aglasem.com
Home Schools Admission Career Mock Test PDF Docs Playground
ClassChoose class
StateSelect state

NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन

AglaSem पर कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन (अन्वेषण) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 9 Science Chapter 13 Earth As a System Energy Matter and Life (Exploration), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन - Page 1 of 50

About NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन

NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन is available here for free download. Published by NCERT for Class 9, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (50 pages). Candidates preparing for Class 9 can use NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

How can I download NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन?

Open this page and click the Download button to save NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन as a PDF. It is completely free on AglaSem Docs.

Is NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन free to download?

Yes. NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

How many pages does NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन have?

NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन contains 50 pages, which you can read online or download together as a single PDF.

Where can I find more Class 9 study material?

You can find more Class 9 question papers, sample papers, syllabus, and answer keys on AglaSem Docs.

NCERT Solutions Class 9 Science Chapter 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन – Text

Read the full text of this solution below — useful to quickly search, copy and reference the content online without downloading the PDF.

📄 View text version (50 pages)

Page 1

F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा9

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 13: पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य
और जीवन

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — अन्वेषण

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

252 – 269 16 39 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 49 pages

Page 2

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 9 · व ान · अन्वे ष ण

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 13: पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य
और जीवन
पवन, मानसूनी वषा, हमा नयाँ, महासागरीय धाराएँ और आपक थाली का भोजन — इन सबको चलाने वाली दो ही चीज़ ह: सूय से आती ऊजा का
नरंतर प्रवाह और द्रव्य का अनवरत चक्रण। कक्षा 9 का यह अं तम अध्याय इन प्र क्रयाओं को अलग-अलग वषय-वस्तु के रूप म नह , ब ल्क एक ही
पृथ्वी तंत्र के रूप म दे खता है जसम पाँच मंडल परस्पर क्रया करते ह, असमान ऊष्मण वायु और महासागर को ग तशील करता है, और जल, काबन,
नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन बार-बार च क्रत होते रहते ह।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

अन्वेषण (कक्षा 9) 252 – 269

खं ड प्रश्न

16 39

माध्यम

हन्द

चतन क जए — पृष्ठ 252
अध्याय का आरंभ

चतन क जए

प्र.1 अरब सागर के जल के गम होने से भारत के द क्षण-प म मानसून पर क्या प्रभाव पड़ता है?

गम समुद्र जल से वाष्पीकरण तेज़ी से होता है, इस लए मानसूनी पवन म अ धक जलवाष्प भर जाती है — मानसून प्रबल
तो होता है, परंतु कह अ धक अ न त हो जाता है।

अरब सागर की सतह गम → अिधक वाष्पीकरण

अिधक वाष्पीकरण → दिक्षण-पिश्चम मानसून अिधक जलवाष्प ले जाता है

अिधक जलवाष्प + वायु का ऊपर उठना → कु छ क्षेत्रों में अत्यिधक तीव वष

वही कु ल नमी, असमान रूप से बँट ी → अन्य क्षेत्रों में सूखा

Page 1 of 49

Page 3

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

यह क्य होता है: समुद्र क सतह से वाष्पीकरण क दर ताप बढ़ने पर तेज़ी से बढ़ती है, और गम वायु संघ नत होने
से पहले अ धक जलवाष्प धारण भी कर सकती है। इस लए गम अरब सागर मानसूनी पवन को अ त रक्त नमी से
भर दे ता है। जब यह आद्र वायु ऊपर उठने को ववश होती है — प श्चमी घाट पर या कसी नम्न दाब तंत्र म — तो
वह ठं डी होकर संघ नत होती है और सारी नमी थोड़े समय म तीव्र झड़ी के रूप म गरा दे ती है, न क धीमी- स्थर वषा
के रूप म। अध्याय यही कहता है — द क्षण-प श्चम मानसून म उतार-चढ़ाव से वषा म असमानता होती है और
भारत के कुछ क्षेत्र म बाढ़ आ सकती है जब क अन्य क्षेत्र सूखाग्रस्त रह सकते ह।

ध्यान द जए: यह अध्याय क मूल अवधारणा का अच्छा उदाहरण है। प रवतन जलमंडल (समुद्र का ताप) म आरंभ
होता है, वायुमंडल (मानसूनी पवन) से होकर गुज़रता है और जैवमंडल (फसल और कसान) पर आकर रुकता है।
कोई भी मंडल अकेले वक्षो भत नह होता।

प्र.2 य द कसी बड़े वन क्षेत्र को हटा दया जाए तो उस क्षेत्र क नद के प्रवाह पर इसका क्या प्रभाव हो सकता है?

नद का प्रवाह अ स्थर हो जाता है — वषा के समय भीषण बाढ़ और वषा के बीच म जल का घट जाना या सूख जाना —
और नद बहुत अ धक गाद ढोने लगती है।

यह क्य होता है: ढलान पर बछा वन एक स्पंज क तरह काय करता है। वन हटते ही तीन बात बदल जाती ह।

अंतःस्यंदन ( रसाव) घट जाता है। प त्तय क परत और जड़ के माग वषा जल को मृदा म उतरने दे ते ह। नंगी
भू म पर वही जल सतह से बहकर नकल जाता है। अध्याय इसे "सतही जल का अपवाह बढ़ जाना" और "जल
का कम रसाव" कहता है।
भूजल का पुनभरण घट जाता है। जो जल पहले धीरे-धीरे रसकर पूरे शुष्क महीन तक नद को पो षत करता
था, अब सं चत ही नह होता। इस लए नद का न्यूनतम प्रवाह गर जाता है।
मृदा अपरदन बढ़ जाता है। "मृदा को बाँधकर रखने वाली वृक्ष क जड़ के अभाव म मृदा अपरदन बढ़ सकता
है।" यही मृदा नद क तली म गाद बनकर बैठती है, तली ऊँची हो जाती है और बाढ़ और भी वकराल हो जाती
है।

वषा क मात्रा पर भी प्रभाव पड़ता है — "वन क कटाई से प्रकाश सं ेषण म कमी आती है और वाष्पोत्सजन घट
जाता है जससे स्थानीय वषा म कमी हो सकती है।"

संकेत: इस पैटन को "ऊँचा शखर, नीचा आधार" कहकर याद र खए। उतनी ही वा षक वषा नद को स्थर आपू त
के बजाय तीखी बाढ़ के रूप म मलती है।

Page 2 of 49

Page 4

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 य द हमा नयाँ (glaciers) और ुवीय बफ तेजी से पघलती रही तो भारत के तट य शहर पर इसका क्या
प्रभाव पड़ सकता है?

समुद्र का जल स्तर बढ़े गा और मुंबई तथा चेन्नई जैसे नचले तट य शहर पर बाढ़, भूजल म खारे जल का प्रवेश और भू म
के डू बने का संकट आएगा।

वायुमंडलीय ताप में वृिद्ध → िहमािनयों और धु वीय िहम का ते ज़ी से िपघलना (िहममंडल)

िपघला जल महासागर में जाता है → महासागरीय जल का आयतन बढ़ ता है

आयतन बढ़ ने से → समुद का जल स्तर बढ़ ता है

ऊँ चा जल स्तर + तूफ़ानी लहरे ं → िनचले तटीय क्षेत्रों में बाढ़

यह क्य होता है: स्थल पर जमी बफ वही जल है जो महासागर से नकालकर रोक लया गया था। पघलने पर वह
जल लौट आता है, महासागर का आयतन बढ़ जाता है और समुद्र तट के वरुद्ध ऊँचा उठ जाता है। भारत इस दृ ष्ट से
वशेष रूप से संवेदनशील है क्य क इसक बड़ी जनसंख्या, बंदरगाह और उद्योग समुद्र तल से कुछ ही मीटर ऊँचाई
पर बसे ह। अध्याय कहता है क इससे "समुद्र का जल स्तर बढ़ने से तट य शहर को खतरा उत्पन्न हो सकता है",
और आगे जोड़ता है क "यह जैवमंडल म पा रतंत्र को पयावास हा न के कारण वक्षो भत कर सकता है" — तट के
लए इसका अथ है मग्रोव और मत्स्य संसाधन क हा न।

क्या आप जानते ह? महासागर म पहले से तैर रही समुद्र बफ के पघलने से जल स्तर अ धक नह बढ़ता, क्य क
तैरती बफ पहले ही अपने भार के बराबर जल हटा चुक होती है। जल स्तर बढ़ाने वाली बफ वह है जो स्थल पर जमी
है — हमालयी हमा नयाँ तथा ग्रीनलड और अंटाक टका क हम चादर।

प्र.4 वायुमंडल म काबन डाइऑक्साइड क मात्रा बढ़ने से महासागरीय प्लवक (plankton) पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

अ त रक्त CO2 समुद्र जल म घुलकर उसे अ धक अम्लीय बना दे ती है, जससे प्लवक को हा न होती है — वशेषकर उन
सूक्ष्म जीव को जो कै ल्सयम काब नेट के खोल बनाते ह।

वायु में अिधक CO2 → महासागर में अिधक CO2 घुलती है

घुली CO2 + जल → काब िनक अम्ल → अिधक H+ आयन

अिधक H+ → समुद ी जल अिधक अम्लीय
अम्लीय जल काब ने ट खोलों पर आक्रमण करता है → खोल बनाने वाले प्लवक कमज़ोर

Page 3 of 49

Page 5

as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
यह इतना महत्त्वपूण क्य है: अध्याय कहता है — "वायुमंडलीय CO2 क अ धकता से महासागर म उनका

o m l a se
अवशोषण बढ़ने से समुद्र जल अ धक अम्लीय हो जाता है। इस कारण सूक्ष्म प्लवक और प्रवाल भ त्तय को खतरा
हो सकता है,.जो a g अंग नह है —
c समुद्र पा रतंत्र को बा धत कर सकता है।" प्लवक महासागर का कोई छोटा-मोटा
m
e वश्व के प्रकाश सं ेषण का एक बहुत बड़ा भाग करते ह, वे प्रत्येक समुद्र आहार ंखला का आधार
sप्लवक
l a
aह,g और मरने पर उनके खोल काबन को समुद्र तल तक ले जाते ह। प्लवक को हा न पहुँचने का अथ है — मत्स्य
पादप

m
संसाधन, ऑक्सीजन क आपू त और महासागर क काबन संचय क्षमता, तीन पर एक साथ चोट।

. co ag
e m
g l as
a
दोहरी मार: अध्याय यह भी कहता है क "गम महासागरीय जल, महासागर क CO2 के अवशोषण क क्षमता को
घटा" दे ता है। अथात् समुद्र जतना गम होगा, उतनी ही कम CO2 लेगा — और उतनी ही अ धक CO2 वायु म बची

co m
m.
रहकर उसे और गम करेगी। यह धनात्मक पुनभरण है: प रवतन स्वयं को बढ़ाता है।

m as e
.co a g l
em
ag las 13.1 — पृष्ठ 253
क्रयाकलाप

m a s
m .co agl
l a se
a g

co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a
se m
com g l a
m . a
ase
agl

co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 4 of 49

Page 6

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

आइए, अन्वेषण कर — पृथ्वी के मंडल

क्रयाकलाप 13.1

प्र.1 चत्र 13.1 म दशाए गए पृथ्वी के अ भलक्षण का अवलोकन क जए। भूमंडल, जलमंडल, हममंडल, वायुमंडल
और जैवमंडल को नरू पत करने वाले एक उदाहरण को पहचान और उन पर घेरा बनाएँ।

चत्र 13.1, पृष्ठ 253 — पृथ्वी क सतह के कुछ अ भलक्षण, पुनः च त्रत रेखा चत्र। इसम कसी भाग का नाम नह
लखा है; यही पहचानना क्रयाकलाप का काय है।

चत्र 13.1 म एक ऊँची पवतीय घाट दखाई गई है — उसम एक झील है, पीछे बफ से ढक पवत ंखला है, और जल के
कनारे उगी घास पर एक गड़ रया अपनी भेड़ चरा रहा है। इसी एक चत्र म पाँच मंडल उप स्थत ह:

मंडल चत्र 13.1 म कस पर घेरा बनाएँ क्य

भूम ंडल घाटी के तल और पवतीय ढलानों की नंगी च ाने ं तथा पत्थर ठोस च ान, मृदा और भू-आकृ तयाँ

जलमंडल झील सतह पर उप स्थत द्रव जल

िहममंडल पवतों की चोिटयों पर जमी िहम और बफ जल का ठोस रूप

वायुम ंडल घाटी के ऊपर का आकाश और बादल पृथ्वी के गुरुत्वाकषण से बँधा वायु का आवरण

जैवमंडल भेड़ें, गड़ िरया और घास सजीव और उनके पयावास

Page 5 of 49

Page 7

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

स्वयं जाँ चए: यह चत्र इसी लए चुना गया है क इसम पाँच मंडल एक-दूसरे को स्पश करते ह। हम च ान पर
टक है, उसका पघला जल झील भरता है, झील का जल वा ष्पत होकर वायु म जाता है, और घास — जसे मृदा,
जल और वायु तीन चा हए — भेड़ का भोजन बनती है। यही अ तव्यापन इस क्रयाकलाप का उ े श्य है।

प्र.2 हम (cryosphere) अंतत: झील (hydrosphere) का भाग कस प्रकार बनती है?

पघलकर। वसंत और ग्रीष्म म जब वायु और भू म गम होती है, तो हम और हमानी क बफ ऊष्मा अवशो षत करके ठोस से द्रव
अवस्था म बदल जाती है, और यह पघला जल धाराओं के रूप म ढलान से उतरकर झील म पहुँचता है।

िहम / बफ (ठोस, िहममंडल)

+ सौर िविकरण और गम वायु से पाप्त ऊष्मा

→ 0 °C पर गलन

→ िपघला जल ढलान से नीचे बहता है

→ धाराएँ → झील (द व, जलमंडल)

यह क्य होता है: हम और झील का जल एक ही पदाथ ह — केवल अवस्था भन्न है। गलन के लए ऊजा चा हए,
और वह ऊजा सूय से आती है। हम क सतह का ताप 0 °C तक पहुँच जाने के बाद आगे मलने वाली ऊष्मा ताप
बढ़ाने म नह , ब ल्क बफ के क्रस्टल के बंधन तोड़ने (गलन क गुप्त ऊष्मा) म लगती है, और ठोस द्रव म बदल जाता
है। इसके आगे का काम गुरुत्व करता है — जल ढलान से बहकर घाट के सबसे नचले भाग, अथात् झील तक पहुँच
जाता है।

संकेत: हम का थोड़ा भाग द्रव अवस्था से गुज़रता ही नह — वह पवत क शुष्क वायु म सीधे ऊध्वपातन ारा
जलवाष्प बन जाता है। वह जल वायुमंडल म जाकर कह और वषण के रूप म लौटता है।

प्र.3 य द कुछ वष तक शीतकाल म हमपात कम हो जाए तो इससे झील के जल स्तर और भेड़ के लए उपलब्ध घास
पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

ग्रीष्मकाल म झील का जल स्तर घट जाएगा और जल कम मलने से घास कम उगेगी — अथात् भेड़ के लए चारा कम हो
जाएगा।

Page 6 of 49

Page 8

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

शीतकाल में कम िहमपात → िहम और बफ का भंडार छोटा

छोटा भंडार → गीष्म में कम िपघला जल

कम िपघला जल → झील का जल स्तर िगरता है
नीची झील और सूखी मृद ा → घास की वृिद्ध कमज़ोर

कम घास → भे ड़ों के िलए कम भोजन

यह क्य होता है: हमपात एक प्राकृ तक जलाशय है। वह शीतकाल के वषण को ठोस रूप म एकत्र करता है और
ग्रीष्म भर धीरे-धीरे द्रव रूप म छोड़ता रहता है — ठ क उसी समय जब वषा नह होती और घास को जल क सबसे
अ धक आवश्यकता होती है। शीत ऋतु क जमा रा श घटे गी तो ग्रीष्म क नकासी भी घटे गी। अध्याय भी यही कहता
है — "शीतकाल म हमपात कम होता है तो ग्रीष्मकाल म झील का जल स्तर घट जाता है। प रणामस्वरूप मैदान म
घास क वृ द्ध के लए जल कम उपलब्ध हो पाता है।"

एक कदम और आगे: कम भेड़ चराई जा सकगी, इस लए गड़ रये क आय घटे गी। हममंडल म आरंभ हुआ
प रवतन एक मानव प रवार तक पहुँच गया — इसी लए पृथ्वी के मंडल का अध्ययन एक साथ करना आवश्यक है।

प्र.4 अपने सहपा ठय के साथ चचा क जए और ल खए क ये सभी मंडल परस्पर कस प्रकार संबं धत ह और कसी
एक मंडल म वक्षोभ अन्य मंडल म कस प्रकार का प रवतन ला सकता है।

पाँच मंडल दो चीज़ से जुड़े ह जनका चलना कभी नह रुकता — ऊजा (मुख्यत: सूय से) और द्रव्य (जल, काबन,
नाइ ोजन, ऑक्सीजन तथा ख नज)। चूँ क वे एक ही ऊजा और एक ही द्रव्य को साझा करते ह, इस लए कसी एक मंडल
पर पड़ा दबाव दूसर म प्रकट होकर ही रहता है।

Page 7 of 49

Page 9

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

वायुमंडल

भूमंडल जलमंडल

ऊज
और दव्य

जैवमंडल िहममंडल

पाँच मंडल अलग-अलग परत नह ह — वे अ तव्यापी ह और प्रत्येक रेखा के साथ ऊजा तथा द्रव्य का आदान-प्रदान करते ह। इसी लए
वक्षोभ एक से दूसरे तक यात्रा करता है।

वक्षोभ कस मंडल म आगे कहाँ प्रकट होता है
आरंभ

शीतकाल में कम िहमपात हममंडल झील का स्तर िगरना (जलमंडल ) → घास कम उगना → भेड़ों को चारा कम
(जैवमंडल )

अरब सागर का गम होना जलमंडल अिधक वाष्पीकरण → अिनिश्चत मानसून (वायुमंडल ) → बाढ़ और सूखा → फसल
हािन (जैवमंडल )

ईंध न जलाने से अितिरक्त वायुमंडल तापन से िहमािनयों का िपघलना (िहममंडल ) → समुद स्तर बढ़ ना (जलमंडल ) → तटीय
CO2 पय वास की हािन (जैवमंडल )

वनोन्मूल न जैवमंडल वाष्पोत्सजन घटना (वायुमंडल ), अपवाह और अपरदन बढ़ ना (भूमंडल ), निदयों में गाद
(जलमंडल )

मूल कारण: पृथ्वी द्रव्य के लए एक बंद तंत्र है — बाहर से न जल आता है, न काबन, न नाइट्रोजन — कतु ऊजा
के लए एक खुला तंत्र है, जो सूय से आती है और अवरक्त व करण के रूप म लौट जाती है। चूँ क द्रव्य का यही
सी मत भंडार पाँच मंडल साझा करते ह, इस लए एक मंडल से द्रव्य नकालने का अथ है दूसरे म उसक मात्रा बदल
जाना। अध्याय इसी को "एक सूक्ष्म संतुलन" कहता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 253

Page 8 of 49

Page 10

ase
कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

13.1 पृथ्वी का असमान ऊष्मीकरण क भू मका
co m
e m.
m l as
.co a g
क्या सौर व करण पृथ्वी क सतह को समान रूप से गम करती है?
m
प्र.1

l a se
a g

m
नह । सौर व करण पृथ्वी पर अत्यंत असमान रूप से वत रत होता है, और यही असमानता पवन , महासागरीय धाराओं

. co ag
m
तथा जल चक्र को संचा लत करती है।

a s e
g l
तीन अलग-अलग कारण, तीन जाननेaयोग्य:

1. पृथ्वी गोलाकार है, इस लए अक्षांश महत्त्वपूण है। भूमध्य रेखा के पास सूय क करण लगभग लंबवत पड़ती
co m
se m.
ह और करण-पुंज छोटे क्षेत्र पर क द्रत रहता है। ध्रुव के पास वही पुंज तरछा पड़कर कह बड़े क्षेत्र म फैल

c o m
जाता है, इस लए प्र त वग मीटर ऊजा बहुत कम मलती है।
g l a
2. mभन्न. सतह भन्न व्यवहार करती ह — ए ल्बडो। हम अपने ऊपर पड़ने वाले aव करण का 0.80 – 0.90 भाग
l a seपराव तत कर दे ती है और ठं डी रहती है; काली मृदा और महासागरीय जल बहुत कम पराव तत करते ह,
a g
अ धकांश अवशो षत कर लेते ह और अपेक्षाकृत गम रहते ह। भू म जल क तुलना म शीघ्र गम भी होती है।

a s
coकmअव ध बदलती है। इस लए एक ही स्थान को भी वष भर agl
3. पृथ्वी क धुरी झुक है और वह प रक्रमा करती है। इससे यह बदलता रहता है क कौन-सा गोलाध सूय क
.
s em
ओर झुका है — इसी से ऋतुएँ बनती ह और दन
a
agl
समान सूयातप नह मलता।

co m
m .
िकसी क्षैितज सतह पर पाप्त तीवता, I = I0 cos θ
as e
omस्थान पर सूय की िकरणों और ऊध्व धर के बीच का कोण)
(θ =.cउस a g l
l sem
a भूमध्य रेखा पर सूय िसर के ऊपर, θ = 0°: I = 1 kW m–2 × 1 = 1 kW m–2
a g
ं पर, θ = 60°: I = 1 kW m–2 × 0.50 = 0.5 kW m–2
se m
m a
60° अक्षाश
धु व के िनकट, θ → 90°: I → लगभग शू य.co a g l
s em
न्

a
agl
यह क्य महत्त्वपूण है: असमान ऊष्मण का अथ है असमान वायुदाब, और वायु सदै व उच्च दाब से नम्न दाब क

co m
.
ओर चलती है। इस लए यही एक तथ्य अनुभाग 13.2 क हर बात का आरंभ- बदु है — स्थानीय पवन, ग्रहीय पवन
em
m as
और महासागरीय धाराएँ।

.co a g l
se m
g l a
a c
वै ा नक क भाँ त सो चए — पृष्ठ 255
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 9 of 49

Page 11

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

13.1 पृथ्वी का असमान ऊष्मीकरण — एक अनुमान आधा रत प्रश्न

वै ा नक क भाँ त सो चए

प्र.1 एक रोचक अनुमान आधा रत प्रश्न यह समझने म सहायता करता है क हम सूय से कतनी अ धक मात्रा म ऊजा
प्राप्त होती है। हम यह अनुमान लगाना है क वतमान म हमारे दे श म उपभोग होने वाली पूण व ुत आपू त को
पूरा करने के लए पृथ्वी क सतह के कतने भाग पर सौर पैनल लगाने ह गे ( चत्र 13.4)। इसका अनुमान लगाने
के लए आप आवश्यक आँकड़े इंटरनेट से प्राप्त कर सकते ह। पृथ्वी क सतह पर कुछ सूयातप क कल्पना
क जए जसका कुछ अंश व ुत ऊजा म रूपांत रत होता है। आप जानगे क य द थार मरुस्थल के केवल एक
छोटे से भाग को सौर पैनल से ढक दया जाए तब वह भारत क संपूण व ुत आपू त करने म सक्षम ह गे।

सौर पैनलों की पंिक्तयाँ

मरुस्थल की रेत और झािड़ याँ

चत्र 13.4, पृष्ठ 255 — मरुस्थल म सौर पैनल, पुनः च त्रत रेखा चत्र।

नीचे क गणना के अनुसार लगभग 4600 km2 क्षेत्र पर पैनल लगाने से काम चल जाएगा — अथात् लगभग 68 km ×
68 km का एक वग, जो थार मरुस्थल का केवल लगभग 2 प्र तशत है। पूरी गणना, प्रत्येक चरण पर मात्रक स हत:
चरण 1 — भारत कतनी व ुत श क्त उपयोग करता है?

भारत का वािषक िव त 12
ु उपभोग ≈ 1.6 × 10 kW h (लगभग 1600 अरब यूिनट)
एक वष में घंटे = 365 × 24 h = 8760 h

औसत शिक्त, P = ऊज ÷ समय

P = (1.6 × 1012 kW h) ÷ (8760 h)

P = 1.83 × 108 kW = 1.83 × 1011 W (लगभग 180 GW)

Page 10 of 49

Page 12

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

चरण 2 — एक वग मीटर पैनल कतनी व ुत श क्त दे ता है?

सतह पर अिधकतम सूय तप ≈ 1 kW m–2 = 1000 W m–2 (स्वच्छ आकाश, सूय ऊँ चा)

िकं त ु िदन-रात, बादल और ितरछी िकरणों को िमलाकर भारत में औसतन

5 kW h m–2 पितिदन → 5000 W h m–2 ÷ 24 h ≈ 200 W m–2 (चौबीसों घंटे का औसत)
सौर पैन ल की दक्षता, η ≈ 20% = 0.20
–2
ु शिक्त = 0.20 × 200 W m = 40 W m–2
पित वग मीटर िव त

चरण 3 — भाग द जए।

आवश्यक क्षेत्रफल, A = आवश्यक शिक्त ÷ पित वग मीटर शिक्त

A = (1.83 × 1011 W) ÷ (40 W m–2)

A = 4.6 × 109 m2

1 km2 = 106 m2, अतः A = 4.6 × 109 ÷ 106 = ≈ 4600 km2

अथ त् √4600 km2 ≈ 68 km भुजा वाला एक वग

चरण 4 — थार मरुस्थल से तुलना।

थार मरुस्थल का क्षेत्रफल ≈ 2 × 105 km2

आवश्यक अंश = 4600 km2 ÷ 2 × 105 km2 = 0.023 = लगभग 2.3%

उत्तर इतना छोटा क्य नकला: सूय अत्यंत तीव्र दर से ऊजा भेजता है — वायुमंडल के ऊपर प्रत्येक वग मीटर पर
प्रत्येक सेकंड 1400 जूल। पूरे वष म फैली भारत क समस्त वद्युत माँग, मरुस्थल के एक छोटे -से टु कड़े पर गरने
वाली ऊजा के सामने बहुत छोट है। इस लए सौर ऊजा क सीमा सूय के प्रकाश क कमी नह है; सीमा है पैनल क
लागत, भू म, और सबसे बढ़कर भंडारण, क्य क रात म और मानसून म सूय नह चमकता।

स्वयं जाँ चए: आपके आँकड़े इनसे भन्न हो सकते ह — नवीनतम उपभोग आँकड़ा ली जए और दक्षता तथा औसत
सूयातप क अपनी कल्पना क जए। य द आप प्रत्येक चरण पर मात्रक लखते ह और वे ठ क से कटते ह (W ÷ W
m–2 = m2), तो आपका अनुमान सही है। अनुमान आधा रत प्रश्न म प रमाण क को ट महत्त्वपूण होती है, अं तम
अंक नह ।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 256

Page 11 of 49

Page 13

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

13.1.1 पृथ्वी क सतह पर सौर व करण क पारस्प रक क्रया क भू मका

प्र.1 सौर व करण, पृथ्वी क सतह और वायुमंडल के साथ कस प्रकार पारस्प रक क्रया करता है और पृथ्वी को कैसे
गम करता है?

आता हुआ व करण चार भाग म बँट जाता है — कुछ बादल और वायुमंडल पराव तत कर दे ते ह, कुछ वायुमंडल
अवशो षत कर लेता है, कुछ भू म पराव तत करती है, और शेष भू म अवशो षत कर लेती है। केवल यही अं तम भाग सतह
को गम करता है, और फर सतह नीचे से वायु को गम करती है।

सूय बादलों ारा परावितत

वायुमंडल और बादल

यहाँ अवशोिषत कु छ िनकल जाती है

सतह ारा परावितत (एि बडो)

अवरक्त बाहर शेष लौटा दी जाती है

भूिम ारा अवशोिषत → भूिम गम

पथ्ृ वी की सतह

आती हुई सूय करण क चार नय त, और वह अवरक्त वापसी-पथ जसे ह रतगृह गैस रोक लेती ह ( चत्र 13.5 से तुलना क जए)।

क्रया व ध, चरण दर चरण:

1. आते समय। ओजोन परत लघु तरंगदै य वाली अ धकांश पराबगनी व करण अवशो षत कर लेती है। बादल,
धूल और गैस दृश्य प्रकाश का कुछ भाग पराव तत और प्रक णत कर दे ती ह। शेष भू म तक पहुँचता है।
2. सतह पर। उस सतह के ए ल्बडो के अनुसार एक अंश पराव तत हो जाता है। शेष अवशो षत होकर मृदा, च ान
या जल का ताप बढ़ा दे ता है।
3. जाते समय। प्रत्येक गम वस्तु व करण करती है। पृथ्वी सूय से बहुत ठं डी है, इस लए वह दृश्य प्रकाश नह ,
अवरक्त व करण छोड़ती है।
4. ऊष्मा का रुकना। ह रतगृह गैस — CO2, CH4 और जलवाष्प — आते हुए दृश्य प्रकाश के लए पारदश ह,
परंतु बाहर जाती अवरक्त व करण को अवशो षत कर लेती ह और उसका कुछ भाग पुनः नीचे भेज दे ती ह,
जससे सतह जीवन के लए पयाप्त गम बनी रहती है।

Page 12 of 49

Page 14

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

मुख्य बात: क्षोभमंडल नीचे से, अथात् सतह से गम होता है — उससे होकर गुज़रते सूय के प्रकाश से सीधे नह ।
इसी लए क्षोभमंडल म ऊँचाई के साथ ताप घटता है (लगभग 6.5 °C प्र त km) — आप ऊष्मा- ोत से दूर जा रहे
होते ह।

क्रयाकलाप 13.2 — पृष्ठ 256
आइए, पता लगाएँ — 13.1.1 पृथ्वी क सतह पर सौर व करण क पारस्प रक क्रया

क्रयाकलाप 13.2

प्र.1 वश्वसनीय ोत जैसे— वेबसाइट और पुस्तक से प्राप्त जानकारी ारा ता लका 13.1 को पूण क जए।
(ता लका 13.1— पदाथ क सतह ारा सौर व करण का परावतन: 1. हम 0.80 – 0.90; 2. बफ 0.50 –
0.70; 3. संद लत च ान 0.25 – 0.30; 4. हल्के रंग क मृदा; 5. काली मृदा; 6. महासागरीय जल)
ता लका 13.1— पदाथ क सतह ारा सौर व करण का परावतन, जैसी पृष्ठ 256 पर छपी है — अं तम तीन
ए ल्बडो के खाने रक्त ह।

क्रम संख्या पदाथ ए ल्बडो

1. हम 0.80 – 0.90

2. बफ 0.50 – 0.70

3. संद लत च ान 0.25 – 0.30

4. हल्के रंग क मृदा

5. काली मृदा

6. महासागरीय जल

मानक प्रका शत ए ल्बडो सार णय से ली गई तीन रक्त पं क्तयाँ:

Page 13 of 49

Page 15

as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
क्रम पदाथ ए ल्बडो अथ

m a se
संख्या

.cहमo g l
80 – 90% पराव तत — इस लए अत्य धक ठं डीaरहती है (पुस्तक म दया हुआ)
1.
a s em 0.80 –

ag l 0.90

2. बफ 0.50 – लगभग आधे से दो- तहाई भाग पराव तत (पुस्तक म दया हुआ)

co m
. ag
0.70

e m
0.30 ag
las
3. संद लत च ान 0.25 – लगभग चौथाई भाग पराव तत (पुस्तक म दया हुआ)

4. हल्के रंग क 0.30 –
co m
हल्क , शुष्क, बलुई मृदा — लगभग एक- तहाई पराव तत करती है

em.
मृदा 0.40

m l as
5.
m .co काली मृदा a g
गहरे रंग क काली मृदा लगभग सब कुछ अवशो षत करती है, इस लए शीघ्र गम

se
0.05 –

l a
0.15 होती है

g
a 6. महासागरीय 0.06 – सूय ऊँचा होने पर जल केवल लगभग 6% पराव तत करता है, शेष अवशो षत कर

m a s
agl
जल 0.10 लेता है

m .co
l a se
a g
यह पैटन ऐसा क्य है: ए ल्बडो कसी सतह ारा पराव तत सौर व करण का अंश है। जो सतह कम पराव तत
करती है, उसे अ धक अवशो षत करना ही पड़ता है, और अवशो षत व करण ही ताप बढ़ाता है। इस लए उच्च
ए ल्बडो वाली सतह ठं डी रहती है और नम्न ए ल्बडो वाली गम हो जाती है। धवलता और चकनाहट ए ल्बडो बढ़ाती
co m
m .
e
ह; कालापन और खुरदरापन घटाते ह। इसी कारण हम से ढके ध्रुवीय प्रदे श अत्य धक ठं डे रहते ह — वे आती हुई
m l as
.co g
ऊजा का बड़ा भाग सीधे अंत रक्ष म लौटा दे ते ह — और काली मृदा तथा खुला महासागर अपेक्षाकृत गम रहते ह।

m a
l a se
ag यिद िकसी सतह पर सूय तप = 1000 W m–2 हो, तो
se m
अवशोिषत ऊज = (1 – एि बडो) × सूय तप
com g l a
m . a
ase
agl
िहम (a = 0.85): अवशोिषत = (1 – 0.85) × 1000 = 150 W m–2

काली मृद ा (a = 0.10): अवशोिषत = (1 – 0.10) × 1000 = 900 W m–2

co m
.
वही सूय, िफर भी काली मृद ा में छह गुन ा अिधक ऊज ।
e m
m l as
.co a g
a s em क्या आप जानते ह? आक टक म ए ल्बडो एक पुनभरण लूप बना दे ता है। समुद्र बफ (उच्च ए ल्बडो) पघलकर

agl महासागरीय जल ( नम्न ए ल्बडो) को उघाड़ दे ती है; महासागर अ धक व करण अवशो षत कर गम होता है और
.c
m
और बफ पघलाता है। इसी हम–ए ल्बडो पुनभरण के कारण ध्रुवीय प्रदे श शेष पृथ्वी क तुलना म तेज़ी से गम हो रहे

m a s e
co agl
ह। मान परास म इस लए दए जाते ह क्य क ए ल्बडो सूय के कोण, मृदा क नमी और हम क ताज़गी पर नभर

m .
as e
करता है।

a g l

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 14 of 49

Page 16

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

सो चए और बताइए — पृष्ठ 258
13.1.3 वायुमंडल क भू मका

सो चए और बताइए

प्र.1 दए गए वेबपृष्ठ का अवलोकन क जए और यह समझ क ह रत गृह गैस क मात्रा सतही ताप को कस प्रकार
प्रभा वत करती है— https://phet.colorado.edu/en/simulations/greenhouse-effect

यह PhET का "Greenhouse Effect" अनुरूपण (simulation) है। इसम आप ह रतगृह गैस क सांद्रता स्वयं
बदलकर दे ख सकते ह क सतह का ताप कैसे बदलता है।

आप क्या बदलते स्क्र न पर क्या दखता है इसके पीछे का व ान
ह

हिरतग ृह गैस की लगभग पत्येक अवर क्त फ़ ोटॉन बाहर िनकल जाता बाहर जाती अवरक्त व करण को कोई नह रोकता, इस लए
सांद ता शून्य कर है; सतह का ताप तेज़ी से िगरता है पृथ्वी जतनी ऊष्मा पाती है उतनी ही तुरंत खो दे ती है —
दीिजए और वह भी नीचे ताप पर

िहम युग या 1750 का कु छ अवर क्त फ़ ोटॉन लौट आते है;ं ताप एक मध् यम यही वह संतु लत ह रतगृह प्रभाव है जसने पृथ्वी पर जीवन
स्तर चुिनए मान पर िस्थर होता है संभव बनाया

स्लाइडर को आज अिधक अवर क्त फ़ ोटॉन अवशोिषत होकर नीचे अवशोषक जतने अ धक, ऊष्मा के नकलने म उतना ही
और उससे आगे लौटते है;ं तापमापी चढ़ ने लगता है वलंब, इस लए स्थायी ताप उतना ही ऊँचा
बढ़ ाइए

फ़ ोटॉन दृ श्य दे िखए पीले (सूय-पकाश) फ़ ोटॉन नीचे तक स्वतंत्र आते ह रतगृह गैस दृश्य प्रकाश के लए पारदश और अवरक्त के
है;ं लाल (अवर क्त) फ़ ोटॉन CO2 और CH4 लए अपारदश ह — यही इस प्रभाव का मूल है
अणुओं में फँ स जाते है ं

नष्कष जो आपको लखना चा हए: ह रतगृह गैस क सांद्रता बढ़ाने से यह नह बदलता क कतना सूय-प्रकाश
भीतर आता है। बदलता यह है क ऊष्मा कतनी सरलता से बाहर जा पाती है। पृथ्वी को उतनी ही ऊजा व क रत
करनी ही पड़ती है जतनी वह पाती है, और य द बाहर जाने का माग आं शक रूप से रुक जाए तो पयाप्त ऊजा बाहर
धकेलने का एक ही उपाय बचता है — सतह का और गम हो जाना। मानवीय ग त व धय से नकली अ त रक्त CO2
वै श्वक ताप ठ क इसी कारण बढ़ाती है।

पुस्तक म द गई सावधानी: "आप इंटरनेट का उपयोग करते समय कसी भी प्रकार क व्य क्तगत जानकारी साझा
न कर।"
संस्करण म अंतर: यही प्रश्न अंग्रेज़ी संस्करण Exploration (पृष्ठ 258) म छपा है, परंतु वहाँ वेब पते के स्थान पर
एक खाली सफ़ेद डब्बा छपा है और केवल अं तम भाग "greenhouse-effect" दखाई दे ता है। पूरा पता केवल
इसी हद संस्करण म उपलब्ध है।

Page 15 of 49

Page 17

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

ज ासा-सूत्र — पृष्ठ 259
ओजोन परत इतनी महत्त्वपूण क्य है?

ज ासा-सू त्र

प्र.1 ओजोन परत इतनी महत्त्वपूण क्य है?

क्य क सूय से आती लघु तरंगदै य वाली पराबगनी व करण को भू म तक पहुँचने से पहले रोकने वाली केवल यही परत है।
इसके बना पराबगनी करण सजीव के नेत्र , त्वचा और DNA को हा न पहुँचात और पूरे पा रतंत्र को नष्ट कर दे त ।

ओजोन समतापमंडल (12 – 50 km) में िस्थत है

पराबैगं नी िकरणों की तरंगदै य का परास = 100 nm से 400 nm, जहाँ 1 nm = 10–9 m

तरंगदै य िजतनी कम → ऊज उतनी अिधक → जीिवत ऊतक को उतनी अिधक हािन

ओजोन इस UV को अवशोिषत कर लेत ी है → वह ऊज जीवन को हािन पहुँच ाने के बजाय समतापमंडल को

गम करती है

ज ासा-सूत्र क कहानी और उसका महत्त्व:

परत कैसे घटती है। ओजोन नरंतर बनती और नष्ट होती रहती है। संकट तभी आता है जब "ओजोन अणुओं
का वनाश उनक प्राकृ तक नमाण दर से अ धक शीघ्रता से" होने लगे — तब परत पतली हो जाती है।
कारण क्या था। रे जरेटर और ऐरोसॉल म प्रयुक्त मानव- न मत क्लोरोफ्लुओरोकाबन (CFCs) ऊपर
समतापमंडल तक पहुँचकर ओजोन नष्ट करने लगे। अंटाक टका के ऊपर हुए भारी क्षरण को ओजोन छद्र कहा
गया।
क्या कया गया। मॉ न्ट्रयल प्रोटोकॉल नामक वै श्वक समझौते ने CFC का उपयोग घटाया — और अब यह परत
धीरे-धीरे पुन न मत हो रही है।

अं तम बदु ही इस कहानी का असली उ े श्य है: यह "अंतराष्ट्रीय वै ा नक सहयोग क श क्त को दशाता है"। इसक
तुलना CO2 पर बने क्योटो प्रोटोकॉल और पे रस समझौते से क जए, जनके वषय म अध्याय स्पष्ट कहता है क
"उतनी सफलता प्राप्त नह हुई"।

दो ओजोन म भ्रम न क जए। ऊपर समतापमंडल क ओजोन रक्षक है — वह पराबगनी करण रोकती है। धरातल
के नकट बनी ओजोन, जो वाहन के धुएँ और सूय के प्रकाश क अ भ क्रया से बनती है, "स्वास्थ्य के लए
हा नकारक है"। अणु वही है, नणय उल्टा — और यह नणय पूरी तरह इस बात से तय होता है क वह कहाँ है।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 261

Page 16 of 49

Page 18

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

13.2.1 स्थानीय पवन / 13.2.3 महासागरीय धाराएँ

सो चए और बताइए

प्र.2 शीतल पवतीय समीर कृ ष काय , वशेषतः फसल और मृदा के लए कस प्रकार लाभदायक होती है?

रा त्र क पवतीय समीर घाट का ताप घटाती है, वायु को नम और ग तशील बनाए रखती है, और मृदा तथा प त्तय से जल
क हा न धीमी कर दे ती है — इन सबसे फसल और मृदा दोन को लाभ होता है।

िदन रात

पवतीय समीर
(नीचे )

घाटी समीर (ऊपर)

घाटी का तल (खेत )

दन म धूप वाली ढलान गम होती है, वायु ऊपर उठती है और ठं डी वायु ऊपर चढ़ती है — घाट समीर। सूयास्त के बाद ढलान शीघ्र ठं डी
होती है और सघन शीतल वायु घाट म उतरती है — पवतीय समीर।

Page 17 of 49

Page 19

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

लाभ, एक-एक करके:

ऊष्मा-तनाव घटता है। अ धक गम म पादप अपने रंध्र बंद कर लेते ह और प्रकाश सं ेषण क दक्षता गर
जाती है। रात म उतरती शीतल पवन खेत का ताप घटा दे ती है, जससे पादप रातभर म स्वस्थ हो जाता है।
जल क हा न कम होती है। ठं डी वायु संतृप्त होने से पहले कम जलवाष्प धारण कर पाती है, इस लए मृदा से
वाष्पन और प त्तय से वाष्पोत्सजन दोन धीमे पड़ जाते ह। मृदा अगले दन के लए अपनी नमी बचा लेती है।
अध्याय कहता है क ये पवन "ताप, आद्रता क प र स्थ तय को नयं त्रत करने म सहायता करती ह और मृदा
एवं फसल क गुणवत्ता बनाए रखती ह"।
दन-रात के ताप म बड़ा अंतर बनता है। गम दन और ठं डी रात ठ क वही प र स्थ त ह जो सेब, आलूबुखारा,
चाय और अनेक मसाल को अच्छा स्वाद, रंग और मठास दे ती ह। इसी कारण शमला और दे हरादून के आस-
पास ऐसी फसल होती ह जो मैदान म नह हो सकत ।
वायु ग तशील रहती है और शीतल वायु बह जाती है। फसल के ऊपर ठहरी हुई नम वायु कवक रोग को
न्योता दे ती है; हल्क पवन पत्ती क सतह सुखा दे ती है। नीचे क ओर बहती वायु ढलान से शीतल वायु हटा भी
दे ती है, जससे ढलान पर पाला पड़ने क हा न घटती है।
मृदा क रक्षा होती है। पवतीय समीर मंद होती है, झ क के रूप म नंगी भू म पर नह चलती, और मृदा नम बनी
रहती है — इस लए वायु ारा अपरदन तथा ऊपरी मृदा का सूखना दोन घट जाते ह।

संकेत: पवतीय समीर इस लए बनती है क सूयास्त के बाद ढलान घाट के तल क तुलना म तेज़ी से ऊष्मा खोती है।
ढलान क वायु ठं डी होकर सघन हो जाती है और गुरुत्व उसे नीचे ख च लेता है। सघन शीतल वायु स्वयं उतरती है —
उसे कोई धकेलता नह ।

प्र.3 भूमध्य रेखा से ुव क ओर जाने पर जल क गम सतह का क्या होता है? इस संचलन का उस क्षेत्र पर क्या
प्रभाव पड़ता है?

गम सतही जल ुव क ओर बढ़ते हुए अपनी ऊष्मा वायु को दे ता जाता है, धीरे-धीरे ठं डा और सघन होकर उच्च अक्षांश
पर नीचे बैठ जाता है, और गहरे महासागर से होता हुआ भूमध्य रेखा क ओर लौट आता है। रास्ते म वह जो ऊष्मा पहुँचाता
है, उससे उन तट क जलवायु उनके अक्षांश क अपेक्षा कह अ धक गम बनी रहती है।

गम, कम सघन भूमध्यरेखीय जल सतह पर धु वों की ओर बहता है

माग में ऊपर की ठं डी वायु को ऊष्मा दे त ा है → जल ठं डा होता है

ठं डा होना (और वाष्पन, िजससे लवणता बढ़ ती है) → सघनता बढ़ ती है

सघन जल उच्च अक्षांशों पर नीचे बैठ जाता है

ठं डा, सघन जल गहरे स्तरों से भूमध्य रेखा की ओर लौटता है

→ भूमध्य रेखा से धु वों तक ऊष्मा का एक िनरंत र वाहक बनता है

Page 18 of 49

Page 20

as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
जन क्षेत्र तक यह पहुँचता है, उन पर प्रभाव:

o m l a se
c
का. स्थानांतरण कर भूमंडल के ताप के अंतर को कम करती ह"। इनके बना भू
g
पृथ्वी पर ताप का अंतर घटता है। अध्याय कहता है क महासागरीय धाराएँ "भूमध्य रेखा से ध्रुव क ओर
ऊष्माm
e a
ध्रुs
मध्य रेखा और गम तथा

g l a
a
व और ठं डे होते।
उच्च अक्षांश के बंदरगाह प्रयोग योग्य बने रहते ह। पुस्तक का उदाहरण उत्तरी अटलां टक प्रवाह है, जो गल्फ

co m
ag
स्ट्र म का वस्तार है और "यूरोप के उत्तर-प श्चमी तट क ओर बहती है और शीतकाल म कई बंदरगाह को बफ

m .
as e
से मुक्त रखती है चाहे वह उच्च अक्षांश पर स्थत ह ।"

a g l
व्यापार और बसावट को सहारा मलता है। पूरे वष बफ-मुक्त बंदरगाह का अथ है नबाध जहाज़रानी, व्यापार
और वा णज्य — अध्याय इसका नाम लेकर उल्लेख करता है।
समुद्र जीवन पो षत होता है। यही संचलन पोषक तत्व का प रवहन भी करता है, इस लए महासागरीय धाराएँ
co m
em.
"एक वशाल पा रतंत्र को भी सहायता प्रदान करती ह"। जहाँ ठं डा, पोषक-समृद्ध गहरा जल ऊपर उठता है, वहाँ
m l as
.co a g
मत्स्य संसाधन प्रचुर होते ह।

se m
g l a
a ध्यान द जए: गहराई म लौटता प्रवाह सघनता से चलता है, और सघनता ताप तथा लवणता दोन पर नभर करती

m a s
जल, अ धक सघन होने के कारण महासागरीय जल.cकoे गहरे स्तर म चला जाता है।" ठं डा होना और वाष्पन — दोन agl
है। "सघनता कम होने के कारण कम लवणता वाला जल सतह के नकट बना रहता है जब क अ धक लवणता वाला

a s em
agl
मलकर जल को नीचे बैठाते ह।

co m
m .
सो चए और बताइए — पृष्ठ 263
as e
. coचक्रm a g l
em
13.3.2 काबन

सोsचए और बताइए
a
agl
se m
com
से महासागर म घुली CO2 का संतुलन बगड़ जाता है। इसका समुद्र जीवन पर क्या
g l a
.
वै श्वक तापमान म वृ
a
प्र.4

m
ase
प्रभाव पड़ेगा?

agl

co m
.
समुद्र जीवन पर दो ओर से एक साथ आघात होता है — समुद्र अ धक अम्लीय हो जाता है, जससे खोल और प्रवाल पर

em
as
आक्रमण होता है; और गम जल कम घुली ऑक्सीजन तथा कम घुली CO2 धारण कर पाता है, जससे मछ लयाँ संकट म
m l
.co a g
आती ह और महासागर का काबन भंडार कमज़ोर पड़ता है।

se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 19 of 49

Page 21

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

वैिश्वक ताप में वृिद्ध

(क) वायु में अिधक CO2 → अिधक घुलती है → काब िनक अम्ल → महासागरीय अम्लीकरण

→ प्लवक, शंबक
ु और पवाल के काब ने ट खोल घुलते है ं / ठीक से बनते ही नही ं

(ख) गम जल में गैस कम घुलती है → घुली O2 कम → मछिलयों को श्वसन में किठनाई

(ग) गम जल कम CO2 अवशोिषत करता है → काबन अवशोषक कमज़ोर → वायु में और अिधक CO2 शेष

गैस ऐसा व्यवहार क्य करती ह: जल म कसी गैस क वलेयता जल के गम होने पर घटती है — इसी कारण गम
शीतल पेय ठं डे पेय क तुलना म जल्द फ का (गैस-र हत) हो जाता है। इस लए तापन दो वपरीत-सी दखने वाली
बात करता है: वायुमंडल म CO2 बहुत अ धक होने के कारण वह और अ धक CO2 जल म धकेलता है, फर भी गम
समुद्र जल का प्रत्येक लीटर पहले से कम गैस — जसम मछ लय के लए आवश्यक ऑक्सीजन भी स म्म लत है
— धारण कर पाता है। अध्याय दोन पक्ष कहता है: अ त रक्त CO2 से "महासागर म उनका अवशोषण बढ़ने से
समुद्र जल अ धक अम्लीय हो जाता है", और "गम महासागरीय जल, महासागर क CO2 के अवशोषण क क्षमता
को घटा कर उनक प्रभावी काबन भंडारण क क्षमता को कम कर दे ता है।"

जीव-समूह उन पर क्या बीतती है

पादप प्लवक ृ ला का आधार और ऑक्सीजन का िवशाल ोत — यहाँ हािन होने पर ऊपर का
पत्येक समुद ी आहार शंख
सारा जीवन भूखा रह जाता है

खोल बनाने वाले जीव (शंबक
ु , कु छ अम्लीय जल में कै ि सयम काब नेट के खोल पतले पड़ जाते है ं और बनाने किठन हो जाते है ं
प्लवक)

पवाल िभित्तयाँ गम जल में िवरंिजत होती है ं और अम्लीय जल में घुल ती है;ं िभित्त की मछिलयाँ अपना पय वास खो दे ती है ं

मछिलयाँ और तटीय मत्स्य घुल ी ऑक्सीजन कम, भोजन कम, पवास -माग बदलते हुए — पकड़ घटती है
संस ाधन

मात्रा क जाँच: अध्याय का ज ासा-सूत्र बताता है क यह भंडार क्य इतना महत्त्वपूण है — "वै श्वक काबन क
कुल मात्रा म से लगभग 71 प्र तशत काबन महासागर म पाया जाता है", जब क वायुमंडल म केवल लगभग 1
प्र तशत है। इस लए महासागर के रसायन म थोड़ा-सा प रवतन भी काबन क बहुत बड़ी मात्रा को हला दे ता है।

सो चए और बताइए — पृष्ठ 265

Page 20 of 49

Page 22

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

13.3.4 ऑक्सीजन चक्र

सो चए और बताइए

प्र.5 य द जैव-भूरासाय नक चक्र बा धत हो जाए अथवा रुक जाए तो पृथ्वी पर पादप और जंतुओं पर क्या प्रभाव
पड़ेगा? उदाहरण स हत समझाइए।

जीवन समाप्त हो जाएगा, क्य क पृथ्वी के पास द्रव्य क कोई बाहरी आपू त नह है। कोई पादप या जंतु जल, काबन,
नाइ ोजन या ऑक्सीजन का जो भी परमाणु प्रयोग करता है, वह पहले कसी और जीव ारा प्रयोग कया जा चुका है।
चक्रण रुका तो आपू त समाप्त।

चक्र-दर-चक्र क्या होगा:

जल चक्र रुका। न वाष्पन, न संघनन, न वषा। न दयाँ, झील और मृदा क नमी सूख जाएँगी। पादप प्रकाश
सं ेषण के लए जल नह ख च पाएँगे और न ही ख नज का प रवहन कर पाएँगे; जंतुओं को पीने को कुछ नह
मलेगा। स्थलीय जीवन कुछ ही दन -सप्ताह म समाप्त हो जाएगा।
काबन चक्र रुका। पादप प्रकाश सं ेषण के लए वायु से CO2 लेते रहगे, परंतु अपघटन और श्वसन उसे
लौटाएँगे नह । वायुमंडल क CO2 समाप्त हो जाएगी, प्रकाश सं ेषण रुक जाएगा और पादप पर आ श्रत हर
आहार ंखला ढह जाएगी। साथ ही मृत शरीर और प त्तयाँ ढे र होती जाएँगी, क्य क अपघटक उनका काबन
लौटा नह रहे।
नाइ ोजन चक्र रुका। वायुमंडलीय N2 अ क्रयाशील है और पादप उसका सीधा उपयोग नह कर सकते।
नाइट्रोजन स्थरीकरण के बना अमो नया नह बनेगी, नाइट्र करण के बना नाइट्रे ट नह मलेगा, इस लए पादप
प्रोट न और न्यूक्लीक अम्ल नह बना पाएँगे। वृ द्ध, मरम्मत और जनन तीन रुक जाएँगे। जंतु, जो नाइट्रोजन
केवल खाकर प्राप्त करते ह, प्रोट न के अभाव म मर जाएँगे।
ऑक्सीजन चक्र रुका। श्वसन और दहन ऑक्सीजन का उपभोग करते रहगे, परंतु प्रकाश सं ेषण उसे
लौटाएगा नह । वायुमंडलीय ऑक्सीजन घटते-घटते इतनी रह जाएगी क ऑक्सी-श्वसन असंभव हो जाएगा।

पृथ्वी = ऊज के िलए खुला तं त्र (सूय का पकाश भीतर, अवरक्त बाहर)

पृथ्वी = द व्य के िलए बंद तं त्र (नई C, N, O या H2O बाहर से नही ं आती)

अतः द व्य का चक्रण होना अिनवाय है, अन्यथा आपूित सीिमत है और जीवन रुक जाएगा।

लखने योग्य एक ठोस उदाहरण: आज आपने जो दाल खाई, उसक नाइट्रोजन कुछ ही समय पहले वायु म N2
गैस थी। दलहनी फसल क जड़ ग्रं थय म बैठे राइजो बयम ने उसे अमो नया म स्थर कया, नाइट्र करण जीवाणुओं
ने नाइट्रे ट बनाया, पादप ने उसका स्वांगीकरण कर प्रोट न बनाया — और जब आप उस प्रोट न का पाचन करके
अप शष्ट मृदा को लौटाते ह, तब अपघटक अमोनीकरण करके उसे फर से स प दे ते ह। इस ंखला क एक भी कड़ी
टू ट तो खेत आपको खलाना बंद कर दे गा।

Page 21 of 49

Page 23

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

क्या होगा य द… — पृष्ठ 265
13.4 पृथ्वी क प्र क्रयाओं पर मानवीय प्रभाव

क्या होगा य द…

प्र.1 य द प्रकाश सं ेषण रुक जाए, तो पृथ्वी पर क्या होगा?

लगभग तत्काल दो आपू तयाँ ठप हो जाएँगी — भोजन और ऑक्सीजन — और समस्त जीव-जगत आहार ंखला के
आधार से ऊपर क ओर ढह जाएगा।

पकाश संश्लेषण: 6CO2 + 6H2O + सूय का पकाश → C6H12O6 + 6O2

इसे रोकने का अथ है एक साथ हटा दे न ा —
• ग् लूक ोस का एकमात्र बड़ ा ोत, जो लगभग समस्त जीवन का भोजन है

• वायुमंडल में मुक्त O2 का एकमात्र बड़ ा ोत

• वायु से CO2 हटाने की एकमात्र बड़ ी पिक्र या

घटनाओं का क्रम:

1. उत्पादक सबसे पहले मरगे। हरे पादप, शैवाल और पादप प्लवक भोजन बनाने का कोई उपाय न पाकर कुछ
ही दन म समाप्त हो जाएँगे।
2. शाकाहारी, फर मांसाहारी भूखे मरगे। पुस्तक क प्रत्येक आहार ंखला कसी उत्पादक से आरंभ होती है,
इस लए यह हा न पोषी स्तर दर पोषी स्तर ऊपर चढ़ती जाएगी।
3. ऑक्सीजन घटे गी। जंतुओं और सूक्ष्मजीव का श्वसन तथा ईंधन का दहन O2 का उपयोग करते रहगे। उसे
लौटाने वाला प्रकाश सं ेषण न होने से वायुमंडल क 21 प्र तशत ऑक्सीजन नरंतर घटती जाएगी। ऑक्सी-
जीवन समाप्त हो जाएगा; केवल कुछ अवायवीय सूक्ष्मजीव बचगे।
4. CO2 बढ़ती जाएगी। श्वसन, अपघटन और दहन CO2 छोड़ते रहगे और उसे अवशो षत करने वाला कोई नह
होगा, इस लए ह रतगृह प्रभाव तीव्र होगा और पृथ्वी और गम होती जाएगी।
5. काबन और ऑक्सीजन दोन चक्र टू ट जाएँगे। अध्याय ऑक्सीजन चक्र को उपभोग (श्वसन और दहन) तथा
उत्पादन (प्रकाश सं ेषण) के बीच के संतुलन के रूप म प रभा षत करता है। उत्पादन हटा द जए तो चक्र
बचता ही नह , केवल एकतरफ़ा हा न रह जाती है।

क्या आप जानते ह? यह काय अ धकांशतः वन नह करते। वश्व के प्रकाश सं ेषण का बहुत बड़ा भाग महासागर
के सूक्ष्म पादप प्लवक करते ह। इसी लए महासागरीय अम्लीकरण और तापन, जो प्लवक के लए खतरा ह, स्थल पर
आपक साँस के लए भी महत्त्व रखते ह।

Page 22 of 49

Page 24

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

सो चए और बताइए — पृष्ठ 266
13.4 पृथ्वी क प्र क्रयाओं पर मानवीय प्रभाव

सो चए और बताइए

प्र.6 चचा क जए क मानवीय ग त व धयाँ वायुमंडल म ह रत गृह गैस क मात्रा कस प्रकार बढ़ाती ह? ह रत गृह
गैस के बढ़ते उत्सजन को रोकने के लए आप अपने स्तर पर क्या करगे?

मनुष्य ह रतगृह गैस दो तरह से बढ़ाता है — जो काबन कह बंद पड़ा था उसे मुक्त करके, और जो तंत्र उसे अवशो षत
करते थे उन्ह नष्ट करके।

मानवीय ग त व ध कौन-सी गैस कस प्रकार
बढ़ती है

िव तु , यातायात और उ ोग के िलए CO2 मंद काबन चक्र म लाख वष तक दबा रहा काबन कुछ सेकंड म वायु
कोयला, तेल और गैस जलाना म लौटा दया जाता है

वनोन्मूल न CO2 एक काबन अवशोषक हट जाता है, और वृक्ष के जलने या सड़ने से
उनका सं चत काबन भी मुक्त हो जाता है

धान के खेत, पशुध न, कू ड़े के ढे र CH4 अवायवीय अपघटन से मीथेन बनती है, जो CO2 से कह प्रबल
ह रतगृह गैस है

नाइटोजन उवरकों का अत्यिधक उपयोग नाइटोजन मृदा क अ त रक्त नाइट्रोजन को सूक्ष्मजीव नाइट्रोजन ऑक्साइड म
ऑक्साइड बदल दे ते ह, जो वायु म नकल जाती ह

सीमेंट, इस्पात और ईंट बनाना CO2 जलाया गया ईंधन और स्वयं रासाय नक अ भ क्रया, दोन CO2
छोड़ते ह

िचत्र 13.14 (कीिलंग वक्र) से पमाण:

वष 1960 में CO2 ≈ 315 ppm वष 2025 में CO2 ≈ 420 ppm

वृिद्ध = 420 – 315 = 105 ppm

पितशत वृिद्ध = (105 ÷ 315) × 100 = 33% (पुस्तक इसे "लगभग 35 पितशत " िलखती है)

दर ≈ 105 ppm ÷ 65 वष ≈ 1.6 ppm पित वष

एक व्य क्त के प्रयास क्य मायने रखते ह: एक प रवार का उत्सजन छोटा है, परंतु कुल उत्सजन करोड़ प रवार
के योग के अ त रक्त और कुछ नह है। यही मशन LiFE (Lifestyle for Environment) का तक है — भारत
ारा नेतृत्व क जाने वाली वह वै श्वक पहल जसे 2021 म संयुक्त राष्ट्र जलवायु प रवतन सम्मेलन म प्रस्तुत कया
गया और जसका उ े श्य लोग को ववेकपूण, पयावरण- हतैषी जीवनशैली अपनाने के लए प्रे रत करना है।

Page 23 of 49

Page 25

as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

c om
नमूना उत्तर — म व्य क्तगत स्तर पर क्या करूँगा:

व ुत बचाऊँगा: कमरे से नकलते समय पंखे और बल्ब बंद करूँगा, LED बल्ब लगाऊँगा, वातानुकूलकm
.
m a s e 24 °C से नीचे नह
. co प्रत्येक यू नट का अथ है बजलीघर म न नकली CO2। a gl
यात्राsकem
रखूँगा। बचाई गई

l a आदत बदलूँगा: छोट दूरी पैदल या साइ कल से, बस या मेट्रो का उपयोग, और वद्यालय के लए साझा वाहन।

agयातायात का ईंधन जला हुआ काबन ही है।
अप शष्ट म कमी, पुनः उपयोग, पुनचक्रण: अध्याय स्वयं इसका उल्लेख करता है। कोई भी नई वस्तु बनाने म ऊजा लगती है;

. c om
मरम्मत क हुई या दोबारा प्रयोग क गई वस्तु म लगभग कुछ नह ।
ag
भोजन और जल क बबाद रोकूँगा: बबाद भोजन काmअथ है बबाद उवरक, बबाद सचाई तथा पकाने और ढोने म बबाद
l a se
ag
ईंधन।
वृक्ष लगाऊँगा और उनक रक्षा करूँगा: बढ़ता हुआ वृक्ष प्रकाश सं ेषण ारा वायु से CO2 हटाकर उसका काबन काष्ठ म
सं चत करता है। भारत ने "अरब वृक्षारोपण कए ह"।
co m
em.
as
नवीकरणीय ऊजा अपनाऊँगा: घर पर सौर जल-तापक या छत पर सौर पैनल सीधे जीवाश्म-ईंधन वाली वद्युत का स्थान ले
m l
.co a g
लेता है।

a s em
a gl संकेत: परीक्षा म उत्तर लखते समय केवल काय क सूची मत बनाइए — प्रत्येक के साथ कारण भी ल खए क वह
उत्सजन कैसे घटाता है। "साइ कल चलाइए" एक आदत है; "साइ कल चलाइए, क्य क पेट्रोल जीवाश्म काबन है

m a s
.co agl
और उसे जलाने से वही CO2 वायु म लौट आती है जसे मंद काबन चक्र ने लाख वष म हटाया था" — यह व ान
है।
se m
g l a
a

co m
अभ्यास प्रश्न — पृष्ठ 267 – 268
m .
m ase
.co g l
अध्याय के अंत के प्रश्न

m a
a se
अभ्यास प्रश्न

a g l
पा रतंत्र म जैव-भू रासाय नक चक्र क भू मका का वणन करने के लए सबसे अ धक उपयुक्त वकल्प चु नए।
se m
com a
प्र.1

.
(i) समस्त जीव को प्रत्यक्ष रूप से भोजन उपलब्ध कराना। (ii) जै वक और अजै वक घटक के मध्य आवश्यक
a g l
m
ase
पोषक पुनचक्रण करना। (iii) सजीव के उपयोग के लए नए तत्व का नमाण करना। (iv) जीव से प्रदूषक और

agl
वषाक्त पदाथ को हटाना।

co m
.

m a s em
सही वकल्प: (ii) जै वक और अजै वक घटक के मध्य आवश्यक पोषक पुनचक्रण करना।

. co a gl
a s em
agl c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m ase
.co


a g l Page 24 of 49

Page 26

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

अन्य वकल्प क्य ग़लत ह:

(i) ग़लत है — भोजन उत्पादक प्रकाश सं ेषण ारा बनाते ह। चक्र केवल कच्ची सामग्री (काबन, नाइट्रोजन,
जल) को घुमाता है; वह भोजन नह बाँटता।
(iii) ग़लत है — कसी भी जै वक या रासाय नक प्र क्रया से तत्व का नमाण नह हो सकता। चक्र काबन,
नाइट्रोजन और ऑक्सीजन के उन्ह सी मत परमाणुओं को बार-बार प्रयोग करते ह।
(iv) ग़लत है — यह कसी जीव के उत्सज अंग का काय है, कसी वै श्वक चक्र का नह ।

अध्याय क अपनी प रभाषा से यह स्पष्ट है — "अजै वक और जै वक घटक के मध्य, द्रव्य और ऊजा का यह
चक्र य संचलन जैव-भू रासाय नक चक्र कहलाता है", और यह "सु न श्चत करती है क आवश्यक पोषक तत्व, जैसे
— काबन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन पुनः चक्रण ारा पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने के लए उपलब्ध रहते ह।"

प्र.2 नम्न ल खत म से कौन-सा वकल्प पृथ्वी के गम होने के लए मुख्य रूप से उत्तरदायी है? (i) सौर व करण
शीघ्रता से काबन डाईआक्साइड ारा अवशो षत हो जाती है, जो इसे ऊष्मा के रूप म नमुक्त करती है। (ii)
वायुमंडल के सूक्ष्म कण आगामी सौर व करण को अवशो षत करते ह, जो प्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी को गम करते ह।
(iii) पृथ्वी क सतह, सौर व करण का अवशोषण करती है, जो पुन: व क रत होती है और ह रत गृह गैस ारा
रोक ली जाती है। (iv) पृथ्वी का वातावरण बादल ारा पराव तत सौर व करण से ही गम होता है।

सही वकल्प: (iii) पृथ्वी क सतह, सौर व करण का अवशोषण करती है, जो पुन: व क रत होती है और ह रत गृह गैस
ारा रोक ली जाती है।

सूय का पकाश (मुख्यतः दृ श्य) वायुमंडल से गुज़रकर भूिम ारा अवशोिषत

भूिम गम → अवरक्त रूप में पुन ः िविकिरत (क्योंिक पृथ्वी सूय से बहुत ठं डी है)

हिरतगृह गैसे ं (CO2, CH4, जलवाष्प) इस अवरक्त को अवशोिषत कर लेत ी है ं

उसका कु छ भाग पुन ः नीचे भे जा जाता है → सतह जीवन के िलए पय प्त गम बनी रहती है

अन्य वकल्प क्य असफल ह:

(i) CO2 आते हुए दृश्य सूय-प्रकाश के लए बहुत हद तक पारदश है। वह बाहर जाती अवरक्त व करण
अवशो षत करती है, आती हुई नह ।
(ii) कण थोड़ा अवशोषण और प्रक णन अवश्य करते ह, परंतु यह प्रभाव छोटा है; वायुमंडल मुख्यतः नीचे से,
अथात् सतह से गम होता है। इसी लए क्षोभमंडल म ऊँचाई के साथ ताप घटता है।
(iv) बादल ारा पराव तत व करण तो अंत रक्ष म चली गई ऊजा है — वह पृथ्वी को गम कर ही नह सकती।
"ही" शब्द इस वकल्प को स्पष्टतः ग़लत बना दे ता है।

Page 25 of 49

Page 27

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 स्पष्ट क जए क जलवायु प रवतन, जल चक्र को कस प्रकार प्रभा वत करता है? उदाहरण ारा दशाइए।

गम वायुमंडल अ धक जलवाष्प धारण करता है, इस लए जल चक्र तेज़ और उग्र हो जाता है — कह अत्य धक तीव्र वषा,
कह लंबा सूखा, और जमे हुए जल का भंडार नरंतर घटता हुआ।

जल चक्र का जलवायु प रवतन से क्या अध्याय से उदाहरण
चरण बदलता है

वाष्पन गम समुद और स्थल से वाष्पन तेज़; गम अरब सागर द क्षण-प श्चम मानसून को नमी दे ता है
गम वायु अिधक नमी धारण करती है

वषण अिधक नमी थोड़ े समय में तीव झड़ ी के "कुछ क्षेत्र (जैसे तीव्र मानसून) म अ धक वषा और कुछ अन्य क्षेत्र म
रूप में िगरती है; अन्य क्षेत्र ों को कु छ सूखा"
नही ं िमलता

िहम का िपघलना िहमािनयाँ तेज़ी से िपघलती है ं — अभी " हमा नय के पघलने से न दय म जल क अ धकता से द घकाल म समुद्र
(िहममंडल) निदयों में जल बढ़ ता है, आगे चलकर का जल स्तर बढ़ सकता है और वह तट य शहर , जैसे— मुंबई और चेन्नई के
समुद स्तर लए संकट बन सकता है"

अपवाह तीव वष िरसने के बजाय सतह से बह "आक स्मक तीव्र वषा से सतही जल का अपवाह बढ़ जाता है और मृदा
जाती है और मृद ा का अपरदन करती है क्षरण होता है"

अंतःस्यंद न और जल कम िरसता है, इसिलए भूजल का "जल का कम रसाव भूजल के पुनभरण को कम कर दे ता है जसके
भूजल पुनभरण नही ं हो पाता प रणामस्वरुप कृ ष को वशेषकर शुष्क महीन के दौरान बनाए रखना
क ठन हो जाता है"

ऊष्मा चक्र को तेज़ क्य करती है: वाष्पन के लए ऊजा चा हए, और गम सतह वह ऊजा तेज़ी से दे ती है। गम वायु
संतृप्त होने से पहले अ धक जलवाष्प धारण भी कर सकती है, इस लए वषा से पहले वह अ धक बोझ ढोती है। जब
वह बोझ अंततः गरता है तो अ धक भारी वषा के रूप म गरता है। ध्यान द जए — पृथ्वी पर जल क कुल मात्रा
त नक भी नह बदली; वही जल केवल तेज़ी से और अ धक असमान रूप से इधर-उधर पहुँचाया जा रहा है।

अध्याय जस जुड़ाव पर बल दे ता है: "जल चक्र, हममंडल (glaciers), जलमंडल (न दयाँ और महासागर),
वायुमंडल (नमी), भूमंडल (मृदा अपरदन और अंत: स्यंदन म कमी) और जैवमंडल (फसल और मत्स्य पालन) को
परस्पर जोड़ता है।" ताप म हुआ एक ही प रवतन इसी एक चक्र के माध्यम से पाँच मंडल तक पहुँच जाता है।

Page 26 of 49

Page 28

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

प्र.4 वणन क जए क ए ल्बडो कस प्रकार पृथ्वी क सतह के ताप और इसक जलवायु को प्रभा वत करता है।

ए ल्बडो तय करता है क आती हुई धूप का कतना अंश सीधे वापस लौटा दया जाएगा। उच्च ए ल्बडो वाली सतह
अ धकांश पराव तत कर ठं डी रहती है; नम्न ए ल्बडो वाली सतह अ धकांश अवशो षत कर गम हो जाती है। चूँ क पृथ्वी के
भन्न- भन्न क्षेत्र का ए ल्बडो बहुत भन्न है, इस लए ए ल्बडो प्रत्येक क्षेत्र क जलवायु तय करने म सहायक होता है।

एि बडो, a = परावित त िविकरण ÷ पाप्त िविकरण (एक शुद्ध संख्या, 0 से 1)

पित इकाई क्षेत्र अवशोिषत ऊज = (1 – a) × सूय तप

सूय तप = 1000 W m–2 लेने पर:

ताज़ी िहम, a = 0.85 → अवशोिषत = (1 – 0.85) × 1000 = 150 W m–2

महासागरीय जल, a = 0.06 → अवशोिषत = (1 – 0.06) × 1000 = 940 W m–2

यह जलवायु को कैसे गढ़ता है:

ुवीय प्रदे श जमे रहते ह। हम और बफ आती हुई व करण का 0.80 – 0.90 भाग पराव तत कर दे ती ह,
इस लए बहुत कम ऊजा अवशो षत होती है। अध्याय भी यही कहता है — उच्च ए ल्बडो के कारण "ध्रुवीय प्रदे श
अत्य धक ठं डे रहते ह"।
महासागर और काली मृदा ऊष्मा सं चत करते ह। नम्न ए ल्बडो के कारण वे लगभग सब कुछ अवशो षत
कर लेते ह और "अपेक्षाकृत अ धक गम रहते ह" — और महासागर, जसक ऊष्मा-धा रता वशाल है, फर
पृथ्वी का ऊष्मा-भंडार बन जाता है।
शहर ऊष्मा प बन जाते ह। गहरे रंग क डामर सड़क और कंक्र ट नम्न ए ल्बडो वाले ह, प्रबलता से
अवशो षत करते ह और रात म पुनः व क रत करते ह। यही शहरी ऊष्मा प प्रभाव है, जससे वातानुकूलन क
माँग बढ़ जाती है।
वनोन्मूलन ए ल्बडो बदल दे ता है। अध्याय कहता है क वन क कटाई "सतही ए ल्बडो को भी बदल दे ता है",
अथात् भू म-उपयोग म प रवतन सीधे स्थानीय ऊजा-संतुलन बदल दे ता है।
हम–ए ल्बडो पुनभरण। बफ पघलने पर गहरे रंग का महासागर उघड़ जाता है; महासागर अ धक अवशो षत
कर अ धक गम होता है और और बफ पघलाता है। छोटा-सा तापन स्वयं को बढ़ा लेता है।

रोज़मरा क जाँच: अध्याय के अपने उदाहरण गली-मुहल्ले के स्तर पर भी काम करते ह — गहरे रंग क सड़क
हल्के रंग क सतह क तुलना म जल्द गम हो जाती ह, और ग्रीष्म म गहरे रंग के कपड़े श्वेत कपड़ क तुलना म
अ धक गम लगते ह। सूय वही, ए ल्बडो भन्न।

Page 27 of 49

Page 29

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

प्र.5 पवतीय और घाट समीर कस प्रकार बनती ह? मान ली जए दो पवत ह, एक घास ारा आ ा दत है और दूसरा
बंजर च ान से, क्या दोन पवतीय समीर के ताप भन्न- भन्न ह गे? य द ऐसा है तो कस प्रकार?

दोन समीर ढलान और घाट के तल के भन्न दर से गम तथा ठं डे होने से बनती ह। और हाँ — दोन पवतीय समीर के ताप
भन्न ह गे: बंजर च ान वाले पवत से उतरने वाली समीर घास से ढके पवत क समीर से अ धक ठं डी होगी।
भाग 1 — दोन समीर कैसे बनती ह

घाट समीर ( दन) पवतीय समीर (रात)

पहले क्या गम/ठं डा धूप वाली ढलान घाट के तल से तेज़ी से गम ढलान तेज़ी से ऊष्मा खोती है; घाट का तल अपेक्षाकृत गम
होता है होती है रहता है

ढलान की वायु गम होकर फै लती है, कम सघन होती है, ऊपर ठं डी होकर सघन हो जाती है, नीचे बैठती है
उठती है

दाब ढलान के ऊपर नम्न दाब क्षेत्र बनता है सघन शीतल वायु ढलान से नीचे दबाव डालती है

पवन की िदशा घाटी की ठं डी वायु ढलान पर ऊपर चढ़ ती है ढलान की शीतल वायु नीचे घाटी में उतरती है

भाग 2 — घास वाली ढलान बनाम बंजर च ान

तक:

दन म नंगी च ान अ धक गम होती है। च ान क व शष्ट ऊष्मा-धा रता कम है और उस पर छाया दे ने या
वाष्पोत्सजन करने वाली वनस्प त नह है, इस लए उसक सतह का ताप तेज़ी से चढ़ता है। इसके वपरीत घास
वाष्पोत्सजन से ठं डी रहती है — वा ष्पत होता जल गुप्त ऊष्मा ले जाता है — और वनस्प त क छाया मृदा को
ठं डा रखती है।
रात म नंगी च ान अ धक ठं डी भी होती है। अध्याय भवन-सामग्री के वषय म ठ क यही बात कहता है:
कंक्र ट रात म अपनी सं चत ऊष्मा प्रबलता से पुनः व क रत करता है, जब क गाढ़ म और लकड़ी क द वार
"ठं डक का अनुभव कराती ह, क्य क इनसे ऊष्मा का पुनः व करण कम हो जाता है।" खुली च ान क सतह
स्वच्छ आकाश क ओर मुक्त रूप से व करण कर अपनी ऊष्मा शीघ्र खो दे ती है।
घास वाली ढलान अपनी ऊष्मा रोक लेती है। नम मृदा और पादप ऊतक अ धकांशतः जल ह, और जल क
व शष्ट ऊष्मा-धा रता बहुत अ धक (4200 J kg–1 °C–1) है, इस लए उतनी ही ऊष्मा खोने पर ताप म गरावट
कह कम होती है। घास जो जलवाष्प छोड़ती है, वह ढलान के ठ क ऊपर क वायु म एक ह रतगृह गैस जोड़ दे ती
है, जससे व करण ारा शीतलन और धीमा पड़ जाता है।

नष्कष: बंजर च ान पर टक वायु अ धक नीचे ताप तक ठं डी होती है, इस लए उससे उतरती पवतीय समीर
अ धक ठं डी होती है। घास से ढके पवत क समीर अपेक्षाकृत मंद और अ धक नम होती है। ( दन म यही अंतर बंजर
पवत क घाट समीर को अ धक प्रबल बना दे ता है, क्य क उसे चलाने वाला ताप-अंतर बड़ा होता है।)

Page 28 of 49

Page 30

as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
संकेत: पूरा उत्तर वगत कक्षाओं क एक ही अवधारणा पर टका है — जस पदाथ म जल अ धक हो, उसका ताप

m as e
l
धीरे बदलता है। घास और नम मृदा म जल है; नंगी च ान म नह ।

m .co a g
l a se
a g
प्र.6 आप पवन, तूफान और वषा आ द मौसमी प रघटनाओं के साक्षी रहे ह। वायुमंडल क कौन-सी परत इनके लए

co m
ag
उत्तरदायी ह? और इन प रघटनाओं के होने का प्रमुख कारण क्या है?

m .
as e
a g l
क्षोभमंडल — सबसे नचली परत, 0 – 12 km, जसम "लगभग सभी मौसम संबंधी प रघटनाएँ" घ टत होती ह। प्रमुख कारण
यह है क क्षोभमंडल नीचे से, अथात् पृथ्वी क सतह से गम होता है, इस लए इसम ऊँचाई के साथ ताप घटता है (लगभग
co m
6.5 °C प्र त km) और भू म के पास क गम वायु ऊपर उठ सकती है।
e m.
m l as
m .co a g
l a se
सतह सूय का पकाश अवशोिषत करती है → सतह गम हो जाती है
a g उसके संपक की वायु गम → फै लती है, कम सघन हो जाती है

m a s
.co agl
कम सघन वायु ऊपर उठती है → संवहन धाराएँ बनती है ं

se m
a
ऊपर उठती वायु ठं डी होती है → जलवाष्प संघिनत होती है → बादल → वष

a g l
ऊपर उठी वायु का स्थान लेने दौड़ ती वायु = पवन ; उठान पचंड हो तो = तूफ़ान

. c om
ऊपर क परत म तूफ़ान क्य नह आते: समतापमंडल (12 – 50 km) म ओजोन परतm
s e
laताप बढ़ता है। ठं डी वायु के
c mकरती है, इस लए यह परत ऊपर से गम होती है और इसम ऊँचाई कaे gसाथ
पराबगनी करण
अवशोoषत
.
m गम वायु का होना एक स्थायी व्यवस्था है — उसम से होकर कुछ भी ऊपर उठना नह चाहता। अध्याय कहता
eऊपर
as है क यह "वायु के ऊध्वाधर मश्रण क कमी के कारण इस परत को शांत कर दे ती है, जससे मौसम क्षोभमंडल तक
a g l
ही सी मत रहता है।" इसी स्था यत्व के कारण वायुयान क्षोभमंडल के शखर और नचले समतापमंडल म, मौसम के
se m
com g l a
. a
ऊपर, उड़ान भरते ह।
m
ase
agl
ध्यान द जए: वायुमंडल क लगभग सारी जलवाष्प भी क्षोभमंडल म ही रहती है — और जलवाष्प के बना न

m
बादल, न वषा, न तूफ़ान चलाने वाली गुप्त ऊष्मा। क्षोभमंडल क ऊँचाई भूमध्य रेखा के ऊपर सबसे अ धक (जहाँ

. co
m
ऊष्मण सबसे तीव्र है) और ध्रुव के ऊपर सबसे कम होती है।

m as e
.co a g l
a s em
agl नाइ ोजन चक्र म होने वाली प्र क्रयाओं क व्याख्या क जए। य द नाइ ोजन का चक्रण नह हो तो पृथ्वी पर
.c
प्र.7

e m
जीवन कस प्रकार प्रभा वत होगा?

m a s
e m . co agl
as

a g l
नाइ ोजन का सबसे बड़ा भंडार वायुमंडल म है, परंतु N2 गैस अ क्रयाशील है, इस लए जीवन के उपयोग म आने से पहले
उसे घुलनशील यौ गक म बदलना पड़ता है। पाँच प्र क्रयाएँ मलकर इस बंद लूप को पूरा करती ह।

com
m .
m ase
.co


a g l Page 29 of 49

Page 31

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

ं लीय N₂ (78%)
वायुमड

नाइटोजन िस्थरीकरण
(राइजोिबयम, एजोटोबैक्टर, तिड़ त)

अमोिनया NH₃ िवनाइटीकरण
(स्यूडोमोनास)
नाइटीकरण

नाइटाइट NO₂⁻ पादप → जंत ु

नाइटीकरण मत्ृ यु, अपिशष्ट
स्वागं ीकरण
नाइटे ट NO₃⁻ अपघटक
अमोनीकरण नाइटोजन को अमोिनया के रूप मे ं मदृ ा मे ं लौटाता है

नाइट्रोजन चक्र ( चत्र 13.15 से तुलना क जए)। नाइट्रोजन वायु से केवल स्थरीकरण ारा नकलती है और वायु म केवल वनाइट्र करण
ारा लौटती है।

प्र क्रया क्या होता है कौन करता है

नाइटोजन वायुमंडलीय N2 → अमोिनया (NH3) फलीदार पादप क जड़ ग्रं थय म राइजो बयम, मृदा म
िस्थरीकरण एजोटोबैक्टर; त ड़त और हाबर–बॉश प्र क्रया भी

नाइटीकरण NH3 → नाइटाइट (NO2–) → नाइटेट (NO3–) नाइट्रोसोमोनास, फर नाइट्रोबैक्टर

स्वांग ीकरण पादप मृद ा से नाइटेट ले क र पोटीन और न्यूक्लीक अम्ल पादप, फर जंतु
बनाते है;ं जंत ु खाकर नाइटोजन पाप्त करते है ं

अमोनीकरण मृत शरीर और अपिशष्ट का अपघटन होकर अमोिनया अपघटक जीवाणु और कवक
मृद ा में लौट आती है

िवनाइटीकरण कु छ नाइटेट पुनः N2 गैस बनकर वायुमंडल में लौट स्यूडोमोनास
जाती है — च पूर ा
क्र

Page 30 of 49

Page 32

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

य द नाइ ोजन का चक्रण न हो: नाइट्रोजन "सभी सजीव म प्रोट न और न्यूक्लीक अम्ल के सं ेषण के लए
एक आवश्यक तत्व है"। प्रोट न एंज़ाइम, पेशी और प्रत्येक को शक य संरचना बनाते ह; न्यूक्लीक अम्ल (DNA और
RNA) जीवन के नदश ढोते ह। चक्र रुकने पर—

वायु क 78 प्र तशत N2 व्यथ रह जाएगी, क्य क "पादप तथा जंतु इसका प्रत्यक्षतः उपयोग नह कर सकते
ह।"
मृदा का नाइट्रे ट उगते पादप खा जाएँगे और वह कभी भरा नह जाएगा, इस लए पादप प्रोट न नह बना पाएँगे
— वृ द्ध, मरम्मत और बीज- नमाण रुक जाएगा।
जंतु, जो नाइट्रोजन केवल पादप या अन्य जंतुओं को खाकर पाते ह, प्रोट न के अभाव म मर जाएँगे।
अपघटक मृत पदाथ म बंद नाइट्रोजन को लौटा नह पाएँगे, इस लए वह सदा के लए संचरण से बाहर हो
जाएगी।

जीवन, जैसा हम जानते ह, चल नह पाएगा। प्रत्येक जीव का प्रोट न उधार ली हुई नाइ ोजन है, जसे अंततः
लौटाना ही पड़ता है।

क्या आप जानते ह? अध्याय का आइए, और आगे बढ़ बताता है क "मानव शरीर म उप स्थत आधे से भी अ धक
नाइट्रोजन परमाणु इसी हाबर–बॉश प्र क्रया से बनते ह" — वायुमंडलीय नाइट्रोजन से अमो नया बनाने क वह
औद्यो गक प्र क्रया जसे "वायु से अन्न" कहा गया और जसने भारत क ह रत क्रां त संभव बनाई। इसक क़ मत यह
है क यह वै श्वक ऊजा का लगभग 1 – 2 प्र तशत खपाती है, और इससे बने उवरक के अत्य धक उपयोग ने मृदा
तथा जल को क्ष त पहुँचाई है।

प्र.8 वनोन्मूलन का पृथ्वी के ऑक्सीजन और काबन चक्र पर क्या प्रभाव पड़ता है? वनोन्मूलन के अन्य प रणाम क्या
ह?

वनोन्मूलन दोन चक्र पर एक ही ओर से प्रहार करता है: यह उस तंत्र को हटा दे ता है जो वायु से CO2 लेकर O2 दे ता था,
और साथ ही वृक्ष म सं चत काबन को मुक्त भी कर दे ता है।

चक्र वन काटने का प्रभाव

ऑक्सीजन वायुमंडलीय O2 को पुनस्थ िपत करने वाली एकमात्र बड़ ी पि या पकाश संश्ले षण है। वृक्ष कम होने से O2 का उ त्पादन घटता है,
क्र

चक्र जबिक श्वसन और दहन उसका उपभोग करते रहते है ं — इसिलए च का संतलु न उपभोग की ओर झुक जाता है।
क्र

काबन चक्र एक साथ दो चोटें। (क ) एक काबन अवशोषक हट जाता है — वृक्ष पकाश संश्ले षण के िलए CO2 नही ं ले पाते। (ख) एक काबन
ोत बन जाता है — कटे वृक्षों के जलने या सड़ ने से उनका संिचत काबन CO2 बनकर िनकल जाता है। अध् याय कहता है िक
जीवाश्म ईंध नों का दहन और वनोन्मूल न िमलकर "वन तथा महासागर जैसे पाकृ ितक काबन अवशोषक " संतप्ृ त कर रहे है।
ं

अध्याय म दए गए अन्य प रणाम:

स्थानीय वषा म कमी। "वन क कटाई से प्रकाश सं ेषण म कमी आती है और वाष्पोत्सजन घट जाता है जससे स्थानीय
वषा म कमी हो सकती है।" वृक्ष भूजल को वायु म पंप करते ह; वृक्ष हटे तो नमी क वह आपू त भी रुक जाती है।

Page 31 of 49

Page 33

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

ए ल्बडो म प रवतन। "यह सतही ए ल्बडो को भी बदल दे ता है", जससे स्थानीय ऊजा-संतुलन और ताप बदल जाते ह।
मृदा अपरदन। "मृदा को बाँधकर रखने वाली वृक्ष क जड़ के अभाव म मृदा अपरदन बढ़ सकता है" — ऊपरी मृदा बह जाती
है, न दय म गाद भरती है और बाढ़ बढ़ जाती है।
पयावास और जैव व वधता क हा न। "समय के साथ पयावास नष्ट हो सकते ह। प रणामस्वरूप अनेक जा त (species)
अपने प्राकृ तक आवास खो दगी और जैव व वधता म कमी आएगी।"

एक ही काय के इतने प्रभाव क्य : वन केवल वृक्ष का समूह नह है — वह एक साथ चार मंडल का कायशील अंग
है। वह वायुमंडल से गैस का आदान-प्रदान करता है, जलमंडल म जल वाष्पोत्स जत करता है, अपनी जड़ से
भूमंडल को बाँधता है और जैवमंडल को आश्रय दे ता है। उसे काटने से चार संबंध एक ही प्रहार म कट जाते ह।

प्र.9 उपयुक्त चत्र से उस पथ क व्याख्या क जए जससे काबन पुन: वायुमंडल म जाता है। इस चत्र का आरंभ आप
पादप ारा वायुमंडलीय CO2 के उपयोग से कर सकते ह।

काबन वायुमंडल से केवल एक मुख्य ार से नकलता है — प्रकाश सं ेषण — परंतु लौटता चार ार से है: श्वसन,
अपघटन, जीवाश्म ईंधन का दहन, और महासागर से नमु क्त।

वायुमंडल मे ं CO₂

आदान-पदान
पकाश संश्लेषण
श्वसन
(भीतर जाने का एकमात्र माग)

जल मे ं CO₂
दहन
पादप (ग्लूकोस) श्वसन
अपघटन
खाया जाना

जीवाश्म ईंधन
जंत ु
लाखों वष ं तक दबे रहना
मत्ृ यु

ृ जैव पदाथ
मत

हरे तीर: वायुमंडल से काबन का नकलना। लाल तीर: चार वापसी-पथ। धूसर बदुदार तीर: सजीव और दबे हुए भंडार के बीच काबन का
संचलन।

Page 32 of 49

Page 34

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

पथ , िलिखत रूप में:
वायु की CO2 → पकाश सं लेषण → पादप में ग्लूक ोस
श्

→ (1) पादप का श्वसन → CO2 वायु में वापस

→ जंत ु ारा खाया जाना → (2) जंत ु का श्वसन → CO2 वायु में वापस

→ पादप/जंत ु की मृत्यु → (3) सूक्ष्मजीवों ारा अपघटन → CO2 वायु में वापस

→ लाखों वष दबे रहना → कोयला, ते ल, गैस → (4) दहन → CO2 वायु में वापस

→ समुद ी जल में काब ने ट /हाइडोजन काब ने ट के रूप में घुलना → वायु के साथ आदान-पदान

एक नह , दो घ ड़याँ। अध्याय इन्ह सावधानी से अलग करता है।

द्रुत चक्र "कुछ दन से वष तक" चलता है — प्रकाश सं ेषण, श्वसन और अपघटन।
मंद चक्र "लाख वष " तक चलता है — मृत जीव का दबना और जीवाश्म ईंधन म बदलना।

यही जलवायु समस्या का मूल है। जस काबन को मंद चक्र ने लाख वष म दबाया, उसे दहन "बहुत कम समय म"
लौटा दे रहा है। हम एक मंद भंडार को एक तेज़ नल से खाली कर रहे ह।

प्र.10 वायुमंडल म CO2 क अ धकता को अवांछनीय क्य माना जाता है जब क पादप को इसक आवश्यकता होती
है?

क्य क पादप के लए CO2 क उपयो गता और पृथ्वी के ताप पर उसका प्रभाव दो अलग-अलग बात ह, और इनम से
केवल एक क एक सीमा है। पादप एक हद तक ही उपयोग कर सकते ह; ह रतगृह प्रभाव बढ़ता ही जाता है।

"आवश्यक" और "अ धकता" म वरोध क्य नह है:

पादप क माँग क एक छत है। प्रकाश सं ेषण जल, प्रकाश, ताप और ख नज-आपू त से भी सी मत होता है,
केवल CO2 से नह । जैसे ही कोई दूसरा कारक सीमाकारी बन जाता है, अ त रक्त CO2 कुछ नह जोड़ती।
ह रतगृह प्रभाव क ऐसी कोई छत नह है। प्रत्येक अ त रक्त CO2 अणु बाहर जाती और अ धक अवरक्त
व करण रोक लेता है। अध्याय के शब्द म — "यद्य प पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने और उसे पयाप्त गम
रखने के लए कुछ मात्रा म काबन डाइऑक्साइड क आवश्यकता होती है", संतुलन ही नणायक है।

Page 33 of 49

Page 35

as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
अध्याय में िगनाए गए पिरणाम:
as e
. c m → वैि वक तापन
हिरतगृह पभाव oतीव
a g l
m
श्

→a e
s और आकिटक समुदी बफ का िपघलना
g l िहमािनयों
a→ समुद के जल स्तर का बढ़ ना → तटीय शहरों पर संकट

co m
. ag
→ मौसम की अिधक चरम पिरिस्थितयाँ
e m
→ भारत में पचंड मानसून और बदलते वष पैट न → कृ िष पर खतरा
g l as
a
→ समुद में अिधक CO2 घुलना → महासागरीय अम्लीकरण → प्लवक और पवाल को हािन

co m
se m.
o m l a
प्रमाण: चत्र 13.14 (क लग वक्र) दखाता है क CO2 वष 1960 के लगभग 315 ppm से बढ़कर आज लगभग
420m .c हो गई है — अथात् 105 ppm क वृ द्ध, जो 33% बनती है (पुस्तक aइसेg "लगभग 35 प्र तशत"
se है), और अध्याय इसे "मानव सभ्यता के इ तहास म असामान्य" कहता है। वक्र के छोटे-छोटे आरीनुमा दाँते
ppm

g l a
a
लखती
उत्तरी गोलाध क वनस्प त का प्रत्येक ग्रीष्म म साँस लेना और शीत म छोड़ना ह — यह प्रमाण है क पादप CO2

m a s
.co agl
अवशो षत कर रहे ह, और साथ ही यह भी प्रमाण है क वे इस चढ़ाई को रोक पाने जतना अवशो षत नह कर पा
रहे।
se m
g l a
a

co m
.
पृथ्वी क सतह से ऊष्मा का क्षय कस प्रकार होता है? इसक क्या साथकता है?
m
प्र.11

o m l a se
उत्तर .c a g
m
se चार प्रकार से ऊष्मा खोती है — अवरक्त व करण ारा, स्पश म आई वायु तक चालन ारा, गम वायु के ऊपर उठने
g l a
a
सतह
अथात् संवहन ारा, और वाष्पन ारा जो गुप्त ऊष्मा ले जाता है। इनम से केवल व करण ही ऊजा को सीधे अंत रक्ष तक

se m
com l a
पहुँचा सकता है।

. a g
m
ase
agl
ऊष्मा-क्षय कैसे काय करती है ऊजा कहाँ जाती है
क वध

िविकरण गम सतह अवर क्त िविकरण उ त्सिजत करती है (वह सूय से बहुत ठं डी
co m
कुछ भाग ह रतगृह गैस अवशो षत कर लेती ह;
है, इसिलए दृ श्य पकाश नही,ं अवर क्त छोड़ ती है)
m .
शेष अंत रक्ष म नकल जाता है

m as e
.co a g l
em संवहन
चालन ऊष्मा भूिम के सीधे संपक में आई वायु की पतली परत तक पहच
ु ँ ती है सबसे नचली वायु परत म

a s
agl वही गम वायु फै लकर कम सघन होती है और ऊपर उठती है; उसका क्षोभमंडल म ऊपर क ओर ले जाई जाती है
स्थान ठं डी वायु ले ले ती है
.c
s e m
m a
. co agl
वाष्पन जल द व से वाष्प बनने के िलए गुप्त ऊष्मा ले ता है और िजस सतह से वाष्प म सं चत; ऊपर जाकर बादल बनते समय

e m
as
उठा उसे ठं डा कर दे ता है मुक्त हो जाती है

a g l

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 34 of 49

Page 36

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

यह क्षय क्य साथक है — चार कारण:

1. इससे पृथ्वी का ताप स्थर रहता है। वष भर म पृथ्वी को उतनी ही ऊजा खोनी पड़ती है जतनी वह सूय से
पाती है। य द वह कम खोती तो बना कसी सीमा के गम होती चली जाती।
2. ह रतगृह प्रभाव इसी चरण पर काम करता है। ह रतगृह गैस आते हुए सूय-प्रकाश को नह रोकत ; वे बाहर
जाती अवरक्त व करण को धीमा करती ह। वायुमंडल न होता तो "पृथ्वी इतनी ठं डी होती क यहाँ पर जीवन
संभव नह हो पाता"; और CO2 बहुत अ धक हो जाए तो यह क्षय आवश्यकता से अ धक धीमा पड़ जाता है
और पृथ्वी गम होने लगती है।
3. यही मौसम चलाता है। संवहन ऊष्मा को ऊपर ले जाता है — इसी से पवन और तूफ़ान बनते ह। वाष्पन और
संघनन जल तथा गुप्त ऊष्मा को पृथ्वी भर म घुमाते ह — यही जल चक्र है।
4. इससे दै नक ताप-अंतर समझ म आता है। रात म कोई आती हुई व करण नह होती, परंतु सतह व करण
करती रहती है — इसी लए रात ठं डी होती ह, और इसी लए स्वच्छ शुष्क रात बादल वाली रात से अ धक ठं डी
होती है, क्य क बादल कुछ अवरक्त लौटा दे ते ह।

रोज़मरा क जाँच: अध्याय का वह उदाहरण क पक्के मकान म रात म गम लगती है, इसी वचार का छोटा रूप है
— कंक्र ट दन म ऊष्मा सं चत करता है और रात म पुनः व करण ारा उसे कमरे म छोड़ता है। गाढ़ म और
लकड़ी क द वार कम पुनः व करण करती ह, इस लए ठं डी रहती ह।

प्र.12 य द पृथ्वी गोलाकार न होकर एक तश्तरी के समान चपट होती तब सौर व करण और ताप के पैटन कस प्रकार
भन्न होते?

सूय के सामने रखी चपट तश्तरी पर प्रत्येक बदु को करण एक ही कोण पर मलत , इस लए सूयातप सवत्र समान होता।
भूमध्य रेखा और ुव के बीच कोई ताप-अंतर न होता — और इस लए न वायुदाब प याँ बनत , न ग्रहीय पवन, न ऊष्मा
ढोने वाली महासागरीय धाराएँ।

Page 35 of 49

Page 37

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

गोला — वही िकरण-पुंज, िभन्न क्षेत्रफल चपटी तश्तरी — सवत्र वही कोण

उच्च अक्षांश: ठं डा

पत्येक प ी को
भूमध्य रेखा: गम
समान ऊज

भूमध्य रेखा–धुव का बड़ ा अंतर अंतर नही ं → चालक बल नही ं

गोले पर उतनी ही चौड़ाई का करण-पुंज उच्च अक्षांश पर अ धक सतह पर फैल जाता है। सूय के सामने रखी चपट तश्तरी पर ऐसा फैलाव
होता ही नह ।

गोले पर: िकसी स्थान पर तीवता, I = I0 cos θ

भूमध्य रेखा पर θ = 0° → I = I0 = 1 kW m–2

θ = 60° → I = 0.5 × 1 kW m–2 = 0.5 kW m–2
धु व पर θ = 90° → I ≈ 0

सूय के सामने चपटी तश्तरी पर: सवत्र θ = 0° → सवत्र I = I0 → समान ऊ ष्मण

Page 36 of 49

Page 38

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

समान ऊष्मण से क्या-क्या होता:

कोई वायुदाब प नह । भूमध्यरेखीय नम्न, 30° क उपोष्ण उच्च, 60° क उपध्रुवीय नम्न और ध्रुवीय उच्च
— ये सब इस लए बनती ह क ऊष्मण अक्षांश के साथ भन्न होता है। समान ऊष्मण का अथ है समान दाब।
कोई ग्रहीय पवन नह । पवन उच्च दाब से नम्न दाब क ओर चलती वायु है। दाब म अंतर ही न हो तो बड़े स्तर
क पवन बनेगी ही नह ।
ऊष्मा ढोने वाली महासागरीय धाराएँ नह । सतही धाराएँ ग्रहीय पवन के घषण से खचती ह और ताप तथा
सघनता के अंतर से चलती ह। दोन चालक बल समाप्त हो जाते ह।
भूमध्य रेखा से ुव तक क जलवायु प याँ नह । न उष्णक टबंध, न शीतोष्ण क टबंध, न ध्रुवीय प्रदे श —
प्रका शत सतह पर सवत्र एक ही जलवायु।
दूसरा पृष्ठ बलकुल नज व। सूय से वमुख पृष्ठ को कुछ भी नह मलता और वह सदा के लए भीषण ठं डा
रहता — वास्त वक पृथ्वी के कसी भी अंतर से कह तीखा वरोध।

प्रश्न का मम: पृथ्वी क आकृ त — उसक धुरी के झुकाव के साथ — ही ऊष्मण को असमान बनाती है, और पवन ,
धाराओं तथा मानसून को चलाने वाली वही असमानता है, ऊष्मा क मात्रा नह । पूणतः और समान रूप से गम कया
गया ग्रह एक नश्चल ग्रह होता।

प्र.13 कल्पना क जए क पृथ्वी पर वायुमंडलीय ताप बढ़ जाता है। यह कस प्रकार हममंडल, जलमंडल और
जैवमंडल को प्रभा वत करेगा?

यह वृ तीन मंडल से क्रमशः होकर गुज़रती है: बफ पघलती है, पघला जल समुद्र का स्तर बढ़ाता है और जल चक्र
तेज़ करता है, और बदला हुआ जल तथा ताप हर जीव-समुदाय को वक्षो भत कर दे ता है।

मंडल क्या होता है क्य

िहममंडल िहमािनयाँ, िहमावरण और धु वीय िहम तेज़ी से िपघलते है;ं िहम 0 °C पर पहले से खड़ी बफ को अ धक ऊष्मा मलती है,
चादरे ं िसकु ड़ ती है ं इस लए अ धक भाग द्रव म बदलता है। चमक ली बफ हटने से
ए ल्बडो घटता है, और अ धक व करण अवशो षत होता है
— पघलन स्वयं को तेज़ कर लेती है

जलमंडल पहले निदयाँ िपघले जल से भरती है;ं दीघ काल में समुद का स्थल पर बफ के रूप म सं चत जल महासागर म लौटकर
स्तर बढ़ ता है; वाष्पन बढ़ ता है; समुद गम होकर अिधक CO2 उसका आयतन बढ़ा दे ता है। गम सतह से वाष्पन तेज़ होता है,
घोलता है इस लए जल चक्र और उग्र चलता है — "कुछ क्षेत्र म अ धक
वषा और कुछ अन्य क्षेत्र म सूखा"

जैवमंडल पय वास नष्ट होते है ं (मैंगोव, पवाल िभित्त याँ, धु वीय जाितयाँ), प्रत्येक जीव ताप, जल-आपू त और ऋतु क एक वशेष परास
फसल की उपज और वष पैटन बदलते है,ं महासागरीय के अनुकूल ढला है। इन्ह उसक अनुकूलन-क्षमता से तेज़
अम्लीकरण प्लवक और पवाल के िलए संक ट बनता है, बदल द जए तो वह समाप्त हो जाता है — "पयावास हा न"
जाितयाँ स्थान बदलती है ं या लुप्त होती है ं

Page 37 of 49

Page 39

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

वायुमंडलीय ताप में वृिद्ध

→ िहममंडल: िहमािनयों और धु वीय िहम का त्विरत िपघलना

→ जलमंडल: अभी िनचले क्षेत्रों में बाढ़ , आगे समुद स्तर में वृिद्ध, ते ज़ जल चक्र
→ जै वमंडल: पय वास हािन, िवक्षोिभत पािरतं त्र, कृ िष और मत्स्य संसाधनों पर खतरा

वशेष रूप से भारत के लए: हमालयी हमा नयाँ गंगा–ब्रह्मपुत्र तंत्र को जल दे ती ह, इस लए उनके पीछे हटने से
न दय का प्रवाह पहले बढ़े गा और बाद म घटे गा। मुंबई और चेन्नई जैसे तट य शहर पर बढ़ते समुद्र का संकट है। और
गम अरब सागर मानसून को अ धक प्रचंड तथा कम वश्वसनीय बना दे ता है — जो कृ ष पर सीधा खतरा है।

प्र.14 व्याख्या क जए क कस प्रकार पृथ्वी का वायुमंडल, इसका ताप उपयुक्त बनाए रखने के लए सहायता करता
है जो क पृथ्वी पर जीवन के लए आवश्यक है।

वायुमंडल दोहरे छननी क भाँ त काय करता है। आते समय वह उस व करण को हटा दे ता है जो जीवन को हा न पहुँचाती,
और जाते समय वह उस ऊष्मा का कुछ भाग रोक लेता है जो अन्यथा नकल जाती। पृथ्वी का ताप जीवन के योग्य संकरी
परास म बना रहे, इसके लए दोन आवश्यक ह।

भू मका वायुमंडल क्या करता है ताप पर प्रभाव

1. आते िविकरण का समतापमंडल की ओजोन परत हािनकारक लघु-तरंगदै य UV अत्य धक तापन रुकता है और जी वत ऊतक
कु छ भाग अवशोिषत अवशोिषत कर ले ती है; बादल , धूल और गैसे ं कु छ सूय-पकाश UV से सुर क्षत रहता है
करना परावितत तथा अवशोिषत कर ले ती है ं

2. बाहर जाती ऊष्मा सतह सूय का पकाश अवशोिषत कर उसे अवर क्त रूप में पुनः सतह पयाप्त गम बनी रहती है — "य द
को रोकना िविकिरत करती है; हिरतगृह गैसे ं (CO2, CH4, जलवाष्प) उसे वायुमंडल नह होता तो पृथ्वी इतनी ठं डी होती
अवशोिषत कर कु छ भाग नीचे लौटा दे ती है ं क यहाँ पर जीवन संभव नह हो पाता"

3. ऊष्मा का िवतरण पवन और संवहन गम क्षेत्रों से ठं डे क्षेत्रों तक ऊष्मा ले जाते है;ं दन-रात तथा भूमध्य रेखा–ध्रुव क चरम सीमाएँ
जलवाष्प गुप्त ऊष्मा ढोकर कही ं और छोड़ ती है नरम पड़ जाती ह

4. रात में कं बल की सूय स्त के बाद अवर क्त िविकरण के िनकलने की गित धीमी सतह हर रात जमने से बच जाती है
भाँित काय करना कर दे ता है

Page 38 of 49

Page 40

as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
सारा महत्त्व संतुलन का है। ह रतगृह प्रभाव बहुत कम हो तो पृथ्वी जम जाए; बहुत अ धक हो तो तप जाए।

m
अध्याय दोन छोर दे ता है:
o l a se
बहुतm .c "य द वायुमंडल नह होता तो पृथ्वी इतनी ठं डी होती क यहाँ पर जीवन aसंgभव नह हो पाता।"
se अ धक: "मानवीय ग त व धय से नकलने वाली अ त रक्त CO ह रतगृह प्रभाव को बढ़ाती है जससे
कम:

g l a
a
बहुत 2
वै श्वक ताप म वृ द्ध होती है। य द इसे अ नयं त्रत छोड़ दया जाए तो पृथ्वी पर जीवन दुष्कर हो सकता है।"

co m
m .
अध्याय का प्राकृ तक उदाहरण शुक्र ग्रह है — बुध सूय के अ धक नकट है फर भी शुक्र उससे अ धक गम है,
e ag
l as
क्य क शुक्र पर घना वायुमंडल है जसम "अ नयं त्रत ह रत गृह प्रभाव" चल रहा है। दो ग्रह, एक ही सूय; अंतर
g
वायुमंडल ने डाला। a

co m
em.
संघटन याद र खए: नाइट्रोजन 78%, ऑक्सीजन 21%, तथा आगन, काबन डाइऑक्साइड और जलवाष्प अल्प
m l as
.co g
मात्रा म। ह रतगृह का काम यही अल्प मात्रा वाली CO2 और जलवाष्प करती ह — प्रचुर N2 और O2 नह ।

m a
l a se
a g
m a s
पृथ्वी के व भन्न मंडल के मध्य अंतःसंबंध का वणन क जए। उदाहरण स हत समझाइए क ये मंडल कस

.co agl
प्र.15

m
प्रकार एक सूक्ष्म संतुलन म काय करते ह।

l a se
उत्तर a g
m
पाँच मंडल इस लए जुड़े ह क वे एक ही ऊजा और एक ही द्रव्य साझा करते ह। ऊजा सूय से आकर इन सबसे होकर
बहती है; द्रव्य इनके बीच बार-बार च क्रत होता है। इनम से कसी एक से होकर गुज़रे बना न ऊजा चल सकती है, न द्रव्य
. co
em
m as
— और गुज़रते समय वह शेष को बदल दे ता है।

.co a g l
se m
l a
मंडल क्या है अध्याय से उदाहरण

ag
m
ठोस च ाने,ं मृद ा, भू-आकृ ितयाँ और पथ्ृ वी का आंतिरक भाग
se
भूम ंडल दक्कन का पठार, थार मरुस्थल

द व जल — महासागर , निदयाँ, झीले ,ं भूजलcom g l a
जलमंडल
m . गंगा एवं ब्रह्मपुत्र नद तंत्र
a
जल का ठोस रूप — िहम औरla बफs
e
िहममंडल
a g हमालयी हमा नयाँ, ल ाख म जमी बफ, ध्रुवीय हम छत्रक

गुरुत्वाकषण से पथ्ृ वी के चारों ओर बँध ी वायु
m
वायुम ंडल पहाड़ और वन म अ धक स्वच्छ वायु

. co
e m
as
जैवमंडल सभी सजीव और उनके पय वास मग्रोव, वन, खेत, महासागरीय प्लवक, प्रवाल भ त्तयाँ
m l
.co a g
a s em ये कस प्रकार जुड़े ह:

agl
.c
सौर ऊष्मण स्थल, समुद्र और हम को असमान रूप से गम करता है — यही अकेला तथ्य भूमंडल, जलमंडल, हममंडल और
वायुमंडल को जोड़ दे ता है।
s e m
m a
. co agl
जल चक्र जल को महासागर से वायु, वायु से वषा, वषा से मृदा, मृदा से नद और फर वापस ले जाता है — क्रम से हर मंडल से

e m
as
होकर।

a g l
जैव-भू रासाय नक चक्र काबन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन को च ान, जल, वायु और सजीव के बीच घुमाते ह।
पवन और महासागरीय धाराएँ ऊष्मा और नमी को एक क्षेत्र से दूसरे तक पहुँचाती ह।

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 39 of 49

Page 41

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

सूक्ष्म संतुलन के तीन उदाहरण:

1. िक्र याकलाप 13.1 की पवतीय घाटी

कम िहमपात (िहममंडल) → कम िपघला जल → झील का स्तर िगरना (जलमंडल)

→ घास की खराब वृिद्ध (जै वमंडल) → भे ड़ों के िलए कम चारा

2. अरब सागर और मानसून

गम समुद (जलमंडल) → अिधक वाष्पीकरण → अिनिश्चत मानसून (वायुमंडल)

→ एक क्षेत्र में बाढ़ , दू सरे में सूखा → फसल हािन (जै वमंडल)

3. ईंधन जलाने से अितिरक्त CO2

अिधक CO2 (वायुमंडल) → पबल हिरतगृह पभाव → िहमािनयों का िपघलना (िहममंडल)

→ समुद स्तर बढ़ ना (जलमंडल) → तटीय पय वास की हािन (जै वमंडल)
→ जहाँ वन कटे वहाँ मृद ा अपरदन (भूमंडल)

"सूक्ष्म" क्य : यह संतुलन कसी कठोर ढाँचे से नह टका है। यह प्रवाह का एक समुच्चय है — ऊजा और द्रव्य के
प्रवाह — जो संयोगवश भीतर और बाहर लगभग बराबर ह। इनम से कसी एक प्रवाह पर ज़ोर से धक्का द जए,
जैसा मानवीय ग त व धयाँ आज काबन के प्रवाह पर दे रही ह, और पूरा समुच्चय एक नई अवस्था म जा बैठेगा —
जो जीवन के लए कह कम सुखद हो सकती है। यही अध्याय क अं तम सीख है और मशन LiFE का आधार भी
— "असतत उपभोग इस प्राकृ तक संतुलन म व्यवधान उत्पन्न करता है।"

प रयोजना काय — पृष्ठ 268

Page 40 of 49

Page 42

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

प रयोजना

प रयोजना काय

प्र.1 पृथ्वी के आकार के सामान दो काल्प नक ग्रह पर वचार क जए जनका अपना वायुमंडल है। मान ली जए क
एक ग्रह पूणरूपेण महासागर से आ ा दत है और दूसरा पूणरूपेण स्थल से। यह जानते हुए क सूय ुव क
तुलना म भूमध्यरेखा को अ धक गम करता है, बताइए क पृथ्वी पर उप स्थत स्थल और समुद्र के संयोजन क
तुलना म इन ग्रह पर पवन के पैटन कस प्रकार भन्न ह गे?

दोन ग्रह पर भूमध्य रेखा से ुव तक का महान प रसंचरण बना रहेगा, क्य क वह अक्षांश और ग्रह के घूणन से बनता है।
जो समाप्त हो जाएगा वह है स्थल और समुद्र के साथ-साथ होने पर नभर हर प रघटना — समुद्र समीर, स्थल समीर और
सबसे बढ़कर मानसून।

पूणतः महासागरीय ग्रह पूणतः स्थलीय ग्रह वास्त वक पृथ्वी

वायुद ाब पि याँ और उपिस्थत — गह के चारों ओर उपिस्थत — परंत ु कही ं अिधक पचंड, उप स्थत, परंतु महा प से
ग हीय पवन सुचारु, अखंिडत पि याँ क्योंिक स्थल शीघ गम और ठं डा होता टू ट -फूट
है

दै िनक और ऋतु- बहतु कम — जल की ऊष्मा-धािरता बहतु अिधक — स्थल की ऊष्मा- बीच का — तट मंद, भीतरी
आधािरत ताप- िवशाल है और वह ऊष्मा संिचत धािरता कम है, इसिलए वह शीघ गम भाग चरम
पिरवतन रखता है और ठं डा होता है

स्थल और समुद ी नही ं — कोई तट है ही नही ं नही ं — कोई समुद है ही नही ं सभी तट पर उप स्थत
समीर

मानसून नही ं नही ं उप स्थत — ग्रीष्म म स्थल के
समुद्र से तेज़ गम होने से
चलता है

जल चक्र और वष सवत्र पचुर वाष्पन और वष वाष्पन का ोत लगभग शून्य — एक असमान; तट आद्र, भीतरी
शुष्क , धूल भरा मरुस्थली गह भाग शुष्क

महासागरीय धाराएँ पबल और अखंिडत — रोकने या िबलकु ल नही ं घूणन से मुड़कर भंवर बनत
मोड़ ने वाला कोई महा ीप नही ं और महा प से अवरुद्ध

Page 41 of 49

Page 43

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

तक:

दोन ग्रह पर क्या बचेगा। भूमध्य रेखा और ध्रुव के बीच असमान ऊष्मण अब भी भूमध्यरेखीय नम्न और
उपोष्ण उच्च दाब प याँ बनाएगा, और ग्रह का घूणन अब भी पवन को वक्षे पत करेगा — उत्तरी गोलाध म दाईं
ओर, द क्षणी म बाईं ओर। इस लए ग्रहीय पवन दोन पर ह गी।
क्या लुप्त हो जाएगा। अध्याय कहता है क स्थानीय पवन तथा स्थल–समुद्र समीर "भू म और जल का
असमान ऊष्मण" से उत्पन्न होते ह। दोन म से एक हटा द जए तो क्रया व ध के पास काम करने को कुछ बचता
ही नह । भारत का द क्षण-प श्चम मानसून एक वशाल ऋतुगत समुद्र समीर ही है — इस लए पूणतः
महासागरीय या पूणतः स्थलीय ग्रह पर मानसून होगा ही नह ।
स्थलीय ग्रह अ धक तूफ़ानी क्य । स्थल क ऊष्मा-धा रता जल से बहुत कम है। वह दन म तीव्रता से गम और
रात म तेज़ी से ठं डा होता है, इस लए दाब-अंतर शीघ्र बनते ह और पवन प्रबल तथा झ केदार होती ह — वषा के
तूफ़ान नह , धूल-भरी आँ धयाँ, क्य क वा ष्पत होने को जल ही नह है।
महासागरीय ग्रह शांत पर अ धक आद्र क्य । जल ताप-प रवतन का प्र तरोध करता है, इस लए दाब-प्रवणता
धीरे बनती है और पवन अ धक स्थर रहती है। कतु वाष्पन सवत्र होता है, इस लए बादल और वषा प्रचुर होते ह
और धाराएँ पूरे ग्रह के चार ओर अखं डत बहती ह।

लखने योग्य नमूना नष्कष: " कसी भी घूणन करते और गम होते ग्रह पर अक्षांश और घूणन ग्रहीय पवन-प याँ
बना दे ते ह। स्थल और समुद्र का वरोध प्रादे शक और स्थानीय पवन बनाता है। पृथ्वी पर दोन ह, इसी लए तीन म
से उसक पवन-प्रणाली सबसे व वध है।"

प्र.2 कोई भी ऐसा एक भोजन चु नए जो आपने कुछ समय पूव ही खाया हो (ये कुछ भी हो सकता है, उदाहरण के
लए, रोट और दाल, चावल और सांभर, इडली और चटनी इत्या द)। इस भोजन के प्रत्येक महत्त्वपूण घटक हेतु
नम्न ल खत को ात करके व्याख्या क जए — (i) उसम उप स्थत काबन मूल रूप से प्रकाश सं ेषण ारा
वायु क काबन डाइऑक्साइड म कैसे आया, (ii) वायुमंडल से नाइ ोजन मृदा म कैसे आई (उदाहरण के लए,
जीवाणु ारा अथवा हाबर–बॉश प्र क्रया ारा और उवरक ारा) और फर पुन: पादप म कैसे पहुँच गई। साथ
ही, अन्य मानवीय ग त व धय क सूची बनाइए जो भोजन के उत्पादन या पकाने म स म्म लत होती ह और जो
वातावरण म अ त रक्त काबन डाइऑक्साइड अथवा नाइ ोजन को बढ़ाती ह।

व ध: अपना भोजन चु नए, उसके मुख्य घटक सूचीबद्ध क जए, और प्रत्येक के लए दो पथ खो जए — काबन का पथ (वायु →
पत्ती → आपक थाली) और नाइट्रोजन का पथ (वायु → मृदा → जड़ → प्रोट न → आपक थाली)। फर इस पूरी यात्रा म जला
ईंधन और प्रयुक्त उवरक सूचीबद्ध क जए।
नमूना उत्तर — रोट और दाल का भोजन

Page 42 of 49

Page 44

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

घटक (I) इसका काबन कहाँ से आया (II) इसक नाइ ोजन कहाँ से आई

रोटी (गेहू)ँ गेहू ँ की पित्त यों ने रंध ों से वायु की CO2 ली और सूय के गेहू ँ फलीदार नही ं है, इसिलए िकसान यूिरया डालता है। वह
पकाश तथा जल की सहायता से पकाश संश्ले षण ारा यूिरया वायुमंडलीय N2 से हाबर –बॉश पि या ारा बना था।
क्र

ग्लूक ोस बनाया। यह ग्लूक ोस दाने में मंड (स्टाच) के रूप मृद ा में वह अमोिनया बनती है, नाइटीकरण जीवाणु उसे नाइटेट
में संिचत हुआ। पीसने पर आटा बना; पत्येक रोटी का में बदलते है,ं और गेहू ँ की जड़ उस नाइटेट का स्वांगीकरण कर
काबन वायुमंडलीय काबन ही है। दाने के ग्लूटेन पोटीन बनाती है।

दाल वही पकाश संश्ले षी माग — वायु की CO2 बीज का दलहन फलीदार है। इसकी जड़ गंिथयों में रहने वाला
(अरहर / काब हाइडेट बन गई। राइजोिबयम वायु की N2 को सीधे अमोिनया में िस्थर कर दे ता
मूँग — है, िजससे पादप वह पोटीन बनाता है जो दाल को पोटीनयुक्त
दलहन) भोजन बनाती है। उवरक की आवश्यकता कम या नही ं पड़ ती।

तेल / घी सरसों या मूँगफली के पादप (या गाय ारा खाई घास ) ारा वसा में नाइटोजन लगभग नही ं होती; फसल की नाइटोजन ऊपर
िस्थर िकया गया काबन, वसा के रूप में संिचत। बताए अनुस ार मृद ा के नाइटेट से आई।

नमक और नमक खिनज है, जैिवक नही ं — इसका कोई काबन पथ —
मसाले नही ं। मसाले पादप-माग का अनुस रण करते है।
ं

इस भोजन से जुड़ी वे मानवीय ग त व धयाँ जो वातावरण म अ त रक्त CO2 या नाइ ोजन बढ़ाती ह:

उवरक बनाना। हाबर–बॉश प्र क्रया "अत्य धक ऊजा-खपत" वाली है (वै श्वक ऊजा का लगभग 1 – 2 प्र तशत) और वह ऊजा
अ धकतर जीवाश्म ईंधन से आती है — इस लए यू रया खेत तक पहुँचने से पहले ही CO2 क लागत ढो लाता है।
जुताई, बुआई और कटाई। डीज़ल से चलने वाले ट्रै क्टर और ेशर ईंधन जलाते ह।
सचाई। वद्युत या डीज़ल पंप, और भारत क वद्युत का बड़ा भाग अब भी जीवाश्म ईंधन से आता है।
उवरक का बहाव। अ त रक्त नाइट्रे ट न दय और झील म पहुँचकर सुपोषण उत्पन्न करता है; मृदा क कुछ नाइट्रोजन
नाइट्रोजन ऑक्साइड के रूप म वायु म नकल जाती है।
प रवहन और पसाई। मंडी तक ट्रक, फर चक्क और दुकान; चक्क क मोटर भी वद्युत खपाती है।
पकाना। LPG या लकड़ी — दोन CO2 छोड़ते ह। प्रेशर कुकर ईंधन घटाता है और इस प्रकार उत्सजन भी घटाता है।
पै कग और अप शष्ट। प्ला स्टक क थै लयाँ पेट्रो लयम से बनती ह; कूड़े म सड़ता भोजन मीथेन छोड़ता है।

अंत म लखने योग्य नष्कष: "मेरी रोट का काबन कुछ महीने पहले वायु म था; उसे पकाने के लए छोड़ा गया
काबन लाख वष से धरती म दबा था।" पहला द्रुत चक्र का स्वयं को संतु लत करना है; दूसरा एक एकतरफ़ा वृ द्ध
है। यही अंतर पूरी जलवायु समस्या को एक वाक्य म समेट दे ता है।

Page 43 of 49

Page 45

as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
भारतीय मौसम वभाग (IMD, https://mausam.imd. gov.in/) या समाचार पत्र के आँकड़ का उपयोग
करके अपने शहर या जले के लए दो दशक जैसे 1980 के दशक और 2020 के दशक म 5eवष m के दौरान हुई
प्र.3

m a s
o (जून– सतंबर अथवा स्थानीय ऋतु) का औसत ात क जए। अवलोकन
मानसून.ीcवषा
a gl क जए क भारी वषा
a s emmm) वाले दन क संख्या समय के साथ बढ़ रही है, घट रही है या स्थर है। इसे अरब सागर के बढ़ते
gl तापमान तथा भू म के उपयोग म हुए प रवतन (वन का खेत और शहर म बदलना) से कैसे जोड़ा जा सकता है,
(>50
a
जैसा क अध्याय म चचा क गई है?

co m
e m . ag
l as

a g
संस्करण म अंतर: यह प रयोजना अंग्रेज़ी संस्करण Exploration (पृष्ठ 268) म अधूरी छपी है — उसक

co m
m.
आरं भक तीन पं क्तयाँ कट गई ह और वाक्य शब्द के बीच से आरंभ होता है। पूरा प्रश्न केवल इसी हद संस्करण म
उपलब्ध है, जसम IMD का पता भी दया गया है।
m as e
.co a g l
se m
a
व ध — इस प रयोजना को सही ढं ग से कैसे कर:

g l
a 1. अपना कद्र न त क जए। अपने शहर या जले का नकटतम IMD कद्र चु नए, ता क तुलना एक ही स्थान क हो।
s
2. अपनी ऋतु न त क जए। भारत के अ धकांश भाग के लए जून – सतंबर ली जए। त मलनाडु के लए उत्तर-पूव मानसून,
m a
.co agl
अथात् अक्टू बर – दसंबर ली जए।

a s em
glसे अथवा पुस्तकालय म पुराने समाचार पत्र से।
3. पाँच-पाँच वष के दो खंड एकत्र क जए, जैसे 1981 – 1985 और 2019 – 2023 —

a
https://mausam.imd.gov.in/
4. दो अलग-अलग बात ल खए। (क) ऋतु क कुल वषा mm म। (ख) उन दन क संख्या जनम वषा 50 mm से अ धक
हुई। ये दोन वपरीत दशाओं म जा सकते ह, और यही इस प रयोजना का मम है।
co m
m .
ase
5. प्रत्येक खंड का औसत नका लए और दोन को आमने-सामने र खए।
m l
.co a g
a s emरा श 1981 – 1985 का औसत 2019 – 2023 का औसत प रवतन

agl
कु ल मानसूनी वष (mm) (भिरए ) (भिरए ) (+ / – …%)

se m
com g l a
. a
> 50 mm वष वाले िदनों की संख्या (भिरए ) (भिरए ) (+ / – … िदन)

a s e) m
agl
ऋतु में शुष्क िदनों की संख्या (भिरए (भिरए ) (+ / – … िदन)

co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
m as e
.co


a g l Page 44 of 49

Page 46

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

अपने प रणाम को अध्याय से कैसे जोड़:

य द भारी वषा वाले दन बढ़े ह जब क ऋतु क कुल वषा म वशेष अंतर नह आया, तो यही वह पैटन है
जसक अध्याय भ वष्यवाणी करता है: गम अरब सागर से "समुद्र से अ धक वाष्पीकरण होता है", गम वायु
अ धक नमी धारण करती है, और वही जल कम परंतु अ धक प्रचंड झ ड़य म आता है — वषा के दन कम,
प्रत्येक दन अ धक भारी।
य द आपके शहर म बाढ़ वषा क तुलना म अ धक तेज़ी से बढ़ है, तो भू म-उपयोग दे खए। वन और खेत
वषा को रसने दे ते ह; कंक्र ट और डामर नह । "आक स्मक तीव्र वषा से सतही जल का अपवाह बढ़ जाता है …
और जल का कम रसाव भूजल के पुनभरण को कम कर दे ता है।"
य द आपका शहर पहले से गम भी हुआ है, तो उसम शहरी ऊष्मा प प्रभाव जो ड़ए — कंक्र ट और डामर
से गम हुए शहर वायु के ऊपर उठने को बल दे सकते ह, जससे स्थानीय मूसलाधार वषा भड़कती है।
अपनी सीमाओं के वषय म ईमानदार र हए। पाँच वष एक छोटा प्र तदश है और मौसम स्वभाव से
प रवतनशील है। स्पष्ट ल खए क आपका प रणाम एक प्रवृ त्त का संकेत है, प्रमाण नह । वै ा नक अ न श्चतता
बताता है; वह भी उत्तर का ही भाग है।

प्रस्तु त का सुझाव: दोन खंड को दं ड आलेख के रूप म बनाइए — x-अक्ष पर वष, y-अक्ष पर mm म वषा —
और >50 mm वाले दन को दूसरे रंग से दशाइए। जो प्रवृ त्त सारणी म क ठनाई से दखती है, वह आलेख म उभर
आती है।

खोज जारी है… — पृष्ठ 268
आगे ले चलने के लए एक खुला प्रश्न

खोज जारी है …

प्र.1 नए उपकरण वै ा नक को इस ग्रह का वास्त वक समय म नरीक्षण करने, जलवायु, पा रतंत्र तथा मानवीय
ग त व धय के बीच के छपे हुए संबंध को उजागर करने म सहायता करते ह। ये उपकरण बदलते ग्रह के वषय म
कौन-सी नई खोज को उजागर करगे और वे भूमंडलीय ऊष्मण एवं जलवायु प रवतन को समझने क हमारी
क्षमता को कैसे बढ़ाएँगे?

सबसे बड़ा प रवतन यह है क अब पृथ्वी का कभी-कभार प्र तचयन नह , ब ल्क नरंतर नरीक्षण हो रहा है — इस लए
वै ा नक कसी प रवतन को घ टत होते समय दे ख सकते ह, वष बाद नह ।

Page 45 of 49

Page 47

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

उपकरण अब क्या दे ख सकता है इससे क्या उजागर हो सकता है

पथ्ृ वी-िनरीक्षण उपग ह समुद -सतह का ताप, िहम का िवस्तार , वन आवरण, कौन-से व शष्ट ोत मीथेन छोड़ रहे ह; कोई हमानी
मृद ा की नमी, CO2 और CH4 के पवाह — पूरे गह कतनी तेज़ी से पतली हो रही है; आग के बाद वन
पर , हर कु छ िदनों में कतनी शीघ्रता से उबरता है

महासागरीय बॉय अनेक गहराइयों पर ताप, लवणता और घुल ी CO2, महासागर क ऊष्मा और काबन कतनी गहराई तक
(buoys) और प्लव स्वतः दज होकर सं चत हो रहे ह, और धाराएँ कस प्रकार खसक रही ह

युिग्मत कं प्यूटर मॉडल वायुमंडल , महासागर , स्थल और िहम का एक साथ बेहतर ऋतुगत पूवानुमान, और यह स्पष्ट चत्र क तापन
अनुक रण, जैस ा IITM पुणे के वै ािनक भारतीय भारत भर म मानसून वषा को कैसे बदलेगा
मानसून के िलए करते है ं

िहम-क्रोड, वृक्ष-वलय, लाखों वष पीछे तक की CO2 और ताप क्या आज क वृ द्ध सचमुच "मानव सभ्यता के इ तहास
अवसाद म असामान्य" है — और वह है

स्वचािलत मौसम कें द वष , ताप और वायु गुणवत्त ा के सघन स्थानीय मापन शहरी ऊष्मा प और बाढ़-जो खम के गली-स्तर के
और नागिरक आँक ड़े मान चत्र

बेहतर नरीक्षण से व ान क्य बदलता है, केवल रकॉड नह :

यह पुनभरण को उजागर करता है। हम–ए ल्बडो, पमा ॉस्ट क मीथेन और कमज़ोर पड़ता महासागरीय
काबन अवशोषक जैसे लूप ही तय करते ह क तापन संयत रहेगा या बेक़ाबू हो जाएगा। कसी पुनभरण को एक
पाठ से नह मापा जा सकता; उसके लए पूरे तंत्र को एक साथ दे खना पड़ता है।
यह "जलवायु" को स्थानीय बना दे ता है। 1.5 °C का वै श्वक औसत वदभ के कसान को कुछ नह बताता।
उच्च वभेदन वाले मॉडल बता सकते ह क उस जले क बुआई क त थ का क्या होगा।
यह हा न और प्र त क्रया के बीच का अंतराल घटाता है। मीथेन के रसाव, अवैध कटाई या समुद्र ऊष्मा-
लहर का वास्त वक समय म पता चलने का अथ है क उस पर अगले वष क रपोट म नह , इसी सप्ताह कारवाई
हो सकती है।
यह व ान को जाँचने योग्य बनाता है। खुले उपग्रह आँकड़ से कोई भी कसी दे श के उत्सजन-दाव क पु ष्ट
कर सकता है — और यही पे रस समझौते जैसे समझौत को लागू करने योग्य बनाता है।

आपका अपना उत्तर: यहाँ कोई एक "सही" उत्तर नह है — यह प्रश्न तक करने के लए है। कोई एक उपकरण
चु नए, बताइए क वह कस अनुत्त रत प्रश्न को सुलझा सकता है, और उस क्रया व ध क व्याख्या क जए जसे वह
दे खने दे गा। और पुस्तक क अं तम पं क्त याद र खए — "संभव है क आने वाली नई खोज कसी ऐसे व्य क्त ारा
क जाएँ जो वतमान म व ान सीख रहा है — ठ क आपक भाँ त!"

Page 46 of 49

Page 48

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

अध्याय — एक नज़र म
पृथ्वी परस्पर क्रया करने वाले पाँच मंडल का एक तंत्र है — भूमंडल (च ान, मृदा, आंत रक भाग), जलमंडल (द्रव जल),
हममंडल ( हम और बफ), वायुमंडल (वायु) और जैवमंडल (सभी सजीव)। एक मंडल म वक्षोभ अन्य मंडल म प रवतन के
रूप म प्रकट होता है।
सौर व करण वद्युत चुंबक य तरंग के रूप म आता है जो नवात म 3 × 108 m s–1 क चाल से चलती ह। सूय क लगभग
99 प्र तशत ऊजा UV, दृश्य और IR परास म होती है। सौर स्थरांक 1.4 kW m–2 (1400 J s–1 m–2) है; अवशोषण और
प्रक णन के बाद सतह पर अ धकतम सूयातप लगभग 1 kW m–2 रह जाता है।
ऊष्मण असमान होता है — ए ल्बडो के कारण ( हम 0.80 – 0.90 पराव तत करती है, काली मृदा और महासागरीय जल
बहुत कम), अक्षांश के कारण (ध्रुव क ओर वही करण-पुंज अ धक क्षेत्रफल पर फैल जाता है) और पृथ्वी क धुरी के झुकाव
के कारण।
वायुमंडल संस्त रत है। मौसम क्षोभमंडल (0 – 12 km, ऊँचाई के साथ ताप ~6.5 °C km–1 घटता है) म बनता है; ओजोन
परत समतापमंडल (12 – 50 km, ऊँचाई के साथ ताप बढ़ता है, इस लए यह परत शांत रहती है) म स्थत है।
वायुमंडल जीवन क दो प्रकार से रक्षा करता है — आती हुई हा नकारक पराबगनी करण को ओजोन परत रोक लेती है, और
बाहर जाती अवरक्त ऊष्मा को ह रतगृह गैस (CO2, CH4, जलवाष्प) अवशो षत कर लेती ह।
असमान ऊष्मण से दाब का अंतर बनता है, और यही अंतर स्थानीय पवन (घाट समीर, पवतीय समीर), ग्रहीय पवन तथा
महासागरीय धाराएँ उत्पन्न करता है, जन्ह पृथ्वी का घूणन वक्षे पत कर वृत्ताकार भंवर (gyres) बना दे ता है।
जैव-भू रासाय नक चक्र — जल, काबन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन — म द्रव्य अजै वक और जै वक घटक के बीच एक
बंद लूप म घूमता है, इस लए वही परमाणु बार-बार प्रयोग होते रहते ह।
आज सबसे बड़ा वक्षोभ मानवीय ग त व धयाँ ह: जीवाश्म ईंधन के दहन से वायुमंडलीय CO2 वष 1960 के लगभग 315
ppm से बढ़कर आज लगभग 420 ppm हो गई है, उवरक का बहाव सुपोषण उत्पन्न करता है, और वनोन्मूलन एक साथ
प्रकाश सं ेषण, वाष्पोत्सजन तथा मृदा-बंधन तीन को घटा दे ता है।

Page 47 of 49

Page 49

कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन AglaSem · NCERT Solutions

त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द अथ अध्याय से मान / उदाहरण कहाँ आया
है

सौर स्थरांक वायुम ंडल के ऊपरी भाग पर सूय की िकरणों के लंबवत 1.4 kW m–2 = 1400 J s–1 m–2 अनुभाग
पित इकाई क्षेत्र पर पित इकाई समय में पाप्त सौर ऊज 13.1
की औसत मात्रा

सूयातप पथ्ृ वी की सतह पर वास्तव में पहच
ु ँ ने वाला सौर स्वच्छ आकाश म लगभग 1 kW m–2 अनुभाग
िविकरण 13.1

ए ल्बडो िकसी सतह ारा परावितत सौर िविकरण का अंश हम 0.80 – 0.90; बफ 0.50 – 0.70; ता लका 13.1
(लै िटन albedo = धवलता) संद लत च ान 0.25 – 0.30

क्षोभमंडल सबसे िनचली परत, जो पथ्ृ वी की सतह से नीचे से गम 0 – 12 km; ऊँचाई के साथ ताप ता लका 13.2
होती है; लगभग सारा मौसम यही ं बनता है लगभग 6.5 °C km–1 घटता है

समतापमंडल यहाँ ओजोन परत है; UV अवशोषण से यह गम होती है, 12 – 50 km ता लका 13.2
इसिलए ऊँचाई के साथ ताप बढ़ ता है और परत शांत
रहती है

ह रतगृह गैस गम पथ्ृ वी ारा पुनः िविकिरत अवरक्त ऊष्मा को CO2, CH4, जलवाष्प अनुभाग
अवशोिषत कर उसे अंतिरक्ष में जाने से रोकने वाली 13.1.3
गैसे ं

घाट समीर िदन की पवन — धूप वाली ढलान गम होती है, वायु शमला, दे हरादून और अन्य हमालयी चत्र 13.8
ऊपर उठती है, ठं डी वायु घाटी से ढलान पर ऊपर घा टयाँ (क)
चढ़ ती है

पवतीय समीर रात की पवन — ढलान शीघ ठं डी होती है, सघन शमला, दे हरादून और अन्य हमालयी चत्र 13.8
शीतल वायु नीचे घाटी में उतरती है घा टयाँ (ख)

वायुदाब प याँ भूम ध्य रे खा और धु वों के बीच असमान ऊष्मण से बनी भूमध्यरेखीय नम्न, उपोष्ण उच्च (30°), चत्र 13.9
उच्च और िनम्न दाब की पि याँ उपध्रुवीय नम्न (60°), ध्रुवीय उच्च (ख)
(90°)

भंवर (gyre) पथ्ृ वी के घूणन से िवक्षेिपत जल का िवशाल वृत्त ाकार उत्तरी गोलाध म घड़ी क दशा म, चत्र 13.10
पवाह पैटन द क्षणी म वपरीत दशा म (क)

जैव-भू रासाय नक चक्र अजैिवक और जैिवक घटकों के मध्य द व्य तथा ऊज जल, काबन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन अनुभाग
का चक्रीय संचलन चक्र 13.3

नाइट्रोजन स्थरीकरण अिक्रयाशील N2 को अमोिनया में बदलना, िजसे सजीव जड़ ग्रं थय म राइजो बयम, मृदा म अनुभाग
उपयोग कर सकें एजोटोबैक्टर, त ड़त, हाबर–बॉश प्र क्रया 13.3.3

नाइट्र करण / NH3 → NO2– → NO3–, तथा नाइटेट का पुनः N2 नाइट्रोसोमोनास, नाइट्रोबैक्टर; चत्र 13.15
वनाइट्र करण स्यूडोमोनास
गैस में बदलना

Page 48 of 49

Page 50

as e
कक्षा 9 व ान अध्याय 13 पृथ्वी एक तंत्र — ऊजा, द्रव्य और जीवन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

शब्द अथ अध्याय से मान / उदाहरण
. comकहाँ आया

e m है
m l as
.co अितिरक्त नाइटेट से शैवाल पस्फु टन, जल में a g
सुपोषण
a s em चत्र 13.17 अनुभाग

agl
(eutrophication) ऑक्सीजन की कमी और मछिलयों की म ृत्यु 13.4

क लग वक्र वष 1960 से वायुम ंडलीय CO2 का ग ाफ; आरीनुम ा 315 ppm (1960) → लगभग 420 चत्र 13.14

m
.co ag
दाँते उत्तरी गोलाध की वािषक वनस्पित वृिद्ध है ं ppm (2025)

s
कं क्रीट, ईंट और डामर ऊष्मा संaिचतeकरmपुनः
agशहरl आस-पास के गामीण
शहरी ऊष्मा प प्रभाव शहर म वातानुकूलन क माँग बढ़ना ज ासा-सूत्र,
िविकिरत करते है,ं इसिलए पृष्ठ 257
क्षेत्र ों से गम रहते है ं

co m
em.
m l as
m .co a g
l a se
a g
m a s
m .co agl
l a se
a g

co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a
se m
com g l a
m . a
ase
agl

co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

com
m .
m as e
.co


a g l Page 49 of 49

Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 9
TypeSolution
Pages50
Languagehindi
Updated19 Sep 2026