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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा7
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 6: संख्याओं का खेल
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ग णत प्रकाश
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
127 - 145 20 75 हन्द
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कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 7 · ग णत · ग णत प्रकाश
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 6: संख्याओं का खेल
ग णत प्रकाश कक्षा 7 के अध्याय 6 म संख्याएँ एक खेल बन जाती ह। ब क पं क्त को उनके ारा बोली गई संख्याओं से पढ़ना, समानता (सम या
वषम) सीखना और उससे यह तय करना क क्या संभव है, जादुई वग बनाना, भारतीय काव्य से जन्मी वरहांक– फबोनाची संख्याएँ जानना तथा
क्रप्टा रथम हल करना — यही इस अध्याय क यात्रा है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
ग णत प्रकाश (कक्षा 7) 127 - 145
खं ड प्रश्न
20 75
माध्यम
हन्द
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 127
अनु े द 6.1 संख्याएँ हम बताती ह
प्र.1 नीचे दए गए चत्र म वद्यमान संख्याएँ हम क्या बताती ह?
0
1
0 2
2
2
1
पृष्ठ 127 का चत्र — पं क्त म खड़े सात ब े, प्रत्येक एक संख्या बोलता हुआ।
प्रत्येक संख्या बताती है क उस ब े के सामने खड़े कतने ब े उससे लंबे ह। वास्त वक ऊँचाई का पता नह चलता — केवल
तुलना का पता चलता है।
पहले चत्र म सात ब े बाईं ओर से इस प्रकार बोलते ह —
0, 1, 0, 2, 2, 2, 1
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कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल AglaSem · NCERT Solutions
एक-एक करके दे खए —
पहले ब े के सामने कोई नह है, अत: उसक संख्या 0 है।
दूसरे ब े के सामने एक लंबा ब ा है, अत: 1।
तीसरा ब ा सबसे लंबा है, अत: उसके सामने कोई लंबा नह — 0।
अं तम ब े के सामने केवल दो ब े उससे लंबे ह — 1।
ऐसा क्य होता है: यह संख्या एक गनती है, माप नह । भन्न- भन्न ऊँचाइय वाले दो समूह भी वही संख्याएँ बोल
सकते ह, य द लंबाई का क्रम समान हो।
प्र.2 आपके वचार से इन संख्याओं का क्या तात्पय है?
दूसरे चत्र म भी इनका वही तात्पय है — सामने खड़े उन ब क संख्या जो लंबाई म बड़े ह।
पुनव्यव ा के बाद बाईं ओर से बोली गई संख्याएँ ह —
0, 0, 1, 2, 2, 5, 6
सबसे लंबा ब ा (बाईं ओर से दूसरा) 0 बोलता है तथा सबसे छोटा ब ा अंत म खड़ा है और 6 बोलता है, क्य क उसके सामने
खड़े छह ब े उससे लंबे ह।
संकेत: अं तम संख्या बताती है क पूरी पं क्त म कतने ब े अं तम ब े से लंबे ह। य द अं तम ब ा सबसे छोटा है
तो यह संख्या ब क कुल संख्या से एक कम होगी।
प्र.3 क्या आप पता लगा पाए क ये संख्याएँ क्या बता रही ह? दे खए और ात करने का प्रयास क जए।
हाँ। नयम यह है — प्रत्येक ब ा अपने सम्मुख खड़े उन ब क संख्या बोलता है जो लंबाई म उससे बड़े ह।
दोन चत्र म इसक जाँच क जए — प्रत्येक संख्या इस नयम से मेल खाती है।
पं क्त म ान 1 2 3 4 5 6 7
पहला िचत्र 0 1 0 2 2 2 1
दू स रा िचत्र 0 0 1 2 2 5 6
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ऐसा क्य होता है: पहले ब े के सामने कोई नह होता, अत: पहली संख्या सदै व 0 होती है। जो ब ा अब तक
सबसे लंबा है, वह भी 0 बोलेगा।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 128
अनु े द 6.1 संख्याएँ हम बताती ह
प्र.1 उस संख्या को ल खए जो प्रत्येक ब े को इस नयम के आधार पर नीचे दशाई गई व्यव ा के लए बोलनी
चा हए।
पृष्ठ 128 क व्यव ा — पुस्तक म संवाद-बुलबुले खाली छपे ह।
चत्र को बाईं ओर से दे खए। लंबाई के अनुसार क्रम है — लाल, हरा, नीला, गुलाबी, गहरा पीला, नारंगी, हल्का पीला (सबसे लंबे से
सबसे छोटे तक)।
अब प्रत्येक ब े के सामने खड़े लंबे ब को ग नए —
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कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
ब ा (बाईं ओर से) सामने खड़े लंबे ब े बोली गई संख्या
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1 — हल्का पीला (सबसे छोटा) कोई नह
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0
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g l a कोई नह
a
2 — हल्का नीला 0
3 — गहरा पीला हल्का नीला 1
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seनीला, गहरा पीला, हरा
4 — हरा कोई नह 0
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5 — नारंग ी
ag हल्का 3
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6 — लाल (सबसे लंबा) कोई नह 0
3 em
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7 — गल
ु ाबी हल्का नीला, हरा, लाल
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अत: अनुक्रम है — 0, 0, 1, 0, 3, 0, 3
s
स्वयं जाँ चए: 0 ठ क वह आता है जहाँ ब ा अपने सामने खड़े सभी ब से लंबा है।
m a
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l a se
पता लगाइए — पृष्ठ 128 a g
अनु े द 6.1 संख्याएँ हम बताती ह
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m .
m l a se
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इस पुस्तक के अंत म दए गए स्टकर चत्र के कटआउट को इस प्रकार व्यव
ag
m ख चकर उसक ऊँचाई के आधार पर ऐसी व्यव ा बनाइए क उनका अनुक्रम नम्न ल खत रूप म पढ़ा जाए —
प्र.1 त क जए अथवा रेखा खंड
l a se
ag (a) 0, 1, 1, 2, 4, 1, 5 (b) 0, 0, 0, 0, 0, 0, 0 (c) 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6 (d) 0, 1, 0, 1, 0, 1, 0 (e) 0, 1, 1,
se m
1, 1, 1, 1 (f) 0, 0, 0, 3, 3, 3, 3
com g l a
m . a
ase
agl
सात कटआउट को 1 से 7 ऊँचाइयाँ द जए, जहाँ 7 सबसे लंबा और 1 सबसे छोटा है। अब उन्ह नीचे दए क्रम म बाएँ से दाएँ
र खए।
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वां छत अनुक्रम ऊँचाइयाँ, बाएँ → दाएँ (7 = सबसे लंबा)
(a) 0, 1, 1, 2, 4, 1, 5 7, 3, 5, 4, 1, 6, 2
(b) 0, 0, 0, 0, 0, 0, 0 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7
(c) 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6 7, 6, 5, 4, 3, 2, 1
(d) 0, 1, 0, 1, 0, 1, 0 2, 1, 4, 3, 6, 5, 7
(e) 0, 1, 1, 1, 1, 1, 1 7, 1, 2, 3, 4, 5, 6
(f) 0, 0, 0, 3, 3, 3, 3 5, 6, 7, 1, 2, 3, 4
(a) क जाँच एक-एक करके —
7 → सामने कोई नही ं = 0
3 → सामने लंबे: 7 = 1
5 → सामने लंबे: 7 = 1
4 → सामने लंबे: 7, 5 = 2
1 → सामने लंबे: 7, 3, 5, 4 = 4
6 → सामने लंबे: 7 = 1
2 → सामने लंबे: 7, 3, 5, 4, 6 = 5
(f) क जाँच — ऊँचाइयाँ 5, 6, 7, 1, 2, 3, 4 से 0, 0, 0, 3, 3, 3, 3 प्राप्त होता है, क्य क पहले तीन ब े अं तम चार से लंबे
ह।
ऐसा क्य होता है: पं क्त को अं तम ब े से पीछे क ओर बनाइए। य द कसी ब े को k बोलना है तो उसके
सामने रखे गए ब म ठ क k ब े उससे लंबे होने चा हए। इस प्रश्न के प्रत्येक भाग म ऊँचाइय का क्रम पूणत:
न त हो जाता है, अत: प्रत्येक भाग का एक ही उत्तर है।
प्रयास क जए: प्रत्येक अनुक्रम संभव नह होता। 0, 2, 0, 0, 0, 0, 0 कभी संभव नह है, क्य क दूसरे ब े के
सामने केवल एक ब ा है, वह दो लंबे ब े नह दे ख सकता।
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प्र.2 नीचे दए गए कथन म से प्रत्येक के बारे म सो चए तथा पहचान क जए क यह कथन सदै व सत्य है या केवल
कभी-कभी सत्य है या सदै व असत्य है। अपने तक को साझा क जए। (a) य द कोई व्य क्त ‘0’ बोलता है तो ऐसे
व्य क्त उस समूह म सबसे लंबे ह। (b) य द कोई व्य क्त सबसे लंबा है तो उसक संख्या ‘0’ है। (c) सबसे पहले
व्य क्त क संख्या ‘0’ है। (d) य द कोई व्य क्त पं क्त म प्रथम या अं तम नह है (अथात ऐसे व्य क्त जो कह बीच
म खड़े ह) तो वह ‘0’ नह बोल सकता है। (e) वह व्य क्त जो सबसे बड़ी संख्या बोलता है, वह सबसे छोटा है। (f)
8 व्य क्तय के समूह म अ धकतम संभा वत संख्या क्या है?
कथन उत्तर कारण
(a) ‘0’ बोलने वाला सबसे लंबा है के वल कभी-कभी 0 का अथ केवल इतना है क सामने कोई लंबा नह है। पहला ब ा सबसे
सत्य छोटा होकर भी 0 बोलता है।
(b) सबसे लंबे की संख्या ‘0’ है सदै व सत्य पूरी पं क्त म कोई उससे लंबा नह , अत: सामने भी कोई लंबा नह ।
(c) पहले व्यिक्त की संख्या ‘0’ है सदै व सत्य पहले व्य क्त के सामने गनने के लए कोई नह है।
(d) बीच में खड़ा व्यिक्त ‘0’ नही ं बोल के वल कभी-कभी 5, 6, 7, 1, 2, 3, 4 म तीसरा ब ा बीच म है और 0 बोलता है।
सकता सत्य
(e) सबसे बड़ी संख्या बोलने वाला के वल कभी-कभी 7, 3, 5, 4, 1, 6, 2 म सबसे बड़ी संख्या 5 दूसरे सबसे छोटे ब े ने बोली है।
सबसे छोटा है सत्य
(f) 8 व्य क्तय के समूह म अ धकतम संभा वत संख्या 7 है।
के वल सामने खड़ े व्यिक्त ही िगने जाते है।
ं
8वें (अंितम) व्यिक्त के सामने 7 व्यिक्त है।
ं
अिधकतम िस्थित में सातों उससे लंबे → अिधकतम संख्या = 7
ऐसा क्य होता है: ान p पर खड़ा व्य क्त अ धकतम p – 1 बोल सकता है। अत: n व्य क्तय के समूह म
अ धकतम संभा वत संख्या n – 1 है, और वह तभी संभव है जब अं तम व्य क्त सबसे छोटा हो।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 129
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अनु े द 6.2 समानता चयन
प्र.1 क्या आप पता कर सकते ह क कन 5 काड के योग से योगफल 30 प्राप्त होगा? क्या ऐसा करना संभव है? इस
संग्रह म से 5 काड चुनने क अनेक व धयाँ ह। क्या सभी संभावनाओं क जाँच कए बना एक हल ात करने क
कोई व ध है?
9 9 7 7 5 5 3 3
13 13 1 1 11 11
9 9 7 7 5 5 3 3
13 1 11
कशोर के संख्या-काड का संग्रह, पृष्ठ 129।
ऐसा संभव नह है। उस संग्रह से चुने गए कन्ह भी 5 काड का योग 30 नह हो सकता।
कशोर के काड को दे खए — 13, 9, 1, 7, 11, 5 और 3। प्रत्येक काड पर एक वषम संख्या अं कत है।
िवषम + िवषम = सम
(िवषम + िवषम) + िवषम = सम + िवषम = िवषम
5 िवषम संख्याएँ = (िवषम + िवषम) + (िवषम + िवषम) + िवषम = सम + सम + िवषम = िवषम
30 एक सम संख्या है, अत: योग कभी 30 नही ं हो सकता।
ऐसा क्य होता है: सैकड़ संभावनाओं क जाँच करने क आवश्यकता नह है। वषम संख्याएँ दो-दो करके सम योग
बनाती ह; 5 काड म एक वषम संख्या सदै व शेष रह जाती है, अत: योग सदै व वषम होगा।
संकेत: य द लक्ष्य कोई वषम संख्या होती, जैसे 31, तो यह सरल था — 13 + 9 + 5 + 3 + 1 = 31।
प्र.2 कुछ सम संख्याओं को जो ड़ए। आपको कस प्रकार क संख्या प्राप्त होती है? क्या इससे कोई अंतर पड़ता है क
आप ऐसी कतनी संख्याएँ जोड़ते ह?
योग सदै व सम होता है, और इससे कोई अंतर नह पड़ता क आप कतनी सम संख्याएँ जोड़ते ह।
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4 + 6 = 10 (सम)
4 + 6 + 8 = 18 (सम)
4 + 6 + 8 + 10 + 12 = 40 (सम)
ऐसा क्य होता है: प्रत्येक सम संख्या को पूण युग्म म बना कसी शेष के रखा जा सकता है। ऐसे अनेक संग्रह को
मलाने पर भी केवल पूण युग्म ही बनते ह, अत: योग पुन: सम होता है।
प्र.3 अब कुछ वषम संख्याओं को लेकर जो ड़ए। आपको कस प्रकार क संख्या प्राप्त होती है? क्या इससे कोई अंतर
पड़ता है क आप कतनी वषम संख्याएँ जोड़ते ह?
यहाँ अंतर पड़ता है क आप कतनी वषम संख्याएँ जोड़ते ह।
कतनी वषम संख्याएँ उदाहरण योग क समानता
2 3+5=8 सम
3 3 + 5 + 7 = 15 िवषम
4 3 + 5 + 7 + 9 = 24 सम
5 3 + 5 + 7 + 9 + 11 = 35 िवषम
अथात सम संख्या म वषम संख्याएँ जोड़ने पर योग सम होता है तथा वषम संख्या म वषम संख्याएँ जोड़ने पर योग वषम होता
है।
ऐसा क्य होता है: प्रत्येक वषम संख्या युग्म के साथ एक अ त रक्त बदु रखती है। दो अ त रक्त बदु मलकर एक
और युग्म बना लेते ह। य द वषम संख्याओं क गनती सम है तो सभी शेष बदु युग्म बना लेते ह और योग सम होता
है; य द गनती वषम है तो ठ क एक बदु अकेला रह जाता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 130
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
अनु े द 6.2 समानता चयन
co m
em.
m l as
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तीन वषम संख्याओं को जोड़ने के बारे म आप क्या कह सकते ह? क्या प रणामी योग को युग्म के रूप म
m त कया जा सकता है?
प्र.1
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व्यव
a g
co m
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नह । तीन वषम संख्याओं का योग सदै व वषम होता है, अत: उसे युग्म म व्यव त नह कया जा सकता।
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ag एक युग्म बनाते है)ं
िवषम + िवषम = सम (दोनों शेष िबंद ु िमलकर
सम + िवषम = िवषम (पुन : एक िबंद ु शेष रह जाता है)
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as
अत: िवषम + िवषम + िवषम = िवषम
c o m
उदाहरण. — 5 + 7 + 9 = 21, तथा 21 िबंद ुओ ं में एक िबंद ु अके ला रह जाता है।a g l
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ऐसा क्य होता है: तीन शेष बदुओं का युग्म नह बन सकता — दो बदु एक युग्म बनाते ह और तीसरे का कोई
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साथी नह बचता।
se m
g l a
a
m
पता लगाइए क (a) 4 वषम संख्याओं के, (b) 5 वषम संख्याओं के तथा (c) 6 वषम संख्याओं के योग क
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प्र.2
त म क्या होता है?
m .
ase
उत्तर .c
om a g l
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agl वषम संख्याओं क गनती उदाहरण योग समानता
se m
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सम
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(a) 4 1+3+5+7 16
m
ase
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(b) 5 1+3+5+7+9 25 िवषम
(c) 6 1 + 3 + 5 + 7 + 9 + 11 36 सम
co m
m .
(a) सम
m
(b) वषम (c) सम
as e
.co a g l
se m ऐसा क्य होता है: शेष बदु दो-दो करके समाप्त होते ह। 4 अथवा 6 वषम संख्याओं म प्रत्येक शेष बदु को साथी
g l a
a मल जाता है; 5 वषम संख्याओं म एक बदु सदै व अकेला रह जाता है।
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प्र.3 दो भाई-बहन मा टन और मा रया का जन्म ठ क एक वष के अंतराल म हुआ। आज वे अपना जन्म दन मना रहे
ह। मा रया कहती है क उनक आयु का योग 112 वष है। क्या यह संभव है? य द हाँ, तो क्य ? य द नह , तो क्य
नह ?
नह , यह संभव नह है।
एक वष के अंत राल में जन्म ⇒ उनकी आयु क्र मागत संख्याएँ है।ं
िकन्ही ं दो क्रमागत संख्याओं में एक सम होती है और दू सरी िवषम।
सम + िवषम = िवषम
परंत ु 112 एक सम संख्या है। अत: उनकी आयु का योग 112 नही ं हो सकता।
कुछ युग्म लेकर दे खए —
55 + 56 = 111 (िवषम)
56 + 57 = 113 (िवषम)
51 + 52 = 103 (िवषम)
संकेत: 111 और 113 ठ क 112 के नीचे और ऊपर ह — योग हर बार 2 से बढ़ता है और प्रत्येक सम संख्या को
छोड़ दे ता है।
पता लगाइए — पृष्ठ 131
अनु े द 6.2 समानता चयन
प्र.1 वषम और सम संख्याओं के चत्रीय नरूपण क अपनी समझ का उपयोग करते हुए नम्न ल खत म से प्रत्येक
योग क समानता ात क जए — (a) 2 सम संख्याओं और 2 वषम संख्याओं का योग (सम + सम + वषम +
वषम) (b) 2 वषम संख्याओं और 3 सम संख्याओं का योग (c) 5 सम संख्याओं का योग (d) 8 वषम संख्याओं
का योग
सम संख्याएँ केवल पूण युग्म लाती ह। शेष बदु केवल वषम संख्याएँ लाती ह, अत: केवल यह ग नए क वषम संख्याएँ कतनी ह।
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योग वषम संख्याओं क गनती शेष बदु समानता
(a) 2 सम + 2 वषम 2 (सम गनती) पूरे युग्म बन जाते ह सम
(b) 2 वषम + 3 सम 2 (सम गनती) पूरे युग्म बन जाते ह सम
(c) 5 सम 0 कोई नह सम
(d) 8 वषम 8 (सम गनती) पूरे युग्म बन जाते ह सम
चार योग सम ह।
(a) 4 + 6 + 3 + 5 = 18 सम
(b) 3 + 5 + 2 + 4 + 6 = 20 सम
(c) 2 + 4 + 6 + 8 + 10 = 30 सम
(d) 1 + 3 + 5 + 7 + 9 + 11 + 13 + 15 = 64 सम
ऐसा क्य होता है: सम संख्याएँ युग्मन को बगाड़ती नह ह। पूरे योग क समानता केवल इस पर नभर करती है क
वषम संख्याएँ कतनी ह — सम गनती → सम योग, वषम गनती → वषम योग।
प्र.2 लता के पास उसके गुल्लक म ₹1 के सक्के वषम संख्या म ह, ₹5 के सक्के वषम संख्या म ह तथा ₹10 के
सक्के सम संख्या म ह। उसे कुल धनरा श क गणना करने पर ₹205 प्राप्त हुए। क्या उसने गणना म कोई त्रु ट
क ? य द कोई त्रु ट नह हुई तो उसके पास प्रत्येक प्रकार के कतने सक्के हो सकते ह? य द उससे कोई त्रु ट हुई
तो स्पष्ट क जए क ऐसा क्य हुआ होगा?
हाँ, लता ने गणना म त्रु ट क है। इन गन तय के साथ कुल धनरा श कभी ₹205 नह हो सकती।
मान ली जए उसके पास ₹1 के a सक्के (a वषम), ₹5 के b सक्के (b वषम) तथा ₹10 के c सक्के (c सम) ह।
₹1 के िसक्कों से मूल्य = a → िवषम
₹5 के िसक्कों से मूल्य = 5b, तथा िवषम × िवषम = िवषम
₹10 के िसक्कों से मूल्य = 10c → सम (10 सम है)
कु ल = िवषम + िवषम + सम = सम + सम = सम
परंत ु ₹205 िवषम है। अत: यह कु ल असंभ व है।
एक उदाहरण से जाँ चए — ₹1 के 3 सक्के, ₹5 के 5 सक्के, ₹10 के 4 सक्के।
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3 × 1 + 5 × 5 + 4 × 10 = 3 + 25 + 40 = ₹68 (सम, जै सा अपेिक्षत था)
ऐसा क्य होता है: ₹10 का सक्का समानता को कभी नह बदल सकता, तथा ₹1 वाला भाग और ₹5 वाला भाग
दोन वषम ह। दो वषम रा शयाँ सदै व मलकर सम रा श बनाती ह, अत: लता का कुल सदै व सम रुपये होगा।
स्वयं जाँ चए: ₹204 या ₹206 संभव है, परंतु कोई भी वषम कुल रा श संभव नह है।
प्र.3 हम जानते ह क — (a) सम + सम = सम (b) वषम + वषम = सम (c) सम + वषम = वषम। इसी प्रकार नीचे
द गई तय के लए समानता ात क जए — (d) सम – सम = _____ (e) वषम – वषम = _____ (f) सम –
वषम = _____ (g) वषम – सम = _____
सं क्रया समानता उदाहरण
(d) सम – सम सम 10 – 4 = 6
(e) वषम – वषम सम 9–3=6
(f) सम – वषम िवषम 10 – 3 = 7
(g) वषम – सम िवषम 9–4=5
ऐसा क्य होता है: घटाना भी यहाँ जोड़ने जैसा ही व्यवहार करता है। पूण युग्म म से पूण युग्म नकालने पर पूण
युग्म ही बचते ह (सम)। एक शेष बदु म से दूसरा शेष बदु नकालने पर भी पूण युग्म बचते ह (सम)। केवल तब एक
बदु अकेला बचता है जब एक पक्ष म शेष बदु हो और दूसरे म न हो।
संकेत: आठ तथ्य को याद रखने का सरल तरीका — उत्तर तभी वषम होता है जब दोन संख्याओं क समानता
भन्न हो, चाहे + हो या –।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 131
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जाल ( ग्रड) म छोटे वग
प्र.1 कसी एक ग्रड क वमाएँ ( वस्तार) द गई होने पर क्या आप गुणनफल को प रक लत कए बना छोटे वग क
संख्या क समानता बता सकते ह?
हाँ। केवल दोन वमाओं क समानता दे खए।
ग्रड M × N छोटे वग क संख्या उदाहरण
m और n दोनों िवषम िवषम 3×3=9
इनमें से एक सम सम 3 × 4 = 12
दोनों सम सम 4 × 6 = 24
छोटे वग ं की संख्या = m × n
िवषम × िवषम = िवषम
सम × कोई भी संख्या = सम
ऐसा क्य होता है: य द एक भुजा सम है तो पूरे ग्रड को स्तंभ (या पं क्तय ) के पूण युग्म म बाँटा जा सकता है,
अत: वग पूणत: युग्म बना लेते ह। य द दोन भुजाएँ वषम ह तो प्रत्येक पं क्त म एक वग शेष बचता है और पं क्तय
क संख्या भी वषम है, अत: अंत म एक वग अकेला रह जाता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 132
व्यंजक क समानता
प्र.1 इन ग्रड म छोटे वग क संख्या क समानता ात क जए — (a) 27 × 13 (b) 42 × 78 (c) 135 × 654
ग्रड दोन भुजाओं क समानता संख्या क समानता वास्त वक गुणनफल
(a) 27 × 13 वषम, वषम िवषम 351
(b) 42 × 78 सम, सम सम 3276
(c) 135 × 654 वषम, सम सम 88290
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co m
m.
ऐसा क्य होता है: गुणनफल वषम केवल तभी होता है जब प्रत्येक गुणनखंड वषम हो। एक भी सम गुणनखंड 2
m as e
l
का गुणनखंड दे दे ता है और पूरा गुणनफल सम हो जाता है।
.co a g
a s em
agl
स्वयं जाँ चए: समानता बना गुणा कए ज्ञात क गई है — गुणनफल केवल पु के लए दए गए ह।
co m
m . ag
l a se
एक ऐसा व्यंजक ल खए जसक समानता सदै व सम है। इसके कुछ उदाहरण ह, जैसे — 100p और 48w – 2,
इसी प्रकार के और अ धक व्यंजक g
प्र.2
a ात करने का प्रयास क जए।
co m
m.
m as e
.co l
ऐसा कोई भी व्यंजक जसका प्रत्येक पद 2 का गुणज हो, सदै व सम मान दे ता है।
a g
a s em
a gl • 6k • 10m • 4a + 8 • 12t – 6 • 100p • 48w – 2
2n
m a s
.co agl
एक क जाँच क जए —
a s em
4a + 8 → a = 1: 12, a = 2: a gl a = 3: 20 — सभी
16, सम
co m
m .
e
ऐसा क्य होता है: व्यंजक को 2 × (कुछ) के रूप म ल खए। जैसे 4a + 8 = 2(2a + 4)। जस संख्या म 2
m l as
.co a g
गुणनखंड हो उसे सदै व युग्म म व्यव त कया जा सकता है, अत: वह सम है।
se m
g l a
a
se m
com a
ऐसे व्यंजक ल खए जनक समानता सदै व वषम है।
l
प्र.3
. a g
m
ase
agl
सदै व सम रहने वाले व्यंजक म 1 (या कोई वषम संख्या) जोड़ या घटा द जए।
co m
m .
2n + 1 • 2m – 1 • 4n + 3 • 6k + 5 • 8a + 3 • 10p – 7
m as e
.co a g l
a s emएक क जाँच क जए —
agl
.c
s e m
m a
agl
6k + 5 → k = 1: 11, k = 2: 17, k = 3: 23 — सभी िवषम
. co
e m
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 14 of 57
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कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: 6k पूण युग्म का संग्रह है; उसम 5 जोड़ने पर (5 स्वयं वषम है) एक बदु बना साथी के रह
जाता है। अत: मान कभी सम नह हो सकता।
प्र.4 3n + 4 जैसे कुछ अन्य व्यंजक ल खए जनक समानता या तो वषम हो सकती है या फर सम हो सकती है।
ऐसा पद ली जए जसका गुणांक वषम हो, जससे n बदलने पर समानता भी बदलती रहे।
3n + 4 • 5n + 2 • 7n + 1 • 9n – 4 • n + 3
N 5N + 2 समानता
1 7 वषम
2 12 सम
3 17 वषम
4 22 सम
ऐसा क्य होता है: 5n + 2 म 5n तब वषम होता है जब n वषम हो तथा तब सम होता है जब n सम हो। न त
सम संख्या 2 जोड़ने से यह नह बदलता, अत: उत्तर एकांतर रूप से वषम और सम होता रहता है।
प्र.5 व्यंजक 6k + 2 का मान 8, 14, 20, ... प्राप्त होता है (k = 1, 2, 3, ... के लए)। इसम अनेक सम संख्याएँ छू ट
गई ह। क्या ऐसे व्यंजक ह जनके उपयोग से हम सभी सम संख्याओं क सूची बना सकते ह? (संकेत — सभी
सम संख्याओं का एक गुणनखंड 2 है।)
हाँ — वह व्यंजक 2n है।
n = 1, 2, 3, 4, 5, …
2n = 2, 4, 6, 8, 10, … — पत्येक सम संख्या आ जाती है, कोई नही ं छू टती।
6k + 2 से तुलना क जए —
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कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल AglaSem · NCERT Solutions
व्यंजक मान क्या छू ट जाता है
6k + 2 8, 14, 20, 26, … 2, 4, 6, 10, 12, 16, …
2n 2, 4, 6, 8, 10, … कुछ नह
ऐसा क्य होता है: 6k + 2 = 2(3k + 1) है, अत: इससे केवल वही सम संख्याएँ मलती ह जनका आधा 3k + 1
के रूप का हो — यह 6 के पग म बढ़ता है। 2n दो के पग म बढ़ता है, अत: वह प्रत्येक सम संख्या को पकड़ लेता
है।
प्र.6 क्या ऐसे व्यंजक ह जनके उपयोग से हम सभी वषम संख्याओं क सूची बना सकते ह?
हाँ — 2n – 1 (जहाँ n = 1, 2, 3, …)।
n = 1 → 2(1) – 1 = 1
n = 2 → 2(2) – 1 = 3
n = 3 → 2(3) – 1 = 5
n = 4 → 2(4) – 1 = 7 … इत्यािद
व्यंजक 2n + 1 भी केवल वषम संख्याएँ दे ता है, परंतु n = 1 से आरंभ करने पर वह 3, 5, 7, … दे ता है और 1 छू ट जाता है।
ऐसा क्य होता है: प्रत्येक वषम संख्या कसी सम संख्या से एक कम होती है। 2n सभी सम संख्याएँ दे ता है, अत:
2n – 1 सभी वषम संख्याएँ दे ता है।
प्र.7 2 के गुणज का nवाँ पद क्या होगा? अथवा nव सम संख्या क्या है?
nव सम संख्या 2n है।
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कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल AglaSem · NCERT Solutions
पहली सम संख्या = 2 × 1 = 2
दू सरी सम संख्या = 2 × 2 = 4
पाँच वी ं सम संख्या = 2 × 5 = 10
ते इसवी ं सम संख्या = 2 × 23 = 46
ऐसा क्य होता है: सम संख्याएँ ठ क 2 के गुणज ह, और 2 का nवाँ गुणज 2 × n होता है।
प्र.8 100व वषम संख्या क्या है?
100व वषम संख्या 199 है।
100वी ं सम संख्या = 2 × 100 = 200
पत्येक स्थान पर िवषम संख्या, सम संख्या से एक कम होती है —
सम: 2, 4, 6, 8, 10, …
िवषम: 1, 3, 5, 7, 9, …
100वी ं िवषम संख्या = 200 – 1 = 199
ऐसा क्य होता है: दोन अनुक्रम ान-दर- ान साथ चलते ह और वषम अनुक्रम सदै व ठ क 1 पीछे रहता है —
इसी लए 2n तथा 2n – 1 nव सम और वषम संख्या दे ते ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 133
अनु े द 6.3 जाल ( ग्रड) म कुछ खोज
प्र.1 100व सम संख्या क्या है?
100व सम संख्या 200 है।
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कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल AglaSem · NCERT Solutions
nवी ं सम संख्या = 2n
100वी ं सम संख्या = 2 × 100 = 200
संकेत: यह ज्ञात होते ही 100व वषम संख्या भी तुरंत मल जाती है — 200 – 1 = 199।
प्र.2 nव वषम संख्या ात करने के लए एक सूत्र ल खए।
nव वषम संख्या 2n – 1 है।
चरण 1: उस स्थान की सम संख्या ात कीिजए → 2n
चरण 2: उसमें से 1 घटाइए → 2n – 1
N 2N 2N – 1
1 2 1
2 4 3
7 14 13
50 100 99
ऐसा क्य होता है: 2n सदै व सम है, अत: 2n – 1 सदै व वषम है, और n = 1, 2, 3, … रखने पर 1, 3, 5, 7, …
क्रम से बना कसी अंतराल के प्राप्त होते ह।
प्र.3 क्या आप पता लगा पाए ह क घेरा लगी हुई संख्याएँ क्या नरू पत करती ह?
हाँ — प्रत्येक पीले घेरे क संख्या उसके सामने वाली पं क्त अथवा स्तंभ का योग है।
पुस्तक म दए गए ग्रड के लए —
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as e
कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
स्तंभ 1 स्तंभ 2 स्तंभ 3 पं क्त योग
m 4 as e
पंिक्त 1
.co
7 5
a g l16
se m
g l a 6 1 2
a
पंिक्त 2 9
पंिक्त 3 3 9 8 20
co m
स्तंभ योग 13 17
em . 15 — ag
g l as
a
4 + 7 + 5 = 16 • 6 + 1 + 2 = 9 • 3 + 9 + 8 = 20
co m
m.
4 + 6 + 3 = 13 • 7 + 1 + 9 = 17 • 5 + 2 + 8 = 15
m as e
.co a g l
a s emजाँ चए: 16 + 9 + 20 = 45 तथा 13 + 17 + 15 = 45 — दोन 1 + 2 + … + 9 के बराबर ह।
gl
स्वयं
a
omग्रड भ रए — a s
em
. cगए agl
s
ऊपर बताए गए नयम के आधार पर नीचे दए
a
प्र.4
agl
co m
.
1 से 9 तक क संख्याओं का बना पुनरावृ त्त के उपयोग क जए, जससे प्रत्येक पं क्त और प्रत्येक स्तंभ का योग घेरे क संख्या के
e m
as
बराबर हो।
m l
m .co a g
पहला ग्रड — पं क्त योग 13, 14, 18 तथा स्तंभ योग 24, 9, 12; ऊपर बाएँ कोने म 9 और नीचे दाएँ कोने म 5 दए ह।
l a se
ag स्तंभ 1 स्तंभ 2 स्तंभ 3 पं क्त योग
se m
पंिक्त 1 9
com
1 3 13
g l a
m .2 a
as e
agl
पंिक्त 2 8 4 14
पंिक्त 3 7 6 5 18
. co45m
m
स्तंभ योग 24 9 12
m as e
.co a g l
m
यह इस प्रकार ज्ञात हुआ —
l a se
ag
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 19 of 57
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कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल AglaSem · NCERT Solutions
पंिक्त 1: 9 + ? + ? = 13 → शेष दो का योग 4 → वे 1 और 3 है ं
स्तं भ 1: 9 + ? + ? = 24 → शेष दो का योग 15 → वे 7 और 8 है ं
पंिक्त 3: ? + ? + 5 = 18 → पहले दो का योग 13 → अत: 7 पंिक्त 3 स्तं भ 1 में और 6 पंिक्त 3 स्तं भ 2 में
स्तं भ 2: 1 + ? + 6 = 9 → बीच का मान 2
पंिक्त 2: 8 + 2 + ? = 14 → अंितम मान 4 ✓
दूसरा ग्रड — पं क्त योग 24, 15, 6 तथा स्तंभ योग 12, 16, 17; बीच वाली पं क्त के बाएँ खाने म 4 और अं तम पं क्त के दाएँ
खाने म 3 दए ह।
स्तंभ 1 स्तंभ 2 स्तंभ 3 पं क्त योग
पंिक्त 1 7 8 9 24
पंिक्त 2 4 6 5 15
पंिक्त 3 1 2 3 6
स्तंभ योग 12 16 17 45
पंिक्त 1 का योग 24 है और तीन िभन्न संख्याओं का अिधकतम योग 9 + 8 + 7 = 24 है → पंिक्त 1 में 7, 8, 9
ही आएँगे
पंिक्त 3 का योग 6 है जो न्यून तम संभ व योग है और 3 पहले से है → शेष दो 1 और 2 है ं
स्तं भ 1: ? + 4 + ? = 12 → 7 + 4 + 1 = 12 ✓
स्तं भ 2: 8 + 6 + 2 = 16 ✓ स्तं भ 3: 9 + 5 + 3 = 17 ✓
क्या आप जानते ह? दूसरे ग्रड का एक और हल भी है — 7, 9, 8 / 4, 5, 6 / 1, 2, 3 भी सभी घेर से मेल
खाता है। पहले ग्रड का हल केवल एक ही है।
ऐसा क्य होता है: तीन पं क्त योग जोड़ने पर सदै व 1 + 2 + … + 9 = 45 प्राप्त होता है और स्तंभ योग जोड़ने पर
भी। पहले यही जाँच ली जए (13 + 14 + 18 = 45, 24 + 9 + 12 = 45) — तब पता चल जाता है क प्रश्न हल
करने योग्य है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 134
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अनु े द 6.3 जाल ( ग्रड) म कुछ खोज
प्र.1 इसी प्रकार के कुछ प्रश्न स्वयं बनाइए तथा अपने सहपा ठय को चुनौती द जए।
कसी भरे हुए ग्रड से आरंभ क जए और संख्याएँ छपा द जए — केवल घेरे शेष रहने द जए।
यहाँ एक प्रश्न दया जा रहा है —
स्तंभ 1 स्तंभ 2 स्तंभ 3 पं क्त योग
पंिक्त 1 2 9 4 15
पंिक्त 2 7 5 3 15
पंिक्त 3 6 1 8 15
स्तंभ योग 15 15 15 45
अपने मत्र को केवल छह घेर क संख्याएँ 15, 15, 15 (पं क्तयाँ) तथा 15, 15, 15 (स्तंभ) और संकेत के लए एक भरा हुआ
खाना द जए।
अ ा प्रश्न बनाने का संकेत: सदै व जाँच ली जए क आपके तीन पं क्त योग जोड़ने पर 45 और तीन स्तंभ योग
जोड़ने पर भी 45 आते ह, तथा कोई भी घेरा 6 से कम या 24 से अ धक नह है। अन्यथा आपके प्रश्न का कोई हल
ही नह होगा।
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कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 आपने अनुभव कया होगा क इस ग्रड के लए एक हल ात करना संभव नह है। ऐसी त क्य है?
5
6 21
19
9 11 26
पृष्ठ 134 का ग्रड — घेर म पं क्त-योग और स्तंभ-योग दए गए ह।
क्य क घेर म से दो संख्याएँ संभव परास से बाहर ह।
1 – 9 में से तीन िभन्न संख्याओं का न्यून तम योग = 1 + 2 + 3 = 6
1 – 9 में से तीन िभन्न संख्याओं का अिधकतम योग = 9 + 8 + 7 = 24
अत: पत्येक घेरे के िलए 6 ≤ घेरा ≤ 24।
इस ग्रड म घेरे 5, 21, 19 (पं क्तयाँ) तथा 9, 11, 26 (स्तंभ) दए ह।
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कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल AglaSem · NCERT Solutions
घेरा संभव? कारण
5 नही ं न्यूनतम संभा वत योग 6 से कम है
26 नही ं अ धकतम संभा वत योग 24 से अ धक है
21, 19, 9, 11 हाँ 6 और 24 के बीच ह
अत: यह ग्रड असंभव है।
ऐसा क्य होता है: एक भी खाना भरने क आवश्यकता नह पड़ी। केवल घेर के परास क जाँच से ही उत्तर मल
गया।
स्वयं जाँ चए: यहाँ पं क्त योग 5 + 21 + 19 = 45 है, परंतु स्तंभ योग 9 + 11 + 26 = 46 है। स्तंभ का कुल 45
भी नह है — यह असंभवता का दूसरा कारण है।
प्र.3 पं क्तय के योग अथवा स्तंभ के योग को जोड़ने पर योग सदै व 45 क्य होना चा हए?
क्य क तीन पं क्त योग जोड़ने का अथ है ग्रड क प्रत्येक संख्या को ठ क एक बार जोड़ना।
पंिक्त योगों का कु ल
= (पंिक्त 1 की सभी संख्याएँ) + (पंिक्त 2 की सभी) + (पंिक्त 3 की सभी)
=1+2+3+4+5+6+7+8+9
= 45
यही तक स्तंभ के लए भी है, क्य क तीन स्तंभ मलकर पूरे ग्रड को एक बार ढक लेते ह।
पहले हल कया गया ग्रड पं क्त योग कुल स्तंभ योग कुल
475/612/398 16, 9, 20 45 13, 17, 15 45
913/824/765 13, 14, 18 45 24, 9, 12 45
789/465/123 24, 15, 6 45 12, 16, 17 45
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as e
कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
ऐसा क्य होता है: पं क्तयाँ परस्पर नह मलत और मलकर नौ खाने पूरे कर दे ती ह। अत: उनका कुल 1 + 2 +
m a s emहै क छह घेर
gl
… + 9 = 45 पर र रहता है, चाहे व्यव ा कोई भी हो। इसी से कशोर का प्रेक्षण भी सद्ध होता
o = 90 है।
का योग 45 .+c45
a
a s em
agl
com
ag
जादुई योग क्या हो सकता है? क्या यह कोई भी संख्या हो सकती है?
.
प्र.4
e m
g l as
a
नह । 1 – 9 क संख्याओं से बने जादुई वग का जादुई योग 15 ही होना चा हए।
co m
e m.
m l as
.co
तीनों पंिक्त योगों का कु ल सदै व 45 होता है।
a g
se m
a
जादुई वग में तीनों पंिक्त योग बराबर होते है,ं माना पत्येक S।
a g l S + S + S = 45
m a s
.co agl
3S = 45
S = 15
se m
g l a
a
प्रेक्षण 1 — 1 से 9 तक क संख्याओं के उपयोग से बनाए गए एक जादुई वग म जादुई योग 15 होना चा हए।
. c om
ऐसा क्य होता है: जादुई योग हमारी इ ा से नह चुना जा सकता — वह उपयोग क जाने
s e m वाली संख्याओं से
. comहोता है। 2 – 10 लेने पर कुल 54 हो जाता है, अत: जादुई योग 54 ÷a3g=la18 हो जाता है।
नधा रत
a s em
agl
se m
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 135
com g l a
m . a
ase
अनु े द 6.3 जाल ( ग्रड) म कुछ खोज
a gl
प्र.1 कसी जादुई वग के कद्र पर संभवतः कौन-कौन सी संख्याएँ वद्यमान हो सकती ह?
co m
m .
o m l a se
कद्र.cपर केवल 5 आ सकता है। a g
m
se मान ली जए कद्र पर 9 है। तब 8 कसी अन्य खाने म आएगा और कोई-न-कोई रेखा ऐसी होगी जसम 8 और 9 दोन ह —
a
agl c
m .
a s e
com agl
8 + 9 + (अन्य संख्या) = 15
अन्य संख्या = 15 – 17 = –2 — e 1m
.
a s
agl
से 9 तक की संख्याओं से यह असंभ व है।
अब मान ली जए कद्र पर 1 है। तब 2 कसी अन्य खाने म आएगा —
com
m .
m ase
.co
a g l Page 24 of 57
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कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल AglaSem · NCERT Solutions
2 + 1 + (अन्य संख्या) = 15
अन्य संख्या = 15 – 3 = 12 — असंभ व, क्योंिक हम के वल 1 से 9 तक की संख्याएँ ले रहे है।
ं
अत: न 9 कद्र पर आ सकता है और न 1।
ऐसा क्य होता है: कद्र का खाना चार रेखाओं पर त होता है — एक पं क्त, एक स्तंभ और दोन वकण। अत:
कद्र य संख्या को शेष आठ संख्याओं के चार भन्न युग्म के साथ जुड़ना पड़ता है, और प्रत्येक युग्म का योग (15 –
कद्र) होना चा हए।
प्र.2 ऐसे ही तक का उपयोग करते हुए ात क जए क 1 से 9 तक क संख्याओं म से कौन-सी संख्याएँ कद्र पर
वद्यमान हो सकती ह।
5 के अ त रक्त कोई संख्या कद्र पर नह आ सकती। प्रत्येक कद्र c के लए ग नए क शेष संख्याओं के कतने युग्म का योग (15 –
c) है। चार युग्म चा हए।
कद्र C युग्म का योग = 15 – C उपलब्ध युग्म कतने संभव?
1 14 5+9, 6+8 2 नही ं
2 13 4+9, 5+8, 6+7 3 नही ं
3 12 4+8, 5+7 2 नही ं
4 11 2+9, 3+8, 5+6 3 नही ं
5 10 1+9, 2+8, 3+7, 4+6 4 हाँ
6 9 1+8, 2+7, 4+5 3 नही ं
7 8 2+6, 3+5 2 नही ं
8 7 1+6, 2+5, 3+4 3 नही ं
9 6 1+5, 2+4 2 नही ं
प्रेक्षण 2 — 1 से 9 तक क संख्याओं ारा भरे गए एक जादुई वग के कद्र पर प्रकट होने वाली संख्या 5 ही होनी चा हए।
ऐसा क्य होता है: कद्र चार रेखाओं पर है, अत: शेष आठ संख्याओं को चार युग्म म बँटना चा हए जनम प्रत्येक
का योग 15 – c हो। केवल c = 5 पर ठ क चार ऐसे युग्म मलते ह — और 5 ही 1 – 9 क मध्य संख्या है।
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कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल AglaSem · NCERT Solutions
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 136
अनु े द 6.3 जाल ( ग्रड) म कुछ खोज
प्र.1 य द हाँ, तो 15 प्राप्त करने के लए दो अन्य संख्याओं के साथ 1 जोड़ने क तीन व धयाँ होनी चा हए। हम 1 + 5
+ 9 = 1 + 6 + 8 = 15 प्राप्त करते ह। क्या कोई अन्य संयोजन संभव है?
नह , तीसरा संयोजन संभव नह है। 14 बनाने वाले केवल दो युग्म ह।
1 + ? + ? = 15 → शेष दो का योग 14 होना चािहए
14 = 5 + 9 ✓
14 = 6 + 8 ✓
14 = 7 + 7 ✗ (संख्या दोहराई नही ं जा सकती)
अत: 1 से होकर के वल द ो रेखाएँ संभ व है।
ं
कोने का खाना तीन रेखाओं पर होता है — एक पं क्त, एक स्तंभ और एक वकण — अत: उसे तीन ऐसे संयोजन चा हए। 1 के
पास केवल दो ह, अत: 1 कसी कोने म नह आ सकता।
ऐसा क्य होता है: कोना एक व्यस्त खाना है। उसे तीन बार दो अन्य संख्याओं के साथ मलकर 15 बनाना पड़ता है।
1 जैसी छोट संख्या को बहुत बड़े साथी चा हए और इतनी बड़ी संख्याएँ ही नह ह।
प्र.2 इसी प्रकार क्या 9 को कसी कोने के वग म रखा जा सकता है?
नह । वही गनती इसे भी असंभव बना दे ती है।
9 + ? + ? = 15 → शेष दो का योग 6 होना चािहए
6=1+5 ✓
6=2+4 ✓
6 = 3 + 3 ✗ (पुन रावृि नही ं)
अत: 9 से होकर के वल द ो रेखाएँ संभ व है,ं जबिक कोने को तीन चािहए।
प्रेक्षण 3 — संख्याएँ 1 और 9 कसी कोने के ान पर वद्यमान नह हो सकती ह, अत: इन्ह मध्य- ान म से कसी ान पर
आना चा हए।
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कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: 9 इतनी बड़ी है क उसके दोन साथी बहुत छोटे होने चा हए, और ऐसे छोटे युग्म केवल दो ही
उपलब्ध ह।
प्र.3 क्या आप 1 और 9 के लए अन्य संभव ान ात कर सकते ह?
1 और 9 को भुजाओं के मध्य खान म आना चा हए, तथा वे एक-दूसरे के आमने-सामने ह गे, जनके बीच म 5 होगा।
1 + 5 + 9 = 15, तथा 5 कें द पर है।
अत: 1 और 9 कें द से जाने वाली एक ही रेखा के दोनों िसरों पर है।
ं
कोना संभ व नही ं है, अत: वह रेखा बीच वाली पंिक्त या बीच वाला स्तं भ है।
चार संभावनाएँ ह —
1 बाईं भुजा के मध्य म, 9 दाईं भुजा के मध्य म
9 बाईं भुजा के मध्य म, 1 दाईं भुजा के मध्य म
1 ऊपरी भुजा के मध्य म, 9 नचली भुजा के मध्य म
9 ऊपरी भुजा के मध्य म, 1 नचली भुजा के मध्य म
ऐसा क्य होता है: कद्र पर 5 न त हो जाने और 1 तथा 9 के कोन से हट जाने के बाद उनके लए केवल चार
मध्य-खाने बचते ह — और 1, 5, 9 एक सीध म आएँगे क्य क 1 + 5 + 9 = 15।
प्र.4 अब हमारे पास जादुई वग के लए एक पूण पं क्त या एक पूण स्तंभ है! इसे पूरा करने का प्रयास क जए! (संकेत
— सवप्रथम 1 और 9 वाली पं क्त को भ रए।)
बीच वाली पं क्त म 1, 5, 9 रखकर आरंभ क जए और फर ग्रड पूरा क जए।
स्तंभ 1 स्तंभ 2 स्तंभ 3 योग
पंिक्त 1 8 3 4 15
पंिक्त 2 1 5 9 15
पंिक्त 3 6 7 2 15
योग 15 15 15 —
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कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल AglaSem · NCERT Solutions
िवकण: 8 + 5 + 2 = 15 ✓ तथा 4 + 5 + 6 = 15 ✓
स्तं भ 1: 1 के साथ ऐसी दो संख्याएँ चािहए िजनका योग 14 हो → 8 और 6
स्तं भ 3: 9 के साथ ऐसी दो संख्याएँ चािहए िजनका योग 6 हो → 4 और 2
स्तं भ 2: 3 + 5 + 7 = 15 ✓
इस ग्रड को घुमाकर और पलटकर वही प र चत रूप प्राप्त होता है —
8 1 6
3 5 7
4 9 2
स्वयं जाँ चए: पं क्तयाँ 15, 15, 15; स्तंभ 15, 15, 15; वकण 8 + 5 + 2 = 15 तथा 6 + 5 + 4 = 15।
पता लगाइए — पृष्ठ 136
अनु े द 6.3 जाल ( ग्रड) म कुछ खोज
ग णत चचा
प्र.1 1 से 9 तक क संख्याओं के उपयोग से कतने भन्न- भन्न जादुई वग बनाए जा सकते ह?
वस्तुत: केवल एक जादुई वग है। य द घुमाव और दपण प्र त बब अलग गने जाएँ तो 8 होते ह।
8 1 6
3 5 7
4 9 2
घुमाव: 4 (0°, 90°, 180°, 270°)
पत्येक घुमाव का एक दपण पितिबंब भी: 4 × 2 = 8 िगड
परंत ु आठों एक ही वग के िभ न्न दृ श्य है।ं
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as e
कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
ऐसा क्य होता है: हम सद्ध कर चुके ह क कद्र पर 5 आना ही चा हए तथा 1 और 9 आमने-सामने के मध्य-खान
म आने चा हए। इन दो तथ्य के बाद कागज़ घुमाने या दपण म दे खने के अ त रक्त कोई स्वतंत्रता eशेm
m a s
gl
ष नह रहती।
. co a
a s em
agl 2 से 10 तक क संख्याओं के उपयोग से एक जादुई वग क रचना क जए। ऐसा करने के लए आप कौन-सी
प्र.2
co m
ag
यु क्त अपनाएँगे? इसक तुलना 1 से 9 तक क संख्याओं से बनाए गए जादुई वग से क जए।
m .
as e
a g l
यु क्त: 2 से 10 तक क संख्याएँ 1 से 9 तक क संख्याओं म 1 जोड़ने से ही बनती ह। अत: 1 – 9 वाले जादुई वग के प्रत्येक खाने
म 1 जोड़ द जए।
co m
em.
m l as
.co g
1 – 9 वाला जादुई वग प्रत्येक म 1 जो ड़ए 2 – 10 वाला जादुई वग
m a
l a se
g
8 1 6 → 9 2 7
a →
s
3 5 7 4 6 8
m a
m .co agl
se
4 9 2 → 5 10 3
g l a
a
पंिक्तयाँ: 9 + 2 + 7 = 18, 4 + 6 + 8 = 18, 5 + 10 + 3 = 18
com
स्तं भ : 9 + 4 + 5 = 18, 2 + 6 + 10 = 18, 7 + 8 + 3 = 18
m .
m as e
.co
िवकण: 9 + 6 + 3 = 18, 7 + 6 + 5 = 18
a g l
s m ई योग = 15 + 3 × 1 = 18
eजादु
gl a
a
se m
com g l a
.
तुलना: रचना ठ क वैसी ही है। अब कद्र 6 है (2 – 10 क मध्य संख्या) तथा जादुई योग 3 बढ़ गया, क्य क प्रत्येक
m a
ase
रेखा क तीन संख्याओं म 1-1 जुड़ा।
agl
. c om
एक जादुई वग ली जए तथा (a) प्रत्येक संख्या म 1 क वृ द्ध क जए। (b) प्रत्येक संख्या को दुगुना क जए। क्या
emम कस प्रकार का प रवतन
प्र.3
a s
comहोता है?
प्रत्येक त म प रणामी ग्रड भी एक जादुई वग है? प्रत्येक त म जादुई योग
m . agl
ase
agl c
.
s e m
m a
हाँ — दोन तय म प रणामी ग्रड भी जादुई वग है। 8 1 6 / 3 5 7 / 4 9 2 से आरंभ क जए, जसका जादुई योग 15 है।
(a) प्रत्येक संख्या म 1 क वृ द्ध
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 29 of 57
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9 2 7
4 6 8
5 10 3
पत्येक रेखा में 1 + 1 + 1 = 3 की वृि होती है।
नया जादुई योग = 15 + 3 = 18
(b) प्रत्येक संख्या को दुगुना
16 2 12
6 10 14
8 18 4
पत्येक रेखा दुगन
ु ी हो जाती है।
नया जादुई योग = 15 × 2 = 30
जाँच : 16 + 2 + 12 = 30, 6 + 10 + 14 = 30, 8 + 18 + 4 = 30 ✓
ऐसा क्य होता है: नौ खान म एक ही संख्या k जोड़ने पर प्रत्येक रेखा 3k से बढ़ती है; नौ खान को k से गुणा
करने पर प्रत्येक रेखा k गुना हो जाती है। सभी रेखाएँ एक ही प्रकार बदलती ह, अत: वे बराबर बनी रहती ह और
ग्रड जादुई बना रहता है।
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कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 एक जादुई वग पर अन्य कौन-कौन सी सं क्रयाएँ क जा सकती ह ता क एक अन्य जादुई वग प्राप्त हो जाए?
सं क्रया क्या जादुई रहेगा? नया जादुई योग (पुराना योग S)
पत्येक खाने में k जोड़ना हाँ S + 3k
पत्येक खाने में से k घटाना हाँ S – 3k
पत्येक खाने को k से ग ण
ु ा करना हाँ k×S
पत्येक खाने को k से भाग दे ना (k ≠ 0) हाँ S÷k
िग ड को 90°, 180° या 270° घुम ाना हाँ S (अप रव तत)
िग ड का दपण पितिबंब ले ना हाँ S (अप रव तत)
के वल दो संख्याओं की अदला-बदली पाय: नही ं रेखाएँ बराबर नह रहत
ऐसा क्य होता है: कोई सं क्रया वग को तभी जादुई बनाए रखती है जब वह प्रत्येक खाने के साथ एक जैसा
व्यवहार करे। जोड़ना, घटाना, गुणा, भाग तथा घुमाना — सभी ऐसा ही करते ह; केवल एक-दो खाने बदलना नह ।
प्रयास क जए: 8 1 6 / 3 5 7 / 4 9 2 को 3 से गुणा क जए — 24 3 18 / 9 15 21 / 12 27 6 प्राप्त होता
है, जसका जादुई योग 45 है।
प्र.5 कन्ह भी 9 क्रमागत संख्याओं के संग्रह के उपयोग से (जैसे 2 – 10, 3 – 11, 9 – 17, इत्या द) एक जादुई वग क
रचना करने क व धय पर चचा क जए।
1 – 9 वाला जादुई वग ली जए और प्रत्येक खाने म एक ही संख्या जोड़ द जए। जोड़ी जाने वाली संख्या = (नए संग्रह क सबसे
छोट संख्या) – 1।
9 क्रमागत संख्याओं का संग्रह 1 – 9 वग के प्रत्येक खाने म जो ड़ए कद्र जादुई योग
1–9 0 5 15
2 – 10 1 6 18
3 – 11 2 7 21
9 – 17 8 13 39
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9 – 17 के लए प्रत्येक खाने म 8 जोड़ने पर —
16 9 14
11 13 15
12 17 10
पंिक्तयाँ: 16 + 9 + 14 = 39, 11 + 13 + 15 = 39, 12 + 17 + 10 = 39 ✓
स्तं भ : 16 + 11 + 12 = 39, 9 + 13 + 17 = 39, 14 + 15 + 10 = 39 ✓
िवकण: 16 + 13 + 10 = 39, 14 + 13 + 12 = 39 ✓
ऐसा क्य होता है: नौ क्रमागत संख्याओं के बीच का अंतर-प्र तरूप 1 – 9 जैसा ही होता है — प्रत्येक संख्या एक
न त मात्रा से बड़ी है। मध्य संख्या सदै व कद्र म आती है और जादुई योग = 3 × कद्र होता है।
ग णत चचा — पृष्ठ 137
एक 3 × 3 जादुई वग का व्यापक करण करना
ग णत चचा
प्र.1 उन जादुई वग म से कसी एक वग का चयन क जए जन्ह आपने क्रमागत संख्याओं का उपयोग करके बनाया
है। य द कद्र पर त संख्या क अक्षर संख्या m है तो व्यक्त क जए क अन्य संख्याएँ कस प्रकार m से
संबं धत ह, अथात वे m से कतनी अ धक या कम ह। (संकेत — स्मरण क जए क हमने बीजीय व्यंजक के
अध्याय म कस प्रकार एक त थ पत्र (कैलडर) मास म 2 × 2 ग्रड क व्याख्या क थी।)
जादुई वग 8 1 6 / 3 5 7 / 4 9 2 ली जए। इसका कद्र 5 है, अत: प्रत्येक संख्या को “5 और कुछ” के रूप म ल खए।
8=5+3 • 1=5–4 • 6=5+1
3=5–2 • 5=5 • 7=5+2
4=5–1 • 9=5+4 • 2=5–3
अब 5 के ान पर अक्षर संख्या m रखने पर व्यापक कृत रूप प्राप्त होता है —
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कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल AglaSem · NCERT Solutions
m+3 m–4 m+1
m–2 m m+2
m–1 m+4 m–3
पंिक्त 1: (m + 3) + (m – 4) + (m + 1) = 3m
पंिक्त 2: (m – 2) + m + (m + 2) = 3m
पंिक्त 3: (m – 1) + (m + 4) + (m – 3) = 3m
स्तं भ 1: (m + 3) + (m – 2) + (m – 1) = 3m
िवकण: (m + 3) + m + (m – 3) = 3m ✓
ऐसा क्य होता है: m – 4, m – 3, …, m + 4 वस्तुत: m को मध्य म रखकर नौ क्रमागत संख्याएँ ह। प्रत्येक रेखा
म m के दोन ओर क संख्याएँ एक-दूसरे को काट दे ती ह — एक जतनी m से अ धक है, दूसरी उतनी ही कम।
प्र.2 एक बार जब व्यापक कृत रूप प्राप्त हो जाए तब अपने प्रेक्षण को कक्षा के साथ साझा क जए।
साझा करने योग्य कुछ प्रेक्षण —
जादुई योग सदै व 3m होता है — कद्र संख्या का तीन गुना।
कद्र m उपयोग क गई नौ क्रमागत संख्याओं क मध्य संख्या होती है।
चार कोन पर m + 3, m + 1, m – 1, m – 3 होते ह — अथात m से वषम दूरी वाली संख्याएँ।
चार मध्य-खान म m – 4, m + 2, m – 2, m + 4 होते ह — अथात m से सम दूरी वाली संख्याएँ।
कद्र से आमने-सामने के कन्ह भी दो खान का योग 2m होता है, जैसे (m + 3) + (m – 3) = 2m।
कसी भी कद्र वाला जादुई वग बनाने के लए केवल m चु नए — जोड़-घटाव का प्र तरूप कभी नह बदलता।
प्रयास क जए: m = 100 रखने पर 103 96 101 / 98 100 102 / 99 104 97 प्राप्त होता है, जसका
जादुई योग 300 है।
पता लगाइए — पृष्ठ 137
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as e
कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल
a g l AglaSem · NCERT Solutions
एक 3 × 3 जादुई वग का व्यापक करण करना
co m
em.
m as
प्रयास कर
.co a g l
a s em
gl
इस व्यापक कृत रूप के उपयोग से वह जादुई वग ात क जए जब कद्र य संख्या 25 है।
a
प्र.1
co m
ag
m .
व्यापक कृत रूप म m = 25 र खए।
as e
a g l
व्यापक कृत रूप M+3 M–4 M+1
co m
m.
मान 28 21 26
m as e M+2
.co
व्यापक कृत रूप M–2 M
a g l
se m
g l a
a
मान 23 25 27
s
व्यापक कृत रूप M–1 M+4 M–3
om a
24 .c
em agl
s
मान 29 22
l a
जादुई वग है — ag
co m
28 21 26
m .
m as e
23
.co
25
a g l27
a s e24m
agl
29 22
se m
com g l a
जादुई योग = 3m = 3 × 25 = 75
m . a
e
पंिक्तयाँ: 28 + 21 + 26 = 75, 23a+s25 + 27 = 75, 24 + 29 + 22 = 75 ✓
agl
स्तं भ : 28 + 23 + 24 = 75, 21 + 25 + 29 = 75, 26 + 27 + 22 = 75 ✓
co m
.
िवकण: 28 + 25 + 22 = 75, 26 + 25 + 24 = 75 ✓
e m
m l as
.co a g
m स्वयं जाँ चए: नौ संख्याएँ 21 से 29 तक ह — 25 को मध्य म रखकर नौ क्रमागत संख्याएँ, जैसा अपे क्षत था।
s e
agla
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 34 of 57
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प्र.2 कसी पं क्त, स्तंभ या वकण के तीन पद को जोड़ने पर कौन-सा व्यंजक प्राप्त होता है?
प्राप्त व्यंजक 3m है।
पंिक्त 1: (m + 3) + (m – 4) + (m + 1) = 3m + 3 – 4 + 1 = 3m
पंिक्त 2: (m – 2) + m + (m + 2) = 3m – 2 + 2 = 3m
स्तं भ 2: (m – 4) + m + (m + 4) = 3m – 4 + 4 = 3m
िवकण: (m + 1) + m + (m – 1) = 3m
ऐसा क्य होता है: प्रत्येक रेखा म तीन m होते ह और जोड़ी-घटाई गई संख्याएँ सदै व कट जाती ह। यही कारण है
क वग जादुई है — और इससे यह भी सद्ध होता है क जादुई योग सदै व कद्र संख्या का तीन गुना होता है।
प्र.3 नम्न ल खत तय के प रणाम ल खए — (a) व्यापक कृत रूप के प्रत्येक पद म 1 जोड़ने पर। (b)
व्यापक कृत रूप के प्रत्येक पद को दुगुना करने पर।
(a) प्रत्येक पद म 1 जोड़ने पर
m+4 m–3 m+2
m–1 m+1 m+3
m m+5 m–2
रेखा का योग = (m + 4) + (m – 3) + (m + 2) = 3m + 3
अत: जादुई योग 3 बढ़ जाता है तथा नया कें द m + 1 हो जाता है।
(b) प्रत्येक पद को दुगुना करने पर
2m + 6 2m – 8 2m + 2
2m – 4 2m 2m + 4
2m – 2 2m + 8 2m – 6
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रेखा का योग = (2m + 6) + (2m – 8) + (2m + 2) = 6m
अत: जादुई योग दुगन
ु ा हो जाता है तथा नया कें द 2m हो जाता है।
ऐसा क्य होता है: दोन ग्रड जादुई बने रहते ह क्य क प्रत्येक खाने को एक ही प्रकार से बदला गया है। ध्यान
द जए क दुगुना करने के बाद संख्याएँ क्रमागत नह रहत — वे 2 के पग म बढ़ती ह।
प्र.4 एक जादुई वग क रचना क जए जसका जादुई योग 60 हो।
जादुई योग = 3m, अत: m = 20 ली जए।
3m = 60
m = 60 ÷ 3 = 20
23 16 21
18 20 22
19 24 17
पंिक्तयाँ: 23 + 16 + 21 = 60, 18 + 20 + 22 = 60, 19 + 24 + 17 = 60 ✓
स्तं भ : 23 + 18 + 19 = 60, 16 + 20 + 24 = 60, 21 + 22 + 17 = 60 ✓
िवकण: 23 + 20 + 17 = 60, 21 + 20 + 19 = 60 ✓
संकेत: 3 से वभाज्य कसी भी जादुई योग S के लए m = S ÷ 3 ली जए और व्यापक कृत रूप भर द जए।
प्र.5 क्या 9 अक्रमागत संख्याओं को भरकर एक जादुई वग प्राप्त करना संभव है?
हाँ, यह संभव है। कसी ज्ञात जादुई वग के प्रत्येक खाने को एक ही संख्या से गुणा कर द जए।
8 1 6 / 3 5 7 / 4 9 2 को 3 से गुणा करने पर 3 के नौ गुणज प्राप्त होते ह, जो न त रूप से क्रमागत नह ह —
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24 3 18
9 15 21
12 27 6
पंिक्तयाँ: 24 + 3 + 18 = 45, 9 + 15 + 21 = 45, 12 + 27 + 6 = 45 ✓
स्तं भ : 24 + 9 + 12 = 45, 3 + 15 + 27 = 45, 18 + 21 + 6 = 45 ✓
िवकण: 24 + 15 + 6 = 45, 18 + 15 + 12 = 45 ✓
जादुई योग = 15 × 3 = 45
ऐसा क्य होता है: जादुई वग को वस्तुत: क्रमागत संख्याओं क नह , कद्र से अंतर के प्र तरूप क आवश्यकता
होती है। यहाँ प्रत्येक अंतर तगुना हो गया है — कद्र 3 × 5 = 15 है और संख्याएँ 15 ± 3, 15 ± 6, 15 ± 9, 15 ±
12 ह।
प्रयास क जए: कसी भी पग d के लए m – 4d, m – 3d, …, m + 4d रूप क नौ संख्याएँ काम करती ह। m
= 20 और d = 5 लेने पर 35 0 25 / 10 20 30 / 15 40 5 प्राप्त होता है, जसका जादुई योग 60 है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 137
सबसे पहला 4 × 4 जादुई वग
प्र.1 चौतीस अथात 34 है। आपके वचार से उन लोग ने इसे ‘चौतीसा यंत्र’ क्य कहा?
क्य क उस 4 × 4 वग क प्रत्येक पं क्त, प्रत्येक स्तंभ और प्रत्येक वकण क संख्याओं का योग 34 है — अत: 34 ही उस यंत्र
क पहचान है।
7 12 1 14
2 13 8 11
16 3 10 5
9 6 15 4
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कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल AglaSem · NCERT Solutions
पंिक्तयाँ: 7 + 12 + 1 + 14 = 34, 2 + 13 + 8 + 11 = 34, 16 + 3 + 10 + 5 = 34, 9 + 6 + 15 + 4 =
34
स्तं भ : 7 + 2 + 16 + 9 = 34, 12 + 13 + 3 + 6 = 34, 1 + 8 + 10 + 15 = 34, 14 + 11 + 5 + 4 = 34
िवकण: 7 + 13 + 10 + 4 = 34, 14 + 8 + 3 + 9 = 34
ऐसा क्य होता है: इस वग म 1 से 16 तक क संख्याएँ ह, जनका कुल योग 1 + 2 + … + 16 = 136 है। चार
पं क्तय म बराबर बाँटने पर प्रत्येक पं क्त को 136 ÷ 4 = 34 मलता है। अत: 34 न त है।
क्या आप जानते ह? यह शलालेख खजुराहो के पाश्वनाथ जैन मं दर का दसव शताब्द का है — वश्व का सवप्रथम
अ भले खत 4 × 4 जादुई वग।
प्र.2 इस जादुई वग क प्रत्येक पं क्त, स्तंभ और वकण क संख्याओं का योग 34 है। क्या आप इस वग म 4 संख्याओं
के अन्य प्र तरूप (पैटन) ात कर सकते ह जनका योग 34 हो?
हाँ — यह वग असाधारण रूप से समृद्ध है। नीचे दए गए सभी प्र तरूप का योग 34 है —
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as e
कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
प्र तरूप संख्याएँ योग
m as e
चारों कोने
.co
7 + 14 + 9 + 4
a g l 34
se m
g l a 13 + 8 + 3 + 10
a
बीच का 2 × 2 खंड 34
ऊपर बाईं ओर का 2 × 2 खंड 7 + 12 + 2 + 13 34
co m
ऊपर दाईं ओर का 2 × 2 खंड
e m . 1 + 14 + 8 + 11 34 ag
g l as
नीचे बाईं ओर का 2 × 2 खंड
a 16 + 3 + 9 + 6 34
co m
नीचे दाईं ओर का 2 × 2 खंड 10 + 5 + 15 + 4 34
m .
com ase
agl
पहली और अंितम पंिक्त के बीच वाले दो-दो खाने 12 + 1 + 6 + 15 34
e m.
las
पहले और अंितम स्तंभ के बीच वाले दो-दो खाने 2 + 16 + 11 + 5 34
ag एक टू टा िवकण 12 + 8 + 5 + 9 34
m a s
.co agl
दू स रा टू टा िवकण 1 + 11 + 16 + 6 34
se m
g l a
a
एक पतंग ाकार पितरूप 7 + 8 + 15 + 4 34
उसका दपण पितरूप 14 + 13 + 3 + 4 34
co m
m .
o m l a se
g वग से कह अ धक है।
.c से लपेटकर बनने वाले टूटे वकण भी 34 ही दे ते ह — यह साधारण जादुई
ऐसा क्य होता है: चौतीसा यंत्र वह है जसे ग णतज्ञ अ त-पूण जादुई वग कहते ह। इसम प्रत्येक 2 × 2 खंड तथा
m a
se
कनार
a
agl
प्रयास क जए: ग्रड म कह से भी कोई 2 × 2 खंड ली जए ( कनार से लपेटते हुए भी) और चार संख्याएँ
se m
com g l a
. a
जो ड़ए। हर बार 34 ही प्राप्त होगा।
m
ase
agl
m
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 140–141
. co
em
अनु े द 6.4 प्रकृ त का मनपसंद अनुक्रम — वरहांक- फबोनाची संख्याएँ!
m l as
.co a g
a s emप्र.1 लघु शब्दांश (1 ताल) और गुरु शब्दांश (2 ताल) को स म्म लत करते हुए 8 ताल क कतनी लय बनाई जा
agl सकती ह? यहाँ कुछ संभावनाएँ द गई ह — गुरु गुरु गुरु गुरु / लघु लघु लघु लघु लघु लघु लघु लघु / लघु गुरु गुरु
.c
m
लघु गुरु / गुरु गुरु लघु लघु गुरु। क्या आप अन्य संभावनाएँ भी ात कर सकते ह?
m a s e
e m . co agl
as
a g l
हाँ, और भी अनेक। लघु शब्दांश 1 ताल लेता है तथा गुरु शब्दांश 2 ताल, अत: प्रत्येक लय 1 और 2 के योग से 8 बनाने क एक
व ध है।
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 39 of 57
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कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल AglaSem · NCERT Solutions
लय योग के रूप म
लघु लघु ग रु
ु ग रु
ु ग रु
ु 1+1+2+2+2
ग रु
ु लघु ग रु
ु लघु ग रु
ु 2+1+2+1+2
ग रु
ु ग रु
ु ग रु
ु लघु लघु 2+2+2+1+1
लघु ग रु
ु लघु ग रु
ु ग रु
ु 1+2+1+2+2
ग रु
ु लघु लघु लघु ग रु
ु ग रु
ु 2+1+1+1+2+2
लघु लघु लघु लघु ग रु
ु ग रु
ु 1+1+1+1+2+2
कुल मलाकर 8 ताल वाली 34 लय ह।
संकेत: एक-एक करके गनना धीमा है और भूल होने क संभावना अ धक है। पुस्तक म द गई क्रमबद्ध व ध बना
सूची बनाए ही उत्तर दे दे ती है।
प्र.2 अ धक ग णतीय रूप म लखने पर — 1 और 2 के योग के रूप म संख्या 8 को कतनी व धय से लखा जा
सकता है? उदाहरण के लए — 8 = 2 + 2 + 2 + 2, 8 = 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1 + 1, 8 = 1 + 2 + 2 + 1 +
2, 8 = 2 + 2 + 1 + 1 + 2, इत्या द। क्या आप कोई अन्य व धयाँ सोच पा रहे ह?
34 व धयाँ ह। सभी को लखने के ान पर चरण-दर-चरण ब ढ़ए।
N 1 2 3 4 5 6 7 8
िविधयों की संख्या 1 2 3 5 8 13 21 34
िविधयाँ(3) = िविधयाँ(2) + िविधयाँ(1) = 2 + 1 = 3
िविधयाँ(4) = 3 + 2 = 5
िविधयाँ(5) = 5 + 3 = 8
िविधयाँ(6) = 8 + 5 = 13
िविधयाँ(7) = 13 + 8 = 21
िविधयाँ(8) = 21 + 13 = 34
8 के लए कुछ और व धयाँ — 1 + 1 + 2 + 2 + 2, 2 + 1 + 2 + 1 + 2, 2 + 2 + 1 + 2 + 1, 1 + 2 + 1 + 1 + 1 + 2, 2
+ 1 + 1 + 1 + 1 + 2।
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कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: 8 के प्रत्येक योग का आरंभ या तो 1 से होगा या 2 से। य द 1 से आरंभ हो तो शेष से 7 बनना
चा हए; य द 2 से आरंभ हो तो शेष से 6। अत: 8 क गनती 7 क गनती और 6 क गनती का योग है।
प्र.3 अपनी अभ्यास पु स्तका म संख्या 5 को सभी संभा वत व धय से 1 और 2 के योग के रूप म लखने का प्रयास
क जए। आपने कतनी व धयाँ ात क ह? (आपको 8 व भन्न व धयाँ प्राप्त होनी चा हए)। क्या आप सभी
संभावनाओं को लखे बना इन्ह ात कर सकते ह? क्या आप n = 8 के लए इसका प्रयास कर सकते ह?
n = 5 के लए ठ क 8 व धयाँ ह —
1+1+1+1+1 1+1+1+2 1+1+2+1 1+2+1+1
1+2+2 2+1+1+1 2+1+2 2+2+1
बना सूची बनाए: 4 ताल वाली प्रत्येक लय (5 लय) के आगे “1 +” ल खए तथा 3 ताल वाली प्रत्येक लय (3 लय) के आगे “2
+” ल खए।
िविधयाँ(5) = िविधयाँ(4) + िविधयाँ(3) = 5 + 3 = 8
िविधयाँ(8) = िविधयाँ(7) + िविधयाँ(6) = 21 + 13 = 34
ऐसा क्य होता है: पहला शब्दांश या तो लघु (1 ताल) होगा या गुरु (2 ताल)। ये दोन तयाँ कभी नह मलत
और मलकर सब कुछ ढक लेती ह, अत: गन तयाँ सीधे जुड़ जाती ह। इसी से वरहांक अनुक्रम 1, 2, 3, 5, 8, 13,
21, 34, … बनता है।
प्र.4 क्रमबद्ध व ध का उपयोग करते हुए सभी 6 ताल लय को ल खए। अथात 6 को 1 और 2 के योग के रूप म सभी
संभा वत व धय से ल खए। क्या आपको 13 व धयाँ प्राप्त हुईं?
हाँ — ठ क 13 व धयाँ। 5 ताल वाली आठ लय के आगे “1 +” तथा 4 ताल वाली पाँच लय के आगे “2 +” ल खए।
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1 + से आरंभ (8 व धयाँ) 2 + से आरंभ (5 व धयाँ)
1+1+1+1+1+1 2+1+1+1+1
1+1+1+1+2 2+1+1+2
1+1+1+2+1 2+1+2+1
1+1+2+1+1 2+2+1+1
1+1+2+2 2+2+2
1+2+1+1+1 —
1+2+1+2 —
1+2+2+1 —
8 + 5 = 13 ✓
स्वयं जाँ चए: कसी भी पं क्त म ताल को जो ड़ए — प्रत्येक योग 6 ही आता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 142
अनु े द 6.4 वरहांक- फबोनाची संख्याएँ
प्र.1 इस अनुक्रम म 55 के बाद आने वाली संख्या ल खए।
अगली संख्या 89 है।
िनयम: पत्येक संख्या = उससे पहले की दो संख्याओं का योग।
1 + 2 = 3 • 2 + 3 = 5 • 3 + 5 = 8 • 5 + 8 = 13
8 + 13 = 21 • 13 + 21 = 34 • 21 + 34 = 55
34 + 55 = 89
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स्वयं जाँ चए: यह नयम पहले से लखी प्रत्येक संख्या पर सत्य है, इसी लए अगली संख्या के लए भी इस पर
भरोसा कया जा सकता है।
प्र.2 इस अनुक्रम म अगली तीन संख्याएँ ल खए — 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55, 89, ____, ____, ____, … य द
आपको उपरोक्त अनुक्रम क एक और संख्या लखनी हो तो क्या आप बता सकते ह क ( पछली दो संख्याओं
को जोड़े बना) यह संख्या सम होगी या वषम?
अगली तीन संख्याएँ ह — 144, 233, 377।
55 + 89 = 144
89 + 144 = 233
144 + 233 = 377
377 के बाद आने वाली संख्या सम होगी, और यह जोड़े बना बताया जा सकता है।
अब तक की समानताएँ: 1(िव), 2(स), 3(िव), 5(िव), 8(स), 13(िव), 21(िव), 34(स), 55(िव), 89(िव),
144(स), 233(िव), 377(िव)
अंितम दो िवषम है ं → िवषम + िवषम = सम
ऐसा क्य होता है: समानताएँ वषम, वषम, सम के खंड म बार-बार दोहराई जाती ह। दो वषम संख्याओं के बाद
अगला पद सम होना ही चा हए। (वास्त वक मान 233 + 377 = 610 है, जो वस्तुत: सम है।)
प्र.3 इस अनुक्रम म प्रत्येक संख्या क समानता क्या है? समानताओं के अनुक्रम म क्या आप कोई पैटन दे ख पा रहे ह?
ान 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12
संख्या 1 2 3 5 8 13 21 34 55 89 144 233
समानता िव स िव िव स िव िव स िव िव स िव
पैटन है — वषम, सम, वषम, वषम, सम, वषम, वषम, सम, … अथात पहले पद के बाद वषम, वषम, सम का खंड सदै व
दोहराता है।
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
em.
िवषम + सम = िवषम
m l as
सम + िवषम = िवषम
m .co a g
l a se
g
िवषम + िवषम = सम … और चक्र पुन : आरंभ हो जाता है
a
com
अत: कोई पद सम ठ क तब होता है जब उसका ान 2, 5, 8, 11, 14, … हो (अथात 3 से भाग दे ने पर शेषफल 2 आए)।
m . ag
l a se
समानताओं के युग्म गने-चुने ह, अत: पैटaनgको दोहराना ही पड़ता है — और यहाँ यह प्रत्येक तीन पद पर दोहराता
ऐसा क्य होता है: कसी पद क समानता केवल उससे पहले के दो पद क समानताओं पर नभर करती है।
m
है।
co
e m.
m l as
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mआप नम्न ल खत फूल म से प्रत्येक म कतनी पंखु ड़याँ दे ख पा रहे ह? a g
l a se
प्र.4
a g
m a s
m.co
तीन गुलबहार के चत्र म पंखु ड़याँ गनने पर 13, 21 तथा 34 प्राप्त होते ह।
agl
l a se
गनी गई g
फूल
a पंखु ड़याँ क्या यह वरहांक संख्या है?
पहला ग ल
ु बहार 13 हाँ — छठा पद
co m
m .
m as e
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हाँ — सातवाँ पद
g
दू स रा ग ल
ु बहार 21
m a
l a se तीसरा ग ल
ु बहार 34 हाँ — आठवाँ पद
ag
se m
और 13, 21, 34 अनुक्रम 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55, … म एक-दूसरे के ठ क बाद आने वाली तीन संख्याएँ ह।
com g l a
m . a
e
asव्यव ा म वरहांक- फबोनाची संख्याएँ बार-बार प्रकट होती ह।
ऐसा क्य होता है: पंखु ड़याँ, सूरजमुखी के बीज के स पल तथा चीड़ के फल के स पल इस प्रकार बढ़ते ह क
ान का सव त्तम उपयोग हो, और lइस
a g
co m
.
क्या आप जानते ह? अगली बार गदा, सूरजमुखी या अनानास दे खए और स पल ग नए — प्राय: 8, 13, 21 या
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m as e
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34 ही मलगे।
m .co a g
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 143
s e m
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अनु े द 6.5 अंक पहेली
प्र.1 U और T क्या हो सकते ह? क्या T अंक 2 हो सकता है? क्या यह 3 हो सकता है?
पहेली है T + T + T = UT, अथात 3 × T एक 2-अंक य संख्या हो जसक इकाई का अंक पुन: T ही हो।
T 3×T इकाई का अंक क्या T के बराबर है?
2 6 6 नही ं (और 6 दो अंकों की नही ं है)
3 9 9 नही ं
4 12 2 नही ं
5 15 5 हाँ
6 18 8 नही ं
7 21 1 नही ं
8 24 4 नही ं
9 27 7 नही ं
अत: T = 5 तथा U = 1, अथात UT = 15।
5 + 5 + 5 = 15 ✓
T = 2 संभव नह है (3 × 2 = 6 दो अंक क संख्या ही नह है) तथा T = 3 भी संभव नह है (3 × 3 = 9, पुन: एक अंक और
इकाई का अंक 9 है, 3 नह )।
ऐसा क्य होता है: 3T के अंत म T आने का अथ है क 3T – T = 2T के अंत म 0 आए, अथात 2T, 10 का गुणज
हो। एक अंक वाले T के लए इससे T = 0 या T = 5 ही बचता है, और T = 0 से 2-अंक य योग नह मलेगा।
प्र.2 यहाँ K2 का अथ है क यह संख्या एक 2-अंक य संख्या है जसम इकाई का अंक 2 है तथा दहाई का अंक K है।
K2 को स्वयं से जोड़ने पर एक 3-अंक य संख्या HMM प्राप्त होती है। अक्षर M को कस अंक के संगत होना
चा हए?
M = 4, तथा पूरा हल है K = 7, H = 1, अथात 72 + 72 = 144।
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इकाई का स्तं भ : 2 + 2 = 4, अत: M = 4 और कोई हािसल नही ं।
दहाई के स्तं भ में भी M = 4 िदखना चािहए —
K + K = 4 अथवा 14 → 2K = 14 → K = 7 (2K = 4 से K = 2, परंत ु तब 22 + 22 = 44 तीन अंक ों
की संख्या नही ं है)
सैक ड़ े के स्तं भ में 1 का हािसल → H = 1
अत: 72 + 72 = 144 ✓
ऐसा क्य होता है: सबसे पहले इकाई का अंक तय होता है और वही M को न त कर दे ता है। फर योग के दहाई
के अंक को उसी M से मेल खाना पड़ता है, जससे K न त हो जाता है।
प्र.3 H के वषय म क्या वचार ह? क्या यह 2 हो सकता है? क्या यह 3 हो सकता है?
H केवल 1 हो सकता है। यह 2 या 3 नह हो सकता।
K2 अिधकतम 92 है, अत: K2 + K2 अिधकतम 92 + 92 = 184 है।
200 से कम की 3-अंक ीय संख्या का पहला अंक 1 ही होगा।
अत: H = 1, और H = 2 या H = 3 असंभ व है।
ऐसा क्य होता है: कसी 2-अंक य संख्या को दुगुना करने पर 200 तक नह पहुँचा जा सकता। योग के सैकड़े का
अंक केवल 1 के हा सल से आ सकता है, अत: H सदै व 1 होगा।
प्र.4 पता लगाइए क प्रत्येक अक्षर कस अंक को व्यक्त करता है — YY + Z = ZOO; B5 + 3D = ED5; KP + KP
= PRR; C1 + C = 1FF
पहेली 1: YY + Z = ZOO
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YY अिधकतम 99 है और Z अिधकतम 9, अत: योग अिधकतम 108 है।
108 तक की 3-अंक ीय संख्या 100 – 108 के बीच होगी, अत: Z = 1 तथा O = 0, अथ त ZOO = 100।
YY + 1 = 100 → YY = 99 → Y = 9
जाँच : 99 + 1 = 100 ✓
पहेली 2: B5 + 3D = ED5
इकाई: 5 + D का अंत 5 पर हो → D = 0, कोई हािसल नही ं।
योग के दहाई का अंक D = 0 है, अत: B + 3 का अंत 0 पर हो → B + 3 = 10 → B = 7, हािसल 1।
सैक ड़ ा: E = 1
जाँच : 75 + 30 = 105 ✓
पहेली 3: KP + KP = PRR
2-अंक ीय संख्या दुगन
ु ी करने पर अिधकतम 198 आता है, अत: P = 1।
2 × (10K + 1) = 100 + 11R
20K + 2 = 100 + 11R → 20K – 98 = 11R
K = 6 रखने पर 120 – 98 = 22 = 11 × 2 → R = 2
जाँच : 61 + 61 = 122 ✓
पहेली 4: C1 + C = 1FF
(10C + 1) + C = 11C + 1, तथा 1FF = 100 + 11F
11C + 1 = 100 + 11F → 11(C – F) = 99 → C – F = 9
अत: C = 9 तथा F = 0
जाँच : 91 + 9 = 100 ✓
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क्रप्टा रथम अक्षर के मान अंक म योग
YY + Z = ZOO Y = 9, Z = 1, O = 0 99 + 1 = 100
B5 + 3D = ED5 B = 7, D = 0, E = 1 75 + 30 = 105
KP + KP = PRR K = 6, P = 1, R = 2 61 + 61 = 122
C1 + C = 1FF C = 9, F = 0 91 + 9 = 100
ऐसा क्य होता है: सदै व वहाँ से आरंभ क जए जहाँ सूचना सबसे कसी हुई हो — प्राय: इकाई का स्तंभ (जहाँ कोई
हा सल नह आता) अथवा लंबे उत्तर का पहला अंक (जो केवल हा सल से बनता है, अत: प्राय: 1 ही होता है)।
पता लगाइए — पृष्ठ 143–144
अनु े द 6.5 अंक पहेली
प्र.1 एक वद्युत बल्ब जला हुआ (On) है। दनेश इसके बटन को 77 बार दबाता है। क्या यह बल्ब अब जला हुआ
(On) होगा या बंद (Off) होगा? ऐसा क्य ?
बल्ब बंद (Off) होगा।
पत्येक बार बटन दबाने पर अवस्था बदलती है: On → Off → On → Off …
सम बार दबाने के बाद बल्ब पुन : On रहता है।
िवषम बार दबाने के बाद बल्ब Off रहता है।
77 िवषम है → बल्ब Off होगा।
कतनी बार दबाया 0 1 2 3 4 … 77
अवस्था On Off On Off On … Off
ऐसा क्य होता है: “On → Off” और “Off → On” दो दबाव एक-दूसरे को ठ क बदुओं के युग्म क तरह काट
दे ते ह। 77 दबाव से 38 ऐसे युग्म बनते ह और एक दबाव शेष रह जाता है, जो बल्ब को बंद कर दे ता है।
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
emहो सकता है?
प्र.2 ल लता के पास एक बड़ा प्राचीन वश्वकोश है। जब वह इसे खोलती है तब इसके अनेक खुले पृष्ठ गर जाते ह। वह
m a s
य द हाँ., cतोoक्य अथवा नह , तो क्य नह ? gl
कुल 50 पृष्ठ गनती है जो दोन ओर छपे हुए ह। क्या इन खुले पृष्ठ क संख्याओं का योग 6000
em a
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उत्तरgl
co m
समानता क जाँच से हाँ लगता है, परंतु गहराई से दे खने पर उत्तर नह है — योग ठ क 6000 कभी नह हो सकता।
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चरण 1 — समानता क जाँच। प्रत्येक पृष्ठ पर दो संख्याएँ होती ह, एक वषम और एक सम। ag
g l as
एक पृष्ठ: िवषम + सम = िवषम
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50 पृष्ठ: 50 िवषम संख्याओं का योग
m as e
50 एक सम िगनती है → कु ल योग सम होगा
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se m
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6000 सम है, अत: समानता इसे असंभ व नही ं बताती।
a g l
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चरण 2 — गहराई से दे खए। य द कोई पृष्ठ kवाँ पन्ना है तो उसक दोन संख्याएँ 2k – 1 तथा 2k ह गी।
m a
m .co agl
एक पृष्ठ का योग = (2k – 1) + 2k = 4k – 1
l a se
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50 पृष्ठों का योग = 4 × (k1 + k2 + … + k50) – 50
co m
.
यिद यह 6000 हो: 4 × (k का योग) = 6050
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m l as
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k का योग = 6050 ÷ 4 = 1512.5 — यह पूण संख्या नही ं है!
a g
a s em50 पृष्ठ का योग 6000 नह हो सकता। यह योग 4 से भाग देने पर सदैव शेषफल 2 देता है, जब क 6000 शेषफल 0 देता है।
agl अत:
se m
ऐसा क्य होता है: समानता क जाँच एक अ
com
पहली छलनी है, परंतु वह केवल 2 से वभाज्यता दे खती है। 4 से
g l a
m . a
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वभाज्यता क जाँच अ धक तीक्ष्ण है और इस प्रश्न का नणय कर दे ती है।
agl
स्वयं जाँ चए: 6000 के नकट संभव योग 5998 और 6002 ह — दोन 4 से भाग दे ने पर शेषफल 2 दे ते ह।
co m
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प्र.3 यहाँ चत्र म एक 2 × 3 का ग्रड दया गया है। प्रत्येक पं क्त और स्तंभ के लए योग क समानता घेरे म लखी हुई
है। ‘e’ सम संख्या के लए है तथा ‘o’ वषम संख्या के लए है। इन बक्स को 3 वषम संख्याओं (o) तथा 3 सम
संख्याओं (e) से इस प्रकार भ रए क पं क्त और स्तंभ के योग क समानता संतुष्ट हो जाए।
o
e
e e o
इस प्रश्न के साथ पृष्ठ 144 पर छपा 2 × 3 का ग्रड।
घेरे इस प्रकार ह — पं क्त 1 → o, पं क्त 2 → e, स्तंभ 1 → e, स्तंभ 2 → e, स्तंभ 3 → o।
एक संभा वत व्यव ा—
स्तंभ 1 स्तंभ 2 स्तंभ 3 पं क्त योग अपे क्षत
पंिक्त 1 1 2 4 7 o ✓
पंिक्त 2 3 6 5 14 e ✓
स्तंभ योग 4 8 9 — —
अपेिक्षत e ✓ e ✓ o ✓ — —
प्रयुक्त वषम संख्याएँ — 1, 3, 5 (तीन)। प्रयुक्त सम संख्याएँ — 2, 4, 6 (तीन)। ✓
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समानता के रूप म यह प्र तरूप है —
पंिक्त 1: िव स स → िव + स + स = िवषम ✓
पंिक्त 2: िव स िव → िव + स + िव = सम ✓
स्तं भ 1: िव + िव = सम ✓ स्तं भ 2: स + स = सम ✓ स्तं भ 3: स + िव = िवषम ✓
प्रयास क जए: एक और प्र तरूप भी चलता है — पं क्त 1 म स, व, स तथा पं क्त 2 म स, व, व; जैसे 2, 1, 4
और 6, 3, 5।
प्र.4 जादुई योग 0 वाला एक 3 × 3 जादुई वग बनाइए। सभी संख्याएँ शून्य नह हो सकती ह। आवश्यकतानुसार
ऋणात्मक संख्याओं का उपयोग क जए।
जादुई योग = 3m है, अत: व्यापक कृत रूप म m = 0 र खए।
3 –4 1
–2 0 2
–1 4 –3
पंिक्तयाँ: 3 – 4 + 1 = 0, –2 + 0 + 2 = 0, –1 + 4 – 3 = 0 ✓
स्तं भ : 3 – 2 – 1 = 0, –4 + 0 + 4 = 0, 1 + 2 – 3 = 0 ✓
िवकण: 3 + 0 – 3 = 0, 1 + 0 – 1 = 0 ✓
ऐसा क्य होता है: नौ संख्याएँ – 4, – 3, – 2, – 1, 0, 1, 2, 3, 4 ह — 0 को मध्य म रखकर नौ क्रमागत
संख्याएँ। प्रत्येक संख्या के साथ उसक वपरीत संख्या भी है, अत: सभी रेखाएँ शून्य हो जाती ह।
संकेत: इसे शीघ्र प्राप्त करने का तरीका — 8 1 6 / 3 5 7 / 4 9 2 के प्रत्येक खाने म से 5 घटा द जए।
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प्र.5 नम्न ल खत रक्त ान को ‘ वषम’ या ‘सम’ से भ रए — (a) वषम संख्या म सम संख्याओं का योग _____
होता है। (b) सम संख्या म वषम संख्याओं का योग _____ होता है। (c) सम संख्या म सम संख्याओं का योग
_____ होता है। (d) वषम संख्या म वषम संख्याओं का योग _____ होता है।
योग उत्तर उदाहरण
(a) वषम संख्या म सम संख्याओं का योग सम 2 + 4 + 6 = 12
(b) सम संख्या म वषम संख्याओं का योग सम 1 + 3 + 5 + 7 = 16
(c) सम संख्या म सम संख्याओं का योग सम 2+4=6
(d) वषम संख्या म वषम संख्याओं का योग िवषम 1+3+5=9
ऐसा क्य होता है: सम संख्याएँ कभी कोई बदु शेष नह छोड़त , अत: चाहे कतनी भी जो ड़ए, योग सम ही रहता
है — इससे (a) और (c) तय हो जाते ह। प्रत्येक वषम संख्या एक शेष बदु छोड़ती है; ये शेष बदु दो-दो करके कट
जाते ह, अत: सम गनती पर योग सम (b) और वषम गनती पर एक बदु बच जाने से योग वषम (d) होता है।
प्र.6 1 से 100 तक क संख्याओं के योग क समानता क्या है?
योग सम है।
1 से 100 तक 50 िवषम संख्याएँ (1, 3, 5, …, 99) तथा 50 सम संख्याएँ है।
ं
50 सम संख्याओं का योग सम होगा।
50 िवषम संख्याएँ = िवषम संख्याओं की सम िगनती → योग सम।
सम + सम = सम
वास्त वक मान से जाँच —
1 + 2 + 3 + … + 100 = (1 + 100) × 100 ÷ 2 = 101 × 50 = 5050 — सम ✓
संकेत: समानता 5050 क गणना कए बना ही ज्ञात हो गई — केवल यह गनकर क वषम संख्याएँ कतनी ह।
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प्र.7 वरहांक अनुक्रम म दो क्रमागत संख्याएँ 987 और 1597 ह। इस अनुक्रम क अगली दो संख्याएँ तथा पछली दो
संख्याएँ क्या ह?
अगली दो: 2584 और 4181। पछली दो: 610 और 377।
आगे बढ़ ने के िलए (िपछली दो को जोिड़ ए) —
987 + 1597 = 2584
1597 + 2584 = 4181
पीछे जाने के िलए (घटाइए) —
1597 – 987 = 610
987 – 610 = 377
अत: अनुक्रम का यह भाग है —
…, 377, 610, 987, 1597, 2584, 4181, …
ऐसा क्य होता है: नयम a + b = c को उल्टा पढ़ने पर c – b = a मलता है, अत: वही नयम दोन दशाओं म
चलता है।
स्वयं जाँ चए: 377 + 610 = 987 ✓ तथा 610 + 987 = 1597 ✓।
प्र.8 अंगद एक 8 पग वाली सीढ़ पर चढ़ना चाहता है। उसके खेल का एक नयम है क एक समय पर वह 1 पग या 2
पग ही ले सकता है। उदाहरणाथ, उसके पथ म से एक पथ 1, 2, 2, 1, 2 है। तो बताइए क वह शीष पर कतनी
भन्न व धय से पहुँच सकता है?
अंगद शीष पर 34 भन्न व धय से पहुँच सकता है।
N पग वाली सीढ़ 1 2 3 4 5 6 7 8
िविधयों की संख्या 1 2 3 5 8 13 21 34
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as e
कक्षा 7 ग णत अध्याय 6 संख्याओं का खेल
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
e m.
िविधयाँ(3) = िविधयाँ(2) + िविधयाँ(1) = 2 + 1 = 3
m l as
.co
िविधयाँ(4) = 3 + 2 = 5
m a g
l a se
g
िविधयाँ(5) = 5 + 3 = 8
aिविधयाँ(6) = 8 + 5 = 13
co m
. ag
िविधयाँ(7) = 13 + 8 = 21
e m
िविधयाँ(8) = 21 + 13 = 34
g l as
a
. c om
ऐसा क्य होता है: अंगद का अं तम पग या तो 1 का होगा (तब वह 7व पग पर था) या 2 का (तब वह 6ठे पग पर
तयाँ कभी नह मलत , अत: गन तयाँ जुड़ जाती ह — यही वरहांक नयम m
था)। ये दोन
s e है। यह ठ क वही प्रश्न
है जो 8 कोo1mऔर 2 के योग के रूप म लखने का था।
. c a gla
a s em
a gl क्या आप जानते ह? इसी कारण 8 ताल क लय भी 34 ही होती ह — क वता और सीढ़ वस्तुत: एक ही पहेली के
m a s
agl
दो रूप ह।
m .co
l a se
a g
प्र.9 वरहांक अनुक्रम के 20व पद क समानता क्या है?
co m
m .
as e
coसमmहै। l
. a g
em
20वाँ पद
a s
agl
m
समानता का पितरूप: िव, स, िव, िव, स, िव, िव, स, िव, िव, स, …
a se
पहले पद के बाद िवषम, िवषम, सम का खंड दोहराता है।
. com a g l
m
ase
agl
सम पद 2, 5, 8, 11, 14, 17, 20, … स्थानों पर आते है।
ं
पत्येक अगला स्थान िपछले से 3 अिधक है, तथा 20 = 2 + 3 × 6 → 20वाँ पद सम है।
co m
m .
as e
वास्त वक अनुक्रम से पु —
m l
.co a g
m 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55, 89, 144, 233, 377, 610, 987, 1597, 2584, 4181, 6765, 10946
l a se
ag 20वाँ पद 10946 है, जो सम है ✓
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m ase
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ऐसा क्य होता है: समानता केवल पछले दो पद क समानताओं पर नभर करती है, अत: वह एक दोहराने वाले
चक्र म बँध जाती है। यहाँ चक्र क लंबाई 3 है, अत: केवल यह दे खना पयाप्त है क ान संख्या को 3 से भाग दे ने
पर शेषफल क्या है।
प्र.10 सत्य कथन क पहचान क जए — (a) व्यंजक 4m – 1 से सदै व वषम संख्याएँ प्राप्त होती ह। (b) सभी सम
संख्याओं को 6j – 4 के रूप म व्यक्त कया जा सकता है। (c) दोन व्यंजक 2p + 1 और 2q – 1 सभी वषम
संख्याओं का वणन करते ह। (d) व्यंजक 2f + 3 सम और वषम दोन संख्याओं को व्यक्त करता है।
केवल कथन (a) सत्य है।
कथन सत्य / कारण
असत्य
(a) 4m – 1 से सदै व वषम संख्याएँ प्राप्त सत्य 4m सदै व सम है और सम – 1 = वषम। मान: 3, 7, 11, 15, …
होती ह
(b) सभी सम संख्याओं को 6j – 4 के रूप असत्य 6j – 4 से 2, 8, 14, 20, … मलते ह। 4, 6, 10, 12, 16, … छू ट
म लखा जा सकता है जाते ह।
(c) 2p + 1 और 2q – 1 दोन सभी वषम असत्य अक्षर-संख्या 1, 2, 3, … लेने पर 2q – 1 से 1, 3, 5, … मलते ह,
संख्याओं का वणन करते ह परंतु 2p + 1 से 3, 5, 7, … मलते ह और 1 छू ट जाता है।
(d) 2f + 3 सम और वषम दोन संख्याएँ असत्य 2f सम है और 3 वषम, अत: 2f + 3 सदै व वषम है: 5, 7, 9, 11,
दे ता है …
ऐसा क्य होता है: (b) म 6j – 4 = 2(3j – 2) है, अत: इससे केवल वही सम संख्याएँ मलती ह जनका आधा 3j
– 2 के रूप का हो — यह 6 के पग म बढ़ता है और अ धकांश सम संख्याएँ छोड़ दे ता है। (d) म समानता बँधी हुई
है — सम भाग और वषम भाग का योग सदै व वषम होता है।
संकेत: (c) म य द अक्षर-संख्या को 0 भी लेने क छू ट हो तो p = 0, 1, 2, … के लए 2p + 1 से भी 1, 3, 5, …
मल जाते और कथन सत्य हो जाता। यहाँ हम पुस्तक का अनुसरण कर रहे ह, जहाँ अक्षर-संख्या गणन संख्या 1, 2,
3, … को व्यक्त करती है।
प्र.11 नम्न ल खत क्रप्टा रथम को हल क जए — UT + TA = TAT
U = 9, T = 1, A = 0, अथात 91 + 10 = 101।
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स्थानीय मान की सहायता से िलिखए —
UT = 10U + T • TA = 10T + A • TAT = 100T + 10A + T = 101T + 10A
(10U + T) + (10T + A) = 101T + 10A
10U + 11T + A = 101T + 10A
10U = 90T + 9A
10U = 9 × (10T + A)
दाईं ओर 9 का गुणज है, अत: 10U भी 9 का गुणज होना चािहए → U = 0 अथवा U = 9।
U = 0 असंभ व है (तब UT 2-अंक ीय संख्या नही ं रहेगी), अत: U = 9।
90 = 9 × (10T + A) → 10T + A = 10 → T = 1, A = 0
जोड़ क जाँच —
91
+10
——
101 ✓
ऐसा क्य होता है: दो 2-अंक य संख्याओं को जोड़ने पर TAT 3-अंक य उत्तर है, अत: उसका पहला अंक T केवल
1 का हा सल हो सकता है। T = 1 होते ही इकाई के स्तंभ से T + A का अंत T पर होना चा हए, अथात 1 + A का
अंत 1 पर हो, अत: A = 0 — और फर U तुरंत मल जाता है।
अध्याय — एक नज़र म
संख्याएँ कसी व्यव ा के बारे म सूचना दे सकती ह, बना वास्त वक मान बताए — प्रत्येक ब ा बोलता है क उसके सामने
कतने ब े उससे लंबे ह।
समानता का अथ है सम या वषम होना। सम संख्या को युग्म म व्यव त कया जा सकता है; वषम संख्या म सदै व एक शेष
रह जाता है।
समानता के नयम — सम + सम = सम, वषम + वषम = सम, सम + वषम = वषम। वषम संख्या म वषम संख्याओं का
योग वषम होता है तथा सम संख्या म वषम संख्याओं का योग सम होता है।
nव सम संख्या 2n है तथा nव वषम संख्या 2n – 1 है।
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1 से 9 तक क संख्याओं से भरे 3 × 3 ग्रड म सभी पं क्त योग जोड़ने पर 45 तथा सभी स्तंभ योग जोड़ने पर भी 45 प्राप्त
होता है। 1 – 9 से बने जादुई वग का जादुई योग 15 होता है और कद्र म 5 आता है।
वरहांक अनुक्रम 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55, … सवप्रथम लगभग 700 सामान्य संवत् म भारत म लघु एवं गुरु शब्दांश
क लय गनते समय लखा गया।
क्रप्टा रथम म प्रत्येक अक्षर एक न त अंक को व्यक्त करता है, और ानीय मान तथा समानता क सहायता से पहेली हल
हो जाती है।
त्व रत पुनरावृ त्त
वचार अथ नयम / सूत्र उदाहरण
पं क्त क संख्या आपके सामने िकतने बच्चे आपसे सामने खड़े लंबे ब को ग नए 0, 0, 1, 0, 3, 0, 3
लंबे है ं
समानता सम या िवषम होना सम = पूरे युग्म; वषम = एक शेष 12 सम है, 13 वषम है
सम संख्याओं का योग सदै व सम सम + सम = सम 4 + 8 + 10 = 22
वषम संख्याओं का िकतनी है,ं इस पर िनभर सम संख्या म → सम; वषम संख्या म → 3 + 5 = 8; 3 + 5 + 7 = 15
योग वषम
nव सम / वषम िदए गए स्थान का मान 2n तथा 2n – 1 100व वषम = 200 – 1 = 199
संख्या
m × n क समानता िग ड में छोटे वग वषम केवल तब जब m और n दोन 27 × 13 → वषम
वषम ह
पं क्त और स्तंभ योग 1 – 9 से भरा िग ड तीन पं क्त योग का कुल 45 13 + 14 + 18 = 45
जादुई वग (1 – 9) पंिक्त, स्तंभ, िवकण बराबर जादुई योग 15, कद्र 5 816/357/492
व्यापक कृत जादुई कें द m के चारों ओर जादुई योग = 3m कद्र 25 → जादुई योग 75
वग
वरहांक संख्याएँ पत्येक पद = िपछले दो का योग 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, … 8 ताल → 34 लय
क्रप्टा रथम अक्षर अंक ों को व्यक्त करते है ं एक ही अक्षर = एक ही अंक UT + TA = TAT → 91 + 10 =
101
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