NCERT Solutions for Class 11 Political Science (राजनीतिक सिद्धांत) Chapter 4 सामाजिक न्याय – Text
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NCERT
SOLUTIONS
CLASS - 11th
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Book : Rajnitik Siddhant Ncert Solutions | Chapter - 4 Social Science Political Science
Class : 11th
Subject : Political science
Chapter : 4
Chapter Name : सामािजक याय
Q1 हर यि त को उसका ा य दे ने का या मतलब है ? हर कसी को उसका ा य दे ने का मतलब समय के
साथ-साथ कैसे बदला?
Answer. येक यि त को उसका ा य प दे ने का अथ है येक यि त को उसका अ धकार दे ना| कसी
यि त को वे तमाम चीज उपल ध कराना िजसका वो अ धकार है | यह ि थ त याय है | यह समय के इस प म
बदला - लेटो के समय याय का अथ ऐसे काय से था िजसम सबक भलाई हो| क तु आज याय का अथ केवल
यहाँ तक सी मत नह ं है | आज येक यि त क नजता(Privacy) का अ धकार है | अतः हर यि त अपनी
नजता क र ा का अ धकार है |
Page : 66 , Block Name : नावल
Q2 अ याय म उि ल खत याय के तीन स धांत पर सं ेप म चचा कर। उदाहरण स हत येक को समझाइए।
Answer. समान लोग के त समान बरताव का स धांत- एक यि त के प म कुछ वशेषताओं को साझा
करने वाले यि तय को समान अ धकार ा त होना चा हए तथा उनके साथ समान यवहार होना चा हए| इसम
लंग, जा त, न ल या रं ग के अधार पर भेद-भाव नह ं करना चा हए| उदाहरण के लए य द एक म हला और एक
पु ष दोन ईट ढोने का काम करते ह तो दोन को समान वेतन मलना चा हए| कसी एक को कम या कसी एक को
अ धक नह ं मलना चा हए|
समानपु ा तक याय समान यवहार याय का एकमा स धांत नह ं है य क कुछ प रि थ तय म
समान यवहार कए जाने पर कुछ अ याय हो सकता है । उदाहरण के लए कसी क ा म आयोिजत नबंध
तयो गता म सब लोग एक ह परु कार राशी द जाय केवल इस आधार पर क सारे तयोगी एक ह क ा के ह
और सबने एक ह काम कया है तो यहाँ ये अ याय होगा| यूँ तो हम समान काय के लए समान दाम क बात करत
है क तु यहाँ ये बात मह वपण
ू क नबंध क गण ु व ा और उसके लए कये गये प र म क आधार पर परु कार
दया जाना चा हए बशत नबंध तयो गता म भाग लेने म कसी कार का भेद-भाव न हुआ हो|
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वशेष ज़ रत का वशेष याल यह याय का एक तीसरा स धांत है िजसे हम इस प म पहचानते ह
क एक समाज म परु कार या कत य का वतरण करते समय लोग क वशेष आव यकताओं को यान म रखना
चा हए। वशेष आव यकताओं या द यांग लोग को कुछ वशेष स मान और वशेष मदद के यो य माना जा
सकता है । शार रक अ मता, उ या अ छ श ा या आधारभत ू वा य सु वधाओं तक पहुंच क कमी, कुछ
ऐसे कारक ह िज ह कई दे श म वशेष यवहार के लए आधार माना जाता है । उदाहरण के लए द यांग लोग या
व र ठ नाग रक के लए आर ण यव था याय के इसी स धांत का आधार लेती है |
Q3 या वशेष ज रत का स धांत सभी के साथ समान बरताव के स धांत के व ध है ?
Answer. लोग क वशेष ज रत का वशेष याल स धांत के साथ समान बरताव के स धांत का वरोधी नह ं
है | वा तव कुछ लोग क ह मह वपण
ू स दभ म एक-समान नह ं होते ऐसे म उनके साथ वशेष यवहार अपे त
है | इस प म यह सामान बरताव स धांत का ह व तार| व तत
ु ः समान बरताव स धांत म ह यह न हत है क
जो यि त क ह ं वशेष स दभ म समान ह उनके साथ अलग तर के का बरताव कया जाए अथात वशेष
बरताव कया जाए|
कई बार वशेष आव यकताओं वाले यि तय को वशेष सहायता दे ने के लए इस बात का नधारण
करना बड़ा क ठन हो जाता क उनक कस असमानता को पा ता द जाए| शार रक अ मताओं, उ , या बेहतर
श ा व वा य सु वधाओं क कमी को वशेष यवहार के यो य मन जाए। भारत म, अ छ श ा, वा य
सु वधा, सु वधाओं आ द क कमी को आमतौर पर जा त के आधार पर सामािजक भेदभाव के साथ जोड़ा जाता है ।
भारत के सं वधान ने समाज म वं चत लोग के लए सरकार नौक रय और शै णक सं थान म आर ण का
ावधान कया है ।
Q4 न प और यायपण ू वतरण को यिु तसंगत आधार पर सह ठहराया जा सकता है । रॉ स ने इस तक को
आगे बढ़ाने म ‘अ ानता के आवरण’ के वचार का उपयोग कस कार कया।
Answer. जॉन रॉ स ने न प और यायपण ू वतरण के लए ‘अ ानता के आवरण’ का वचार दया है | रा स
का मानना है क ‘अ ानता के आवरण’ के स धांत से हम न प और यायपण ू वतरण को तकसंगत ठहरा
सकते ह| रा स कहते ह क हम एक ऐसी ि थ त क क पना करनी चा हए जहाँ हम यह नणय लेना है क समाज
को कैसे संग ठत कर कया जाए ले कन इस पर वचार करने से पव
ू रा स क यह शत है क हम अपनी वमन
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ि थ त से अ ात ह | इसे इस प म समझा जा सकता है क कोई यि त एक समाज क क पना करे िजसम उसे
यह न ात हो क उस समाज म उसक या जगह होगी उदाहरण क लए उसे उसक जा त, प रवार आ द के बारे
म कोई ान न क उसक जा त उ च है अथवा न न उसका प रवार सु वधा संप न है क सु वधा वह न ऐसी
ि थ त म वह ऐसे समाज क क पना कर पायेगा जो सबके लए सु वधाजनक हो और यायपण
ू हो|
रा स कहते ह क कोई यि त उपयु त ि थ त म जब यि त को कसी समाज म अपनी जगह का ान
नह ं होगा तब वह सबके लए बेहतर और यायपण ू समाज चन
ु ेगा| ऐसा इस लए क उसे बराबर यह भय रहे गा क
कह उसका ज म असु वधाजनक प रवार या न न जा त म हो गया अतः वह उसके अनस ु ार भी समाज क
क पना करे गा क उसमे उसके हत क र ा हो साथ यह भी क कह ं उसका ज म सु वध जनक ि थ त म हुआ
अतः वह इस बारे म भी सोचेगा क सु वधा संप न लोग का अ हत न हो| सम ता म वह एक ऐसे समाज क
क पना करे गा जहाँ सबको बु नयाद सु वधा मले|
Q5 आम तौर पर एक व थ और उ पादक जीवन जीने के लए यि त क यन
ू तम बु नयाद ज रत या मानी
गई है ? इस यन
ू तम को सु नि चत करने म सरकार क या िज मेदार है ?
Answer. एक व थ समाज को व थ और उ पादक जीवन जीने के लए बना कसी भेद भाव के येक यि त
क बु नयाद आव यकताओं को सु नि चत करना चा हए| चंू क ऐसा नह होने पर एक यायपण
ू समाज नह ं बन
पायेगा| कसी यि त क बु नयाद अव य ता के प म समा यतः तीन चीज का िज़ होता है - रोट , कपड़ा,
मकान| कोई यि त चीज क इद- गद अपना जीवन बता दे ता है | मनु य क अ य तमाम आव यकताएं िजनम
व य, श ा और यत ू म आय आते ह इ ह ं तीन चीजो के लए होती ह|
इन यनू तम आव यकताओं को सु नि चत करना रा य क िज़ मेदार होती है | रा य को चा हए क
येक नाग रक बना कसी भेद-भाव के ये सु वधाएँ मह
ु ै या कराए िजससे नाग रक वारा अपने चन
ु े हुए ल य
को ा त के लए समान अवसर मले।
Q6 सभी नाग रक को जीवन क यन ू तम बु नयाद ि थ तयाँ उपल ध कराने के लए रा य क कायवाई को
न न म से कौन-से तक से वािजब ठहराया जा सकता है ?
(क) गर ब और ज रतमंद को नशु क सेवाएँ दे ना एक धम काय के प म यायो चत है ।
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(ख) सभी नाग रक को जीवन का यन
ू तम बु नयाद तर उपल ध करवाना अवसर क समानता सु नि चत
करने का एक तर का है ।
(ग) कुछ लोग ाकृ तक प से आलसी होते ह और हम उनके त दयालु होना चा हए।
(छ) सभी के लए बु नयाद सु वधाएँ और यन
ू तम जीवन तर सु नि चत करना साझी मानवता और मानव
अ धकार क वीकृ त है ।
Answer. (द) बु नयाद सु वधाओं को सु नि चत करना और सभी के लए जीवन तर का एक यन
ू तम मानक
हमारे साझा मानवता और एक मानव अ धकार क मा यता है ।
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