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NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर

AglaSem पर कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर (अन्वेषण) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 9 Science Chapter 8 Journey Inside the Atom (Exploration), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर - Page 1 of 60

About NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर

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NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा9

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 8: एक या ा— परमाणु के भीतर

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — अन्वेषण

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

140 – 161 24 63 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 59 pages

Page 2

कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 9 · व ान · अन्वे ष ण

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 8: एक यात्रा— परमाणु के भीतर
आचाय कणाद ने जस परमाणु क कल्पना क थी, उसके दो हज़ार वष बाद तीन प्रयोग — कैथोड करण, स्वण प णका और ही लयम के द्रव्यमान क
पहेली — ने वैज्ञा नक को परमाणु के भीतर झाँकने पर ववश कया। यह अध्याय टॉमसन, रदरफोड, बोर एवं चैड वक क उसी यात्रा का अनुसरण
करता है और अंत म वे उपकरण दे ता है जनका उपयोग आप आगे पूरे रसायन वज्ञान म करगे — परमाणु क्रमांक, द्रव्यमान संख्या, इलेक्ट्रॉ नक
वन्यास, संयोजकता, सम ा नक एवं समभा रक।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

अन्वेषण (कक्षा 9) 140 – 161

खं ड प्रश्न

24 63

माध्यम

हन्द

चतन क जए — पृष्ठ 140
अध्याय आरंभ

चतन क जए

प्र.1 क्या परमाणु सूक्ष्मतम अ वभाज्य कण ह?

नह । परमाणु को और भी सूक्ष्म कण म वभा जत कया जा सकता है, अतः यह अ वभाज्य नह है।
अ वभाज्यता का वचार दशन से आया था, प्रयोग से नह — आचाय कणाद का परमाणु तथा ग्रीक एटोमॉस ( जसका अथ ही है
'अ वभाज्य')। डाल्टन ने वष 1808 म भी यही मान्यता रखी। प्रयोग ने इसे तोड़ा —

रे डयोध मता — कुछ तत्व स्वयं ही अदृश्य ऊजा एवं कण उत्स जत करते पाए गए। अथात परमाणु म से कुछ बाहर आ रहा
था।
कैथोड करण (टॉमसन, 1897) — कैथोड से ऋणावे शत कण क धारा नकलती है जनका द्रव्यमान परमाणु से बहुत कम
है, और यह इस बात पर नभर नह करता क कैथोड कस धातु का है अथवा नली म कौन-सी गैस भरी है। ये कण इलेक्ट्रॉन थे,
जो प्रत्येक परमाणु म उप त ह।

आज हम जानते ह क परमाणु म तीन अवपरमाणुक कण होते ह — इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन — तथा प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन क
भी अपनी आंत रक संरचना होती है।

ऐसा क्य होता है: मुख्य संकेत यह है क इलेक्ट्रॉन कैथोड के पदाथ पर नभर नह करता। य द ताँबे, ऐलु म नयम
अथवा लोहे — तीन से पूणतः एक जैसा कण नकलता है तो वह कण कसी एक तत्व का नह हो सकता; वह सभी
तत्व का साझा मूल घटक है।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 इलेक्ट्रॉन परमाणु के ना भक म उप त प्रोटॉन ारा आक षत होने पर भी ना भक म क्य नह गरते ह?

क्य क ायी अव ा म इलेक्ट्रॉन क ऊजा का क्षय नह होता — यही बोर क अ भधारणा है, और यही वह बदु है जहाँ उनका
मॉडल रदरफोड के मॉडल से आगे नकल गया।
तक को दो चरण म सम झए।

चरसम्मत भौ तक क्या कहती है। वृत्ताकार पथ म ग तशील इलेक्ट्रॉन क दशा नरंतर बदलती रहती है, अतः वह त्व रत हो
रहा है (अध्याय 4)। त्व रत आवेश से ऊजा का व करण होना चा हए। ऊजा खोते हुए वह स पलाकार पथ पर भीतर क ओर
बढ़कर क्षण भर म ना भक म गर जाएगा। तब प्रत्येक परमाणु नष्ट हो जाता और द्रव्य का अ स्तत्व ही न होता।
वास्तव म क्या होता है। परमाणु ायी ह; लोहे का टु कड़ा लोहा ही बना रहता है। अतः परमाणु के लए चरसम्मत पूवानुमान
गलत है। बोर ने प्रस्ता वत कया क इलेक्ट्रॉन केवल कुछ न त कोश (K, L, M, N …) म ही रह सकते ह, और अपने कोश
म रहते हुए इलेक्ट्रॉन क ऊजा र रहती है, भले ही वह ग तमान हो। ऊजा का आदान-प्रदान तभी होता है जब इलेक्ट्रॉन
एक कोश से दूसरे कोश म जाए, और तब भी केवल उतनी ही मात्रा म जतना दोन स्तर क ऊजा का अंतर है।

अतः प्रोटॉन का रवैद्युत आकषण इलेक्ट्रॉन को बाँधे तो रखता है — यही उसे परमाणु से जुड़ा रखता है — परंतु इलेक्ट्रॉन पूरी
तरह भीतर गरने के बजाय कसी अनुमत ऊजा स्तर पर र हो जाता है।

क्या आप जानते ह? बोर के पास ायी अव ाओं क कोई व्युत्प त्त नह थी; उन्ह ने इसे केवल अ भगृहीत के
रूप म रखा क्य क यह प्रयोग से मेल खाता था। वज्ञान म यह उ चत है — अ भगृहीत तब तक टकता है जब तक
कोई गहरा सद्धांत (यहाँ क्वांटम यां त्रक ) उसक व्याख्या न कर दे ।

प्र.3 वै ा नक परमाणु प्र तरूप (मॉडल ) म प रवतन क्य करते रहे ह?

क्य क प्रत्येक नए प्रयोग से ऐसा प रणाम मला जसक व्याख्या पुराना मॉडल नह कर सका, और जो मॉडल प्रमाण क व्याख्या न
कर सके उसे बदलना ही पड़ता है।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

मॉडल कसक व्याख्या क कसने इसे तोड़ा

डाल्टन (1808) परमाणु द्रव्य के अ वभाज्य नमाण खंड रे िडयोधिम ता एवं कै थोड िकरणें — परमाण ु सूक्ष्म कण उ त्सिजत
करते है ं

टॉमसन उदासीन परमाणु म धनावेश एवं ऋणावेश का स्वण पिणका पयोग — कु छ α-कण पुनः लौट आए
संतुलन

रदरफोड रक्त ान, सघन कद्र य ना भक, प रक्रमा करते परमाण ु के स्थाियत्व की व्याख्या नही ं कर सका
(1911) इलेक्ट्रॉन

बोर (1913) न त ऊजा स्तर K, L, M, N ारा ा यत्व आगे के पयोगों में इले क्टॉन मेघ की आवश्यकता पड़ी, िनिश्चत
क क्षाओं की नही ं

क्वाट
ं म इलेक्ट्रॉन मेघ के रूप म — संभावना वाले क्षेत्र इस पर अभी भी काय जारी है
यांित्रकीय

ऐसा क्य होता है: यह वज्ञान क असफलता नह , उसक कायप्रणाली है। मॉडल पूवानुमान लगाने का साधन है।
जब पूवानुमान गलत नकलता है तो उसके ान पर ऐसा मॉडल आता है जो पुराने क सभी सही बात भी बनाए रखे
और नए प रणाम क भी व्याख्या करे। ध्यान द जए क प्रत्येक नए मॉडल ने पछले मॉडल का उपयोगी भाग रखा
— बोर ने रदरफोड का ना भक बनाए रखा।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 140

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर
a g l AglaSem · NCERT Solutions

अध्याय आरंभ
co m
em.
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उपयुक्त चत्र को ध्यानपूवक दे खए। आपने क्या अवलोकन कया? क्या आपने ध्यान दया है क हमारे जैसे
m
प्र.1

l a se
सजीव प्राणी और घर जैसी नज व वस्तुए ँ दोन ही अंततः परमाणुओं से न मत ह?

a g

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घर a मानव शरीर

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C P

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a परमाणु
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Si

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दीवार ऊतक

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N

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ईंट कोिशका

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m .co िसिलके ट
a g प ोटीन

l a se
a g अध्याय के आरं भक पृष्ठ 139 के ऊपरी भाग म छपा चत्र।

se m
com g l a
m . a
gl ase
a

चत्र म दो ंखलाएँ ह जो बल्कुल अलग-अलग ान से आरंभ होकर एक ही ान पर पहुँचती ह — परमाणु।

co m
.
नज व ंखला: घर → कक्ष → द वार → ईंट → स लकेट → परमाणु।

se m
m a
सजीव ंखला: मानव शरीर → अंग → ऊतक → को शका → प्रोट न → परमाणु।
o l
c दोन परमाणु पर ही समाप्त होती ह। बीच म दशाए गए परमाणु (C, H, O, N,agP, Si) दोन ंखलाओं म वही तत्व ह। ईंट
हाँ .—
m
se मुख्यतः स लकेट (Si एवं O) से बनी है; प्रोट न C, H, O, N एवं S से बना है। परमाणुओं के प्रकार एवं उनक व्यव ा भन्न होती
a
agl c
.
है, परंतु 'सजीव द्रव्य' नाम का कोई अलग पदाथ नह होता।

s e m
co m gl a
m .
ऐसा क्य होता है: को शका को सजीव बनाने वाली बात कसी भन्न प्रकार का परमाणु नह , ब ल्क व्यव
a ा है —
e
वह ढं ग जससे काबन, हाइड्रोजन, sऑक्सीजन
a
gl। व्यव ा तोड़ द जए, शेष केवल साधारण परमाणु बचगे।
एवं नाइट्रोजन जुड़कर ऐसे बड़े अणु बनाते ह जो अपनी प्र तकृ त बना
सक और अ भ क्रयाएँ चलाaसक

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 4 of 59

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 आप आश्चयच कत ह गे क क्या परमाणु ही वास्तव म द्रव्य क सबसे छोट इकाई होती है अथवा इसे और भी
सूक्ष्म इकाइय म वभा जत कया जा सकता है?

इसे और भी वभा जत कया जा सकता है। परमाणु तीन अवपरमाणुक कण से बना होता है —

कण प्रतीक आपे क्षक आवेश कहाँ त

इले क्टॉन e– –1 ना भक के बाहर, कोश म

पोटॉन p+ +1 ना भक म

न्यूटॉन n0 0 ना भक म

'परमाणु' शब्द का अथ आज भी 'अ वभाज्य' है, परंतु यह नाम अब केवल ऐ तहा सक है। सत्य यह है क परमाणु वह सबसे छोटा
कण है जो अब भी उस तत्व क भाँ त व्यवहार करता है — काबन परमाणु को तोड़ द जए तो वह काबन नह रहेगा।

क्या आप जानते ह? प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन स्वयं और भी सूक्ष्म कण से बने होते ह जन्ह क्वाक कहते ह — इनके
वषय म आप उच्च कक्षाओं म पढ़गे। इलेक्ट्रॉन म अब तक कोई आंत रक संरचना नह मली है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 141
8.1 परमाणु सद्धांत क उत्प त्त का पुनः अन्वेषण

प्र.1 परमाणु कससे न मत होते ह?

परमाणु इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन से न मत होते ह, जो दो अलग-अलग क्षेत्र म व्यव त रहते ह।

कद्र म त ना भक म प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन ( जन्ह स म्म लत रूप से न्यू क्लऑन कहते ह) होते ह। इसम संपूण धनावेश एवं
लगभग संपूण द्रव्यमान होता है। इसका व्यास लगभग 10–15 m है।
इलेक्ट्रॉन ना भक के चार ओर कोश म ग त करते ह। ये परमाणु का लगभग संपूण आयतन घेरते ह (व्यास ≈ 10–10 m) परंतु
द्रव्यमान म इनका योगदान नगण्य है।

परमाणु का व्यास ÷ नािभक का व्यास

= (10–10 m) ÷ (10–15 m)

= 105, अथ त परमाणु अपने नािभक से एक लाख गुन ा चौड़ ा है

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: इसी अनुपात के कारण परमाणु को 'अ धकांशतः रक्त ान' कहा जाता है। य द परमाणु एक
क्रकेट मैदान (लगभग 100 m) जतना बड़ा हो तो ना भक उसके कद्र म काली मच के कुछ मलीमीटर के दाने
जतना होगा।

प्र.2 य द हम परमाणुओं को दे ख सकते तो वे कैसे दखाई दे ते?

इस अध्याय के चत्र जैसे नह — न रंगीन गोले होते और न खची हुई कक्षाएँ।
आज हम वास्तव म परमाणुओं के चत्र प्राप्त कर सकते ह। क्रमवीक्षण सुरंगन सूक्ष्मदश (STM) कसी सतह का परमाणु-दर-
परमाणु मान चत्रण करता है; संचरण इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदश (TEM) दशाता है क अ त सूक्ष्म प्र तदश के भीतर परमाणु कस प्रकार
व्यव त ह। STM के चत्र ( चत्र 8.15) म परमाणु गोलाकार उभार क नय मत पं क्तय के रूप म दखाई दे ते ह — न रंग, न
तीखे कनारे, न कोई आंत रक भाग।

ऐसा चत्र वास्तव म इलेक्ट्रॉन मेघ दशाता है — वह क्षेत्र जहाँ इलेक्ट्रॉन के होने क संभावना सवा धक है। ना भक 105 गुना छोटा
होने के कारण उसम दखाई ही नह दे ता।

संकेत: पाठ्यपुस्तक क अपनी टप्पणी यही कहती है — परमाणुओं का कोई रंग नह होता। रेखा चत्र म प्रद शत
रंग केवल इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन को अलग-अलग दखाने के लए ह।

प्र.3 एक तत्व के परमाणु कसी अन्य तत्व के परमाणुओं से कस प्रकार भन्न होते ह?

ना भक म प्रोटॉन क संख्या से — अथात परमाणु क्रमांक Z से।
Z तत्व का पहचान-पत्र है। Z बदलते ही तत्व बदल जाता है, चाहे शेष सब कुछ वैसा ही रहे —

हाइड्रोजन: 1 प्रोटॉन, Z = 1।
ही लयम: 2 प्रोटॉन, Z = 2।
सो डयम: 11 प्रोटॉन, Z = 11।

न्यूट्रॉन पहचान नह बदलते — 126C, 136C एवं 146C तीन म 6 प्रोटॉन ह, अतः तीन काबन ह।

ऐसा क्य होता है: उदासीन परमाणु म इलेक्ट्रॉन क संख्या प्रोटॉन के बराबर होती है, अतः Z ही इलेक्ट्रॉन क
संख्या भी तय करता है। इलेक्ट्रॉन क संख्या इलेक्ट्रॉ नक वन्यास तय करती है और वही संयोजकता इलेक्ट्रॉन क
संख्या। रसायन वज्ञान संयोजकता इलेक्ट्रॉन से तय होता है, अतः Z ही तत्व का व्यवहार नधा रत करता है।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 143

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8.2.1 टॉमसन का परमाणु मॉडल

सो चए और बताइए

प्र.1 मान ली जए क आपने टॉमसन के ववरणानुसार स्वयं एक ‘परमाणु’ बनाया जसम धनात्मक आवेश के लए
म और वत रत इलेक्ट्रॉन के लए छोटे मो तय का उपयोग कया। क्या होगा य द — (i) म पर धनावेश
उसम वत रत मो तय के कुल ऋणावेश से कम हो? (ii) त्रु टवश य द म म थोड़ा-सा भी ऋणावेश हो तो क्या
आपका मॉडल अब भी उदासीन परमाणु को प्रद शत करेगा?

(i) मॉडल पर प रणामी ऋणावेश होगा — यह उदासीन परमाणु नह , ब ल्क ऋणायन (ऐनायन) को प्रद शत करेगा।

पिरणामी आवेश = (िम ी पर धनावेश) + (मोितयों पर कु ल ऋणावेश)

यिद धनावेश का पिरमाण ऋणावेश से कम है तो योग ऋणात्मक होगा

जै से — िम ी +8, मोती 10 × (–1) = –10 → पिरणामी = –2

वास्त वक उदाहरण ऑक्साइड आयन O2– है: 8 प्रोटॉन, 10 इलेक्ट्रॉन, प रणामी आवेश –2।
(ii) नह — यह उदासीन परमाणु को प्रद शत नह करेगा, ब ल्क यह परमाणु का मॉडल ही नह रह जाएगा।

ग णतीय रूप से आवेश कभी नरस्त हो ही नह सकते: ऋणात्मक म + ऋणात्मक मोती का योग सदै व ऋणात्मक ही होगा।
वैचा रक रूप से टॉमसन के मॉडल का पूरा आधार यही है क परमाणु का धनावेश गोले म और ऋणावेश उसम धँसे कण म
रहता है। य द गोला ही ऋणावे शत हो जाए तो इलेक्ट्रॉन को संतु लत करने के लए कुछ बचता ही नह ।

ऐसा क्य होता है: उदासीनता एक सट क हसाब क शत है — प्रोटॉन क संख्या = इलेक्ट्रॉन क संख्या, अतः
कुल धनावेश एवं कुल ऋणावेश प रमाण म समान होकर नरस्त हो जाते ह। उदासीन परमाणु के कसी भी मॉडल को
यह शत पूरी करनी ही होगी।

प्र.2 क्या इसक तुलना एक संतरे (अथवा एक न बू जनके नरम गूद के मध्य बीज होते ह) से करना उ चत है? यह
कहाँ तक टॉमसन के वचार से मेल खाता है और इसम कहाँ कमी है?

हाँ, यह उतना ही उपयुक्त है जतना तरबूज — और इसक क मयाँ भी ठ क वही ह।
कहाँ मेल खाता है

बीज (इलेक्ट्रॉन) कसी बड़े पदाथ (धनावे शत गूदे) के भीतर धँसे रहते ह, बाहर चपके नह होते।
बीज एक ान पर एकत्र न होकर पूरे फल म वत रत रहते ह — टॉमसन के इलेक्ट्रॉन भी गोले म वत रत ह।
फल लगभग गोलाकार है, जैसे मॉडल का धनावेश का गोला।

कहाँ कमी है

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संतरा फाँक म बँटा होता है जनके बीच झल्ली होती है, और बीज कुछ ही फाँक म रहते ह — टॉमसन का धनावेश पूणतः
एकसमान है, उसम कोई खाने नह ।
बीज र ह; इलेक्ट्रॉन ग तशील ह।
संतरे पर मोटा छलका होता है, अथात एक स्पष्ट बाहरी सीमा; परमाणु के चार ओर ऐसी कोई परत नह होती।
पैमाना पूणतः गलत है। बीज फल का अच्छा-खासा भाग होता है, जब क इलेक्ट्रॉन परमाणु क तुलना म अत्यंत सूक्ष्म है और
उसका द्रव्यमान परमाणु के द्रव्यमान क तुलना म नगण्य है।
सबसे बड़ी बात — मॉडल स्वयं गलत है: वास्त वक परमाणु म फैला हुआ धनावे शत गूदा होता ही नह । संपूण धनावेश परमाणु
से 105 गुना छोटे ना भक म समटा रहता है।

संकेत: वज्ञान क प्रत्येक उपमा क एक सीमा होती है। पहले यह बताइए क उपमा कस बात को दशाने के लए है
(यहाँ — धनावे शत पदाथ म धँसे ऋणावे शत कण) और उससे आगे उसका उपयोग मत क जए।

प्र.3 टॉमसन ने यह नष्कष क्य नकाला क इलेक्ट्रॉन सभी परमाणुओं म उप त होते ह?

क्य क नली कसी भी पदाथ क हो और उसम कोई भी गैस भरी हो, कैथोड करण एक जैसी ही नकल ।
टॉमसन ने वसजन नली का प्रयोग दो बात बदलते हुए दोहराया —

कैथोड क धातु, तथा
नम्न दाब पर नली म भरी गैस।

प्रत्येक बार करण ने वद्युत एवं चुंबक य क्षेत्र म एक ही प्रकार का व्यवहार कया — आवेश का वही चह्न, आवेश-द्रव्यमान का वही
अनुपात। कण सदै व ऋणावे शत थे और सदै व परमाणु से बहुत हल्के।

ऐसा क्य होता है: यह एक नयं त्रत प्रयोग है। य द कण अपने ोत पर नभर होता तो ोत बदलने पर कण भी
बदलता। ऐसा नह हुआ। शेष एकमात्र व्याख्या यही है क यह कण कसी एक तत्व का लक्षण नह , ब ल्क प्रत्येक
परमाणु का घटक है। अतः टॉमसन ने नष्कष नकाला क इलेक्ट्रॉन समस्त द्रव्य का मूल घटक ह — और इस लए
परमाणु वभाज्य ह।

क्या आप जानते ह? इलेक्ट्रॉन पहला ऐसा कण था जसे अवपरमाणुक कण के रूप म पहचाना गया। गैस क
वद्युत चालकता पर उसी अध्ययन के लए, जससे यह खोज हुई, टॉमसन को वष 1906 म भौ तक का नोबेल
पुरस्कार मला।

आइए, और आगे बढ़ — पृष्ठ 144

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर
a g l AglaSem · NCERT Solutions

क. रदरफोड का परमाणु मॉडल
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आइए, और आगे बढ़

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0.1 mm मोटाई का कागज का एक पत्रक (जैसा आपक पाठ्यपुस्तक का एक पृष्ठ) बनाने के लए कतने
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प्र.1
परमाणुओं क आवश्यकता होगी? गणना क जए।

co m
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लगभग 106 परमाणु — अथात दस लाख परमाणु एक के ऊपर एक।
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a
सूत्र: मोटाई क दशा म परमाणुओं क संख्या = पत्रक क मोटाई ÷ एक परमाणु का व्यास।

co m
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पत्रक की मोटाई = 0.1 mm
om
1 mm =.c10–3 m, अतः 0.1 mm = 0.1 × 10–3 m = 10–4 m a g l
a s em
l
ag एक परमाणु का व्यास ≈ 10
–10 m

m a s
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परमाणुओ ं की संख्या ≈ (10–4 m) ÷ (10–10 m)

g l a
= 10(–4) – (–10) a
m
= 106
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as
= 106 परमाणु, अथ त लगभग 10 लाख परमाणु
m l
.co a g
a s emद जए क मीटर नरस्त हो जाते ह, अतः उत्तर एक शुद्ध संख्या है — और होना भी यही चा हए, क्य क यह एक गणना है।
gl
ध्यान
a
se m
मm a
ऐसा क्य होता है: यह गणना इस लए चलती है क्य क उत्तर दो लंबाइय का अनुपात है। साथ ही यह एक आकलन
है, सट क गणना नह — कागज म परमाणु रेश.co व्यव त रहते ह, सीधी खड़ी पं क्त म नह , और 10–10 m
a g l
a s em
l
कसी एक तत्व का नह ब ल्क एक प्ररूपी परमाणु का व्यास है।
ag
यह क जए: मानव बाल क मोटाई लगभग 0.07 mm = 7 × 10–5 m होती है। इसके आर-पार परमाणुओं क
co m
m .
संख्या ≈ (7 × 10–5 m) ÷ (10–10 m) = 7 × 105, अथात लगभग 7 लाख परमाणु।
m as e
.co a g l
se m
g l a
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वै ा नक क भाँ त सो चए — पृष्ठ 144
m .
m a s e
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g l as
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co m
m .
m ase
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Page 11

कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

क. रदरफोड का परमाणु मॉडल

वै ा नक क भाँ त सो चए

प्र.1 चत्र 8.4 म दशाए स्वण प णका प्रयोग का अवलोकन क जए। उन अवलोकन का पूवानुमान लगाइए जो प्रयोग
म अ धक मोट स्वण प णका का उपयोग करने पर प्राप्त हो सकते ह? अपने अपे क्षत अवलोकन को दशाने हेतु
एक सरल चत्र भी बनाइए। संकेत— पतली प णका एवं मोट प णका क तुलना क जए। प णका क मोटाई α
कण के ना भक से टकराने क संभावनाओं को कैसे प्रभा वत करेगी?

पतली स्वण पिणका

α - कणों
का पुंज

चत्र 8.4 — स्वण प णका प्रयोग का व्यव ात्मक चत्रण।

पूवानुमान: अ धक वक्षेपण एवं कम पारगमन। मोट प णका के साथ आप दे खगे —

कम α-कण बना वक्षे पत हुए सीधे पार जाएँगे;
अ धक α-कण वक्षे पत ह गे, और उनम से अ धक बड़े कोण पर वक्षे पत ह गे;
अ धक अंश ोत क ओर पुनः लौट आएगा;
अनेक कण व चत्र कोण पर पहुँचगे क्य क वे माग म एक से अ धक बार वक्षे पत हुए ह गे।

कारण। मोट प णका का अथ है α-कण के माग म स्वण परमाणुओं क अ धक परत। प्रत्येक अ त रक्त परत कसी ना भक के
नकट से गुजरने का एक और अवसर है। य द एक परत म उल्लेखनीय वक्षेपण क संभावना कम है, तो सभी परत से बना छु ए
नकल जाने क संभावना परत क संख्या बढ़ने के साथ घटती जाती है।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

पतली पिणका (पयोग में पयुक्त) अिधक मोटी पिणका (अपेिक्षत)

α α

िबना िवक्षे िपत हुए िवक्षे िपत पुनः लौटा स्वण नािभक

पतली एवं मोट स्वण प णका क तुलना। माग म स्वण परमाणुओं क अ धक परत होने पर कम α-कण बना वक्षे पत हुए नकल पाते ह
तथा अ धक कण वक्षे पत होते ह — कुछ तो एक से अ धक बार।

ऐसा क्य होता है: ठ क इसी कारण गाइगर एवं मासडेन ने अत्यंत पतली प णका का उपयोग कया — केवल कुछ
सौ परमाणु मोट । पतली प णका म वक्षे पत हुआ α-कण लगभग न त रूप से एक ही ना भक ारा एक ही बार
वक्षे पत हुआ होता है। तभी कोण से पीछे क ओर गणना करके प्रक णक के आकार एवं आवेश का अनुमान लगाया
जा सकता है। मोट प णका म अनेक वक्षेपण जुड़ जाते ह और यह सूचना नष्ट हो जाती है।

स्वयं जाँ चए: 'परमाणु का अ धकांश भाग रक्त है' यह नष्कष इस तथ्य से आता है क अ धकांश कण सीधे
नकल गए। य द मोट प णका अ धकांश कण को रोक ले तो क्या इससे ना भक अ सद्ध हो जाएगा? नह — इसका
अथ केवल इतना होगा क करणपुंज को अ धक ना भक मले। एक टक्कर क भौ तक नह बदली।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 144
क. रदरफोड का परमाणु मॉडल

सो चए और बताइए

प्र.4 आप क्या सोचते ह? य द रदरफोड के स्वण प णका प्रयोग म अल्फा (α) कण के ान पर ऋणावे शत कण का
उपयोग कया जाता तो क्या होता?

कण फर भी वक्षे पत होते, परंतु ना भक ारा प्र तक षत होने के बजाय आक षत होते — अतः वक्षेपण दूसरी दशा म मुड़ता
और कोई भी कण ना भक से सीधा टकराकर वापस नह लौटता।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

Α-कण (आवेश +2) ऋणावे शत कण (जैसे इलेक्ट्रॉन)

नािभक से बल प्र तकषण आकषण

नािभक के िनकट पथ दूर धकेला जाता है, बाहर क ओर भीतर िखंचता है, नािभक के चारों ओर मुड़ता है
मुड़ता है

बड़े कोण पर वापसी हाँ, कुछ कण लौट आते ह सीधी वापसी नही;ं कण पास से घूम कर िनकल जाते है ं

परमाण ु के अपने इले क्टॉनों का लगभग शून्य (α लगभग 7300 गुना पबल — द व्यमान समान होने से पत्येक टक्कर पथ बहुत
पभाव भारी है) बदल दे ती है

ऋणावे शत कण से प्रयोग और भी दो कारण से बगड़ जाता —

इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान परमाणु के अपने इलेक्ट्रॉन के बराबर है, अतः वह उन्ह से बुरी तरह प्रक ण हो जाता। α-कण इलेक्ट्रॉन
से लगभग 7300 गुना भारी होने के कारण उन्ह अनदे खा करके नकल जाता है और केवल ना भक ही उसे मोड़ सकता है। यही
α-कण को इतना स्वच्छ अन्वेषी बनाता है।
आकषण बल कण को लक्ष्य से दूर धकेलने के बजाय उसक ओर ख चता है, अतः कण प्रक ण होने के बजाय पकड़ा भी जा
सकता है।

ऐसा क्य होता है: दोन आवेश एक ही नयम मानते ह — समान आवेश प्र तक षत करते ह, वपरीत आवेश
आक षत करते ह, और कण जतना नकट आता है बल उतना ही बढ़ता है। अ त सूक्ष्म संक द्रत ना भक के अ स्तत्व
का संकेत तब भी प्रबल वक्षेपण के रूप म मलता। परंतु रदरफोड का नणायक संकेत — कण का अपने ही माग
पर लौट आना — प्र तकषण माँगता है, और इस लए धनावे शत अन्वेषी माँगता है।

प्र.5 रदरफोड ने पाया क कुछ अल्फा (α) कण तीव्र ग त से पुनः लौट आए। मात्र इस एक आश्चयजनक प रणाम से
टॉमसन का परमाणु ‘प्लम पु डग मॉडल’ पूण रूप से कैसे गलत सद्ध हो गया?

क्य क टॉमसन के परमाणु म ऐसा कुछ है ही नह जससे टकराकर कण लौट सके।
दोन मॉडल का पूवानुमान दे खए।

टॉमसन का मॉडल: धनावेश पूरे परमाणु म एकसमान फैला है और इलेक्ट्रॉन इतने हल्के ह क उनका कोई प्रभाव नह । भीतर
से गुजरते α-कण को चार ओर से क्षीण, बखरा हुआ धनावेश मलता है और भन्न- भन्न दशाओं के धक्के अ धकांशतः नरस्त
हो जाते ह। अ धक से अ धक उसे हल्का-सा धक्का लग सकता है — डग्री के अंश जतना वक्षेपण। वापसी असंभव है।
जो दे खा गया: कुछ α-कण लगभग सीधे लौट आए, अथात 90° से अ धक वक्षे पत हुए।

कसी तीव्र, भारी, धनावे शत कण को लौटाने के लए बहुत बड़ा प्र तकषण बल चा हए, और बहुत बड़े बल के लए बहुत बड़ा
धनावेश बहुत छोटे आयतन म संक द्रत होना चा हए ता क α-कण एक साथ उस पूरे आवेश के अत्यंत नकट पहुँच सके।
रदरफोड ने स्वयं कहा था क यह वैसा ही अ वश्वसनीय था जैसे कसी टशू पेपर पर गोला दागा जाए और वह लौटकर आप पर आ
पड़े।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: यह नणायक प्रयोग का तक है — एक ऐसा अवलोकन जसे एक मॉडल व जत करता है और
दूसरा आवश्यक बनाता है। टॉमसन का मॉडल केवल वापसी क व्याख्या करने म असफल नह होता, वह उसे
असंभव ठहराता है। अतः एक भी पुष्ट वापसी उसे समाप्त करने के लए पयाप्त है। और चूँ क अ धकांश कण सीधे
नकल गए, वह संक द्रत आवेश परमाणु के आयतन के अ त सूक्ष्म भाग म ही हो सकता है — ना भक।

प्र.6 य द आप रदरफोड से उनके काय के संबंध म एक प्रश्न पूछ सकते तो वह क्या होता?

यह आपका अपना प्रश्न है, अतः इसका कोई एक सही उत्तर नह । अच्छा प्रश्न वही है जो उस बात क ओर संकेत करे जसे सामने
रखा मॉडल हल नह कर पाता। एक नमूना उत्तर नीचे है।
नमूना उत्तर: “महोदय, आपका मॉडल कहता है क इलेक्ट्रॉन ना भक के चार ओर वैसे ही प रक्रमा करते ह जैसे ग्रह सूय क । परंतु
प रक्रमा करता इलेक्ट्रॉन त्व रत होता है, और त्व रत आवेश को ऊजा का व करण करके क्षण भर म ना भक म गर जाना चा हए।
परमाणु स्पष्टतः नष्ट नह होते — तो आपके वचार म इलेक्ट्रॉन को कौन थामे हुए है?”
यह प्रश्न इस लए सशक्त है क्य क —

यह उसे स्वीकार करता है जो प्रमाण ने सद्ध कर दया है (ना भक वास्त वक है);
यह मॉडल के उस भाग पर प्रहार करता है जो प्रमाण से आगे जाता है (ग्रहीय कक्षाएँ);
यह ठ क वही र क्त है जसे दो वष बाद, वष 1913 म, नील्स बोर ने ायी अव ाओं क अवधारणा से भरा।

अन्य अ े प्रश्न जो आप पूछ सकते ह —

“ वक्षे पत कण के अंश से आपने ना भक का व्यास कस प्रकार प रक लत कया?”
“य द ना भक म अनेक प्रोटॉन ह और सभी धनावे शत ह, तो उनका पारस्प रक प्र तकषण ना भक को तोड़ क्य नह दे ता?”
(रदरफोड इसका पूरा उत्तर नह दे पाते — न्यूट्रॉन एवं ना भक य बल बाद म आए।)
“य द स्वण के ान पर ऐलु म नयम जैसी हल्क धातु क प णका ली जाती तो क्या वही प रणाम मलता?”

संकेत: कमज़ोर प्रश्न वह है जसका उत्तर आप कह दे खकर पा सकते ह। सशक्त प्रश्न वह है जो प्रमाण क सीमा
पर नशाना लगाता है।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 145

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as e
कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर
a g l AglaSem · NCERT Solutions

ग. प्रोटॉन क खोज
co m
e m.
m as
सो चए और बताइए

.co a g l
a s emदए गए अ भकथन एवं कारण को प ढ़ए और उनके संबंध म आगे दए गए वकल्प म से सही वकल्प का
gl
नीचे
a
प्र.7
चयन क जए। अ भकथन— रदरफोड ने नष्कष नकाला क परमाणु का अ धकांश द्रव्यमान उसके कद्र म एक

om
छोटे से भाग म क द्रत होता है जसे ना भक कहते ह। कारण— टॉमसन मॉडल के अनुसार इलेक्ट्रॉन एकसमान

. c ag
रूप से वत रत धनावेश वाले गोले म धँसे हुए रहते ह। (i) अ भकथन और कारण दोन सत्य ह और कारण
अ भकथन क सही व्याख्या है। (ii) अ भकथन
a s emऔर कारण दोन सत्य ह परंतु कारण अ भकथन क सही
व्याख्या नह है। (iii) अ भकथन सत्यgहैl परंतु कारण असत्य है। (iv) अ भकथन असत्य है परंतु कारण सत्य है।
a
. c om
s e m है।
la श एवं अ धकांश द्रव्यमान कद्र
comहै। स्वण प णका प्रयोग से रदरफोड ने नष्कष नकाला क परमाणु का संपaूणgधनावे
सही वकल्प है (ii) अ भकथन और कारण दोन सत्य ह परंतु कारण अ भकथन क सही व्याख्या नह

.
eअmत सूक्ष्म भाग, ना भक, म त है। प्रमाण यह है क तीव्र α-कण को बड़े कोण पर केवल कोई भारी, संक द्रत लक्ष्य ही
अ भकथन सत्य

a s
l सकता है।
के एक

a gमोड़
s
कारण भी सत्य है। यह टॉमसन के प्लम पु डग मॉडल का सही कथन है — एकसमान धनावे शत गोले म धँसे इलेक्ट्रॉन।
m a
em
.co
परंतु कारण अ भकथन क व्याख्या नह करता। कारण केवल यह बताता है क पहले वाला मॉडल क्या कहता था। टॉमसन का
agl
a s
l है) जब क कुछ बड़े कोण पर वक्षे पत हुए अथवा लौट आए (अतः द्रव्यमान एवं
मॉडल ना भक तक नह ले जाता — वह उसका खंडन करता है। अ भकथन क वास्त वक व्याख्या अवलोकन है: अ धकांश α-कण
सीधे नकल गए (अतः परमाणु अ धकांशतः g
आवेश संक द्रत ह)।
a रक्त

c o m
.
mसत्य है, क्या कारण
s e
ऐसा क्य होता है: अ भकथन–कारण प्रश्न म तीन बात क्रम से जाँ चए — क्या अ भकथन
सत्य हैo, m
. la व्याख्या नह बन जाते। यहाँ
c और क्या कारण अ भकथन का हेतु है? एक ही वषय पर दो सत्य कथनagस्वतः
m वह मॉडल है जसे प्रमाण ने उलट दया, न क वह हेतु जससे प्रमाण ना भक क ओर संकेत करते ह।
ase
agl
कारण

se m
com g l a
m . a
ase
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 146

agl
8.2.3 बोर का परमाणु मॉडल

आप आश्चय कर रहे ह गे क बोर का मॉडल परमाणु के
com
ा यत्व को कस प्रकार समझाता है?
.
प्र.1

e m
m l as
.co a g
emएक अ भगृहीत के ारा — अनुमत वृत्ताकार पथ ायी अव ाएँ ह, और ायी अव ा म इलेक्ट्रॉन क ऊजा ग तमान रहते हुए

a s
agl
.c
भी र रहती है।

s e m
m a
दोन मॉडल को आमने-सामने र खए।

e m . co agl
g l as
a

com
m .
m ase
.co


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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

रदरफोड बोर

इले क्टॉन का पथ कोई भी वृत्ताकार कक्षा के वल िनिश्चत कोश K, L, M, N (n = 1, 2, 3, 4)

पिरक्रमा के दौरान ऊज नरंतर व क रत होती रहती है िस्थर रहती है — कोई क्षय नही ं

पूव नुम ािनत पिरणित स पलाकार पथ पर ना भक म गरना; परमाणु नष्ट अपने कोश में बना रहता है; परमाण ु स्थायी

ऊज पिरवतन सतत के वल छलाँग में, दो स्तरों के अंतर के बराबर

बाहर क ओर जाने पर स्तर क ऊजा बढ़ती जाती है: K (n = 1) ना भक के सबसे नकट और न्यूनतम ऊजा वाला है; L (n = 2)
म इलेक्ट्रॉन क ऊजा K से अ धक है। इलेक्ट्रॉन कोश तभी बदलता है जब वह ठ क दोन स्तर क ऊजा का अंतर अवशो षत अथवा
उत्स जत करे — बीच म कुछ भी अनुमत नह , अतः भीतर क ओर धीरे-धीरे स पल ग त का कोई माग ही नह बचता।

ऐसा क्य होता है: बोर ने ायी अव ाओं क व्युत्प त्त नह क ; उन्ह ने इन्ह मान लया क्य क इससे मॉडल
प्रयोग से मेल खाने लगा, वशेषकर परमाणु स्पेक्ट्रम क तीक्ष्ण रेखाओं से। अ भगृहीत का अथ यही है — ऐसी
मान्यता जसका मूल्यांकन उसके प रणाम से होता है। बाद म क्वांटम यां त्रक ने समझाया क केवल कुछ ऊजाएँ ही
अनुमत क्य ह।

ज ासा-सूत्र — पृष्ठ 146
8.2.3 बोर का परमाणु मॉडल

ज ासा-सू त्र

प्र.1 बोर के कोश (कोश) को K, L, M, N, .... क्य कहा गया, A, B, C, D, .... क्य नह ?

क्य क ये अक्षर X- करण स्पेक्ट्र मक से लए गए थे, जहाँ नामकरण पहले ही K से आरंभ हो चुका था।

भौ तक वैज्ञा नक चाल्स बकला तत्व से नकलने वाली X- करण का अध्ययन कर रहे थे। उन्ह X- करण रेखाओं क एक
ंखला मली और उन्ह ने सवप्रथम दे खी गई रेखा को K नाम दया।
उन्ह ने जान-बूझकर A से आरंभ नह कया। उन्ह ने इस संभावना के लए ान छोड़ा क आगे चलकर और भी अ धक ऊजा
वाली — अथात वणमाला म पहले आने वाली — कोई ंखला मल सकती है।
ऐसी कोई ंखला कभी नह मली, अतः K से पहले के अक्षर का उपयोग कभी हुआ ही नह ।
बोर ने परमाणु कोश के लए बकला का यही प्रच लत नामकरण अपना लया — K, L, M, N, …

ऐसा क्य होता है: दोन नामकरण भौ तक रूप से भी मेल खाते ह, केवल संयोगवश नह । K X- करण रेखा तब
उत्पन्न होती है जब कोई इलेक्ट्रॉन सबसे भीतरी कोश म गरता है, अतः बोर के उपयोग से पहले ही 'K' का अथ
'सबसे भीतरी स्तर' हो चुका था। वही अक्षर रखने से एक ही वस्तु के दो प्र तस्पध नाम बनने से बच गए।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

क्या आप जानते ह? कोश को n = 1, 2, 3, 4 … संख्याएँ भी द जाती ह, और कसी कोश म अ धकतम
इलेक्ट्रॉन के सूत्र 2n² म यही n आता है। अक्षर पुराना नाम ह; संख्याएँ उपयोगी नाम ह।

क्या होगा य द … — पृष्ठ 147
8.3 परमाणु के द्रव्यमान म कौन-से घटक योगदान दे ते ह?

क्या होगा य द …

प्र.1 परमाणु म कोई रक्त ान न हो? इससे व भन्न वस्तुओं का आकार कस प्रकार प्रभा वत हुआ होगा?

प्रत्येक वस्तु अत्य धक सकुड़ जाती — जब क उसका द्रव्यमान ठ क उतना ही बना रहता।

कतना? ना भक का व्यास परमाणु के व्यास से लगभग 105 गुना छोटा है। य द सारा रक्त ान हटा दया जाए तो प्रत्येक लंबाई
उसी गुणक से घटे गी और प्रत्येक आयतन उसके घन से।

लंबाई का मापक गुणक = 105

आयतन का मापक गुणक = (105)3 = 1015

7 cm व्यास की िक्रके ट गेंद हो जाती

7 cm ÷ 105 = 7 × 10–5 cm = 0.7 µm — धूल के कण से भी छोटी

लगभग 1.6 m लंबा आपका शरीर हो जाता

1.6 m ÷ 105 = 1.6 × 10–5 m = 16 µm — लगभग एक बाल की मोटाई िजतना

द्रव्यमान अप रव तत रहेगा, अतः घनत्व 1015 गुना बढ़ जाएगा। 160 g क क्रकेट गद 0.7 µm म समटकर भी 160 g क ही
रहेगी। ऐसे पदाथ क एक चम्मच का द्रव्यमान लाख टन होगा।

ऐसा क्य होता है: परमाणु का लगभग संपूण द्रव्यमान ना भक म है और लगभग संपूण आयतन इलेक्ट्रॉन वाले क्षेत्र
म। इलेक्ट्रॉन क्षेत्र हटाइए तो आयतन चला जाता है, द्रव्यमान नह — यही एकमात्र कारण है क ना भक य द्रव्य
इतना अकल्पनीय रूप से सघन होता है।

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क्या आप जानते ह? यह केवल वचार-प्रयोग नह है। न्यूट्रॉन तारे म गुरुत्व वास्तव म परमाणुओं को तब तक दबा
दे ता है जब तक ना भक एक-दूसरे से सट न जाएँ। न्यूट्रॉन तारे म सूय से भी अ धक द्रव्यमान एक नगर के आकार के
गोले म समाया रहता है।

ज ासा-सूत्र — पृष्ठ 147
8.3.1 न्यूट्रॉन क खोज

ज ासा-सू त्र

प्र.1 आपको आश्चय होगा क जब समान आवे शत प्रोटॉन ना भक म संकु चत रहते ह तो वे एक-दूसरे को दूर क्य नह
धकेलते?

वे एक-दूसरे को प्र तक षत करते ह — परंतु उससे कह प्रबल आकषण, जसे ना भक य बल कहते ह, ना भक को बाँधे रखता है,
और न्यूट्रॉन ही इसे संभव बनाते ह।
न्यूट्रॉन दो प्रकार से सहायता करते ह —

अनावे शत होने के कारण वे प्रोटॉन के बीच बैठकर उनके मध्य दूरी बढ़ा दे ते ह, जससे रवैद्युत प्र तकषण कम हो जाता
है।
वे ना भक य बल को प्रबल करते ह — यह अल्प-परास आकषण सभी न्यू क्लऑन के बीच (प्रोटॉन–प्रोटॉन, प्रोटॉन–न्यूट्रॉन
एवं न्यूट्रॉन–न्यूट्रॉन, तीन म) काय करता है और उन्ह दृढ़ता से बाँधता है।

इसी कारण परमाणु के भारी होने के साथ न्यूट्रॉन-प्रोटॉन अनुपात बढ़ता जाता है। गनकर दे खए —

तत्व प्रोटॉन न्यूट्रॉन N:P

काबन 6 6 1.00

ऑक्सीजन 8 8 1.00

आयरन 26 30 1.15

यूरे िनयम 92 146 1.59

ऐसा क्य होता है: दोन बल दूरी के साथ अलग-अलग व्यवहार करते ह। रवैद्युत प्र तकषण द घ-परास है —
प्रत्येक प्रोटॉन पूरे ना भक म हर दूसरे प्रोटॉन को धकेलता है। ना भक य बल अल्प-परास है — यह केवल लगभग
स्पश करते न्यू क्लऑन के बीच ही काय करता है। अतः ना भक बड़ा होने पर कुल प्र तकषण, बंधनकारी आकषण
से तेज़ी से बढ़ता है और उसे ायी रखने के लए अ त रक्त न्यूट्रॉन चा हए। एक सीमा के बाद कोई भी अनुपात
काम नह करता — यही कारण है क सबसे भारी ना भक रे डयोधम होते ह।

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भारत का वै ा नक योगदान — पृष्ठ 148
8.3.1 न्यूट्रॉन क खोज

भारत का वै ा नक योगदान

प्र.1 ुव के वषय म और अ धक शोध एवं खोज क जए!

ुव भारत का सबसे बड़ा अनुसंधान रएक्टर है, जो भाभा परमाणु अनुसंधान कद्र (BARC), ट्रॉम्बे, मुंबई म त है। यह वद्युत
उत्पादन करने वाला रएक्टर नह है। इसका काय प्रयोग के लए न्यूट्रॉन का प्रबल एवं र ोत बनना है।
अनुसंधान रएक्टर कस काम आता है

न्यूट्रॉन प्रक णन। न्यूट्रॉन का करणपुंज कसी प्र तदश पर डाला जाता है और प्रक णत न्यूट्रॉन को अं कत कया जाता है।
न्यूट्रॉन अनावे शत होने के कारण इलेक्ट्रॉन मेघ को पार कर ना भक से अन्योन्य क्रया करते ह, अतः वे बता दे ते ह क कसी
ठोस के भीतर परमाणु कहाँ त ह — यह काय हाइड्रोजन जैसे हल्के परमाणुओं के लए X- करण ठ क से नह कर पात ।
रे डयोसम ा नक बनाना जो अस्पताल म उपयोग होते ह — जैसे कसर क रे डयोथेरेपी म प्रयुक्त 6027Co तथा थायरॉइड

रोग म प्रयुक्त 13153I।
पदाथ का परीक्षण — श क्त रएक्टर म उपयोग से पहले पदाथ को न्यूट्रॉन व करण म परखना।

भारतीय वै ा नक ने इससे क्या सीखा — अ तचालक क आंत रक संरचना, बैटरी इलेक्ट्रोड के भीतर ली थयम आयन क
ग त, औष ध अणुओं क आकृ त तथा औद्यो गक मश्र धातुओं का व्यवहार। ये प रणाम सीधे भारत म बनने वाली बेहतर दवाइय ,
बेहतर ऊजा भंडारण एवं सुदृढ़ मश्र धातुओं म काम आते ह।

यह क जए: ुव पर एक पृष्ठ का ववरण तैयार क जए। पता लगाइए — (i) यह कस वष पूण क्षमता पर पहुँचा,
(ii) इसक तापीय श क्त MW म कतनी है, (iii) इसम ईंधन, मंदक एवं शीतलक क्या ह, तथा (iv) वष 1956 म
आरंभ हुए BARC के उस छोटे रएक्टर का नाम क्या था जो इससे पहले बना। BARC एवं परमाणु ऊजा वभाग क
वेबसाइट इसके लए वश्वसनीय ोत ह।

यह क्य महत्त्वपूण है: भारतीय परमाणु कायक्रम के जनक होमी जहाँगीर भाभा का तक था क कसी दे श के पास
अपने अनुसंधान उपकरण स्वयं के होने चा हए, उधार के नह । ुव जैसे रएक्टर का अथ है क भारतीय वैज्ञा नक
न्यूट्रॉन प्रयोग वदे श म समय मलने क प्रतीक्षा कए बना अपने ही दे श म कर सकते ह।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 149

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as e
कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर
a g l AglaSem · NCERT Solutions

8.4 तत्व के प्रतीक
co m
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m as
सो चए और बताइए

.co a g l
a s em क जए क आप एक वै ा नक ह और आपने एक नया तत्व खोजा है। उसका नाम अपने नाम पर र खए
gl
कल्पना
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प्र.8
और सद्ध क जए क आपने उसके लए जस प्रतीक का चयन कया वह आई.यू.पी.ए.सी. के नयम का पालन

m
करता है।

. co ag
se m
l a
gना दया गया है जससे आप तक क व ध ले सकते ह।
यह उत्तर आपको स्वयं गढ़ना है, अतः यहाँ एक a
नमू

m
नमूना उत्तर: म अपने नाम पर इस तत्व का नाम आनं दयम रखता हूँ और इसका प्रतीक An चुनता हूँ।

co
se m.
अध्याय म दए आई.यू.पी.ए.सी. नयम के अनुसार औ चत्य —

om l a
नयम .c
em agकरता है?
s
क्या ‘AN’ इसका पालन

a
glपतीक नाम का पथम अक्षर अथवा पथम दो अक्षर हो
a हाँ — Anandium (आनंिदयम )

m a s
.co agl
पथम अक्षर बड़ा, ि तीय अक्षर (यिद हो) छोटा हाँ — A बड़ा, n छोटा। न AN, न an

se m
पतीक पहले से िकसी तत्व का न हो
g l a जाँच िलया — ात 118 तत्वों में से िकसी का पतीक An नही ं है

a
िकसी व्यिक्त के नाम पर रखे तत्वों का नाम -ium पर समाप्त होता है ◌
हाँ — आनंद + ि यम = आनंिदयम , जैसे क्यूिरयम एवं आइंस्टीिनयम

co m
m .
e
य द ‘An’ पहले से प्रयोग म होता तो तीसरा आई.यू.पी.ए.सी. नयम तीय अक्षर के ान पर नाम के कसी बाद वाले अक्षर क

m l as
.co
अनुम त दे ता है — जैसे Ad (आनदि◌यम से) अथवा Am। क्लोरीन को Cl और जक को Zn ठ क इसी नयम से मला है।
a g
a s eसंmकेत: आई.यू.पी.ए.सी. — 'शुद्ध और अनुप्रयुक्त रसायन वज्ञान का अंतरा ीय संघ' — वह सं ा है जो वास्तव म
a gl
m
नाम एवं प्रतीक को स्वीकृ त दे ती है। वास्त वक तत्व के नाम ान (पोलो नयम, नहो नयम), वैज्ञा नक (बो रयम,

a se
com l
माइटने रयम) अथवा गुणधम पर रखे जाते ह, और कसी जी वत व्य क्त के स्वयं के अनुरोध पर कसी तत्व का नाम
. a g
m
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नह रखा जाता।

agl

co m
.
प्र.9 य द सभी वै ा नक एक तत्व के लए भन्न- भन्न प्रतीक का उपयोग करते तो क्या समस्याएँ उत्पन्न हो सकती थ ?

se m
उत्तरc o m g l a
m . a
a se तब रसायन वज्ञान एक साझा भाषा नह रह जाता, और त्रु टयाँ प्रत्येक गणना के पहले ही चरण से आरंभ हो जात ।
agl c
सूत्र सं दग्ध हो जाते। य द एक रसायनज्ञ सो डयम के लए Na लखे और दूसरा S, तो 'SO' का अथ सो डयम ऑक्साइड भी
m .
m a s e
co agl
हो सकता है और सल्फर मोनोऑक्साइड भी। कागज़ दे खकर यह तय करना असंभव है।

m .
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समीकरण न संतु लत कए जा सकते, न जाँचे जा सकते, अतः प रणाम को दोहराया नह जा सकता — और पुनरावृ त्त-

g l as
योग्यता ही कसी दावे को वैज्ञा नक बनाती है।
a
संख्यात्मक काय गलत हो जाता। सल्फर (द्रव्यमान ≈ 32 u) को सो डयम (≈ 23 u) समझ ली जए और प्रयोग क प्रत्येक

m
द्रव्यमान गणना गलत हो जाएगी।

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em
m l as
.co a g
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

भाषा क बाधा लौट आती। आयरन को हद म लोहा, च म fer और जमन म Eisen कहते ह — परंतु प्रतीक सवत्र Fe है।
एक ही प्रतीक के कारण चेन्नई का रसायनज्ञ जापान का शोध-पत्र पढ़ सकता है।
सुरक्षा पर संकट आता। रसायन के ड्रम, दवा के लेबल अथवा कारखाने के सूचना-पट को कोई भी प्र श क्षत व्य क्त तत्काल
और बना कसी संदेह के पढ़ सकना चा हए।

ऐसा क्य होता है: प्रतीक कोई सजावट नह , वह एक ऐसा आँकड़ा है जो आगे गणना म उपयोग होता है। उसका
मानक करण ठ क वैसा ही आवश्यक है जैसा SI मात्रक का। इसी लए तत्व का नामकरण अलग-अलग वैज्ञा नक
पर न छोड़कर एक अंतरा ीय सं ा, आई.यू.पी.ए.सी., को स पा गया।

क्या आप जानते ह? वष 1803 म डाल्टन के चत्रात्मक प्रतीक — हाइड्रोजन के लए बदु वाला वृत्त, काबन के
लए भरा वृत्त — मानक बनाने का सच्चा प्रयास थे, परंतु उन्ह छापना और याद रखना क ठन था। बज लयस ने वष
1813 म इनके ान पर लै टन नाम से लए गए अक्षर रखे, और वही पद्ध त आज भी चल रही है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 150
8.5 परमाणु क्रमांक

प्र.1 क्या अब आप यह कह सकते ह क भन्न- भन्न परमाणु क्रमांक के तत्व एक-दूसरे से भन्न होते ह अथात परमाणु
क्रमांक कसी तत्व क व शष्ट पहचान होती है?

हाँ। परमाणु क्रमांक Z कसी तत्व क व शष्ट पहचान है, और भन्न Z वाले दो परमाणु सदै व भन्न तत्व होते ह।

Z = 1 → हाइड्रोजन; Z = 2 → ही लयम; Z = 11 → सो डयम। Z = 11 वाला कोई दूसरा तत्व है ही नह ।
कोई और संख्या ऐसा नह करती। द्रव्यमान संख्या तत्व क पहचान नह है — 40Ar, 40K एवं 40Ca तीन क A = 40 है
परंतु तीन भन्न तत्व (समभा रक) ह।
न्यूट्रॉन क संख्या भी पहचान नह है — 126C, 136C एवं 146C म 6, 7 एवं 8 न्यूट्रॉन ह और तीन काबन ह (सम ा नक)।

ऐसा क्य होता है: उदासीन परमाणु म इलेक्ट्रॉन क संख्या प्रोटॉन के बराबर होती है, अतः Z इलेक्ट्रॉन क संख्या
तय करता है। इलेक्ट्रॉन क संख्या इलेक्ट्रॉ नक वन्यास तय करती है और वही संयोजकता इलेक्ट्रॉन क संख्या —
और रसायन वज्ञान संयोजकता इलेक्ट्रॉन से तय होता है। Z बद लए तो रसायन बदल जाता है; केवल न्यूट्रॉन
बद लए तो रसायन वही रहता है।

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प्र.2 चत्र 8.10 का अवलोकन क जए। ली थयम के परमाणु म कतने न्यूट्रॉन एवं प्रोटॉन वद्यमान होते ह तथा इसका
परमाणु क्रमांक क्या है?

लीिथयम धातु
का टुकड़ ा

लीिथयम परमाणु

लीिथयम
परमाणु नािभक

इलेक्टॉन

न्यूटॉन एवं
पोटॉन

चत्र 8.10 — ना भक म न्यूट्रॉन और प्रोटॉन।

चत्र 8.10 म बड़ा करके दखाए गए ना भक को दे खने पर ली थयम के ना भक म 3 प्रोटॉन (लाल गोले) एवं 4 न्यूट्रॉन (हरे गोले) ह
— कुल 7 न्यू क्लऑन। इसके चार ओर तीन इलेक्ट्रॉन ग त करते दशाए गए ह।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

पोटॉनों की संख्या = 3

न्यूट ॉनों की संख्या = 4

परमाणु क्रमांक , Z = पोटॉनों की संख्या = 3

द व्यमान संख्या, A = p+ + n0 = 3 + 4 = 7

संके तन: 73Li

यह ता लका 8.3 से मेल खाता है, जसम ली थयम के लए 3 प्रोटॉन, 4 न्यूट्रॉन एवं द्रव्यमान संख्या 7 द गई है। उदासीन होने के
कारण इसम 3 इलेक्ट्रॉन भी ह, जनका वन्यास K = 2, L = 1 है।

ऐसा क्य होता है: ध्यान द जए क चत्र 8.10 तीन बार आवधन करता है — ली थयम धातु के टु कड़े से, सटे हुए
ली थयम परमाणुओं तक, फर एक परमाणु तक, फर उसके ना भक तक। यही चत्र मन म र खए: ठोस धातु
परमाणुओं का समूह है और प्रत्येक परमाणु अ धकांशतः वह ान है जसे उसके 3 इलेक्ट्रॉन घेरते ह।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 150
8.6 द्रव्यमान संख्या

सो चए और बताइए

प्र.10 परमाणु क्रमांक 26 के कसी परमाणु म 56 न्यू क्लऑन ह। इसके इलेक्ट्रॉन , प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन क संख्या ात
क जए।

इलेक्ट्रॉन 26, प्रोटॉन 26, न्यूट्रॉन 30। यह तत्व आयरन है, 5626Fe।

सूत्र: Z = प्रोटॉन क संख्या = इलेक्ट्रॉन क संख्या (उदासीन परमाणु); न्यू क्लऑन = A = p+ + n0, अतः n0 = A – Z।

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िदया है: Z = 26, A = 56 न्यूिक्लऑन

पोटॉनों की संख्या = Z = 26

इलेक्टॉनों की संख्या = Z = 26 (परमाणु उदासीन है)

न्यूट ॉनों की संख्या = A – Z

= 56 – 26

= 30

ऐसा क्य होता है: 'न्यू क्लऑन' का अथ है प्रोटॉन और न्यूट्रॉन, दोन मलाकर — अतः 56 द्रव्यमान संख्या है,
न्यूट्रॉन क संख्या नह । Z ज्ञात होते ही प्रोटॉन एवं इलेक्ट्रॉन दोन ज्ञात हो जाते ह; A म से Z घटाने पर न्यूट्रॉन बचते
ह।

स्वयं जाँ चए: 26 + 30 = 56 ✓, और यह आयरन का सबसे प्रचुर सम ा नक है — वही धातु जो प्रत्येक रेल
पटरी म और आपके रक्त के प्रत्येक हीमोग्लो बन अणु म है।

प्र.11 एक परमाणु के ना भक म 20 प्रोटॉन ह। य द उसक द्रव्यमान संख्या 41 है तो उसम न्यूट्रॉन क संख्या ात
क जए।

21 न्यूट्रॉन।

सूत्र: द्रव्यमान संख्या A = प्रोटॉन क संख्या + न्यूट्रॉन क संख्या, अतः n0 = A – p+।

िदया है: p+ = 20, A = 41

n0 = A – p+

= 41 – 20

= 21 न्यूट ॉन

Z = 20 होने से यह तत्व कै ल्सयम है, अतः यह परमाणु 4120Ca है। इसम 20 इलेक्ट्रॉन भी ह जनका वन्यास 2, 8, 8, 2 है।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर
a g l AglaSem · NCERT Solutions

क्या आप जानते ह? साधारण कै ल्सयम 4020Ca है जसम 20 न्यूट्रॉन होते ह। 4120Ca उसका एक सम
. comा नक
e m
m l as
.co
है — वही Z, एक अ त रक्त न्यूट्रॉन, अतः रसायन वही परंतु द्रव्यमान थोड़ा अ धक।
a g
se m
g l a
a
एक परमाणु म 18 न्यूट्रॉन ह और उसका परमाणु क्रमांक 17 है। इसक द्रव्यमान संख्या क्या होगी?
m
प्र.12

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g l as
द्रव्यमान संख्या = 35। a
m
सूत्र: A = प्रोटॉन क संख्या + न्यूट्रॉन क संख्या, तथा प्रोटॉन क संख्या = Z।
co
em.
m l as
.co
िदया है: Z = 17, अतः p+ = 17; n0 = 18
m a g
l a se
a g
A = p+ + n 0
m a s
.co agl
= 17 + 18
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= 35
g l a
a
Z = 17 से यह तत्व क्लोरीन है, अतः यह परमाणु 3517Cl है — क्लोरीन के दो प्राकृ तक सम
co m
ा नक म से अ धक प्रचुर, जो

m .
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समस्त क्लोरीन परमाणुओं का लगभग 75% है।
m l
.co a g
a s em ऐसा क्य होता है: द्रव्यमान संख्या केवल न्यू क्लऑन गनती है। 17 इलेक्ट्रॉन इसम नह जोड़े जाते क्य क

ag l इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटॉन के लगभग 1/1836 भाग के बराबर है — इस हसाब म नगण्य।
se m
com g l a
m . a
ase
agl
प्र.13 एक परमाणु म 11 इलेक्ट्रॉन ह। इसम न्यूट्रॉन क संख्या ात क जए।

co m

m .
e
12 न्यूट्रॉन — यह मानकर क परमाणु क द्रव्यमान संख्या 23 है।

m l as
.co a g
m पहले यह ध्यान द जए: इस प्रश्न म द्रव्यमान संख्या आवश्यक है। अंग्रेज़ी संस्करण म यह परमाणु A लखा है,
s e
23

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agl अथात A = 23। हद संस्करण क छपाई म यह ऊपरी अंक 23 छू ट गया है, इस लए प्रश्न अधूरा दखता है। अंग्रेज़ी
c
पुस्तक के अनुसार A = 23 लेकर हल नीचे दया गया है।
m .
m a s e
e m . co
संकेतन पढ़ना: AZX म ऊपर लखी संख्या द्रव्यमान संख्या होती है, अतः A = 23। परमाणु उदासीन है, अतः प्रोटॉन क संख्या agl
g l as
a
इलेक्ट्रॉन क संख्या के बराबर है।

co m
m .
m ase
.co


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इलेक्टॉनों की संख्या = 11

⇒ पोटॉनों की संख्या, Z = 11 (उदासीन परमाणु)

द व्यमान संख्या, A = 23

न्यूट ॉनों की संख्या = A – Z

= 23 – 11

= 12 न्यूट ॉन

Z = 11 से तत्व क पहचान सो डयम के रूप म होती है, अतः यह 2311Na है। इसका इलेक्ट्रॉ नक वन्यास 2, 8, 1 है — एक
संयोजकता इलेक्ट्रॉन, इसी लए सो डयम इतनी अ भ क्रयाशील धातु है।

संकेत: यहाँ 'A' कसी वास्त वक तत्व का प्रतीक नह , अज्ञात तत्व के लए रखा गया अक्षर मात्र है। प्रश्न यह जाँच
रहा है क क्या आप इलेक्ट्रॉन क संख्या से Z नकाल सकते ह।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 151
8.7 व भन्न ऊजा स्तर म इलेक्ट्रॉन कस प्रकार वत रत होते ह?

प्र.1 ही लयम परमाणु म दो इलेक्ट्रॉन और ना भक म दो प्रोटॉन होते ह। इसके परमाणु कोश म ये दो इलेक्ट्रॉन कस
प्रकार व्यव त ह गे?

दोन इलेक्ट्रॉन K-कोश म ही जाएँगे: ही लयम का वन्यास केवल 2 है।
नयम: कसी कोश म अ धकतम 2n² इलेक्ट्रॉन समा सकते ह, और कोश भीतर से बाहर क ओर भरे जाते ह।

K-कोश के िलए n = 1

अिधकतम इलेक्टॉन = 2n²

= 2 × 1²

=2

हीिलयम में 2 इलेक्टॉन है ं और K-कोश में ठीक 2 समा सकते है ं

⇒ He का िवन्यास = 2, L-कोश िरक्त

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

अतः ही लयम का एकमात्र कोश पूणतः भरा है। यही कारण है क ही लयम रासाय नक रूप से अ क्रय है — उसके पास न कुछ
त्यागने को है, न ग्रहण करने को, न साझा करने को। प्रथम कोश के लए 2 इलेक्ट्रॉन ( क) वही भू मका नभाते ह जो आगे के
कोश के लए अष्टक नभाता है।

ऐसा क्य होता है: इलेक्ट्रॉन पहले सबसे कम ऊजा वाला उपलब्ध स्तर भरते ह, और K-कोश ना भक के सबसे
नकट तथा न्यूनतम ऊजा वाला है। जब K म ान शेष है तो दूसरे इलेक्ट्रॉन के L-कोश म जाने का कोई कारण नह ।

स्वयं जाँ चए: ली थयम म 3 इलेक्ट्रॉन ह। K-कोश 2 लेकर भर जाता है, अतः तीसरे को L-कोश आरंभ करना ही
पड़ता है — वन्यास 2, 1। वही एक बाहरी इलेक्ट्रॉन ली थयम को अ भ क्रयाशील धातु बनाता है, जब क उससे
ठ क पहले वाला ही लयम ऐसी गैस है जो कसी से अ भ क्रया नह करती।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 152
8.7.1 परमाणुओं का नमाण प्रक्रम

सो चए और बताइए

प्र.14 नम्न ल खत तत्व के बाह्यतम कोश म इलेक्ट्रॉन क संख्या पहचा नए। (i) ¹²₆C (ii) ¹⁹₉F (iii) ²⁸₁₄Si

(i) 4 (ii) 7 (iii) 4।

व ध: AZX म नीचे लखी संख्या परमाणु क्रमांक Z है, जो उदासीन परमाणु म इलेक्ट्रॉन क संख्या के बराबर होती है। अब K, L,
M कोश को क्रम से भ रए — अ धकतम 2n², और बाह्यतम कोश म 8 से अ धक नह ।

परमाणु Z = इलेक्ट्रॉन K (अ ध. 2) L (अ ध. 8) M बाह्यतम कोश

(i) 126C 6 2 4 – L, िजसमें 4 इले क्टॉन

(ii) 199F 9 2 7 – L, िजसमें 7 इले क्टॉन

(iii) 2814Si 14 2 8 4 M, िजसमें 4 इले क्टॉन

स लकॉन म क्रम जाँ चए: K म 2, फर M आरंभ होने से पहले L का पूरा भरना (8) आवश्यक है, अतः M-कोश के लए 14 – 2 –
8 = 4 इलेक्ट्रॉन बचते ह।

ऐसा क्य होता है: यहाँ ऊपर लखी द्रव्यमान संख्या क कोई भू मका नह है। इलेक्ट्रॉन केवल Z से गने जाते ह,
अतः 12C और 14C का बाह्यतम कोश बल्कुल एक जैसा है — और ठ क इसी कारण सम ा नक के रासाय नक
गुणधम समान होते ह।

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संकेत: काबन एवं स लकॉन दोन के बाह्यतम कोश म 4 इलेक्ट्रॉन ह और दोन चार बंध बनाते ह। यही पा रवा रक
समानता उन्ह आवत सारणी के एक ही समूह म रखती है।

प्र.15 ऐसे तत्व जनके परमाणु क्रमांक 12, 16 और 18 ह, का इलेक्ट्रॉ नक वन्यास ल खए।

Z = 12 → 2, 8, 2 | Z = 16 → 2, 8, 6 | Z = 18 → 2, 8, 8।
प्रयुक्त नयम: कसी कोश म अ धकतम इलेक्ट्रॉन = 2n²; बाह्यतम कोश म अ धकतम 8; भरने का क्रम K → L → M।

क्षमताएँ: K (n = 1) = 2 × 1² = 2 L (n = 2) = 2 × 2² = 8 M (n = 3) = 2 × 3² = 18

Z = 12 (मैग् नीिशयम): K के बाद 12 – 2 = 10 शेष; L के बाद 10 – 8 = 2 शेष → K 2, L 8, M 2 = 2, 8,

2

Z = 16 (सल्फर): 16 – 2 = 14; 14 – 8 = 6 → K 2, L 8, M 6 = 2, 8, 6

Z = 18 (आगन ): 18 – 2 = 16; 16 – 8 = 8 → K 2, L 8, M 8 = 2, 8, 8

आगन को ध्यान से दे खए। M-कोश म 18 इलेक्ट्रॉन समा सकते ह, परंतु यहाँ यह बाह्यतम कोश है, और बाह्यतम कोश क सीमा 8
है। अतः भरना 8 पर रुक जाता है — जससे आगन को पूण अष्टक मल जाता है और वही उसे अ क्रय उत्कृष्ट गैस बनाता है।

Z तत्व वन्यास संयोजकता इलेक्ट्रॉन संयोजकता

12 मैग्नी शयम 2, 8, 2 2 2 (2 त्यागता है)

16 सल्फर 2, 8, 6 6 2 (2 ग हण करता है)

18 आगन 2, 8, 8 8 0 (अष्टक पूण)

प्र.16 इस पहेली को हल क जए — म एक ऐसा परमाणु ँ जसक द्रव्यमान संख्या 23 और प्रोटॉन क संख्या 11 है।
म एक नरम धातु ँ और जल के साथ तीव्रता से अ भ क्रया करती ँ। म कौन ँ और मेरे पास कतने न्यूट्रॉन ह?
आप भी इसी प्रकार क एक पहेली बना सकते ह।

म सो डयम ,ँ 2311Na, और मेरे पास 12 न्यूट्रॉन ह।

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पोटॉनों की संख्या = 11 ⇒ परमाणु क्रमाक
ं Z = 11
Z = 11 से तत्व की पहचान सोिडयम (Na) के रूप में होती है

न्यूट ॉनों की संख्या = A – Z

= 23 – 11

= 12 न्यूट ॉन

क्या संकेत मेल खाते ह? सो डयम का वन्यास 2, 8, 1 है — एक ही संयोजकता इलेक्ट्रॉन, जो श थल रूप से बँधा है। वह इसे
बहुत सरलता से त्याग दे ता है, इसी लए सो डयम एक नरम धातु है जो जल के साथ तीव्रता से अ भ क्रया कर हाइड्रोजन गैस मुक्त
करती है। दोन संकेत मेल खाते ह।
आपक अपनी नमूना पहेली:

यह क जए: “मेरा परमाणु क्रमांक 17 है और मेरे पास 18 न्यूट्रॉन ह। म हरी-पीली गैस हूँ, मुझे अपना अष्टक पूण
करने के लए केवल एक इलेक्ट्रॉन चा हए, और मेरी थोड़ी-सी मात्रा पेयजल को सुर क्षत बनाने के लए मलाई जाती
है। म कौन हूँ और मेरी द्रव्यमान संख्या क्या है?”

उत्तर: क्लोरीन। A = 17 + 18 = 35, अतः 3517Cl; वन्यास 2, 8, 7; संयोजकता 1।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 153
8.8 परमाणु क संयोजन क्षमता — संयोजकता

प्र.1 NH₃ (अमो नया) और MgCl₂ (मैग्नी शयम क्लोराइड) म नाइट्रोजन और मैग्नी शयम क संयोजन क्षमताएँ
क्रमशः क्या ह गी?

नाइट्रोजन: 3। मैग्नी शयम: 2।
नयम: कसी तत्व क संयोजन क्षमता हाइड्रोजन अथवा क्लोरीन के उन परमाणुओं क संख्या है जो उसके एक परमाणु के साथ
संयो जत होते ह — क्य क हाइड्रोजन और क्लोरीन दोन क संयोजन क्षमता एक है।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
em.
NH3 में: N का एक परमाणु 3 H परमाणुओ ं से संयोिजत होता है
m l as
m .co
⇒ नाइटोजन की संयोजन क्षमता = 3
a g
l a se
g
aMgCl में: Mg का एक परमाणु 2 Cl परमाणुओ ं से संयोिजत होता है
2

co m
⇒ मैग् नीिशयम की संयोजन क्षमता = 2
m . ag
l a se
agका उत्तर एक ही आना चा हए:
इलेक्ट्रॉ नक वन्यास से मलान — दोन व धय

co mसंयोजकता
m.
तत्व वन्यास संयोजकता इलेक्ट्रॉन अष्टक पूण करने के लए

m as e
.co
नाइटोजन (Z = 7) 2, 5 5 3 और चा हए
a g l 3 ✓
se m
g l a ✓
a
मैग्नीिशयम (Z = 12) 2, 8, 2 2 बाह्यतम 2 इलेक्ट्रॉन त्यागता है 2

m a s
c o agl
ऐसा क्य होता है: कसी यौ गक का सूत्र मनमाना नह होता — वह इस बात से तय होता है क
.
ायी अष्टक तक

s e m ग्रहण, त्याग अथवा साझा करने ह। नाइट्रोजन म 8 से 3
पहुँचने के लए प्रत्येक परमाणु को कतने इलेक्ट्रॉन

a g
इलेक्ट्रॉन कम ह, अतः वह तीन हाइड्रोजनlaपरमाणुओं से साझेदारी करता है। मैग्नी शयम के पास ायी कोश से 2
इलेक्ट्रॉन अ धक ह, अतः वह एक-एक इलेक्ट्रॉन दो क्लोरीन परमाणुओं को दे दे ता है, जनम से प्रत्येक को एक क
कमी थी।
co m
m .
m as e
.co a g l
a s em क्या आप पूवानुमान लगा सकते ह क उन परमाणुओं के साथ क्या होता है जनके बाह्यतम कोश म पहले से ही
agl
प्र.2
आठ इलेक्ट्रॉन उप त होते ह (उन तत्व के परमाणुओं को छोड़कर जनम केवल एक ही कोश होता है और
उसम केवल दो इलेक्ट्रॉन ही संभव ह)? क्या वे तब भी इलेक्ट्रॉन त्यागने अथवा ग्रहण करने का प्रयास करगे?
se m
com g l a
m . a
ase
agl

नह । वे वैसे ही बने रहते ह। ऐसे परमाणु पहले से ही ायी ह, अतः वे लगभग पूणतया अन भ क्रय होते ह।

m
पूण अष्टक वही व्यव ा है जस तक पहुँचने के लए अन्य सभी परमाणु इलेक्ट्रॉन त्यागते, ग्रहण करते अथवा साझा करते ह।

. co
m
जस परमाणु के पास वह पहले से है, उसके पास बदलने का कोई कारण नह ।

o m l a se
पूण बाह्यतम कोश वाले तत्व उत्कृष्ट गैस ह — नऑन (2, 8), आगन (2, 8, 8) इत्या द। ही लयम वह अपवाद है जसका
.cउल्लेख प्रश्न म है: उसम केवल एक कोश है और 2 इलेक्ट्रॉन उसे भर देते ह, अतःagही लयम के लए क ही पूणता है।
m इनक संयोजकता 0 होती है। ये सामान्यतः यौ गक नह बनात और प्रकृ त म अणुओं के रूप म नह , अलग-अलग एकल
l a se
ag
.c
परमाणुओं के रूप म रहती ह।

s e m
m a
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 29 of 59

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: पू छए क बदलने से परमाणु को मलेगा क्या। भरे हुए कोश से इलेक्ट्रॉन त्यागने का अथ है एक
ायी व्यव ा को तोड़ना — इसम बहुत अ धक ऊजा लगती है। इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने का अथ है ना भक से कह
दूर एक बल्कुल नया कोश आरंभ करना, जहाँ आकषण क्षीण है। दोन ही तय म परमाणु पहले से कम ायी
हो जाता, अतः दोन म से कुछ नह होता।

क्या आप जानते ह? 'लगभग' अन भ क्रय, पूणतः नह । अत्यंत वशेष प र तय म रसायनज्ञ ने ज़ीनॉन के
यौ गक, जैसे XeF₄, बनाए ह। आपक कक्षा के स्तर पर अष्टक नयम एक बहुत अच्छा मागदशक है, और अध्याय
स्वयं बताता है क कुछ यौ गक इसका उल्लंघन करते प्रतीत होते ह — उन्ह आप उच्च कक्षाओं म पढ़गे।

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प्र.3 ता लका 8.4 का अवलोकन क जए। इसम एक कॉलम और जो ड़ए और प्रत्येक तत्व क सामान्य संयोजकता
ल खए।

तत्व का प्रतीक परमाणु प्रोटॉन न्यूट्रॉन इलेक्ट्रॉन इलेक्ट्रॉन का वतरण
नाम क्रमांक क क क संख्या
संख्या संख्या K L M N

हाइडोजन H 1 1 - 1 1 - - -

हीिलयम He 2 2 2 2 2 - - -

लीिथयम Li 3 3 4 3 2 1 - -

बेिरिलयम Be 4 4 5 4 2 2 - -

बोरॉन B 5 5 6 5 2 3 - -

काबन C 6 6 6 6 2 4 - -

नाइटोजन N 7 7 7 7 2 5 - -

ऑ क्सीजन O 8 8 8 8 2 6 - -

फ्लुओ रीन F 9 9 10 9 2 7 - -

िनऑन Ne 10 10 10 10 2 8 - -

सोिडयम Na 11 11 12 11 2 8 1 -

मैग्नीिशयम Mg 12 12 12 12 2 8 2 -

ऐलुिमिनयम Al 13 13 14 13 2 8 3 -

िसिलकॉन Si 14 14 14 14 2 8 4 -

फॉस्फोरस P 15 15 16 15 2 8 5 -

स ल्फर S 16 16 16 16 2 8 6 -

क्लोरीन Cl 17 17 18 17 2 8 7 -

आग न Ar 18 18 22 18 2 8 8 -

ता लका 8.4 — प्रथम अठारह तत्व के परमाणुओं के प्रतीक, परमाणु क्रमांक, प्रोटॉन क संख्या, न्यूट्रॉन क संख्या,
इलेक्ट्रॉन क संख्या और इलेक्ट्रॉन का वतरण (पृष्ठ 152)।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

अ त रक्त कॉलम स हत ता लका 8.4 नीचे द गई है। नयम: य द संयोजकता कोश म 4 से कम इलेक्ट्रॉन ह तो परमाणु उन्ह
त्यागता है; 4 से अ धक ह तो 8 तक पहुँचने के लए आवश्यक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है; ठ क 4 ह तो साझा करता है। संयोजकता
उन्ह त्यागे, ग्रहण कए अथवा साझा कए गए इलेक्ट्रॉन क संख्या है।

तत्व प्रतीक Z वन्यास संयोजकता इलेक्ट्रॉन त्याग / ग्रहण / साझा संयोजकता

हाइडोजन H 1 1 1 1 साझा अथवा त्याग 1

हीिलयम He 2 2 2 क पूण 0

लीिथयम Li 3 2, 1 1 1 त्यागता है 1

बेिरिलयम Be 4 2, 2 2 2 त्यागता है 2

बोरॉन B 5 2, 3 3 3 त्यागता / साझा करता है 3

काबन C 6 2, 4 4 4 साझा करता है 4

नाइटोजन N 7 2, 5 5 3 ग्रहण करता है 3

ऑक्सीजन O 8 2, 6 6 2 ग्रहण करता है 2

फ्लुओ रीन F 9 2, 7 7 1 ग्रहण करता है 1

िनऑन Ne 10 2, 8 8 अष्टक पूण 0

सोिडयम Na 11 2, 8, 1 1 1 त्यागता है 1

मैग्नीिशयम Mg 12 2, 8, 2 2 2 त्यागता है 2

ऐलुिमिनयम Al 13 2, 8, 3 3 3 त्यागता है 3

िसिलकॉन Si 14 2, 8, 4 4 4 साझा करता है 4

फॉस्फोरस P 15 2, 8, 5 5 3 ग्रहण / साझा करता है 3

सल्फर S 16 2, 8, 6 6 2 ग्रहण करता है 2

क्लोरीन Cl 17 2, 8, 7 7 1 ग्रहण करता है 1

आगन Ar 18 2, 8, 8 8 अष्टक पूण 0

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: संयोजकता वाले कॉलम को ऊपर से नीचे प ढ़ए और एक प्र तरूप दखाई दे गा — 1, 0, 1, 2,
3, 4, 3, 2, 1, 0, फर 1, 2, 3, 4, 3, 2, 1, 0। यह 4 तक बढ़ता है, फर घटता है, और नऑन के बाद स्वयं को
दोहराता है। यही पुनरावृ त्त आवत सारणी का बीज है: समान संयोजकता वाले तत्व (Li और Na; Be और Mg; F
और Cl) इस लए एक जैसा व्यवहार करते ह क्य क उनके संयोजकता इलेक्ट्रॉन क संख्या समान है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 154
8.9.1 सम ा नक

प्र.1 क्या आप अनुमान लगा सकते ह क इनम से प्रत्येक सम ा नक म कतने इलेक्ट्रॉन होते ह?

प्रत्येक म एक इलेक्ट्रॉन। प्रो टयम, ूट रयम एवं ट्राइ टयम — तीन म ठ क 1 इलेक्ट्रॉन होता है।

सम ा नक संकेतन प्रोटॉन न्यूट्रॉन द्रव्यमान संख्या A इलेक्ट्रॉन

पोिटयम (~99.98%) 1 H 1 0 1 1
1

ड ूटीिरयम (~0.015%) 2 H 1 1 2 1
1

टाइिटयम (अल्प मात्रा में) 3 H 1 2 3 1
1

तक: तीन हाइड्रोजन ह, अतः तीन के लए Z = 1। उदासीन परमाणु म इलेक्ट्रॉन क संख्या प्रोटॉन के बराबर होती है, अतः प्रत्येक
म 1 इलेक्ट्रॉन है, जो K-कोश म रहता है।

ऐसा क्य होता है: ठ क इसी कारण सम ा नक के रासाय नक गुणधम समान होते ह। रसायन संयोजकता
इलेक्ट्रॉन से तय होता है, और तीन का वन्यास एक ही है — '1'। ये केवल न्यूट्रॉन क संख्या म भन्न ह, जससे
द्रव्यमान बदलता है — अतः इनके भौ तक गुणधम, जैसे क्वथनांक एवं गलनांक, थोड़े भन्न होते ह।

क्या आप जानते ह? प्रो टयम के ान पर ूट रयम से बने जल को भारी जल, D₂O, कहते ह। यह रासाय नक
रूप से जल ही है, परंतु लगभग 10% अ धक सघन है और 0 °C के बजाय 3.8 °C पर जमता है। काकरापार एवं
कैगा जैसे भारतीय ना भक य रएक्टर म मंदक के रूप म भारी जल का उपयोग होता है।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 156

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर
a g l AglaSem · NCERT Solutions

क. औसत परमाणु द्रव्यमान
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em.
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सो चए और बताइए

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a s emदो भन्न परमाणुओं जसम से प्रत्येक म 11 प्रोटॉन ह परंतु एक म 12 न्यूट्रॉन ह और दूसरे म 13 न्यूट्रॉन ह,
gl
आप
a
प्र.17
के परमाणु क्रमांक और द्रव्यमान संख्याओं क तुलना कस प्रकार से करगे? क्या वे एक ही तत्व के परमाणु ह

m
अथवा भन्न तत्व के?

. co ag
se m
l a
ag— दोन एक ही तत्व (सो डयम) के परमाणु ह और परस्पर सम ा नक ह।

परमाणु क्रमांक समान, द्रव्यमान संख्याएँ भन्न

co m
परमाणु क्रमांक Z = पोटॉनों की संख्या
em.
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पहला परमाणु: Z = 11
m
दू सरा परमाणु: Z = 11 → समान
a g
l a se
a g
द व्यमान संख्या A = p+ + n0
m a s
पहला परमाणु: A = 11 + 12 = 23 → 2311Na
m .co agl
l a se
दू सरा परमाणु: A = 11 + 13 = 24 → 2411Na
a g
→ िभ न्न, 1 का अंत र
co m
m .
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omक प रभाषा है। l
दोन म Z = 11 है, और Z ही तत्व क पहचान नधा रत करता है, अतः दोन सो डयम ह। समान Z और भन्न A — यही
सम .ा cनक a g
a s em
agl ऐसा क्य होता है: दोन परमाणु उदासीन ह, अतः दोन म 11 इलेक्ट्रॉन ह जनका वन्यास 2, 8, 1 है। संयोजकता

se m
om है, जो भौ तक गुणधम म दखता है, रासाय नक म नह । a
कोश एक जैसा ⇒ रसायन एक जैसा। दोन नरम धातुएँ ह जो जल से तीव्रता से अ भ क्रया करती ह। अ त रक्त
न्यूट्रॉन दूसरे परमाणु को लगभग 4% भारी भर.cबनाता
a g l
a s em
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स्वयं जाँ चए: य द एक परमाणु म 11 प्रोटॉन और दूसरे म 12 होते तो उत्तर बदल जाता? हाँ, पूरी तरह — 11
प्रोटॉन सो डयम है और 12 मैग्नी शयम। भन्न तत्व, और वे सम ा नक होते ही नह ।
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m as e
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a s emप्र.18
gl
य द ोमीन परमाणु दो सम ा नक , ⁷⁹₃₅Br (49.7%) और ⁸¹₃₅Br (50.3%) के रूप म उपलब्ध होता है तो
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.
ोमीन परमाणु के भा रत औसत द्रव्यमान क गणना क जए।

s e m
m a
m . co agl

ase
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ोमीन का औसत परमाणु द्रव्यमान ≈ 80.01 u, अथात लगभग 80 u।
सूत्र (भा रत औसत): a g

co m
m .
m as e
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

औसत परमाणु द व्यमान = (द व्यमान 1 × पितशत पचुरता1/100) + (द व्यमान 2 × पितशत पचुरता2/100)

मान रखने पर:

= (79 u × 49.7/100) + (81 u × 50.3/100)

= (79 × 49.7 + 81 × 50.3) ÷ 100 u

79 × 49.7 = 3926.3

81 × 50.3 = 4074.3

योग = 3926.3 + 4074.3 = 8000.6

औसत परमाणु द व्यमान = 8000.6 ÷ 100

= 80.006 u ≈ 80.01 u

दए गए आँकड़ क प रशुद्धता के अनुसार उ चत रूप से पूणा कत करने पर ≈ 80 u।

ऐसा क्य होता है: दोन सम ा नक लगभग बराबर मात्रा म ह (49.7% एवं 50.3%), अतः भा रत औसत 79 u
और 81 u के लगभग ठ क बीच म आता है — और वह बीच का मान 80 u है। 80 से थोड़ा अ धक इस लए आया
क्य क भारी सम ा नक ज़रा-सा अ धक प्रचुर है। इसक तुलना क्लोरीन से क जए, जहाँ प्रचुरता 75% एवं 25%
है, अतः औसत 35.5 u, 37 u क तुलना म 35 u के कह अ धक नकट है।

संकेत: ोमीन के कसी एक परमाणु का द्रव्यमान 80.01 u नह होता। प्रत्येक ोमीन परमाणु या तो 79 u का है
या 81 u का। औसत एक बड़े समूह का वणन करता है — 1000 ोमीन परमाणुओं म लगभग 497 79Br और
503 81Br होने क अपेक्षा क जाती है।

अभ्यास प्रश्न — पृष्ठ 158 – 160

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अध्याय के अंत के प्रश्न

अभ्यास प्रश्न

प्र.1 अरनेस्ट रदरफोड के स्वण प णका प्रयोग के संदभ म सही वकल्प का चयन क जए और सही एवं गलत
वकल्प का कारण समझाइए। (i) इस प्रयोग ने स्पष्ट रूप से ना भक म न्यूट्रॉन क उप त को दशाया। (ii)
इसके प रणाम ने प्लम पु डग मॉडल को गलत सद्ध कर दया और परमाणु के कद्र म ना भक होने क अवधारणा
को जन्म दया। (iii) कुछ अल्फा कण का अ धक वक्षेपण यह दशाता है क परमाणु का अ धकांश द्रव्यमान
और धन आवेश एक सूक्ष्म कद्र म सुसंकु लत है। (iv) जस प्रकार अल्फा कण वक्षे पत हुए उससे यह ात हुआ
क इलेक्ट्रॉन ना भक के चार ओर ग त करते ह।

सही वकल्प: (ii) एवं (iii)। गलत: (i) एवं (iv)।

वकल्प नणय कारण

(i) न्यूटॉनों की उपिस्थित गलत न्यूट्रॉन अनावे शत होते ह, अतः वे α-कण पर कोई रवैद्युत बल नह लगाते और प्रक णन प्रयोग
दश ई म दखाई ही नह दे सकते। न्यूट्रॉन क खोज 21 वष बाद, वष 1932 म जेम्स चैड वक ने क ।

(ii) प्लम पुिडंग गलत सही टॉमसन का एकसमान फैला धनावेश केवल अत्यंत सूक्ष्म वक्षेपण दे सकता था। बड़े कोण का
िसद्ध, नािभक की वक्षेपण एवं वापसी उस मॉडल म असंभव है, अतः मॉडल को जाना पड़ा — और उसके ान पर
अवधारणा सूक्ष्म, सघन, धनावे शत कद्र आया।

(iii) द व्यमान एवं धनावेश सही α-कण को बड़े कोण पर केवल वही लक्ष्य मोड़ सकता है जो अत्य धक आवे शत भी हो और α-कण
सूक्ष्म कें द में सुस ंकु िलत से कह भारी भी। चूँ क अ धकांश कण सीधे नकल गए, वह लक्ष्य परमाणु के आयतन के अ त
सूक्ष्म भाग म ही हो सकता है।

(iv) इले क्टॉनों की गित गलत यह प्रयोग इलेक्ट्रॉन के वषय म कुछ नह बताता। α-कण इलेक्ट्रॉन से लगभग 7300 गुना भारी
दश ई होता है, अतः माग म आने वाले इलेक्ट्रॉन उसका पथ लगभग नह बदलते। इलेक्ट्रॉन क व्यव ा
का ज्ञान बाद म बोर के स्पेक्ट्रम संबंधी काय से मला।

ऐसा क्य होता है: कोई प्रयोग केवल उसी के वषय म बता सकता है जससे उसक अन्योन्य क्रया होती है। α-कण
आवे शत एवं भारी ह, अतः वे संक द्रत आवेश एवं संक द्रत द्रव्यमान क टोह लेते ह — और कुछ नह ।

प्र.2 बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार नम्न ल खत म से कौन-से कथन सही अथवा गलत ह? प्रत्येक कथन के लए
एक कारण द जए। (i) इलेक्ट्रॉन न श्चत कक्षाओं म ग त करते हुए अपनी ऊजा का ास करते ह और धीरे-धीरे
ना भक म गर जाते ह। (ii) इलेक्ट्रॉन ना भक के चार ओर कह भी वद्यमान हो सकते ह और उनक ऊजा
न श्चत नह होती। (iii) इलेक्ट्रॉन ना भक के चार ओर न श्चत ऊजा क कक्षाओं म ऊजा ास कए बना चक्कर
लगाते ह। (iv) ना भक के चार ओर ग त करते हुए इलेक्ट्रॉन ऊजा स्तर के मध्य भी पाए जा सकते ह।

केवल (iii) सही है। (i), (ii) एवं (iv) गलत ह।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

कथन नणय कारण

(i) ऊज खोकर नािभक में गलत यह वही चरसम्मत पूवानुमान है जसे बोर ने अस्वीकार कया। रदरफोड के मॉडल म ऐसा
िगरते है ं होता, और यही वह असफलता है जसे सुधारने बोर आए। ायी अव ा म ऊजा र रहती
है।

(ii) कही ं भी, अिनिश्चत ऊज गलत बोर का मूल वचार इसका ठ क उल्टा है — इलेक्ट्रॉन केवल कुछ अनुमत कोश म ही रहते
के साथ ह, और प्रत्येक क ऊजा न त होती है। ऊजा क्वां टत है, मनमानी नह ।

(iii) िनिश्चत ऊज की कक्षाओं सही यह ठ क ायी अव ाओं क अ भधारणा है। कोश K, L, M, N (n = 1, 2, 3, 4) म से
में िबना ऊज ास के चक्कर प्रत्येक क ऊजा न त है और उसम ग तशील इलेक्ट्रॉन व करण नह करता।

(iv) ऊज स्तरों के मध्य भी पाए गलत दो कोश के बीच का ान अनुमत नह है। इलेक्ट्रॉन ठ क दोन स्तर के ऊजा-अंतर को
जाते है ं अवशो षत अथवा उत्स जत करके कोश बदलता है — वह या तो एक स्तर पर है या दूसरे पर,
बीच म कभी नह ।

ऐसा क्य होता है: ये चार कथन बोर ारा जोड़े गए दो वचार क जाँच-सूची ह — क केवल कुछ ऊजाएँ ही
अनुमत ह, और क अनुमत अव ा म इलेक्ट्रॉन व करण नह करता। कथन (i) दूसरे वचार का खंडन करता है;
कथन (ii) एवं (iv) पहले का।

प्र.3 तीन परमाणु कण X, Y और Z के ना भक का संघटन नीचे दया गया है— प्रोटॉन क संख्या X: 18, Y: 17, Z:
17; न्यूट्रॉन क संख्या X: 19, Y: 18, Z: 20। नम्न ल खत के मध्य संबंध स्पष्ट क जए। (i) Y एवं Z (ii) Z एवं
X

(i) Y एवं Z सम ा नक ह। (ii) Z एवं X समभा रक ह।

पहले A = p+ + n0 का उपयोग करके प्रत्येक के लए Z (परमाणु क्रमांक) एवं A (द्रव्यमान संख्या) नका लए।

कण प्रोटॉन = Z न्यूट्रॉन द्रव्यमान संख्या A = P + N तत्व

18 19 37
18Ar (आगन)
X 18 + 19 = 37

17 18 35
17Cl (क्लोरीन)
Y 17 + 18 = 35

17 20 37
17Cl (क्लोरीन)
Z 17 + 20 = 37

(i) Y एवं Z — सम ा नक। दोन म 17 प्रोटॉन ह, अतः दोन क्लोरीन ह, परंतु इनक द्रव्यमान संख्याएँ 35 एवं 37 ह। समान
परमाणु क्रमांक, भन्न द्रव्यमान संख्या = सम ा नक। दोन का इलेक्ट्रॉ नक वन्यास (2, 8, 7) समान है, अतः रासाय नक गुणधम
भी समान; केवल द्रव्यमान भन्न है। ये वस्तुतः क्लोरीन के वही दो प्राकृ तक सम ा नक ह जो 3 : 1 के अनुपात म पाए जाते ह।
(ii) Z एवं X — समभा रक। दोन क द्रव्यमान संख्या 37 है, अतः दोन ना भक म 37 न्यू क्लऑन ह, परंतु Z म 17 प्रोटॉन ह
और X म 18। समान द्रव्यमान संख्या, भन्न परमाणु क्रमांक = समभा रक। ये भन्न तत्व ह — क्लोरीन एवं आगन — जनका
रसायन पूणतः अलग है: क्लोरीन (2, 8, 7) को एक इलेक्ट्रॉन चा हए और वह अत्य धक अ भ क्रयाशील है, जब क आगन (2, 8,

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8) का अष्टक पूण है और वह अ क्रय है।

ऐसा क्य होता है: दोन अवधारणाओं को अलग रखना सरल है य द आप पूछ क कौन-सी संख्या र रखी जा
रही है। सम- ा नक म प्रोटॉन संख्या र है, अतः वे एक ही तत्व ह। सम-भा रक म कुल न्यू क्लऑन संख्या
र है, अतः उनका भार समान है परंतु वे भन्न तत्व ह।

प्र.4 रदरफोड ने स्वण प णका प्रयोग म ऐसे कुछ अल्फा कण जो पुनः लौट आए थे अथवा बड़े कोण पर वक्षे पत हो
गए थे, के आधार पर परमाणु के धनावे शत भाग क अव त और अ भलक्षण के वषय म क्या नष्कष
नकाला?

रदरफोड ने नष्कष नकाला क धनावेश पूरे परमाणु म फैला नह है ब ल्क कद्र के एक अ त सूक्ष्म क्षेत्र म क द्रत है, जसे
उन्ह ने ना भक कहा।

अव त। परमाणु के कद्र म, जो उसके आयतन का अ त सूक्ष्म भाग ही घेरता है। परमाणु का व्यास लगभग 10–10 m है; ना भक
का व्यास लगभग 10–15 m — अथात 105 गुना छोटा। इसके बाहर का सारा भाग व्यावहा रक रूप से रक्त ान है जसम
इलेक्ट्रॉन ग त करते ह।
अ भलक्षण।

इसम परमाणु का संपूण धनावेश होता है।
इसम लगभग संपूण द्रव्यमान होता है — बाहर के इलेक्ट्रॉन इतने हल्के ह क उनके द्रव्यमान क उपेक्षा क जा सकती है।
अतः यह अत्यंत सघन है।

कस अवलोकन ने कौन-सा नष्कष दया —

अवलोकन नष्कष

अिधकांश α-कण िबना िवक्षेिपत हुए सीधे िनकल गए परमाण ु का अिधकांश भाग िर क्त है

कु छ बड़े कोणों पर िवक्षेिपत हएु कोई संकें िद त धनावेश है जो उ न्हे ं पबल रूप से पितकिषत करता है

अत्यंत कम कण लगभग सीधे लौट आए वह आवेश α-कण से कही ं भारी वस्तु पर है और अत्यंत सूक्ष्म आयतन घे र ता है

ऐसा क्य होता है: बड़े वक्षेपण क दुलभता उतनी ही महत्त्वपूण है जतने स्वयं वक्षेपण। य द वापसी सामान्य
होती तो लक्ष्य बड़ा होना चा हए था। चूँ क वह अत्यंत दुलभ थी, लक्ष्य अ त सूक्ष्म होना चा हए — और फर भी कण
को पूरा लौटाने के लए सारा भारी एवं धनावे शत भाग उसी म समटा होना चा हए।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर
a g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
क समय के साथ परमाणु मॉडल कैसे वक सत हुए ह। (i) बोर के मॉडल ने प्रस्ता वत कयाem
प्र.5 नम्न ल खत कथन क व्याख्या क जए और इन्ह सही कालक्रम म व्यव त क जए जससे यह ात हो सके

m
o न श्चत कक्षाओं म प रभ्रमण करते ह और प्रत्येक कक्षा क एक न श्चत a s
l होती है। (ii) टॉमसन
क इलेक्ट्रॉन ना भक
के चार .c
a gऊजा
m
aकsे eमॉडल ने परमाणु को एक ‘प्लम पु डग’ के रूप म दशाया है जसम इलेक्ट्रॉन धनावेश के एक गोले म धँसे होते
ओर

agl ह। (iii) रदरफोड के मॉडल ने प्रस्ता वत कया क परमाणुओं म एक सघन कद्र य ना भक होता है। (iv) डाल्टन
के मॉडल ने परमाणुओं को अ वभाज्य कण के रूप म व णत कया।

co m
m . ag
l a se
g डाल्टन → टॉमसन → रदरफोड → बोर।
सही कालक्रम: (iv) → (ii) → (iii) → (i),aअथात

co m
m.
क्रम मॉडल वष क्या प्रस्ता वत कया अगला मॉडल क्य आवश्यक हुआ

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com
.डाल्टन l
agम कण उ सिजत करते है ं
पहला (iv) 1808 समस्त द्रव्य अ वभाज्य परमाणुओं से बना है रे िडयोधिम ता एवं कै थोड िकरणों ने िदखाया िक

sem
— द्रव्य का प्रथम वैज्ञा नक ववरण परमाण ु सूक्ष् त्

a
aglदू सरा (ii)
टॉमसन
1897 के
बाद
धनावेश के गोले म धँसे इलेक्ट्रॉन — प्लम
पु डग
स्वण पिणका पयोग : कु छ α-कण पुनः लौट आए

m a s
m .co agl
se
तीसरा (iii) 1911 सघन कद्र य ना भक, अ धकांशतः रक्त परमाण ु नष्ट क्यों नही ं होते, इसकी व्याख्या नही ं कर

l a
रदरफोड ान, प रक्रमा करते इलेक्ट्रॉन सका

(i) बोर 1913
g
aन त ऊजा वाले न त कोश म
चौथा बाद के काय ने िदखाया िक इले क्टॉन िनिश्चत

co m
इलेक्ट्रॉन; कोश म रहते हुए ऊजा क्षय नह क क्षाएँ नही,ं मेघ है ं — क्वांटम यांित्र कीय मॉडल

m .
o m l a se
इस क्रम का तक। प्रत्येक मॉडल को उस खोज क प्रतीक्षा करनी पड़ी जसने उसे संभव बनाया। टॉमसन का मॉडल वष 1897 म

m .cक खोज से पहले नह आ सकता था। रदरफोड का मॉडल स्वण प णका प्रयोगaसेgपहले नह । बोर का मॉडल तब तक नह
seसकता था जब तक प रक्रमा के लए कोई ना भक न हो — उनका मॉडल रदरफोड के मॉडल म एक नया नयम जोड़ने भर से
इलेक्ट्रॉन

l a
g बनता है।
आ
a
se m
com g l a
.
ऐसा क्य होता है: ध्यान द जए क कोई भी मॉडल पूरी तरह त्यागा नह गया। डाल्टन का परमाणु आज भी तत्व
m a
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agl
क इकाई है; टॉमसन का इलेक्ट्रॉन बना हुआ है; रदरफोड का ना भक बोर के मॉडल म और आधु नक मॉडल म भी
है। वज्ञान जो काम करता है उसे रखकर और जो असफल होता है उसे सुधारकर आगे बढ़ता है।

co m
m .
m as e
.co उन्ह ना भक क ओर आक षत रखता है, व्याख्या क जए?
प्र.6
g l
इलेक्ट्रॉन ना भक के चार ओर कक्षाओं म ग त करते ह। वे परमाणु से बाहर क्य नह नकल जाते? कौन-सा बल
a
se m
g l a
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m a s e
.co agl
वे बाहर इस लए नह नकलते क्य क ऋणावे शत इलेक्ट्रॉन और धनावे शत ना भक के बीच रवैद्युत आकषण बल काय करता
है।
se m
g l a
a
ना भक म प्रोटॉन होते ह, प्रत्येक पर +1 आवेश। प्रत्येक इलेक्ट्रॉन पर –1 आवेश। वपरीत आवेश आक षत करते ह।

co m
m .
m as e
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यह आकषण नरंतर कद्र क ओर दष्ट रहता है, अतः इलेक्ट्रॉन के ग तमान रहते हुए भी उसे भीतर क ओर ख चता रहता है।
यही वह बल है जो इलेक्ट्रॉन के पथ को सीधी रेखा के बजाय एक बंद कोश म मोड़ दे ता है।
इसक भू मका वही है जो सूय क प रक्रमा करते ग्रह के लए गुरुत्व क है: एक अंतमुखी बल जो ग तमान पड को बंद पथ म
बनाए रखता है।

उत्तर का दूसरा भाग यह है क इलेक्ट्रॉन भीतर गरता क्य नह , जो वपरीत संकट है। बोर क अ भधारणा इसका समाधान करती
है: अनुमत कोश म रहते हुए इलेक्ट्रॉन क ऊजा र रहती है, अतः वह न ऊजा व क रत करता है और न भीतर क ओर स पल
ग त करता है। वह तभी बाहर नकलता है जब उसे बाहर से इतनी ऊजा मले क वह बाह्यतम स्तर से भी आगे जा सके — और
परमाणु के आयनन म ठ क यही होता है।

ऐसा क्य होता है: आकषण क प्रबलता यह भी समझाती है क भन्न कोश के इलेक्ट्रॉन इतने भन्न व्यवहार क्य
करते ह। K-कोश का इलेक्ट्रॉन ना भक के नकट है, प्रबल रूप से बँधा है और उसे हटाना क ठन है। बाहरी कोश का
संयोजकता इलेक्ट्रॉन दूर है और श थल रूप से बँधा है — इसी लए सो डयम (2, 8, 1) अपना एकमात्र बाहरी
इलेक्ट्रॉन इतनी सरलता से त्याग दे ता है और जल के साथ तीव्रता से अ भ क्रया करता है।

प्र.7 नीचे दए गए अ भकथन एवं कारण को प ढ़ए और उनके संबंध म आगे दए गए वकल्प म से सही वकल्प का
चयन क जए। अ भकथन— अवपरमाणुक कण क खोज ने परमाणु संरचना को समझने म सहायता क ।
कारण— कसी परमाणु म इलेक्ट्रॉन क संख्या प्रोटॉन क संख्या के समान होती है। (i) अ भकथन और कारण
दोन सत्य ह और कारण अ भकथन क सही व्याख्या करता है। (ii) अ भकथन और कारण दोन सत्य ह परंतु
कारण अ भकथन क सही व्याख्या नह करता है। (iii) अ भकथन सत्य है परंतु कारण असत्य है। (iv)
अ भकथन असत्य है परंतु कारण सत्य है।

सही वकल्प है (ii) अ भकथन और कारण दोन सत्य ह परंतु कारण अ भकथन क सही व्याख्या नह करता है।
अ भकथन सत्य है। परमाणु संरचना क समझ म प्रत्येक अगला कदम कसी अवपरमाणुक कण क खोज से ही आया। इलेक्ट्रॉन
(टॉमसन, 1897) ने सद्ध कया क परमाणु वभाज्य है; प्रोटॉन ने ना भक को उसका आवेश दया; न्यूट्रॉन (चैड वक, 1932) ने
अंततः परमाणु द्रव्यमान क व्याख्या क । इन खोज के बना परमाणु का कोई मॉडल होता ही नह ।
कारण भी सत्य है। उदासीन परमाणु म इलेक्ट्रॉन क संख्या प्रोटॉन के बराबर होती ही है — इसी से परमाणु पर कोई प रणामी
आवेश नह होता, और इसी से परमाणु क्रमांक Z प्रोटॉन-गणना और इलेक्ट्रॉन-गणना दोन का काम करता है।
परंतु कारण अ भकथन क व्याख्या नह करता। कारण एक व शष्ट तथ्य है जो हम कण क खोज होने के कारण पता चला —
वह प रणाम है, हेतु नह । वह यह नह बताता क कण क खोज ने समझ को आगे क्य बढ़ाया। अ भकथन पूरे वषय के इ तहास
का कथन है; कारण उसके भीतर का एक छोटा-सा ववरण।

ऐसा क्य होता है: तीर क दशा जाँ चए। पू छए — 'क्या कारण से अ भकथन नकलता है?' यह जानना क
इलेक्ट्रॉन = प्रोटॉन, स्वयं म यह नह बताता क परमाणु संरचना क समझ कैसे वक सत हुई। अब पू छए — 'क्या
अ भकथन से कारण नकलता है?' हाँ — इलेक्ट्रॉन एवं प्रोटॉन क खोज होने पर ही हम यह समानता कह सके। तीर
उल्ट दशा म है, अतः कारण अ भकथन क व्याख्या नह हो सकता।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

प्र.8 मैग्नी शयम अनेक जै वक प्र क्रयाओं के लए आवश्यक है जसम मांसपे शय का संकुचन भी स म्म लत है।
मैग्नी शयम के परमाणु क द्रव्यमान संख्या 24 और परमाणु क्रमांक 12 है तो उसम (i) प्रोटॉन क संख्या (ii)
न्यूट्रॉन क संख्या (iii) इलेक्ट्रॉन क संख्या ात क जए। मैग्नी शयम परमाणु म इलेक्ट्रॉन क व्यव ा को भी
चत्रात्मक रूप से दशाइए।

(i) 12 प्रोटॉन (ii) 12 न्यूट्रॉन (iii) 12 इलेक्ट्रॉन। इलेक्ट्रॉ नक वन्यास 2, 8, 2 है।

सूत्र: Z = प्रोटॉन क संख्या = उदासीन परमाणु म इलेक्ट्रॉन क संख्या; n0 = A – Z।

िदया है: A = 24, Z = 12

(i) पोटॉनों की संख्या = Z = 12

(ii) न्यूट ॉनों की संख्या = A – Z

= 24 – 12

= 12

(iii) परमाणु िव त
ु उदासीन है, अतः
इलेक्टॉनों की संख्या = Z = 12

12 इलेक्ट्रॉन क व्यव ा। पहले K भ रए (अ धकतम 2 × 1² = 2), फर L (अ धकतम 2 × 2² = 8), शेष M म।

K-कोश: 2 इलेक्टॉन → 12 – 2 = 10 शेष

L-कोश: 8 इलेक्टॉन → 10 – 8 = 2 शेष

M-कोश: 2 इलेक्टॉन

Mg का इलेक्टॉिनक िवन्यास = 2, 8, 2

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

Mg

K=2 L=8 M=2
नािभक मे ं 12 पोटॉन एवं 12 न्यूटॉन
मैग्नी शयम परमाणु (Z = 12) म इलेक्ट्रॉन व्यव ा — 12 इलेक्ट्रॉन K → L → M क्रम म 2, 8, 2 के रूप म भरे गए। बाह्यतम कोश के
दो इलेक्ट्रॉन संयोजकता इलेक्ट्रॉन ह।

ऐसा क्य होता है: बाह्यतम M-कोश के दो इलेक्ट्रॉन ही संयोजकता इलेक्ट्रॉन ह। मैग्नी शयम इन्ह त्यागकर ायी
वन्यास 2, 8 प्राप्त करता है, इसी लए उसक संयोजकता 2 है और वह Mg²⁺ आयन बनाता है — मैग्नी शयम
आपक मांसपे शय म और पणह रत म इसी रूप म काय करता है।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

प्र.9 चत्र 8.17 म दशाए गए तत्व के लए नम्न ल खत जानकारी ात क जए। (i) तत्व का नाम (ii) प्रतीक (iii)
इलेक्ट्रॉन क कुल संख्या (iv) संयोजकता इलेक्ट्रॉन क संख्या (v) तत्व क संयोजकता (vi) प्रोटॉन क संख्या
(vii) परमाणु क्रमांक

(क) (ख) (ग) (घ)

चत्र 8.17

चत्र 8.17 म प्रत्येक कोश पर बने इलेक्ट्रॉन को गनने पर वन्यास 2,1 · 2,5 · 2,8,3 · 2,7 मलते ह, जनसे चार तत्व क
पहचान हो जाती है।

(क) (ख) (ग) (घ)

िचत्र में बने इले क्टॉन (K, L, M) 2, 1 2, 5 2, 8, 3 2, 7

(i) तत्व का नाम लीिथयम नाइटोजन ऐलुिमिनयम फ्लुओ रीन

(ii) पतीक Li N Al F

(iii) इले क्टॉनों की कु ल संख्या 3 7 13 9

(iv) संयोजकता इले क्टॉनों की संख्या 1 5 3 7

(v) संयोजकता 1 (1 त्यागता है) 3 (3 ग हण करता है) 3 (3 त्यागता है) 1 (1 ग हण करता है)

(vi) पोटॉनों की संख्या 3 7 13 9

(vii) परमाण ु क्रमांक Z 3 7 13 9

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as e
कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
em.
m l as
m .co a g
l a se
a g Li N Al F

co m
e m . ag
as
(क) Li (ख) N (ग) Al (घ) F
2, 1
a g l
2, 5 2, 8, 3 2, 7

चत्र 8.17 के चार परमाणु — मु द्रत चत्र से इलेक्ट्रॉन गनकर बनाए गए: ली थयम (2,1), नाइट्रोजन (2,5), ऐलु म नयम (2,8,3) एवं

co m
m.
फ्लुओरीन (2,7)।

m as e
.co a g l
em
प्रत्येक पं क्त कैसे प्राप्त हुई। सभी कोश के इलेक्ट्रॉन जो ड़ए — यही इलेक्ट्रॉन क कुल संख्या है। परमाणु उदासीन है, अतः

a s
l संयोजकता इलेक्ट्रॉन 4 से कम → त्यागता है; 4 से अ धक → 8 तक पहुँचने के लए ग्रहण करता है।
प्रोटॉन क संख्या एवं परमाणु क्रमांक वही संख्या है। बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉन संयोजकता इलेक्ट्रॉन ह। संयोजकता के लए नयम

a gलगाइए:
m a s
m.co
(क) 2 + 1 = 3 इलेक्टॉन → Z = 3 → Li; 1 संयोजकता इलेक्टॉन, अतः 1 त्यागता है → संयोजकता 1
agl
l a se
g
(ख) 2 + 5 = 7 इलेक्टॉन → Z = 7 → N; 5 संयोजकता इलेक्टॉन, 8 – 5 = 3 चािहए → संयोजकता 3
a
(ग) 2 + 8 + 3 = 13 इलेक्टॉन → Z = 13 → Al; 3 संयोजकता इलेक्टॉन, अतः 3 त्यागता है → संयोजकता

co m
3
m .
m as e
.co
(घ) 2 + 7 = 9 इलेक्टॉन → Z = 9 → F; 7 संयोजकता इलेक्टॉन, 8 – 7 = 1 चािहए → संयोजकता 1
a g l
se m
g l a
a स्वयं जाँ चए: (ख) और (ग) दोन क संयोजकता 3 नकलती है, परंतु कारण वपरीत ह — नाइट्रोजन तीन
इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, ऐलु म नयम तीन त्यागता है। इसी लए ये दोन 1 : 1 अनुपात म संयो जत होकर AlN
se m
com g l a
बनाते ह।
m . a
ase
agl
रदरफोड और बोर दोन के प्र तरूप म इलेक्ट्रॉन ना भक क प रक्रमा करते ह परंतु रदरफोड का मॉडल, परमाणु
co m
.
प्र.10
के ा यत्व को समझाने म असफल क्य रहा जब क बोर का मॉडल सफल रहा?
e m
c o m g l as
. a
a sem

agl क्य क रदरफोड ने इलेक्ट्रॉन को कोई भी कक्षा दे द और चरसम्मत भौ तक को अपना काम करने दया, जब क बोर ने केवल
c
m .
e
कुछ न श्चत कक्षाएँ अनुमत क और यह अ भगृहीत रखा क उनम रहते हुए इलेक्ट्रॉन ऊजा व क रत नह करता।

m a s
. co agl
रदरफोड का मॉडल क्य असफल होता है।

se m
l a
वृत्ताकार पथ म ग तशील इलेक्ट्रॉन क दशा नरंतर बदलती है, अतः वह त्व रत हो रहा है।
ारgत्व रत आवेश को ऊजा व क रत करनी चा हए।
चरसम्मत भौ तक के अनुसa
ऊजा खोते हुए उसक कक्षा सकुड़ती जाएगी; वह स पलाकार पथ पर भीतर जाकर ना भक म गर जाएगा।

co m
m .
m as e
.co


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परमाणु क्षण भर म नष्ट हो जाता — परंतु हमारे चार ओर का द्रव्य ायी है। अतः यह मॉडल, जैसा था, अधूरा था।

बोर का मॉडल क्य सफल होता है।

इलेक्ट्रॉन केवल कुछ अनुमत कोश — ायी अव ाओं K, L, M, N (n = 1, 2, 3, 4) — म ही रह सकते ह, बीच म कह
नह ।
ायी अव ा म इलेक्ट्रॉन क ऊजा र रहती है, भले ही वह ग तमान हो, अतः कोई ऊजा व क रत नह होती।
ऊजा का आदान-प्रदान केवल दो स्तर के बीच छलाँग म होता है, उनके ऊजा-अंतर के बराबर। चूँ क कोश के बीच कोई
अनुमत अव ा नह है और K-कोश से नीचे भी कोई नह , भीतर जाने का कोई सतत माग बचता ही नह ।

रदरफोड (1911) बोर (1913)

अनुम त कक्षाएँ कोई भी त्रज्या के वल िनिश्चत कोश

पिरक्रमा के दौरान ऊज नरंतर व क रत िस्थर

परमाण ु के िलए पूव नुम ान नष्ट हो जाता है स्थायी रहता है

ऐसा क्य होता है: बोर ने परमाणु का चत्र नह बदला — उन्ह ने रदरफोड का ना भक और कक्षाएँ ज्य क त्य
रख । उन्ह ने जो बदला वह इन पर लागू होने वाला नयम था, जसम एक ऐसा प्र तबंध जोड़ा जो चरसम्मत
भौ तक म है ही नह । इसी लए दोन मॉडल चत्र म एक जैसे दखते ह परंतु वपरीत प रण त का पूवानुमान दे ते ह।
बोर का नयम एक मान्यता थी, जसका औ चत्य इसी बात से सद्ध हुआ क वह काम करती थी — इसने परमाणु
स्पेक्ट्रम क तीक्ष्ण रेखाओं क भी व्याख्या क , जो सतत व करण कभी नह कर सकता था।

प्र.11 एक परमाणु ⁷⁰X म 31 इलेक्ट्रॉन ह। बताइए क इसके ना भक म कतने न्यूट्रॉन ह?

39 न्यूट्रॉन।

संकेतन पढ़ना: 70X म ऊपर लखी संख्या द्रव्यमान संख्या है, अतः A = 70। परमाणु उदासीन है, अतः प्रोटॉन = इलेक्ट्रॉन।

इलेक्टॉनों की संख्या = 31

⇒ पोटॉनों की संख्या, Z = 31

द व्यमान संख्या, A = 70

न्यूट ॉनों की संख्या = A – Z

= 70 – 31

= 39 न्यूट ॉन

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Z = 31 से तत्व क पहचान गै लयम के रूप म होती है, अतः 70X वस्तुतः 7031Ga है।

स्वयं जाँ चए: 31 प्रोटॉन + 39 न्यूट्रॉन = 70 न्यू क्लऑन ✓। ध्यान द जए क यहाँ न्यूट्रॉन पहले ही प्रोटॉन से
अ धक ह (अनुपात 39 : 31 ≈ 1.26) — वही प्रवृ त्त जसका वणन अध्याय म है क भारी ना भक को बँधे रहने के
लए अनुपात म अ धक न्यूट्रॉन चा हए।

प्र.12 एक परमाणु म 79 प्रोटॉन ह और उसक द्रव्यमान संख्या 197 है। इसम (i) न्यूट्रॉन क संख्या और (ii)
इलेक्ट्रॉन क संख्या क गणना क जए।

(i) 118 न्यूट्रॉन (ii) 79 इलेक्ट्रॉन। यह तत्व गोल्ड (स्वण) है, 19779Au।

िदया है: पोटॉनों की संख्या = 79, द व्यमान संख्या A = 197

(i) न्यूट ॉनों की संख्या = A – पोटॉनों की संख्या

= 197 – 79

= 118

(ii) परमाणु िव त
ु उदासीन है, अतः
इलेक्टॉनों की संख्या = पोटॉनों की संख्या

= 79

Z = 79 अथात स्वण — वही धातु जसक प णका पीटकर गाइगर एवं मासडेन ने प्रक णन प्रयोग कया था।

ऐसा क्य होता है: 79 प्रोटॉन एक साथ ठुँ से होने के कारण स्वण के ना भक म रवैद्युत प्र तकषण अत्य धक
होता है। इसे बाँधे रखने के लए 118 न्यूट्रॉन चा हए — न्यूट्रॉन-प्रोटॉन अनुपात लगभग 1.49 — ता क पयाप्त
अल्प-परास ना भक य बल मले और प्रोटॉन के बीच पयाप्त दूरी भी। इसक तुलना काबन से क जए, जसका काम
6 और 6 से चल जाता है।

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प्र.13 ता लका 8.5 को पूण क जए।

परमाणु द्रव्यमान न्यूट्रॉन क प्रोटॉन क इलेक्ट्रॉन क तत्व के
क्रमांक संख्या संख्या संख्या संख्या नाम

5 – 6 – – –

– 14 – – 7 नाइट्रोजन

– 24 – 12 – –

15 – 16 – – –

– 1 0 – – –

ता लका 8.5, पृष्ठ 160 — पुस्तक के अनुसार, रक्त ान “–” से दशाए गए ह।

प्रत्येक रक्त ान दो संबंध से भरा जाता है: Z = प्रोटॉन क संख्या = इलेक्ट्रॉन क संख्या (उदासीन परमाणु) तथा A =
प्रोटॉन क संख्या + न्यूट्रॉन क संख्या।

परमाणु द्रव्यमान न्यूट्रॉन क प्रोटॉन क इलेक्ट्रॉन क तत्व के
क्रमांक संख्या संख्या संख्या संख्या नाम

5 11 6 5 5 बोरॉन

7 14 7 7 7 नाइट्रोजन

12 24 12 12 12 मैग्नीिशयम

15 31 16 15 15 फॉस्फोरस

1 1 0 1 1 हाइडोजन

पं क्त-दर-पं क्त:

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पंिक्त 1: Z = 5 ⇒ पोटॉन = 5, इलेक्टॉन = 5। A = 5 + 6 = 11। Z = 5 → बोरॉन, 115B

पंिक्त 2: इलेक्टॉन = 7 ⇒ Z = 7, पोटॉन = 7। न्यूट ॉन = 14 – 7 = 7। िदया है: नाइटोजन, 147N ✓

पंिक्त 3: पोटॉन = 12 ⇒ Z = 12, इलेक्टॉन = 12। न्यूट ॉन = 24 – 12 = 12। Z = 12 → मैग् नीिशयम,
24 Mg
12

पंिक्त 4: Z = 15 ⇒ पोटॉन = 15, इलेक्टॉन = 15। A = 15 + 16 = 31। Z = 15 → फॉस्फोरस, 3115P

पंिक्त 5: A = 1 एवं न्यूट ॉन = 0 ⇒ पोटॉन = 1 – 0 = 1, अतः Z = 1 एवं इलेक्टॉन = 1। Z = 1 →

हाइडोजन, 11H

क्या आप जानते ह? पं क्त 5 प्रो टयम है — पूरी आवत सारणी का एकमात्र ऐसा परमाणु जसके ना भक म एक
भी न्यूट्रॉन नह होता, केवल एक अकेला प्रोटॉन। प्राकृ तक हाइड्रोजन का लगभग 99.98% भाग यही है।

प्र.14 अमन अपने सहपा ठय के साथ परमाणु क संरचना पर चचा कर रहा था। चचा के समय उसे ात हुआ क
कसी तत्व X क द्रव्यमान संख्या 35 है और उसम 18 न्यूट्रॉन ह। इस जानकारी के आधार पर नम्न ल खत प्रश्न
के उत्तर द जए— (i) तत्व X म कतने इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन ह? (ii) इसका परमाणु क्रमांक क्या है? (iii) तत्व
X क पहचान क जए। (iv) इसका इलेक्ट्रॉ नक वन्यास ल खए। (v) इसम कतने संयोजकता इलेक्ट्रॉन ह?
(vi) य द इसके ना भक म दो न्यूट्रॉन और जोड़ दए जाएँ तो इसक द्रव्यमान संख्या क्या होगी? (vii) X का नए
परमाणु के साथ क्या संबंध होगा?

A = 35 एवं n0 = 18 से आरंभ क जए।
(i) 17 प्रोटॉन एवं 17 इलेक्ट्रॉन।

पोटॉनों की संख्या = A – न्यूट ॉनों की संख्या

= 35 – 18

= 17
परमाणु उदासीन है, अतः इलेक्टॉनों की संख्या = पोटॉनों की संख्या = 17

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as e
कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर
a g l AglaSem · NCERT Solutions

(ii) परमाणु क्रमांक Z = 17, क्य क Z क प रभाषा ही प्रोटॉन क संख्या है।
co m
em.
as
(iii) तत्व क्लोरीन (Cl) है, जसे 35 17Cl लखा जाता है।

(iv) इलेक्ट्रॉ नक.co
m g l
em
वन्यास = 2, 8, 7।
a
a s
gl
aK-कोश (अिधकतम 2 × 1² = 2): 2 इलेक्टॉन → 17 – 2 = 15 शेष

co m
. ag
L-कोश (अिधकतम 2 × 2² = 8): 8 इलेक्टॉन → 15 – 8 = 7 शेष
e m
M-कोश: 7 इलेक्टॉन
g l as
िवन्यास = 2, 8, 7 a

co m
em.
as
(v) 7 संयोजकता इलेक्ट्रॉन — बाह्यतम (M) कोश के इलेक्ट्रॉन। क्लोरीन को अष्टक पूण करने के लए 8 – 7 = 1 और चा हए,
m l
.co g
अतः उसक संयोजकता 1 है और वह अत्य धक अ भ क्रयाशील है।

m a
a se
(vi) नई द्रव्यमान संख्या = 37।
l
a g
s
न्यूट ॉनों की नई संख्या = 18 + 2 = 20
m a
m .co agl
se
पोटॉन अपिरवितत, 17

g l a
a
नई द व्यमान संख्या A′ = 17 + 20

= 37, अथ त 3717Cl

co m
m .
m as e
एवं 37 .हco
l
(vii) X एवं नया परमाणु परस्पर सम ा नक ह। दोन का Z = 17 है, अतः दोन क्लोरीन ह, परंतु इनक द्रव्यमान संख्याएँ 35
a g
em
— समान परमाणु क्रमांक, भन्न द्रव्यमान संख्या।
a s
agl ऐसा क्य होता है: न्यूट्रॉन जोड़ने से तत्व नह बदल सकता, क्य क तत्व क प रभाषा केवल प्रोटॉन क संख्या से

se m
om l a
होती है। दोन परमाणुओं म अब भी 17 इलेक्ट्रॉन 2, 8, 7 व्यव ा म ह, अतः दोन प्रत्येक रासाय नक अ भ क्रया म
एक जैसा व्यवहार करगे। अंतर केवल द्रव्यमान.cका
a g
m
है। ये दोन वस्तुतः क्लोरीन के वास्त वक सम ा नक ह जो
प्रकृ त म 3 : 1 के अनुपात म म श्रत ह,se
l a इसी लए क्लोरीन का औसत परमाणु द्रव्यमान 35.5 u है।
ag

co m
m .
seके समान ही है परंतु वे 500 गुना
कसी परमाणु के ना भक म 12 प्रोटॉन और 12 न्यूट्रॉन ह। अब कल्पना क जए क सभी इलेक्ट्रॉन को कन्ह
m a
प्र.15

o l
.c अ धक भारी ह। इस प्र त ापन का परमाणु के नम्न ल खत गुण aपरgक्या प्रभाव पड़ेगा? (i) परमाणु क्रमांक
काल्प नक कण से प्र त ा पत कर दया जाता है जनका आवेश इलेक्ट्रॉन

se m
g l a
a
(ii) परमाणु द्रव्यमान (iii) द्रव्यमान संख्या (iv) समग्र आवेश

.c
s e m
m a
co agl

m .
as e
यह परमाणु मैग्नी शयम है: 12 प्रोटॉन, 12 न्यूट्रॉन और इस लए 12 इलेक्ट्रॉन।

a g l
(i) परमाणु क्रमांक — कोई प रवतन नह । यह 12 ही रहेगा। परमाणु क्रमांक क प रभाषा प्रोटॉन क संख्या है, और ना भक
को छु आ ही नह गया।

co m
m .
m as e
.co


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(ii) परमाणु द्रव्यमान — बढ़े गा, लगभग 3.3 u। केवल यही रा श बदलती है।

एक इलेक्टॉन का द व्यमान ≈ पोटॉन के द व्यमान का 1/1836 ≈ 5.5 × 10–4 u

एक भारी कण का द व्यमान = 500 × 5.5 × 10–4 u
= 0.275 u

ऐसे 12 कणों का कु ल द व्यमान = 12 × 0.275 u

= ≈ 3.3 u

मूल परमाणु द व्यमान ≈ 24 u (12 पोटॉन + 12 न्यूट ॉन; इलेक्टॉन नगण्य)

नया परमाणु द व्यमान ≈ 24 u + 3.3 u = ≈ 27.3 u

महत्त्व केवल संख्या का नह , उसके अथ का है: सामान्यतः 12 इलेक्ट्रॉन केवल 12 × 5.5 × 10–4 u ≈ 0.0066 u का योगदान दे ते
ह, इसी लए हम उनक उपेक्षा करते ह। 500 गुना भारी होने पर वे परमाणु म लगभग 14% जोड़ दे ते ह और अब उनक उपेक्षा नह
क जा सकती।
(iii) द्रव्यमान संख्या — कोई प रवतन नह । यह 24 ही रहेगी।

द व्यमान संख्या A = पोटॉनों की संख्या + न्यूट ॉनों की संख्या
= 12 + 12

= 24 (इलेक्टॉन इस गणना में कभी नही ं आते , उनका द व्यमान चाहे जो हो)

(iv) समग्र आवेश — कोई प रवतन नह । परमाणु उदासीन ही रहेगा। प्र त ापी कण पर इलेक्ट्रॉन के समान ही आवेश है
और उनक संख्या भी अब भी 12 है।

कु ल धनावेश = 12 × (+1) = +12

कु ल ऋणावेश = 12 × (–1) = –12

पिरणामी आवेश = +12 – 12 = 0

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ऐसा क्य होता है: यह प्रश्न तीन ऐसी अवधारणाओं को अलग करता है जन्ह वद्याथ अक्सर मला दे ते ह। आवेश
केवल इस पर नभर है क धनात्मक एवं ऋणात्मक इकाइयाँ कतनी ह, उनके द्रव्यमान पर नह । द्रव्यमान संख्या
न्यू क्लऑन क गनती है — एक प रभाषा, अतः ना भक के बाहर क कसी बात से यह प्रभा वत हो ही नह
सकती। परमाणु द्रव्यमान वास्त वक द्रव्यमान है, अतः इसम प्रत्येक कण का योगदान होता है; हम इलेक्ट्रॉन को
केवल इस लए छोड़ दे ते ह क्य क उनका योगदान अत्यंत सूक्ष्म है, और यह स न्नकटन उसी क्षण टू ट जाता है जब वे
भारी हो जाएँ।

क्या आप जानते ह? ठ क ऐसा कण वास्तव म वद्यमान है — म्यूऑन, जस पर इलेक्ट्रॉन जतना ही आवेश होता
है परंतु वह लगभग 207 गुना भारी होता है। भौ तक वैज्ञा नक इनसे 'म्यूऑ नक परमाणु' बनाते ह। भारी कण
ना भक के कह अ धक नकट प रक्रमा करता है, जससे ऐसे परमाणु ना भक के आकार को मापने का संवेदनशील
साधन बन जाते ह।

प रयोजना काय — पृष्ठ 161
प रयोजना काय

प रयोजना काय

प्र.1 परमाणु क्रमांक, द्रव्यमान संख्या, इलेक्ट्रॉन क संख्या, प्रोटॉन क संख्या, न्यूट्रॉन क संख्या और संयोजकता के
आधार पर एक ‘परमाणु पूवानुमान बोड’ गेम बनाइए। वद्याथ इन परमाणु संकेत का उपयोग करके तत्व का
पूवानुमान लगा सकते ह।

इसे कैसे बनाएँ। ता लका 8.4 के प्रथम अठारह तत्व के लए 18 काड बनाइए। प्रत्येक काड के पीछे चार संकेत ल खए जो नीचे
जाते-जाते आसान होते जाएँ।

संकेत यहाँ पहचानने पर अंक नमूना काड

संके त 1 (किठनतम) 4 “मेरी संयोजकता 2 है और मेरे 3 कोश ह।”

संके त 2 3 “मेरी द्रव्यमान संख्या 32 है और मेरे पास 16 न्यूट्रॉन ह।”

संके त 3 2 “मेरा इलेक्ट्रॉ नक वन्यास 2, 8, 6 है।”

संके त 4 (सरलतम) 1 “मेरा परमाणु क्रमांक 16 है और मेरे प्रतीक म एक ही अक्षर है।”

नयम। पाठक एक काड उलटकर संकेत 1 पढ़ता है। कोई भी खलाड़ी उत्तर दे सकता है। गलत उत्तर दे ने पर वह खलाड़ी उस काड
के शेष दौर से बाहर हो जाता है। जब तक कोई सही उत्तर न दे , संकेत पढ़ते जाइए। जो खलाड़ी उत्तर दे ता है उसे उस समय चल रहे
संकेत के अंक मलते ह।

इसे और क ठन बनाइए — 'संबंध' काड जोड़कर: “म 4020Ca का समभा रक हूँ और मेरा परमाणु क्रमांक 18 है: म कौन हूँ?”
(आगन) अथवा “म 6 प्रोटॉन वाले तत्व का सम ा नक हूँ और जीवाश्म क आयु ज्ञात करने म काम आता हूँ” (146C)।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

संकेत: उत्तर-कुंजी काड पर नह , अलग पन्ने पर ल खए ता क काड पुनः उपयोग हो सके। खेलने से पहले प्रत्येक
काड को ता लका 8.4 से मलाकर जाँच ली जए — गलत संकेत गलत तथ्य सखाता है।

प्र.2 एक रपोट तैयार क जए जसम बताया गया हो क परमाणुओं के गुणधम हमारे दै नक जीवन के व भन्न क्षेत्र ,
जैसे— स्वास्थ्य सेवा, ऊजा, कृ ष और प्रौद्यो गक पर कैसे प्रभाव डालते ह।

अ रपोट म क्या होना चा हए: प्रत्येक क्षेत्र के लए उस परमाणु-गुणधम का नाम ली जए जो काम म आता है, कोई ठोस
भारतीय उदाहरण द जए, और दोन के बीच का संबंध समझाइए। केवल अनुप्रयोग क सूची मत बनाइए — यह दखाइए क कौन-
सा गुणधम प्रत्येक अनुप्रयोग को संभव बनाता है।

क्षेत्र प्रयुक्त परमाणु-गुणधम अनुप्रयोग

स्वास्थ्य से वा रे डयोधम सम ा नक भेदक व करण उत्स जत कैं सर की रे िडयोथेरे पी में 6027Co; घे ंघ ा एवं थायरॉइड कैं सर के
करते ह; रासाय नक रूप से ायी सम ा नक के
उपचार में 13153I, क्योंिक थायरॉइड ग ंिथ आयोडीन अवशोिषत
समान होने से शरीर उन्ह वैसे ही ग्रहण करता है
करती है

ऊज भारी ना भक का खंडन ऊजा मुक्त करता है; न्यूट्रॉन तारापुर एवं कु डनकु लम जैसे नािभकीय शिक्त संयंत्र ों में ईध
ं न के
अनावे शत होने से ना भक म प्रवेश कर सकता है रूप में 23592U

कृ िष सम ा नक अनुज्ञापक (ट्रे सर) का काम करते ह — फसल वास्तव में िकतनी उवरक ग हण करती है यह पता लगाना;
रसायन वही, परंतु द्रव्यमान अथवा व करण से बीजों का िविकरणन कर उ न्न त िक स्में िवकिसत करना; उपज का
पहचान संभव िविकरणन कर उसे अिधक समय तक सुर िक्षत रखना

पौ ोिगकी संयोजकता इलेक्ट्रॉन वद्युत व्यवहार तय करते ह; पत्येक फोन एवं कं प्यूटर की िसिलकॉन िचप; BARC में न्यूटॉन
स लकॉन (2, 8, 4) म ठ क चार होते ह पकीणन से परमाण ु व्यवस्था का अध् ययन कर बनाई गई िम श्र धातुए ँ

पुर ातत्व एवं रे डयोधम सम ा नक एक न त दर से क्षय होता है जीवाश्मों, काष्ठ एवं कलाकृ ितयों की आयु ात करने हेत ु 146C
भूिव ान

ढाँचा जो अपनाएँ: (1) सं क्षप्त प्रस्तावना जसम बताइए क आप कन परमाणु-गुणधम का उपयोग करगे — सम ा नक,
संयोजकता इलेक्ट्रॉन, ना भक य ऊजा; (2) प्रत्येक क्षेत्र पर एक खंड जसम ता लका क पं क्त को अनुच्छेद के रूप म वस्तार
द जए; (3) रे डयोधम पदाथ के जो खम एवं सुर क्षत रख-रखाव पर एक अनुच्छेद; (4) आपके ोत।

संकेत: भारतीय उदाहरण के लए परमाणु ऊजा वभाग एवं BARC क वेबसाइट का उपयोग क जए और जहाँ
संभव हो रएक्टर अथवा अस्पताल का ठ क नाम ल खए। एक व शष्ट उदाहरण दस सामान्य कथन से अ धक
मूल्यवान होता है।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 ‘एक यात्रा— परमाणु के भीतर’ तथा परमाणु संरचना क खोज करने वाले और उसक पहचान म योगदान दे ने
वाले वै ा नक पर कसी भू मका- नवाह, मंचीय नाटक अथवा कहानी क रचना क जए।

नाटक तभी प्रभावी होगा जब प्रत्येक वै ा नक मंच पर अपना दावा रखे और अगला वै ा नक उसे चुनौती दे । नीचे एक
दृश्य-योजना द गई है जस पर आप आगे बढ़ सकते ह।

दृश्य पात्र वह संवाद जो व ान को आगे ले जाता है

1 आचाय कणाद “द्रव्य को बार-बार बाँटते जाइए, आप परमाणु तक पहुँचगे — परंतु म यह तक से कहता हूँ, माप से नह ।”

2 जॉन डाल्टन “म भी यही कहता हूँ, परंतु अब प्रयोग के आधार पर: परमाणु द्रव्य के अ वभाज्य नमाण खंड ह।”
(1808)

3 जे. जे. टॉमसन “मेरे कैथोड से कोई ऋणावे शत और अत्यंत हल्क वस्तु नकलती है — चाहे म कोई भी धातु लूँ। आपका
(1897) परमाणु अ वभाज्य नह है।”

4 गाइगर एवं मासडेन “महोदय, कुछ अल्फा कण लौट आए ह।” रदरफोड: “यह उतना ही अ वश्वसनीय है जतना कसी टशू
(1911) पेपर से गोले का लौट आना।”

5 नील्स बोर (1913) “आपका ना भक सही है, परंतु आपका इलेक्ट्रॉन तो गर जाना चा हए था। कक्षाओं को ठ क करने द जए
— केवल कुछ न त कोश, और उनम ऊजा का कोई क्षय नह ।”

6 जेम्स चैड वक “ही लयम म दो प्रोटॉन ह परंतु द्रव्यमान हाइड्रोजन का चार गुना। यह अनुप त द्रव्यमान एक उदासीन
(1932) कण है — न्यूट्रॉन।”

7 होमी जहाँगीर भाभा “भारत अपने रएक्टर और अपनी सं ाएँ — TIFR एवं BARC — स्वयं बनाएगा, ता क हम ये प्रश्न स्वयं
पूछ सक।”

8 सूत्रधार “बोर भी अं तम शब्द नह थे। आज इलेक्ट्रॉन एक मेघ है, और यह यात्रा अभी समाप्त नह हुई।”

मंचन के सुझाव। कोश के लए एक बड़ा घेरा (हूप) ली जए और नीले काड पकड़े वद्या थय को उसम चलाइए, जब क बीच म
लाल (प्रोटॉन) और हरे (न्यूट्रॉन) काड पकड़े वद्याथ 'ना भक' बनकर खड़े रह। बड़े कोण का वक्षेपण दखाने के लए एक 'अल्फा
कण' सीधी रेखा म चले और ना भक के पास पहुँचकर तेज़ी से मुड़ जाए। बोर क छलाँग दखाने के लए इलेक्ट्रॉन भीतरी घेरे से
बाहरी घेरे म तभी जाए जब उसे एक 'ऊजा' काड दया जाए।

स्वयं जाँ चए: ध्यान र खए क प्रत्येक दृश्य उसी प्रमाण पर समाप्त हो जसने अगला प रवतन आवश्यक बनाया।
परमाणु क कहानी प्रयोग क कहानी है, मत क नह ।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर
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emम साझा क जए।
प्र.4 उपयुक्त सॉफ्टवेयर अथवा ड जटल उपकरण का उपयोग करते हुए व भन्न परमाणु प्र तरूप का सजीव चत्रण

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(animation) अथवा प्र तरूपण (simulation) बनाने का प्रयास क जए और उन्ह कक्षा

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उत्तर as
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agभlउन्ह दो तैयार PhET प्र तरूपण से क जए जनके लक पुस्तक स्वयं दे ती है — ये नःशुल्क ह, ाउज़र म चलते ह,
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और उन्ह रा शय को बदलने दे ते ह जो महत्त्वपूण ह।

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Rutherford Scattering (phet.colorado.edu/en/simulations/rutherford-scattering) — प्लम

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पु डग परमाणु और ना भक य परमाणु के बीच बदल-बदलकर अल्फा कण के पथ का अंतर दे खए। प्रोटॉन क संख्या बढ़ाइए
और दे खए क वक्षेपण कैसे बढ़ते ह।

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Isotopes and Atomic Mass (phet.colorado.edu/en/simulations/isotopes-and-atomic-mass)
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— न्यूट्रॉन जोड़कर सम ा नक बनाइए और प्रचुरता बदलकर दे खए क औसत परमाणु द्रव्यमान कैसे बदलता है। 75% एवं

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25% से क्लोरीन का 35.5 u स्वयं नकालने का प्रयास क जए।
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.c । य द आप स्क्रैच जैसे ब्लॉक-आधा रत उपकरण का उपयोग कर तो प्रत्येक aइलेgक्ट्रॉन को एक ाइट बनाइए जो
स्वयं क्याmबनाएँ
se पथ पर चले, और एक बटन जो ड़ए जससे इलेक्ट्रॉन K-घेरे से L-घेरे म तभी छलाँग लगाए जब एक न त 'ऊजा क्वांटम'
वृlत्तaाकार
agदया जाए — यह एक वशेषता ही पूरा बोर मॉडल है।
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प्रस्तु त म क्या कह। प्रत्येक प्र तरूपण के लए बताइए — (i) यह कौन-सा मॉडल दशाता है, (ii) आपने क्या बदला, (iii) क्या

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हुआ, और (iv) इससे वास्त वक परमाणु के वषय म क्या ज्ञात होता है। चौथे बदु के बना प्र तरूपण केवल एक चल चत्र है।

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संकेत: प्र तरूपण मॉडल का भी मॉडल होता है। सदै व यह भी बताइए क वह क्या छोड़ दे ता है — जैसे इनम से

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कोई भी इलेक्ट्रॉन को मेघ के रूप म नह दखाता, जब क आधु नक भौ तक यही कहती है क वह वास्तव म मेघ ही
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है।

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a gl प्र.5 परमाणु क संरचना के संदभ म कोई फल्म अथवा डॉक्यूमट्र (वृत्त चत्र) दे खए और नम्न ल खत प्रश्न के उत्तर
दे ते हुए एक रपोट ल खए। आपने कौन-सी फल्म अथवा डॉक्यूमट्र दे खी और उसका मुख्य वचार अथवा वषय
se m
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.
क्या था? परमाणु क संरचना और परमाणु मॉडल/मॉडल के वषय म फल्म या डॉक्यूमट्र ने आपको क्या

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as भाग आपको सबसे रोचक लगा और आपके मन म अभी भी कौन-सा प्रश्न
सखाया? फल्म अथवा डॉक्यूमट्र म कन वै ा नक का उल्लेख कया गया था और उनका क्या योगदान था?

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फल्म अथवा डॉक्यूमट्र का कौन-सा
है?

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यह रपोट आपको अपनी दे खी हुई सामग्री के आधार पर लखनी है, अतः यहाँ अपे क्षत गहराई दशाने वाला एक नमूना उत्तर दया

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agl नमूना उत्तर।
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मने क्या दे खा। परमाणु ना भक क खोज पर आधा रत एक वृत्त चत्र। इसका मुख्य वचार यह था क तीस वष म परमाणु का
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हमारा चत्र तीन बार नए सरे से बनाना पड़ा, और हर बार इस लए क्य क कसी एक प्रयोग ने ऐसा प रणाम दया जसक

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कसी को अपेक्षा नह थी।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर AglaSem · NCERT Solutions

संरचना के वषय म क्या सखाया। यह क परमाणु का अ धकांश भाग रक्त ान है — वृत्त चत्र ने पैमाना एक स्टे डयम के
बीच रखे मटर से समझाया, जो पुस्तक के 10–15 m बनाम 10–10 m के आँकड़े से मेल खाता है। इसने यह भी स्पष्ट कया क
बोर क सुव्यव त कक्षाएँ एक सोपान भर ह, अं तम सत्य नह : आधु नक चत्र संभावना के मेघ का है।
उ ल्ल खत वै ा नक। जे. जे. टॉमसन (इलेक्ट्रॉन क खोज, 1897, तथा प्लम पु डग मॉडल); अरनेस्ट रदरफोड (स्वण प णका
के प रणाम क व्याख्या एवं ना भक य मॉडल, 1911); नील्स बोर ( ायी अव ाएँ एवं ऊजा स्तर, 1913); जेम्स चैड वक
(न्यूट्रॉन, 1932)।
सबसे रोचक भाग। यह जानना क गाइगर एवं मासडेन को लौटते कण को खोजने के लए लगभग एक सामान्य जाँच के रूप
म कहा गया था, जससे कसी को कुछ मलने क आशा ही नह थी — और पूरा ना भक य मॉडल उसी जाँच से नकला।
मेरे मन म शेष प्रश्न। य द इलेक्ट्रॉन मेघ के रूप म रहते ह और न त पथ पर कण क भाँ त नह , तो जब हम कहते ह क
इलेक्ट्रॉन ना भक क प रक्रमा करता है तो वास्तव म 'ग त' क्या कर रहा होता है?

संकेत: अपनी रपोट लखते समय फल्म का नाम एवं वष अवश्य ल खए, और उसम दए प्रत्येक आँकड़े को इस
अध्याय से मलाकर जाँ चए। वृत्त चत्र कभी-कभी इतना सरल कर दे ते ह क बात गलत हो जाती है — उसे पकड़
लेना स्वयं म अच्छा वज्ञान है।

प्र.6 कन्ह तीन तत्व के प्रत्येक ऊजा स्तर म इलेक्ट्रॉन क संख्या दशाते हुए एक स्तंभ ग्राफ बनाइए।

व ध: क्षै तज अक्ष पर तीन तत्व और ऊध्वाधर अक्ष पर इलेक्ट्रॉन क संख्या ली जए, फर प्रत्येक तत्व के लए प्रत्येक कोश का
एक स्तंभ बनाइए — K, L एवं M के लए तीन स्तंभ का एक समूह। एक ही कोश के लए पूरे ग्राफ म एक ही रंग र खए।
सो डयम (2, 8, 1), स लकॉन (2, 8, 4) एवं आगन (2, 8, 8) ली जए:

8 8 8 8
8
इलेक्टॉनों की संख्या

6

4
4

2 2 2
2
1

0
सोिडयम िसिलकॉन आगन
K-कोश L-कोश M-कोश

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सो डयम (2, 8, 1), स लकॉन (2, 8, 4) एवं आगन (2, 8, 8) के प्रत्येक ऊजा स्तर म इलेक्ट्रॉन क संख्या। तीन म K एवं L स्तंभ समान
ह; केवल M स्तंभ बदलता है।

ग्राफ से क्या पढ़। तीन के K-स्तंभ 2 पर बराबर ह और L-स्तंभ 8 पर बराबर ह — भीतरी कोश तीन म भरे हुए और एक जैसे ह।
केवल M-स्तंभ बदलता है: 1, 4 और 8। अथात एक अ भ क्रयाशील धातु, एक अधचालक और एक अ क्रय गैस के रासाय नक
व्यवहार का सारा अंतर उसी तीसरे स्तंभ म है।

ऐसा क्य होता है: यह ग्राफ अध्याय के कद्र य वचार को आँख के सामने रख दे ता है। रसायन केवल बाह्यतम कोश
से तय होता है। सो डयम का एकमात्र M-इलेक्ट्रॉन सरलता से त्यागा जाता है (संयोजकता 1); स लकॉन के चार
साझा कए जाते ह (संयोजकता 4); आगन के आठ पूण अष्टक ह, अतः उसके पास व नमय करने को कुछ है ही
नह (संयोजकता 0)।

यह क जए: यही ग्राफ ली थयम (2, 1), सो डयम (2, 8, 1) एवं पोटै शयम (2, 8, 8, 1) के लए बनाइए। तीन
का अंत एक ही बाहरी इलेक्ट्रॉन पर होता है — और तीन नरम, अत्य धक अ भ क्रयाशील धातुएँ ह। स्तंभ ग्राफ पर
आवत सारणी का एक समूह ऐसा ही दखता है।

प्र.7 परमाणुओं के वषय म और अ धक जानने के लए आप नीचे दए गए लक दे ख सकते ह।

पुस्तक कोलोराडो वश्व वद्यालय के दो PhET प्र तरूपण दे ती है। दोन नःशुल्क ह और कसी भी ाउज़र म चलते ह।

https://phet.colorado.edu/en/simulations/rutherford-scattering — प्लम पु डग परमाणु और
ना भक य परमाणु, दोन पर अल्फा कण दा गए और साथ-साथ दे खए। ध्यान द जए क प्लम पु डग म केवल अत्यंत सूक्ष्म
वक्षेपण होते ह जब क ना भक य परमाणु कुछ कण को सीधे लौटा दे ता है। फर ना भक म प्रोटॉन क संख्या बढ़ाइए और
दे खए क वक्षेपण कैसे प्रबल होते जाते ह।
https://phet.colorado.edu/en/simulations/isotopes-and-atomic-mass — न्यूट्रॉन जोड़कर एवं
घटाकर कसी तत्व के सम ा नक बनाइए और उनक प्रचुरता बदलकर औसत परमाणु द्रव्यमान म प रवतन दे खए। क्लोरीन
को 75% 35Cl एवं 25% 37Cl पर र खए और जाँ चए क 35.5 u मलता है — ठ क वही जो पृष्ठ 155 पर प रक लत है।

संकेत: प्र तरूपण खोलने से पहले ल खए क आप क्या होने क अपेक्षा करते ह। फर चलाइए। जन क्षण म
प्र तरूपण आपके पूवानुमान से असहमत हो, वही आपको वास्तव म कुछ सखाएँगे — वष 1911 म गाइगर एवं
मासडेन के साथ ठ क यही हुआ था।

खोज जारी है… — पृष्ठ 161

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आगे ले जाने के लए एक खुला प्रश्न

खोज जारी है …

प्र.1 क्या परमाणु के भीतर होने वाली प्रत्येक प्र क्रया को पूण रूप से समझना संभव है?

इसका कोई न त उत्तर नह है, और यही ईमानदार त है। परंतु हम स्पष्ट रूप से यह कह सकते ह क हम क्या जानते ह, क्या
बदला है और क ठनाई कहाँ है।
इस अध्याय का इ तहास क्या संकेत दे ता है। हर पीढ़ को अपना मॉडल पूण लगा, और हर पीढ़ को सुधारा गया।

डाल्टन: परमाणु अ वभाज्य है — कैथोड करण एवं रे डयोध मता ने उलट दया।
टॉमसन: आवेश एक गोले म फैला है — स्वण प णका प्रयोग ने उलट दया।
रदरफोड: इलेक्ट्रॉन ग्रह क भाँ त प रक्रमा करते ह — ा यत्व क व्याख्या नह कर सका।
बोर: इलेक्ट्रॉन न त कोश म — बाद म यह एक स न्नकटन सद्ध हुआ।
आज: इलेक्ट्रॉन को मेघ के रूप म व णत कया जाता है। हम उस क्षेत्र का पूवानुमान लगा सकते ह जहाँ उसके होने क
संभावना सवा धक है, परंतु यह नह बता सकते क कसी क्षण वह ठ क कहाँ है।

वास्त वक क ठनाई कहाँ है। बोर क कक्षा से इलेक्ट्रॉन मेघ तक का प रवतन केवल बेहतर चत्र बनाना नह है। यह इस बात का
कथन है क कुछ प्रश्न के सट क उत्तर हो ही नह सकते — क इस पैमाने पर प्रकृ त का वणन न त तय से नह , संभावनाओं
से होता है। यह सीमा भौ तक म ही अंत न हत है, केवल हमारे उपकरण क सीमा नह ।
दो पक्ष, दोन तकसंगत

सैद्धां तक रूप से हाँ — बेहतर सद्धांत एवं बेहतर उपकरण (STM, TEM, कण त्वरक) सीमा को नरंतर आगे बढ़ाते रहते ह।
अब हम जानते ह क प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन क भी आंत रक संरचना है, जसक कल्पना रदरफोड नह कर सकते थे।
पूण रूप से नह — क्य क 'इलेक्ट्रॉन इस क्षण ठ क कहाँ है' यह ऐसा प्रश्न हो सकता है जसका उपकरण चाहे जतने अच्छे हो
जाएँ, कोई सट क उत्तर है ही नह ।

सशक्त उत्तर दोन को जोड़ता है: हमारा वणन नरंतर बेहतर एवं अ धक उपयोगी होता जा रहा है, परंतु क्रकेट क गद क
त के वषय म जैसी न श्चतता हम है वैसी न श्चतता परमाणु के भीतर उपलब्ध नह है। हम जो कर सकते ह —
पूवानुमान लगाना, गणना करना और वश्वास के साथ नमाण करना — वह कभी बढ़ना बंद नह हुआ। जैसा अध्याय कहता है,
परमाणु के रहस्य क खोज क यात्रा अभी समाप्त नह हुई है।

इस पर वचार क जए: क्या ऐसा प्रश्न वज्ञान क असफलता है, अथवा वही कारण है जससे वज्ञान चलता रहता
है? इस अध्याय के हर मॉडल को बदला गया, और हर बदलाव ने पछले से बेहतर पूवानुमान दए। यह प्रग त है,
पराजय नह ।

अध्याय — एक नज़र म
परमाणु अ वभाज्य नह है। टॉमसन के कैथोड करण प्रयोग (1897) ने दशाया क प्रत्येक परमाणु म इलेक्ट्रॉन होते ह —
इन पर –1.602 × 10–19 C आवेश होता है जसे प रपाट एवं सु वधा हेतु –1 लया जाता है, और इनका द्रव्यमान परमाणु क

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तुलना म नगण्य होता है।
स्वण प णका प्रयोग (गाइगर एवं मासडेन, 1911) ने परमाणु क संरचना नधा रत क । अ धकांश α-कण सीधे नकल गए,
अतः परमाणु का अ धकांश भाग रक्त है; कुछ कण पुनः लौट आए, अतः संपूण धनावेश एवं लगभग संपूण द्रव्यमान एक अ त
सूक्ष्म, सघन ना भक म क द्रत है। परमाणु का व्यास ≈ 10–10 m, ना भक का व्यास ≈ 10–15 m — अथात 105 गुना का
अंतर।
रदरफोड का ग्रहीय मॉडल ा यत्व क व्याख्या नह कर सका — वृत्ताकार कक्षा म ग तशील इलेक्ट्रॉन त्व रत होता है, अतः
उसे ऊजा का क्षय कर ना भक म गर जाना चा हए। बोर (1913) ने ायी अव ाओं क अ भधारणा से इसे सुलझाया —
न त कोश K, L, M, N (n = 1, 2, 3, 4) जनम इलेक्ट्रॉन बना ऊजा क्षय के ग त करता है।
चैड वक (1932) ने न्यूट्रॉन क खोज क — द्रव्यमान लगभग प्रोटॉन के बराबर, आवेश शून्य। अब द्रव्यमान का हसाब मल
गया: ही लयम के 2 प्रोटॉन + 2 न्यूट्रॉन से द्रव्यमान संख्या 4 बनती है, 2 नह । तीन अवपरमाणुक कण ह — e– (–1), p+
(+1) एवं n0 (0)।
परमाणु क्रमांक Z = प्रोटॉन क संख्या (उदासीन परमाणु म इलेक्ट्रॉन क संख्या भी); यही तत्व क पहचान नधा रत करता
है। द्रव्यमान संख्या A = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन = न्यू क्लऑन क कुल संख्या। परमाणु को AZX के रूप म लखा जाता है, जैसे
12 C।
6
बोर एवं बरी के नयम के अनुसार इलेक्ट्रॉन कोश म भरे जाते ह — कसी कोश म अ धकतम 2n² इलेक्ट्रॉन, बाह्यतम कोश
म अ धकतम 8, तथा भरने का क्रम K → L → M → N। संयोजकता अष्टक (ही लयम म क) पूण करने हेतु त्यागे, ग्रहण
कए अथवा साझा कए गए इलेक्ट्रॉन क संख्या है।
सम ा नक म Z समान परंतु A भन्न होता है (11H, 21H, 31H)। इलेक्ट्रॉ नक वन्यास समान होने के कारण इनके
रासाय नक गुणधम समान होते ह, केवल भौ तक गुणधम भन्न होते ह। समभा रक म A समान परंतु Z भन्न होता है (40Ar,
40K, 40Ca)।

कसी तत्व का औसत परमाणु द्रव्यमान उसके सम ा नक का भा रत औसत होता है — क्लोरीन के लए 35 × 75/100
+ 37 × 25/100 = 35.5 u। क्लोरीन के कसी एक परमाणु का द्रव्यमान 35.5 u नह होता।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 8 एक यात्रा— परमाणु के भीतर
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त्व रत पुनरावृ त्त
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पद मु ख्य मान अथवा नयम अध्याय म कहाँ

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इलेक्ट्रॉन (e–) नािभक के बाहर िस्थत ऋणावेिशत अवपरमाणक
ु आवेश –1.602 × 10–19 C, जसे –1 लया 8.2 टॉमसन का कैथोड
करण प्रयोग
कण जाता है; द्रव्यमान नगण्य

m क्षक आवेश +1; द्रव्यमान ≈ 1 u
coआपे
प्रोटॉन (p+) नािभक में िस्थत धनावेिशत कण
e m . 8.2.2 ग, रदरफोड ारा ag
g l as खोजा गया

a आपे क्षक आवेश 0; द्रव्यमान ≈ 1 u
न्यूट्रॉन (n0) नािभक में िस्थत अनावेिशत कण 8.3.1, चैड वक, वष

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1932

.
m 8.2.2 क, स्वण प णका
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comलगभग संपूण दव्यमान होता है l
ना भक अित सूक्ष्म सघन कें द िजसमें संपूण धनावेश एवं व्यास ≈ 10–15 m, अथात परमाणु से 105
g
m. a प्रयोग

e
गुना छोटा

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कोश / ऊजा स्तर िनिश्चत वृ ाकार पथ िजसमें इले क्टॉन की ऊज n = 1, 2, 3, 4 के लए K, L, M, N 8.2.3 बोर का मॉडल
िनिश्चत होती है

m a s
m .co उदासीन agl
परमाणु क्रमांक नािभक में पोटॉनों की संख्या परमाणु म इलेक्ट्रॉन क संख्या के 8.5 परमाणु क्रमांक

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(Z) बराबर

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द्रव्यमान संख्या न्यूिक्लऑनों (पोटॉन + न्यूटॉन) की कु ल संख्या A = p+ + n0; संकेतन AZX 8.6 द्रव्यमान संख्या

com8.7
(A)

m .
बोर–बरी नयम
m
कोशों में इले क्टॉन भरने के िनयम
as e
प्र त कोश अ धकतम 2n²; बाह्यतम कोश ≤

.co
8; क्रम K → L → M
a g l
यe
संs
m
a
gl इलेक्ट्रॉन
ोजकता रासाय नक व्यवहार नधा रत करते ह; 8 = 8.8 संयोजकता
a
बाह्यतम (संयोजकता) कोश के इले क्टॉन
अष्टक = ायी

se m
संयोजकता
ग हण अथवा साझा िकए गए इले क्टॉन .co
m
संयोजन क्षमता — अष्टक पूण करने हेत ु त्यागे, Na (2,8,1) → 1; O (2,6) → 2; C 8.8 संयोजकता
g l a
em
(2,4) → 4
a
a s
l Z समान परंत ु A
एक ही तत्व के परमाण ु g
सम ा नक
िभन्न हो
a िजनका 1 H, 2 H, 3 H; 12 C, 13 C, 14 C
1 1 1 6 6 6
8.9.1 सम ा नक

co m
समभा रक िभन्न तत्वों के परमाण ु िजनका A समान परंत ु Z 40 Ar, 40 K, 40 Ca

m . 8.9.2 समभा रक

as e
18 19 20

com l
िभन्न हो

. परमाणु a g
e m
as द्रव्यमान
औसत Cl: 35 × 75/100 + 37 × 25/100 = 8.9.1 क

agl
समस्थािनकों की पचुर ता के आधार पर िनकाला
गया भािरत औसत 35.5 u

.c
s e m
m a
उपयोगी उ ोग एवं िचिकत्सा में पयुक्त समस्थािनक 235 U ईंधन, 60 Co कसर उपचार, वज्ञान एवं समाज, पृष्ठ

co agl
92 27

.
सम ा नक 155

m
131 I थायरॉइड, 14 C आयु नधारण

as e
53 6

a g l

co m
m .
m as e
.co


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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 9
TypeSolution
Pages60
Languagehindi
Updated19 Sep 2026