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Class 11 Question Bank जीव विज्ञान

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Class 11 Question Bank जीव विज्ञान - Page 1 of 70

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Frequently Asked Questions

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Class 11 Question Bank जीव विज्ञान – Text

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Class 11 Biology Question Bank

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अध्याय-1 जीव जगत में ववववधता
महत्वपर्
ू ण ब द
िं ू :-
➢ जीवन केवल जीव धारियों के रूप में ही दृष्टिगोचि होता है , जीव धारियों में वद्
ृ धध, जनन,उपापचय जैसे जैववक
गण
ु धमम पाए जाते हैं |
➢ जीवन का आधाि आणववक िचना है |
➢ जल जीवधारियों की ववभिन्न जैववक क्रियाओं के भलए अत्यंत आवश्यक होता है , जीवधारियों में 60 से 90% तक
जल होता है |
➢ कोभिका में उजाम एिीपी के रूप में संधचत िहती है |
➢ सजीव एक खुले तंत्र के रूप में कायम किते हैं ष्जसमें बाहरी वाताविण के साथ ऊजाम का आदान-प्रदान होता है |
➢ बाहरी वाताविण के साथ सामजस्य बनाए िखने की क्रिया समस्थापन कहलाती है |
➢ सिी जीव धारियों की एक ववभिटि जीवन अवधध होती है ननष्श्चत जीवन अवधध के पश्चात जीवधािी मत्ृ यु को
प्राप्त होते हैं|
➢ वगीकिण की क्रिया जीवो के ववकास को समझने में सहायक होती है |
➢ वधगमकी के प्रमुख उपकिण वानस्पनतक उद्यान ,संग्रहालय तथा िाटरीय उद्यान है |
➢ जीवो के नामकरण हे तु के नामकरण की अंतिामटरीय संहहता प्रस्ताववत की गई है |
प्रश्न 1. सही ववकल्प चुननए :-
1. वगीकरण की सबसे छोटी इकाई क्या है -
अ) वंश ब) जानत स) गण द) वगग

2. वगीकरण की सबसे बडी इकाई क्या है -

अ) वंश ब) जानत स) संघ द) जगत

3. द्ववनामाकरण पद्धनत के प्रनतपादक कौन थे -

अ) चार्लसग डाववगन ब) डाववगन स) बेंथम व हुकर द) कैरोलस लीननयस

4. जीवो के मुख्य अशभलक्षण क्या है -

अ) जनन ब) उपापचय स) वद्
ृ धध द) उपरोक्त सभी

5. ननम्नशलणखत में से आलू का वैज्ञाननक नाम हैं -

अ) सोलेनम ट्यब
ू ् रोसम ब) सोलेनम स्पाइनोसम

स) सोलेनम मेग्ननफेरा द) सोलेनम अभीतोरा

5

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6. शसस्टे मा नेचुरी पस्
ु तक के लेखक हैं –

अ) कैरोलस लीननयस ब) जॉन एवं हधचंसन

स) लेमाकग द) डाववगन

7. ननम्नशलणखत में से गेहूं के वंश का वैज्ञाननक नाम है -

अ) ट्रिटीकम ब) सोलेनम स) एशलयन द) मेजनीफेरा

8. ननम्नशलणखत में से ककस वैज्ञाननक ने प्रथम जानत वत्त
ृ ीय वगीकरण ट्रदया था –

अ) जॉन एवं हधचंसन ब) बेंथम व हुकर स) लीननयस द) मेग्ननफेरा

9. ननम्नशलणखत में से कौन सा समूह सबसे कम समान लक्षण वाला है -

अ) जानत ब) वंश स) कुल द) वगग

प्रश्न .2 रिक्त स्थानों की पूनतण कीजजये-

1. भारत का सबसे बडा बॉटननकल गाडगन ---------- शहर में ग्स्थत है |
2. वह स्थान जहां पर पौधों के नमूने एकत्रत्रत करके रखे जाते हैं उसे--------- कहां जाता है |
3. शसस्टे मा नेचरु ी पस्
ु तक के लेखक ------------ हैं |
4. वगीकरण की सबसे छोटी इकाई ---------- होती है |
5. गेहूं का वैज्ञाननक नाम --------- हैं |

प्रश्न .3 एक वाक्य में ऊति लिखिए –

1. ICBN का पूरा नाम क्या है ?
2. ICZN का पूरा नाम क्या है ?
3. मनुष्य का वैज्ञाननक नाम शलणखए |
4. पादप ववज्ञान की शाखा माइकोलॉजी के अंतगगत ककसका अध्ययन ककया जाता है ?
5. पादप ववज्ञान की शाखा फाईकोलॉजी के अंतगगत ककसका अध्ययन ककया जाता है ?

प्रश्न .4 सही जोडी नाइए –

कॉलम A कॉलम B
1. मैधगनी फेरा अ. ट्यूब्रोसम
2. सोलेनम ब. इंडडका

3. ब्रेशसका स. एस्टीवम
4. ट्रिटीकम द. ओलेरशसया
5. प्याज य. शलशलयम सीपा

6

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अनत िघु उत्तिीय प्रश्न- 2 अंक

1. प्राणी उद्यान एवं प्राणी संग्रहालय से आप क्या समझते हैं ?
2. समग्ष्ट को पररभावषत कीग्जए |
3. समस्थापन या होशमयोस्टै शसस से आप क्या समझते हैं ?
4. ककन्हीं दो पादपों के वैज्ञाननक नाम शलणखए |
5. ककन्हीं दो जंतुओं के वैज्ञाननक नाम शलणखए |
6. मत्ृ यु जीवन का आवश्यक घटक है , शलणखए |
7. टे क्सोंन को पररभावषत कीग्जए |
8. उपापचय को स्पष्ट कीग्जये |
9. द्ववनामाकरण पद्धनत क्या है ?
10. फोना एवं फ्लोरा शब्द का अथग शलणखए |

िघु उत्तिीय प्रश्न- 3 अंक

1. वधगगकी , वगीकरण पद्धनत एवं वगीकरण को पररभावषत कीग्जए |
2. टै क्सा ककसे कहते हैं ?उदाहरण सट्रहत स्पष्ट कीग्जए |
3. क्या कारण है कक अत्याधधक गमी में उभयचर व सरीसप
ृ कम ट्रदखाई दे ते हैं |
4. हरबेररया के तीन उपयोग शलणखए |
5. वगीकरण की ककन्हीं तीन पद्धनतयों का नाम शलणखए |
6. जीवो के वगीकरण तथा पहचान में कंु जी ककस प्रकार सहायक है ? स्पष्ट कीग्जए |
7. ककन्हीं तीन महत्वपण
ू ग लक्षणों के आधार पर आप जीवो को जीवों से ककस प्रकार अलग कर सकते हैं?
8. जीवो को वगीकृत क्यों ककया जाता है ? ककन्हीं तीन कारणों को शलणखए|
9. हरबेररयम, वानस्पनतक उद्यान, जूलॉग्जकल उद्यान के बारे में शलणखए |
10. वधगगकी पदानुक्रम से आप क्या समझते हैं ? इसमें ककतने पदों को शाशमल ककया गया है , उनके नाम
शलणखए |
11. वगीकरण के ककन्हीं तीन महत्व के बारे में शलणखए |
12. जैव ववववधता से आप क्या समझते हैं? यह ववववधता ककस प्रकार पाररग्स्थनतक संतुलन बनाए रखने में
आवश्यक है स्पष्ट कीग्जए |
13. जैव ववववधता संरक्षण में वानस्पनतक उद्यान एवं जंतु उद्यान ककस प्रकार सहायक है , स्पष्ट कीग्जए |

-----------------------------------------------------------xx----------------------------------------------------------------------

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अध्याय-2 जीव जगत का वगीकिर्

महत्वपूर्ण ब द
िं ू :-
➢ जंतुओं के प्रथम वगीकरण का श्रेय दाशगननक अरस्तु को जाता है ग्जन्हें जंतु ववज्ञान का जनक कहा
जाता है |
➢ धथयोफ्रेस्ट्स को वनस्पनत ववज्ञान का जनक कहा जाता है इन्होंने पादपों को चार समह
ू में ववभाग्जत
ककया |
➢ वगीकरण की तीन पद्धनतयां प्रचशलत है - कृनतम पद्धनत, प्राकृनतक पद्धनत, जानत वत्त
ृ ीय पद्धनत
➢ जीव वधगगकी ववज्ञान जशू लयन हक्सले की दे न है |
➢ जीवों के वगीकरण हे तु प्रमख
ु रूप से दो वगीकरण प्रचशलत हुए हैं|
➢ दो जगत वगीकरण व पांच जगत वगीकरण
➢ पांच जगत वगीकरण में संसार के समस्त जीवो को 5 जगतों में ववभाग्जत ककया गया है - मोनेरा,
प्रोट्रटस्टा, कवक, पादप, जंतु
➢ कालग वुस ने जीवो को वगीकृत करने की तीन डोमेन पद्धनत प्रस्तुत की |

प्रश्न 1. सही ववकल्प चनु नए :-
1. ननम्नशलणखत में से ककस वैज्ञाननक ने सवगप्रथम प्रोट्रटस्टा शब्द का प्रयोग ककया-
अ) हीकल ब) पाश्चर स) कॉज द) शलस्टर

2. डाइनर द्वारा सन 1971 में ककसकी खोज की गई थी -

अ) वायरस की ब) माइकोप्लाजमा की स) वाईरोइड द) वप्रओंन

3 वधगगकी का वपतामह कहा जाता है -

अ) चार्लसग डाववगन ब) लेमाकग स) बेंथम व हुकर द) कैरोलस लीननयस

4. पांच जगत वगीकरण में ववषाणु को ककस जगत में वगीकृत ककया गया है-

अ) मोनेरा जगत ब) प्रोट्रटस्टा जगत स) जीवाणु जगत द) ककसी जगत में नहीं

5. ननम्नशलणखत में से जीवाणु जननत रोग है –

अ) है जा ब) टाइफाइड स) गोनेररया द) उपरोक्त सभी

6. पांच जगत वगीकरण में एक कोशशकीय यूकैररयोट्रटक जीवो को ककस समह
ू में रखा गया है -

अ) मोनेरा में ब) प्रोटीस्टा में स) फंगाई में द) प्लांटी में

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7. ननम्नशलणखत में से ककसे थैली फंगाई कहा जाता है –

अ) एस्कोमायशसटीज को ब) फाईकोमायशसटीज को स) बशसडडयोमायशसटीज को द)
डूटे रोमायशसटीज को

8. दलहनी पौधों की जडों की ग्रंधथयों में पाए जाने वाले जीवाणु का नाम शलणखए जो नाइिोजन
ग्स्थरीकरण में भाग लेता है –

अ) राइजोत्रबयम ब) क्लॉस्िीडडयम स) क्लोरोत्रबयम द) एजरोंवेक्टर

प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पूनतण कीजजए-
1. --------- को पौधों और जंतओ
ु ं के बीच की संयोजी कडी कहा जाता है |
2. कवक ववज्ञान के जनक वैज्ञाननक ----------- हैं |
3. तीन डोमेन पद्धनत वैज्ञाननक -------- ने प्रस्तुत की थी |
4. पैरामीशशयम को इस ------------ नाम से भी जाना जाता है |
5. ग्हहटे कर ने अपने वगीकरण में ------------ को सग्म्मशलत नहीं ककया है |
6. पादप ववषाणु का अनुवांशशक पदाथग ----------- होता है |
7. कवकों की कोशशका शभवत्त प्राय -------------- बनी होती है |
8. कवकों में संधचत भोज्य पदाथग ------------ के रूप में पाया जाता है |
प्रश्न 3. एक वाक्य में उत्ति दीजजए -
1. पांच जगत वगीकरण ककस वैज्ञाननक द्वारा ट्रदया गया ?
2. ककस जीव को पादप जगत का जोकर कहा जाता है ?
3. जीवाणु शब्द का सबसे पहले प्रयोग ककस वैज्ञाननक द्वारा ककया गया ?
4. पी पी एल ओ का पूरा नाम शलणखए |
5. साइनोबैक्टीररया में नाइिोजन ग्स्थरीकरण करने वाली रचना कौन सी है ?
6. कवक की कोशशका शभवत्त ककस रासायननक पदाथग की बनी होती है ?
7. TMV का परू ा नाम शलणखए |
8. वाईरोइड की खोज ककस वैज्ञाननक ने की थी ?
प्रश्न 4. सही जोडी नाइए –

कॉिम A कॉिम B
1. पादप अ. पोररफेरा
2 फंजाई ब. आची बैक्टीररया
3. प्रोट्रटस्टा स. फाईकोमायशसटीज
4. मोनेरा द. युग्नलनोइड

5 एननमशलया य. एर्लगी

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अनत िघु उत्तिीय प्रश्न- 2 अंक

1. प्लाज्मोगेमी व केररओगेमी में दो अंतर शलणखए |
2. आरएच ग्हहटे कर द्वारा प्रनतपाट्रदत 5 जगतों के नाम शलणखए |
3. वप्रओंन द्वारा मनष्ु य में होने वाले दो रोग का नाम शलणखए |
4. आची बैक्टीररया को जीववत जीवाश्म क्यों कहा जाता है |
5. जीवाणुओं में ववखंडन ववधध का धचत्र बनाइए |
6. दो खाने योनय मशरूम का नाम शलणखए |
7. वप्रओंन क्या है ?
8. सहजीववता से आप क्या समझते हैं ?

िघु उत्तिीय प्रश्न- 3 अंक

1. मोनेरा एवं प्रोट्रटस्टा में कोई तीन अंतर शलणखए |
2. एक प्रारूवपक जीवाणु कोशशका का स्वच्छ नामांककत धचत्र बनाइए |
3. मेथनोजन, हे लोकफल, आची बैक्टीररया को स्पष्ट कीग्जए|
4. स्वपोषी, ववषमपोषी एवं मत
ृ ोपजीवी जंतुओं को पररभावषत कीग्जए|
5. आकार के आधार पर जीवाणु ककतने प्रकार के होते हैं, स्पष्ट कीग्जए|
6. अननवायग परजीवी व वैकग्र्लपक परजीवी से आप क्या समझते हैं?
7. आइसोगेमस और एनआइसोगेमस को स्पष्ट कीग्जए|
8. पैरामीशशयम, अमीबा व यूनलीना में चलन अंग का नाम शलणखए|
9. मोनेरा जगत के 3 लक्षण शलणखए|
10. डाईनोंफ्लैग्जलेट के 3 लक्षण शलणखए|
11. अवपंक कवक के 3 लक्षण शलणखए|
12. जीवाणु भोजी का नामांककत धचत्र बनाइए|
13. TMV का नामांककत धचत्र बनाइए|
14. पादप एवं जंतुओं में कोई तीन अंतर शलणखए |
15. ववषाणु को सजीव एवं ननजीव के बीच की संयोजी कडी क्यों कहा जाता है ?
16. ग्हहटे कर द्वारा ट्रदए गए पांच जगत वगीकरण को शलणखए तथा प्रत्येक जगत के दो दो लक्षण
शलणखए|
17. संतनत एकांतरण से आप क्या समझते हैं ?
18. सहजीववता से आप क्या समझते हैं लाइकेन के उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीग्जए|
19. प्रचलन के आधार पर प्रोटोजोआ को ककतने वगों में बांटा गया है उदाहरण सट्रहत स्पष्ट कीग्जए|
20. जीवाणु द्वारा मनुष्य में फैलने वाले ककन्हीं तीन रोगों के नाम शलणखए |
21. परजीवी पौधों को उदाहरण सट्रहत स्पष्ट कीग्जए |

---------------------------------------------------------------xx-------------------------------------------------------------------

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अध्याय – ३
पादप- जगत/ वनस्पनत जगत
महत्वपूर्ण ब द
िं ू :-
1. ऐसे पादप शरीर ग्जसे जड, तना तथा पत्ती में ववभाग्जत नहीं ककया जा सकता उसे सक
ू ाय (Thallns)
कहते हैं।
2. शैवालों का अध्ययन फाइकोलॉजी कहलाता है ।
3. व्रायोफाइट्स को पादप जगत का उभयचर कहा जाता है ।
4. टे ररडोफाइट्स प्रथम सवहनी पादप होते है ।
5. ग्जम्नोस्पमगस ननन बीजी पौधों का समह
ू है । इनके बीजों के चारों ओर कोई आवरण नहीं पाया जाता है ।
6. आवत
ृ बीजी पादप (Angiosperms) पष्ु प धारण करने वाले पादपों का समूह है , ग्जनमें बीजों का ववकास फल
के अंदर होता है ।
7. हरे पौधे अकाबगननक पदाथो से अपना भोजन स्वयं तैयार करते हैं अत: उन्हें उत्पादक कहा जाता है ।
8. कवकों में संधचत भोजन नलाइकोजन के रूप मे होता है ।
9. म्यक
ू र तथा राइजोपस नामक कवक सामान्यता डबल रोटी तथा चमडे पर उगते है , अत: इन्हें ब्रेड मोर्लड
कहा जाता है ।
10. बेंथम तथा हूकर का वगीकरण एक प्राकृनतक वगीकरण है ।

प्रश्न .1 सही ववकल्प चुननए :-
1. पादप जगत के उभयचर होते हैं :-
(अ) शैवाल (ब) ब्रायोफाइटा (स) थैलोफाइटा (द) उत्प्लावी पौधें
2. ‘तालाब का रे शम’ ककस पौधे का सामान्य नाम है :-
(अ) कोरोलाइना (ब) स्पाइरोगायरा (स) शसलैग्जनेला (द) क्लोरे ला
3. ग्जम्नोस्पमग का एण्डोस्पमग होता है :-
(अ) अगणु णत (ब) द्ववगणु णत (स) त्रत्रगणु णत (द) चतग
ु णुग णत
4. एंग्जयोस्पमग का एण्डोस्पमग होता है :-
(अ) अगुणणत (ब) द्ववगुणणत (स) त्रत्रगुणणत (द) चतुगणुग णत
5. ग्जम्नोस्पमग को नननबीजी पौधे कहा जाता है , क्योंकक इसमें नहीं पाया जाता :-
(अ) बीजपत्र (ब) भ्रूणपोष (स) टे स्टा (द) अण्डाशय शभवत्त
6. मांस का आवास है :-
(अ) शुष्क स्थान (ब) स्वच्छ जल (स) अलवणीय जल (द) नम तथा छायादार स्थान
7. वगीकरण के जनक है :-
(अ) लैमाकग (ब) बेंथम (स) अरस्तु (द) लीननयस

8. शसस्टे मा नैचुरी ककताब ककसके द्वारा शलखी गयी :-
(अ) लैमाकग (ब) लीननयस (स) अरस्तु (द) बेंथम

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9. पूणग तना परजीवी का उदाहरण है :-
(अ) अमरबेल (ब) चंदन (स) ववस्कम (द) लोरे न्थस
10. कीटभक्षी पादप है :-
(अ) घटपणी (ब) ब्लैडरवटग (स) ड्रोसेरा (द) उपरोक्त सभी

11.gjs 'kSokyksa esa lafpr Hkkstu gksrk gS&
¼v½ LVkpZ ¼c½ eSuhVksy ¼l½ lsY;qykst ¼n½ ¶yksjksfM;u LVkpZ
12. i`Foh ij lcls vf/kd izdk’k la’ys"k.k gksrk gS&
¼v½ 'kSokykas }kjk ¼c½ dodkas }kjk ¼l½ LFkyh; ikS/kksa }kjk ¼n½ e:LFkyh; ikS/kks }kjk
13.fuEufyf[kr esa ls fdles tsEek di }kjk vySafxd tuu gksrk gSA
¼v½ fyojoVZ esa ¼c½ flysftuSyk esa ¼l½ bDohflVe esa ¼n½ ikbul esa

प्रश्न .2 रिक्त स्थानों की पूनतण कीजजए :-
1. पांच जगत वगीकरण के जनक ................... हैं।
2. भूरे शैवाल का रं ग ...................... वणगक के कारण होता है ।
3. शैवालो की कोशशका शभवत्त ................... से बनी होती है ।
4. लाल शैवाल का लाल रं ग .................... वणगक के कारण होता है ।
5. ब्रायोफाइट के नर लैंधगक अंग को ..................... कहते है ।
6. ब्रायोफाइट के मादा जनन अंग को ..................... कहते है ।
7. ..................... एंग्जयोस्पमग का अद्ववतीय गण
ु है ।
8. ..................... ववकासशील भ्रूण को पोषण प्रदान करता है ।
9. टे ररडोफाइट्स का मुख्य पादपकाय ....................... होता है ।
10. lcls Åapk ftEukssaLieZ&&&&&&&&gSaA
11. lcls Åapk ,aft;ksLieZ&&&&&&gSA
12. lcls NksVk ,aft;ksLieZ&&&&&&gSA

प्रश्न .3 सही जोडी नाइए :-
कॉलम A कॉलम B
1. क्लैमाइडोमोनॉस अ. मांस
2. साइकस ब. टै ररडोफाइट
3. शसलैंग्जनेर्लस स. शैवाल
4. स्फैगनम द. ग्जम्नोस्पमग
5. कक्रप्टोगेम्स य. बीजीय पौधे
6. फेनरोगेम्स ई. उभयचर पौधे
7. ब्रायोफाइट्स फ. नननबीजी
8. टे ररडोफाइट्स स. एंग्जयोस्पमग

9. ग्जम्नोस्पमग र. बीजरट्रहत पौधे
10. द्ववननषेचन ल. संवहनी कक्रप्टोगेम्स

12

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प्रश्न .4 एक शब्द में उत्ति लिखिये :-
1. पुष्प एवं बीजधारण करने वाले पादपों का वगग क्या कहलाता हैं ?
2. समानान्तर शशराववन्यास यक्
ु त पत्ती वाले पादप का वगग क्या कहलाता हैं ?
3. भूरे शैवालों में पाया जाने वाला भूरा वणगक कोनसा है ?
4. सबसे ऊंचे एंग्जयोस्पमग वक्ष
ृ का नाम शलणखए |
5. लाल शैवालों में पाया जाने वाले लाल वणगक का नाम शलणखए |
6. पौधों तथा जन्तु के बीच की कडी ककसे कहा जाता है ?
7. Lkeqnz dh xgjkbZ esa dkSu ls 'kSoky ik, tkrs gS\
8. ,d ifjiDo Hkzw.kdks"k fdrus dks’kdh; gksrk gS\
9. 'kSokyksa esa ik, tkus okys o.kZd dk uke fyf[k,A
10.VsfjMksQkbVk ds nks lnL;ksa ds uke fyf[k,A
11.fo"kecktk.kqrk fdl ikS/ks esa ikbZ tkrh gS\

अनत िघुउत्तिीय प्रश्न - 2 अंक
1. ववटे कर द्वारा सझ
ु ाए गये पांच जगत के नाम शलणखऐं |
2. कृत्रत्रम वगीकरण क्या है ?
3. प्राकृनतक वगीकरण क्या है ?
4. जानतवत्ृ तीय वगीकरण क्या है ?
5. शैवालों के दो प्रमुख लक्षण शलणखये |
6. जूस्पोर क्या है ?
7. ववषम बीजाणक
ु ता को शलणखये |
8. क्लोरोफाइसी का हरा रं ग ककस वणगक के कारण होता है ?
9. ब्रायोफाइट के दो आधथगक महत्व शलणखये |
10. जेमा कप का क्या कायग है ?
11. कवक मूल ककसे कहते है ?
12. शैवाल के वगीकरण का क्या आधार है ?
13. लाल शैवाल तथा भूरे शैवाल में दो अंतर स्पष्ट कीग्जए |
14. युनमक संलयन तथा त्रत्रसंलयन में दो अंतर स्पष्ट कीग्जए |
15 f}&fu"kspu dks Li"V dhft,A

16.f=&lay;u dks Li"V dhft,A

िघुउत्तिीय प्रश्न - 3 अंक
1. शैवालों के तीन प्रमख
ु लक्षण शलणखये |
2. ब्रायोफाइटा का आधथगक महत्व शलणखये |

3. ग्जम्नोस्पमग के आधथगक महत्व पर ट्रटप्पणी शलखो |
4. शलवरवटग तथा मांस में अंतर तीन शलणखये |
5. ब्रायोफाइटा को हम पादप जगत का जलस्थलचर क्यों कहते हैं ?

13

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6. लाइकेन पर ट्रटप्पणी शलणखये |
7. शैवालों में कानयक जनन ककस प्रकार होता हैं ?
8. शैवालों में लैंधगक जनन ककस प्रकार होता हैं ?
9. ग्जम्नोस्पमग तथा एंग्जयोस्पमग दोनों में बीज होते हैं। कफर भी इनका वगीकरण अलग-अलग क्यों हैं ?
10. मांस के जीवन चक्र की ववशभन्न अवस्थायें शलणखये |
11. एक बीजपत्री व द्ववबीजपत्री पोधों में 3 अंतर शलणखये |
12. ग्जम्नोस्पमग को एंग्जयोस्पमग से ककस प्रकार ववभेट्रदत ककया जा सकता हैं ?
13. एग्न्जयोस्पमग का जीवन चक्र धचत्र द्वारा स्पष्ट कीग्जये |
14. एग्न्जयोस्पमग के प्रमुख 3 लक्षणों को शलखये |
15. द्ववननषेचन क्या है ? इसका महत्व शलणखये |
16. भूणकोष में पाई जाने वाली ककन्ही 3 कोशशकाओं का वणगन कीग्जये |
17. ववषम बीजाणुता क्या है ? इसकी साथगकता पर संक्षक्षप्त ट्रटप्पणी शलणखये |
18. पीढी एकांतरण क्या है ? उदाहरण सट्रहत शलणखए।
19. कवक मूल तथा शैवाल मूल में 3 अंतर शलणखए।

---------------------------------------------------------------xx------------------------------------------------------------------------------------

14

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अध्याय – 4
प्राखर् जगत

महत्वपूर्/ण स्मिर् योग्य ब द
िं ु :-
➢ मूलभूत लक्षण जैसे – संगठन के स्तर, कोशशका संगठन, गह
ु ा, खंडीभवन, पष्ृ ठरज्जू आट्रद प्राणण
जगत के वगीकरण के आधार है।
➢ पॉरीफेरी संघ जंतु जगत का सबसे आध एंव सरल संघ है |
➢ कोशशकायें (कोएनोसाइट) मुख्य लक्षण है।
➢ सीलेंटरे टा में स्पशगक एवं दं श कोशशका पाए जाते है।
➢ टीनोफोर लवणीय तथा कंकत पट्ट्रटका वाले जीव होते है।
➢ प्लेटीहे ग्र्लमथींज (चपटे – कृशम) – शरीर चपटा चपटा तथा द्ववपाश्वग समनननत वाला होता है।
➢ एस्केग्र्लमथीज कूटप्रगुही वाले गोलकृनत प्राणी होते है ।
➢ ऐनेशलड प्राणी ववखंडत: खंडडत होते हैं।
➢ आथोपोडा प्राणी जगत का बडा समह
ू है ग्जसमें संधधयक्
ु त पाद होता है।
➢ मोलस्का का कोमल शरीर कवच से ढका रहता है। बाहरी कंकाल काइट्रटन का होता है।
➢ ऐकाइनोडमग की त्वचा काटे दार होती है । जल संवहन तंत्र प्रमख
ु लक्षण है ।
➢ संघ कॉडेटा में पष्ृ ठरज्जू (नोटोकॉडग) पाया जाता है।
➢ मछशलयां, उभयचर तथा सरीसप
ृ असमतापी है ।
➢ पक्षी समतापी जीव होते है तथा शरीर पर पंख होते है।
➢ स्तनधाररयों के ववशशष्ट लक्षणों में स्तन ग्रंधथ एवं त्वचा पर बाल प्रमुख हैं।

प्रश्न .1 सही ववकल्प का चयन कीजजए :-
1. ननम्नशलणखत में से शारीररक खंडीभवन ककसमें पहले दे खा गया-
(अ) प्लेट्रटहे शलमथीज (ब) एस्केहे लशमथीज (स) ऐनेशलडा (द) आथोपोडा
2. ननम्नशलणखत में से कौन एक मछली है -
(अ) स्टार कफश (ब) शसर्लवर कफश (स) जेली कफश (द) शाकग
3. ननम्नशलणखत में अंडे दे ने वाला स्तनधारी है -
(अ) कंगारू (ब) प्लैटीपस (स) हहे ल (द) काओला
4. ननम्नशलणखत में से कौन जरायुज है :-
(अ) पक्षी (ब) सरीसप
ृ (स) स्तनधारी (द) उभयचर

5. ननम्नशलणखत में से ककसका ह्रदय तीन प्रकोष्ठ का बना होता है -
(अ) एम्फीत्रबया (ब) पक्षी (स) स्तनधारी (द) सरीसप
ृ

15

Page 13

6. ननम्नशलणखत में से ककस में वायुकोष युक्त अग्स्थयॉ पाई जाती है -
(अ) एम्फीत्रबया (ब) पक्षी (स) स्तनधारी (द) सरीसप
ृ
7. ननम्नशलणखत में त्वचा पर रोम पाए जाते है -
(अ) एम्फीत्रबया (ब) पक्षी (स) स्तनधारी (द) सरीसप
ृ
8. ननम्नशलणखत में से ककसमे चार प्रकोष्ठ का ह्रदय पाया जाता है -
(अ) पक्षी (ब) स्तनधारी (स) मगरमच्छ (द) उपरोक्त सभी
9. ननम्नशलणखत में से संघ कोडेटा का प्रमख
ु लक्षण है -
(अ) पष्ृ ठ रज्जू (ब) पष्ृ ठ खोंखली तंत्रत्रका रज्जू (स) युग्नमत ग्रसनी क्लोम नछद्र (द) उपरोक्त सभी
10. fuEuf[kf[kr esa ls fdl la?k esa vkWfLV;k rFkk vkWLdqye uked fNnz ik, tkrs gS&
¼v½ iksjhQsjk esa ¼c½ flysuVsªVk esa ¼l½ izksVkstksvk esa ¼n½ IysVhgsyfeufFkat esa
11.fuEufyf[kr esa ls dkSu&lk LoPN tyh; Liat gS &
¼v½ lkbdu ¼c½ ;wLikaft;k ¼l½ Liakftyk ¼n½ gkbfMªyk
12.fuEufyf[kr esa ls fdl la?k esa ikWyhi rFkk esM~;wlk voLFkk,a ikbZ tkrh gS &
¼v½ iksjhQsjk ¼c½ flysuVsVªk ¼l½ izksVkstksvk ¼n½ ,usfyMk
13.la?k ,usfyMk ds izkf.k;ksa esa mRltZu fdl jpuk }kjk gksrk gS&
¼v½ isjkiksfM;k }kjk ¼c½ usfQzfM;k }kjk ¼l½ lhVh }kjk ¼n½ DykbVsye }kjk

प्रश्न .2 रिक्त स्थानों क पनू तण कीजजये :-
1. जेली कफश .................. संघ का सदस्य है।
2. जीव संदीग्प्त संघ ................. की मुख्य ववशेषता है।
3. एनेशलडा में चलन अंग ................. होते है।
4. एनेशलडा में उत्सजी अंग ................... है।
5. प्राणी जगत का सबसे बडा संघ …………….. है।
6. आथोपोडा में उत्सजगन ...................... के द्वारा होता है।
7. लाख के कीडे का वैज्ञाननक नाम ................... है।
8. मछशलयों के हृदय में ..................... प्रकोष्ठ होते है।
9. पक्षक्षयों में श्वसन .................... के द्वारा होता है।
10. LVkjfQ’k esa izpyu&&&&&&&&&uked jpuk }kjk gksrk gS A
11 la?k ,LdsgsyfeufFkat es&
a &&&&&&& izdkj dh nsgxqgk ik;h tkrh gSA
12. la?k vFkksZiksM+k es&
a &&&&&&&&& izdkj dh lefefr ikbZ tkrh gSA
13. ty laogu ra=&&&&&&la?k dh fo’ks"krk gSA

16

Page 14

प्रश्न .3 सही जोडी नाइये :-

कालम ‘A’ कालम ‘B’
i. vkfdZ;ksIVsfjDl ¼v½ ,Ldsgsyfeuथीज
ii. xksyd`fe ¼c½ la;ksth dM+h
iii. f}&ik’oZ lefefr ¼l½ flysuVªsVk
iv. dks,ukslkbV dksf’kdk ¼n½ IysVhgsyfeuafFkt
v. Tokyk dksf’kdk,a ¼,½ Lru/kkjh

प्रश्न .4 एक शब्द में उत्ति लिखिये :-
1. पण
ू ग ववकशसत शशशओ
ु ं को जन्म दे ने वाले जन्तु क्या कहलाते हैं?
2. केचय
ु ें में पाये जाने वाले प्रचलन अंग का नाम शलणखए।
3. मन
ु ष्य के ह्रदय में ककतने कोष्ठ होते है ?
4. संधधयक्
ु त पाद ककस संघ के जंतओ
ु ं की ववशेषता है ?
5. केचुओं में उत्सजी अंग का नाम शलणखए।
6. संघ पोरीफेरा के दो सदस्यों का नाम शलणखए।
7. ककस जीव को जीववत जीवाश्म कहा जाता है ?

अनत िघुउत्तिीय प्रश्न - 2 अंक
1. खुले पररसंचरण तंत्र तथा बंद पररसंचरण तंत्र में 2 अंतर शलणखये |
2. अरीय समशमनत ककसे कहते है ?
3. द्पाश्वग समशमनत क्या है ?
4. त्रत्रकोरकी जीव ककसे कहते है ?
5. खंडीभवन से क्या आशय है ?
6. संघ नाइडेररया को यह नाम क्यों ट्रदया गया है ?
7. प्लेटीहैग्र्लमथीज में परासरण तथा उत्सजगन ककससे होता है ?
8. आथोपोडा संघ की दो प्रमख
ु ववशेषतायें शलणखये |
9. रे डुला का क्या कायग है ?
10. मनष्ु य के शरीर पर पाये जाने वाले दो परजीवों के नाम शलखों |
11. चमगादड को स्तनी पक्षी क्यों माना गया है ?
12. पोरीफेरा संघ के दो लक्षण शलणखये |
13. ननम्नशलणखत जंतुओं के संघ के नाम शलणखयें -
(अ) स्टार कफश (ब) एस्केररस (स) आक्टोपस (द) कॉकरोच

14. समतापी से क्या आशय है ?

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िघुउत्तिीय प्रश्न - 3 अंक
1. वगीकरण के प्रमख
ु आधार क्या है ?
2. दे हगह
ु ा के आधार पर जीवों के प्रकार शलणखए |
3. कशेरूकी संघ के प्राणणयों के तीन मल
ू भत
ू लक्षण शलणखए |
4. पक्षक्षयों में उडने हे तु क्या-क्या रूपांतरण पाए जाते है ?
5. मछशलयों में वायु आशय की उपग्स्थनत का क्या महत्व है ?
6. पीढीयों
ी़ का एकांतरण क्या है ?
7. स्तनधारी वगग के तीन लक्षण शलणखयें |
8. परजीवी प्लेटीहे ग्र्लमथीज के तीन ववशेष लक्षण शलणखए |
9. आथोपोडा प्राणी समूह का सबसे बडा वगग है इस कथन के प्रमुख कारण शलणखए |
10. हहे ल मछली को स्तनी वगग में क्यों रखा गया है ?
11. कॉडेटा एवं नॉन काडेटा में 3 अंतर शलणखये |
12. सभी कशेरूकी (वट्रटग ब्रेट्स) रज्जूकी (कॉडेट्स) है , लेककन सभी सज्जूकी कशेरूकी नहीं है।इस कथन की
हयाख्या कीग्जए|
13.एम्फीत्रबया वगग के प्रमुख लक्षण व दो उदाहरण शलणखये |
14.गोल कृशम व फीता कृशम में 3 अंतर शलणखयें |
15.मोलस्का संघ के प्रमुख लक्षण व दो उदाहरण शलणखयें |
16.पोरीफेरा संघ के प्रमख
ु 3 लक्षण शलणखयें |
17.प्रगह
ु ा ककसे कहते है ? प्रगुहा के आधार पर जीवों का वगीकरण ककस प्रकार ककया गया है ?
18.संघ शसलेन्िे टा में जनन को समझाइये |
19.संघ एकाइनोडमेटा के प्रमुख लक्षण व दो उदाहरण शलणखयें |

-------------------------------------------------------------------xx-------------------------------------------------------------------

18

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v/;k;&5
iq"ih; ikniksa dh vkdkfjdh
महत्वपूर्/ण स्मिर् योग्य ब द
िं ु :-
➢ एक प्रारूवपक पुष्पी पादप दो आधारभूत भागों का बना होता है जड तथा तना
➢ जड मुख्यतः तीन प्रकार की होती हैं- मूसला जड, रे शेदार जड, अपस्थाननक जड
➢ तना मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं- ननबगल तना व उधवग तना
➢ पवत्तयां मख्
ु य रूप से दो प्रकार की होती हैं- सरल पत्ती व संयक्
ु त पत्ती
➢ एक प्रारूवपक पुष्प में 4 भाग होते हैं जो पुष्पासन पर ग्स्थत रहते हैं |
➢ पररपक्व अंडाशय को फल कहते हैं फलों को तीन श्रेणणयों में बांटा गया है - एकल फल, पुंज फल
संगट्रठत फल
➢ बीज एक पररपक्व बीजांड है |
➢ बीच पत्रों की संख्या के आधार पर बीज दो प्रकार के होते हैं- एकबीज पत्री एवं द्ववबीजपत्री

iz-1- lgh fodYi pqudj fyf[k,%&
i. tMs+ fodflr gksrh gS&
¼v½ ewykadj ls ¼c½ izkadqj ls ¼l½ chti= ls ¼n½ izkadqj pksy ls
ii. ewyjkse tM+ ds fdl Hkkx esa ik, tkrs gSa&
¼v½ nh?khZdj.k {ks= esa ¼c½ ifjiDou {ks= esa ¼l½ esjsLVseh {ks= esa ¼n½ ewy xksi {ks= esa
iii. 'olu ewy ikbZ tkrh gS&
¼v½ jkbtksQksjk esa ¼c½ cjxn esa ¼l½ eDdk esa ¼n½ xsga ¡w eas
iv. rus dk :ikarj.k gS&
¼v½ vkyw ¼c½ vnjd ¼l½ gYnh ¼n½ lHkh
v. fuEufyf[kr esa iÙkh ds Hkkx gSa&
¼v½ i.kkZ/kkj ¼c½ i.kZoa`r ¼l½ e/;f’kjk ¼n½ lHkh

iz-2- fjDr LFkkuksa dh iwfrZ dj fyf[k,&
i. f}&chti=h ikS/kksa dh ifÙk;ksa esa &&&&&&&& f’kjkfoU;kl ik;k tkrk gSA
ii. iq"i dk lcls ckgjh pØ&&&&&&&&&dgykrk gS A
iii. iq"i dk uj Hkkx&&&&&&&& dgykrk gSA
iv. iq"i dk eknk Hkkx&&&&&&&&&& dgykrk gSA
v. I;kt dk dqy&&&&&& gSA

iz-3- lgh tksfM+;ka cukdj fyf[k,&
*v* *c*
i. iqrUrq ¼v½ tk;kax
ii. ofrZdkxz ¼c½ iqeax
iii. nkysa ¼l½ lksysuslh
¼n½ Qscslh

iv. I;kt
v. vkyw ¼,½ fyfy,lh

19

Page 17

iz-4- ,d okD; esa mRrj fyf[k,&
1. vke esa QyfHkfÙk dk dkSu&lk Hkkx [kk;k tkrk gS\
2. rus dk fodkl cht ds fdl Hkkx ls gksrk gS\
3. ,d chti=h cht dk chti= D;k dgykrk gS \
4. eVj dk okuLifrd uke fyf[k,A
5. I;kt dk okuLifrd uke fyf[k,A

iz-5- vfr y?kqmÙkjh; iz’u- 2 अंक

1. पोधों में tM+ ds 2 dk;Z fyf[k,A
2. 'olu ewy dks mnk- lfgr fyf[k,A
3. i.kZfoU;kl dks Li"V dhft,A
4. iq"Ik ds eq[; Hkkxksa ds uke fyf[k,A
5. chtkaMU;kl dks ifjHkkf"kr dhft,A
6. iq"ilw= dk vFkZ Li"V dhft,A
7. iq"iØe dks ikfjHkkf"kr dhft,A

iz-6- y?kqmÙkjh; iz’u- 3 अंक

1. fdlh ewy ds fofHkUu Hkkxksa dks fp= dh lgk;rk ls Li"V dhft, A
2. i.kZfoU;kl ls vki D;k le>rs gS blds izdkj fyf[k, A
3. ,d izk:fid iRrh ds fofHkUu Hkkxksa dks fyf[k, A
4. ,d O;kl lefefr o f=T;k lefefr iq"Ik dks Li"V dhft, A
5. iRrh ds fofHkUu :ikarj.k fyf[k, A
6. tkfydkor~ o lekUrj f’kjkfoU;kl esa तीन varj fyf[k,A
7. ljy iÙkh o la;qDr iÙkh esa dksbZ तीन varj fyf[k,A
8. llhek{kh o vlhek{kh iq"iØe esa dksbZ rhu varj fyf[k,A
9. ,dfyaxh o mHk;fyaxh iq"Ik esa dksbZ तीन varj fyf[k,A
10.,d izk:fid iq"Ik dk ukekafdr fp= cukb,A
11.Lkskysuslh dqy ds तीन eq[; y{k.kksa dks fyf[k,A
12. Qkcslh dqy ds rhu egRoiw.kZ y{k.kksa dks fyf[k, A
13.fyfy,lh dqy ds rhu egRoiw.kZ y{k.kksa dks fyf[k, A
14.Qy ds rhu ds rhu egRoiw.kZ y{k.kksa dks fyf[k, A
15.cht ds rhu ds egRoiw.kZ y{k.kksa dks fyf[k, A
16.ewy ds fofHkUu तीन :ikarj.k fyf[k, A

---------------------------------------------------------------------------------

20

Page 18

v/;k;&6
iq"ih; ikniksa dk 'kjhj
महत्वपूर्/ण स्मिर् योग्य ब द
िं ु :-
➢ समान तथा असमान कोशशकाओं का ऐसा समूह ग्जसकी सभी कोशशकाएं कायग एवं उत्पवत्त में समान
होते हैं उत्तक कहलाता है |
➢ ववभाजन क्षमता के आधार पर पादप ऊतकों को दो भागों में बांटा गया है - ववभज्योतक उत्तक व
स्थाई उत्तक
➢ ववभज्योतक ऊतक में ववभाजन की क्षमता पाई जाती है |
➢ स्थाई ऊतक का ननमागण ववभज्योतक ऊतक के ववभाजन एवं ववभेदन से होता है|
➢ स्थाई उत्तक तीन प्रकार के होते हैं- सरल उत्तक, जट्रटल ऊतक, ववशशष्ट ऊतक
➢ ववशभन्न प्रकार के ऊतक आपस में शमलकर उत्तक तंत्र का ननमागण करते हैं -उत्तक तंत्र तीन प्रकार के
होते हैं|
बाह्य त्वचीय उत्तक तंत्र ,साधारण उत्तक तंत्र, आधारभत
ू उत्तक तंत्र
➢ जाइलम तथा फ्लोएम संवहन उत्तक के उदाहरण हैं
➢ द्ववतीयक वद्
ृ धध द्ववबीजपत्री तनों एवं जडों में पाई जाती है |

iz-1- lgh fodYi pqudj fyf[k,%&
i. Ikk’oZ dSafc;e ds mnkgj.k gaS&
¼v½ iwyh; dSafc;e ¼c½ varjkiwyh; dSafc;e ¼l½ dkdZ dSafc;e ¼n½ mijksDr lHkh
ii. ikS/kksa dh tM+ksa ls ty rFkk [kfut yo.kksa dk ifjogu fdl Ård }kjk gksrk gS&
¼v½ tkbye }kjk ¼c½ ¶yks;e }kjk ¼l½ iSjsudkbek }kjk ¼n½ dkWysudkbek }kjk
iii. tkbye ds Hkkx gS&
¼v½ okfgfudh ¼c½ okfgdk ¼l½ iSjsudkbek ¼n½ lHkh
iv. ¶yks;e ds Hkkx gS&
¼v½ pkyuh ufydk ¼c½ iSjudkbek ¼l½ rarq ¼n½ lHkh
v. jU/kz dh lajpuk esa dkSu ls Hkkx fn[kkbZ nsrs gS&
¼v½ j{kd dksf’kdk,a ¼c½ lgk;d dksf’kdk,a ¼l½ DyksjksIykLV ¼n½ lHkh

iz-2- fjDr LFkkuksa dh iwfrZ dj fyf[k,&
i. ,slk laogu c.My ftlesa tkbye o ¶yks;e ds e/; esa dSfca;e mifLFkr gksrk gS&&&&&&&laogu
c.My dgykrk gSA
ii. dSLisfj;u ifV~Vdk,&&&&&&&esa ik;h tkrh gSA
iii. j{kd dksf’kdk,a&&&&&&&&&esa ik;h tkrh gSA
iv. ,d chti=h ewy esa&&&&&&&&izdkj ds laogu c.My ik, tkrs gSA
v. जड का शसरा एक टोपी नुमा रचना द्वारा सुरक्षक्षत रहता है ग्जसे--------- कहा जाता है |

vi. पौधों में भोजन का पररवहन --------- के द्वारा होता है |

21

Page 19

iz-3- lgh tksfM+;ka cukdj fyf[k,&
*v* *c*
i. foHkT;ksrd Ård ¼v½ ,dchtiRrh iRrh
ii. ewyxksi ¼c½ foHkktu’khy dksf’kdk,a
iii. cqyhQkeZ dksf’kdk,a ¼l½ tM+
iv. jU/kz ¼n½ Hkkstu dk ifjogu
v. ¶yks;e ¼,½ iRRkh

iz-4- ,d okD; esa mRrj fyf[k,&
1. ,d chti=h ewy esa laogu c.My dh la[;k fyf[k,A
2. var% dk"B esa mifLFkr inkFkksZ ds uke fyf[k,A
3. tkbye isjsudkbek dh fHkfRr fdl inkFkZ dh cuh gksrh gS\
4. izk;% LVksesVk ifRRk;ksa dh fdl lrg ij mifLFkr gksrs gS\

iz-5- vfr y?kqmÙkjh; iz’u 2 अंक

1. foHkT;ksrd Ård dks ifjHkkf"kr dhft,A
2. iSjaus dkbek Ård ds nks dk;Z fyf[k,A
3. dksysudkbek Ård ds nks dk;Z fyf[k,A
4. tkbye o ¶yks;e dk ,d&,d dk;Z fyf[k,A
5. okf"kZd oy; dk vFkZ Li"V dhft,A

iz-6- y?kqmÙkjh; iz’u 3 अंक
1. izkFkfed o f}rh;d esjhLVse Ård dks Li"V dhft, A
2. var dk"B o 'kjn dk"B dks Li"V dhft, A
3. tkbye o ¶yks;e ds nks & nks dk;Z fyf[k,A
4. okf"kZd oy; ds vk/kkj ij fdlh ikS/ksa dh vk;q dk fu/kkZj.k fdl izdkj fd;k tk ldrk gS ?
5. f}& chti=h rus dh vkarfjd lajpuk dk ukekafdr fp= cukb, A
6. ,d & chti=h rus dh vkarfjd lajpuk dk ukekafdr fp= cukb, A
7. ,d chti=h o f}& chti=h rus esa dksbZ तीन varj fyf[k,A
8. ,d chti=h o f}& chti=h iRrh esa dksbZ तीन varj fyf[k,A
9. jU/kz dh lajpuk dk ukekadu fp= cukb,A
10.f}rh;d o`f} ls vki D;k le>rs gS ?
11.[kqys o can laogu ra= esa तीन varj Li"V dhft,A

12.,d chti=h o f}& chti=h tM+ esa dksbZ तीन varj fyf[k,A

---------------------------------&&&00&&--------------------------------------------------

22

Page 20

v/;k;&7
izkf.k;ksa esa lajpukRed laxBu
महत्वपूर्/ण स्मिर् योग्य ब द
िं ु :-
➢ केंचुआ ऐनेशलडा संघ के ओशलगोंकीटा वगग का सदस्य है |
➢ केंचुए का शरीर 100 से 200 खंडों का बना होता है केंचुए के 14 15 16 खंड में क्लयीटे लूम उपग्स्थत
होता है | केंचुए में श्वसन शरीर की सामान्य सतह से होता है |
➢ केंचुए में पररसंचरण तंत्र बंद प्रकार का होता है |
➢ केंचए
ु में उत्सजी पदाथग यरू रया होता है |
➢ कॉकरोच संघ आथोपोडा के इन्सेक्टा वगग का सदस्य है |
➢ कॉकरोच में 3 जोडी चलन टांगे पाई जाती हैं ग्जसके आधार पर इसे हे क्सापोडा भी कहते हैं|
➢ कॉकरोच का शरीर शसर तथा उधर में बटा होता है
➢ कॉकरोच में 10 जोडे स्वाश रं ध्र पाए जाते हैं|
➢ कॉकरोच में खुला पररवहन तंत्र पाया जाता है |
➢ कॉकरोच का हृदय 13 कक्षाओं का बना होता है |
➢ कॉकरोच में अपण
ू ग कायांतरण पाया जाता है |
➢ में ढक एग्म्फत्रबया वगग का सदस्य है इसका शरीर शसर व धड में ववभक्त रहता है|
➢ में ढक एक असमतापी जंतु है |
➢ में ढक में बंद प्रकार का पररवहन तंत्र पाया जाता है|
iz-1- lgh fodYi pqudj fyf[k,%&
i. es<d fdl oxZ ls lacaf/kr gS&
¼v½ ,EQhfc;k ¼c½ jsIVhfy;k ¼l½ esefs y;k ¼n½ ,oht
ii. mRlthZ inkFkZ dh n`f"V ls es<d gksrk gS-
¼v½ veksuksVsfyd ¼c½ ;wfj;ksVsfyd ¼l½ ;wfdksVsfyd ¼n½ dksbZ ugha
iii. dkWdjkp dk 'kjhj ववभाग्जत होता gS-
¼v½ flj] o{k o mnj esa ¼c½ flj] o{k o iwNa esa ¼l½ flj] mnj o iwN
a esa ¼n½ o{k] mnj o iaN
w esa
iv. dkWdjkp ds 'olu ra= esa fdrus tksM+h 'okl jU/kz ik, tkrs gS&
¼v½ 8 tksM+h ¼c½ 9 tksM+h ¼l½ 10 tksM+h ¼n½ 12 tksM+h

iz-2- fjDr LFkkuksa dh iwfrZ dj fyf[k,&
i. dsqp,a esa Hkkstu dks ihlus dk dk;Z&&&&&&& के }kjk होता gSA
ii. dsqp,a esa mRltZu dk dk;Z&&&&&&& }kjk होता gSA
iii. dadkyh is’kh&&&&&&&&&izd`fr dh gksrh gSA
iv. fpduh is’kh&&&&&&&&&izd`fr dh gksrh gSA

v. dkWdjkp la| ----------------- dk tarq gS A
vi. dspq, la| ---------------------- dk trq gSA
vii. es<d dk ykokZ -------------------- dgykrk gS A

23

Page 21

iz-3- lgh tksfM+;ka cukdj fyf[k,&
*v* *c*
1-gSoflZ;u ra= ¼v½ var L=koh xzfFka;k
2- gkeksZu ¼c½ vfLFk;ka
3- àn; ¼l½ varfoZ"V fMLd
4- dspqvk ¼n½ vkFkksZiksMk
5- dkWdjkp ¼,½ ,susfyMk

iz-4- ,d okD; esa mRrj fyf[k,&
1-dspq,a esa ट्रटफ्लोlksy dk dk;Z fyf[k,A
2-vfLFk dks vfLFk ls tksMus okys Ård D;k dgykrs gS\
3-is’kh dks vfLFk ls tksMus okys Ård D;k dgykrs gS\
4-ekLV dksf’kdk,a dgka ikbZ tkrh gS\

iz-5- vfr y?kqmÙkjh; iz’u 2 अंक
1- mikfLFk o vfLFk esa dksbZ nks varj fyf[k,A
2- la;ksth Ård dks ifjHkkf"kr dhft,A
3- dspq,a dk oSKkfud uke crkrs gq,] bldh mRltZu jpuk dk uke fyf[k, A
4- dspq,a dks fdlkuksa dk fe= D;ksa dgk tkrk gS ?
5- vuqgj.k dks Li"V dhft, A
6- 'khr fuf"dz;rk o xzh"e fuf"dz;rk dks Li"V dhft, A

iz-6- y?kqmÙkjh; iz’u 3 अंक
1. midyk Ård o blds izdkj fyf[k, A
2. cfg%L=koh o var L=koh xzfFk;ksa dks ifjHkkf"kr dj fyf[k, A
3. mikfLFk o vfLFk esa dksbZ rhu varj fyf[k,A
4. àn; is’kh dh lajpuk fp= lfgr Li"V dhft, A
5. dspq, ds fofHkUu [k.Mksa dk ukekafdr fp= cukb, A
6. dadkyh is’kh dh lajpuk fp= lfgr Li"V dhft, A
7. fpduh is’kh dh lajpuk fp= lfgr Li"V dhft, A
8. raf=dk is’kh dh lajpuk fp= lfgr Li"V dhft, A
9. dkWdjkp dk oSKkfud uke crkrs gq,] bldh mRltZu o 'olu jpuk dk uke fyf[k, A

---------------------------------------------------------------------xx-------------------------------------------------------------

24

Page 22

1- j‚cVZ gqd us loZçFke dksf'kdk 'kCn dk ç;ksx fd;kA
2- j‚cVZ czkmu us dsUæd dh [kkst v‚fdZM ewy dh dksf'kdkvksa esa dhA
3- dksf'kdk fl)kUr dk çfriknu 'yhMsu ,oa 'oku uked oSKkfudksa }kjk çLrqr fd;k x;kA
4- **dksf'kdk dk fuekZ.k iwoZ fufeZr dksf'kdkvksa ls gksrk gSA** vo/kkj.kk j‚cVZ fodksZ }kjk çLrqr dh
x;hA
5- çksdSfj;‚fVd dksf'kdkvksa esa dksbZ Hkh dksf'kdkax ugha ik;s tkr हैंsA
6- dksf'kdk fHkfÙk eq[; :i ls lsY;qykst ,oa dksf'kdk f>Yyh ykbiksçkVhu dh cuh gksrh gSA
7- jkbckslkse] lsUVªkslkse] lsUVªhvksy] U;wfDyvksyl f>Yyh jfgr dksf'kdkax gSA
8- ,.MksIykfTed jsfVdqye] x‚Yxhdk;] fjfädk] ykblkslkse] LQsjkslkse] ijv‚Dlhlkse]
Xykbv‚Dlhlkse Fkk;yksd‚bM vFkok ySfeyh vkfn ,dy f>Yyh ls f?kjs dksf'kdkax gSaA
9- ekbVksd‚fUMª;k ,oa yod ¼DyksjksIykLV] ØkseksIykLV] Y;wdksIykLV½ nksgjh f>Yyh ls f?kjs
dksf'kdkax gSaA
10- dsUæd] dksf'kdk esa ik;k tkus okyk lcls cM+ks dksf'kdkax gSaA

1 -

¼v½ lw=df.kdk ¼ekbVksd‚fUMª;k½ dh vuqifLFkfr ¼c½ dksf'kdk&fHkfÙk dk ik;k tkuk
¼l½ gheksXyksfcu dk ik;k tkuk ¼n½ dsæa d dh vuqifLFkfr

¼v½ nks mi&bdkb;ksa dk cuk gksrk gS ¼c½ i‚fylkse curk gS
¼l½ ERds lkFk tqM+k gksrk gS ¼n½ çksVhu&la'ys"k.k esa bldk dksbZ ;ksxnku ugha gksrk

सु
¼v½ ;wXyhuk ¼c½ ,sukchuk
¼l½ Likbjksxkbjk ¼n½ उपरोक्त सभी

¼v½ {kkjdh; QqfDlu ¼c½ lSÝus hu
¼l½ esfFkyhu Cyw ¼n½ एसीटोdkehZu

25

Page 23

¼i½ ekbdksIykTek ¼ii½ 'kqrqjeqxZ ds vaMs
¼iii½ ekuo yky #f/kj df.kdk,¡ ¼iv½ thok.kq

¼v½ (i), (iv), (iii), (ii) ¼c½ (i), (ii), (iii), (iv)
¼l½ (ii), (i), (iii), (iv) ¼n½ (iii), (ii), (i), (iv)
6.
¼v½ dSfeyks xkWYth ¼c½ 'yhMu vkSj 'oku
¼l½ flaxj vkSj fudksYlu ¼n½ jkWcVZ czkmu
7.
¼v½ lw=df.kdk ¼ekbVksdkWfUMª;k½ dh ckgjh f>Yyh
¼c½ gfjr yod ¼DyksjksIykLV½ dh Hkhrjh f>Yyh
¼l½ ikni dksf'kdkvksa dh /kkuh dh f>Yyh lhek
¼n½ ikni dksf'kdk dh dksf'kdkdyk
8.

¼v½ f>Yyh dh nks ijrksa dk ik;k tkuk
¼c½ jkbckslkse dk ik;k tkuk
¼l½ i.kZgfjr ¼DyksjksfQy½ dk ik;k tkuk
¼n½ Mh-,u-,- dk ik;k tkuk
9. us निम्ननिखित में से
¼v½ dsUnzd ¼c½ dsfUnzdk
¼l½ dksf'kdknzO; ¼n½ IykTek f>Yyh
10
¼v½ ykblkslkse ¼c½ ekbVksdkWf.Mª;k
¼l½ dsUnzd ¼n½ ER
11. F1 किसिो
¼v½ Dok.Vklkse ¼c½ ijvkWDlhlkse
¼l½ QukZfUMl d.k ¼n½ XykbvkWDlhlkse

12 ER
¼v½ xkWYxhdk; ¼c½ dsUnzd f>Yyh
¼l½ ekbVksdkWf.Mª;k ¼n½ dksf'kdk fHkfRr

13. -
¼v½ 'yhMsu ,oa 'oku ¼c½ lVu ,oa ckosjh

¼l½ okVlu ,oa fØd ¼n½ MkfoZu ,oa osysl

14. lcls cM+h dksf’kdk gksrh gS&
¼v½ eqxhZ dk v.Mk ¼c½ 'krqjeqxZ dk v.Mk ¼l½ raf=dk dksf’kdk ¼n½ ekbØksIyktek

26

Page 24

2

1-thok.kqvkssa esa jkbckslksEl -------------------------- izdkj ds gksrs gSaA
2-ikni dksf'kdkvksa esa dksf'kdk fHkfRr eq[; :i ls -------------------------- dh cuh gksrh gSA
3-jkbckslksEl ---------------------- ds la'ys"k.k esa lgk;d gksrs gSaA
4------------------------ dks dksf'kdk dk ÅtkZ ?kj dgk tkrk gSA
5-dsUnzd dh [kkst -------------------------- us dh FkhA
6--&&&&&&&&&izksVhu fuekZ.k ls lacaf/kr dksf’kdk vaxd gSA
7-tho dh lajpukRed o fØ;kRed bdkbZ&&&&&&&&&gksrh gS A
8-xq.klw= esa izkFkfed ladqpu&&&&&&&ij feyrk gS A

3

(i) jkWcVZ czkmu (a) jkbckslkse
(ii) 'yhMsu ,oa 'oku (b) dsUnzd
(iii) iSysM (c) dksf'kdk fl)kUr
(iv) okYMs;j (d) thok.kq
(v) Y;wosugkWd (e) xq.klw=
(vi) ykblkslkse (f) izdk'k&la'ys"k.k
(vii) DyksjksIykLV (g) ÅtkZ ?kj
(viii) jkbckslkse (h) dksf'kdk foHkktu
(ix) ekbVksdkWf.Mª;k (i) dksf'kdk ikpu
(x) lsUVªhvksy (j) izksVhu&la'ys"k.k
4

i. PPLO dk iwjk uke fyf[k,A
ii. dbZ jkbckslkse ds feyus ls cuus okyh jpuk D;k dgykrh gS\
iii. vehck esa ladqpu’khy jl/kkuh dk dk;Z fyf[k, A
iv. gfjr yod fdu dksf’kdkvksa esa mifLFkr gksrs gS \

प्रश्न - 2 अंक
1-70S vkSj 80S jkbckslkse esa 'S' dk D;k vFkZ gS\

2- ml vax dk uke crkb, ftlds pkjksa rjQ dsoy ,d gh f>Yyh gksrh gS ftleas ty&vi?kVd ,atkbe
izpqj ek=k esa gksता gSaA
3 -dksf'kdk esa ÅtkZ dgk¡ lafpr jgrh gS\

27

Page 25

4- izksdSfj;ksfVd dksf'kdk ls vki D;k le>rs gSa\
5.- VksVhiksVsUlh fdls dgrs gSa\
6- dksf'kdk dk vkfo"dkj fdlus vkSj dc fd;k\
7- dksf'kdk ds vUnj ik;s tksu nks f>Yyh jfgr dksf'kdkaxks ds uke निखिएA

8.D;k gksxk ;fn R.B.Cs. dks vfrijkljh foy;u esa j[kk tk,\
9- vUr%ijklj.k dk D;k vFkZ gS\
10- thonzO;dqapu ls vki D;k le>rs gSa\
11- v)Z&Lofu;fU=r dksf'kdkax fdls dgrs gSa\
12- dksf'kdk D;k gS\ la{ksi esa crkb,A
13 xzzke /kukRed o xzke _.kkRed thok.kq esa dksbZ nks varj fyf[k,A
14 dksf’kdk fHkfRr ds nks dk;Z fyf[k,A
15 lfØ; ifjogu dks Li"V dhft,A
16 E.R. ds nks dk;Z fyf[k,A

प्रश्न- 3 अंक
1. dksf'kdk&fl)kar dk la{ksi esa o.kZu dhft,A
2. :{k var&nzO;h tkyd ¼RER½ vkSj fpdus var%nzO;h tkyd ¼SER½ ds chp varj fyf[k,A
3. IykfTeM D;k gksrs gSa\ thok.kq esa mudh Hkwfedk fyf[k,A
4. fgLVksu D;k gksrs gSa\ os D;k dk;Z djrs gSa\
5. ,d izksdSfj;ksfVd dksf'kdk dk ukekafdr fp= fyf[k,A

6. izksdSfj;ksfVd ,oa ;wdSfj;ksfVd dksf'kdkvksa dh ifjHkk"kk mnkgj.k lfgr fyf[k, |
7. dsUnzd ds dk;ksZa dk mYys[k dhft,A
8. ;wdSfj;ksfVd xq.klw= izksdSfj;ksfVd xq.klw= ls fdl izdkj fHkUu gS\
9. xq.klw=ksa dks vkuqoaf'kd xq.kksa dk okgd D;ksa dgk tkrk gS\
10. gfjryod dh lajpuk dk o.kZu dhft,A
11. fdlh dksf'kdk eas lajpukRed vkSj izdk;kZRed dkSu&lh fo'ks"krk,¡ gksuh pkfg, rkfd mls thfor
dksf'kdk dgk tk lds\
12. dksf'kdk fl)kar dk izfriknu djus esa fuEufyf[kr oSKkfudksa ds ;ksxnkuksa dk la{ksi esa o.kZu dhft,
&
¼a½ jkWcVZ fodksZ] ¼b½ 'yhMu vkSj 'okuA
13. **lw=df.kdk ¼ekbVksdkWfUMª;k½ dksf'kdk ds fctyh ?kj gSaA** bl dFku dh iqf"V dhft,A

14. fuEufyf[kr ds dk;Z crkb, &
¼a½ xq.klw=fcanq ¼lsVa ªksfe;j½] ¼b½ dksf'kdk fHkfRr ¼c½ fpduh
¼d½ xkWYth midj.k ¼e½ rkjd dsna z ¼lsfa Vªvksy½A

28

Page 26

15. dsUnzd vFkok ukfHkd dh lajpuk ,oa dk;Z dk o.kZu dhft,A
16. Øksekslkse D;k gS\ bldh lajpuk ,oa dk;Z dk o.kZu dhft,A
17. xq.klw= D;k gS\ bldh lajpuk dk la{ksi esa o.kZu dhft,A
18. dksf'kdk f>Yyh dh lajpuk dk rjy ekstsd ekWMy ds vk/kkj ij o.kZu dhft,A
19. gfjryवd dh lajpuk ,oa dk;Z fyf[k;sA
20. izksdsfj;ksfVd o ;wdsfj;ksfVd dksf’kdk esa dksbZ rhu varj fyf[k,A
21. izksds;ksfVd dksf’kdk dk ukekafdr fp= cukb,A
22. ikni dksf’kdk dk ukekafdr fp= cukb, A
23. tarq dksf’kdk dk ukekafdr fp= cukb, A
24. ikni dksf’kdk o tarq dksf’kdk esa dksbZ rhu varj fyf[k, A

-------------------------------------------------------------------------------

29

Page 27

BIOMOLECULES

1- U;wfDyd vEyksa [kkldj DNA dks NksM+dj vkSj fdlh Hkh Kkr tSo v.kqvksa eas Lo&f}xq.ku dh
{kerk ugha ik;h tkrh हैंA
2- DNA dks **vkuqoaf'kd lwpukvksa dk cSad** (Bank of genetic informations) ds :i eas tkuk
tkrk gSA
3- leLr thoksa dk 'kjhj rRoksa dk cuk gksrk gSA ;s rRo Lora= :i esa vFkok ;kSfxd ds :i easa
thoksa ds 'kjhj esa ik;s tkrs gSaA
4- dkcksZgkbMªsV dk lkekU; lw= Cx(H2O)y gksrk gSA
5- eksukslSdsjkbM~l esa dkcZu] gkbMªkstu ,oa vkWDlhtu dk vuqikr ges'kk 1%2%1 gksrk gSA
6- izksVhu] ikWyhlSdsjkbM~l] fyfiM~l ,oa U;wfDyd vEy dksfs 'kdkvksa esa ik;s tksus okys o`gr v.kqvksa
dh Js.kh esa vkrs gSaA
7- 'olu fØ;k esa mi;ksx gksus okyk izeq[kre lcLVsªsV dkcksZgkbMªsV gSA
8- fyfiM~l ds izR;sd v.kq esa ,d v.kq fXyljkWy vFkok yEch Chain ds ,sYdksgkWy (Long Chain
alcohol) ,oa ,d v.kq olh; vEy ik;s tkrs gSaA
9- izkd`frd :i ls ik;h tkus okyh 'kdZjkvksa eas ÝDVkst lcls ehBh 'kdZjk gSA
10- ikni dksf'kdkvksa esa ik;h tkus okyh dksf'kdk fHkfRr eq[; :i ls lsY;qykst dh cuh gksrh gSA

1.
1- lsY;qyksज fdldk cuk gksrk gS&
¼v½ Xywdkst ¼c½ lqØkst
¼l½ ÝDVkst ¼n½ jkbckst
2- xUus ds jl ds ty&vi?kVu ls izkIr gksrk gS &
¼v½ Xywdkst$xSysDVkst ¼c½ Xywdkst$ÝDVkst
¼l½ Xywdkst$lwØkst ¼n½ Xywdkst$ekYVkst
3.- okbjl D;k gksrs gSa&
¼v½ izksVhu ¼c½ U;wfDy;ksizksVhu
¼l½ U;wfDyd vEy ¼n½ mijksDr esa ls dksbZ ugha
4- okVlu ,oa fØd ds vuqlkj DNA ds ,d pØ esa fdrus U;wfDy;ksVkbM~l ik;s tkrs gSa &
¼v½ 10 ¼c½ 11
¼l½ 12 ¼n½ 13
5- DNA ds nks LVªSaM~l ds chp dh nwjh gksrh gS&

¼v½ 20Å ¼c½ 11Å
¼l½ 12Å ¼n½ 13Å

30

Page 28

6- fuEu esa ls fdl vehuksa vEy esa lYQj ik;k tkrk gS&
¼v½ flfLVu ¼c½ oSfyu
¼l½ fyoflu ¼n½ ykbflu
7- ATP dh [kkst fdlus dh &
¼v½ dkyZ yksekWu ¼c½ fyieSu
¼l½ ckWeSu ¼n½ CySdeSu
8- U;wfDy;ksVkbM~l cus gksrs gSa &
¼v½ I;wjhu] 'kdZjk rFkk QkWLQsV ¼c½ I;wjhu] ikbjhfeMhu rFkk QkWLQsV
¼l½ ikbjhfeMhu] 'kdZjk rFkk QkWLQsV ¼n½I;wjhu] ikbjhfeMhu] 'kdZjk rFkk QkWLQsV

2
1- LVkpZ] ------------------------------ dk cgqyd gSA
2- dkcksZgkbMªsV eas dkcZu] gkbMªkstu rFkk ------------------------- ik;k tkrk gS A
3- ------------------------- thfor dksf'kdk esa lokZf/kd ek=k esa ik;k tkus okyk ?kVd gSA
4- ty] --------------------------- rFkk ---------------------------- dk cuk gksrk gSA
5- Xywdkst esa ------------------------------- dkcZu ijek.kq ik;s tkrs gSaA
6- izksVhu dh og lajpuk ftleas ,d ls vf/kd ikWyhisIVkbM ik;s tkrs gSa] ----------------------
izksVhu dgykrs gSaA
7- ,YC;wfeUl ,d -------------------------------- izksVhu gSA
8- U;wfDy;ksVkbM~l] QkWLQksfjd vEy] isUVkst 'kdZjk rFkk -------------------- ds cus gksrs gSaA
9- DNA rFkk RNA ---------------------------- ds mnkgj.k gSaA

3

(i) izksVhu (a) olh; vEy
(ii) dkcksZgkbMªsV (b) U;wfDy;ksVkbM~l
(iii) olk (c) vehuks vEy
(iv) RNA (d) Xywdkst
(v) vk;ksMhu (e) dkcksZgkbMªsV
(vi) ykSg rRo (f) ?ks?a kk
(vii) Lof}xq.ku (g) ,uhfe;k
(viii) ekYVkst (h) DNA

4.

1- izksVhu v.kw esa vehuksa vEy v.kqvksa ds chp ik;k tkus okyk ca/k क्या कहिाता हैA
2- DNA rFkk RNA fdlds cgqyd gksrs gSa\
3- ,d okbjl dk uke crk;sa ftleas RNA vkuqoaf'kd inkFkZ gksrk gSA

31

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4- nw/k esa ik;s tksus okys dkcksZgkbMªVs dks D;k dgrs gSa\
5- ?ksa?kk jksx fdl rRo dh deh ls gksrk gS\
6- U;wfDyd vEy (DNA) esa fdrus izdkj ds U;wfDy;ksVkbM~l ik;s tkrs gSa\
7- ykSg rRo dh deh ls dkSu&lk jksx gksrk gS\
8- izd`fr eas ik;h tkus okyh lcls ehBh 'kdZjk dk uke fyf[k,A

- 2 अंक

1- olk ¼?kh½ vkSj rsy esa 2 vUrj fyf[k,A
2- eksukslSdsjkbM~l ls vki D;k le>rs gSa\
3- lar`Ir vkSj vlar`Ir olh; vEyksa esa 2 vUrj fyf[k,A
4- isIVkbM cU/k fdls dgrs gSa\
5- U;wfDy;ksVkbM D;k gS\ buds nks mnkgj.k fyf[k,A
6- vfuok;Z ,oa xSj&vfuok;Z vehukas vEyksa esa 2 vUrj fyf[k,A
7- dkcksZgkbMªsV dk lkekU; lw= fyf[k,A
8- vehuksa vEy dk lajpukRed lw= fyf[k,A
9- vk;ksMhu dh deh ls gksus okys jksx dk uke fyf[k,A
10- vk;ju dh deh ls gksus okys jksx dk uke fyf[k,A
11- lHkh thoksa eas oa'kkxfr inkFkZ dkSu&ls gksrs gSa\
12- fdUgha nks ikWyhlSdsjkbM~l ds uke fyf[k, tks fd dksf'kdk esa j{kd vkoj.k cukrs gSaA
13- dsUnzdh; vEy D;k gS\
14- ml cU/k dk uke crkb, ftlds }kjk vehuksa vEy tqM+dj izksVhu dk fuekZ.k djrk
gSA
15- dkbfVu D;k gS\

- 3 अंक
1. thoksa esa ty ds तीि izeq[k dk;Z fyf[k,A
2. fyfiM~l ds dk;Z ,oa egRo dk o.kZu dhft,A
3. U;wfDy;ksVkbM~l D;k gS\ budh lajpukRed bdkb;ksa ds uke fyf[k,A
4. U;wfDy;kslkbM ,oa U;fDy;ksVkbM~l esa vUrj Li"V dhft,A
5. izksVhUl ds egRo ,oa mi;ksfxrk dk o.kZu dhft,A
6. DNA U;wfDy;ksVkbM~l ds fuekZ.k की प्रनिया का वणणि कीनजये |

7. okWVlu ,oa fØd }kjk izLrqr DNA dk नित्रात्मक ekWMy cukb,A
8. izksVhu ds तीि izeq[k dk;Z fyf[k,A
9. DNA ,oa RNA esa तीि vUrj fyf[k,A

32

Page 30

10. U;wfDyd vEyksa ds dk;Z dh foospuk dhft,A
11. fyfiM~l dk oxhZdj.k mnkgj.k lfgr nhft,A
12. U;wfDy;ksVkbM~l ds dk;ksZa dk o.kZu dhft,A
13. dkcksZgkbMªsV ds izdkj ,oa muds dk;ksZa dk o.kZu dhft,A
14. izksVhu ds tSfod egRo dk o.kZu dhft,A
15. vehuksa vEyksa dh lajpuk] izdkj ,oa dk;kZsa dk mYys[k dhft,A
16. lajpuk ds vk/kkj ij fofHkUu izdkj ds izksVhUl dk o.kZu dhft,A
17. dksf'kdk ds o`gn~ v.kq ls vkidk D;k rkRi;Z gS\ egRoiw.kZ dksf'kdh; o`g~n v.kqvksa dk uke
crkb;s ,oa muds izeq[k dk;Z dks crkb,A
18. DNA dh izeq[k lajpuk dks foLrkj ls le>kb;sA
19. dksf'kdk esa fdrus izdkj ds U;wfYd vEy ik;s tkrs gSa\
20. LVkpZ ,oa dkbfVu dh tSfod lajpuk ,oa egRo dk o.kZu dhft,A

---------------------------------------------------------------------------00---------------------------------------------------------------------------------------------------

33

Page 31

v/;k;&10
dksf’kdk pØ o dksf’kdk foHkktu

➢ ककसी कोशशका के गुणसूत्रों एवं कोशशका द्रव के ववभाजन से दो या चार कोशशकाओं के बनने की
कक्रया कोशशका ववभाजन कहलाती है |
➢ कोशशका ववभाजन तीन प्रकार का होता है असत्र
ू ी कोशशका ववभाजन, समसत्र
ू ी कोशशका ववभाजन,
अधगसूत्री कोशशका ववभाजन
➢ कोशशका ववभाजन प्रमख
ु रूप से 2 अवस्थाओं में होता है केंद्रक ववभाजन व कोशशका द्रहय
ववभाजन
➢ समसूत्री कोशशका ववभाजन में एक कोशशका से दो संतनत कोशशकाएं बनती हैं |
➢ अधगसत्र
ू ी कोशशका ववभाजन में एक कोशशका से चार संतनत कोशशकाएं बनती हैं |
➢ अधगसूत्री कोशशका ववभाजन में गुणसूत्र ववननमय होता है|

iz-1- lgh fodYi pqudj fyf[k,%&

1- xq.klw= dk loZJs"B v/;;u fdl voLFkk eas fd;k tk ldrk gSa&
¼d½ iwokZoLFkk eas ¼[k½ Ik'pkoLFkk eas
¼x½ e/;koLFkk eas ¼?k½ अन्तराO;kLFkk eas
2- dsUnzd foHkktu dks dgrs gS&
¼d½ lkbVksdkbZusfll ¼[k½ dsfj;ksdkbusfll
¼x½ vUतराoLFkk ¼?k½ dsfj;ksQls
3- lelw=h foHkktu esa lsUVªsfe;j dk foHkktu gksrk gS&
¼d½ iwokZoLFkk eas ¼[k½ मध्याoLFkk eas
¼x½ Ik'pkoLFkk eas ¼?k½ vaR;koLFkk eas
4- dksf'kdk pdz dk lgh dze gS&
¼d½ S-G1- G-M1 ¼[k½ S-M – G1-G2
¼x½ G1-S- G2-M ¼?k½ M1-G- G2-S
5- og voLFkk ftlesa v)Zxq.klw= /kzqoksa ij pys tkrs gS dgykrh gSa&
¼d½ iwokZoLFkk ¼[k½ e/;koLFkk
¼x½ Ik'pkoLFkk ¼?k½ vaR;koLFkk
6- dksf'kdk foHkktu ds le; izksVhu rFkk RNA dk la'ys"k.k fdl voLFkk esa gksrk gS&
¼d½ G1 izkoLFkk ¼[k½ S izkoLFkk
¼x½ G2 izkoLFkk ¼?k½ buesa ls dksbZ ugha
7- *dzkWflax vksoj* fdl voLFkk esa gksrk gS&

¼d½ ysIVksVhu ¼[k½ tkbxksVhu
¼x½ iSdsVhu ¼?k½ fMIyksVhu

34

Page 32

8- dksf'kdk pdz dh G &2 voLFkk esa xq.klw= esa DNA gsfyDl dh la[;k gksrh gS&
¼d½ ,d ¼[k½ nks
¼x½ pkj ¼?k½ vkB
9- 'kjhj dh fdl dksf'kdk esa foHkktu ugha gksrk&
¼d½ tuu dksf'kdk ¼[k½ ;d`r dksf'kdk
¼x½ raf=dk dksf'kdk ¼?k½ eq[k dksf'kdk
iz-2- fjDr LFkkuksa dh iwfrZ dhft,&
(i) v)Zlw=h foHkktu ds QyLo:i ------------------------------dk fuekZ.k gksrk gSaA
(ii) v)Zlw=h iwokZoLFkku dh vfUre voLFkk ---------------------dgykrh
(iii) xq.klw= ;qXeu ¼flusfll) v)Zlw=h foHkktu ds ------------------------------ pj.k esa gksrk gS |
(iv) ------------------------------ dksf'kdk foHkktu ds nkSjku Øksekslkse esa lgkfur gksते gSaA
(v) Lkelw=h dksf'kdk foHkktu esa vuqokaf'kd :Ik ls -------------------------- dksf'kdkvksa dk fuekZ.k gksrk gSaA
(vi) v)Zlw=h foHkktu ds nkSjku--------------------------------vxqf.kr dksf'kdkvksa dk fuekZ.k gksrk gSaA
(vii) dksf'kdk foHkktu ds nkSjku वह vax tks nks Hkkxksa esa foHkkftr gksrk gS वह है------!
(viii) ----------------------------- dksf'kdk pØ dh सबसे yEch voLFkk gksrh gSA
(ix) Lru/kkjh dksf'kdkvksa dh vkSlr dksf'kdk pØ vof/k ----------------------- gksrh gS !
(x) v)Zlw=h foHkktu n~okjk mRiUu vxqf.kr voLFkk ---------------- n~okjk iqu% f)xqf.kr dh tkrh gSa !

iz-3- lgh tksfM+;k feykdj dhft,&
**v** **c**
i. DNA dk fuekZ.k ¼v½ iSdVs hu
ii. thu fofue; ¼c½ S- voLFkk
iii. VsVªkM fuekZ.k ¼l½ fMIyksVhu
iv. dk,TesVk fuekZ.k ¼n½ tkbxksVhu

iz-4- ,d okD; eas mRrj fyf[k,&
i. tuu dksf’kdkvksa esa fdl izdkj dk foHkktu gksrk gSA
ii. nSfgd dksf’kdkvksa esa fdl izdkj foHkktu gksrk gSA
iii. varjkoLFkk dh lcls yach voLFkk dkSu lh gSA
iv. varjkoLFkk dh fdl voLFkk dks 'kkar voLFkk dgk tkrk gSA

iz-5- vfr y?kqmRrjh; iz’u 2 अंक

i. dksf’kdk pØ dk vFkZ Li"V dhft,A
ii. dksf’kdk pØ dh G0 voLFkk dks iz’kkUr voLFkk D;ksa dgk tkrk gSA
iii. ;qXeiV~V dks ककसे कहते हैA

iv. LFkwyiV~V dks Li"V dhft,A
v. thonzO; foHkktu dks Li"V dhft,A
vi. dsUnzd foHkktu dks Li"V dhft,A

35

Page 33

iz-6- y?kqmRrjh; iz’u 3 अंक

1. lelw=h o v}Zlw=h dksf’kdk foHkktu esa dksbZ rhu varj fyf[k,A
2. thu fofue; dh fØ;k dks Li"V dhft,A
3. lelw=h dksf’kdk foHkktu dk egRo Li"V dhft,A
4. v)Zlw=h dksf’kdk foHkktu dk egRo Li"V dhf,tA
5. dksf'kdk foHkktu eas rdqZ rUrq fuekZ.k fdl izdkj gksrk gS+ ?
6. dksf'kdk foHkktu dk fu.kZ; fdl voLFkk eas fy;k tkrk gSa?
7. dksf'kdk foHkktu esa lsUVªkfs e;j fdl izdkj lgk;d gksrh gS?
8. dksf'kdk pØ dh pkj voLFkk;sa dkSu lh gS?
9. letkr xq.klw= fdls dgrs gS?
10.tho nzO; foHkktu rFkk dszUnzd foHkktu esa D;k varj gS !
11.dksf'kdk pØ dk fp=kRed fu:i.k dhft, !
12.izkf.k;ksa ds thou pØ esa lelw=h foHkktu dk D;k egRo gS ?
13.lw=h o v)Zlw=h foHkktu esa rhu izeq[k varjksa dks lwphc) djsAa
14.ikS/kksa ds thou pØ esa v)Zlw=h foHkktu dk D;k egRo gSa ?
15.lelw=h foHkktu rFkk v)Zlw=h dksf'kdk foHkktu dh iwokZoLFkk dh rqyuk dhft;sA
16.ikni dksf'kdkvksa esa dksf'kdk foHkktu fdl izdkj izkf.k;ksa esa gksus okys dksf’kdh; foHkktu ls
fHkUu gSaA
17.lelw=h foHkktu rFkk v)Zlw=h foHkktu dh iwokZoLFkk dh rqyuk dhft;sA
18.dksf'kdk pØ dk fp=kRed n`'; cukbZ;s !
19.lelw=h foHkktu esa v)Zxq.klw= fdl voLFkk eas i`Fkd gksrs gSa?

----------------------------------------------------------------------------00---------------------------------------------------------------------------------------

36

Page 34

v/;k;&11 पोधों में परिवहन व v/;k;&12 िननज पोषर् को पाठ्यक्रम से
हटाया गया हैं |

v/;k;&13
izdk’k la’ys"k.k

➢ प्रकाश संश्लेषण की कक्रया में हरे पौधे सूयग से प्राप्त प्रकाश ऊजाग को रासायननक ऊजाग में
पररवनतगत करते हैं |
➢ प्रकाश संश्लेषण की कक्रया स्थल क्लोरोप्लास्ट हैं|
➢ प्रकाश संश्लेषण वणगक तीन प्रकार के होते हैं क्लोरोकफल, केरोटीनोइड, फाईकोत्रबशलंस
➢ प्रकाश संश्लेषण की कक्रया दो चरणों में पूरी होती है प्रकाश अशभकक्रया एवं अप्रकाश अशभकक्रया
➢ प्रकाश संश्लेषण की प्रकाश अशभकक्रया तीन रूपों में पाई जाती है - C3 चक्र C4 चक्र व केम चक्र
➢ ब्लैकमैंन प्रकाश संश्लेषण की कक्रया के संबंध में सीमाकारक शसद्धांत ट्रदया था|

iz-1- lgh fodYi pqudj fyf[k,%&
i. fdl oSKkfud us vkWDlhtu dh [kkst dh&
¼v½ izhLVys us ¼c½ twfy;l lsDl ¼l½ foyLVkWVj us ¼n½ oksu lSpl us
ii. ikS/kksa dh ifRr;ksa esa mifLFkr izdk’k la’ys"kh o.kZd gS&
¼v½ DyksjksfQy A o B ¼c½ tsUFkksfQy ¼l½ dsjsVhuksbM ¼n½ mijksDr lHkh
iii. dSfYou pØ dk izFke mRikn gS&
¼v½ 3&QkWLQksfXyljhd vEy ¼c½ vkWDtsyks ,lhfVd vEy
¼l½ Vªk;kst QkWLQsV ¼n½ QkLdksbuksy ikb:osV
iv. fuEufyf[kr esa ls dkSu lk pj.k dSfYou pØ esa 'kkfey gS&
¼v½ dkcksZfDlyhdj.k ¼c½ vip;u ¼l½ fjtsujs’ku ¼n½ mijksDr lHkh

iz-2- fjDr LFkkuksa dh iwfrZ dhft,&
i. C3 pØ dks &&&&&&&&ds uke ls Hkh tkuk tkrk gSA
ii. ØkWt jpuk&&&&&&&&&&ikS/kksa esa ikbZ tkrh gSA
iii. fo’o esa lcls vf/kd ek=k esa ik;k tk;k tkus okyk ,atkbe&&&&&gSA
iv. lhekdkjd fl}kar oSKkfud&&&&&&&&us izLrqr fd;kA

iz-3- lgh tksfM+;k feykdj dhft,&
**v** **c**
i. PS-I ¼v½ P680
ii. PS-II ¼c½ P700
iii. PEP ¼l½ Mg

iv. DyksjksfQy ¼n½ Co2 xzg.kdrkZ

37

Page 35

iz-4- ,d okD; eas mRrj fyf[k,&
i. izdk’k la’ys"k.k dks izHkkfor djus okys dkjdksa ds uke fyf[k,A
ii. izdk’kh; 'olu dh fØ;k fdu dksf’kdk vaxks esa laiUu gksrh gS?
iii. 3-PGA dk iw.kZ foLrkj fyf[k,A
iv. izdk’k la’ys"k.k dh fØ;k dgka laiUUk gksrh gS\

iz-5- vfr y?kqmRrjh; iz’u 2 अंक

1- izdk’k la’ys"k.k dks ifjHkkf"kr dhft, A
2- jlksijklj.kh; ifjdYiuk fyf[k, A
3- CySdesu dk lhekdkjd fl}kr fyf[k,A
4- ØkWt ,ukVkseh dks Li"V dhft, A

iz-6- y?kqmRrjh; iz’u 3 अंक

i. fdUgh rhu izdk’k la’ys"kh o.kZdksa ds uke fyf[k,A
ii. izdk’k la’ys"k.k dh Z- Ldhe dk Li"V dhft,A
iii. izdk’kh; 'olu dh fØ;k dks Li"V dhft,A
iv. izdk’k la’ys"k.k ls lacaf/kr izhLVys dk iz;ksx fyf[k,A

iz-7- अनतnh?kZ mRrjh; iz’u (ववश्लेषणात्मक) 5 अंक

i. C3 o C4 ikS/kksa esa dksbZ ikap varj fyf[k,A
ii. izdk’k la’ys"k.k dh izdk’kh; o vizdk’kh; vfHkfØ;k esa dksbZ 5 varj fyf[k,A
iii. pØh; o vpØh; QkWLQksjkbys’ku esa dksbZ ikap varj fyf[k,A
iv. C3 pdz dh fofHkUu voLFkkvksa dk o.kZu dhft, A
v. C4 pdz dh fofHkUu voLFkkvksa dk o.kZu dhft, A
vi. izdk’k la’ys"k.k dh fdz;k dks izHkkfor djus okys dkjdksa dk o.kZu dhft, A
vii. izdk’k la’ys"k.k dh Z- Ldhe fdz;k dk xzkQh; fu:i.k dhft, A

-------------------------------------------------------------------------------------00-------------------------------------------------------------------------------------------

38

Page 36

v/;k;&14
ikni esa 'olu

➢ श्वसन एक ऐसी प्रकक्रया है ग्जसमें कोशशका में उपग्स्थत जट्रटल काबगननक पदाथग ऑक्सीकरण की कक्रया
द्वारा सरल पदाथों में टूट जाता है |
➢ श्वसन दो प्रकार का होता है ऑक्सी श्वसन अनोक्सी श्वसन
➢ मुक्त हुई काबगन डाइ ऑक्साइड तथा ली गई ऑक्सीजन के अनुपात को श्वसन गुणांक कहते हैं|
➢ नलाइकोलाइशसस की कक्रया दोनों प्रकार के श्वसन में होती है |
➢ fd.ou एक प्रकार का अनोक्सी श्वसन है|

iz-1- lgh fodYi pqudj fyf[k,%&
i. Xykbdksykbfll dh fØ;k dks fdl vU; uke ls Hkh tkrk gS&
¼v½ bacM
s su] es;j, ikjkukFk ikFkos ¼c½ EMP ikFk os ¼l½ lhfVªd vEy ¼n½ d o [k nksuksa

ii. XykbdksYkkbfll dh izfØ;k esa Xywdkst var esa fdlesa ifjofrZr gksrk gS&
¼v½ ik;:fod vEy esa ¼c½ vkWDtsfyd vEy esa
¼l½ vkWDtsyks&,lhfVd vEy ¼n½ lDlhuhd vEy

iii. ikb:fod vEy esa fdrus dkcZu ijek.kq gksrs gS&
¼v½ 3 ¼c½ 2 ¼l½ 4 ¼n½ 5

iv. Xykbdksykbfll dh izfØ;k esa ,d Xy~dkst ds v.kq ls fdrus ikb:fod vEy curs gS&
¼v½ 1 ¼c½ 2 ¼l½ 3 ¼n½ 4

iz-2- fjDr LFkkuksa dh iwfrZ dhft,&

i. Øsc pØ esa cuus okys lhfVªd vEy esa dkcZu ijek.kqvksa dh la[;k&&&&&gksrh gSA
ii. dkcksZgkbMªVs ds 'olu xq.kkad dk eku&&&&&&&gksrk gSA
iii. izksVhu ds 'olu xq.kkad dk eku&&&&&&&&gksrk gSA
iv. vkWDlh 'olu esa ,d Xywdkst ds v.kq ls &&&&&&&ATP ÅtkZ dh izkfIr gksrh gSA
v. dksf’kdk ds vanj dzsc pdz dh fdz;k ------------------ esa laiUu gksrh gS A
vi. dksf’kdk ds vanj Xykbdksykbfll dh fdz;k ----------- esa laiUu gksrh gS A
vii. DyksjksfQy dk izeq[k la|Vd rRo --------------------- gS A
viii. dzSt vkarfjdh -------------------- ikS/kksa esa ikbZ tkrh gS A
iz-3- ,d okD; eas mRrj fyf[k,&
i. Øsc pØ dks fdl vU; uke ls Hkh tkuk tkrk gS\

ii. dksf’kdk esa XYkkbdksykbfll dh fØ;k dgka laiau gksrh gS \
iii. dksf’kdk esa Øsc pØ dh fØ;k dgka laiau gksrh gS\
iv. olk ds 'olu xq.kkad dk eku fyf[k,A
v. dkcksZgkbM~V
s ds 'olu xq.kkad dk eku fyf[k,A

39

Page 37

vi. izksVhu ds 'olu xq.kkad dk eku fyf[k,A

iz-4- vfr y?kqmRrjh; iz’u 2 अंक
i. fd.ou dh fØ;k dks Li"V dhft,A
ii. 'olu xq.kkad vuqikr Li"V dhft,A
iii. vkWDlh 'olu dks Li"V dhft,A

iz-5- y?kqmRrjh; iz’u 3 अंक

i. Xykbdksykbfll dh fØ;k dks Li"V dhft,A
ii. fd.ou fØ;k ds rhu egRo fyf[k,A
iii. Øsc pØ dh fØ;k dk egRo fyf[k,A
iv. 'olu fdrus izdkj dk gksrk gS A

iz-6- अनतnh?kZ mRrjh; iz’u (ववश्लेषणात्मक) 5 अंक

i. Xykbdksykbfll o Øsc pØ esa dksbZ 5 varj fyf[k,A
ii. vkWDlh o vukWDlh 'olu esa dksbZ 5 varj fyf[k,A
iii. Øsc pØ dh fØ;k dk xzkQh; fu:i.k dhft,A
iv. fd.ou dh fØ;k dks Li"V djrs gq, blds egRo fyf[k, A
v. 'olu dh fdz;k dks izHkkfor djus okys dkjdksa dks fyf[k, A
vi. Xykbdksykbfll dh fØ;k dk xzkQh; fu:i.k dhft,A
vii. fd.ou o 'olu dh fdz;k esa dksbZ 5 varj fyf[k,A

--------------------------------------------------------------------------------------------------00----------------------------------------------------------------------------------

40

Page 38

v/;k;&15
ikni o`f)

➢ वद्
ृ धध जीवो का एक मुख्य लक्षण है |
➢ इकाई समय में हुई वद्
ृ धध को वद्
ृ धध दर कहते हैं|
➢ हामोन ववशेष प्रकार के पदाथग होते हैं जो वद्
ृ धध से संबधं धत होते हैं|
➢ प्राकृनतक रूप से पाए जाने वाले पादप हामोन हैं ऑग्क्जन, ग्जबरे शलन, साइटोककननन, एधथलीन
➢ एधथलीन एक प्राकृनतक गैस पादप हामोन है |
➢ प्रकाश काल का पुष्पन पर प्रभाव दीग्प्तकाशलका कहलाता है |
➢ तापमान का पुष्पन पर प्रभाव बसंती करण कहलाता है |
➢ फाइटोक्रोम एक जट्रटल प्रोटीन है |
➢ पुष्पन की कक्रया फ्लोररजन नामक हामोन के कारण होती है बीज अंकुरण के शलए उधचत ताप, वायु का
होना आवश्यक है |

iz-1- lgh fodYi pqudj fyf[k,%&
i. fuEufyf[kr esa ls dkSu lk o`f) dk pj.k gS&
¼v½ foHkkT;ksrd ¼c½ nh?khZdj.k ¼l½ ifjiDou ¼n½ lHkh
ii. o`f} oØ dk lkekU; vkdkj gksrk gSA
¼v½ js[kh; ¼c½ lh/kk ¼l½ VsM+k&esM+k ¼n½ flXekbM
iii. fdl ikni gkeksZu dks 2] 4]Mh ds uke ls tkuk tkrk gS
¼v½ vkWfDtu ¼c½ ftcjsfyu ¼l½ lkbVksdkbfuu ¼n½ ,fFkyhu
iv.ikS/kksa esa nhfIrdkfydk dk izHkko fdl Hkkx ij fn[kkbZ nsrk gS&
¼v½ iq"Ik ij ¼c½ ifr;ksa ij ¼l½ esjhLVse ij ¼n½ iq"Ik dfydk ij

iz-2- fjDr LFkkuksa dh iwfrZ dhft,&
i. ikni gkekZsu&&&&&&&&&&&dksf’kdk foHkktu esa lgk;rk djrk gSA
ii. IAA dk iwjk uke&&&&&&gSaA
iii. ikni gkeksZu vkWfDtu dh [kkst&&&&&&oSKkfud us dhA
iv. de rki dk iq"iu ij izHkko ------------------- dgykrk gS A
v. ------------------------- gkeksZu dk mi;ksx Qyksa dks idkus esa fd;k tkrk gS A

iz-3- ,d okD; eas mRrj fyf[k,&
i. xSlh; voLFkk eas ik, tkus okys gkekZsu dk uke fyf[k,A
ii. fdl gkekZsu dks ruko gkeksu Z ds uke ls Hkh tkuk tkrk gSA
iii. ikS/kksa esa iq"iu ij rki dk izHkko D;k dgykrk gS ?
iv. o`f) dk ekiu fdl ;a= dh lgk;rk ls fd;k tkrk gS ?

v. iq"iu ij rki dk izHkko D;k dgykrk gS ?

41

Page 39

iz-4- vfr y?kqmRrjh; iz’u& 2 अंक

i. foHksnu dks Li"V dhft,A
ii. o`f) dks ifjHkkf"kr dhft,A
iii. o`f) oØ dk fp= cukb,A
iv. IykfLVflVh D;k gS?
v. flXeksbM o`f) oØ dks Li"V dhft,A

iz-5- y?kqmRrjh; iz’u 3 अंक

i. vkWfDlu gkekZsu ds rhu dk;Z fyf[k,A
ii. ftcjsfyu gkeksZu ds rhu dk;Z fyf[k,A
iii. lkbVksdkbfuu gkeksZu ds rhu dk;Z fyf[k,A
iv. ,fClfld vEy ds rhu dk;Z fyf[k,A
v. ikni o`f) fu;=ad ls D;k vk’k; gS ?

iz-6- अनतnh?kZ mRrjh; iz’u 5 अंक

i. nhfIrdkfyrk dks ifjHkkf"kr djrs gq,, vYi iznhIrdkyh o nh?kZ iznhIrdkyh ikS/kks dks Li"V dhft,A
ii. clarhdj.k dh fØ;k dks Li"V djrs gq, bldk egRo fyf[k,A
iii. cht vadqj.k ls vki D;k le>rs gS ?
iv. cht izlqfIr ds dkj.kksa dks Li"V dhft, A
v. ikni o`f) ds fofHkUu pj.kksa dks Li"V dhft, A

-----------------------------------------------------------------00---------------------------------------------------------------------------------

42

Page 40

अध्याय -16 पाचन एविं अवशोषर् को पाठ्यक्रम से हटाया गया हैं |

अध्याय -17 श्वसन तथा गैसीय ववननमय

➢ श्वसि एक ऐसी निया है नजसमें भोजि के ऑक्सीकरण से ऊजाण प्राप्त होती है |
➢ मिुष्य में श्वसि तंत्र पाया जाता है जो िनसका का से प्रारं भ होकर से फेफडे तक बिा होता है |
➢ फेफडे मिुष्य में मुख्य श्वसि अंग होते हैं जो वक्ष गुहा में खथित होते हैं |

➢ श्वसि की निया श्वक्सोवास से प्रारं भ होती है |

➢ ऑक्सीजि का पररवहि मुख्य रूप से ऑखक्सनहमोग्लोनबि के रूप में होता है |
➢ काबणि डाइऑक्साइड का पररवहि मुख्य रूप से बाई काबोिेट के रूप में होता है |
➢ दमा, न्यूमोनिया, तपेनदक आनद मुख्य श्वसि रोग हैं |

प्रo1 सही ववकल्प चन
ु कि लिखिए ।
I. मनष्ु य में फेंफडे कंहााँ पाए जाते है -
(अ) उदर गह
ु ा मे (ब) मग्स्तष्क गह
ु ा में
(स) वक्ष गह
ु ा में (द) मख
ु गह
ु ा में
II. श्वसन संबंधी रोग नहीं है -
(अ) दमा (ब) वातस्फीनत
(स) श्वसनी शोथ (द) पीशलया
III. हीमोनलोववन का एक अणु ककतने O2 अणुओ का वहन करता है -
(अ) 2 (ब) 4 (स) 6 (द) 8
IV. हीमोनलोववन में कौन सा तत्व पाया जाता है -
(अ) मकगरी (ब) कॉपर (स) मैननीज (द) आयरन
V. त्रबच्छू के श्वसन अंग का नाम हैं -
(अ) धगर्लस (ब) िे ककया (स) पुस्त क्लोम (द) फेंफडे
VI. कौन सी संरचना भोजन को श्वास नली मे जाने से रोकती है -
(अ) दांत (ब) एपीनलोट्रटस (स) कंठ (द) जीभ
VII. मनुष्य में श्वसन ककसके द्वारा होता है -
(अ) फेंफडे (ब) पुस्त क्लोम (स) धगर्लस (द) त्वचा

VIII. हीमोनलोववन ककतनी पॉलीपेप्टाइड श्रंख्लओ का बना होता है -
(अ) 2 (ब) 3 (स) 4 (द) 5

43

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IX. कबोननक एनहाइड्रेज कंहााँ पाया जाता है -
(अ) WBCs मे (ब) RBCs मे
(स) रक्त पट्ट्रटकाओ में (द) उपरोक्त सभी में
X. ऑग्क्सजन – हीमोनलोववन वक्र होता है -
(अ) सीधा (ब) उर्लटा (स) शसनमाइड (द) उपरोक्त सभी में
XI. सामान्य शरीर कक्रयात्मक ग्स्थनतयो में प्रत्येक 100 शम०ली० आक्सीजननत रक्त ऑक्सीजन की
ककतनी मात्रा ऊतको तक पहुंचाता है -
(अ) 5 शम०ली० (ब) 10 शम०ली० (स) 15 शम०ली० (द) 20 शम०ली०

प्रo 2 रिक्त स्थानों की पनू तण कीजजये ।
I. फेफडॊ की संरचनात्मक एवं कक्रयात्मक ईकाई ---------------- है |
II. ------------ ध्वनन उत्पन्न करने में सहायक रचना है ।
III. मछशलयों में श्वसन ------------- के द्वारा होता है ।
IV. कंठ के ऊपर ढक्कननम
ु ा संरचना ------------ कहलाती है ।
V. --------- कक्रया में वायम
ु ंडलीय वायु को फेफडॊ में अंदर शलया जाता है ।
VI. फुफ्फसावरणीय द्रव ------------ णझग्र्ललयों के बीच में पाया जाता है ।
VII. बाईं काबोनेट के रूप में CO2 का पररवहन ---------- प्रनतशत होता है ।
VIII. कीटों का श्वसन अंग ----------- है ।
IX. केंचुओ का श्वसन अंग ----------- है ।
X. --------- कक्रया में फेफडॊ से वायु बाहर वायुमंडल में जाती है ।
XI. ---------- हीमोनलोववन तथा ऑग्क्सजन के संयोग से बना अस्थाई यौधगक है ।
XII. वायु का वह आयतन जो बलपूवक
ग नन:श्वसन के बाद फेंफडॊ में शेष रह जाता है --------
आयतन कहलाता है ।
XIII. नन:श्वसन के समय फेंफडॊ का दाव वायुमंडलीय दाव से ........... होता है ।
XIV. ---------- फेंफडॊ के चारों ऒर उपग्स्थत दोहरी णझग्र्ललमय संरचना है ।
XV. फुफ्फुस आयतन कम होने पर वायुदाव --------- है ।

प्रo 3 एक वाक्य में उत्ति लिखिए ।
I. एक स्वस्थ मनुष्य में प्रनतशमननट ककतनी बार श्वसन होता है ?

II. श्वसन गनतववधधयों में समग्म्लत वायु के आयतन का आकलन ककस यंत्र की सहायता से
ककया जाता है ?
III. श्वसन कक्रया का ननयंत्रण मग्स्तष्क के ककस भाग द्वारा ककया जाता है ?

44

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IV. ज्वारीय आयतन का मान ककतना होता है ?
V. फेंफडॊ के चारों ऒर कौन सा णझग्र्ललमय आवरण पाया जाता है ?
VI. वायु कुवपकाओ में ऑक्सीजन तथा काबगन डाई ऑक्साइड का ववननमय ककस कक्रया द्वारा
होता है ?
VII. CO2 की घल
ु ंशीलता O2 की तल
ु ना में ककतने गण
ु ा अधधक होती है ?
VIII. रुधधर द्वारा CO2 का पररवहन मख्
ु यत: ककस रूप में होता है ?
IX. स्पाइरोमीटर का क्या कायग है ?
X. गैसीय ववननमय के शलए प्राथशमक स्थल का नाम शलणखए।
XI. नन:श्वसन के समय कौन सी पेशशयों में संकुचन होता है ।
XII. कंठ का कोई एक कायग शलणखए ।

प्रo 4 सही जोडी शमलाईये ।
कालम – A कालम – B
I. ज्वारीय आयतन - (अ) 4500 शम०ली०
II. जैव क्षमता - (ब) कंठ
III. अवशशष्ट आयतन - (स) दमा
IV. हीमोनलोववन - (द) 1200 शम०ली०
V. श्वसन रोग - (ड) O2 पररवहन
VI. ध्वनन उत्पादन - (फ) 500 शम०ली०

सही जोडी शमलाईये ।
कालम – A कालम – B
I. चपटे कृशम - (अ) फेफडे
II. पक्षी - (ब) क्लोम
III. मछली - (स) पुस्त क्लोम
IV. कीट - (द) आद्रग क्यूट्रटकल
V. त्रबच्छू - (ड) श्वसन नशलकाये
VI. केंचुआ - (फ) त्वचा

अनतिघुत्तिीय प्रश्न 2 अंक
1. ज्वारीय आयतन को पररभावषत कीग्जये |

2. जैव क्षमता (VC) तथा फेंफडॊ की कुल धाररता (EC) में अंतर शलणखए ।
3. अंत:श्वाशसत आरक्षक्षत आयतन (IRV) तथा नन:श्वाशसत आरक्षक्षत आयतन (ERV) में दो अंतर
शलणखए ।

45

Page 43

4. फुफ्फुसवरणीय द्रव के दो कायग शलणखए ।
5. नन:श्वाशसत क्षमता (IC) तथा नन:श्वसन क्षमता में अंतर शलणखए ।
6. अंत:श्वसन ककसे कह्ते है ?
7. जैव क्षमता से आप क्या समझते है ?
8. मानव में होने वाले श्वसन संबंधी दो रोगो के नाम शलणखए ।
9. फुफ्फुसावरण के दो कायग शलणखए ।
10. ववसरण णझर्लली के द्वारा ववसररत CO2 की मात्रा O2 की तल
ु ना मे अधधक होती है क्यो
11. आंशशक दाब ककसे कहते है ?
12. मानव श्वसन तंत्र के ववशभन्न भागो के नाम शलणखए ।
13. नन:श्वसन ककसे कहते है ?
14. कंठ तथा फेफडॊ का एक – एक कायग शलणखए ।
15. दमा रोग ककस कारण से होता हैं ।
दीघणउत्तिीय प्रश्न (ववश्लेषणात्मक) 4 अंक
1. PCO2 का ऑक्सीजन के पररवहन मे क्या प्रभाव पडता है ?
2. गैसो का ववसरण केवल कुवपकीय क्षेत्र मे होता है श्वसन तंत्र के ककसी अन्य भाग में क्यो
नही ?
3. पहाड पर चढने वाले हयग्क्त की श्वसन प्रकक्रया में क्या प्रभाव पडेगा ?
4. कीटों की श्वसन कक्रया ववधध कैसी होती है ?
5. मनुष्य का बांया फेफडा दांये फेफडे की तुलना में छोटा होता है क्यों ?
6. ऑक्सीजन पररवहन मे हीमोनलोववन की भूशमका को समझाइये |
7. ऑक्सीजन ववयोजन वक्र से आप क्या समझते है यह शसनमाइड क्यों होता है ?
8. वायु कुवपकायें गैसीय ववननमय के शलए उपयुक्त है क्यों ?
9. ज्वारीय आयतन क्या है एक स्वस्थ मनुष्य के शलए 1 घंटे के ज्वारीय आयतन की मात्रा
आकशलत करे |
10. अंत:श्वसन के समय होने वाले पररवतगनों को शलणखए |

अनत दीघणउत्तिीय प्रश्न (ववश्लेषणात्मक) 5 अंक
1. श्वसन कक्रया का ननयमन ककस प्रकार होता है समझाइये |
2. मानव श्वसन तंत्र का सधचत्र वणगन कीग्जए |
3. अंत:श्वसन एवं नन:श्वसन में पांच अंतर शलणखए|
4. मानव फेफडे की संरचना सधचत्र समझाइये |

5. ककन्ही चार श्वसन ववकारों का वणगन कीग्जए |
6. मानव शरीर में O2 पररवहन की प्रकक्रया शलणखए |
7. शरीर में CO2 का पररवहन ककस प्रकार होता है वणगन कीग्जए |

46

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8. श्वासन (श्वाच्छोवास) की कक्रयाववधध का सधचत्र वणगन कीग्जए |
9. फेफडो में होने वाले गैसीय ववननमय को सधचत्र शलणखए |
10. वायु कुवपका एवं शरीर ऊतको के मध्य रक्त द्वारा गैसीय पररवहन एवं ववननमय का

आरे खीय धचत्र बनाइये |

-------------------------------------------------------------------00-----------------------------------------------------------------------------

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अध्याय –18 शिीि द्रव तथा परिसिंचिर्

➢ हृदय की रििा का अध्ययि कानडण योिॉजी तिा रक्त का अध्ययि नहमेटोिॉजी के अंतगणत नकया जाता है |
➢ वैज्ञानिक नवनियम हावे को एिनजयोिॉजी का जिक कहा जाता है |
➢ मािव हृदय 4 कक्षाओं से नमिकर बिा होता है |
➢ मिुष्य में आरबीसी का जीविकाि 120 नदि का होता है |
➢ एक सामान्य मिुष्य में हीमोग्लोनबि की मात्रा 14 से 16 ग्राम तक होती है |

प्रo1 सही ववकल्प चुनकि लिखिए ।

i. jDr IykTek esa ikbZ tkus okyh eq[; izkVs hu gS&
¼v½ Qkbfczukstu ¼c½ Xyksfcu ¼l½ ,Ycqfeu ¼n½ lHkh
ii. ,d LoLFk euq"; esa izfr 100 ml jDr eas yxHkx fdrus xzke gheksXyksfcu ik;k tkrk gS &
¼v½ 12 ls 16 ¼c½ 20 ls 28 ¼l½ 0 ls 5 ¼n½ 29 ls 34
iii. yky jDr df.kdkvksa dks fdl vU; uke ls Hkh tkuk tkrk gS &
¼v½ bfjFkkzslkbV ¼c½ Y;wdkslkbV ¼l½ IysV~Vl ¼n½ U;wVªksकफर्लस
iv. 'osr jDr df.kdkvksa ds izdkj gS&
¼v½ fyaEQksslkbV ¼c½ eksukslkbV ¼l½ U;wVªksfQYl ¼n½ mijksDr lHkh

प्रo 2 रिक्त स्थानों की पूनतण कीजजये ।

1- Rh कारक से संबंधी रोग ............................. है|
2- मनुष्य के ह्रदय की उत्पवत्त .............................. नामक परत से होती है |
3- बाए आशलंद ननलय नछद्र के मध्य................कपाट पाया जाता है |
4- ह्रदय मे उतपन्न आवेग को ग्राफ पेपर पर ररकोडग करना............कहलाता है |
5- एक ह्रदय चक्र मे .................... सेकेण्ड का समय लगता है .|
6- शरीर की प्रनतरक्षा तंत्र के शलए कोशशका सहायक...................... है|
7- मछशलयो का हृदय ............................ कक्षों का बना होता है |
8- खल
ु ा संवहन तंत्र प्राणी मे पाया जाता...................... है |
9- रक्त का थक्का जमाने मे ........... नामक तत्व सहायक होता है.|
10- एक ह्रदय चक्र मे ननलय ................ . शमली रक्त पम्प करता है .|

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प्र .3 जोडडया शमलाइये |

I- ह्रदय धमनी रोग अ – स्टे थोस्कोप
II- ECG ब -ग्स्फनमोमेनोमेटर
III- A.V.Node स- पेस मेकर
IV- S.A Node द- ररसवग पेसमेकर
V- रक्त दाब इ- इलेक्िोकाडडगयोग्राम
VI- ह्रदय ध्वनन फ- एधथरोस्क्लेरोशसस

प्र. 4 एक वाक्यमें उत्तर दीग्जये |
1-थ्रोम्बोकाइनेज नामक एंजाइम का कायग शलणखए |
2- एक शमनट मे ह्रदय चक्र की संख्या ककतनी होती है ?
3-रक्त दाब को कोन सी धमनी मे मापा जाता है ?
4-लब ध्वनन कोन से कपाट के कारण उत्पन्न होती है ?
5-पेरीकाडडगयल द्रव का कायग शलणखए|
6-एक पररपक्व RBC मे केन्द्रक क्यों नहीं पाया जाता है ?
7-स्िोक या ववस्पंदन आयतन ककसे कहते है ?
8-ट्रहमोनलोत्रबन लाल क्यों होता है ?
9-ह्रदय से रक्त फेफडो मे क्यों जाता है ?
10-S.A. Node खराब हो जाने पर क्या होगा ?

अनतिघुत्तिीय प्रश्न - 2 अिंक
1- फाइत्रब्रनोजन का कायग शलणखए |
2-लसीका के दो कायग शलणखए |
3-पेस मेकर ककसे कहते है ? इसका कायग शलणखए |
4-मानव ह्रदय को पेशीय जननत ह्रदय क्यों कहते है ?
5-रक्त के दो कायग शलणखए |
6-ह्रदय सम्बन्धी दो रोगों के नाम शलणखए |
7-रक्त को संयोजी उतक क्यों मानते है ?

8-प्लाज्मा प्रोटीन का क्या महत्व है |
9-हीमो सील ककसे कहते है ?
10-दोहरे संवहन तंत्र के 2 लाभ शलणखए |

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11- O रक्त समूह सवग दाता क्यों होता है?
12- ECG का परू ा नाम शलणखए |
13-मेगा केरीयोसाईट का कायग शलणखए |
14- थ्रोम्बोसाईट ककसे कहते है ?
15-मनष्ु य के ह्रदय को पेशीय जननत क्यों कहते है ?

दीघणउत्तिीय प्रश्न- (ववश्लेषणात्मक) 4 अिंक

1. रक्त समूह का वणगन कीग्जये |
2. र्लयुकोसाईट के ववशभन्न प्रकारों को शलणखए |
3. रक्त को एक संयोजी उतक क्यों माना जाता है ?
4. खुले व बंद संवहन तंत्र मे अंतर शलणखए |
5. S.A. Node को पेस मेकर क्यों कहते है ?
6. ह्रदय ध्वनन ककसे कहते है ? इसके प्रकारों को समझाइये|
7. मनुष्य के ह्रदय का नामांककत धचत्र बनाइये |
8. रक्त व लसीका मे अंतर शलणखए |
9. रक्त दाब ककसे कहते है ? इसके प्रकार शलणखए |
10. यकृत ननवाट्रहका तंत्र का वणगन कीग्जये |

अनतदीघणउत्तिीय प्रश्न- (ववश्लेषणात्मक) 5 अिंक

1-मनुष्य के ह्रदय की संरचना को समझाइये |
2-मनुष्य के ह्रदय चक्र का वणगन कीग्जये|
3-E.C.G.को सधचत्र समझाइये|
4-द्वव सवहन तंत्र का वणगन कीग्जये|
5 S.A.node व A.V.node मे 5 अंतर शलणखए |
6रक्त के थक्का ज़माने की प्रकक्रया को समझाइये |
7.Rh कारक का वणगन कीग्जये|
8.मनष्ु य के ह्रदय मे रक्त पररवहन को रे खा धचत्र द्वारा समझाइये |
9.मनष्ु य के ह्रदय मे आवेग का संवहन ककस प्रकार होता है ?
10.Bरक्त समह
ू वाला वाला हयग्क्त ककस समह
ू वाले हयग्क्त को रक्त प्रदान कर सकता है और क्यों ?

-------------------------------------------------00------------------------------------------------------------

50

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v/;k;&19
mRlthZ mRikn o mudk fu"dklu

➢ शरीर में बने हाननकारक नाइिोजेनस पदाथों को बाहर ननकालने की कक्रया उत्सजगन कहलाती है |
➢ मनुष्य यूररयोटशलक जंतु है |
➢ ककडनी की संरचनात्मक एवं कक्रयात्मक इकाई नेफ्रॉन होती है |
➢ एक ककडनी में नेफ्रॉन की संख्या 10 से 12 लाख तक होती है |
➢ मूत्र ननमागण की कक्रया 3 चरणों में संपन्न होती है |

iz-1- lgh fodYi pqudj fyf[k,%&
i. mRlthZ inkFkZ ds vk/kkj ij tarqvksa dk izdkj gS&
¼v½ veksuksVsfyd ¼c½ ;wfj;ksVsfyd ¼l½ ;wfjsdksVsfyd ¼n½ mijksDr lHkh
ii. piVs d`fe;ksa esa mRltZu fdl jpuk }kjk gksrk gS&
¼v½ Tokyk dksf’kdk,a ¼c½ eSyihxh ufydk,a ¼l½ o`Dd ¼n½ xzhu xzfFk;ka
iii. ekuo o`Dd dh lajpukRed o fØ;kRed bdkbZ gksrh gS&
¼v½ Xykse:s yl ¼c½ ew=k’k; ¼l½ o`Ddk.kq ¼n½ gkbye
iv. fuEufyf[kr esa ls fdl mRlthZ inkFkZ ds fu"dklu esa vR;kf/kd ty dh vko’;drk gksrh gS&
¼v½ veksfu;k ¼c½ ;wfj;k ¼l½ ;wfjd vEy ¼n½ cstksbad vEy
iz-2- fjDr LFkkuksa dh iwfrZ dhft,&
i. jDr esa ;wfj;k dk ,df=r gksuk&&&&&&&dgykrk gSA
ii. ekuo dk mRlthZ inkFkZ&&&&&&&&gksrk gSA
iii. ekuo ew= dh PH oSY;q&&&&&&&&&&gksrh gSA
iv. eSyihxh ufydkvksa }kjk&&&&&&&&esa mRltZu gksrk gSA

iz-3- lgh tksfM+;k feykdj लिखिए&
**v** **c**
i. veksuksVsfyd ¼v½ xzhu xazfFk
ii. >haxk ¼c½ eNfy;ka
iii. lokZf/kd fo"kkDr mRlthZ inkFkZ ¼l½ veksfu;k
iv. fcfy:fcu ¼n½ fiRr jl

iz-4- ,d okD; eas mRrj fyf[k,&
i. ekuo o`Dd ls fudyus okys gkekZsu fyf[k,A
ii. izR;sd ekuo o`Dd esa yxHkx fdrus usQzkWu ik, tkrs gS\
iii. ew= es Xywdkst dh mifLFkfr fdl jksx dks n'kkZrh gS\

iv. ckseus lEiqV dgka ij mifLFkr gksrk gS\

51

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iz-5- vfr y?kqmRrjh; iz’u 2 अिंक

i. euq"; ds 2 mRlthZ vaxks ds uke fyf[k,A
ii. mRltZu dh fØ;k esa ;d`r fdl izdkj lgk;rk djrk gS\
iii. veksuksVsfyd tarqvks dks ifjHkkf"kr dhft,A
iv. ;wfj;ksVsfyd tarqvksa dks ifjHkkf"kr dhft,A
v. ;wfjdksVsfyd tarqvksa dks ifjHkkf"kr dhft,A

iz-6- nh?kZ mRrjh; iz’u (ववश्लेषणात्मक) 4 अिंक

i. usQzku dh lajpuk dk ukekafdr fp= cukb,A
ii. o`Dd dh lajpuk dk ukekafdr fp= cukb,A
iii. gheksMk;fyfll dh fØ;kfof/k fyf[k,A

iz-7- अनतnh?kZ mRrjh; iz’u (ववश्लेषणात्मक) 5 अिंक

i. ekuo o`Dd ds dksbZ ikap dk;Z fyf[k,A
ii. ew= fuekZ.k dh fØ;kfof/k dks blds fofHkUUk pj.kksa dh lgk;rk ls Li"V dhft,A
iii. o`Dd dh fØ;kfof/k dk fu;eu fdl izdkj gksrk gS\
iv. o`Dd ls lacaf/kr fdUgh rhu fodkjksa dk o.kZu dhft, A
v. mRltZu dh fdz;k esa ;d`r dh Hkwfedk Li"V dhft, A

--------------------------------------------------------------------------------------------------00--------------------------------------------------------------------------------------------------

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v/;k;&20
xeu ,oa lapyu

➢ स्नायु दो अग्स्थयों को आपस में जोडते हैं |
➢ कंडरा अग्स्थ को पेशी से जोडता है |
➢ मानव शरीर में सबसे सवागधधक लंबी पेशी सािोररयस होती है |
➢ मानव शरीर की सबसे छोटी पेशी कान में पाई जाने वाली स्टे पस होती है |
➢ मत्ृ यु के पश्चात पेशशयों का कठोर होना ररंगर मोटसग कहलाता है |
➢ पक्षक्षयों की अग्स्थयों में वायवीय अवकाश पाए जाते हैं|
1- lgh fodYi pqudj fyf[k,&
I. iSjkfef’k;e esa pyu fdl jpuk }kjk gksrk gS&
v½ dwVikn c½ i{ekHk l½ Li’kZd n½ ikn

II. ekuo 'kqØk.kqvksa esa xfr fdl jpuk }kjk gksrh gS&
v½ d’kkfHkdk c½ dwVikn l½ Li’kZd n½ i{ekHk

III. fuEufyf[kr esa ls dkSu&lh is’kh dadkyh; is’kh dgykती gS&
v½ jsf[kr is’kh c½ vjsf[kr is’kh l½ ân; is’kh n½ mijksDr lHkh

IV. is’kh; ladqpu dh lajpukRed o fØ;kRed bdkbZ gksrh gS&
v½ lkjdkseh;j c½ U;wVkWu l½ usÝku n½ ,fYo;ksykbZ

2- fjDr LFkkuksa dh iwfrZ dj fyf[k,&
I. euq"; eas dikyh; vfLFk;ksa dh la[;k---------------gksrh gSA
II. euq"; esa ------------------- tksMh+ ilfy;ka ikbZ tkrh gSaA
III. euq"; esa dqy ------------------- vfLFk;k¡ ikbZ tkrh gSaA
IV. d.Mjk is’kh dks ------------------ ls tksMrh gS A

3- lgh tksM+h लमिाकि fyf[k,&

v c
1. ekuo 'kjhj dh yach vfLFk v½ ,Vyl
2. d'ks:d n.M dh izFke c½ Qhej

vfLFk
3. ,flVscqye xqgk n½ vlaes[kyk
4. XyhukWbM xqgk m½ Jksf.kes[kyk

53

Page 51

4- ,d okD; esa mÙkj fyf[k,&
I. danqd [kfYydk laf/k dgka ikbZ tkrh gS\
II. ekuo d.kZ esa ikbZ tkus okyh vfLFk;ksa ds uke fyf[k,A
III. jsfM;l vfLFk dgka ikbZ tkrh gS\
IV. isf’k;ksa esa ikbZ tkus okyh izkVs hu dk uke fyf[k,A

vfr y?kqmÙkjh; iz’u- 2 अिंक

I. laf/k fdls dgrs gSa \
II. vehck, iSjkfef’k;e esa pyu vax dk uke fyf[k,A
III. vjsf[kr is’kh dk ukekafdr fp= cukb,A
IV. jsf[kr is’kh dks dadkyh; is’kh D;ksa dgk tkrk gS\

nh/kZ mÙkjh; iz’u (ववश्लेषणात्मक) 4 अिंक
I. vxzikn o i'p ikn dh vfLFk;ksa dk o.kZu dhft,A
II. vales[kyk o Jks.kh es[kyk dh fLFkfr crkrs gq, bldh vfLFk;ksa dk mYys[k dhft,A
III. ,fDVन o ek;kslhu izkVs hu dgka ikbZ tkrh gS\ bldh fØ;kfof/k fyf[k,A
IV. ân; is’kh o jsf[kr is’kh dk ukekafdr fp= cukb,A

vfr nh/kZ mÙkjh; iz’u - (ववश्लेषणात्मक) 5 अिंक
I. is’kh; ladqpu dh fØ;kfof/k fyf[k,A
II. laf/k fdls dgrs gSa] blds izR;sd izdkjksa dks fyf[k,A
III. dadkyh; ra= ds dksbZ 5 fodkj fyf[k,A
IV. lkbuksfc;y xqgk dh fLFkfr crkrs gq,] lkbuksfo;y nzo ds rhu dk;Z fyf[k,A
V. ekuo [kksiMh dh vfLFk;ksa dk o.kZu dhft, A
VI. euq"; ds vxz ikn dh vfLFk;ksa dk o.kZu dhft, A
VII. euq"; ds i’p ikn dh vfLFk;ksa dk o.kZu dhft, A
VIII. euq"; ds d’ks:d naM dh vfLFk;ksa dk o.kZu dhft, A

&&00&&

54

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v/;k;&21
raf=dh; fu;a=.k o leUo

स्मरणीय नबंदु:-
1. ‘‘वह तंत्र जो सोििे, समझिे, याद रििे के साि शरीर के नवनभन्न अंगों के कायों में समन्वय तिा संतुिि
थिानपत करके शरीर पर नियंत्रण रिता है तंनत्रका तंत्र कहिाता है ‘‘
2. तंनत्रका कोनशका या न्यूरॉि, तंनत्रका तंत्र की मुख्य संरििात्मक व नियात्मक इकाई होती है ।
3. तंनत्रका तंत्र का नवकास भूरणीय
ू् एक्टोडमण से होता है ।
4. मािव का तंनत्रका तंत्र तीि भागों में नवभानजत होता है (अ) केंद्रीय तंनत्रका तंत्र (ब) पररधीय तंनत्रका तंत्र
(स) स्वायत्त तंनत्रका तंत्र।
5. केंद्रीय तंनत्रका तंत्र में मखिष्क तिा मेरुरज्जु सखिनित है।
6. पररधीय तंनत्रका तंत्र में दो प्रकार की तंनत्रका होती है (क) संवेदी या अनभवाही (ि) िािक या प्रेरक या
अपवाही
7. संवेदी या अनभवाही तंनत्रकायें उद्दीपिों (सूििाओं) को अंगों (ऊतकों) से केंद्रीय तंनत्रका तंत्र तक
पहंिाती है।
8. िािक (प्रेरक) तंनत्रकायें है नियामक उद्दीपिों (आदे शों) को केंद्रीय तंनत्रका तंत्र से अंगों (ऊतकों) तक
पहंिती है
9. मखिक से निकििे वािी तंनत्रकायें , कपाि तंनत्रकायें या िेनियि िवणस कहिाती है। मािव में इिकी
संख्या 12 जोडी होती है।
10. मेरुरज्जु से निकििे वािी तंनत्रकायें मेरुरज्जु तंनत्रकायें या स्पाइिि िवणस कहिाती है। ििधाररयों में 31
जोडी स्पाइिि िवणस पायी जाती है।
11. मिुष्य के मखिष्क में 30000 नमनियि तंनत्रका कोनशकायें पाई जाती है (एक नमनियि 10 िाि के
बराबर होती है)
12. शरीर द्वारा उपयोग की गई संपूणण दो का 02 का 20 प्रनतषत भाग मखिष्क द्वारा प्रयोग नकया जाता है ।
13. िैंगिी 1921 के अिुसार स्वायत्त तंनत्रका तंत्र दो भागों का बिा होता है। (अ) अिुकिी तंनत्रका तंत्र (ि)
परािुकम्पी तंनत्रका तंत्र।
14. अिुकंपी तंनत्रका तंत्र हृदय गनत को बढ़ाता है जबनक परािुकम्पी तंनत्रका तंत्र हृदय गनत को कम करता
है।

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15. मािव का तंनत्रका तंत्र

केन्द्रीय तंनत्रका तंत्र पररधीय तंनत्रका तंत्र स्वायप्त तंनत्रका तंत्र
(1) अिुकम्पी तंनत्रका तंत्र

मखिष्क मेरूरज्जु (2) परािुकम्पी तंनत्रका
तंत्र
कपाि तंनत्रकायें स्पाइिि तंनत्रकायें
(12 जोडी) (31 जोडी)

अग्रमखिष्क (िार भाग) मध्य मखिष्क (भाग) पश्ि मखिष्क (तीि भाग)
(1) प्रमखिष्क (1) प्रमखिष्क तन्तु (1) अिुमखिष्क या
सेररबेिम
(2) हाइपोिैिेमस (2) कापोरा क्वाडर ीजेमाइिा (2) पॉन्स
(3) घ्राणनपण्ड (3) मेंडुिा ऑब्ांगोटा
(4) डायि सेफेिॉि

16. दो तंनत्रकाओं के संपकण थिि को नसिेप्स कहते हैं। एक न्यूरॉि से दू सरे न्यूरॉि तक आवेगों का संि रण
नसिेखप्सस द्वारा होता है ।
17. हमारे तंनत्रका तंत्र में नवदू् युतीय नसिेखप्सस बहत कम होते हैं।
18. मािव मखिक का कुि भार िगभग 1400 ग्राम होता है ।
19. हाइपोिेिेमस भाग भूि, प्यास, सुि, दु ि, ताप तिा भावात्मक नियाओं का ज्ञाि कराता है।
20. मिुष्य का प्रमखिष्क सबसे अनधक नवकनसत होता है। यह कुि मखिक का 2/3 भाग बिाता है।
21. मिुष्य का प्रमखिष्क एक मध्यवगीय दरार या नवदर द्वारा दो स्पष्ट भागों में बटा होता है। दोिों भाग एक
तंनत्रकीय पट्टी कापणस केिोसम द्वारा जुडे होते हैं।
22. अिुमखिक शरीर के संतुिि एवं साम्यावथिा का नियमि करता है । यह कंकाि पेनशयों की गनतयों का
भी नियमि करता है ।
23. मेडुिा ऑब्ांगेटा शरीर की अिेखिक नियाओं का केंद्र है।
24. मेरुरज्जु प्रनतवती नियाओं का नियंत्रण एक समन्वय करती है।
25. प्रमखिष्क, िेतिा, बुखि, नविार, स्मृनत एवं इिाशखक्त का केंद्र है।
26. दशणि केंद्र, श्रवण केंद्र, घ्राण केंद्र तिा नवनवध भावों जैसे िोध, ममता, िोभ प्रेम आनद के केंद्र प्रमखिष्क
में पाए जाते हैं।

27. मािव मखिष्क के िारों तरफ मखकावरण िामक तीि िरों की नझल्ली पाई जाती है जो निम्न है। (1)
सबसे बाहरी िर को- दृढ़तंनत्रका या ड्यूरामेटर (2) बीि के िर को- जाितानिका या अरे क्नॉएड (3)
अंदर के िर को मृदुतानिका या पायामेटर कहते हैं।

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28. मखिष्क आवरण के बीि सेरीब्रोस्पाइिि द्रव िामक नवनशष्ट तरि पदािण भरा होता है जो मखिष्क को
बाहरी झटकों से बिाता है।
29. मािव मखिष्क एक िोििी रििा है नजसके अंदर एक बडी गुहा पाई जाती है ।
30. मेडुिा आब्ांगेटा की गुहा को ितुिण गुहा कहते हैं।
31. डायिसेफेिाि की गुहा को तृतीय गुहा या डायोसीि कहते हैं ।
32. प्रमखिष्क की गुफाओं को पार्ष्ण गुहा कहते हैं।
33. तंनत्रका संिारी पदािण जैसे। ऐसीटाइिकोिीि, नसम्पैनिि, डोपामीि, िोटइनसिेनफि आनद है। जो
युग्मािुबंध में प्रेरणाओं का संिरण करते हैं।
34. वे नियायें जो नकसी बाहय उत्तेजिा के कारण प्रनतनिया के रूप अिैखिक रूप से होती है। प्रनतवती
नियायें कहिाती है। जैसे - सुई िुभिे पर पैर का हटिा। नमठाई दे कर मुंह में िार आिा आनद।
35. माशणि हाि िे सवणप्रिम प्रनतवती नियाओं का पता िगाया।
36. हमारे कािों के सुििे की क्षमता 10 से 12 डे सीबि या 20 से 20000 हटू्ण ज (भरू् ्ू्) होती है।
37. कानिणया को छोडकर िेत्र गोिक की दीवार बाहर से भीतर की ओर तीि िरों की बिी होती है (1) दृढ़
पटि- यह गोिक को आकृनत दे ता है तिा रक्षा करता है। (2) रक्त पटि (कोराइड)- यह गोिक के
अंदर प्रकाश के परावतणि को रोकता है (3) दृनष्ट पटि (रे टीिा)- विु का प्रनतनबम्ब रे टीिा में बिता है ।
38. शंकु तिा शिाका कोनषकायें रे टीिा में पाई जाती है।
39. रत ध
ं ी रोग नवटानमि ए की कमी के कारण होता है ।
40. शिाका कोनशकाओं में रोडोखप्सि तिा शंकु कोनशकाओं में आयोडोखप्सि िामक वणणक पाए जाते हैं।
41. काि के मध्य भाग में तीि अखथियां पाई जाती है (1) मेनियस (2) इन्कस (3) िे पीस
42. नमगी - इस रोग में बार-बार झटके से पेशी संकुिि और बेहोशी होती है यह मखिष्क रोग है ।
43. मेनवन्जाइनटस - यह मखिष्क रोग मखिष्क अवरण में सूजि के कारण होता है जो जीवाणु नवषाणु या
कवक के संिमण से होता है।
44. कोमा- व्यखक्त बेहोश हो जाता है तिा नकसी भी उद्दीपि पर प्रनतनिया िहीं करता है ।
45. इिनसफेिाइनटस- यह रोग नवषाणु संिमण के कारण मखिष्क में सूजि के कारण होता है व्यखक्त
बेहोश हो जाता है ।
46. मिुष्य के िेत्र गोिक से संबंनधत 6 पेनषयां पाई जाती हैं।
47. जिीय कक्ष- कानिणया और िेंस के बीि का कक्ष जिीय कक्ष कहिाता है इसमें एक्वसहू्यूमर भरा होता
है।
48. िेत्र गोिक में िेंस के पीछे का कक्ष कािाभ कक्ष कहिाता है इसमें कािाभ द्रव भरा होता है।
49. प्रमखिष्क का बाहरी भाग काटे क्स या घूसरा पदािण कहिाता है। और तंनत्रका कोनशकाओं का बिा
होता है जबनक आं तररक भाग मेण्ड्ड्यूिा (श्वेत पदािण) कहिाता है और तंनत्रका सूत्रों का बिा होता है।
50. मेरुरज्जु के भीतरी िर को घूसर पदािण तिा बाहरी िर को श्वेत पदािण कहते हैं |
वस्तुकिष्ठ प्रश्न क्रम ांि- 01
प्रश्ि 01- बहनवकल्प प्रश्ि

(1) क ि सी तंनत्रका काि से प्राप्त उद्दीपि का संवहि करती है -
(अ) ऑनिक (ब) आनडटरी (स) ऑिफेक्टरी (द) टर ाईजेनमिि

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(2) मिुष्य में जैकॉबसि अंग -
(अ) सूंघिे कायण करता है (ब) सुििे का कायण करता है
(स) एक अवशेषी अंग होता है (द) उद्दीपि ग्राही अंग है -
(3) मखिष्क होता है -
(अ) एक्टोडमणि (ब) मीजोडमणि (स) एण्डोडमणि (द) मीजोएण्डोडमणि
(4) यनद कोई मिुष्य दु घणटिा में आपकी याददाश्त िो दे ता है तो मखिष्क का क ि सा भाग
प्रभानवत होता है -
(अ) डायि सेफेिॉि (ब) मेड्यूिा आब्ां गेटा (स) सेरीबेिम (द) सेरीब्रि हेनमखियर
(5) मिुष्य के रं गीि दृनष्ट के निए होते हैं -
(अ) दृनष्ट न्युरॉि (ब) शिाका कोनषकायें (स) शंकु कोनषकायें (द) उपरोक्त सभी
(6) रात में जब प्रकाश की तीव्रता कम होती है तो प्रकाश नकसके द्वारा ग्रहण नकया जाता है -
(अ) शिाका कोनषका (ब) शंकु कोनशका (स) िेंस (द) । तिा ठ दोिों
(7) काि में पाई जािे वािी नझल्ली है -
(अ) नटम्पैनिक नझल्ली (ब) टें सर नटम्पैिी (स) केिा नटम्पैिी (द) केिा वेिी बुिाई
(8) तंनत्रका तन्तु के ठीक बाहर क ि सा आवरण पाया जाता है -
(अ) साकोप्लाज्म (ब) पेरीन्युररयम (स) एनपन्युररयम (द) एण्डोन्युररयम
(9) मेरुरज्जु की पररनध में क्या पाया जाता है -
(अ) ग्रे- मेटर (ब) मायिीिेटेड िवण (स) व्हाइट मैटर (द) िोटोफाडण
(10) मािव में ग्रीवा तंनत्रकाओं की संख्या नकतिी होती हैं -
(अ) 8 (ब) 12 (स) 5 (द) 4

प्रश्ि 02- ररक्त थिािों की पूनतण कीनजएः -
(1) निसि के कण में ....................................................... तिा प्रोटीि पाए जाते हैं।
(2) तंनत्रका कोनशका सदै व ................................................ में रहती हैं।
(3) ........................................मखिष्क का दू सरा सबसे बडा भाग होता है ।
(4) स्पाइिि तंनत्रका .............................................. तंनत्रका होती है ।
(5) दो न्यूरॉि के संनध थिि को ....................................................कहते हैं।
(6) रानत्रिर जंतुओं के िेत्रों की रे टीिा में ...................................... की संख्या अनधक होती है।
(7) आं सुओं में जीवाणुिाशक ................................................... पाया जाता है।
(8) दृनष्ट अक्ष पर रे टीिा का भाग .................................................. कहिाता है ।
(9) कॉि ...................................... अंग होते हैं ।
(10) एक मायोनपक (निकट दृनष्टदोष) के व्यखक्त के िश्मे का िेंस .................................... होता है।

प्रश्ि 03- सही जोडी नमिाइयेः -

(1) मेनिन्जेज - (अ) श्वसि केन्द्र
(2) आगणि आफ कॉटाणई - (ब) प्रनतवती निया
(3) सेरीब्रि हेमीखियर - (स) मखिष्क

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(4) मेरूरज्जु - (द) कॉखिया
(5) मेड्यूिा ऑब्ांगेटा - (ई) निंति
(6) िै टोनिि - (प) रं ग
(7) शंकु - (फ) आन्तररक कणण
(8) जैकोब्सि अंग - (भ) संतुिि
(9) एण्डोनिम्फ - (म) ड्यूरामेटर
(10) मखिष्क - (य) गंध

प्रश्ि 04- एक शब्द वाक्य में उत्तर दीनजए।
(1) तंनत्रका कोनशकाओं के बडे प्रवधो को क्या कहते हैं ?
(2) मिुष्य के कणण में मैं खथित सबसे छोटी अखथि का िाम बताइए।
(3) नसिेप्स से तंनत्रका संवेग के संिरण के निए क ि सा रसायि आवश्यक होता है ?
(4) उल्लू के आं ि की रे टीिा में क ि सी कोनशकायें िहीं पाई जाती है ?
(5) रे टीिा के उस भाग का िाम बताइयें नजसमें केवि कोन्स पाये जाते है।
(6) मध्य मखिष्क के िार गोिाकार उभार क्या कहिाते है ?
(7) सबसे छोटी कपाि तंनत्रका का िाम निखिए।
(8) सबसे िंबी कपाि तंनत्रका का िाम निखिए।
(9) दृनष्ट वैसम्य दोष दू र करिे हेतु क ि सा िेंस िगाया जाता है ?
(10) रकाबिुमा कणण अखथि क ि सी है ?

प्रश्ि 05- अनत िघु उत्तरीय प्रश्न - 2 अंक
(1) मिुष्य के मखिष्क के सबसे बडे भाग का िाम निखिए।
(2) सेररब्रोस्पाइिि द्रव्य के दो कायण निखिए।
(3) मिुष्य की नकन्ीं दो प्रनतवती नियाओं के िाम निखिए।
(4) एक्सॉि तिा डे न्ड्राइट में अंतर निखिए।
(5) नसिैप्स क्या है ?
(6) मोनतयानबंद बीमारी के िक्षण निखिए।
(7) दू र दृनष्ट दोष के िक्षण निखिए।
(8) अंध नबंदु एवं पीट नबंदु में अंतर निखिए।
(9) शिाका एवं शंकु में अंतर निखिए।
(10) आिानदत और अिािानदत तंनत्रकाक्ष में अंतर निखिये।
(11) मखिष्क वृन्त नकि रििाओं से नमिकर बिा होता है।
(12) कशेरुकी के िेत्र का वह भाग जहां से दृक तंनत्रका रे टीिा से बाहर निकिती है क्या कहिाता है।
(13) मिुष्य में नकतिी जोडी कपािीय एवं स्पाइिि तंनत्रकायें होती है ।

(14) माएनिि िोि (षीष) के दो कायण निखिए।
(15) मेनिन्जाइनटस रोग का कारण व िक्षण निखिए।

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प्रश्ि06-दीघणउत्तरीयप्रश्न- (ववश्लेषणात्मक) 4 अंक
(1) तंनत्रका कोनशका का स्वि िामांनकत नित्र बिाइए।
(2) खथिर नवभव व सनिय नवभव में अंतर निखिए।
(3) मािव िेत्र का स्वि िामांनकत नित्र बिाइए।
(4) िेिेमस और हाइपोिेिेमस में अंतर निखिए।
(5) एखक्वअस हू्यूमर एवं नवनटर यस हू्यूमर में 4 अन्तर निखिए।
(6) कॉखिया पर संनक्षप्त नटप्पणी निखिए।
(7) संवेदी तंनत्रका एवं प्रेरक तंनत्रकां में 4 अंतर निखिए।
(8) आप नकस प्रकार की नकसी विु के रं ग का पता िगाते हैं ?
(9) ग्रे-मैटर तिा व्हाइट मैटर में 4 अंतर निखिए।
(10) मेरुरज्जु का िामांनकत नित्र बिाइए।

प्रश्ि08-अनतदीघणउत्तरीयप्रश्न (ववश्लेषणात्मक) 5 अंक
(1) प्रनतवती िाप का उदाहरण सनहत वणणि कीनजए।
(2) अिुकम्पी तिा परािुकम्पी तंनत्रका तंत्र में 5 अंतर निखिए।
(3) प्रनतवती निया को पररभानषत करते हए इसकी निया नवनध का वणणि कीनजए।
(4) दे ििे की प्रनिया पर संनक्षप्त नटप्पणी निखिए।
(5) स्वायप्त तंनत्रका तंत्र की निया नवनध का वणणि कीनजए।
(6) युग्मािुबन्ध में आवेग के संिरण को समझाइए।
(7) मािव मखिष्क के नवनभन्न भागों के िाम व कायण निखिए।
(8) रे टीिा पर प्रकाश द्वारा आवेग उत्पन्न होिे की निया नवनध का वणणि कीनजए।
(8) अन्तः कणण में ध्वनि द्वारा तंनत्रका आवेग उत्पन्न होिे की निया नवनध का वणणि कीनजए।
(10) मािव िेत्र के िार नवकारों के िाम एवं उिके िक्षण निखिए।

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अध्याय-22
रासायनिक समन्वय एवं एकीकरण

स्मरणीय क ांदु-
01. वे ग्रंनियां जो अपिे उत्पाद को भी नवनहकाओं के माध्यम से नवसनजणत करती हैं बनह: स्रावी
ग्रंनियां कहिाती है जैसे (1) िार ग्रंनियां (2) आहार िाि की पािि ग्रंनियां (3) स्वेद ग्रंनियां (4)
तेि एवं दु ग्ध ग्रंनियां आनद
02. अंतः स्रावी ग्रंनियां ये िनिका नवहीि ग्रंनियां होती है। जैसे पीयूष, िायराइड, पैरािायराइड,
एनडर िि, पीनियि तिा िाइमस ग्रंनि।
03. नमनश्रत ग्रंनियां इिमें अंतः स्रावी तिा बनह: स्रावी दोिों प्रकार के ऊतक या कोनशकाएं होती हैं
जैसे अग्नाशय
04. हामोि सूक्ष्म मात्रा में उत्पन्न होिे वािे अपोषक रसायि है जो अंतरकोनशकीय संदेशवाहक के
रूप में कायण करते हैं ।
05. िॉमस एनडसि को अंतः स्रावी नवज्ञाि के जिक के रूप में जािा जाता है।
06. िारनिंग िे 1905 में सवणप्रिम हामोि शब्द का प्रयोग नकया।
07. हाइपोिैिेमस में हामोि का उत्पादि करिे वािी कोनशकाएं होती हैं नजन्ें न्युक्िी कहते है।
08. हाइपोिैिेमस से मोिक हामोि निकिते हैं जो पीयूष ग्रंनि से हामोि स्राव को प्रेररत करते हैं।
09. हाइपोिैिेमस से निकििे वािे रोधी हामोि पीयूष ग्रंनि से हामोि स्राव को रोकते हैं।
10. पीयूष ग्रंनि की पश्ि पानि से निकििे वािे हामोि का नियंत्रण हाइपोिैिेमस करता है।
11. हारमोंस पुिनिणवेसि द्वारा अपिे ही संश्लेषण का नियंत्रण करते हैं ।
12. इररथ्रोपवां इनटि हामोि अखथि मज्जा में िाि रक्त कनणकाओं के निमाणण का नियमि करता है।
13. इं सुनिि हामोि की कमी से डायनबटीज मेिीटस (मधुमेह) रोग हो जाता है।
14. व्रषण की िीनडं ग कोनशकाएं िर हामोन्स या एन्डर ोजेंस का संश्लेषण करती है। प्रमुि िर हामोि
टे िोिे राि होता है।
15. अंडाशय द्वारा स्रानवत हामोि एिर े नडऑि को िारी नवकास हामोंस भी कहते हैं।
16. अग्नाशय में पाई जािे वािी िैंगरहैस के नद्वपों की बीटा कोनशकाओं द्वारा इं सुनिि हामोि का
स्रावि होता है तिा अल्फा कोनशकाओं द्वारा ग्लूकोगॉि हामोि का स्रावि होता है।
17. इं सुनिि हामोि रक्त में शकणरा के िर को कम करता है।
18. ग्लूकोगॉि हामोि रक्त के शकणरा के िर को बढ़ाता है।
19. हमारे भोजि में आयोडीि की कमी से िायराइड ग्रंनि की वृखि हो जाती है नजसे गिगंड या
घेंघा रोग कहते हैं।

20. नपनियि ग्रंनि से स्रानवत मेिेटोनिि हामोि सोिे जागिे के िि एवं शरीर के ताप िम को
नियंनत्रत करता है।
21. पीयूष ग्रंनि की अग्रपािी से निकििे वािे वृखि हामोि या सोमेटोटर नपि हामोि की कमी से
शरीर की वृखि रुक जाती है नजसे ब िापि कहते हैं।
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22. पैरािायराइड हामोि रक्त में CA++ का संतुिि बिाता है।
23. एनडर िि ग्रंनि को संघषण या पिायि की ग्रंनि भी कहते हैं।
24. एनडर िि ग्रंनि के मेडयूिा से निकििे वािे हामोि एनडर िैनिि तिा िॉरएू्डरीिैनिि को जीवि रक्षक
हामोि कहते हैं।
25. हांशीमोटो का रोग एक थव: प्रनतरनक्षत रोग है इसनिए इसे िायराइड की आत्महत्या कहते हैं
26. हृदय की आनिंद नभनत्त द्वारा एक पेिाइड हामोि का स्राव होता है नजसे एनटर यि िेनटयुरेनटक
कारक कारक (एएिएफ) कहते हैं। यह रक्तदाब को कम करता है।
27. पेिाइड, पॉनिपेिाइड, प्रोटीि हामोि इं सुनिि, ग्लूकोगॉि, पीयूष ग्रंनि के हामोि इत्यानद।
28. िे रॉयड हामोि काटीसोि, टे थओथटे सि, प्रोजेथटे रॉि इत्यानद।
29. अमीिो अम्ल के व्युउत्पन्न हामोि एडर ीिेनिि या एपीिफ्रीि।
30. आयोडोिाईरोनिि िायराइड हामोि।

प्रश्ि 01 - बहनवकल्प प्रश्न-
(1) इं सुनिि हामोि का थत्रावण करिे वािी िैंगर हैन्स नद्वनपकाएं पाई जाती है -
(अ) पीयूष ग्रंनि में (ब) यकृत में (स) अग्नाशय में (द) ग्रासििी में
(2) आधार उपापियी दर को नियंनत्रत करिे वािा हामोि है -
(अ) एडर ीिैनिि (ब) िायरॉखक्सि (स ) इन्सुनिि (द) आक्सीटोनसि
(3) अनधकतर गभणनिरोधक गोनियां मैं होता है -
(अ) एथटर ोजेि व FSH (ब) प्रोजेथटे रॉि (स) FSH व L.H. (द) प्रोिॉखम्बि
(4) अपरा (प्लेसेंटा) द्वारा स्रानवत होिे वािा हामोि है -
(अ) FSH (ब) प्रोिैखक्टि (स) हयूमि कोररयानिकगोिेडोटर ॉनपि (द) प्रोिॉखम्बि
(5) संकटकािीि हामोि है-
(अ) एल्डोथटीिरोि (ब) पैरािामोि (स) एडर ीिेनिि (द) िायरॉखक्सि
(6) एक्सोक्िैखिक ग्वां इटर का कारण है-
(अ) िाइरॉएड का अनतथत्रावण (ब) िाइराएड का अल्पथत्रावण
(स) पैरािाइरॉएड का अनतथत्रावण (द) िाइराएड का अल्पथत्रावण
(7) एक प्रोटीि हामोि है-
(अ) एपीिेफ्रीि (ब) एण्ड्डर ोजेि (स) प्रोजेथटे रॉि (द) िाइरोटर ॉनपक हामोि (TSH)
(8) िर में नद्वतीय िैंनगंक के िक्षणों के निए आवश्यक हामोि है -
(अ) टे थटोथटीरॉि (ब) प्रोजेथटर ॉि (स) एथटर ोजेि (द) ररिैखक्सि
(9) यनद रूनधर में एडीएि की मात्रा कम हो जाए तो मूत्र की मात्रा-
(अ) अप्रभानवत (ब) कम हो जाती है (स) बढ जाती है (द) इिमें से कोई िहीं
(10) नकसके प्रभाव से शुिजिि का नियंत्रण होता है -
(अ) ADH (ब) FSH (स) LH (द) STH

प्रश्ि 02 - ररक्त थिािों की पूनतण कीनजए।

(1) पीयूष ग्रंनि --------------------------- में पाई जाती है।
(2) टे िोिे रॉि ----------------------------------- हामोि है।
(3) हमारे शरीर की सबसे बडी याद अंत: स्रावी ग्रंनि ----------------------------होती है।
(4) -------------------------प्रसव पीडा हेतु उत्तरदाई होता है।

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(5) -----------------------------------हामोि की कमी से मािव बोिा रह जाता है।
(6) वृषण में ------------------------------- कोनशकाओं द्वारा निंग हामोि निनमणत होता है।
(7) एडर ीिेनिव हामोि से ------------------- एवं --------------- में वृि हो जाती है।
(8) ----------------------------------- एक एण्ड्टीडाइयूरेनटक हामोि है।
(9) एरीथ्रोपोइनटि का उत्पादि ------------------------ में होता है।
(10) रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ािे वािा हामोि --------------------- है।

प्रश्ि 03 - सही जोडी बिाइए।

(1) हाइपोिेिेमस (a) टे थटोथटीरॉि
(2) प्रोिैखक्टि (b) सोमेटोडर ानपि
(3) कापणस ल्यूटीयम (c) िायरॉखक्सि
(4) िीनडं ग कोनशकायें (d) दु ग्ध थत्राव
(5) अग्रपीयूष पानि (e) प्रोजेथटीरॉि
(6) आक्सीटोनसि (f) प्रसव हामोि
(7) ररिैखक्सि (g) पीयूष ग्रंनि
(8) थतर (h) मादा निंग हामोि
(9) सोमेटोथटे नटि (i) हाइपोिेिेमस
(10) एथटर ोजि (j) िायरॉइड

प्रश्ि 04 - एक शब्द या वाक्य में उत्तर दीनजए -

(1) पीयूष ग्रंनि के मध्य नपंड द्वारा स्रानवत प्रेरक हामोि का िाम निखिए।
(2) वैसोप्रेनसिहामोि की कमी से होिे वािे रोग का िाम निखिए।
(3) प्रसव पीडा करािे वािे हामोि का िाम निखिए।
(4) रे निि हामोि नकस अंग द्वारा स्रानवत होता है ?
(5) मखिष्क के उस भाग का िाम निखिए नजसमें पीयूष ग्रंनि खथित होती है।
(6) उस हामोि का िाम बताइए जो तिाव के समय उत्पन्न होता है।
(7) मिुष्य की उस ग्रंनि का िाम बताइए जो पािक एं जाइम तिा हामोि दोिों का स्रावण करती
है।
(8) एं टे रोकाइनिि हामोि नकस ग्रंनि द्वारा स्रानवत होता है ?
(9) नकस हामोि की अनधकता होिे पर गभणपात की संभाविा बढ़ जाती है ?
(10) गैथटर ीि हामोि नकस अंग द्वारा स्रानवत होता है ?

प्रश्ि 05 - अनत िघु उत्तरीय प्रश्न- 2 अंक

(1) पीयूष ग्रंनि को मािर ग्रंनि क्यों कहा जाता है ?
(2) आयोडीि युक्त हामोि का िाम निखिए।
(3) अंतः स्रावी ग्रंनि नकसे कहते हैं ?

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Document Details

Board / OrgAglasem
ExamClass 11
TypeQuestion Bank
Pages70
Languagehindi
Updated20 Sep 2026