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NCERT Solutions for Class 9 Hindi (क्षितिज) Chapter 3 उपभोक्तावाद की संस्कृति

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi (क्षितिज) Chapter 3 उपभोक्तावाद की संस्कृति - Page 1 of 5

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi (क्षितिज) Chapter 3 उपभोक्तावाद की संस्कृति – Text

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NCERT
SOLUTIONS
CLASS - 9th

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Book : Kshitij Ncert Solutions | Chapter - 3 Hindi

Class : 9th
Subject : हंद
Chapter : 3
Chapter Name : उपभो तावाद क सं कृ त

Q1 लेखक के अनस
ु ार जीवन म ‘सख
ु ’ से या अ भ ाय है ?

Answer. लेखक के अनस ु ार जीवन म सख
ु का मतलब सफ़ वला सता क व तओ ु ं से रह गया है । आज
हम भौ तकवाद और द ु नयावी दखावे को सख ु क ेणी म रख दे ते ह। न य-नए उ पाद का उपयोग
करके हम वयं को उनका आ द बनाते चले जाते ह। हम इन उ पाद पर इतने नभर हो जाते ह क इनके
बना हम अपना जीवन अधरू ा महसस ू होता है ।जब तक हम इन भौ तक व तओु ं का उपयोग नह ं कर
लेते ह, हम लगता है क हम तो सख
ु ह नह ं मल रहा। कुल मलाकर तत ु लेख म सख ु का ता पय
भौ तकवाद से रखा गया है ।

Page : 38 , Block Name : न अ यास

Q2 आज क उपभो तावाद सं कृ त हमारे दै नक जीवन को कस कार भा वत कर रह है ?

Answer. आज उपभो तावाद सं कृ त से हमार मल ू सं कृ त और नै तक मू य का हनन हो रहा है ।
हम पा चा य सं कृ त से इतने यादा भा वत हो रहे ह क हम उसको अपनाने के लए लाला यत हो रहे
ह। सफ़ इतना ह नह ं बि क हम अपनी सं कृ त अपनाने से भी शम महसस ू होने लगी है । जब हम
कसी नए उ पाद का व ापन दे खते ह तो हम उसे ख़र दने के लए उतावले हो जाते ह। ये उतावलापन
इस लए नह ं होता क हम उस व तु क आव यकता है बि क हम तो समाज म अपने तबे का बखान
करना होता है । हमार सं कृ त कसी भी बनावट दखावे से बलकुल दरू है । उपभो तावाद सं कृ त के
कारण हम अपने ह च र का भी पतन करते जा रहे ह।

Page : 38 , Block Name : न अ यास

Q3 लेखक ने उपभो ता सं कृ त को हमारे समाज के लए चन
ु ौती य कहा है ?

Answer. लेखक ने उपभो ता सं कृ त को हमारे समाज के लए चनु ौती कहा है य क उपभो तावाद के
कारण हमार अपनी सं कृ त और उसके मू य का तेज़ी से हनन हो रहा है । उपभो ता सं कृ त के पीछे
हम इस क़दर अंधे हो रहे ह क हम अपने मू य को अपनाने म शम महसस ू हो रह है । उपभो ता
सं कृ त उपभोग क व तओ ु ं का व ापन करके हम मत करती है । हम इन उपभोग और वला सता
क व तओ ु ं को ह अपने सख ु का मा यम समझने लगते ह। इन चीज़ का उपयोग करके हम
दखावापर ती करते ह और अपने च र को पतन क राह पर ले चलते ह।

Page : 38 , Block Name : न अ यास

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Book : Kshitij Ncert Solutions | Chapter - 3 Hindi

Q4 आशय प ट क िजए-

(क) जाने-अनजाने आज के माहौल म आपका च र भी बदल रहा है और आप उ पाद को सम पत होते
जा रहे ह।
(ख) त ठा के अनेक प होते ह, चाहे वे हा या पद ह य न हो।

Answer.

(क) व ापन को दे खकर हम कसी भी व तु को ख़र द लेते ह और ये नह ं दे खते क वह कैसी है । हम
सफ़ उस व तु को इस लए ख़र दते ह ता क हम भी आधु नक लोग क ेणी म आ सक और अपने तबे
का बखान कर सक। हम अपने नी त मू य को तेज़ी से भल ू ते चले जाते ह और ख़द
ु को इन उ पाद का
ग़लु ाम बना दे ते ह। इससे हमारा च र भी न ट होने लगता है और हम उपभोग सं कृ त क एक
कठपत ु ल मा बन कर रह जाते ह।

(ख) त ठा के अनेक प होते ह चाहे वे हा या पद ह य न ह अथात ् आज वे चीज़ भी ति ठत
मानी जाने लगी ह जो पहले के समाज म अजीब क ेणी म रखी जाती थीं। इसका उदाहरण हम इस
कार ले सकते ह क आज फटे कपड़े पहनना मॉडन और उ च लास क ेणी म आता है । इसी कार
आज कसी बड़े होटल म अधपका खाना ऑडर करना आधु नकता क ेणी म आता है । ये एक कार क
झूठ त ठा है जो हा या पद है ले कन ह तो त ठा ह ।

Page : 39 , Block Name : न अ यास

Q5 कोई व तु हमारे लए उपयोगी हो या न हो, ले कन ट .वी. पर व ापन दे खकर हम उसे ख़र दने के
लए अव य लाला यत होते ह? य ?

Answer. ट .वी. पर व ापन दे खकर हम कसी भी उ पाद को ख़र दने के लए लाला यत हो जाते ह भले
ह वह व तु हमारे लए उपयोगी न हो। ऐसा इस लए होता है य क हम आज उपभो ता सं कृ त के
पीछे पागल से हो गए ह।हम लगता है क इन उ पाद का योग करके हम भी ति ठत क ेणी म आ
जाएँगे और समाज म हमारा तबा ऊँचा हो जाएगा। व ापन म दखाए गए लोग चीज़ का इस कार
वणन करते ह क अमक ु उ पाद का योग करके वे सफलता को ा त हुए। इन चीज़ को दे खकर हम उन
उ पाद के त लालच उ प न होता है । इस कार हम उस चीज़ को ख़र दने के लए लाला यत हो जाते ह
ये जानते हुए भी क वह हमारे काम क नह ं है ।

Page : 39 , Block Name : रचना और अ भ यि त

Q6 आप के अनसु ार व तओ
ु ं को ख़र दने का आधार व तु क गुणव ा होनी चा हए या उसका व ापन?
तक दे कर प ट कर।

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Book : Kshitij Ncert Solutions | Chapter - 3 Hindi

Answer. कसी भी व तु को ख़र दने का आधार उसक गण ु व ा ह होनी चा हए ना क उसका व ापन।
ऐसा इस लए य क य द व तओ ु ं क गण ु व ा अ छ नह ं होगी तो फर वह हमारे कसी काम के नह ं
रहे ग फर चाहे उसके व ापन पर लाख पये ह य ना ख़च कये गये ह । उदाहरण के तौर पर य द
हम कसी कपड़े का व ापन दे खकर उसे ख़र दते ह और हम ये यान नह ं दे ते क उसक गुणव ा कैसी
है तो ये घाटे का सौदा हो सकता है । ऐसा इस लए क अगर उस कपड़े क गुणव ा अ छ नह ं होगी तो
वह ज द घस जाएगा फर चाहे वह कतना महँगा ह य न हो। इस कार कसी भी चीज़ को ख़र दने
से पहले हम ये दे खना चा हए क वह हमारे लए कतना उपयोगी हो सकता है अथात ् उसक गुणव ा
कैसी है ।

Page : 39 , Block Name : रचना और अ भ यि त

Q7 पाठ के आधार पर आज के उपभो तावाद यग
ु म पनप रह ‘ दखावे क सं कृ त’ पर वचार य त
क िजए।

Answer. आज के उपभो तावाद यग ु म पनप रह ‘ दखावे क सं कृ त’ ने लोग को वा तव म अपना
ग़ल
ु ाम बना रखा है । आज उ पाद का व ापन करके उ ह लोग के बीच आम कर दया जाता है । लोग
को उ पाद के त आक षत करने के लए तरह तरह क कहा नयाँ बतायी जाती है और लोग उनसे
भा वत भी हो जाते ह। उन चीज़ को ख़र द कर लोग ख़दु को आधु नक क ेणी म रखते ह। सफ़
इतना ह नह ं है बि क जो लोग उन उ पाद का योग नह ं कर रहे होते ह वे उ ह पछड़ा और परु ाने
ख़याल का मानते ह।यह एक कार का दखावा ह है । उपभो तावाद यग ु म पनप रह पा चा य सं कृ त
और दखावे क सं कृ त के कारण हमारे नै तक मू य का हनन हो रहा है िजससे क हमारा च र पतन
क ओर अ सर है ।

Page : 39 , Block Name : रचना और अ भ यि त

Q8 आज क उपभो ता सं कृ त हमारे र त- रवाज़ और योहार को कस कार भा वत कर रह है ?
अपने अनभ
ु व के आधार पर एक अनु छे द ल खए।

Answer. आज क उपभो ता सं कृ त हमारे र त- रवाज़ और योहार को नकारा मक प से भा वत
कर रह है । आज हम अपने योहार को उनके मल ू प और सं कृ त के आधार पर न मनाकर उन म
पा चा य का तड़का लगाते ह। र त- रवाज़ क बात कर तो उपभो ता सं कृ त के कारण हमारे नै तक
मू य का पतन हो गया है िजस कारण आज हम अपने बड़ के आदर वाल सं कृ त को तेज़ी से भल ु ाते
जा रहे ह। आज र त म दरार पड़ रह है य क व ापन के मा यम से लोग को यह संदेश तेज़ी से
दया जा रहा है क वयं का यान रखना ह आव यक है भले ह दसू रे को कतना ह क ट य न हो
जाए। वाथ आज अपने चरम पर पहुँच रहा है ।

Page : 39 , Block Name : रचना और अ भ यि त

Q9 धीरे -धीरे सब कुछ बदल रहा है ।

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Book : Kshitij Ncert Solutions | Chapter - 3 Hindi

इस वा य म ‘बदल रहा है ’ या है । ये या कैसे हो रह है धीरे -धीरे । अतः यहाँ धीरे -धीरे या- वशेषण
है ।जो श द या क वशेषता बताते ह या- वशेषण कहलाते ह।जहाँ वा य म हम पता चलता है या
कैसे, कतनी और कहाँ हो रह है , वहाँ वह श द या- वशेषण कहलाता है ।

(क) ऊपर दए गए उदाहरण को यान म रखते हुए या- वशेषण से यु त पाँच वा य पाठ म से छाँटकर
ल खए।

(ख) धीरे धीरे , ज़ोर से, लगातार, हमेशा, आजकल, कम, यादा, यहाँ, उधर, बाहर-इन या- वशेषण
श द का योग करते हुए वा य बनाइए।

Answer.

(क)

1. अमे रका म जो आज हो रहा है , वो कल हमारे भारत ने भी आ सकता है ।
2. आपको लभ ु ाने क जी-तोड़ को शश म नरं तर लगी रहती है ।
3. हमारे सामािजक सरोकार म कमी आ रह है ।
4. धीरे -धीरे सब कुछ बदल रहा है ।
5. सामंती सं कृ त के त व भारत म पहले भी रहे ह।
(ख)

1. धीरे -धीरे - धीरे धीरे वषा क शु आत हुई और फर यह घनघोर हो गई।
2. ज़ोर से- जाते हुए पंकज ने ज़ोर से दरवाज़ा बंद कर दया।
3. लगातार- श क से लगातार एक ह न पछ
ू ते रहने के कारण याम को ल जा महसस
ू होने
लगी।
4. हमेशा- हम हमेशा स य क राह पर चलना चा हए।
5. आजकल- आजकल यव ु ाओं म तनाव तेज़ी से बढ़ता जा रहा है ।
6. कम- कम भोजन करने से हम व थ जीवन का आनंद ले सकते ह।
7. यादा- यादा बोलने से लोग हम मख ू क ेणी म रखने लगते ह।
8. यहाँ- हमारे यहाँ अ त थ का वागत उ लास के साथ कया जाता है ।
9. उधर- जब मने खड़क के उधर झांक कर दे खा तो मझ ु े हरे पेड़ नज़र आए।
10. बाहर- घर से बाहर जाते हुए मझ ु े रोना आ गया।

Page : 39 , Block Name : भाषा-अ ययन

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 9
TypeSolution
Pages5
Languagehindi
Updated11 Aug 2026