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CBSE Class 10 Social Science Question Paper 2020 Set 32-4-3 Solutions (Hindi)

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About CBSE Class 10 Social Science Question Paper 2020 Set 32-4-3 Solutions (Hindi)

CBSE Class 10 Social Science Question Paper 2020 Set 32-4-3 Solutions (Hindi) is available here for free download. Published by CBSE for Class 10, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (14 pages). Candidates preparing for Class 10 can use CBSE Class 10 Social Science Question Paper 2020 Set 32-4-3 Solutions (Hindi) to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

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Yes. CBSE Class 10 Social Science Question Paper 2020 Set 32-4-3 Solutions (Hindi) can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

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CBSE Class 10 Social Science Question Paper 2020 Set 32-4-3 Solutions (Hindi) – Text

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अितयंत गोपनीय -केवल आं त रक एवं सीिमत योग हे तू

मा िमक िवधालय परी ा, माच-2020
अक-योजना : सामामिक मिज्ञान
SUBJECT कोड सं ा : 087 PAPER कोड : 32/4/3

सामा िनदश :-

1. आप जानते ह क परी ा थय के सही और उिचत आकलन के िलए उ र पुि तका का मू यांकन एक मह वपूण
या है। मू यांकन म एक छोटी-सी भूल भी गंभीर सम या को ज म दे सकती है जो परी ा थय के भिव य,
िश ा णाली और अ यापन- व था को भी भािवत कर सकती है। इससे बचने के िलए अनुरोध कया जाता है
क मू यांकन ारं भ करने से पूव ही आप मू यांकन िनदश को पढ़ और समझ ल। मू यांकन हम सबके िलए 10-12
दन का िमशन है अतः यह आव यक है क आप इसम अपना मह वपूण योगदान द।

2. मू यांकन अंक-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही कया जाना चािहए, अपनी ि गत ा या या कसी
अ य धारणा के अनुसार नह । यह अिनवाय है क अंक-योजना का अनुपालन पूरी तरह और िन ापूवक कया जाए।
हालाँ क, मू यांकन करते समय नवीनतम सूचना और ान पर आधा रत अथवा नवाचार पर आधा रत उ र को
उनक स यता और उपयु ता को परखते ए पूरे अंक दए जाएँ। क ा दसव के प म दए गए द ता
आधा रत(competency based) दो का मू यांकन करने म कृ पया िव ा थय ारा दए गए उ र को
समझने का यास कर; उनके उ र चाहे अंक-योजना म दए गए उ र से मेल न खाते ह तब भी सही द ता क
प रगणना क गई हो तो अंक दए जाने चािहए।

3. मु य परी क येक मू यांकन कता के ारा पहले दन जाँची गई पाँच उ र पुि तका के मू यांकन क जाँच
यानपूवक कर और आ त ह क मू यांकन-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही मू यांकन कया जा रहा है।
परी क को बाक उ र पुि तकाएँ तभी दी जाएँ जब वह आ त हो क उनके अंकन म कोई िभ ता नह है।

4. परी क सही उ र पर सही का िनशान (√) लगाएँ और गलत उ र पर गलत का (×)। मू यांकन-कता ारा ऐसा
िच न न लगाने से ऐसा समझ म आता है क उ र सही है परं तु उस पर अंक नह दए गए। परी क ारा यह भूल
सवािधक क जाती है।

5. य द कसी का उपभाग ह तो कृ पया के उपभाग के उ र पर दाय ओर अंक दए जाएँ। बाद म इन
उपभाग के अंक का योग बाय ओर के हािशये म िलखकर उसे गोलाकृ त कर दया जाए। इसका अनुपालन
दृढ़तापूवक कया जाए।

6. य द कसी के कोई उपभाग न हो तो बाय ओर के हािशये म अंक दए जाएँ और उ ह गोलाकृ त कया जाए।
इसके अनुपालन म भी दृढ़ता बरती जाए।

7. य द परी ाथ ने कसी का उ र दो थान पर िलख दया है और कसी को काटा नह है तो िजस उ र पर
अिधक अंक ा हो रहे ह , उस पर अंक द और दूसरे को काट द। य द परी ाथ ने अित र / का उ र दे
दया है तो िजन उ र पर अिधक अंक ा हो रहे ह उ ह ही वीकार कर/ उ ह पर अंक द।

Page 2

8. एक ही कार क अशुि बार-बार हो तो उसे अनदेखा कर और उस पर अंक न काटे जाएँ।

9. यहाँ यह यान रखना होगा क मू यांकन म संपूण अंक पैमाने 0 – 80 का योग अभी है अथात परी ाथ ने
य द सभी अपेि त उ र- बदु का उ लेख कया है तो उसे पूरे अंक दने े म संकोच न कर।

10. येक परी क को पूण काय-अविध म अथात 8 घंटे ित दन अिनवाय प से मू यांकन काय करना है और
ित दन मु य िवषय क बीस उ र-पुि तकाएँ तथा अ य िवषय क 25 उ र पुि तकाएँ जाँचनी ह। (िव तृत
िववरण ‘ पॉट गाइडलाइन’ म दया गया है)

11. यह सुिनि त कर क आप िन िलिखत कार क ु टयाँ न कर जो िपछले वष म क जाती रही ह –

 उ र पुि तका म कसी उ र या उ र के अंश को जाँचे िबना छोड़ देना।
 उ र के िलए िनधा रत अंक से अिधक अंक देना।
 उ र या दए गए अंक का योग ठीक न होना।
 उ र पुि तका के अंदर दए गए अंक का आवरण पृ पर सही अंतरण न होना।
 आवरण पृ पर ानुसार योग करने म अशुि ।
 योग करने म अंक और श द म अंतर होना।
 उ र पुि तका से ऑनलाइन अंकसूची म सही अंतरण न होना।
 कु ल अंक के योग म अशुि
 उ र पर सही का िच न ( √ ) लगाना कतु अंक न देना। सुिनि त कर क ( √) या (×) का उपयु
िनशान ठीक ढंग से और प प से लगा हो। यह मा एक रे खा के प म न हो)
 उ र का एक भाग सही और दूसरा गलत हो कतु अंक न दए गए ह ।

12. उ र पुि तका का मू यांकन करते ए य द कोई उ र पूण प से गलत हो तो उस पर (x) िनशान लगाएँ
और शू य (0) अंक द।

13. उ र पुि तका म कसी का िबना जाँचे ए छू ट जाना या योग म कसी भूल का पता लगना, मू यांकन काय
म लगे सभी लोग क छिव को और बोड क ित ा को धूिमल करता है।

14. सभी परी क वा तिवक मू यांकन काय से पहले ‘ पॉट इवै यूएशन’ के िनदश से सुप रिचत हो जाएँ।

15. येक परी क सुिनि त करे क सभी उ र का मू यांकन आ है, आवरण पृ पर तथा योग म कोई अशुि
नह रह गई है तथा कु ल योग को श द और अंक म िलखा गया है।

16. क ीय मा यिमक िश ा बोड प रषद पुन: मू यांकन या के अंतगत परी ा थय के अनुरोध पर िनधा रत
शु क भुगतान के बाद उ ह उ र पुि तका क फोटो कॉपी ा करने क अनुमित देती है।

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माध्यममक मिद्यालय परीक्षा (मार्च- 2020)

सामामिक मिज्ञान (087)

अंकन योिना 32/4/3
MM-80

QNO. अपेमक्षत उत्तर / मूल्य अंक PAGE MARKS
NO.
खंड -क
1. D – नर्मदा घाटी से एक आददवासी - जीदवका उपाजमन की पूदतम के दिए Eco-pg 4 1

2. १९१७ में गुिरात के खेड़ा मिले में गांधीिी का सत्याग्रह H-pg 31 1

i. खेडा दजिे के दकसान ों के सर्र्मन र्ें
3. तृतीयक क्षेत्र
i. कुि उत्पादन की अवदि र्ें सबसे अदिक। 23 Eco-pg 1

ii. र जगार सृजन की अवदि र्ें सबसे अदिक। 23
iii. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
क ई एक दबोंदु

संगमित क्षेत्र के लाभ

i. नौकरी की सुरक्षा Eco-pg 1
ii. कार् के घोंटे तय दकए 30
iii. वैतदनक अवकाश / र्ेदिकि िाभ
iv. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
क ई एक दबोंदु
4. तामलका प्रश्न Eco-pg 1
दबहार 10
5. बाल्कन H-pg 26 1

6. B – फारसी H-pg 121 1

7. B – िायर्ोंि सूत्र H-pg 106 1

8. िामत आधाररत भेदभाि को समाप्त करने का सुझाि DP 1
i. जादतवाद क र कने के दिए सोंदविान क कडे कदर् उठाने चादहए। PG-51
ii. शहरीकरण क बढावा दे ना।
iii. साक्षरता का बढना।

1

Page 4

iv. व्यावसादयक गदतशीिता।
v. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
क ई एक दबोंदु

र्ुनाि और िामत व्यिस्था
i. जादत-आिाररत अपीि से बचें
ii. जादत-आिाररत सर्र्मन के दिए दि ों क नहीों ह ना चादहए।
iii. ि ग ों र्ें नई चेतना। Dp 1
iv. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु। Pg-51
क ई एक दबोंदु

9. C – दसोंहिी DP-pg 3 1

10. सत्ता के साझेदारी DP-pg 06 1
i. सोंघर्म क कर् करने के दिए।
ii. राजनीदतक स्थर्रता सुदनदित करें ।
iii. ि कतोंत्र की भावना क बनाए रखने के दिए।
iv. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
ऊपर वदणमत दकसी भी एक का वणमन करने के दिए।

लोकतांमत्रक दे शों के प्रशासन में सामामिक समूह
i. सार्ादजक र्तभेद ों क सर्ाय दजत करने के दिए।
ii. तादक वे अिग-र्िग र्हसूस न करें । DP-pg 09 1
iii. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
क ई एक दबोंदु

11. A – दवदभन्न सार्ादजक सर्ूह DP-pg 4 1

12. पारों पररक / गैर-नवीकरणीय G-pg 56 1

13. पांडुमलमपयों का व्यापक रूप से भारत में उपयोग नही ं मकया गया H-pg 119 1
i. वे नाजुक और र्होंगे र्े।
ii. बहुत अदिक दे खभाि की आवश्यकता है।
iii. आसानी से नहीों पढा जा सकता र्ा जैसा दक दवदभन्न शैदिय ों र्ें दिखा
गया है।
iv. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
2

Page 5

क ई एक दबोंदु

14. र्हात्मा गााँिी द्वारा दिस्खत दहोंद स्वराज H-pg 32 1

1
आनोंदर्ठ - बोंदकर् चोंद्र चट्ट पाध्याय H-pg 47
15. (A) कि ि तेि क्षेत्र -गुजरात G-pg 57 1

16. D - उत्तर प्रदे श G-pg 89 1

17. जवाहर िाि नेहरू प टम G-pg 85 1

अर्वा
1
G-pg 86
हस्िया प टम
18. . A- गैर परम्परागत G-pg 2 ½+½
=1
B- परम्परागत

19. सीमांत कृषक की आय में िृद्धि के उपाय G-pg 45, 1
i. फसि पद्धदत र्ें दवदविता िाएों 46
ii. गााँव ों क आिारभूत सोंरचना प्रदान करें ।
iii. र्ोंदिय ों की प्रदतस्पिाम के रूप र्ें वैकस्िक दवपणन तोंत्र सुदनदित करें ।
iv. कृदर् ज्ञान सृजन और हस्ाों तरण क बढाना।
v. भूदर् पर दबाव क कर् करने के दिए अदिक गैर-कृदर् र जगार।
vi. आनुवोंदशक क्ाोंदत / अदभयाोंदत्रकी ( इों जीदनयररों ग)
vii. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
क ई एक दबोंदु

20.
A- दवदियर् प्रर्र् H-pg 19 1
SECTION -B
21.
केंद्र और राज्य के बीर् शद्धियों का मितरण DP-pg 3

i. सोंदविान स्पष्ट रूप से बीच र्ें दविायी शस्िय ों क दवतररत करता है 16,17
राज्य और सोंघ सरकार
ii. iदवदे शी र्ार्ि ों / बैंदकोंग जैसे राष्टरीय र्हत्व के दवर्य केंद्र सरकार की
सोंघ सूची र्ें आया।
iii. पुदिस, व्यापार जैसे थर्ानीय र्हत्व के दवर्य राज्य सूची के तहत राज्य
सरकार।
iv. दशक्षा / दववाह जैसे सार्ान्य दहत के दवर्य आए केंद्र और राज्य सरकार
3

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द न ों की सर्वती सूची के अोंतगमत।
v. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
दकन्ीों तीन दबोंदुओों की व्याख्या की जाएI

22. ममहलाओं के साथ भेदभाि
DP-pg 42, 3

i. भारतीय र्ाता-दपता पुरुर् बच्चे क पसोंद करते हैं और र्दहिा क 43
गभमपात कराते हैं।
ii. र्ाता-दपता िडदकय ों की दशक्षा पर सर्ान रूप से खचम नहीों करते हैं।
iii. र्दहिाओों क दवदभन्न क्षेत्र ों र्ें पुरुर् ों की तुिना र्ें कर् भुगतान दकया
जाता है
iv. कायम - सर्य।
v. कईों बार र्दहिाओ के घरे िू दहोंसा क सार्ना करना पडता है
vi. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
वदणमत दकए जाने वािे तीन दबोंदु

भारत में िामतयों की सरं र्ना और िामत व्यिस्था में पररितचन
i. जादत पदानुक्र् की पुरानी िारणाएों टू ट रही हैं
ii. आदर्मक दवकास के कारण।
iii. बडे पैर्ाने पर शहरीकरण के कारण।
iv. साक्षरता और दशक्षा के दवकास के कारण।
v. व्यावसादयक गदतशीिता के कारण।
vi. पुरानी जादत की पदानुक्र् क त डना।
vii. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु। DP-pg 51 3
वदणमत दकए जाने वािे तीन दबोंदु

23.
असंगमित क्षेत्र के श्रममकों की सुरक्षा की आिश्यकता ECO-pg
32 3

i. उनका अक्सर श र्ण दकया जाता है और उदचत र्जदू री का भुगतान
नहीों दकया जाता है।
ii. कर् और अदनयदर्त कर्ाई।
iii. असुरदक्षत नौकरी और क ई अन्य िाभ नहीों।
iv. वे कर्ज र ि ग हैं इसदिए आदर्मक / सार्ादजक सुरक्षा की जरूरत है
v. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
दकन्ीों तीन दबोंदुओों की व्याख्या

4

Page 7

मनिी क्षेत्र की गमतमिमधयााँ
i. सोंपदत्त का स्वादर्त्व और सेवाओों की दििीवरी दनजी व्यस्ि या
कोंपदनयाों के हार् ों र्ें है
ii. र्कसद िाभ कर्ाना है।
iii. कीर्त तोंत्र के अनुसार कार्
iv. दनजी क्षेत्र से सेवाएाँ प्राप्त करने के दिए हर्ें इन व्यस्िय ों और
कोंपदनय ों पैसे दे ने ह ग
ों े ECO-pg 3
v. टाटा आयरन एों ि स्टीि कोंपनी दिदर्टे ि (TISCO) या ररिायोंस 32
vi. उद्य ग दिदर्टे ि (RIL) दनजी स्वादर्त्व र्ें हैं।
vii. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
दकन्ीों तीन दबोंदुओों की व्याख्या
24. रे लिे
G-pg 84 3

i. रे िवे भारत र्ें पररवहन का प्रर्ुख सािन है।

ii. रे िवे व्यापार, र्ाि के पररवहन जैसी दवदवि गदतदवदिय ों का सोंचािन
करना सोंभव बनाता है।

iii. भारत र्ें रे िवे का बहुत बडा नेटवकम है ज भारतीय अर्मव्यवथर्ा क
प्रभादवत करता है।

iv. रे िवे व्यवसाय और दवदभन्न दवदवि गदतदवदियााँ जैसे तीर्मयात्रा पयमटन,
यात्रा, आवागर्न आदद का सोंचािन करता है।

v. स्र त से उद्य ग ों तक कच्चे र्ाि के पररवहन र्ें सहायता, और बाजार र्ें
दनदर्मत सार्ान।

vi. उद्य ग ों क बाजार के सार् ज डने और उन्ें दवकदसत करने र्ें र्दद
करें ।

vii. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।

दकन्ीों तीन दबोंदुओों की व्याख्या

25. 19 िी ं शताब्दी के दौरान अथचशाद्धियों द्वारा पहर्ाने गए तीन प्रिाह H-pg 57 3
i. व्यापार का प्रवाह काफी हद तक र्ाि र्ें व्यापार के दिए सोंददभमत
ह ता र्ा (गेहों या कपडे )

5

Page 8

ii. ि ग ों का प्रवाह (ख ज र्ें ि ग ों का प्रवासन) र जगार)
iii. िघु / दीघमकादिक दनवेश के दिए पूोंजी का प्रवाह
iv. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
दकन्ीों तीन दबोंदुओों की व्याख्या

भारत से कपड़ा मनयाचत
i. कपास की र्हीन दकस्म भारत से ही आती र्ी
ii. भारतीय व्यापाररय ों / बैंकर ों की दवदविता
iii. व्यापार के दनयाम त का नेटवकम
iv. उन् न
ों े बुनकर ों क सिाह दी H-pg 89
3
v. बुनाई वािे गाोंव ों से कपडे ।
vi. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
दकन्ीों तीन दबोंदुओों की व्याख्या

26.
स्रोत आधाररत प्रश्न

26.1 आसार् के बैगनी र्ज़दू र ों के दिए स्वराज की अविारणा क स्पष्ट
कीदजये I
1+1+1=
H-36
सीदर्त थर्ान से स्वतोंत्र रूप से अोंदर और बाहर जाने का अदिकार। (1) 3

21.2 बागानी र्जदू र ों की आज़ादी र्ें भडक के रूप र्ें 1859 के इनिैंि
इर्ीग्रेशन एक्ट क एक बािा के रूप र्ें स्पष्ट करें
i. वृक्षार पण श्रदर्क ों की स्वतोंत्रता।

ii. बागान श्रदर्क ों क दबना अनुर्दत के चाय बागान से जाने की अनुर्दत
नहीों र्ी (1)

21.3 र्जदू र ों के असहय ग आों द िन र्ें दहस्सा िेने के प्रर्ुख पररणार् क स्पष्ट
कीदजये I
i. उन्ें पुदिस ने पकड दिया और बेरहर्ी से पीटा।
ii. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु (1)
दकसी एक दबोंदु की व्याख्या

6

Page 9

27. औद्योमगक प्रदु षण द्वार पयाचिरण को क्षमत
3
Eco-pg
i. वायु प्रदू र्ण: अवाोंछनीय गैसे की उच्च अनुपात की उपस्थर्दत के 76, 78
कारण ह ता है
ii. जि प्रदू र्ण: जैदवक और अकाबमदनक औद्य दगक अपदशष्ट क
सर्ृद्ध नददय ों र्ें छ ड ददए जाने से ह ता है i
iii. पानी का र्र्मि प्रदू र्ण:- यह तब ह ता है जब कारखान ों और र्र्मि
प्ाोंट से गर्म पानी क ठों िा करने से पहिे क नददय ों र्ें बहा ददया
जाता है
iv. कचरे का िों दपोंग दवशेर् रूप से काोंच, हादनकारक रसायन,
औद्य दगक अपदशष्ट से भूदर् प्रदू र्ण ह ता है
v. औद्य दगक और दनर्ामण गदतदवदियााँ , र्शीनरी, कारखाने उपकरण
आदद श र प्रदू र्ण का कारण बनते हैं

दकसी भी एक दबोंदु का उल्लेख दकया जाना है। (1)

B- रोकने के उपाय

i. पानी का पुन: उपय ग और पुननमवीनीकरण दकया जाना चादहए

ii. वर्ाम जि का सोंचयन दकया जाना चादहए

iii. िुएों क कर् करने के दिए कारखान ों र्ें क यिे के बजाय तेि या
गैस का उपय ग दकया जाना चादहए।

iv. ध्वदन प्रदू र्ण क कर् करने के दिए जेनरे टर क साइिेंसर से
सुसस्ित दकया जाना चादहए।

v. उन्ें नददय ों और तािाब ों र्ें छ ड ने से पहिे गर्म पानी और
अपदशष्ट का उपचार दकया जाना चादहए

vi. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु। (2)
दकन्ीों द दबोंदुओों की व्याख्या की जाएi

28. संसाधनों के समान मितरण का महत्व
i. जीवन की एक सतत गुणवत्ता के दिए G-pg 03 3

ii. अर्ीर और गरीब के बीच के अोंतर क खत्म करना
iii. गरीबी क कर् करने के दिए
7

Page 10

iv. दवश्व र्ें शाोंदत बनाये रखने के दिए
v. हर्ारे ग्रह क खतरे से बचाने के दिए।
vi. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
दकन्ीों तीन दबोंदुओों की व्याख्या

मानि अद्धित्व के मलए संसाधन
i. र्ानव ,सार्ग्री क सोंसािन ों र्ें बदि सकता है और उनका उपय ग कर
सकता है।
ii. र्ानव अपने क सोंतुष्ट करने के दिए कच्चे र्ाि के रूप र्ें सोंसािन ों का
उपय ग करता है
iii. जरूरत ों और आरार् के दिए सोंसािनाओ की आवश्यकता
iv. उनका उपय ग वे कपडे , भ जन बनाने, र्कान बनाने के दिए करते हैं
v. वे क यिा, गैस आदद जैसे ऊजाम सोंसािन ों का उपय ग करते हैं।
vi. दबजिी, दबजिी या चिाने के दिए ईोंिन के रूप र्ें वाहन, कारखाने 3
आदद।
G-pg 03
vii. सािन जीवन की र्ुख्य गुणवत्ता र्ें भी र्दद करते हैं।
viii. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
दकन्ीों तीन दबोंदुओों की व्याख्या
29. SECTION-C
लोकतंत्र रािनीमतक समानता पर आधाररत है। DP-pg 90 5

i. ि कतोंत्र का सदविान है
ii. वे चुनाव करते हैं
iii. उनके पास पादटम याों हैं
iv. वे नागररक ों के अदिकार ों की गारों टी दे ते हैं।
v. नागररक ों र्ें सर्ानता क बढावा दे ता है
vi. व्यस्ि की गररर्ा क बढाता है
vii. दनणमय िेने की गुणवत्ता र्ें सुिार करता है
viii. सोंघर्म क हि करने के दिए एक दवदि प्रदान करता है
ix. ि कतोंत्र सभी नागररक ों क व ट दे ने का अदिकार दे ता है।
x. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
दकन्ीों पााँच दबोंदुओों की व्याख्या

30. कृमष का योगदान

i. कृदर् भारतीय अर्मव्यवथर्ा की रीढ है। G-pg 43,
44 5
ii. भारतीय सकि घरे िू उत्पादन (जी िी पी) र्ें कृदर् का उच्च दहस्सा।
iii. यह भारत र्ें अभी भी सबसे अदिक 52% र जगार पैदा करता है।

8

Page 11

iv. भारतीय कृदर् का आिुदनकीकरण अर्मव्यवथर्ा क सर्र्मन दे सकता है
v. ग्रार्ीण बुदनयादी ढाोंचे र्ें कृदर् से सुिार
vi. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
दकन्ीों पााँच दबोंदुओों की व्याख्या की जाए

31. आं तररक कममयों को दू र करने के उपाय

5
i. राजनीदतक दि ों क सदस्यता रदजस्टर रखना चादहए। DP-pg 86
ii. राजनीदतक दि ों क सोंगठनात्मक बैठक करनी चादहए।
iii. राजनीदतक दि ों क दनयदर्त आों तररक चुनाव कराने चादहए।
iv. राजनीदतक दि ों का अपना सोंदविान और ह ना चादहए
v. राजनीदतक दि ों र्ें वोंशानुगत उत्तरादिकार नहीों ह ना चादहए।
vi. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
दकन्ी पााँच दबोंदुओों की व्याख्या

32. E- PG-50 5
स्वयं सहायता समूह
i. वे ग्रार्ीण गरीब / र्दहिाओों क आत्मदनभमर बनने र्ें र्दद करते हैं।
ii. सार्ादजक दवर्य ों पर चचाम करने के दिए स्वयों सहायता सर्ूह की
दनयदर्त बैठकें
iii. स्वास्थ्य, प र्ण, घरे िू दहोंसा जैसे र्ुद्दे पर चचाम
iv. सोंपादश्वमक की सर्स्या क दू र करने के दिए स्वयों सहायता सर्ूह
र्ददगार
v. वे बचत क ज ड कर सर्ूह के सदस्य ों की र्दद करते है
vi. वे गरीबी भी कर् करते हैं
vii. स्वर जगार के अवसर पैदा करने र्ें सहायक
viii. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
दकन्ीों पााँच दबोंदुओों की व्याख्या

रोिमराच की मिंदगी में मुद्रा
i. पैसे के उपय ग से सार्ान खरीदा और बेचा जाता है ।
ii. पैसे के सार् कई तरह की सेवाओों का भी आदान-प्रदान दकया जाता
है। E-39,40 5
iii. िन का उपय ग, चाहत ों के द हरे सोंय ग की आवश्यकता क कर्
करता है।
iv. पैसा रखने वािा व्यस्ि आसानी से दवदनर्य कर सकता है

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v. अच्छी सेवाएों भी पायी जा सकती ही
vi. सार्न्य जीवन की अवश्क्िाओ की भी पूदतम र्ुद्रा से आसान ह जाती
है
vii. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु
दकन्ीों पााँच दबोंदुओों की व्याख्या की जाएi

33. 1830 का दशक यूरोप में भरी कमिनाईयां ले कर आया H-pg 15 5
i. यूर प र्ें 19 वीों शताब्दी की पहिी छर्ाही र्ें जनसोंख्या र्ें भारी वृस्द्ध
दे खी गई
ii. र जगार चाहने वाि ों की सोंख्या र जगार से अदिक है।
iii. ग्रार्ीण से शहरी क्षेत्र ों र्ें बडी आबादी का प्रवास।
iv. इों ग्लॅण्ड के सस्े र्शीन-दनदर्मत सार्ान ों के आयात से कडी प्रदतस्पिाम
v. अदभजात वगम ने अभी भी शस्ि दवशेर्ादिकार का आनोंद दिया।
vi. दकसान सार्ोंती बकाया के ब झ तिे जूझते रहे।
vii. खराब फसि के कारण खाद्य कीर्त ों र्ें वृस्द्ध।
viii. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
दकन्ीों पााँच दबोंदुओों की व्याख्या की जाए

साम्राज्यिाद से िुड़ कर राष्ट्रिाद प्रथम मिश्व युि का कारण

i. बाल्कन र्ें र र्ाोंदटक राष्टरवाद के दवचार ों का प्रसार
ii. तुकम साम्राज्य का दवघटन
iii. व्यापार, उपदनवेश, नौसेना और सैन्य पर यूर पीय शस्िय ों के बीच
H-pg 27 5
तीव्र प्रदतद्वों दद्वता,
iv. राष्टर वाददय ों द्वारा साम्राज्यवाद दवर िी आों द िन
v. स्वतोंत्र राष्टर राज्य बनाने के दिए सोंघर्म
vi. वे सार्ूदहक राष्टरीय एकता की भावना से प्रेररत र्े।
vii. राष्टरवाद के यूर पीय दवचार ों ने अपनी दवदविता दवकदसत की
Vii क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु।
सर्ग्र रूप से र्ूल्ाोंकन

34. स्रोत आधाररत प्रश्न E 2+2+1=
Pg- 5

स्रोत ए - मिदे शी व्यापार और बािारों का एकीकरण 59,61,64

34.1 दवदे शी व्यापार बाजार क कैसे एकीकृत करता है ?
i) दवदे शी व्यापार के दिए एक अवसर पैदा करता है
उत्पादक ों घरे िू बाजार ों से परे तक पहुाँचने के दिए।

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ii) दनर्ाम ता अपने उत्पाद ों क स्थर्त बाजार ों र्ें बेच सकते हैं
अन्य दे श ों र्ें।
iii) यह परे र्ाि की पसोंद का दवस्ार करने र्ें र्दद करता है
घरे िू बाजार।
iv) यह दे श ों क ज डने वािा एक र्ुख्य चैनि है
v) क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु
क ई भी द अोंक
(2)
स्रोत बी – िैश्वीकरण

34.2 वैश्वीकरण कैसे क्षेत्र और र्हाद्वीप ों र्ें र्ानव गदतदवदि का दवस्ार कर
रहा है
?
i. एक दे श से दू सरे दे श र्ें ि ग ों की आवाजाही
ii. बेहतर आय / नौकरी / दशक्षा की ख ज।
iii. वैश्वीकरण बडे के दिए अदिक अवसर पैदा करता है
iv. दु दनया भर के बाजार।
v. दे श ों र्ें पूोंजी प्रवाह की अदिक पहुोंच है
vi. प्रौद्य दगकी, र्ानव पूोंजी,
vii. सस्ा आयात और बडा दनयामत बाजार
viii. क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु
क ई भी द अोंक

(2)

स्रोत -C मिश्व व्यापार संगिन

34.3- दवश्व व्यापार सोंगठन के कायों और दवदिय ों र्जबूत बहस क जन्म ददया
है
i. िब्ल्यूटीओ के दनयर् ों ने दवकासशीि दे श ों क व्यापार क हटाने के
दिए र्जबूर दकया
ii. वे बािाएाँ ज दवकासशीि दे श ों के दहत र्ें अनुदचत हैं।
i) क ई अन्य प्रासोंदगक दबोंदु
क ई भी एक दबोंदु (1)

35. 35 के दिए Q 35 a और b - सोंिग्न र्ानदचत्र दे खें 2+4=6

दृदष्टबादित परीक्षादर्मय ों के दिए र्ानदचत्र के थर्ान पर दनम्नदिस्खत प्रश्न 1X6 = 6

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35.1 दाों िी
35.2 खेडा
35.3 ओदिशा
35.4 ओदिशा
35.5 र्हाराष्टर
356. तदर्िनािु
35.7 अर्ृतसर
35.8 र् हािी

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Document Details

Board / OrgCBSE
ExamClass 10
TypeSolution
Pages14
Updated22 Jul 2026