NCERT Solutions for Class 9 Hindi (स्पर्श) Chapter 8 गीत अगीत – Text
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NCERT
SOLUTIONS
CLASS - 9th
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Book : Sparsh Ncert Solutions | Chapter - 11 Hindi
Class : 9th
Subject : ह द
Chapter : 11
Chapter Name : गीत-अगीत
Q1 न न ल खत न के उ र द िजये-
1. नद का कनार से कुछ कहते हुए बह जाने पर गुलाब या सोच रहा है ? इससे संबं धत पंि तय को
ल खए-
2. जब शकु गाता है , तो शक
ु के दय पर या भाव पड़ता है ?
3. ेमी जब गीत गाता है , तब े मका क या इ छा होती है ?
4. थम छं द म व णत कृ त- च ण को ल खए।
5. कृ त के साथ पश-ु प य के संबंध क या या क िजए।
6. मनु य को कृ त कस प से आंदो लत करती है ? अपने श द म ल खए।
7. सभी कुछ गीत है , अगीत कुछ नह ं होता। कुछ अगीत भी होता है या? प ट क िजए।
8. गीत-अगीत के क य भाव को ल खए।
Answer.
1. तट पर गुलाब यह सोचता है - क
"दे ते वर य द मझ
ु े वधाता,
अपने पतझर के सपन का
मै भी जग को गीत सन ु ाता।"
2. शक
ु अपनी खश ु ी को दशाने के लए जब गीत गाता है , तो उसका वर परू े वन म गँज
ू ने लगता है । शक
ु
का मन भी उस समय गाने के लए करता है पर वह अपने वा स य के कारण मौन रह जाती है । शक ु के
पंख खशु ी से फूल जाते है । और वह मौन हो के भी अ य धक स न हो उठती है ।
3. जब ेमी शाम के समय गीत गाता है , तब उसक जो े मका अपने ेमी के गीत को सन ु ने के लए
अपने घर से बाहर आ जाती है , और एक नीम के पेड़ के पीछे छपकर अपने ेमी का मधरु वर, गीत
सनु ने लगती है । तब उस व त े मका क इ छा होती है , क काश वह भी उस गीत क पंि त बन
सकती।
4. थम छं द म क वराज ने कृ त का सजीव संद ु र च ण कया है । पहले छं द म नद अपने वेग से
बहती है , मान क कनार से अपने दख ु को बताती या अ भ य त करते बह जा रह है । और वह उस
तट पर खड़ा गुलाब का पौधा है जो मौन खड़ा है ।
5. कृ त के साथ पश-ु प य का बड़ा गहरा और मधरु संबंध होता है । सभी पश-ु प ी अपने भोजन एवं
आवास के लए कृ त पर नभर होते है । उनके सारे काय कृ त पर ह नभर होते है । कृ त पर ह
उनका परू ा जीवन नभर होता है । अथात उनके जो या-कलाप होते है , वो सब कृ त से जड़ु े होते है ।
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कृ त क संद ु रता इतनी मनमोहक होती है , क पश-ु प य को गाने,गन
ु गन
ु ाने और चहचहाने को े रत
करती है । इस कृ त के साथ ह पश-ु प य के आपसी संबंध को आगे लेकर जाती है , एवं दस
ू रे के ेम
म खो जाते है ।
6. मनु य को कृ त अनेक प म आंदो लत करती है । कृ त का मोहक प उसे गाने के लए ववश
कर दे ता है । ाकृ तक स दय इतना मनमोहक और सह ु ावना होता है , क शाम क जो मनमोहक छ प या
अदा होती है , वह ेमी को गीत गाने के लए ववश तो उसक े मका को उसके घर से बाहर नकलने के
लए मजबरू कर दे ती है ।
7. गीत-अगीत का जो संबंध है , वो मन म उठनेवाले भाव को वर मल जाते है , तो वह गीत बन जाता
है । फर जब भावनाओ को वर नह ं मल पाते वह अगीत कहलाता है । अगीत को भले ह अ भ यि त
का कोई अवसर न मले परं तु उसके अि त व को भी नकारा नह ं जा सकता है । अ भ य त न होते हुए
भी वह अपने आप म संपणू होता है , इस लए क व ने कहा क कुछ अगीत भी होता है ।
8. इस क वता से क व यह कहना चाहते ह क ऐसा कोई ज़ र नह ं क मन के हर वचार को गीत के
प म य त कया जाए। अगीत क भी अपनी एक संद ु रता होती है । उसे भले य त न कया गया हो
पर तु उसका भी अपना अि त व है । पहचान न मलने पर भी वह परू ा है इसी कारण क व ने उसे अगीत
कहा है ।
Page : 101 , Block Name : न न ल खत न के उ र द िजये
Q2 संदभ-स हत या या क िजए-
1. अपने पतझर के सपन का
म भी जग को गीत सनु ाता।
2. गाता शक
ु जब करण वसंती
छूती अंग पण से छनकर।
3. हुई न य म कड़ी गीत क
बधना य मन म गुनती है ।
Answer
1. संदभ: तत ु का य पंि तयाँ हमार पा य पु तक ' पश' भाग १ के पाठ ११ 'गीत-अगीत' से ल गई
या या: इन पंि तय म क व ने गल ु ाब के पेड़ का वणन कया गया है , जो नद कनारे खड़ा होकर यह
सोच रहा है क अगर उसके पास वर होते तो वो अपने पतझड़ क यथा सन ु ा सकता था।
2. संदभ: तत ु का य पंि तयाँ हमार पा य पु तक ' पश' भाग-1 के पाठ-11 'गीत-अगीत' से ल गई
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या या: इन पंि तय म क व ने उस गीत क बात कह है जो सरू ज क करण के शक
ु के अंग पर प
से छनकर पड़ने से गाया जाता है ।
3. संदभ: तत ु का य पंि तयाँ हमार पा य पु तक ' पश' भाग १ के पाठ ११ 'गीत-अगीत' से ल गई
या या: जब कोई े मका अपने ेमी के गीत को सन ु ती है तो सोचती है क काश वह भी अपने ेमी के
गीत का भाग बन पाती।
Page : 101 , Block Name : संदभ-स हत या या क िजए
Q3 न न ल खत उदाहरण म 'वा य- वचलन'को समझने का यास क िजए। इसी आधार पर च लत
वा य- व यास ल खए −
उदाहरण: तट पर एक गुलाब सोचता
एक गुलाब तट पर सोचता है ।
(क) दे ते वर य द मझ ु े वधाता
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(ख) बैठा शक ु उस घनी डाल पर
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(ग) गँज ू रहा शकु का वर वन म
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(घ) हुई न य म कड़ी गीत क
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(ङ) शक ु बैठ अंडे है सेती
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Answer -
(क) य द वधावा मझ ु े वर दे त।े
(ख) उस घनी डाल पर शक ु बैठा है ।
(ग) शक ु का वर वन म गँज ू रहा है ।
(घ) म गीत क कड़ी य न हो सक ।
(ङ) शक ु बैठ कर अंडे सेती है ।
Page : 102 , Block Name : वा य- वचलन
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