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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा7
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 7: तीन प्र त े द रेखाओं क एक
कथा
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ग णत प्रकाश
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
146 – 172 24 75 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 65 pages
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क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 7 · ग णत · ग णत प्रकाश
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 7: तीन प्र त े द रेखाओं क एक
कथा
ग णत प्रकाश भाग I का अध्याय 7 त्रभुज क कथा है — तीन शीष, तीन भुजाएँ एवं तीन कोण। हम परकार तथा समकोणक क सहायता से त्रभुज
क रचना करते ह, त्रभुज अस मका क खोज करते ह जो यह तय करती है क त्रभुज बन भी सकता है या नह , और समांतर रेखाओं के उपयोग से
प्र सद्ध कोण योग गुण को सद्ध करते ह।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
ग णत प्रकाश (कक्षा 7) 146 – 172
खं ड प्रश्न
24 75
माध्यम
हन्द
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 146–149
प रचय · 7.1 समबाहु त्रभुज · 7.2 द गई भुजाओं से एक त्रभुज क रचना करना
प्र.1 जब तीन शीष एक सरल रेखा पर त होते ह तब क्या होता है?
तब कोई त्रभुज बनता ही नह । आकृ त समटकर एक रेखाखंड बन जाती है।
एक ही रेखा पर तीन िबंदु — कोई बंद आकार नही ं
A B C
जब A, B तथा C एक ही रेखा पर ह तो AB + BC = AC होता है और त्रभुज का कोई अंदरूनी भाग नह बचता।
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क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: त्रभुज को कुछ ेत्र घेरना ही चा हए। य द B, रेखाखंड AC पर स्थत है तो 'भुजाएँ' AB एवं
BC ठ क AC के ऊपर ही पड़ी रहती ह, अत: AB + BC = AC। कुछ भी घरता नह और B पर बना कोण 180°
अथात एक ऋजु कोण हो जाता है, कोना नह । ऐसे तीन बदु संरेख कहलाते ह।
प्र.2 एक ऐसे त्रभुज क रचना क जए जसक सभी भुजाओं क लंबाई 4 से.मी. हो।
परकार का उपयोग क जए — केवल मापक से अनेक बार प्रयास करने पड़गे।
1. मापक से AB = 4 से.मी. ख चए।
2. कद्र A तथा त्रज्या 4 से.मी. लेकर AB के ऊपर एक लंबा चाप ख चए।
3. कद्र B तथा उसी त्रज्या 4 से.मी. से दूसरा चाप ख चए जो पहले चाप को C पर काटे ।
4. AC और BC को मलाइए। ΔABC वाँ छत समबाहु त्रभुज है।
C
4 से.मी. 4 से.मी.
A 4 से.मी. B
4 से.मी. त्रज्या के दोन चाप ठ क C पर मलते ह, अत: AC = BC = AB = 4 से.मी.।
स्वयं जाँ चए: चाँदे से तीन कोण मा पए। प्रत्येक कोण 60° का मलेगा।
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प्र.3 आपने इस त्रभुज क रचना कस प्रकार क तथा आपने कौन-कौन से साधन उपयोग कए ह? क्या यह रचना
केवल एक मापक और एक प सल के उपयोग से क जा सकती है?
हाँ, केवल मापक और प सल से भी क जा सकती है — परंतु अनेक बार प्रयास करने पड़ते ह।
AB = 4 से.मी. खी ंिचए
ऐसा िबंद ु C अंिकत कीिजए िक AC = 4 से.मी.
अब BC मािपए → पाय: वह 4 से.मी. नही ं होती
C को िखसकाइए और िफर मािपए … और िफर
ऐसा क्य होता है: मापक एक बार म एक ही दूरी न त करता है। AC = 4 से.मी. वाले बदु C असंख्य ह और
उनम से केवल दो ऐसे ह जनके लए BC भी 4 से.मी. है। उन्ह आँख से ढूँ ढ़ना धीमा काम है। परकार एक ही झटके
म A से 4 से.मी. दूरी वाले सभी बदु दे दे ता है, इसी लए रचना सट क हो जाती है।
संकेत: प्रयुक्त साधन — आधार के लए मापक, दोन चाप के लए परकार तथा मलाने के लए प सल। चाँदे क
आवश्यकता बल्कुल नह है।
प्र.4 हम इस रचना को कस प्रकार अ धक सक्षम बना सकते ह?
अनुमान लगाने के स्थान पर परकार के दो चाप ख चए।
A से 4 से.मी. ि ज्या का चाप → इसका पत्येक िबंद ु A से 4 से.मी. दू र है
B से 4 से.मी. ि ज्या का चाप → इसका पत्येक िबंद ु B से 4 से.मी. दू र है
इनका पितच्छे द िबंद ु C दोनों से 4 से.मी. दू र है
ऐसा क्य होता है: यही यु क्त पछली क ा म 'रचनाओं से खेलना' अध्याय म 'घर' के शीष बदु को अं कत करने
म प्रयुक्त हुई थी। एक चाप सही बदुओं का पूरा कुल दे दे ता है; दूसरा चाप उनम से वही एक बदु छाँट लेता है जो
दूसरी शत भी पूरी करता है। कोई प्रयास शेष नह रहता।
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
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m.
मान ली जए क C इन दोन चाप का प्र त े द बदु है। यह रचना सु न त करती है क AC और BC दोन क ही
e
प्र.5
m l as
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लंबाई 4 से.मी. है। क्या आप बता सकते ह क ऐसा क्य है?
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g l a
a
क्य क C एक साथ दोन चाप पर स्थत है।
. c om ag
C, कें द A तथा ि ज्या 4 से.मी. वाले चाप पर है →mAC = 4 से.मी.
l a se
agपर है → BC = 4 से.मी.
C, कें द B तथा ि ज्या 4 से.मी. वाले चाप
m
और AB = 4 से.मी. पहले ही खी ंचा गया था
co
अत: AB = BC = CA = 4 से.मी.
em.
m l as
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a s emक्य होता है: वृत्त (या चाप) का प्रत्येक बदु अपने कद्र से समान दूरी अथात त्रज्या पर होता है। इस लए चाप
a gl ऐसा
पर होना अपने आप म एक दूरी का कथन है। दो चाप पर होने का अथ है दो दूरी-शत का एक साथ पूरा होना।
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em
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प्र.6
agl करते ह जो समबाहु नह ह?
हम उन त्रभुज क रचना कस प्रकार
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m .
m ase
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वही दो-चाप वाली व ध चलती है — केवल दोन त्रज्याएँ अब भन्न होती ह।
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1. तीन लंबाइय म से कसी एक को आधार मानकर ख चए।
ag l एक सरे से दूसरी लंबाई क त्रज्या का चाप ख चए।
2.
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3. दूसरे सरे से तीसरी लंबाई क त्रज्या का चाप ख चए।
4. प्र तच्छे द बदु को दोन सर से मलाइए।
com g l a
m . a
e
संकेत: सबसे लंबी भुजा को आधारlaचुsनने पर दोन चाप अच्छे कोण पर कटते ह, जससे तीसरा शीष स्पष्ट रूप से
अं कत होता है। ag
co m
m .
o m l a s.eमी. और 6 से.मी. हो।
.c a g
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एक ऐसे त्रभु ज क रचना क जए जसक भु जाओं क लं बाई 4 से .मी., 5 से
se
प्र.7
a
agl c
m .
m a s e
co agl
AB = 4 से.मी. को आधार ली जए, AC = 5 से.मी. तथा BC = 6 से.मी.।
m .
1. चरण 1: AB = 4 से.मी. ख चए।
as e
a g l
2. चरण 2: कद्र A लेकर 5 से.मी. त्रज्या का पयाप्त लंबा चाप ख चए।
3. चरण 3: कद्र B लेकर 6 से.मी. त्रज्या का चाप इस प्रकार ख चए क वह पहले चाप को काटे ।
co m
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m as e
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4. चरण 4: प्र तच्छे द बदु को C क हए। AC और BC मलाकर ΔABC प्राप्त क जए।
C
6 से.मी.
5 से.मी.
A 4 से.मी. B
आधार 4 से.मी.; A से 5 से.मी. का चाप तथा B से 6 से.मी. का चाप C पर मलते ह।
स्वयं जाँ चए: 4 < 5 + 6, 5 < 4 + 6 तथा 6 < 4 + 5, अत: दोन चाप का मलना न त है। यही त्रभुज
अस मका है जो कुछ पृष्ठ आगे मलेगी।
प्र.8 हम इस त्रभुज क रचना अ धक सक्षमता से कस प्रकार कर सकते ह?
पूरे वृत्त मत ख चए — दो छोटे चाप पयाप्त ह।
A से 5 से.मी. दू र के िबंद ु → कें द A, ि ज्या 5 से.मी. वाला वृत्त
B से 6 से.मी. दू र के िबंद ु → कें द B, ि ज्या 6 से.मी. वाला वृत्त
C = दोनों में उभयिनष्ठ िबंद ु → के वल पित च् छे द के पास के चाप ही चािहए
ऐसा क्य होता है: पूरा वृत्त आवश्यकता से कह अ धक जानकारी दे ता है। शीष C वह है जहाँ दोन वृत्त कटते ह,
अत: हम केवल उसी ेत्र के छोटे टु कड़े ख चने होते ह। कम रेखाएँ अथात स्वच्छ एवं अ धक सट क आकृ त।
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क्या आप जानते ह? दोन वृत्त वास्तव म दो बदुओं पर कटते ह — एक AB के ऊपर और एक नीचे। दोन ही सही
त्रभुज दे ते ह; वे रेखा AB म एक-दूसरे के प्र त बब ह।
रचना क जए — पृष्ठ 150
खंड 7.2 द गई भुजाओं से एक त्रभुज क रचना करना
प्र.1 नम्न ल खत लंबाइय क भुजाओं वाले त्रभुज क रचना क जए (सभी इकाइयाँ से.मी. म ह) — (a) 4, 4, 6
(b) 3, 4, 5 (c) 1, 5, 5 (d) 4, 6, 8 (e) 3.5, 3.5, 3.5
प्रत्येक स्थ त म सबसे लंबी भुजा को आधार ख चए, फर शेष दो लंबाइय के चाप का टए।
समूह आधार दोन सर से चाप त्रभुज का प्रकार
(a) 4, 4, 6 6 से.मी. 4 से.मी. एवं 4 से.मी. समि बाहु
(b) 3, 4, 5 5 से.मी. 3 से.मी. एवं 4 से.मी. िवषमबाहु (समकोण)
(c) 1, 5, 5 5 से.मी. 1 से.मी. एवं 5 से.मी. समि बाहु (बहतु पतला)
(d) 4, 6, 8 8 से.मी. 4 से.मी. एवं 6 से.मी. िवषमबाहु
(e) 3.5, 3.5, 3.5 3.5 से.मी. 3.5 से.मी. एवं 3.5 से.मी. समबाहु
प्रत्येक समूह बनता है, क्य क हर बार सबसे बड़ी लंबाई अन्य दो के योग से कम है —
(a) 6 < 4 + 4 = 8 ✓
(b) 5 < 3 + 4 = 7 ✓
(c) 5 < 1 + 5 = 6 ✓
(d) 8 < 4 + 6 = 10 ✓
(e) 3.5 < 3.5 + 3.5 = 7 ✓
ऐसा क्य होता है: दोन चाप तभी मलते ह जब वे मलकर आधार को 'पार' कर सक। (c) म पहुँच 1 + 5 = 6 है
जब क आधार 5 है — केवल एक सट मीटर क छू ट, इसी लए वह त्रभुज लंबा-पतला बनता है और 1 से.मी. भुजा
के सम्मुख कोण बहुत छोटा रहता है।
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स्वयं जाँ चए: (b) के कोण मा पए। 37°, 53° तथा 90° मलगे — एक समकोण त्रभुज।
पता लगाइए — पृष्ठ 150–151
खंड 7.2 द गई भुजाओं से एक त्रभुज क रचना करना
प्र.1 सम बाहु त्रभुज को बनाने के लए दए गए वृत्त पर त बदुओं या कद्र बदु का उपयोग कर।
कद्र O तथा वृत्त पर कोई भी दो बदु P और Q ली जए। ΔOPQ सम बाहु होगा।
O
r r
P Q
OP तथा OQ दोन त्रज्याएँ ह, अत: ΔOPQ सदै व सम बाहु रहता है।
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OP = ि ज्या
OQ = ि ज्या
अत: OP = OQ → ΔOPQ समि बाहु
ऐसा क्य होता है: वृत्त का प्रत्येक बदु कद्र से समान दूरी पर होता है। इस लए ज्य ही तीन शीष म से दो वृत्त पर
ह और तीसरा कद्र हो, दो भुजाएँ बराबर होनी ही ह। P और Q को वृत्त पर कह भी खसकाइए, त्रभुज सम बाहु
ही रहेगा।
प्रयास कर: वृत्त पर P, Q, R, S … अं कत क जए। ΔOPQ, ΔOQR, ΔORS … सभी सम बाहु ह — आप
जतने चाह बना सकते ह। य द P और Q इस प्रकार ल क PQ भी त्रज्या के बराबर हो जाए तो त्रभुज समबाहु भी
बन जाता है।
प्र.2 सम बाहु और समबाहु त्रभुज को बनाने के लए दए गए वृत्त या कद्र पर त बदुओं का उपयोग क जए।
ये सभी वृत्त समान माप के ह।
दोन चत्र म प्रत्येक वृत्त दूसरे के कद्र से होकर जाता है, अत: AB = त्रज्या।
P
A B
Q
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
P तथा Q दोन समान वृत्त के प्र तच्छे द बदु ह; ΔABP एवं ΔABQ समबाहु ह।
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em.
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समबाहु त्रभुज
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aAP = ि ज्या (P, वृत्त A पर है)
om
BP = ि ज्या (P, वृत्त B पर है)
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m है) ag
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AB = ि ज्या (पत्येक वृत्त दू सरे के कें द से होकर जाता
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अत: AP = BP = AB → ΔABP समबाह aglु है (और ΔABQ भी)
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सम बाहु त्रभुज
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.c ख्य त्रभुज मलगे। g
कद्र B वाले वृत्त पर कोई भी बदु C ली जए। तब BC = त्रज्या = AB, अत: ΔABC सम बाहु है। C को उस वृत्त पर घुमाते
m a
sद्रe A वाले वृत्त पर कोई भी दो बदु C और D ली जए। तब AC = AD = त्रज्या, अत: ΔACD सम बाहु है।
जाइए, असं
g l a
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क
ΔAPQ तथा ΔBPQ भी सम बाहु ह, क्य क AP = AQ एवं BP = BQ।
m a s
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दूसरे चत्र म A, B और C तीन कद्र ह तथा प्रत्येक शेष दोन वृत्त पर स्थत है —
se m
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AB = BC = CA = ि ज्या a
अत: ΔABC समबाहु है
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m .
o m l a se
ऐसा.cक्य होता है: समान वृत्त केवल एक ही लंबाई न त करते ह — उभय नष्ठg त्रज्या। कसी कद्र से उसी के वृत्त
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के कसी बदु तक ख चा गया हर रे ख ाखं ड उसी लं ब ाई का होता है । त्रभु ज क कतनी भुजाएँ ऐसी ह, यह गनते ही
पता चल जाता है क वह सम बाहु है (दो) या समबाहु (तीन )।
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a
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 151
क्या कसी भी लंबाई के त्रभुज बनाने संभव ह?
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m .
ग णत चचा
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m .c एक ऐसे त्रभुज क रचना क जए जसम उसक भुजाओं क लंबाईa3gसे.मी., 4 से.मी. और 8 से.मी. हो। क्या
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प्र.1
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आप ऐसे एक त्रभुज क रचना कर पा रहे ह?
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m .
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नह । दोन चाप कभी मलते ही नह , अत: तीसरा शीष बनता ही नह ।
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आधार AB = 8 से.मी. खी ंिचए
A से 3 से.मी. का चाप के वल 3 से.मी. तक पहुँच ता है
B से 4 से.मी. का चाप के वल 4 से.मी. पीछे तक आता है
3 + 4 = 7 से.मी., परंत ु पाटनी है 8 से.मी. की दू री
7 < 8 → दोनों चाप 1 से.मी. कम पड़ जाते है ं
िरिक्त — चाप नही ं िमलते
3 से.मी. 4 से.मी.
A B
8 से.मी.
8 से.मी. आधार पर 3 से.मी. एवं 4 से.मी. के चाप एक-दूसरे तक पहुँच ही नह पाते।
ऐसा क्य होता है: दोन छोट भुजाओं को मलकर आधार को पाटना पड़ता है। यहाँ उनका योग केवल 7 से.मी. है
जब क आधार 8 से.मी. का है, अत: उन्ह कतना भी झुकाइए, वे कभी नह मलगी। 3 से.मी., 4 से.मी. और 8
से.मी. भुजाओं वाले त्रभुज का अ स्तत्व नह है।
प्र.2 यहाँ लंबाइय का एक अन्य समूह भी है — 2 से.मी., 3 से.मी. और 6 से.मी.। जाँच क जए क क्या इन लंबाइय
क भुजाओं से एक त्रभुज बनाना संभव है।
संभव नह है। यहाँ भी वही बात है, ब ल्क और अ धक।
सबसे बड़ ी लंबाई = 6 से.मी.
अन्य दो का योग = 2 + 3 = 5 से.मी.
5 < 6 → चाप 1 से.मी. कम पड़ ते है ं
ि भुज का अिस्त त्व नही ं है
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स्वयं जाँ चए: AB = 6 से.मी. ख चए, फर A से 2 से.मी. और B से 3 से.मी. का चाप लगाइए। दोन के बीच स्पष्ट
खाली जगह बची रह जाती है।
प्र.3 भुजाओं क लंबाइय के कुछ अन्य समूह ात करने का प्रयास क जए जनके लए एक त्रभुज क रचना
असंभव है। दे खए क क्या आप इनम कोई पैटन ात कर सकते ह?
यहाँ ऐसे पाँच असंभव समूह और उनके पीछे का पैटन दया है।
लंबाइय का समूह सबसे बड़ी अन्य दो का योग त्रभुज?
1, 2, 5 5 3 नह
2, 4, 9 9 6 नह
3, 5, 8 8 8 नह (चाप केवल स्पश करते ह)
6, 7, 20 20 13 नह
1, 1, 3 3 2 नह
पैटन: त्रभुज ठ क तब असंभव होता है जब
सबसे बड़ ी लंबाई ≥ अन्य दो लंबाइयों का योग
ऐसा क्य होता है: दोन छोट भुजाओं को सबसे बड़ी भुजा के दोन सर से चलकर उसके ऊपर कह मलना होता
है। उनक कुल लंबाई आधार से अ धक होनी चा हए — बराबर होने पर वे आधार पर ही लेट जाती ह और एक सरल
रेखा बन जाती है, तथा कम होने पर वे मल ही नह पात ।
प्रयास कर: कोई भी दो लंबाइयाँ चु नए और तीसरी को उनके योग से बड़ा र खए, जैसे 7, 9 और 20 — आपका
अपना असंभव समूह तैयार।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 152–153
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त्रभुज अस मका
ग णत चचा
प्र.1 10 से.मी., 15 से.मी. और 30 से.मी. लंबाइय पर वचार क जए। क्या इन लंबाइय क भुजाओं वाले कसी
त्रभुज का अ स्तत्व संभव है?
ऐसे त्रभुज का अ स्तत्व नह है।
सबसे बड़ ी लंबाई = 30 से.मी.
अन्य दो का योग = 10 + 15 = 25 से.मी.
30 > 25 → सबसे बड़ ी भुजा बहुत लंबी है
अत: 10 से.मी., 15 से.मी., 30 से.मी. भुजाओं वाला ि भुज असंभ व है
ऐसा क्य होता है: 30 से.मी. वाली भुजा के एक सरे से दूसरे तक सीधा जाना 30 से.मी. क यात्रा है। तीसरे शीष
से घूमकर जाना 10 + 15 = 25 से.मी. है। इसका अथ होगा क घूमकर जाने वाला माग सीधे माग से छोटा है — जो
कभी संभव नह । इस लए आकृ त स्वयं ही टू ट जाती है।
प्र.2 कल्पना क जए क आप तंबू के प्रवेश ार पर ह तथा आप उस पेड़ तक जाना चाहते ह। कौन-सा माग छोटा है
— (i) पेड़ तक सरल रेखा माग (लाल माग) या (ii) तंबू से खंभे तक सरल रेखा माग और फर उसके बाद खंभे से
पेड़ तक सरल रेखा माग (पीला माग)?
लाल माग — तंबू से पेड़ तक का सीधा सरल रेखा माग छोटा है।
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खंभा
घूमकर
तंब ू सीधा पेड़
सीधा माग (लाल) खंभे से घूमकर जाने वाले माग (पीला) से छोटा है।
ऐसा क्य होता है: दो बदुओं के बीच सरल रेखा ही सबसे छोटा संभा वत माग होती है। कसी तीसरे बदु से होकर
घूमने पर लंबाई बढ़ ही जाती है। रोज़मरा का यही एक तथ्य पूरी त्रभुज अस मका का आधार है।
प्र.3 क्या 10 से.मी., 15 से.मी. और 30 से.मी. क लंबाइय क भुजाओं वाले एक त्रभुज के अ स्तत्व के वषय म कुछ
बताने के लए इस समझ का उपयोग कया जा सकता है?
हाँ। मान ली जए ऐसा ΔABC है जसम BC = 10 से.मी., AB = 15 से.मी. तथा CA = 30 से.मी. है। तीन युग्म क जाँच क जए।
कनके बीच सीधा माग घूमकर जाने वाला माग सीधा छोटा?
B और C BC = 10 से.मी. BA + AC = 15 + 30 = 45 से.मी. हाँ
A और B AB = 15 से.मी. AC + CB = 30 + 10 = 40 से.मी. हाँ
C और A CA = 30 से.मी. CB + BA = 10 + 15 = 25 से.मी. नही!ं
30 से.मी. > 25 से.मी. — सीधा माग घूमकर जाने वाले माग से बड़ ा है
यह िनरथक है
अत: ऐसा ि भुज नही ं बन सकता
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
ऐसा क्य होता है: हमने त्रभुज का अ स्तत्व मान लया और एक असंभव नष्कष तक पहुँच गए, अत: मान्यता ही
mप्र तच्छे द
गलत थी। ध्यान द जए क इसम न मापक चा हए, न परकार, न रचना — केवल तकण। समांतर eएवं
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रेखाओं के गु.णcoक खोज भी ठ क इसी तरह हुई थी। gl a
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क्या हम 3 से.मी., 3 से.मी. और 7 से.मी. लंबाइय क भुजाओं वाले एक त्रभुज के अ स्तत्व के बारे म जान
.
प्र.4
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सकते ह? अपने उत्तर का सत्यापन इसक रचना ारा क जए।
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त्रभुज का अ स्तत्व नह है।
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co=m7 से.मी. g l as
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eकरmजाने वाला माग = 3 + 3 = 6 से.मी.
सीधा माग
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a gl घू म
7 > 6 → सीधा माग घुमावदार माग से बड़ ा होगा — असंभ व
om a s
रचना ारा सत्यापन: AB = 7 से.मी. ख चए, फरeAm
. c agl
a s से 3 से.मी. तथा B से 3 से.मी. त्रज्या के चाप लगाइए। दोन चाप 1 से.मी.
agl नह काटते, अत: तीसरा शीष मलता ही नह ।
क दूरी पर रुक जाते ह और एक-दूसरे को कभी
संकेत: 3 से.मी. क दो भुजाएँ मलकर अ धक-से-अ धक 6 से.मी. ही पाट सकती ह। 7 से.मी. का आधार उनक
co m
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पहुँच से बाहर है।
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प्र.5 “ चत्र 7.4 म दए गए रफ आरेख म क्या लंबाइय को एक भन्न क्रम म नयत करना संभव है ता क सीधे माग
सदै व घूमकर जाने वाले माग क तुलना म छोटे रह? य द ऐसा संभव है तो एक त्रभुज का अ स्तत्व हो सकता
है।” क्या त्रभुज म लंबाइय क ऐसी पुनव्यव ा संभव है?
A
30
15
.
स.े म
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स
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ी.
B
10 स.े म
ी. C
चत्र 7.4, पृष्ठ 152 — 10 से.मी., 15 से.मी. तथा 30 से.मी. भुजाओं वाले माने गए त्रभुज का रफ आरेख (मापानुसार
नह )।
नह । नाम बदलने से कुछ नह बदलता।
आप िजस भी भुजा को 30 से.मी. कहे,ं शेष दो 10 से.मी. एवं 15 से.मी. ही रहेगं ी
उनका योग सदै व 10 + 15 = 25 से.मी. है
और हर व्यवस्था में 30 > 25
वास्तव म केवल तीन भन्न व्यवस्थाएँ बनती ह और तीन उसी एक तुलना म वफल होती ह —
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व्यव ा वफल तुलना त्रभुज?
BC = 10, AB = 15, CA = 30 30 > 10 + 15 नह
BC = 15, AB = 30, CA = 10 30 > 15 + 10 नह
BC = 30, AB = 10, CA = 15 30 > 10 + 15 नह
ऐसा क्य होता है: नणायक तुलना म केवल सबसे बड़ी संख्या और शेष दो का योग आता है। शीष के नाम या
भुजाओं का क्रम केवल लेबल ह — वे 10 + 15 को 30 से बड़ा नह बना सकते।
पता लगाइए — पृष्ठ 154
त्रभुज अस मका
प्रयास कर
प्र.1 हमने रचना ारा जाँच क है क भुजाओं क लंबाइय 3 से.मी., 4 से.मी. और 8 से.मी. तथा 2 से.मी., 3 से.मी.
और 6 से.मी. वाले त्रभुज बनाने संभव नह ह। जाँच क जए क क्या आप त्रभुज क रचना कए बना इस तथ्य
का पता लगा सकते थे?
हाँ — प्रत्येक स्थ त म एक ही तुलना पयाप्त है।
3, 4, 8 → 3 + 4 = 7 और 7 < 8 → ि भुज नही ं
2, 3, 6 → 2 + 3 = 5 और 5 < 6 → ि भुज नही ं
ऐसा क्य होता है: सबसे लंबी भुजा वाला सीधा माग शेष दो से बने घुमावदार माग से छोटा होना चा हए। यहाँ
घुमावदार माग (7 से.मी., 5 से.मी.) सीधे माग (8 से.मी., 6 से.मी.) से छोटा है, जो असंभव है। अत: रचना कभी
सफल होती ही नह थी — परकार ने केवल वही बताया जो संख्याएँ पहले ही कह रही थ ।
संकेत: सदै व सबसे बड़ी लंबाई क तुलना शेष दो के योग से क जए। यही एक जाँच काफ है।
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प्र.2 क्या हम लंबाइय के नम्न ल खत समूह म से प्रत्येक के लए एक त्रभुज के अ स्तत्व के बारे म बता सकते ह?
(a) 10 क.मी., 10 क.मी. और 25 क.मी. (b) 5 म.मी., 10 म.मी. और 20 म.मी. (c) 12 से.मी., 20 से.मी.
और 40 से.मी.
तीन म से कसी भी समूह से त्रभुज नह बनता।
समूह सबसे बड़ी अन्य दो का योग तुलना त्रभुज?
(a) 10, 10, 25 िक.मी. 25 10 + 10 = 20 25 > 20 नह
(b) 5, 10, 20 िम.मी. 20 5 + 10 = 15 20 > 15 नह
(c) 12, 20, 40 से .मी. 40 12 + 20 = 32 40 > 32 नह
ऐसा क्य होता है: प्रत्येक समूह म सबसे बड़ी लंबाई शेष दो के योग से बड़ी है, अत: दोन छोट भुजाएँ उसे कभी
नह पाट सकत । इकाई ( क.मी., म.मी., से.मी.) से कोई अंतर नह पड़ता — केवल संख्याएँ मायने रखती ह, बशत
तीन एक ही इकाई म ह ।
प्र.3 अभी तक दे खी गई लंबाइय के प्रत्येक समूह म आपने इस ओर अवश्य ही ध्यान दया होगा क न्यूनतम दो
तुलनाओं म एक सीधी लंबाई अन्य दो लंबाइय के योग से कम थी (य द नह तो पुन: जाँच क जए)। उदाहरणाथ,
10 से.मी., 15 से.मी. और 30 से.मी. क लंबाइय के समूह के लए ऐसा घ टत होने वाली दो तुलनाएँ ये ह — 10
< 15 + 30, 15 < 10 + 30। परंतु यह बात तीसरी लंबाई के लए घ टत नह होती है — 30 > 10 + 15 है। क्या
ऐसा सदै व होगा? अथात लंबाइय के कसी भी समूह के लए न्यूनतम दो तुलनाएँ ह गी जनम एक लंबाई अन्य दो
लंबाइय के योग से कम होगी? लंबाइय के भन्न- भन्न समूह के लए इसका पता लगाइए।
हाँ, सदै व। अ धक-से-अ धक एक ही तुलना वफल हो सकती है।
समूह सफल तुलनाएँ वफल तुलना
7, 10, 15 7 < 25, 10 < 22, 15 < 17 कोई नह — त्रभुज बनता है
12, 14, 18 12 < 32, 14 < 30, 18 < 26 कोई नह — त्रभुज बनता है
2, 3, 9 2 < 12, 3 < 11 9>2+3
1, 4, 5 1 < 9, 4 < 6 5 = 1 + 4 (कम नह )
लंबाइय को बढ़ते क्रम म a ≤ b ≤ c ल खए। तब —
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a ≤ c है और b धनात्मक है, अत: a < b + c ✓
b ≤ c है और a धनात्मक है, अत: b < a + c ✓
के वल c < a + b संदे ह में रहती है
ऐसा क्य होता है: छोट लंबाई तो पहले ही सबसे बड़ी से अ धक नह है, अत: उसम एक और धनात्मक लंबाई
जोड़ने पर योग न त रूप से बड़ा हो जाता है। इसी लए दोन छोट लंबाइयाँ सदै व उत्तीण होती ह। पूरा प्रश्न केवल
सबसे बड़ी लंबाई वाली एक तुलना पर टका है।
प्रयास कर: कोई भी तीन लंबाइयाँ लेकर तीन तुलनाएँ क जए। दो तुलनाओं को वफल करना आपसे कभी नह
बन पड़ेगा।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 154
त्रभुज अस मका
प्र.1 आगे लंबाइय के एक दए हुए समूह के लए क्या बना कसी प रकलन के इसक तुरंत पहचान करना संभव है
क कौन-सी लंबाई अन्य दोन लंबाइय के योग से कम है? (संकेत — बढ़ते क्रम म सीधी लंबाइय पर वचार
क जए।)
हाँ। तीन लंबाइय को बढ़ते क्रम म र खए — दोन छोट अपने आप उत्तीण हो जाती ह।
मान लीिजए a ≤ b ≤ c
a ≤ c < b + c → a < b + c ✓ (कोई पिरकलन नही ं)
b ≤ c < a + c → b < a + c ✓ (कोई पिरकलन नही ं)
के वल c < a + b की जाँच करनी पड़ ती है
उदाहरणाथ 6, 11, 14 म तुरंत कहा जा सकता है क 6 और 11 उत्तीण ह; केवल 14 बनाम 6 + 11 = 17 दे खनी है।
ऐसा क्य होता है: जस योग म सबसे बड़ी संख्या पहले से शा मल हो, उससे कसी छोट संख्या क तुलना करने म
कोई क ठनाई ही नह । क ठन तुलना केवल वही है जसम सबसे बड़ी संख्या अकेली बाईं ओर खड़ी हो।
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as e
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
भुजाओं क तीन लंबाइयाँ प्राप्त करने पर हम एक त्रभुज के अ स्तत्व क जाँच करने के लए कसक तुलना
e
प्र.2
m l as
.co
करने क आवश्यकता है?
a g
se m
g l a
a
सबसे बड़ी लंबाई क तुलना शेष दो के योग से क जए। बस यही एक जाँच चा हए।
. c om ag
यिद सबसे बड़ ी < अन्य दो का योग → ि भुज का m
a s e अिस्त त्व है
agl िबंदु एक रेखा में, ि भुज नही ं
यिद सबसे बड़ ी = अन्य दो का योग → तीनों
यिद सबसे बड़ ी > अन्य दो का योग → ि भुज नही ं
co m
e m.
m l as
.co g
जब प्रत्येक लंबाई अन्य दो के योग से कम हो तो कहते ह क ये लंबाइयाँ त्रभुज अस मका को संतुष्ट करती ह।
m a
l a se
a g समूह जाँच त्रभुज अस मका संतुष्ट?
s
हाँ
a
5<3+4=7
m
3, 4, 5
m .co agl
ase
10, 15, 30 30 > 10 + 15 = 25 नही ं
agl
संकेत: कुल तीन तुलनाएँ होती ह, परंतु दो मुफ़्त म मल जाती ह। जो काम क है वही क जए और समय बचाइए।
co m
m .
m as e
. c o a g l
पाठ्यm
a s e प्रश्न — पृष्ठ 155
agवृlत्त क रचना का चत्रीयकरण
se m
com g l a
. a
क्या 4 से.मी., 5 से.मी. और 8 से.मी. क भुजाओं क लंबाइय वाले एक त्रभुज का अ स्तत्व है? ये त्रभुज
m
प्र.1
ase
अस मका को संतुष्ट करती ह — 8 < 4 + 5 = 9. हम अन्य दो भुजाओं क जाँच करने क आवश्यकता क्य नह
agl
है?
co m
.
e m
as
क्य क शेष दो तुलनाएँ लंबाइय के क्रम से ही सु न त हो जाती ह।
m l
.co
m 4 < 5 + 8 = 13 ✓ (4 तो अकेले 8 से भी छोटी है) a g
l a se
ag
.c
m
5 < 4 + 8 = 12 ✓ (5 तो अके ले 8 से भी छोटी है)
m a s e
. co agl
8 < 4 + 5 = 9 ✓ — के वल यही त ल
ु ना िवफल हो सकती थी
em
g l as
a
co m
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m as e
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ऐसा क्य होता है: दोन छोट लंबाइयाँ अकेली सबसे बड़ी लंबाई से पहले ही कम ह; उसम एक और धनात्मक
लंबाई जोड़ने पर अंतर और बढ़ ही जाता है। अत: सबसे बड़ी लंबाई क जाँच से पूरा प्रश्न हल हो जाता है।
प्र.2 अब मान ली जए क B को कद्र लेकर त्रज्या 5 से.मी. के एक वृत्त क रचना क जाती है। क्या आप इस प रणामी
चत्र का एक रफ आरेख बना सकते ह?
4 से.मी.
B
A
X
8 से.मी.
पृष्ठ 155 — आधार AB = 8 से.मी. पर A को कद्र मानकर ख चा गया 4 से.मी. त्रज्या का वृत्त; X वह बदु है जहाँ यह
AB को काटता है।
AB = 8 से.मी. को आधार ली जए। A पर क द्रत 4 से.मी. का वृत्त तथा B पर क द्रत 5 से.मी. का वृत्त ख चए — वे एक लस जैसे
ेत्र म एक-दूसरे को ढक लेते ह।
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वृत्त B, ि ज्या 5
वृत्त A, ि ज्या 4
4 से.मी. 4 से.मी.
A X B
AB = 8 से.मी., AX = 4 से.मी. अत: BX = 4 से.मी., जो वृत्त B क 5 से.मी. त्रज्या से कम है।
संकेत: पहले आधार ख चए और X अं कत क जए जहाँ वृत्त A, AB को काटता है। तब एक नज़र म दख जाता है
क वृत्त B, X को अपने भीतर लेता है या नह ।
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प्र.3 ध्यान द जए क आगे दए गए चत्र म AX = 4 से.मी. है तथा AB = 8 से.मी. है। अत: BX क्या है? क्या यह
लंबाई प रणामी चत्र के चत्रीयकरण म सहायता करती है?
4 से.मी.
B
A
X
8 से.मी.
पृष्ठ 155 — आधार AB = 8 से.मी. पर A को कद्र मानकर ख चा गया 4 से.मी. त्रज्या का वृत्त; X वह बदु है जहाँ यह
AB को काटता है।
BX = 4 से.मी., और यही पूरा चत्र तय कर दे ती है।
BX = AB – AX
= 8 से.मी. – 4 से.मी.
= 4 से.मी.
कें द B वाले वृत्त की ि ज्या = 5 से.मी.
BX = 4 से.मी. < 5 से.मी.
अत: X, वृत्त B के भीतर िस्थत है
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ऐसा क्य होता है: X वृत्त A का वह बदु है जो B के सबसे नकट है। य द यह नकटतम बदु भी वृत्त B के भीतर है
तो वृत्त A का कुछ भाग वृत्त B के भीतर है और कुछ (दूर वाला) बाहर — अत: दोन वृत्त का कटना अ नवाय है
और वे ठ क दो बदुओं पर कटते ह। उनम से कसी एक बदु को A तथा B के साथ लेने पर त्रभुज बन जाता है। इस
प्रकार 4 से.मी., 5 से.मी. एवं 8 से.मी. भुजाओं वाले त्रभुज का अ स्तत्व है।
पता लगाइए — पृष्ठ 156
त्रभुज अस मका
प्र.1 नम्न ल खत म से कौन-सी लंबाइयाँ एक त्रभुज क भुजाओं क लंबाइयाँ हो सकती ह? अपने उत्तर को स्पष्ट
क जए। ध्यान द जए क प्रत्येक समूह म तीन लंबाइय के मापन क इकाई समान है। (a) 2, 2, 5 (b) 3, 4, 6
(c) 2, 4, 8 (d) 5, 5, 8 (e) 10, 20, 25 (f) 10, 20, 35 (g) 24, 26, 28
प्रत्येक समूह म सबसे बड़ी लंबाई क तुलना शेष दो के योग से क जए।
समूह सबसे बड़ी बनाम अन्य दो का योग त्रभुज क भुजाएँ?
(a) 2, 2, 5 5>2+2=4 नही ं
(b) 3, 4, 6 6<3+4=7 हाँ
(c) 2, 4, 8 8>2+4=6 नही ं
(d) 5, 5, 8 8 < 5 + 5 = 10 हाँ
(e) 10, 20, 25 25 < 10 + 20 = 30 हाँ
(f) 10, 20, 35 35 > 10 + 20 = 30 नही ं
(g) 24, 26, 28 28 < 24 + 26 = 50 हाँ
सफल समूह क तीन तुलनाएँ —
(b) 3 < 4 + 6, 4 < 3 + 6, 6 < 3 + 4 ✓
(d) 5 < 5 + 8, 5 < 5 + 8, 8 < 5 + 5 ✓
(e) 10 < 20 + 25, 20 < 10 + 25, 25 < 10 + 20 ✓
(g) 24 < 26 + 28, 26 < 24 + 28, 28 < 24 + 26 ✓
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as e
क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
ऐसा क्य होता है: समूह (a), (c) तथा (f) म एक लंबाई शेष दोन के योग से भी बड़ी है, अत: वे दोन भुजाएँ उसे
कभी पाट नह सकत । समूह (b), (d), (e) तथा (g) त्रभुज अस मका को संतुष्ट करते ह, अत: e
s m चाप का
m gl a
दोन
कटना न त.cहैoऔर त्रभुज अवश्य बनता है।
em a
a s
aसंgकl े त: (d) 5, 5, 8 सम बाहु है और (g) 24, 26, 28 वषमबाहु — अस मका अ स्तत्व तय करती है, प्रकार
co m
ag
नह ।
m .
as e
a g l
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 156–159
co m
m.
दोन वृत्त कब प्र त े द करते ह?
o m l a se
प्र.1 m .cतब त्रभुज का अ स्तत्व सदै व ही होता है जब तीन लंबाइय का एक समूaह gत्रभुज अस मका को संतुष्ट करता
se है? हम इसके लए कस प्रकार सु न त हो सकते ह?
क्या
l a
ag
a s
coे mलए सु न त हो सकते ह। agl
.
seBmपर छोट दोन लंबाइय क त्रज्या वाले वृत्त ख चए। केवल तीन बात हो
हाँ — और दोन वृत्त क संभा वत स्थ तयाँ दे खकर हम इसक
आधार AB = सबसे बड़ी लंबाई ली जए तथा Alऔर a
सकती ह — ag
mज?
coत्रभु
m .
e
त चत्र संबंध
m l as
.co a g
em
िस्थित 1 वृत्त एक बदु पर स्पश करते ह दोन त्रज्याओं का योग = AB नही ं (सरल रे खा)
a s
agl िस्थित 2 वृत्त प्र तच्छे द नह करते दोन त्रज्याओं का योग < AB नही ं
se m
com a
दोन त्रज्याओं का योग > AB हाँ
l
िस्थित 3 वृत्त परस्पर काटते ह
. a g
m
ase
agl
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a िस्थित 1: स्पश िस्थित 2: अलग िस्थित 3: पितच्छे द
a c
m .
m
केवल स्थ त 3 — जहाँ वृत्त परस्पर कटते ह — तीसरा शीष दे ती है।
a s e
em . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 24 of 65
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ऐसा क्य होता है: त्रभुज अस मका कहती है क दोन छोट लंबाइय का योग सबसे बड़ी लंबाई से अ धक है।
चूँ क दोन त्रज्याएँ छोट लंबाइयाँ ह और AB सबसे बड़ी, यह ठ क स्थ त 3 क शत है। अत: अस मका का संतुष्ट
होना वृत्त को कटने पर ववश कर दे ता है और त्रभुज बनना न त हो जाता है।
प्र.2 त 2 — वृत्त आंत रक रूप से प्र त े द नह कर रहे ह। इस त के घ टत होने के लए त्रज्याओं और AB
के बीच क्या संबंध होना चा हए?
दोन त्रज्याएँ मलकर AB से कम पड़नी चा हए।
दोनों ि ज्याओं का योग < AB
अथ त दोनों छोटी लंबाइयों का योग < सबसे बड़ ी लंबाई
चत्र म X वह बदु है जहाँ वृत्त A, AB को काटता है। XB क र क्त खाली रह जाती है क्य क दूसरा वृत्त इतना बड़ा नह क X तक
पहुँच सके।
ऐसा क्य होता है: वृत्त A, AB के अनु दश केवल अपनी त्रज्या तक पहुँचता है; वृत्त B भी पीछे केवल अपनी
त्रज्या तक आता है। य द ये दोन पहुँच एक-दूसरे को ढक नह तो बीच म एक खाली प बची रह जाती है और कोई
भी बदु दोन वृत्त पर नह होता।
प्र.3 क्या हम इस व ेषण का उपयोग यह बताने म कर सकते ह क एक त्रभुज का अ स्तत्व तब होता है जब इसक
लंबाइयाँ त्रभुज अस मका को संतुष्ट करती ह?
हाँ — यह व ेषण तक को पूरा कर दे ता है।
ि भुज असिमका संत ष्ु ट है
→ दोनों छोटी लंबाइयों का योग > सबसे बड़ ी लंबाई
→ दोनों ि ज्याओं का योग > AB
→ हम िस्थित 3 में है,ं वृत्त परस्पर कटते है ं
→ तीसरा शीष पाप्त होता है
→ ि भुज का अिस्त त्व है
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नष्कष: य द तीन लंबाइय का दया हुआ समूह त्रभुज अस मका को संतुष्ट करता है तो उन भुजाओं वाले त्रभुज का अ स्तत्व होता
है। य द नह करता तो अ स्तत्व नह होता।
ऐसा क्य होता है: पहले हम केवल इतना जानते थे क अस मका के वफल होने पर त्रभुज नह बनता। तीन
स्थ तय के अध्ययन ने बचा हुआ आधा भाग दे दया — अस मका के संतुष्ट होने पर त्रभुज बनता ही है। दोन
मलकर एक संपूण जाँच बन जाते ह।
प्र.4 लंबाइय के उस समूह के लए दोन वृत्त कस प्रकार के बनगे जो त्रभुज अस मका को संतुष्ट नह करते ह? ऐसी
लंबाइय के समूह के तीन-तीन उदाहरण ात क जए जनके लए वृत्त — (a) परस्पर एक बदु पर स्पश करते ह
(b) परस्पर प्र त े द नह करते ह।
वे स्थ त 1 या स्थ त 2 म आ जाते ह।
(a) वृत्त एक बदु पर स्पश करते ह — दोन छोट लंबाइय का योग = सबसे बड़ी लंबाई —
समूह जाँच
3, 5, 8 3+5=8
2, 4, 6 2+4=6
5, 5, 10 5 + 5 = 10
(b) वृत्त प्र त े द नह करते — दोन छोट लंबाइय का योग < सबसे बड़ी लंबाई —
समूह जाँच
2, 3, 8 2+3=5<8
1, 2, 10 1 + 2 = 3 < 10
4, 5, 12 4 + 5 = 9 < 12
ऐसा क्य होता है: स्पश क स्थ त म मलन बदु स्वयं AB पर ही पड़ता है, अत: A, B तथा वह बदु संरेख हो जाते
ह — बना ऊँचाई वाला चपटा त्रभुज। न कटने क स्थ त म तो कोई उभय नष्ठ बदु ही नह होता।
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प्र.5 एक संपूण प्र क्रया बनाइए जसका उपयोग एक त्रभुज के अ स्तत्व क जाँच करने म कया जा सके।
तीन चरण क ऐसी व ध जो कभी वफल नह होती।
1. चरण 1: सु न त क जए क तीन लंबाइयाँ एक ही इकाई म ह।
2. चरण 2: सबसे बड़ी लंबाई छाँ टए। शेष दो को जो ड़ए।
3. चरण 3: तुलना क जए —
सबसे बड़ी < शेष दो का योग → त्रभुज का अ स्तत्व है
सबसे बड़ी = शेष दो का योग → तीन बदु संरेख, त्रभुज नह
सबसे बड़ी > शेष दो का योग → त्रभुज नह
उदाहरण: 7, 9, 15
सबसे बड़ ी = 15, शेष का योग = 7 + 9 = 16
15 < 16 → ि भुज का अिस्त त्व है
संकेत: न परकार, न मापक, न कोई रचना — एक जोड़ और एक तुलना से उत्तर मल जाता है।
पता लगाइए — पृष्ठ 159–160
नष्कष — त्रभुज अस मका क जाँच
प्रयास कर
प्र.1 जाँच क जए क नम्न ल खत लंबाइय के प्रत्येक समूह के लए एक त्रभुज का अ स्तत्व है या नह (लंबाइयाँ
समान इकाई म ह) — (a) 1, 100, 100 (b) 3, 6, 9 (c) 1, 1, 5 (d) 5, 10, 12
सबसे बड़ी लंबाई क तुलना शेष दो के योग से क जए।
समूह सबसे बड़ी बनाम शेष दो का योग त्रभुज?
(a) 1, 100, 100 100 < 1 + 100 = 101 अिस्तत्व है
(b) 3, 6, 9 9=3+6 अिस्तत्व नही ं
(c) 1, 1, 5 5>1+1=2 अिस्तत्व नही ं
(d) 5, 10, 12 12 < 5 + 10 = 15 अिस्तत्व है
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ऐसा क्य होता है: (b) म योग ठ क बराबर है, कम नह । दोन वृत्त केवल स्पश करते ह, अत: 'तीसरा शीष' आधार
पर ही आ जाता है और आकृ त सरल रेखा बन जाती है — बराबरी पयाप्त नह है। (a) म छू ट केवल 1 इकाई क है,
अत: त्रभुज बनता तो है पर बहुत पतला।
प्र.2 क्या भुजाओं 50, 50, 50 (समान इकाई म) वाले एक समबाहु त्रभुज का अ स्तत्व है? क्या व्यापक रूप म कसी
भी लंबाई क भुजा वाले एक समबाहु त्रभुज का अ स्तत्व है? अपने उत्तर का औ चत्य द जए।
दोन का उत्तर हाँ है।
50 < 50 + 50 = 100 ✓
तीनों त ल
ु नाएँ एक-सी है,ं अत: ि भुज असिमका संत ष्ु ट है
भुजा 50 वाले समबाहु ि भुज का अिस्त त्व है
कसी भी भुजा s (एक धनात्मक संख्या) के लए —
शेष दो भुजाओं का योग = s + s = 2s
s धनात्मक है, अत: s < 2s सदै व सत्य है
इसिलए िकसी भी लंबाई की भुजा वाले समबाहु ि भुज का अिस्तत्व है
ऐसा क्य होता है: बराबर भुजाओं के लए अस मका घटकर "s, 2s से कम है" रह जाती है, जसे कोई भी
धनात्मक संख्या तोड़ नह सकती। इसी लए 2 म.मी. का भी और 2 मीटर का भी समबाहु त्रभुज उसी दो-चाप वाली
व ध से बन जाता है।
प्र.3 नम्न ल खत म से प्रत्येक के लए तीसरी लंबाई के न्यूनतम 5 संभा वत मान द जए ता क इन्ह भुजाओं क
लंबाइय के रूप म लेने पर एक त्रभुज का अ स्तत्व हो (दशमलव मान को भी चुना जा सकता है) — (a) 1,
100 (b) 5, 5 (c) 3, 7
तीसरी लंबाई दोन द हुई लंबाइय के अंतर से बड़ी तथा उनके योग से छोट होनी चा हए।
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as e
क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
द गई लंबाइयाँ तीसरी लंबाई कनके बीच पाँच संभा वत मान
m as e
(a) 1, 100
.co
100 – 1 = 99 तथा 100 + 1 = 101
a g l
99.5, 100, 100.2, 100.7, 99.8
se m
g l a 0 तथा 10
a
(b) 5, 5 1, 3, 4.9, 5, 9
(c) 3, 7 7 – 3 = 4 तथा 7 + 3 = 10 4.5, 5, 6.4, 7, 9
co m
em . ag
(c) में तीसरी लंबाई 5 की जाँच —
g l as
7<3+5=8✓
a
co m
m.
5 < 3 + 7 = 10 ✓
m as e
.co
3 < 5 + 7 = 12 ✓
a g l
se m
g l a
a ऐसा क्य होता है: यहाँ दो शत एक साथ काम करती ह। नई लंबाई इतनी बड़ी न हो क वह शेष दोन के योग से बढ़
m
जाए, और इतनी छोट भी न हो क द हुई बड़ी भुजा उसके तथा छोट भुजा के योग से बड़ी हो जाए। दोन मलकर
a s
उसे अंतर और योग के बीच कैद कर दे ती ह।
m .co agl
l a se
ag
दे खए क क्या आप प्रत्येक
co m
त म तीसरी भुजा क सभी संभा वत लंबाइय क व्याख्या कर सकते ह ता क इन
.
प्र.4
लंबाइय क भुजाओं के त्रभुज का अ स्तत्व हो जाए। उदाहरणाथ
e m
त (a) म 99 और 101 के बीच क सभी
m l as
.co g
संख्याएँ संभव ह गी।
em a
a s
a gl उत्तर
se m
प्रत्येक स्थ त म उत्तर एक खुला परास है: अंतर < तीसरी लंबाई < योग।
com g l a
m .योग a
ase
दया गया युग्म अंतर तीसरी लंबाई के सभी संभव मान
(a) 1, 100 agl
99 101 99 और 101 के ठीक बीच
(b) 5, 5 0 10 0 और 10 के ठीक बीच
co m
m .
as e
com l
4 10 4 और 10 के ठीक बीच
g
(c) 3, 7
m . a
ase
agl यिद दी गई दोनों लंबाइयाँ p तथा q हों और p ≤ q, तो तीसरी लंबाई x के िलए
c
m .
m a s e
agl
q–p<x<q+p
. co
e m
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 29 of 65
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क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: x < p + q रखने से x अत्य धक लंबी भुजा नह बन पाती; x > q – p (जो q < x + p के
समान है) रखने से q अत्य धक लंबी भुजा नह बन पाती। सरे के मान इस लए छोड़ दए जाते ह क्य क बराबरी पर
त्रभुज चपटा होकर रेखा बन जाता है।
प्रयास कर: 5 और 5 के लए परास 0 से शुरू होता है, क्य क दो बराबर भुजाएँ जतनी चाह उतनी छोट तीसरी
भुजा सँभाल सकती ह — त्रभुज बस बहुत चपटा हो जाता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 160
7.3 द गई भुजाओं और कोण के माप से त्रभुज क रचना कर — दो भुजाएँ और अंतगत कोण
प्र.1 हम एक त्रभुज क रचना कैसे करते ह जब उसक दो भुजाएँ तथा उनके अंतगत कोण दए हुए ह ?
एक द हुई भुजा को आधार ख चए, उसके एक सरे पर दया हुआ कोण बनाइए और नई भुजा पर दूसरी लंबाई काट ली जए।
1. पहली द हुई भुजा को आधार के रूप म ख चए।
2. जस सरे पर कोण है, वहाँ चाँदे से कोण क दूसरी भुजा ख चए।
3. उस भुजा पर दूसरी द हुई लंबाई अं कत क जए।
4. अं कत बदु को आधार के दूसरे सरे से मलाइए।
संकेत: अंतगत कोण वह कोण है जो दोन द हुई भुजाओं के बीच है — दोन भुजाएँ उसी कोण क भुजाएँ होती
ह। माप प्राय: भुजा-कोण-भुजा के क्रम म लखे जाते ह, जैसे 4 से.मी., 60°, 3 से.मी.।
प्र.2 एक त्रभुज ABC क रचना क जए जसम AB = 5 से.मी., AC = 4 से.मी. और ∠A = 45° है।
AB को आधार ली जए, क्य क दया हुआ कोण A पर है।
1. चरण 1: 5 से.मी. लंबी एक भुजा AB क रचना क जए।
2. चरण 2: कोण क दूसरी भुजा को ख चकर ∠A = 45° क रचना क जए।
3. चरण 3: इस दूसरी भुजा पर बदु C इस प्रकार अं कत क जए क AC = 4 से.मी. रहे।
4. चरण 4: वाँ छत त्रभुज प्राप्त करने के लए BC को मलाइए।
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क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा AglaSem · NCERT Solutions
C
4 से.मी.
45°
A 5 से.मी. B
आधार AB = 5 से.मी., चाँदे से ∠A = 45°, और नई भुजा पर AC = 4 से.मी. काटा गया।
ऐसा क्य होता है: A पर कोण न त होते ही भुजा AC क दशा न त हो जाती है। उस पर 4 से.मी. अं कत
करते ही C भी न त हो जाता है। कोई वकल्प शेष नह रहता, अत: इस रचना से ठ क एक ही त्रभुज बनता है।
पता लगाइए — पृष्ठ 161
दो भुजाएँ और अंतगत कोण
ग णत चचा
प्र.1 नम्न ल खत माप के लए त्रभुज क रचना क जए जहाँ कोण भुजाओं के बीच म है — (a) 3 से.मी., 75°, 7
से.मी. (b) 6 से.मी., 25°, 3 से.मी. (c) 3 से.मी., 120°, 8 से.मी.
प्रत्येक स्थ त म लंबी द हुई भुजा को आधार ख चए, एक सरे पर कोण बनाइए और नई भुजा पर दूसरी लंबाई अं कत क जए।
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क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा AglaSem · NCERT Solutions
समूह आधार उस सरे पर कोण नई भुजा पर लंबाई प्राप्त आकार
(a) 3 से .मी., 75°, 7 से .मी. 7 से.मी. 75° 3 से.मी. िवषमबाहु, न्यून कोण
(b) 6 से .मी., 25°, 3 से .मी. 6 से.मी. 25° 3 से.मी. िवषमबाहु, पतला
(c) 3 से .मी., 120°, 8 से .मी. 8 से.मी. 120° 3 से.मी. िवषमबाहु, अिधक कोण
उदाहरण के लए (a) क रचना —
1. PQ = 7 से.मी. ख चए।
2. P पर PQ से 75° बनाती हुई एक भुजा ख चए।
3. उस भुजा पर R इस प्रकार अं कत क जए क PR = 3 से.मी. हो।
4. QR मलाइए। ΔPQR वाँ छत त्रभुज है।
स्वयं जाँ चए: प्रत्येक समूह से केवल एक ही त्रभुज बनता है। (c) को ध्यानपूवक बनाने वाले दो सहपा ठय के
त्रभुज एक-दूसरे पर ठ क बैठ जाएँगे।
प्र.2 हम दे ख चुके ह क भुजाओं क लंबाइय के सभी समूह के लए त्रभुज का अ स्तत्व नह होता है। क्या दो
भुजाओं और उनके अंतगत कोण क त म माप का कोई ऐसा संयोजन है जहाँ एक त्रभुज क रचना संभव
नह हो? इनक रचना करते समय आपने जो प्रे क्षत कया है उसका उपयोग करते हुए अपने उत्तर का औ चत्य
द जए।
हाँ — परंतु केवल तब जब दया हुआ कोण त्रभुज का वास्त वक कोण ही न हो, अथात वह 180° या उससे अ धक हो।
माप कागज़ पर क्या होता है त्रभुज?
3 से .मी., 180°, 7 से .मी. दोन भुजाएँ एक ही सरल रेखा म आ जाती ह; तीसरा शीष आधार पर ही पड़ता है नही ं
4 से .मी., 210°, 6 से .मी. ऐसा कोण त्रभुज के अंत:कोण के रूप म ख चा ही नह जा सकता नही ं
4 से .मी., 179°, 6 से .मी. अत्यंत चपटा कतु वास्त वक त्रभुज हाँ
ऐसा क्य होता है: जब तक अंतगत कोण 0° से अ धक और 180° से कम है, दोन भुजाएँ भन्न दशाओं म जाती
ह, अत: उनके दूर वाले सरे सदै व मलाए जा सकते ह और त्रभुज बन जाता है — भुजाओं क लंबाइय से कोई
अंतर नह पड़ता। केवल 180° पर दोन भुजाएँ एक ही रेखा म आकर त्रभुज को समाप्त कर दे ती ह। इस लए तीन
भुजाओं वाली स्थ त के वपरीत यहाँ नणय अकेला कोण करता है।
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क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा AglaSem · NCERT Solutions
संकेत: इसक तुलना त्रभुज अस मका से क जए। वहाँ लंबाइयाँ वफल हो सकती थ ; यहाँ वे कभी वफल नह
होत ।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 161
दो कोण और अंतगत भुजा
प्र.1 एक त्रभुज ABC क रचना क जए जसम AB = 5 से.मी., ∠A = 45° और ∠B = 80° है।
द हुई भुजा AB को आधार मा नए और उसी से दोन कोण उगाइए।
1. चरण 1: 5 से.मी. लंबाई का आधार AB ख चए।
2. चरण 2: AB के एक ही ओर क्रमश: 45° और 80° माप के ∠A और ∠B ख चए।
3. चरण 3: दो नए रेखाखंड का प्र तच्छे द बदु तीसरा शीष C है।
C
45° 80°
A 5 से.मी. B
45° और 80° पर ख ची गई दोन भुजाएँ C पर मलती ह, जो तीसरा शीष है।
तीसरा कोण ∠C = 180° – (45° + 80°)
= 180° – 125°
= 55°
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as e
क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
ऐसा क्य होता है: 45° + 80° = 125°, जो 180° से कम है, अत: दोन भुजाएँ एक-दूसरे क ओर झुकती ह।
m a s emइस लए यहाँ भी
gl
झुक हुई रेखाओं का मलना न त है और जहाँ वे मलती ह वही एकमात्र संभव तीसरा शीष है —
o ज बनता है।
ठ क एक ही .cत्रभु
a
a s em
agl
co m
ag
पता लगाइए — पृष्ठ 162
m .
दो कोण और अंतगत भुजा
as e
a g l
नम्न ल खत मापन के लए त्रभुज क रचना क जए— (a) 75°, 5 से.मी., 75° (b) 25°, 3 से.मी., 60° (c)
m
प्र.1
co
m.
120°, 6 से.मी., 30°
m as e
.co a g l
se m
g l a
द हुई भुजा को आधार ख चए और उसके दोन सर पर दए हुए कोण बनाइए।
a
om a s
समूह आधार सर पर कोण दोन कोण का योग तीसरा कोण प्रकार
75° और 75° .c 150°
em agl
s
(a) 75°, 5 से .मी., 75° 5 से.मी. 30° सम बाहु, न्यून कोण
a
(b) 25°, 3 से .मी., 60° 3 से.मी. aglऔर 60° 85°
25° 95° वषमबाहु, अ धक कोण
m
.co
(c) 120°, 6 से .मी., 30° 6 से.मी. 120° और 30° 150° 30° सम बाहु, अ धक कोण
se m
com g l a
m . कोण = 180° – (दोनों िदए हएु कोणों का योग) a
as eतीसरा
agl (a) 180° – 150° = 30°
se m
com a
(b) 180° – 85° = 95°
. a g l
m
ase
(c) 180° – 150° = 30°
agl
ऐसा क्य होता है: तीन म योग 180° से कम है, अत: हर बार दोन भुजाएँ एक-दूसरे क ओर झुककर मल ही
co m
जाती ह। (c) म तीसरा कोण दए हुए एक कोण (30°) के बराबर नकलता है, इसी लए वह त्रभुज सम बाहु बनता
m .
m as e
l
है।
m .co a g
l a se
ag स्वयं जाँ चए: रचना के बाद तीसरे कोण को चाँदे से मापकर ता लका के मान से मलाइए।
.c
s e m
m a
e m . co agl
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 162–163
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 34 of 65
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क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा AglaSem · NCERT Solutions
क्या त्रभुज का अ स्तत्व सदै व संभव है?
ग णत चचा
प्र.1 क्या दो कोण और उनक अंतगत भुजाओं के प्रत्येक संयोजन के लए त्रभुज बन सकते ह? पता लगाइए।
नह । य द दोन दए हुए कोण बहुत बड़े ह तो दोन भुजाएँ कभी मलती ही नह ।
दोन कोण योग भुजाएँ क्या करती ह त्रभुज?
45°, 80° 125° एक-दूसरे क ओर झुकती ह हाँ
90°, 90° 180° दोन सीधी ऊपर जाती ह — समांतर नही ं
100°, 95° 195° एक-दूसरे से दूर झुकती ह नही ं
ऐसा क्य होता है: दोन भुजाएँ तभी मलती ह जब वे मलकर भीतर क ओर मुड़। य द दोन कोण 90° या उससे
अ धक ह तो प्रत्येक भुजा या तो ऊध्वाधर है या बाहर क ओर झुक है, अत: वे केवल दूर ही होती जाएँगी। जैसे तीन
लंबाइय को एक जाँच पास करनी पड़ती है, वैसे ही दो कोण को भी।
प्र.2 ऐसे दो कोण और उनक अंतगत भुजाओं के मापन के उदाहरण ात क जए जहाँ एक त्रभुज क रचना संभव
नह है।
ऐसा कोई भी युग्म काम दे गा जसका योग 180° तक पहुँच जाए, अंतगत भुजा चाहे कतनी भी हो।
माप दोन कोण का योग त्रभुज?
90°, 5 से .मी., 90° 180° नही ं — दोनों भुजाएँ समातं र
110°, 4 से .मी., 95° 205° नही ं
40°, 6 से .मी., 150° 190° नही ं
120°, 7 से .मी., 60° 180° नही ं
संकेत: य द दोन कोण म से प्रत्येक समकोण (90°) से अ धक या उसके बराबर हो तो त्रभुज स्पष्ट रूप से संभव
नह है।
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क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 अब हम आधार कोण म से एक को न्यून कोण 40° का कोण बनाते ह। अन्य कोण के मान संभवतः क्या होने
चा हए ता क ये रेखाएँ परस्पर न मल? (a) ऐसा घ टत होने के लए (ऊपर आकृ त म अं कत) एक संभा वत ∠B
ात करने का प्रयास क जए। (b) इन रेखाओं के न मलने के लए ∠B का न्यूनतम मान क्या हो सकता है?
C
l
40°
A B
पृष्ठ 162 — आधार AB तथा A से 40° पर ख ची गई करण l।
∠A = 40° होने पर B से जाने वाली रेखा को दाईं ओर पयाप्त झुकना होगा।
(a) ∠B = 150° काम करता है — इसी प्रकार 145°, 160°, 170° भी। इनम से कसी भी मान पर B से जाने वाली रेखा, A से
ख ची गई रेखा l से कभी नह मलती।
(b) ऐसा न्यूनतम मान है ∠B = 140°।
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क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा AglaSem · NCERT Solutions
l से
िमलती है
l
m (∠B = 140°)
40°
A B
B से होकर l के समांतर ख ची गई रेखा m वह न्यूनतम ∠B बनाती है जस पर रेखाएँ नह मलत ।
ऐसा क्य होता है: B वाली भुजा जतनी दाईं ओर झुकती है, वह l को उतनी ही दूर जाकर काटती — और एक
वशेष झुकाव पर वह समांतर हो जाती है तथा कभी काटती ही नह । यही समांतर स्थ त सबसे छोटा वफल ∠B
दे ती है, और उससे बड़ा हर ∠B भी वफल ही रहता है।
प्र.4 क्या आप इस त म ∠B का वास्त वक मान बता सकते ह? (संकेत— ध्यान द जए क AB एक तयक रेखा
है।)
∠B = 140°।
B से होकर जाने वाली रेखा m, A से होकर जाने वाली रेखा l के समांत र है
AB ितयक रेखा है
∠A और ∠B ितयक रेखा के एक ही ओर के अंत :कोण है ं
अत: ∠A + ∠B = 180°
40° + ∠B = 180°
∠B = 140°
ऐसा क्य होता है: यह समांतर रेखाओं का वही गुण है जो 'रेखाएँ एवं कोण' अध्याय म पढ़ा था। चूँ क सीमांत
स्थ त ठ क समांतर वाली स्थ त है, इस लए ∠B का सीमांत मान भी ठ क 180° म से दूसरे कोण को घटाकर
मलता है।
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क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा AglaSem · NCERT Solutions
प्र.5 इस लए ∠B के कन मान के लए एक त्रभुज का अ स्तत्व नह होगा? क्या लंबाई AB क इसम कोई भू मका
है?
जब ∠B ≥ 140° हो तब त्रभुज का अ स्तत्व नह होगा, और लंबाई AB क इसम कोई भू मका नह है।
∠A = 40°
ि भुज बनता है जब ∠A + ∠B < 180°, अथ त ∠B < 140°
ि भुज नही ं बनता जब ∠B ≥ 140°
व्यापक रूप म, आधार कोण ∠A तथा ∠B के लए —
∠A + ∠B < 180° → ि भुज का अिस्त त्व है
∠A + ∠B ≥ 180° → ि भुज का अिस्त त्व नही ं है
ऐसा क्य होता है: AB को लंबा या छोटा करने पर B वाली भुजा केवल इधर-उधर खसकती है, उसक दशा नह
बदलती। दो रेखाएँ केवल अपनी दशाओं के कारण मलती या नह मलती ह, इस लए नणय केवल कोण करते ह।
पता लगाइए — पृष्ठ 163
क्या त्रभुज का अ स्तत्व सदै व संभव है?
प्र.1 नम्न ल खत कोण म से प्रत्येक कोण के लए एक अन्य कोण ात क जए जसके लए एक त्रभुज (i) संभव है
(ii) अथवा संभव नह है। प्रत्येक ेणी के लए न्यूनतम दो भन्न- भन्न कोण ात क जए। (a) 30° (b) 70° (c)
54° (d) 144°
त्रभुज बनने के लए दूसरा कोण, 180° म से दए हुए कोण को घटाने पर मली संख्या से कम होना चा हए।
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as e
क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
दया सीमा (180° – त्रभुज संभव — दो वकल्प (तीसरा त्रभुज संभव नह — दो
as e
om
कोण दया) कोण) वकल्प
.c150° g l
a 170°
(a) 30°
a s em 50° (तीसरा 100°), 90° (तीसरा 60°) 150°,
l
a(b)g 70° 110° 60° (तीसरा 50°), 80° (तीसरा 30°) 120°, 140°
m
.co ag
(c) 54° 126° 90° (तीसरा 36°), 64° (तीसरा 62°) 134°, 154°
s m 35° (तीसरा 1°)
e16°),
a
agl
(d) 144° 36° 20° (तीसरा 36°, 90°
co m
m.
नमून ा जाँच , (b) में 60° के साथ —
m as e
.co l
70° + 60° = 130° < 180° ✓
a g
se m
तीसरा कोण = 180° – 130° = 50°
g l a
a
m a s
agl
ऐसा क्य होता है: चुने हुए दोन कोण को तीसरे कोण के लए कुछ न कुछ बचाकर रखना पड़ता है, अत: उनका
m.co
योग 180° से कम ही रहना चा हए। सीमा पर या उससे ऊपर के कोण तीसरे के लए कुछ भी नह छोड़ते।
l a se
ag
संकेत: (d) म 144° पहले से ही बड़ा है, इस लए साथी कोण के लए बहुत कम जगह बचती है — 0° से थोड़ा
ऊपर से लेकर 36° से थोड़ा नीचे तक।
co m
m .
m as e
.co a g l
a s em नधा रत क जए क नम्न ल खत म से कौन-से युग्म एक त्रभुज के कोण हो सकते ह तथा कौन-से नह हो
a gl
प्र.2
सकते ह— (a) 35°, 150° (b) 70°, 30° (c) 90°, 85° (d) 50°, 150°
se m
com g l a
m . a
ase
agl
युग्म को जो ड़ए और 180° से तुलना क जए।
युग्म योग त्रभुज के कोण? तीसरा कोण
c—o m
m .
e
नही ं हो सकते
as
(a) 35°, 150° 185°
m l
.(b)co70°, 30° a g
sem
100° हो सकते है ं 80°
a
agl 175° हो सकते है ं 5°
c
.
(c) 90°, 85°
s e m
m a
.co agl
(d) 50°, 150° 200° नही ं हो सकते —
se m
g l a
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 39 of 65
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क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: (c) म योग 175° है और केवल 5° क छू ट बचती है, अत: त्रभुज वास्त वक तो है पर बहुत
पतला एवं नुक ला। (a) तथा (d) म योग पहले ही 180° से आगे नकल जाता है, जससे तीसरे कोण के लए
ऋणात्मक मान बचता है — जो असंभव है।
प्र.3 त्रभुज अस मका क तरह क्या आप एक नयम ऐसा बना सकते ह जो उन दो कोण क व्याख्या करे जनके लए
एक त्रभुज का नमाण संभव है? क्या इस नयम को बनाने म दोन कोण के योग का उपयोग कया जा सकता
है?
हाँ। नयम म ठ क दोन कोण के योग का ही उपयोग होता है।
ि भुज के दो कोणों ∠A तथा ∠B के िलए —
0° < ∠A + ∠B < 180°
य द योग 180° से कम है तो इन दो कोण वाला त्रभुज बनता है।
य द योग 180° अथवा उससे अ धक है तो ऐसा कोई त्रभुज नह बनता।
लंबाइय का नयम कोण का नयम
पत्येक लंबाई < अन्य दो का योग दो कोणों का योग < 180°
त्रभुज अस मका कोणों की शत
ऐसा क्य होता है: तीसरा कोण वही है जो 180° म से बच जाता है। बचत तभी होगी जब पहले दो कोण ने पूरे
180° खच न कर दए ह । यह अगले ही पृष्ठ पर सद्ध होने वाले कोण योग गुण का पहला संकेत है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 164
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क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा AglaSem · NCERT Solutions
तीसरा कोण ात करना
ग णत चचा
प्र.1 आइए, दो कोण को ल। मान ली जए क हम 60° और 70° के कोण लेते ह जनका योग 180° से कम है। मान
ली जए क इसक अंतगत भुजा 5 से.मी. है। तीसरे कोण का माप क्या हो सकता है? य द आधार क लंबाई को
बदलकर कोई अन्य मान कर दया जाए, जैसे 7 से.मी. तो क्या इस माप म कोई प रवतन होगा? रचना क जए
तथा पता लगाइए?
तीसरा कोण 50° है, और आधार बदलने पर भी वही रहता है।
तीसरा कोण = 180° – (60° + 70°)
= 180° – 130°
= 50°
आधार (अंतगत भुजा) सर पर कोण मापने पर तीसरा कोण
5 से .मी. 60°, 70° 50°
7 से .मी. 60°, 70° 50°
10 से .मी. 60°, 70° 50°
ऐसा क्य होता है: आधार बदलने से त्रभुज केवल बड़ा या छोटा होता है; भुजाओं क दशाएँ वही रहती ह, अत:
उनसे बना कोना उतना ही खुला रहता है। आकार बदलता है, आकृ त नह ।
प्र.2 व्यापक रूप म दे ख तो दो कोण के न त हो जाने पर क्या तीसरा कोण अंतगत भुजा क लंबाई पर नभर करता
है? कोण के भन्न- भन्न युग्म तथा भुजा क लंबाइयाँ लेकर प्रयास क जए।
नह । तीसरा कोण केवल दए हुए दो कोण पर नभर करता है।
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क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा AglaSem · NCERT Solutions
दोन कोण अंतगत भुजा तीसरा कोण
45°, 80° 3 से.मी. 55°
45°, 80° 8 से.मी. 55°
30°, 30° 4 से.मी. 120°
30°, 30° 9 से.मी. 120°
हर पंिक्त में: तीसरा कोण = 180° – (दोनों िदए हुए कोणों का योग)
संकेत: य द आपका माप एक-दो ड ी अलग आए तो वह रचना क त्रु ट है, ग णत क नह । प सल नुक ली क जए
और चाँदा ठ क ऊपर से प ढ़ए।
प्र.3 व भन्न त्रभुज के साथ यह दे खने के लए प्रयोग करने का प्रयास क जए क क्या कन्ह दो कोण तथा तीसरे
कोण के बीच कोई संबंध है। इस संबंध को ात करने के लए आप कौन-से आँकड़ का संग्रह करगे तथा इन
संग्र हत आँकड़ को कस प्रकार संग ठत करगे?
तीन कोण क तीन-स्तंभी ता लका बनाइए और उसम उनके योग का एक चौथा स्तंभ जोड़ द जए।
∠A ∠B ∠C ∠A + ∠B + ∠C
60° 70° 50° 180°
45° 80° 55° 180°
90° 30° 60° 180°
120° 30° 30° 180°
60° 60° 60° 180°
संबंध:
तीसरा कोण = 180° – (शेष दो का योग)
अथ त ∠A + ∠B + ∠C = 180°
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क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा AglaSem · NCERT Solutions
ऐसा क्य होता है: केवल दो-दो कोण लखने से पैटन छपा रहता है; योग भी लख दे ने पर वह तुरंत सामने आ
जाता है, क्य क अं तम स्तंभ म हर बार वही संख्या आती है। क्या-क्या ता लकाबद्ध करना है, यह चुनना ही आधी
खोज है।
स्वयं जाँ चए: पाँच अलग-अलग तरह के त्रभुज बनाइए — पतले, चौड़े, समकोण, अ धक कोण — और ता लका
भ रए। अं तम स्तंभ 180° ही रहेगा।
प्र.4 एक त्रभुज ABC पर वचार क जए जसम ∠B = 50° और ∠C = 70° ह। मान ली जए क हम शीष A से होकर
एक रेखा XY को आधार BC के समांतर ख चते ह। हम दे ख सकते ह क यहाँ नए कोण बन गए ह। ये कोण
∠XAB और ∠YAC ह। इनके मान क्या ह? क्या हम इससे ∠BAC ात कर सकते ह?
∠XAB = 50°, ∠YAC = 70°, अत: ∠BAC = 60°।
X A Y
50° 70°
60°
50° 70°
B C
XY, BC के समांतर है, अत: A पर बने बाहरी दोन कोण ∠B तथा ∠C क नकल ह।
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as e
क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
e m.
XY ∥ BC तथा ितयक रेखा AB → ∠XAB = ∠B = 50° (एकात
ं र कोण)
m l as
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XY ∥ BC तथा ितयक रेखा AC → ∠YAC = ∠C = 70° (एकांत र कोण)
m a g
l a se
g
a∠XAB + ∠BAC + ∠YAC = 180° (ये A पर ऋजु कोण बनाते है)ं
co m
. ag
50° + ∠BAC + 70° = 180°
e m
120° + ∠BAC = 180°
g l as
इस पकार ∠BAC = 60° a
co m
se m.
m l a
ऐसा क्य होता है: समांतर रेखा दोन आधार कोण को उठाकर शीष A तक ले आती है, जहाँ वे ∠BAC के साथ
o
m .c रेखा पर बैठ जाते ह। ऋजु कोण 180° का होता है, अत: तीन का योगag180° होना ही है — और यही
se योग गुण है।
एक ही सरल
g l a
कोण
a
m a s
m .co agl
se
पता लगाइए — पृष्ठ 165
g l a
तीसरा कोण ात करना
a
m
प्रयास कर
. co
e m
om150°, 15° (c) 90°, 30° (d) 75°, 45° g l as
.c(b)
य द दो कोण दए गए ह तो एक समांतर रेखा के उपयोग से त्रभुज का तीसरा कोण ात क जए। (a) 36°, 72°
a
प्र.1
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g l a
a
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com
A से होकर BC के समांतर रेखा XY ख चए। दोन आधार कोण एकांतर कोण के रूप म A पर फर से बन जाते ह, अत: A पर
g l a
m . a
ase
तीन कोण मलकर एक ऋजु कोण भर दे ते ह।
a gl
∠XAB + ∠BAC + ∠YAC = 180°
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∠B + ∠BAC + ∠C = 180°
m .
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तीसरा कोण = 180° – (शेष दो का योग)
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दोन कोण योग तीसरा कोण
(a) 36°, 72° 108° 72°
(b) 150°, 15° 165° 15°
(c) 90°, 30° 120° 60°
(d) 75°, 45° 120° 60°
पुस्तक क भाँ त (a) का पूरा हल —
∠XAB = ∠B = 36° तथा ∠YAC = ∠C = 72° (एकांत र कोण)
∠XAB + ∠BAC + ∠YAC = 180°
36° + ∠BAC + 72° = 180°
108° + ∠BAC = 180°
∠BAC = 72°
संकेत: (a) तथा (b) दोन सम बाहु त्रभुज दे ते ह, क्य क तीसरा कोण दए हुए कसी एक कोण के बराबर
नकलता है।
प्र.2 क्या आप एक ऐसे त्रभुज क रचना कर सकते ह जसके सभी कोण 70° के बराबर ह? य द दो कोण 70° के ह
तो तीसरा कोण क्या होगा? य द कसी त्रभुज के सभी कोण बराबर ह तो प्रत्येक कोण का माप क्या होगा?
खो जए और ात क जए?
नह , ऐसा त्रभुज संभव नह है।
70° + 70° + 70° = 210°
210° ≠ 180° → ऐसा ि भुज नही ं बनता
य द दो कोण 70° के ह —
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तीसरा कोण = 180° – (70° + 70°)
= 180° – 140°
= 40°
य द तीन कोण बराबर ह —
मान लीिजए पत्येक कोण x है
x + x + x = 180°
3x = 180°
x = 60°
ऐसा क्य होता है: तीन कोण के पास बाँटने के लए 180° का न त बजट होता है। 70° के तीन कोण उसे 30°
से अ धक खच कर दे ते ह। बजट बराबर-बराबर बाँटने पर 180° ÷ 3 = 60° मलता है — इसी लए हर समबाहु
त्रभुज के तीन कोण 60° के होते ह।
प्र.3 यहाँ एक त्रभुज है जसम हम ात है क ∠B = ∠C और ∠A = 50° है। क्या आप ∠B और ∠C ात कर सकते
ह?
∠B = ∠C = 65°।
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क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा AglaSem · NCERT Solutions
A
50°
65° 65°
B C
शीष कोण 50° वाला सम बाहु त्रभुज; दोन बराबर आधार कोण 65°-65° नकलते ह।
∠A + ∠B + ∠C = 180°
50° + ∠B + ∠C = 180°
∠B + ∠C = 130°
परंत ु ∠B = ∠C, अत: 2 × ∠B = 130°
∠B = 130° ÷ 2 = 65°
∠C = 65°
ऐसा क्य होता है: कोण योग गुण बताता है क दोन आधार कोण के हस्से म कुल कतना आता है; और ∠B =
∠C क शत बताती है क उस हस्से को बराबर-बराबर बाँटना है। दो तथ्य, दो अज्ञात, एक साफ़ उत्तर।
स्वयं जाँ चए: 50° + 65° + 65° = 180° ✓
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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 165–167
कोण के योग का गुण · ब हष्कोण
प्र.1 कसी त्रभुज के कोण के योग के बारे म हम क्या कह सकते ह? (एक त्रभुज ABC पर वचार क जए तथा A से
होकर BC के समांतर एक रेखा क रचना क जए।)
यह योग सदै व 180° होता है — हर त्रभुज के लए, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, पतला हो या चौड़ा।
X A Y
∠XAB ∠YAC
∠A
∠B ∠C
B C
A पर बना ऋजु कोण ∠XAB, ∠A तथा ∠YAC म बँटा है — जो ∠B, ∠A एवं ∠C क प्र तयाँ ह।
XY ∥ BC → ∠B = ∠XAB तथा ∠C = ∠YAC (एकांत र कोण)
अत: ∠A + ∠B + ∠C = ∠A + ∠XAB + ∠YAC
= 180°, क्योंिक ये तीनों िमलकर एक ऋजु कोण बनाते है ं
यह प रणाम त्रभुज के कोण योग का गुण कहलाता है।
ऐसा क्य होता है: पूरी चतुराई ऊपरी शीष से होकर आधार के समांतर एक रेखा ख चने म है। इससे ∠B और ∠C
ऊपर उठकर ∠A के दोन ओर आ जाते ह, जहाँ तीन एक ही सरल रेखा पर पड़े होते ह। यह वचार यूनानी ग णतज्ञ
यू क्लड क प्र सद्ध पुस्तक 'द ए लमट् स' म मलता है; उनका जीवन-काल लगभग 300 सामान्य संवत् था।
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
emत्रभुज म कोण
प्र.2 इस कोण योग गुण के सत्यापन क एक सु वधाजनक व ध है। इस व ध म एक कागज के त्रभुजाकार
m a s
o है? gl
कटआउट को मोड़ा जाता है। क्या आप दे ख रहे ह क यह व ध कस प्रकार दशाती है क इस
का योग.c180°
m a
ase
agl
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हाँ — तीन कोन को भीतर क ओर मो ड़ए, वे आधार पर एक कतार म आ जाते ह।
e m . ag
as
1. कागज़ का कोई भी त्रभुज ΔABC का टए और तीन कोण को अलग-अलग रंग से च ह्नत क जए।
a g l
2. ऊपरी शीष A को इस प्रकार नीचे मो ड़ए क वह ठ क आधार BC पर आ जाए।
3. अब B वाला कोना भीतर मोड़कर उसी बदु तक लाइए, और यही C वाले कोने के साथ भी क जए।
4. तीन रंगीन कोने अब BC क सीधी कोर पर एक साथ बैठ जाते ह — न कोई र क्त, न कोई अ तव्यापन।
co m
em.
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तीन कोण एक सरल रेखा पर सटीक बैठ गए
a g
a s emकोण = 180°
agl अत: ∠A + ∠B + ∠C = 180°
ऋजु
m a s
m .co agl
l a se
ऐसा क्य होता है: पहला मोड़ वास्तव म उपप त्त वाली समांतर रेखा ही है — वह मोड़ का चह्न BC के समांतर
ag
होता है। मोड़ने से छपी हुई उपप त्त हाथ म पकड़ी जा सकने वाली वस्तु बन जाती है, इसी लए वह इतनी जल्द
व ास दला दे ती है।
co m
m .
m as e
.co a g l
प्रयास कर: एक बहुत अ धक कोण वाले त्रभुज तथा एक समकोण त्रभुज से भी यही क जए। कोने फर भी सीधी
a s em कोर पर ठ क बैठगे।
agl
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com ात क जए। g l a
.
य द ∠A = 50° और ∠B = 60° है तो ∠ACD
a
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प्र.3
a s
उत्तर agl
∠ACD = 110°।
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a
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क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा AglaSem · NCERT Solutions
A
50°
110°
60°
B C D
बिहष्कोण
BC को D तक बढ़ाया गया है; ∠ACD शीष C पर बना ब हष्कोण है।
कोण योग गुण ारा —
50° + 60° + ∠ACB = 180°
110° + ∠ACB = 180°
अत: ∠ACB = 70°
∠ACB और ∠ACD िमलकर एक ऋजु कोण बनाते है ं
∠ACD = 180° – 70°
= 110°
संकेत: कसी भुजा को बढ़ाने पर उसके तथा दूसरी भुजा के बीच बना कोण ब हष्कोण कहलाता है। हर त्रभुज म
ऐसे छह ब हष्कोण होते ह, प्रत्येक शीष पर दो।
प्र.4 ∠A और ∠B के व भन्न माप के लए ब हष्कोण ात क जए। क्या आप ब हष्कोण और इन दोन कोण के
बीच कोई संबंध दे खते ह? (संकेत— कोण योग गुण ारा हम ∠A + ∠B + ∠ACB = 180° प्राप्त है।) हम
∠ACD + ∠ACB = 180° भी प्राप्त है, क्य क ये ऋजु कोण बनाते ह। यह क्या दशाता है?
ब हष्कोण सदै व दोन सम्मुख अंत:कोण के योग के बराबर होता है।
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∠A ∠B ∠ ACB ∠ ACD ∠A + ∠B
50° 60° 70° 110° 110°
40° 80° 60° 120° 120°
90° 30° 60° 120° 120°
35° 35° 110° 70° 70°
दोन संकेत मलकर इसे एक ही पं क्त म सद्ध कर दे ते ह —
∠A + ∠B + ∠ACB = 180° … (कोण योग गुण)
∠ACD + ∠ACB = 180° … (ऋजु कोण)
दोनों के दािहने पक्ष 180° है,ं अत: बाएँ पक्ष बराबर है ं —
∠A + ∠B + ∠ACB = ∠ACD + ∠ACB
दोनों ओर से ∠ACB हटाइए —
∠ACD = ∠A + ∠B
ऐसा क्य होता है: दोन व्यंजक एक ही 180° का वणन करते ह — एक बार त्रभुज के भीतर से और एक बार
सरल रेखा के अनु दश। ∠ACB दोन म उभय नष्ठ है, अत: उसे हटाते ही ब हष्कोण का गुण बच जाता है: त्रभुज का
ब हष्कोण अपने दोन दूरस्थ अंत:कोण के योग के बराबर होता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 167–169
7.4 त्रभुज के शीषलम्ब से संबं धत रचनाएँ
प्र.1 एक त्रभुज ABC पर वचार क जए। शीष A क सम्मुख भुजा BC से कतनी ऊँचाई है तथा इसे कस प्रकार
मापा जा सकता है?
A से BC पर लम्ब डा लए और उसे मा पए। वही लम्ब ऊँचाई है।
मान लीिजए AD ⟂ BC है, जहाँ D भुजा BC पर है
AD की लंबाई = BC से शीष A की ऊँ चाई
रेखाखंड AD इस ि भुज का एक शीषलम्ब कहलाता है
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शेष दो शीषलम्ब BE तथा CF ह — B और C से उनक अपनी सम्मुख भुजाओं पर ख चे गए लम्ब।
ऐसा क्य होता है: 'ऊँचाई' का अथ सदै व सबसे छोट दूरी होता है, और कसी बदु से कसी रेखा तक क सबसे
छोट दूरी लम्ब के अनु दश ही नापी जाती है। A से BC तक कोई भी तरछा रेखाखंड AD से लंबा होगा, अत: वह A
क वास्त वक ऊँचाई नह बताएगा।
संकेत: जब भी त्रभुज क ऊँचाई शब्द आता है तो उसका अथ उसी भुजा पर ख चे गए शीषलम्ब से होता है जसे
आधार माना गया है।
प्र.2 इस त्रभुज म A से भुजा BC तक शीषलम्ब क्या होगा? (उस त्रभुज म जसम B पर बना कोण अ धक कोण है)
लम्ब का पाद त्रभुज के बाहर पड़ता है, अत: पहले BC को बढ़ाना पड़ता है।
A
शीषलम्ब
D B C
BC को B से आगे बढ़ाया गया है और A से डाला गया लम्ब उसी बढ़ हुई रेखा पर D पर मलता है।
BC को B से आगे बढ़ ाइए
A से इस बढ़ ी हुई रेखा पर लम्ब डािलए
लम्ब का पाद = D
AD ही A से BC पर शीषलम्ब है
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ऐसा क्य होता है: B पर कोण अ धक कोण है, अत: A आधार के सरे से बाहर क ओर झुका हुआ है। BC वाली
रेखा तो अब भी A के नीचे से गुज़रती है, केवल रेखाखंड BC नह गुज़रता। शीषलम्ब आधार क रेखा तक नापा
जाता है, इसी लए रेखा को बढ़ाकर लम्ब लया जाता है।
प्र.3 कागज का एक त्रभुजाकार टु कड़ा का टए। तीन भुजाओं म से कसी एक भुजा को आधार के रूप म न त
क जए। इसे इस प्रकार मो ड़ए क प रणामी मोड़ का चह्न ऊपरी शीष से आधार पर शीषलम्ब हो। इसका
औ चत्य द जए क मोड़ के चह्न को आधार पर लंब क्य होना चा हए?
इस प्रकार मो ड़ए क आधार के दोन भाग ठ क एक-दूसरे पर आ जाएँ और मोड़ का चह्न ऊपरी शीष से होकर जाए।
1. ΔABC का टए और BC को आधार मा नए।
2. कागज़ को ऐसे मो ड़ए क मोड़ A से होकर जाए तथा BC का एक भाग ठ क शेष भाग पर बैठ जाए।
3. खो लए। A से BC तक बना मोड़ का चह्न ही शीषलम्ब है।
मोड़ का चह्न लंब क्य होता है:
मोड़ ने पर आधार की रेखा स्वयं अपने ऊपर बैठ जाती है
िचह्न ारा BC के साथ बने दोनों कोण ठीक एक-दू सरे पर आ जाते है ं
अत: दोनों कोण बराबर है ं
वे एक सरल रेखा पर भी है,ं अत: िमलकर 180° बनाते है ं
पत्येक कोण = 180° ÷ 2 = 90°
ऐसा क्य होता है: मोड़ एक दपण क तरह काम करता है। य द कसी रेखा का एक भाग उसी के दूसरे भाग पर
पराव तत हो जाए तो मोड़ का चह्न उसक दपण-रेखा है, और दपण-रेखा जसे पराव तत करती है उससे सदै व
समकोण पर मलती है।
प्र.4 एक त्रभुज क रचना क जए। BC को आधार लेते हुए शीष को A, B और C से नामां कत क जए। A से भुजा
BC पर शीषलम्ब ख चए। क्या आप दे ख सकते ह क ऐसा कैसे कया जाता है?
मापक पर समकोणक सरकाकर — केवल मापक से 90° सट क नह बनता।
1. चरण 1: मापक को आधार BC के अनु दश र खए। समकोणक को मापक पर इस प्रकार र खए क समकोण के कनार म से
एक कनारा मापक को स्पश करे।
2. चरण 2: समकोणक को मापक के अनु दश तब तक सरकाइए जब तक क उसका ऊध्वाधर कनारा शीष A को छू न ले।
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
3. चरण 3: समकोणक के ऊध्वाधर कनारे का उपयोग करते हुए A से होकर BC पर शीषलम्ब ख चए।
co m
em.
m l as
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ऐसा क्य होता है: मापक BC क दशा को स्थर रखता है। समकोणक म समकोण पहले से बना होता है, अत:
em a
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सरकते समय उसका ऊध्वाधर कनारा BC पर सदै व लंब बना रहता है। सरकाने से कनारा केवल इधर-उधर
a
l है, उसक दशा कभी नह बदलती।
gखसकता
a
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.
संकेत: य द लम्ब का पाद रेखाखंड BC के बाहर पड़े तो पहले मापक से BC को बढ़ा ली जए और फर समकोणक
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l as
सरकाइए।
a g
co m
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क्या ऐसे कसी त्रभुज का अ स्तत्व है जसम एक भुजा भी एक शीषलम्ब हो? ऐसे त्रभुज क कल्पना क जए
as
प्र.5
m l
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तथा एक रफ आरेख ख चए।
m a
l a se
g
a हाँ — समकोण त्रभुज म। य द ∠B = 90° हो तो AB स्वयं ही A से BC पर शीषलम्ब है।
m a s
m .co agl
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ag
A
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शीषलम्ब m . a
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= भुजा AB a g l
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a B C c
m .
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a s emभुजा AB पहले से ही BC पर लंब है, अत: वही A से शीषलम्ब है।
agl
∠B = 90° होने पर
co m
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∠B = 90° → AB ⟂ BC
अत: A से BC पर शीषलम्ब स्वयं AB है
इसी पकार CB, C से AB पर शीषलम्ब है
एक समकोण वाले त्रभुज समकोणीय त्रभुज या केवल समकोण त्रभुज कहलाते ह।
ऐसा क्य होता है: शीषलम्ब तो केवल शीष से सम्मुख भुजा पर डाला गया लम्ब है। समकोण त्रभुज म समकोण क
दोन भुजाएँ पहले से ही एक-दूसरे पर लंब ह, अत: तीन म से दो शीषलम्ब त्रभुज क भुजाएँ ही होती ह। केवल
तीसरा शीषलम्ब — समकोण वाले शीष से सबसे बड़ी भुजा पर — ख चना पड़ता है।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 170
7.5 त्रभुज के प्रकार
ग णत चचा
प्र.1 क्या आपने कसी अन्य प्रकार का त्रभुज भी दे खा था?
हाँ। समबाहु, सम बाहु, वषमबाहु तथा समकोण त्रभुज के अ त रक्त इस अध्याय म न्यून कोण तथा अ धक कोण त्रभुज भी
सामने आए ह।
कहाँ आया त्रभुज प्रकार
रचना कीिजए, पष्ृ ठ 150 3, 4, 5 िवषमबाहु, समकोण
रचना कीिजए, पष्ृ ठ 150 4, 4, 6 समि बाहु, अिधक कोण
पता लगाइए, पष्ृ ठ 161 3 से.मी., 120°, 8 से.मी. िवषमबाहु, अिधक कोण
पता लगाइए, पष्ृ ठ 162 75°, 5 से.मी., 75° समि बाहु, न्यून कोण
संकेत: भुजाओं के आधार पर वग करण दे ता है समबाहु / सम बाहु / वषमबाहु। कोण के आधार पर वग करण
दे ता है न्यून कोण / समकोण / अ धक कोण। हर त्रभुज को दोन सू चय से एक-एक नाम मलता है।
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प्र.2 कोण के माप के आधार पर त्रभुज के अन्य कौन-से प्रकार ह?
कुल तीन प्रकार — न्यून कोण, समकोण तथा अ धक कोण त्रभुज।
प्रकार कोण पर शत उदाहरण
न्यून कोण ि भुज तीन कोण 90° से कम 60°, 60°, 60°
समकोण ि भुज एक कोण ठ क 90° 90°, 60°, 30°
अिधक कोण ि भुज एक कोण 90° से बड़ा 120°, 30°, 30°
ऐसा क्य होता है: कसी त्रभुज म 90° या उससे बड़ा कोण अ धक-से-अ धक एक ही हो सकता है, क्य क ऐसे दो
कोण मलकर 180° खच कर दगे और तीसरे के लए कुछ नह बचेगा। इसी लए केवल सबसे बड़े कोण को दे खकर
प्रकार बता दे ना पयाप्त है।
प्र.3 एक न्यून कोण त्रभुज क्या हो सकता है? क्या हम इसे एक न्यून कोण वाले त्रभुज के रूप म प रभा षत कर
सकते ह? क्य नह ?
न्यून कोण त्रभुज वह है जसके तीन कोण न्यून कोण ह । "एक न्यून कोण वाला त्रभुज" कहकर प रभा षत करना व्यथ होगा।
समकोण ि भुज का उदाहरण: 90°, 60°, 30° — इसमें भी दो न्यून कोण है ं
अिधक कोण ि भुज का उदाहरण: 120°, 40°, 20° — इसमें भी दो न्यून कोण है ं
अत: "एक न्यून कोण होना" िकसी को अलग नही ं करता
ऐसा क्य होता है: हर त्रभुज म कम-से-कम दो न्यून कोण पहले से होते ह, क्य क 90° या उससे बड़ा कोण
अ धक-से-अ धक एक ही हो सकता है। प रभाषा का काम है एक प्रकार को शेष से अलग करना; "एक न्यून कोण"
तो सभी त्रभुज पर लागू होता है, अत: वह कुछ अलग नह करता। तीन कोण के न्यून होने क शत ही प रभाषा
को उपयोगी बनाती है।
स्वयं जाँ चए: केवल एक न्यून कोण वाला त्रभुज बनाने का प्रयास क जए। आप पाएँगे क यह असंभव है।
पता लगाइए — पृष्ठ 170–171
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क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा AglaSem · NCERT Solutions
7.5 त्रभुज के प्रकार
प्रयास कर
प्र.1 एक त्रभुज ABC क रचना क जए जसम BC = 5 से.मी., AB = 6 से.मी. और CA = 5 से.मी. है। A से भुजा
BC पर शीषलम्ब क रचना क जए।
पहले त्रभुज अस मका जाँ चए, फर रचना क जए और लम्ब डा लए।
सबसे बड़ ी भुजा = 6 से.मी.
6 < 5 + 5 = 10 ✓ → ि भुज का अिस्तत्व है
1. BC = 5 से.मी. ख चए।
2. कद्र B लेकर 6 से.मी. त्रज्या का चाप ख चए (यह AB है)।
3. कद्र C लेकर 5 से.मी. त्रज्या का चाप ख चए (यह CA है), जो पहले चाप को A पर काटे ।
4. AB तथा AC मलाइए।
5. मापक को BC के अनु दश र खए, उस पर समकोणक तब तक सरकाइए जब तक उसका ऊध्वाधर कनारा A को न छू ले, और
AD ⟂ BC ख चए।
A
5 से.मी.
6 से.मी.
B D 5 से.मी. C
BC = 5 से.मी., AB = 6 से.मी., CA = 5 से.मी. वाला ΔABC तथा BC पर ख चा गया शीषलम्ब AD।
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क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा AglaSem · NCERT Solutions
स्वयं जाँ चए: CA = CB = 5 से.मी. है, अत: यह त्रभुज C शीष वाला सम बाहु त्रभुज है। AD मापने पर लगभग
4.8 से.मी. मलता है और D, BC के भीतर पड़ता है।
प्र.2 एक त्रभुज TRY क रचना क जए जसम RY = 4 से.मी., TR = 7 से.मी. और ∠R = 140° है। T से भुजा RY
पर शीषलम्ब क रचना क जए।
∠R, भुजाओं RY तथा TR के बीच का अंतगत कोण है, अत: कोण R पर बनाइए।
1. RY = 4 से.मी. ख चए।
2. R पर RY के एक ओर 140° बनाती हुई एक भुजा ख चए।
3. उस भुजा पर T इस प्रकार अं कत क जए क TR = 7 से.मी. हो।
4. TY मलाइए। ΔTRY वाँ छत त्रभुज है।
5. शीषलम्ब के लए YR को R से आगे बढ़ाइए, फर T से उस बढ़ हुई रेखा पर लम्ब डा लए; उसका पाद D क हए। TD ही
शीषलम्ब है।
T
7 से.मी.
140°
D R 4 से.मी. Y
∠R = 140° अ धक कोण है, अत: T से ख चे गए शीषलम्ब का पाद D रेखाखंड RY के बाहर पड़ता है।
ऐसा क्य होता है: ∠R = 140° अ धक कोण है, इस लए T, R से आगे क ओर झुका हुआ है। अत: T से डाला
गया लम्ब YR क बढ़ हुई रेखा पर गरता है, स्वयं रेखाखंड RY पर नह — ठ क वही स्थ त जो पृष्ठ 168 पर पढ़
थी।
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क ा 7 ग णत अध्याय 7 तीन प्र तच्छे द रेखाओं क एक कथा
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एक समकोण त्रभुज ABC क रचना क जए जसम ∠B = 90° और AC = 5 से.मी. है। इन मापन के कतनेcom
mसकते ह। AC को
भन्न- भन्न त्रभुज हो सकते ह? (संकेत— ध्यान द जए क अन्य मापन कोई भी मान ग्रहणeकर
प्र.3
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आधार .लीcoजए। ∠A और ∠C के क्या-क्या मान ले सकते ह ता क अन्य कोण 90°aकाglहो?)
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उत्तरgl
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इन दोन शत पर असंख्य भन्न- भन्न त्रभुज खरे उतरते ह।
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∠A + ∠B + ∠C = 180°
∠A + 90° + ∠C = 180°
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∠A + ∠C = 90°
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अत: ऐसा कोई भी युग् म चलेगा िजसमें ∠A + ∠C = 90° हो
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a ∠A ∠C ∠B मान्य?
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30° 60° 90° हाँ
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45° 45°
g l a 90° हाँ (समि बाहु)
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10° 80° 90° हाँ
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72.5° 17.5° 90° हाँ
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g∠C = 90° – ∠A बनाइए, और दोन
m .cज क रचना: AC = 5 से.मी. ख चए, 0° और 90° के बीच कोई भी ∠A चु नए,
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seजाओं को B पर मलने द जए।
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