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NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 8 समय एवं गति का मापन

AglaSem पर कक्षा 7 विज्ञान अध्याय 8 समय एवं गति का मापन (जिज्ञासा) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 7 Science Chapter 8 Measurement of Time and Motion (Curiosity), Hindi Medium.
NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 8 समय एवं गति का मापन - Page 1 of 35

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NCERT Solutions Class 7 Science Chapter 8 समय एवं गति का मापन – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा7

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 8: समय एवं ग त का मापन

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ज ासा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

105 – 120 13 36 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 34 pages

Page 2

कक्षा 7 व ान अध्याय 8 समय एवं ग त का मापन AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 7 · व ान · ज ासा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 8: समय एवं ग त का मापन
कक्षा 7 व ान क पाठ्यपुस्तक ज ासा के अध्याय 8 समय एवं ग त का मापन के सभी प्रश्न के पूण एनसीईआरट समाधान — वही अध्याय जो
अपने जनपद क सबसे तीव्र धा वका प्रेरणा क कहानी से आरंभ होता है। क्रयाकलाप 8.1 से 8.4, एक वै ा नक क तरह सो चए! बॉक्स, पृष्ठ
106 से 117 तक के सभी पाठ्य प्रश्न, आइए, और अ धक सीख के ग्यारह प्रश्न (प्रश्न 7 और 10 क ता लकाएँ भरी हुई), चार अन्वेषणात्मक
प रयोजनाएँ तथा समग्र दृ का काय — चाल, दूरी और समय के प्रत्येक मान का चरण-दर-चरण प रकलन करके।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

ज ासा (कक्षा 7) 105 – 120

खं ड प्रश्न

13 36

माध्यम

हन्द

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 106
8.1 समय का मापन

प्र.1 जब घ ड़याँ नह होती थ तो लोग समय का मापन कस प्रकार करते थे?

ऐसी घटनाओं का अवलोकन करके जो एक न त समयाव ध के प ात पुनरावृत्त होती ह। मनुष्य ने सूय के उदय एवं अस्त होने,
चंद्रमा क कलाओं तथा बदलती ऋतुओं का उपयोग समय- नधारण के लए कया। सबसे पहले पंचांग (कैलडर) बनाए गए, जनम
सूय के उदय-अस्त के एक चक्र से एक दन प रभा षत हुआ। इसके बाद दन के भीतर के लघु समयांतराल मापने के यंत्र बनाए गए।

यंत्र इसम क्या दोहराता या समय कैसे पढ़ा जाता था
प्रवा हत होता था

धूप-घड़ी (िचत्र 8.1) सूय का प्र त दन आकाश म भ्रमण सूय के पकाश ारा बनी िकसी वस्तु की परछाई की
पिरवतनीय िस्थित से

जल-िनष्क्रमण पकार की जल-घड़ी अं कत पात्र से बाहर प्रवा हत होता घटते जल -स्तर की तुल ना पात्र पर बने समय-अंक नों से
[िचत्र 8.2 (क)] जल करके

प्लवमान पात्र पकार की जल-घड़ी तली के छद्र से कटोरे म भरता कटोरा एक िनिश्चत समय में भरकर डू ब जाता था; उसे
[िचत्र 8.2 (ख)] जल िनकालकर पुनः तैराया जाता था

रे त-घड़ी (िचत्र 8.3) एक बल्ब से दूसरे बल्ब म गरती िकतनी रे त नीचे आ चुक ी है, इससे
रेत

मोमबत्ती-घड़ी (िचत्र 8.4) एक समान ग त से जलती मोमबत्ती मोमबत्ती पर िकए गए अंशाक
ं न से , जहाँ तक लौ पहचु ँ चुक ी
होती थी

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कक्षा 7 व ान अध्याय 8 समय एवं ग त का मापन AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य : इन सभी यंत्र को — और उसके बाद बनी प्रत्येक घड़ी को — एक ही चीज़ चा हए: कोई ऐसा प्रक्रम जो
दोहराता हो अथवा एक समान दर से चलता हो। तभी समय को समान भाग म बाँटकर गना जा सकता है।

क्या आप जानते ह? प्राचीन भारत म प्लवमान पात्र प्रकार क जल-घड़ी घ टका यंत्र कहलाती थी। इसका छद्र
ऐसा बनाया जाता था क पात्र को भरने और डू बने म ठ क 24 मनट लग। 24 घंटे = 1440 मनट और 1440 ÷
24 = 60, अतः दन 60 समान घ टय म बँटा था। प्रत्येक बार पात्र डू बने पर ढोल, शंख अथवा घंटा बजाकर इसक
घोषणा क जाती थी।

क्रयाकलाप 8.1: आइए, नमाण कर — पृष्ठ 107
8.1 समय का मापन

क्रयाकलाप

प्र.1 क्या आप एक साधारण जल-घड़ी बनाना चाहगे?

हाँ — और इसके लए केवल एक प्रयुक्त पारदश प्ला स्टक क बोतल चा हए। पूरा क्रयाकलाप क्रम से:

1. पारदश प्ला स्टक क एक प्रयुक्त बोतल (1/2 लीटर क अथवा बड़ी) ली जए जसम ढक्कन भी लगा हो।
2. इसे लगभग बीच से काटकर दो भाग म वभा जत क जए [ चत्र 8.5 (क)]।
3. एक ाइंग- पन से ढक्कन के बीच म एक छोटा छद्र बनाइए [ चत्र 8.5 (ख)]।
4. ढक्कन लगी बोतल के ऊपरी भाग को उल्टा करके नीचे वाले आधे भाग के ऊपर र खए [ चत्र 8.5 (ग)]।
5. ऊपरी भाग म जल भ रए। जल का स्तर स्पष्ट दखे, इसके लए स्याही क कुछ बूँद अथवा रंग मला द जए [ चत्र 8.5 (घ)]।
6. जल बूँद-बूँद कर नीचे गरने लगेगा। घड़ी क सहायता से प्रत्येक मनट के बाद जल के स्तर को अं कत करते जाइए, जब तक
सारा जल नीचे न आ जाए।

अंकन समान दूरी पर क्य नह बनते: जैसे-जैसे ऊपरी भाग का जल घटता है, छद्र पर जल का दाब कम होता
जाता है और टपकने क दर धीमी पड़ जाती है। यही क ठनाई प्राचीन भारत म भी आई थी — अथशास्त्र म व णत
जल- नष्क्रमण प्रकार क घड़ी बहुत यथाथ नह थी, क्य क जल का स्तर घटने पर प्रवाह क दर कम हो जाती थी।
इसी कारण घ टका यंत्र का वकास हुआ।

स्वयं जाँ चए: छद्र क ल से नह , केवल एक ाइंग- पन से बनाइए। बड़ा छद्र बोतल को कुछ ही सेकंड म खाली
कर दे गा और कोई उपयोगी अंकन नह बन पाएगा।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 8 समय एवं ग त का मापन AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 आपक जल-घड़ी तैयार है। क्या आप अब अनुमान लगा सकते ह क इसे उपयोग म कैसे लाया जाएगा?

जल को नीचे वाले भाग से वापस ऊपर के भाग म उड़ेल ली जए और बूँद-बूँद कर नीचे गरते जल के स्तर पर ध्यान द जए। हर बार
जब जल आपके ारा अं कत कसी चह्न तक पहुँचता है तो इसका अथ है क एक और मनट व्यतीत हो चुका है।
अथात यह घड़ी डायल दे खकर नह , चह्न गनकर पढ़ जाती है:

जल-स्तर पहले चह्न पर → 1 मनट पूरा।
जल-स्तर पाँचव चह्न पर → 5 मनट पूरे।
कसी घटना का समय मापने के लए — जैसे कोई मत्र 10 सवाल कतनी दे र म हल करता है — जल छोड़ते ही आरंभ क जए
और समा प्त पर पहुँचा हुआ चह्न दे ख ली जए।

यह काम क्य करती है: वही बोतल, वही छद्र और उतना ही जल होने के कारण एक चह्न से दूसरे चह्न तक जल
को उतना ही समय लगता है जतना अंकन करते समय लगा था। दोहराने योग्य प्रक्रम ही हर घड़ी का आधार है।

यह भी क जए: क्रयाकलाप 8.2 म बनाए लोलक के 10 दोलन का समय अपनी जल-घड़ी से मा पए और कलाई
घड़ी से तुलना क जए। तब समझ आएगा क लोग बेहतर घ ड़य क खोज म क्य लगे रहे।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 109
8.1.1 सरल लोलक

प्र.1 कक्षा 6 म व ान क पाठ्यपुस्तक ज ासा के अध्याय ‘लंबाई एवं ग त का मापन’ म हमने एक क्रयाकलाप
कया था जसम हमने धागे से लटके एक इरेजर/रबड़ क दोलन-ग त का अवलोकन कया था। क्या लोलक
उसके जैसा ही है?

हाँ — दोन एक ही ह। धागे से लटका इरेजर जब दोलन करता है तो वह वास्तव म एक सरल लोलक ही है; केवल नाम और गोलक
अलग ह।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 8 समय एवं ग त का मापन
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दृ ढ़ आधार
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सरल लोलक। गोलक माध्य
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त 'अ' पर लटका रहता है और दो चरम तय 'ब' तथा 'स' के बीच दोलन करता है।

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कक्षा 6 का क्रयाकलाप इस अध्याय का सरल लोलक

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धागे से बँधी छोटी धातु की गेंद — गोलक
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धागे से बँध ा एक इरे जर/रबड़

िकसी दृ ढ़ आधार से लटकाया गया
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हाथ में पकड़कर या िकसी हुक से लटकाया गया

oथोड़mा-सा िवस्थािपत करके छोड़ ने पर दोलन-गित करने लगता है l a se
एक ओर िवस्थािपत करके छोड़ने पर आगे-पीछे झूल ता
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यह झूल ना बार-बार दोहराता है agl इसकी गित आवत है: यह अपने पथ को एक िनिश्चत समयाविध के पश्चात दोहराता
है

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g तक दोलन करता है, इस लए एक
.cमापन करते ह। तनी हुई डोरी पर लटका भारी गोलक बना डगमगाए लंबे aसमय
फर लोलक क अलग चचा क्य : कक्षा 6 म हमने केवल इस ग त का अवलोकन कया था। यहाँ हम इसका

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दोलन म लगा समय — दोलनकाल — यथाथता से मापा जा सकता है। यही गुण इसे घड़ी के योग्य बनाता है।

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e — पृष्ठ 109 और 110
क्रयाकलाप 8.2: आइए, प्रयोग sकर m . co agl
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कक्षा 7 व ान अध्याय 8 समय एवं ग त का मापन AglaSem · NCERT Solutions

8.1.1 सरल लोलक

क्रयाकलाप

प्र.1 गोलक को हल्के से पक ड़ए और एक ओर थोड़ा-सा व ा पत करके छोड़ द जए। ध्यान र खए क छोड़ते समय
गोलक को झटका न लगे और डोरी सम्यक रूप से तनी रहे। क्या आपका लोलक अब दोलन कर रहा है?

हाँ। गोलक एक ओर से दूसरी ओर और फर वापस — बार-बार उसी पथ पर आता-जाता है। यही दोलन-ग त है, और यह आवत
है क्य क यह अपने पथ को एक न त समयाव ध के प ात दोहराती है।
इस चरण क दो सावधा नयाँ ही तय करती ह क प्रयोग सफल होगा या नह :

गोलक को झटका न द जए। झटके से उसे अ त रक्त चाल मल जाती है, दोलन चौड़ा और अ नय मत हो जाता है और
पाठ्यांक बखर जाते ह।
डोरी तनी रहनी चा हए। ढ ली डोरी पर गोलक झूलने के बजाय झटके खाता है और लोलक क लंबाई बदलती रहती है।

दोलन सदा के लए क्य नह चलते: वायु का प्र तरोध और आधार पर होने वाला घषण प्रत्येक दोलन म थोड़ी
ऊजा ले लेते ह, इस लए गोलक हर बार कुछ कम ऊँचाई तक उठता है और अंततः रुक जाता है। ध्यान द जए क
दोलन छोटा होते जाने पर भी दोलनकाल लगभग नह बदलता — यही गुण लोलक को अच्छा समय-मापी बनाता
है।

प्र.2 क्या आपके लोलक के दोलनकाल का मान प्रत्येक प्रेक्षण के लए लगभग समान प्राप्त होता है? इस अवलोकन से
आप क्या नष्कष नकालते ह?

हाँ, यह प्रत्येक बार लगभग समान ही प्राप्त होता है। 100 cm लंबाई के लोलक के प्र तदश पाठ्यांक के साथ ता लका 8.1 इस
प्रकार भरी जाएगी। दोलनकाल = (10 दोलन म लया गया समय) ÷ 10।

ता लका 8.1 — सरल लोलक का दोलनकाल (डोरी क लंबाई = 100 CM)

क्र.सं. 10 दोलन म लया गया समय (सेकंड) दोलनकाल (सेकंड)

1. 20.1 20.1 ÷ 10 = 2.01

2. 19.9 19.9 ÷ 10 = 1.99

3. 20.2 20.2 ÷ 10 = 2.02

पत्येक बार दोलनकाल ≈ 2 s

पाठ ांक ों में सबसे अिधक अंत र = 2.02 s − 1.99 s = के वल 0.03 s

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कक्षा 7 व ान अध्याय 8 समय एवं ग त का मापन AglaSem · NCERT Solutions

नष्कष: कसी न त लंबाई के सरल लोलक का एक ही ान पर दोलनकाल अचर रहता है। पाठ्यांक का मामूली अंतर घड़ी
चलाने और रोकने म लगी हमारी प्र त क्रया-अव ध के कारण है, लोलक के कारण नह ।

एक दोलन के बजाय 10 दोलन का समय क्य मापते ह: हाथ क प्र त क्रया म लगभग 0.2 s लगते ह। य द 2 s
के एक ही दोलन को माप तो यह त्रु ट पूरे 10% हो जाती है। 10 दोलन (20 s) का समय मापने पर वही त्रु ट दस
दोलन म बँट जाती है — प्र त दोलन 0.02 s, अथात केवल 1%। अनेक आवृ त्तय का मापन करके भाग दे ना त्रु ट
घटाने क मानक व ध है।

सुझाव: दोलन क गनती 0, 1, 2, 3 … से क जए — घड़ी 'शून्य' पर चलाइए, 'एक' पर नह । एक से गनने पर
दस के भ्रम म वास्तव म नौ ही दोलन मापे जाते ह।

एक वै ा नक क तरह सो चए! — पृष्ठ 110
8.1.1 सरल लोलक

एक वै ा नक क तरह सो चए!

प्र.1 मान ली जए क आप गैली लयो ह और लोलक को लेकर प्रयोग कर रहे ह। सो चए क आपके अन्वेषण के क्या-
क्या बदु ह गे? वे कौन से प्रश्न ह गे जनके उत्तर पाने के लए आप प्रयोग करगे? क्या सभी लोलक के दोलनकाल
समान होते ह? इसक जाँच आप कस प्रकार करगे?

वै ा नक सबसे पहले उन सभी बात क सूची बनाता है जो दोलनकाल को बदल सकती ह, और फर उन्ह एक-एक करके बदलता
है। ये बात हो सकती ह:

1. लोलक क लंबाई (आधार से गोलक के कद्र तक),
2. गोलक का द्रव्यमान,
3. गोलक का पदाथ (लोहा, पत्थर, काँच),
4. गोलक को एक ओर कतना व ा पत कया गया (दोलन का वस्तार),
5. वह ान जहाँ प्रयोग कया जा रहा है।

पूछने योग्य प्रश्न: क्या लंबा धागा धीमे दोलन कराता है? क्या भारी गोलक तेज दोलन करता है? दोलन छोटा होने पर क्या वह धीमा
पड़ता है? क्या दल्ली और कसी पहाड़ी पर दोलनकाल एक-सा रहेगा?
क्या सभी लोलक के दोलनकाल समान होते ह? नह । भन्न लंबाई के लोलक के दोलनकाल भन्न होते ह। कतु एक ही लंबाई
के सभी लोलक का कसी एक ान पर दोलनकाल समान होता है, चाहे गोलक कसी भी पदाथ का हो।

जाँच कैसे कर — नष्पक्ष प्रयोग का नयम: एक समय म केवल एक ही बात बद लए, शेष सब वैसा ही र खए।
लंबाई क जाँच के लए वही गोलक रखकर केवल धागा बद लए; द्रव्यमान क जाँच के लए वही लंबाई रखकर
केवल गोलक बद लए। दो बात साथ बदल द तो कभी नह कह पाएँगे क अंतर कसके कारण आया।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 8 समय एवं ग त का मापन AglaSem · NCERT Solutions

क्या आप जानते ह? गैली लयो के पास वराम-घड़ी नह थी। गरजाघर म बैठे हुए उन्ह ने झूलते लप का समय
अपनी नाड़ी के स्पंदन से मापा और पाया क प्रत्येक दोलन म समान समय लगता है। इसी अवलोकन से आगे
चलकर हाइगेन्स क लोलक घड़ी बनी।

प्र.2 क्रयाकलाप 8.2 को एक ही गोलक के साथ दो या तीन अलग-अलग लंबाई के लोलक बनाकर दोहराइए। क्या
दोलनकाल बदलता है? य द ऐसा होता है तो दोलनकाल पर लंबाई का क्या प्रभाव पड़ता है?

हाँ, दोलनकाल बदलता है। एक ही गोलक के साथ लए गए प्र तदश पाठ्यांक:

लोलक क लंबाई 10 दोलन म लगा समय दोलनकाल प्रेक्षण

25 cm 10.0 s 1.0 s छोटा लोलक — शीघ्र दोलन करता है

50 cm 14.2 s 1.42 s अ धक लंबा — धीमा

100 cm 20.0 s 2.0 s सबसे लंबा — सबसे धीमा

लंबाई का प्रभाव: लोलक जतना लंबा होगा, उसका दोलनकाल उतना ही अ धक होगा। लंबा लोलक धीमे और छोटा लोलक तेज
दोलन करता है। यह भी ध्यान द जए क लंबाई दोगुनी करने पर दोलनकाल दोगुना नह होता — 25 cm से 100 cm (चार गुनी
लंबाई) करने पर दोलनकाल केवल दोगुना हुआ।

यह इतना उपयोगी क्य है: चूँ क दोलनकाल लंबाई पर एक न त ढं ग से नभर करता है, इस लए घड़ी बनाने
वाला लोलक घड़ी को समं जत कर सकता है। हाइगेन्स क घड़ी धीमी चलने पर गोलक को थोड़ा ऊपर उठा दया
जाता था (छोटा लोलक, कम दोलनकाल, तेज चाल)। आज भी लोलक घ ड़य म गोलक के नीचे यह समंजन-पेच
लगा होता है।

यह भी क जए: लगभग 1 मीटर के लोलक का दोलनकाल 2 सेकंड के आस-पास होता है — एक ओर से दूसरी
ओर जाने म ठ क एक सेकंड। इसी लए पुरानी द वार घ ड़याँ इतनी लंबी होती थ ।

प्र.3 य द लंबाई बदलने का प्रभाव दोलनकाल पर होता है तो क्या गोलक का द्रव्यमान भी इसको प्रभा वत करता है?
एक नयत लंबाई क डोरी और भन्न- भन्न द्रव्यमान के गोलक से लोलक बनाइए और प्रत्येक से क्रयाकलाप 8.2
दोहराकर इसक जाँच क जए। क्या आप दोलनकाल म कोई अंतर पाते ह?

कोई अंतर नह मलता। लंबाई 100 cm पर र रखकर केवल गोलक बदलने पर:

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कक्षा 7 व ान अध्याय 8 समय एवं ग त का मापन AglaSem · NCERT Solutions

प्रयुक्त गोलक (लंबाई 100 CM नयत) 10 दोलन म लगा समय दोलनकाल

लोहे की छोटी गेंद (हल्की) 20.0 s 2.0 s

धातु की भारी गेंद 20.1 s 2.01 s

लगभग उसी आमाप का पत्थर 19.9 s 1.99 s

यह मामूली अंतर केवल मापन-त्रु ट है। अतः बॉक्स का नष्कष सद्ध होता है: सरल लोलक का दोलनकाल इसक लंबाई पर नभर
करता है कतु गोलक के द्रव्यमान पर नह । कसी एक ान पर एक ही लंबाई के सभी लोलक का दोलनकाल समान होता है।

भारी गोलक पीछे क्य नह रह जाता: भारी गोलक को गुरुत्व अ धक बल से ख चता है, कतु भारी होने के कारण
उसे ग त म लाना भी उतना ही क ठन होता है। दोन प्रभाव आपस म कट जाते ह, इस लए दोलन म उतना ही समय
लगता है। इसी कारण एक साथ गराए गए भारी और हल्के पत्थर धरती पर एक साथ पहुँचते ह — यह भी गैली लयो
से जुड़ी खोज है।

स्वयं जाँ चए: डोरी क लंबाई सदै व गोलक के कद्र तक मा पए। छोटे गोलक के ान पर बहुत बड़ा गोलक
बाँधकर य द लंबाई फर से न मापी जाए तो लंबाई चुपके से बदल जाती है और आप गलती से यह नष्कष नकाल
लगे क द्रव्यमान का प्रभाव पड़ता है।

क्रयाकलाप 8.3: आइए, पहचान — पृष्ठ 112

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कक्षा 7 व ान अध्याय 8 समय एवं ग त का मापन
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8.1.2 समय का SI मात्रक
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क्रयाकलाप

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a s em8.9 म दशाई गई द वार-घड़ी को ध्यानपूवक दे खए। आप इसके ारा छोटे से छोटे कतने समय-अंतराल को
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चत्र 8.9, पृष्ठ 112 — द वार-घड़ी का पुनः बनाया गया रेखा चत्र।

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1 सेकंड। 1 सेकंड वह न्यूनतम समय-अंतराल है जसे इस घड़ी के ारा मापा जा सकता है।

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चत्र 8.9 के डायल पर ध्यान द जए:
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1 से 12 तक क संख्याएँ घंटे दशाती ह।
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दो संख्याओं के बीच पाँच छोटेgअं
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इसम तीन सुइयाँ ह — छोट घंटा सुई, बड़ी मनट सुई और पतली, तेज चलने वाली सेकंड सुई।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 8 समय एवं ग त का मापन AglaSem · NCERT Solutions

सेकं ड सुई पूरा डायल 1 िमनट = 60 s में पार करती है

छोटे भागों की संख्या = 60

सेकं ड सुई को एक भाग पार करने में लगा समय = 60 s ÷ 60 = 1 s

सबसे छोटा अंशांकन ही यह क्य तय करता है: कसी मापक यंत्र से मापा जा सकने वाला न्यूनतम मान उसके
पैमाने के एक अंशांकन के बराबर होता है — ठ क वैसे ही जैसे मलीमीटर अं कत मापक 1 mm से कम नह माप
सकता। इस घड़ी म छोटे भाग के बीच कोई और चह्न नह है, इस लए 1 s से छोटा अंतराल इससे नह पढ़ा जा
सकता।

क्या आप जानते ह? खेल क वराम-घड़ी सेकंड के सौव और यहाँ तक क हजारव भाग ( मली सेकंड) तक पढ़ती
है। इसी से उस समय वजेता तय होता है जब दो धावक समापन रेखा लगभग एक साथ पार करते प्रतीत होते ह —
वही बात जस पर अध्याय के आरंभ म प्रेरणा को वस्मय होता है।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 112 और 113
8.2 धीमा या तेज · 8.3 चाल

प्र.1 समान दूरी क दौड़ के लए समय माप कर हम यह बता सकते ह क कौन अ धक तेज दौड़ा। कतु अलग-अलग
दू रय क दौड़ क तुलना करनी हो तो हम यह कस प्रकार बता पाएँगे?

यह दे खकर क प्रत्येक धावक ने इकाई समय म कतनी दूरी तय क — अथात उनके चाल क तुलना करके, समय क नह ।
दू रयाँ भन्न ह तो केवल समय से कुछ नह कहा जा सकता। इन दो दौड़ को दे खए:

धावक दूरी समय 1 सेकंड म तय दूरी

पेर णा 100 m 12.5 s 100 ÷ 12.5 = 8 m/s

उसकी सहेल ी 400 m 62.5 s 400 ÷ 62.5 = 6.4 m/s

सहेली कह अ धक समय तक दौड़ी और कह अ धक दूरी तय क , फर भी दोन म तेज प्रेरणा ही रही — क्य क उसने प्रत्येक
सेकंड म अ धक दूरी तय क ।

चाल ही नष्पक्ष तुलना क्य है: दूरी को समय से वभा जत करते ही यह बात हट जाती है क दौड़ कतनी लंबी थी।
दौड़ चाहे जतनी लंबी हो, चाल एक ही प्रश्न का उत्तर दे ती है — 'प्र त सेकंड कतनी दूरी?' इसी लए दो बलकुल
भन्न दौड़ भी आमने-सामने रखी जा सकती ह।

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कक्षा 7 व ान अध्याय 8 समय एवं ग त का मापन AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 जब हम कहते ह क कसी वस्तु क ग त धीमी है या तेज है तो हमारा क्या अ भप्राय होता है?

हमारा अ भप्राय दए गए समय-अंतराल म चली गई दू रय क तुलना से होता है। कोई वस्तु तेज है य द वह समान समय म
अ धक दूरी तय करती है, और धीमी है य द कम दूरी तय करती है।

बस 1 घंटे में → 40 km

साइिकल सवार 1 घंटे में → 15 km

समय समान, दू री अिधक ⇒ बस अिधक ते ज

अतः 'धीमा' और 'तेज' कभी नरपेक्ष शब्द नह होते। साइ कल सवार पैदल चलते व्य क्त क तुलना म तेज है और बस क तुलना म
धीमा।

समय समान होना क्य आवश्यक है: य द 1 घंटे म 40 km क तुलना 20 मनट म 15 km से कर तो केवल
दे खकर कुछ नह कहा जा सकता — 20 मनट म 15 km का अथ है एक घंटे म 45 km, अथात साइ कल सवार
ही तेज नकलेगा। 'अ धक दूरी' का अथ 'अ धक तेज' केवल तभी होता है जब समय-अंतराल समान हो।

प्र.3 सभी धावक आरंभ रेखा से एक साथ दौड़ना प्रारंभ करते ह। परंतु कुछ समय के प ात वे आगे-पीछे हो जाते ह
( चत्र 8.10)। हम कस प्रकार नणय करते ह क उनम से कौन अ धक तेज दौड़ रहा है?

आरंभ रे खा
चत्र 8.10, पृष्ठ 113 — पुनः बनाया गया रेखा चत्र — सीधे पथ पर दौड़ लगाते बालक।

उस क्षण पर जो धावक सबसे आगे है, वही सबसे तेज दौड़ रहा है। सभी धावक एक ही आरंभ रेखा से एक साथ चले थे, अतः
सभी को दौड़ते हुए समान समय बीता है। जो आगे है उसने समान समय म अ धक दूरी तय क है।

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आरंभ

क

ख

ग

समान समय के बाद तीन धावकों की िस्थितयाँ
तीन एक साथ चले थे। धावक 'क' सबसे आगे है, अतः उसने उस समय म सबसे अ धक दूरी तय क और वही सबसे तेज है।

यह तक यह क्य चलता है: क्य क सबका आरंभ-क्षण एक ही था। य द धावक अलग-अलग समय पर चले होते
तो आगे होने से कुछ सद्ध नह होता — तब प्रत्येक धावक क चाल अलग से ात करनी पड़ती।

प्र.4 हम कसी वस्तु क चाल कैसे ात कर सकते ह?

य द हम वस्तु ारा चली गई कुल दूरी और उस दूरी को तय करने म लगा समय ात हो, तो उसक चाल का प रकलन कया जा
सकता है।

चाल = चली गई कु ल दू री ÷ दू री चलने में लगा कु ल समय

पुस्तक के उदाहरण 8.1 का हल — स्वा त का व ालय घर से 3.6 km दूर है और वह साइ कल से 15 मनट लेती है:

दू री = 3.6 km = 3.6 × 1000 m = 3600 m

समय = 15 min = 15 × 60 s = 900 s

चाल = 3600 m ÷ 900 s = 4 m/s

पहले मात्रक क्य बदलते ह: दूरी और समय उन्ह मात्रक म होने चा हए जनम उत्तर चा हए। m/s म उत्तर के
लए दूरी मीटर म और समय सेकंड म ली जए; km/h के लए दूरी कलोमीटर म और समय घंटे म।

सुझाव: यही संबंध बदलकर दो और प्रश्न का उत्तर दे ता है — दूरी = चाल × समय तथा समय = दूरी ÷ चाल।

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प्र.5 चाल का मात्रक क्या होगा?

चाल = दूरी ÷ समय है, अतः इसका मात्रक लंबाई के मात्रक को समय के मात्रक से वभा जत करने पर बनता है। चाल का SI
मात्रक मीटर/सेकंड है, जसे m/s लखा जाता है।

दूरी जसम हो… …और समय जसम हो… …तो चाल का मात्रक कहाँ प्रयोग

मीटर (m) सेकंड (s) m/s (SI मात्र क ) धावक, गरती वस्तुए,ँ भौ तक के प्रश्न

िकलोमीटर (km) घंटा (h) km/h बस, रेलगाड़ी, चालमापी

रूपांत रण: 1 m/s की वस्त ु 1 घंटे में 3600 m = 3.6 km चलती है

अतः: m/s → km/h : 3.6 से गुणा · km/h → m/s : 3.6 से भाग

स्वयं जाँ चए: 72 km/h क रेलगाड़ी क चाल 72 ÷ 3.6 = 20 m/s है और 8 m/s के धावक क चाल 8 ×
3.6 = 28.8 km/h।

क्रयाकलाप 8.4: आइए, प रकलन कर — पृष्ठ 114 और 115
8.3 चाल

क्रयाकलाप

प्र.1 इन दो स्टे शन के बीच रेलगाड़ी क चाल का प रकलन क जए तथा ता लका 8.2 म अ भले खत क जए।

रेलवे समय सारणी से अगले ठहराव तक क दूरी ली जए और अपने स्टे शन से प्र ान तथा अगले स्टे शन पर आगमन के समय का
अंतर नका लए, फर भाग द जए।

रेलगाड़ ी की चाल = अगले स्टे शन की दू री ÷ अगले स्टे शन तक जाने में लगा समय

नमूना उत्तर ( नकटतम रेलवे स्टे शन: भोपाल जंक्शन) — अपनी समय सारणी के मान इसी प्रकार भ रए:

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as e
कक्षा 7 व ान अध्याय 8 समय एवं ग त का मापन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
ता लका 8.2 — रेलगा ड़य क चाल ात करना

m as e
क्र.सं.
. c o
रेलगाड़ी का अगले अगले स्टे शन अगले स्टे शन तक
a g l
इन दो स्टे शन के बीच

sem
नाम स्टे शन का क दूरी (KM) जाने म लगा समय रेलगाड़ी क चाल
a
agl
नाम (H) (KM/H)

1. झाँसी 291 3.00
m
वंदे भारत 291 ÷ 3.00 = 97 km/h

. co ag
एक्सपेस

em
2. झाँसी
g l
291
as 3.50
a
शताब्दी 291 ÷ 3.50 = 83.1 km/h
एक्सपेस

3. बीना 139 2.25
co m
m.
पंजाब मेल 139 ÷ 2.25 = 61.8 km/h

se
(एक्सपेस )

m l a
.cइंटoरिसटी ag 54 ÷ 0.75 = 72 km/h
sem एक्सपेस
4. व दशा 54 0.75

a
agl5. सवारी गाड़ी व दशा 54 1.50 54 ÷ 1.50 = 36 km/h

om a s
समय पर वशेष ध्यान द जए: समय सारणीem
. c agl
a s घड़ी का समय दे ती है, अव ध नह । य द गाड़ी 06:20 पर चले और

a l मनट = 1.5 h है, 1.30 h नह । मनट को सदै व घंटे के भन्न म बद लए
07:50 पर पहुँचे तो लगा समय 1 घंटाg30
(30 मनट = 0.5 h, 45 मनट = 0.75 h, 15 मनट = 0.25 h)।

co m
m .
o m l a se
प्र.2 .cरेलगा ड़य क चाल क तुलना क जए। इनम सबसे तेज चलने वाली रेलa g कौन-सी है?
e m गाड़ी

las
ag उत्तर
se m
com g l a
.
वह रेलगाड़ी जो इकाई समय म सबसे अ धक दूरी तय करती है अथात जसक चाल सबसे अ धक है, वही सबसे तेज

m a
ase
चलने वाली रेलगाड़ी है। ऊपर क नमूना ता लका म यह वंदे भारत एक्सप्रेस (97 km/h) है।

a gl
तेज से धीमी के क्रम म: वंदे भारत (97 km/h) > शताब्द (83.1 km/h) > इंटर सट (72 km/h) > पंजाब मेल (61.8
km/h) > सवारी गाड़ी (36 km/h)।

co m
m .
e
सबसे लंबी यात्रा सबसे तेज क्य नह होती: पंजाब मेल ने 139 km चली और इंटर सट ने केवल 54 km, फर
m l as
.co a g
भी दोन म इंटर सट तेज है। बड़ी दूरी बड़े समय म तय करने पर भी चाल कम रह सकती है। नणय केवल प्र त घंटा

a s em दूरी से होता है।

agl
.c
क्या आप जानते ह? सुपरफास्ट गा ड़याँ कम स्टे शन पर रुकती ह, और प्रत्येक ठहराव म धीमा होना, रुकना और
s e m
m a
. co agl
फर चाल पकड़ना — तीन म समय लगता है। उसी पटरी पर चलने वाली सवारी गाड़ी इसी लए इतनी धीमी पड़
e m
l as
जाती है।

a g

com
m .
m ase
.co


a g l Page 14 of 34

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पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 116
8.4 एकसमान एवं असमान रेखीय ग त

प्र.1 मने एक बार एक सीधी सड़क पर लंबी दौड़ (मैराथन) के एक भाग को दे खा। मुझे ऐसा लगा क कुछ व्य क्त उस
पूरी दूरी म समान चाल से दौड़ रहे थे जब क कुछ अन्य व्य क्त या तो अपनी चाल धीमी कर रहे थे या बढ़ा रहे थे।
उनक ग त भन्न कैसे थी?

दोन प्रकार के धावक रेखीय ग त के दो भन्न रूप म थे।

जो समान चाल से दौड़ रहे थे जो चाल घटा-बढ़ा रहे थे

एकसमान रे खीय गित — सरल रे खा में िनयत चाल से गित असमान रे खीय गित — सरल रे खा में ऐसी गित िजसमें चाल बदलती रहती
है

समान समय-अंतरालों में समान दू िरयाँ तय करते है ं (जैसे पत्येक समान समय-अंतरालों में असमान दू िरयाँ तय करते है ं (एक िमनट में 250
िमनट में 200 m) m, अगले में 150 m)

िकसी भी क्षण की चाल उनकी औसत चाल के बराबर होती है िकसी क्षण की चाल औसत चाल से कम या अिधक हो सकती है

दोन वग एक ही सीधी सड़क पर दौड़ रहे थे, अतः दोन क ग त रेखीय है। अंतर केवल इतना है क चाल नयत रही या नह ।

'रेखीय' और 'एकसमान' दो अलग बात क्य ह: 'रेखीय' पथ बताता है — सरल रेखा। 'एकसमान' चाल बताता
है — अप रव तत। वृत्ताकार पथ पर 40 km/h क नयत चाल से चलती कार क चाल तो नह बदलती, पर पथ
सरल रेखा नह है, अतः वह एकसमान रेखीय ग त म नह है।

प्र.2 आपने कक्षा 6 म व ान क पाठ्यपुस्तक ज ासा के अध्याय ‘लंबाई एवं ग त का मापन’ म रेखीय ग त के संबंध
म जो सीखा था, क्या आपको वह याद है?

हाँ। कक्षा 6 म हमने सीखा था क जब कोई वस्तु एक सरल रेखा के अनु दश ग त करती है तो इसक ग त सरल रेखीय ग त
कहलाती है।
उस अध्याय म ग त के प्रमुख प्रकार अलग-अलग बताए गए थे:

रेखीय ग त — सरल रेखा के अनु दश: सीधी पटरी पर रेलगाड़ी, सीधी सड़क पर माच करते ब े, सीधी ढलान पर लुढ़कती
गद।
वृत्तीय ग त — वृत्ताकार पथ पर: घड़ी क सुइयाँ, मेले का झूला (मेरी-गो-राउं ड)।
दोलन ग त — कसी नयत त के इधर-उधर आगे-पीछे : झूला और इसी अध्याय के भाग 8.1.1 का लोलक।

यह अध्याय रेखीय ग त पर एक नया प्रश्न जोड़ता है: चाल नयत है या बदल रही है? इसी से रेखीय ग त एकसमान और असमान म
बँट जाती है।

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सुझाव: चत्र 8.11 क रेलगाड़ी एक ही यात्रा म दोन दखाती है — 'क' से 'ख' तक असमान (चाल बढ़ती है), 'ख'
से 'ग' तक एकसमान ( नयत चाल), और 'ग' से 'घ' तक फर असमान (चाल घटकर रुक जाती है)।

पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 117
8.4 एकसमान एवं असमान रेखीय ग त

प्र.1 इनम से कौन-सी रेलगाड़ी 10:00 और 11:00 बजे के बीच एकसमान रेखीय ग त म है?

रेलगाड़ी X। रेलगाड़ी X समान समय-अंतराल म समान दूरी तय करती है, इस लए यह एकसमान रेखीय ग त म है, जब क रेलगाड़ी
Y असमान रेखीय ग त म है।
ता लका 8.3 के दूरी स्तंभ को प्रत्येक 10- मनट के अंतराल के लए प ढ़ए:

अंतराल (प्रत्येक 10 मनट) रेलगाड़ी X — दूरी (KM) रेलगाड़ी Y — दूरी (KM)

10:00 – 10:10 20 20

10:10 – 10:20 20 15

10:20 – 10:30 20 15

10:30 – 10:40 20 25

10:40 – 10:50 20 20

10:50 – 11:00 20 25

1 घंटे में कु ल 120 km 120 km

रेलगाड़ ी X की चाल = 20 km ÷ 10 min = 20 km ÷ (1/6) h = पत्येक अंत राल में 120 km/h

रेलगाड़ ी Y: 20 km/10 min = 120 km/h, िफर 15 km/10 min = 90 km/h, िफर 25 km/10 min = 150

km/h — चाल बदलती रहती है

दोनों रेलगािड़ यों की औसत चाल = 120 km ÷ 1 h = 120 km/h

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रेलगाड़ ी X रेलगाड़ ी Y
120

100

80
िस्थित (km)

60

40

20

0
10:00 10:10 10:20 10:30 10:40 10:50 11:00
समय (पूव ह्न)

ता लका 8.3 का दूरी-समय ाफ। रेलगाड़ी X क रेखा पूणतः सीधी है — एकसमान ग त। रेलगाड़ी Y क रेखा मुड़ी हुई है, क्य क उसक
चाल बदलती रहती है।

औसत चाल समान होने पर भी दोन एक जैसी क्य नह : दोन रेलगा ड़याँ 0 km से चलकर एक घंटे म 120
km पहुँच , अतः दोन क औसत चाल 120 km/h है। कतु Y कभी धीमी और कभी तेज चलकर वहाँ पहुँची।
औसत चाल पूरी यात्रा क बात बताती है; यात्रा के भीतर क्या हुआ, यह छपा लेती है। ाफ कुछ नह छपाता —
सीधी रेखा अथात एकसमान, मुड़ी रेखा अथात असमान।

आइए, और अ धक सीख — पृष्ठ 118 और 119

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अध्याय के अभ्यास प्रश्न

आइए, और अ धक सीख

प्र.1 उस कार क चाल का प रकलन क जए जो 10 सेकंड म 150 मीटर चलती है। अपने उत्तर को km/h म व्यक्त
क जए।

चाल = चली गई कु ल दू री ÷ िलया गया कु ल समय

= 150 m ÷ 10 s

= 15 m/s

अब m/s को km/h म बद लए:

150 m = 150 ÷ 1000 km = 0.15 km

10 s = 10 ÷ 3600 h

चाल = 0.15 km ÷ (10/3600) h = 0.15 × 360 = 54 km/h

सं क्षप्त व ध से भी वही उत्तर मलता है:

1 m/s = 3.6 km/h

15 m/s = 15 × 3.6 = 54 km/h

3.6 कहाँ से आता है: 1 m/s क चाल से चलती वस्तु 1 सेकंड म 1 m चलती है। 1 घंटे (3600 s) म वह 3600
m = 3.6 km चलेगी। अतः 1 m/s और 3.6 km/h एक ही चाल ह — एक ओर जाते समय 3.6 से गुणा, लौटते
समय 3.6 से भाग।

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as e
कक्षा 7 व ान अध्याय 8 समय एवं ग त का मापन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
एक धावक 50 सेकंड म 400 मीटर क दूरी तय करता है। कोई दूसरा धावक यही दूरी 45 सेकंड म पूरी करता है।
e
प्र.2

m l as
.co
कसक चाल अ धक है और कतनी अ धक है?

a g
se m
g l a
a

om
पहला धावक: चाल = 400 m ÷ 50 s = 8 m/s
. c
em(8 8/9 m/s) ≈ 8.9 m/s ag
a s
दू सरा धावक: चाल = 400 m ÷ 45 s = 8.89 m/s

agl
दूसरे धावक क चाल अ धक है — जसने समान दूरी कम समय म पूरी क ।

co m
e m.
m l as
.co
अंत र = 8.89 m/s − 8 m/s = 0.89 m/s (ठीक-ठीक 8/9 m/s ≈ 0.9 m/s)
a g
se m
g l a
a
km/h म संख्याएँ और भी सरल आती ह:

m a s
.co agl
8 m/s = 8 × 3.6 = 28.8 km/h

se m
8.89 m/s = 8.89 × 3.6 = 32 km/h
g l a
अंत र = 32 − 28.8 = 3.2 km/h a

. com
कम समय का अथ अ धक चाल क्य : दोन क दूरी समान है, अतः चाल केवल हर मeलखे
s m समय पर नभर करती
m
coछोटा होने पर भागफल बड़ा हो जाता है। 400 m क दौड़ म 5 s क बचत a
glने चाल लगभग 0.9 m/s बढ़ा
m .
है। हर
a
aseद ।
agl
se m
com g l a
m . a
ase
प्र.3 एक रेलगाड़ी 25 m/s क चाल से चलती है और 360 km क दूरी तय करती है। इसे यह दूरी तय करने म कतना

agl
समय लगता है?

co m
m .
m as e
.co
िलया गया कु ल समय = चली गई कु ल दू री ÷ चाल
a g l
a s em
agl चाल m/s म है, अतः पहले दूरी को मीटर म बद लए:
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a

com
m .
m ase
.co


a g l Page 19 of 34

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360 km = 360 × 1000 m = 3,60,000 m

समय = 3,60,000 m ÷ 25 m/s = 14,400 s

14,400 s ÷ 60 = 240 min = 240 ÷ 60 = 4 h

km/h म हल करके जाँच क जए:

25 m/s = 25 × 3.6 = 90 km/h

समय = 360 km ÷ 90 km/h = 4 h ✔

सुझाव: इस अध्याय क सबसे आम भूल मात्रक को मला दे ना है। भाग दे ने से पहले दे खए क दोन रा शयाँ एक ही
प रवार क ह या नह — m के साथ s, अथवा km के साथ h।

प्र.4 कोई रेलगाड़ी 3 घंटे म 180 km क दूरी तय करती है। इसक चाल का प रकलन क जए — (i) km/h म (ii)
m/s म (iii) य द रेलगाड़ी अपनी संपूण यात्रा म समान चाल बनाए रखती है तो 4 घंटे म यह कतनी दूरी तय
करेगी?

(i) km/h म

चाल = 180 km ÷ 3 h = 60 km/h

(ii) m/s म

180 km = 1,80,000 m · 3 h = 3 × 3600 s = 10,800 s

चाल = 1,80,000 m ÷ 10,800 s = 16.67 m/s (अथ त 50/3 m/s ≈ 16.7 m/s)

जाँच : 60 ÷ 3.6 = 16.67 m/s ✔

(iii) समान चाल पर 4 घंटे म दूरी

कु ल चली गई दू री = चाल × चलने में िलया गया कु ल समय

= 60 km/h × 4 h = 240 km

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भाग (iii) म 'समान चाल बनाए रखती है' क्य आवश्यक है: दूरी = चाल × समय सूत्र पूरी यात्रा के लए एक ही
चाल मानता है। यह तभी उ चत है जब ग त एकसमान हो; अन्यथा उन 4 घंट क औसत चाल चा हए होती, जो प्रश्न
म द ही नह गई है।

प्र.5 सबसे अ धक चाल से चौकड़ी भरता हुआ घोड़ा लगभग 18 m/s तक क चाल प्राप्त कर सकता है। 72 km/h
क चाल से ग तमान रेलगाड़ी क तुलना म यह कम है या अ धक है?

तुलना से पहले दोन चाल को एक ही मात्रक म लाइए।

रेलगाड़ ी: 72 km/h = 72 ÷ 3.6 = 20 m/s

घोड़ ा: 18 m/s = 18 × 3.6 = 64.8 km/h

M/S म KM/H म

चौकड़ी भरता घोड़ा 18 64.8

रे ल गाड़ी 20 72

घोड़े क चाल रेलगाड़ी से कम है। रेलगाड़ी 2 m/s (अथात 7.2 km/h) अ धक तेज है। दूसरे शब्द म, घोड़े क चाल 18 ÷ 20
= 0.9, अथात रेलगाड़ी क चाल का 90% है — कसी पशु के लए यह बहुत अ धक है।

बना रूपांतरण के तुलना क्य असंभव है: 72 क संख्या 18 से चार गुनी दखती है, जससे भ्रम होता है क
रेलगाड़ी चार गुनी तेज है। मात्रक भन्न होने के कारण इन संख्याओं क तुलना क ही नह जा सकती। पहले मात्रक
समान क जए, तब तुलना क जए।

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प्र.6 एक यातायात वहीन सरल रेखीय राजमाग पर ग तमान कार तथा एक अन्य कार जो शहर के यातायात के बीच
चल रही है, इन दोन का उदाहरण लेते हुए एकसमान एवं असमान ग त के बीच वभेद क जए।

अंतर का आधार यातायात वहीन सीधे राजमाग पर कार शहर के यातायात म कार

गित का पकार एकसमान रे खीय गित असमान रे खीय गित

चाल नयत रहती है, जैसे 60 km/h, क्य क उसे बदलने नरंतर बदलती है — लाल बत्ती और चौराह पर
क कोई ववशता नह धीमी, रास्ता खुलते ही तेज

समान समय-अंतरालों में समान: प्रत्येक मनट म 1 km असमान: एक मनट म 1 km, अगले मनट म
दू र ी केवल 300 m

चालमापी का पाठ ांक सुई लगभग एक ही ान पर टक रहती है सुई ऊपर-नीचे होती रहती है और संकेत पर शून्य
तक आ जाती है

दू र ी-समय ग ाफ सरल रेखा मुड़ी हुई असमान रेखा, रुकने पर क्षै तज

िकसी क्षण की चाल बनाम औसत चाल के बराबर कभी अ धक, कभी कम
औसत चाल

दोन कार सीधी सड़क पर चल रही ह, अतः दोन क ग त रेखीय है। अंतर केवल इस बात का है क चाल नयत रहती है या नह ।

वास्त वक यात्राएँ प्रायः एकसमान क्य नह होत : राजमाग वाली कार को भी टोल प्लाजा या मोड़ पर धीमा होना
ही पड़ता है। एकसमान रेखीय ग त एक आदश अवधारणा है — इसी लए पुस्तक कहती है क हम औसत चाल का
उपयोग करना पड़ता है।

प्र.7 व भन्न समय-अंतराल म कसी वस्तु ारा च लत दू रय के आँकड़े ता लका म दए गए ह। य द वस्तु एकसमान
ग त म है तो ता लका म छोड़े गए रक्त ान क पू त क जए

समय(S) 0 10 20 30 ___ 50 ___ 70

दूरी(M) 0 8 ___ 24 32 40 ___ 56

पहले कसी ऐसे युग्म से चाल ात क जए जसके दोन मान दए ह, फर उसी चाल से प्रत्येक रक्त ान भ रए।

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चाल = 8 m ÷ 10 s = 0.8 m/s

िकसी अन्य पूण युग् म से जाँच : 24 m ÷ 30 s = 0.8 m/s ✔ तथा 40 m ÷ 50 s = 0.8 m/s ✔

अब दूरी = 0.8 × समय तथा समय = दूरी ÷ 0.8 से रक्त ान भ रए:

20 s पर दू री = 0.8 × 20 = 16 m

32 m के िलए समय = 32 ÷ 0.8 = 40 s

सातवाँ स्तं भ (50 s और 70 s के बीच) = 60 s, तथा दू री = 0.8 × 60 = 48 m

समय (S) 0 10 20 30 40 50 60 70

दूरी (m) 0 8 16 24 32 40 48 56

भरे गए मान नारंगी रंग म ह: 16 m, 40 s, 60 s तथा 48 m।

56
48
दूरी (m)

32

16

0
0 20 40 60 70
समय (s)
आठ पाठ्यांक एक ही सरल रेखा पर, मूल बदु से होकर, त ह — यही एकसमान ग त क पहचान है। नारंगी बदु भरे गए मान ह।

एक सरल रेखा ही पयाप्त क्य है: एकसमान ग त म वस्तु प्रत्येक सेकंड म 0.8 m चलती है, चाहे गनती कह से
भी आरंभ कर। इस लए दूरी और समय एक न त अनुपात म साथ-साथ बढ़ते ह और ाफ मूल बदु से जाती सरल
रेखा ही हो सकता है। तब कोई भी रक्त मान इसी रेखा से सीधे पढ़ा जा सकता है।

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as e
कक्षा 7 व ान अध्याय 8 समय एवं ग त का मापन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
कोई कार अपनी यात्रा के पहले घंटे म 60 km, दूसरे घंटे म 70 km और तीसरे घंटे म 50 km क दूरी तय करती
em
प्र.8

m a s
co gl
है। क्या इसक ग त एकसमान है? अपने उत्तर का औ चत्य बताइए। कार क औसत चाल का प रकलन क जए।

. a
उत्तर as
em
l
ag, इसक
नह ग त एकसमान नह है।

co m
ag
औ चत्य: एकसमान ग त म वस्तु समान समय-अंतराल म समान दू रयाँ तय करती है। यहाँ समय-अंतराल तो समान ह (एक-एक

m .
e
घंटा), कतु दू रयाँ समान नह ह:

g l as
a
पहला घंट ा → 60 km · दू सरा घंट ा → 70 km · तीसरा घंट ा → 50 km

co m
m.
60 km ≠ 70 km ≠ 50 km ⇒ असमान गित

as e
. com a g l
em
औसत चाल:

a s
agl चली गई कु ल दू री = 60 + 70 + 50 = 180 km

m a s
.co agl
िलया गया कु ल समय = 1 + 1 + 1 = 3 h

se m
औसत चाल = 180 km ÷ 3 h = 60 km/h
g l a
SI मात्रक में: 60 ÷ 3.6 = 16.67 m/s a

co m
m .
o m l a se
पहले जोड़कर फर एक ही बार भाग क्य दे ते ह: औसत चाल = कुल दूरी ÷ कुल समय होती है, तीन अलग-
.c चाल का औसत नह । यहाँ दोन उत्तर संयोग से समान ((60+70+50)/3
a g= 60) इस लए आए क्य क तीन
m
aseअंतराल बराबर ह। य द कार 1 घंटे म 60 km और 2 घंटे म 70 km चलती, तो चाल का औसत नकालने पर उत्तर
अलग

agl गलत आता।

se m
com g l a
m . a
e
s चाल से नह चल रही थी। औसत चाल पूरी यात्रा का सारांश है, कसी
क्या आप जानते ह? कार क औसत चाल 60 km/h ठ क वही है जो उसक पहले घंटे क चाल थी — फर भी
दूसरे या तीसरे घंटे के कसी क्षण वहla
a g 'औसत'
क्षण का वणन नह ।

co m
m .
o m l a se
. c a g
sem अपने अनुभव के आधार पर अपने उत्तर के समथन म तीन उदाहरण द जए।
प्र.9 दै नक जीवन म हम सामान्यतः कस प्रकार क ग त दृ गत होती है — एकसमान ग त अथवा असमान ग त?

a
agl c
m .
m a s e
m . co
दै नक जीवन म असमान ग त ही कह अ धक दखाई दे ती है। एकसमान रेखीय ग त एक आदश अवधारणा है; लंबी दू रय तक
e agl
l as
या द घकाल तक अचर चाल से चलती वस्तु हम क ठनाई से ही मलती है।

a g
1. प्रातः व ालय क बस। खुली सड़क पर चाल बढ़ाती है, ग त-अवरोधक पर धीमी होती है और प्रत्येक ठहराव तथा लाल बत्ती

m
पर पूरी तरह रुक जाती है। एक मनट म 600 m और अगले मनट म केवल 100 m।

. co
e m
m l as
.co a g
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2. व ालय या बाजार तक पैदल जाना। आरंभ म धीमे, दे र होने पर तेज, चौराहे पर धीमे और मत्र से मलने पर रुक जाना —
प्रत्येक मनट म तय दूरी बदलती रहती है।
3. बल्ले से लगने के बाद क्रकेट क गद। बल्ले से बहुत तेज नकलती है, वायु म धीमी पड़ती है और भू म पर लगने के बाद
लुढ़कते हुए और धीमी होकर सीमा-रेखा तक पहुँचती है।

दो और उदाहरण रेल-यात्रा से: चत्र 8.11 क रेलगाड़ी 'क' से 'ख' तक चाल पकड़ते हुए असमान ग त म है और 'ग' से 'घ' तक
रुकते हुए फर असमान — एकसमान केवल बीच के 'ख' से 'ग' खंड म।

एकसमान ग त इतनी दुलभ क्य है: चाल को ठ क-ठ क नयत रखने के लए वस्तु को धीमा करने वाली प्रत्येक
बात — घषण, वायु का प्र तरोध, यातायात, मोड़, ढलान — प्र त सेकंड संतु लत करनी पड़ेगी। दै नक जीवन म ऐसा
लगभग कभी नह होता। इसके नकटतम उदाहरण घड़ी क सेकंड सुई का सरा या एक ही चाल पर चलता पंखा ह।

प्र.10 ता लका म कसी वस्तु क ग त संबंधी आँकड़े दए गए ह। बताइए क वस्तु क चाल एकसमान है अथवा
असमान। उसक औसत चाल ात क जए।

समय(S) 0 10 20 30 40 50 60 70 80 90 100

दूरी(M) 0 6 10 16 21 29 35 42 45 55 60

क्रमागत दू रय को घटाकर प्रत्येक 10-सेकंड के अंतराल म तय दूरी ात क जए।

समय (S) 0 10 20 30 40 50 60 70 80 90 100

दूरी (m) 0 6 10 16 21 29 35 42 45 55 60

उस अंतराल म तय दूरी (m) — 6 4 6 5 8 6 7 3 10 5

समय-अंतराल सभी समान ह (प्रत्येक 10 s), कतु उनम तय क गई दू रयाँ — 6, 4, 6, 5, 8, 6, 7, 3, 10, 5 m — समान नह
ह।
अतः वस्तु क चाल असमान है।

औसत चाल = चली गई कु ल दू री ÷ िलया गया कु ल समय

= 60 m ÷ 100 s

= 0.6 m/s

km/h में: 0.6 × 3.6 = 2.16 km/h

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वास्तिवक गित
60

औसत 0.6 m/s
40
दू री (m)

20

0
0 30 60 90
समय (s)
पाठ्यांक को जोड़ने वाली लाल रेखा असमान है — चाल बदलती रहती है। धूसर बदुदार रेखा वह सरल पथ है जो वस्तु अपनी औसत चाल
0.6 m/s से एकसमान ग त करने पर बनाती।

ग्राफ शीघ्र उत्तर क्य दे ता है: इसम घटाने क भी आवश्यकता नह । य द सभी बदु एक सरल रेखा पर ह तो ग त
एकसमान है; रेखा मुड़ी हो तो असमान। यहाँ रेखा 80 s से 90 s के बीच सबसे अ धक ढलवाँ है (10 s म 10 m =
1 m/s, सबसे तेज खंड) और 70 s से 80 s के बीच सबसे कम (10 s म 3 m = 0.3 m/s, सबसे धीमा खंड)।

प्र.11 कोई वाहन एक सरल रेखा के अनु दश ग तमान है और यह 2 km क दूरी तय करता है। पहले 500 m यह 10
m/s क चाल से चलता है और अगले 500 m यह 5 m/s क चाल से चलता है। शेष बची दूरी इसको कतनी
चाल से चलना चा हए जससे इसक पूरी यात्रा 200 s म समाप्त हो जाए? पूरी यात्रा के लए वाहन क औसत
चाल कतनी है?

पहले दोन खंड म लगा समय ात क जए, फर दे खए क कतनी दूरी और कतना समय शेष बचा।

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कु ल दू री = 2 km = 2000 m

पहला खंड: समय = 500 m ÷ 10 m/s = 50 s

दू सरा खंड: समय = 500 m ÷ 5 m/s = 100 s

अब तक लगा समय = 50 + 100 = 150 s

शेष दू री = 2000 − (500 + 500) = 1000 m

शेष समय = 200 s − 150 s = 50 s

अपेिक्षत चाल = 1000 m ÷ 50 s = 20 m/s (= 72 km/h)

पूरी यात्रा क औसत चाल:

औसत चाल = कु ल दू री ÷ कु ल समय
= 2000 m ÷ 200 s = 10 m/s (= 36 km/h)

10 m/s 5 m/s 20 m/s (अपेिक्षत)

500 m 500 m 1000 m

50 s 100 s 50 s

पूरी यात्रा: 200 s मे ं 2000 m

यात्रा के तीन खंड। प ट्टय क चौड़ाई दू रय के अनुपात म है।

औसत (10 + 5 + 20) ÷ 3 = 11.67 m/s क्य नह है: तीन चाल अलग-अलग अव ध तक बनी रह — 50 s,
100 s और 50 s। 5 m/s वाला धीमा खंड शेष दोन से दोगुनी दे र चला, इस लए वह औसत को नीचे ख चता है।
औसत चाल सदै व कुल दूरी ÷ कुल समय से ही नकाली जाती है।

स्वयं जाँ चए: तीन समय जो ड़ए, 50 + 100 + 50 = 200 s ✔, और तीन दू रयाँ, 500 + 500 + 1000 =
2000 m ✔। दोन योग प्रश्न से मेल खाते ह, अतः उत्तर संगत है।

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अन्वेषणात्मक प रयोजनाएँ — पृष्ठ 119 और 120
अंतर वषयक प रयोजनाएँ

अन्वे ष णात्मक प रयोजनाएँ

प्र.1 एक प्लवमान पात्र प्रकार क जल-घड़ी बनाइए। व भन्न आमाप के पात्र लेकर और उनम व भन्न आमाप के छद्र
बना कर प्रयोग क जए जससे क एक ऐसा पात्र मल जाए जो लगभग 24 मनट म डू ब जाता हो।

क्या बनाना है: प्राचीन घ टका यंत्र क प्र तकृ त — तली म एक महीन छद्र वाला कटोरा, जसे बाल्ट के जल पर तैराया जाता है।
जल धीरे-धीरे भीतर आता है, कटोरा भरता है और अंततः डू ब जाता है। उसे नकालकर पुनः तैराया जाता है और प्रत्येक डू बना एक
घट दशाता है।
वध

1. जल से भरी एक बड़ी टब या बाल्ट और एक हल्का धातु या प्ला स्टक का कटोरा (कटोरी) ली जए।
2. पन या पतली क ल से तली के ठ क बीच म एक महीन छद्र बनाइए।
3. कटोरे को धीरे से जल पर तैराइए ता क कनारे से जल भीतर न जाए। उसी क्षण घड़ी चालू क जए।
4. कटोरा जस समय डू बे, वह समय ता लका म अ भले खत क जए।
5. बड़े छद्र, छोटे छद्र तथा भन्न आमाप के कटोर के साथ इसे दोहराइए।

प्रयास कटोरा छद्र कससे बनाया डू बने म लगा समय आगे क्या कर

1 छोटी कटोरी पतली क ल (बड़ा छद्र) 2 मनट बहुत शीघ डू बा — छोटा िछद बनाइए

2 छोटी कटोरी ाइंग- पन 9 मनट अब भी शीघ — बड़ ा कटोरा लीिजए

3 बड़ा कटोरा ाइंग- पन 21 मनट बहुत िनकट — िछद थोड़ ा और महीन कीिजए

4 बड़ा कटोरा सलाई क सुई ≈ 24 मनट ल क्ष्य पाप्त — यही एक घटी है

डू बने का समय इस प्रकार क्य बदलता है: बड़े कटोरे को डू बने के लए अ धक जल चा हए, अतः वह अ धक
समय लेता है। बड़ा छद्र जल को तेजी से भीतर आने दे ता है, अतः वह शीघ्र डू बता है। समय बढ़ाने के लए कटोरा
बड़ा क जए या छद्र छोटा — और एक बार म इन दोन म से केवल एक ही बद लए, तभी पता चलेगा क कस
प रवतन का क्या प्रभाव पड़ा।

क्या आप जानते ह? 24 मनट ठ क एक दन का 1/60 भाग है (24 घंटे = 1440 मनट; 1440 ÷ 60 = 24)।
इसी लए प्राचीन भारतीय दन म 60 घ टयाँ होती थ । प्रत्येक डू बने क घोषणा ढोल, शंख अथवा घंटा बजाकर क
जाती थी।

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as e
कक्षा 7 व ान अध्याय 8 समय एवं ग त का मापन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

. com
धड़कती है) के मापन के लए एक क्रयाकलाप क जए। एक ऐसे क्रयाकलाप का वचार कem
प्र.2 अपने मत्र क नाड़ी स्पंदन दर (वह संख्या जो यह बताती है क एक मनट म कसी व्य क्त क नाड़ी कतनी बार

m a s
l कहानी वक सत
cे oलए आप अपनी नाड़ी का उपयोग कर सकते ह और इस वचार को लेकaरgएक
जए जसम समय

.
em
मापन क

l aकs जए।
a g
m

. co ag
m
भाग 1 — नाड़ी स्पंदन दर का मापन

as e
a g l
1. अपने दा हने हाथ क पहली दो अँगु लयाँ (अंगूठा नह ) मत्र क बाईं कलाई के भीतरी भाग पर, अंगूठे के आधार के नीचे र खए
और हल्का-सा दबाइए जब तक स्पंदन अनुभव न हो।

m
2. घड़ी से 30 s तक स्पंदन ग नए और 2 से गुणा क जए। तीन बार दोहराकर औसत ली जए।
co
se m.
3. प्रत्येक मत्र का पाठ्यांक पहले शांत बैठे हुए और फर 20 बार रस्सी कूदने या थोड़ा दौड़ने के बाद अ भले खत क जए।

m l a
.co 30 S म स्पंदन ( व ाम म) agव्यायाम के बाद नाड़ी दर
sem
नाम नाड़ी दर (प्र त मनट)

a
aglनमूना: मीरा 39 78 116

m a s
.co agl
नमूना: अरुण 36 72 124

se m
g l a
भाग 2 — नाड़ी को घड़ी क तरह उपयोग करना। य द आपक नाड़ी दर 72 प्र त मनट है तो एक स्पंदन ≈ 60 ÷ 72 = 0.83 s
a
का होता है। जहाँ वराम-घड़ी उपलब्ध न हो वहाँ इससे समय मा पए: कागज का हवाई जहाज कतनी दे र हवा म रहा, मत्र ने 50 m
दौड़ने म कतने स्पंदन लए, लोलक के 10 दोलन म कतने स्पंदन हुए।

. com
mआता है — वह दो अँगु लयाँ
नमूना कहानी: 'कलाई म घड़ी लेकर घूमने वाला लड़का'। व ालय क खेल-प्र तयो गता के दन कबीर अपनी घड़ी घर भूल आता
है। उसक सहेली 100 m दौड़ने वाली है और समय मापने वाला कोई नह । कबीर को यह अध्याय eयाद
m a s
l वह अपनी नाड़ी दर 72 प्र त
. co पर रखकर गनता है और सीट से समापन रेखा तक 10 स्पंदन गनता है। aघरgआकर
emमापता है, 10 × 0.83 = 8.3 s का प रकलन करता है और समझ जाता है क सहेली ने व ालय का क तमान तोड़ दया है।
अपनी कलाई

a s
gl पर उसे यह भी पता चलता है क गैली लयो क व ध क्य छोड़ द गई — दौड़ के समय उत्साह म उसका अपना हृदय तेज धड़क
मनट

a
रहा था, अथात उसक 'घड़ी' तेज चल रही थी।
se m
com g l a
m . a
ase
वै ा नक दृ से नाड़ी अ घड़ी क्य नह है: इसक दर उत्साह, व्यायाम, बीमारी और आयु के साथ बदलती

a gl
रहती है, अथात 'मात्रक' स्वयं बदलता रहता है। अच्छ घड़ी के लए ऐसा आवत प्रक्रम चा हए जसक दर आस-
पास क प र तय पर नभर न करे — यही लाभ लोलक को हृदय-स्पंदन पर प्राप्त है।

co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a

co m
m .
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प्र.3 क्रयाकलाप 8.2 म लोलक क एक ही लंबाई के लए दोलनकाल के पाठ्यांक म मामूली अंतर के क्या कारण हो
सकते ह? इसको कम करने क व धय पर वचार क जए और उनका उपयोग करते हुए क्रयाकलाप को
दोहराइए और जाँ चए क क्या पाठ्यांक म भन्नता कम होती है।

अंतर का संभा वत कारण इसे नयं त्रत करने का उपाय

पिति क्रया-अविध — हाथ घड़ी थोड़ी दे र से 10 के स्थान पर 20 या 30 दोलनों का समय मापकर भाग दीिजए ; घड़ ी उस क्षण 'शून्य' पर
चलाता और रोकता है चलाइए जब गोलक माध्य िस्थित से गुजरे , जहाँ वह सबसे तेज होता है और क्षण पहचानना सरल
होता है

दोलनों की िगनती में भूल के वल एक ही िदशा में माध्य िस्थित से गुजरना िगिनए ; एक दू स रा िव ाथ बोलकर िगनती कराए

छोड़ते समय गोलक को झटका लगना, या गोलक पकिड़ ए , डोरी तनने दीिजए और िबना झटके के छोिड़ ए ; दोलन छोटा रिखए
दोलन बहत
ु चौड़ा होना

ढीली या िखंचने वाली डोरी, अथवा गाँठ का पतली, मजबूत और न िखंचने वाली डोरी लीिजए ; उसे दृ ढ़ता से किसए ; लंबाई हर बार गोलक के
सरकना — लंबाई बदलती रहती है कें द तक मािपए

िहलता हुआ आधार , या गोलक का एक आधार को भारी मेज या दृ ढ़ स्टैंड से बाँिधए ; गोलक को के वल एक ही तल में छोिड़ ए
तल में न होकर वृत्त में घूम ना

पंखे या िखड़की से आती वायु पाठ ाक
ं ले ते समय पंखा बंद कर दीिजए और िखड़ की बंद रिखए

घड़ी का अल्पतमांक (दीवार घड़ी के वल 1 0.01 s तक पढ़ ने वाली िवराम -घड़ ी या मोबाइल की स्टॉपवॉच का उपयोग कीिजए
s तक पढ़ ती है)

दोहराइए और तुलना क जए। पहले पुरानी व ध से पाँच पाठ्यांक ली जए और फर उपयुक्त नयंत्रण के साथ पाँच, और दोन
को साथ र खए:

पहले: 10 दोलनों के िलए 19.6, 20.4, 19.8, 20.5, 20.1 s → दोलनकाल 1.96 से 2.05 s, िवस्तार = 0.09 s

बाद में (30 दोलन, िवराम-घड़ ी, पंखा बंद ): 60.1, 60.0, 60.2, 60.1, 59.9 s → दोलनकाल 2.003 से 2.007

s, िवस्तार = 0.004 s

भन्नता क्य घट जाती है: घड़ी चलाने-रोकने क लगभग 0.2 s क नयत त्रु ट अब 10 के बजाय 30 दोलन म
बँटती है, अतः एक दोलन पर उसका प्रभाव तीन गुना कम हो जाता है। वायु और हलते आधार को हटा दे ने से वे
कारण ही समाप्त हो जाते ह जनसे लोलक स्वयं हर बार भन्न व्यवहार करता था।

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प्र.4 एक खेल के मैदान म जाइए जहाँ कुछ झूले लगे ह । कसी झूले के 10 दोलन म लगा समय मा पए और इसके
दोलनकाल का प रकलन क जए। इस क्रयाकलाप को अलग-अलग भार के ब े को झूले म बैठाकर दोहराइए
और दे खए क क्या दोलनकाल का माप प्रत्येक बार लगभग समान होता है? अलग-अलग लंबाई के झूल के साथ
प्रयोग दोहराइए और पता लगाइए क झूले क लंबाई म वृ से उसका दोलनकाल कस प्रकार प रव तत होता
है? क्या झूला भी लोलक का एक उदाहरण है?

हाँ — झूला एक बड़ा लोलक ही है। जंजीर धागे का काम करती ह, बैठा हुआ ब ा गोलक है और ऊपर लगा ढाँचा दृढ़ आधार।
क्या क जए: झूले को एक बार हल्का-सा धक्का द जए, ग त र होने द जए, फर 10 दोलन (प्रत्येक दोलन = जाकर उसी
ओर वापस आना) का समय मापकर 10 से भाग द जए।

झूला झूले पर ब ा 10 दोलन म लगा समय दोलनकाल

लंबा झूल ा (लगभग 2.5 m) हल्का ब ा 31.6 s 3.16 s

लंबा झूल ा (लगभग 2.5 m) भारी ब ा 31.7 s 3.17 s

लंबा झूल ा (लगभग 2.5 m) दो ब े साथ 31.5 s 3.15 s

मध्यम झूल ा (लगभग 1.6 m) हल्का ब ा 25.4 s 2.54 s

छोटा झूल ा (लगभग 1.0 m) हल्का ब ा 20.0 s 2.00 s

नष्कष

एक ही झूले पर अलग-अलग भार के ब े बैठ तो दोलनकाल लगभग समान ही रहता है — ठ क वैसे ही जैसे क्रयाकलाप
8.2 म गोलक के द्रव्यमान से कोई अंतर नह पड़ा था।
अलग-अलग लंबाई के झूल म दोलनकाल स्पष्ट रूप से बदलता है: झूला जतना लंबा, दोलनकाल उतना अ धक। ऊँचा झूला
धीमे झूलता है, छोटा झूला शीघ्र।

झूला पूण लोलक क्य नह है: इसका 'गोलक' कोई छोट भारी गद नह ब ल्क एक ब ा है, और ब े के आगे-
पीछे झुकने से उसका कद्र खसकता रहता है — ब े इसी से झूले को स्वयं ऊँचा करते ह। स्वच्छ पाठ्यांक के लए
झूलने वाले से र बैठने को क हए।

सुरक्षा सुझाव: झूलती सीट से दूर खड़े र हए और समय सदै व बगल से मा पए, सामने से कभी नह ।

समग्र दृ — पृष्ठ 120

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अंतर वषयक काय

समग्र दृ

प्र.1 पछले दो ओलं पक खेल म पुरूष एवं म हला धावक ारा व भन्न प्रकार क (100 m, 200 m एवं 400 m)
दौड़ के वजेताओं ारा उनक दौड़ म लए गए समय के आँकड़े एक त्रत क जए। उनक चाल का प रकलन
क जए और उनक आपस म तुलना क जए। कस प्रकार क दौड़ म चाल अ धकतम रही?

व ध: प्रत्येक स्पधा के लए चाल = दूरी ÷ वजेता का समय। आ धका रक समय ओलं पक क वेबसाइट या समाचार-पत्र से
ली जए; नीचे टोक्यो 2020 और पे रस 2024 के वजेताओं के समय (दो दशमलव ान तक) लए गए ह।

स्पधा खेल वजेता का समय (S) चाल = दूरी ÷ समय (M/S) चाल (KM/H)

100 m, पुरुष टोक्यो 2020 9.80 100 ÷ 9.80 = 10.20 36.7

100 m, पुरुष पे रस 2024 9.79 100 ÷ 9.79 = 10.21 36.8

200 m, पुरुष टोक्यो 2020 19.62 200 ÷ 19.62 = 10.19 36.7

200 m, पुरुष पे रस 2024 19.46 200 ÷ 19.46 = 10.28 37.0

400 m, पुरुष टोक्यो 2020 43.85 400 ÷ 43.85 = 9.12 32.8

400 m, पुरुष पे रस 2024 43.40 400 ÷ 43.40 = 9.22 33.2

100 m, मिहला टोक्यो 2020 10.61 100 ÷ 10.61 = 9.43 33.9

100 m, मिहला पे रस 2024 10.72 100 ÷ 10.72 = 9.33 33.6

200 m, मिहला टोक्यो 2020 21.53 200 ÷ 21.53 = 9.29 33.4

200 m, मिहला पे रस 2024 21.71 200 ÷ 21.71 = 9.21 33.2

400 m, मिहला टोक्यो 2020 48.36 400 ÷ 48.36 = 8.27 29.8

400 m, मिहला पे रस 2024 48.17 400 ÷ 48.17 = 8.30 29.9

तुलना: औसत चाल 100 m और 200 m क तीव्र दौड़ म सबसे अ धक रही — दोन लगभग बराबर, पुरुष म लगभग 10.2
m/s और म हलाओं म लगभग 9.3 m/s — और 400 m म स्पष्ट रूप से सबसे कम (लगभग 9.2 m/s तथा 8.3 m/s)।
अथात छोट दौड़ म चाल अ धकतम रहती है और दौड़ लंबी होने पर घटती जाती है।

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लंबी दौड़ धीमी क्य पड़ती है: कोई भी धावक अपनी अ धकतम चाल अ धक दे र तक नह बनाए रख सकता।
100 m म लगभग पूरी दौड़ पूरी चाल से होती है; 400 m म धावक को कुछ श क्त बचाकर रखनी पड़ती है ता क
अंत से पहले थक न जाए। यह भी ध्यान द जए क 200 m क औसत चाल 100 m के बराबर या उससे अ धक
भी हो सकती है — क्य क 100 m म वराम से चाल पकड़ने म लगा समय पूरी दौड़ का बड़ा भाग होता है, जब क
200 m म वही धीमा आरंभ दुगुनी दूरी म बँट जाता है।

नए आँकड़ से क जए: नवीनतम ओलं पक के समय लेकर स्वयं भाग द जए — संख्याएँ बदलगी, पर प्रवृ त्त
(100 m ≈ 200 m > 400 m) वही रहेगी।

अध्याय — एक नज़र म
मनुष्य ने सबसे पहले प्रकृ त क उन घटनाओं से समय जाना जो एक न त समयाव ध के प ात पुनरावृत्त होती ह — सूय का
उदय एवं अस्त होना, चंद्रमा क कलाएँ और बदलती ऋतुए।ँ इन्ह से पंचांग बने और फर दन के भीतर के लघु समयांतराल
मापने के यंत्र — धूप-घड़ी, जल-घड़ी, रेत-घड़ी और मोमबत्ती-घड़ी।
भारत म समय-मापन क समृद्ध परंपरा रही है। छाया-आधा रत मापन का उल्लेख कौ टल्य के अथशास्त्र म है और वराह म हर
ने लगभग सामान्य संवत् 530 म इसका सट क व्यंजक दया। प्लवमान पात्र प्रकार क जल-घड़ी अथात घ टका यंत्र, जसका
पहला उल्लेख आयभट्ट ने कया, भरने और डू बने म 24 मनट लेती थी — इसी लए एक दन 60 घ टय म बाँटा गया। जयपुर
के जंतर-मंतर का स ाट यंत्र 27 मीटर ऊँचा है और 2 सेकंड तक क अल्पाव ध माप सकता है।
सरल लोलक म एक छोट धातु क गद (गोलक) एक लंबे धागे ारा कसी दृढ़ आधार से लटक होती है। माध्य त अ से
चलकर गोलक जब अ → ब → स → अ का पथ पूरा करता है तो कहा जाता है क उसने एक दोलन पूरा कया। एक दोलन
पूरा करने म लगा समय उसका दोलनकाल कहलाता है।
कसी न त लंबाई के सरल लोलक का एक ही ान पर दोलनकाल नयत रहता है। यह लोलक क लंबाई पर नभर
करता है, गोलक के द्रव्यमान पर नह । इसी गुण का उपयोग समय के मापन म कया जाता है — और सभी घ ड़याँ कसी न
कसी आवत प्रक्रम पर ही आधा रत होती ह।
समय का SI मात्रक सेकंड (s) है। बड़े मात्रक मनट (min) एवं घंटा (h) ह: 60 s = 1 min तथा 60 min = 1 h। संकेत
सदै व छोटे अक्षर म, एकवचन म, संख्या के बाद रक्त ान छोड़कर और बना पूण वराम के लखे जाते ह — 'sec' या
'hrs' लखना सही नह है।
चाल = चली गई कुल दूरी ÷ लया गया कुल समय। इसका SI मात्रक मीटर/सेकंड (m/s) है; इसे km/h म भी व्यक्त
कया जाता है। सूत्र को बदलकर: दूरी = चाल × समय तथा समय = दूरी ÷ चाल। 1 m/s = 3.6 km/h.
कोई वस्तु प्रायः संपूण यात्रा म एक ही चाल से नह चलती, अतः जो चाल हम प रक लत करते ह वह वास्तव म औसत चाल
होती है। इस पुस्तक म 'चाल' का अथ औसत चाल ही है।
सरल रेखा म नयत चाल से चलती वस्तु एकसमान रेखीय ग त म होती है — वह समान समय-अंतराल म समान दू रयाँ तय
करती है। य द चाल बदलती रहे तो ग त असमान रेखीय ग त कहलाती है। ता लका 8.3 म रेलगाड़ी X एकसमान ग त म है
(प्रत्येक 10 मनट म 20 km) और रेलगाड़ी Y असमान ग त म।

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as e
कक्षा 7 व ान अध्याय 8 समय एवं ग त का मापन
a g l AglaSem · NCERT Solutions

co m
m.
त्व रत पुनरावृ त्त
a se
. com l
g रखने योग्य बात
aध्यान
sem
पद अथ अध्याय से उदाहरण / ववरण

a
agl
धूप-घड़ी वह युिक्त िजसमें सूय के पकाश ारा जयपुर के जंतर-मंतर का स ाट यंत्र —
27 मीटर ऊँचा, छाया प्र त सेकंड लगभग
यह ानीय अथवा सौर समय बताती
है, अतः भारतीय मानक समय के लए
िकसी वस्तु की परछाई की पिरवतनीय

m
.co ag
िस्थित से समय पढ़ ा जाता है 1 मलीमीटर खसकती है संशोधन आवश्यक है

sem
a तथा प्लवमान पात्र प्रकार या घ टका यंत्र
agl
जल-घड़ी वह घड़ी िजसमें िकसी पात्र से बाहर जल- नष्क्रमण प्रकार [ चत्र 8.2 (क)] जल का स्तर घटने पर प्रवाह क दर
अथवा भीतर होने वाले जल-पवाह से समय घट जाती है — इसी लए प्लवमान पात्र
मापा जाता है [ चत्र 8.2 (ख)] प्रकार का वकास हुआ

. c om
दन 60m
घ टका (घट ) घिटका यंत्र के पात्र के एक बार डू बने से छद्र ऐसा बनाया जाता था क पात्र को 24 घंटे ÷ 24 मनट = 60, अतः एक

com ase
agl वरामाव ा म गोलक माध्य
मापा गया समय-मात्रक भरने और डू बने म 24 मनट लग समान घ टय म वभा जत था

e m. एक लंबे धागे ारा दृ ढ़ आधार से लटकी
las
सरल लोलक चत्र 8.7 (क) — दृढ़ आधार, लंबा त

ag
छोटी धातु की गेंद (गोलक) धागा, गोलक 'अ' पर होता है

a s
दोलन चत्र 8.7 (ख), जसम 'ब' और 'स' दो केवल 'अ' से 'ब' और वापस 'अ'
m
गोलक की एक पूर ी आवाजाही: अ → ब

.co agl
→ स → अ (अथवा ब → स → ब) चरम तयाँ ह तक जाना आधा दोलन है

a s em क्रयाकलाप 8.2 म (10 दोलन का
a gl
दोलनकाल लोलक ारा एक दोलन पूर ा करने में न त लंबाई के लए एक ान पर
िलया गया समय समय) ÷ 10 से ात कया गया अचर; गोलक के द्रव्यमान पर नभर
नह

co m
m .
eआवत प्रक्रम पर ही आधा रत है
आवत ग त लोलक क दोलन-ग त पुरानी हो या नई — प्रत्येक घड़ी कसी

as
वह गित जो अपने पथ को एक िनिश्चत

m l
.co g
समयाविध के पश्चात दोहराती है

डm
सेकंe
a
a s
gl
(s) समय का SI मात्रक 60 s = 1 min; 60 min = 1 h '5 s' ल खए, '5 सेकं.' नह ; संकेत

a छोटे अक्षर म और एकवचन म

se m
coकmु ल समय l a
चाल िकसी वस्तु ारा इकाई समय में चली गई चाल = चली गई कुल दूरी ÷ लया गया SI मात्रक m/s; km/h भी। 1 m/s

g
m. a
दू र ी = 3.6 km/h

gl ase
िवभािजत करने पर पाप्त a
औसत चाल पूर ी यात्रा की कु ल दू र ी को कु ल समय से लगातार तीन घंट म 60 km, 70 km यह अलग-अलग चाल का औसत नह
चाल और 50 km चलने वाली कार क औसत होती

omसमय-अंतराल म समान दू रयाँ
चाल 60 km/h है

.cसमान
em
as
ता लका 8.3 म रेलगाड़ी X प्रत्येक 10
m
एकसमान सरल रे खा में िनयत (अपिरवितत) चाल से

.co
रेखीय ग त गित मनट म 20 km चलती है
a g l — दूरी-समय ाफ सरल रेखा

s m
eअसमान
gl a ता लका 8.3 म रेलगाड़ी Y क्रमशः 20,
a
सरल रे खा में ऐसी गित िजसमें चाल समान समय-अंतराल म असमान

.c
रेखीय ग त बदलती रहती है 15, 15, 25, 20 और 25 km चलती है दू रयाँ — ाफ मुड़ी हुई रेखा

s e m
m a
.co लगे होते ह agl
चालमापी / वाहनों में लगे यंत्र : चालमापी चाल को स्कूटर, मोटर साइ कल, कार एवं बस म चालमापी → चाल; पथमापी → दूरी
पथमापी
se m
km/h में दश ता है, पथमापी चली गई दू र ी

g
को िकलोमीटर में मापता है
l a
a

co m
m .
m as e
.co


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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 7
TypeSolution
Pages35
Languagehindi
Updated19 Sep 2026