताम्बरम्
(पीतम् अम्बरम् = पीला वस्त्र) कमधारय है, क्य क यहाँ बात वस्त्र क ही हो रही है, कसी बाहर के व्य क्त क नह ।

एक पं क्त क जाँच: वग्रह ल खए और दे खए — य द अन्त म ‘… यस्य सः’ जैसा सवनाम-युग्म आया, तो
बहु ी ह; नह आया, तो नह । इतना सरल है, बशत वग्रह ईमानदारी से लखा जाए।

अव्ययीभावसमासः — बीस भेद क ता लका — पृष्ठ 175–176
‘पूवपदाथप्रधानः अव्ययीभावसमासः। अनव्ययम् अव्ययं भव त इ त अव्ययीभावः।’

अव्ययीभावः

१ अव्ययीभाव समास कसे कहते ह — नाम का अथ, पहचान और लङ्ग-वचन का नयम क्या है?

पुस्तक क प रभाषा (पृष्ठ 175) —

पूवपदाथपधानः अव्ययीभावसमासः। अनव्ययम् अव्ययं भवित इित अव्ययीभावः।
अव्ययीभावसमासस्य भेदाः पायः त्रयिस्त्रंशत् सिन्त। तेष ु केचन पिसद्धाः भेदाः एव अत्र पदिशताः।

हन्द अथ — जसम पूवपद का अथ प्रधान हो, वह अव्ययीभाव है। नाम का अथ है — ‘जो अव्यय नह था, वह अव्यय बन
जाता है’। पुस्तक बताती है क इसके लगभग ततीस भेद होते ह; यहाँ केवल कुछ प्र सद्ध भेद ही दखाए गए ह (ता लका म बीस)।

Page 32 of 41

Page 34

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

प्रश्न अव्ययीभाव म उत्तर

पधान पद कौन ? पूवपद — जो पायः अव्यय या उपसग है (उप, िनर्, अनु, पित, यथा, आ, अिभ, स , अिध, सु, अित, पारे , मध्ये)

समस्तपद का िलङ् ग-वचन सदा नपुंस किलङ् ग, एकवचन — और वह पूरा पद अव्यय बन जाता है, अतः रूप कभी नही ं बदलता
?

िवग ह िकस पकार का ? पायः अस्वपदिवगह — अव्यय का अथ खोलने के िलए बाहर से शब्द लाना पड़ ता है (उप → समीपे, िनर् →
अभावः)

पहचान का सबसे सरल समस्तपद पायः ‘-म्’ पर समाप्त होता है और वाक्य में िक्रयािवशेषण की तरह काम करता है — उपनगरम्,
िचह्न ? पितिदनम्, यथाशिक्त

‘अनव्ययम् अव्ययं भव त’ का अथ खो लए: ‘नगर’ अव्यय नह है — उसके राम-रूप बनते ह (नगरम्, नगरस्य,
नगरे…)। पर ‘उप’ के साथ जुड़ते ही ‘उपनगरम्’ बन गया, और अब इसका कोई और रूप नह बनेगा — यह जम
गया, अव्यय हो गया। जो अव्यय नह था, वह अव्यय बन गया — यही नाम का पूरा अथ है।

तत्पुरुष से भ्रम न क जए: ‘उपनगरम्’ म पूवपद ‘उप’ प्रधान है (अव्ययीभाव), पर ‘प्राचायः’ म पूवपद ‘प्र’ होते
हुए भी प्रधान ‘आचाय’ है (प्रा दतत्पुरुष)। अन्तर यह है क अव्ययीभाव म समस्तपद अव्यय बन जाता है और
नपुंसक एकवचन म जम जाता है; प्रा दतत्पुरुष म वह सामान्य नाम-पद बना रहता है और उसके सब रूप चलते
ह।

२ अव्ययीभाव के भेद क पुस्तक क पूरी ता लका द जए — सभी बीस।

पुस्तक क ता लका, पूरी, ज्य -क -त्य (पृष्ठ 175–176) —

Page 33 of 41

Page 35

as e
कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
क्र.सं. समासनाम वग्रहः समासः (समस्तपदम्)

m उपगामम् las
e
.co ag
१. समीपाथ अव्ययीभावः ग्रामस्य समीपे

a sem अभावाथ अव्ययीभावः
agl
२. मशकानाम् अभावः िनमशकम्

३. योग्यताथ अव्ययीभावः रूपस्य योग्यम् अनुरूपम्

. coदनेm ag
e m पितिदनम्
४. वीप्साथ अव्ययीभावः दने

g l as
५. पदाथ-अन तवृत्त्यथ अव्ययीभावः
a श क्तम् अन तक्रम्य यथाशिक्त

आमुिक्त (संस ारः)
m
.क्cतःo)
६. मयादाथ अव्ययीभावः आ मुक्तेः

m
आबालम् (eहिरभि
com l as
७. अ भ वध्यथ अव्ययीभावः आ बालेभ्यः

. g
aअभ्यिग्न
m
ase
८. आ भमुख्याथ अव्ययीभावः अ ग्नम् अ भ

agl९. मात्राथ अव्ययीभावः शाकस्य लेशः शाकपित

m a s
.co agl
१०. अवधारणाथ अव्ययीभावः यावन्तः ोकाः यावच्छलोकम् (अच्युतपणामाः)

se m
g l a पारे स मुद म्
a
११. पारेशब्दयुक्तः अव्ययीभावः पारे समुद्रस्य

१२. मध्येशब्दयुक्तः अव्ययीभावः मध्ये गङ्गायाः मध्येगङ् गम्

co m
m .
se
१३. सादृश्याथ अव्ययीभावः सख्या सदृशः ससिख

१४. .co
m सम्पत्त्यथ अव्ययीभावः l a
m ag सक्षत्रम्
ase
क्षत्राणां सम्प त्तः

agl १५. साकल्याथ अव्ययीभावः तृणम प अप रत्यज्य सतणृ म्

se m
com l a
१६. पश्चादथ अव्ययीभावः रामस्य पश्चात् अनुरामम्
. a g
m
ase
अिधिवद्यालयम्

agl
१७. वभक्त्यथ अव्ययीभावः वद्यालये इ त

१८. समृद्ध्यथ अव्ययीभावः धान्यानां समृ द्धः सुधान्यम्

म् m
अितिनदo
१९. असम्प्रत्यथ अव्ययीभावः नद्रा सम्प्र त न युज्यते
. c
s e m
m a
.co agl
२०. आनुपूव्याथ अव्ययीभावः ज्येष्ठस्य आनुपूव्यण अनुज्येष्ठम्

a s emपूवपद के अनुसार वही ता लका, याद रखने के लए —
agl
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 34 of 41

Page 36

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

पूवपद (अव्यय) कन अथ म उदाहरण

उप समीपता उपग्रामम् (गाँव के पास)

िनर् अभाव नमशकम् (मच्छर का अभाव)

अनु योग्यता · पश्चात् · आनुपूव्य अनुरूपम्, अनुरामम्, अनुज्येष्ठम्

पित वीप्सा (बार-बार) · मात्रा (थोड़ ा) प्र त दनम्, शाकप्र त

यथा अनितक्रम (उ ल्लंघ न न करना) यथाश क्त

आ मय दा (तक , उससे पहले ) · अिभिविध (सिहत, समेत) आमु क्त, आबालम्

अिभ आिभमुख्य (सामने) अभ्य ग्न (आग के सामने)

पारे · म ध् ये पार · बीच पारेसमुद्रम्, मध्येगङ्गम्

स सादृ श्य · स म्पित्त · साक ल्य सस ख, सक्षत्रम्, सतृणम्

अिध िवभिक्त-अथ (अिधकरण) अ ध वद्यालयम्

सु समृिद्ध सुधान्यम्

अित अस म्पित (अब उिचत नही)ं अ त नद्रम्

छपाई पर एक टप्पणी: भेद १० म पुस्तक ने समस्तपद ‘यावच्छलोकम्’ छापा है। ‘यावत् + ोक’ क स न्ध से
मानक रूप ‘यावच्छ्लोकम्’ बनता है (छ् + ल् का संयुक्त वण)। यह मुद्रण क चूक जान पड़ती है; ऊपर ता लका म
पुस्तक का ही पाठ रखा गया है, पर लखते समय यावच्छ्लोकम् ल खए।

कोष्ठक के शब्द कस लए ह: भेद ६, ७ और १० म कोष्ठक म एक शब्द दया है — (संसारः), (ह रभ क्तः),
(अच्युतप्रणामाः)। ये प्रयोग-वाक्य के शेष अंश ह, जनसे अथ पूरा होता है : ‘आमु क्त संसारः’ = मु क्त तक संसार
है; ‘आबालं ह रभ क्तः’ = ब तक (सब म) ह र-भ क्त है; ‘यावच्छ्लोकम् अच्युतप्रणामाः’ = जतने ोक, उतने
प्रणाम। अव्ययीभाव अकेला खड़ा नह होता — वह कसी बात का वशेषण या क्रया वशेषण बनकर आता है।

३ अभ्यास के लए (स्वयं कर) — अव्ययीभाव

सूचना — ये प्रश्न पुस्तक म नह ह। केवल स्वयं जाँच के लए, उत्तर स हत।

(क) वग्रह क जए —

Page 35 of 41

Page 37

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

समस्तपदम् वग्रहः अथ

पितवषम् वष वष हर वष (वीप्सा)

यथामित मितम् अनितक्रम्य बु द्ध के अनुसार

उपकू लम् कू ल स्य समीपे कनारे के पास

िनभयम् भयस्य अभावः भय का अभाव

आजन्म आ जन्मनः जन्म से लेकर (मयादा)

अिधहिर हरौ इित ह र के वषय म ( वभक्त्यथ)

अनुग ङ् गम् गङ् गायाः पश्चात् / गङ् गाम् अनु गंगा के कनारे- कनारे

यथािविध िविधम् अनितक्रम्य व ध के अनुसार

(ख) पहचा नए — नीचे के पद अव्ययीभाव ह या नह ?
१. प्र त दनम् — हाँ, अव्ययीभाव (वीप्साथ)।
२. प्राचायः — नह ; यह प्रा दतत्पुरुष है, क्य क प्रधान ‘आचाय’ है और पद के सब रूप चलते ह।
३. नष्कृपः — नह ; यह प्रा दबहु ी ह है ( नगता कृपा यस्मात् सः) — प्रधान वह व्य क्त है।
४. नमशकम् — हाँ, अव्ययीभाव (अभावाथ) — यहाँ प्रधान ‘अभाव’ अथात् पूवपद ‘ नर्’ है।
५. स शष्यः — नह ; यह सहपूवपद बहु ी ह है ( शष्येण सह वतते इ त) — प्रधान वह गुरु है।
६. सतृणम् — हाँ, अव्ययीभाव (साकल्याथ) — तनके तक को न छोड़कर, अथात् सब कुछ स हत।

‘ नष्कृपः’ और ‘ नमशकम्’ म अन्तर ही पूरी कहानी है: दोन का पूवपद ‘ नर्’ है, पर ‘ नष्कृपः’ म प्रधान वह
नदय व्य क्त है जो समास म लखा ही नह — इस लए बहु ी ह। ‘ नमशकम्’ म प्रधान अभाव ही है, अथात्
पूवपद का अथ — इस लए अव्ययीभाव। साथ ही ‘ नष्कृपः’ के सब वभ क्त-रूप बनते ह, ‘ नमशकम्’ जमा हुआ
अव्यय है। प्रधान कौन — यही एक प्रश्न हर बार बचाता है।

पूरे प र शष्ट का सार — चार समास एक दृ ष्ट म तथा स्वयं-अभ्यास

Page 36 of 41

Page 38

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

परीक्षा म ‘समासस्य वग्रहं कुरुत’ / ‘समासस्य नाम लखत’ हल करने क तैयारी

पु न रावृ त्तः

१ चार समास एक दृ ष्ट म — तुलनात्मक ता लका द जए।

समास प्रधान पद वग्रह म क्या आता है समस्तपद का स्वभाव उदाहरण

अव्ययीभावः पूवपद समीपे · अभावः · अन तक्रम्य · नपुंसक, एकवचन, अव्यय — उपनगरम्, यथाश क्त,
(अव्यय) दने दने रूप नह बदलता प्र त दनम्

तत्पुरुषः उ त्तरपद पूवपद पर कोई वभ क्त लङ्ग-वचन उत्तरपद के अनुसार रामदूतः, वृक्षमूलम्,
( द्वतीया–सप्तमी) कायकुशलः

• उ त्तरपद दोन पद एक ही वभ क्त म; इव वही नीलमेघः, मेघश्यामः,
कमधारयः / एव / इ त आम्रवृक्षः

• िद्वग ःु उ त्तरपद पूवपद संख्यावाची; ‘समाहारः’ प्रायः स्त्री लङ्ग या नपुंसक त्रलोक , पञ्चवट
एकवचन

• नञ्- उ त्तरपद पूवपद अ / कु / प्र / अ त / नर् वही अधमः, कुपुत्रः, कुम्भकारः
पभिृ तः आद

द्वन्द्वः दोनों (सब) प्रत्येक पद के बाद ‘च’ इतरेतर — द्व/बहुवचन · रामकृष्णौ,
पद समाहार — नपुंसक एकवचन धमाथकाममोक्षाः,
पा णपादम्

बहुवीिहः अन्यपद अन्त म यस्य / येन / यस्मै / पूरा समास वशेषण बन जाता पीताम्बरः, चक्रपा णः,
(बाहर का) यस्मात् / य स्मन् / यं … सः है दशाननः

एक पंिक्त में चारों —
पूवपद पधान → अव्ययीभाव · उ रपद पधान → तत्पुरु ष त्त

दोनों पधान → द्वन्द्व · अ यपद पधान → बहुवीिह
न्

यह ता लका ही पूरा प र शष्ट है: पृष्ठ 171 से 176 तक क सारी ता लकाएँ इन्ह चार पं क्तय के उपभेद ह।
परीक्षा से पहले य द केवल यही एक ता लका याद रह जाए, तो अ धकांश प्रश्न हल हो जाएँगे — शेष केवल अभ्यास
क बात है।

Page 37 of 41

Page 39

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

२ समास का प्रश्न हल करने क चरणबद्ध व ध क्या है, और छात्र कौन-सी भूल सबसे अ धक करते ह?

चरणबद्ध व ध —

चरण क्या क जए उदाहरण — ‘चन्द्रशेखरः’

१ पद को पूवपद + उ त्तरपद में तोिड़ ए चन्द्र + शेखर

२ स म्भव हो तो पद के साथ एक िक्रयापद जोड़ कर वाक्य बना चन्द्रशेखरः प्रसीदतु।
लीिजए

३ पूिछए — िक्रया का सीधा स म्बन्ध िकससे ? न चन्द्र से, न शेखर से — शव से

४ उसी के अनुस ार िवगह िलिखए चन्द्रः शेखरे यस्य सः

५ िवगह में आए शब्द या िवभिक्त से भेद का नाम िनकािलए ‘यस्य सः’ आया → बहु ी ह; दोन पद क वभ क्त अलग →
व्य धकरण

६ बहुवीिह हो तो अन्यपद कोष्ठक में अवश्य िलिखए ( शवः)

सबसे अ धक होने वाली भूल —

भूल क्य होती है बचाव

कमधारय को बहुवीिह िलख दे ना (या पद एक जैस ा िदखता है — पीताम्बरम् / िवगह में ‘यस्य सः’ आया या नही ं — बस यही दे िखए
उलटा) पीताम्बरः

िवग ह में िवभिक्त गलत लगाना अथ सोचे िबना अनुमान से पहले िहन्दी अथ बोिलए — ‘का / से / के िलए / में’ —
वही िवभिक्त है

द्वन्द्व में वचन गलत इतरे तर और समाहार का अन्तर नही ं अलग-अलग िगने जाएँ → िद्व/बहुवचन; समूह हो →
जाना नपुंस क एकवचन

अव्ययीभाव को पािदतत्पुरुष िलख दोनों में पूवपद उपसग है समस्तपद के रूप चलते है ं या जमा हुआ है — यह दे िखए
दे ना

बहुवीिह में अन्यपद न िलखना िवगह ‘यस्य सः’ पर छोड़ दे ना ‘सः’ कौन है — (िवष्णुः), (िशवः), (रावणः) — अवश्य
िलिखए

समास और सिन्ध में भम दोनों में पद जुड़ते िदखते है ं िवभिक्त लुप्त हुई तो समास ; के वल वण िमले तो सिन्ध

Page 38 of 41

Page 40

as e
कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः
a g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
उत्तर लखने का ढाँचा (परीक्षा म): «समस्तपदम् — वग्रहः — समासस्य नाम — (अन्यपदाथः, य द बहु ी ह
हो)»। जैसे — ‘लम्बोदरः — लम्बम् उदरं यस्य सः — षष्ठ्यथबहु ी हः — (गणेशः)।’ तीन -चार eअंm
m a s
gl
श लखने पर पूरे
. co a
em
अंक मलते ह।

a s
agl

com
ag
अभ्यास के लए (स्वयं कर) — म श्रत
.
३

e m
g l as
a

c o m
.
सूचना — ये प्रश्न पुस्तक म नह ह। शारदा का प र शष्टम् २ केवल नयम और ता लकाएँ दे ता है, कोई अभ्यास नह

s e m ल खए, फर
दे ता। नीचे के पद और उत्तर केवल स्वयं जाँच के लए यहाँ जोड़े गए ह। पहले उत्तर ढँ ककर स्वयं
मलाइए। om
. c a gla
a s em
a l वग्रह क जए तथा समास का नाम ल खए —
g(क)
m a s
.co agl
समस्तपदम् वग्रहः समासस्य नाम

षष्ठीतत्sपुरुeषःm
a
agकमl धारयः (िवशेषणपूवपदः)
राजपुरुषः राज्ञः पुरुषः

नीलोत्पलम् नीलम् उ त्पलम्

co m
त्र याणां फलानां समाहारिद्वगुः
m .
e
ित्रफला

com as
समाहारः
. a g l
e m
as
न अश्वः नञ्-तत्पुरुषः

agl
अनश्वः

शीतम् उ ष्णम् कमधारयः (िवशेषणोभयपदः) — पुस्तक की तािलका के अनुस ार (यिद िवगह ‘शीतं च उ णं च’
m
शीतोष्णम्

se
ष्

िकया जाए तो वही पद समाहार भी बनता है; पु तक ने इसे कमधारय में रखा है)
com l a
द्वन्द्व स्

g
m. (अवधारणापूवपदः) a
ase
िवद्याधनम् िवद्या एव धनम् कमधारयः

गजाननः
l
गजस्य आननम् इव ag उपमानपूवपदः बहुवीिहः — (गणेशः)
आननं यस्य सः

co m
शिक्तम् अनितक्रम्य
m .
e
अव्ययीभावः (पदाथ-अनितवृत्त्यथ)
as
यथाशिक्त

om
.कुcम्भकारः a g l
sem
कु म्भं करोित इित उपपदतत्पुरुषः
a
agl दे शान्तरम् अन्यः दे शः कमधारयः (मयूरव्यंस कािदः)
c
m .
s e
(ख) वग्रह से समस्तपद बनाइए —
. c om a g la
१. नखैः भ ः = नख भ ः · २. सं ा च प m
s e रभाषा च = संज्ञाप रभाषम् · ३. दश आनना न यस्य सः = दशाननः · ४. दने दने

a g la = षाण्मातुरः · ६. द्वौ वा त्रयो वा = द्वत्राः · ७. मशकानाम् अभावः = नमशकम् ·
= प्र त दनम् · ५. षण्णां मातॄणाम् अपत्यम्
८. काय कुशलः = कायकुशलः।

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 39 of 41

Page 41

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

(ग) सो चए और उत्तर द जए —
१. ‘भूतपूवः’ को कस समास म रखगे और क्य ?
उत्तर — केवलसमास म। वग्रह है ‘पूव भूतः’, पर समास म क्रम उलट गया — इसी लए इसे तत्पुरुषा द कोई वशेष नाम नह
मलता, केवल ‘समास’ सं ा मलती है। पुस्तक ने पृष्ठ 169 पर यही उदाहरण दया है।
२. समास और स न्ध म तीन अन्तर बताइए।
उत्तर — (क) स न्ध म वण मलते ह, समास म पद। (ख) स न्ध म वभ क्त नह जाती, समास म भीतर क वभ क्तयाँ लुप्त हो
जाती ह। (ग) स न्ध खोलने को वच्छे द कहते ह, समास खोलने को वग्रह।
३. ‘ नत्यसमास’ म स्वपद वग्रह क्य नह हो सकता ?
उत्तर — क्य क उसका पूवपद अव्यय होता है, जसका अपना कोई वभ क्त-रूप नह बनता। उसका अथ खोलने के लए बाहर से
पद लाना ही पड़ता है — ‘यथाश क्त’ का वग्रह ‘श क्तम् अन तक्रम्य’ है, और ‘अन तक्रम्य’ समास म है ही नह । इसी लए पुस्तक
कहती है — ‘ नत्यसमासे अस्वपद वग्रहः भव त’।

आगे क्या: अब शारदा के पाठ म लौ टए और वहाँ आने वाले समस्तपद पर यही व ध लगाइए — पाठ २, ३, ६, ७
और ९ के सुभा षत म समास बहुतायत से ह। जब कसी नए पद को दे खकर आप पहले वग्रह लखने लग और
उसके बाद ही नाम सोच, तब सम झए क यह प र शष्ट काम कर गया।

अध्याय — एक नज़र म
यह क्या है — ‘समासः’ शारदा का दूसरा प र शष्ट है (पृष्ठ 167–176)। प र शष्ट पाठ नह होता — उसम न कथा है, न
ोक, न प्रश्न-खण्ड। यहाँ केवल संस्कृत क एक व्याकर णक प्र क्रया — समास — क्रम से समझाई गई है, और उसके हर
भेद क उदाहरण-ता लका द गई है।
समास क्या है — पुस्तक का पहला ही वाक्य है ‘समसनं समासः भव त। समसनं नाम सङ् क्षेपणम् इत्यथः।’ अथात् समास =
संक्षेपण। दो, तीन या अ धक अथयुक्त पद मलकर जब एक पद बन जाते ह, वही समास है — जैसे ‘महा’ + ‘पुरुष’ =
महापुरुषः।
समास कन म होता है — समास सामान्यतः सुबन्त पद के बीच होता है, और एक बार म दो-दो सुबन्त के बीच; केवल
द्वन्द्व म एक साथ बहुत-से सुबन्त का समास हो जाता है (ह रश्च हरश्च गुरुश्च = ह रहरगुरवः)। सबसे बड़ी शत यह है क दोन
पद म परस्पर अन्वय हो — अन्वय नह तो समास भी नह ।
वग्रह — समस्तपद का अथ खोलकर बताने वाला वाक्य वग्रहवाक्य कहलाता है (राष्ट्रनायकः → राष्ट्रस्य नायकः)। पुस्तक
वग्रह के दो भेद दे ती है — स्वपद वग्रह (समास के अपने ही पद से वग्रह : कृष्णसखा → कृष्णस्य सखा) तथा
अस्वपद वग्रह (बाहर के पद लाकर वग्रह : यथाम त → म तम् अन तक्रम्य)। नत्यसमास म सदा अस्वपद वग्रह होता है।
भेद कैसे बाँटे गए — ‘मुख्यतया समासः द्व वधः’ — केवलसमास ( जसका कोई तत्पुरुषा द नाम नह , केवल ‘समास’ सं ा
है — भूतपूवः) तथा वशेषसमास, जो चार ह — तत्पुरुष, द्वन्द्व, बहु ी ह, अव्ययीभाव। कमधारय और द्वगु को पुस्तक
अलग समास नह , तत्पुरुष के ही भेद मानती है।
कौन-सा समास है, यह कैसे तय हो — पुस्तक ‘समासस्य नणयः’ म एक बहुत काम क व ध दे ती है — समस्तपद के साथ
कोई क्रयापद जोड़ो और दे खो क क्रया का सीधा सम्बन्ध कससे बनता है। उत्तरपद से बने तो तत्पुरुष, दोन से बने तो द्वन्द्व,
कसी से नह बने (बाहर के कसी पद से बने) तो बहु ी ह, पूवपद से बने तो अव्ययीभाव। रामदूतः · राजेशसुरेशौ · पीताम्बरः ·
उपनगरम् — ये चार सा धत उदाहरण इसी व ध को दखाते ह।
ता लकाएँ ही असली सामग्री ह — पृष्ठ 171 से 176 तक लगभग पूरा प र शष्ट ता लकाओं म है — वभ क्ततत्पुरुष के ६,
कमधारय के ९, द्वगु के ३, नञ्-प्रभृ त के ६, द्वन्द्व के ४, बहु ी ह के ६+९ और अव्ययीभाव के २० भेद, हर एक के साथ वग्रह

Page 40 of 41

Page 42

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 13 प र शष्टम् २ — समासः AglaSem · NCERT Solutions

और समस्तपद। नीचे ये सब ज्य -क -त्य द गई ह।
इसका उपयोग कैसे कर — परीक्षा म समास का प्रश्न तीन रूप म आता है — ‘समस्तपदस्य वग्रहं कुरुत’, ‘ वग्रहवाक्यस्य
समस्तपदं लखत’ और ‘समासस्य नाम लखत’। तीन के लए यही प र शष्ट पयाप्त है : पहले वग्रह बनाइए, फर दे खए क
वग्रह म कौन-सी वभ क्त या कौन-सा शब्द (यस्य/येन/इव/एव/च/अन तक्रम्य) आया — वही भेद का नाम बता दे गा।
ध्यान रहे — पुस्तक स्वयं कहती है क अव्ययीभाव के लगभग ततीस भेद होते ह, यहाँ केवल कुछ प्र सद्ध भेद ही दखाए गए
ह (‘तेषु केचन प्र सद्धाः भेदाः एव अत्र प्रद शताः’)। अतः यह प र शष्ट पूरा व्याकरण नह , एक सुव्यव त संद शका है।

त्व रत पुनरावृ त्त

पद अथ उदाहरण टप्पणी

समासः अथवान् पदों का एकीभवन — ‘समसनं नाम महा + पुरुष = महापुरुषः संक्षेप ही समास का प्रयोजन है
सङ् क्षेपणम्’

समस्तपदम् समास बनने के बाद बना हुआ एक पद सीताप तः इसी से वभ क्त जुड़ती है

वग्रहवाक्यम् समस्तपद का अथ खोलने वाला वाक्य राष्ट्रस्य नायकः ‘वृत्त्यथस्य अवबोधकं वाक्यं वग्रहः’

पूवपदम् समास में पहले पयुक्त पद सीताप तः म ‘सीता’ अव्ययीभाव म यही प्रधान

उत्तरपदम् समास में बाद में पयुक्त पद सीताप तः म ‘प तः’ तत्पुरुष म यही प्रधान

सुबन्तम् सुप ् (िवभिक्त) पत्यय से युक्त नाम-पद सीतायाः, प तः समास सुबन्त के बीच ही होता है

प्रा तप दकम् िवभिक्त-रिहत मूल शब्द सीता, प त, सीताप त समास बनते ही दोन पद प्रा तप दक हो
जाते ह

अन्यपदाथः समास के दोनों पदों से बाहर का अथ पीताम्बरः = वष्णुः बहु ी ह क पहचान

केवलसमासः तत्पुरुषािद संज्ञ ाओं से रिहत, के वल ‘समास’ संज्ञ ा पूव भूतः = भूतपूवः पुस्तक का पहला मुख्य भेद
वाला

वशेषसमासः िजसका िवशेष नाम है — तत्पुरुष, द्वन्द्व, बहुवीिह, रामदूतः, रामकृष्णौ पुस्तक का दूसरा मुख्य भेद
अव्ययीभाव

स्वपद वग्रहः समास के अपने पदों से िकया गया िवग ह कृष्णसखा → कृष्णस्य ‘समासघटकपदस हतं वाक्यम्’
सखा

अस्वपद वग्रहः समास से बाहर के पद लाकर िकया गया िवग ह यथाम त → म तम् नत्यसमास म यही होता है
अन तक्रम्य

नत्यसमासः िजसका िवग ह अपने ही पदों से सम्भव नही ं यथाश क्त, अभ्य ग्न सदा अस्वपद वग्रह

प्रधानपदम् िजस पद का िक्रयापद से सीधा अन्वय बने रामदूतः गच्छ त म ‘दूतः’ समास- नणय क कुंजी

Page 41 of 41

Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 9
TypeSolution
Pages42
Updated19 Sep 2026