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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा9
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 1: दो बैल क कथा
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — गंगा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
3 – 29 20 59 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 62 pages
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 9 · हद · गं गा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 1: दो बैल क कथा
NCERT कक्षा 9 हद क पाठ्यपुस्तक गंगा के गद्य खंड के पाठ 1 दो बैल क कथा के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह प्रेमचंद (1880–1936) क एक
पशु-कथा है, जसम हीरा और मोती नामक दो बैल परतंत्रता के वरुद्ध लड़ते ह और परोक्ष रूप से भारत के स्वतंत्रता संघष के प्रतीक बन जाते ह। पृष्ठ
3 से 29 तक अभ्यास के सभी शीषक — रचना से संवाद (मेरे उत्तर मेरे तक, मेरी समझ मेरे वचार, मेरी कल्पना मेरे अनुमान, मेरे अनुभव मेरे
वचार), वधा से संवाद (कहानी क पड़ताल, कहानी का स दय, कहानी क रचना), वषय से संवाद (कहानी का समय और समाज, पशुओं के लए
कानून, हमारी धरोहर और संस्कृ त, अलग-अलग और साथ-साथ, भारतीय सांके तक भाषा, माग खोजगे कैसे?), सृजन, भाषा से संवाद (व्याकरण
क बात — मेरे शब्द, भाषा गढ़ते मुहावरे, ग त व धयाँ, मेरी पहेली, भाषा संगम) और खोजबीन — शीषक-दर-शीषक, प्रश्न-दर-प्रश्न हल कए गए ह।
पुस्तक क अधूरी ता लकाएँ भी यहाँ पूरी भरकर द गई ह।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
गंगा (कक्षा 9) 3 – 29
खं ड प्रश्न
20 59
माध्यम
हन्द
मेरे उत्तर मेरे तक — पृष्ठ 16 और 17
अभ्यास › रचना से संवाद › मेरे उत्तर मेरे तक
रचना से सं वाद मे रे उत्तर मे रे तक
प्र.1 नम्न ल खत प्रश्न के सट क उत्तर चु नए और यह भी बताइए क आपको ये उत्तर उपयुक्त क्य लगते ह? 1.
कहानी म हीरा और मोती का आपसी संबंध कस गुण को मुख्य रूप से दशाता है? (क) प्र तस्पधा और
प्र त ं ता (ख) एकता और सहयोग (ग) गव और दं भ (घ) वद्रोह और क्रोध
सट क उत्तर — (ख) एकता और सहयोग।
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: कहानी हीरा-मोती के संबंध को आरंभ से ही ‘भाईचारे’ के रूप म गढ़ती है — “बहुत
दन साथ रहते-रहते दोन म भाईचारा हो गया था।” काम बाँटने म भी वे होड़ नह करते, ब ल्क एक-दूसरे का बोझ
उठाना चाहते ह — “हरएक क यही चेष्टा होती थी क ज्यादा-से-ज्यादा बोझ मेरी ही गरदन पर रहे।” साँड़ से लड़ते
समय दोन क संग ठत रणनी त ही जीत दलाती है — “साँड़ को भी संग ठत शत्रुओं से लड़ने का तजुरबा न था।”
और काँजीहौस म मोती अपने बँधे मत्र को छोड़कर भागने से इनकार कर दे ता है — “हम और तुम इतने दन एक
साथ रहे ह। आज तुम वप त्त म पड़ गए, तो म तुम्ह छोड़कर अलग हो जाऊँ?” यही एकता और सहयोग है।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) प्र तस्पधा और ग़लत दोन म होड़ नह । स ग मलाना भी “ वग्रह के नाते से नह , केवल वनोद के भाव से” होता है —
प्र त ं ता यानी खेल है, स्पधा नह ।
(ख) एकता और सही ✓ भाईचारा, मूक-भाषा से वचार- व नमय, साँड़ के वरुद्ध संयुक्त योजना, और मत्र के लए स्वयं
सहयोग मार खाना — सब इसी क ओर संकेत करते ह।
(ग) गव और दं भ ग़लत दं भ तो कहानी म साँड़ का लक्षण है — “अपने घमंड म भूला हुआ है।” बैल म स्वा भमान है,
दं भ नह ।
(घ) वद्रोह और क्रोध ग़लत वद्रोह और क्रोध कहानी म ह ज़रूर, पर वे गया और माल कन के प्र त ह — हीरा-मोती के
आपसी संबंध का गुण नह । प्रश्न ‘आपसी संबंध’ पूछ रहा है।
प्र.2 2. हीरा-मोती ने नया ान स्वीकार क्य नह कया? (क) उन्ह भरपेट भोजन दया गया। (ख) उन्ह बहुत मोट
रस्सी से बाँधा गया। (ग) मा लक ने बेचा, यह सोचकर उन्ह अपमान लगा। (घ) उन्ह अलग-अलग बाँधा गया।
सट क उत्तर — (ग) मा लक ने बेचा, यह सोचकर उन्ह अपमान लगा।
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: प्रेमचंद पहली ही रात का कारण खुद बता दे ते ह — “बैल को क्या मालूम, वे क्य भेजे
जा रहे ह। समझे, मा लक ने हम बेच दया।” इसके तुरंत बाद उनक क ल्पत शकायत आती है — “हमने तो तुम्हारी
सेवा करने म कोई कसर नह उठा रखी… फर तुमने हम इस जा लम के हाथ क्य बेच दया?” यह भूख या रस्सी क
शकायत नह , आहत सम्मान क शकायत है। इसी लए नाँद म चारा रखे जाने पर भी “एक ने भी उसम मुँह न
डाला” — पेट भूखा था, पर मन भरा हुआ था।
वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) उन्ह भरपेट भोजन दया गया। ग़लत यह तो अस्वीकार का कारण बन ही नह सकता। और पहली रात नाँद लगाई तो
गई, पर उन्ह ने खुद ही मुँह न डाला।
(ख) उन्ह बहुत मोट रस्सी से बाँधा ग़लत मोट रस्सी बाद म बाँधी गई — पहली बार भागने क सज़ा के रूप म। यह
गया। अस्वीकार का प रणाम है, कारण नह ।
(ग) मा लक ने बेचा, यह सोचकर सही ✓ पाठ म यही सोच शब्दशः दज है, और उसी रात वे पगहे तुड़ाकर लौट जाते ह।
उन्ह अपमान लगा।
(घ) उन्ह अलग-अलग बाँधा गया। ग़लत कहानी म ऐसा कह नह है। पहली रात दोन साथ ही थे — “दोन ने अपनी
मूक-भाषा म सलाह क … और लेट गए।”
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प्र.3 3. बैल ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का नणय क्य लया? (क) कष्ट से बचने के लए (ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने
के लए (ग) अ भमान क रक्षा के लए (घ) अपनापन पाने के लए
सट क उत्तर — (घ) अपनापन पाने के लए।
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: यह प्रश्न कहानी के पहले पलायन के बारे म है। तब तक गया ने उन्ह मारा नह था, न
भूखा रखा था; नाँद भी लगाई गई थी। फर भी वे लौट गए। कारण प्रेमचंद स्वयं लखते ह — “ जसे उन्ह ने अपना
घर समझ रखा था, वह आज उनसे छू ट गया था। यह नया घर, नया गाँव, नए आदमी, सब उन्ह बेगान -से लगते थे।”
‘बेगाना’ का उलटा ही ‘अपना’ है। जस दशा म वे भागते ह वह भी बताती है क वे खुले जंगल क ओर नह , झूरी
के ार क ओर जा रहे ह। और लौटने पर जो मलता है वह भी अपनापन ही है — “झूरी बैल को दे खकर स्नेह से
गद्गद हो गया। दौड़कर उन्ह गले लगा लया।”
वकल्प सही / ग़लत कारण
(क) कष्ट से बचने ग़लत पहली रात तक कोई कष्ट दया ही नह गया था। कष्ट (सूखा भूसा, डंडे) तो लौटने के बाद शुरू
के लए होते ह — और तब भी वे भागने क जगह डटे रहते ह।
(ख) स्वतंत्रता आं शक रूप से य द केवल स्वतंत्रता चा हए होती, तो बंधन खुलते ही वे कह भी जा सकते थे। पर वे सीधे अपने
प्राप्त करने के ठ क, पर यहाँ ही थान पर आकर खड़े हो जाते ह — यानी वे बंधन नह , पराया बंधन नह चाहते। स्वतंत्रता का
लए नह भाव कहानी म आगे (मटर के खेत म) अलग से आता है।
(ग) अ भमान क ग़लत बैल म स्वा भमान है, अ भमान नह । अ भमान का अथ है घमंड — वह कहानी म साँड़ का गुण
रक्षा के लए है, बैल का नह ।
(घ) अपनापन सही ✓ ‘बेगान -से लगते थे’ वाली पं क्त सीधे इसी वकल्प क ओर ले जाती है; लौटने का गंतव्य भी घर
पाने के लए ही है।
ध्यान द जए: कहानी म दो पलायन ह। पहला (झूरी के घर लौटना) अपनापन पाने के लए है; दूसरा (लड़क के
गराँव खोलने पर) अत्याचार के वरुद्ध वद्रोह और स्वतंत्रता के लए है। प्रश्न म “घर लौटने का नणय” कहा गया है,
इस लए उत्तर पहले पलायन का है।
प्र.4 4. गया ारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश कस मानवीय मनोवृ त्त का द्योतक है? (क) स्वा भमान (ख)
अ हसा (ग) पराधीनता (घ) अन्याय क रक्षा
सट क उत्तर — (क) स्वा भमान।
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यह उत्तर क्य उपयुक्त है: मोती अपनी मार पर नह भड़कता — वह तब भड़कता है जब “उस नदयी ने हीरा क
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नाक पर खूब डंडे जमाए”। यानी उसका क्रोध पीड़ा से नह , अपमान और अन्याय से जन्मा है। प्रेeमm
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gl सम्मान’ ही
चंद ने इससे
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emका दूसरा नाम है। और मोती क भाषा भी स्वा भमानी क भाषा है — “मुझे मारेगा, तो म भी एक-दो को
ठ क पहले लखा
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agगराl दूँगा!” वह डरकर नह , तनकर खड़ा होता है।
स्वा भमान
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वकल्प सही / कारण
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ग़लत
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(क) स्वा भमान सही ✓ आहत सम्मान से उपजा प्र तकार; अपने और अपने मत्र के मान क रक्षा।
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(ख) अ हसा ग़लत अ हसा तो इस प्रसंग म हीरा का पक्ष है — “नह । हमारी जा त का यह धम नह है।” मोती इसके
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ठ क वपरीत खड़ा है।
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(ग) पराधीनता ग़लत पराधीनता का अथ है चुपचाप दासता मान लेना। मोती का आक्रोश तो पराधीनता के इनकार का
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(घ) अन्याय क ग़लत मोती अन्याय क रक्षा नह , अन्याय का वरोध कर रहा है। यह वकल्प अथ क दृ ष्ट से ही उलटा है।
रक्षा
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5. कहानी म बैल क ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने कस लए कया? (क) कहानी को रोचक बनाने के लए
mम हास्य उत्पन्न करने के
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(ख) मनुष्य जैसी चेतना दखाने के लए (ग) संवाद को छोटा रखने के लए (घ) कथा
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सट क उत्तर — (ख) मनुष्य जैसी चेतना दखाने के लए।
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यह उत्तर क्य उपयुक्त है: ‘मूक-भाषा’ पहली बार जस वाक्य म आती है, वह स्वयं इसका उ े श्य बता दे ता है —
“अवश्य ही उनम कोई ऐसी गुप्त श क्त थी जससे जीव म श्रेष्ठता का दावा करने वाला मनुष्य वं चत है।” यानी
लेखक बैल को मनुष्य से कम नह , कह -कह मनुष्य से ऊपर दखा रहा है। मूक-भाषा म जो बात होती ह वे भी
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वचार के स्तर क ह — धम, कायरता, अनाथ लड़क क चता, स्वाथ, ब लदान। जैसे — “भागना कायरता है”,
“ गरे हुए बैरी पर स ग न चलाना चा हए”, “औरत जात पर स ग चलाना मना है”। ये m
s e कसी पशु क नह , एक चेतन
a लायक बनाती है।
m प्राणी क बात ह। यही चेतना कहानी को स्वतंत्रता आंदोलन का रूपकglबनने
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वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) कहानी को रोचक बनाने ग़लत रोचकता एक उप-प रणाम है, उ े श्य नह । केवल रोचकता चा हए होती तो संवाद हल्के-
के लए (अधूरा) फुल्के होते, न क धम और ब लदान पर बहस।
(ख) मनुष्य जैसी चेतना सही ✓ ‘गुप्त श क्त जससे मनुष्य वं चत है’ वाली पं क्त और संवाद का नै तक स्तर, दोन यही
दखाने के लए सद्ध करते ह।
(ग) संवाद को छोटा रखने के ग़लत मूक-भाषा वाले संवाद कहानी के सबसे लंबे और सबसे गहरे संवाद ह — काँजीहौस
लए वाला संवाद तो पूरा पृष्ठ घेरता है।
(घ) कथा म हास्य उत्पन्न करने ग़लत कहानी म व्यंग्य है, हास्य नह । मूक-भाषा के प्रसंग करुण और गंभीर ह — “मोती ने
के लए आँख म आँसू लाकर कहा…”।
प्र.6 6. ‘दो बैल क कथा’ को य द स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़, तो हीरा और मोती कसके प्रतीक हो सकते ह? (क)
भारत पर अंग्रेज के क्रूर और अन्यायपूण शासन के (ख) स्वतंत्रता संग्राम म पशुओं के योगदान के (ग) सत्याग्रह
और अ हसा के आंदोलन के (घ) स्वतंत्रता के लए भारतीय जनता के संघष के
सट क उत्तर — (घ) स्वतंत्रता के लए भारतीय जनता के संघष के।
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: पाठ क भू मका म ही लखा है क प्रेमचंद ने इस कहानी म यह भी बताया है क
“स्वतंत्रता सहज ही नह मलती, उसके लए बार-बार संघष करना पड़ता है”, और इस प्रकार परोक्ष रूप से यह
कहानी स्वतंत्रता आंदोलन क भावना से जुड़ी है। हीरा-मोती वही करते ह जो पराधीन जनता करती है — बार-बार
बंधन तोड़ते ह, बार-बार पकड़े जाते ह, भूखे रहते ह, मार खाते ह, पर हार नह मानते। हीरा का वाक्य — “जोर तो
मारता ही जाऊँगा, चाहे कतने ही बंधन पड़ते जाएँ” — पूरे स्वाधीनता संघष का सार है। और काँजीहौस क द वार
गराकर नौ-दस दूसरे प्रा णय को छु ड़ाना बताता है क उनका संघष केवल अपने लए नह , सबके लए है —
जनता का संघष यही होता है।
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वकल्प सही / कारण
ग़लत
(क) अंग्रेज के क्रूर ग़लत क्रूर शासन के प्रतीक गया, काँजीहौस और द ढ़यल ह — शा सत नह , शासक। हीरा-मोती तो
शासन के उसके भोगी ह।
(ख) पशुओं के ग़लत यह वकल्प रूपक को शब्दशः पढ़ लेता है। कहानी पशुओं के बारे म लखी गई है, पर कही
योगदान के मनुष्य क बात है।
(ग) सत्याग्रह और ग़लत (केवल हीरा अ हसा का पक्ष लेता है, पर मोती साँड़ के पेट म स ग भ कता है और द ढ़यल को खदे ड़ता
अ हसा के आंदोलन आधा सच) है। दोन मलकर अ हसा + सशस्त्र प्र तकार दोन धाराओं को दखाते ह — इस लए केवल
के ‘अ हसा’ कहना अधूरा होगा।
(घ) भारतीय जनता सही ✓ यह वकल्प दोन धाराओं को समेट लेता है और पाठ क भू मका क बात से अक्षरशः मेल खाता
के संघष के है।
मेरी समझ मेरे वचार — पृष्ठ 17
अभ्यास › रचना से संवाद › मेरी समझ मेरे वचार
रचना से सं वाद चचा
प्र.1 1. “दूसरे दन गया ने बैल को हल म जोता, पर इन दोन ने जैसे पाँव न उठाने क कसम खा ली थी।” जब बैल
नए मा लक के यहाँ गए, तो उन्ह ने काम करने से इनकार क्य कर दया था?
बैल का इनकार आलस्य या थकान नह था — वह एक सोचा-समझा असहयोग था। इसके तीन साफ़ कारण कहानी म मलते ह।
1. बकने का अपमान — वे समझ बैठे थे क “मा लक ने हम बेच दया।” जस झूरी क उन्ह ने वष सेवा क , उसी ने उन्ह
‘जा लम के हाथ’ स प दया — यह उनके लए वश्वासघात था। जो सेवा प्रेम से क जाती थी, वह जबरदस्ती से नह क जा
सकती।
2. अपमानजनक व्यवहार — गया के यहाँ उन्ह “मोट र स्सय से बाँधा” गया, “कल क शरारत का मजा” चखाया गया, और
खाने को केवल सूखा भूसा मला, जब क गया के अपने बैल को “खली, चूनी सब कुछ” द गई। प्रेमचंद इसे नाम भी दे ते ह —
“आहत सम्मान क व्यथा तो थी ही, उस पर मला सूखा भूसा।”
3. तुलना क चोट — झूरी उन्ह “फूल क छड़ी से भी न छू ता था। उसक टटकार पर दोन उड़ने लगते थे।” यहाँ वही काम डंडे के
दम पर कराया जा रहा था। जहाँ प्रेम था वहाँ वे दुगना बोझ अपनी गरदन पर लेना चाहते थे; जहाँ मार है वहाँ उन्ह ने पाँव तक न
उठाया।
इसका गहरा अथ: यह प्रसंग कहानी को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने वाली पहली कड़ी है। काम करने क ताकत
उनम थी — इसी हल को वे झूरी के खेत म हँसते-हँसते ख चते थे। जो नह था, वह थी सहम त। पराधीन आदमी क
सबसे बड़ी श क्त यही है क वह अपना श्रम रोक ले। प्रेमचंद के समय भारत म यही ‘असहयोग’ चल रहा था, और
प्रेमचंद ने स्वयं इसी आंदोलन के लए सरकारी नौकरी छोड़ी थी।
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प्र.2 2. “गाँव के इ तहास म यह घटना अभूतपूव न होने पर भी महत्वपूण थी।” बैल का घर लौट आना कोई साधारण
घटना नह है। कैसे? (संकेत— वे क्य लौट आए, उनके और झूरी के मन म कौन-कौन से भाव रहे ह गे, क्या
वास्त वक जीवन म भी ऐसा होता है आ द।)
यह घटना कई कारण से साधारण नह है।
यह असंभव-सा काम था। पगहे इतने मजबूत थे क “अनुमान न हो सकता था क कोई बैल उन्ह तोड़ सकेगा” — फर भी
“एक-एक झटके म र स्सयाँ टू ट गईं।” प्रेमचंद इसका कारण भी दे ते ह — “पर इन दोन म इस समय दूनी श क्त आ गई थी।”
यह दूनी श क्त भावना से आई थी, माँस-पे शय से नह ।
यह चुनाव था, भटकाव नह । अनजान गाँव से रात के अँधेरे म सही रास्ता खोजकर वे ठ क अपने ही ार पर पहुँचे — “घुटने
तक पाँव क चड़ से भरे ह।” यह बताता है क उन्ह ने आजाद नह , अपना घर चुना।
दोन ओर के भाव। बैल क आँख म लेखक ने एक अनोखा भाव दे खा — “दोन क आँख म वद्रोहमय स्नेह झलक रहा
है।” यह एक साथ उलाहना भी है और प्रेम भी। झूरी क ओर से — “स्नेह से गद्गद हो गया। दौड़कर उन्ह गले लगा लया।” गाँव
के ब ने ता लयाँ बजाईं, बाल-सभा ने अ भनंदन-पत्र दे ने का नश्चय कया और कसी ने कहा — “बैल नह ह वे, उस जनम
के आदमी ह।”
इसने रश्ते क स ाई सा बत कर द । पशु और मा लक का संबंध यहाँ मा लक का नह , आत्मीयता का सद्ध हुआ।
इसी लए ‘अभूतपूव न होने पर भी महत्वपूण’ — गाँव म बके पशु लौट आते ह, पर हर बार यह लौटना यही याद दलाता है क
प्रेम को खरीदा-बेचा नह जा सकता।
क्या वास्त वक जीवन म भी ऐसा होता है? हाँ। गाय, बैल, कुत्ते और घोड़े गंध, आवाज़ और रास्ते क पहचान से
मील दूर से लौट आते ह — गाँव म ऐसे कस्से आम ह। इसी लए लेखक ने इसे ‘अभूतपूव’ नह कहा; उसने इसे
महत्वपूण कहा, क्य क महत्व घटना म नह , उसके पीछे के भाव म है।
प्र.3 3. “मोती ने मूक-भाषा म कहा— अब तो नह सहा जाता, हीरा!” ‘कभी-कभी संघष करना आवश्यक हो जाता
है’ इस कथन को कहानी के उदाहरण से सद्ध क जए।
पूरी कहानी इसी कथन का प्रमाण है। कहानी म सहनशीलता एक हद तक चलती है, फर हर बार वह क्षण आता है जब सहना ही
अन्याय को बढ़ाने लगता है — और तब बैल संघष करते ह।
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प्रसंग पहले क्या सहा संघष का रूप क्या मला
ससुराल क अनजान घर, भूख, “दोन ने जोर मारकर पगहे तुड़ा डाले और घर क अपना घर, झूरी का आ लगन, गाँव
पहली रात बेगानापन तरफ चले।” का स्वागत
गया का हल सूखा भूसा, मोट पाँव न उठाना; हीरा क नाक पर डंडे पड़ते ही मोती गया ने उस दन मारपीट टाल द —
जोतना रस्सी, डंडे का हल लेकर भागना — “हल, रस्सी, जुआ, जोत, “उसके तेवर दे खकर … समझ गए क
सब टू ट-टाट कर बराबर हो गया।” इस वक्त टाल जाना ही मसलहत है।”
साँड़ का — “भागना कायरता है।” दोन ने मलकर योजना “साँड़ बेदम होकर गर पड़ा” — जान
सामना बनाई — “म आगे से रगेदता हूँ, तुम पीछे से बची और आत्म वश्वास मला
रगेदो।”
काँजीहौस सारा दन एक तनका हीरा का द वार म स ग गड़ाना, डंडे खाकर भी न तीन घो ड़याँ, बक रयाँ, भेड़ और दो
भी नह ; द वार क रुकना — “जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कतने गधे — नौ-दस प्रा णय क जान
नमक न म चाटना ही बंधन पड़ते जाएँ।” फर मोती का दो घंटे क बच गई
जोर-आजमाई से द वार गराना
द ढ़यल का नीलाम, भय से काँपती “उसी वक्त मोती ने स ग चलाया। द ढ़यल पीछे द ढ़यल गाँव के बाहर भाग गया; बैल
ले जाना बोट -बोट हटा।” हमेशा के लए घर के हो गए
नष्कष: हर बार जो कुछ मला, वह सहने से नह , लड़ने से मला। कहानी यह भी दखाती है क संघष का मूल्य
चुकाना पड़ता है — मार, भूख, बंधन, नीलाम। पर इसके उलट, न लड़ने का मूल्य और भी भारी है: काँजीहौस के
दोन गधे “भाग या न भाग” सोचते ही रह गए और मोती को उन्ह स ग से ठे लकर बाहर नकालना पड़ा। जो अवसर
आने पर भी नह लड़ता, उसे कोई और आकर ही बाहर नकालता है।
प्र.4 4. “जब पेट भर गया और दोन ने आजाद का अनुभव कया…” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’
दोन म से कस भावना से अ धक प्रे रत थे? कारण स हत ल खए।
दोन भावनाएँ कहानी म ह, पर अं तम रूप से हीरा-मोती ‘अपनापन’ से अ धक प्रे रत ह — स्वतंत्रता उनके लए साध्य नह ,
अपनापन तक पहुँचने का साधन है।
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‘स्वतंत्रता’ के पक्ष म प्रमाण ‘अपनापन’ के पक्ष म प्रमाण
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अनुभव कया तो.मस्त a g l
मटर के खेत म — “जब पेट भर गया और दोन ने आजाद का पहली ही रात लौटने का कारण — “यह नया घर, नया गाँव, नए आदमी,
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asसंकल्प — “जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कतने ही
होकर उछलने-कूदने लगे।” सब उन्ह बेगान -से लगते थे।”
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हीरा
lका छोट लड़क क दो रो टयाँ — “उस एक रोट से इनक भूख तो क्या शांत
बंधन पड़ते जाएँ।” होती; पर दोन के हृदय को मानो भोजन मल गया।”
. coवmखुल जाने पर भी न भागना, क्य क “कल इस अनाथ पर आफत ag
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काँजीहौस क द वार गराना और दूसर को छु ड़ाना गराँ
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a मोती का मत्र को न छोड़ना — “आज तुम वप त्त म पड़ गए, तो म तुम्ह
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छोड़कर अलग हो जाऊँ?”
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m a s emखड़े हो गए।” स्वतंत्र होने
co agl झूरी के पास लौटे।
— अंत — “दोन दौड़कर अपने थान पर आए और
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नणायक तक: ध्यान द जए क आजाद का नशा उन्ह केवल एक बार, मटर के खेत म चढ़ता है — और वह भी
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पेट भरने के बाद, कुछ ही दे र के लए। इसके वपरीत ‘अपनापन’ हर मोड़ पर उनका नणय तय करता है: लौटना, न
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भागना, मत्र के साथ बंधे रहना, और अंत म थान पर आ खड़े होना। य द केवल स्वतंत्रता चा हए होती, तो द ढ़यल से
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छू टकर वे जंगल क ओर भाग सकते थे — पर वे घर क ओर दौड़े। इस लए उनके लए स्वतंत्रता का अथ है ‘बंधन
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से मु क्त’ नह , ब ल्क ‘अपन के बीच लौट आना’।
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दूसरा पक्ष भी लख सकते ह: य द आप ‘स्वतंत्रता’ का पक्ष लेना चाह तो हीरा के काँजीहौस वाले संकल्प और नौ-
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दस प्रा णय को छु ड़ाने के प्रसंग को आधार बनाइए। परीक्षा म दोन म से कोई भी पक्ष स्वीकाय है — शत यह है क
a s emउत्तर कहानी के प्रमाण पर टका हो।
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प्र.5
इस कथन से सहमत ह? अपने उत्तरeक m .c
5. “बैल ने जैसे पाँव न उठाने क कसम खा ली थी।” ‘अत्याचार सहना भी अन्याय म भागीदारी है ’— क्या आप
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े कारण भी बताइए।
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हाँ, म इस कथन से सहमत ँ — इस शत के साथ क सहने वाले के पास वरोध करने का कोई-न-कोई रास्ता मौजूद हो।
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सहम त के कारण —
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चुप्पी को स्वीकृ त मान लया जाता है। अत्याचारी को अपने काम क पु ष्ट चा हए होती है। जब कोई वरोध नह होता, तो वह
agl मान लेता है क उसका कया ठ क है। गया ने पहली बार मार-पीट क , दूसरी बार और अ धक क — रुका तभी जब मोती के
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“तेवर” दखे।
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अत्याचार बढ़ता जाता है। कहानी का क्रम दे खए — पहले सूखा भूसा, फर मोट रस्सी, फर डंडे, फर “नाक म नाथ डाल
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द जाएँ” क योजना। हर सही हुई ज़्यादती अगली ज़्यादती का रास्ता खोलती है।
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ag … पराकाष्ठा को पहुँच गए ह; पर आदमी उसे बेवकूफ कहता है।” प्रेमचंद आगे और तीखा
सहनशीलता को बेवकूफ़ समझ लया जाता है। कहानी क पहली ही पं क्तयाँ यही व्यंग्य करती ह — गधे म “ऋ षय -
मु नय के जतने गुण ह, वे सभी
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कहते ह — “अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से दे ना सीख जाते, तो शायद सभ्य कहलाने लगते।”
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
चुप्पी दूसर को भी बाँध दे ती है। काँजीहौस के दोन गधे न भागे और दूसर के लए भी उदाहरण बन जाते — य द मोती न
ठे लता, तो वे वह मर जाते। कहानी के अंत म बैल स्वयं इसे स्वीकार करते ह — “हमारी जान को कोई जान ही नह समझता।”
/ “इसी लए क हम इतने सीधे ह।”
पर एक ज़रूरी शत: जो सचमुच असहाय है — छोटा ब ा, बीमार, अकेली स्त्री — उसका चुप रह जाना
‘भागीदारी’ नह , ववशता है। कहानी क छोट लड़क स्वयं सौतेली माँ क मार सहती है; उसे दोषी नह ठहराया जा
सकता। फर भी वह जतना कर सकती है, करती है — रो टयाँ लाती है और गराँव खोल दे ती है। इस लए सही बात
यह है: वरोध क श क्त रहते हुए चुप रहना अन्याय म भागीदारी है; और श क्त न हो तो जतना बन पड़े, उतना
करना ही वरोध है।
अपने जीवन से जो ड़ए: कक्षा म कसी सहपाठ को चढ़ाया जा रहा हो और बाक सब हँसते रह, तो हँसने वाले
भी उस चढ़ाने म शा मल ह। रोकना न बन पड़े, तो कम-से-कम हँसना बंद करना और शक्षक को बताना — यह भी
वरोध है।
प्र.6 6. “बहुत दन साथ रहते-रहते दोन म भाईचारा हो गया था।” हीरा और मोती अ भन्न मत्र थे। कहानी क कन-
कन घटनाओं के आधार पर यह नष्कष नकाला जा सकता है? कम से कम तीन बदु ल खए।
कहानी म कम-से-कम छह घटनाएँ इस नष्कष का आधार बनती ह। तीन माँगे गए ह, पर सब जान लेना अ ा है।
1. दनचया का साझापन — “दोन साथ उठते, साथ नाँद म मुँह डालते और साथ ही बैठते थे। एक मुँह हटा लेता, तो दूसरा भी
हटा लेता था।” मत्रता क सबसे पहली पहचान यही है क सुख भी बराबर बँटे।
2. बना शब्द क समझ — “एक-दूसरे से मूक-भाषा म वचार- व नमय करते थे… अवश्य ही उनम कोई ऐसी गुप्त श क्त थी
जससे … मनुष्य वं चत है।”
3. बोझ अपने ऊपर लेने क होड़ — “हरएक क यही चेष्टा होती थी क ज्यादा-से-ज्यादा बोझ मेरी ही गरदन पर रहे।” स ी
मत्रता म स्पधा होती है, तो सेवा क होती है।
4. मत्र पर हाथ उठते ही क्रोध — हीरा क नाक पर डंडे पड़े और मोती का “गुस्सा काबू के बाहर हो गया। हल लेकर भागा।”
अपनी मार पर वह चुप रहा था।
5. संकट म लौट आना — मटर के खेत म मोती पकड़ा गया, तो हीरा जो बच नकला था, लौट आया — “हीरा ने दे खा, संगी
संकट म है, तो लौट पड़ा। फँसगे तो दोन फँसगे।”
6. स्वतंत्रता से बड़ी मत्रता — काँजीहौस म द वार गरने के बाद भी मोती नह भागा — “मोती ने आँख म आँसू लाकर कहा—
तुम मुझे इतना स्वाथ समझते हो, हीरा?” और मार खाने क बात पर बोला — “ जस अपराध के लए तुम्हारे गले म बंधन पड़ा,
उसके लए अगर मुझ पर मार पड़े, तो क्या चता।”
ध्यान दे ने योग्य बात: इन दोन का स्वभाव एक-सा नह है — हीरा सहनशील और धमभीरु है, मोती उग्र और तेज।
फर भी वे अ भन्न ह। इससे यह सीख मलती है क मत्रता एक-जैसा होने से नह , एक-दूसरे को स्वीकार करने
और आवश्यकता पड़ने पर एक-दूसरे के लए खड़े हो जाने से बनती है।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
प्र.7 7. “उसी समय माल कन ने आकर दोन के माथे चूम लए।” कहानी म माल कन और छोट लड़क , दोन के
व्यवहार क तुलना क जए।
दोन स्त्री-पात्र ह, दोन के हाथ म बैल को कुछ दे ने क श क्त है — पर एक के पास श क्त होकर भी करुणा नह , और दूसरी के
पास करुणा होकर भी श क्त नह ।
बदु माल कन (झूरी क स्त्री) छोट लड़क (भैरो क बेट )
पहली बैल को ार पर दे खकर “जल उठ ” और उन्ह बना कहे “दो रो टयाँ लए नकली और दोन के मुँह म दे कर चली गई।”
प्र त क्रया ‘नमक-हराम’ तथा ‘कामचोर’ कहा।
व्यवहार का उपयो गता — बैल काम नह करते, इस लए करुणा — वे दुखी ह, इस लए सहायता के पात्र ह।
आधार दं ड के पात्र ह।
अपनी स्थ त घर क स्वा मनी; भोजन का नणय उसी का अनाथ; माँ मर चुक है और सौतेली माँ मारती रहती है। जो दे ती है,
— “सूखे भूसे के सवा कुछ न दूँ गी, खाएँ चाहे चोरी- छपे और अपने हस्से से दे ती है।
मर।”
प्रभाव बैल क भूख और अपमान बढ़ा — “आहत “उस एक रोट से इनक भूख तो क्या शांत होती; पर दोन के हृदय को
सम्मान क व्यथा तो थी ही, उस पर मला सूखा मानो भोजन मल गया।” “प्रेम के इस प्रसाद क यह बरकत थी क …
भूसा।” दोन दुबल न होते थे।”
जो खम कोई जो खम नह ; अपने ही घर म हुक्म बहुत बड़ा जो खम — गराँव खोलकर कहा, “चुपके से भाग जाओ, नह
उठाना चलाया। तो यहाँ लोग तुम्ह मार डालगे।” पकड़े जाने पर मार उसी को पड़ती।
अंत म बदल जाती है — “उसी समय माल कन ने अंत तक वैसी ही — नस्वाथ और चुपचाप दे ने वाली।
आकर दोन के माथे चूम लए।”
अंत का महत्व: कहानी माल कन को खलना यका बनाकर नह छोड़ती। उसका माथा चूमना बताता है क वह कठोर
नह , अनजान थी — उसने बैल को केवल ‘सम्प त्त’ क तरह दे खा था। जब उसने उनका साहस, उनक वफ़ादारी
और मृत्यु के मुँह से लौटना दे खा, तो उसक दृ ष्ट बदल गई। यही प्रेमचंद क करुणा है — वे मनुष्य को सुधरने का
अवसर दे ते ह। और छोट लड़क यह सखाती है क दया के लए श क्त या सम्पन्नता ज़रूरी नह ; ज़रूरी है
संवेदनशील हृदय।
मेरी कल्पना मेरे अनुमान — पृष्ठ 18
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
अभ्यास › रचना से संवाद › मेरी कल्पना मेरे अनुमान
रचना से सं वाद कल्पना
प्र.1 1. “उसने उनके माथे सहलाए और बोली— खोले दे ती ँ। चुपके से भाग जाओ…” य द आप वह छोट लड़क
होते, तो बैल क मदद कस प्रकार करते?
लड़क के पास न श क्त थी, न अ धकार, न कोई सहारा — फर भी उसने वह सब कया जो उसके बस म था। उसक जगह होकर
मदद के तीन स्तर हो सकते ह।
स्तर क्या करता/करती क्य
तुरंत क रोज़ चोरी- छपे रोट , गुड़, चोकर और पानी पहुँचाता; घाव पर हल्द -तेल भूख और चोट का इलाज सबसे पहले चा हए।
मदद लगाता; रात म गराँव ढ ला कर दे ता ता क गरदन न छले। लड़क ने भी यही कया — और इसी क ‘बरकत’
थी क दोन दुबल न हुए।
बचाव वही करता जो उसने कया — गराँव खोल दे ता और भागने का समय यह उसक सबसे बड़ी समझदारी थी — उसने बैल
क मदद ऐसा चुनता जब सब सो चुके ह । साथ ही, जैसा उसने चतुराई से कया, को भी बचाया और अपने ऊपर से आरोप भी हटा
ऊँची आवाज़ म शोर मचा दे ता (“ओ दादा! दादा! दोन बैल भागे जा रहे लया। हीरा को यही चता थी — “कल इस अनाथ
ह!”) ता क कसी को मुझ पर संदेह न हो। पर आफत आएगी।”
ायी गाँव के बड़े-बूढ़ , दादा या पंचायत को बताता क बैल भूखे रखे जा रहे भगाना एक रात क मदद है; स ी मदद यह है क
मदद ह और मारे जा रहे ह; झूरी तक खबर पहुँचवाता क उसके बैल कस अत्याचार रुके। झूरी को पता चलते ही वह अपने
हाल म ह। बैल वापस ले आता।
नमूना उत्तर: “य द म वह छोट लड़क होती, तो सबसे पहले वही करती जो उसने कया — अपने हस्से क रो टयाँ
उन्ह खलाती, क्य क भूख से बड़ा दुख उस समय उनका कोई नह था। दन म जब सब खेत पर होते, म नाँद म
थोड़ी खली और चोकर डाल आती और उनक नाक पर पड़े घाव पर तेल लगा दे ती। रात को जब घर म यह तय हुआ
क उनक नाक म नाथ डाली जाएगी, तब म भी उनका गराँव खोल दे ती और कहती — ‘जाओ, अपने घर लौट
जाओ।’ पर म इतने पर न रुकती। दूसरे दन म अपने दादा से कहती क जो बैल काम करते ह उन्ह भूखा रखना पाप
है, और कसी जाने-पहचाने आदमी के हाथ झूरी तक यह खबर भजवाती क उसके हीरा-मोती यहाँ बहुत दुख म ह।
मुझे डर तो लगता, पर जनक आँख मुझे दे खकर भर आती ह , उन्ह छोड़कर सो जाना मुझसे न होता।”
ध्यान रहे: उत्तर लखते समय अपने-आप को ‘बहुत बड़ा नायक’ मत बनाइए। वह लड़क स्वयं अनाथ थी और मार
खाती थी। इसी लए उसक छोट -सी मदद इतनी बड़ी लगती है — जो स्वयं दुखी होकर भी दूसरे का दुख दे ख ले,
वही सबसे बड़ा सहायक है।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 2. “दोन गधे अभी तक ज्य -के-त्य खड़े थे।” भय और संकोच इंसान को अवसर मलने पर भी जकड़े रखता है।
क्या आप इस कथन से सहमत ह? इस वाक्य के संबंध म कहानी और अपने अनुभव से उदाहरण लेते हुए अपने
वचार ल खए।
हाँ, म पूरी तरह सहमत ँ। प्रेमचंद ने इस छोटे -से प्रसंग म एक बड़ी मनोवैज्ञा नक स ाई रख द है — बंधन जब बहुत दन का हो
जाए, तो वह रस्सी से नकलकर मन म बैठ जाता है।
कहानी से प्रमाण —
द वार गर चुक थी, रास्ता खुला था। “तीन घो ड़याँ सरपट भाग नकल । फर बक रयाँ नकल । इसके बाद भेड़ भी खसक
गईं; पर गधे अभी तक ज्य -के-त्य खड़े थे।”
हीरा ने पूछा तो गधे का उत्तर था — “जो कह फर पकड़ लए जाएँ!” यह भय भ वष्य का है, वतमान का नह । वतमान म तो
अवसर सामने खड़ा था।
हीरा ने समझाया — “तो क्या हरज है। अभी तो भागने का अवसर है।” पर उत्तर वही रहा — “हम तो डर लगता है, हम यह
पड़े रहगे।”
अंत म उन्ह अपने-आप जाना ही नह आया — “मोती ने दोन गध को स ग से मार-मारकर बाड़े के बाहर नकाला।” जो
अपने पैर से नह नकलता, उसे दूसरे को ठे लकर नकालना पड़ता है।
कहानी के भीतर उलटा उदाहरण — उन्ह बैल को दे खए। मार का डर उन्ह भी था; हीरा ने साफ़ कहा भी — “अबक बड़ी मार
पड़ेगी।” पर उसने वह डर काम पर हावी नह होने दया — “जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कतने ही बंधन पड़ते जाएँ।” यही
अंतर गध और बैल म है: दोन डरते ह, पर एक डर के आगे रुक जाता है और दूसरा डर के बावजूद चलता रहता है।
नमूना उत्तर (अपने अनुभव से): “मेरी कक्षा म भाषण प्र तयो गता क सूचना लगी थी। मने घर पर पूरा भाषण याद
कर लया था, पर नाम लखवाने क पच सामने आते ही हाथ रुक गया — यह सोचकर क य द बीच म भूल गया तो
सब हँसगे। प्र तयो गता के दन मेरे मत्र ने वही बात कह जो म कहना चाहता था और उसे पहला पुरस्कार मला।
उस दन मुझे लगा क मुझम तैयारी क कमी नह थी, साहस क कमी थी। अगली बार मने पहले नाम लखवाया,
फर तैयारी क — और डर तब भी था, पर इस बार म मंच तक पहुँच गया। तभी से मुझे काँजीहौस वाले गधे याद
आते ह: दरवाज़ा खुला हो और हम खड़े रह जाएँ, तो दोष दरवाज़े का नह होता।”
गहरा अथ: स्वतंत्रता आंदोलन के संदभ म यह प्रसंग और भी तीखा हो जाता है। प्रेमचंद कह रहे ह क पराधीनता
केवल शासक क ताकत से नह टकती, वह जनता के भय और संकोच से भी टकती है। इस लए आंदोलन का
पहला काम द वार तोड़ना नह , लोग के मन से डर नकालना है।
मेरे अनुभव मेरे वचार — पृष्ठ 18
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा
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अभ्यास › रचना से संवाद › मेरे अनुभव मेरे वचार
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रचना से सं वाद अपनी बात
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s m म घ नष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्क -सी रहती
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है, जस पर ज्यादा व ास नह कया जा सकता।” क्या आप इस बात से सहमत ह? आपको ऐसा क्य लगता
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है? अपने अनुभव के आधार पर बताइए।
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g एक स्पष्ट सीमा के साथ, जसे प्रेमचंद ने स्वयं ख च रखी है।
हाँ, म इस बात से बहुत हद तक सहमत ँ —aपर
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सहम त क्य —
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औपचा रकता दूरी क नशानी है। जन दोस्त के बीच बहुत तमीज़, बहुत ‘आप-जनाब’ रह जाए, वहाँ प्रायः यह डर भी रहता
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.c व ास क परीक्षा है। जो मत्र मज़ाक सह लेता है, वह यह भी सद्ध कर देतaा हैg क वह आपक नीयत पर संदेह
है क कह दूसरा बुरा न मान जाए। जहाँ यह डर न हो, वह खुलकर हँसी-मज़ाक हो पाता है।
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se करता। इसी लए लेखक ऐसी दोस्ती को ‘फुसफुसी’ नह कहता।
छे ड़खानी
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ag कहानी म इसका ठ क चत्र मलता है। हीरा-मोती “कभी-कभी दोन स ग भी मला लया करते थे— वग्रह के नाते से नह ,
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केवल वनोद के भाव से, आत्मीयता के भाव से।” यानी स ग मलाना लड़ाई नह , प्रेम का खेल था।
पर सीमा भी कहानी ही बताती है — मटर के खेत कm . c
s e े पास खेल-खेल म मोती ने हीरा को धक्का दे कर खाई म गरा दया। “तब
a g la से भड़ गया।” उस क्षण मोती ने स्वयं कनारा कर लया — “मोती ने देखा—
उसे भी क्रोध आया। संभलकर उठा और फर मोती
खेल म झगड़ा हुआ चाहता है तो कनारे हट गया।” यही असली सीख है: मज़ाक तभी तक मज़ाक है जब तक दोन हँस रहे ह । जहाँ
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एक का चेहरा बदल जाए, वहाँ रुक जाना ही मत्रता है।
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.c, नोट्स, परीक्षा। दूसरे वे, जो मेरा बस्ता छपा दे ते ह, मेरी ट फ़न से आधाagपरांठा उठा लेते ह और मेरे नाम का
नमूना उत्तर (अपने अनुभव से): “मेरे दो तरह के मत्र ह। एक वे, जनसे म केवल कक्षा क बात करता हूँ —
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aseउपनाम रखकर चढ़ाते ह। जस दन मेरी दाद अस्पताल म थ , फ़ोन दूसरे वाले मत्र का ही आया था, पहले वाले का
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नह । तब मुझे समझ आया क जो मुझसे ‘धौल-धप्पा’ कर सकता है, वही मेरे कंधे पर हाथ भी रख सकता है। पर
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comहै, इसी लए वह टकती है।” l
एक बार उसने मेरे मोटे चश्मे पर मज़ाक कया, तो मने कह दया क यह मुझे अ ा नह लगता — और उसने फर
कभी नह कया। स ी दोस्ती म यह ‘ना’ भी .चलती a g
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प्र.2 2. “हीरा ने तरस्कार कया— गरे हुए बैरी पर स ग न चलाना चा हए।” “यह सब ढ ग है। बैरी को ऐसा मारना
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चा हए क फर न उठे ।” आपका इस संबंध म क्या वचार है? आप कसके साथ ह— हीरा के या मोती के या दोन
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मेरा उत्तर है — म दोन के साथ ँ, पर अलग-अलग समय पर। लड़ते समय मोती ठ क है, और लड़ाई जीत लेने के बाद हीरा
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
पक्ष तक कहानी से प्रमाण कमज़ोरी
हीरा — “ गरे युद्ध का उ े श्य शत्रु को मटाना नह , साँड़ “बेदम होकर गर पड़ा। तब दोन ने उसे य द यह नयम हर जगह
हुए बैरी पर स ग अन्याय रोकना है। जो गर गया, वह छोड़ दया।” यही ‘छोड़ दे ना’ उन्ह साँड़ से लगाया जाए, तो
न चलाना अब खतरा नह रहा; उस पर वार ऊपर उठा दे ता है। हीरा का यह भी कथन — अत्याचारी बार-बार
चा हए।” करना बदला है, न्याय नह । यह “वह अपना धम छोड़ दे , ले कन हम अपना धम उठकर फर हमला
भारतीय युद्ध-नी त का पुराना नयम क्य छोड़?” करता रहेगा।
भी है।
मोती — “बैरी जो अन्याय करने पर तुला है, उसे मोती के तेवर दे खकर ही गया ने उस दन बदला अंतहीन हो जाता
को ऐसा मारना केवल भगा दे ना पयाप्त नह ; उसे मारपीट टाल द । द ढ़यल को उसने गाँव के है और मारने वाला स्वयं
चा हए क फर इतना अशक्त कर दे ना चा हए क वह बाहर तक खदे ड़ा, तभी वह लौटा नह । लेखक वही बन जाता है जससे
न उठे ।” फर वही न कर सके। नरमी को का व्यंग्य भी उसी ओर है — “अगर वे भी ईंट वह लड़ रहा था।
अत्याचारी कमज़ोरी समझता है। का जवाब पत्थर से दे ना सीख जाते, तो शायद
सभ्य कहलाने लगते।”
मेरा नष्कष: मोती का साहस चा हए, हीरा का संयम चा हए। साँड़ पर स ग भ कना ठ क था — वह हमला कर रहा
था। पर गरे हुए साँड़ को मार डालना ठ क न होता — वह अब लाचार था। इसी लए प्रेमचंद ने दोन बैल को एक-
दूसरे का पूरक बनाया है: अकेला हीरा दब जाता, अकेला मोती अत्याचारी बन जाता; दोन साथ ह, इस लए वे न
कायर ह न क्रूर। स्वतंत्रता आंदोलन म भी यही दो धाराएँ साथ-साथ चल — एक ओर अ हसक सत्याग्रह, दूसरी ओर
क्रां तका रय का सशस्त्र प्र तकार।
प्र.3 3. “हम और तुम इतने दन एक साथ रहे। आज तुम वप त्त म पड़ गए तो म तुम्ह छोड़कर अलग हो जाऊँ?” क्या
कभी आपने कसी वप त्त या चुनौती का सामना अपने कसी मत्र या प रजन के साथ मलकर कया है? उस
घटना के वषय म बताइए।
यह प्रश्न आपके अपने जीवन का है, इस लए इसका उत्तर आपको स्वयं लखना है। अ ा उत्तर लखने के लए इन पाँच बात को
क्रम से र खए —
1. कब और कहाँ — घटना का समय और जगह, दो पं क्तय म।
2. चुनौती क्या थी — क ठनाई ठ क-ठ क बताइए, ता क पढ़ने वाले को उसका बोझ महसूस हो।
3. साथ कसने दया और कैसे — केवल ‘मदद क ’ मत ल खए; बताइए क उसने कौन-सा काम अपने ऊपर लया।
4. आपने क्या महसूस कया — यही उत्तर क जान है। मोती के आँसू वाला वाक्य इसी लए याद रह जाता है।
5. क्या सीखा — एक वाक्य म।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर: “ पछले वष हमारे वद्यालय क वज्ञान प्रदशनी से दो दन पहले मेरा और मेरे मत्र आ दत्य का बनाया
हुआ जल-शोधन मॉडल मेज़ से गरकर टू ट गया। मेरा तो हाथ-पाँव ही फूल गए, क्य क उसम हमारी तीन हफ़्ते क
मेहनत लगी थी। मने कहा क अब हम नाम वापस ले लेते ह। आ दत्य ने केवल इतना कहा — ‘अकेले होते तो शायद
छोड़ दे ते; दो ह तो क्य छोड़?’ उस शाम हम दोन उसके घर क छत पर बैठे रहे। उसने टू ट बोतल क जगह पुरानी
बा ल्टयाँ ढूँ ढ़ , मने रेत और कोयले क परत फर से बनाईं। रात के ग्यारह बजे तक काम चला और उसक माँ हम
बीच-बीच म चाय दे ती रह । प्रदशनी म हमारा मॉडल पहले जैसा सुंदर तो नह था, पर वह काम कर रहा था और हम
सांत्वना पुरस्कार मला। मुझे पुरस्कार से ज़्यादा वह वाक्य याद रह गया। उस दन मुझे समझ आया क वप त्त का
बोझ आधा नह होता — बँटने पर वह उठाने लायक हो जाता है। हीरा के लए मोती ने भी यही कया था: वह भाग
सकता था, पर उसने बंधन म पड़े मत्र के पास लौटकर सो जाना चुना।”
Tip: ऐसे प्रश्न म स ी छोट घटना ल खए। बहुत बड़ी और नाटक य घटना गढ़ने से उत्तर नकली लगने लगता है।
परीक्षक भाव दे खता है, घटना का आकार नह ।
कहानी क पड़ताल — पृष्ठ 18 और 19
अभ्यास › वधा से संवाद › कहानी क पड़ताल
वधा से सं वाद ता लका
प्र.1 कहानी ऐसी रचना है जसम जीवन के कसी एक अंग या कसी एक मनोभाव को प्रद शत करना ही लेखक का
उ े श्य रहता है। उसके च रत्र, उसक शैली, उसका कथा- वन्यास सभी उसी एक भाव को पुष्ट करते ह। कोई
कहानी वास्त वक या काल्प नक घटनाओं पर आधा रत हो सकती है और इसम वास्त वक या काल्प नक पात्र भी
शा मल हो सकते ह। आप कहानी लेखन क इस प्र क्रया को ध्यान म रखते हुए एक कहानी का शीषक चु नए और
दए गए मुख्य बदुओं को पूरा क जए— (शीषक और लेखक / वषय / क्रया-काय / प रवेश-दे श-काल और
मुख्य वचार / च रत्र-पात्र / प रणाम)
यहाँ ता लका इसी पाठ क कहानी के लए पूरी भरकर द गई है। इसे दे खकर आप कसी भी दूसरी पढ़ हुई कहानी क ता लका
उसी ढं ग से बना सकते ह।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
बदु ‘दो बैल क कथा’ के लए भरी हुई प्र व ष्ट
शीषक और दो बैल ों की कथा — पेमचंद (मूल नाम धनपत राय, 1880–1936)
लेखक
वषय सीधे और सहनशील प्राणी का स्वा भमान; परतंत्रता के वरुद्ध बार-बार कया जाने वाला संघष; और मत्रता क श क्त।
ऊपर से यह पशु-कथा है, भीतर से पराधीन भारत क कथा।
क्रया/काय झूरी का बैल को ससुराल भेजना → बैल का पहली रात पगहे तोड़कर लौट आना → माल कन का सूखा भूसा दे ना →
गया का दुबारा ले जाना, हल म जोतना और मारना → बैल का काम से इनकार → छोट लड़क का रो टयाँ खलाना और
गराँव खोलना → भागना और रास्ता भूल जाना → साँड़ से युद्ध और वजय → मटर के खेत म पकड़े जाना → काँजीहौस
म बंद होना → हीरा-मोती का द वार गराकर नौ-दस प्रा णय को छु ड़ाना → एक सप्ताह क भूख → नीलाम और द ढ़यल
का खरीदना → रास्ता पहचानकर घर क ओर दौड़ना → मोती का द ढ़यल को खदे ड़ना।
प रवेश/दे श- प रवेश: उत्तर भारत का ग्रामीण जीवन — खेत, हल, नाँद, चरनी, थान, मेड़, कुआँ और पुर, मटर का खेत, काँजीहौस और
काल और मवे शय का नीलाम। दे श-काल: पराधीन भारत, बीसव शताब्द का पूवाध, जब अंग्रेज का दमनकारी शासन चल रहा था
मुख्य वचार और स्वतंत्रता आंदोलन जोर पकड़ रहा था। मुख्य वचार: स्वतंत्रता सहज ही नह मलती, उसके लए बार-बार संघष करना
पड़ता है — और सहनशीलता तभी तक गुण है जब तक वह अन्याय को बढ़ावा न दे ।
च रत्र/पात्र मुख्य: हीरा (सहनशील, धमपरायण, ववेक ) और मोती (उग्र, साहसी, स्वा भमानी)। अन्य: झूरी (स्नेही मा लक), झूरी क
स्त्री/माल कन (पहले कठोर, अंत म द्र वत), गया (झूरी का साला, नदयी), भैरो क छोट अनाथ लड़क (करुणा क
प्रतीक), साँड़ (घमंडी श क्त), काँजीहौस का चौक दार और मुंशी, द ढ़यल (कसाई जैसा खरीदार), तथा काँजीहौस के दो
गधे (भय के प्रतीक)।
प रणाम दोन बैल सारे कष्ट झेलकर अपने घर, अपने थान पर लौट आते ह। मोती द ढ़यल को गाँव के बाहर खदे ड़ दे ता है। नाँद म
खली, भूसा, चोकर और दाना भर दया जाता है और वही माल कन आकर दोन के माथे चूम लेती है — यानी संघष
अंत म सम्मान और अपनापन दोन जीत लाता है।
दूसरी कहानी के लए नमूना (‘ईदगाह’ — प्रेमचंद): शीषक और लेखक — ईदगाह, प्रेमचंद। वषय — बालक
का त्याग और दाद के प्र त प्रेम। क्रया/काय — हा मद का मेले जाना, खलौने- मठाई छोड़कर चमटा खरीदना, घर
लौटकर दाद को दे ना। प रवेश/दे श-काल — ईद के दन का उत्तर भारतीय गाँव; मुख्य वचार — स ा प्रेम अपनी
इ ा से बड़ा होता है। च रत्र/पात्र — हा मद, अमीना, मोह सन, महमूद, नूरे, सम्मी। प रणाम — दाद अमीना का
बालक को गले लगाकर रो पड़ना।
ता लका भरते समय याद र खए: ‘ वषय’ और ‘मुख्य वचार’ एक नह होते। वषय बताता है क कहानी कस
बारे म है; मुख्य वचार बताता है क कहानी उस बारे म क्या कहती है। और ‘ क्रया/काय’ म घटनाएँ उसी क्रम म
ल खए जस क्रम म कहानी म आती ह।
कहानी का स दय — पृष्ठ 19 और 20
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
अभ्यास › वधा से संवाद › कहानी का स दय
वधा से सं वाद ता लका
प्र.1 “दोन सर झुकाकर उसका हाथ चाटने लगे। दोन क पूँछ खड़ी हो गईं।” इस वाक्य को पढ़कर आँख के सामने
एक दृश्य-सा बन जाता है। आप जानते ह क भाषा क इस वशेषता को चत्रात्मकता कहते ह। ‘दो बैल क
कथा’ कहानी म ऐसी अनेक वशेषताएँ ह जो इसे अ त और प्रभावपूण बनाती ह। नीचे इस कहानी म आए कुछ
वशेष बदुओं को उदाहरण के साथ दया गया है। आप भी एक-एक उदाहरण खोजकर ता लका म ल खए—
( चत्रात्मक भाषा, संवादात्मकता, वरोधाभास, व्यंग्य, संघष, अ तशयो क्त, संदेह/उलझन)
पुस्तक म ‘उदाहरण 1’ भरा हुआ है और ‘उदाहरण 2’ का खाना खाली छोड़ा गया है ( चत्रात्मक भाषा म दोन भरे ह)। नीचे पूरी
ता लका द जा रही है — खाली खाने कहानी से खोजकर भरे गए ह।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा
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वशेषता वशेषता का अथ उदाहरण 1 (पुस्तक म उदाहरण 2 (खोजकर भरा गया)
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दया हुआ)
.coशब्द के माध्यम से पाठक के g l
सहसा घर का aार खुला और वही लड़क
भाषाas
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चत्रात्मक घुटने तक पाँव क चड़ से भरे
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मन म स्पष्ट और जीवंत चत्र ह। नकली।
या छ वयाँ बनाना।
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“अब तो नही ं सहा जाता, हीरा!” / “क्या करना
तो न आऊ.ँ गा।
संवादात्मकता कथ्य को आगे बढ़ाने के लए, मर जाऊँगा, पर उसके काम
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ase
पात्र के वचार, भाव आ द चाहते हो?” / “एकाध को सी ंगों पर उठाकर फे ं क
agl
व्यक्त करने के लए बातचीत दू ँगा।” — (इसी तरह: “भागना कायरता है।” /
और संवाद का प्रयोग। “तो िफर यही ं मरो। बंदा तो नौ-दो-ग्यारह होता
है। ”)
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“दोनों की आँखों में िवद ोहमय स्नेह झलक रहा
seस्नेह एक साथ। (दूसरा: वही
वरोधाभास एक ही प्रसंग या रचना म दो झूरी बैल को दे खकर स्नेह से
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.co एक साथ मौजूद होना। gla
वपरीत या परस्पर वरोधी बात गद्गद हो गया। झूरी क स्त्री ने है।” — िवद ोह और
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बैल को ार पर दे खा, तो
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मालिकन जो ‘नमक-हराम ’ कहकर सूखा भूसा देती
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जल उठ । है, अंत में “आकर दोनों के माथे चूम ” लेती है। )
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a व्यंग्य वह शैली जसम मजाक, हास्य भारतवा सय क अ का म “ऋिषयों-मुिनयों के िजतने गुण है,ं वे सभी उसमें
mजवाब पत्थर से
पराकाष्ठा को पहचु ँ गए है;ं पर आदमी उसे बेवकू फ
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agl
या कटाक्ष (चुभते हुए संकेत ) क्या दुदशा हो रही है? अगर
वे भी ईंटoका
के माध्यम से कसी दोष,
देm
. c कहता है। सद् गणु ों का इतना अनादर कही ं नही ं
s e दे खा।” (दूसरा: “जापान की िमसाल सामने है।
la सभ्य कहलाने लगते।
कुरी त, अन्याय, पाखंड या ना सीख जाते तो शायद
है। a g
कमजोरी को प्रकट कया जाता एक ही िवजय ने उसे संसार की सभ्य जाितयों में ग ण् य
बना िदया। ”)
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संघष दो वरोधी श क्तय , वचार , उससे भड़ना जान से हाथ “जोर तो मारता ही जाऊँ गा, चाहे िकतने ही बंध न
पड़ ते जाएँ।” (बैलmबनाम काँजीहौस /व्यवस्था)
m
इ ाओं या प र स्थ तय का धोना है; ले कन न भड़ने पर
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षsका उदाहरण: “िगरे हुए बैर ी पर सी ंग न
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आपस म टकराना। भी जान बचती नह नजर
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agचािहए।” / “यह सब ढोंग है।” — हीरा
(भीतरी संघ
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आती। (बैल बनाम साँड़) चलाना
agl
बनाम मोती, यानी अिहंसा बनाम पितकार। )
अ तशयो क्त कसी पात्र, घटना, भाव या झूरी इन्ह फूल क छड़ी से भी “झूर ी के साले गया को घर तक गोईं ले जाने में
se m
coदोनm उड़ने लगते थे।
दाँतों पसीना आ गया।” (दूसरा: “साँड़ पूरा हाथी
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.
वस्तु का वणन इतना बढ़ाकर न छू ता था। उसक टटकार
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करना क वह असंभव या पर है। ” तीसरा: “दोनों की बोटी-बोटी काँप रही थी। ”)
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अ वश्वसनीय लगे।
संदेह/उलझन
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जब पात्र कसी नणय पर नह सारा दन बीत गया और खाने “अपना यों बेचा जाना उ न्हे ं अच्छा लगा या बुर ा,
पहुँच पाता। को एक तनका भी न मला।
co m
कौन जाने”। (दूसरा: गराँव खुल जाने पर भी —
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समझ ही म न आता था, यह “उसने गराँव खोल िदया, पर दोनों चुपचाप खड़े
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कैसा स्वामी है? रहे। … हीरा ने कहा— चले ं तो, लेिकन कल इस
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अनाथ पर आफत आएगी। ” तीसरा: काँजीहौस के
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गधे — “अभी तक खड़े सोच रहे थे िक भागें या न
भागें। ”)
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
इन वशेषताओं को पहचानने का तरीका: चत्रात्मकता ढूँ ढ़नी हो तो ऐसा वाक्य खो जए जसे पढ़ते ही आँख के
आगे दृश्य बन जाए (रंग, ग त, मुद्रा)। अ तशयो क्त वहाँ है जहाँ बात शब्दशः असंभव हो — बैल सचमुच ‘उड़ने’
नह लगते। वरोधाभास वहाँ है जहाँ दो उलट बात एक ही साँस म कही जाएँ। और व्यंग्य वहाँ है जहाँ लेखक
तारीफ़ जैसा कुछ कहता दखे, पर चोट कह और कर रहा हो।
कहानी क रचना — पृष्ठ 20
अभ्यास › वधा से संवाद › कहानी क रचना
वधा से सं वाद
प्र.1 प्रायः कहानी के प्रारंभ म ही कहानी के मुख्य च रत्र, कहानी का समय, कहानी क भाषा, घटनाओं आ द के कुछ
संकेत मलने लगते ह। प्रेमचंद क इस कहानी म भी ऐसे संकेत ह। आप कहानी के ऐसे संकेत/ बदुओं को ढूँ ढ़कर
ल खए।
‘दो बैल क कथा’ का आरंभ बड़ा चतुर है — कहानी शुरू होने से पहले ही लेखक गधे पर एक छोटा-सा नबंध लख दे ता है, और
उसी नबंध म आगे क पूरी कहानी के बीज छपा दे ता है। नीचे संकेत क्रम से दए गए ह।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
कसका संकेत आरंभ क कौन-सी पं क्त वह आगे कस रूप म खुलता है
शीषक ही पहला ‘दो बैल क कथा’ — ‘कथा’ शब्द पंचतंत्र- हतोपदे श क पशु मनुष्य क तरह सोचते, बोलते और नै तक
संकेत पशु-कथा परंपरा क ओर इशारा करता है। बहस करते ह।
मुख्य च रत्र “झूरी के दोन बैल के नाम थे हीरा और मोती। दोन दो नाम, दो स्वभाव और पूरी कहानी का कद्र। ‘हीरा’
पछाईं जा त के थे— दे खने म सुंदर, काम म चौकस, डील और ‘मोती’ — दोन बहुमूल्य रत्न के नाम ह, यानी
म ऊँचे।” लेखक क दृ ष्ट म ये मामूली पशु नह ।
मूल वषय “गधा सचमुच बेवकूफ है, या उसके सीधेपन, उसक यही प्रश्न कहानी के अंत तक चलता है और अं तम
(सीधापन बनाम नरापद स हष्णुता ने उसे यह पदवी दे द है, इसका नश्चय संवाद म लौट आता है — “हमारी जान को कोई
प्र तकार) नह कया जा सकता।” जान ही नह समझता।” / “इसी लए क हम इतने
सीधे ह।”
दे श-काल और “दे खए न, भारतवा सय क अ का म क्या दुदशा हो यह वाक्य साफ़ बता दे ता है क कहानी पराधीन
राजनी तक संकेत रही है? … अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से दे ना सीख भारत क है और असल वषय पशु नह , पराधीन
जाते, तो शायद सभ्य कहलाने लगते। जापान क मसाल जा त का स्वा भमान है।
सामने है।”
बैल का स्वभाव “बैल कभी-कभी मारता भी है, कभी-कभी अ ड़यल बैल ‘मारना’ → साँड़ और द ढ़यल पर स ग चलाना।
(आगे क घटनाओं भी दे खने म आता है। और भी कई री तय से अपना ‘अ ड़यल होना’ → गया के हल म पाँव न उठाना।
का बीज) असंतोष प्रकट कर दे ता है।” ‘असंतोष प्रकट करना’ → नाँद म मुँह न डालना
और रस्सी तोड़ना।
मत्रता और मूक- “दोन … एक-दूसरे से मूक-भाषा म वचार- व नमय करते पूरी कहानी के संवाद इसी ‘मूक-भाषा’ म होते ह —
भाषा थे… अवश्य ही उनम कोई ऐसी गुप्त श क्त थी जससे … कहानी क सबसे बड़ी शल्प-यु क्त यह घो षत हो
मनुष्य वं चत है।” जाती है।
प रवेश और भाषा “नाँद म खली-भूसा पड़ जाने के बाद दोन साथ उठते…”, भाषा गँवई और मुहावरेदार है — पग हया, चरनी,
“हल या गाड़ी म जोत दए जाते” गराँव, थान, टटकार, डु ग्गी, काँजीहौस। प रवेश पूरी
तरह उत्तर भारतीय ग्रामीण है।
कथा- वन्यास का “संयोग क बात, झूरी ने एक बार गोईं को ससुराल भेज यह वाक्य कहानी का संघष- बदु है। इससे पहले
संकेत दया।” सब कुछ प रचय है; इसके बाद हर घटना इसी से
जन्मती है।
सीख: अ कहानी का आरंभ केवल ‘शुरुआत’ नह होता — वह एक वादा होता है। प्रेमचंद पहले पृष्ठ पर ही बता
दे ते ह क वषय क्या है (सीधेपन का अनादर), पात्र कौन ह, भाषा कैसी होगी और कहानी कस दशा म जाएगी।
कहानी पढ़ते समय पहला पृष्ठ ध्यान से प ढ़ए — आधी कहानी वह खुल जाती है।
कहानी का समय और समाज — पृष्ठ 20 और 21
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
अभ्यास › वषय से संवाद › कहानी का समय और समाज
वषय से सं वाद मलान
प्र.1 ‘दो बैल क कथा’ कहानी जस समय लखी गई थी, उस समय भारत पर अंग्रेज का दमनकारी शासन चल रहा
था… इस कहानी म से कुछ वाक्य चुनकर नीचे दए गए ह। इन वाक्य का मलान स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े
उपयुक्त वाक्य के साथ क जए— (1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कतने ही बंधन पड़ते जाएँ। 2. मर
जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। 3. हमारी जान को कोई जान ही नह समझता। 4. दोन मत्र क आँख
म, रोम-रोम म वद्रोह भरा हुआ था। 5. इतना तो हो ही गया क नौ-दस प्रा णय क जान बच गई। वे सब तो
आशीवाद दगे। 6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोन मत्र जान हथे लय पर लेकर लपके।)
सही मलान इस प्रकार है — 1→6, 2→5, 3→4, 4→2, 5→1, 6→3।
कहानी म से वाक्य स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव मलान का आधार
1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, 6. स्वतंत्र ता से नानी बार -बार जेल गए , फाँस ी दोन म एक ही बात है — बार-बार बंधन, फर भी
चाहे कतने ही बंधन पड़ते जाएँ। पर चढ़ े , पर संघ ष छोड़ ने को तैयार नही ं हुए । प्रयास न छोड़ना। हीरा डंडे खाकर मोट रस्सी से बँध
चुका है, फर भी द वार तोड़ने क बात कर रहा है।
2. मर जाऊँगा, पर उसके काम 5. स्वतंत्र ता के िलए पाण दे ना स्वीकाय था, पर यह असहयोग का सूत्र है — मृत्यु स्वीकार, पर शत्रु
तो न आऊँगा। अंगेजों की से वा में लगना अस्वीकाय। क सेवा नह । मोती यह बात द ढ़यल के संदभ म
कहता है।
3. हमारी जान को कोई जान ही 4. दासता के काल में भारतीयों के पाण, दोन जगह एक ही पीड़ा है — अपने जीवन के मूल्य
नह समझता। स म्मान और अिधकारों की कोई मह ा नही ं का न आँका जाना। यह कहानी का अं तम संवाद है
थी। और सबसे कड़वा भी।
4. दोन मत्र क आँख म, 2. भारतीय जनता के मन में िबिटश शासन के दोन म वद्रोह अभी भीतर पक रहा है, फूटा नह । यह
रोम-रोम म वद्रोह भरा हुआ था। पित िवद ोह धीरे -धीरे गहराता गया। पं क्त उस समय क है जब वे रो टयाँ खाकर भी
भीतर-भीतर उबल रहे थे।
5. इतना तो हो ही गया क नौ- 1. भगत िसंह और चंद शेखर आजाद जैसे दोन म अपने ऊपर संकट लेकर दूसर को मुक्त
दस प्रा णय क जान बच गई। ािं तकािरयों ने बिलदान िदया, िजससे लाखों कराना है। मोती जानता था क सुबह उसक ‘खूब
वे सब तो आशीवाद दगे। भारतीयों में आजादी की पेरणा जगी। मरम्मत’ होगी, फर भी उसने द वार गराई।
6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोन 3. िबिटश साम ाज्य बहत
ु शिक्तशाली था, िफर दोन म बड़ी श क्त के सामने छोट श क्त का
मत्र जान हथे लय पर लेकर भी स्वतंत्रता से नािनयों ने साहसपूवक उसका साहस है — और दोन म जीत संगठन से मलती है,
लपके। सामना िकया। आकार से नह ।
मलान करने क व ध: हर वाक्य म पहले क्रया-भाव पहचा नए — क्या यह ‘न झुकना’ है, ‘असहयोग’ है,
‘अपमान’ है, ‘भीतरी वद्रोह’ है, ‘ब लदान’ है या ‘असमान युद्ध’ है? फर दाईं ओर उसी भाव वाला वाक्य ढूँ ढ़ए।
शब्द नह , भाव मलाइए — यही ऐसे प्रश्न का नयम है।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
Did you know? इसी कारण प्रेमचंद क कहा नयाँ अंग्रेजी शासन को खटकती थ । उनके पहले कहानी-संग्रह
सोज़े-वतन को सरकार ने जब्त कर लया था और उनक प्र तयाँ जला द गई थ । प्रेमचंद ने असहयोग आंदोलन म
भाग लेने के लए सरकारी नौकरी भी छोड़ द थी।
पशुओं के लए कानून — पृष्ठ 21 और 22
अभ्यास › वषय से संवाद › पशुओं के लए कानून
वषय से सं वाद
प्र.1 1. बैल का काँजीहाउस म बंद होना न्याय और अन्याय दोन को दशाता है। कैसे?
यह प्रसंग इस लए महत्वपूण है क यहाँ नयम तो लागू हुआ, पर न्याय नह हुआ। दोन पक्ष अलग-अलग दे खए।
यह न्याय कैसे है यह अन्याय कैसे है
बैल ने सचमुच दूसरे का खेत चरा — “सामने मटर का खेत दं ड का असली दोषी बैल नह , वे लोग ह जन्ह ने उन्ह भूखा रखा और भागने
था ही। मोती उसम घुस गया।” हीरा ने मना भी कया था, पर मजबूर कया। भूख से व्याकुल प्राणी का चरना अपराध कम, ववशता
“पर उसने एक न सुनी।” अ धक है।
कसान का खेत ही उसक रोज़ी है। य द आवारा पशु फ़सल दं ड का तरीका क्रूर है। “सारा दन बीत गया और खाने को एक तनका भी न
चर जाएँ तो कसान का पूरा वष चौपट हो जाए। इसी लए मला।” फर “एक सप्ताह तक दोन मत्र वहाँ बँधे पड़े रहे। कसी ने चारे का
काँजीहौस जैसी व्यवस्था बनी — पशु पकड़े जाएँ, कुछ दं ड एक तृण भी न डाला।” भूखा रखना कसी भी नयम म दं ड नह है — यह
लेकर छोड़े जाएँ। यातना है।
खेत का मा लक अपनी फ़सल क रक्षा के लए कानून का दं ड अनुपात से बाहर है। थोड़े-से मटर चरने का दं ड एक सप्ताह क भूख, डंडे
सहारा ले रहा है, अपने हाथ से बदला नह ले रहा — यह भी और अंत म नीलाम — यानी कसाई जैसे द ढ़यल के हाथ बक जाना और
एक तरह क सभ्यता है। प्राण का संकट।
— जनका कोई दोष नह , वे भी वह मर रहे ह — “कई तो इतने कमजोर हो गए
थे क खड़े भी न हो सकते थे।” और मा लक को सूचना दए बना ही उसका
पशु बेच दया गया, जब क झूरी कहता है — “ कसी को मेरे बैल नीलाम
करने का क्या अ तयार है?”
नष्कष: काँजीहौस का उ े श्य न्यायपूण है, पर उसका व्यवहार अन्यायपूण। प्रेमचंद यहाँ एक बड़ी बात कह रहे ह
— कोई व्यवस्था तब तक न्यायपूण नह कही जा सकती जब तक वह अपने अधीन प्राणी क मूलभूत ज़रूरत
(भोजन, पानी, सुरक्षा) क रक्षा न करे। और स्वतंत्रता आंदोलन के रूपक म काँजीहौस ‘जेल’ है — जहाँ नयम के
नाम पर वही होता था जो यहाँ बैल के साथ हुआ।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा
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2. य द आपको अवसर मले तो आप बैल क ओर से कौन-कौन से कानूनी अ धकार माँगगे?
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बैल gकl ओर से म ये अ धकार माँगूँगा। हर अ धकार के साथ कहानी का वह प्रसंग भी दे रहा हूँ जसके कारण वह ज़रूरी लगता है।
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अ धकार इसका अथ कहानी म इसका उल्लंघन
emउसे पेट-भर पौ ष्टक
जस पशु से काम लयाsजाए,
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aglचोकर, दाना) और पानी मलना
1. भोजन और स्वच्छ जल “सूखे भूसे के सवा कुछ न दूँ गी, खाएँ चाहे मर।”
का अ धकार चारा (भूसा, खली, और काँजीहौस म एक सप्ताह तक अन्न का एक
अ नवाय हो। दाना नह ।
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m का मजा चखाया”;
2. मार-पीट और क्रूरता से पशु को डंडे, चाबुक या नुक ले उपकरण से पीटना “उस नदयी ने हीरा क नाक पर खूब डंडे
जमाए”; “कल क e
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सुरक्षा का अ धकार दं डनीय अपराध हो। शरारत
m . चौक दार ने “कई डंडे रसीद कए”।
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asकाम के घंट और व ाम
a g l3. जोतने-चलाने क एक सीमा हो, बीच म वश्राम “दोन दन-भर जोते जाते, डंडे खाते, अड़ते।”
का अ धकार और छाया मले, तथा बीमार या घायल पशु से काम
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न लया जाए।
घाव, चोट या रोग क m . c o
e स्थ त म पशु- च कत्सक क agl
सेवा मले। as
4. च कत्सा का अ धकार नाक पर डंडे पड़ने और साँड़ से लड़ने के बाद
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कसी ने उनके घाव नह दे खे।
5. स्वामी को सूचना दए पकड़े गए पशु के गले के गराँव, दागी पहचान या झूरी को कुछ पता ही नह चला और बैल बक
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बना नीलाम न होने का पंचायत के माध्यम से मा लक को खोजा जाए और गए — “म मवेशीखाने से नीलाम लए आता हूँ।”
अ धकार सुनवाई का अवसर दया जाए।
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coीहौस/बाड़े l a
6. काँ.ज agजमीन पर मुरद क तरह पड़े थे।” बैल ने
seन्यूmनतम सु वधाओं का
बंद रखने क जगह म चारा, पानी, छाया, हवा और “सब
a
agl अ धकार
सफ़ाई अ नवाय हो; समय-समय पर नरीक्षण हो। “द वार क नमक न म चाटनी शुरू क ”।
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7. साथी से न बछड़ने और
coनmबेचा जाए, गोशाला या
जोड़ी के पशु साथ रखे जाएँ; काम के अयोग्य हो द ढ़यल का खरीदना — “यह आदमी छु री
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वृद्धाव ा म दे खभाल का
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mजाए।
पशु-आश्रय मeरखा
जाने पर उन्ह कसाई को चलाएगा। दे ख लेना।”
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अ धकार
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जानने योग्य: भारत म पशुओं क रक्षा के लए पशु क्रूरता नवारण अ ध नयम, 1960 बना हुआ है, और
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सं वधान का अनुच्छेद 51(क)(छ) हर नाग रक का मौ लक कतव्य बताता है क वह जीवमात्र के प्र त दया रखे।
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.cगई। g l
यानी प्रेमचंद ने जो बात 1930 के दशक म कहानी के रूप म कही, वह आगे चलकर कानून क भाषा म भी लखी
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 3. मान ली जए क हीरा-मोती अपने साथ हुए अन्याय क शकायत करना चाहते ह। उनक ओर से उनक
शकायत थानाध्यक्ष को करते हुए एक पत्र ल खए। (संकेत— “थानाध्यक्ष महोदय, हमारा नाम… है। हमारे साथ
अन्याय हुआ है…।”)
शकायती पत्र का ढाँचा याद र खए — सेवा म / पता / वषय / संबोधन / घटना का क्रम-वार ववरण / माँग / धन्यवाद /
भवद य, नाम-पता- दनांक। भाषा शष्ट और तथ्य क्रम म ह ।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर:
सेवा म,
थानाध्यक्ष महोदय,
थाना — बेलपुर
जला — वाराणसी (उत्तर प्रदे श)
वषय — हमारे साथ हुई क्रूरता, अवैध बंधक और अवैध नीलामी क शकायत।
महोदय,
स वनय नवेदन है क हमारे नाम हीरा और मोती ह। हम पछाईं जा त के दो बैल ह और गाँव के कसान झूरी के यहाँ
रहते ह। वष से हम उनका हल ख चते ह, गाड़ी जोतते ह और कुएँ पर पुर चलाते ह। हमने कभी दाने-चारे क
शकायत नह क । परंतु पछले कुछ सप्ताह म हमारे साथ जो हुआ, उसक शकायत हम आपके समक्ष रख रहे ह
—
1. हमारे मा लक झूरी ने हम अपने साले गया के यहाँ भेजा। वहाँ हम केवल सूखा भूसा दया गया, जब क उसी नाँद
के पास उसके अपने बैल को खली और चूनी द जाती रही।
2. गया ने हम मोट र स्सय से बाँधा और बार-बार डंड से पीटा। एक दन उसने हीरा क नाक पर इतने डंडे मारे क
नाक से खून बहने लगा। हमारे वरुद्ध कोई अपराध नह था; हमारा दोष केवल इतना था क हम अपने घर लौट
जाना चाहते थे।
3. घर म यह भी तय हुआ क हमारी नाक म नाथ डाल द जाए, जससे हम और पीड़ा होती।
4. भूख से व्याकुल होकर हमने एक खेत म मटर चर ली, यह हमारी भूल थी और हम इसके लए क्षमाप्राथ ह। कतु
इसका दं ड यह मला क हम काँजीहौस म बंद कर दया गया, जहाँ लगातार एक सप्ताह तक हम चारे का एक
तनका भी नह दया गया। हम केवल पानी दखा दया जाता था। वहाँ बंद अन्य पशु भी भूख से अधमरे पड़े थे।
5. अंत म, हमारे मा लक झूरी को कोई सूचना दए बना हम डु ग्गी बजवाकर नीलाम कर दया गया और एक
द ढ़यल व्य क्त ने हम खरीद लया, जसके व्यवहार से स्पष्ट था क वह हम वध के लए ले जा रहा था।
अतः आपसे वनम्र नवेदन है क —
क्रूरता करने वाल के वरुद्ध पशु क्रूरता नवारण अ ध नयम के अंतगत उ चत कारवाई क जाए;
काँजीहौस म बंद पशुओं के लए चारे, पानी और छाया क व्यवस्था अ नवाय कराई जाए तथा उसका नय मत
नरीक्षण हो;
कसी भी पशु को नीलाम करने से पूव उसके स्वामी को खोजकर सूचना दे ने का नयम बनाया जाए;
और हमारी नीलामी को अवैध घो षत कर हम हमारे स्वामी झूरी के पास रहने दया जाए।
हम बोल नह सकते, इसी लए यह पत्र लखवाना पड़ा। आशा है आप हमारी पीड़ा समझगे।
धन्यवाद।
भवद य,
हीरा और मोती
ारा — झूरी, ग्राम बेलपुर, जला वाराणसी
दनांक — 12 अगस्त 20XX
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
Tip: शकायती पत्र म भावुक भाषा से ज़्यादा असर क्रम-वार तथ्य का होता है। इस लए घटनाएँ बदुवार ल खए
और अंत म स्पष्ट माँग र खए। अपनी भूल हो तो उसे भी स्वीकार कर ली जए — इससे पत्र क वश्वसनीयता बढ़ती
है, जैसे यहाँ मटर चरने क बात मानी गई है।
हमारी धरोहर और संस्कृ त — पृष्ठ 22
अभ्यास › वषय से संवाद › हमारी धरोहर और संस्कृ त
वषय से सं वाद
प्र.1 1. “वह अपना धम छोड़ दे ले कन हम अपना धम क्य छोड़!” कहानी के अनुसार हीरा और मोती सदै व ध्यान
रखते थे क कौन-से काय करने योग्य ह और कौन-से नह । वे कौन-कौन से काय कभी नह करते थे?
हीरा और मोती के लए ‘धम’ का अथ पूजा-पाठ नह , आचरण क मयादा है। कहानी म उनक छह वजनाएँ साफ़ दखती ह —
1. स्त्री पर स ग नह चलाते। मोती ने माल कन को फक दे ने क बात कही तो हीरा ने रोका — “ले कन औरत जात पर स ग
चलाना मना है, यह भूले जाते हो।”
2. गरे हुए शत्रु पर वार नह करते। साँड़ को हराने के बाद — “ गरे हुए बैरी पर स ग न चलाना चा हए।” और सचमुच, “साँड़
बेदम होकर गर पड़ा। तब दोन ने उसे छोड़ दया।”
3. नद ष को हा न नह पहुँचाते। गया को मारने का मौका था, पर हीरा ने सोचा क “वह प्यारी लड़क , जो हम रो टयाँ खलाती
है, उसी क लड़क है… यह बेचारी अनाथ न हो जाएगी?” अपने बदले के लए कसी अनाथ को और अनाथ नह बनाया।
4. अपने उपकारी को संकट म नह डालते। गराँव खुल जाने पर भी वे रुक गए — “कल इस अनाथ पर आफत आएगी। सब
इसी पर संदेह करगे।”
5. कायरता नह दखाते। साँड़ के सामने से भागने के सुझाव पर हीरा का उत्तर — “भागना कायरता है।”
6. मत्र को संकट म अकेला नह छोड़ते। “हीरा ने दे खा, संगी संकट म है, तो लौट पड़ा। फँसगे तो दोन फँसगे।” और मोती ने
द वार गरने के बाद भी भागने से इनकार कर दया।
ध्यान दे ने क बात: ये सब वे काम ह जनसे उन्ह लाभ हो सकता था — गया को मारकर वे छू ट सकते थे, माल कन
को फककर बदला ले सकते थे, अकेले भागकर मोती बच सकता था। पर उन्ह ने हर बार लाभ के बजाय मयादा
चुनी। इसी लए हीरा कहता है — “वह अपना धम छोड़ दे , ले कन हम अपना धम क्य छोड़?” यही वाक्य कहानी क
नै तक ऊँचाई है: दूसरे के अन्याय को अपने अन्याय का बहाना नह बनाया जा सकता।
प्र.2 2. “ गरे हुए बैरी पर स ग न चलाना चा हए।” “ले कन औरत जात पर स ग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।”
हीरा के ये कथन कन भारतीय मूल्य क ओर संकेत करते ह?
हीरा के ये दोन कथन भारतीय परंपरा के उन मूल्य क ओर संकेत करते ह जो युद्ध म भी मयादा बनाए रखने पर बल दे ते ह।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
कथन जस मूल्य क उसका अथ
ओर संकेत
“ गरे हुए बैरी पर स ग युद्ध-धम / क्षात्र- नहत्थे, घायल, पीठ फेरकर भागते या गरे हुए शत्रु पर वार न करना। महाभारत और
न चलाना चा हए।” धम रामायण से चली आ रही यह मयादा भारतीय युद्ध-नी त का मूल नयम रही है।
करुणा और क्षमा जो अब हा न नह पहुँचा सकता, उस पर दया करना। श क्त का उ े श्य रक्षा है, प्र तशोध
नह ।
अ हसा क सीमा- अ हसा का अथ लड़ना ही नह है — अथ यह है क हसा वह तक हो जहाँ तक
रेखा आत्मरक्षा के लए आवश्यक हो। एक कदम आगे बढ़ते ही वह क्रूरता बन जाती है।
“औरत जात पर स ग नारी के प्र त भारतीय समाज म स्त्री पर हाथ उठाना सबसे नदनीय आचरण माना गया है, चाहे वह
चलाना मना है।” सम्मान और रक्षा- स्त्री स्वयं अन्याय कर रही हो। माल कन ने उन्ह भूखा रखा था, फर भी हीरा ने यह
भाव वजना नह तोड़ी।
नबल पर बल का अपने से कमज़ोर पर श क्त दखाना वीरता नह , कायरता है। हीरा-मोती का बल साँड़
प्रयोग न करना और द ढ़यल के लए है, घर क स्त्री के लए नह ।
एक ज़रूरी स्पष्टीकरण: ‘औरत जात पर स ग चलाना मना है’ को आज इस अथ म नह लेना चा हए क स्त्री
कमज़ोर है। इसका सही और आधु नक अथ यह है — जो नहत्था है और जससे सीधा खतरा नह है, उस पर बल
का प्रयोग नह करना चा हए। प्रेमचंद ने यह वाक्य पशु के मुँह से कहलवाकर मनुष्य पर व्यंग्य भी कया है: जन
मयादाओं को मनुष्य भूल जाता है, उन्ह ये ‘बु द्धहीन’ समझे जाने वाले बैल याद रखते ह।
प्र.3 3. “दूसरे दन गया ने बैल को हल म जोता” (क) खेत म जुताई के लए बैल और हल कृ ष के पारंप रक
उपकरण ह। कृ ष के अन्य पारंप रक और आधु नक उपकरण तथा उनके उपयोग के वषय म पता लगाइए और
ल खए।
भारतीय खेती के उपकरण को दो वग म दे खा जा सकता है — पारंप रक ( जनम पशु-श क्त और मानव-श्रम लगता है) और
आधु नक ( जनम इंजन या बजली क श क्त लगती है)।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा
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वग उपकरण उपयोग
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पारंप रक
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हल (लकड़ी का, फाल म
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को पलटकर जोतना, ता क वह भुरभुरी हो और बीज जम सके। कहानी म यही उपकरण
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लगा है।
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agl जुआ, जोत और रस्सी दो बैल को जोड़कर हल या गाड़ी से बाँधना। कहानी म मोती ने इन्ह को तोड़ डाला था —
“हल, रस्सी, जुआ, जोत, सब टू ट-टाट कर बराबर हो गया।”
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पटे ला / हगा (सुहागा) जुते हुए खेत को समतल करना और ढे ले तोड़ना।
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क्यारीgबनाना, मेड़ बाँधना, नाली खोदना, गुड़ाई करना।
कुदाल और फावड़ा
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खुरपी खरपतवार (घास-फूस) नकालना।
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हँ सया / दराँती फ़सल क कटाई करना।
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कुएँ से पानी नकालकर खेत क सचाई करना। कहानी म उल्लेख है — “इसी कुएँ पर हम पुर
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चलाने आया करते थे।”
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बैलगाड़ी खाद, बीज और उपज क ढु लाई।
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सूप, ओखली-मूसल, अनाज फटकना, कूटना और पीसना।
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चक्क
आधु नक ै क्टर जुताई, ढु लाई और अन्य यंत्र को चलाने क मुख्य श क्त।
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कल्ट वेटर / रोटावेटर / तेज़ी से जुताई और म को बारीक करना।
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डस्क हैरो
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सीड ल (बीज-बुआई बीज को समान दूरी और समान गहराई पर बोना — इससे बीज कम लगता है और उपज बढ़ती
a यंत्र) है।
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ेशर कट फ़सल से दाना अलग करना।
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हावस्टर / कंबाइन कटाई, गहाई और सफ़ाई — तीन काम एक साथ।
हावस्टर
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पंप सेट और ट्यूबवेल भूजल से सचाई।
बूँद-बूँद या फुहार से पानी दे ना — जल क बड़ी बचत। m.
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प और कलर
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ेयर और ोन खाद, क टनाशक और पोषक तत्व का छड़काव; ोन से फ़सल क नगरानी भी।
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पता लगाने का तरीका: अपने गाँव या आस-पास के कसी कसान से बात क जए और पू छए क उनके दादा के
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समय कौन-से औज़ार चलते थे और आज कौन-से चलते ह। हर औज़ार का ानीय नाम भी ल खए — जैसे कह
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हल को ‘नागर’ और सुहागे को ‘पटे ला’ कहते ह। यही आपके उत्तर को सबसे अलग बनाएगा।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
सोचने क बात: मशीन ने काम आसान और तेज़ कया है, पर छोटे कसान के लए बैल आज भी सस्ते और
उपयोगी ह — वे ईंधन नह माँगते, गोबर से खाद दे ते ह और छोटे खेत म मुड़ भी जाते ह, जहाँ ै क्टर नह मुड़ पाता।
प्र.4 3. (ख) भारत म बैल केवल पशु नह ब ल्क कृ ष संस्कृ त का अ भन्न अंग ह। ल खए क भारतीय गाँव एवं
शहर म भी बैल कस- कस काम म सहायक होते ह?
बैल भारतीय जीवन म केवल ‘काम का जानवर’ नह , संस्कृ त का हस्सा ह। उनक उपयो गता तीन स्तर पर दे खी जा सकती है।
क्षेत्र बैल का काम
गाँव — खेती हल से जुताई; सुहागा/पटे ला ख चकर खेत समतल करना; बीज बोने क कूँड़ बनाना; कुएँ से पुर या रहट चलाकर सचाई;
ख लहान म दाँय चलाकर (गोल घुमाकर) अनाज क गहाई; कोल्हू चलाकर गन्ने का रस और सरस का तेल नकालना।
गाँव — ढु लाई बैलगाड़ी से खाद, बीज, अनाज, गन्ना, भूसा, लकड़ी और ईंट- ग क ढु लाई; बारात, मेला और ववाह म सवारी; क े
और सँकरे रास्त पर जहाँ ै क्टर नह जा सकता, वहाँ आज भी बैलगाड़ी ही चलती है।
शहर और मंडी, ईंट-भ े और नमाण-स्थल पर छोट दूरी क सस्ती ढु लाई; सब्ज़ी-मंडी तक माल पहुँचाना; कुछ शहर म आज भी
कस्बे बैलगाड़ी से कचरा और सामान ढोया जाता है; प्रदशनी, फ़ल्म-शू टग और सांस्कृ तक जुलूस म भी बैलगाड़ी दखती है।
अप्रत्यक्ष गोबर से जै वक खाद और गोबर-गैस; गोमूत्र से जै वक क टनाशक; गोबर के उपले ईंधन के रूप म; खेत क उवरता बनाए
उपयोग रखने म सहायक — यानी बैल एक चलती- फरती जै वक खाद-इकाई भी है।
संस्कृ त और पोला (महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़) और बैल पोला म बैल को सजाकर पूजा जाता है; मट्टू प गल (त मलनाडु ) म मवे शय क
उत्सव पूजा; कनाटक का कंबाला और त मलनाडु का जल्लीकट्टू; गोवधन पूजा म गोवंश का सम्मान; नंद शव के वाहन के रूप
म हर शव-मं दर के सामने वराजमान ह।
भाषा और ‘ब छया का ताऊ’, ‘बैल क तरह जुतना’, ‘गोईं’ जैसे मुहावरे और शब्द; लोकगीत , कहावत और चत्रकलाओं म बैल का
लोक-जीवन बार-बार आना — प्रेमचंद क यह कहानी स्वयं इसका प्रमाण है।
नष्कष: इसी लए भारतीय कसान बैल को ‘मवेशी’ नह , प रवार का सदस्य मानता है — उसे नाम दे ता है (हीरा,
मोती), उसके स ग रँगता है, गले म घंट बाँधता है और त्योहार पर उसक पूजा करता है। कहानी म झूरी का बैल को
गले लगाना और माल कन का उनके माथे चूमना इसी सांस्कृ तक रश्ते क झलक है।
अलग-अलग और साथ-साथ — पृष्ठ 22 और 23
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
अभ्यास › वषय से संवाद › अलग-अलग और साथ-साथ
वषय से सं वाद
प्र.1 “दो-चार बार मोती ने गाड़ी को सड़क क खाई म गराना चाहा; पर हीरा ने संभाल लया। वह ज्यादा सहनशील
था।” 1. कहानी के आधार पर हीरा और मोती क वशेषताएँ ल खए। (संकेत— धैयवान, गुस्सैल, मेहनती, शांत,
सहनशील आ द)
दोन बैल एक-जैसे दखते ह, पर स्वभाव म अलग ह। नीचे हर वशेषता के साथ कहानी का प्रमाण भी दया गया है।
हीरा प्रमाण मोती प्रमाण
सहनशील और “दो-चार बार मोती ने गाड़ी को सड़क क गुस्सैल और उग्र “मोती का गुस्सा काबू के बाहर हो गया।
धैयवान खाई म गराना चाहा; पर हीरा ने संभाल हल लेकर भागा।”
लया। वह ज्यादा सहनशील था।”
ववेक और “भागना व्यथ है।” और गराँव खुलने पर — साहसी और नडर “कहो तो दखा दूँ कुछ मजा म भी।
दूरदश “कल इस अनाथ पर आफत आएगी।” लाठ लेकर आ रहा है।”
धमपरायण / “नह । हमारी जा त का यह धम नह है।”; व्यावहा रक और “यह सब ढ ग है। बैरी को ऐसा मारना
मयादावाद “ गरे हुए बैरी पर स ग न चलाना चा हए।” स्पष्टवाद चा हए क फर न उठे ।”
नेतृत्व करने वाला साँड़ के समय — “उपाय यही है क उस पर दृढ़ और अ डग “तुम मुझे इतना स्वाथ समझते हो,
और योजनाकार दोन जने एक साथ चोट कर। म आगे से मत्र हीरा?” — द वार गरने के बाद भी नह
रगेदता हूँ, तुम पीछे से रगेदो।” भागा।
दृढ़-संकल्प “जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कतने ही परोपकारी “मोती ने दोन गध को स ग से मार-
बंधन पड़ते जाएँ।” मारकर बाड़े के बाहर नकाला।”
भावुक और “एक बार भगवान ने उस लड़क के रूप म आत्मा भमानी “अगर वह मुझे पकड़ता, तो म बे-मारे न
आशावाद हम बचाया था। क्या अब न बचाएँगे?” छोड़ता।” और “मर जाऊँगा; पर उसके
काम तो न आऊँगा।”
दोन म समान क्या है: मेहनती, स्वा भमानी, वफ़ादार, बु द्धमान और एक-दूसरे के प्र त अटू ट प्रेम रखने वाले। दोन
ही मार खाकर भी झुके नह और दोन ही अपने घर लौट आए।
प्र.2 2. हीरा और मोती क वशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ अलग ह, कतु उनक भन्न वशेषताएँ एक-
दूसरे को पूरा करती ह। कैसे?
दोन क भन्नताएँ आपस म टकराती नह , एक-दूसरे क कमी भरती ह। यही उनक जोड़ी क ताकत है।
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प्रसंग अकेले हीरा होता तो अकेले मोती होता तो दोन साथ थे, इस लए
गया क मार चुपचाप सहता रहता; मार पहले ही दन कसी को गरा मोती के तेवर से गया रुक गया, और हीरा के संयम
बढ़ती जाती। दे ता और शायद गोली-लाठ से बात हसा तक नह पहुँची — “इस वक्त टाल
का शकार हो जाता। जाना ही मसलहत है।”
साँड़ का “भागना कायरता है” कहकर क्रोध म सीधे टकराता, पर हीरा ने योजना बनाई और मोती ने साहस दया
सामना अकेला भड़ता और मारा एक शत्रु से अकेले लड़ने म — “साँड़ को भी संग ठत शत्रुओं से लड़ने का
जाता — साँड़ “पूरा हाथी” साँड़ ही उस्ताद था। तजुरबा न था।” वजय हुई।
था।
छोट लड़क वह चता तो करता, पर शायद तुरंत भाग नकलता — पर हीरा क चता से लड़क बच गई (उसने स्वयं शोर
का गराँव वह रुक जाता। लड़क पर आफत आ जाती। मचा दया) और मोती क तेज़ी से दोन भाग भी
खोलना नकले।
काँजीहौस अकेला द वार पर चोट करता, द वार तोड़कर अकेला भाग हीरा ने शुरुआत और वचार दया (“सोचो,
डंडे खाकर बँध जाता और जाता, पर संकल्प क वह द वार खुद जाती तो कतनी जान बच जात ”),
वह रह जाता। चगारी न होती जो हीरा ने मोती ने ताकत और अंत तक जुटे रहना — नौ-
द। दस प्राणी बच गए।
द ढ़यल से “भगवान क दया है” कहकर पहले ही रास्ते म उस पर टू ट हीरा ने घर तक पहुँचने का धैय रखा और मोती ने
मु क्त प्रतीक्षा करता। पड़ता। ार पर आकर स ग चलाया — दोन काम सही
समय पर हुए।
सार: हीरा म स्तष्क है और मोती भुजा; हीरा संयम है और मोती साहस। अकेला संयम दब जाता है और अकेला
साहस टू ट जाता है। दोन मलकर वह बन जाते ह जो कोई अकेला नह बन सकता था। यही ‘अलग-अलग और
साथ-साथ’ शीषक का अथ भी है — भन्नता कमी नह , पूरकता है।
प्र.3 3. आपक कक्षा म भी कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ भन्न वशेषताओं वाले सहपाठ ह। सबक आवश्यकताएँ
भी थोड़ी समान और थोड़ी भन्न ह। बताइए क आप भन्न वशेषताओं वाले सहपाठ से अपने लए कैसा व्यवहार
चाहते ह? उनसे पता क जए क वे आपसे अपने लए कैसा व्यवहार चाहते ह? (संकेत— क्या-क्या कर और
क्या-क्या न कर, कैसे पढ़ाई खेल आ द म एक-दूसरे क सहायता कर और साथ द)
यह कक्षा म करने क ग त व ध है। इसे तीन चरण म क जए —
1. अपनी सूची बनाइए — कागज़ पर दो खाने बनाइए: ‘म चाहता/चाहती हूँ क मेरे साथी ऐसा कर’ और ‘ऐसा न कर’।
2. जोड़ी बनाकर पू छए — ऐसे सहपाठ को चु नए जो आपसे भन्न हो — जो अलग भाषा या बोली बोलता हो, अलग खेल
पसंद करता हो, धीरे पढ़ता हो या बहुत तेज़ हो, या जसे दे खने-सुनने-चलने म कोई क ठनाई हो। उसक दोन सू चयाँ सु नए
और लख ली जए।
3. तुलना क जए — दे खए क दोन क सू चय म कौन-सी बात एक जैसी ह। प्रायः यह दे खकर सबसे बड़ी सीख मलती है क
जो हम दूसर से चाहते ह, वही दूसरे भी हमसे चाहते ह।
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क्या कर क्या न कर
नाम से पुकार और पूरी बात सुन उपनाम रखकर चढ़ाएँ या बीच म टोक
समझ न आने पर बना झझक पूछने द और धैय से समझाएँ “इतना भी नह आता?” जैसे वाक्य कह
खेल क ट म म सबको बारी द कमज़ोर खलाड़ी को हमेशा अंत म चुन या बाहर बैठाएँ
उसक भाषा, बोली, खाने और त्योहार के बारे म जज्ञासा से पूछ उसक बोली या उ ारण क नकल उतारकर हँस
अनुप स्थत रहने पर नोट् स द; कसी को लखने म क ठनाई हो तो सहायक बन कसी क क ठनाई को उसक कमी बताकर चचा कर
गलती हो जाने पर सीधे क्षमा माँग ल गुट बनाकर कसी एक को अलग-थलग कर द
नमूना उत्तर: “म ग णत म ठ क हूँ पर चत्र बनाना मुझे नह आता। मेरे सहपाठ रोहन को ग णत क ठन लगता है,
पर उसके बनाए चत्र पूरी कक्षा म सबसे अ े होते ह। म चाहता हूँ क जब म वज्ञान क कॉपी म आरेख बनाऊँ तो
वह हँसे नह , ब ल्क दखा दे क रेखाएँ कैसे सीधी ख चनी ह। उससे पूछने पर उसने कहा क वह चाहता है क जब
वह सवाल हल न कर पाए तो म उत्तर बताकर आगे न बढ़ जाऊँ, ब ल्क यह समझाऊँ क हल का पहला कदम क्या
है। हम दोन ने तय कया क हर श नवार आधा घंटा एक-दूसरे को यही सखाएँगे। जैसे हीरा और मोती क भन्न
वशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती थ , वैसे ही हम दोन क भन्नता हमारे काम आ रही है।”
प्र.4 4. “दोन आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक-भाषा म वचार- व नमय करते थे।” कहानी म
अनेक ान पर ‘मूक-भाषा’ का उल्लेख कया गया है। आपके वचार से हीरा और मोती कस प्रकार आपस म
बात कया करते ह गे? अनुमान और कल्पना से बताइए।
‘मूक-भाषा’ का अथ है — बना ध्व न के, शरीर और भाव से क गई बात। पशु सचमुच इसी तरह संवाद करते ह। कहानी म जो
संकेत मलते ह, उन्ह के आधार पर अनुमान लगाया जा सकता है।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा
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माध्यम कैसे बात बनती होगी कहानी का आधार
mखय से देखना = ‘अभी चुप रहो’; टकटक l a se
.coलगाना = चता; आँख का भर आना = g झुका लया।”; “मोती ने
दूसरे को भीत नेत्र से दे खा औरaसर
आँख कन “एक-दूसरे को कन खय से दे खा और लेट गए।”; “दोन ने एक-
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स ग और सर स ग मलाना = हँसी-मज़ाक और अपनापन; “कभी-कभी दोन स ग भी मला लया करते थे— … केवल वनोद
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स ग नीचे करना = वरोध और चेतावनी; सर के भाव से”; “मारता तो दोन स ग नीचे करके हुँकारते।”
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झुकाना = हार मानना या स्नेह।
पूँछ, कान
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पूँछ खड़ी होना = प्रसन्नता और उत्साह; कान “दोन क पूँछ खड़ी हो गईं।”; “रह-रहकर आहट ले लेते थे।”
और खुर खड़े करना = आहट लेना; पैर पटकना =
com
अधीरता या क्रोध।
“दोन एक-दूसरे को चाटकर और सूँघe
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mअपना प्रेम प्रकट करते”;
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com मटाना; हाथ चाटना = कृतज्ञता। agl थकान मटा लया करते।”;
स्पश और गंध चाटना और सूँघना = प्रेम, सांत्वना और थकान कर
m . “एक-दूसरे को चाट-चूटकर अपनी
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aglध्व न और
“दोन सर झुकाकर उसका हाथ चाटने लगे।”
हुँकारना, डकार लेना, नाक से फुफकारना — “स ग नीचे करके हुँकारते”; “पहले दोन ने डकार ली।”
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इनसे आक्रोश, तृ प्त या चेतावनी सू चत होती है।
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दोन का एक साथ उठना, एक साथ मुm
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साथ-साथ ँह हटाना “एक मुँह हटा लेता, तो दूसरा भी हटा लेता था।”; “दोन ने अपनी
— यह बना कहे बनी सहम l
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कया गया है, संवाद का मूक-भाषा म सलाह क ।”
काम सबसे पक्का रूप।
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कल्पना का एक दृश्य: काँजीहौस क उस रात हीरा ने केवल इतना कया होगा क अपने नुक ले स ग द वार क
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ओर घुमाकर मोती क आँख म दे खा हो — और मोती समझ गया होगा क ‘चलो, अब यहाँ से नकलना है’। इसी
s e m प्रेमचंद ने संवाद म बदल दया। असल म लेखक ने वह लख दया है जो बैल कह नह सकते थे, पर कह रहे थे।
la यही इस कहानी का सबसे सुंदर शल्प है।
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प्र.5 5. आप भी अनेक अवसर पर बना शब्द का उ ारण कए संवाद करते ह। कब-कब? कहाँ-कहाँ? कुछ
उदाहरण ल खए।
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हम दन म जतना बोलकर कहते ह, उससे कम नह , ब ल्क कई बार अ धक बना बोले कह दे ते ह। कुछ अवसर —
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
कहाँ संकेत अथ
कक्षा म हाथ उठाना “मुझे उत्तर आता है / मुझे कुछ पूछना है।”
शक्षक का भ ह चढ़ाकर दे खना “शोर बंद करो।”
परीक्षा म मत्र का कंधे उचकाना “मुझे भी नह आ रहा।”
घर म माँ का चम्मच नीचे रखकर दे खना “बहुत हो गया, अब चुप।”
पता का सर हलाकर हामी भरना “हाँ, जाओ।”
खेल के मैदान म क्रकेट म क पर का इशारा, फुटबॉल म हाथ उठाकर पास “गद मेरी ओर करो / म खाली हूँ।”
माँगना
अंपायर क उँ गली ऊपर उठना “आउट।”
सड़क पर यातायात पु लस का हाथ का इशारा; लाल-हरी बत्ती; “रुको / चलो / यहाँ से पार करो।”
ज़ेबरा क्रॉ सग
वाहन का हॉन या इं डकेटर “म मुड़ रहा हूँ।”
सावज नक ान रेलवे स्टे शन, अस्पताल और हवाई अड्डे के चह्न (तीर, पूरी सूचना बना भाषा के — इसी लए हर भाषा का
पर कूड़ेदान, मौन का चह्न, दव्यांग- चह्न) यात्री समझ लेता है।
भाव म मुस्कुराना, गले लगाना, आँख चुराना, पीठ थपथपाना, स्वागत, स्नेह, अपराध-बोध, शाबाशी, दुख — इनके
आँसू लए शब्द प्रायः कम पड़ जाते ह।
औपचा रक भारतीय सांके तक भाषा (ISL), ेल के साथ प्रयुक्त मूक-ब धर मत्र के लए यह पूरी और नयमबद्ध
सांके तक भाषा स्पश-संकेत भाषा है — इशारा नह , भाषा।
सो चए: इनम से अ धकांश संकेत ऐसे ह जन्ह हमने कभी सीखा नह , फर भी सब समझते ह। इसी लए प्रेमचंद ने
लखा था क हीरा-मोती म “कोई ऐसी गुप्त श क्त थी जससे … मनुष्य वं चत है” — वह श क्त मनुष्य म भी है, बस
हम शब्द पर इतना भरोसा करने लगे ह क उसे भूल जाते ह।
भारतीय सांके तक भाषा — पृष्ठ 23
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
अभ्यास › वषय से संवाद › भारतीय सांके तक भाषा
वषय से सं वाद गतवध
प्र.1 आप नीचे द गई इंटरनेट कड़ी ( लक) पर जाकर भारतीय सांके तक भाषा सीख सकते ह—
यह ग त व ध है — पुस्तक म द गई कड़ी (QR/ लक) खोलकर भारतीय सांके तक भाषा (Indian Sign Language –
ISL) सी खए। नीचे वह जानकारी द जा रही है जो इस ग त व ध को अथपूण बनाएगी।
यह क्या है — ISL भारत के मूक-ब धर समुदाय क अपनी भाषा है। यह हद या अंग्रेज़ी का ‘इशार म अनुवाद’ नह है;
इसका अपना व्याकरण, अपना वाक्य-क्रम और अपनी शब्द-रचना है। इसम हाथ क मुद्रा, हाथ क स्थ त, ग त, चेहरे के
भाव और ह ठ क हलचल — सब मलकर अथ बनाते ह।
कौन सखाता है — भारतीय सांके तक भाषा अनुसंधान एवं प्र शक्षण कद्र (ISLRTC), नई दल्ली — यह भारत सरकार
के सामा जक न्याय एवं अ धका रता मंत्रालय के अंतगत काम करता है। इसने ISL का शब्दकोश भी तैयार कया है, जसम
हज़ार शब्द के वी डयो ह। NCERT क कई पाठ्यपुस्तक अब ISL म भी उपलब्ध ह।
कहाँ से शुरू कर — पहले वणमाला (finger-spelling), फर संख्याएँ, फर रोज़ के शब्द — नमस्ते, धन्यवाद, हाँ, नह ,
माँ, पता, वद्यालय, पानी, सहायता, मत्र। इसके बाद छोटे वाक्य।
कक्षा म कैसे कर — हर सप्ताह पाँच नए संकेत सी खए और उन्ह कक्षा म सबके सामने दखाइए। एक ‘मूक-भाषा दवस’
र खए जसम आधे घंटे कक्षा म केवल संकेत से बात हो — तब आप समझ पाएँगे क बना ध्व न के बात करना कतना क ठन
और कतना सुंदर है।
यह ग त व ध इस पाठ के साथ क्य द गई है: पूरी कहानी ‘मूक-भाषा’ पर टक है। पुस्तक यह याद दलाना
चाहती है क जो बोल नह सकता, वह कह नह सकता — ऐसा मानना हमारी भूल है। हीरा-मोती क मूक-भाषा
कल्पना है, पर भारतीय सांके तक भाषा वास्त वक है और लाख लोग क पूरी भाषा है। इसे सीखना केवल कौशल
नह , संवेदनशीलता का काम है।
Try This: अपने नाम क ISL वतनी सीखकर उसे कक्षा म दखाइए, और यह भी पता क जए क आपके जले म
मूक-ब धर वद्या थय के लए कोई वद्यालय या संसाधन-कद्र है या नह ।
माग खोजगे कैसे? — पृष्ठ 23
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
अभ्यास › वषय से संवाद › माग खोजगे कैसे?
वषय से सं वाद जीवन कौशल
प्र.1 “सीधे दौड़ते चले गए। यहाँ तक क माग का ज्ञान न रहा। जस प र चत माग से आए थे, उसका यहाँ पता न था।
नए-नए गाँव मलने लगे।” 1. हीरा-मोती अपने घर के माग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है
क आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने माग का पता कैसे लगाया था?
यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। उत्तर लखते समय चार बात र खए — कहाँ भटके, कैसे भटके, क्या महसूस हुआ, और
रास्ता कैसे मला।
नमूना उत्तर: “ पछले वष हम प रवार के साथ एक बड़े मेले म गए थे। भीड़ म झूल क ओर दे खते-दे खते म पताजी
से बछड़ गया। पहले तो मुझे लगा क वे पास ही ह गे, पर दो-तीन मनट म चार ओर अनजान चेहरे थे और मेरा गला
सूखने लगा। पहले मन हुआ क दौड़कर ढूँ ँ , पर तभी मुझे वद्यालय म सखाई बात याद आई — भटक जाओ तो
दौड़ो मत, रुक जाओ। म वह एक बड़े खंभे के पास खड़ा हो गया, जो दूर से दखता था। फर मने आस-पास दे खा
और मुझे मेले का सूचना-कद्र (announcement counter) दखाई दया। वहाँ बैठ म हला ने मेरा और पताजी
का नाम पूछकर ध्व न- वस्तारक यंत्र से घोषणा कर द । दस मनट बाद पताजी वहाँ पहुँच गए। उस दन के बाद से
मने अपने पता का मोबाइल नंबर याद कर लया है और जहाँ भी जाता हूँ, पहले यह दे ख लेता हूँ क सूचना-कद्र या
पु लस-सहायता कद्र कधर है।”
कहानी से तुलना: हीरा-मोती के पास न न ा था, न भाषा — फर भी वे अंत म घर पहुँचे। कैसे? पहचान के
च से — “वही खेत, वही बाग, वही गाँव मलने लगे… इसी कुएँ पर हम पुर चलाने आया करते थे; यही कुआँ
है।” रास्ता खोजने का सबसे पुराना तरीका यही है — जाने-पहचाने चह्न ढूँ ढ़ना। इसी लए कसी नई जगह जाते
समय रास्ते के दो-तीन बड़े चह्न (मं दर, पुल, बड़ा पेड़, पे ोल पंप) याद कर लेने चा हए।
प्र.2 2. य द कोई व्य क्त भटक जाए तो उसे क्या करना चा हए क वह सुर क्षत रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच जाए?
कक्षा म चचा क जए और ल खए। (संकेत— ऑनलाइन मान चत्र, पु लस, स्कूल, सरकारी भवन, वद्याथ ,
सड़क पर लगे सूचना-पट, दुकान के बोड पर लखे पते, डाकघर आ द।)
भटक जाने पर सबसे बड़ी भूल है घबराकर चलते चले जाना — इससे आदमी और दूर नकल जाता है। सही क्रम यह है —
1. रु कए और शांत होइए। गहरी साँस ली जए। जहाँ आप ह, वह आस-पास कोई आपको ढूँ ढ़ रहा हो सकता है। हीरा-मोती क
भूल यही थी — “तुम भी बेतहाशा भागे।”
2. अपनी त पहचा नए। आस-पास के सूचना-पट, दुकान के बोड पर लखे पते, गली का नाम, मील का पत्थर, बस-
स्टॉप का नाम प ढ़ए। इससे पता चल जाएगा क आप कस मोहल्ले या गाँव म ह।
3. सुर क्षत व्य क्त या ान चु नए। सहायता के लए सबसे भरोसेमंद क्रम — पु लसकम → वद्यालय → सरकारी भवन
(डाकघर, बक, अस्पताल, पंचायत भवन, रेलवे/बस स्टे शन का पूछताछ कद्र) → वद पहने वद्याथ या शक्षक →
दुकानदार (दुकान के भीतर, अकेली सुनसान जगह नह ) → ब के साथ खड़ी कोई म हला।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
4. सही जानकारी द जए। अपना नाम, अपने माता- पता या अ भभावक का नाम, गाँव/मोहल्ले का नाम और मोबाइल नंबर
बताइए। इसी लए ये सब याद होने चा हए, केवल फ़ोन म नह ।
5. तकनीक का प्रयोग क जए। फ़ोन हो तो ऑनलाइन मान चत्र म अपना गंतव्य डा लए और ‘लाइव लोकेशन’ अपने घर भेज
द जए। आपातकालीन नंबर याद र खए — 112 (सव-आपात), 1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन), 100 (पु लस)।
6. ये काम कभी मत क जए — कसी अजनबी क गाड़ी म मत बै ठए, कसी के साथ सुनसान जगह मत जाइए, अपना पता
लेकर आगे बढ़ने के बजाय कसी को अपने साथ चलने का आग्रह मत क जए, और अँधेरा होने पर चलते रहने के बजाय कसी
सुर क्षत, रोशनी वाली सावज नक जगह पर रुक जाइए।
सबसे ज़रूरी नयम: भटक जाने पर ‘चलते रहना’ नह , ‘सही व्य क्त तक पहुँचना’ लक्ष्य है। दस कदम सही दशा
म पूछकर चलना, एक कलोमीटर अनुमान से चलने से बेहतर है।
Tip: छोटे ब क जेब म माता- पता का नाम और मोबाइल नंबर लखी एक पच रख दे नी चा हए। यात्रा पर
नकलने से पहले प रवार म यह तय कर ली जए क बछड़ जाने पर सब कस एक जगह इक ा ह गे — यह
छोटा-सा नयम बड़ी परेशानी बचा दे ता है।
प्र.3 3. आपके वद्यालय म आपदा क त म नकासी का माग दशाने वाला मान चत्र अवश्य होगा। उसे ध्यानपूवक
दे खए और पता लगाइए क आपदा क त म आपक कक्षा के सबसे नकट और सुर क्षत कौन-सा माग है।
यह वद्यालय म करने क ग त व ध है। इसे इस क्रम से क जए —
1. मान चत्र ढूँ ढ़ए। नकासी मान चत्र (Evacuation Plan) प्रायः ग लयारे, सीढ़ के पास, कायालय के बाहर या हर मं ज़ल के
प्रवेश- ार पर लगा होता है।
2. ‘आप यहाँ ह’ बदु खो जए। उस पर उँ गली रखकर अपनी कक्षा तक पहुँ चए, फर हरे तीर का पीछा क जए।
3. दो रास्ते याद क जए — एक मुख्य और एक वैक ल्पक। आग या मलबे के कारण मुख्य रास्ता बंद हो सकता है, इस लए
दूसरा जानना अ नवाय है।
4. इक ा होने क जगह (Assembly Point) दे खए — प्रायः खेल का मैदान या खुला प्रांगण। वह उप स्थ त ली जाती है।
5. अपनी कक्षा का न ा स्वयं बनाइए — कक्षा, दरवाज़ा, ग लयारा, सीढ़ , मुख्य ार, इक ा होने का स्थान — और कक्षा क
द वार पर लगा द जए।
आपदा क्या कर क्या न कर
आग पं क्त बनाकर शां त से नकल; धुआँ हो तो झुककर चल; दरवाज़ा लफ़्ट का प्रयोग न कर; बस्ता लेने वापस न
खोलने से पहले उसे छू कर दे ख क गरम तो नह । जाएँ।
भूकंप ‘झुको–ढँ को–पकड़ो’ — मेज़ के नीचे जाएँ, सर ढँ क; कंपन रुकने पर कंपन के समय दौड़ नह ; खड़क , अलमारी
बाहर नकल। और पंखे के नीचे न खड़े ह ।
बाढ़ / तेज़ ऊँची मं ज़ल या ऊँचे स्थान पर जाएँ; शक्षक के नदश का पालन कर। बहते पानी म उतरने क को शश न कर।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा
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नमूना उत्तर: “मेरी कक्षा पहली मं ज़ल पर, ग लयारे के बाएँ छोर पर है। मान चत्र के अनुसार सबसे नकट का
m a s emसे नीचे उतरना,
l श्चमी सीढ़ पर भीड़ या
सुर क्षत माग यह है — कक्षा से बाहर नकलकर दाईं ओर मुड़ना, बीस कदम पर बनी प श्चमी सीढ़
और मुख्य .ारco से नकलकर खेल के मैदान म बने ‘इक ा होने के स्थान’ पर पहुँचना। य दgप
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g दोन रास्त म लगभग एक ही समय लगता है, इस लए मने दोन याद कर लए ह।”
धुआँ हो, तो वैक ल्पक माग है — बाईं ओर क पूव सीढ़ से उतरकर प्रयोगशाला के पछले दरवाज़े से मैदान तक
aजाना।
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यह प्रश्न इस पाठ के साथ क्य : हीरा-मोती काँजीहौस म इस लए फँसे रहे क्य क नकलने का रास्ता ही नह था —
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उन्ह द वार गरानी पड़ी। और भागते समय वे इस लए भटके क्य क उन्ह ने पहले से रास्ता नह पहचाना था।
नकलने का रास्ता संकट आने पर नह खोजा जाता, पहले से जाना जाता है।
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mऔर 24
सृजन — पृ.ष्ठco23 g l as
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अभ्यास
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1. हीरा और मोती क दै नं दनी — कहानीm
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aसकते ह। हीरा या मोती क नजर से उस दन क डायरी ल खए जब उन्ह
म हीरा और मोती आपस म मनुष्य क तरह बात करते दखते ह।
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प्र.1
कल्पना क जए क वे लख-पढ़ भी
काँजीहाउस ले जाया गया। कैसे लख— “आज का दन…” से आरंभ कर। भावनाएँ लख (भूख, गुस्सा, दद)।
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अंत म आशा या संकल्प लख। (संकेत— “आज हम काँजीहाउस म बंद कया गया। भूख से पेट जल रहा है। पर
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व ास है क झूरी हम वापस ले जाएगा।”)
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agl डायरी (दैनं दनी) के तीन नयम याद र खए — दनांक और ान ऊपर, उत्तम पुरुष (म/हम) म लेखन, और घटना से अ धक
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भाव। डायरी कसी को सुनाने के लए नह , अपने-आप से बात करने के लए लखी जाती है, इस लए भाषा सहज और भीतरी हो।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर (हीरा क दै नं दनी):
काँजीहौस, कह अनजान गाँव म
बुधवार, रात
आज का दन मेरे जीवन का सबसे भारी दन रहा।
सुबह जब हम मटर के खेत के पास खड़े थे, तब तक सब ठ क था। रात-भर क भूख के बाद मोती से रहा न गया
और वह खेत म घुस गया। मने रोका भी — “मत जाओ” — पर उसने एक न सुनी। अभी उसने चार ही ग्रास खाए थे
क ला ठयाँ लए दो आदमी दौड़ पड़े। म मेड़ पर था, नकल भी सकता था। पर पीछे मुड़कर दे खा तो मोती के खुर
क चड़ म धँसे थे और वह हल तक न पा रहा था। मने सोचा — फँसगे तो दोन फँसगे। और म लौट पड़ा।
अब हम इस बाड़े म बंद ह। सारा दन बीत गया और खाने को एक तनका भी नह मला। ऐसी भूख हमने कभी नह
जानी। हमने द वार क नमक न म चाटकर दे खी, पर उससे भला क्या तृ प्त होती। सारा दन हम फाटक क ओर
टकटक लगाए खड़े रहे क कोई चारा लेकर आए — कोई नह आया।
यहाँ हमारे जैसे और भी ह — तीन घो ड़याँ, कुछ बक रयाँ, भेड़ और दो गधे। सब ज़मीन पर मुरद क तरह पड़े ह।
कई तो इतने कमजोर ह क खड़े भी नह हो पाते। यह दे खकर मेरे भीतर भूख से बड़ी कोई चीज़ जल उठ है —
गुस्सा। समझ ही म नह आता, यह कैसा स्वामी है, जो अपने बं दय को भूखा मारता है!
गया के घर म मार पड़ती थी, पर वहाँ एक छोट लड़क तो थी जो रात म चुपके से दो रो टयाँ दे जाती थी। उन दो
रो टय से पेट कहाँ भरता था, पर हृदय भर जाता था। आज वह भी नह है। नाक पर पड़े डंड का दद अब भी बाक
है और मोती क दे ह भी काँप रही है, यद्य प वह कहता कुछ नह ।
पर मने एक बात तय कर ली है। म यहाँ पड़े-पड़े नह मरूँगा। इस द वार क म क ी है — मने स ग गड़ाकर दे ख
लया है, एक चप्पड़ नकल भी आया। कल रात म फर जोर लगाऊँगा। मार पड़ेगी, बंधन पड़गे, पर जोर तो मारता
ही जाऊँगा। सोचता हूँ — अगर द वार खुद गई, तो केवल हम दो नह , ये सब भाई बच जाएँगे।
और मन म कह यह वश्वास भी बैठा है क हमारा झूरी हम ढूँ ढ़ेगा। एक बार भगवान ने उस लड़क के रूप म हम
बचाया था। क्या अब न बचाएँगे?
— हीरा
Tip: डायरी म तीन भाव क्रम से आने चा हए — पहले घटना (क्या हुआ), फर भाव (भूख, दद, गुस्सा,
अकेलापन), और अंत म संकल्प या आशा। ऊपर के नमूने म यही क्रम है। ध्यान द जए क इसम कहानी क अपनी
पं क्तयाँ घुला- मलाकर रखी गई ह — इससे डायरी पात्र क आवाज़ म लगती है, आपक अपनी आवाज़ म नह ।
प्र.2 2. आज के समाचार — मान ली जए आप एक ानीय समाचार पत्र के संवाददाता ह। अपने समाचार पत्र के
लए बैल के काँजीहाउस से भागने का समाचार ल खए। कैसे लख— शीषक द। घटना का ववरण (कहाँ, कब,
क्या हुआ)। प रणाम और लोग क प्र त क्रया। (संकेत शीषक — ‘दो बहादुर बैल ने तोड़ी बे ड़याँ’)
समाचार लेखन के नयम — शीषक, उपशीषक, ान और दनांक-रेखा, पहला अनु े द जसम क्या-कब-कहाँ-कौन-कैसे-
क्य छह प्रश्न के उत्तर ह , फर ब्यौरा, फर लोग क प्र त क्रया, और अंत म आगे क्या होगा। भाषा तटस्थ हो — संवाददाता अपनी
राय नह दे ता, तथ्य और उद्धरण दे ता है।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर:
दो बहादुर बैल ने तोड़ी बे ड़याँ
काँजीहौस क द वार गराकर नौ-दस पशुओं को कराया मुक्त; एक बैल फर पकड़ा गया
बेलपुर ( नज संवाददाता), 12 अगस्त। बीती रात नगर के मवेशीखाने (काँजीहौस) म उस समय हड़कंप मच गया,
जब वहाँ बंद दो बैल ने क ी द वार का लगभग आधा हस्सा गरा दया और उसम बंद तीन घो ड़य , कई बक रय ,
भेड़ तथा दो गध को बाहर नकलने का रास्ता दे दया।
क्या हुआ — प्रत्यक्षद शय के अनुसार दोन बैल दो दन पहले पास के खेत म मटर चरते हुए पकड़े गए थे और तब
से बाड़े म बंद थे। बताया जाता है क इस अव ध म उन्ह चारा नह दया गया। रात के लगभग नौ बजे एक बैल ने
द वार म स ग गड़ाकर म गरानी शुरू क । चौक दार ने हा जरी लेते समय उसे दे ख लया और डंडे मारकर मोट
रस्सी से बाँध दया। इसके बाद दूसरे बैल ने लगभग दो घंटे क लगातार टक्कर से द वार ऊपर से लगभग एक हाथ
गरा द और अगले धक्के म आधी द वार भरभराकर गर पड़ी।
प रणाम — द वार गरते ही अधमरे पड़े सभी पशु उठ खड़े हुए और भाग नकले। दो गधे भय के कारण खड़े रह
गए, जन्ह बैल ने स ग से ठे लकर बाहर कया। उल्लेखनीय है क द वार तोड़ने वाला बैल स्वयं नह भागा — वह
अपने बँधे हुए साथी के पास लौट आया और वह बैठ गया। सुबह उसे भी मोट रस्सी से बाँध दया गया।
लोग क प्र त क्रया — सुबह घटनास्थल पर भीड़ जमा रही। गाँव के एक बुजुग ने कहा, “ऐसे बैल कसी के पास न
ह गे।” एक अन्य ग्रामीण का कहना था, “बैल नह ह वे, उस जनम के आदमी ह।” वह कई लोग ने मवेशीखाने क
व्यवस्था पर प्रश्न उठाते हुए कहा क बंद पशुओं को दन तक भूखा रखना क्रूरता है और इसी कारण यह स्थ त बनी।
आगे क्या — काँजीहौस के मुंशी ने बताया क टू ट द वार क मरम्मत कराई जा रही है। पशु-प्रे मय ने प्रशासन से
माँग क है क बाड़े म चारे, पानी और छाया क व्यवस्था अ नवाय क जाए तथा कसी भी पशु को नीलाम करने से
पहले उसके स्वामी को सू चत कया जाए।
Tip: समाचार म ‘बेचारे बैल’, ‘ नदयी चौक दार’ जैसे भावुक वशेषण मत लगाइए। संवाददाता का काम है — तथ्य
दखाना और लोग के शब्द ज्य -के-त्य उद्धत करना; राय पाठक स्वयं बना लेगा। ऊपर के नमूने म जो कुछ ‘भावुक’
लगता है, वह भी ग्रामीण के उद्धरण के रूप म आया है।
प्र.3 3. कहानी का नया अंत — य द बैल वापस न लौटते तो कहानी का अंत कैसे होता? कहानी का नया अंत ल खए।
कैसे लख— बैल क नई जगह। झूरी क त। (संकेत— “हीरा और मोती अब एक बूढ़े कसान के घर शां त
से रह रहे ह।”)
नया अंत लखते समय दो बात ध्यान म र खए — (1) अंत कहानी के पात्र के स्वभाव के अनुरूप हो; हीरा वहाँ भी सहनशील
रहेगा और मोती वहाँ भी उग्र। (2) अंत कहानी के मूल भाव से जुड़ा रहे — स्वा भमान, मत्रता और स्वतंत्रता का संघष।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर — ‘नई म ’
द ढ़यल क रस्सी म बँधे दोन मत्र चले जा रहे थे। रास्ता अनजाना था; न वही कुआँ मला, न वही बाग। हीरा ने मूक-
भाषा म कहा — “अब घर का रास्ता पीछे छू ट गया, भाई।” मोती ने केवल इतना उत्तर दया — “तो क्या हुआ? जब
तक साथ ह, तब तक कुछ नह छू टा।”
सूरज ढलते-ढलते वे एक छोटे -से गाँव के छोर पर पहुँचे। वहाँ एक बूढ़ा कसान अपने सूखे खेत के कनारे बैठा था।
उसके पास एक ही बैल था, वह भी बूढ़ा। द ढ़यल ने दाम बताए। बूढ़े ने अपनी गाँठ खोली, गनती क और सर हला
दया — इतने पैसे उसके पास नह थे। तब उसने अपनी कलाई से चाँद का कड़ा उतारकर रख दया, जो उसक
मरहूम पत्नी क नशानी थी, और कहा — “ले जा। पर इन्ह छु री के पास मत ले जाना। ये काम के जानवर ह, माँस
के नह ।”
द ढ़यल बुदबुदाता हुआ चला गया। बूढ़े ने दोन क पीठ सहलाई, नाँद म भूसे के साथ थोड़ी खली डाली और बोला
— “खाओ। आज से यही तुम्हारा थान है।”
मोती ने मूक-भाषा म कहा — “यह आदमी अ ा है, पर यह झूरी नह है।” हीरा ने उत्तर दया — “झूरी नह है, पर
इसने अपनी सबसे प्यारी चीज़ दे कर हम बचाया है। जो अपना सब कुछ दे कर कसी को बचाए, वह पराया नह
होता।”
उधर बेलपुर म झूरी दन-भर ार पर बैठा रहता। जब भी दूर से कोई सफ़ेद जोड़ी दखती, वह उठ खड़ा होता और
फर धीरे से बैठ जाता। उसने आस-पास के तीन-तीन मवेशीखाने छान मारे, थाने म रपट भी लखवाई, पर कह पता
न चला। खाली थान से गुज़रते हुए वह हर बार वहाँ क म को हाथ से समतल कर दे ता, मानो कोई आने ही वाला
हो। माल कन अब उन्ह ‘नमक-हराम’ नह कहती थ । एक शाम उन्ह ने आँचल से आँख प छकर इतना ही कहा —
“मने ही सूखा भूसा डलवाया था।”
और उस दूर के गाँव म, हर साँझ जब बूढ़ा कसान नाँद भरता, हीरा और मोती एक बार पूरब क ओर मुँह उठाकर
दे ख लेते — जधर से वे आए थे। फर साथ-साथ नाँद म मुँह डालते। एक मुँह हटा लेता, तो दूसरा भी हटा लेता।
यह अंत क्य काम करता है: इसम कहानी क तीन चीज़ जी वत रहती ह — बैल क जोड़ी और उनका आपसी
स्वभाव, अ े मनुष्य के प्र त उनक कृतज्ञता, और अंत क वही मूक-भाषा वाली छ व जससे कहानी शुरू हुई थी
(“एक मुँह हटा लेता, तो दूसरा भी हटा लेता था”)। साथ ही यह अंत मूल कहानी से अ धक करुण है, क्य क इसम
बैल बच तो जाते ह, पर घर नह लौटते — और झूरी क प्रतीक्षा अधूरी रह जाती है।
दूसरा संभव अंत (संक्षेप म): बैल द ढ़यल के हाथ से न बच पाते और मोती लड़ते हुए मारा जाता; हीरा को कोई
राहगीर छु ड़ा लेता और वह वष बाद अकेला झूरी के ार पर आ खड़ा होता। यह अंत और भी मा मक होगा, पर तब
कहानी का संदेश बदल जाएगा — तब वह संघष क वजय नह , संघष क क मत क कहानी बन जाएगी। नया अंत
लखते समय यह तय कर ली जए क आप कौन-सा संदेश दे ना चाहते ह।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 4. चत्रकथा लेखन — नीचे ‘दो बैल क कथा’ क एक घटना को चत्रकथा के रूप म दया गया है। इन घटनाओं
को पहचा नए। प्रत्येक घटना के लए उपयुक्त संवाद और घटनाक्रम बताने वाले वाक्य ल खए। कैसे लख— हर
चत्र के लए एक छोटा संवाद बनाकर ल खए। दृश्य का क्रम— बंद करना, भागने क योजना, द वार तोड़ना,
आजाद । (संकेत— चत्र 4: “अब हम आजाद ह।”)
पुस्तक के पृष्ठ 25 पर चार चत्र दए गए ह। चार मलकर काँजीहौस वाला प्रसंग (कहानी का चौथा भाग) बनाते ह। नीचे हर चत्र
क पहचान, घटनाक्रम-वाक्य और संवाद दए गए ह।
चत्र चत्र म क्या दख रहा है घटना (घटनाक्रम बताने वाला वाक्य) संवाद
1 ऊँची क ी द वार से घरे बाड़े म बहुत-से पशु — बंद करना — मटर के खेत में पकड़ े जाने के मोती: “यह कैसा स्वामी
दो सफ़ेद बैल, एक भसा, गधे और बक रयाँ। कुछ बाद हीरा और मोती काँजीहौस में बंद कर िदए है, जो बं दय को भूखा
ज़मीन पर पड़े ह, एक गधा झाड़ी चबा रहा है। गए। सारा िदन बीत गया, पर खाने को एक मारता है!”
कह कोई नाँद या चारा नह दखता। ितनका भी न िमला। हीरा: “दे खो भाई, यहाँ
सब मुरद क तरह पड़े
ह। कसी क दे ह म जान
नह है।”
2 दो बैल आमने-सामने सर जोड़े खड़े ह, दोन के भागने की योजना — रात होते ही दोनों िमत्रों ने हीरा: “अब तो नह रहा
ऊपर वचार-बुलबुले (thought bubbles) बने मूक -भाषा में सलाह की और तय िकया िक जाता, मोती! यहाँ से
ह; पीछे द वार म एक चमकता हुआ छे द दख रहा दीवार तोड़ कर यहाँ से िनकलना है। भागने का कोई उपाय
है, जसके पास तीसरा बैल खड़ा है। पृष्ठभू म रात नकालना चा हए।”
क है। मोती: “आओ द वार
तोड़ डाल!”
हीरा: “सोचो, द वार
खुद जाती तो कतनी
जान बच जात ।”
3 दोन बैल स ग गड़ाकर द वार पर टक्कर मार रहे दीवार तोड़ ना — हीरा ने सी ंग गड़ ाकर पहला हीरा: “जोर तो मारता ही
ह; ईंट और म उड़ रही ह, द वार म बड़ी दरार िचप्पड़ िगराया और डंडे खाकर बँध जाने के जाऊँगा, चाहे कतने ही
पड़ चुक है और उससे रोशनी छन रही है। बाद मोती ने लगभग दो घंटे की जोर-आजमाई बंधन पड़ते जाएँ।”
से आधी दीवार िगरा दी। मोती: “हाँ, यह बात तो
है। अ ा, तो ला, फर
म भी जोर लगाता हूँ।”
4 द वार का बड़ा हस्सा गर चुका है; उसी दरार से आजादी — दीवार िगरते ही अधमरे पड़ े सभी मोती: “अब हम आजाद
एक सफ़ेद बैल और कई गधे कूदते-दौड़ते बाहर जानवर चेत उठे — घोिड़ याँ, बकिरयाँ और भेड़ें ह! तुम दोन क्य नह
नकल रहे ह। सबक चाल म उत्साह है। भाग िनकली ं। डरकर खड़ े रह गए दोनों गधों भाग जाते?”
को मोती ने सी ंगों से ठे ल कर बाहर िनकाला। गधा: “जो कह फर
पकड़ लए जाएँ!”
मोती: “अभी तो भागने
का अवसर है — चलो,
नकलो बाहर!”
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा
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चत्रकथा लखने के तीन नयम: (1) संवाद छोटे ह — बुलबुले म दो पं क्तय से अ धक नह समात । (2) हर
चत्र के नीचे लखा वाक्य घटना बताए, संवाद भाव बताए — दोन एक बात न दोहराएँ। (3) चारem
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glत्रता-कथा का क्रम है।
चत्र मलकर
. coबन — यहाँ क्रम है: कैद → योजना → संघष → मु क्त, जो कसी भी स्वतं
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एक पूरी घटना
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व्याकरण क बात — मेरे शब्द — पृष्ठ 25
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अभ्यास › भाषा से संवाद › व्याकरण क बात › मेरे शब्द
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भाषा से सं वाद शब्द क बात a g l
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em.
कहानी म से पाँच ऐसे शब्द चुनकर ल खए जो आपके लए बल्कुल नए ह। अब उन शब्द के अथ अपने अनुमान
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प्र.1
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से ल खए। इसके बाद उनके अथ शब्दकोश म से दे खकर ल खए।
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a यह अभ्यास तीन स्तंभ म करना है — शब्द, आपका अनुमान, और शब्दकोश का अथ। सबसे उपयोगी बात तीसरे और दूसरे स्तंभ
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का अंतर दे खना है, क्य क वह पता चलता है क हम संदभ से अथ कतना सही पकड़ पाते ह।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
शब्द (और कहानी क अनुमान से अथ शब्दकोश का अथ अनुमान कतना ठ क था
पं क्त) (वाक्य के
आधार पर)
पग हया — “पग हया बैल को ख चने ढोर (पशु) बाँधने की रस्सी लगभग ठ क — ‘ख चने’ के
पकड़कर आगे से ख चता, तो वाली कोई रस्सी साथ ‘बाँधने’ का अथ भी
दोन पीछे को जोर लगाते।” जुड़ता है।
गराँव — “उसने गराँव खोल गले म बँधी कोई फं दे द ार रस्सी जो बैल आिद के गले में पहनाई ठ क — पर ‘फंदे दार’ होना
दया, पर दोन चुपचाप खड़े चीज़, जसे खोला जाती है अनुमान से नह पता चलता
रहे।” जा सकता है था।
सा बका — “जीवन म कोई क ठन वास्ता, सरोकार, पाला पड़ ना आधा ठ क — शब्द म
पहली बार ऐसा सा बका अनुभव ‘क ठन’ नह , केवल ‘पाला
पड़ा…” पड़ना’ है; क ठनाई वाक्य से
आ रही थी।
काँजीहौस — “प्रातःकाल जानवर क जेल वह बाड़ ा िजसमें दू स रे का खेत खाने वाले या अथ ठ क — पर शब्द का
दोन मत्र काँजीहौस म बंद अनाथ चौपाए बंद िकए जाते और कु छ दंड ोत जानना नया मला।
कर दए गए।” ले क र छोड़ े या नीलाम िकए जाते है ं (अंगेज़ी
‘pound house’ से )
बूता — “अपने बूते-भर जोर जतनी ताकत थी, साम य, बल , शिक्त, बस पूरी तरह ठ क।
तो मार दया।” उतनी
उजड्डपन — “हीरा का यह शरारत अिशष्टता, उ ंडता, उ च्छृ ंखलता कमज़ोर अनुमान — ‘शरारत’
उजड्डपन दे खकर उसने उसे हल्क चीज़ है, ‘उ ं डता’ म
कई डंडे रसीद कए।” नयम तोड़ने का भाव है।
तजुरबा — “साँड़ को भी आदत या अभ्यास अनुभव नकट — पर ‘अनुभव’ और
संग ठत शत्रुओं से लड़ने का ‘आदत’ एक नह ह।
तजुरबा न था।”
पराकाष्ठा — “वे सभी उसम बहुत अ धक होना अंितम सीमा, चरम कोिट ठ क — पर शब्दकोश ‘सीमा’
पराकाष्ठा को पहुँच गए ह।” का भाव जोड़ दे ता है, जो
‘बहुत अ धक’ म नह था।
इस अभ्यास से क्या सीखना है: संदभ से अथ का अनुमान लगाना एक बड़ा कौशल है — इसी से हम पढ़ते-पढ़ते
नए शब्द सीखते ह। पर ऊपर क ता लका दखाती है क अनुमान प्रायः ‘आस-पास’ पहुँचाता है, ठ क नशाने पर
नह । इसी लए शब्दकोश दे खना ज़रूरी है। एक तरीका और अपनाइए — नया शब्द सीखने के बाद उसका अपना
एक वाक्य बनाइए, तभी वह शब्द सचमुच आपका होता है।
Try This: कहानी से पाँच और शब्द चु नए — नरापद, वषाद, कदा चत्, प्र तवाद, ताक द — और यही तीन
स्तंभ वाली ता लका अपनी कॉपी म बनाइए। पाठ के अंत म द गई शब्द-संपदा से अपने उत्तर मलाकर दे ख सकते
ह।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
भाषा गढ़ते मुहावरे — पृष्ठ 26
अभ्यास › भाषा से संवाद › भाषा गढ़ते मुहावरे
भाषा से सं वाद मु हावरे
प्र.1 “लोग आ-आकर उनक सूरत दे खते और मन फ का करके चले जाते।” … कहानी म से चुनकर कुछ वाक्य नीचे
दए गए ह। इन वाक्य म मुहावर को पहचानकर रेखां कत क जए। इन मुहावर का प्रयोग करते हुए नए वाक्य
बनाकर ल खए। 1. “झूरी के साले गया को घर तक गोईं ले जाने म दाँत पसीना आ गया।”
मुहावरा — दाँत पसीना आना।
बदु ववरण
अथ बहुत अ धक प रश्रम करना पड़ना; कसी काम म बहुत क ठनाई का सामना करना।
कहानी म बैल न आगे बढ़ते थे, न पीछे — “पीछे से हाँकता तो दोन दाएँ-बाएँ भागते; पग हया पकड़कर आगे से ख चता, तो दोन
क्य पीछे को जोर लगाते।” इस लए गया को घर तक ले जाने म अत्य धक क ठनाई हुई।
मुहावरा क्य दाँत म पसीना आना असंभव है — यही असंभवता क ठनाई क अ त दखाती है। इसी लए यह अ तशयो क्त पर टका
बना मुहावरा है।
नया वाक्य पुरानी अलमारी को तीसरी मं ज़ल तक चढ़ाने म हम चार के दाँत पसीना आ गया।
एक और यह सवाल इतना उलझा हुआ था क हल करते-करते मेरे दाँत पसीना आ गया।
वाक्य
प्र.2 2. “उसका चेहरा दे खकर अंतज्ञान से दोन मत्र के दल काँप उठे ।”
मुहावरा — दल काँप उठना।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
बदु ववरण
अथ भय से थरा जाना; अ नष्ट क आशंका से मन दहल जाना।
कहानी म नीलाम के समय आया द ढ़यल आदमी — “ जसक आँख लाल थ और मुद्रा अत्यंत कठोर” — बैल क दे ह टटोल रहा था।
क्य उसे दे खकर बना बताए ही उन्ह समझ आ गया क वह कसाई है।
ध्यान यहाँ ‘अंतज्ञान’ शब्द भी साथ है, यानी यह भय कसी के बताने से नह , भीतरी बोध से आया — इसी से मुहावरा और गहरा हो
द जए जाता है।
नया वाक्य रात के सन्नाटे म सी ढ़य पर भारी कदम क आहट सुनकर मेरा दल काँप उठा।
एक और परीक्षा-प रणाम का लफ़ाफ़ा हाथ म आते ही उसका दल काँप उठा।
वाक्य
प्र.3 3. “झूरी क स्त्री ने बैल को ार पर दे खा, तो जल उठ ।”
मुहावरा — जल उठना।
बदु ववरण
अथ क्रोध या ईष्या से भर जाना; तल मला उठना।
कहानी म माल कन को लगा क बैल ने भाईचारा नह , कामचोरी दखाई है — “कैसे नमक-हराम बैल ह क एक दन वहाँ काम न
क्य कया; भाग खड़े हुए।” उनका क्रोध इसी म फूट पड़ा।
शल्प यह वाक्य कहानी के सबसे सुंदर वरोधाभास का हस्सा है — झूरी उन्ह बैल को दे खकर “स्नेह से गद्गद” होता है और
उसक स्त्री “जल उठती” है।
नया वाक्य अपने से छोटे भाई को पुरस्कार मलते दे ख वह भीतर-ही-भीतर जल उठा।
एक और खेत म छोड़े गए मवे शय को दे खकर कसान जल उठा।
वाक्य
प्र.4 4. “मोती दल म ऐंठकर रह गया।”
मुहावरा — दल म ऐंठकर रह जाना।
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बदु ववरण
अथ क्रोध या खीज को मन-ही-मन दबा लेना; कुछ कर न पाने क झुँझलाहट भीतर ही रह जाना।
कहानी म क्य मोती लाठ लए आते हुए गया को सबक सखाना चाहता था, पर हीरा ने रोक दया — “नह । हमारी जा त का यह
धम नह है।” मत्र क बात मानकर वह रुक गया, पर भीतर का गुस्सा उतरा नह ।
इसका यह वही दबा हुआ क्रोध है जो आगे चलकर वद्रोह बनकर फूटता है — “दोन क आँख म, रोम-रोम म वद्रोह भरा
मनोवैज्ञा नक अथ हुआ था।”
नया वाक्य अध्यापक के सामने वह कुछ कह न सका और दल म ऐंठकर रह गया।
एक और वाक्य अपनी बारी छनते दे खकर भी वह चुप रहा, बस दल म ऐंठकर रह गया।
प्र.5 5. “आएगा तो दूर ही से खबर लूँगा। दे खूँ कैसे ले जाता है।”
मुहावरा — खबर लेना।
बदु ववरण
अथ (यहाँ) दं ड दे ना, मज़ा चखाना, अ तरह सबक सखाना।
सावधानी ‘खबर लेना’ के दो अथ ह — (i) हाल-चाल पूछना (“दाद क खबर ले आना”), और (ii) दं ड दे ना। कौन-सा अथ है, यह
संदभ से तय होता है। यहाँ मोती द ढ़यल को धमका रहा है, इस लए दूसरा अथ है।
कहानी म द ढ़यल को गाँव के बाहर तक खदे ड़ आने के बाद मोती अकड़ता हुआ लौटा और यह चेतावनी द — “दे खूँ, कैसे ले जाता
क्य है।”
नया वाक्य य द उसने फर मेरे छोटे भाई को तंग कया, तो म उसक अ तरह खबर लूँगा।
दू स रे अथ में छु के दन जाकर बीमार मत्र क खबर ले आना।
वाक्य
प्र.6 6. “जी तोड़कर काम करते ह, कसी से लड़ाई-झगड़ा नह करते, चार बात सुनकर गम खा जाते ह।”
इस एक वाक्य म दो मुहावरे ह — जी तोड़कर काम करना और गम खाना।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा
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मुहावरा अथ कहानी म संदभ नया वाक्य
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काम करना .c लगाकर प रश्रम करना
री श क्त और लगन प्रेमचंद वदे श म बसे भारतवा सय के बारे म
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कह रहे ह क वे कठोर प रश्रम करते ह, फर भी
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बदनाम ह। हुआ।
गम खाना अपमान या दुख को यह उसी ‘ नरापद स हष्णुता’ क ओर संकेत है दुक ानदार की कड़ वी बात सुनकर भी
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िपताजी गम खा गए और चुपचाप लौट
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चुपचाप सह लेना; क्रोध जस पर पूरी कहानी व्यंग्य करती है।
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ध्यान द जए: ये दोन मुहावरे उसी अनु
a े द म ह जहाँ लेखक व्यंग्य कर रहा है। यानी प्रेमचंद कह रहे ह क केवल
‘जी तोड़कर काम करना’ और ‘गम खा जाना’ पयाप्त नह — आत्मसम्मान क रक्षा भी आनी चा हए। यही कहानी
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का कद्र य भाव है।
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a प्र.7 7. “अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से दे ना सीख जाते, तो शायद सभ्य कहलाने लगते।”
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मुहावरा — ईंट का जवाब पत्थर से दे ना।
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अथ करारा जवाब दे ना; अन्याय का दुगुनी श क्त से प्र तकार करना।
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कहानी प्रेमचंद यहाँ तीखा व्यंग्य कर रहे ह — जो चुपचाप सहते ह उन्ह दु नया ‘बु द्धहीन’ मानती है, और जो पलटकर उत्तर दे ते ह
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उन्ह ‘सभ्य’। इसके तुरंत बाद वे उदाहरण भी दे ते ह — “जापान क मसाल सामने है। एक ही वजय ने उसे संसार क
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सभ्य जा तय म गण्य बना दया।”
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कहानी म
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यही मुहावरा मोती के च रत्र म जी वत हो जाता है — साँड़ के पेट म स ग भ कना और द ढ़यल को गाँव के बाहर तक
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इसका मूत खदे ड़ना।
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नया वाक्य सीमा पर बार-बार छे ड़खानी होने पर सेना ने ईंट का जवाब पत्थर से दया।
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एक और वाक्य
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पहले तीन ओवर म खूब रन लुटाने के बाद गदबाज़ ने ईंट का जवाब पत्थर से दे ते हुए लगातार दो वकेट ले लए।
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8. “तो फर वह मरो। बंदा तो नौ-दो ग्यारह होता है।”
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मुहावरा — नौ-दो ग्यारह होना। gl
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
बदु ववरण
अथ चुपचाप भाग जाना, चंपत हो जाना, खसक लेना।
कहानी म साँड़ को सामने आता दे खकर मोती भाग जाने के पक्ष म था। हीरा ने कहा “भागना कायरता है”, तो मोती ने चढ़कर यह वाक्य
क्य कहा। (आगे वही मोती डटकर लड़ता है — यही उसके च रत्र क रोचक बात है।)
शब्द- चत्र ‘नौ’ और ‘दो’ को जोड़ने पर ‘ग्यारह’ बनता है, और ‘11’ दो सीधी खड़ी रेखाएँ ह — मानो दो पैर तेज़ी से चलते हुए। मुहावरे
म यही चत्र छपा है।
नया वाक्य शीशा टू टने क आवाज़ सुनते ही ब े नौ-दो ग्यारह हो गए।
एक और चौक दार क टॉच जलते ही चोर नौ-दो ग्यारह हो गया।
वाक्य
पाठ के अन्य मुहावरे (अभ्यास के लए): मन फ का करना, नमक-हराम होना, जान हथेली पर लेना, जान से हाथ
धोना, बगल झाँकना, आँख न उठाना, वजय के नशे म झूमना, बोट -बोट काँपना, ठठ रयाँ नकल आना, अकड़ना,
टकटक लगाना, दल भारी होना, आँख म आँसू लाना, अपने बूते-भर जोर मारना। इनके अथ लखकर एक-एक
वाक्य बनाइए — इसी से भाषा ‘मुहावरेदार’ बनती है।
ग त व धयाँ — पृष्ठ 26 और 27
अभ्यास › भाषा से संवाद › ग त व धयाँ
भाषा से सं वाद गतवध
प्र.1 1. क वता (गीत) और अ भनंदन-पत्र — “बाल-सभा ने नश्चय कया, दोन पशुवीर को अ भनंदन-पत्र दे ना
चा हए।” (क) मान ली जए क बाल-सभा ने हीरा और मोती क प्रशंसा म एक गीत लखा और गाया। अपनी
कल्पना से वह गीत ल खए।
गीत लखते समय तीन बात ध्यान र खए — तुक (पं क्तय के अंत क एक-सी ध्व न), टे क (वह पं क्त जो हर अंतरे के बाद लौटे ),
और लय (हर पं क्त म लगभग बराबर मात्राएँ, ता क सब मलकर गा सक)।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर — ‘हीरा-मोती’ (बाल-सभा का गीत)
टे क —
हीरा-मोती, हीरा-मोती, गाँव तुम्हारा गाता है,
जो सर ऊँचा रखकर जीता, वही हम भाता है॥
पछाईं जा त के दो साथी, सुंदर और सजीले,
काम म चौकस, डील म ऊँचे, मन के बड़े रसीले।
बन बोले ही बात समझ ल, ऐसा नाता है —
जो सर ऊँचा रखकर जीता, वही हम भाता है॥
रात -रात पग हया तोड़ी, लौट पड़े नज ारे,
क चड़ सने खड़े थे आकर, आँख म थे तारे।
जसको अपना घर प्यारा हो, वह क्य घबराता है —
जो सर ऊँचा रखकर जीता, वही हम भाता है॥
सूखा भूसा, डंडे-लाठ , भूख भरी थी रात,
फर भी पाँव नह उठवाए, मानी नह वे बात।
जो न झुके अन्याय के आगे, वह ही जग जीता है —
जो सर ऊँचा रखकर जीता, वही हम भाता है॥
साँड़ बड़ा था हाथी जैसा, दोन डटकर भड़ गए,
मलकर वार कया जब दोन , उसके तेवर उड़ गए।
जुड़कर लड़ने वाले को ही जीत बुलाती है —
जो सर ऊँचा रखकर जीता, वही हम भाता है॥
तोड़ी बंद गृह क द वार, छू टे कतने प्राणी,
खुद बँधकर भी साथी न छोड़ा — यही बड़ी कुबानी।
स ा मीत वही है जो दुख म साथ नभाता है —
जो सर ऊँचा रखकर जीता, वही हम भाता है॥
Tip: गीत म कहानी क घटनाओं का क्रम र खए ( मत्रता → लौटना → अत्याचार → साँड़ → काँजीहौस)। इससे
गाते समय सुनने वाले को पूरी कहानी याद आती जाएगी। और टे क ऐसी चु नए जसम कहानी का भाव हो, केवल
नाम नह ।
प्र.2 1. (ख) हीरा और मोती के लए अ भनंदन-पत्र ल खए।
अ भनंदन-पत्र (मानपत्र) एक औपचा रक, अलंकृत प्रशंसा-पत्र होता है। इसम रहता है — शीषक, संबोधन, काय का उल्लेख,
गुण क प्रशंसा, कृतज्ञता, शुभकामना, और अंत म दे ने वाली सं ा का नाम, ान व दनांक। भाषा ग रमामय और थोड़ी
अलंकृत होती है।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर:
अ भनंदन-पत्र
बाल-सभा, ग्राम बेलपुर क ओर से
आदरणीय पशु-वीर हीरा एवं मोती,
आज हमारा यह छोटा-सा गाँव आपका अ भनंदन करते हुए गव का अनुभव करता है। आप दोन केवल हमारे खेत
जोतने वाले बैल नह ह — आप साहस, मत्रता और स्वा भमान के जीवंत उदाहरण ह।
जस रात आपको अपने घर से दूर, अनजान गाँव म बाँध दया गया, आपने अन्न-जल त्याग दया और मजबूत पगहे
तोड़कर उसी रात लौट आए। घुटन तक क चड़ म सने, थके हुए, फर भी आपक आँख म जो ‘ वद्रोहमय स्नेह’ था,
उसे यह गाँव कभी नह भूलेगा।
आपने भूखे रहकर भी अन्यायी के आगे पाँव नह उठाए। आपने अपने से कह बड़े साँड़ का सामना अकेले नह ,
ब ल्क मलकर कया और यह सखाया क संग ठत श क्त के आगे कोई श क्त बड़ी नह होती। और सबसे
बढ़कर — काँजीहौस क द वार गराकर आपने अपनी मु क्त से पहले नौ-दस मूक प्रा णय क मु क्त चुनी। बँधे हुए
मत्र को छोड़कर अकेले भाग जाना आपने स्वीकार नह कया। यह वह आचरण है जसे मनुष्य भी सदा नह नभा
पाता।
आपने यह भी दखाया क श क्त का उपयोग कहाँ रुक जाना चा हए — गरे हुए शत्रु पर आपने स ग नह चलाया
और स्त्री पर वार नह कया। श क्त के साथ मयादा — यही स ी वीरता है।
इस अवसर पर बाल-सभा आपके सम्मान म यह अ भनंदन-पत्र, फूल क माला तथा गुड़, चोकर, खली और रो टय
का भोग सम पत करती है। हमारी कामना है क आप दोन सदा साथ रह, स्वस्थ रह और इसी थान पर, इसी स्नेह के
बीच अपना जीवन बताएँ।
भवद य,
बाल-सभा
ग्राम — बेलपुर, जला — वाराणसी
दनांक — 15 अगस्त 20XX
Tip: अ भनंदन-पत्र म केवल तारीफ़ के वशेषण मत भ रए — काम गनाइए। ऊपर के नमूने म हर अनु ेद
कहानी क एक घटना पर टका है, इसी लए प्रशंसा खोखली नह लगती।
प्र.3 2. बाल सभा म भाषण — मान ली जए क आपको बाल-सभा ने हीरा-मोती के लौटने के बाद भाषण दे ने के लए
बुलाया है। भाषण का वषय है— ‘पशुओं के अ धकार’। अपना भाषण ल खए और कक्षा म प्रस्तुत क जए।
भाषण का ढाँचा — संबोधन → वषय-प्रवेश (कोई घटना या प्रश्न) → मुख्य बदु (तीन-चार, क्रम से) → उदाहरण और तथ्य
→ अपील → धन्यवाद। बोलने के लए वाक्य छोटे र खए और बीच-बीच म श्रोताओं से प्रश्न पू छए।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर — भाषण
माननीय अध्यक्ष महोदय, आदरणीय अध्यापकगण और मेरे प्यारे सा थयो,
आज बाल-सभा म हम दो बैल — हीरा और मोती — के लौट आने क खुशी मना रहे ह। पर म आपसे एक प्रश्न
पूछना चाहता हूँ: य द वे न लौट पाते तो? य द वह द ढ़यल उन्ह ले जाने म सफल हो जाता, तो आज हम यहाँ
ता लयाँ नह बजा रहे होते। इस लए आज म ‘पशुओं के अ धकार’ वषय पर कुछ कहना चाहता हूँ।
पहली बात — पशु हमारी सम्प त्त ज़रूर ह, पर वे वस्तु नह ह। वस्तु को भूख नह लगती, दद नह होता, डर नह
लगता। हीरा और मोती को तीन लगे। जसे भूख और दद होता है, उसके अ धकार भी होते ह।
दूसरी बात — उनका सबसे पहला अ धकार है भोजन और पानी। सो चए, काँजीहौस म एक सप्ताह तक उन्ह चारे
का एक तनका नह मला। वे द वार क नमक न म चाटते रहे। क्या यह कसी अपराध का दं ड हो सकता है? नह
— यह क्रूरता है।
तीसरी बात — उनका अ धकार है मार-पीट से सुरक्षा। जो हाथ हल पकड़ता है, उसी हाथ म डंडा नह होना
चा हए। जस बैल को उसका मा लक “फूल क छड़ी से भी न छू ता था”, वही बैल कसी और के हाथ नाक पर डंडे
खाता है — यह अंतर कोई कानून नह , हमारी संवेदना तय करती है।
चौथी बात — उनका अ धकार है व ाम, च कत्सा और वृद्धाव ा म सम्मान। जस पशु ने जीवन-भर हमारे
खेत जोते, बूढ़ा होने पर उसे कसाई के हाथ बेच दे ना कृतघ्नता है। हमारे दे श म पशु क्रूरता नवारण अ ध नयम,
1960 बना हुआ है, और हमारे सं वधान का अनु े द 51(क)(छ) हर नाग रक से कहता है क वह जीवमात्र के प्र त
दया रखे। यानी दया केवल अ ाई नह , हमारा कतव्य है।
सा थयो, हम ब े कानून तो नह बना सकते, पर हम बहुत कुछ कर सकते ह। हम अपने घर के पशुओं को समय पर
चारा-पानी दे सकते ह। गम म सड़क के कुत्त और प क्षय के लए पानी का बतन रख सकते ह। घायल पशु दखे तो
बड़ को बता सकते ह। और कसी को कसी बेज़बान पर हाथ उठाते दे ख, तो चुप नह रह सकते।
अंत म म इतना ही कहूँगा — जस समाज म बेज़बान सुर क्षत होते ह, वही समाज सचमुच सभ्य कहलाने योग्य है।
हीरा और मोती ने अपनी लड़ाई खुद लड़ ली; पर हर पशु इतना भाग्यशाली नह होता। उनक लड़ाई हम लड़नी है।
धन्यवाद। जय हद।
Tip: भाषण क शुरुआत कसी प्रश्न या घटना से क जए — इससे श्रोता तुरंत जुड़ जाते ह। और अंत म हमेशा एक
अपील र खए क सुनने वाला क्या करे; उपदे श से अ धक असर आमंत्रण का होता है।
प्र.4 3. शीषक — इस कहानी के पाँच भाग ह। कहानी के प्रत्येक भाग को अपने मन से उपयुक्त शीषक द जए।
कहानी पाँच भाग म बँट है (पुस्तक म हर भाग के आरंभ पर एक छोटा चह्न/अंक दया गया है)। नीचे हर भाग क सीमा, कथा-सार
और सुझाए गए शीषक दए गए ह।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा
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भाग कहाँ से कहाँ तक (मुख्य घटनाएँ) सुझाया गया वैक ल्पक शीषक
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coबैलmपर लेखक क टप्पणी; हीरा-मोती का प रचय और भाईचारा;
शीषक
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ag “बेगाना घर”; “जहाँ
1
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गधे और दो िमत्र और
a g l री का गोईं को ससुराल भेजना; पहली रात पगहे तोड़कर लौट आना; गाँव
का स्वागत; माल कन का क्रोध और सूखे भूसे का हुक्म।
पहली वापसी अपनापन नह , वहाँ नाँद
भी खाली है”
2
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भागना; छोट लड़क क दो रो टयाँ; उसका गराँव खोलना;.cबैल का भागना
गया का दुबारा ले जाना; गाड़ी और हल म जोतना; डंडे; मोती का हल लेकर बंधन, रोिटयाँ “दो रो टय का प्रसाद”;
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eअनुmभव।
और भागना
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“पाँव न उठाने क कसम”
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और रास्ता भूल जाना; मटर चरना और आज़ाद का
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3 साँड़ का सामना; योजना बनाकर दोन का मलकर लड़ना और साँड़ को साँड़ से िभड़ ंत “संग ठत श क्त क
हराना; फर मटर के खेत म मोती का पकड़ा जाना; हीरा का लौट आना; दोन और िगर ़ तारी
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जीत”; “जीत के बाद
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se “ मत्र नह छोड़ा जाता”;
का काँजीहौस म बंद होना। कैद”
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em क जोर-आजमाई से द वार गराना; नौ-दस प्रा णय क मु क्त; गध को
4 काँजीहौस क भूख; हीरा का द वार तोड़ना और बाँधा जाना; मोती का दो घंटे
a s बंधन
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“जोर तो मारता ही
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ठे लकर नकालना; मोती का मत्र के पास लौट आना और सुबह पटना। जाऊँगा”
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घर की राह और
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5 एक सप्ताह क भूख; डु ग्गी और नीलाम; द ढ़यल का खरीदना; प र चत “अपना थान”; “लौट
. c मालिकन का
m चूमना।
रास्ता पहचानकर घर क ओर दौड़; झूरी और द ढ़यल क तकरार; मोती का आए अपने ार”
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द ढ़यल को खदे ड़ना; नाँद का भरना और माल कन का माथे चुंबन
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शीषक चुनने क कसौट : अ ा शीषक तीन शत पूरी करता है — (1) वह छोटा हो; (2) उस भाग क मुख्य
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घटना या मुख्य भाव पकड़े; (3) पढ़ते ही उत्सुकता जगाए। यही कारण है क ‘भाग 4’ के लए ‘काँजीहौस’ से
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बेहतर शीषक ‘टू ट द वार, टू टा बंधन’ है — इसम घटना भी है और अथ भी।
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मेरी पहेली — पृष्ठ 27
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अभ्यास › भाषा से संवाद › मेरी पहेली
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भाषा से सं वाद समू ह काय
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अपने समूह के साथ मलकर ऐसी पहे लयाँ बनाइए जनके उत्तर नम्न ल खत ह — हीरा, झूरी, मोती, गया, बैल,
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प्र.1
मटर, रस्सी, रोट
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अ पहेली बनाने का सूत्र — उत्तर को सीधे मत बताइए, उसके दो-तीन गुण बताइए और एक गुण ऐसा र खए जो च काए
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(जैसे शब्द के दो अथ)। तुक मला द जए तो पहेली याद भी रह जाती है।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
उत्तर पहेली पहेली क चाबी
हीरा “खान म मलूँ तो सबसे क मती, कहानी म मलूँ तो शब्द के दो अथ — रत्न और बैल का नाम; ‘धीरज’ उसके स्वभाव का
स ग वाला, संकेत।
धीरज मेरा नाम है साथी, फर भी द वार मने हला
डाला।”
मोती “सीप म जन्मूँ, माला म सजूँ, पर इस कथा म म हूँ जीव, दो अथ — रत्न और बैल; ‘गुस्सा’ और ‘साँड़’ से पहचान पक्क ।
गुस्सा मेरा जल्द आता, साँड़ भगाया मने स ग से ख च।”
झूरी “न म बैल, न म साला, पर दोन का हूँ म रखवाला, ‘फूल क छड़ी से भी न छू ना’ सीधे कहानी क पं क्त है।
फूल क छड़ी से भी न छू ता, गले लगाकर रोता-हँसता।”
गया “मेरा नाम एक क्रया भी है, ‘चला गया’ म मुझको पाओ, ‘गया’ शब्द संज्ञा भी है और क्रया-रूप भी — यही मज़ा है।
पर इस कथा म साला हूँ म, हल म बैल जुताने आओ।”
बैल “कंधे पर जुआ, गले म घंट , खेत मेरा घर-आँगन है, काम, ठकाना और कहानी का व्यंग्य — तीन संकेत।
‘बु द्धहीन’ कहते ह मुझको, पर सारा अन्न मेरा दान है।”
मटर “हरी फली म गोल-गोल हम, कतार बनाकर बैठे रहते, रूप + कहानी क घटना।
भूखे बैल ने जब चर डाला, तब वे काँजीहौस म जा
फँसते।”
रस्सी “बल खाकर म बल पक ,ँ पशु को थामे रहती हूँ, ‘चबाकर तोड़ने’ का उपाय मोती ने ही बताया था।
चबा लो थोड़ा, झटका दो — फर एक ही पल म टू ट
जाती हूँ।”
रोटी “गोल हूँ, पर प हया नह , तवे पर सककर फूल जाती, रूप + कहानी का मा मक प्रसंग।
दो ही मल थ भूखे बैल को, पर दल क भूख मटा
जाती।”
समूह म कैसे क जए: कक्षा को चार-चार के समूह म बाँ टए। हर समूह दो शब्द उठाए और उन पर पहेली बनाए।
फर समूह बारी-बारी अपनी पहेली सुनाएँ और बाक कक्षा उत्तर दे । जस पहेली का उत्तर सब बहुत जल्द दे द, वह
बहुत आसान है; जसका कोई न दे पाए, वह बहुत क ठन है। अ पहेली वह है जसका उत्तर दो-तीन प्रयास म
मल जाए।
भाषा संगम — पृष्ठ 27
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
अभ्यास › भाषा से संवाद › भाषा संगम
भाषा से सं वाद भाषा सं ग म
प्र.1 “कभी-कभी अ ड़यल बैल भी दे खने म आता है।” नीचे ‘बैल’ शब्द के लए सं वधान क आठव अनुसूची म
स म्म लत कुछ भारतीय भाषाओं म प्रयुक्त शब्द क सूची द गई है। — इनके अ त रक्त य द आप ‘बैल’ शब्द
को कसी और भाषा म भी जानते ह तो उस भाषा म भी ल खए।
पहले पुस्तक क सूची दे ख ली जए, फर उसम जोड़े गए शब्द।
भाषा ‘बैल’ के लए शब्द भाषा ‘बैल’ के लए शब्द
हद बैल अस मया षाँड़, बलध
संस्कृत वृषभः म णपुरी शन लाबा
पंजाबी बओलद, बल्द ओ ड़आ बलद
उदू बैल तेलुगु एंददु
कश्मीरी दद त मल ए रदु / काळै माहु
सधी ढ़गो मलयालम काळ
मराठ बैल कन्नड़ एत्तु
गुजराती बळद क कणी बैल
बांग्ला बलद नेपाली गोरु
इनके अ त रक्त कुछ और भाषाएँ/बो लयाँ —
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
भाषा / बोली शब्द टप्पणी
भोजपुरी / अवधी / मगही बैल, बरध / बरधा ‘बरध’ संस्कृत ‘वधः’ (हृष्ट-पुष्ट पशु) से जुड़ा है।
मैिथली बड़द बांग्ला ‘बलद’ और ओ ड़आ ‘बलद’ के नकट।
छ ीसगढ़ ी बइला ‘पोला’ पव म इन्ह क पूजा होती है।
राजस्थानी / मारवाड़ ी बळद, धोरी ‘धोरी’ का अथ है भार ख चने वाला बैल।
हिरयाणवी / बज बल्द, बैला —
डोगरी बल्द पंजाबी के नकट।
संताली दाङरा ऑस् ो-ए शया टक प रवार क भाषा।
बोडो मोसौ (गोवंश) तब्बती-बम प रवार।
अंगेज़ी ox / bullock ‘bull’ (साँड़) से अलग शब्द।
ध्यान दे ने योग्य बात: सूची पर एक बार फर नज़र डा लए — बैल, बल्द, बलद, बळद, बरध, बड़द, बइला — ये
सब एक ही मूल से नकले शब्द ह। इसके वपरीत द क्षण क भाषाओं के शब्द (एंददु, ए रदु, एत्तु, काळ) एक दूसरे
प रवार से आते ह, पर आपस म मलते-जुलते ह। इससे पता चलता है क भारत क भाषाएँ अलग होकर भी
प रवार म बँधी ह — यही ‘भाषा संगम’ का संदेश है।
प्र.2 — उपयुक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा म भी ल खए। (वाक्य: “कभी-कभी अ ड़यल बैल भी दे खने म आता
है।”)
यह आपक अपनी मातृभाषा म लखने का काम है। पहले यह समझ ली जए क वाक्य म तीन टु कड़े ह — कभी-कभी (आवृ त्त),
अ ड़यल बैल ( वशेषण + संज्ञा), और दे खने म आता है ( क्रया)। तीन को अपनी भाषा म अलग-अलग सो चए, फर जो ड़ए —
शब्दशः अनुवाद मत क जए, अपनी भाषा जैसे कहेगी वैसे क हए।
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा AglaSem · NCERT Solutions
भाषा वाक्य
हद (मूल) कभी-कभी अ ड़यल बैल भी दे खने म आता है।
भोजपुरी कबो-कबो अ ड़यल बरध भी दे खे के मल जाला।
अवधी कबहुँ-कबहुँ अ ड़यल बरधा भी दे खै मा आइ जात है।
मैिथली क हयो-क हयो अ ड़यल बड़द सेहो दे खबा मे अबैत अ छ।
राजस्थानी कदे -कदे अ ड़यल बळद ई दे खण नै मलै।
छ ीसगढ़ ी कभू-कभू अ ड़यल बइला घलो दे खे बर मलथे।
मराठी कधी-कधी ह बैल सुद्धा पाहायला मळतो.
गुजराती ક્ ારે ક હઠીલો બળદ પણ જોવા મળે છે . (क्यारेक हठ लो बळद पण जोवा मळे छे ।)
बांग्ला মােঝ মােঝ একগুঁেয় বলদও দখা যায়। (माझे-माझे एकगुँये बलद-ओ दे खा जाय।)
पंजाबी ਕਦੇ -ਕਦੇ ਅੜੀਅਲ ਬਲਦ ਵੀ ਵੇਖਣ ਨੂੰ ਿਮਲਦਾ ਹੈ। (कदे -कदे अड़ीअल बलद वी वेखण नूँ मलदा है।)
संस्कृ त कदा चत् हठ वृषभः अ प दृश्यते।
अंगेज़ी Sometimes one comes across a stubborn ox as well.
Try This: अपनी मातृभाषा म यह वाक्य लखने के बाद कक्षा म सबके वाक्य एक चाट पर लगा द जए और तीन
बात दे खए — (1) ‘बैल’ का शब्द कतनी भाषाओं म मलता-जुलता है; (2) ‘कभी-कभी’ कस- कस रूप म आता
है (कबो-कबो, कदे -कदे , कधी-कधी, माझे-माझे) — प्रायः शब्द को दोहराकर ही; और (3) वाक्य म क्रया अंत म
ही आती है। इससे समझ आएगा क भारतीय भाषाओं क बनावट कतनी मलती-जुलती है।
क्य ज़रूरी है: ‘भाषा संगम’ का उ े श्य केवल शब्द जानना नह है। यह सखाता है क हमारी मातृभाषा कसी से
छोट नह और हद क कक्षा म उसे लाने पर उसका सम्मान बढ़ता है। जतनी भाषाएँ, उतनी खड़ कयाँ — और हर
खड़क से वही दे श दखता है।
खोजबीन — पृष्ठ 27
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कक्षा 9 हद अध्याय 1 दो बैल क कथा
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अभ्यास › खोजबीन
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खोजबीन प रयोजना
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a s em — दो बैल क कथा; कथा स ाट– प्रेमचंद; प्रेमचंद का बचपन और ब
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खोजबीन क कहा नयाँ (channel-
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NCERTOFFICIAL)
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agयह दया गया है क क्या खोजना है और क्या लखकर लाना है।
पुस्तक ने यहाँ तीन वषय सुझाए ह और NCERT के आ धका रक चैनल क ओर संकेत कया है। इन्ह केवल दे ख लेना पयाप्त नह
— दे खकर नोट बनाइए। नीचे हर वषय के लए
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वषय क्या खोज / दे ख कक्षा म क्या प्रस्तुत कर
om कहानी l a se
क कथा’ .c g पात्र — हीरा, मोती, झूरी,
मंचन कaजए।
1. ‘दो बैल का नाट्य-रूपांतरण या पाठ (audio) सु नए। ध्यान कक्षा म कहानी के कसी एक भाग का नाट्य-
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द जए क संवाद बोलते समय स्वर कैसे बदलता है — हीरा का
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ag रूप)
(नाट्य/श्रव्य शांत स्वर, मोती का तीखा स्वर, माल कन का चढ़ा हुआ स्वर। माल कन, गया, छोट लड़क , चौक दार, द ढ़यल,
दो गधे। ‘मूक-भाषा’ के संवाद मंच के कनारे खड़ा
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एक सूत्रधार बोल सकता है।
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जन्म 1880, लमही (वाराणसी); मूल नाम.c
em कहानी-संग्रह सोज़े- agl
पहले ‘नवाब राय’, फर ‘प्रेमचंद’।sपहला
2. कथा धनपत राय; उपनाम एक समय-रेखा (timeline) बनाइए — 1880
स ाट —
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वतन, जसे अंग्रेज़ सरकारgनेlजब्त कर लया। असहयोग आंदोलन
जन्म से 1936 नधन तक — जसम हर मोड़ पर
प्रेमचंद
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म सरकारी नौकरी से त्यागपत्र। कहा नयाँ मानसरोवर के आठ
एक रचना या घटना अं कत हो। साथ म उनक
पाँच प्र सद्ध कहा नय (ईदगाह, पंच परमेश्वर, बड़े
भाग म। उपन्यास — सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभू म, कायाकल्प,
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भाई साहब, नमक का दारोगा, पूस क रात) का
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नमला, गबन, कमभू म, गोदान। प त्रकाएँ — हंस, जागरण, एक-एक पं क्त म प रचय।
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माधुरी। नधन 1936।
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a s e3.mप्रेमचंद का
gl बचपन और
बचपन म माता का दे हांत, क ठन आ थक स्थ त, दूर जाकर पढ़ाई प्रेमचंद क एक बाल-कहानी पढ़कर कक्षा म
a और कताब क दुकान पर उपन्यास पढ़ना। ब के लए लखी सुनाइए और बताइए क उसम भी कोई पशु या
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ब क रचनाएँ — जंगल क कहा नयाँ, कुत्ते क कहानी, राम चचा, तथा कोई नधन पात्र कस तरह मुख्य भू मका म है।
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कहा नयाँ ‘ईदगाह’ और ‘दो बैल क कथा’ जैसी कहा नयाँ जो ब म फर तुलना क जए क ‘दो बैल क कथा’ से वह
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सबसे लोक प्रय ह। कस बात म मलती है।
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खोजबीन का तरीका: केवल इंटरनेट पर मत रु कए। वद्यालय के पुस्तकालय से मानसरोवर का कोई भाग ली जए
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और उसम से एक कहानी प ढ़ए। घर के बड़ से पू छए क उन्ह ने प्रेमचंद क कौन-सी कहानी पढ़ या फ़ल्म दे खी है
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— गोदान, गबन, शतरंज के खलाड़ी और सद्ग त पर फ़ल्म बनी ह। हर ोत का नाम अपनी कॉपी म लख ली जए;
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यही आपक संदभ-सूची होगी।
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क्य कर: एक कहानी को अ तरह समझने के लए उसके लेखक को जानना ज़रूरी है। जब आप जान लगे क
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प्रेमचंद ने स्वयं असहयोग आंदोलन म नौकरी छोड़ी थी और उनक पहली कताब जब्त हो गई थी, तब हीरा का वाक्य
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— “जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कतने ही बंधन पड़ते जाएँ” — केवल एक बैल का संवाद नह रह जाएगा।
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