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NCERT
SOLUTIONS
CLASS - 11th
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Book : Vishwa Itihaas Ke Kuch Vishay Ncert Solutions | Chapter - 1 Social Science History
Class : 11th
Subject : History
Chapter : 1
Chapter Name : समय क शु आत से
Q1 प ृ ठ-13 पर दये गए सकारा मक तपिु ट यव था (Positive Feedback Machanism) को दशाने वाले
आरे ख को दे खए। या आप उन नवेश (Inputs) क सच
ू ी दे सकते ह जो औजार के नमाण म सहायक हुए?
औजार के नमाण से कन- कन याओं के बल मला?
Answer. सकारा मक तपिु ट यव था (Positive Feedback Machanism) वां छत प रणाम क ाि त के
उ दे य को पण
ू करती है । इसके अनस
ु ार औजार के नमाण म सहायक हुए नवेश न न ल खत ह-
1-मि त क के आकार और उसक मता म व ृ ध हुई।
2-आँख से नगरानी, भोजन और शकार क तलाश म लंबी दरू तक जाने का बल मला।
3-औजार के इ तेमाल, चीज और ब च को स हालने के लए हाथ मु त हुए।
4-सीधे खड़े होकर चलना।
औजार का नमाण मानव स यता के प रवतनकार ब दओ ु ं म से एक है । सबसे पहले आ े लो पथेकस ने
औजार का इ तेमाल कया था, िजसके सा य इ थयो पया के परु ा- थल से पट हुए ह। औज़ार को बनाने के
तर के वष तक वह बने रहे । शु आती औज़ार बेडौल तथा भ डे हुआ करते थे। वकास के म म मानव ने उनको
धार दे ना और पा लश करना भी सीख लया। इसके प रणाम व प मानव वकास क न न याओं को बल
मला
शु आत म औजार का योग सरु ा और शकार तक सी मत था।
वन प तय और फसल क पहचान के बाद कृ ष क तरफ उ मख ु हुए मानव को औजार से वशेष ो साहन
मला। औजार का योग ायः सीधे खड़े होकर करना पड़ता था इस लए इससे इस मता का भी मक वकास
हुआ |औजार के वकास से मानव क दै नक जीवन शैल म वशेष प रवतन आया। इसम आ य बनाकर रहने से
लेकर खान-पान और वेश-भष ू ा, बतन बनाने के नवीन साधन के वकास के प म समझा जा सकता है ।
Q2 मानव और लंगरू तथा वानर जैसे तनपाइय के यवहार तथा शर र रचना म कुछ समानताए पायी जाती ह।
इससे यह संकेत ह मलता है क संभवतः मानव का मक वकास वानर से हुआ।
(क) यवहार और
(ख) शर र रचना शीषक के अंतगत दो अलग-अलग त भ बनाइये और उन समानताओं क सच ू ी द िजये।
दोन के बीच पाये जाने वाले उन अंतर का भी उ लेख क िजये िज ह आप मह वपण
ू समझते ह?
Answer. मानव और लंगरू तथा वानर तीन ह जा तयाँ तनपायी ा णय क ाइमेट ेणी से वक सत हुई ह।
इस लए नि चत प से इनम यवहार तथा शर र रचना म समानताएं और वभेद प रल त होते ह। इसे न न
ब दओ
ु ं म समझा जा सकता है –
(क) यवहार के तर पर – तनपायी जीव क ाइमेट ेणी आगे इसके दो उपसमह ू बने ‘होमोनाइड और
हो म नड’ होमोनोइड से वानर और होमो नड से मानव वक सत हुए। होमो नड का मि त क होमोनोइड क
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तलु ना म बड़ा और वक सत था इस लए एक ह ेणी के जीव होने के बाद भी इनका वकास अलग अलग तर के से
हुआ। होमो नड सीधे खड़े होकर चलते थे, औजार से शकार करते थे यंू क इनके हाथ क बनावट अलग थी
जब क होमोनोइड चौपाये थे और अ सर पेड़ पर रहते थे। इन ा णय के नवजात शशु ायः इनक गोद म होते
या शर र से चपके रहते थे।
(ख) शर र रचना के तर पर – होमोनोइड चौपाये थे उनका शर र छोटा और शर र का अगला ह सा लचकदार था।
होमो नड सीधे खड़े होकर दो पैर पर चलते थे इससे उनके पास दो हाथ खाल हुए साथ ह चलने म उतनी ऊजा
ख म नह ं होती थी। इसके प रणाम व प आगे होमो नड ने औज़ार बनाना, शकार क तलाश म दरू तक जाना
और खेती करना आ य बनाने जैसी कलाएं सीखीं. इन जा तय म हाथ क पकड़ का तर का लगभग समान था
फर भी उँ ग लय के वकास से होमो नड क पकड़ यादा सश त थी। दोन ह अपने पछले पैर पर खड़े हो सकते
थे। इन ा णय के शर र पर ायः बाल होते थे।
ाइमेट ेणी के दो पथ
ृ क उपसमहू से वक सत जीव होने के प रणाम व प इनम यवहार और शर र रचना के
तर पर भ नताएँ भी ह। इ हे न न ब दओ ु ं म समझा जा सकता है –
शार रक गठन और मि त क का वकास दोन ह जीव म अलग तर के हुआ|
मानव क शार रक मताओं का वकास सीधे खड़े होकर चलने के के म म हुआ जब क वानर और लंगरू अपने
पछले पैर पर खड़े तो हो सकते थे ले कन यादा समय तक नह ।ं
मि त क के वकास और आकार के प रणाम व प मानव ने शकार करने औज़ार बनाने क कलाओं का
आ व कार कया जब क वानर और लंगरू जंगल म ह रहे ।
दोन ा णय के चहरे और दाँत क बनावट म अंतर था।
Q3 मानव उ भव के े ीय नरं तरता मॉडल के प म दये गए तक पर चचा क िजये। या आपके वचार से यह
मॉडल परु ाताि वक सा य का यिु तसंगत प ट करण दे ता है ?
Answer. मानव उ भव के े ीय नरं तरता और त थापन मॉडल उनक व व के व वध भाग म मौजद ू गी के
आधार पर उं नके वकास क पथ ृ क अवधारणाएं सामने रखते ह। े ीय नरं तरता मॉडल मानव का उ भव अनेक
े म हुआ जब क त थापन मॉडल मानव उ भव का एक ह थान, अ का को वीकार करता है । मानव क
व वध जा तय के व प और वकास को आधार बनाकर े ीय नरं तरता मॉडल क अवधारणा को बल मलता
है । अलग-अलग े म रहने वाल व वध जा तय क नजी वशेषताएँ उनके नयत पव ू ज से वक सत हुई थी।
इसके उलट त थापन मॉडल मानव के सभी आ द प के सि म लत पा तरण म आधु नक मानव के उ भव
क बात को मानता है ।
परु ाताि वक सा य े ीय नरं तरता मॉडल क तलु ना म त थापन मॉडल का यिु तसंगत प ट करण दे ता है ।
Q4 इनम से कौन सी या के सा य व माण परु ाताि वक अ भलेख म सवा धक मलते ह :
(क) सं हण, (ख) औज़ार बनाना, (ग) आग का योग।
Answer. सं हण, औज़ार बनाना और आग का योग इनम से औज़ार बनाने के सा य और परु ाताि वक
अ भलेख सवा धक मलते ह। परु ा- थल से मले सा य के अनस
ु ार आ े लो पथेकस (56 लाख वष पव
ू ) ने
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सव थम औज़ार का योग कया था। इसके माण इ थयो पया से मले ह। औज़ार क उपयो गता नि चत प
से सं हण और आग के योग से कह ं अ धक थी। सरु ा और शकार के उ दे य से सभी अपने अपने तर पर
औज़ार बनाते और उसका योग करते थे। शु आती औज़ार भ डे, बेडौल और खरु दरु े थे िजससे इनके योग सी मत
थे। बाद म मानव ने कृ ष और आवास नमाण के म म अनेक औज़ार वक सत कए। इसके अ ययन क सु वधा
और सा य क अ धकता के अनु प इ हे परु ा पाषाणकाल, म य पाषाणकाल और नव पाषाणकाल म वभ त
कया गया है । जब क अि न के योग के सा य आज से 14 लाख वष परु ाने ह। सं हण क समझ मानव म इन
दोन के बाद आई ।
Q5 भाषा के योग से (क) शकार करने और (ख) आ य बनाने के काम मे कतनी मदद मल होगी? इस पर
चचा क िजये। इन याकलाप के लए वचार-स ेषण के अ य कन तर क का इ तेमाल कया जा सकता था?
Answer. आज भाषा के मु यतः दो प चा लत ह – मौ खक व ल खत। ले कन भाषा के आधु नक व प से
इसके उ भव और वकास क या ा काफ रोचक है । नि चत प से मानव के वकास से जड़ ु ी हुई है । इस संदभ म
होमोहै बलस थम ऐसा उपसमह ू था जो बोलने म समथ था इस आधार पर भाषा का वकास संभवतः 20 लाख वष
परु ाना माना जा सकता है । इसके पहले भाषा के उ भव पर वचार करना ज र है । मानव मि त क कला के त
शु आत से ह आकृ ट रहा है । अनेक परु ा- थल पर पाई गई च का रयाँ इस बात का माण ह, जो लगभग 30 से
10 लाख वष परु ानी ह। इन च का रय म व वध जानवर और प य के च अं कत ह। शकार उस समय
मानव क मौ लक आव यकता थी। इस लए ये भ च ायः शकार क व वध तकनी कय को समझने हे तु
पीढ़ दर पीढ़ योग म आए। कुछ व वान का मानना है क आगे ये च शकार म सफल होने के उ दे य से
र त- रवाज के प म बनाए जाने लगे।
भाषा के नमाण म व न तीक का संकलन और उनक यव था से वचार व नमय क या म नि चत प
से काफ व त लगा। इसके पहले अंग व छे प, गन ु गन
ु ाने जैसी याओं से मानव संपक साधा करता था। भाषा का
मौ खक प या बल ु ाने- बोलने क या का वकास नर-वानर से दे खने को मलता है । उ च रत भाषा के वकास
म कला क मह वपण ू भू मका थी। इसके बाद शकार करने के लए मानव समह ू ब ध होने लगा। इससे शकार क
संभावनाएं बढ़ ं और शकार करना सहज भी हो गया।
वकास के म म मानव शकार के लए दरू दरू तक जाने लगा और इसी दौरान उनसे वन प तय , पेड़ पौध और
मौसम के अपने अनमु ान के अनस
ु ार कृ ष क संभावनाएं वक सत क ।ं अब गफ
ु ा और पेड़ के अलावा उसे नयत
थान पर ककर फसल क दे ख-रे ख और कटाई के लए आ य क आव यता महसस ू हुई। प रणाम व प
शु आत म उसने पेड़ क टह नय और घास-फूस क झोप ड़यां बना आगे वह म ट क और फर प क ईट का
योग भी करने लगा। आ य- नमाण नि चत प से सि म लत और सामू हक या थी इसम भाषा का
अ नवायता को सहज ह समझा जा सकता है । अतः भाषा के उ च रत प के वकास और व तार से पहले आ य
और फर समाज नमाण क कया को बल मला।
Page : 28 , Block Name : सं ेप म नबंध ल खए
Q6 अ याय के अंत म दये गए येक कालानु म म से क ह ं दो घटनाओं को चु नये और यह बताइये क
इसका या मह व है ?
Answer. कलानु म-1 से –
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होमो इरे टस (18 लाख वष पव ू ) – होमो इरे टस के थम ा त अवशेष 18 लाख वष परु ाने ह। इनके उ भव के
माण अ का महा वीप म मलते ह जहां से यह यरू े शीय, जॉिजया, इ डोने शया, चीन और भारत म वक सत
हुए। होमो इरे टस से ता पय मनु य क उस जा त से है िजसने खड़े होकर चलना सीख लया था। परु ा-वै ा नक
होमो इरे टस को ह आग का थन ोयगकता मानते ह। इनका सबसे आधु नक अवशेष 70,000 वष परु ाना है ।
मानव वकास के म म और मानव- वकास को वानर और लंगरू से अलगाव से म म होमो इरे स को
मह वपण ू कड़ी के प म दे खा जाता रहा है ।
होमो-से पयंस (आधु नक मानव) 1.9 से 1.6 लाख वष पवू - होमो लै टन भाषा श द है िजसका अथ है – ‘मानव’।
होमो है बलस, होमो इरे टस और होमो-से पयंस या चंतनशील आधु नक मानव, इन सभी को उनक
व श टताओं के आधार पर पथ ृ क कया गया। होमो-से पयंस इनम से सबसे आधु नक और व श ट ह। ये जा त
मानव के सव म गण ु को द शत करती ह साथ ह मानव वकास के पथ ृ क चरण को भी। होमो-से पयंस आग
के योग से खाना बनाना, कपड़े बनाना, बात करना और सीधे खड़े होकर चलना जानते थे। आधु नक मानव इ ह ं
का वक सत प है
कालानु म –2 से
चू ह के इ तेमाल के बारे म सबसे पहला सा य :- ांस म ि थत लेजरे ट गफ
ु ा क द वार को 12/4 मीटर आकार
के एक नवास थान के साथ बनाया गया है यहाँ दो चू ह के साथ ह खा य पदाथ के सा य मले ह। इसी तरह
के या म चेसोवांजा और द णी अ का म वाट ांस म प थर के औजार के साथ ह आग म पकाई गई चकनी
म ट और जाल हुई ह डय के अवशेष चू हे के माण दे ते ह। भारत म चू हे का ाचीनतम सा य आं दे श
के कुनल
ू म ि थत बलासरु ाम से मले ह। चू हे मानव वारा आग का नयं त योग करने के योतक थे इंका
मलू योजन खा य पदाथ को पकाने म था। इसके साथ ह इसका योग जंगल जानवर से बचाव और औज़ार
नमाण म होता था
सलाई वाल सई ु का आ व कार :- सले हुए कपड़ ने मानव स यता को एक नया प दया। इनके सबसे पहले
माण 21,000 वष परु ाने ह। सई
ु का आ व कार इसी के आस- पास हुआ। इसके बाद रोयेदार जानवर क खाल से
कपड़े बनाने क कला का वकास हुआ। इसके साथ साथ अ य बार क ह थयार बनाने क तकनीक वक सत हु ।
कला के े म भी हाथी दाँत और लकड़ी-प थर आ द पर न काशी क कलाएं वक सत हु ।
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