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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा9
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 2: को शका — जीवन क नमाण
इकाई
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — अन्वेषण
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
8 – 27 25 62 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 76 pages
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 9 · व ान · अन्वे ष ण
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 2: को शका — जीवन क नमाण
इकाई
अन्वेषण का अध्याय 2 एक सीमा से आरंभ होता है — मानव नेत्र 0.1 mm से कम दूरी पर स्थत दो बदुओं को अलग नह दे ख सकता — और
दखाता है क सूक्ष्मदश ने इस सीमा को पार करके को शका को कैसे प्रकट कया। इसके बाद यह भीतर क ओर बढ़ता है — वरणात्मक रूप से
पारगम्य को शका झल्ली और परासरण, दृढ़ को शका भ त्त, को शकांग म काय का वभाजन, समसूत्री और अधसूत्री वभाजन, तथा समस्त
जीव वज्ञान को जोड़ने वाला को शका सद्धांत।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
अन्वेषण (कक्षा 9) 8 – 27
खं ड प्रश्न
25 62
माध्यम
हन्द
चतन क जए — पृष्ठ 8
अध्याय जन चार प्रश्न के उत्तर खोजता है
चतन क जए
प्र.1 को शका कहाँ से आती है?
प्रत्येक को शका कसी पहले से वद्यमान को शका के वभाजन से बनती है — नज व पदाथ से कभी नह । यही को शका सद्धांत
का तीसरा कथन है जसे 1855 म रुडोल्फ वरचो ने जोड़ा।
पूविवद्यमान कोिशका → वृिद्ध → िवभाजन → नई कोिशकाएँ
समसूत्री िवभाजन: 1 जनक कोिशका → 2 समान संत ित कोिशकाएँ
अधसूत्री िवभाजन: 1 जनक कोिशका → 4 कोिशकाएँ, गुणसूत्रों की आधी संख्या के साथ
ऐसा क्य होता है: को शका केवल रसायन क थैली नह है। इसम कायशील झल्ली, को शकाद्रव्य, राइबोसोम
और सबसे बढ़कर डीएनए के पूरे अनुदेश चा हए, और ये सब बने-बनाए तथा सही क्रम म केवल कसी अन्य जी वत
को शका के भीतर ही मलते ह। अध्याय का अपना उदाहरण यही सद्ध करता है — वष 2010 म जे. क्रेग वटर के
दल ने माइकोप्लाज्मा माइकोइड् स का सं ष्ट डीएनए बनाया, फर भी उसे एक वद्यमान जीवाणु को शका म ही
डालना पड़ा जसका को शकाद्रव्य और झल्ली अक्षुण्ण थे। केवल डीएनए सं ष्ट था।
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क्या आप जानते ह? आपका अपना शरीर एक नषे चत अंडाणु से आरंभ हुआ था। आज आपके शरीर क लगभग
30 खरब को शकाएँ उसी एक को शका से वभाजन क अटू ट ृंखला ारा बनी ह।
प्र.2 नग्न आँख से परे संसार को समझने के लए तकनीक प्रयोग ने नए ान के सृजन म कस प्रकार सहायता क
है?
प्रत्येक नए उपकरण ने दे खने क सीमा को आगे बढ़ाया, और हर बार नया जीव वज्ञान सामने आया।
उपकरण सबसे छोट वस्तु जो जो नया ान मला
दखी
नग्न नेत्र 0.1 mm (100 µm) केवल संपूण जीव और अंग
रॉबट हक
ु का सूक्ष्म दश , 1665 कु छ µm कॉक म बक्से जैसे कोष्ठ — उन्ह ने इन्ह ‘को शका’ नाम दया
(200–300 ग नु ा)
िवद्यालय का पकाश सूक्ष्म दश लगभग 0.2 µm कद्रक, को शका भ त्त, ह रतलवक, प्याज के मूलाग्र म को शका
(10X × 10X = 100X, 400X वभाजन क अवस्थाएँ
तक)
इले क्टॉन सूक्ष्म दश (इले क्टॉन पुंज) नैनोमीटर स्तर (1 nm = एक राइबोसोम, माइटोकॉ या के अंतःकटक, ल पड परत, को शका
मीटर का एक अरबवाँ भाग) पंजर, वषाणु; इसी ने गॉल्जी उपकरण के अ स्तत्व क पु ष्ट दशक
बाद क
ऐसा क्य होता है: वभेदन उस तरंगदै य से तय होता है जससे हम ‘दे खते’ ह। दृश्य प्रकाश क तरंगदै य लगभग
400–700 nm है, अतः कोई भी प्रकाश सूक्ष्मदश लगभग 200 nm से पास के दो बदुओं को अलग नह कर
सकता, लस कतना भी श क्तशाली क्य न हो। इलेक् ॉन कह कम तरंगदै य क तरंग क भाँ त व्यवहार करते ह,
इसी लए इलेक् ॉन सूक्ष्मदश हजार गुना बारीक संरचनाएँ दखाता है। वैज्ञा नक ने दो और वशेषताएँ सुधार —
वपयास (वस्तु के व भन्न भाग क द्यु त म अंतर, इसी लए प्याज क झल्ली को सै े नीन और कपोल को शकाओं
को मे थलीन ब्लू से अ भरं जत करते ह) और आवधन।
क्या आप जानते ह? गॉल्जी उपकरण पर दशक तक संदेह कया गया क्य क आरं भक सूक्ष्मदश इसका स्पष्ट
वभेदन नह कर पाते थे। इलेक् ॉन सूक्ष्मदश ने ही यह ववाद समाप्त कया। तकनीक केवल ज्ञान क पु ष्ट नह
करती — वह यह भी तय करती है क कौन-से प्रश्न पूछे ही जा सकते ह।
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प्र.3 को शका जीवन क संरचनात्मक और कायात्मक इकाई कस प्रकार है?
यह संरचनात्मक इकाई इस लए है क्य क प्रत्येक सजीव शरीर को शकाओं से ही बना है, और कायात्मक इकाई इस लए क्य क
जीवन क हर प्र क्रया को शका के भीतर ही होती है।
संरचनात्मक — समान को शकाएँ ऊतक बनाती ह, ऊतक अंग और अंग मलकर अंग-तंत्र — नासा रंध्र, नासा गुहा, श्वासनली
और फेफड़े मलकर श्वसन तंत्र बनाते ह। इस संगठन को खोलते जाइए, अंत म को शका ही मलेगी।
कायात्मक — श्वसन माइटोकॉ या म, प्रोट न सं ेषण राइबोसोम पर, प्रकाश-सं ेषण ह रतलवक म, अप शष्ट का पाचन
लाइसोसोम म और भंडारण रसधानी म होता है। ये सब एक ही को शका के भीतर ह।
एक अकेली को शका संपूण जीव भी हो सकती है — जीवाणु या यीस्ट स्वयं जीता, भोजन लेता, बढ़ता और जनन करता है।
को शका से छोट कोई भी वस्तु यह नह कर सकती।
ऐसा क्य होता है: को शका वह सबसे छोट इकाई है जसम जीवन क तीन आवश्यकताएँ एक साथ ह — एक
सीमा जो भीतर को बाहर से भन्न रखे ( झल्ली), स्वयं को चलाने और अपनी प्र त बनाने के अनुदेश (डीएनए), तथा
उन अनुदेश को काय म बदलने वाली मशीनरी (राइबोसोम, एंजाइम, माइटोकॉ या)। को शका को तोड़ द जए तो
उसके भाग कुछ ही मनट म काम करना बंद कर दे ते ह, क्य क सही सांद्रताओं को एक साथ रखने वाली सीमा ही
नह रही। वषाणुओं म डीएनए और प्रोट न तो ह पर अपनी झल्ली-आबद्ध मशीनरी नह — इसी लए वे परपोषी
को शका के बाहर जी वत नह रह सकते।
प्र.4 को शका कस प्रकार गुणन करती है?
को शका वभाजन ारा — जनक को शका पहले अपने डीएनए क प्र त बनाती है, फर वभा जत होती है। इसके दो प्रकार ह।
समसूत्री वभाजन अधसूत्री वभाजन
संतित कोिशकाएँ 2 4
गण
ु सूत्र संख्या जनक के समान जनक क आधी
िवभाजनों की एक दो, एक के बाद एक
संख्या
कहाँ का यक को शकाओं म — त्वचा, मूलाग्र, अ स्थ जंतुओं म केवल वृषण और अंडाशय; पादप म परागकोश और
म ा अंडाशय
उ े श्य वृ द्ध, मरम्मत, रखरखाव, अल गक जनन युग्मक बनाना; व वधता उत्पन्न करना
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
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e m.
समसूत्री: 1 कोिशका (46 गुणसूत्र) → 2 कोिशकाएँ (पत्येक में 46)
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अधसूत्री: 1 कोिशका (46) → पथम िवभाजन → 2 कोिशकाएँ (पत्येक में 23) → ि तीय िवभाजन → 4
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a s em(पत्येक में 23)
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कोिशकाएँ
aिनषे च न: 23 + 23 = 46 — मूल संख्या पुन स्थ िपत
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m . ag
l a se
aातg म, अतः झल्ली शीघ्र ही भीतरी भाग को भोजन और ऑक्सीजन दे ने म
ऐसा क्य होता है: को शका केवल बढ़ती नह रह सकती। आकार बढ़ने पर आयतन घन के अनुपात म बढ़ता है
जब क पृष्ठीय क्षेत्रफल केवल वग के अनुप
असमथ हो जाती है। वभाजन इस अनुपात को फर से ठ क कर दे ता है। अधसूत्री वभाजन का कारण भन्न है —
co m
m.
य द युग्मक म पूरी गुणसूत्र संख्या होती तो नषेचन प्रत्येक पीढ़ म उसे दोगुना कर दे ता, इस लए पहले उसे आधा
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l
करना आवश्यक है।
.co a g
a s em
a gl आप जानते ह? प्र त दन हमारे शरीर म लगभग सैकड़ अरब को शकाएँ प्र तस्था पत होती ह — कुल संख्या
क्या
का लगभग 1 प्र तशत। इसी कारण कटा हुआ स्थान भर जाता है और बाल फर उग आते ह।
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m.co agl
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 9 ag
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खंड 2.1 को शकाओं का अध्ययन कैसे कर?
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मानव नेत्र ारा दो अ त नकट वस्तुओं को अलग और व शष्ट रूप से दे खने क क्षमता को हम क्या कहते ह?
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प्र.1
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agl उत्तर
इसे नेत्र का वभेदन कहते ह, और वह न्यूनतम दूरी जस पर यह क्षमता बनी रहती है, वभेदन सीमा कहलाती है।
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m . a
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agl
मानव ने त्र का िनकट िबंद ु = 25 cm
मानव ने त्र की िवभे द न सीमा = 0.1 mm
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0.1 mm = 0.1 × 1000 µm = 100 µm
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emही बदु प्रतीत होते ह।
कागज पर 0.1 mm क दूरी पर बने दो बदु, नेत्र से 25 cm दूर रखने पर, अभी भी दो दखाई दे ते ह। इससे पास लाने पर वे एक
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agl
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ऐसा क्य होता है: वभेदन और आवधन एक ही बात नह ह। आवधन केवल प्र त बब को बड़ा करता है; वभेदन
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com a
. agl
यह तय करता है क बड़ा करने पर भी दोन बदु अलग बने रहगे या नह । धुँधले चत्र को बड़ा करने से बड़ा
m। इसी लए वैज्ञा नक ने सूक्ष्मदश क तीन वशेषताओं — वभेदन,
धुँधलापन मलता है, अ धक ववरणeनह
s
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a l कया, केवल आवधन पर नह ।
वपयास और आवधन — परgकाम
co m
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m ase
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स्वयं जाँ चए: एक प्ररूपी पादप या जंतु को शका 10–100 µm क होती है। नेत्र क सीमा 100 µm है, अतः
केवल सबसे बड़ी को शकाएँ ही दृश्यता क सीमा पर आ सकती ह — और वह भी बना कसी आंत रक ववरण के।
प्र.2 को शका जीव व ा नय ने मानव नेत्र क वभेदन सीमा से बहुत छोट को शकाओं क संरचना और काय का
अध्ययन कस प्रकार से कया होगा?
लस का उपयोग करके — एक उत्तल लस, या उससे भी बेहतर, एक अ भदृश्यक लस और एक ने त्रका का संयोजन, जो वास्तव
म सूक्ष्मदश ही है।
अ भदृश्यक लस वस्तु का आव धत प्र त बब बनाता है; ने त्रका उस प्र त बब को फर आव धत करती है। दोन आवधन गुणा
होते ह।
वद्यालय के प्रकाश सूक्ष्मदश म कई अ भदृश्यक लस (10X, 40X) होते ह जससे एक ही स्लाइड को दृश्य प्रकाश म भन्न- भन्न
आवधन पर दे खा जा सके।
प्रकाश क सीमा से आगे वैज्ञा नक इलेक् ॉन सूक्ष्मदश का उपयोग करते ह जसम प्रकाश के स्थान पर इलेक् ॉन पुंज होता है
और जो नैनोमीटर स्तर तक संरचना दखाता है (1 nm = एक मीटर का एक अरबवाँ भाग)। पुस्तक का चत्र 2.4
कोलोके शया क पत्ती क नचली सतह के रंध्र का क्रमवीक्षण इलेक् ॉन माइक्रोग्राफ है।
कु ल आवधन = ने ित्रका का आवधन × अिभदृ श्यक का आवधन
= 10X × 10X = 100X
अतः 200 µm की प्याज कोिशका 200 µm × 100 = 20000 µm = 20 mm चौड़ ी िदखेगी
ऐसा क्य होता है: लस प्रकाश को इस प्रकार मोड़ता है क सूक्ष्म वस्तु से चलने वाली करण नेत्र तक ऐसे पहुँच
मानो कसी बहुत बड़ी वस्तु से आ रही ह , अथात कह बड़े दृ ष्ट-कोण पर। जैसे ही यह कोण नेत्र क अपनी सीमा से
बड़ा हो जाता है, ववरण दखने लगता है। इ तहास म को शका क खोज इसी प्रकार हुई — रॉबट हुक ने 1665 म
लगभग 200–300 गुना आवधन क्षमता वाला स्व- न मत सूक्ष्मदश बनाया, कॉक के पतले टु कड़े को दे खा और बक्से
जैसे छोटे कोष्ठ पाए जन्ह उन्ह ने ‘को शका’ नाम दया।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 10
खंड 2.1 को शकाओं का अध्ययन कैसे कर?
प्र.1 सूक्ष्मदश से दे खने के प ात आपको वस्तु का आव धत प्र त बब दखेगा। क्या अब आप उसके वास्त वक
आकार का अनुमान लगा सकते ह?
हाँ। सूक्ष्मदश के अपने दृश्य क्षेत्र को ही मापनी क तरह उपयोग क जए।
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1. मंच पर मलीमीटर वाली पारदश मापनी रखकर गोलाकार दृश्य क्षेत्र का व्यास मा पए — मान ली जए 5 mm।
2. इसे बद लए — 5 mm × 1000 = 5000 µm।
3. मापनी हटाकर नमूने क स्लाइड र खए और ग नए क उसी व्यास के अनु दश एक सीधी रेखा म कतनी को शकाएँ आती ह —
मान ली जए 25।
4. भाग द जए।
एक कोिशका का अनुमािनत आमाप = माइक्रोमीटर में दृ श्य क्षेत्र का व्यास ÷ व्यास के अनुिदश कोिशकाओं की
संख्या
= 5000 µm ÷ 25
= 200 µm (अथ त 0.2 mm)
ऐसा क्य होता है: केवल ने त्रका से आमाप नह बताया जा सकता, क्य क वह नमूने और मापनी दोन को समान
रूप से आव धत करती है। परंतु कसी दए गए अ भदृश्यक के लए दृश्य क्षेत्र एक न त वास्त वक लंबाई है, अतः
एक बार मलीमीटर म माप लेने पर वह एक मापक-दं ड बन जाता है जो उसी अ भदृश्यक से दे खी गई हर स्लाइड के
लए मान्य रहता है। इसी लए चरण 2 मापनी हटाने से पहले करना आवश्यक है और बाद म अ भदृश्यक बदलना नह
चा हए।
सुझाव: गनती व्यास के अनु दश, एक सीधी रेखा म होनी चा हए — पूरे वृत्त म नह । व्यास के स्थान पर कसी
जीवा पर गनने से लंबाई कम पड़ेगी और को शकाएँ वास्त वक से बड़ी नकलगी।
क्रयाकलाप 2.1— आइए, को शका के आकार का अनुमान लगाएँ — पृष्ठ 10
खंड 2.1 को शकाओं का अध्ययन कैसे कर?
क्रयाकलाप
प्र.1 नम्न ल खत सूत्र का उपयोग करके को शका के वास्त वक आमाप का अनुमान लगाइए— प्याज क झल्ली क
को शका का अनुमा नत आमाप = माइक्रोमीटर म दृश्य क्षेत्र का व्यास / व्यास के अनु दश को शकाओं क संख्या
पुस्तक के ही प्रेक्षण ली जए — दृश्य क्षेत्र का व्यास 5 mm और उस व्यास के अनु दश गनी गईं 25 को शकाएँ।
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चरण 1 — व्यास को माइक्र ोमीटर में बदिलए।
1 mm = 1000 µm
d = 5 mm = 5 × 1000 µm = 5000 µm
चरण 2 — सूत्र लगाइए।
एक कोिशका का अनुमािनत आमाप = d ÷ n
= 5000 µm ÷ 25
= 200 µm = 0.2 mm
दृ श्य क्षेत्र
5000 µm ÷ 25
= 200 µm पित कोिशका
(= 0.2 mm)
व्यास = 5000 µm
इसमें 25 कोिशकाएँ आती है ं
दृश्य क्षेत्र को मापनी क भाँ त उपयोग कया जाता है — उसका ज्ञात वास्त वक व्यास उन को शकाओं म बाँट दया जाता है जो उसम
समाती ह।
ऐसा क्य होता है: यह व ध इस लए काम करती है क्य क को शकाएँ और दृश्य क्षेत्र दोन ठ क उतना ही आव धत
होते ह। एक को दूसरे से भाग दे ने पर आवधन पूरी तरह कट जाता है, अतः आव धत प्र त बब से प्राप्त उत्तर
वास्त वक आमाप होता है। यही कारण है क यह केवल अनुमान है — इसम यह मान लया जाता है क को शकाएँ
बना अंतराल के सट हुई ह और 25 क गनती ठ क है।
स्वयं जाँ चए: य द 25 के स्थान पर 40 को शकाएँ आत तो प्रत्येक को शका 5000 µm ÷ 40 = 125 µm क
होती। छोट को शकाएँ, अ धक संख्या — दोन रा शयाँ व्युत्क्रमानुपाती ह।
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प्र.2 य द प्याज क झल्ली क एक को शका का अनुमा नत आमाप 200 µm है तो प्रकाश सूक्ष्मदश इस को शका
को कतना आव धत करेगा?
कुल आवधन दोन लस के आवधन का गुणनफल होता है।
कु ल आवधन = ने ित्रका का आवधन × अिभदृ श्यक का आवधन
= 10X × 10X
= 100X
िदखाई दे ने वाला आमाप = वास्तिवक आमाप × आवधन
= 200 µm × 100
= 20000 µm = 20 mm = 2 cm
अथात जो को शका वास्तव म केवल 0.2 mm चौड़ी है, वह लगभग 2 cm चौड़ी दखेगी — लगभग आपके अँगूठे के नाखून
जतनी।
ऐसा क्य होता है: अ भदृश्यक काय नली के भीतर एक वास्त वक आव धत प्र त बब बनाता है; फर ने त्रका उसी
प्र त बब को अपनी वस्तु मानकर पुनः आव धत करती है। दूसरा लस पहले के प रणाम पर काय करता है, इस लए
दोन गुणनखंड जुड़ते नह , गुणा होते ह। उसी ने त्रका के साथ 40X अ भदृश्यक लगाने पर 10 × 40 = 400X
मलेगा और वही को शका 200 µm × 400 = 80000 µm = 8 cm चौड़ी दखेगी।
सुझाव: अ धक आवधन सदा बेहतर नह होता। 400X पर दृश्य क्षेत्र बहुत छोटा और प्र त बब मंद हो जाता है, अतः
आप एक अत्यंत छोटे भाग का सूक्ष्म ववरण दे खते ह। प्रश्न के अनुसार अ भदृश्यक चु नए।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 11
खंड 2.2.1 को शका झल्ली — को शका क साव त्रक वशेषता
प्र.1 कू पकाओं क को शकाओं म को शका झल्ली क संरचना उससे पार होकर जाने वाले पदाथ क ग त को कस
प्रकार नयं त्रत करती है?
क्य क झल्ली केवल 7 से 10 nm मोट ल पड परत है, O₂ और CO₂ जैसी छोट और अध्रुवी गैस इसम घुलकर सीधे पार
चली जाती ह, जब क आयन, ग्लूकोस और प्रोट न नह जा सकते — उन्ह प्रोट न ार चा हए।
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
ल पड अणुओं क दो परत म जल-आकष शीष बाहर क ओर और जल-प्र तकष पूँछ भीतर क ओर होती ह। ऑक्सीजन
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और काबन डाइऑक्साइड छोट और अध्रुवी ह, अतः यह तैलीय भीतरी भाग उनके लए बाधा नह है।
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c म अ धक और वायु म कम — अतः दोन गैस एक ही झल्ली के आर-पार एक l a
gही समय म वपरीत दशाओं
ये वसरण ारा, सदा उच्च से नम्न सांद्रता क ओर जाती ह। कू पका म O₂ अंतःश्व सत वायु म अ धक और रक्त म कम है,
जब क CO₂.रक्त a
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मlचलती
ag परत म अंतःस्था पत प्रोट न उन सब पदाथ के लए गेटक पर का काय करते ह जो ल पड म नह घुलते — इसी से झल्ली
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केवल छ द्रत न रहकर वरणात्मक रूप से पारगम्य बनती है।
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कू पका क भ त्त केवल एक को शका मोट होती है, अतः गैस के अणु को बहुत कम दूरी तय करनी पड़ती है — इसी से
व नमय श्वसन क ग त के साथ चल पाता है।
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कोिशका िझल्ली की मोटाई = 7 से 10 nm
co m
e m.
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1 nm = 0.000001 mm = 10⁻⁶ mm
. com a g l
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अतः िझल्ली लगभग 7 × 10⁻⁶ mm से 10 × 10⁻⁶ mm मोटी है
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ऐसा क्य होता है: दूरी बढ़ने पर वसरण क दर तेजी से घटती है, अतः पतली बाधा संयोग नह ब ल्क आवश्यकता
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. c agl
है। ल पड परत वह सबसे पतली स्थायी परत है जो फर भी को शका क अंतवस्तुओं को भीतर रोक सके, और
s e mजो तेल म घुले वह मुक्त रूप से पार जाए, जो केवल जल म घुले
a
उसका तैलीय भीतरी भाग ही छँ टाई करता है —
aglनह होती — सारा काय सांद्रता प्रवणता करती है।
उसे प्रोट न ही ले जाए। इसम ऊजा व्यय
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क्रयाकलापm2.2— आइए, प्रयोग कर — पृष्ठ 11 as e
. coशका झल्ली — को शका क साव त्रक वशेषता a g l
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खंड 2.2.1
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agl क्रयाकलाप
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आपने क्या अवलोकन कया?
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प्र.1
उत्तर agl
आलू के दोन टु कड़े वपरीत व्यवहार करते ह।
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बीकर तरल लगभग एक घंटे बाद प्रेक्षण
em ‘क’ a
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साधारण जल आलू के टुकड़ े के आमाप में वृिद्ध हो जाती है; वह अिधक दृ ढ़ लगता है
a c
आलू का टुकड़ ा संकुिचत हो जाता है; वह नरम और ढीला लगता है
m .
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‘ख’ 20 प्र तशत नमक अथवा चीनी का घोल
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बीकर ‘क’ — साधारण जल बीकर ‘ख’ — 20% नमक का घोल
जल भीतर → टु कड़ ा फू लता है जल बाहर → टु कड़ ा िसकुड़ ता है
जल सदा अ धक सांद्र वलयन क ओर जाता है, इसी लए एक ही आलू बीकर ‘क’ म जल पाता है और बीकर ‘ख’ म खोता है।
सुझाव: दोन टु कड़े लगभग समान आकार के कटे होने चा हए और रखने से पहले तौले जाने चा हए, अन्यथा अं तम
भार क तुलना कससे क जाएगी?
प्र.2 इससे आप क्या नष्कष नकालते ह? उनके भार म प रवतन के संदभ म आप क्या अनुमान लगाते ह?
बीकर ‘क’ के टु कड़े का भार बढ़ जाता है और बीकर ‘ख’ के टु कड़े का भार घट जाता है। इसके लए उत्तरदायी प्र क्रया परासरण
है।
भार में वृिद्ध (क) = अंितम भार − पारंिभक भार → एक धनात्मक संख्या
भार में कमी (ख) = अंितम भार − पारंिभक भार → एक ऋणात्मक संख्या
उदाहरण — क: 25.0 g → 27.2 g, पिरवतन = +2.2 g
ख: 25.0 g → 22.6 g, पिरवतन = −2.4 g
झल्ली के पार केवल जल गया, अतः भार म प रवतन सीधे यह बताता है क कतना जल भीतर आया या बाहर गया।
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ऐसा क्य होता है: आलू क को शकाओं क झल्ली वरणात्मक रूप से पारगम्य है — वह जल को जाने दे ती है,
चीनी या नमक के अणुओं को नह । बीकर ‘क’ म बाहर का जल को शका-रस से तनु है (जल अ धक, वलेय कम),
अतः जल भीतर जाता है जब तक दोन सांद्रताएँ पास न आ जाएँ। बीकर ‘ख’ म बाहर का 20 प्र तशत घोल
को शका-रस से कह अ धक सांद्र है, अतः जल बाहर जाता है। वरणात्मक पारगम्य झल्ली के पार जल क इस शुद्ध
ग त को परासरण कहते ह, जो वास्तव म जल का ही वसरण है। साधारण वसरण के लए झल्ली क आवश्यकता
ही नह — कक्षा 8 म आपने जल म रंजक का फैलना ( क्रयाकलाप 7.8) और वायु म सुगंध का फैलना (7.9) दे खा
था। परासरण उसी क वशेष स्थ त है जहाँ ग त करने वाले कण जल के अणु ह और बीच म वरणात्मक पारगम्य
झल्ली है।
क्या आप जानते ह? पौधा ठ क इसी प्रकार जल पीता है। मृदा का जल तनु है, जड़ का को शका-रस सांद्र, अतः
जल परासरण ारा जड़ क को शकाओं म प्रवेश करता है — न कोई पंप, न कोई ऊजा।
क्या होगा य द... — पृष्ठ 12
खंड 2.2.1 को शका झल्ली — को शका क साव त्रक वशेषता
क्या होगा य द...
प्र.1 मूँग के बीज को 12 घंटे तक जल म भगोने के प ात एक सांद्र वलयन म रखा जाए, बताइए इनम क्या प रवतन
होगा?
वे सकुड़कर झुर दार हो जाएँगे और अंकु रत नह ह गे।
1. 12 घंटे जल म रहने पर बीज जल सोखकर फूल जाते ह — बीजावरण तन जाता है और भ्रूण स क्रय हो जाता है।
2. सांद्र (अ तपरासारी) नमक या चीनी के वलयन म रखने पर बाहर क वलेय सांद्रता बीज क को शकाओं के भीतर से कह
अ धक हो जाती है।
3. अतः जल परासरण ारा बीज क को शकाओं से बाहर नकलता है। फूले हुए बीज जल खोकर छोटे , नरम और झुर दार हो
जाते ह।
4. अंकुरण रुक जाता है। बीज के भीतर के एंजाइम को सं चत स्टाच तोड़ने के लए जल चा हए; जल खच जाने पर वे
अ भ क्रयाएँ चल ही नह सकत ।
बाहर की िवलेय सांद ता > भीतर की िवलेय सांद ता → अितपरासारी
जल की शुद्ध गित = कोिशका से बाहर → कोिशका संकु िचत
ऐसा क्य होता है: भगोना और सकुड़ना एक ही भौ तक के दो वपरीत रूप ह। जल सदा वरणात्मक पारगम्य
झल्ली के पार वहाँ से चलता है जहाँ वह अ धक है (तनु वलयन) उस ओर जहाँ वह कम है (सांद्र वलयन)। बीज
कुछ ‘चुनता’ नह ; वह केवल आस-पास क सांद्रता के अनुसार व्यवहार करता है।
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई AglaSem · NCERT Solutions
यह क जए: मूँग के दो समूह 12 घंटे भगोइए, फर एक को साधारण जल म और दूसरे को गाढ़े चीनी के घोल म
र खए। एक दन बाद केवल पहले समूह म सफेद मूलांकुर नकलेगा। यही तक प्रश्न 16 म द पा आँवले और न बू को
सुर क्षत रखने के लए उपयोग करती है।
प्र.2 एक को शका को अलग-अलग सांद्रताओं के नमक या चीनी के वलयन म रखा जाए?
तीन प रणाम संभव ह, और कौन-सा होगा यह केवल इस पर नभर है क बाहर क वलेय सांद्रता भीतर क तुलना म कैसी है।
वलयन तुलना जल क शुद्ध ग त को शका पर प्रभाव
समपरासारी बाहर = भीतर कोई नह (दोन ओर बराबर) आमाप में कोई पिरवतन नही ं
अल्पपरासारी बाहर < भीतर को शका के भीतर कोिशका फू लती है; जंत ु कोिशका फट भी सकती है
अितपरासारी बाहर > भीतर को शका से बाहर कोिशका संकुिचत हो जाती है
समपरासारी अल्पपरासारी अितपरासारी
कोई शुद्ध गित नही ं जल भीतर जाता है जल बाहर जाता है
आमाप अपिरवितत कोिशका फूलती है कोिशका िसकु ड़ ती है
एक ही को शका तीन भन्न प रवेश म। जल क दशा केवल सांद्रता के अंतर से तय होती है।
ऐसा क्य होता है: झल्ली जल को जाने दे ती है पर वलेय को रोक लेती है, अतः दोन ओर क सांद्रताएँ बराबर होने
का एकमात्र उपाय यही है क जल स्थान बदले। ध्यान द जए क अ तपरासारी वलयन म रखी पादप को शका जंतु
को शका क भाँ त नह धँसती — उसक दृढ़ को शका भ त्त बाहरी आकार बनाए रखती है जब क झल्ली और
अंतवस्तुएँ भीतर क ओर खच जाती ह, ठ क वैसे ही जैसा क्रयाकलाप 2.3 म रोइओ क वशल्क म दखता है।
क्या आप जानते ह? अस्पताल म प से दए जाने वाले तरल जान-बूझकर रक्त के समपरासारी बनाए जाते ह।
अल्पपरासारी प से लाल रक्त को शकाएँ फूलकर फट जात और अ तपरासारी से सकुड़ जात ।
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई AglaSem · NCERT Solutions
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 13
खंड 2.2.2 को शका भ त्त — को शकाओं का बाहरी आवरण
प्र.1 पादप , कवक और जीवाणुओं क को शकाओं म को शका झल्ली के चार ओर एक अ त रक्त परत होती है
जसे को शका भ त्त कहा जाता है। आपके वचार से इन को शकाओं म को शका भ त्त क क्या आवश्यकता है?
ये जीव संकट से हटकर कह जा नह सकते, अतः इन्ह एक दृढ़ बाहरी आवरण चा हए जो आकार, साम य और सुरक्षा दे और फर
भी जल तथा ख नज को आर-पार जाने दे ।
यां त्रक अवलंब — पौधे सीधे खड़े रहते ह और प त्तयाँ तथा फूल दृढ़ बने रहते ह क्य क लाख भ त्त-युक्त को शकाएँ एक-
दूसरे पर दबाव डालती ह। वायु और वषा का सामना पतली झल्ली नह , भ त्त करती है।
फटने से सुरक्षा — जड़ क को शकाएँ तनु मृदा-जल म रहती ह, जो अल्पपरासारी है, अतः परासरण ारा जल नरंतर भीतर
आता रहता है। भ त्त न हो तो को शका फूलकर फट जाए। भ त्त प्र तदाब दे ती है और भीतर आना रुक जाता है।
आकार — भ त्त-युक्त को शका जल खोने पर भी अपना बॉक्स जैसा आकार बनाए रखती है — इसी लए प्याज क झल्ली
और रोइओ क को शकाएँ सूक्ष्मदश म नय मत और आयताकार दखती ह जब क कपोल को शकाएँ अ नय मत।
फर भी पारगम्य — भ त्त दृढ़ होते हुए भी पारगम्य है, अतः जल और घुले हुए ख नज सीधे उसम से नकल जाते ह। क्या
भीतर आए, इसका चयन ठ क भीतर स्थत झल्ली पर छोड़ दया जाता है।
पादप कोिशका िभि मुख्यतः सेल्युलोस से बनी होती है
सेल्युलोस = अने क ग् लूक ोस इकाइयों के जुड़ने से बना काब हाइडेट
ऐसा क्य होता है: जंतु इन्ह समस्याओं को दूसरे ढं ग से हल करता है — उसके पास कंकाल है और वह वायु, सूखे
या परभक्षी से हटकर चल सकता है। पादप एक स्थान पर स्थर है, अतः उसका अवलंब हर एक को शका म ही
बनाना पड़ता है। इसक क मत लचीलेपन से चुकानी पड़ती है — जंतु को शकाओं म भ त्त न होने से वे आकार
बदल सकती ह, और इसी से पेशी सकुड़ती है, श्वेत रक्त को शकाएँ ऊतक के बीच से नकलती ह और भ्रूण मुड़कर
जीव का रूप लेता है।
क्या आप जानते ह? हमारे एंजाइम आहार के सेल्युलोस को पचा नह सकते, अतः वह रुक्षांश (roughage) के
रूप म नकल जाता है और भोजन म भार जोड़कर पाचन म सहायता करता है।
क्रयाकलाप 2.3— आइए, जाँच कर — पृष्ठ 13
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई
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खंड 2.2.2 को शका भ त्त — को शकाओं का बाहरी आवरण
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क्रयाकलाप
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a s emक झल्ली क को शकाएँ अथवा रोइओ क पत्ती क वशल्क को शकाएँ बॉक्स जैसे आकार क ह और
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प्याज
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प्र.1
नय मत रूप से व्यव स्थत ह, जब क कपोल को शकाएँ अ नय मत रूप से व्यव स्थत ह। आपके वचार से यह
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भन्नता क्य दखाई दे ती है?
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त्तgहोती है और जंतु को शकाओं म नह ।
क्य क पादप को शकाओं म दृढ़ को शका भ a
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प्याज क झल्ली / रोइओ क वशल्क मानव कपोल
m के वल कोिशका िझlल्aलीs
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सबसे बाहरी आवरण सेल्युलोस क को शका भ त्त, फर को शका झल्ली
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आकार बॉक्स जैसा, सीधी कोर वाला, न त गोलाई िलए, अिनयिमत, कोई िनिश्चत रूपरे खा नही ं
िबखरी हुई, पायः एक-दू सरे पर चढ़ ी हुई
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व्यवस्था नय मत, ईंट क भाँ त सट हुई
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पयुक्त अिभरंजक सै े नीन
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ऐसा क्य होता है: भ त्त तब बनती है जब को शका ऊतक म अपने पड़ो सय से जुड़ी होती है, अतः सट हुई
भ त्तयाँ साझा होती ह और को शकाएँ ईंट जैसे न त प्र तरूप म जुड़ जाती ह, जो वशल्क उतारने के बाद भी
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बना रहता है। कपोल को शकाएँ एक नम सतही परत से खुरचकर अलग क जाती ह, उनके पास आकार बनाए रखने
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वाली भ त्त नह होती और पृष्ठ तनाव प्रत्येक मुक्त को शका को गोल रूपरेखा क ओर ख चता है। स्लाइड पर उनक
s e mनय मत व्यवस्था आं शक रूप से को शकाओं के आकार के कारण है और आं शक रूप से इस लए क वे ऊतक
la म जुड़ी न रहकर केवल जल क एक बूँद म फैलाई गई ह।
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cकomकारण स हत लगाए जाते ह — सै े नीन सेल्युलोस भ त्त और g l a
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सुझाव: दोन स्लाइड पर अलग-अलग अ भरंज
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पादप कद्रक से अच्छ तरह जुड़ता है, जब क मे थलीन ब्लू लगभग पारदश कपोल को शका के कद्रक को दृश्य
बनाता है। ag
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mरोइओ क पत्ती क वशल्क और मानव कपोल को शकाओं क दो स्लाइडaपुsनeः तैयार क जए और उन पर 20
o l आप क्या दे खते ह?
.c प्र तशत चीनी का घोल डा लए। आधे घंटे प ात इन्ह सूक्ष्मदश ाराaदेgखए।
प्र.2
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दोन को शकाएँ जल खोती ह, परंतु उसके बाद वे बलकुल भन्न दखती ह।
m ठ क वह बना रहता है, कतु भीतरी अंतवस्तुएँ उससे दूर सकुड़ जाती ह।
रोइओ (पादप) को शकाएँ — बाहरीeआवरण
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agl एक स्पष्ट स्थान बढ़ जाता है। झल्ली और अंतवस्तुओं का भ त्त से इस प्रकार दूर हटना
भीतरी और बाह्य आवरण के बीच
जीवद्रव्यकुंचन (plasmolysis) कहलाता है।
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई AglaSem · NCERT Solutions
कपोल (जंतु) को शकाएँ — पूरी को शका अत्य धक संकु चत हो जाती है और झुर दार दखती है, क्य क आकार बनाए रखने
वाली कोई बाहरी भ त्त है ही नह ।
जल में पादप कोिशका 20% चीनी के घोल में जल में कपोल कोिशका चीनी के घोल में
िभि और अंतवस्तु िभि अपिरवितत, गोल और भरी हुई पूरी कोिशका िसकुड़ ी
दोनों भरी हुई अंतवस्तु िसकुड़ ी
अ तपरासारी वलयन म दोन को शकाएँ जल खोती ह; केवल पादप को शका अपनी रूपरेखा बनाए रखती है, क्य क भ त्त नह सकुड़ती।
ऐसा क्य होता है: 20 प्र तशत चीनी का घोल को शका-रस के लए अ तपरासारी है, अतः दोन को शकाओं से
परासरण ारा जल नकलता है। पादप को शका म सेल्युलोस क भ त्त दृढ़ और पारगम्य है — चीनी का घोल भ त्त
और झल्ली के बीच के स्थान म भर जाता है, इस लए जीवद्रव्य सकुड़ने पर भी भ त्त अपना मूल बॉक्स आकार
बनाए रखती है। कपोल को शका म झल्ली ही सीमा है, अतः अंतवस्तु का जल घटते ही सीमा स्वयं धँस जाती है।
अध्याय म यह अकेला प्रेक्षण सबसे स्पष्ट प्रमाण है क पादप को शका म झल्ली के बाहर कुछ ऐसा है जो जंतु
को शका म नह ।
स्वयं जाँ चए: जीवद्रव्यकुं चत रोइओ क स्लाइड पर साधारण जल डा लए। अंतवस्तुएँ फर फूलकर भ त्त तक
पहुँच जाती ह — प्र क्रया उलट जाती है, जससे पता चलता है क जीवद्रव्यकुंचन ने को शका को मारा नह है।
सो चए और बताइए — पृष्ठ 14
खंड 2.2.2 को शका भ त्त — को शकाओं का बाहरी आवरण
सो चए और बताइए
प्र.1 एक स्थान से दूसरे स्थान पर ग त करने वाले जंतुओं क अपेक्षा एक स्थान पर स्थर रहने वाले पादप म को शका
भ त्त क आवश्यकता के संबंध म आप क्या तक दगे?
तक इस पर टका है क अवलंब और बचाव का माग कहाँ से आता है। स्थर जीव को साम य हर को शका म बनानी पड़ती है;
ग तशील जीव को हर को शका को आकार बदलने योग्य रखना पड़ता है।
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई AglaSem · NCERT Solutions
समस्या पादप का समाधान जंतु का समाधान
सीधे खड़े रहना, वायु और हर को शका म दृढ़ सेल्युलोस भ त्त; त आंतिरक कं काल और पेिशयाँ
वष सहना को शकाएँ एक-दूसरे पर दबाव डालती ह
परासरण से बहुत अिधक भ त्त प्र तदाब दे ती है और आगे जल आना रुक वृक्क और रक्त शरीर के तरल को समपरासारी रखते
जल भीतर आना जाता है — को शका फट नह सकती है,ं अतः यह समस्या उठती ही नही ं
सूखे, ताप या परभक्षी से ग त संभव नह ; सहना ही पड़ता है हटकर चला जाता है
बचना
गित, भूण की वृिद्ध, घाव आवश्यकता नह — वृ द्ध न त वधनशील बदुओं िभि हीन कोिशकाएँ आकार बदलती है,ं एक-दू सरे पर
भरना पर को शकाएँ जोड़कर होती है सरकती है ं और स्थान बदलती है ं
ऐसा क्य होता है: भ त्त मुफ्त का उपहार नह , एक सौदा है। वह दृढ़ता और फटने से सुरक्षा दे ती है, पर ग तशीलता
और लचीलापन छ न लेती है। मृदा म जड़े पादप के लए दृढ़ता ग तशीलता से कह अ धक मूल्यवान है, अतः यह
सौदा लाभ का है। जस जंतु को दौड़ना, नगलना, पेशी सकोड़ना और घाव भरना है, उसके लए हर को शका के
चार ओर दृढ़ बक्सा यह सब असंभव कर दे ता — इस लए जंतु केवल झल्ली रखते ह और साम य कह और,
अ स्थ और उपा स्थ म, जुटाते ह। ध्यान द जए क कवक और जीवाणु, जो अग तशील या मंद ग त वाले ह, उन्ह ने
भी पादप जैसा ही चुनाव कया और उनम भी भ त्त है।
प्र.2 य द कसी पादप को शका क को शका भ त्त, को शका झल्ली के समान लचीली हो जाए तो आप कन
प रणाम का पूवानुमान लगाएँगे?
वह को शका ठ क जंतु को शका जैसा व्यवहार करने लगेगी — और पूरा पौधा गर पड़ेगा।
1. साधारण मृदा-जल (अल्पपरासारी) म को शका फट जाएगी। परासरण ारा जल नरंतर भीतर आता रहता है और उसे
केवल दृढ़ भ त्त रोकती है। लचीली भ त्त के साथ वरोधी दाब बन ही नह पाएगा, अतः को शका फूलती जाएगी और झल्ली
फट जाएगी।
2. पौधा अपना आकार खो दे गा। तना, पत्ती या पंखुड़ी लाख त भ त्त-युक्त को शकाओं के परस्पर दबाव से खड़े रहते ह।
दृढ़ता हटाइए तो पूरी तरह स चत पौधा भी मुरझाए हुए क भाँ त लटक जाएगा।
3. जीवद्रव्यकुंचन के स्थान पर पूरी को शका सकुड़ेगी। सांद्र वलयन म अंतवस्तुएँ अप रव तत भ त्त से हटने के बजाय पूरी
को शका ही सकुड़ जाएगी — और केवल जल डालकर उसे पुनज वत नह कया जा सकेगा।
4. जड़ का अवशोषण कम प्रभावी होगा। भ त्त पारगम्य है और मृदा-जल तथा ख नज के झल्ली तक पहुँचने का चौड़ा, खुला
माग बनाती है। झल्ली जैसा मुलायम आवरण इस माग को धीमा कर दे गा।
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मृद ा-जल जड़ के कोिशका-रस के िलए अल्पपरासारी है
→ परासरण ारा जल िनरंत र भीतर आता है
→ भीतर दाब बढ़ ता है
दृ ढ़ िभि उपिस्थत: दाब संत िु लत हो जाता है, कोिशका स्फीत होकर रुक जाती है
दृ ढ़ िभि अनुपिस्थत: दाब बढ़ ता ही जाता है → कोिशका फट जाती है
ऐसा क्य होता है: भ त्त एक दाब-पात्र क तरह काय करती है। को शका भर जाने पर भ त्त का भीतर क ओर
दबाव परासरणी खचाव के बराबर हो जाता है और सांद्रताएँ असमान होने पर भी जल क शुद्ध ग त रुक जाती है।
इसी संतुलन को त कहते ह, और त ही पादप का कंकाल है।
प्र.3 दो आलू के टु कड़ को लगभग समान आकार म काट कर उन्ह व भन्न तरल पदाथ म रखने से पूव उनके आरं भक
भार का मापन क्य महत्त्वपूण है?
ता क दोन व्यवस्थाओं म केवल तरल का ही अंतर रहे, और भार म प रवतन का प रकलन वास्तव म कया जा सके।
समान आकार — नष्पक्ष परीक्षण। परासरण पृष्ठीय क्षेत्रफल और ऊतक क मात्रा पर नभर करता है। बड़े टु कड़े म अ धक
झल्ली क्षेत्रफल और अ धक को शकाएँ ह गी, अतः केवल आकार के कारण ही उसम अ धक जल का व नमय होगा। आकार
समान रखने से आकार एक कारण नह रह जाता और केवल तरल ही चर बचता है।
प्रारं भक भार — आधार-रेखा। कतना भार बढ़ा या घटा, यह केवल अं तम भार से नह जाना जा सकता। इसके लए अंतर
चा हए।
भार में पिरवतन = अंितम भार − पारंिभक भार
बीकर ‘क’: 25.0 g → 27.2 g, अथ त 27.2 − 25.0 = +2.2 g (जल पाप्त)
बीकर ‘ख’: 25.0 g → 22.6 g, अथ त 22.6 − 25.0 = −2.4 g (जल की हािन)
ऐसा क्य होता है: यह नयं त्रत प्रयोग का तक है। जो भी कारक प रणाम को प्रभा वत कर सकता है — आकार,
रूप, एक ही आलू, एक ही समय, एक ही तापमान — उसे जान-बूझकर समान रखा जाता है, ता क प रणाम का
कोई भी अंतर उसी एक कारक से आया हो जसे बदला गया था। प्रारं भक भार के बना प्रयोग केवल ‘बड़ा’ और
‘छोटा’ जैसा धुँधला प्रभाव दे ता; उनके साथ वह ऐसे अंक दे ता है जनक तुलना क जा सके, जन्ह दोहराया जा सके
और कोई दूसरा जाँच सके।
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सुझाव: हर बार तौलने से पहले दोन टु कड़ को समान सावधानी से प छए। सतह पर लगा जल ऐसे तौला जाएगा
मानो वह को शकाओं म प्रवेश कर गया हो।
क्रयाकलाप 2.4— आइए, अध्ययन कर — पृष्ठ 14
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई
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खंड 2.3 को शका का आंत रक भाग — एक सम न्वत काय प्रणाली
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क्रयाकलाप
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a s emगए जीवाणु को शका, पादप को शका और जंतु को शका के चत्र का अध्ययन क जए ( चत्र 2.10 क, ख
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और ग)। प्रत्येक को शका म उप स्थत व भन्न संरचनाओं का अवलोकन क जए। ता लका 2.1 म अपने
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अवलोकन अ भले खत क जए।
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई AglaSem · NCERT Solutions
कोिशका िभि
राइबोसोम
चलन हेत ु उपागं
कोिशकाद व्य
केंद काभ (आनुवंिशक पदाथ )
(क)
कोिशका िझ ल् ली
हिरत लवक
केंद क
रसधानी
केंिद का
राइबोसोम
अंतद व्यी जािलका
माइटोकॉिन् ड या
गॉल् जी काय
कोिशकाद व्य
कोिशका िभि
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केंद क लाइसोसोम
केंिद का
रसधानी
अंतद व्यी जािलका
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माइटोकॉिन् ड या
राइबोसोम
कोिशका िझ ल् ली कोिशकाद व्य
(ग)
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चत्र 2.10 — (क) एक प्ररूपी जीवाणु को शका, (ख) एक प्ररूपी पादप को शका और (ग) एक प्ररूपी जंतु को शका।
ता लका 2.1— संरचना के आधार पर व भन्न प्रकार क को शकाओं क तुलना
क्र.सं. को शका संरचनाएँ जीवाणु पादप जंतु
को शका को शका को शका
1. को शका झल्ली
2. को शका भ त्त
3. को शकाद्रव्य
4. सुस्पष्ट कद्रक ( झल्ली से घरा आनुवं शक
पदाथ)
5. आद्य कद्रक (कद्रकाभ) ( झल्ली र हत
आनुवं शक पदाथ)
6. झल्ली-आबद्ध को शकांग
चत्र 2.10 के आधार पर पूरी क गई ता लका 2.1 इस प्रकार है।
क्रम को शका संरचनाएँ जीवाणु पादप जंतु
सं. को शका को शका को शका
1. को शका झल्ली उपिस्थत उपिस्थत उपिस्थत
2. को शका भ त्त उपिस्थत उपिस्थत अनुपिस्थत
3. को शकाद्रव्य उपिस्थत उपिस्थत उपिस्थत
4. सुस्पष्ट कद्रक ( झल्ली से घरा आनुवं शक पदाथ) अनुपिस्थत उपिस्थत उपिस्थत
5. आद्य कद्रक (कद्रकाभ) ( झल्ली र हत आनुवं शक उपिस्थत अनुपिस्थत अनुपिस्थत
पदाथ)
6. झल्ली-आबद्ध को शकांग अनुपिस्थत उपिस्थत उपिस्थत
चत्र 2.10 म दो और बात दखती ह जन्ह नोट करना चा हए — जीवाणु को शका म चलन हेतु उपांग और मुक्त राइबोसोम ह;
तथा केवल पादप को शका म ह रतलवक और एक बड़ी कद्र य रसधानी है।
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: ता लका का प्र तरूप यूँ ही बना अंतर क सूची नह है — यह को शकाओं को दो वग म बाँट
दे ता है। पं क्तयाँ 4, 5 और 6 साथ-साथ चलती ह — को शका या तो अपने डीएनए को कद्रक झल्ली म बंद करती
है और झल्ली-आबद्ध को शकांग रखती है, या दोन म से कुछ नह । ऐसा इस लए क दोन वशेषताएँ एक ही क्षमता
पर टक ह — आंत रक झ ल्लयाँ बनाने क क्षमता। जीवाणुओं म यह नह है, अतः उनका डीएनए को शकाद्रव्य म
कद्रकाभ के रूप म मुक्त रहता है और उनक सारी रसाय नक एक ही खुले कक्ष म चलती है। पं क्तयाँ 1 और 3 हर
स्तंभ म उप स्थत ह क्य क बना सीमा और बना तरल भीतरी भाग के कोई को शका हो ही नह सकती।
सुझाव: पं क्त 2 पादप और जंतु को अलग करती है, और पं क्तयाँ 4–6 जीवाणु को दोन से। ता लका को स्तंभ से
नह , पं क्तय से प ढ़ए — तक अपने आप दख जाएगा।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 15
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई
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खंड 2.3 को शका का आंत रक भाग — एक सम न्वत काय प्रणाली
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चत्र 2.10 म द गई को शकाओं म से कौन-सी को शकाएँ पूवकद्रक और सुकद्रक को शकाओं क
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कोिशका िभि
राइबोसोम
चलन हेत ु उपागं
कोिशकाद व्य
केंद काभ (आनुवंिशक पदाथ )
(क)
कोिशका िझ ल् ली
हिरत लवक
केंद क
रसधानी
केंिद का
राइबोसोम
अंतद व्यी जािलका
माइटोकॉिन् ड या
गॉल् जी काय
कोिशकाद व्य
कोिशका िभि
(ख)
केंद क लाइसोसोम
केंिद का
रसधानी
अंतद व्यी जािलका
गॉल् जी काय
माइटोकॉिन् ड या
राइबोसोम
कोिशका िझ ल् ली कोिशकाद व्य
(ग)
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चत्र 2.10 — (क) एक प्ररूपी जीवाणु को शका, (ख) एक प्ररूपी पादप को शका और (ग) एक प्ररूपी जंतु को शका।
जीवाणु को शका ( चत्र 2.10 क) पूवकद्रक है। पादप को शका ( चत्र 2.10 ख) और जंतु को शका ( चत्र 2.10 ग)
सुकद्रक ह।
pro = पूव, karyon = कें द क → पूवके ं द की = आद्य कें द क
eu = वास्तिवक, karyon = कें द क → सुकें द की = वास्तिवक कें द क
चत्र म जो दखता है और जससे यह नणय होता है —
चत्र 2.10 क म कद्रकाभ दखता है — आनुवं शक पदाथ को शकाद्रव्य म खुला पड़ा है — साथ म बखरे राइबोसोम और
चलन हेतु उपांग। न कोई कद्रक झल्ली है, न अपनी झल्ली से घरा कोई को शकांग।
चत्र 2.10 ख और 2.10 ग दोन म कद्रक झल्ली के भीतर क द्रका स हत कद्रक दखता है, तथा माइटोकॉ या, अंतद्रव्यी
जा लका, गॉल्जी काय, लाइसोसोम और रसधानी — ये सब झल्ली-आबद्ध ह।
वशेषता पूवकद्रक को शका सुकद्रक को शका
एक सामान्य कोिशका का व्यास 1 से 10 µm 10 से 100 µm
िझल्ली-आबद्ध कें द क अनुप स्थत उप स्थत
िझल्ली-आबद्ध कोिशकांग अनुप स्थत उप स्थत
एक जीव में कोिशकाओं की संख्या सामान्यतः एकको शक य एकको शक य या बहुको शक य हो सकते ह
ऐसा क्य होता है: आंत रक झ ल्लयाँ ही सुकद्रक को शका को संभव बनाती ह। वे को शका को कमर म बाँट दे ती
ह, जससे परस्पर वरोधी अ भ क्रयाएँ एक ही समय म साथ-साथ चल सक — पाचक एंजाइम लाइसोसोम म बंद
रहते ह और को शका को नह गलाते, ऊजा नमु क्त माइटोकॉ या तक सी मत रहती है, प्रोट न प्रसंस्करण
अंतद्रव्यी जा लका और गॉल्जी तक। पूवकद्रक को शका म एक ही खुला कक्ष है, अतः उसक सारी रसाय नक एक
ही स्थान साझा करती है; यही एक कारण है क वह छोट बनी रहती है। आमाप के आँकड़े भी इसी तक से नकलते
ह — 1–10 µm के मुकाबले 10–100 µm लंबाई म दस गुना अंतर है, जो आयतन म हजार गुना अंतर बनता है।
ता लका 2.2 पर एक टप्पणी: पुस्तक क पहली पं क्त है “आद्य कद्रक — पूवकद्रक म उप स्थत, सुकद्रक म
अनुप स्थत”। इसे “आद्य कद्रक (कद्रकाभ)” के रूप म प ढ़ए, जो वास्तव म केवल पूवकद्रक को शकाओं म ही
होता है; अं तम दो पं क्तयाँ फर ठ क कहती ह क झल्ली-आबद्ध कद्रक केवल सुकद्रक को शकाओं म है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 16
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ज ासा-सूत्र — कद्रक: कूटबद्ध अनुदेश का कद्र
ज ासा-सू त्र
प्र.1 मनुष्य म प रपक्व लाल रक्त को शकाओं म कद्रक नह होता (कद्रक-र हत)। क्या आप बना कद्रक क कसी
अन्य को शका के वषय म जानते ह?
हाँ। कई को शकाएँ कद्रक खो दे ती ह या बनाती ही नह , और हर बार इस हा न से कुछ लाभ मलता है।
को शका कहाँ मलती कद्रक न होने से क्या मलता है
है
पिरपक्व लाल रक्त कोिशका मानव रक्त हीमोग्लोिबन के िलए अिधक स्थान, अतः अिधक ऑक्सीजन का पिरवहन
िबंबाण ु (प्ले टले ट) मानव रक्त छोटे कोिशका-खंड जो घाव को शीघ बंद कर दे ते है ं
फ्लोएम की चालनी निलका पादप संवहन भोजन के बहाव के िलए खुल ा माग; पास की सहचर कोिशका अपना के ं द क रखकर
कोिशकाएँ ऊतक इसे िनयंित्रत करती है
पिरपक्व जाइलम वािहका और पादप संवहन मृत, खोखली निलकाएँ — जल के िलए स्वच्छ पाइप
वािहिनका ऊतक
नेत्र ले ंस की पिरपक्व तंत ु नेत्र का लस पूण पारदिशता, क्योंिक के ं द क पकाश को पकीिणत कर दे ता
कोिशकाएँ
ऐसा क्य होता है: कद्रक नयंत्रण कद्र है, अतः उसे छोड़ने क क मत भी है — बना कद्रक क को शका न अपनी
मरम्मत कर सकती है, न वभाजन। इसी लए मानव लाल रक्त को शका लगभग 120 दन ही जी वत रहती है और
उसे अ स्थ म ा से बदलना पड़ता है। यह सौदा फर भी लाभ का है क्य क काय वशुद्ध यां त्रक है — ऑक्सीजन
ढोने, रसाव रोकने या पाइप बनने के लए नए अनुदेश क आवश्यकता नह । जहाँ भी कसी को शका का एक
सरल, न त काय हो और उसे कह और से बदला जा सके, वहाँ वकास ने प्रायः कद्रक त्याग दया है।
क्या आप जानते ह? लाल रक्त को शका का उभयावतल, कद्रक-र हत आकार उसे इतना लचीला भी बना दे ता है
क वह स्वयं से पतली के शकाओं म एक-एक करके नकल सके।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 17
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लाइसोसोम — नमलन प्रणाली
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को शकाएँ अपनी को शक य ग त व धय के दौरान अप शष्ट पदाथ और क्ष तग्रस्त, जीण को शकांग न मत
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करती ह। को शका इन अप शष्ट को अपने भीतर सं चत होने से कस प्रकार रोकती है?
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वह उन्ह पचा दे ती है — लाइसोसोम क सहायता से, जो एंजाइम से भरे एकल झल्ली-आबद्ध थैले ह।
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agक्षितगस्त कोिशकांग
अवांिछत पोटीन, काब हाइडेट , वसा और
→ लाइसोसोमी एंजाइमों ारा घेरकर िवघिटत
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→ सरल उत्पाद कोिशकाद व्य में िनमुक्त
om पिक्रयाओं में पुनः उपयोग
→ अन्य.cकोिशकीय a g l
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agl ये एंजाइम प्रोट न, काब हाइ ेट, वसा और को शका के अपने जीण भाग तक को वघ टत कर सकते ह, जससे को शका स्वच्छ
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और स्वस्थ रहती है।
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वघटन के उत्पाद फके नह जाते — वे को शकाद्रव्य म नमुक्त होते ह और कच्चे माल के रूप म फर काम आते ह।
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ऐसा क्य होता है: महत्त्वपूण बात लाइसोसोम के चार ओर क एकल झल्ली है। जो एंजाइम प्रोट न और वसा को
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पचा सकते ह, वे य द को शकाद्रव्य म खुले पड़े होते तो को शका क अपनी संरचनाओं पर ही आक्रमण कर दे ते;
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अतः उन्ह एक थैली म बंद रखा जाता है और केवल वही भीतर लाया जाता है जसे नष्ट करना है। यही वह
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अ भकल्पना है जो आपने को शका झल्ली म भी दे खी — परस्पर वरोधी रसाय नक को अलग-अलग कक्ष म
g अमीनो अम्ल शून्य से बनाने
.c पुनःचक्रण आ थक दृ ष्ट से भी ठ क है — अमीनो अम्ल से प्रोट न फरaबनाना,
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seक तुलना म कह सस्ता है।
र खए।
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क्या आप जानते ह? मानव शुक्राणु के अग्र भाग म लाइसोसोमीय एंजाइम होते ह। जब शुक्राणु अंडाणु के संपक म
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आता है तो ये एंजाइम अंडाणु क बाहरी परत का वघटन करते ह जससे नषेचन संपन्न होता है — वही पाचक
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औजार रचनात्मक काय म।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 18
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लवक — पादप को शकाओं म भोजन सं ेषण का कद्र
प्र.1 जंतु अपने प रवेश से भोजन प्राप्त कर सकते ह यद्य प पादप सूय के प्रकाश क उप स्थ त म भोजन सं े षत
करते ह। परंतु पादप अपना भोजन कहाँ सं े षत करते ह एवं को शक य ग त व धय के लए पादप को ऊजा
कहाँ से मलती है?
पादप भोजन ह रतलवक म बनाते ह, जो एक प्रकार का लवक है, और फर उस भोजन से ऊजा माइटोकॉ या म नमुक्त करते ह
— ठ क जैसे जंतु करते ह।
सूय का पकाश + CO₂ + H₂O → (हिरतलवक में, पकाश-संश्लेषण) → शक रा
शक रा + O₂ → (माइटोकॉिन्डया में, कोिशकीय श्वसन) → एटीपी + CO₂ + H₂O
ह रतलवक के भीतर एक अध-तरल पदाथ होता है जसे पी ठका (stroma) कहते ह। उसके भीतर च क्रका के आकार क
झल्लीनुमा संरचनाएँ होती ह जनम पणह रत होता है — वही हरा वणक जो सूय के प्रकाश को अवशो षत करता है।
प्रकाश-सं ेषण म बनी शकरा स्टाच के कण के साथ पी ठका म संग्रहीत होती है।
ह रतलवक माइटोकॉ या क भाँ त दोहरी झल्ली-आबद्ध होते ह।
अन्य लवक के अन्य काय ह — वण लवक म पीले, नारंगी या लाल वणक होते ह; अवण लवक म वणक नह होता और वे
स्टाच, तेल या प्रोट न संग्रहीत करते ह।
ऐसा क्य होता है: इस प्रश्न म एक सामान्य भ्रां त छपी है — क पादप अपनी को शकाएँ चलाने के लए सीधे सूय
के प्रकाश का उपयोग करते ह। ऐसा नह है। प्रकाश केवल पकड़ा जाता है और उसक ऊजा शकरा के रासाय नक
बंध म संग्रहीत हो जाती है। पादप को शका क हर ग त व ध — दन हो या रात, जड़ हो या पत्ती — एट पी से
चुकाई जाती है जसे माइटोकॉ या उसी शकरा को तोड़कर बनाते ह। इसी लए पादप को शका म दोन को शकांग
होते ह, और इसी लए जड़ क को शका — जो कभी प्रकाश नह दे खती और जसम ह रतलवक नह होते — म भी
माइटोकॉ या भरपूर होते ह।
क्या आप जानते ह? माइटोकॉ या और लवक दोन म अपना डीएनए और अपने राइबोसोम होते ह और वे अपने
कुछ प्रोट न स्वयं बना सकते ह — ऐसी वशेषताएँ जो जीवाणुओं म भी ह और जो संकेत दे ती ह क दोन को शकांग
एकको शक य जीव के साथ एक वकासीय इ तहास साझा करते ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 19
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लवक और रसधानी
प्र.1 क्या पादप को शकाओं म ऐसे अन्य लवक भी ह जनम ह रत वणक के अ त रक्त कोई अन्य वणक होते ह?
हाँ — वण लवक।
लवक वणक काय कहाँ मलता है
हिरतलवक पणहिरत (हरा) प्रकाश-सं ेषण; भोजन का अस्थायी भंडारण प त्तयाँ, हरे तने
वण लवक पीला, नारंगी या लाल चटक रंग दे ना फूल क पंखु ड़याँ, फल
अवण लवक कोई नही ं — रंगहीन स्टाच, तेल या प्रोट न का भंडारण आलू, अरबी (कोलोके शया), बीज, जड़
ग्रीक मूल से नाम सरल हो जाते ह — क्रोमा का अथ है रंग, ल्यूकोस का अथ है सफेद या रंगहीन।
ऐसा क्य होता है: तीन लवक ह, अथात दोहरी झल्ली वाले उन को शकांग के एक ही कुल के सदस्य जो भोजन
बनाते और संग्रहीत करते ह। इनम अंतर केवल इतना है क कसम कौन-सा वणक है और उससे क्या संग्रहीत कराया
जाता है। एक ही कुल का होने के कारण एक लवक दूसरे प्रकार म बदल भी सकता है — इसी लए पकने पर हरा
टमाटर लाल हो जाता है, और प्रकाश म रखा आलू हरा पड़ जाता है क्य क अवण लवक म पणह रत बनने लगता
है।
प्र.2 फूल, फल और स ब्जयाँ व भन्न रंग कस प्रकार प्राप्त करते ह?
अपने वण लवक म स्थत वणक से — पणह रत के अ त रक्त वे वणक जो पीले, नारंगी या लाल हो सकते ह।
फूल क पंखु ड़य तथा फल के गूदे और छलके म लवक पणह रत के स्थान पर ये रंगीन वणक रखते ह।
यह रंग सजावट नह है। यह फूल क ओर परागणका रय को आक षत करता है जससे परागण होता है, और फल खाने
वाले जंतुओं को आक षत करता है जो बीज को दूर ले जाकर उनके प्रक णन म सहायता करते ह।
हरा फल (हिरतलवक, पणहिरत)
→ पकना: पणहिरत िवघिटत, वण लवक के वणक पकट और िनिमत
→ लाल, नारंगी या पीला पका फल — यह संके त िक बीज तै यार है ं
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ऐसा क्य होता है: पादप ग त नह कर सकता, अतः उसे जंतुओं को अपनी ओर से चलने के लए मनाना पड़ता है।
रंग उसका सबसे सस्ता दूरगामी संकेत है। इसे प्रभावी बनाता है इसका समय — जब तक बीज अप रपक्व ह तब
तक फल हरा और अनाकषक रहता है, और रंग तभी बदलता है जब बीज प्रक णन के लए तैयार ह । अतः वणक
का यह प रवतन वास्तव म पादप और जंतु के बीच एक संवाद है।
क्या आप जानते ह? पादप का हर रंग वण लवक से नह आता। जामुन, चुकंदर या गुलाब के अनेक लाल, नीले
और बगनी रंग रसधानी के को शका-रस म घुले वणक से आते ह, लवक से नह ।
प्र.3 परंतु को शका म जल, ख नज और अप शष्ट पदाथ कहाँ संग्रहीत होते ह?
रसधानी म। एक प रपक्व पादप को शका म सामान्यतः एक बड़ी कद्र य रसधानी होती है, जो एकल वरणात्मक रूप से पारगम्य
झल्ली से घरी होती है और को शका-रस नामक जलीय तरल से भरी होती है।
यह जल, ख नज, शकरा और अप शष्ट पदाथ संग्रहीत करती है।
बड़ी मात्रा म जल रखकर यह को शका के भीतर दबाव बनाए रखती है, जो पादप को शका को दृढ़ रखता है।
जंतु को शकाओं म भी कभी-कभी रसधा नयाँ होती ह। वे बहुत छोट होती ह और पदाथ के अस्थायी भंडारण म सहायक ह।
ऐसा क्य होता है: पादप के पास न वृक्क ह और न अ धकांश अप शष्ट को बाहर नकालने का कोई माग, अतः वह
उसे संग्रहीत कर लेता है — रसधानी म सुर क्षत बंद, जहाँ वह को शकाद्रव्य म बाधा नह डाल सकता। वही थैली एक
साथ दूसरी समस्या भी हल करती है। एक बड़ी थैली को जल से भर दे ने पर को शकाद्रव्य और को शकांग भ त्त से
सट एक पतली परत म आ जाते ह, जससे वे व नमय के लए सतह के पास रहते ह; और इससे को शका सस्ते म
बड़ी भी हो जाती है — महँगा नया को शकाद्रव्य बनाने के बजाय केवल जल भरकर आयतन बढ़ाया जा सकता है।
प्र.4 जब पौध को पयाप्त मात्रा म जल प्राप्त नह होता तो वे मुरझाए हुए क्य दखाई दे ते ह?
क्य क रसधानी से जल क हा न होती है, अतः को शकाएँ बाहर क ओर दबाव डालना बंद कर दे ती ह और पौधा स्वयं को सँभाल
नह पाता।
पय प्त जल → रसधानी भरी → कोिशका-रस िझल्ली को िभि से दबाता है → कोिशका स्फीत → पौधा दृ ढ़
खड़ ा
कम जल → रसधानी से जल की हािन → भीतरी दाब घटा → कोिशका िशिथल → पि याँ और तना लटके =
मुरझाना
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ऐसा क्य होता है: कोमल तने या पत्ती के पास उसे थामने वाली काष्ठ नह होती। उसक कठोरता पूरी तरह त
दाब से आती है — जल से भरी को शकाओं का अपनी ही भ त्त पर बाहर क ओर दबाव, जैसे साइ कल के टायर म
हवा। मृदा सूखने पर को शका-रस मृदा- वलयन क तुलना म अपेक्षाकृत सांद्र हो जाता है, रसधा नय से जल खच
जाता है और ‘टायर’ बैठ जाते ह। भ त्त तब भी दृढ़ है, पर आधी खाली को शका के चार ओर क दृढ़ भ त्त अपने
पड़ोसी पर दबाव नह डालती, अतः पूरा ऊतक ढ ला पड़ जाता है।
स्वयं जाँ चए: मुरझाए मनीप्लांट को शाम को पानी द जए और अगली सुबह दे खए। वह फर सीधा खड़ा मलेगा
क्य क रसधा नयाँ परासरण ारा फर भर गईं — यह प्रमाण क मुरझाना जल-दाब का प्रभाव है, क्ष त नह , बशत
समय रहते पानी मल जाए।
सो चए और बताइए — पृष्ठ 19
खंड 2.3.1 सुकद्रक को शकाओं को इन को शकांग क आवश्यकता क्य होती है?
सो चए और बताइए
प्र.4 क्या सफेद फूल म कोई वणक होता है? कारण बताइए।
वास्तव म सफेद फूल क पंखु ड़य म कोई रंगीन वणक नह होता। उनके लवक अवण लवक होते ह — ऐसे लवक जनम वणक
नह होता और जो इसी लए रंगहीन ह।
रंग तब बनता है जब कोई वणक प्रकाश क कुछ तरंगदै य को अवशो षत कर ले और शेष को पराव तत कर दे । पणह रत लाल
और नीला अवशो षत करके हरा पराव तत करता है; वण लवक का वणक नीला अवशो षत करके पीला, नारंगी या लाल
पराव तत करता है।
सफेद पंखुड़ी लगभग कुछ भी अवशो षत नह करती। उसक को शकाओं के बीच के वायु-अवकाश सभी तरंगदै य को एक
साथ प्रक णत और पराव तत कर दे ते ह, और सभी तरंगदै य वाला प्रकाश सफेद दखता है।
अतः सफेद कोई वणक है ही नह — यह उस पंखुड़ी क उप स्थ त है जसम वणक नह ।
सभी तरंगदै य अवशोिषत → काला
लाल और नीला अवशोिषत, हरा परावितत → हरा
सभी तरंगदै य परावितत → सफे द
ऐसा क्य होता है: यही कारण है क दूध का झाग, पसी हुई बफ और बादल सफेद दखते ह, जब क जल रंगहीन है
— असंख्य छोट सतह हर रंग को समान रूप से प्रक णत कर दे ती ह। सफेद पंखुड़ी म ये प्रक णक सतह
को शकाओं के बीच के वायु-अवकाश ह। एक उपयोगी जाँच — सफेद पंखुड़ी को जल म मस लए, कोई रंग नह
नकलेगा, जब क लाल गुलाब या गदे क पंखुड़ी तुरंत रंग छोड़ दे गी।
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क्या आप जानते ह? चमेली जैसे अनेक ‘सफेद’ फूल उन क ट के लए बलकुल सादे नह होते जो उन पर आते ह
— उनक पंखु ड़य पर पराबगनी प्रकाश म दखने वाले प्र तरूप होते ह, जन्ह मधुम क्खयाँ दे ख e
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प्र.5 नम्न संकेत का उपयोग करके एक पादप या जंतु को शका का सुस्पष्ट रूप से नामां कत आरेखी चत्र बनाइए —
(i) को शका के भीतर कद्रक एक सघन और गोल पड के रूप म दखाई दे ता है। (ii) अंतद्रव्यी जा लका
वस्ता रत कद्रक आवरण के संजाल क तरह फैलती है। (iii) माइटोकॉ या और ह रतलवक छड़ाकार होते ह।
आप चत्र 2.10 को दे ख सकते ह।
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केंद काभ (आनुवंिशक पदाथ )
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चत्र 2.10 — (क) एक प्ररूपी जीवाणु को शका, (ख) एक प्ररूपी पादप को शका और (ग) एक प्ररूपी जंतु को शका।
इन्ह तीन संकेत के अनुसार बनाया गया पादप को शका का आरेखी चत्र यहाँ दया है। इसी वन्यास क नकल क जए और
नामांकन क जए।
कोिशका िझल्ली
कोिशका िभि
केंद क (सघन गोल िपंड, अंतद व्यी जािलका
भीतर केंिद का) (केंद क से फैला संजाल)
माइटोकॉिन्डया (छड़ )
हिरतलवक (छड़ )
बड़ ी केंद ीय
रसधानी
कोिशकाद व्य
आरेखी पादप को शका — कद्रक सघन गोल पड है, अंतद्रव्यी जा लका कद्रक आवरण से संजाल क तरह फैली है, और माइटोकॉ या
तथा ह रतलवक छड़ाकार बनाए गए ह।
पूरे अंक पाने के लए आपके चत्र म ये अवश्य होने चा हए —
दोहरी बाहरी सीमा — बाहर मोट को शका भ त्त और ठ क भीतर पतली को शका झल्ली।
गोल, गहरी छाया वाला कद्रक जसके भीतर छोट गहरी क द्रका हो।
अंतद्रव्यी जा लका कद्रक आवरण क बाहरी झल्ली से जुड़ी न लकाओं और चादर के संजाल के रूप म।
छड़ाकार माइटोकॉ या और छड़ाकार ह रतलवक (ह रतलवक को हरा रं गए)।
बड़ी कद्र य रसधानी, और उसके तथा भ त्त के बीच को शकाद्रव्य क परत।
सुझाव: य द आप जंतु को शका बनाएँ तो को शका भ त्त और ह रतलवक हटा द जए, रूपरेखा गोलाई लए और
अ नय मत बनाइए, रसधानी छोट र खए, तथा लाइसोसोम और गॉल्जी उपकरण जोड़ द जए।
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खंड 2.4 सामान्य को शकाएँ कस प्रकार वृ द्ध और वभाजन करती ह?
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जब आपक त्वचा पर छोटा-सा कट लग जाता है तो यह कुछ दन म स्वतः ठ क हो जाता है। जब आपके बाल
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l a seगरते ह तो नए बाल आ जाते ह। ऐसा कैसे होता है?
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क्य क शरीर क को शकाएँ पुरानी, मृत या क्ष तग्रस्त को शकाओं को प्र तस्था पत करने के लए वृ द्ध और वभाजन करती ह।
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क्षितगस्त कोिशका हटी a
→ पास की स्वस्थ कोिशका अपने डीएनए की पित बनाती है
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→ समसूत्री िवभाजन से 2 समान संत ित कोिशकाएँ em.
com िरक्त स्थान भरती है ं और घाव भर जाता है g l as
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→ नई कोिशकाएँ
agl त्वचा क को शकाएँ और बाल क जड़ क को शकाएँ नरंतर वभा जत होती ह, क्य क ये ऊतक हर समय घसते रहते ह।
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संत त को शकाएँ जनक के आनुवं शक रूप से समान होती ह, अतः नई त्वचा वास्त वक त्वचा ही होती है और नया बाल उसी
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प्रकार का।
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रक्त स्थान भरते ही, जब नई को शकाएँ अपने पड़ो सय के संपक म आती ह, वभाजन रुक जाता है — इसे संपक अवरोध
कहते ह। a
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m .
ऐसा क्य होता है: ध्यान द जए क वृ द्ध क्या नह है। हमारा शरीर को शकाओं के फूलने से नह बढ़ता; को शका
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केवल एक न त आकार तक ही बढ़ सकती है, क्य क उससे आगे झल्ली का पृष्ठीय क्षेत्रफल भीतरी आयतन क
आपू.cत नह कर पाता। अतः वृ द्ध और मरम्मत अ धक को शकाएँ बनाकर होतीaहैg, बड़ी को शकाएँ बनाकर नह ।
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aseप्र त दन लगभग सैकड़ अरब को शकाएँ — शरीर क कुल को शकाओं का लगभग 1 प्र तशत — प्र तस्था पत
agl होती ह।
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com g l a
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s क मोथेरेपी, जो तेजी से वभा जत होती को शकाओं को लक्ष्य करती है,
क्या आप जानते ह? जो को शकाएँ नरंतर वभा जत होती ह, वही उन उपचार से सबसे अ धक प्रभा वत होती ह
aलए
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a है।
जो को शका वभाजन रोकते ह। इसी
प्रायः बाल झड़ने का कारण बनती
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m 2.5— आइए, अपने कौशल को उन्नत कर — पृष्ठ 20 as e
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क्रयाकलाप
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई AglaSem · NCERT Solutions
खंड 2.4 सामान्य को शकाएँ कस प्रकार वृ द्ध और वभाजन करती ह?
क्रयाकलाप
प्र.1 व्यवस्थापन को 5–6 दन के लए रख द जए और अवलोकन क जए। क्या आप जड़ को वृ द्ध करते हुए दे खते
ह?
हाँ। प्याज के कंद के आधार से ताजी सफेद जड़ जल म नकल आती ह, सामान्यतः 5–6 दन म कुछ सट मीटर तक।
जड़ युक्त आधार डू बा रहना चा हए; कंद का शेष भाग जल के ऊपर रहे।
वृ द्ध सरे पर सबसे तेज होती है। स्लाइड के लए नई उगी जड़ के 2–3 सट मीटर का टए, क्य क वभा जत होती को शकाएँ
सरे म ही होती ह।
जड़ के 2–3 cm काटे → एसीटो-ऐल्कोहॉल (ग्लेिशयल एिसिटक अम्ल : एथे न ॉल :: 1 : 3) में 24 घंटे
→ पिररक्षण के िलए 70 पितशत एथे न ॉल
→ ऊतक नरम करने के िलए तनु HCl, 10–15 िमनट
→ एसीटो-कािमन अिभरंजक की 2–3 बूदँ े ं, 5–10 िमनट, हल्का गम
→ कवरिस्लप के नीचे दबाकर फैलाइए और अवलोकन कीिजए
ऐसा क्य होता है: जड़ अपने सरे पर नई को शकाएँ जोड़कर बढ़ती है, अतः वभाजन वास्तव म सरे पर ही चल
रहा होता है। सूची के हर रसायन का अपना काय है — एसीटो-ऐल्कोहॉल को शकाओं को स्थर करता है, उन्ह
तत्काल मारकर वभाजन क जो अवस्था जस को शका म थी उसे वह जमा दे ता है; तनु HCl को शकाओं के बीच
का बंधन ढ ला करता है ता क ऊतक फैलाया जा सके; एसीटो-का मन गुणसूत्र को गहरा लाल रंगकर उभार दे ता है;
और दबाने से सरा एक ही परत म फैल जाता है, क्य क एक-दूसरे पर चढ़ को शकाओं पर एक साथ फोकस नह
कया जा सकता।
सुझाव: स्लाइड को स्प रट लप पर केवल हल्का गम क जए — उबा लए मत। अ धक ताप से अ भरंजन असमान
हो जाता है और वही गुणसूत्र नष्ट हो सकते ह जन्ह आप दे खना चाहते ह।
प्र.2 आपने क्या अवलोकन कया? क्या आपने प्याज के मूलाग्र क को शकाओं का अवलोकन कया? क्या वे
संरचना म समान ह? क्या आपको इन को शकाओं म कोई संरचनात्मक अंतर दखाई दे ते ह? य द हाँ, तो ऐसा
क्य है?
मूलाग्र क को शकाएँ दखाई दे ती ह, और वे सब एक जैसी नह ह। भन्न- भन्न को शकाओं म अ भरं जत पदाथ क व्यवस्था भन्न
दखती है।
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई AglaSem · NCERT Solutions
कुछ को शकाओं म साधारण गोल कद्रक और फैला हुआ, धागे जैसा क्रोमे टन जाल दखता है — ये उस क्षण वभा जत नह
हो रही थ ।
अन्य म गहरे रंग के, छड़ाकार गुणसूत्र दखते ह — कह को शका के मध्य म पं क्तबद्ध, कह दोन सर क ओर खचते हुए,
तो कह दो अलग समूह म एक त्रत।
कारण यह है क प्याज के वधनशील मूलाग्र क को शकाएँ नरंतर वभा जत होती रहती ह। जस क्षण ऊतक को स्थर कया गया,
प्रत्येक को शका प्र क्रया के भन्न बदु पर थी, अतः स्लाइड एक ही समय म को शका वभाजन क अनेक अवस्थाओं का चत्र बन
जाती है — ठ क वही जो चत्र 2.17 दखाता है।
ऐसा क्य होता है: क्रोमे टन और गुणसूत्र एक ही डीएनए क दो अवस्थाएँ ह। वभाजन न करने वाली को शका म
डीएनए क्रोमे टन के रूप म ढ ला पड़ा रहता है, धागे जैसी संरचनाओं का उलझा हुआ जाल — अनुदेश पढ़ने के लए
अच्छा, पर बाँटने के लए बलकुल अनुपयुक्त। जब भी को शका वभा जत होने वाली होती है, क्रोमे टन कसकर
कुंड लत होकर छोटे छड़ाकार गुणसूत्र म संग ठत हो जाता है, जन्ह बना उलझे या टू टे इधर-उधर ले जाया जा
सकता है। इसी लए गुणसूत्र केवल तभी दखते ह जब को शका वभा जत होने वाली हो, और इसी लए मूलाग्र क
एक ही स्लाइड पर एक ही प्रकार क को शकाएँ इतनी भन्न दख सकती ह।
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 चत्र 2.17 को शका वभाजन क व भन्न अवस्थाओं को दशाता है। क्या आप पहचान सकते ह क को शका
वभाजन के दौरान कौन-सी अवस्था पहले आती है?
चत्र 2.17 — पाठ्यपुस्तक के सूक्ष्मदश चत्र का पुनःआरे खत रेखा चत्र — प्याज के मूलाग्र क को शकाएँ, जैसी
सूक्ष्मदश म दखती ह।
पहले वह अवस्था आती है जसम क्रोमे टन अभी-अभी संघ नत होकर दृश्य गुणसूत्र बना है पर वे अब भी बखरे हुए ह और
कद्रक झल्ली वघ टत हो रही है। यह उस हर अवस्था से पहले आती है जसम गुणसूत्र पं क्तबद्ध या पृथक हो चुके ह ।
चत्र 2.17 क को शकाओं को क्रम म रखने के लए घटनाओं का यह क्रम काम आएगा —
1. साधारण कद्रक और फैले हुए क्रोमे टन वाली को शका — वभाजन आरंभ होने से पहले क को शका।
2. गुणसूत्र प्रकट होते ह, छड़ाकार पड के रूप म, को शका म बखरे हुए; कद्रक झल्ली लुप्त हो जाती है।
3. गुणसूत्र को शका के मध्य म पं क्तबद्ध होते ह।
4. गुणसूत्र दोन वपरीत सर क ओर ख चे जाते ह।
5. दोन सर पर गुणसूत्र के दो समूह एकत्र होते ह, नए कद्रक बनते ह और उनके बीच नई भ त्त बनती है — दो संत त
को शकाएँ।
ऐसा क्य होता है: यह क्रम काय के तक से ही तय होता है। डीएनए बाँटने से पहले उसे गनने और हलाने योग्य
इकाइय म बाँधना पड़ेगा — अतः संघनन पहले आएगा। फर उसे एक स्थान पर इक ा करना होगा ता क प्रत्येक
आधा भाग अलग दशा म जा सके — इसी लए मध्य म पं क्तबद्ध होना। तभी दोन समुच्चय अलग कए जा सकते
ह, और अलग होने के बाद ही दो नए कद्रक बन सकते ह। को शका वभाजन क ना मत अवस्थाएँ आप उच्चतर
कक्षाओं म पढ़गे; इस स्तर पर गुणसूत्र क्या कर रहे ह, उसी से क्रम पढ़ लेना पयाप्त है।
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई AglaSem · NCERT Solutions
सुझाव: स्लाइड दे खते समय ग नए क कतनी को शकाओं म बखरे गुणसूत्र ह और कतनी म पृथक समूह। जो
अवस्थाएँ अ धक समय लेती ह वे अ धक को शकाओं म दखती ह — चत्र आकार का ही नह , समय का भी
अ भलेख है।
सो चए और बताइए — पृष्ठ 22
खंड 2.4.1 को शका वभाजन
सो चए और बताइए
प्र.6 एक को शका म अनेक छोटे -छोटे माइटोकॉ या के स्थान पर एक वशाल माइटोकॉ या क्य नह होता? यह
सतह क्षेत्रफल क अवधारणा से कस प्रकार संबं धत है?
क्य क ऊजा उत्पादन झल्ली क सतह पर होता है, और समान कुल आयतन के लए अनेक छोटे माइटोकॉ या एक बड़े क
तुलना म कह अ धक सतह क्षेत्रफल दे ते ह।
ित्रज्या r के गोले के िलए —
पृष्ठीय क्षेत्रफल A = 4πr² तथा आयतन V = (4/3)πr³
अतः A/V = 3/r — ित्रज्या िजतनी कम, पित इकाई आयतन सतह उतनी अिधक
ित्रज्या R के एक गोले को समान कु ल आयतन वाले 8 गोलों में बाँिटए —
8 × (4/3)πr³ = (4/3)πR³ → 8r³ = R³ → r = R/2
कु ल पृष्ठीय क्षेत्रफल = 8 × 4π(R/2)² = 8 × 4πR²/4 = 2 × 4πR²
अथ त ठीक उसी आयतन के िलए एक बड़ े माइटोकॉिन्डया से दोगुन ा सतह क्षेत्रफल।
एक िवशाल माइटोकॉिन्डया आठ छोटे (चार िदखाए गए)
पष्ृ ठीय क्षेत्रफल 4πR² पष्ृ ठीय क्षेत्रफल 2 × 4πR², आयतन वही
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई
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उसी आयतन को छोटे टु कड़ म बाँटने से पदाथ क मात्रा बदले बना सतह कई गुना हो जाती है।
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इसी वचार से तीन और कारण नकलते ह —
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g— पेशी तंतु म वे सकुड़ने वाले तंतुओं के साथ पं क्तबद्ध रहते ह, शुक्राणु म वे पूँछ म भरे होते ह।
वतरण। एट पी को को शका के हर कोने तक पहुँचना है। अनेक माइटोकॉ या ठ क वह रखे जा सकते ह जहाँ ऊजा चा हए
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आपू त। ऑक्सीजन और ग्लूकोस को माइटोकॉ या के भीतर वस रत होना पड़ता है। लंबी दूरी पर वसरण धीमा है, अतः
वशाल को शकांग का कद्र भूखा रह जाता।
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a s emहो जाए तो लाइसोसोम उसे पचाकर हटा देता है और उसक जगह
सुरक्षा और मरम्मत। एक छोटा माइटोकॉ या क्ष तग्रस्त
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नया बन जाता है, हा न नाममात्र। एक वशालgमाइटोकॉ या के नष्ट होने पर को शका के पास ऊजा का कोई स्रोत ही न बचता।
ऐसा क्य होता है: यही सद्धांत एक अकेले माइटोकॉ
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या के आकार क भी व्याख्या करता है। उसक भीतरी
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mको शक य श्वसन
झल्ली अँगुली जैसे उभार म अंतव लत होती है जन्ह अंतःकटक (cristae) कहते ह, और ये
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क रासाय o
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a la बढ़ाए। प्रकृ त सतह-
mअ भ क्रयाओं के लए सतह का क्षेत्र बढ़ा दे ती ह, बना को शकांग का gआमाप
m क समस्या दो बार हल करती है — प्रत्येक माइटोकॉ या के भीतर वलन बनाकर, और अनेक
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क्षेत्रफल
agl माइटोकॉ या रखकर।
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प्र.7 य द त्वचा क को शकाएँ समसूत्री वभाजन क अपेक्षा अधसूत्री वभाजन करने लग तो आपके वचार से त्वचा
के कटने पर क्या होगा? a
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कटा हुआ स्थान ठ क से नह भरेगा। त्वचा के स्थान पर आधी गुणसूत्र संख्या वाली को शकाएँ बनगी जो त्वचा का काय कर ही नह
सकत .—c और अधसूत्री वभाजन के एक चक्र के बाद वे को शकाएँ वभा जत होना भी aबंदgकर दगी।
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सामान्य उपचार (समसूत्री िवभाजन):
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त्वचा कोिशका (46 गुणसूत्र) → 2 कोिशकाएँ (पत्येक 46) → 4 → 8 … घाव वास्तिवक त्वचा से भर जाता है
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यिद अधसूत्री िवभाजन हो जाए: agl
त्वचा कोिशका (46) → पत्येक में 23 गुणसूत्र वाली 4 कोिशकाएँ
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आधे जीन अनुपिस्थत → अने क पोटीन बन ही नही ं सकते → कोिशकाएँ त्वचा कोिशकाएँ नही ं रहती ं और शीघ
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a s em मर जाती है ं
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1. गलत गुणसूत्र संख्या। प्रत्येक संत त को शका को हर युग्म का केवल एक गुणसूत्र मलेगा, अतः उसके आनुवं शक अनुदेश का
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बड़ा भाग अनुप स्थत होगा। वह त्वचा के लए आवश्यक करै टन, वणक और सं ध-प्रोट न नह बना पाएगी।
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2. गलत संख्या म को शकाएँ, और आगे कुछ नह । अधसूत्री वभाजन चार को शकाएँ बनाकर रुक जाता है — युग्मक फर
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वभा जत नह होते। घाव भरने के लए तो वभाजन तब तक दोहराया जाना चा हए जब तक रक्त स्थान भर न जाए।
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई AglaSem · NCERT Solutions
3. प रणाम: घाव खुला रह जाएगा या कमजोर, असामान्य ऊतक से भरेगा; त्वचा अपना अवरोधक काय खो दे गी और संक्रमण हो
जाएगा।
ऐसा क्य होता है: दोन वभाजन दो भन्न काय के लए बने ह, और यही अंतर इस अध्याय का सार है। समसूत्री
वभाजन आनुवं शक सूचना को सभी का यक को शकाओं म बनाए रखता है, और मरम्मत को ठ क यही चा हए —
जो खोया, उसक हूबहू प्र त। अधसूत्री वभाजन उसे जान-बूझकर आधा करता है, क्य क युग्मक को नषेचन म
दूसरे युग्मक से मलना है। यह आधा करना वृषण और अंडाशय म उ चत है और कह और वनाशकारी, इसी लए
शरीर अधसूत्री वभाजन को कठोरता से जनन अंग तक सी मत रखता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 23
ज ासा-सूत्र — खंड 2.5.1 क्या को शकाएँ चरकाल तक वृ द्ध और जनन करती ह?
ज ासा-सू त्र
प्र.1 कसर को शकाएँ कस प्रकार वृ द्ध करती ह और फैलती ह?
वे इस लए बढ़ती ह क्य क उन्ह ने सामान्य को शका वभाजन को रोकने वाले नयंत्रण खो दए ह, और वे आस-पास के ऊतक
म प्रवेश करके तथा शरीर के अन्य भाग तक पहुँचकर फैलती ह।
सामान्य कोिशका: वृिद्ध → काय → जीणता → मृत्यु → पितस्थापन, सब िनयंत्रण में
कैं सर कोिशका: िनयंत्रण पणाली िवफल
→ अिनयंित्रत िवभाजन, संपक अवरोध की अवहेलना
→ असामान्य कोिशकाओं का िपंड = अबुद (सुद म्य या दुद म)
→ दुद म अबुद आस-पास के ऊतकों में पवेश करता है
→ कोिशकाएँ अन्यत्र पहुँच कर नए अबुद बनाती है ं
सुदम्य अबुद दुदम (कसरयुक्त) अबुद
वृिद्ध एक ही स्थानीय पड के रूप म रहता है आस-पास के ऊतक में पवेश करता है
अन्य अंग ों में फै लाव नह हाँ — अन्यत्र नए अबुद बनाता है
जोिखम सामान्यतः कम, जब तक कसी अंग पर दबाव न डाले अिधक
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ऐसा क्य होता है: अनेक जंतु को शकाओं म वभाजन सामान्यतः तब रुक जाता है जब को शका अपने पड़ो सय
के संपक म आती है — यही संपक अवरोध है। कसर को शका इस संकेत को नह मानती, अतः स्थान न होने पर
भी वभा जत होती रहती है। वह अपने जीवनकाल के अंत म मरने का सामान्य नदश भी नह मानती। प रणाम एक
बढ़ता हुआ पड है जो स्वस्थ ऊतक से भोजन और ऑक्सीजन छ न लेता है और दुदम होने पर ऊतक क सीमाएँ
तोड़कर दूर के अंग तक पहुँच जाता है। इसके वपरीत पादप को शकाएँ संपक अवरोध दशाती ही नह — उनक
दृढ़ को शका भ त्तयाँ उन्ह अपने स्थान पर बाँधे रखती ह और वे वृ द्ध के एक भन्न प्र तरूप का अनुसरण करती ह,
इसी लए फैलते अबुद का प्रश्न पादप म उसी रूप म उठता ही नह ।
आइए, और चतन कर — पृष्ठ 23
खंड 2.5.1 क्या को शकाएँ चरकाल तक वृ द्ध और जनन करती ह?
आइए, और चतन कर
प्र.1 को शकाएँ संतुलन बनाए रखने के लए अपनी वृ द्ध का अनुवीक्षण कस प्रकार करती ह?
नई को शकाओं के बनने और पुरानी को शकाओं क सु नयो जत, नयं त्रत मृत्यु के बीच संतुलन बनाकर। इसक मुख्य प्र क्रया
क्रमादे शत को शका मृत्यु (पी.सी.डी.) है।
पी.सी.डी. को शका के वरणात्मक रूप से नष्ट होने क आनुवां शकतः नयं त्रत और व्यव स्थत प्र क्रया है — को शका नदश
पर स्वयं को क्रमबद्ध ढं ग से समेट लेती है, फटकर पड़ो सय को हा न नह पहुँचाती।
यह तीन काय के लए अ नवाय है — सामान्य वकास, को शक य गुणवत्ता नयंत्रण और प्र तरक्षा काय।
इसके साथ संपक अवरोध भी काम करता है — अनेक जंतु को शकाओं म पड़ोसी को शकाओं के संपक म आते ही वभाजन
रुक जाता है, अतः ऊतक पूरा बनते ही बढ़ना बंद कर दे ता है।
प्रत्येक को शका क एक न त जीवन अव ध भी होती है। उदाहरण के लए, प रपक्व लाल रक्त को शकाएँ लगभग 120 दन
जी वत रहती ह और फर प्र तस्था पत हो जाती ह।
कोिशका िवभाजन की दर = कोिशका मृत्यु की दर → ऊतक का आमाप िस्थर
िवभाजन > मृत्यु → अबुद
िवभाजन < मृत्यु → ऊतक क्षीण
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ऐसा क्य होता है: पुस्तक का सबसे प्रभावी उदाहरण मानव हाथ है। भ्रूण के वकास के समय पी.सी.डी. वक सत
हो रही अँगु लय के बीच क को शकाओं को हटा दे ता है, और इसी प्रकार चप्पू जैसी कली म से अलग-अलग
अँगु लयाँ तराशी जाती ह — इसके बना हमारे हाथ जालयुक्त होते। अतः यहाँ को शका मृत्यु क्ष त नह , मू तकार का
औजार है। यही प्र क्रया उन को शकाओं को भी हटाती है जनके डीएनए म त्रु ट आ गई हो, इससे पहले क वे
कसरयुक्त बन — इसी लए पी.सी.डी. को गुणवत्ता नयंत्रण कहा जाता है। दोन छोर पर समस्या है — को शकाएँ
समय पर न मर तो अबुद बनते ह, और बहुत जल्द मर जाएँ तो ऊतक टू टने लगते ह।
प्र.2 आप ऐसी भन्न पद्ध तय का अन्वेषण क जए जनके ारा को शकाएँ स्वयं को बनाए रखती ह।
को शका एक साथ कई गृह-प्रबंधन प्रणा लयाँ चलाकर स्वस्थ रहती है। अन्वेषण के लए ये बदु ली जए, साथ म अध्याय का वह
भाग भी जससे प्रत्येक जुड़ता है।
स्वयं को बनाए रखने यह कैसे काम करता है संबं धत को शकांग या
का उपाय प्र क्रया
भीतर-बाहर आने-जाने पर वरणात्मक पारगम्य झल्ली; प्रोट न गेटक पर का काय करते ह; कोिशका िझल्ली
िनयंत्र ण परासरण ारा जल संतुलन
अपिशष्ट और जीण भागों एंजाइम अवां छत प्रोट न, काब हाइ ेट, वसा और क्ष तग्रस्त लाइसोसोम
की सफाई को शकांग को पचाते ह; उत्पाद को शकाद्रव्य म पुनःच क्रत
क्षितग स्त अणओ
ु ं का नए प्रोट न सं े षत होते ह, फर रूपांत रत, वग कृत और पैक होकर राइबोसोम, रूक्ष अंतद व्यी जािलका,
पितस्थापन भेजे जाते ह गॉल्जी उपकरण
माँग पर ऊज की आपूित को शक य श्वसन म ग्लूकोस वघ टत होता है और ऊजा एट पी म माइटोकॉिन्डया
संग्रहीत होती है
आकार बनाए रखना और अत्यंत पतले तंतुओं का जाल संरचनात्मक स्थरता और आंत रक कोिशका पंजर (cytoskeleton)
भीतर पिरवहन प रवहन दे ता है
ृ क्करण
भंडारण और पथ जल, ख नज, शकरा और अप शष्ट को शका-रस म बंद; त बनी रसधानी
रहती है
पूर ी कोिशकाओं का क्ष तग्रस्त या मृत को शकाओं क जगह समान नई को शकाएँ समसूत्री िवभाजन
पितस्थापन
अनावश्यक कोिशकाओं वरणात्मक, आनुवं शकतः नयं त्रत आत्म- वनाश क्रमादे िशत कोिशका मृत्यु
को हटाना
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: ता लका को ऊपर से नीचे प ढ़ए और एक ही वचार बार-बार लौटता है — को शका स्थायी
बनकर नह , नरंतर नवीनीकरण से जी वत रहती है। को शका का लगभग हर अणु समय के साथ टू टता और फर
बनता है; जो बना रहता है वह है प्र तरूप, जो डीएनए म सं चत है, और वे कक्ष जो हर प्र क्रया को अलग रखते ह।
इस लए रखरखाव को को शकांग क उसी संरचना से अलग नह कया जा सकता जसका वणन अभी हुआ —
लाइसोसोम के बना सफाई नह , माइटोकॉ या के बना पुन नमाण क ऊजा नह , और झल्ली के बना ऐसा
‘भीतर’ ही नह जसे बनाए रखा जाए।
यह क जए: चत्र 2.10 से कोई एक को शकांग चु नए और सो चए क य द वह एक दन काम करना बंद कर दे तो
क्या-क्या वफल होगा। लाइसोसोम, माइटोकॉ या और गॉल्जी उपकरण के लए बारी-बारी यह करने पर दखेगा
क ये प्रणा लयाँ एक-दूसरे पर कतनी नभर ह।
अभ्यास प्रश्न — पृष्ठ 24
अध्याय के अंत के प्रश्न
अभ्यास प्रश्न
प्र.1 कोष्ठक म दए गए संकेत के आधार पर नम्न ल खत युग्म के बीच अंतर स्पष्ट क जए — (i) को शका झल्ली
और को शका भ त्त (पारगम्यता) (ii) रूक्ष अंतद्रव्यी जा लका और चकनी अंतद्रव्यी जा लका (संरचना) (iii)
ह रतलवक और वण लवक (वणक)
(i) को शका झल्ली और को शका भ त्त — पारगम्यता
को शका झल्ली को शका भ त्त
पारगम्यता वरणात्मक रूप से पारगम्य — कु छ पदाथ ं को जाने दे ती है, कु छ पूणतः पारगम्य — जल और घुले हुए खिनज सीधे
को रोकती है आर-पार जाते है ं
इसका अथ जल पार जाता है; नमक और चीनी के अणु रुक जाते ह, जससे कोई छँ टाई नह करती; चयन ठ क भीतर स्थत
परासरण संभव होता है झल्ली पर छोड़ दे ती है
कहाँ प्रत्येक जी वत को शका म केवल पादप, कवक और जीवाणु म
उपिस्थत
(ii) रूक्ष और चकनी अंतद्रव्यी जा लका — संरचना
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई
a g l AglaSem · NCERT Solutions
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रूक्ष (खुरदुरी) अंतद्रव्यी जा लका चकनी अंतद्रव्यी जा लका
सतहoपरmराइबोसोम जुड़े होते है,ं अतः इले क्टॉन सूक्ष्मदश से खुरदुरी िदखती है l a sनहीe ं होते, अतः िचकनी
c िदखती है ag
सतह पर राइबोसोम
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aमुgख्यl प्रोट न सं ेषण और प्रोट न का स्रवण (जैसे अग्न्याशयी को शकाओं म ग्रं थ वसा और हाम न का सं ेषण और भंडारण
काय को शकाएँ)
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(iii) ह रतलवक और वण लवक — वणक
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ह रतलवक वण लवक
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पणहिरत के अितिरक्त वणक — पीले , नारंगी याcoलाल
वणक पणहिरत — हरा वणक
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mप्रकाश-सं ेषण के लए सूय के प्रकाश का e
asऔर फल खाने वाले जंतु
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वणक का
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चटक रंग दे ना, जससे परागणकारी
काय m
as e अवशोषण आक षत ह
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a कहाँ प त्तय और अन्य हरे भाग म फूल क पंखु ड़य और फल म
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. comसंबंधी ह और एक छोटा-सा अंतर ही काय तय कर दे ता है। agl
emक आंत रक संरचना को केवल वरणात्मक सीमा ही नयं त्रत कर
ऐसा क्य होता है: तीन युग्म म दोन संरचनाएँ नकट
s
झल्ली और भ त्त दोन सीमाएँ ह, पर कोaशका
gl
सकती है — पूण पारगम्य भ त्त यहaकभी नह कर पाती, इसी लए दोन साथ चा हए। रूक्ष और चकनी जा लका
m
एक ही सतत जाल ह; उसके एक भाग पर राइबोसोम जोड़ दे ने से वह भाग प्रोट न क फैक्टरी बन जाता है।
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ह रतलवक और वण लवक दोन लवक ह; वणक बदलते ही भोजन क फैक्टरी संकेत- चह्न बन जाती है।
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a s em
a gl प्र.2 दो समान जंतु को शकाओं को दो अलग-अलग वलयन म रखा जाता है— को शका X को शुद्ध जल म रखा
जाता है। को शका Y को नमक के सांद्र वलयन म रखा जाता है। कुछ समय प ात को शका X फूल जाती है और
se m
com
को शका Y संकु चत हो जाती है। नम्न ल खत म से कौन-सा कथन उपयुक्त अवलोकन का सही स्पष्टीकरण है?
g l a
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(i) नमक के अणु को शका Y म प्रवेश कर गए जस कारण वह संकु चत हो गई। (ii) को शका X म जल प्रवेश
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कर गया और को शका Y से बाहरl asगए जल क मात्रा उसम प्रवेश कर गए नमक के वलयन क मात्रा से अ धक
थी। (iii) को शका झल्लीaके माध्यम से जल को शका X म प्रवेश कर गया और को शका Y से बाहर चला गया।
m
(iv) वलेय के संचलन के कारण दोन को शकाओं म परासरण हुआ।
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.cस्पष्टीकरण है (iii) को शका झल्ली के माध्यम से जल को शका X म प्रवेशagकर गया और को शका Y से बाहर चला
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सही
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गया।
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co agl
शुद्ध जल में कोिशका X: बाहर अल्पपरासारी → जल भीतर → कोिशका फूलती है
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ं नमक में कोिशका Y: बाहर अितपरासारी → जल बाहर → कोिशका िसकु ड़ ती है
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साद
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दोनों िस्थितयों में िझल्ली के पार जाने वाला एकमात्र पदाथ है जल
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई AglaSem · NCERT Solutions
शेष वकल्प क्य गलत ह —
(i) गलत है क्य क नमक के अणु को शका झल्ली के पार जाते ही नह — वह वरणात्मक रूप से पारगम्य है। और य द नमक
भीतर आता भी, तो भीतर क सांद्रता बढ़ाकर जल को भीतर ख चता, अतः को शका फूलती, सकुड़ती नह ।
(ii) इसी कारण गलत है — यह मान लेता है क नमक का वलयन को शका म प्रवेश कर गया। को शका Y म कुछ भी प्रवेश
नह कया।
(iv) गलत है क्य क परासरण प रभाषा से जल क ग त है, वलेय क नह । वलेय क ग त वसरण है, और यहाँ वह होती ही
नह ।
ऐसा क्य होता है: संपूण परासरण एक ही असमानता पर टका है — झल्ली वलायक के लए खुली और वलेय
के लए बंद है। नमक हलकर सांद्रताएँ बराबर नह कर सकता, अतः जल को ही हलना पड़ता है। इस प्रश्न क दोन
को शकाएँ ठ क एक ही नयम मानती ह; केवल सांद्रता के अंतर क दशा उलट है। यह भी ध्यान र खए क जंतु
को शका पर क्या जो खम है — को शका भ त्त न होने से को शका X शुद्ध जल म फूलती-फूलती फट भी सकती है।
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 चत्र 2.20 म एक को शका का चत्र दे खए। (क) से (छ) तक च ह्नत भाग क पहचान क जए और नीचे दए
गए काय से उनका सही मलान क जए— (i) को शका क सभी ग त व धय का नयंत्रण करना। (ii)
को शक य श्वसन का स्थल। (iii) भंडारण को शकांग जो को शका को दृढ़ता भी प्रदान करता है। (iv) को शका
के अवयव को प रवेश से अलग करता है। (v) को शका को संरचनात्मक दृढ़ता प्रदान करता है। (vi) अंतद्रव्यी
जा लका से प्राप्त सामग्री को पैक और संग्रहीत करता है। (vii) भोजन नमाण म सहायता करता है।
(घ)
(क)
(ङ)
(ख)
(च)
(ग)
(छ)
चत्र 2.20 — एक को शका, जसम सात भाग (क) से (छ) तक च ह्नत ह।
चत्र 2.20 एक पादप को शका है — मोट बाहरी भ त्त, ह रतलवक और बड़ी रसधानी से यह स्पष्ट है।
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई AglaSem · NCERT Solutions
चह्न भाग काय
(क) माइटोकॉिन्डया (ii) को शक य श्वसन का स्थल
(ख) के ं द क (i) को शका क सभी ग त व धय का नयंत्रण करना
(ग) गॉल्जी उपकरण (vi) अंतद्रव्यी जा लका से प्राप्त सामग्री को पैक और संग्रहीत करता है
(घ) हिरतलवक (vii) भोजन नमाण म सहायता करता है
(ङ) कोिशका िभि (v) को शका को संरचनात्मक दृढ़ता प्रदान करता है
(च) कोिशका िझल्ली (iv) को शका के अवयव को प रवेश से अलग करता है
(छ) रसधानी (iii) भंडारण को शकांग जो को शका को दृढ़ता भी प्रदान करता है
(घ) हिरतलवक
(क) माइटोकॉिन्डया
(ङ) कोिशका िभि
(ख) केंदक
(च) कोिशका िझल्ली
(ग) गॉल्जी उपकरण
(छ) रसधानी
चत्र 2.20 के सात नामां कत भाग और उनम से प्रत्येक का काय।
ऐसा क्य होता है: सबसे क ठन युग्म (ङ) और (च) को दो संकेत अलग करते ह। दोन तीर सीमा क ओर ह, पर
(ङ) मोट बाहरी नारंगी परत पर पहुँचता है और (च) ठ क उसके भीतर क पतली रेखा पर। इसे काय के शब्द से
मलाइए — “संरचनात्मक दृढ़ता प्रदान करता है” केवल दृढ़ सेल्युलोस भ त्त हो सकती है, जब क “को शका के
अवयव को प रवेश से अलग करता है” उस सीमा का वणन है जो व नमय को नयं त्रत करती है, अथात झल्ली।
काय (iii) पर भी ध्यान द जए — रसधानी भंडारण को शकांग भी है और दृढ़ता का स्रोत भी, क्य क उसम संग्रहीत
जल ही वह त दाब बनाए रखता है जो को शका को दृढ़ करता है।
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प्र.4 नम्न ल खत म से को शकांग के कौन-से युग्म दए गए वग से सही सुमे लत ह? (i) अवण लवक / को शका
भ त्त (ii) माइटोकॉ या / राइबोसोम (iii) को शका भ त्त / गॉल्जी उपकरण (iv) लाइसोसोम / अंतद्रव्यी
जा लका — जहाँ पहला स्तंभ ‘पादप को शका म उप स्थत’ और दूसरा ‘जंतु को शका म अनुप स्थत’ है।
केवल वकल्प (i) सही है — अवण लवक पादप को शका म उप स्थत है और को शका भ त्त जंतु को शका म अनुप स्थत।
वकल्प पादप को शका म उप स्थत? जंतु को शका म अनुप स्थत? नणय
(i) अवण लवक / हाँ — रंगहीन लवक जो स्टाच, तेल या प्रोट न संग्रहीत हाँ — जंतु को शका म केवल सही
कोिशका िभि करता है झल्ली होती है
(ii) माइटोकॉिन्डया / हाँ नह — राइबोसोम जंतु को शकाओं गलत
राइबोसोम म उप स्थत ह
(iii) कोिशका िभि / हाँ नह — गॉल्जी उपकरण जंतु गलत
गॉल्जी उपकरण को शकाओं म उप स्थत है
(iv) लाइसोसोम / चत्र 2.10 ख क पादप को शका म नह दखाया गया; नह — अंतद्रव्यी जा लका जंतु गलत
अंतद व्यी जािलका लाइसोसोम जंतु को शकाओं क वशेषता ह को शकाओं म उप स्थत है
ऐसा क्य होता है: यह प्रश्न वास्तव म एक ही बात जाँचता है — कौन-सी संरचनाएँ केवल पादप क ह। इस
अध्याय म ऐसी केवल तीन ह — को शका भ त्त, लवक (ह रतलवक, वण लवक, अवण लवक) और बड़ी कद्र य
रसधानी। बाक सब — माइटोकॉ या, राइबोसोम, अंतद्रव्यी जा लका, गॉल्जी उपकरण, कद्रक, को शका झल्ली
— पादप और जंतु दोन म समान रूप से ह, क्य क वे कसी भी सुकद्रक को शका क सामान्य मशीनरी ह। यह
छोट सूची याद रहे तो हर वकल्प क्षण भर म जाँचा जा सकता है।
प्र.5 दो वद्याथ , रेणु और रो हत लवक पर चचा कर रहे थे। रेणु ने इस बात पर बल दया क पौध के सभी भाग म
यहाँ तक क जड़ म भी लवक होते ह। यद्य प रो हत इस कथन से सहमत नह था और उसने बताया क पादप
क जड़ म लवक अनुप स्थत होते ह क्य क जड़ भू मगत होती ह और उन्ह प्रकाश-सं ेषण करने क
आवश्यकता नह होती। कौन सही है? अपने उत्तर का औ चत्य सद्ध क जए।
रेणु सही है। जड़ म लवक होते ह। रो हत ने लवक को उसके एक वशेष प्रकार, ह रतलवक, से भ्र मत कर दया है।
लवक को शकांग का एक कुल है जसके तीन सदस्य ह — ह रतलवक (हरा, प्रकाश-सं ेषण के लए), वण लवक (पीला,
नारंगी या लाल) और अवण लवक (रंगहीन, भंडारण के लए)।
जड़ म ह रतलवक नह होते क्य क भू म के नीचे प्रकाश नह है और प्रकाश-सं ेषण करना ही नह है — रो हत के तक का
यह भाग ठ क है।
परंतु जड़ अवण लवक से भरी होती ह, जो स्टाच, तेल और प्रोट न संग्रहीत करते ह। भोजन संग्रह करना जड़ का एक मुख्य
काय ही है।
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई
a g l AglaSem · NCERT Solutions
कुछ जड़ म वण लवक तक होते ह। गाजर क जड़ नारंगी उसी म स्थत वणक के कारण होती है; चुकंदर और शकरकंद भी
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भू म के नीचे ही रंगीन होते ह।
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लवक = हिरतलवक + वण लवक + अवण लवक
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aजड़ : हिरतलवक अनुपिस्थत, अवण लवक उपिस्थत, वण लवक कभी-कभी उपिस्थत
→ अतः जड़ ों में लवक उपिस्थत है ं
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ag ह — को शका का काय बदलने पर एक प्रकार दूसरे म बदल सकता
ऐसा क्य होता है: लवक परस्पर प रवतनीय
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है। इसी लए धूप म रखा आलू हरा पड़ जाता है (अवण लवक म पणह रत बनकर वे ह रतलवक बन जाते ह) और
co
m.
पकने पर हरा टमाटर लाल हो जाता है (ह रतलवक वण लवक बन जाते ह)। पूरा कुल एक ही उद्गम साझा करता है,
o m l a se
इस लए पादप को शका म कसी न कसी प्रकार के लवक लगभग सदा होते ह; बदलता केवल यह है क कौन-सा
m .cहत क भूल याद रखने योग्य है — “प्रकाश-सं ेषण नह होता” से केवलagइतना सद्ध होता है क
e नह ह, यह नह क लवक नह ह।
प्रकार। रो
हsरतलवक
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coतmदशाती है — वही स्टाच जो अवण लवक के भीतर agl
स्वयं जाँ चए: कच्चे आलू या अरबी (कोलोके शया) क पतली फाँक पर आयोडीन वलयन क एक बूँद डा लए। वह
नीली-काली हो जाती है, जो स्टाच के कण क उप.स्थ
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संग्रहीत है।
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माइटोकॉ या और ह रतलवक एक पादप को शका के दो महत्त्वपूण को शकांग ह।
a s emववेचना क जए क ये दोन
gl और भन्न ह?
cकोo शकांग संरचनात्मक और कायात्मक रूप से एक-दूसरे से कस प्रकारaसमान
प्र.6
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ag उत्तर
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समानताएँ
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दोन दोहरी झल्ली-आबद्ध को शकांग ह।
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g l as होते ह, अतः दोन अपने कुछ प्रोट न स्वयं बना सकते ह।
a से मलती-जुलती ह, जो संकेत देती ह क दोन एकको शक य जीव के साथ एक
दोन म अपना डीएनए और अपने राइबोसोम
दोन क कुछ वशेषताएँ जीवाणुओं
m
वकासीय इ तहास साझा करते ह।
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दोन ऊजा से जुड़े को शकांग ह — एक ऊजा पकड़ता है, दूसरा उसे नमुक्त करता है। दोन अपनी आंत रक झल्ली क
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omपादप को शका म पाए जाते ह। l
सतह बढ़ाते ह — एक म अंतःकटक, दूसरे म च क्रका के आकार क झ ल्लयाँ।
.cदोन a g
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agl अंतर
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माइटोकॉ या ह रतलवक
वणक कोई नही ं पणहिरत, एक हरा वणक
आंतिरक भीतरी झल्ली अँगुली जैसे अंतःकटक म अंतव लत; एक अध-तरल पी ठका जसम पणह रत युक्त च क्रकाकार
संर चना अंतर झल्ली अवकाश झल्लीनुमा संरचनाएँ
पिक्रया को शक य श्वसन — ग्लूकोस और अन्य अणु वघ टत प्रकाश-सं ेषण — प्रकाश ऊजा अवशो षत होती है
होते ह और शकरा बनती है
ऊज सं चत रासाय नक ऊजा को एट पी, ऊजा क मुद्रा, के रूप प्रकाश ऊजा को शकरा क रासाय नक ऊजा म बदलता है
म नमुक्त करता है
उपिस्थित सभी सुकद्रक को शकाओं म — पादप और जंतु दोन केवल पादप और कुछ अन्य प्रकाश-सं ेषी जीव म; वह
भी केवल हरे भाग म
भंडारण भोजन संग्रहीत नह करता बनी शकरा स्टाच के कण के साथ पी ठका म संग्रहीत
होती है
हिरतलवक: पकाश ऊज + CO₂ + H₂O → शक रा + O₂ (ऊज संिचत )
माइटोकॉिन्डया: शक रा + O₂ → एटीपी + CO₂ + H₂O (ऊज िनमुक्त )
ऐसा क्य होता है: ये दोन को शकांग एक ही चक्र के वपरीत आधे भाग ह, और उनक संरचना इसी को दशाती है।
दोन अपनी भीतरी झल्ली को व लत करते ह क्य क प्रकाश-सं ेषण और श्वसन दोन क अ भ क्रयाएँ झ ल्लय
पर होती ह, अतः अ धक झल्ली-क्षेत्र का अथ है अ धक दर। साझा वशेषताएँ — दोहरी झल्ली, अपना डीएनए,
अपने राइबोसोम — ही वह कारण ह जनसे जीव वज्ञानी मानते ह क दोन कभी स्वतंत्र जीवाणु थे जो बाद म कसी
बड़ी को शका के भीतर बस गए। इससे यह भी स्पष्ट होता है क पादप को शका को दोन क्य चा हए — ह रतलवक
सूय क ऊजा को केवल शकरा म जमा कर सकता है, और उसे एट पी के रूप म नकाल सकता है केवल
माइटोकॉ या, जो को शका के हर अन्य भाग के लए खच करने योग्य रूप है।
प्र.7 नम्न ल खत म से को शकांग के कौन-से जोड़े म डीएनए होता है? (i) ह रतलवक, राइबोसोम (ii)
माइटोकॉ या, कद्रक (iii) गॉल्जी उपकरण, राइबोसोम (iv) कद्रक, लाइसोसोम
सही जोड़ा है (ii) माइटोकॉ या, कद्रक।
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को शकांग डीएनए है? उसके स्थान पर या साथ म क्या है
कें द क हाँ डीएनए और वशेष प्रोट न से बने गुणसूत्र; डीएनए के कायात्मक खंड जीन कहलाते ह
माइटोकॉिन्डया हाँ अपना डीएनए और अपने राइबोसोम — यह अपने कुछ प्रोट न स्वयं बनाता है
हिरतलवक हाँ इसम भी अपना डीएनए और अपने राइबोसोम होते ह
राइबोसोम नही ं यह प्रोट न सं ेषण का स्थल है, डीएनए का भंडार नह
गॉल्जी उपकरण नही ं प्रोट न और ल पड को रूपांत रत, वग कृत और पु टकाओं म पैक करता है
लाइसोसोम नही ं पाचक एंजाइम से भरा एकल झल्ली-आबद्ध थैला
वकल्प (i), (iii) और (iv) म हर बार एक डीएनए-युक्त को शकांग के साथ एक ऐसा को शकांग जोड़ा गया है जसम डीएनए नह ,
अतः तीन गलत ह। ध्यान द जए क ह रतलवक म डीएनए होता है — वकल्प (i) केवल इस लए गलत है क्य क राइबोसोम म
नह होता।
ऐसा क्य होता है: डीएनए वह चा हए जहाँ प्रोट न स्थानीय स्तर पर बनाने ह । कद्रक को शका क मुख्य प्र त
रखता है। माइटोकॉ या और ह रतलवक एक छोटा नजी समुच्चय इस लए रखते ह क्य क उनके पास अपने
राइबोसोम भी ह और वे अपने कुछ प्रोट न वह बना लेते ह — यही वह वशेषता है जो संकेत दे ती है क वे प्राचीन
स्वतंत्र जीवाणुओं के वंशज ह। को शका का शेष सब कुछ अपने प्रोट न को शकाद्रव्य से बने-बनाए पाता है, अतः उसे
अपने डीएनए क आवश्यकता ही नह ।
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प्र.8 एक शोधकता ने एक प्रयोग कया जसम उसने समान आकार क दो गाजर का उपयोग कया। उसने एक गाजर
को साधारण जल म और दूसरी को नमक के सांद्र वलयन म रखा ( चत्र 2.21)। 24 घंटे के प ात उसने अपने
अवलोकन अ भले खत कए। (i) वह इस प्रयोग के माध्यम से कौन-सी प रकल्पना का परीक्षण करना चाहती है?
(ii) इस प्रयोग म सुधार के लए आप क्या सुझाव दगे? (iii) साधारण जल म रखी हुई गाजर अनम्य (कठोर) और
कड़क (कुरकुरी) रहती है ले कन नमक के सांद्र वलयन म रखी हुई गाजर रबर जैसी लचीली एवं नरम क्य हो
जाती है?
(क) (ख)
चत्र 2.21 — प्रायो गक व्यवस्थापन, जसम गाजर (क) साधारण जल म और (ख) लवण के वलयन म है।
(i) प रकल्पना। क आस-पास के वलयन क सांद्रता के अनुसार जल परासरण ारा पादप को शकाओं म भीतर या बाहर जाता है
— अतः तनु (अल्पपरासारी) माध्यम म रखी गाजर जल पाएगी और दृढ़ रहेगी, जब क सांद्र (अ तपरासारी) माध्यम म रखी गाजर
जल खोकर ढ ली पड़ जाएगी।
(ii) सुधार के सुझाव।
दोन गाजर का ठ क मलान क जए — समान द्रव्यमान और समान लंबाई के टु कड़े, एक ही आयु और कस्म क गाजर से।
24 घंटे से पहले और बाद म प्रत्येक टु कड़े का भार और लंबाई मा पए, ता क प रणाम एक अंक हो, केवल एक आभास नह ।
प रवतन अ भले खत क जए — अं तम द्रव्यमान − प्रारं भक द्रव्यमान।
नमक क सांद्रता ठ क-ठ क बताइए (जैसे 20 प्र तशत) और दोन बीकर म समान आयतन तरल ली जए, दोन गाजर पूरी
तरह डू बी रह।
दोन बीकर एक ही तापमान पर र खए और ढक द जए, ता क वाष्पन से कोई एक वलयन सांद्र न हो जाए।
प्रत्येक बीकर म तीन-चार गाजर के साथ दोहराइए और औसत ली जए — एक गाजर पयाप्त प्रमाण नह है।
केवल अंत म नह , अंतराल पर (मान ली जए हर 4 घंटे) पा ांक ली जए, ता क प रवतन क प्रग त भी दखे।
तौलने से पहले दोन टु कड़ को एक ही ढं ग से प छए, ता क सतह पर लगा जल न गना जाए।
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(iii) दोन अलग क्य लगती ह।
साधारण जल: बाहर की िवलेय सांद ता < भीतर की (अल्पपरासारी)
→ परासरण ारा जल गाजर की कोिशकाओं में भीतर → रसधािनयाँ भरी ं → कोिशकाएँ स्फीत
→ पत्येक कोिशका अपनी दृ ढ़ िभि पर दबाव डालती है → ऊतक कठोर और कु रकु रा
सांद नमक: बाहर की िवलेय सांद ता > भीतर की (अितपरासारी)
→ परासरण ारा जल बाहर → रसधािनयाँ खाली → कोिशकाएँ िशिथल
→ िभि यों पर कोई दबाव नही ं → ऊतक नरम, मुड़ने वाला और लचीला
ऐसा क्य होता है: कुरकुरापन जल-दाब से उत्पन्न एक यां त्रक गुण है। गाजर इस लए चटकती है क्य क लाख भरी
हुई त को शकाएँ अपनी भ त्तय पर बाहर क ओर दबाव डालती ह, जससे ऊतक फूली हुई न लय के बंडल
जैसा व्यवहार करता है और मुड़ने के बजाय साफ टू टता है। जल ख च ली जए और वही भ त्तयाँ अब भी ह, पर उन
पर दबाव नह , अतः गाजर खाली नली क भाँ त मुड़ जाती है। यही पृष्ठ 19 के प्रश्न 4 का मुरझाना है, और यही तब
होता है जब कट स ब्जय पर नमक डालने से जल रसने लगता है।
प्र.9 जीवाणु और जंतु को शकाओं म नम्न ल खत संरचनाओं क उप स्थ त या अनुप स्थ त इं गत क जए —
गुणसूत्र, कद्रक, माइटोकॉ या, गॉल्जी उपकरण, वण लवक।
को शका म संरचनाएँ जीवाणु को शका जंतु को शका
गण
ु सूत्र उपिस्थत उपिस्थत
कें द क अनुपिस्थत उपिस्थत
माइटोकॉिन्डया अनुपिस्थत उपिस्थत
गॉल्जी उपकरण अनुपिस्थत उपिस्थत
वण लवक अनुपिस्थत अनुपिस्थत
दो पं क्तय पर स्पष्टीकरण आवश्यक है।
गुणसूत्र — जीवाणु को शका। आनुवं शक पदाथ न त रूप से उप स्थत है, पर वभा जत होती सुकद्रक को शका के
छड़ाकार गुणसूत्र के रूप म नह । पूवकद्रक को शका म डीएनए वशेष प्रोट न से संबद्ध एकल गोल अणु होता है जो
कद्रकाभ नामक क्षेत्र म बना कसी झल्ली के रहता है। इसे सामान्यतः जीवाणु गुणसूत्र कहते ह, अतः प्र व ष्ट “उप स्थत” है,
पर उसका रूप बताना चा हए।
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 2 को शका — जीवन क नमाण इकाई
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वण लवक। ये लवक ह, और लवक केवल पादप को शकाओं म होते ह। अतः इस ता लका के दोन स्तंभ म ये अनुप स्थत ह।
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ऐसा क्य होता है: पहली दो पं क्तयाँ साथ प ढ़ए और पूरा पूवकद्रक –सुकद्रक भेद सामने आ जाता है। जीवाणु के
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पास आनुवं शक पदाथ है पर आनुवं शक कक्ष नह — कद्रक झल्ली के बना डीएनए। पं क्तयाँ 3 और 4 इसी सीमा
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agझlल्लयाँ नह बना सकती उसम ये हो ही नह सकते। जीवाणु फर भी श्वसन करता है और प्रोट न बनाकर बाहर
से नकलती ह — माइटोकॉ या और गॉल्जी उपकरण झल्ली-आबद्ध को शकांग ह, और जो को शका आंत रक
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भेजता है; वह यह सब को शकांग के बजाय को शकाद्रव्य म और को शका झल्ली पर करता है।
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