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NCERT
SOLUTIONS
CLASS - 9th
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Book : Bharat Aur Samkalin Vishwa - I Ncert Solutions | Chapter - 3 Social Science - History
Class : 9th
Subject : इ तहास
Chapter : 3
Chapter Name: ना सीवाद और हटलर का उदय
Q1 वाइमर गणरा य के सामने या सम याएं थी?
Answer- व व यु ध के ारं भ म जमनी एक शि तशाल दे श था, ले कन अंत होते-होते जमनी को म
रा ने हरा दया। उस समय जमनी म वाइमर का शासन था। थम व व यु ध के बाद वाइमर
गणरा य के सामने अनेक सम याएं खड़ी हो गई-
➔ स ाट के पद याग के बाद मता धकार से चन
ु े जाने वाल लोकतां क संसद का ावधान कया
गया, परं तु जमनी म ह काफ लोग को यह बात पसंद नह ं आई।
➔ वसाय क सं ध से जमनी पर अनेक पाबं दयां लगा द गई जो परू े दे श के लए अपमान का सबब
बन चक
ु थी।
➔ जमनी को अपने संसाधन से भी हाथ धोना पड़ा। आम जनता इसके लए भी रा य को ह
िज मेदार ठहरा रह थी।
➔ यु ध के पहले वाला जमनी यु ध के बाद कज़दार बन गया था। थम व व यु ध का हजाना
जमनी को चक
ु ाना पड़ रहा था। वाइमर गणरा य इस आ थक बोझ से परे शान हो चक
ु ा था।
➔ वाइमर गणरा य के समथक यथा समाजवा दय , कैथो लक, डेमो े ट और लोकतं वा दय को
‘नवंबर के अपराधी’ कहकर बल
ु ाया जाने लगा।
➔ वाइमर गणरा य राजनी तक अि थरता से भी त था। इसक वजह उ ह ं के सं वधान के दो
ावधान थे- पहला, ‘आनप
ु ा तक त न ध व’ िजसके कारण कसी एक पाट को बहुमत मलना
नामम
ु कन सा था और गठबंधन सरकार ह बनती थी। दस
ू रा, अनु छे द 48, िजसम रा प त को
आपातकाल लागू करने व अ यादे श के ज रए शासन चलाने का अ धकार दया गया था।
इस कार वाइमर गणरा य सम याओं से जझ
ू रहा था व लोकतां क होने के बाद भी लोग क
सम याएं नह ं सल
ु झा पा रहा था।
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Q2 इस बारे म चचा क िजए क 1930 तक आते-आते जमनी म ना सीवाद को लोक यता य मलने
लगी?
Answer. नाजीवाद के उदय व लोक य होने के पीछे अनेक कारण थे, िज ह हम इस कार समझ
सकते ह-
असमथ वाइमर गणरा य- यह जमनी को थम व व यु ध से उबारने म असफल रहा। जम नय का
अपनी सरकार पर से भरोसा उठ चक
ु ा था, उ ह कसी ऐसे वक प क खोज थी जो उ ह उनका खोया
हुआ सामान वापस दलवा सके।
हटलर का उदय- ऑि या म ज मा यह यि त जमनी क हार व हुए अपमान से आग बबल
ू ा हो चक
ु ा
था। वह हर हाल म जमनी को ताकतवर बनाना चाहता था। 1919 म उसने जमन वकस पाट क
सद यता ल , जो आगे चलकर ना सी पाट कहलायी। वह अपनी व ता शैल से सभी को आक षत करता
था। धीरे -धीरे लोग का व वास उसम बढ़ता गया।
1929 क महामंद - इस मंद ने लोग को नाि सय क तरफ आक षत कया। इस समय ना सीवाद एक
जन आंदोलन बन गया। यह लोग को एक अ छा भ व य दखाई दे ने लगा।
राजनी तक फेरबदल - 1933 तक हटलर को रा प त ने चांसलर बना दया। हटलर ने ढ़वा दय को
भी अपने साथ कर लया था। अब लोकतां क संगठन व णाल को समा त कया जाने लगा,
क यु न ट को मौत के घाट उतार दया गया।
इस कार एक रा क क पना व गौरवपण
ू जमनी के सपने ने ना सीवाद को काफ लोक य बना दया
था।
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Q3 ना सी सोच के खास पहलू कौन से थे?
Answer- ना सीवाद एक संपण
ू यव था, वचार क एक परू संरचना का नाम है । ना सी सोच ने
जमनी को सन
ु हरे सपने दखाए पर उसके लए वयं जमन वा सय को ह भार क मत चक
ु ानी पड़ी।
ना सी सोच क वशेष पहलू इस कार थे-
सभी समान नह ं होते- ना सी लोग ‘नॉ डक जमन आय’ व तभाशाल लोग को ह सव े ठ समझते थे।
इसके वपर त सभी अवां छत लोग थे, िज ह मार दे ना ह बेहतर समझा जाता था।
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चा स डा वन व हबट पसर का भाव- अपनी गलत सोच को वह इन वचारक के स धांत से जोड़कर
मा णक दखाने क को शश करते थे, उनके हसाब से य क पसर ने कहा है क ‘जो सबसे यो य है
वह जी वत बचेगा’, इस लए यहू दय व अवां छत का मरना ह तकसंगत है ।
‘लेबे ाउम’ या जीवन प र ध क भू राजनी तक अवधारणा- हटलर यह मानता था क सा ा य का
सार ज र है ता क जमनी के लोग को रहने क जगह कम ना पड़े। इससे एक तरफ दे श का े फल
बढ़े गा और दस
ू र तरफ दे श ताकतवर भी बनेगा।
ना सी लोग यह सोचते थे क सफ वह े ठ ह। समच
ू े व व को उ ह ं क तरह होना चा हए अथात
व वधता से परे ना सी सोच एक पता क पैरवी करती थी।
उपरो त पहलओ
ु ं को दे खकर यह लगता है क इस तरह क सोच म भले ह ारं भ म हा न न पहुंचाई, पर
आगे जाकर तानाशाह रवैये का पयाय बन गई।
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Q4 नाि सय का ोपेगडा यहू दय के खलाफ नफरत पैदा करने म इतना असरदार कैसे रहा?
Answer. जैसा क हम जानते ह, जमनी म हटलर के समय यहू दय के साथ बरु े से बरु ा यवहार कया
गया। एक तरह का नरसंहार संपण
ू व व ने दे खा, पर इस ोपेगडा के असरदार होने के पीछे कुछ कारण
थे-
राजनी तक वीकृ त- ऐसा नह ं था क यहू दय के खलाफ नफरत को एक संगठन फैला रहा था, अ पतु
वयं दे श क सरकार का यह एक एजडा था।
धा मक वीकृ त- सभी ईसाई, यहू दय को ईसा मसीह के का तल क तरह ह दे खते थे, य क ईसाइय
का आरोप था क यहू दय ने ह ईसा मसीह को मारा था। ईसाई उ ह ह यारे और सद
ू खोर समझते थे।
आ थक वीकृ त- यहू दय को पैसे के भख
ू े समझा जाता था। वह याज वसल
ू ते थे और उधार दे ने का
कारोबार करके जी वका चलाते थे। नाि सय को यह पसंद नह ं था।
सामािजक वीकृ त- हटलर ने यह बात परू जमन समाज म घर करा द थी क यहूद अ छ न ल के
नह ं है , वे आय के लए खतरा ह, इस लए समाज से उनका खा मा आव यक है ।
अतः सामािजक, आ थक, धा मक और राजनी तक वीकृ तय ने ना सी ोपेगडा को यहू दय के
खलाफ नफरत फैलाने म इतना असरदार बनाया।
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Q5 ना सी समाज म औरत क या भू मका थी? ांसीसी ां त के बारे म जानने के लए अ याय 1
दे ख। ांसीसी ां त और ना सी शासन म औरत क भू मका के बीच या फक था, एक पैरा ाफ म
बताएं।
Answer. हटलर ने जमनी म पतस
ृ ा मक समाज बनाने पर बल दया। ना सी वचारधारा म
म हलाओं को पु ष से कम माना गया। उ ह हमेशा भोग क व तु के प म समझा गया। हटलर ने
म हलाओं का काम केवल ब चे पैदा करने तक ह सी मत कर दया था।
य द हम 1940 के जमनी क तल
ु ना 1780-90 के ांस से कर तो पाएंगे क दोन दे श म म हलाओं क
ि थ त म जमीन आसमान का अंतर था। जहां एक और ांस म म हलाओं ने लई
ु स 16व का त तापलट
कर दया था; व व व यालय म रोजगार हे तु श ा ा त करने का यास कया; मता धकार के लए
संघष कया, वह ं दस
ू र ओर जमनी म म हलाएं कभी भी पु ष के समक नह ं मानी गई। हटलर ने
ना सीवाद के ज रए परू े समाज म यह सोच बना द थी क म हलाएं - पु ष म समानता का संघष बेकार
क बात है । म हलाओं का दा य व हमेशा अ छे , गोरे , तभाशाल आय ब चे पैदा करना है । उ टा
जमनी म यादा से यादा ब चे पैदा करने वाल म हलाओं को परु कृत कया जाता था।
इस कार ांसीसी ां त म जहां अबला नार क क पना साकार होती है वह ं ना सी शासन म वह नार
अबला तीत होती है ।
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Q6 नाि सय ने जनता पर परू ा नयं ण हा सल करने के लए कौन-कौन से तर के अपनाएं?
Answer- थम व व यु ध के समापन से लेकर वतीय व वयु ध के समापन तक जमनी म
ना सीवाद चरम सीमा पर रहा। इस दौरान उ ह ने जमनी के समाज और उसक जनता पर न न ल खत
तर क से नयं ण हा सल कया-
एक उ चतम दे श क क पना- हटलर ने जमनी के लोग को इतना आकषक सपना दखाया क जनता
उस सपने को परू ा करने के लए नरसंहार तक करने को तैयार हो गई।
यव
ु ाओं व ब च पर वशेष यान- अ छे जमन ब च को ना सी श ा णाल से गज
ु रना पड़ता था।
ब च को सखाया जाता था क वह यहू दय से नफरत और हटलर क पज
ू ा कर। 10 साल के ब च को
यंग
ूु फोक म भत कराया जाता था। 1922 म बनी ना सी यथ
ू ल ग म लाख यव
ु ा शा मल हुए।
पतस
ृ ा मक समाज- पु ष को म हलाओं से े ठ माना गया। उ ह हमेशा ब चा पैदा करने वाल व तु
के प म दे खा जाता था।
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चार के तर के- अ य प से श द का योग होता था, यथा ‘सामू हक ह या’ को ‘अं तम समाधान’
कहा जाता था। ना सी वचार को फैलाने के लए त वीर , फ म , रे डयो, आकषक पो टर और नार
का सहारा लया जाता था।
अ य वचारधाराओं को कमतर बताना- समाजवा दय , उदारवा दय को कमजोर व ट बताया जाता
था। उ ह वदे शी एजट कहा जाता था।
इस कार उपरो त तर क से धीरे -धीरे ना सी वचार परू जमनी म फैल गए। हालां क कुछ
जमन-वा सय ने वरोध भी कया पर वह खल
ु े प से कुछ करने से हमेशा बचते रहे , िजसके चलते
हटलर तानाशाह क तरह जमनी पर शासन कर सका।
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