NCERT Solutions for Class 9 Hindi (कृतिका) किस तरह आख़िरकार मै हिंदी मे आया [Old Book] – Text
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NCERT
SOLUTIONS
CLASS - 9th
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Book : Kritika Ncert Solutions | Chapter - 5 Hindi
Class : 9th
Subject : हंद
Chapter : 5
Chapter Name : कस तरह आ खरकार म ह द म आया
Q1 वह ऐसी कौन सी बात रह होगी िजसने लेखक को द ल जाने के लए बा य कर दया?
लेखक को कसी ने कटु बात कह द थी य क लेखक के पास कोई रोज़गार नह ं था और वह उसे बदा त
नह ं कर पाये इस लए वो द ल चले गये।
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Q2 लेखक को अं ेजी म क वता लखने का अफसोस य रहा होगा ?
अं ेजी भारत क भाषा नह ं थी और भारत के लोग उसे समझ नह ं पाते थे। साथ ह जब वे इलाहाबाद
आए तो वहाँ सा ह यक वातावरण था। वहाँ वे नराला, ब चन और प त जैसे महान लेखक को मले
अतः ह द मे ह रचनाएँ करने लगे। इस कार लेखक का अं ेजी म लखने का यास यथ गया ।
इस लए लेखक को अं ेजी म क वता लखने का अफसोस रहा होगा।
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Q 3 अपनी क पना से ल खए क ब चन ने लेखक के लए नोट म या लखा होगा ?
शायद ब चन जी ने लखा होगा क प र म करो सफलता तु हारे कदम चम ू ेगी, संघष करने वाले ह
जीवन पथ पर आगे बढ़ते है । उस नोट म शायद लखा होगा क तम
ु इलाहाबाद आ जाओ य क लेखन
म ह तु हारा भ व य न हत है ।
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Q4 लेखक ने ब चन के यि त व के कन- कन प को उभारा है ?
लेखक ने ब चन के यि त व के कई प को उभारा है -
1) ब चन जी स दय और कोमल वभाव के थे।
2) वे समय के अ यंत पाबंद होने के साथ -साथ वे कम से परम सहयोगी मनु य थे।
3) उ ह ने लेखक वारा लखे एक ह सॉ नट को पढ़कर उनक कला- तभा को पहचान लया।
4) ब चन सव-परोपकार , संघषशील, प के संक प वभाव वाले थे ।
5) उ ह ने न केवल लेखक को इलाहाबाद बल ु ाया बि क लेखक क पढ़ाई म मदद भी क ।
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Book : Kritika Ncert Solutions | Chapter - 5 Hindi
Q5 ब चन के अ त र त लेखक को अ य कन लोग का तथा कस कार का सहयोग मला?
लेखक को ब चन के अ त र त न न ल खत लोग का सहयोग मला
1) ब चन के पता - जब लेखक इलाहाबाद म आकर बस गए तो ब चन के पता ने उनका अ भभावक
बनना वीकार कया।
2) तेजबहदरु संह- लेखक के बड़े भाई थे िज ह ने आ थक तंगी म कुछ पये भेज कर लेखक क मदद
क।
3) ससरु ाल प - जब लेखक बेरोज़गार म संघष कर रहे थे तब ससरु ाल वाल ने उ हे अपनी के म स
क दक ु ान पर कंपाउं डर सीखने का मौका दया।
4) सु म ानदं न और नरालाजी-इ ह ने लेखक को ह ं डयन ेस से अनव ु ाद का काम दलवाया।
5) ब चन जी- लेखक को सबसे यादा सहयोग ब चन जी ने दया। िज ह ने लेखक को कदम -कदम पर
मागदशन कया और मदद क । ब चन जी ने लेखक को इलाहाबाद बल ु ाया और पढ़ाई का परू ा ख़च
उठाया और एम ए करने के लए े रत कया।
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Q6 लेखक के हंद लेखन म कदम रखने का मानस ु ार वणन क िजये।
इलाहाबाद का सा हि यक वातावरण, म का सहयोग और ो साहन पाकर लेखक ह द म रचनाएँ
करने लगे।
सन 1933म लेखक क कुछ क वताएँ 'सर वती' व चाँद' प का म छपी।
1937 म लेखक ने ब चन जी के बताए अनसु ार 14 पि तय क क वता को लखने का यास कया।
लेखक ने ' नशा नमं ण के क व के त' एक क वता लखी पर अ का शत रह ।
फर लेखक ' पाभ' के ऑ फ़स मे क श ण लेकर बनारस से का शत हं स के कायालय मे काम संभाला ।
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Q7 लेखक ने अपने जीवन म िजन क ठनाइय को झेला है ,उनके बारे म ल खए।
लेखक को शु आत के दन म आ थक सम याओं से जझ ू ना पड़ा तथा क जगार के दन म यं य
बाण को झेलना पड़ा।उन दन लेखक को साइन बोड पट करके अपना गुजरा करना पड़ा।
लेखक क यव ु ाव था म ह प नी का ट .बी.के कारण दे हांत हो गया था। इस लए उ ह प नी का बयोग भी
सहना पड़ा।
ब चन जी ने उनक पढ़ाई का सारा ख़चा उठाया था य क वे आ थक सम याओं से जझ ू रहे थे। इस
तरह उनके ारं भ के दन आ थक क ठनाइय म बीते ।
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