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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा7
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 5: समांतर और प्र त े द रेखाएँ
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ग णत प्रकाश
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
106 – 126 18 55 हन्द
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
क ा 7 · ग णत · ग णत प्रकाश
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 5: समांतर और प्र त े द रेखाएँ
ग णत प्रकाश भाग-1 का अध्याय 5 यह दे खता है क एक समतल पर दो रेखाएँ कस प्रकार व्यवहार करती ह — या तो वे कसी एक बदु पर
प्र त े द करती ह, या फर वे कभी नह मलत और समांतर कहलाती ह। जब एक तीसरी रेखा, अथात तयक रेखा, कसी रेखा-युग्म को काटती है
तो आठ कोण बनते ह और उनके संबंध से हम केवल तक ारा यह तय कर सकते ह क वे दोन रेखाएँ समांतर ह या नह ।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
ग णत प्रकाश (क ा 7) 106 – 126
खं ड प्रश्न
18 55
माध्यम
हन्द
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 106
खंड 5.1 रेखा के पार
ग णत चचा
प्र.1 कागज का एक वगाकार टु कड़ा ली जए और इसे व भन्न प्रकार से मो ड़ए तथा इसे पुन: खोल ली जए। अब मोड़ने
से कागज पर बने मोड़ पर मापक व प सल का उपयोग करके रेखाएँ ख चए। आपको कागज पर व भन्न रेखाएँ
दखगी। रेखाओं के कसी भी युग्म को ली जए और एक-दूसरे के साथ उनका संबंध दे खए। क्या वे परस्पर मल
रही ह? क्या आपको लगता है क जो रेखाएँ कागज के अंदर नह मल रही ह, य द उन्ह कागज के बाहर तक
बढ़ाया जाए तो वे मलगी?
उत्तर
कुछ मोड़ के युग्म कागज के भीतर ही एक-दूसरे को काटते ह — वे रेखाएँ मलती ह। जो युग्म कागज के भीतर नह मलते, उनके
लए दो अलग-अलग तयाँ बनती ह।
य द दोन मोड़ का झुकाव भन्न है तो एक ओर उनके बीच क दूरी लगातार घटती जाती है। उन्ह कागज के बाहर तक बढ़ाने
पर वे अवश्य मलगी।
य द दोन मोड़ के बीच क दूरी हर जगह बलकुल समान रहती है (जैसे कागज को दो बार आधा-आधा मोड़ने से बने मोड़), तो
वे कतना भी बढ़ाने पर कभी नह मलगी। ऐसी रेखाएँ समांतर कहलाती ह।
ऐसा क्य होता है: एक तल क दो सरल रेखाएँ अ धक से अ धक एक ही बार कट सकती ह। अतः या तो वे पहले
ही कट चुक ह, या कागज के बाहर कह कटगी, या कभी नह कटगी। कभी न कटने क एक ही शत है — दोन का
झुकाव बलकुल एक जैसा हो, तब उनके बीच क दूरी सदै व समान बनी रहती है।
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स्वयं जाँ चए: एक मोड़ पर मापक र खए और उसे बना घुमाए दूसरे मोड़ क ओर खसकाइए। य द दोन मोड़ के
बीच क दूरी पूरे मापक पर समान रहती है तो वे कभी नह मलगी।
प्र.2 आइए, दे खते ह क क्या होता है जब दो रेखाएँ परस्पर प्र त े द करती ह? वे प्र त े द रेखाएँ कतने कोण बना
रही ह?
उत्तर
चार कोण।
दो रेखाएँ 1 िबंद ु पर कटती है ं
पत्येक रेखा 2 िकरणों में बँट जाती है
2 िकरणे ं + 2 िकरणे ं = िबंद ु से िनकलती 4 िकरणे ं
एक िबंद ु पर 4 िकरणे ं 4 कोण बनाती है ं
ऐसा क्य होता है: प्र त े द बदु के चार ओर एक चक्कर लगाइए। चार करण एक-एक करके मलती ह और हर
दो लगातार करण के बीच एक कोण बनता है। इसी लए कोण क संख्या 4 है और चार का योग 360° होता है।
चत्र 5.2 म जहाँ रेखा l, रेखा m को प्र त े द करती है, इन चार कोण के नाम ∠a, ∠b, ∠c और ∠d ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 107
खंड 5.1 रेखा के पार
ग णत चचा प्रयास कर
प्र.1 क्या दो सरल रेखाएँ एक से अ धक बदुओं पर प्र त े द कर सकती ह?
उत्तर
नह । दो भन्न सरल रेखाएँ केवल एक ही बदु पर मल सकती ह।
ऐसा क्य होता है: कन्ह दो बदुओं से होकर ठ क एक ही सरल रेखा जाती है। अतः य द दो रेखाओं म दो
उभय नष्ठ बदु P और Q होते तो दोन रेखाएँ P और Q से जाने वाली एक ही रेखा होत — वे दो भन्न रेखाएँ रह ही
नह जात ।
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संकेत: मेज पर दो मापक रखकर दे खए। उनके कनारे जैसे ही एक बदु पर कटते ह, वे तुरंत दोन ओर दूर हटने
लगते ह।
प्र.2 ग त व ध 1: कागज क एक समतल शीट पर दो रेखाएँ इस प्रकार ख चए क वे परस्पर प्र त े द कर। इनसे बने
चार कोण को चाँदे क सहायता से मा पए। ऐसी ही प्र त े द रेखाओं के चार युग्म बनाइए और प्र त ेद
बदुओं पर बने कोण को मा पए। आपको इन कोण के बीच कौन-सा प्र तरूप (पैटन) दख रहा है?
उत्तर
आप कोई भी युग्म बनाइए, हर बार यही दो प्र तरूप दखगे।
∠a = ∠c तथा ∠b = ∠d ( आमने -सामने के कोण समान)
∠a + ∠b = 180°, ∠b + ∠c = 180°
∠c + ∠d = 180°, ∠d + ∠a = 180°
∠a + ∠b + ∠c + ∠d = 360°
चार भन्न चत्र से लए गए माप का एक नमूना:
चत्र ∠A ∠B ∠C ∠D ∠A + ∠B
1 120° 60° 120° 60° 180°
2 90° 90° 90° 90° 180°
3 35° 145° 35° 145° 180°
4 72° 108° 72° 108° 180°
संकेत: य द आपका माप एक-दो ड ी कम-ज़्यादा आए तो दोष चाँदे और प सल क मोटाई का है, ग णत का नह ।
पतली रेखाएँ ख चए और चाँदे को ठ क ऊपर से दे खए।
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
चत्र 5.2 म य द ∠a का माप 120° है तो क्या आप ∠b, ∠c और ∠d का माप बना उन्ह ख चे और मापे नकाल
e
प्र.3
m l as
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सकते ह?
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चत्र 5.2, पृष्ठ 107 — रेखा l, रेखा m को प्र त े द करती है और चार कोण ∠a, ∠b, ∠c तथा ∠d बनते ह।
co m
m .
as e
उत्तर .c
om a g l
a s e—mएक के बाद एक रै खक युग्म का उपयोग क जए।
agl हाँ
se m
ऋजु कोण) com g l a
. a
∠a + ∠b = 180° (
m
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120° + ∠b = 180° → ∠b = 60°
∠b + ∠c = 180°
co m
.
60° + ∠c = 180° → ∠c = 120°
e m
m l as
.co
∠c + ∠d = 180°
a g
a s em 120° + ∠d = 180° → ∠d = 60°
agl
.c
अतः ∠a = ∠c = 120° और ∠b = ∠d = 60°। जाँच: 120 + 60 + 120 + 60 = 360° ✔
s e m
m a
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g l as
a
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m .
m as e
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ऐसा क्य होता है: ∠a और ∠b एक सरल रेखा पर अगल-बगल ह, अतः दोन मलकर 180° का ऋजु कोण
बनाते ह। यही बात अगले युग्म के लए और उसके अगले के लए भी सच है — 180° क यही ंखला आमने-
सामने के कोण को समान बना दे ती है।
प्र.4 क्या यह तथ्य प्र त े द रेखाओं के प्रत्येक युग्म के लए सदै व सत्य है? ∠a के व भन्न माप के लए इसक जाँच
क जए। क्या आप इसका कारण बता सकते ह क इन माप का उपयोग करके ∠a के कसी भी माप के लए यह
गुण सत्य सद्ध होगा?
उत्तर
हाँ, यह सदै व सत्य है — और इसे कसी वशेष संख्या के बना सद्ध कया जा सकता है।
∠a + ∠b = 180° (एक रेखा पर ऋजु कोण)
∠a + ∠d = 180° (दू सरी रेखा पर ऋजु कोण)
अतः ∠a + ∠b = ∠a + ∠d
दोनों ओर से ∠a हटाइए → ∠b = ∠d
∠b + ∠a = 180° तथा ∠b + ∠c = 180°
अतः ∠b + ∠a = ∠b + ∠c → ∠a = ∠c
ऐसा क्य होता है: ∠b और ∠d दोन ही 180° म से वही एक कोण ∠a नकालने पर बची हुई मात्रा ह। एक ही
रक्त ान को भरने वाली दो संख्याएँ समान ही ह गी। ध्यान द जए क यहाँ कोई मापन नह कया गया — यह
एक उपप त्त है और ∠a के हर माप के लए काम करती है।
क्या आप जानते ह? ∠a और ∠b जैसे कोण रै खक युग्म कहलाते ह तथा ∠b और ∠d जैसे कोण शीषा भमुख
कोण। यह छोटा-सा तक आपक ज्या म त क पहली उपप त्तय म से एक है।
पता लगाइए — पृष्ठ 108
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खंड 5.1 रेखा के पार
प्र.1 चत्र 5.3 म आप जन रै खक युग्म एवं शीषा भमुख कोण को दे खते ह, उन सभी क सूची बनाइए — रै खक
युग्म: ∠a और ∠b, … ; शीषा भमुख कोण: ∠b और ∠d, …
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b
a c
d
l
m
चत्र 5.3, पृष्ठ 108 — प्र त े द रेखाएँ l व m तथा उनके चार ओर बने कोण ∠a, ∠b, ∠c और ∠d।
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उत्तर
चत्र 5.3 म रेखाएँ l और m एक बार कटती ह, जससे बाईं ओर ∠a, ऊपर ∠b, दाईं ओर ∠c और नीचे ∠d बनते ह।
रै खक युग्म शीषा भमुख कोण के युग्म
∠a और ∠b ∠a और ∠c
∠b और ∠c ∠b और ∠d
∠c और ∠d
∠d और ∠a
अतः 4 रै खक युग्म तथा शीषा भमुख कोण के 2 युग्म ह।
m
b
a c
d
l
रेखाएँ l और m प्र त े द करती हुई। ∠a और ∠c (नीले) आमने-सामने ह, इसी प्रकार ∠b और ∠d (लाल) भी। अगल-बगल के कोई दो
कोण, जैसे ∠a और ∠b, रै खक युग्म बनाते ह।
ऐसा क्य होता है: प्र त े द बदु के चार ओर एक चक्कर लगाइए। हर दो पड़ोसी कोण एक ही सरल रेखा पर ह,
अतः हर पड़ोसी युग्म एक रै खक युग्म है — इससे 4 युग्म मलते ह। जो कोण पड़ोसी नह ह वे आमने-सामने के ह
और ऐसे केवल 2 ही युग्म ह।
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
संकेत: यहाँ हर शीषा भमुख युग्म समान है: ∠a = ∠c तथा ∠b = ∠d। हर रै खक युग्म का योग 180° है।
m as e
.co a g l
a s em
a l — पृष्ठ 108
पाठ्यgप्रश्न
खंड 5.2 लम्ब रेखाएँ
co m
ग णत चचा
em . ag
g l as
प्र.1 क्या आप प्र त a
े द रेखाओं का एक युग्म इस प्रकार बना सकते ह जसम सभी चार कोण समान ह ? क्या आप
m
पता लगा सकते ह क प्रत्येक कोण का माप क्या होगा?
co
e m.
c o m g l as
.
उत्तर
हाँ, और m
e a
s
तब प्रत्येक कोण 90° का होगा।
a gla
पूरा चक्कर)
s
∠a + ∠b + ∠c + ∠d = 360° (
m a
चारों समान है,ं मान लीिजए पत्येक = x
m .co agl
l a se
4x = 360°
a g
x = 360° ÷ 4 = 90°
co m
m .
m as e
.co
ऐसा क्य होता है: चार कोण मलकर प्र त
g l
े द बदु के चार ओर का पूरा 360° का चक्कर भरते ह। 360° को
a
a s em चार बराबर भाग म बाँटने पर प्रत्येक 90° अथात समकोण मलता है।
l
ag इस प्रकार कटने वाली रेखाएँ लम्ब रेखाएँ कहलाती ह। चत्र 5.4 म रेखाएँ l और m एक-दूसरे पर लम्ब ह। समकोण को चाप से
se m
नह , ब ल्क एक छोटे वग के चह्न से दशाया जाता है।
com g l a
m . a
e
s तथा समकोणक क दोन भुजाएँ — ये सब लम्ब युग्म ह। पन्ने के कोने
स्वयं जाँ चए: पन्ने का कोना, मेज काaकोना
g l
को प्र त े द पर र खए; य द वहaठ क बैठ जाए तो रेखाएँ लम्ब ह।
co m
m .
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om — पृष्ठ 109
पाठ्य.cप्रश्न
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खंड 5.3 रेखाओं के मध्य
ग णत चचा
प्र.1 चत्र 5.5 दे खए एवं प्रत्येक त म रेखाखंड के मलने या आर-पार जाने के तरीके का उ चत ग णतीय शब्द
(एक बदु, एक अंत- बदु, मध्य- बदु, अवसं ध — जहाँ दो रेखाएँ मलती ह, प्र त े द करती ह) और प्रत्येक कोण
क ड ी माप के साथ वणन क जए। उदाहरण के लए, रेखाखंड FG एवं FH अंत- बदु F पर कोण 115° पर
मलते ह।
T
V O
Q
S
B
P
U
C
X R
D
A I
L
H
F
115° J
G
M
चत्र 5.5, पृष्ठ 109 — रेखाखंड के युग्म ST व UV, AB व CD, OP व QR, FG व FH तथा IJ व LM।
उत्तर
चत्र 5.5 म पाँच युग्म ह। प्रत्येक का वणन तथा मापने पर मलने वाला कोण नीचे दया है।
युग्म कस प्रकार मलते ह कोण
FG और FH ये अंत- बदु F पर मलते ह — F दोन रेखाखंड का सरा है ( दया गया उदाहरण) 115°
AB और CD ये एक बदु X पर प्र त े द करते ह। X दोन के भीतर है, कसी का सरा नह लगभग 60° (दू सरी ओर 120°)
IJ और LM ये एक बदु Y पर प्र त े द करते ह, जो दोन के लगभग मध्य म है लगभग 79° (दू सरी ओर 101°)
ST और UV ये चत्र म कह नह मलते — कोई उभय नष्ठ बदु नह कोई कोण नहीं बनता
OP और QR ये बलकुल नह मलते — इनके बीच क दूरी समान रहती है कोई कोण नहीं बनता
ऐसा क्य होता है: ये शब्द बताते ह क मलन कहाँ हो रहा है। य द उभय नष्ठ बदु कसी रेखाखंड का सरा है तो
हम कहते ह क वे अंत- बदु पर मलते ह; य द वह बदु दोन के भीतर है तो वे उस बदु पर प्र त े द करते ह।
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स्वयं जाँ चए: X और Y पर चार कोण मा पए। हर बार दो समान युग्म मलगे और हर पड़ोसी युग्म का योग 180°
होगा — वही गुण जो पृष्ठ 107 पर सद्ध कए गए थे।
प्र.2 य द रेखाखंड ST एवं UV को आगे बढ़ाया जाए तो क्या इन रेखाओं के मलने क संभावना है?
उत्तर
हाँ। ये लगभग समांतर दखते ह, परंतु ह नह — दाईं ओर बढ़ने पर ये धीरे-धीरे पास आते जाते ह।
बाएँ िसरों पर ST और UV के बीच दू री ≈ 12 इकाई
दाएँ िसरों पर दू री ≈ 9 इकाई
दू री घट रही है → रेखाएँ पास आ रही है ं
अतः दोन रेखाखंड को दाईं ओर पयाप्त दूर तक बढ़ाने पर वे अवश्य कटगी।
ऐसा क्य होता है: UV का झुकाव ST से थोड़ा अ धक है (लगभग 22° बनाम लगभग 20°)। जन दो रेखाओं का
झुकाव बलकुल समान नह है वे कह न कह अवश्य मलती ह, चाहे अंतर कतना ही छोटा क्य न हो — बस उन्ह
बहुत दूर तक बढ़ाना पड़ सकता है।
संकेत: केवल आँख पर भरोसा मत क जए। दो दूर-दूर के ान पर लम्बवत दूरी मा पए। य द दोन माप भन्न ह तो
रेखाएँ समांतर नह ह।
प्र.3 य द रेखाखंड OP एवं QR को आगे बढ़ाया जाए तो क्या इन रेखाओं के मलने क संभावना है?
उत्तर
नह । OP और QR समांतर ह, अतः कतना भी बढ़ाने पर वे कभी नह मलगी।
OP का झुक ाव ैितज से ≈ 33° नीचे
QR का झुक ाव ैितज से ≈ 33° नीचे
समान झुक ाव → लम्बवत दू री हर जगह समान
ऐसा क्य होता है: दो रेखाएँ तभी मलती ह जब उनका झुकाव भन्न हो। OP और QR का झुकाव समान है, अतः
उनके बीच का ान कभी बंद नह होता।
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स्वयं जाँ चए: O से रेखा QR क तथा P से रेखा QR क लघुतम (लम्बवत) दूरी मा पए। समांतर युग्म म दोन माप
समान आते ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 110
खंड 5.3 रेखाओं के मध्य
ग णत चचा
प्र.1 कुछ ऐसी समांतर रेखाओं के नाम बताइए जन्ह आप अपनी क ा म दे ख सकते ह।
उत्तर
क ा म समांतर रेखाएँ चार ओर ह:
श्यामपट्ट के ऊपरी और नचले कनारे, तथा उसके बाएँ और दाएँ कनारे।
आपक कॉपी क लक र।
आपके मापक (स्केल) के दोन लंबे कनारे।
खड़क के शीशे, दरवाज़े तथा फ़श क टाइल के सम्मुख कनारे।
एक पं क्त म रखी बच के पाए तथा छत क धरन।
छत क चादर क धा रयाँ या द वार म ईंट क पं क्तयाँ।
ऐसा क्य होता है: ये सभी युग्म एक ही समतल सतह पर ह और अपनी पूरी लंबाई म समान दूरी बनाए रखते ह,
इस लए ये कभी नह मल सकते।
संकेत: श्यामपट्ट का कनारा और फ़श पर ख ची गई रेखा भी कभी नह मलते — परंतु वे समांतर नह ह, क्य क वे
एक ही तल म नह ह।
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प्र.2 नीचे दए गए चत्र 5.6 म रेखाओं के कौन-से युग्म समांतर प्रतीत होते ह?
a
d e
c
g
b
f
i h
चत्र 5.6, पृष्ठ 110 — बदु कत कागज पर ख चे गए नौ रेखाखंड a से i।
उत्तर
रेखाखंड को उनक दशा के अनुसार समूह म बाँ टए।
दशा समांतर रेखाखंड
ऊ व धर (सीधे ऊपर-नीचे) a, i और h
ैितज (सीधे आर-पार) c और g
दाईं ओर नीचे झुक ी (45°) d और f
बाईं ओर नीचे झुक ी (45°) e और b
अतः समांतर समूह ह — a, i, h; c और g; d और f; e और b।
ऐसा क्य होता है: बदु कत कागज पर कसी रेखाखंड क दशा को "इतने बदु दाएँ, इतने बदु ऊपर" के रूप म
पढ़ा जा सकता है। जन दो रेखाखंड का यह पग समान है वे एक ही दशा म ह, अतः लंबाई और आरंभ- बदु भन्न
होने पर भी वे समांतर ह।
स्वयं जाँ चए: d और f के पग ग नए। दोन हर बार 1 बदु दाएँ और 1 बदु नीचे जाते ह — समान दशा, अतः
समांतर।
ग त व ध 2 — पृष्ठ 111
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ
a g l AglaSem · NCERT Solutions
खंड 5.4 कागज को मोड़ने म समांतर एवं लम्ब रेखाएँ
co m
em.
m as
प्रयास कर
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a s emसपाट वगाकार कागज ली जए (इस ग त व ध के लए एक समाचार-पत्र का उपयोग क जए)। आप कागज
gl
एक
a
प्र.1
के सम्मुख कनार क ाख्या कस प्रकार करगे? वे एक-दूसरे के ______ ह।
co m
उत्तर
e m . ag
कागज के सम्मुख कनारे एक-दूसरे के समांतर ह।
g l as
a
m
ऐसा क्य होता है: वगाकार कागज के बाएँ और दाएँ कनारे ऊपर से नीचे तक बलकुल समान दूरी (भुजा क
co
m.
लंबाई) पर रहते ह। एक तल क जो रेखाएँ समान दूरी बनाए रखती ह वे कभी नह मल सकत , अतः वे समांतर ह।
m ase
.co a g l
a s em
a glप्र.2 आप कागज के आसन्न कनार क ाख्या कस प्रकार करगे? आसन्न कनारे एक-दूसरे के ______ ह। वे एक बदु
पर मलते ह। वे समकोण बनाते ह।
m a s
m .co agl
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उत्तर
आसन्न कनारे एक-दूसरे पर लम्ब ह।
a g l
co m
कागज का पत्येक कोना एक समकोण है
m .
m as e
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दो आसन्न िकनारों के बीच कोण = 90°
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se m
g l a
a ऐसा क्य होता है: वग (या आयत) के चार कोने समकोण होते ह। कसी कोने पर मलने वाले दो कनारे 90° पर
se m
com a
कटते ह और लम्ब होने का अथ ठ क यही है।
. a g l
m
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agl
co m
m .
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g l a
a c
m .
m a s e
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a
co m
m .
m as e
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 कागज को ै तज रूप से आधे भाग म मो ड़ए। इससे एक नई रेखा बनती है ( चत्र 5.7 दे खए)। अब आप
कतनी समांतर रेखाएँ दे खते ह? नया रेखाखंड ऊध्वाधर भुजाओं (व टकल) से कस प्रकार संबं धत है?
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चत्र 5.7, पृष्ठ 111 — वगाकार कागज को ै तज रूप से आधा मोड़ना, फर दोबारा, फर एक बार और, तथा अंत म
एक ऊध्वाधर मोड़।
उत्तर
अब 3 समांतर रेखाएँ दखती ह — ऊपरी कनारा, नया मोड़ और नचला कनारा।
2 ैितज िकनारे + 1 मोड़ = 3 समांत र रेखाएँ
नया मोड़ दोन ऊध्वाधर भुजाओं पर लम्ब है और उन्ह ठ क आधा-आधा बाँटता है।
ऐसा क्य होता है: ऊपरी कनारे को नचले कनारे पर मोड़ने से बना मोड़ ठ क उन्ह कनार क दशा म जाता है,
अतः तीन समांतर ह। ऊध्वाधर भुजाएँ पहले से ही ऊपरी- नचले कनार पर लम्ब थ , इस लए वे मोड़ पर भी लम्ब
ह।
प्र.4 मुड़े हुए कागज म एक और ै तज मोड़ बनाइए। अब आप कतनी समांतर रेखाएँ दे खते ह?
उत्तर
5 समांतर रेखाएँ।
पहले से मुड़े कागज को िफर आधा मोड़ ने पर कु ल 3 मोड़ बनते है ं
3 मोड़ + 2 ैितज िकनारे = 5 समांत र रेखाएँ
ऐसा क्य होता है: पहले से बना एक मोड़ नए मोड़ के दोन हस्स पर छप जाता है, इस लए एक मोड़ तीन हो जाते
ह। इनम से हर एक ऊपरी और नचले कनार के समांतर ही रहता है।
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ
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य द आप पुन: एक बार ऐसा कर तो क्या होगा? आपको कतनी समांतर रेखाएँ प्राप्त ह गी? क्या यहाँ कोई पैटन
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प्र.5
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है? य द आप एक और ै तज मोड़ बनाते ह तो जाँ चए क क्या यह पैटन आगे बढ़ता है।
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उत्तर as
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aglमोड़ के बाद 9 समांतर रेखाएँ और चौथे मोड़ के बाद 17 मलगी।
तीसरे
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मोड़ क संख्या N
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मोड़ क रेखाएँ समांतर रेखाएँ
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1
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2 3 5
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4 15 17
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n मोड़ ों के बाद मोड़ -रेखाएँ = 2n – 1
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समांत र रेखाएँ = मोड़ -रेखाएँ + 2 िकनारे
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= (2n – 1) + 2 a
= 2n + 1
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g बनी हर मोड़-रेखा क एक
ऐसा.cक्य होता है: हर नया मोड़ परत क संख्या दुगनी कर दे ता है, अतः पहलेaसे
m
aseप्र त ल प बनती है और बीच म एक बलकुल नई मोड़-रेखा जुड़ जाती है। इसी लए संख्या 1 → 3 → 7 → 15
agl चलती है, हर बार दुगुनी होकर एक अ धक।
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ध्यान द जए: पैटन 2n + 1 है (2 क घात n), न क 2 × n + 1। n = 3 के लए 2 × 3 + 1 से 7 मलता, जब क
agl
वास्तव म मोड़ने पर 9 रेखाएँ बनती ह — अपने कागज पर गनकर दे खए।
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वगाकार कागज म एक ऊध्वाधर मोड़ बनाइए। यह नई ऊध्वाधर रेखा पहले से बनी ै तज रेखाओं क ______ है।
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प्र.6
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agl उत्तर
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यह नई ऊध्वाधर रेखा पहले से बनी ै तज रेखाओं पर लम्ब है।
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agl
ऊ व धर मोड़ हर ैितज मोड़ से 90°
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: ऊध्वाधर मोड़ बाएँ कनारे को दाएँ कनारे पर लाता है, इस लए यह मोड़ ऊध्वाधर भुजाओं क
दशा म जाता है। वे भुजाएँ ै तज मोड़ पर लम्ब ह, अतः नया मोड़ भी उन सब पर लम्ब है।
संकेत: सभी ै तज मोड़ आपस म समांतर ह, इस लए उनम से कसी एक पर लम्ब रेखा स्वतः ही सब पर लम्ब हो
जाती है।
प्र.7 शीट को वकण के अनुदेश से मो ड़ए। क्या आप वह मोड़ ात कर सकते ह जो वकण रेखा के समांतर रेखा
बनाता हो?
उत्तर
हाँ। वगाकार कागज ABCD म वकण AC के लए एक सरल तरीका यह है।
1. दोन वकण पर एक-एक बार मोड़कर वग का कद्र O अं कत क जए।
2. अब कोने B को इस प्रकार मो ड़ए क वह ठ क O पर आ जाए।
3. मोड़ खो लए। नई मोड़-रेखा वकण AC के समांतर है।
ऐसा क्य होता है: B रेखा BD के अनु दश O तक जाता है और BD, AC पर लम्ब है। मोड़ कसी बदु को सीधे
मोड़-रेखा के पार ले जाता है, अतः मोड़-रेखा BD पर लम्ब होनी ही चा हए — और BD पर लम्ब हर रेखा AC क
दशा म ही जाती है। समान दशा का अथ है समांतर।
प्रयास कर: इसके बदले B को BO के मध्य- बदु पर मो ड़ए। तब भी AC के समांतर एक मोड़ मलेगा, बस वह B के
अ धक नकट होगा। वास्तव म B को BD के कसी भी बदु पर ले जाने वाला हर मोड़ AC के समांतर रेखा दे ता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 112
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खंड 5.4 कागज मोड़ना एवं संकेतन
प्रयास कर
प्र.1 एक वगाकार कागज ली जए, इसे मध्य से मो ड़ए एवं मोड़ को खोल द जए। कनार को मध्य रेखा क ओर
मो ड़ए एवं उन मोड़ को खोल द जए। ऊपरी दाएँ कोने एवं नचले बाएँ कोने को मोड़ क रेखा पर इस प्रकार
मो ड़ए क त्रभुज बन। चत्र 5.8 को दे खए। ये त्रभुज मोड़ क रेखा के पार नह जाने चा हए। क्या a, b एवं c
क्रमशः p, q एवं r के समांतर ह? य द हाँ, तो क्य ? य द नह , तो क्य नह ?
c a c
a
b b
q q
r p r p
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
चत्र 5.8, पृष्ठ 112 — चौथाई भाग म मुड़ा वगाकार कागज, जसम ऊपरी दायाँ एवं नचला बायाँ कोना मोड़कर
त्रभुज a, b, c तथा p, q, r बनाए गए ह।
उत्तर
हाँ। a ∥ p, b ∥ q तथा c ∥ r।
युग्म ये भुजाएँ क्या ह समांतर क्य
a और p दोन त्रभुज क ऊध्वाधर भुजाएँ, जो मोड़-रेखाओं पर सभी मोड़ वग के ऊ व धर िकनारों के समांतर है ं
ह
b और दोन त्रभुज क ै तज भुजाएँ दोनों उ हीं ऊ व धर मोड़ ों पर ल ब है,ं अतः एक ही िदशा में है ं
न् म्
q
c और r दोन मोड़-रेखाएँ ( तरछ भुजाएँ) प येक एक बराबर वग का िवकण है, अतः दोनों िकनारों से 45° बनाती
त्
है ं
ऐसा क्य होता है: दोन कोने बलकुल एक ही तरीके से, सम्मुख कोन पर मोड़े गए ह। इस लए कागज को उसके
कद्र के प रतः आधा चक्कर (180°) घुमाने पर पूरा चत्र वैसा ही दखता है — ऊपरी दायाँ त्रभुज ठ क नचले बाएँ
त्रभुज पर आ जाता है। आधा चक्कर हर रेखा को उसी दशा क रेखा पर, अथात समांतर रेखा पर ले जाता है। यही
एक तथ्य तीन युग्म क व्याख्या कर दे ता है।
स्वयं जाँ चए: त्रभुज abc को अनुरेखण कागज पर उता रए, वग के कद्र पर पन लगाकर उसे 180° घुमाइए। वह
ठ क त्रभुज pqr पर बैठ जाएगा।
पता लगाइए — पृष्ठ 113–114
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खंड 5.4 कागज को मोड़ने म समांतर एवं लम्ब रेखाएँ
प्र.1 चत्र 5.10 म बदु कत कागज पर द गई रेखाओं के लम्बवत कुछ रेखाएँ ख चए।
चत्र 5.10, पृष्ठ 113 — बदु कत कागज पर ख चे गए चार रेखाखंड।
उत्तर
हर द गई रेखा को एक पग क तरह प ढ़ए — "इतने बदु दाएँ, इतने बदु नीचे"। उसे घुमाने के लए दोन संख्याएँ आपस म बदल
द जए और एक का चह्न पलट द जए।
द गई रेखा उसका पग एक लम्ब रेखाखंड
ऊपरी पं क्त क ै तज रेखा 2 दाएँ, 0 नीचे 0 दाएँ, 1 नीचे — एक ऊ व धर रे खाखंड
नीचे बाईं ओर क तरछ रेखा 2 दाएँ, 2 ऊपर 2 दाएँ, 2 नीचे — दू सरी ओर झुका 45° का रे खाखंड
बीच क ऊध्वाधर रेखा 0 दाएँ, 2 नीचे 2 दाएँ, 0 नीचे — एक ैितज रे खाखंड
दाईं ओर क खड़ी ढलान वाली रेखा 2 दाएँ, 3 नीचे 3 दाएँ, 2 ऊपर
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gl उसके दोन सरे बदुओं पर ह।
धूसर = चार द गई रेखाएँ; नीली = बदुओं पर ख ची गई लम्ब रेखाएँ। हर नीला रेखाखंड अपनी धूसर जोड़ी को 90° पर काटता है और
a
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ऐसा क्य होता है: य द कोई रेखाखंड p दाएँ और q नीचे जाता है, तो q दाएँ और p ऊपर जाने वाला रेखाखंड
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दशा को ठ क एक चौथाई चक्कर घुमा दे ता है। बदुओं का जाल दोन सर को बदुओं पर ही रखता है, इस लए
e mदे क आवश्यकता ही नह पड़ती। a
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चाँ
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स्वयं जाँ चए: हर प्र त े द पर पन्ने का कोना र खए। वह बना कसी खाली जगह के ठ क बैठना चा हए।
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प्र.2 चत्र 5.11 म ऊपर दए गए संकेतन (एकल तीर का चह्न, दो तीर के चह्न आ द) का उपयोग करके समांतर
रेखाओं को च ह्नत क जए। लम्ब रेखाओं के बीच कोण को वग के प्रतीक से च ह्नत क जए। (a) आपने
लम्बवत रेखाओं को कैसे पहचाना? (b) आपने समांतर रेखाओं को कैसे पहचाना?
चत्र 5.11, पृष्ठ 113 — वगा कत कागज पर बनी पाँच आकृ तयाँ।
उत्तर
जाल पर एक-एक आकृ त लेकर काम क जए।
हर ऊध्वाधर भुजा पर एक तीर का चह्न (>) और हर ै तज भुजा पर दो तीर के चह्न (>>) लगाइए।
जाल के वकण पर चलने वाली तरछ भुजाएँ दो प रवार म बँटती ह — दाईं ओर नीचे जाने वाली और दाईं ओर ऊपर जाने
वाली। एक प रवार पर तीन तीर और दूसरे पर चार तीर लगाइए।
जहाँ कोई ऊध्वाधर भुजा कसी ै तज भुजा से मलती है, वहाँ 90° का छोटा वग चह्न बनाइए।
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
(a) आपने लम्बवत रेखाओं को कैसे पहचाना? जाल क ऊध्वाधर और ै तज रेखाएँ एक-दूसरे को समकोण (90°) पर काटती
ह। अतः जहाँ एक भुजा जाल के स्तंभ पर और दूसरी पं क्त पर चलती है, वहाँ वे लम्ब ह। पन्ने का कोना या समकोणक रखकर
इसक पु कर सकते ह।
(b) आपने समांतर रेखाओं को कैसे पहचाना? ऐसी रेखाएँ ढूँ ढ़कर जो सदै व समान दूरी पर रहती ह। जाल पर यह आसान है —
दो भुजाएँ तभी समांतर ह जब उनका पग समान हो, जैसे दोन 1 खाना दाएँ और 1 खाना नीचे जाती ह ।
ऐसा क्य होता है: जाल स्वयं समांतर रेखाओं के दो प रवार से बना है जो एक-दूसरे को 90° पर काटते ह। जाल
के सहारे ख ची गई हर भुजा इन्ह संबंध को अपना लेती है, इस लए मापने के बजाय खाने गनकर ही नणय हो
जाता है।
प्र.3 नीचे दए बदु कत कागज पर समांतर रेखाओं के व भन्न समूह बनाइए। रेखाखंड व भन्न लंबाइय के हो सकते ह
कतु उनके अंत- बदु बदु कत होने चा हए।
उत्तर
एक पग चु नए और उसी पग को अलग-अलग बदुओं से दोहराइए। कुछ सरल समूह नीचे दए ह।
समूह प्रयुक्त पग उदाहरण ( बदुओं को मलाकर)
1 3 दाएँ, 0 नीचे िभ पंि तयों में 2, 3 और 4 इकाई लंबे तीन ैितज रे खाखंड
न्न क्
2 0 दाएँ, 2 नीचे िभ तंभों में ऊ व धर रे खाखंड
न्न स्
3 1 दाएँ, 1 नीचे िभ िबंदुओं से आरंभ होते 45° के रे खाखंड
न्न
4 2 दाएँ, 1 ऊपर धीरे -धीरे ऊपर उठते रे खाखंड — किठन पर सुंदर समूह
ऐसा क्य होता है: दो रेखाखंड ठ क तभी समांतर होते ह जब उनक दशा समान हो। बदु कत कागज पर दशा
पूरी तरह पग से तय होती है, अतः समान पग = समांतर, चाहे लंबाई कुछ भी हो और आरंभ कह से भी हो।
संकेत: रेखाखंड क लंबाई जान-बूझकर अलग-अलग र खए। इससे याद रहेगा क समांतर होना दशा क बात है,
आकार क नह ।
प्र.4 अपनी समझ का उपयोग करके बताइए क समांतर रेखाएँ कैसी दखती ह तथा इस बदु कत कागज पर दए गए
रेखाखंड के समांतर रेखाएँ ख चने का प्रयत्न क जए। (a) क्या आपको इनम से कुछ रेखाएँ ख चना चुनौतीपूण
लगा? (b) कौन-सी रेखाएँ ख चना चुनौतीपूण लगा? (c) आपने इसे कैसे कया?
उत्तर
चत्र 5.12 के हर रेखाखंड का पग ग नए और उसी पग को कसी दूसरे बदु से दोहराइए।
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(a) क्या चुनौतीपूण लगा? हाँ — कुछ रेखाएँ बहुत क ठन थ ।
(b) कौन-सी? रेखाखंड e, f, g और h। ये न कसी पं क्त पर ह, न कसी स्तंभ पर और न ही 45° के वकण पर, इस लए आँख
से इनका अनुमान लगाना क ठन है। ै तज, ऊध्वाधर और 45° वाले (a, b, c, d) आसान थे।
(c) आपने कैसे कया? दो भरोसेमंद तरीके:
1. पग ग नए। य द रेखाखंड 3 बदु दाएँ और 1 बदु नीचे जाता है, तो कसी दूसरे बदु से 3 दाएँ और 1 नीचे जाकर दोन बदुओं
को मला द जए।
2. दूरी समान र खए। द गई रेखा से समान लम्बवत दूरी पर दो बदु अं कत क जए, एक-एक सरे के पास, और उन्ह मला
द जए।
ऐसा क्य होता है: "3 दाएँ, 1 नीचे" जैसी तरछ दशा क नकल करने के लए पन्ने पर कोई सहारा नह होता,
इस लए अंदाज़ा गलत हो जाता है। बदु गनने से दशा दो पूण संख्याओं म बदल जाती है, जन्ह ठ क-ठ क दोहराना
आसान है।
स्वयं जाँ चए: दोन रेखाखंड को काटती हुई कोई रेखा ख चए। य द आपका चत्र सही है तो दोन प्र त े द पर
एक ही त के कोण समान ह गे।
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प्र.5 चत्र 5.13 म कौन-सी रेखा, रेखा a के समांतर है — रेखा b या रेखा c? आपने यह कैसे सु न त कया?
b
c
a
चत्र 5.13, पृष्ठ 114 — रेखा a तथा एक ही उभय नष्ठ बदु से ख ची गई रेखाएँ b और c।
उत्तर
रेखा c, रेखा a के समांतर है।
रेखाएँ b और c एक ही बदु से नकलती ह, और चत्र म उस बदु को रेखा a के सरे से जोड़ता हुआ एक रेखाखंड पहले से खचा
है। उसे तयक रेखा मानकर कोण क तुलना क जए।
जोड़ ने वाली रेखा और रेखा a के बीच कोण ≈ 29°
जोड़ ने वाली रेखा और रेखा c के बीच कोण ≈ 29° → समान ✔
जोड़ ने वाली रेखा और रेखा b के बीच कोण ≈ 32° → समान नही ं ✘
संगत कोण केवल c और a के लए समान ह, अतः c ∥ a। रेखा b थोड़ी अ धक झुक है, इस लए दाईं ओर पयाप्त दूर बढ़ाने पर b
और a मल जाएँगी।
ऐसा क्य होता है: झुकाव के छोटे अंतर आँख नह पकड़ पाती — 29° और 32° एक जैसे दखते ह। तयक रेखा
इस प्रश्न को दो कोण क तुलना म बदल दे ती है, जसे चाँदा (या अनुरेखण कागज) ठ क-ठ क तय कर दे ता है।
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संकेत: एक और जल्द जाँच — a और c के बीच लम्बवत दूरी दोन सर के पास मा पए। समांतर युग्म म दोन
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माप समान आते ह।
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 115
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खंड 5.5 तयक रेखाएँ एवं 5.6 संगत कोण
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ग णत चचा
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प्र.1 क्या यह संभव है क सभी 8 कोण के माप भन्न ह ? य द हाँ, तो क्य ? य द नह , तो क्य नह ?
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उत्तर
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नह , यह संभव नह है। आठ कोण म अ धक से अ धक चार भन्न माप हो सकते ह।
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शीष िभमुख) s
cखom a
रेखा l पर: ∠1 = ∠3 तथा ∠2 = ∠4 (
.
रेखा m पर: ∠5 = ∠7 तथा ∠6 = ∠8 (शीष िभमु
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)
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8 कोण → 4 समान युग् मों में बँट जाते है ं
agl
अतः अिधक से अिधक 4 िभ न्न माप
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
तयक रेखा t रेखाओं l और m को काटती है और आठ कोण बनाती है। पहले प्र त े द पर ∠1, ∠2, ∠3, ∠4 तथा दूसरे पर ∠5, ∠6,
∠7, ∠8।
ऐसा क्य होता है: हर प्र त े द पर चार कोण स्वतंत्र नह ह — आमने-सामने के कोण समान होने ही चा हए और
पड़ोसी कोण का योग 180° होना ही चा हए। अतः एक प्र त े द केवल दो भन्न माप दे सकता है और दो प्र त ेद
मलकर अ धक से अ धक 2 + 2 = 4।
क्या आप जानते ह? य द रेखाएँ l और m समांतर ह तो ये चार माप भी घटकर दो रह जाते ह — एक न्यून और
एक अ धक कोण, जनका योग 180° होता है।
प्र.2 5 भन्न कोण 6, 5, 4, 3 और 2 के वषय म आपके क्या वचार ह?
उत्तर
पाँच भन्न माप भी संभव नह ह। इसी प्रकार तीन या छह भी नह ।
िभन्न मापों की संभ व संख्याएँ = 1, 2 या 4
4 → साधारण िस्थित (l और m समांत र नही ं)
2 → l ∥ m, ितयक रेखा ितरछी
1 → t दोनों पर लम्ब (सभी आठ कोण 90°)
पाँच भन्न माप पाने के लए कसी एक प्र त े द पर तीन भन्न कोण चा हए — जो असंभव है, क्य क ∠2 = ∠4 और ∠1 = ∠3
सदै व होते ह।
ऐसा क्य होता है: कोण जोड़ म बँधे होते ह। एक प्र त े द पर एक कोण तय करते ही बाक तीन तय हो जाते ह
— एक उसके बराबर और दो उसके संपूरक। इसी लए भन्न माप क संख्या केवल 1, 2 या 4 हो सकती है।
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 चत्र 5.14 म क्य क ∠1 और ∠3 शीषा भमुख कोण ह, अतः वे समान माप के ह। क्या शीषा भमुख कोण के
अन्य युग्म भी ह?
1 2
l
4 3
m
5 6
8 7
t
चत्र 5.14, पृष्ठ 115 — तयक रेखा t रेखाओं l व m को प्र त े द करती है और आठ कोण ∠1 से ∠8 बनते ह।
उत्तर
हाँ — कुल चार युग्म, प्रत्येक प्र त े द पर दो।
प्र त ेद शीषा भमुख युग्म संबंध
t और रेखा l ∠1 और ∠3 समान
t और रेखा l ∠2 और ∠4 समान
t और रेखा m ∠5 और ∠7 समान
t और रेखा m ∠6 और ∠8 समान
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: दो रेखाओं का हर प्र त े द अपने आप म एक पूरा छोटा चत्र है, और ऐसे हर चत्र म आमने-
सामने के ठ क दो युग्म होते ह। अतः दो प्र त े द से 2 × 2 = 4 युग्म मलते ह।
संकेत: इन्ह संगत कोण — ∠1 और ∠5, ∠2 और ∠6, ∠3 और ∠7, ∠4 और ∠8 — से मत उलझाइए, जो
दो अलग प्र त े द पर एक ही त म होते ह।
ग त व ध 3 — पृष्ठ 116
खंड 5.6 संगत कोण
प्रयास कर
प्र.1 ग त व ध 3: एक रेखा-युग्म एवं एक तयक रेखा इस प्रकार ख चए क वे दो भन्न कोण बनाएँ। चरण 1 — रेखा l
ख चए एवं इस रेखा को बदु X पर प्र त े द करती हुई तयक रेखा t ख चए। चरण 2 — रेखाओं l और t ारा
बना ∠a मा पए। (आइए इसे 60° मान लेते ह।) चरण 3 — रेखा t पर एक बदु Y च ह्नत क जए। चरण 4 —
बदु Y से होकर जाती हुई एक रेखा m ख चए जो रेखा t के साथ 60° का कोण बनाती है।
उत्तर
मापक और चाँदे से चार चरण क जए।
1. रेखा l ख चए, फर उसे X पर काटती हुई t ख चए।
2. l और t के बीच ∠a मा पए। मान ली जए वह 60° आता है।
3. t पर आगे कोई बदु Y अं कत क जए।
4. Y पर t से 60° का कोण बनाइए — उसी ओर और उसी त म जैसा ∠a है — और रेखा m ख चए।
∠a = 60° (X पर, l और t के बीच)
∠b = 60° (Y पर, m और t के बीच)
∠a और ∠b संगत कोण है ं
पूरे िचत्र में के वल दो माप बनते है:ं 60° और 120°
ऐसा क्य होता है: Y पर कोण क नकल करने से रेखा m ठ क रेखा l क तरह झुक जाती है। तब Y पर बना हर
कोण X के संगत कोण क प्र त ल प ही होता है, इस लए कोई नया माप बन ही नह सकता।
संकेत: चाँदे के ान पर ∠a को अनुरेखण कागज पर उतारकर उसे t के सहारे Y तक खसकाइए। नकल करना
मापने से अ धक शुद्ध होता है।
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 अब कतने व भन्न कोण बने ह?
उत्तर
केवल दो भन्न कोण: 60° और 120°।
X पर: ∠a = 60°
रैिखक युग् म → 180° – 60° = 120°
शीष िभमुख → िफर से 60° और 120°
Y पर भी वही दो माप दोहराए जाते है ं
कु ल िभन्न माप = 2
ऐसा क्य होता है: कसी प्र त े द पर एक कोण चार को तय कर दे ता है — वह कोण स्वयं, उसका संपूरक और
इन दोन क आमने-सामने क प्र त ल पयाँ। चूँ क हमने Y पर जान-बूझकर 60° क नकल क , दूसरा प्र त े द वही
दो माप दोहरा दे ता है।
प्र.3 रेखाओं l व m के बारे म आपने क्या ध्यान दया? क्या ये एक-दूसरे के समांतर प्रतीत होती ह?
उत्तर
हाँ, l और m समांतर प्रतीत होती ह — और वे वास्तव म समांतर ह।
संगत कोण ∠a = ∠b = 60°
संगत कोण समान ⟹ l ∥ m
ऐसा क्य होता है: तयक रेखा के साथ कोई रेखा जो कोण बनाती है वही बताता है क वह रेखा कतनी झुक है।
चूँ क l और m, t के साथ समान 60° बनाती ह, दोन का झुकाव समान है, अतः उनके बीच क दूरी कभी नह
बदलती और वे कभी नह मल सकत ।
क्या आप जानते ह? यही इस अध्याय का महत्वपूण नयम है: जब एक तयक रेखा ारा एक रेखा-युग्म पर बने
संगत कोण समान होते ह तो वे रेखाएँ समांतर होती ह। इससे रेखाओं को बढ़ाए बना ही समांतरता क जाँच हो
जाती है।
ग त व ध 4 और 5 — पृष्ठ 117
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ
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खंड 5.6 संगत कोण
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प्रयास कर
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a s eतmव ध 4: चत्र 5.19 म समांतर रेखाएँ l व m ह ( चत्र म समांतर रेखाएँ च ह्नत करने के लए कस संकेतन का
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a
प्र.1
उपयोग कया गया है?)। रेखा t इन दोन रेखाओं क तयक रेखा है।
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e m . ag
g l as
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m l as
m .co l a a g
ase
agl
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m b
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comt g l a
m . a
ase
agl
m
चत्र 5.19, पृष्ठ 117 — समांतर रेखाएँ l व m (समान तीर- चह्न से अं कत) तथा तयक रेखा t; ∠a और ∠b संगत
co
m .
e
कोण ह।
m l as
.co a g
a s em
agl उत्तर
.c
संकेतन है एक जैसे तीर के चह्न का युग्म (>) — एक रेखा l पर और एक रेखा m पर।
s e m
. c om a gla
a s emबढ़ाया नह जा सकता, अतः यह दे खा नह जा सकता क दो रेखाएँ कभी
ऐसा क्य होता है: चत्र को अनंत तक
aglबनाने वाले का यह आ ासन ह क वे रेखाएँ समांतर ह।
नह मलत । तीर के चह्न चत्र
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 34 of 71
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
संकेत: य द चत्र म समांतर रेखाओं का दूसरा समूह भी हो तो उसे दो तीर के चह्न (>>) से, तीसरे को तीन तीर से
दशाया जाता है। लम्ब रेखाओं के लए तीर नह , ब ल्क छोटा वग चह्न लगाया जाता है।
प्र.2 एक अनुरेखण कागज ( े सग पेपर) लेकर उस पर ∠a को अनुरेख ( े स) क जए। अब इस अनुरेखण कागज को
∠b पर र खए एवं दे खए क क्या कोण पूणतः संपाती ह। चत्र म अन्य संगत कोण क चाँदे क सहायता से जाँच
क जए। क्या सभी संगत कोण एक-दूसरे के समान ह?
l a
m b
t
चत्र 5.19, पृष्ठ 117 — समांतर रेखाएँ l व m (समान तीर- चह्न से अं कत) तथा तयक रेखा t; ∠a और ∠b संगत
कोण ह।
उत्तर
हाँ। ∠a का अनुरेख ठ क ∠b पर बैठ जाता है, और शेष तीन संगत युग्म भी समान नकलते ह।
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
संगत युग्म आप क्या पाते ह
∠a और ∠b समान
दोनों पितच्छे द ों के शेष तीन युग्म भी समान
l ∥ m तथा t एक ितयक रेखा है
⟹ संगत कोणों का हर युग्म समान होता है
ऐसा क्य होता है: अनुरेखण कागज को तयक रेखा के सहारे पहले प्र त े द से दूसरे तक सीधे खसकाना एक
ानांतरण है। चूँ क l और m एक ही दशा म ह, पूरा पहला प्र त े द ठ क दूसरे पर बैठ जाता है — अतः हर
कोण अपने संगत साथी पर ही गरता है।
स्वयं जाँ चए: एक बार कोई एक संगत युग्म समान सद्ध हो जाए तो शेष तीन रै खक युग्म और शीषा भमुख कोण
से स्वतः नकल आते ह।
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 ग त व ध 5: चत्र 5.20 म रेखाओं l व m क तयक रेखा इस प्रकार ख चए क संगत कोण का एक युग्म समान
हो। आप कोण को एक चाँदे ारा माप सकते ह। क्या आपको ऐसी तयक रेखा ख चने म क ठनाई आ रही है
जससे संगत कोण समान ह ?
l
m
चत्र 5.20, पृष्ठ 117 — रेखाएँ l व m, बना कसी तयक रेखा के।
उत्तर
हाँ — और यह असंभव है, क्य क चत्र 5.20 क रेखाएँ l और m समांतर नह ह।
कोई भी ितयक रेखा खी ंचकर दे िखए
संगत कोण सदै व िभन्न ही आते है ं
यह अंत र हर ितयक रेखा के िलए एक-सा रहता है
= वह कोण िजस पर l और m िमलेगं ी
ऐसा क्य होता है: संगत कोण समान होने का अथ होता क l और m का झुकाव एक जैसा है, अथात वे समांतर ह।
चूँ क वे समांतर नह ह, कोई भी तयक रेखा कसी संगत युग्म को समान नह बना सकती।
क्या आप जानते ह? इससे नयम उल्ट दशा म भी मलता है: जब एक रेखा-युग्म क रेखाएँ समांतर नह होत
तो तयक रेखा ारा बने संगत कोण कभी समान नह हो सकते। अतः संगत कोण क समानता समांतरता के
लए आवश्यक भी है और पयाप्त भी।
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 118–119
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as e
क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ
a g l AglaSem · NCERT Solutions
खंड 5.7 समांतर रेखाएँ ख चना
co m
e m.
m as
ग णत चचा
.co a g l
a s emआप एक मापक एवं एक समकोणक (सेट स्क्वेयर) का उपयोग करके समांतर रेखाओं का एक युग्म बना
gl
क्या
a
प्र.1
सकते ह? चत्र 5.21 दशाता है क आप इसे कस प्रकार कर सकते ह। एक मापक ारा एक रेखा l ख चए।
अपने समकोणक को खसकाकर आप रेखा l के लम्बवत दो रेखाएँ ख च सकते ह।
co m
e m . ag
g l as
a
co m
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m l as
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l a se l
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m .
m ase
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a g l Page 39 of 71
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
चत्र 5.21, पृष्ठ 118 — रेखा l पर रखा मापक तथा उस पर खसकाया गया समकोणक, जससे l के लम्बवत दो रेखाएँ
ख ची गई ह।
उत्तर
हाँ। चत्र 5.21 वाली व ध इस प्रकार है।
1. मापक से रेखा l ख चए।
2. समकोणक क एक भुजा को l पर र खए और उस भुजा के सहारे रेखा ख चए जो l से 90° बनाती है।
3. समकोणक को l के सहारे खसकाकर दूसरी जगह ले जाइए और उसी 90° वाली भुजा के सहारे दूसरी रेखा ख चए।
दोनों नई रेखाएँ l से 90° बनाती है ं
ये 90° के कोण संगत कोण है ं
संगत कोण समान ⟹ दोनों नई रेखाएँ समांत र है ं
ऐसा क्य होता है: समकोणक को खसकाने से वह घूमता नह है, अतः ख चने वाली भुजा क दशा वही बनी रहती
है। इस लए दोन रेखाओं का झुकाव समान होता है और वे कभी नह मल सकत ।
प्र.2 क्या ये दोन रेखाएँ एक-दूसरे के समांतर ह? हमने कैसे सु न त कया क वे एक-दूसरे के समांतर ह? इन
रेखाओं एवं रेखा l के बीच कौन-से कोण बने ह?
उत्तर
हाँ, ये समांतर ह। इनम से प्रत्येक और रेखा l के बीच का कोण 90° है।
पहली रेखा का l के साथ कोण = 90° ( समकोणक से)
दू सरी रेखा का l के साथ कोण = 90°
l को दोनों नई रेखाओं की ितयक रेखा मािनए
संगत कोण = 90° = 90° → समान
⟹ दोनों रेखाएँ समांत र
ऐसा क्य होता है: हम चत्र के दखने पर नह , ब ल्क इस नयम पर भरोसा कर रहे ह क संगत कोण क समानता
समांतरता क गारंट दे ती है — तक, न क आँख।
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
क्या आप जानते ह? इसका एक उपयोगी प रणाम: जो दो रेखाएँ एक ही रेखा पर लम्ब ह वे आपस म समांतर
होती ह।
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 चत्र 5.22 म दशाए अनुसार समकोणक क लम्बी भुजा का उपयोग करके दो और समांतर रेखाएँ ख चए।
l
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
चत्र 5.22, पृष्ठ 118 — समकोणक क लम्बी भुजा को मापक पर खसकाकर दो और समांतर रेखाएँ ख चना।
उत्तर
इस बार ख चने वाली भुजा l से 90° पर नह है, फर भी वचार बलकुल वही है।
1. मापक को कागज पर र र खए — यही पटरी का काम करेगा।
2. समकोणक क लम्बी भुजा को मापक से सटाकर र खए और सामने वाली भुजा के सहारे एक रेखा ख चए।
3. समकोणक को मापक के सहारे — बना घुमाए — खसकाइए और उसी भुजा के सहारे दूसरी रेखा ख चए।
दोनों रेखाएँ मापक के िकनारे से समान कोण बनाती है ं
वह िकनारा ितयक रेखा का काम करता है
संगत कोण समान ⟹ रेखाएँ समांत र
ऐसा क्य होता है: मापक समकोणक को घूमने नह दे ता। केवल खसकना संभव है और खसकने से दशा नह
बदलती।
प्र.4 आपको कैसे ात हुआ क ये दोन रेखाएँ समांतर ह? क्या आप जाँच सकते ह क संगत कोण समान ह या नह ?
उत्तर
दोन को काटती हुई कोई रेखा ख चए और एक ही त वाले दो कोण क तुलना क जए।
चाँदे से: दोन प्र त े द पर तयक रेखा क एक ही ओर, एक ही त का कोण मा पए। दोन माप समान आते ह।
अनुरेखण कागज से: एक कोण को उतारकर उस कागज को तयक रेखा के सहारे दूसरे प्र त े द तक खसकाइए। वह ठ क
बैठ जाता है।
दोनों माप समान → रेखाएँ समांत र
2° या 3° का भी अंत र → रेखाएँ समांत र नहीं
और वे कही ं दू र जाकर िमलेगं ी
ऐसा क्य होता है: संगत कोण क समानता समांतरता के लए आवश्यक भी है और पयाप्त भी। अतः यही एक
जाँच पूरा प्रश्न हल कर दे ती है।
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as e
क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
संकेत: मापन क छोट त्रु टयाँ सामान्य ह। य द दोन माप एक ड ी से कम भन्न ह तो रेखाओं को समांतर मा नए
m as e
l
और दोष चाँदे तथा प सल क मोटाई का सम झए।
m .co a g
l a se
a g
पता लगाइए — पृष्ठ 119
com
. ag
खंड 5.7 समांतर रेखाएँ ख चना
se m
l a
क्या आप रेखा l के समांतर एक रेखaाgख च सकते ह जो बदु A से होकर जाती है? आप इसे अपने ज्या म त
प्र.1
बॉक्स के उपकरण से कैसे करगे? अपनी व ध का उल्लेख क जए।
co m
em.
om एक मापक, एक समकोणक और प सल। l as
उत्तर
. cउपकरण: a g
em क एक भुजा को ठ क रेखा l पर र खए।
हाँ। आवश्यक
a s
gl
a 2. समकोणक क दूसरी भुजा से मापक को कसकर सटाइए ता क मापक हल न सके — अब यह एक पटरी है।
1. समकोणक
m a s
.co agl
3. समकोणक को मापक के सहारे तब तक खसकाइए जब तक l पर रखी भुजा बदु A तक न पहुँच जाए।
4. उसी भुजा के सहारे A से होकर रेखा ख चए।
se m
g
5. यह नई रेखा A से होकर जाती है और l के समांतर है।
l a
a
समकोणक के वल िखसकता है, घूमता नही ं
co m
m .
as e
com l
अतः खी ंचने वाली भुजा l की िदशा बनाए रखती है
. a g
e m
as
⟹ नई रेखा ∥ l, और वह A से होकर जाती है
agl चाँदे वाली दूसरी व ध: A से होकर कोई रेखा ख चए जो l को कसी बदु P पर काटे। P पर l के साथ बना कोण मा पए। वही
se m
कोण A पर संगत
com
त म बनाकर दूसरी भुजा ख च द जए। संगत कोण समान होने से नई रेखा l के समांतर होगी।
g l a
m . a
ase
कागज मोड़ने वाली व ध: A से होकर l पर लम्ब मोड़ t बनाइए; फर A से होकर t पर लम्ब मोड़ m बनाइए। तब m ∥ l।
a gl
ऐसा क्य होता है: तीन व धयाँ अलग-अलग रूप म एक ही काम करती ह — वे नई रेखा को कसी तयक रेखा
co
के साथ वही कोण बनाने पर ववश करती ह जो l बनाती है। संगत कोण क समानता समांतरता क गारंट दे ती है।
m
m .
m as e
.co a g l
m व ध अपनाइए, पूरी क ा को वही रेखा मलेगी।
क्या आप जानते ह? कसी रेखा से बाहर के बदु से होकर उसके समांतर ठ क एक ही रेखा जाती है। अतः कोई भी
l a se
ag
.c
s e m
m a
e m . co agl
as
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 120
a g l
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 44 of 71
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
खंड 5.8 एकांतर कोण
ग णत चचा प्रयास कर
प्र.1 रेखाएँ l व m एक-दूसरे के समांतर रेखाएँ क्य ह? (कागज मोड़कर समांतर रेखाएँ बनाना, चत्र 5.24)
A
l l
t t
A A m
l l
चत्र 5.24, पृष्ठ 119 — दो लम्ब मोड़ ारा बदु A से होकर मोड़-रेखा l के समांतर रेखा m बनाना।
उत्तर
क्य क ये दोन एक ही मोड़ t पर लम्ब ह।
पहला मोड़ : t ⟂ l, तथा t िबंद ु A से होकर जाता है
दू सरा मोड़ : m ⟂ t, तथा m भी A से होकर जाता है
t को l और m की ितयक रेखा मािनए
संगत कोण = 90° और 90° → समान
⟹l∥m
ऐसा क्य होता है: जो मोड़ कसी रेखा को ठ क उसी पर लटा दे ता है वह उस रेखा पर लम्ब ही होगा। इस लए हर
मोड़ बना मापे ही स ा समकोण बना दे ता है। जो दो रेखाएँ कसी उभय नष्ठ तयक रेखा से समान 90° बनाती ह
उनका झुकाव समान होता है, अतः वे समांतर ह।
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
संकेत: यह पृष्ठ 118 क समकोणक वाली व ध का ही मोड़-रूप है। दोन एक ही नयम पर टके ह: एक रेखा पर
लम्ब दो रेखाएँ आपस म समांतर होती ह।
प्र.2 ग त व ध 6: चत्र 5.25 म य द ∠f का माप 120° है तो इसके एकांतर कोण ∠d का माप क्या है?
l
a b
d c
m
e f
h g
t
चत्र 5.25, पृष्ठ 120 — समांतर रेखाएँ l व m तथा तयक रेखा t; आठ कोण ∠a से ∠h।
उत्तर
∠d = 120°।
∠f = 120° (िदया है)
संगत कोण, l ∥ m)
∠b = ∠f = 120° (
∠d = ∠b = 120° (शीष िभमुख कोण)
अतः ∠d = 120°
यही ंखला ∠f के हर माप के लए चलती है:
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
∠f = ∠b (संगत)
∠b = ∠d (शीष िभमुख)
अतः ∠f = ∠d, सदै व
ऐसा क्य होता है: ∠f का एकांतर कोण ात करने के लए पहले दूसरी रेखा पर उसके संगत कोण ∠b तक
जाइए, फर उसके आमने-सामने के कोण ∠d तक। दोन चरण म माप नह बदलता, इस लए ंखला के दोन सरे
समान होने ही चा हए — बना कसी मापन के।
क्या आप जानते ह? इससे यह नयम सद्ध होता है: समांतर रेखाओं के युग्म को तयक रेखा ारा प्र त ेद
करने पर बनने वाले एकांतर कोण सदै व समान होते ह। चत्र 5.25 म ∠c और ∠e दूसरा एकांतर युग्म है।
उदाहरण — पृष्ठ 120–122
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
खंड 5.8 एकांतर कोण
ग णत चचा
प्र.1 उदाहरण 1 — चत्र 5.26 म समांतर रेखाएँ l व m तयक रेखा t ारा प्र त े द क जाती ह। य द ∠6 का माप
135° हो तो अन्य कोण का माप क्या होगा?
l
2
135°
1 3 m
6
4
5 7
8
t
चत्र 5.26, पृष्ठ 121 — समांतर रेखाएँ l व m तयक रेखा t ारा प्र त े दत; ∠6 = 135°।
उत्तर
∠6 = 135° से आरंभ करके पूरे चत्र म च लए।
∠2 = ∠6 = 135° ( संगत कोण, l ∥ m)
∠8 = ∠6 = 135° (शीष िभमुख)
∠4 = ∠8 = 135° (संगत)
∠2 = ∠4 = 135° (शीष िभमुख) ✔
∠5 + ∠6 = 180° (रैिखक युग् म)
∠5 = 180° – 135° = 45°
इसी पकार ∠1 = ∠3 = ∠7 = 45°
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as e
क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
कोण माप
m as e
∠2, ∠4, ∠6, ∠8
.co
135°
a g l
se m
g l a
a
∠1, ∠3, ∠5, ∠7 45°
co m
ag
ऐसा क्य होता है: जब तयक रेखा समांतर रेखाओं को काटती है तो केवल दो माप बन सकते ह और उनका योग
m .
as e
180° होना चा हए। यहाँ वे 135° और 45° ह, तथा 135 + 45 = 180 ✔
a g l
co m
em.
m l as
m .co a g
l a se
a g
m a s
m .co agl
l a se
a g
co m
m .
m as e
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g l a
a c
m .
m a s e
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g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 49 of 71
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 उदाहरण 2 — चत्र 5.27 म रेखाएँ l व m तयक रेखा t ारा प्र त े द क जाती ह। य द ∠a का माप 120° हो
एवं ∠f का माप 70° हो तो क्या रेखाएँ l व m एक-दूसरे के समांतर ह?
120°
a b l
d c
70°
e f m
h g
t
चत्र 5.27, पृष्ठ 121 — रेखाएँ l व m तयक रेखा t ारा प्र त े दत; ∠a = 120° तथा ∠f = 70°।
उत्तर
नह , l और m समांतर नह ह।
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
∠a + ∠b = 180° (रैिखक युग् म)
120° + ∠b = 180°
∠b = 60°
∠b और ∠f संगत कोण है ं
l ∥ m के िलए ∠b = ∠f होना चािहए
परंत ु 60° ≠ 70° ✘
संगत कोण समान नह ह, अतः रेखाएँ समांतर नह ह।
ऐसा क्य होता है: ∠f, ∠b से 10° बड़ा है, अथात रेखा m, रेखा l से 10° अ धक झुक है। भन्न झुकाव वाली
रेखाएँ कह न कह मलती ही ह — यहाँ वे उस ओर मलगी जधर उनके बीच क दूरी घटती है।
संकेत: 120° क तुलना सीधे 70° से कभी मत क जए। पहले दोन कोण को दोन प्र त े द पर एक ही तम
लाइए, तभी तुलना क जए।
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 उदाहरण 3 — चत्र 5.28 म तयक रेखा t समांतर रेखाओं l व m को प्र त े द करती है। य द ∠3 का माप 50° है
तो ∠6 का माप क्या होगा?
l
1 2
4 3
50°
m
5 6
8 7
t
चत्र 5.28, पृष्ठ 121 — समांतर रेखाएँ l व m तयक रेखा t ारा प्र त े दत; ∠3 = 50°।
उत्तर
∠6 = 130°।
∠2 + ∠3 = 180° (रैिखक युग् म)
∠2 = 180° – 50° = 130°
∠2 = ∠6 ( संगत कोण, l ∥ m)
अतः ∠6 = 130°
साथ ही यह भी मलता है: ∠3 + ∠6 = 50° + 130° = 180°। कोण ∠3 और ∠6 तयक रेखा के एक ही ओर के अंत: कोण
कहलाते ह।
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: ∠3 और ∠2 मलकर एक सरल रेखा भरते ह, और ∠2 दूसरी समांतर रेखा पर ∠6 क ही
प्र त ल प है। इस लए ∠3 और ∠6 मलकर वही 180° का ऋजु कोण भरते ह।
प्र.4 क्या कोण ∠3 और ∠6 के बीच कोई संबंध है? आप ∠3 के व भन्न माप लेकर एवं ∠6 के माप दे खकर इस संबंध
को ात करने का प्रयत्न कर सकते ह। जब आपको यह संबंध ात हो जाए तो इसक जाँच करने का प्रयत्न कर
एवं सद्ध करने का प्रयत्न कर क क्या यह संबंध सदै व सत्य ही है।
उत्तर
हाँ: ∠3 + ∠6 = 180° सदै व। तयक रेखा के एक ही ओर के अंत: कोण संपूरक होते ह।
∠3 ∠ 2 = 180° – ∠ 3 ∠6 = ∠2 ∠3 + ∠6
50° 130° 130° 180°
70° 110° 110° 180°
90° 90° 90° 180°
115° 65° 65° 180°
उपप त्त ( बना कसी मापन के):
∠2 + ∠3 = 180° (रेखा l पर रैिखक युग् म)
∠2 = ∠6 (संगत कोण, l ∥ m)
पहली पंिक्त में ∠2 के स्थान पर ∠6 रिखए:
∠6 + ∠3 = 180°
ऐसा क्य होता है: पूरा तक केवल एक प्र त ापन है। ∠6 वास्तव म ∠2 ही है, बस दूसरे नाम से; और ∠2 पहले
से ही ∠3 का ऋजु-कोण साथी था। इस लए योग 180° के अलावा कुछ हो ही नह सकता।
क्या आप जानते ह? इन्ह सह-अंत: कोण भी कहते ह। संगत कोण और एकांतर कोण के साथ मलकर ये तीन तथ्य
इस अध्याय के लगभग हर प्रश्न को हल कर दे ते ह।
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as e
क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
उदाहरण 4 — चत्र 5.29 म रेखाखंड AB रेखाखंड CD के समांतर है एवं रेखाखंड AD रेखाखंड BC के समांतर
e
प्र.5
as
है। ∠ADC का माप 60° है। ∠CAB, ∠ABC एवं ∠BCD के माप क्या ह?
m l
m .co a g
l a se
a g
A
m B
.co ag
a sem
agl 65°
co m
em.
m l as
m .co a g
l a se
a g
s
60°
m a
m .co agl
D
l a se C
a g
co m
.
चत्र 5.29, पृष्ठ 122 — AB ∥ CD एवं AD ∥ BC, वकण AC स हत; ∠DAC = 65° तथा ∠ADC = 60°।
m
m as e
.co a g l
a s em
agl उत्तर
se m
चत्र 5.29 म ∠DAC = 65° भी दया गया है। अब अंत: कोण का नयम दो बार लगाइए।
com g l a
m . a
ase
agl
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
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g l as
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क ा 7 ग णत अध्याय 5 समांतर और प्र त े द रेखाएँ AglaSem · NCERT Solutions
चरण 1 — AB ∥ CD, ितयक रेखा AD
∠ADC + ∠DAB = 180° (एक ही ओर के अंत : कोण)
60° + ∠DAB = 180°
∠DAB = 120°
चरण 2 — ∠DAB को बाँिटए
∠DAB = ∠DAC + ∠CAB
120° = 65° + ∠CAB
∠CAB = 55°
चरण 3 — AD ∥ BC, ितयक रेखा CD
∠ADC + ∠BCD = 180°
60° + ∠BCD = 180°
∠BCD = 120°
चरण 4 — AB ∥ CD, ितयक रेखा BC
∠BCD + ∠ABC = 180°
120° + ∠ABC = 180°
∠ABC = 60°
अतः ∠CAB = 55°, ∠ABC = 60°, ∠BCD = 120°।
ऐसा क्य होता है: ABCD क सम्मुख भुजाओं के दोन युग्म समांतर ह, अतः यह एक समांतर चतुभुज है। इसी लए
सम्मुख कोण समान आते ह (∠ADC = ∠ABC = 60° तथा ∠DAB = ∠BCD = 120°) और आसन्न कोण का
योग 180° होता है।
स्वयं जाँ चए: 60 + 120 + 60 + 120 = 360°, जो कसी भी चतुभुज के कोण का सही योग है ✔
पता लगाइए — पृष्ठ 123–125
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खंड 5.8 एकांतर कोण
प्र.1 नीचे दए गए च ह्नत कोण को ात क जए — ( चत्र 5.30 : a, b, c, d, e, f, g, h, i तथा j)
48°
52°
a° b°
a=
b=
81° d°
99°
81° 99°
c°
c= d=
f°
e° 132°
69°
97° 83°
f=
e=
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g° 75°
58°
122° h°
122°
120°
58°
h=
g=
27°
i°
54° 97° 124°
j°
70° 56°
j=
i=
चत्र 5.30, पृष्ठ 123 — दस आकृ तयाँ (a) से (j), जनम च ह्नत कोण ात करने ह।
उत्तर
हर भाग संगत, एकांतर या अंत: कोण का एक-एक चरण है। कई भाग म एक अ त रक्त कोण छपा है जसक आवश्यकता नह
है।
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कोण मान कारण
a 48° 48° को तयक रेखा के सहारे दूसरी समांतर रेखा तक ले जाइए — वह संगत कोण भी 48° है, और a° उसका
शीषा भमुख कोण है
b 52° b और 52° दोन समांतर रेखाओं के एकांतर अंत: कोण ह
c 81° c और 99° एक ही ओर के अंत: कोण ह: c = 180° – 99°
d 99° d और 81° एक ही ओर के अंत: कोण ह: d = 180° – 81°
e 69° e और 69° एकांतर अंत: कोण ह (97° तथा 83° दूसरी तयक रेखा के ह और आवश्यक नह )
f 48° f और 132° एक ही ओर के अंत: कोण ह: f = 180° – 132°
g 122° g और दूसरी ऊध्वाधर रेखा पर बना 122° संगत कोण ह
h 75° h और 75° एकांतर अंत: कोण ह (120° क आवश्यकता नह )
i 54° तीर से च ह्नत दोन करण समांतर ह, अतः बाईं ओर का आधार कोण 56° है। त्रभुज म i = 180° – 70° – 56°
j 97° j और 97° पहली व तीसरी समांतर रेखा के एकांतर अंत: कोण ह (27° और 124° क आवश्यकता नह )
दो लंबे भाग पूरे वस्तार से:
भाग i: ित्रभुज के आधार कोण
दायाँ आधार कोण = 70°
बायाँ आधार कोण = 56° ( दाईं ओर के 56° का संगत कोण, क्योंिक दोनों िकरणे ं समांतर है)ं
i = 180° – 70° – 56° = 54°
दाएँ पाद पर जाँच : 70° + 54° + 56° = 180° ✔
भाग c: ऊपरी रेखा पर 99° + 81° = 180° ✔
c + 99° = 180° → c = 81°
ऐसा क्य होता है: जब तयक रेखा समांतर रेखाओं को काटती है तो केवल दो माप बनते ह और उनका योग 180°
होता है। इस लए हर उत्तर या तो कसी छपे कोण क प्र त ल प है या 180° म से उसे घटाने पर मलता है। सारा
काम यही तय करने का है क कौन-सा।
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संकेत: गणना से पहले तीर के चह्न दे खए। जस रेखा-युग्म पर तीर नह ह उस पर ये नयम लगाए ही नह जा
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सकते — इसी लए भाग e, h और j म अ त रक्त संख्याएँ द गई ह।
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