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NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 9 द्रव्य का परमाण्विक आधार

AglaSem पर कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमाण्विक आधार (अन्वेषण) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 9 Science Chapter 9 Atomic Foundations of Matter (Exploration), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 9 द्रव्य का परमाण्विक आधार - Page 1 of 65

About NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 9 द्रव्य का परमाण्विक आधार

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NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 9 द्रव्य का परमाण्विक आधार – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा9

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 9: द्रव्य का परमा वक आधार

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — अन्वेषण

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

162 – 183 23 63 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 64 pages

Page 2

कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 9 · व ान · अन्वे ष ण

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 9: द्रव्य का परमा वक आधार
अंक य तुला पर कए गए दो प्रयोग — एक जल और नमक का, दूसरा सरका और बे कग सोडा का — उस प्रश्न का उत्तर दे दे ते ह जस पर स दय
तक ववाद रहा: क्या रासाय नक प रवतन म द्रव्य का सृजन अथवा वनाश होता है? इन्ह तोल से यह अध्याय दो नयम (द्रव्यमान संरक्षण, स्थर
अनुपात), डॉल्टन का परमाणु सद्धांत, सहसंयोजी एवं आय नक आबंध, रासाय नक सूत्र लखना तथा आ वक द्रव्यमान और सूत्र इकाई द्रव्यमान
क गणना तक पहुँचता है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

अन्वेषण (कक्षा 9) 162 – 183

खं ड प्रश्न

23 63

माध्यम

हन्द

चतन क जए — पृष्ठ 162
अध्याय का आरंभ

चतन क जए

प्र.1 जल व भन्न ोत से प्राप्त कया जा सकता है। क्या जल के ये सभी प्र तदश (sample) रासाय नक रूप से
एकसमान होते ह?

जल स्वयं एकसमान होता है, प्र तदश नह । प्रत्येक प्र तदश को शो धत कर लेने पर वह एक ही यौ गक H₂O रह जाता है जसम
हाइ ोजन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात सदै व 1 : 8 होता है — यही स्थर अनुपात के नयम का कथन है।
भन्नता उन पदाथ म है जो जल अपने साथ लए रहता है —

नद का जल — नलं बत म , घुली हुई ऑक्सीजन, काब नक पदाथ के अंश।
बोरवेल का जल — घुले हुए कै ल्सयम एवं मैग्नी शयम के लवण (इन्ह से जल कठोर बनता है), कभी-कभी आयरन अथवा
फ्लुओराइड।
समुद्र जल — प्र त कलोग्राम लगभग 35 g घुले हुए लवण, जनम अ धकांश सो डयम क्लोराइड है।
वषा जल — वायु से घुली काबन डाइऑक्साइड एवं अन्य गैस।

अतः ये सभी मश्रण ह, और मश्रण म अवयव कसी भी अनुपात म हो सकते ह। इनम से कसी का भी आसवन क जए तो शुद्ध
जल ही प्राप्त होगा — और उसके 9 g से सदै व 1 g हाइ ोजन तथा 8 g ऑक्सीजन ही मलगे।

ऐसा क्य होता है: कसी यौ गक का संघटन इस बात से न त होता है क उसके परमाणु कस प्रकार आबं धत ह
— जल म सदै व दो हाइ ोजन परमाणु एक ऑक्सीजन परमाणु से जुड़े रहते ह। ोत इसे बदल नह सकता। मश्रण
का संघटन कसी आबंध से बँधा नह होता, अतः वह स्वतंत्र रूप से बदल सकता है।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 ऑक्सीजन को कभी O और कभी O2 के रूप म नरू पत कया जाता है। इन दोन प्रतीक म क्या अंतर है?

O ऑक्सीजन के एक परमाणु को नरू पत करता है; O₂ ऑक्सीजन गैस के एक अणु को, जसम -आबंध ारा जुड़े दो
ऑक्सीजन परमाणु होते ह।

प्रतीक क्या नरू पत परमाणुओं क द्रव्यमान क्या स्वतंत्र रूप से रह सकता है?
करता है संख्या

O ऑक्सीजन का एक 1 16 u नह — अकेले O परमाणु के संयोजकता कोश म केवल 6
परमाणु इलेक् ॉन होते ह, अतः वह अस्थायी है

O₂ ऑक्सीजन गैस का 2 32 u हाँ — दोन परमाणुओं का अष्टक पूण है
एक अणु

जब कसी सूत्र के भीतर परमाणु गनने होते ह तब O लखा जाता है — H₂O म, CO₂ म, CaO म। जब उस गैस क बात होती है
जसम हम साँस लेते ह, तब O₂ लखा जाता है।

ऐसा क्य होता है: ऑक्सीजन परमाणु का वन्यास 2, 6 है — अष्टक से दो इलेक् ॉन कम। दो ऑक्सीजन परमाणु
मलकर दो इलेक् ॉन युग्म साझा कर लेते ह, जससे दोन को आठ संयोजकता इलेक् ॉन प्राप्त हो जाते ह। यही -
आबंध O=O है और इसी कारण वायु क मुक्त ऑक्सीजन O₂ है, O नह ।

क्या आप जानते ह? ऑक्सीजन परमाणु तीन-तीन के समूह म भी जुड़ सकते ह और ओज़ोन O₃ बनाते ह। एक ही
तत्व, भन्न अणु और बलकुल भन्न व्यवहार — O₂ धरातल पर हम जी वत रखती है और O₃ ऊपरी वायुमंडल म
पराबगनी करण से हमारी रक्षा करती है।

प्र.3 जल म घुला हुआ नमक वद्युत का सुचालक होता है परंतु चीनी नह , ऐसा क्य ?

क्य क नमक जल म मुक्त आयन म वभा जत हो जाता है और चीनी नह । वलयन म वद्युत धारा उन आवे शत कण से
बहती है जो ग त करने के लए मुक्त ह ; चीनी के वलयन म ऐसा कोई कण नह होता।

साधारण नमक NaCl एक आय नक यौ गक है। इसका ठोस पहले से ही जालक म बँधे Na⁺ और Cl⁻ आयन से बना होता
है। जल इस जालक को तोड़ दे ता है और आयन मुक्त हो जाते ह। बैटरी जोड़ते ही Na⁺ ऋण इलेक् ोड क ओर और Cl⁻ धन
इलेक् ोड क ओर बहने लगते ह — यही बहाव धारा है और बल्ब प्रद प्त हो जाता है।
चीनी एक सहसंयोजी यौ गक है। यह घुलती तो अच्छ तरह है, परंतु जल म जो फैलते ह वे पूरे और वैद्युत उदासीन चीनी के
अणु होते ह। कोई आवेश मुक्त नह होता, कसी इलेक् ोड क ओर कुछ नह बहता, और बल्ब नह जलता।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: घुलना और आय नत होना दो भन्न बात ह। नमक और चीनी दोन घुलते ह; केवल नमक
आय नत होता है। जल म आय नक और सहसंयोजी यौ गक का यही मूल अंतर है।

स्वयं जाँ चए: ठोस नमक भी वद्युत का चालन नह करता। शुष्क क्रस्टल म आयन नयत स्थ तय म बँधे रहते ह,
अतः आवेश होते हुए भी वे ग त नह कर सकते। केवल आवेश का होना पयाप्त नह — उसका ग तशील होना भी
आवश्यक है।

क्रयाकलाप 9.1 — पृष्ठ 163
आइए, एक भौ तक प रवतन का परीक्षण कर

क्रयाकलाप 9.1

प्र.1 आपने क्या अवलोकन कया? (नमक घुल जाने के प ात)

तुला का पाठ्यांक नह बदलता। हलाने से पूव पलड़े पर जल और अ वलेय नमक का ढे र था; हलाने के प ात उस पर स्वच्छ
लवण- वलयन है — और प्रदशक पर वही संख्या दखाई दे ती है।

िलए गए जल का द व्यमान (50 mL) ≈ 50.0 g

िमलाए गए नमक का द व्यमान (एक स्पैच ुला) ≈ 2.0 g
िवलयन का अपेिक्षत द व्यमान = 50.0 g + 2.0 g = 52.0 g

घुलने के पश्चात वास्तिवक पाठ ांक = 52.0 g (±0.1 g के भीतर)

अतः वलयन का द्रव्यमान = जल का द्रव्यमान + नमक का द्रव्यमान। कसी ठोस का जल म घुलना एक भौ तक प रवतन है
और इसम द्रव्यमान न बढ़ता है न घटता है।

ऐसा क्य होता है: नमक कह गया नह है। उसके Na⁺ और Cl⁻ आयन क्रस्टल म जमे रहने के स्थान पर अब जल
के अणुओं के बीच फैल गए ह। जो भी कण पहले पलड़े पर था वह अब भी पलड़े पर ही है। न कुछ जोड़ा गया, न
कुछ बाहर गया — अतः तुला भन्न पा ांक दे ही नह सकती।

यह क जए: इसी क्रयाकलाप को कागज के साथ दोहराइए। कागज को तो लए, पलड़े पर ही उसके छोटे -छोटे
टु कड़े क जए और पुनः तो लए। पा ांक वही रहेगा। टु कड़े करने से आकार बदलता है, द्रव्य क मात्रा नह ।

क्रयाकलाप 9.2 — पृष्ठ 163 – 165

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as e
कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार
a g l AglaSem · NCERT Solutions

आइए, एक रासाय नक प रवतन क जाँच कर
co m
e m.
m as
क्रयाकलाप 9.2

.co a g l
a s emगक व्यव ा 1, चरण 8) आपने क्या अवलोकन कया?
gl
(प्रायो
a
प्र.1

o m
c ag

एक तीव्र बुदबुदाहट — बे कग सोडा के सरके म गरते हीm .
s e मश्रण म जोर से बुलबुले उठने लगते ह, तुला का पा ांक घटने लगता

a gla हो जाता है।
है और अंत म आरं भक पा ांक से कम मान पर स्थर
अ भ क्रया है —

. c om
िसरका + बेिकं ग सोडा (सोिडयम हाइडोजनकाब ने ट ) → काबन डाइऑ क्साइड + अन्य पदाथ
m a s em
. co a gl
a s emकाबन डाइऑक्साइड गैस के बनने के कारण है। इस व्यवस्था म फ्लास्क खुला है, अतः गैस फ्लास्क के मुँह से नकलकर
gl
बुदबुदाहट
a तुला के पलड़े से ही बाहर चली जाती है।
m a s
.co agl
ऐसा क्य होता है: गैस एक उत्पाद है, अतः उसका द्रव्यमान उत्पाद के कुल द्रव्यमान म स म्म लत है। परंतु तुला

a s em
केवल उसी को तोल सकती है जो उस पर रखा हो। CO₂ के कमरे म फैल जाने के प ात वह तुली ही नह जा रही

agl है जतनी गैस बाहर गई।
— और पा ांक ठ क उतना ही घट जाता

co m
m .
m as e
प्र.2
.co
(प्रायो गक व्यव
g l
ा 1, चरण 9) क्या आरं भक और अं तम पाठ्यांक समान ह?
a
a s em
agl उत्तर
नह । अं तम पा ांक आरं भक पा ांक से कम होता है।
se m
com g l a
.
कतना कम, इसका आकलन क जए। लगभग 2 g बे कग सोडा लया गया है और सरका आ धक्य म है, अतः लगभग समस्त
m a
ase
बे कग सोडा अ भ क्रया कर लेता है।

agl
NaHCO₃ का सूत्र इकाई द व्यमान = 23 u + 1 u + 12 u + (16 u × 3) = 84 u
com
m .
e
CO₂ का आि वक द व्यमान = 12 u + (16 u × 2) = 44 u
m l as
.co
पत्येक 84 u NaHCO₃ से 44 u CO₂ पाप्त होती है
m 2.0 g से पाप्त CO₂ का दव्यमान = 2.0 g × 44 ÷ 84 = ≈ 1.0 g a g
l a se
ag
.c
s e m
m a
co agl
अतः लगभग 1 g क कमी अपे क्षत है — जो अंक य तुला पर सरलता से दखाई दे ती है और मापन क उस ±1 अ न तता से कह

m .
e
अ धक है जो अं तम अंक म सदै व रहती है।

g l as
a

co m
m .
m ase
.co


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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार AglaSem · NCERT Solutions

संकेत: लगभग एक ग्राम क कमी गैस के नकलने का पक्का चह्न है। य द पा ांक केवल 0.01 g घटा होता तो
वह प्रायो गक त्रु ट होती, वास्त वक हा न नह ।

प्र.3 एक तीव्र बुदबुदाहट दखाई दे ती है। अं तम पाठ्यांक आरं भक पाठ्यांक से भन्न होता है। इसका क्या कारण हो
सकता है?

क्य क बनी हुई काबन डाइऑक्साइड खुले फ्लास्क से बाहर नकल जाती है, और जो द्रव्यमान पलड़े से चला गया उसे
तोला नह जा सकता।
अ भ क्रया म द्रव्यमान संर क्षत रहता ही है। पूरा हसाब इस प्रकार है —

िसरके का द व्यमान + बेिकं ग सोडा का द व्यमान = CO₂ का द व्यमान + अन्य पदाथ ं का द व्यमान

परंत ु त ल
ु ा अब के वल यह पढ़ रही है : अन्य पदाथ ं का द व्यमान (+ फ्लास्क + गुब्बारा)

अतः अंितम पाठ ांक = आरंिभक पाठ ांक − िनकली हुई CO₂ का द व्यमान

द्रव्यमान संरक्षण का नयम टू टा नह है। दोष प्रयोग म था, नयम म नह — यह प्रयोग एक खुले नकाय म कया गया, जहाँ उत्पाद
बाहर जाने के लए स्वतंत्र है।

CO₂ escapes

अंितम < आरंिभक अंितम = आरंिभक
खुला िनकाय ( यव था 1) व् स् बंद िनकाय ( यव था 2)
व् स्

गैस तुला से बाहर चली जाती है गैस तुला पर ही रहती है

बाईं ओर — खुले फ्लास्क म CO₂ तुला से बाहर चली जाती है और पा ांक घट जाता है। दाईं ओर — गुब्बारा बाँध दे ने पर वही गैस भीतर
ही रुक जाती है, पलड़े पर बनी रहती है और पा ांक स्थर रहता है।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य होता है: रासाय नक तुला अपनी सीमा के भीतर के द्रव्य को ही मापती है। कसी संरक्षण नयम क जाँच
से पूव यह सु न त करना आवश्यक है क उस सीमा को कोई पार न कर सके। प्रायो गक व्यवस्था 2 म गुब्बारा
फ्लास्क को बंद करके ठ क यही सुधार करता है।

प्र.4 (प्रायो गक व्यव ा 2, चरण 8) आपने क्या अवलोकन कया?

वही तीव्र बुदबुदाहट — और इस बार गुब्बारा फूल जाता है। बे कग सोडा के सरके म गरते ही मश्रण बुदबुदाता है, और काबन
डाइऑक्साइड के पास कह और जाने का माग न होने के कारण वह गुब्बारे को फुला दे ती है।
इस बीच तुला का पा ांक वह का वह रहता है।

ऐसा क्य होता है: गैस अब भी उतनी ही बन रही है जतनी व्यवस्था 1 म बनी थी — 2 g बे कग सोडा से लगभग
1 g CO₂। अंतर केवल इतना है क गुब्बारा उसे नकाय के भीतर रोके रखता है। उसका द्रव्यमान अब भी पलड़े पर
ही है, अतः तुला के पास बदलने का कोई कारण नह ।

स्वयं जाँ चए: फूला हुआ गुब्बारा कुछ वायु अवश्य हटाता है और उस पर थोड़ा उत्प्लावन बल लगता है, परंतु यह
प्रभाव कुछ मलीग्राम का ही होता है और तुला के अं तम अंक क ±1 अ न तता म समा जाता है।

प्र.5 (प्रायो गक व्यव ा 2, चरण 11) क्या इस प्रयोग म आरं भक और अं तम पाठ्यांक समान ह?

हाँ। अं तम पा ांक आरं भक पा ांक के समान होता है (अं तम अंक म ±1 क सामान्य अ न तता के साथ)।

िसरके का द व्यमान + बेिकं ग सोडा का द व्यमान (पूव) = CO₂ का द व्यमान + अन्य पदाथ ं का द व्यमान

(पश्चात)

अिभि या से पूव कु ल द व्यमान = अिभि या के पश्चात कु ल द व्यमान

यही द्रव्यमान संरक्षण के नयम का प्रायो गक प्रमाण है — कसी रासाय नक अ भ क्रया म द्रव्य का न तो सृजन कया जा सकता है
और न ही उसे नष्ट कया जा सकता है।

ऐसा क्य होता है: आरंभ म उप स्थत परमाणु — बे कग सोडा और सरके के सो डयम, काबन, हाइ ोजन और
ऑक्सीजन परमाणु — अंत म भी सब उप स्थत ह। वे केवल नए पदाथ के रूप म पुनव्यव स्थत हुए ह। जब कोई
परमाणु न नष्ट हुआ और न कह से आया, तो कुल द्रव्यमान बदल ही नह सकता।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार AglaSem · NCERT Solutions

संकेत: व्यवस्था 1 और 2 म केवल एक ही अंतर है — नकाय बंद है या नह । एक बार म केवल एक चर बदलना ही
कसी प्रयोग को प्रमाण बनाता है।

क्रयाकलाप 9.3 — पृष्ठ 165
आइए, नयम क जाँच कर — सामू हक क्रयाकलाप

क्रयाकलाप 9.3

प्र.1 (चरण 7) आपने क्या अवलोकन कया?

तुरंत एक दुग्ध- ेत अवक्षेप बन जाता है जब बे रयम क्लोराइड का वलयन सो डयम सल्फेट के वलयन म डाला जाता है। स्वच्छ
द्रव धुँधला और सफ़ेद हो जाता है।

सोिडयम सल्फेट + बेिरयम क्लोराइड → बेिरयम सल्फे ट + सोिडयम क्लोराइड

Na₂SO₄ + BaCl₂ → BaSO₄↓ + 2 NaCl

यह श्वेत ठोस बे रयम सल्फेट है जो जल म अघुलनशील है और इसी लए नीचे बैठ जाता है। साथ बना सो डयम क्लोराइड वलयन म
ही घुला रहता है, अतः दखाई नह दे ता।

ऐसा क्य होता है: दोन आरं भक वलयन म मुक्त आयन ह — एक फ्लास्क म Na⁺ और SO₄²⁻, दूसरे म Ba²⁺
और Cl⁻। मलने पर Ba²⁺ और SO₄²⁻ एक-दूसरे को इतने प्रबल रूप से आक षत करते ह क वे वलयन म रहने के
स्थान पर ठोस जालक म बँध जाते ह। Na⁺ और Cl⁻ म ऐसी प्रवृ त्त नह , अतः वे मुक्त बने रहते ह। इस प्रकार बना
नया अघुलनशील ठोस अवक्षेप कहलाता है और उसका बनना ही रासाय नक प रवतन का प्रमाण है।

प्र.2 (चरण 9) क्या वलयन को म श्रत करने के प ात आपको पाठ्यांक म कोई प रवतन दखाई दे ता है?

नह — पाठ्यांक अप रव तत रहता है। दोन शंक्वाकार फ्लास्क का कुल द्रव्यमान मश्रण के प ात भी वही रहता है जो पहले
था।

Na₂SO₄ िवलयन का द व्यमान + BaCl₂ िवलयन का द व्यमान

= BaSO₄ अवक्षेप का द व्यमान + NaCl िवलयन का द व्यमान

िमश्रण से पूव कु ल द व्यमान = िमश्र ण के पश्चात कु ल द व्यमान

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार AglaSem · NCERT Solutions

इससे उस अ भ क्रया के लए द्रव्यमान संरक्षण के नयम क पु ष्ट होती है जसम ठोस बनता है।

ऐसा क्य होता है: क्रयाकलाप 9.2 के वपरीत इस अ भ क्रया म कोई गैस नह बनती। फ्लास्क से कुछ बाहर जा
ही नह सकता, अतः द्रव्यमान क दृ ष्ट से खुला फ्लास्क भी एक बंद नकाय है। प्रत्येक परमाणु पलड़े पर बना रहता
है, इस लए तुला का पा ांक बदल ही नह सकता।

संकेत: पुस्तक कहती है क दोन फ्लास्क पूरे समय पलड़े पर ही रखे रह, खाली फ्लास्क भी। स्थानांतरण के समय
फ्लास्क 'ख' क द वार पर वलयन क सूक्ष्म परत सदै व चपक रह जाती है; य द आप 'ख' को हटा लगे तो वह
परत भी तुला से हट जाएगी और आप गलती से द्रव्यमान क कमी लख लगे।

वै ा नक क भाँ त सो चए — पृष्ठ 166
9.1 द्रव्यमान संरक्षण का नयम

वै ा नक क भाँ त सो चए

प्र.1 आपको एक रासाय नक अ भ क्रया द गई है जसमे जक, तनु हाइ ोक्लो रक अम्ल के साथ अ भ क्रया कर
जक क्लोराइड और हाइ ोजन गैस बनाता है। जक + हाइ ोक्लो रक अम्ल (तनु) → जक क्लोराइड +
हाइ ोजन। इस अ भ क्रया का उपयोग इस प रकल्पना का परीक्षण करने के लए क जए क कसी भी
रासाय नक अ भ क्रया म द्रव्यमान संर क्षत रहता है। इसके लए एक प्रयोग क रूपरेखा बनाकर इसका नष्पादन
क जए। आप क्रयाकलाप 9.2 म दशाई गई व्यव ा से एक भन्न प्रकार क व्यव ा का उपयोग कर सकते ह।

प रकल्पना: अ भ क्रया Zn + 2 HCl → ZnCl₂ + H₂ म अ भ क्रया के प ात कुल द्रव्यमान वही रहेगा जो पूव था, बशत कोई भी
हाइ ोजन बाहर न नकलने पाए।
अ भकल्पना क मुख्य समस्या। हाइ ोजन सभी गैस म सबसे हल्क है और बहुत तेज़ी से नकलती है। अतः पूरा प्रयोग एक ही
बात पर टका है — नकाय बंद होना चा हए, और वह जक के अम्ल को छू ने से पहले बंद होना चा हए।
उपकरण: 250 mL शंक्वाकार फ्लास्क, उसम समा जाने वाली एक छोट परखनली, गुब्बारा एवं धागा, दानेदार जक, तनु
हाइ ोक्लो रक अम्ल तथा 0.01 g तक पढ़ने वाली अंक य तुला।
वध

1. शंक्वाकार फ्लास्क म लगभग 25 mL तनु HCl ली जए।
2. छोट परखनली म लगभग 1.3 g दानेदार जक ली जए और परखनली को सीधा फ्लास्क के भीतर उतार द जए, जससे
जक अभी अम्ल म न गरे।
3. फ्लास्क के मुँह पर गुब्बारा चढ़ाकर धागे से कसकर बाँध द जए।
4. इस पूरे बंद नकाय को तुला पर र खए और आरं भक पाठ्यांक m₁ अ भले खत क जए।
5. फ्लास्क को पलड़े से उठाए बना तरछा क जए जससे परखनली लुढ़क जाए और जक अम्ल म गर जाए। तुरंत बुलबुले उठने
लगते ह और गुब्बारा फूलने लगता है।
6. बुदबुदाहट पूणतः रुक जाने तक प्रतीक्षा क जए, फर अं तम पाठ्यांक m₂ अ भले खत क जए।
7. पूरे प्रयोग को तीन बार दोहराइए।

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as e
कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार
a g l AglaSem · NCERT Solutions

1.3 g जक ही क्य ? क्य क उत्पन्न हाइ ोजन इतनी अवश्य होनी चा हए क तुला उसे पकड़ सके।
co m
em.
m l as
m .co
Zn का परमाणु द व्यमान = 65 u; H₂ का आि वक द व्यमान = 2 u
a g
l a se
g
Zn + 2 HCl → ZnCl₂ + H₂
a65 u Zn से 2 u H₂ पाप्त होती है

co m
. ag
1.3 g Zn से पाप्त H₂ का द व्यमान = 1.3 g × 2 ÷ 65 = 0.04 g
se m
यह तुला क 0.01 g क सूक्ष्मग्रा हता का चार गुaनg
l a
ा है, अतः खुले फ्लास्क वाले नयंत्रण प्रयोग म स्पष्ट कमी पढ़ जा सकेगी।
समीकरण का द्रव्यमान संतुलन भी जाँच ली जए —

co m
em.
m l as
.co g
अिभकारक : 65 u (Zn) + 2 × 36.5 u (HCl) = 138 u

m a
l a se
उत्पाद : 136 u (ZnCl₂) + 2 u (H₂) = 138 u ✓

a g
s
अपे क्षत प रणाम

om a
आरं भक पाठ्यांकm
e
. c agl
s
M₁ अं तम पाठ्यांक M₂ M₂ − M₁
la
प्रयास

1 (बंद ) 176.42agg 176.42 g 0.00 g

co m −0.01 g
.
2 (बंद ) 178.05 g 178.04 g

e m
m l as
.co g
175.90 g
a
3 (खुल ा — िनयंत्र ण) 175.86 g −0.04 g

a s em
gl
नष्कष: बंद नकाय वाले प्रयास म m₂ = m₁ रहा, वह भी ±0.01 g के भीतर — अथात अं तम अंक क अ न तता के भीतर।
a अतः द्रव्यमान संर क्षत रहता है। खुले नयंत्रण प्रयास म 0.04 g क कमी आई, जो हाइ ोजन के प रक लत द्रव्यमान के ठ क

se m
com a
बराबर है — इससे सद्ध होता है क खुले पात्र म होने वाली ‘हा न’ पलड़े से गैस के चले जाने क हा न है, ब्र ांड से द्रव्य के लोप क

. a g l
m
नह ।

ase
agl
सुरक्षा प्रथम: हाइ ोजन अत्य धक ज्वलनशील है। इसे कसी भी ज्वाला से दूर क जए, इतना कसा हुआ काग मत
लगाइए क दाब बढ़ जाए — गैस को गुब्बारे म जाने द जए। तनु अम्ल त्वचा को जलाता है, अतः नेत्र-रक्षक अवश्य

co m
.
पह नए।

se m
o m l a
m .cऐसा क्य होता है: जक के परमाणु लुप्त नह हुए ह; वे वलयन म Zn²⁺ aकेgरूप म ह। HCl म क्लोरीन से जुड़ी
l a se
ag हाइ ोजन केवल H₂ के रूप म मुक्त हो गई है। परमाणु पुनव्यव स्थत हुए ह, न सृ जत हुए ह न नष्ट — और यही

.c
m
डॉल्टन का दूसरा अ भगृहीत तथा द्रव्यमान संरक्षण के नयम का कारण है।

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सो चए और बताइए — पृष्ठag166

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार AglaSem · NCERT Solutions

9.1 द्रव्यमान संरक्षण का नयम

सो चए और बताइए

प्र.1 एक वद्याथ कसी खुले बीकर म 10 g एथेनॉल जलाता है। अ भ क्रया पूण होने के प ात बीकर म कोई अवशेष
शेष नह रहता है। क्या इससे यह नष्कष नकलता है क द्रव्यमान संरक्षण के नयम का उल्लंघन हुआ है?
व्याख्या क जए।

नह , नयम का उल्लंघन नह हुआ है। बीकर म कुछ शेष इस लए नह बचता क्य क इस दहन के सभी उत्पाद गैस ह, और खुले
बीकर म गैस उड़ जाती ह। द्रव्य स्थान बदल गया है, लुप्त नह हुआ।
एथेनॉल वायु क ऑक्सीजन म जलता है —

C₂H₅OH + 3 O₂ → 2 CO₂ + 3 H₂O

अब द्रव्यमान का हसाब लगाइए। H = 1 u, C = 12 u, O = 16 u ली जए।

एथे न ॉल C₂H₅OH का आि वक द व्यमान = (12 × 2) + (1 × 6) + 16 = 46 u

पयुक्त ऑक्सीजन : 3 O₂ = 3 × 32 u = 96 u, अतः 10 g एथे न ॉल के िलए

O₂ का द व्यमान = 10 g × 96 ÷ 46 = 20.87 g

बनी काबन डाइऑक्साइड : 2 CO₂ = 88 u → 10 g × 88 ÷ 46 = 19.13 g

बना जल : 3 H₂O = 54 u → 10 g × 54 ÷ 46 = 11.74 g

अिभकारकों का कु ल द व्यमान = 10 g + 20.87 g = 30.87 g

उत्पादों का कु ल द व्यमान = 19.13 g + 11.74 g = 30.87 g

अिभकारकों का द व्यमान = उत्पादों का द व्यमान ✓

अतः तुला का पा ांक घटता अवश्य, परंतु केवल इस लए क 30.87 g गैस बीकर से बाहर चली गई जब क 20.87 g ऑक्सीजन
चुपचाप वायु से भीतर आ गई। इनम से कोई भी आवागमन तोला नह गया।

ऐसा क्य होता है: कोई भी संरक्षण नयम बंद नकाय के वषय म कथन होता है। खुले बीकर म जलाना तो नकाय
के खुलेपन क पराकाष्ठा है — द्रव्य ऑक्सीजन के रूप म भीतर आता है और काबन डाइऑक्साइड तथा जलवाष्प
के रूप म बाहर जाता है। नयम क जाँच के लए नकाय को बंद करना ही होगा, ठ क जैसे क्रयाकलाप 9.2 क
व्यवस्था 2 म कया गया।

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स्वयं जाँ चए: तुला पर रखे बंद जार के भीतर मोमबत्ती जलाइए। मोम घटता रहता है फर भी पा ांक स्थर रहता
है — क्य क CO₂ और जलवाष्प जार के भीतर ही बंद ह।

प्र.2 जब 20 g हाइ ोजन, 160 g ऑक्सीजन के साथ पूणतः अ भ क्रया करता है तब द्रव्यमान संरक्षण के नयम के
अनुसार जल क कतनी मात्रा का नमाण होगा?

180 g जल।

द व्यमान संरक्षण के िनयम के अनुसार,

जल का द व्यमान = हाइडोजन का द व्यमान + ऑक्सीजन का द व्यमान

= 20 g + 160 g

= 180 g

र अनुपात के नयम से जाँच। जल म हाइ ोजन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात सदै व 1 : 8 होता है।

20 g : 160 g = 1 : 8 ✓

अनुपात ठ क वही है, इसी लए प्रश्न म कहा गया है क हाइ ोजन पूणतः अ भ क्रया करता है — कोई भी गैस शेष नह बचती। य द
20 g हाइ ोजन के साथ केवल 100 g ऑक्सीजन ली जाती, तो सारी 100 g ऑक्सीजन मात्र 12.5 g हाइ ोजन के साथ
अ भ क्रया करती, 112.5 g जल बनता और 7.5 g हाइ ोजन बना अ भ क्रया के शेष रह जाती।

ऐसा क्य होता है: दोन नयम साथ-साथ काय करते ह। द्रव्यमान संरक्षण का नयम कुल न त करता है; स्थर
अनुपात का नयम यह तय करता है क प्रत्येक अ भकारक क कतनी मात्रा वास्तव म भाग ले सकेगी। न त
अनुपात से अ धक अ भकारक डालने से उत्पाद नह बढ़ता — अ त रक्त मात्रा शेष रह जाती है।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 167

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9.2 र अनुपात का नयम

सो चए और बताइए

प्र.3 कसी यौ गक म सल्फर और ऑक्सीजन के द्रव्यमान का प्र तशत क्रमशः 40% और 60% है। इसी यौ गक के
कसी प्र तदश म 20 g सल्फर है तो ऑक्सीजन का द्रव्यमान कतना होना चा हए जससे र अनुपात के नयम
का पालन हो?

30 g ऑक्सीजन।

यौिगक में द व्यमान के अनुसार S : O = 40 : 60 = 2 : 3

अतः ऑक्सीजन का द व्यमान = सल्फर का द व्यमान × 3 ÷ 2

= 20 g × 3 ÷ 2

= 30 g

जाँच: प्र तदश का कुल द्रव्यमान = 20 g + 30 g = 50 g। सल्फर का प्र तशत = 20 ÷ 50 × 100 = 40 %, ऑक्सीजन का =
30 ÷ 50 × 100 = 60 % ✓

ऐसा क्य होता है: स्थर अनुपात का नयम कहता है क यौ गक का द्रव्यमान-संघटन न त रहता है, प्र तदश चाहे
कतना भी बड़ा हो और कह से भी आया हो। अतः प्र तशत 40 % और 60 % ही रहगे, चाहे आपके पास 5 g
यौ गक हो या 5 kg — इस लए प्रत्येक प्र तदश म S : O का द्रव्यमान अनुपात 2 : 3 ही होगा।

क्या आप जानते ह? S = 32 u और O = 16 u लेने पर 20 g : 30 g का अथ है 20/32 : 30/16 = 0.625 :
1.875 = 1 : 3 परमाणुओं क संख्या के अनुसार — अतः यह यौ गक SO₃, अथात सल्फर ाइऑक्साइड है।

प्र.4 काबन मोनोक्सॉइड (CO) म काबन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात 3:4 है। काबन मोनोक्सॉइड बनाने के
लए 9 g काबन से ऑक्सीजन क कतनी मात्रा संयोजन करेगी?

12 g ऑक्सीजन।

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द व्यमान के अनुसार C : O = 3 : 4

ऑक्सीजन का द व्यमान = काबन का द व्यमान × 4 ÷ 3

=9g×4÷3

= 12 g

जाँच: 9 g : 12 g = 3 : 4 ✓। द्रव्यमान संरक्षण के नयम से बनी काबन मोनोक्सॉइड का कुल द्रव्यमान = 9 g + 12 g = 21 g।

ऐसा क्य होता है: 3 : 4 का अनुपात वस्तुतः परमाणु द्रव्यमान का ही रूप है। CO के एक अणु म एक C परमाणु
(12 u) और एक O परमाणु (16 u) होता है, और 12 : 16 = 3 : 4। चूँ क यौ गक का प्रत्येक अणु एक ही प्रकार
से बना है, अतः उसक कसी भी मात्रा म द्रव्यमान अनुपात वही 3 : 4 रहेगा।

संकेत: य द काबन डाइऑक्साइड पूछ जाती तो अनुपात 12 : 32 = 3 : 8 होता और 9 g काबन को 24 g
ऑक्सीजन चा हए होती। वही दो तत्व, भन्न यौ गक, भन्न न त अनुपात — नयम एक समय म एक ही यौ गक के
वषय म है।

प्र.5 र अनुपात का नयम केवल यौ गक के लए सत्य होता है परंतु मश्रण के लए नह । कारण द जए।

क्य क यौ गक म परमाणु रासाय नक आबंध ारा एक न त क्रम म बँधे होते ह, जब क मश्रण केवल भौ तक मेल है
जसके अवयव कसी भी मात्रा म हो सकते ह।

यौ गक मश्रण

अवयव िकस रासाय नक आबंध ारा — प्र त अणु अथवा सूत्र इकाई प्रत्येक बँधे होते ही नह ; अवयव केवल साथ-साथ पड़े
पकार बँधे है ं तत्व के परमाणुओं क संख्या न त रहते ह

द व्यमान संघ टन श्
िनि चत — जल में सदै व H : O = 1 : 8 कोई भी मान

उदाहरण H₂O; 9 g से सदै व 1 g H और 8 g O H₂ एवं O₂ गैस का मश्रण, अथवा जल म
नमक, कसी भी अनुपात म

गण
ु धम नए गुणधम, जो तत्व से बलकुल भन्न होते ह प्रत्येक अवयव अपने गुणधम बनाए रखता है

जल म दो हाइ ोजन परमाणु एक ऑक्सीजन परमाणु से सदै व आबं धत रहते ह। इस गनती को बदले बना पदाथ नह बदला जा
सकता; बदल द जए तो वह जल रह ही नह जाएगा। अतः द्रव्यमान अनुपात 2 × 1 u : 1 × 16 u = 1 : 8 पर बँधा रहता है।
मश्रण पर ऐसा कोई बंधन नह । आप एक लीटर जल म 1 g नमक घो लए अथवा 30 g — दोन ही लवण- वलयन कहलाएँगे।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार
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ऐसा क्य होता है: न त अनुपात डॉल्टन के इस अ भगृहीत से आता है क परमाणु सरल पूणाक के अनुपात म
संयो जत होते ह। पूणाक धीरे-धीरे नह खसक सकता — 2.3 हाइ ोजन परमाणु वाला जल का e
s m अणु होता ही
m a
l ध नह रहता।
कोई
co म परमाणुओं का कोई संयोजन होता ही नह , अतः अनुपात पर कोईaप्रgतबं
नह । मश्रण.बनाने

a s em
agl

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ag
दो वद्या थय X और Y ने कॉपर और ऑक्सीजन को क्रमशः 4:1 और 8:2 के अनुपात म संयो जत करके कॉपर
.
प्र.6

e m
as
का ऑक्साइड बनाया। क्या उनके प रणाम र अनुपात के नयम क पु ष्ट करते ह? व्याख्या क जए।

a g l

हाँ, उनके प रणाम नयम क पु ष्ट करते ह — क्य क 8 : 2 वही अनुपात है जो 4 : 1 है।
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em.
co:mCu : O = 4 : 1
िव ाथ .X g l as
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aिवseाथ Y : Cu : O = 8 : 2 = (8 ÷ 2) : (2 ÷ 2) = 4 : 1
agl
दोनों अनुपात एकसमान है।
ं

om a s
.
em है —
c agl
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प्र तशत के रूप म तुलना क जए, यही सबसे उ चत परीक्षण

वद्याथ
agl
लया गया CU : O कॉपर % ऑक्सीजन %

com
4:1
m .
e
X 4/5 × 100 = 80 % 1/5 × 100 = 20 %

m l a s2/10
.co ag
em
Y 8:2 8/10 × 100 = 80 % × 100 = 20 %

a s
agl दो स्वतंत्र नमाण से द्रव्यमान संघटन एक ही नकला — स्थर अनुपात का नयम ठ क यही कहता है। वद्याथ Y ने केवल उसी
se m
ऑक्साइड क दुगुनी मात्रा बनाई है।

com g l a
m . a
e
as है — जैसे 1 कटोरी दाल के साथ 2 रोट और 2 कटोरी दाल के साथ 4
ऐसा क्य होता है: अनुपात प रमाण नह , समानुपात बताता है। दोन संख्याओं को दुगुना करने से प्र तदश का

a g l
आकार दुगुना होता है, संघटन वही रहता
रोट एक ही अनुपात है।

. com
mका अथ है 4/63.5 : 1/16
क्या आप जानते ह? Cu = 63.5 u और O = 16 u लेने पर 4 : 1 द्रव्यमान अनुपeात
s
m a
gl कॉपर (II) ऑक्साइड बनाया है।
m .c≈o1 : 1 परमाणुओं के अनुसार — अतः दोन वद्या थय ने CuO, अथातaकाला
l a se
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क्या होगा य द… — पृष्ठ 168
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9.3 डॉल्टन का परमाणु सद्धांत

क्या होगा य द…

प्र.1 क्या होगा य द… परमाणु एक न त अनुपात म संयो जत न होकर कसी भी अनुपात म जुड़ सकते ह? यह
हमारे आस-पास के पदाथ को कस प्रकार प्रभा वत करेगा?

तब हमारे आस-पास कसी भी पदाथ क कोई भरोसेमंद पहचान ही नह रह जाती। न त अनुपात ही कसी पदाथ को
पदाथ बनाता है; उसे हटा द जए तो रसायन वज्ञान एक वज्ञान के रूप म ढह जाएगा।

कसी पदाथ का नाम रखा ही नह जा सकेगा। ‘जल’ का अथ एक वस्तु नह रह जाएगा। एक प्र तदश H₂O होगा, दूसरा
H₃O, तीसरा H₁.₄O — और प्रत्येक का क्वथनांक, घनत्व और स्वाद भन्न। यह शब्द एक यौ गक नह , द्रव के पूरे कुल का
नाम बन जाएगा।
र अनुपात का नयम और गु णत अनुपात का नयम दोन ही असत्य हो जाएँगे, और उनके साथ डॉल्टन का पाँचवाँ
अ भगृहीत भी। तब परमाणु सद्धांत के पास समझाने को कुछ बचेगा ही नह ।
रासाय नक सूत्र, संयोजकता और आ वक द्रव्यमान नरथक हो जाएँगे। न आप H₂O लख सकगे, न सूत्र इकाई
द्रव्यमान नकाल सकगे, न यह बता सकगे क कतने पदाथ से कतना पदाथ अ भ क्रया करेगा।
औष ध बनाना असंभव हो जाएगा। पैरा सटामोल क गोली इस लए काम करती है क्य क उसका प्रत्येक अणु एकसमान है।
य द परमाणुओं का अनुपात हर बार बदलता रहे तो वही गोली कसी दन नष्प्रभावी और कसी दन वषैली हो सकती है।
सजीव अ स्तत्व म ही नह आ सकते। हीमोग्लो बन ऑक्सीजन इस लए वहन करता है क्य क उसक संरचना ठ क-ठ क
न त है; यादृ च्छक अनुपात म बना प्रोट न न मुड़ेगा, न काय करेगा, और न अगली पीढ़ म ठ क-ठ क प्र त ल पत होगा।

वास्तव म ऐसा क्य नह होता: अनुपात इस लए न त है क्य क परमाणु अपना अष्टक पूण करने के लए आबंध
बनाते ह, और अष्टक इलेक् ॉन क पूणाक संख्या है। ऑक्सीजन को ठ क दो इलेक् ॉन चा हए और हाइ ोजन को
ठ क एक — इसी लए एक ऑक्सीजन के साथ दो हाइ ोजन जुड़ते ह, 2.3 नह । इलेक् ॉन क गनती म पूणाक ही
सूत्र म पूणाक लाते ह।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 168

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9.3 डॉल्टन का परमाणु सद्धांत

सो चए और बताइए

प्र.7 नीचे दए गए अ भकथन एवं कारण प ढ़ए और उनके संबंध म आगे दए गए वकल्प म से सही वकल्प का चयन
क जए। अ भकथन — 2 g हाइ ोजन 16 g ऑक्सीजन के साथ संयो जत होकर 18 g जल का नमाण करती
है। कारण — डॉल्टन के परमाणु सद्धांत के अनुसार परमाणु, द्रव्यमान के सरल पूणाक अनुपात म संयोजन कर
यौ गक बनाते ह। (i) अ भकथन और कारण दोन सत्य ह और कारण, अ भकथन क सही व्याख्या है। (ii)
अ भकथन और कारण दोन सत्य ह और कारण, अ भकथन क सही व्याख्या नह है। (iii) अ भकथन सत्य है
परंतु कारण असत्य है। (iv) अ भकथन असत्य है परंतु कारण सत्य है।

वकल्प (ii) — अ भकथन और कारण दोन सत्य ह और कारण, अ भकथन क सही व्याख्या नह है।
क्या अ भकथन सत्य है? हाँ, दो कारण से।

िलया गया अनुपात, H : O = 2 g : 16 g = 1 : 8 — जल का िनिश्चत अनुपात ✓

जल का द व्यमान = 2 g + 16 g = 18 g — द व्यमान संरक्षण के िनयम से ✓

(सूत्र से जाँच : H₂O = (1 u × 2) + 16 u = 18 u, और H : O = 2 : 16 = 1 : 8)

क्या कारण सत्य है? यह डॉल्टन के पाँचव अ भगृहीत का कथन है — परमाणु सरल पूणाक के अनुपात म संयो जत होकर यौ गक
बनाते ह — और यह एक सही सद्धांत है।
क्या कारण, अ भकथन क व्याख्या करता है? नह । अ भकथन म दो बात ह और डॉल्टन का पूणाक-अनुपात वाला अ भगृहीत
इनम से कोई नह दे ता —

द्रव्यमान अनुपात 1 : 8 होने क बात प्राउस्ट के र अनुपात के नयम से आती है, डॉल्टन के पूणाक- नयम से नह ।
2 g + 16 g से ठ क 18 g मलने क बात द्रव्यमान संरक्षण के नयम से आती है।

डॉल्टन का अ भगृहीत यह बताता है क कतने परमाणु जुड़गे (2 H और 1 O)। वह स्वयं यह नह बताता क कतना द्रव्यमान व्यय
होगा या कतना उत्पन्न होगा। अतः कारण एक सत्य कथन के साथ रखा गया दूसरा सत्य कथन है — परंतु उसका कारण नह है।

संकेत: कारण को कड़ाई से पढ़ तो उसम एक और त्रु ट है — डॉल्टन का अ भगृहीत परमाणुओं क संख्या के
अनुपात के वषय म है, द्रव्यमान के अनुपात के वषय म नह । इस पाठ पर (iii) चुनने वाले वद्याथ ने एक
वास्त वक बात पकड़ी है; परंतु यहाँ 1 : 8 स्वयं भी एक सरल पूणाक द्रव्यमान अनुपात है, अतः कारण को सत्य
मानना ही उ चत है और नणायक बदु यह है क वह अ भकथन क व्याख्या नह करता। इसी लए उत्तर (ii) है।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 170

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9.4.1 क तत्व के अणु

सो चए और बताइए

प्र.8 नाइ ोजन म पाँच संयोजकता इलेक् ॉन होते ह। नाइ ोजन अणु (N2) क संरचना आरे खत क जए।

नाइ ोजन (परमाणु क्रमांक 7) का वन्यास 2, 5 है। पाँच संयोजकता इलेक् ॉन होने पर उसे अष्टक पूण करने के लए तीन और
चा हए। कोई भी परमाणु दूसरे से तीन इलेक् ॉन ले नह सकता, अतः दोन परमाणु तीन युग्म साझा करते ह — त्र-आबंध।

× ×
× N ×
×
N

N≡N
× एक नाइटोजन परमाणु का इलेक्टॉन
दू सरे नाइटोजन परमाणु का इलेक्टॉन
प्रत्येक नाइ ोजन परमाणु साझा क्षेत्र म तीन इलेक् ॉन दे ता है और अपने पास एक एकाक युग्म रखता है। कसी भी परमाणु के चार ओर
ग नए : 6 साझा + 2 एकाक = 8 इलेक् ॉन, अथात पूण अष्टक।

पत्येक N के संयोजकता इलेक्टॉन = 5

अष्टक पूण करने हेत ु आवश्यक इलेक्टॉन = 8 − 5 = 3

अतः तीन युग् म साझा होते है ं → ित्र-आबंध, िजसे N ≡ N िलखा जाता है

ऐसा क्य होता है: त्र-आबंध सामान्य सहसंयोजी आबंध म सबसे प्रबल है, और यही कारण है क नाइ ोजन गैस
इतनी अ क्रयाशील है। वायु का 78 % भाग N₂ है, फर भी वह न जलती है, न कसी वस्तु म जंग लगाती है — एक
साथ तीन आबंध तोड़ने के लए बहुत अ धक ऊजा चा हए। इसी लए औद्यो गक स्तर पर अमो नया बनाने म उच्च
ताप, उच्च दाब और उत्प्रेरक क आवश्यकता पड़ती है।

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प्र.9 फ्लुओरीन का परमाणु क्रमांक 9 है। फ्लुओरीन अणु (F2) के नमाण क व्याख्या क जए।

फ्लुओरीन का परमाणु क्रमांक 9 है, अतः उसका इलेक् ॉ नक वन्यास 2, 7 है — संयोजकता (L) कोश म सात इलेक् ॉन, अष्टक से
एक कम।
एक फ्लुओरीन परमाणु दूसरे फ्लुओरीन परमाणु से वह इलेक् ॉन ले नह सकता, क्य क उसे भी उतनी ही आवश्यकता है। समाधान
यह है क प्रत्येक परमाणु एक-एक इलेक् ॉन साझा युग्म म डाल दे । यह युग्म दोन ना भक का साथ-साथ हो जाता है, अतः दोन
परमाणुओं के आठ संयोजकता इलेक् ॉन गने जाते ह।

××
×
× F × F
××

F—F
× एक फ्लुओरीन परमाणु का इलेक्टॉन
दू सरे फ्लुओरीन परमाणु का इलेक्टॉन
दोन फ्लुओरीन परमाणुओं के बीच एक साझा युग्म; प्रत्येक परमाणु पर तीन एकाक युग्म भी ह। कसी भी परमाणु के चार ओर : 2 साझा
+ 6 एकाक = 8 इलेक् ॉन।

F : 2, 7 → 7 संयोजकता इलेक्टॉन, 1 और चािहए

पत्येक परमाणु ारा साझा िकए गए इलेक्टॉन = 1 → एक साझा युग् म

बना आबंध = एकल सहसंयोजी आबंध, िजसे F — F िलखा जाता है

यह साझा युग्म दोन ना भक को एक साथ आक षत करता है, और यही दोहरा आकषण दोन परमाणुओं को एक अणु F₂ के रूप
म बाँधे रखता है।

ऐसा क्य होता है: अणु इस लए बनता है क्य क साझा व्यवस्था क कुल ऊजा दो अलग-अलग फ्लुओरीन
परमाणुओं क ऊजा से कम होती है। परमाणु ठ क इसी कारण संयो जत होते ह — कम ऊजा वाली व्यवस्था अ धक
स्थायी होती है।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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सो चए और बताइए — पृष्ठ 171
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9.4.1 ख यौ गक के अणु
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सो चए और बताइए

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नम्न ल खत अणुओं का नमाण दशाइए— (i) काबन डाइऑक्साइड (CO2) (ii) हाइ ोजन सल्फाइड (H2S)
m
प्र.10
(iii) अमो नया (NH3)
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em
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a
प्रत्येक स्थ त म पहले वन्यास ल खए, फर ग नए क कस परमाणु को कतने इलेक् ॉन कम ह, और फर उन क मय का मलान

co m
m.
क जए।

m
(i) काबन डाइऑक्साइड, CO₂
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.co a g l
a s em= 6) : 2, 4 → 4 संयोजकता इलेक्टॉन, 4 और चािहए
a gl C (Z
O (Z = 8) : 2, 6 → 6 संयोजकता इलेक्टॉन, 2 और चािहए
m a s
m
एक काबन (4) की पूित दो ऑक्सीजन (2 + 2) करते है ं → सूत्र CO₂
.co agl
l a se
a g

co m
m .
m ase
.co ×× a g l ××
se m × ×
g l a ×
× O C O ××
a ×× × ×
××
se m
com g l a
m . O=C=O a
glक्टॉन
× ऑक्सीजन परमाणु काaइले
ase

m
काबन परमाणु का इलेक्टॉन

काबन प्रत्येक ऑक्सीजन के साथ दो इलेक् ॉन साझा करता है और दो -आबंध बनते ह : O = C = m . c o
s e O। अब काबन के भी 8 संयोजकता

. com a gla
इले क् ॉन ह और प्रत्ये क ऑक्सीजन के भी।

a em
s (ii) हाइ ोजन सल्फाइड, H₂S
agl c
m .
m a s e
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m .
m as e
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार AglaSem · NCERT Solutions

S (Z = 16) : 2, 8, 6 → 2 इलेक्टॉन चािहए

H (Z = 1) : 1 → अपना ि क पूण करने हेत ु 1 इलेक्टॉन चािहए

एक सल्फर के िलए दो हाइडोजन परमाणु आवश्यक → सूत्र H₂S

H
× ×
×
S ×
× ×

H
H—S—H
× सल्फर परमाणु का इलेक्टॉन
हाइडोजन परमाणु का इलेक्टॉन
दो एकल सहसंयोजी आबंध, H — S — H। सल्फर पर दो एकाक युग्म शेष रहते ह; प्रत्येक हाइ ोजन का 2 इलेक् ॉन वाला क पूण है।

(iii) अमो नया, NH₃

N (Z = 7) : 2, 5 → 3 इलेक्टॉन चािहए

H : पत्येक को 1 चािहए → तीन हाइडोजन परमाणु आवश्यक

सूत्र NH₃

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H
×× ×

H × N
×

H
NH₃
× नाइटोजन परमाणु का इलेक्टॉन
हाइडोजन परमाणु का इलेक्टॉन
नाइ ोजन के चार ओर तीन एकल सहसंयोजी आबंध और नाइ ोजन परमाणु पर एक एकाक युग्म शेष। नाइ ोजन : 6 साझा + 2 एकाक
= 8 इलेक् ॉन।

ऐसा क्य होता है: कोई परमाणु कतने आबंध बनाएगा, यह केवल इस पर नभर है क उसे कतने इलेक् ॉन कम
ह। काबन को 4 कम ह, अतः 4 आबंध; नाइ ोजन को 3, अतः 3; ऑक्सीजन एवं सल्फर को 2, अतः 2; हाइ ोजन
को 1, अतः 1। यही एक नयम ऊपर के तीन सूत्र दे दे ता है।

संकेत: ध्यान द जए क NH₃ म एक एकाक युग्म शेष रह जाता है। यही शेष युग्म अमो नया के वलयन को क्षारीय
बनाता है और उसक तीखी गंध का कारण है — उच्च कक्षाओं म आप इससे पुनः मलगे।

प्र.11 नऑन (परमाणु क्रमांक 10) अपने संयोजकता इलेक् ॉन को न तो ानांत रत करता है और न ही साझा करता
है। व्याख्या क जए।

क्य क नऑन का संयोजकता कोश पहले से ही पूण है।

िनऑन, Z = 10 → इलेक्टॉिनक िवन्यास 2, 8

संयोजकता (L) कोश में इलेक्टॉन = 8 — पूण अष्टक

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परमाणु इलेक् ॉन त्यागते, ग्रहण करते अथवा साझा करते ही केवल इस लए ह क अष्टक तक पहुँच सक। नऑन वहाँ पहले से है,
अतः आबंधन से उसे कुछ मलना ही नह है —

वह इलेक् ॉन त्यागेगा नह — इससे पूण अष्टक टू ट जाएगा और वह कम स्थायी हो जाएगा; साथ ही पूण कोश से इलेक् ॉन
ख चने म बहुत अ धक ऊजा लगती है।
वह इलेक् ॉन ग्रहण नह करेगा — L कोश म स्थान ही नह है, अतः अ त रक्त इलेक् ॉन को ना भक से बहुत दूर एक नया M
कोश आरंभ करना पड़ेगा, जो स्थायी व्यवस्था नह है।
वह साझा भी नह करेगा — साझेदारी तभी लाभप्रद है जब वह कोश पूण करे, और नऑन का कोश पहले से पूण है।

अतः नऑन एकल, पृथक परमाणुओं के रूप म रहता है, Ne₂ अणु नह बनाता और सामान्य यौ गक भी नह बनाता। ही लयम
भी पूण क (2) के साथ इसी प्रकार व्यवहार करता है।

ऐसा क्य होता है: जब परमाणु संयो जत होते ह तब नकाय क कुल ऊजा घट जाती है — यही ऊजा-कमी
आबंधन का प्र तफल है। उत्कृष्ट गैस के लए ऐसा कोई प्र तफल नह ; कोई भी आबंध उसक ऊजा बढ़ा ही दे गा।
इसी लए वग 18 के तत्व अ क्रय अथवा उत्कृष्ट गैस कहलाते ह और वहाँ काम आते ह जहाँ रासाय नक न ष्क्रयता
चा हए — जैसे नऑन साइन म और आगन भरे बल्ब म।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 172

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9.4.2 इलेक् ॉन ानांतरण ारा आबंधन — आय नक आबंध

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार
a g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
emइलेक् ॉन होते ह)
प्र.1 अध्याय 8 ‘एक यात्रा — परमाणु के भीतर’ क ता लका 8.4 म दए गए प्रथम 18 तत्व के इलेक् ॉ नक वन्यास

m a s
co gl
का उपयोग करके चार ऐसे तत्व क पहचान क जए। ( जनके संयोजकता कोश म चार से कम

. a
a s em
a gl तत्व का प्रतीक परमाणु प्रोटॉन न्यू ॉन इलेक् ॉन इलेक् ॉन का वतरण

संख्या om संख्या
नाम क्रमांक क क क संख्या

.c ag
K L M N

se m
a 1
agl
हाइ ोजन H 1 - 1 1 - - -

He
m
ही लयम 2 2 2 2 2 - - -

. c o
ली थयम Li 3 3 4 3
s
2
e m1 - -

. coबे m ag la
m र लयम
ase
Be 4 4 5 4 2 2 - -

agl बोरॉन B 5 5 6 5 2 3 - -

m a s
.co agl
काबन C 6 6 6 6 2 4 - -

se m7
l a
नाइ ोजन N 7 7 7 2 5 - -
g
a8
ऑक्सीजन O 8 8 8 2 6 - -

. com7
m
फ्लुओरीन F 9 9 10 9 2 - -

mनऑन as e 2
.co
Ne 10 10 10 10
a g l 8 - -

se m
g l a
a
सो डयम Na 11 11 12 11 2 8 1 -

मैग्नी शयम Mg 12 12 12 12 2 8 2 -
se m
com g l a
m . a
ase
ऐलु म नयम Al 13 13 14 13 2 8 3 -

स लकॉन Si agl 14 14 14 14 2 8 4 -

m
.co
फॉ ोरस P 15 15 16 15 2 8 5 -

se m
com
सल्फर S 16 16 16
g l
16
a 2 8 6 -

m . a 17
ase
agl
क्लोरीन Cl 17 17 18 2 8 7 -

.c
m
आगन Ar 18 18 22 18 2 8 8 -

m a s e
m . co
ता लका 8.4, अध्याय 8 ‘एक यात्रा — परमाणु के भीतर’, पृष्ठ 152 — प्रथम अठारह तत्व तथा K, L, M और N कोश
agl
l a se म उनके इलेक् ॉन का वतरण।

a g

co m
m .
m as e
.co


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ली थयम, बे र लयम, सो डयम, मैग्नी शयम और ऐलु म नयम — इनम से कोई भी चार।

तत्व Z इलेक् ॉ नक वन्यास संयोजकता इलेक् ॉन त्यागने पर बना आयन

लीिथयम (Li) 3 2, 1 1 Li⁺

बेिरिलयम (Be) 4 2, 2 2 Be²⁺

सोिडयम (Na) 11 2, 8, 1 1 Na⁺

मैग्नीिशयम (Mg) 12 2, 8, 2 2 Mg²⁺

ऐलुिमिनयम (Al) 13 2, 8, 3 3 Al³⁺

ऐसा क्य होता है: 1, 2 अथवा 3 इलेक् ॉन दे दे ना छोटा रास्ता है; अष्टक पूण करने के लए 5, 6 अथवा 7
इलेक् ॉन जुटाना बहुत लंबा। सो डयम (2, 8, 1) जब अपना एकमात्र M-कोश इलेक् ॉन त्यागता है तो नीचे का कोश
पहले से ही पूण 2, 8 है — नऑन जैसी स्थायी व्यवस्था। अथात एक छोट -सी हा न से पूण अष्टक मल जाता है।
इसी लए चार से कम संयोजकता इलेक् ॉन वाले तत्व धातु होते ह और धनायन बनाते ह।

संकेत: बोरॉन (2, 3) के संयोजकता कोश म भी चार से कम इलेक् ॉन ह, परंतु तीन इलेक् ॉन दे ने पड़ते और परमाणु
छोटा तथा इलेक् ॉन को कसकर पकड़ने वाला है, अतः वह साझा करना पसंद करता है। ‘चार से कम → त्याग’ एक
अच्छा मागदशक नयम है, अटल नयम नह ।

प्र.2 क्या यह एक इलेक् ॉन खोकर भी उदासीन ही रहेगा? य द नह , तो इस पर क्या आवेश होगा और क्य ?

नह — एक इलेक् ॉन त्याग दे ने पर सो डयम परमाणु उदासीन नह रहता। उस पर +1 आवेश आ जाता है और उसे
सो डयम धनायन Na⁺ कहते ह।

सोिडयम परमाणु, Z = 11 → 11 पोटॉन (+11) और 11 इलेक्टॉन (−11)

कु ल आवेश = (+11) + (−11) = 0 — उदासीन

एक इलेक्टॉन त्यागने के पश्चात : 11 पोटॉन (+11) और 10 इलेक्ट ॉन (−10)

कु ल आवेश = (+11) + (−10) = +1

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कसी रासाय नक अ भ क्रया म प्रोटॉन क संख्या कभी नह बदलती — प्रोटॉन ना भक म रहते ह और रसायन केवल बाहरी
इलेक् ॉन को हलाता है। अतः एक इलेक् ॉन हटा दे ने पर एक प्रोटॉन का धनावेश असंतु लत रह जाता है।

ऐसा क्य होता है: परमाणु उदासीन केवल इस लए है क प्रोटॉन और इलेक् ॉन संख्या म बराबर तथा आवेश म
समान और वपरीत होते ह। यह बराबरी टू टते ही आवेश प्रकट हो जाता है। इलेक् ॉन त्या गए तो धनायन (Na⁺,
Mg²⁺, Al³⁺) और ग्रहण क जए तो ऋणायन (Cl⁻, O²⁻, S²⁻) बनता है।

स्वयं जाँ चए: अब Na⁺ का वन्यास 2, 8 है — ठ क नऑन जैसा। रासाय नक रूप से यह सो डयम परमाणु से
बलकुल भन्न है : सो डयम धातु जल के साथ प्रचंड अ भ क्रया करती है, जब क वलयन का Na⁺ वही है जो आप
प्र त दन साधारण नमक के रूप म खाते ह।

क्या होता य द … — पृष्ठ 174
9.4.2 इलेक् ॉन ानांतरण ारा आबंधन — आय नक आबंध

क्या होता य द …

प्र.1 क्या होता य द … हम परमाणुओं को प्रत्यक्ष रूप से दे ख पाते? यह वै ा नक के लए कस प्रकार सहायक होता
और कस प्रकार क चुनौ तयाँ उत्पन्न करता?

तब रसायन व ान अनुमान से हटकर प्रत्यक्ष अवलोकन बन जाता — परंतु परमाणु को ‘दे खना’ कंचे को दे खने जैसा नह
है, और क ठनाई यह से आरंभ होती है।
इससे क्या सहायता मलती

संरचनाएँ अनुमान से नह , सीधे पढ़ जात । संयोजकता और आबंध क गनती से यह सद्ध करने के स्थान पर क जल का
अणु मुड़ा हुआ है और CO₂ सीधा, आप बस दे ख लेते।
अ भ क्रयाओं को होते हुए दे खा जा सकता। आबंध टू टते हुए, सो डयम से क्लोरीन तक इलेक् ॉन जाते हुए, अथवा उत्प्रेरक
को दो अणुओं को थामे हुए दे खा जा सकता जब क वे जुड़ रहे ह ।
पदाथ और औष धयाँ परमाणु-दर-परमाणु अ भक ल्पत क जा सकत — कसी वशेष स्थल म ठ क बैठने वाला औष ध
अणु, अथवा ऐसा बैटरी इलेक् ोड जो आयन को ठ क वह रोके जहाँ आप चाह।
दोष तुरंत पकड़ म आ जाते — अधचालक चप म एक भी परमाणु का अपने स्थान से हट जाना उसे बेकार कर दे ता है।

यह क ठन क्य है

परमाणु प्रकाश क तरंगदै य से कह छोटा है। परमाणु का व्यास लगभग 10⁻¹⁰ m है, जब क दृश्य प्रकाश क तरंगदै य
लगभग 5 × 10⁻⁷ m — अथात लगभग पाँच सौ गुना बड़ी। कोई भी प्रका शक सूक्ष्मदश , चाहे उसके लस कतने ही अच्छे ह ,
उस तरंग से इतनी छोट वस्तु को वभे दत नह कर सकता।
दे खने क क्रया ही वस्तु को वच लत कर दे ती है। परमाणु को ‘दे खने’ के लए उस पर कुछ टकराना पड़ेगा, और जो कण
इतना छोटा होगा क यह काम कर सके उसक ऊजा परमाणु को अपने स्थान से हटा दे ने के लए पयाप्त होगी।
दे खने के लए कोई स्पष्ट पृष्ठ है ही नह । इलेक् ॉन पथ पर घूमती छोट गद नह ह; वे प्रा यकता के एक धुँधले बादल म रहते
ह। कोई भी चत्र एक धब्बा ही दखाएगा, और उसे अक्षरशः मान लेने वाला वद्याथ गलत बात सीखेगा।

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आँकड़े और व्यय। द्रव्य के एक कण के भी प्रत्येक परमाणु का मान चत्र बनाने पर इतने आँकड़े बनगे क उन्ह सं चत करना
क ठन है; और ये उपकरण नवात म, अत्यंत नम्न ताप पर चलते ह तथा अत्य धक महँगे होते ह।

ऐसा क्य होता है: इससे मलता-जुलता काय हम पहले से करते ह। प्रगामी सुरंगन सूक्ष्मदश (STM) एक परमाणु
जतनी नुक ली सुई को पृष्ठ पर घुमाकर यह अं कत करता है क इलेक् ॉन कतनी सरलता से अंतराल पार करते ह,
और इलेक् ॉन सूक्ष्मदश प्रकाश के स्थान पर इलेक् ॉन का उपयोग करता है क्य क उनक तरंगदै य हज़ार गुना
छोट होती है। दोन ही एकल परमाणुओं के वास्त वक प्र त बब दे ते ह — परंतु वे इलेक् ॉन घनत्व के मान चत्र ह,
छाया चत्र नह ; यह प्रश्न ठ क इसी सूक्ष्म भेद क ओर संकेत कर रहा है।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 174
9.4.2 इलेक् ॉन ानांतरण ारा आबंधन — आय नक आबंध

सो चए और बताइए

प्र.12 ऑक्सीजन (O) कस प्रकार का आयन बनाएगा?

ऑक्सीजन ऑक्साइड ऋणायन O²⁻ बनाएगा — दो इकाई ऋण आवेश वाला ऋणायन।

ऑक्सीजन, Z = 8 → िवन्यास 2, 6

संयोजकता इलेक्टॉन = 6; अष्टक हेत ु आवश्यक इलेक्टॉन = 8 − 6 = 2

O + 2 e⁻ → O²⁻ (िवन्यास 2, 8)

पोटॉन = 8 (+8), इलेक्टॉन = 10 (−10) → कु ल आवेश = −2

अतः ऑक्सीजन संयोजी ऋणायन बनाती है, संयोजकता 2। वह त्यागने के स्थान पर ग्रहण करती है क्य क छह संयोजकता
इलेक् ॉन के साथ छह त्यागने क अपेक्षा दो ग्रहण करके अष्टक तक पहुँचना कह सरल है।

ऐसा क्य होता है: O²⁻ का वन्यास 2, 8 है — ठ क नऑन जैसा। प्रत्येक परमाणु इसी स्थायी व्यवस्था क ओर
बढ़ता है, और ऑक्सीजन के लए दो इलेक् ॉन ग्रहण करना वहाँ पहुँचने का सबसे सस्ता माग है।

संकेत: इसी से धातुओं के ऑक्साइड बनते ह। Na⁺ के साथ O²⁻ से Na₂O, Mg²⁺ के साथ MgO और Al³⁺ के
साथ Al₂O₃ — प्रत्येक स्थ त म आवेश शून्य पर संतु लत हो जाते ह।

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प्र.13 रक्त ान क पू त क जए — मैग्नी शयम और क्लोरीन म से Mg2+ बनने के लए मैग्नी शयम परमाणु दो
इलेक् ॉन त्याग सकता है। यद्य प क्लोरीन परमाणु एक इलेक् ॉन ग्रहण करके ____________ बनाता है। अब
मैग्नी शयम का __________ आयन और क्लोरीन के __________ आयन संयो जत हो कर मैग्नी शयम क्लोराइड
बनाते ह।

पूण वाक्य: “यद्य प क्लोरीन परमाणु एक इलेक् ॉन ग्रहण करके क्लोराइड आयन Cl⁻ बनाता है। अब मैग्नी शयम का एक आयन
और क्लोरीन के दो आयन संयो जत हो कर मैग्नी शयम क्लोराइड बनाते ह।”

Mg (2, 8, 2) → Mg²⁺ (2, 8) + 2 e⁻ — दो इलेक्टॉन मुक्त होते है ं

Cl (2, 8, 7) + 1 e⁻ → Cl⁻ (2, 8, 8) — पत्येक क्लोरीन के वल एक ले सकता है

अतः दोनों इलेक्टॉन लेने के िलए दो क्लोरीन परमाणु चािहए :

Mg²⁺ + 2 Cl⁻ → MgCl₂

आवेश जाँच : (+2) + 2(−1) = 0 ✓

ऐसा क्य होता है: इलेक् ॉन बचे नह रह सकते। मैग्नी शयम को ठ क दो इलेक् ॉन दे ने ही ह और प्रत्येक क्लोरीन
परमाणु म ठ क एक के लए स्थान है, अतः संख्याएँ 1 : 2 ही ह गी। सूत्र प्राप्त करने के लए आवेश का तयक
करना वस्तुतः इसी इलेक् ॉन- हसाब का सं क्षप्त रूप है।

प्र.14 पोटै शयम (K) और कै ल्सयम (Ca) परमाणुओं के धनायन के नमाण तथा उनके संगत क्लोराइड के नमाण
को चत्र ारा दशाइए।

पोटै शयम (Z = 19) : 2, 8, 8, 1। बाह्यतम कोश म एक इलेक् ॉन — उसे त्याग दे ने पर आगन जैसी स्थायी व्यवस्था 2, 8, 8 शेष
रह जाती है।

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a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
e m.
m l as
m .co a g
l a se
a g − 1 e⁻

co m
e m . ag
g l as
a K⁺

m
K 2, 8, 8
co
m.
2, 8, 8, 1

m as e
.co a g l
se m K (2, 8, 8, 1) अपना एकमात्र संयोजकता इलेक् ॉन त्यागकर K⁺ (2, 8, 8) बनाता है, जो एकसंयोजी धनायन है।
g l a
a
m a s
.co agl
कै ल्सयम (Z = 20) : 2, 8, 8, 2। बाह्यतम कोश म दो इलेक् ॉन — दोन त्यागने पर 2, 8, 8 शेष रहता है।

se m
g l a
a

co m
m .
m as e
.co
− 2 e⁻
a g l
se m
g l a
a
se m
com g l a
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Ca²⁺
m
ase
Ca 2, 8, 8

agl
2, 8, 8, 2

co m
m .
e
Ca (2, 8, 8, 2) दो संयोजकता इलेक् ॉन त्यागकर Ca²⁺ (2, 8, 8) बनाता है, जो संयोजी धनायन है।

m l as
.co a g
mपोटै शयम क्लोराइड, KCl। पोटै शयम ारा त्यागा गया एक इलेक् ॉन एक क्लोरीन परमाणु ग्रहण कर लेता है (2, 8, 7 → 2, 8,
s e
agla 8)।
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a

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m .
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K⁺ Cl⁻
2, 8, 8 2, 8, 8

KCl

K⁺ और Cl⁻, जो स्थर वद्युत आकषण ारा परस्पर बँधे ह। एक धनायन के लए एक ऋणायन, अतः सूत्र KCl है।

कै ल्सयम क्लोराइड, CaCl₂। कै ल्सयम को दो इलेक् ॉन त्यागने ह और प्रत्येक क्लोरीन केवल एक ले सकता है — अतः दो
क्लोरीन परमाणु चा हए।

Ca²⁺ Cl⁻ Cl⁻
2, 8, 8 2, 8, 8 2, 8, 8

CaCl₂

एक Ca²⁺ के साथ दो Cl⁻ आयन। आवेश जाँच : (+2) + 2(−1) = 0, अतः सूत्र CaCl₂ है।

K → K⁺ + e⁻; Cl + e⁻ → Cl⁻; K⁺ + Cl⁻ → KCl
Ca → Ca²⁺ + 2 e⁻; 2 Cl + 2 e⁻ → 2 Cl⁻; Ca²⁺ + 2 Cl⁻ → CaCl₂

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ऐसा क्य होता है: दोन धातुएँ सो डयम जैसी ही स्थ त म ह — एक पूण कोश के ऊपर लगभग खाली बाह्यतम
कोश। उसे खाली कर दे ना ही अष्टक तक पहुँचने का सबसे छोटा माग है। क्लोरीन परमाणु ठ क वपरीत स्थ त म ह,
एक इलेक् ॉन कम, अतः यह स्थानांतरण दोन पक्ष के अनुकूल है और फर वपरीत आवेश उन्ह बाँधे रखते ह।

प्र.15 दशाइए क सो डयम सल्फाइड (Na2S) का नमाण कस प्रकार होता है?

सो डयम 2, 8, 1 है — एक इलेक् ॉन दे ने को। सल्फर 2, 8, 6 है — अष्टक से दो इलेक् ॉन कम। चूँ क प्रत्येक सो डयम केवल एक
इलेक् ॉन दे सकता है, अतः एक सल्फर परमाणु के लए दो सो डयम परमाणु चा हए।

+ +

Na S Na
2, 8, 1 2, 8, 6 2, 8, 1

transfer of 2 e⁻

Na⁺ Na⁺
2, 8 S²⁻ 2, 8
2, 8, 8

Na₂S

दो सो डयम परमाणु एक-एक इलेक् ॉन एक ही सल्फर परमाणु को स्थानांत रत करते ह। दोन Na⁺ आयन का वन्यास 2, 8 ( नऑन
जैसा) और S²⁻ का 2, 8, 8 (आगन जैसा) हो जाता है।

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2 Na (2, 8, 1) → 2 Na⁺ (2, 8) + 2 e⁻

S (2, 8, 6) + 2 e⁻ → S²⁻ (2, 8, 8)

2 Na⁺ + S²⁻ → Na₂S
आवेश जाँच : 2(+1) + (−2) = 0 ✓

इसके प ात दोन Na⁺ आयन और S²⁻ आयन वपरीत आवेश के बीच के र वद्युत आकषण बल से बँधे रहते ह — यही
आय नक आबंध है। सभी आय नक यौ गक क भाँ त Na₂S भी पृथक अणु के रूप म नह रहता, अ पतु त्र वमीय क्रस्टल जालक
बनाता है; Na₂S उसक सूत्र इकाई है, अथात आयन का सरलतम पूण संख्या अनुपात।

ऐसा क्य होता है: Na₂S म पादांक 2 सजावट नह है — वह इलेक् ॉन क गनती से बाध्य है। सल्फर को दो
इलेक् ॉन चा हए और सो डयम एक-एक ही दे सकता है, अतः अनुपात 2 : 1 ही होगा। इसी तक से Na₂O, K₂S
और Li₂O बनते ह।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 177
9.5 रासाय नक सूत्र को लखना

सो चए और बताइए

प्र.16 नम्न ल खत के नाम ल खए। (i) CO2 (ii) NO2 (iii) SF6 (iv) PCl3

ये सभी सहसंयोजी यौ गक ह, अतः इनका नामकरण उपसग प्रणाली से होता है — प्रथम तत्व का नाम सामान्य रहता है, दूसरे तत्व
के अंत म आइड (-ide) लगता है, और उपसग (मोनो-, डाइ-, ाइ-, टे ा-, पेन्टा-, हेक्सा-) परमाणुओं क संख्या बताते ह। प्रथम
तत्व के लए मोनो- नह लखा जाता।

सूत्र दूसरे तत्व के परमाणु नाम

(i) CO₂ 2 ऑक्सीजन → डाइ- + ऑक्साइड काबन डाइऑ क्साइड

(ii) NO₂ 2 ऑक्सीजन → डाइ- + ऑक्साइड नाइटोजन डाइऑ क्साइड

(iii) SF₆ 6 फ्लुओरीन → हेक्सा- + फ्लुओराइड ल्
स फ र हे क्साफ्ल ुओ राइड

(iv) PCl₃ 3 क्लोरीन → ाइ- + क्लोराइड फॉ स्फ ोरस टाइक्ल ोराइड

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ऐसा क्य होता है: दो तत्व मलकर एक से अ धक यौ गक बना सकते ह — CO और CO₂, NO तथा NO₂ और
N₂O₄। उपसग ही इन्ह अलग पहचानता है, अतः दूसरे तत्व से उपसग हटाया नह जा सकता। यह भी ध्यान द जए
क CO काबन मोनोक्सॉइड है, मोनोऑक्साइड नह : अंग्रेज़ी नाम म जब ‘o’ या ‘a’ पर समाप्त होने वाला उपसग
स्वर से आरंभ होने वाले तत्व से मलता है तब उपसग का अं तम स्वर छोड़ दया जाता है।

क्या आप जानते ह? SF₆ अब तक ज्ञात सबसे प्रबल ग्रीनहाउस गैस म से एक है और उच्च वोल्टता वाले वद्युत
स्वच गयर म वद्युतरोधी गैस के रूप म प्रयुक्त होती है। NO₂ वही लाल-भूरी गैस है जो व्यस्त यातायात चौराह पर
धुँधलापन उत्पन्न करती है।

प्र.17 नम्न ल खत के सूत्र ल खए। (i) सो डयम हाइ ोजनकाब नेट (ii) सल्फर डाइऑक्साइड (iii) फे रक क्लोराइड
(iv) क्यूप्रस ऑक्साइड

ता लका 9.1 के आवेश के साथ तयक व ध का प्रयोग क जए — पहले धनायन ल खए, प्रतीक के नीचे आवेश क संख्याएँ
ल खए, उन्ह अदल-बदलकर पादांक बनाइए और फर उभय नष्ठ गुणनखंड से भाग द जए।

यौ गक आयन / संयोजकता तयक सूत्र

(i) सो डयम हाइ ोजनकाब नेट Na⁺ (1), HCO₃⁻ (1) 1 और 1 → दोन नह लखे जाते NaHCO₃

(ii) सल्फर डाइऑक्साइड S (संयोजकता 4), O (संयोजकता 2) S₂O₄ ÷ 2 SO₂

(iii) फे रक क्लोराइड Fe³⁺ (3), Cl⁻ (1) Fe₁Cl₃ FeCl₃

(iv) क्यूप्रस ऑक्साइड Cu⁺ (1), O²⁻ (2) Cu₂O₁ Cu₂O

ऐसा क्य होता है: तयक व ध कुल धनावेश को कुल ऋणावेश से नरस्त कराने का शीघ्र उपाय है। FeCl₃ म (+3)
+ 3(−1) = 0; Cu₂O म 2(+1) + (−2) = 0। प्रत्येक आय नक सूत्र वैद्युत रूप से उदासीन ही नकलना चा हए।

संकेत: ‘-अस’ (-ous) सदै व कम आवेश और ‘-इक’ (-ic) अ धक आवेश दशाता है — क्यूप्रस Cu⁺ है और
क्यू प्रक Cu²⁺; फेरस Fe²⁺ और फे रक Fe³⁺। इसम भूल हुई तो पूरा सूत्र बदल जाएगा : क्यू प्रक ऑक्साइड CuO
है, Cu₂O नह ।

प्र.18 नम्न ल खत आयन के युग्म से न मत यौ गक के सूत्र ल खए— (i) Fe3+ और ‒OH (ii) K+ और CO3 2–

(i) Fe³⁺ और OH⁻ → Fe(OH)₃

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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e m.
आवेश : Fe पर 3+, OH पर 1−
m l as
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ितयक : Fe₁(OH)₃ → Fe(OH)₃ — फेिरक हाइडॉक्साइड
m a g
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g
आवेश जाँच : (+3) + 3(−1) = 0 ✓
a
m
यहाँ कोष्ठक आवश्यक ह क्य क तीन हाइ ॉक्साइड आयन ह। Fe(OH)₃ का अथ है एक आयरन और तीन OH समूह; FeOH₃

. co ag
m
लखने पर गलत अथ नकलेगा क एक O और तीन H ह।

as e
(ii) K⁺ और CO₃²⁻ → K₂CO₃
a g l
आवेश : K पर 1+, CO₃ पर 2−
co m
em.
cचom as
ितयक : K₂(CO₃)₁ → K₂CO₃ — पोटै िशयम काब ने ट
. a g l
e m
आवेश जाँ : 2(+1) + (−2) = 0 ✓
l as
agयहाँ कोष्ठक नह लगगे, क्य क काब नेट आयन केवल एक है। कोष्ठक तभी लगते ह जब एक ही प्रकार के दो अथवा अ धक

m a s
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बहुपरमा ण्वक आयन ह ।

se m
g l a
ऐसा क्य होता है: OH⁻ अथवा CO₃²⁻ जैसा बहुपरमा ण्वक आयन एक ही इकाई क भाँ त व्यवहार करता है —
a
उसके भीतर के परमाणु आपस म सहसंयोजी रूप से जुड़े होते ह और पूरे समूह पर एक आवेश होता है। अतः तयक

m
करते समय उसे एकल प्रतीक क भाँ त ही ली जए, और कोष्ठक उस इकाई को जोड़े रखने का काम करता है।
. co
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a sem 9.4 — पृष्ठ 177 – 178
agl
क्रयाकलाप

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9.6 आय नक और सहसंयोजी यौ गक के गुणधम

क्रयाकलाप 9.4

प्र.1 (चरण 9) उन यौ गक का समूह बनाइए जो ता लका 9.2 म सूचीबद्ध यौ गक के समान गुणधम दशाते ह।

यौ गक प्रयोग

वलेयता यौ गक क वैद्युत
चालकता

जल करो सन ( म का तेल) पे ोल ठोस अव ाम जल म
म म म

कपूर

सो डयम
क्लोराइड

कॉपर सल्फेट

चीनी

नैफ्थलीन

कोई अन्य

ता लका 9.2, पृष्ठ 178 — क्रयाकलाप 9.4 क प्रेक्षण ता लका, जसम परी क्षत यौ गक सूचीबद्ध ह।

ता लका 9.2 म आपको ये प्रेक्षण अ भले खत करने चा हए।

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यौ गक वलेयता वद्युत चालकता

जल म करो सन म पे ोल म ठोस अव ाम जल म

कपूर अघुलनशील घुल नशील घुल नशील नह नह

सोिडयम क्लोराइड घुल नशील अघुलनशील अघुलनशील नह हाँ

कॉपर सल्फे ट घुल नशील अघुलनशील अघुलनशील नह हाँ

चीनी घुल नशील अघुलनशील अघुलनशील नह नह

नैफ्थलीन अघुलनशील घुल नशील घुल नशील नह नह

ये यौ गक तीन समूह म बँटते ह।

समूह 1 — आय नक यौ गक : सो डयम क्लोराइड एवं कॉपर सल्फेट। जल म घुलनशील, करो सन एवं पे ोल म
अघुलनशील; ठोस अवस्था म चालन नह करते परंतु जल म चालन करते ह। दोन के गलनांक भी उच्च ह।
समूह 2 — जल म अघुलनशील सहसंयोजी यौ गक : कपूर एवं नैफ्थलीन। ये करो सन और पे ोल म घुलते ह और कभी
चालन नह करते। दोन के गलनांक नम्न ह और गंध तीव्र — ये सरलता से ऊध्वपा तत होते ह।
समूह 3 — जल म घुलनशील सहसंयोजी यौ गक : चीनी। यह वलेयता के स्तंभ म समूह 1 जैसा और चालकता के स्तंभ म
समूह 2 जैसा व्यवहार करती है — घुलती है परंतु आयन नह दे ती।

ऐसा क्य होता है: प्रत्येक प्र व ष्ट के पीछे का नयम है ‘समान, समान को घोलता है’। जल के अणु ुवीय होते ह
— उनके सर पर अल्प आवेश होता है — अतः वे आय नक जालक के आवे शत आयन को घेरकर अलग कर
सकते ह। करो सन और पे ोल अ ुवीय ह, अतः आयन पर उनक कोई पकड़ नह , परंतु कपूर और नैफ्थलीन जैसे
अ ुवीय अणुओं के साथ वे सरलता से मल जाते ह। चीनी वशेष स्थ त है : वह सहसंयोजी है, परंतु उसम अनेक —
OH समूह ह जन्ह जल पकड़ सकता है, इस लए वह घुल जाती है — पूरे उदासीन अणुओं के रूप म, और इसी लए
बल्ब नह जलता।

सुरक्षा प्रथम: पे ोल और करो सन अत्य धक ज्वलनशील ह, अतः इन्ह ज्वाला से दूर र खए और हवादार स्थान पर
काय क जए। बैटरी जुड़ी होने पर इलेक् ोड को स्पश न क जए और केवल नम्न-वोल्टता क बैटरी का ही उपयोग
क जए।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 178

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9.6 आय नक और सहसंयोजी यौ गक के गुणधम

प्र.1 अन्य सहसंयोजी यौ गक, जैसे क कपूर और नैफ्थलीन भी वद्युत का चालन नह करते ह। क्या आप इसका
कारण दे सकते ह?

क्य क इनम ऐसा कोई आवे शत कण है ही नह जो ग त करने के लए मुक्त हो — न आयन, न मुक्त इलेक् ॉन।
धारा ग तशील आवेश के अ त रक्त और कुछ नह है। चालन के लए पदाथ को ग तशील आवेश-वाहक दे ने ही ह गे; कपूर और
नैफ्थलीन कोई नह दे ते —

ये वैद्युत उदासीन अणुओं से बने ह। इनका प्रत्येक इलेक् ॉन या तो सहसंयोजी आबंध के साझा युग्म म बँधा है या कसी
परमाणु पर एकाक युग्म के रूप म बैठा है — इनम से कोई भी ठोस के भीतर वचरण नह कर सकता।
ये जल म अघुलनशील ह, अतः इन्ह सो डयम क्लोराइड क भाँ त वलयन म आयन छोड़ने का अवसर ही नह मलता।
पघलाने पर भी ये अणु के रूप म ही रहते ह। कपूर को पघलाने से अणु एक-दूसरे से ढ ले पड़ जाते ह, परंतु उनके भीतर के
सहसंयोजी आबंध नह टू टते, अतः आयन तब भी नह बनते।

ऐसा क्य होता है: तीन स्थ तय क तुलना क जए — धातु इस लए चालन करती है क्य क उसम मुक्त इलेक् ॉन
ह; ग लत अथवा घुला हुआ सो डयम क्लोराइड इस लए चालन करता है क्य क उसम मुक्त आयन ह; कपूर म इनम
से कुछ नह , अतः प रपथ अपूण रह जाता है और बल्ब कभी नह जलता।

प्र.2 अनुमान लगाइए क आय नक और सहसंयोजी यौ गक ग लत अव ा ( कसी पदाथ क पघली अव ा) म
वद्युत का चालन करगे अथवा नह ।

आय नक यौ गक ग लत अव ा म वद्युत का चालन करते ह; सहसंयोजी यौ गक नह करते।

अव ा आय नक यौ गक (जैसे NACL) सहसंयोजी यौ गक (जैसे नैफ्थलीन)

ठोस चालन नह — आयन जालक म नयत चालन नह — आयन ह ही नह

गिलत चाल न करता है — जाल क टूटता है, आयन मुक्त होकर गित करते है ं चाल न नही ं — अब भी उ द ासीन अण ु ही है ं

जलीय िवलयन चाल न करता है — जल आयनों को पथक
ृ कर दे ता है चालन नह (य द वह घुले भी तो)

आय नक यौ गक के लए तक। ठोस आय नक यौ गक म Na⁺ और Cl⁻ आयन पहले से आवे शत ह, परंतु प्रबल स्थर वद्युत बल
ारा नयत स्थ तय म जकड़े हुए ह। ठोस को गलनांक से ऊपर गम क जए तो ये स्थ तयाँ टू ट जाती ह : आयन आवे शत तो ह ही,
अब ग त भी कर सकते ह। ग तशील आवेश ही धारा है, अतः यौ गक चालन करने लगता है।
सहसंयोजी यौ गक के लए तक। सहसंयोजी ठोस को पघलाने पर अणु एक-दूसरे से पृथक हो जाते ह, परंतु प्रत्येक अणु के
भीतर के सहसंयोजी आबंध बचे रहते ह। द्रव उदासीन अणुओं क भीड़ मात्र है, और उदासीन कण धारा नह ले जा सकते।

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ऐसा क्य होता है: चालन के लए एक साथ दो बात चा हए — आवेश और ग तशीलता। ठोस NaCl म आवेश है
पर ग तशीलता नह ; ग लत नैफ्थलीन म ग तशीलता है पर आवेश नह ; ग लत NaCl म दोन ह, और केवल वही
चालन करता है।

क्या आप जानते ह? उद्योग म ऐलु म नयम का नष्कषण ग लत ऐलु म नयम ऑक्साइड म से वद्युत धारा प्रवा हत
करके कया जाता है। यह प्रक्रम इसी लए चलता है क्य क ग लत पदाथ म मुक्त Al³⁺ और O²⁻ आयन भरे होते ह
— ठ क वही पूवानुमान जो आपने अभी लगाया।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 179
9.6 आय नक और सहसंयोजी यौ गक के गुणधम

सो चए और बताइए

प्र.19 कसी ठोस यौ गक म कस प्रकार का रासाय नक आबंध होगा जो ठोस अव ा म वद्युत का चालन नह करता
है परंतु जल म घुलने पर वद्युत का चालन करता है?

आय नक आबंध। ये दोन प्रेक्षण साथ मलकर आय नक यौ गक क सु न त पहचान ह।

ठोस अव ा म चालन नह — आयन वहाँ ह तो सही, परंतु क्रस्टल जालक म प्रबल स्थर वद्युत बल ारा नयत स्थ तय म
जकड़े ह, अतः कोई आवेश ग त नह कर सकता।
जल म चालन — जल जालक को तोड़कर आयन को मुक्त कर दे ता है। ग तशील होते ही धनायन ऋण इलेक् ोड क ओर और
ऋणायन धन इलेक् ोड क ओर बहने लगते ह, और यही बहाव धारा है।

सो डयम क्लोराइड और कॉपर सल्फेट दोन ठ क ऐसा ही व्यवहार करते ह, जैसा क्रयाकलाप 9.4 दशाता है।

ऐसा क्य होता है: दोन संकेत को साथ पढ़ना आवश्यक है। केवल वलयन म चालन से नणय नह होता — तब
भी चीनी जैसे सहसंयोजी यौ गक को अलग करना शेष रह जाता। ठोस म आयन उप स्थत पर अचल, और घुलने पर
ग तशील — यही संयोजन अनन्य रूप से आय नक आबंधन क ओर संकेत करता है।

स्वयं जाँ चए: ऐसे यौ गक के गलनांक भी उच्च होते ह, क्य क वपरीत आवे शत आयन के जालक को तोड़ने म
बहुत ऊजा लगती है। साधारण नमक लगभग 800 °C पर पघलता है; कपूर, जो सहसंयोजी ठोस है, 180 °C से
भी नीचे पघल जाता है।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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धातु X, जसके संयोजकता कोश (M कोश) म दो इलेक् ॉन ह, ऑक्सीजन से अ भ क्रया कर एक यौ गक
बनाती है जो जल म अल्प घुलनशील है। इसके लए नम्न का पूवानुमान लगाइए। (i) सूत्र e mआबंध के प्रकार
प्र.20

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coे जलीय वलयन क वैद्युत चालकता gl
(ii)

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(iii) उसक

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m
पहले धातु पहचा नए। उसका संयोजकता कोश M कोश है और उसम दो इलेक् ॉन ह, अतः वन्यास 2, 8, 2 हुआ — अथात Z =

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m
12, मैग्नी शयम।

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(i) सूत्र — XO (मैग्नी शयम ऑक्साइड, MgO)
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X (2, 8, 2) → X²⁺ (2, 8) + 2 e⁻
co m
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O (2, 6) + 2 e⁻ → O²⁻ (2, 8)

. coितयक a g l
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आवेशों का : X₂O₂, 2 से भाग → XO
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agl आवेश जाँच : (+2) + (−2) = 0 ✓
om a s
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(ii) आबंध का प्रकार — आय नक। दो संयोजकता इलेक् ॉन वाली धातु का सामना ऐसी अधातु से है जसे दो इलेक् ॉन कम ह।
इलेक् ॉन का
s e m X²⁺ और O²⁻ बनते ह और फर स्थर वद्युत आकषण उन्ह बाँधे रखता
ानांतरण होता है, साझेदारी नह , जससे
a
agl
है।
(iii) जलीय वलयन क वैद्युत चालकता — चालन होगा, परंतु दुबल। यौ गक क जतनी भी अल्प मात्रा घुलती है वह मुक्त

co m
X²⁺ और O²⁻ (व्यवहार म OH⁻) आयन के रूप म जाती है, और ग तशील आयन धारा ले जाते ह। परंतु यौ गक अल्प घुलनशील है,

m .
e
अतः वलयन म आयन क संख्या कम रहती है और बल्ब तेज़ के स्थान पर मंद प्रद प्त होता है।

m l as
.co a g
a s em ऐसा क्य होता है: चालकता इस पर नभर करती है क प्र त इकाई आयतन म कतने ग तशील आयन ह, केवल

agl इस पर नह क यौ गक आय नक है या नह । आबंध का प्रकार यह तय करता है क आयन बन सकते ह या नह ;
m
वलेयता यह तय करती है क कतने बनते ह।

a se
. com a g l
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क्या आप जानते ह? इसी अल्प घुलनशील यौ गक का जल म नलंबन ‘ मल्क ऑफ़ मैग्नी शया’ के नाम से बकता
है और अम्लता दूर करने के लए लया जाता है — यह उपयोग उसे इसी लए मला है क वह इतना कम घुलता है।

co m
m .
m बताइए — पृष्ठ 179 as e
सो चए और
.co a g l
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9.7 सहसंयोजी यौ गक का आ वक द्रव्यमान

सो चए और बताइए

प्र.21 नाइ क अम्ल (HNO3) का आ वक द्रव्यमान ात क जए। परमाणु द्रव्यमान – H = 1 u; N = 14 u; O =
16 u

63 u।

आि वक द व्यमान = सूत्र में उपिस्थत सभी परमाणुओ ं के परमाणु द व्यमानों का योग

HNO₃ में है ं : 1 H, 1 N, 3 O

= (1 u × 1) + (14 u × 1) + (16 u × 3)

= 1 u + 14 u + 48 u

= 63 u

ऐसा क्य होता है: परमाणु का लगभग समस्त द्रव्यमान उसके ना भक म होता है, और आबंधन केवल बाह्य
इलेक् ॉन को पुनव्यव स्थत करता है — जनका द्रव्यमान नगण्य है। अतः परमाणुओं के जुड़ने पर द्रव्यमान न बढ़ता
है न घटता है, और अणु का द्रव्यमान उसके परमाणुओं के द्रव्यमान का सीधा योग होता है। यह एक अणु पर लागू
कया गया द्रव्यमान संरक्षण का नयम ही है।

संकेत: पादांक केवल अपने ठ क पहले वाले प्रतीक को गुणा करता है। HNO₃ म 3 केवल O का है, अतः 16 × 3
होगा, (14 + 16) × 3 नह ।

प्र.22 मेथेन (CH4) का आ वक द्रव्यमान ात क जए। परमाणु द्रव्यमान— C = 12 u; H = 1 u

16 u।

CH₄ में है ं : 1 C, 4 H

आि वक द व्यमान = (12 u × 1) + (1 u × 4)

= 12 u + 4 u

= 16 u

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मेथेन एक सहसंयोजी यौ गक है : काबन को चार इलेक् ॉन चा हए और प्रत्येक हाइ ोजन को एक, अतः काबन चार एकल
सहसंयोजी आबंध बनाता है — प्रत्येक हाइ ोजन के साथ एक।

क्या आप जानते ह? मेथेन बायोगैस और CNG का मुख्य अवयव है। यह एक प्रबल ग्रीनहाउस गैस भी है, इसी लए
गैस पाइपलाइन तथा धान के खेत से इसका रसाव जलवायु क दृ ष्ट से महत्त्वपूण है।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 180
9.8 आय नक यौ गक का सूत्र इकाई द्रव्यमान

सो चए और बताइए

प्र.23 पोटै शयम क्लोराइड (KCl) का सूत्र इकाई द्रव्यमान ात क जए। परमाणु द्रव्यमान — K = 39 u; Cl = 35.5
u

74.5 u।

KCl में है ं : 1 K, 1 Cl

सूत्र इकाई द व्यमान = (39 u × 1) + (35.5 u × 1)

= 74.5 u

इसे सूत्र इकाई द्रव्यमान क्य कहते ह, आ वक द्रव्यमान क्य नह ? क्य क पोटै शयम क्लोराइड अणुओं के
रूप म रहता ही नह । इसका ठोस एक त्र वमीय जालक है जसम प्रत्येक K⁺ के चार ओर Cl⁻ आयन और प्रत्येक
Cl⁻ के चार ओर K⁺ आयन होते ह — आप कसी एक K⁺ और एक Cl⁻ क ओर संकेत करके यह नह कह सकते
क ‘यह युग्म एक अणु है’। KCl तो केवल आयन का सरलतम पूण संख्या अनुपात 1 : 1 दशाता है, और वही
अनुपात सूत्र इकाई है।

संकेत: 35.5 u कोई भूल नह है। क्लोरीन के दो समस्था नक होते ह जनके द्रव्यमान 35 u और 37 u ह तथा जो
लगभग 3 : 1 के अनुपात म मलते ह; 35.5 u वही भा रत औसत है जो आपने अध्याय 8 म पढ़ा था।

प्र.24 मैग्नी शयम हाइ ॉक्साइड Mg(OH)2 का सूत्र इकाई द्रव्यमान ात क जए। परमाणु द्रव्यमान — Mg = 24 u;
O = 16 u; H = 1 u

58 u।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार AglaSem · NCERT Solutions

Mg(OH)₂ में है ं : 1 Mg, तथा 2 हाइडॉक्साइड समूह — अथ त 2 O और 2 H

सूत्र इकाई द व्यमान = (24 u × 1) + {(16 u × 1) + (1 u × 1)} × 2

= 24 u + (17 u × 2)
= 24 u + 34 u

= 58 u

कोष्ठक क्य महत्त्वपूण है: पादांक 2 कोष्ठक के बाहर है, अतः वह कोष्ठक के भीतर क प्रत्येक वस्तु को गुणा
करता है — ऑक्सीजन को भी और हाइ ोजन को भी। कोष्ठक क उपेक्षा करने पर आप 24 + 16 + 2 = 42 u
लख बैठगे, जो 16 u से गलत है। कोष्ठक इस लए है क एक Mg²⁺ आयन से दो पूरे हाइ ॉक्साइड आयन बँधे ह।

स्वयं जाँ चए: यही नयम उदाहरण 9.7 के कै ल्सयम नाइ े ट पर लगाइए — Ca(NO₃)₂ = 40 + {14 + (16 ×
3)} × 2 = 40 + 124 = 164 u ✓

अभ्यास प्रश्न — पृष्ठ 181 – 183
अध्याय के अंत के प्रश्न

अभ्यास प्रश्न

प्र.1 कसी एक तत्व (क) के तीसरे कोश म एक इलेक् ॉन है। एक अन्य तत्व (ख) है जसके दूसरे कोश म छह इलेक् ॉन
ह। (i) ा यत्व प्राप्त करने के लए ‘क’ कतने इलेक् ॉन का त्याग करेगा अथवा ग्रहण करेगा? (ii) वह कस
प्रकार का आयन बनाएगा? (iii) ा यत्व प्राप्त करने के लए ‘ख’ कतने इलेक् ॉन का त्याग करेगा अथवा
ग्रहण करेगा? (iv) वह कस प्रकार का आयन बनाएगा? (v) ‘क’ और ‘ख’ के संयो जत होने पर कस प्रकार का
आबंध बनेगा? (vi) उनके संयोजन से न मत यौ गक का सूत्र क्या होगा?

पहले वन्यास न त क जए। 'क' के तीसरे कोश म एक इलेक् ॉन है, अतः पहले दो कोश पूण होने ही चा हए : क = 2, 8, 1 (Z
= 11, सो डयम)। 'ख' के दूसरे कोश म छह इलेक् ॉन ह : ख = 2, 6 (Z = 8, ऑक्सीजन)।
(i) 'क' 1 इलेक् ॉन त्यागेगा। अपना एकमात्र M-कोश इलेक् ॉन हटा दे ने पर 2, 8 शेष रहता है — पूण अष्टक। इसके स्थान पर
सात इलेक् ॉन ग्रहण करना कह क ठन होता।
(ii) 'क' एकसंयोजी धनायन क⁺ बनाएगा।

क : 11 पोटॉन (+11), 11 इलेक्टॉन (−11) → उदासीन

क⁺ : 11 पोटॉन (+11), 10 इलेक्टॉन (−10) → कु ल आवेश +1

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(iii) 'ख' 2 इलेक् ॉन ग्रहण करेगा। छह संयोजकता इलेक् ॉन के साथ वह अष्टक से दो कम है; छह त्यागने क अपेक्षा दो ग्रहण
करना बहुत सरल है।
(iv) 'ख' संयोजी ऋणायन ख²⁻ बनाएगा ( वन्यास 2, 8)।
(v) आय नक आबंध। एक तत्व इलेक् ॉन स पता है और दूसरा उन्ह ग्रहण करता है, अतः यह स्थानांतरण है, साझेदारी नह । इससे
बने वपरीत आवे शत आयन फर स्थर वद्युत आकषण ारा परस्पर बँध जाते ह।
(vi) क₂ख।

पत्येक 'क' 1 इलेक्टॉन दे त ा है; पत्येक 'ख' को 2 चािहए → एक 'ख' के िलए दो 'क'

2 क⁺ + ख²⁻ → क ₂ख (वास्तिवक रूप में Na₂O — सोिडयम ऑक्साइड)

आवेश जाँच : 2(+1) + (−2) = 0 ✓

ऐसा क्य होता है: ‘तीसरे कोश म एक इलेक् ॉन’ को ठ क-ठ क पढ़ लेना ही पूरा प्रश्न है। कोई कोश तब तक भरना
आरंभ नह करता जब तक उससे नीचे वाला पूण न हो जाए, अतः तीसरे कोश म इलेक् ॉन होने का अथ ही है क
पहले दो म 2 और 8 ह। यह एक नष्कष तत्व, आयन, आबंध और सूत्र — चार न त कर दे ता है।

प्र.2 कसी तत्व ‘च’ के बाह्यतम कोश म छह इलेक् ॉन ह और वह एक परमाणुक अणु बनाता है। (i) ऐसा क्य हुआ
होगा? (ii) वह कस प्रकार का आबंध बनाएगा? (iii) उसके ारा न मत अणु क संरचना आरे खत क जए।
(iv) एक अन्य तत्व ‘छ’ के दूसरे कोश म दो इलेक् ॉन ह। उस अणु क संरचना आरे खत क जए जो तत्व ‘च’
और ‘छ’ के संयोजन से बनेगा।

'च' के बाह्यतम कोश म छह इलेक् ॉन ह, अतः वह अष्टक से दो इलेक् ॉन कम है। ऐसे तत्व म सबसे छोटा लेने पर च = ऑक्सीजन
(2, 6)।
(i) परमाणुक अणु क्य ? क्य क 'च' अकेले अपना अष्टक पूण नह कर सकता, और उसके पास सबसे नकट का परमाणु
दूसरा 'च' परमाणु ही है, जसम ठ क उतनी ही कमी है। कोई भी दूसरे से दो इलेक् ॉन ले नह सकता, क्य क तब दे ने वाले म चार
क कमी हो जाएगी। दोन को संतुष्ट करने वाली एकमात्र व्यवस्था यह है क प्रत्येक परमाणु दो इलेक् ॉन साझा क्षेत्र म डाल दे —
और दोन के अष्टक पूण हो जाने पर तीसरा परमाणु जोड़ने का कोई कारण नह बचता। अतः अणु दो पर ही रुक जाता है, च₂।
(ii) सहसंयोजी आबंध — वशेष रूप से -आबंध, क्य क इलेक् ॉन के दो युग्म साझा होते ह।
(iii) च₂ क संरचना

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार
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दू सरे ऑक्सीजन परमाणु का इलेक्टॉन

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दोन परमाणुओं के बीच दो साझा युग्म ( -आबंध, च = च) तथा प्रत्येक परमाणु पर दो एकाक युग्म। कसी भी परमाणु के चार ओर : 4

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साझा + 4 एकाक = 8 इलेक् ॉन।

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(iv) 'च' और 'छ' का यौ गक। 'छ' के दूसरेglकोश म दो इलेक् ॉन ह, अतः उसका वन्यास 2, 2 है (Z = 4, बे र लयम)। 'छ' को
दो संयोजकता इलेक् ॉन त्यागने ह और 'च' को ठ क दो चा हए, अतः दोन 1 : 1 के अनुपात म संयो जत होते ह।

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'छ' (2, 2) अपने दोन संयोजकता इलेक् ॉन 'च' (2, 6) को स्थानांत रत कर दे ता है। 'छ' छ²⁺ बन जाता है और 'च' च²⁻, तथा यौ गक
छच बनता है — यहाँ BeO।

छ (2, 2) → छ²⁺ + 2 e⁻; च (2, 6) + 2 e⁻ → च²⁻

छ²⁺ + च²⁻ → छच (BeO)

आवेश जाँच : (+2) + (−2) = 0 ✓

संकेत: इस स्तर पर अपे क्षत उत्तर ऊपर दखाया गया 1 : 1 इलेक् ॉन-स्थानांतरण वाला चत्र ही है। वास्तव म
बे र लयम इतना छोटा और अपने इलेक् ॉन को इतनी कसकर पकड़ने वाला परमाणु है क Be—O आबंध म
सहसंयोजी लक्षण बहुत अ धक होते ह, और BeO को सच्चे अणु के स्थान पर सूत्र इकाई के रूप म लखा जाता है
— यह सूक्ष्मता आप उच्च कक्षाओं म पढ़गे।

ऐसा क्य होता है: परमाणु साझा करगे या स्थानांतरण, यह इस पर नभर है क इलेक् ॉन पर उनक पकड़ म
कतना अंतर है। दो एकसमान 'च' परमाणु बराबर ख चते ह, अतः कोई जीत नह सकता — उन्ह साझा करना ही
होगा और आबंध सहसंयोजी होगा। 'छ' जैसी धातु अपने बाह्य इलेक् ॉन को ढ ला पकड़ती है, अतः 'च' उन्ह पूरी
तरह ले लेता है और आबंध आय नक हो जाता है।

प्र.3 आप एक नवीन आय नक यौ गक क अ भकल्पना करना चाहते ह जसम कुल धन आवेश 6+ है और कुल ऋण
आवेश 6– है। नम्न ल खत म से कौन-सा संयोजन आयन क सही संख्या दशाता है? (i) 2 Al3+ और 3 Cl–
(ii) 3 Mg2+ और 1 PO4 3– (iii) 2 Fe3+ और 3 O2– (iv) 3 Ca2+ और 2 SO4 2–

वकल्प (iii) — 2 Fe³⁺ और 3 O²⁻।

संयोजन कुल धनावेश कुल ऋणावेश संतु लत?

(i) 2 Al³⁺ और 3 Cl⁻ 2 × 3 = 6+ 3 × 1 = 3− नह

(ii) 3 Mg²⁺ और 1 PO₄³⁻ 3 × 2 = 6+ 1 × 3 = 3− नह

(iii) 2 Fe³⁺ और 3 O²⁻ 2 × 3 = 6+ 3 × 2 = 6− हाँ ✓
(iv) 3 Ca²⁺ और 2 SO₄²⁻ 3 × 2 = 6+ 2 × 2 = 4− नह

केवल (iii) म दोन योग 6 के बराबर ह, अतः केवल वही उदासीन यौ गक दे ता है। सूत्र है Fe₂O₃ — फे रक ऑक्साइड, जो जंग
और हेमेटाइट अयस्क का लाल-भूरा यौ गक है।

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ऐसा क्य होता है: प्रत्येक यौ गक को कुल मलाकर वैद्युत उदासीन होना ही चा हए — य द न हो तो शेष आवेश
और आयन को तब तक ख चता रहेगा जब तक संतुलन न बन जाए। अतः कसी भी आय नक सूत्र म (धनायन क
संख्या × धनायन का आवेश) = (ऋणायन क संख्या × ऋणायन का आवेश) होना चा हए। तयक व ध यही
सु न त करती है : Fe³⁺ और O²⁻ का तयक Fe₂O₃ दे ता है।

संकेत: शेष तीन को सरलता से ठ क कया जा सकता है — 1 Al³⁺ के साथ 3 Cl⁻ से AlCl₃, 3 Mg²⁺ के साथ 2
PO₄³⁻ से Mg₃(PO₄)₂, और 1 Ca²⁺ के साथ 1 SO₄²⁻ से CaSO₄ बनता है।

प्र.4 सही कथन (न ) का चयन क जए और गलत कथन (न ) को सही क जए। (i) तत्व अणुओं से बनते ह और
यौ गक परमाणुओं से बनते ह। (ii) कसी यौ गक का अणु सदै व एक ही प्रकार के दो अथवा अ धक परमाणुओं से
मलकर बनता है। (iii) नाइ ोजन गैस के एक अणु म तीन नाइ ोजन परमाणु होते ह। (iv) जल दो हाइ ोजन
परमाणुओं से मलकर बना है जो एक ऑक्सीजन परमाणु से सहसंयोजी रूप से आबं धत होते ह।

केवल कथन (iv) सही है। शेष तीन गलत ह; उनके सही रूप नीचे दए गए ह।
(i) गलत। इसम दोन भाग आपस म बदल गए ह और शब्द का प्रयोग भी ढ ला है।
सही रूप: तत्व केवल एक ही प्रकार के परमाणुओं से बनते ह — ये परमाणु अकेले रह सकते ह (He, Ne) अथवा तत्व के अणु
के रूप म जुड़ सकते ह (H₂, O₂, N₂, Cl₂)। यौ गक दो अथवा दो से अ धक भन्न तत्व के परमाणुओं से बनते ह जो एक
न त अनुपात म संयो जत होकर या तो अणु (H₂O, CO₂) बनाते ह या सूत्र इकाई (NaCl, CaCO₃)।
(ii) गलत। एक ही प्रकार के परमाणुओं से तत्व का अणु बनता है, यौ गक का नह ।
सही रूप: कसी यौ गक का अणु सदै व भन्न प्रकार के दो अथवा अ धक परमाणुओं से मलकर बनता है। उदाहरणाथ HCl
म एक हाइ ोजन और एक क्लोरीन परमाणु है; H₂SO₄ म तीन भन्न तत्व ह।
(iii) गलत। नाइ ोजन म पाँच संयोजकता इलेक् ॉन (2, 5) होते ह, तीन और चा हए, और वह उन्ह एक ही अन्य नाइ ोजन परमाणु
के साथ तीन युग्म साझा करके प्राप्त कर लेता है।
सही रूप: नाइ ोजन गैस के एक अणु म दो नाइ ोजन परमाणु होते ह, जो त्र-आबंध से जुड़े रहते ह — N ≡ N, सूत्र N₂।
(iv) सही।

O (2, 6) को 2 इलेक्टॉन चािहए; पत्येक H को 1

दो H परमाणु एक-एक इलेक्टॉन O परमाणु के साथ साझा करते है ं

→ दो एकल सहसंयोजी आबंध → H₂O, आि वक द व्यमान 18 u

ऐसा क्य होता है: इस प्रश्न का असली जाल ‘अणु’ शब्द है। अणु एक से अ धक आबं धत परमाणुओं का वह वैद्युत
उदासीन समूह है जो स्वतंत्र रूप से रह सकता है। एक ही प्रकार के परमाणु → तत्व का अणु; भन्न प्रकार के परमाणु
→ यौ गक का अणु। इन दोन को अलग रखते ही (i), (ii) और (iii) एक साथ सुलझ जाते ह।

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प्र.5 नम्न ल खत यौ गक के रासाय नक सूत्र ल खए। (i) ऐलु म नयम नाइ े ट (ii) कै ल्सयम ऑक्साइड (iii) फे रक
ऑक्साइड

पहले धनायन ल खए, प्रतीक के नीचे आवेश क संख्याएँ ल खए, उनका तयक करके पादांक बनाइए और फर उभय नष्ठ
गुणनखंड से भाग द जए।

यौ गक आयन तयक सूत्र आवेश जाँच

(i) ऐलु म नयम नाइ े ट Al³⁺, NO₃⁻ Al₁(NO₃)₃ Al(NO₃)₃ (+3) + 3(−1) = 0

(ii) कै ल्सयम ऑक्साइड Ca²⁺, O²⁻ Ca₂O₂ ÷ 2 CaO (+2) + (−2) = 0

(iii) फे रक ऑक्साइड Fe³⁺, O²⁻ Fe₂O₃ Fe₂O₃ 2(+3) + 3(−2) = 0

Al(NO₃)₃ म कोष्ठक पर ध्यान द जए : यहाँ तीन नाइ े ट आयन ह और कोष्ठक प्रत्येक NO₃ समूह को अखंड रखता है। उसके
बना AlNO₃₃ लखना नरथक हो जाएगा।

संकेत: (ii) म तयक से पहले Ca₂O₂ मलता है, जसे उभय नष्ठ गुणनखंड 2 से भाग दे ना आवश्यक है। रासाय नक
सूत्र सदै व सरलतम पूण संख्या अनुपात दशाता है, अतः उत्तर CaO है।

प्र.6 आयन के नम्न ल खत युग्म से न मत यौ गक के सूत्र ल खए। (i) Ca2+ और Br– (ii) Al3+ और CO3 2–
(iii) K+ और SO4 2– (iv) NH4 + और Cl–

आयन तयक सूत्र नाम आवेश जाँच

(i) Ca²⁺, Br⁻ Ca₁Br₂ CaBr₂ कै ल्सयम ब्रोमाइड (+2) + 2(−1) = 0

(ii) Al³⁺, CO₃²⁻ Al₂(CO₃)₃ Al₂(CO₃)₃ ऐलु म नयम काब नेट 2(+3) + 3(−2) = 0

(iii) K⁺, SO₄²⁻ K₂(SO₄)₁ K₂SO₄ पोटै शयम सल्फेट 2(+1) + (−2) = 0

(iv) NH₄⁺, Cl⁻ 1 और 1, दोन नह लखे जाते NH₄Cl अमो नयम क्लोराइड (+1) + (−1) = 0

कोष्ठक कब लगते ह? केवल तब जब एक ही प्रकार के दो अथवा अ धक बहुपरमा ण्वक आयन ह । अतः Al₂(CO₃)₃ म कोष्ठक
चा हए (तीन काब नेट आयन), K₂SO₄ म नह (एक ही सल्फेट आयन), और NH₄Cl म भी नह (एक ही अमो नयम आयन)।

ऐसा क्य होता है: बहुपरमा ण्वक आयन एक ही आवे शत इकाई है — उसके परमाणु आपस म सहसंयोजी रूप से
बँधे ह और पूरा समूह एक साथ ग त करता है। तयक करते समय उसे एकल प्रतीक क भाँ त ही ली जए, और जब
भी पादांक को पूरे समूह पर लगाना हो तब कोष्ठक का प्रयोग क जए।

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क्या आप जानते ह? NH₄Cl एक असामान्य आय नक यौ गक है — इसके दोन आयन के भीतर सहसंयोजी
आबंध ह। NH₄⁺ के चार N—H आबंध सहसंयोजी ह, जब क NH₄⁺ और Cl⁻ के बीच का आबंध आय नक है।

प्र.7 चत्र 9.18 म नम्न ल खत म से कौन Cl– आयन को सही प्रकार से नरू पत कर रहा है (क्लोरीन क परमाणु
संख्या 17 है)?

(i) (ii) (iii) (iv)

चत्र 9.18, पृष्ठ 182: (i) से (iv) तक चार कोश-आरेख। बीच का काला बदु ना भक है तथा प्रत्येक नीला बदु एक
इलेक् ॉन।

वकल्प (ii)।
क्लोराइड आयन वह क्लोरीन परमाणु है जसने एक इलेक् ॉन ग्रहण कर लया है, अतः चत्र म यह दखना चा हए —

क्लोरीन परमाणु, Z = 17 → 17 इलेक्टॉन → 2, 8, 7

Cl + 1 e⁻ → Cl⁻ → 18 इलेक्टॉन → 2, 8, 8

पुस्तक म छपे चार चत्र के बदु ग नए —

चत्र K L M कुल नणय
कोश कोश कोश इलेक् ॉन

(i) 2 7 8 17 गलत — L कोश म केवल 7 ह जब क M कोश म पहले ही 8 ह। कोई
कोश भरे बना अगला कोश आरंभ नह होता।

(ii) 2 8 8 18 सही — यही Cl⁻ है ✓

(iii) 2 8 9 19 गलत — 19 इलेक् ॉन, जो क्लोरीन के 17 प्रोटॉन से दो अ धक ह; और
बाह्यतम कोश म 9, जब क उसम कभी भी 8 से अ धक नह हो सकते।

(iv) 2 8 7 17 गलत — यह उदासीन क्लोरीन परमाणु है, आयन नह ।

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Cl⁻ co m
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क्लोराइड आयन : ना भक म 17 प्रोटॉन परंतु 18 इलेक् ॉन, जो 2, 8, 8 म व्यव स्थत ह — इसी लए कुल आवेश −1 है।

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Cl⁻ पर आवेश = (पोटॉनों से +17) + (इलेक्टॉनों से −18) = −1 ✓
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ऐसा क्य होता है: इस प्रश्न का जाल यह है क चत्र से प्रोटॉन क संख्या का पता ही नह चलता — ना भक केवल
एक बदु के रूप म बना है। प्रश्न म Z = 17 दया गया है, अतः सही चत्र वही है जसम 18 इलेक् ॉन ठ क क्रम 2, 8,
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8 म भरे ह । चत्र (iv) का योग परमाणु के लए सही है पर आयन के लए गलत; चत्र (i) का योग सही है पर भरने
m बाह्यतम कोश क अ धकतम सीमा दोन गलत ह।
का नयम टू टता है; चत्र (iii) म योगeऔर
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प्र.8 नम्न ल खत पदाथ का सूत्र इकाई द्रव्यमान ात क जए। (i) अमो नयम नाइ े ट (NH4NO3) जसका उपयोग
नाइ ोजन उवरक के रूप म कया जाता है जो पौध क वृ द्ध हेतु आवश्यक है। (ii) फॉ ो रक अम्ल (H3PO4)
जसका उपयोग फॉ े ट उवरक और अपमाजक के नमाण म कया जाता है। (iii) सो डयम हाइ ोजनकाब नेट
(NaHCO3) जसका उपयोग अम्लता को कम करता है और पाचन म सहायता करता है।

प्रयुक्त परमाणु द्रव्यमान (अध्याय 8 से) : H = 1 u, C = 12 u, N = 14 u, O = 16 u, Na = 23 u, P = 31 u।
(i) अमो नयम नाइ े ट, NH₄NO₃ → 80 u

उपिस्थत परमाणु : 2 N, 4 H, 3 O

= (14 u × 2) + (1 u × 4) + (16 u × 3)

= 28 u + 4 u + 48 u

= 80 u

(ii) फॉ ो रक अम्ल, H₃PO₄ → 98 u

उपिस्थत परमाणु : 3 H, 1 P, 4 O

= (1 u × 3) + (31 u × 1) + (16 u × 4)

= 3 u + 31 u + 64 u

= 98 u

(iii) सो डयम हाइ ोजनकाब नेट, NaHCO₃ → 84 u

उपिस्थत परमाणु : 1 Na, 1 H, 1 C, 3 O

= (23 u × 1) + (1 u × 1) + (12 u × 1) + (16 u × 3)

= 23 u + 1 u + 12 u + 48 u

= 84 u

संकेत: NH₄NO₃ म नाइ ोजन दो बार आया है — एक बार अमो नयम आयन म और एक बार नाइ े ट आयन म।
गुणा करने से पहले सूत्र म प्रत्येक तत्व के सभी परमाणु जोड़ ली जए; दूसरा N भूल जाने पर 14 u क चूक हो
जाएगी।

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ऐसा क्य होता है: अमो नयम नाइ े ट अच्छा उवरक इसी ग णत के कारण है — उसके 80 u म से 28 u नाइ ोजन
है, अथात वह द्रव्यमान के अनुसार 28/80 × 100 = 35 % नाइ ोजन है, और प त्तय क वृ द्ध के लए पौध को
सबसे अ धक आवश्यकता नाइ ोजन क ही होती है।

प्र.9 उन यौ गक के सूत्र ल खए जो नम्न ल खत क परस्पर अ भ क्रया ारा बनते ह— (i) मैग्नी शयम और
नाइ ोजन (ii) ली थयम और नाइ ोजन (iii) सो डयम और सल्फर (iv) ऐलु म नयम और ऑक्सीजन

पहले यह नका लए क प्रत्येक तत्व कौन-सा आयन बनाता है, फर आवेश को संतु लत क जए।

तत्व वन्यास बने आयन सूत्र आवेश जाँच

(i) Mg और N 2, 8, 2 तथा 2, 5 Mg²⁺, N³⁻ Mg₃N₂ 3(+2) + 2(−3) = 0

(ii) Li और N 2, 1 तथा 2, 5 Li⁺, N³⁻ Li₃N 3(+1) + (−3) = 0

(iii) Na और S 2, 8, 1 तथा 2, 8, 6 Na⁺, S²⁻ Na₂S 2(+1) + (−2) = 0

(iv) Al और O 2, 8, 3 तथा 2, 6 Al³⁺, O²⁻ Al₂O₃ 2(+3) + 3(−2) = 0

नाम : (i) मैग्नी शयम नाइ ाइड, (ii) ली थयम नाइ ाइड, (iii) सो डयम सल्फाइड, (iv) ऐलु म नयम ऑक्साइड।

ऐसा क्य होता है: नाइ ोजन के पाँच संयोजकता इलेक् ॉन होते ह और वह अष्टक से तीन कम है, अतः तीन
इलेक् ॉन लेकर N³⁻ बनाता है। मैग्नी शयम दो-दो और ली थयम एक-एक इलेक् ॉन दे सकता है — इसी लए दो N
के लए तीन Mg (दोन ओर छह इलेक् ॉन) और एक N के लए तीन Li। पादांक सदै व वे सबसे छोटे पूणाक होते ह
जनसे इलेक् ॉन का हसाब ठ क-ठ क बराबर हो जाए।

क्या आप जानते ह? Al₂O₃ वही कठोर, अदृश्य परत है जो ऐलु म नयम पर वायु के संपक म आते ही बन जाती है।
यही परत ऐलु म नयम के बतन को आगे संक्षा रत होने से रोकती है, और यही पदाथ मा णक तथा नीलम जैसे रत्न
का भी है, जनका रंग अन्य धातु आयन के अंश से आता है।

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प्र.10 बाईं ओर दए गए धनायन और शीष पर दए गए ऋणायन से न मत यौ गक के सूत्र लखकर ता लका 9.3
को पूण क जए। LiNO3 एक उदाहरण के रूप म दया गया है।

NO 3 − SO 4 2− PO 4 3−

NH4+

Li+ LiNO3

Al3+

Cu2+

ता लका 9.3, पृष्ठ 182 — जैसी पुस्तक म छपी है; LiNO3 उदाहरण के रूप म भरा है।

प्रत्येक कोष्ठ म आवेश क संख्याओं का तयक क जए, फर सरलतम रूप द जए। जब कसी बहुपरमा ण्वक आयन का पादांक 2
या उससे अ धक हो, तभी उस पर कोष्ठक लगेगा।

NO₃⁻ SO₄²⁻ PO₄³⁻

NH₄⁺ NH₄NO₃ (NH₄)₂SO₄ (NH₄)₃PO₄

Li⁺ LiNO₃ Li₂SO₄ Li₃PO₄

Al³⁺ Al(NO₃)₃ Al₂(SO₄)₃ AlPO₄

Cu²⁺ Cu(NO₃)₂ CuSO₄ Cu₃(PO₄)₂

दो कोष्ठ को दोबारा दे खए —

AlPO₄ — 3 और 3 का तयक करने पर Al₃(PO₄)₃ मलता है, जसे उभय नष्ठ गुणनखंड 3 से भाग दे कर सरलतम अनुपात
1 : 1 तक लाना आवश्यक है।
CuSO₄ — 2 और 2 का तयक Cu₂(SO₄)₂ दे ता है, जसे 2 से भाग दे कर CuSO₄ प्राप्त होता है।

ऐसा क्य होता है: रासाय नक सूत्र आयन का सरलतम पूण संख्या अनुपात दशाता है, ठोस के कसी टु कड़े म
आयन क वास्त वक संख्या नह । अतः तयक के प ात उभय नष्ठ गुणनखंड सदै व काटना पड़ता है — इसी कारण
MgO को Mg₂O₂ और CaCO₃ को Ca₂(CO₃)₂ नह लखा जाता।

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संकेत: (NH₄)₂SO₄ और (NH₄)₃PO₄ दोन म कोष्ठक चा हए, क्य क एक से अ धक अमो नयम आयन ह।
NH₄NO₃ म कोष्ठक नह — वहाँ प्रत्येक आयन एक ही है।

प्र.11 5.3 g सो डयम काब नेट और 6.0 g ऐसी टक अम्ल परस्पर अ भ क्रया ारा 2.2 g काबन डाइऑक्साइड, 0.9
g जल और 8.2 g सो डयम ऐसीटे ट बनाते ह। जाँच क जए क क्या इसम द्रव्यमान संरक्षण के नयम का
अनुपालन हो रहा है।

नयम का अनुपालन हो रहा है — दोन ओर 11.3 g आता है।

अिभकारक
सोिडयम काब ने ट का द व्यमान = 5.3 g

ऐसीिटक अम्ल का द व्यमान = 6.0 g

अिभकारकों का कु ल द व्यमान = 5.3 g + 6.0 g = 11.3 g

उ पाद
त्

काबन डाइऑक्साइड का द व्यमान = 2.2 g

जल का द व्यमान = 0.9 g

सोिडयम ऐसीटे ट का द व्यमान = 8.2 g

उत्पादों का कु ल द व्यमान = 2.2 g + 0.9 g + 8.2 g = 11.3 g

अिभकारकों का द व्यमान = उत्पादों का द व्यमान = 11.3 g ✓

अतः इस अ भ क्रया म द्रव्यमान संरक्षण का नयम मान्य है।

ऐसा क्य होता है: यहाँ एक उत्पाद काबन डाइऑक्साइड है, जो गैस है। आँकड़े इसी लए मल पाए क्य क
अ भ क्रया बंद पात्र म क गई थी और 2.2 g CO₂ तोले जाने के लए वह मौजूद थी। यही अ भ क्रया खुले बीकर
म क जए तो तुला पहले 11.3 g और बाद म केवल 9.1 g दखाएगी — और असावधान वद्याथ यह नष्कष
नकाल लेगा क नयम टू ट गया।

संकेत: इस प्रकार के प्रश्न म जब भी उत्पाद म कोई गैस द हो तो पहले यह दे खए क पात्र बंद है या नह । यही एक
शब्द तय करता है क ग णत मलेगा या नह ।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार
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. com
em(iii) इसका
प्र.12 य द कसी स्पीशीज म 11 प्रोटॉन, 12 न्यू ॉन और 10 इलेक् ॉन ह, तो (i) उसका परमाणु क्रमांक और द्रव्यमान

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o वन्यास ल खए। (iv) स्पीशीज का नाम ल खए। gl
संख्या क्या ह गे? (ii) क्या यह उदासीन है, धनायन है अथवा ऋणायन है? व्याख्या क जए।
इलेक् .ॉcनक
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ag

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(i) परमाणु क्रमांक Z = 11, द्रव्यमान संख्या A = 23।

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Z = पोटॉनों की संख्या = 11

A = पोटॉन + न्यूट ॉन = 11 + 12 = 23

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ध्यान द जए क इनम से कसी म भी इलेक् ॉन क कोई भू मका नह — उनका द्रव्यमान नगण्य है, और तत्व क पहचान प्रोटॉन

. coन त होती है। a
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क संख्या से ही

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(ii) यह धनायन है, जस पर +1 आवेश है।

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पोटॉनों से आवेश = +11

इलेक्टॉनों से आवेश = −10
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कु ल आवेश = (+11) + (−10) = +1

com
m .
प्रोटॉन क संख्या से एक इलेक् ॉन कम है, अतः एक धनावेश असंतु लत रह गया है। जस परमाणु ने इलेक् ॉन त्यागे ह वह धनायन
कहलाता है।
o m l a se
m .cक् ॉ नक वन्यास : 2, 8। इस स्पीशीज म केवल 10 इलेक् ॉन ह, अतः K कोशagम 2 और L कोश म शेष 8 — ठ क
e जैसी व्यवस्था। (उदासीन परमाणु का वन्यास 2, 8, 1 होता।)
(iii) इले

l a sनऑन
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(iv) यह सो डयम आयन Na⁺ है — अ धक स्पष्टता से 2311Na⁺।

a se
. com a g l
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ऐसा क्य होता है: तत्व क पहचान केवल प्रोटॉन से क जए। Z = 11 सो डयम ही है, इलेक् ॉन चाहे जतने ह —
s नह । सो डयम धातु क अ भ क्रया म ठ क यही होता है : वह अपना
इलेक् ॉन बदलने से आवेश बदलता lहैa
a g , तत्व
एकमात्र संयोजकता इलेक् ॉन त्यागकर साधारण नमक वाला स्थायी Na⁺ आयन बन जाती है।

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o m l a s8,e 7 (i) कौन-सा तत्व अ धक
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दो तत्व , ‘क’ और ‘ख’ के वन्यास नम्न ल खत ह— (क) 2, 8, 5 (ख) 2,

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प्र.13

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अ भ क्रयाशील है ? (ii) जब ‘क’ और ‘ख’ सं योजन करगे तब वे आय नक आबंध बनाएँगे अथवा सहसंयोजी

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आबंध? इलेक् ॉन ानांतरण अथवा साझेदारी के उपयोग ारा समझाइए। (iii) उनसे न मत यौ गक के सूत्र

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का पूवानुमान क जए।
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'क' 2, 8, 5 है — पाँच संयोजकता इलेक् ॉन, अष्टक से तीन कम (Z = 15, फॉ ोरस)। 'ख' 2, 8, 7 है — सात संयोजकता
इलेक् ॉन, एक कम (Z = 17, क्लोरीन)।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार AglaSem · NCERT Solutions

(i) 'ख' अ धक अ भ क्रयाशील है।

'क' को अष्टक पूण करने हेत ु चािहए 8 − 5 = 3 इलेक्टॉन

'ख' को अष्टक पूण करने हेत ु चािहए 8 − 7 = 1 इलेक्टॉन

'ख' स्था यत्व से केवल एक इलेक् ॉन दूर है, अतः वह सरलता से और लगभग हर वस्तु के साथ अ भ क्रया कर लेता है। 'क' को तीन
इलेक् ॉन जुटाने ह, जो कह क ठन माँग है, इस लए वह कम उत्सुकता से अ भ क्रया करता है।
(ii) वे सहसंयोजी आबंध बनाएँगे। 'क' और 'ख' दोन के संयोजकता कोश म चार से अ धक इलेक् ॉन ह, अतः कोई भी
इलेक् ॉन स पेगा नह — पाँच या सात इलेक् ॉन त्यागने के लए वशाल ऊजा चा हए। और कोई दूसरे से इलेक् ॉन ले भी नह
सकता, क्य क दोन ही ग्रहण करना चाहते ह। एकमात्र व्यावहा रक व्यवस्था साझेदारी है।
अतः 'क' तीन 'ख' परमाणुओं म से प्रत्येक के साथ एक-एक इलेक् ॉन साझा करता है। प्रत्येक साझा युग्म एक कमी पूरी करता है :
'क' को तीन साझा युग्म मलकर आठ तक पहुँचा दे ते ह, और प्रत्येक 'ख' को एक साझा युग्म से आठ मल जाते ह।
(iii) सूत्र : कख₃ (वास्त वक रूप म PCl₃, फॉ ोरस ाइक्लोराइड)।

'क' को चािहए 3 इलेक्टॉन, और पत्येक 'ख' के वल 1 का साझा दे सकता है

→ एक 'क' के िलए तीन 'ख' परमाणु → कख₃

संयोजकता जाँच : 'क' की संयोजकता 3, 'ख' की 1; ितयक → क₁ख₃

ऐसा क्य होता है: अनुभाग 9.4.2 का एक मोटा नयम — संयोजकता कोश म चार से कम इलेक् ॉन ह तो परमाणु
त्यागता है (धातु, आय नक आबंधन); चार से अ धक ह तो ग्रहण करता है अथवा साझा करता है। अतः दो अधातुएँ
सदै व साझा ही करगी और सहसंयोजी यौ गक बनेगा। आय नक आबंध के लए कसी एक साथी का दे ने को तैयार
होना आवश्यक है, और यहाँ कोई नह है।

प्र.14 नीचे दए गए अ भकथन एवं कारण को प ढ़ए और उनके संबंध म आगे दए गए वकल्प म से सही वकल्प का
चयन क जए। अ भकथन — ग लत अव ा म कॉपर सल्फेट वद्युत का चालन करता है परंतु ठोस अव ाम
नह । कारण— जालक क ग लत अव ा म कॉपर और सल्फेट आयन क त नयत होती है जब क ठोस
अव ा म वे स्वतंत्र रूप से ग त कर सकते ह। (i) अ भकथन और कारण दोन सत्य ह और कारण, अ भकथन
क सही व्याख्या है। (ii) अ भकथन और कारण दोन सत्य ह परंतु कारण, अ भकथन क सही व्याख्या नह है।
(iii) अ भकथन सत्य है, परंतु कारण असत्य है। (iv) अ भकथन असत्य है, परंतु कारण सत्य है।

वकल्प (iii) — अ भकथन सत्य है, परंतु कारण असत्य है।
अ भकथन सत्य है। कॉपर सल्फेट आय नक यौ गक है। ठोस अवस्था म उसके Cu²⁺ और SO₄²⁻ आयन जालक क नयत
स्थ तय म जकड़े रहते ह, अतः कोई आवेश ग त नह कर सकता और वह चालन नह करता। पघलाने पर जालक टू ट जाता है;
आयन ग तशील हो जाते ह और ग लत पदाथ चालन करने लगता है।
कारण असत्य है — उसम दोन अव ाएँ ठ क उलट द गई ह।

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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार AglaSem · NCERT Solutions

अव ा कारण क्या कहता है वास्तव म क्या सत्य है

ठोस आयन स्वतंत्र रूप से ग त कर सकते ह आयन जाल क में िनयत रहते है ं

गिलत आयन क स्थ त नयत होती है आयन स्वतंत्र रूप से गित करते है ं

कारण असत्य कथन है, अतः वकल्प (i) और (ii) नरस्त हो जाते ह; और अ भकथन सत्य है, अतः (iv) भी नरस्त। उत्तर (iii) है।

ऐसा क्य होता है: गलन वस्तुतः वही प्रक्रम है जसम कण को नयत स्थ तय म रोके रखने वाले बल पर वजय
पाई जाती है। आय नक ठोस म ये बल वपरीत आवेश के बीच के प्रबल स्थर वद्युत आकषण ह, इसी लए उसका
गलनांक उच्च होता है — और एक बार वे बल टू ट गए तो आयन मुक्त हो जाते ह। जो कथन द्रव म आयन को नयत
और ठोस म मुक्त बताए, वह गलन को उलटा व णत कर रहा है।

संकेत: अ भकथन-कारण प्रश्न म पहले अ भकथन और कारण को अलग-अलग जाँ चए, उसके बाद ही पू छए क
कारण अ भकथन क व्याख्या करता है या नह । यहाँ कारण पहले ही चरण म असफल हो जाता है, अतः दूसरा चरण
आता ही नह ।

प्र.15 27Al, 80Br– और 201Hg2+ कण म क्रमशः 13, 35 और 80 प्रोटॉन ह। इनम कतने इलेक् ॉन और न्यू ॉन
ह?

दो नयम का उपयोग क जए : न्यू ॉन = द्रव्यमान संख्या − प्रोटॉन, तथा इलेक् ॉन = प्रोटॉन − आवेश (धनावेश का अथ है
इलेक् ॉन कम ह, ऋणावेश का अथ है अ त रक्त इलेक् ॉन उप स्थत ह)।

स्पीशीज द्रव्यमान संख्या A प्रोटॉन आवेश इलेक् ॉन न्यू ॉन

27Al 27 13 0 (उदासीन परमाणु) 13 27 − 13 = 14

80Br⁻ 80 35 −1 (1 e⁻ ग्रहण कया) 35 + 1 = 36 80 − 35 = 45

201Hg²⁺ 201 80 +2 (2 e⁻ त्यागे) 80 − 2 = 78 201 − 80 = 121

27Al → 13 इलेक्टॉन, 14 न् यूटॉन
80Br⁻ → 36 इले टॉन, 45 न्यूटॉन
क्

201Hg²⁺ → 78 इले ट ॉन , 121 न्यूट ॉन
क्

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ऐसा क्य होता है: आयन बनने से केवल इलेक् ॉन प्रभा वत होते ह। प्रोटॉन और न्यू ॉन ना भक म रहते ह और
रसायन उन्ह छू ता ही नह , अतः Br⁻ क द्रव्यमान संख्या ब्रोमीन परमाणु क तरह 80 ही रहती है और Hg²⁺ म अब
भी 121 न्यू ॉन ह। केवल इलेक् ॉन क संख्या — और इसी लए आवेश — बदला है।

स्वयं जाँ चए: 36 इलेक् ॉन वाले Br⁻ का वन्यास 2, 8, 18, 8 है — ठ क क्रप्टॉन जैसा। वह एक इलेक् ॉन ग्रहण
करना ही हैलोजन क चाह है, और इसी लए ब्रोमीन इतनी अ भ क्रयाशील है।

प रयोजना काय — पृष्ठ 183
प रयोजना काय

प रयोजना काय

प्र.1 एक प्रयोग क अ भकल्पना और नष्पादन यह दशाने और तुलना करने हेतु क जए क जल म हाइ ोजन और
ऑक्सीजन सदै व समान अनुपात म अ स्तत्व म होते ह चाहे उसका ोत कुछ भी हो।

उ े श्य: यह दशाना क भन्न- भन्न ोत का जल सदै व हाइ ोजन और ऑक्सीजन म एक ही न त अनुपात म वभा जत होता है
— अथात स्थर अनुपात के नयम क प्रत्यक्ष जाँच।
सद्धांत। जल म दष्ट धारा प्रवा हत करने पर उसका अपघटन होता है। हाइ ोजन कैथोड (ऋण इलेक् ोड) पर और ऑक्सीजन
ऐनोड पर एक त्रत होती है। य द जल सदै व H₂O है तो आयतन अनुपात सदै व 2 : 1 ही नकलना चा हए, ोत चाहे कोई भी हो।
उपकरण: हॉफमान वोल्टामीटर (अथवा एक प्ला स्टक टब म दो काबन इलेक् ोड पर उलट रखी दो अंशां कत परखन लयाँ), 9 V
बैटरी, तनु सल्फ्यू रक अम्ल, तथा चार ोत का जल — नल, वषा, बोरवेल और नद ।
वध

1. प्रत्येक प्र तदश को छानकर फर आस वत क जए। यही चरण प्रयोग का नणायक चरण है — घुले हुए लवण हटने ही चा हए,
अन्यथा आप जल का नह , वलयन का वद्युत अपघटन कर रहे ह गे।
2. उपकरण म पहला आस वत प्र तदश भ रए। चालकता दे ने के लए तनु सल्फ्यू रक अम्ल क 3–4 बूँद डा लए। प्रत्येक प्र तदश म
ठ क उतनी ही मात्रा डा लए।
3. दोन अंशां कत न लकाओं को पूरी तरह भरकर इलेक् ोड पर उलटा र खए और 9 V बैटरी जो ड़ए।
4. एक न त समय तक — मान ली जए 10 मनट — चलाइए और प्रत्येक न लका म एक त्रत गैस का आयतन प ढ़ए।
5. गैस क जाँच क जए : अ धक आयतन वाली गैस जलती हुई तीली के पास ‘पॉप’ ध्व न दे ती है (हाइ ोजन); कम आयतन
वाली गैस सुलगती तीली को पुनः जला दे ती है (ऑक्सीजन)।
6. उपकरण को अच्छ तरह धोकर चार ोत के लए यही दोहराइए।

नमूना प्रेक्षण

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जल का ोत H₂ का आयतन O₂ का आयतन अनुपात H₂ : O₂

नल का जल 20.0 mL 10.0 mL 2:1

वष जल 18.2 mL 9.1 mL 2:1

बोरवेल का जल 21.4 mL 10.6 mL 2:1

नदी का जल 19.6 mL 9.9 mL 2:1

नष्कष। कुल आयतन प्रत्येक प्रयास म कुछ भन्न रहता है — यह केवल धारा और समय के छोटे अंतर को दशाता है — परंतु
अनुपात हर बार 2 : 1 ही रहता है। प्रत्येक ोत के जल का संघटन एक ही है।

H₂ के 2 आयतन : O₂ का 1 आयतन

→ H₂ के 2 अणु : O₂ का 1 अणु → 4 H परमाणु : 2 O परमाणु → H₂O

द व्यमान के अनुसार : (4 × 1 u) : (2 × 16 u) = 4 : 32 = 1 : 8 ✓

जाँच को नष्पक्ष रखने वाले नयंत्रण: प्रत्येक प्रयास म अम्ल का समान आयतन, वही इलेक् ोड, वही धारा और वही समय; और
आयतन तभी प ढ़ए जब न लकाएँ ठं डी हो चुक ह तथा बुलबुले नकल चुके ह ।

सुरक्षा प्रथम: हाइ ोजन ज्वलनशील है — तीली वाली जाँच के अ त रक्त ज्वाला को दूर र खए, और जाँच भी
थोड़ी-सी गैस पर ही क जए। नम्न वोल्टता क बैटरी का ही प्रयोग क जए, मुख्य वद्युत आपू त का कभी नह ।

प्र.2 कन्ही तीन तत्व के परमाणुओं एवं आयन क तुलना क जए। स्तंभ आलेख (Bar graphs) का उपयोग करते
हुए आयन नमाण के पूव और प ात इलेक् ॉन क संख्या दशाइए।

सो डयम, मैग्नी शयम और क्लोरीन ली जए — दो धातुएँ जो इलेक् ॉन त्यागती ह और एक अधातु जो एक इलेक् ॉन ग्रहण करती
है।

तत्व Z परमाणु : इलेक् ॉन एवं प रवतन आयन : इलेक् ॉन एवं आवेश
(प्रोटॉन) वन्यास वन्यास

सोिडयम 11 11 — 2, 8, 1 1 e⁻ त्यागता है 10 — 2, 8 Na⁺

मैग्नीिशयम 12 12 — 2, 8, 2 2 e⁻ त्यागता है 10 — 2, 8 Mg²⁺

क्लोरीन 17 17 — 2, 8, 7 1 e⁻ ग हण करता 18 — 2, 8, 8 Cl⁻
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कक्षा 9 वज्ञान अध्याय 9 द्रव्य का परमा ण्वक आधार
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परमाण ु आयन

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इलेक्टॉनों की संख्या

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आयन बनने से पूव और प ात इलेक् ॉन क संख्या। दोन धातुओं म स्तंभ नीचे गरता है और क्लोरीन म ऊपर चढ़ता है — फर भी प्रत्येक

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आयन पूण अष्टक पर ही जाकर रुकता है।

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आलेख क्या दशाता है। सो डयम और मैग्नी शयम गरकर 10 इलेक् ॉन पर आते ह; क्लोरीन चढ़कर 18 पर जाता है। संख्याएँ

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वपरीत दशाओं म चलती ह, फर भी तीन एक ही प्रकार क व्यवस्था पर पहुँचते ह — पूण बाह्यतम कोश। Na⁺ और Mg²⁺ दोन

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2, 8 ( नऑन जैसे) और Cl⁻ 2, 8, 8 (आगन जैसा) हो जाते ह।

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ऐसा.cक्य होता है: प्रोटॉन क संख्या कभी नह बदलती — सो डयम म अब a gभी 11, मैग्नी शयम म 12 और
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aseक्लोरीन म 17। केवल इलेक् ॉन क गनती हलती है, और उससे उत्पन्न असंतुलन ही आयन का आवेश है। इसी लए
agl आयन अपने मूल परमाणु से इतना भन्न व्यवहार करता है : सो डयम धातु जल म आग पकड़ लेती है, जब क Na⁺

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वही है जो आप भोजन पर छड़कते ह।
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यह क जए: आलेख म प्रत्येक स्थ त के लए प्रोटॉन का तीसरा स्तंभ भी जो ड़ए। वह 11, 12 और 17 पर स्थर
रहेगा जब क इलेक् ॉन वाले स्तंभ हलते रहगे — यही चत्र बताता है क आवेश क्य उत्पन्न होता है।

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m .c धनायन और ऋणायन का एक काड गेम बनाइए। इसम आप नम्न aलgखत संभा वत वचार को सं ान म ले
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सकते ह— काड क ढे री म से अथवा फैले हुए काड म से एक काड उठा सकते ह और अपने हाथ के काड से

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उनका मलान करते हुए यौ गक बना सकते ह। आप अवांछनीय काड को छोड़ सकते ह। यौ गक बनाने हेतु अन्य
खला ड़य से भी काड ले सकते ह और उन काड का उपयोग भी कर सकते ह जो उनके पास पहले से ह।
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यहाँ एक पूरा, खेलने योग्य प्रारूपag
दया गया है जसे आप अपने अनुसार बदल सकते ह।

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 9
TypeSolution
Pages65
Languagehindi
Updated19 Sep 2026