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CENTRAL BOARD OF SECONDARY EDUCATION
SAMPLE PAPER
CLASS 10
2025
Solutions
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अंक योजना प्रतिदर्श प्रश्नपत्र (2024–25)
कक्षा-दसव ं तिन्द -अ (कोड 002)
तनर्ाशरिि समय: 3 घं टे अतर्किम अंक : 80
सामान्य तनदे र् :
अंक योजना का उद्दे श्य मूल्ां कन को अधिकाधिक वस्तुधनष्ठ बनाना है |
प्रश्नपत्र में बहुधवकल्पीय एवं वर्णनात्मक प्रश्न हैं |
अंक योजना में धिए गए वर्णनात्मक प्रश्नों के उत्तर धबंिु अंधिम नहीं हैं | ये सुझावात्मक एवं
सां केधिक हैं |
यधि परीक्षार्थी इन उत्तर धबन्िु ओं से धिन्न, धकंिु उपयुक्त उत्तर िें िो उसे उपयुक्त अंक धिए
जाएँ |
मूल्ां कन-कायण अपनी धनजी व्याख्या के अनुसार नहीं,बल्कि अंक योजना में धनधिण ष्ट
धनिे शानुसार ही धकया जाए |
एक ही प्रकार की अशुल्कि पर अंक न काटा जाए |
मूल्ां कन में संपूर्ण अंक पैमाने – 0 से 80 का प्रयोग अिीष्ट है
खंड – क
( अपतिि बोर् ) 14
1. धनम्नधिल्किि गद्ां श को ध्यानपूवणक पढ़कर उस पर आिाररि पू छे गए प्रश्नों के उत्तर धिल्किए 7
:
आज धवश्व के कई िे शों में ----------------------- श्रधमक उपिब्ध हैं |
(क) iii कर्थन (A) सही है और कारर् (R) कर्थन (A) की सही व्याख्या है | 1
(ि) i कर्थन I और II सही हैं | 1
(ग) ii I (2) II (3) III (1) 1
(घ) करोड़ों िोग चाय के व्यापार से जुड़े हुए हैं | उनके धहिों की रक्षा और जागरूकिा 2
जरूरी है | इसी के चििे चायपत्ती की िपि और मां ग बढ़ाने पर जोर डािने में
‘अंिराण ष्टरीय चाय धिवस’ की महत्त्वपू र्ण िूधमका है |
(ङ) चाय एक श्रम आिाररि उद्ोग है | अधिक मात्रा में श्रधमकों की आवश्यकिा पड़िी है , 2
बहुि साविानी से चाय की पधत्तयाँ एक-एक कर िोड़ी जािी हैं | श्रधमकों को पूरे धिन
िड़े रहना पड़िा है , यह श्रमसाध्य कायण है |
2. धनम्नधिल्किि काव्यां श को ध्यानपूवणक पढ़कर उस पर आिाररि पूछे गए प्रश्नों के उत्तर 7
धिल्किए :
अजुणन ! िे िो,----------------------------------------अिुि
िनुिणर को रर् में ?
(क) ii कृष्ण कर्ण की | 1
(ि) iv कर्थन I,III और IV सही हैं | 1
(ग) iii कर्थन (A) सही है और कारर् (R) कर्थन (A) की सही व्याख्या है | 1
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(घ) श्रीकृष्ण ने अजुणन से यह गूढ़ वचन बिाया धक वह अजुणन िर्था कर्ण िोनों की वीरिा को 2
जानिे हैं । वह िोनों के बि से पररधचि हैं परन्तु मन ही मन वह कर्ण को अजुणन से िी बड़ा
वीर मानिे रहे हैं ।
(ङ) कृष्ण सोच रहे र्थे धक संसार में क्या कोई और ऐसा वीर है जो कर्ण की बराबरी कर सके? 2
उसे युि में पराधजि कर सके ?
खंड – ख
(व्याविारिक व्याकिण ) 16
3. धनिे शानुसार ‘रचना के आिार पर वाक्य िेि’ पर आिाररि पाँ च प्रश्नों में से धकन्ीं चार 4x1=4
प्रश्नों के उत्तर धिल्किए :
(क) हाििार साहब चौराहे पर रुककर मूधिण को िे ििे र्थे | (सरि वाक्य) 1
(ि) जाड़ा आिा और बािगोधबन िगि एक कािी कमिी ऊपर से ओढ़े रहिे | 1
(सं युक्त वाक्य)
(ग) आधश्रि उपवाक्य- जो डु मराँ व में मुख्यिः सोन निी के धकनारों पर पाई जािी है | 1
आधश्रि उपवाक्य का िेि – धवशेषर् आधश्रि उपवाक्य
(घ) जैसे ही नवाब साहब ने िीरे का आनंि धिया वै से ही उनकी पिकें मुँि गईं | 1
(धमश्र वाक्य)
(ङ) संयुक्त वाक्य 1
4. धनिे शानुसार ‘वाच्य’ पर आिाररि पाँ च प्रश्नों में से धकन्ीं चार प्रश्नों के उत्तर धिल्किए : 4x1=4
(क) उसके द्वारा धगने -चुने फ्रेम नेिाजी की मूधिण पर धिट कर धिए जािे हैं | (कमण वाच्य) 1
(ि) नवाब साहब ने जेब से चाकू धनकािा और िीरे धछिने शु रु कर धिए| (किृणवाच्य) 1
(ग) धबना सहारे िािाजी से अब चिा नहीं जािा है | (िाववाच्य) 1
(घ) किृणवाच्य 1
(ङ) कमणवाच्य 1
5. धनिे शानुसार ‘पि पररचय’ पर आिाररि पाँ च प्रश्नों में से धकन्ीं चार प्रश्नों के रे िां धकि 4x1=4
पिों का पि-पररचय धिल्किए :
(क) नया - धवशेषर्, गु र्वाचक, पुल्कलंग, एकवचन, ‘पान’ धवशेष्य | 1
(ि) िरीिे होंगे - धिया,सकमणक, पुल्कलंग, बहुवचन, िूिकाि | 1
(ग) के सार्थ - संबंिबोिक अव्यय, घर और डाकिाने के बीच संबंि िशाण रहा है | 1
(घ) वाह ! – धवस्मयाधिबोिक अव्यय, प्रशंसासूचक 1
(ङ) वे – सवण नाम, अन्यपुरुषवाचक सवण नाम, आिरार्थणक बहुवचन, किाण कारक | 1
6. धनिे शानुसार ‘अिं कार’ पर आिाररि पाँ च प्रश्नों में से धकन्ीं चार प्रश्नों की रे िां धकि 4x1=4
काव्य पंल्कक्तयों में अिंकार पहचान कर धिल्किए :
(क) सहसबाहु सम सो ररपु मोरा | 1
– उपमा अिंकार
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(ि) छु अि टू ट रघुपधिहु न िोसू | 1
– अधिशयोल्कक्त अिंकार |
(ग) बूढ़े पीपि ने आगे बढ़कर जुहार की | 1
– मानवीकरर् अिंकार |
(घ) िुम्ह िौ कािु हाँ क जनु िावा | बार बार मोधह िाधग बोिावा | 1
– उत्प्रेक्षा अिंकार |
(ङ) बढ़ि िे ल्कि जि सम वचन बोिे रघुकुििानु | 1
– रूपक अिंकार
खंड – ग
(पाठ्य पु स्तक एवं पूिक पाठ्य पु स्तक) 30
7. धनम्नधिल्किि पधिि गद्ां श पर आिाररि बहुधवकल्पीय प्रश्नों के सवाण धिक उपयुक्त उत्तर 5x1=5
वािे धवकल्प चुनकर धिल्किए :
काशी में संगीि आयोजन--------------------------------------
--- बजिी है |
(क) iv कर्थन I,II और IV सही हैं | 1
(ि) iii कर्थन (A) सही है और कारर् (R) कर्थन (A) की सही व्याख्या है | 1
(ग) ii काशी धवश्वनार्थ और बािाजी के प्रधि | 1
(घ) i संगीि आयोजन की | 1
(ङ) i कर्थन I और II सही हैं | 1
8. धनिाण ररि गद् पािों के आिार पर धनम्नधिल्किि चार प्रश्नों में से धकन्ीं िीन प्रश्नों के उत्तर 3x2=6
िगिग 25-30 शब्ों में धिल्किए :
(क) कैप्टन के प्रधि पानवािे ने धटप्पर्ी की र्थी ‘वो िँगड़ा क्या जाएगा फ़ौज में | पागि है 1+1=2
पागि !’-
उसकी यह धटप्पर्ी व्यंग्य िाव से पररपूर्ण है |
नैधिक मूल्ों के धवरुि है |
शारीररक रूप से चुनौिीपूर्ण व्यल्कक्त का उड़ाया गया उपहास है |
सवण िा अनुधचि ही नहीं अिद्रिा का िी प्रिीक है |
ऐसी धटप्पर्ी करना अशोिनीय एवं अनुधचि व्यवहार को िशाण िा है |
जबधक ऐसे िे श-प्रेमी व्यल्कक्तयों के प्रधि हमारा व्यवहार स्नेह,सहयोग एवं
सहानुिूधिपूर्ण होना चाधहए |
( धकन्ीं िो धबंिुओ का उले ि अपेधक्षि )
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(ि) बािगोधबन िगि ने मधहिाओं की सामाधजक ल्कथर्थधि सुिारने के धिए िो कायण धकए - 2
उन्ोंने अपने पुत्र को अपनी पिोहू से मुिाधि धििाकर मधहिाओं को पु रुषों के
बराबर िाने का प्रयास धकया |
बािगोधबन िगि ने अपने पुत्र की मृत्यु होने पर पिोहू के िाई को बुिवाकर
आिे शात्मक स्वर में कहा, “इसकी िू सरी शािी कर िे ना|”
इस प्रकार धविवा धववाह के माध्यम से उन्ोंने नाररयों की सामाधजक ल्कथर्थधि को
सुिारना चाहा।
(ग) ‘शीिा अग्रवाि’ ने महत्त्वपूर्ण िूधमका धनिाई – 2
उनके सार्थ की गई िंबी बहसों ने िेल्किका को साधहत्य समझने की दृधष्ट प्रिान
की |
अनेक महत्त्वपूर्ण िे िकों को पढ़ने का सुझाव िे कर मन्नू के धचंिन और मनन को
सँवारा |
उन्ें साहसी और आत्मधवश्वासी बनाया |
िे श के स्विंत्रिा आं िोिन में सधिय िागीिार बनाया |
उनकी जोशीिी बािों से ही िेल्किका की रगों का का िून िावा में बिि गया |
उन्ोंने मन्नू के व्यल्कक्तत्व को धनिार कर असािारर् बनाया |
( धकन्ीं िो धबंिुओ का उले ि अपेधक्षि )
(घ) ‘संस्कृधि’ पाि के आिार पर 2
न्यूटन गुरुत्वाकषण र् के धसिां ि का आधवष्कार करने के कारर् संस्कृि मानव र्था
|
आज के धवद्ार्थी ने अपनी बुल्कि और धववे क के बि पर न्यू टन की िरह नया
आधवष्कार नहीं धकया।
अि: वह न्यू टन के समान सुसंथकृि नहीं है ।
आज का धवद्ार्थी न्यूटन के धसिां ि के सार्थ-सार्थ अन्य बािों का िी ज्ञान रििा
है |
इस आिार पर आज के धवद्ार्थी को अधिक सभ्य िो कह सकिे हैं परं िु संस्कृि
नहीं |
9. धनम्नधिल्किि पधिि काव्यां श पर आिाररि बहुधवकल्पीय प्रश्नों के सवाण धिक उपयुक्त उत्तर 5x1=5
वािे धवकल्प चुनकर धिल्किए :
ऊिौ, िुम हौ अधि बड़िागी-----------------------------------------ज्ौं पागी ||
(क) ii गोधपयाँ - उिव | 1
(ि) iv कर्थन I और IV सही हैं | 1
(ग) iii कर्थन (A) सही है और कारर् (R) कर्थन (A) की सही व्याख्या है | 1
(घ) iv गुर (गुड़) श्रीकृष्ण का, चाँ टी (चींटी) गोधपयों का | 1
(ङ) ii कर्थन I और II सही हैं | 1
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10. धनिाण ररि कधविाओं के आिार पर धनम्नधिल्किि चार प्रश्नों में से धकन्ीं िीन प्रश्नों के उत्तर 3x2=6
िगिग 25-30 शब्ों में धिल्किए :
(क) शल्कक्त और साहस के सार्थ धवनम्रिा का होना आवश्यक है – 2
धवनम्रिा के अिाव में शल्कक्त और साहस अधनयंधत्रि हो सकिे हैं , धजसका पररर्ाम
धवनाशकारी होिा है |
धवनम्रिा का न होना अहं कार को जन्म िे िा है |
जैसे परशुराम और िक्ष्मर् में धवनम्रिा का अिाव र्था इसधिए उन्ें सिा के धवरोि
का सामना करना पड़ा |
जबधक राम में शल्कक्त और साहस के सार्थ धवनम्रिा िी र्थी इसधिए सिा ने उनका
सम्मान धकया |
(ि) कधव अपनी आत्मकर्था में धनम्नधिल्किि िथ्ों का उले ि नहीं करना चाहिा है - 2
वह अपनी सरििा जो उसके िु िों का कारर् रही है , का उले ि नहीं करना
चाहिा है |
वह अपने जीवन में की गई न िो िू िों को धििाना चाहिा है और न िू सरों के
छि-कपट को।
वह अपनी प्रे यसी के सार्थ धबिाए सु िमय पिों को सबसे नहीं कहना चाहिा है ।
वह अपने जीवन के िु बणि पक्षों का िी उले ि नहीं करना चाहिा है ।
( धकन्ीं िो धबंिुओ का उले ि अपेधक्षि )
(ग) कधव नागाजुणन अपनी घुमक्कड़ प्रवृ धत्त के कारर् प्रवासी जीवन व्यिीि करिे र्थे | 2
अधिकां श समय अपने घर से िू र रहे , धजस कारर् वे अपने धशशु के धिए
अपररधचि हो गए |
कधव एक अधिधर्थ की िरह बहुि धिनों पश्चाि् िौटे हैं |
अपनी इसी ल्कथर्थधि के कारर् वे स्वयं को अन्य,इिर,अधिधर्थ कह रहे हैं |
ये उनके अंिमणन की पीड़ा और व्यर्था को प्रिधशणि कर रहा है |
( धकन्ीं िो धबंिुओ का उले ि अपेधक्षि )
(घ) संगिकार जैसे व्यल्कक्तयों की प्रासंधगकिा हर काि में रही है और 2
रहे गी |
संगिकार की बहुि ही महत्त्वपूर्ण एवं सार्थणक िूधमका होिी है |
ऐसे व्यल्कक्त समाज के हर छोटे -बड़े कायण में सहायक की िूधमका का धनवाण ह करिे
है |
प्रधसि या महान व्यल्कक्तयों की सफ़ििा में स्वयं को पीछे रिकर अपनी मनुष्यिा
का पररचय िे िे हैं |
ये सिै व अपने त्याग से िू सरों को आगे बढ़ाने में सहायक बनिे हैं |
इनकी उपयोधगिा सुदृढ़ नींव जैसी होिी है |
( धकन्ीं िो धबंिुओ का उले ि अपेधक्षि )
11. पूरक पाठ्य पुस्तक के धनिाण ररि पािों पर आिाररि धनम्नधिल्किि िीन प्रश्नों में से धकन्ीं िो 2x4=8
प्रश्नों के उत्तर िगिग 50-60 शब्ों में धिल्किए :
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(क) ‘मािा का अंचि’ नामक पाि में िेिक ने ित्कािीन समाज का धचत्रर् करिे हुए वहाँ 4
की जीवन-शैिी का उलेि धकया है
शां ि, प्राकृधिक एवं आत्मीयिा से पररपू र्ण वािावरर्
सरि एवं सािगीपूर्ण जीवनशैिी
पाररवाररक संबंिों में घधनष्ठिा
सामूधहकिा
प्रकृधि से धनकटिा
शारीररक िेिों की प्रिानिा
िेि -मनोरं जन के सरि और सुिि सािन
( धकन्ीं चार धबंिुओ का उलेि अपेधक्षि )
(ि) ‘साना-साना हार्थ जोधड़’ यात्रा-वृ िां ि के आिार पर िेल्किका ज्ोंज्ों- ऊँचाई की 4
ओर बढ़िी जा रही र्थीं, त्यों- त्यों-
बाजार, िोग और बल्कस्तयाँ कम होिी जा रही र्थीं।
चििे-चििे स्वेटर बुनने वािी नेपािी युवधियाँ और काटू ण न ढोने वािे
बहािु र नेपािी ओझि हो रहे र्थे।
घाधटयों में बने घर िाश के बने घरों की िरह धिि रहे र्थे।
धहमािय अब अपने धवराट रूप एवं वै िव के सार्थ धििने िगा र्था।
रास्ते सँकरे और जिे बी की िरह घुमाविार होिे जा रहे र्थे।
बीच-बीच में रं ग-धबरं गे ल्कििे हुए िूि धिि जािे र्थे।
( धकन्ीं चार धबंिुओ का उले ि अपेधक्षि )
(ग) धहरोधशमा में अर्ुबम धवस्फोट से धनकिी रे धडयोिमी िरं गों ने असमय असंख्य िोगों को 4
कािकवधिि कर धिया। िेिक ने उस धवस्फोट का िु ि िोगिे हुए िोगों को िे िा। यह
िे िकर िारि की पूवी सीमा की घटना याि आ गई धक कैसे सैधनक ब्रह्मपु त्र में बम
िेंककर हजारों मछधियाँ मार िे िे र्थे जबधक उनका काम र्थोड़ी-सी मछधियों से चि
सकिा र्था। इससे जीवों का व्यर्थण ही धवनाश हुआ र्था।
खंड – घ
( िचनात्मक लेखन ) 20
12. धनम्नधिल्किि िीन धवषयों में से तकस एक धवषय पर संकेि धबन्िु ओं के आिार पर िगिग 1x6=6
120 शब्ों में एक अनुच्छेि धिल्किए :
अनुच्छेि िे िन
िूधमका 1 अंक
धवषयवस्तु 3 अंक
धनष्कषण 1 अंक
िाषा शु ििा 1 अंक
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13. धकसी एक धवषय पर िगिग 100 शब्ों में पत्र धिल्किए : 1x5=5
पत्र -िेिन
प्रारूप (प्रारं ि और अंि की औपचाररकिाएं ) 1 अंक
धवषयवस्तु 3 अंक
िाषा शु ििा 1 अंक
14. धकसी एक धवषय पर िगिग 80 शब्ों में स्ववृ ि / ई-मेि धिल्किए : 1x5=5
स्ववृ ि िेिन
प्रारूप 1 अंक
धवषयवस्तु 3 अंक
िाषा शु ििा 1 अंक
अर्थवा
ई - मेि
प्रारूप 1 अंक
धवषयवस्तु 3 अंक
िाषा शु ििा 1 अंक
15. धकसी एक धवषय पर िगिग 40 शब्ों में धवज्ञापन / संिेश िेिन : 1x4=4
धवज्ञापन िेिन
रचनात्मक प्रस्तुधि 1 अंक
धवषयवस्तु 3 अंक
िाषा शु ििा 1 अंक
अर्थवा
संिेश िे िन
रचनात्मक प्रस्तुधि 1 अंक
धवषयवस्तु 3 अंक
िाषा शु ििा 1 अंक
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