NCERT Solutions for Class 11 Political Science (राजनीतिक सिद्धांत) शांति [Old Book] – Text
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NCERT
SOLUTIONS
CLASS - 11th
aglase .co
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Class : 11th
Subject : History
Chapter : 9
Chapter Name : शां त
Q1 या आप जानते ह क एक शां तपण
ू द ु नया क ओर बदलाव के लए लोग के सोचने के तर के म बदलाव
ज र है ? या मि त क शां त को बढ़ावा दे सकता है ? और, या मानव मि त क पर क त रहना शां त थापना
के लए पया त है ?
Answer. गौतम बु ध ने कहा था क सभी द ु कम मन के कारण उपजते ह। य द मन पांत रत हो जाए तो या
द ु कम बने रह सकते ह।
हमारे मि त क म चलने वाले वचार हमार सोच को ज म दे ते ह, और यह सोच हमारे यवहार म
झलकती है । हटलर के मि त क म वसाय क सं ध म जमनी के अपमान क भावना घर कर गई थी, िजसका
नतीजा वतीय व व यु ध के प म दखा, िजसने व व शां त के लए लोग म जाग कता पैदा क । इसके बाद
के यरू ोप म शां त के मह व को समझा गया।
बातचीत से लोग के वचार को शां तपण
ू बनाने का यास होना चा हए। अ छ श ा, मनो व लेषण व
नरोगकार तकनीक हमारे मि त क को शांत बनाए रखने म कारगर स ध हो रह ह। य द हमारा दमाग शांत हो
तो वैि वक शां त क क पना को साकार करना इतना मिु कल भी नह ं है ।
हम यह भी यान रखना चा हए क महज़ मानव मि त क पर क त रहकर शां त एक सीमा तक ह
था पत हो सकती है । एक दे श क सामािजक संरचना, याय यव था व राजनी तक यव था भी शां त बनाए
रखने म अहम योगदान दे ती है । अतः खश
ु हाल समाज, न प याय यव था व लोकतं मनु य के मि त क को
शांत रखते ह, िजससे हंसा नह ं पनपती है ।
Q2 रा य को अपने नाग रक के जीवन और अ धकार क र ा अव य ह करनी चा हए। हालां क कई बार रा य
के काय इसके कुछ नाग रक के खलाफ हंसा के ोत होते ह। कुछ उदाहरण क मदद से इस पर ट पणी
क िजए।
Answer. यह स य है क कसी रा य को अपने नाग रक के जीवन को अ धकार क र ा करनी चा हए परं तु
व व भर म ऐसे अनेक उदाहरण ह जब रा य क कुछ नी तय व काय के कारण नाग रक म आपसी हंसा भड़क
उठ । इस तरह का एक मह वपण
ू उदाहरण रवांडा नरसंहार का है । नमम ह या करने से रोक
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Book : Rajnitik Siddhant Ncert Solutions | Chapter - 9 Social Science Political Science
1994 म जब रवांडा सरकार हुतु समद
ु ाय के लोग को लगभग 500000 तु सी समद
ु ाय के लोग क
नमम ह या करने से नह ं रोक पाई। रवांडा अपने ह लोग के जीने के अ धकार क र ा नह ं कर पाया। ऐसा
इस लए हुआ य क रा य का एक समद
ु ाय अपने को दस
ू रे समद
ु ाय से ऊंचा समझने लगा था।
जमनी म भी हटलर ने यहू दय के खलाफ यह कया था। कई बार रा य अपने को सबसे अलग,
उ चतम और सव े ठ मानने लगते ह। इसके चलते नाग रक हर हाल म अपनी साख बचाने के लए यु ध तक
कर लेते ह। वह दस
ू रे लोग को हा न पहुंचाते ह।
हाल ह म यांमार के बु ध समद
ु ाय वारा नरसंहार करके रो हं या मिु लम को शरणाथ बनना पड़ गया
है । ऐसा इस लए हुआ य क यांमार सरकार ने कानन
ू म बदलाव के वारा रो हं याओं को नाग रक मानने से
इंकार कर दया, िजसके चलते उ ह हंसा झेलनी पड़ी और दे श छोड़ना पड़ा।
इस लए रा य को चा हए क वह नाग रक के बीच आपसी सौहा व शां त बनाए रखे। ऐसा तभी होगा
जब रा य समानता, वतं ता, उदारता, याय व धम नरपे ता का पालन करे ।
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Q3 शां त को सव म प म तभी पाया जा सकता है जब वतं ता, समानता और याय कायम हो। या आप
सहमत ह?
Answer. वतं ता, समानता और याय शां त क ाि त के लए अ यंत मह वपण
ू ह। इन तीन क अनप
ु ि थत
म समाज म अ यव था फैल जाती है , नाग रक का रा य से भरोसा उठ जाता है , वह व ोह पर उतर आते ह।
वतं ता के अभाव म लोग गल
ु ाम जैसा महसस
ू करते ह। वे अपने अ धकार के लए हंसा पर उतर आते
ह। य द समानता न हो तो एक समद
ु ाय दस
ू रे समद
ु ाय को ता ड़त करता है , और य द पी ड़त समद
ु ाय को याय न
मले तो यु ध जैसा माहौल बन सकता है जैसा क रवांडा म घ टत हुआ था।
अतः संपण
ू शां त के लए वतं ता, समानता और याय मह वपण
ू आव यकताएं ह।
Q4 हंसा के मा यम से दरू गामी यायो चत उ दे य को नह ं पाया जा सकता। आप इस कथन के बारे म या
सोचते ह?
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Answer. महा मा गांधी ने कहा था क हंसा जब कोई अ छा काय करती तीत होती है तब अ छाई अ थाई होती
है जब क इससे जो बरु ाई होती है वह थाई होती है । इसका आशय यह है क हंसा के मा यम से दरू गामी
यायो चत उ दे य को नह ं पाया जा सकता।
इसे हम आतंकवाद क मदद से समझ सकते ह। आतंकवाद ू र हंसा क मदद से अपने ल य पाने क
वचारधारा रखता है । कभी कभी वह अपने ल य पाने म सफल भी हो जाता है पर वह चर थाई नह ं होते। इसके
चलते अनेक लोग म भी तशोध पनपता है , अ य धक हंसा ज म लेती है । आतंकवाद क मदद से एक शांत
समाज कभी नह ं बन सकता।
अतः हम कह सकते ह क हंसा से हंसा ज म लेती है और य द हंसा से कुछ मलता भी है तो वह मा
णक होता है ।
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Q5 व व म शां त थापना के िजन ि टकोण क अ याय म चचा क गई है उनके बीच या अंतर है ?
Answer. उपयु त अ याय म तीन ि टकोण का उ लेख कया गया है ।
थम ि टकोण यह बताता है क रा सं भु होते ह ह और अपने हत क र ा के लए उनम संघष व ववाद
होना प रहाय है । हम इसे बेहतर बंधन से महज नयं त कर सकते ह ता क दो दे श के बीच क लड़ाई से अ य
लोग को हा न न पहुंचे।
इसके वपर त दस
ू रा ि टकोण बस इतना ह भ न है क भले ह रा सं भु होते ह पर वे आ थक प से
एक-दस
ू रे पर नभर होते ह। इस ि टकोण से दो दे श क सामािजक व आ थक भागीदार उनके संबध
ं को लचीला
बनाती है और व व शां त बल होती है ।
अंत म तीसरा ि टकोण तो यह मानता है क रा नामक यव था का दौर ह समा त हो चक
ु ा है , तथा अब
वै वीकरण ह व व को जोड़ कर रख रहा है । बहुरा य नगम व गैर सरकार संगठन व व को एक नया प दे
रहे ह, िजसम रा सीमार हत दख रहे ह। इससे रा क सं भत
ु ा मट सी गई है और वैि वक शां त का आधार
तैयार हो चक
ु ा है ।
इस कार तीन ि टकोण शां त यव था बनाए रखने के नए तर क को आकार दे ने म मह वपण
ू भू मका नभा
रहे ह।
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