Page 1
F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा9
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 4: ऐसी भी बात होती ह
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — गंगा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
62 – 83 17 57 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 56 pages
Page 2
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 9 · हद · गं गा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 4: ऐसी भी बात होती ह
NCERT कक्षा 9 हद क पाठ्यपुस्तक गंगा के पाठ 4 ऐसी भी बात होती ह (लता मंगेशकर से साक्षात्कार) के सभी अभ्यास-प्रश्न के पूरे हल। यह
पाठ यत द्र मश्र ारा स्वर-साम्रा ी लता मंगेशकर से लया गया साक्षात्कार है — गंगा क गद्य- वधाओं म यह पहली बार आई वधा है। पृष्ठ 62 से
83 तक के अभ्यास का हर शीषक — मेरे उत्तर मेरे तक, मेरी समझ मेरे वचार, साक्षात्कार से उभरता व्य क्तत्व/उभरती छ व, मेरे प्रश्न, मेरे अनुभव मेरे
वचार, साक्षात्कार क पड़ताल, आपका साक्षात्कार, वषय से संवाद, शास्त्रीय संगीत, साइबर सुरक्षा, हम ऐसे भी बोलते ह, सृजन, व्याकरण क बात,
हमारी भाषाएँ, ग त व धयाँ, भाषा संगम और खोजबीन — क्रम से, प्रश्न-दर-प्रश्न हल कया गया है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
गंगा (कक्षा 9) 62 – 83
खं ड प्रश्न
17 57
माध्यम
हन्द
मेरे उत्तर मेरे तक — पृष्ठ 74 और 75
रचना से संवाद
रचना से सं वाद बहु वकल्पी + तक
प्र.1 नम्न ल खत प्रश्न के सट क उत्तर चु नए और यह भी बताइए क आपको ये उत्तर उपयुक्त क्य लगते ह? — 1.
लता जी ने अपने पताजी से क्या-क्या सीखा? (क) अनुशासन और नयम के साथ जीना (ख) भय और संशय के
साथ जीना (ग) स्वा भमान और स ाई के साथ जीना (घ) चतुराई और संयम के साथ जीना
सही उत्तर — (ग) स्वा भमान और स ाई के साथ जीना।
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: प्रश्न स्वयं लता जी से पूछा गया था और उन्ह ने अपने शब्द म उत्तर भी दया है —
“सबसे ज्यादा तो स्वा भमान से जीने क प्रेरणा।” आगे वे पता का वाक्य दोहराती ह — “अगर कोई बात तुम्ह सही
लगती है, तो उसे करो और कसी के आगे झुकने क जरूरत नह है।” इसम दोन बात एक साथ ह — स्वा भमान
( कसी के आगे न झुकना) और स ाई (जो सही लगे, वही करना)। इसका प्रमाण उनके आचरण म भी है — “मने
कसी से यह नह कहा क आप मुझे पाँच सौ रुपये द जए… मुझे उसक जरूरत है।” यानी यह सीख कहने भर क
नह रही, जया गया मूल्य बनी।
Page 1 of 56
Page 3
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प नणय कारण
(क) अनुशासन और अधूरा पता का अनुशासन पाठ म है ज़रूर — “उनका सख्त अनुशासन था”, फल्म दे खने पर रोक थी।
नयम के साथ जीना पर यह उनका स्वभाव था; प्रश्न यह है क लता जी ने क्या सीखा। उस पर उनका अपना उत्तर
‘स्वा भमान’ है, ‘अनुशासन’ नह ।
(ख) भय और संशय के ग़ ल त पता के गुस्से से बच्चे डरते ज़रूर थे, पर वह डर सम्मान का था और क्ष णक था — “अच्छा अब
साथ जीना जाओ, बाहर जाकर खेलो।” लता जी ने कह संशय म जीना नह सीखा; उलटे उन्ह ने नभय होकर
खड़े रहना सीखा।
(ग) स्वा भमान और सही ✓ लता जी का सीधा कथन — “सबसे ज्यादा तो स्वा भमान से जीने क प्रेरणा… जदगी म सही बात
स ाई के साथ जीना पर खड़े रहने क हम्मत मली।”
(घ) चतुराई और संयम के ग़ ल त ‘चतुराई’ शब्द पाठ क भावना के वरुद्ध है। जो व्य क्त ज़रूरत म भी हाथ न फैलाए, वह चतुराई
साथ जीना नह , सद्धांत से जीता है।
प्र.2 2. पताजी क मृत्यु के बाद प रवार सँभालने का लता जी का नणय कस जीवन-मूल्य का द्योतक है? (क) संघष
(ख) नराशा (ग) भौ तकता (घ) कतव्य नष्ठा
सही उत्तर — (घ) कतव्य नष्ठा।
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: प्रश्न म मूल शब्द है ‘जीवन-मूल्य’। जीवन-मूल्य वह भीतरी कसौट है जसके आधार पर
व्य क्त नणय लेता है। लता जी का नणय कसी ववशता से नह , एक स्वीकारे हुए कतव्य से नकला — “हमेशा
यही बात दमाग म घूमती थी क कसी तरह बस मुझे अपने प रवार को दे खना है… कस तरह म अपने प रवार के
लए ज्यादा से ज्यादा कमाकर उनक जरूरत पूरी कर सकती हूँ।” तेरह वष क आयु म, जब लड़ कय का फल्म म
काम करना अच्छा नह माना जाता था, तब यह भार उठाना कतव्य को अपनी सु वधा से ऊपर रखना है — यही
कतव्य नष्ठा है।
Page 2 of 56
Page 4
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प नणय कारण
(क) संघष नकट, पर संघष उस नणय का प रणाम है, मूल्य नह । सुबह से रात तक स्टू डयो के चक्कर संघष ह; पर संघष क्य
अधूरा कया — इसका उत्तर कतव्य है। यही अंतर प्रश्न परख रहा है।
(ख) नराशा ग़ ल त पाठ म नराशा का एक भी संकेत नह । लता जी कहती ह — “मुझे कसी बात क शकायत नह है। म
बहुत खुश हूँ।”
(ग) भौ तकता ग़ ल त वे कमाईं ज़रूर, पर धन के लए नह — “आज मेरे पास पैसे ह और नाम है। हम आज जहाँ रहते ह, वह
भले ही इतना छोटा-सा घर है, पर उसम हम लोग बहुत खुश ह।” भौ तकता होती तो छोटे घर म सुख न
दखता।
(घ) सही ✓ माँ और छोटे भाई-बहन का उत्तरदा यत्व स्वयं उठाना, और उसे जीवन-भर नभाना।
कतव्य नष्ठा
प्र.3 3. “ बल्कुल ठे ठ गँवई अंदाज म यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है…” ‘मंगलागौर’ के वणन से भारतीय
समाज क कौन-सी परंपरा उजागर होती है? (क) संगीत पर आधु नकता का प्रभाव (ख) लोकगीत क
लोक प्रयता म कमी (ग) धा मक कायक्रम म संगीत का महत्व (घ) संगीत क महत्वपूण सामा जक भू मका
सही उत्तर — (घ) संगीत क महत्वपूण सामा जक भू मका।
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: मंगलागौर का वणन प ढ़ए — “ ववाह के बाद जब नई बहू घर म आती है, तब एक पूजा
होती है घर म, जसम पास-पड़ोस क बहुत सारी औरत आती ह… सारी औरत बल्कुल मुग्ध भाव से गीत गाती ह
और नाचती भी ह… उनम स्त्रयाँ नौटं क और तमाशा क तरह भी कुछ-कुछ करती थ ।” यहाँ गीत का काम पूजा
कराना नह है — गीत नई बहू को पड़ोस से, और पड़ोस को एक-दूसरे से जोड़ता है। संगीत यहाँ मनोरंजन और
भ क्त से आगे बढ़कर समाज को जोड़ने वाला सूत्र बन जाता है। यही उसक सामा जक भू मका है।
Page 3 of 56
Page 5
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
वकल्प नणय कारण
as e
. com a g l
(क) संगीत पर ग़ ल त वणन ठ क उलटा है — यह “ बल्कुल ठे ठ गँवई अंदाज” है, यानी परंपरागत रूप, आधु नक
s em
आधु नकता का प्रभाव नह ।
a
glलोकगीत क
a(ख) आं शक तथ्य, लता जी यह कहती अवश्य ह क “आ हस्ता-आ हस्ता वह भी अब खत्म हो रहा है”, पर यह
लोक प्रयता म कमी पर उत्तर नह उनका खेद है। प्रश्न पूछ रहा है क मंगलागौर के वणन से कौन-सी परंपरा उजागर होती है —
com
. ag
यानी वह परंपरा क्या थी, न क उसका आज क्या हाल है।
se m
l a
aहँसgने, नौटंक -तमाशा करने और स्त्रय के जुटने पर है। यह धा मक से अ धक सामा जक
(ग) धा मक कायक्रम म नकट, पर मंगलागौर के साथ पूजा जुड़ी है, इतना सच है। पर वणन का ज़ोर पूजा पर नह — नाचने,
संगीत का महत्व संक ण
दृश्य है।
co m
m.
सही ✓
e
(घ) संगीत क गीत और नृत्य के बहाने पूरा मोहल्ला एक जगह इकट्ठा होता है — संगीत सामा जक संबंध
com l as
महत्वपूण सामा जक बनाता है।
. a g
em
भू मका
l a s
ag ध्यान द जए: साक्षात्कार म आगे भी यही बात लौटती है — फाग, धमार, छठ के गीत, सोहर, बधावा। ये सब भी
m a s
.co agl
घर-मोहल्ले क स्त्रय के गाए जाने वाले गीत ह। इससे उत्तर (घ) और पक्का हो जाता है।
se m
g l a
a
4. “गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन” — इस कहावत का प्रतीकात्मक अथ क्या है? (क) नाव गाँव म नह रहती,
प्र.4
नद म बहती है। (ख) इस नश्वर संसार म सब कुछ नष्ट हो जाता है। (ग) फल्म म गीत गाने से बहुत प्र स द्ध
co m
m .
as e
मलती है। (घ) जीवन अ ायी है, पर कम अमर रहते ह।
m l
.co a g
a s em
gl सही उत्तर — (घ) जीवन अ ायी है, पर कम अमर रहते ह।
a
se m
com g l a
. a
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: लता जी स्वयं इस मराठ कहावत का अथ बता दे ती ह — “मतलब गाँव तो बह जाता है,
m
ase
ले कन जो नाम है, वह रह जाता है।” और वे इसे कस संदभ म कहती ह, यह दे खए — इससे ठ क पहले उनका
a gl
वाक्य है, “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नह । उसे तो जाना ही है, आज नह तो कल।” यानी ‘गाँव’ =
शरीर/जीवन, जो बह जाता है; ‘नाम’ = कया हुआ काम, जो रह जाता है। ठ क इसी बात को वकल्प (घ) दूसरे
शब्द म कहता है।
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 4 of 56
Page 6
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प नणय कारण
(क) नाव गाँव म नह रहती, ग़ ल त यह वकल्प जाल है। मराठ ‘नाव’ का अथ यहाँ नाम है, हद वाली ‘नाव’ (नौका) नह । यह
नद म बहती है। वकल्प कहावत का शा ब्दक भी नह , गलत अनुवाद है — जब क प्रश्न ‘प्रतीकात्मक अथ’ माँग
रहा है।
(ख) इस नश्वर संसार म सब ग़ ल त यह कहावत का आधा हस्सा उठाकर पूरा उलट दे ता है। कहावत का बल तो इस पर है क सब
कुछ नष्ट हो जाता है। कुछ नष्ट नह होता — नाम बचा रहता है। इसी लए लता जी को “कोई अफसोस नह होता।”
(ग) फल्म म गीत गाने से ग़ ल त कहावत लोक क है, फल्म क नह ; और वह प्र स द्ध क नह , कम क बात कहती है। लता जी
बहुत प्र स द्ध मलती है। को इस पर गव नह क वे प्र सद्ध हुईं, ब ल्क इस पर है क “मने अपने पताजी का नाम… आगे
बढ़ाया।”
(घ) जीवन अ ायी है, सही ✓ कहावत का ठ क-ठ क प्रतीकाथ — शरीर जाता है, नाम और काम रह जाते ह।
पर कम अमर रहते ह।
प्र.5 5. कोरस म साथ गाने वाली लड़ कय के साथ लता जी के संबंध कैसे थे? (क) औपचा रक (ख) कामकाजी (ग)
आत्मीय (घ) प्र तस्पधात्मक
सही उत्तर — (ग) आत्मीय।
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: लता जी स्वयं कहती ह — “मेरा कोरस क लड़ कय के साथ बहुत अच्छा संबंध था…
वो बल्कुल मेरे घर जैसी थ । सबका ही घर म आना-जाना होता था।” इसके तीन ठोस प्रमाण पाठ म मलते ह —
(1) मीना क शाद म कोल्हापुर तक कोरस के सब लड़के-लड़ कयाँ आए और खूब गाया-नाचा; (2) स्टू डयो म
कु सयाँ कम पड़त तो वे ज़मीन पर बैठत , और लता जी भी “वह जमीन पर बैठकर उन सभी के साथ बात करती
थी” — यह बराबरी का व्यवहार है; (3) आज भी उन्ह क वता, गांधारी, कल्याणी, सुमन और रेखा के नाम याद ह,
और यह भी याद है क रेखा शाद शुदा बाल-बच्च वाली थ । नाम और घर-गृह ी तक याद रहना ही आत्मीयता
का सबसे पक्का सबूत है।
वकल्प नणय कारण
(क) औपचा रक ग़ ल त औपचा रक संबंध म दूरी और शष्टाचार भर होता है। यहाँ घर आना-जाना और शाद म शरीक होना है।
(ख) कामकाजी ग़ ल त य द संबंध केवल काम का होता तो वह स्टू डयो के भीतर ही खत्म हो जाता। लता जी कहती ह — “उन
सबने बहुत बाद तक संपक बनाया हुआ था।”
(ग) आत्मीय सही ✓ “वो बल्कुल मेरे घर जैसी थ ” — यह वाक्य ही उत्तर है।
(घ) ग़ ल त कह होड़ या ईष्या का संकेत नह । लता जी उनक आवाज़ क प्रशंसा करती ह — “कल्याणी क भी
प्र तस्पधात्मक आवाज़ सुंदर थी।”
Page 5 of 56
Page 7
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
प्र.6 6. लता मंगेशकर के अनुसार बाबा ह रदास और तानसेन क कथाओं से क्या नष्कष नकाला जा सकता है? (क)
संगीत ारा द पक जलाए जा सकते ह। (ख) मेघराग गाने से वषा होने लगती है। (ग) सुर म वाद्य बजाने से तार
टू ट जाते ह। (घ) संगीत म अप र मत श क्त होती है।
सही उत्तर — (घ) संगीत म अप र मत श क्त होती है।
यह उत्तर क्य उपयुक्त है: प्रश्न म मुख्य शब्द है ‘लता मंगेशकर के अनुसार’ — यानी उत्तर वही होगा जो उन्ह ने
कहा। उनका कथन दो हस्स म है। पहले वे कवदं ती को तथ्य मानने से इनकार करती ह — “परंतु यह न त ही
हुआ होगा, यह कम से कम म नह कह सकती क्य क ऐसा मेरा कोई अनुभव नह है।” फर वे अपना नष्कष दे ती ह
— “हालाँ क म यह मानती ँ क संगीत म वह असीम श क्त है क कुछ अप्रत्या शत वह जरूर रच दे ता है।”
‘असीम’ का ही पयाय ‘अप र मत’ है। इसी को वे अली अकबर खाँ के उदाहरण से पुष्ट करती ह और अंत म कहती
ह — “हो सकता है मयाँ तानसेन से कोई ऐसा सच्चा सुर जरूर लगा होगा…”
वकल्प नणय कारण
(क) संगीत ारा द पक ग़ ल त यह जनश्रु त का कथन है, लता जी का नष्कष नह । वे इसे “ऐसा हम आदर म मान लेते ह”
जलाए जा सकते ह। कहकर श्रद्धा तक सी मत रखती ह।
(ख) मेघराग गाने से वषा ग़ ल त यह भी ताना-रीरी से जुड़ी कवदं ती है, जसे प्रश्नकता ने ही सामने रखा था।
होने लगती है।
(ग) सुर म वाद्य बजाने से आधा यह उदाहरण है, नष्कष नह । अली अकबर खाँ का वाक्य — “बहन, जब बहुत सुर म तार
तार टू ट जाते ह। सच लगता है, तो टू ट जाता है” — उस बड़े नष्कष तक पहुँचने क सीढ़ है, मं ज़ल नह ।
(घ) संगीत म अप र मत सही ✓ लता जी का अपना वाक्य — “संगीत म वह असीम श क्त है क कुछ अप्रत्या शत वह जरूर रच
श क्त होती है। दे ता है।”
तक क बात: ‘उदाहरण’ और ‘ नष्कष’ म अंतर करना इस प्रश्न क असली परीक्षा है। उदाहरण एक घटना है;
नष्कष वह सामान्य सत्य है जो अनेक घटनाओं से नकलता है। वकल्प (क), (ख), (ग) तीन घटनाएँ ह — केवल
(घ) सामान्य सत्य है।
प्र.7 7. पूरे साक्षात्कार म लता मंगेशकर क जो छ व बनती है, वह मुख्यतः कैसी है? (क) सादगी, समपण और
आत्मसम्मान क (ख) प्र स द्ध, प रवार को सम पत और आत्ममुग्ध (ग) कठोर सद्धांतवाद और व्यावहा रक
व्य क्त (घ) आधु नकता वरोधी रू ढ़वाद वचार वाली
सही उत्तर — (क) सादगी, समपण और आत्मसम्मान क ।
Page 6 of 56
Page 8
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
छ व का साक्षात्कार से प्रमाण
पक्ष
सादगी “हम आज जहाँ रहते ह, वह भले ही इतना छोटा-सा घर है, पर उसम हम लोग बहुत खुश ह।” रेकॉ डग म कोरस क
लड़ कय के साथ ज़मीन पर बैठ जाना। रंग से परहेज, सफेद साड़ी।
समपण “मुझे अपने गाने और रेकॉ डग के अलावा कसी दूसरी चीज क सुध नह रहती थी।” सुबह से रात तक रेकॉ डग; अगले दन
कतने गीत रेकॉड होने ह, बस यही चता।
आत्मसम्मान “मने कसी से यह नह कहा क आप मुझे पाँच सौ रुपये द जए…”; माँ का संस्कार — “ कसी के आगे जाकर हाथ नह
पसारना है।”
बाक़ वकल्प क्य नह :
(ख) — ‘प रवार को सम पत’ तो ठ क है, पर उसी वकल्प म ‘आत्ममुग्ध’ भी जुड़ा है, और यही उसे ग़लत बना
दे ता है। आत्ममुग्ध व्य क्त ‘अमर’ कहे जाने पर फूल जाता; लता जी टाल दे ती ह — “मेरा गाना अमर है, पर
शरीर तो अमर नह ।” यह वनम्रता है, आत्ममुग्धता नह । एक वकल्प तभी सही होता है जब उसका हर शब्द
सही हो।
(ग) — वे सद्धांत पर दृढ़ ह, पर ‘कठोर’ नह । पूरे साक्षात्कार म वे हँसती ह, चुहल करती ह, प्रश्नकता से
उलटकर प्रश्न पूछ लेती ह। दृढ़ता और कठोरता एक चीज़ नह ।
(घ) — वे आधु नकता क वरोधी कह नह दखत । ए.आर. रहमान, ज तन-ल लत और शंकर-एहसान-लॉय
क वे खुले मन से प्रशंसा करती ह — “जैसा सुंदर और स्तरीय संगीत आज के संगीतकार बना रहे ह।” यह
वकल्प पाठ के वरुद्ध जाता है।
मेरी समझ मेरे वचार — पृष्ठ 75
रचना से संवाद
रचना से सं वाद चचा
प्र.1 नीचे दए गए प्रश्न पर कक्षा म चचा क जए और उनके उत्तर ल खए— 1. “ पताजी उस समय पूछते थे, ‘समझ
गए न?’… इसके बाद वे कहते थे क ‘अ ा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो।’” यह प्रसंग पा रवा रक अनुशासन
और स्नेह के संतुलन का प्रतीक है। कैसे? (संकेत– यहाँ अनुशासन म डर है या सम्मान?)
यह प्रसंग इस लए संतुलन का प्रतीक है क इसम अनुशासन पूरा है, पर दं ड बलकुल नह । पताजी बच्च को बुलाकर सामने
खड़ा करते ह — यह अनुशासन है; कुछ कहते नह , केवल गंभीरता से दे खते ह — यह मयादा है; और अंत म स्वयं कहते ह “अच्छा
अब जाओ, बाहर जाकर खेलो” — यह स्नेह है। सज़ा वह समाप्त हो जाती है, खचती नह ।
Page 7 of 56
Page 9
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
प्रसंग का चरण पताजी क्या करते ह वह कसका संकेत है
1. बुलाना और सामने खड़ा करना “सबको बुलाकर अपने सामने खड़ा अनुशासन — गलती को अनदे खा नह कया जाता
करते थे”
2. केवल दे खना “वे बस हमको गंभीरता से दे खते थे” संयम — बात आँख से कही जाती है, हाथ या ज़बान
से नह
3. बच्च का स्वयं रोना “इतने म ही हमारा रोना शुरू हो जाता आत्म-बोध — बच्चे स्वयं समझ जाते ह, बताना नह
था” पड़ता
4. पूछना — “समझ गए न?” पु ष्ट माँगना, दोष गनाना नह सम्मान — बच्चे को समझदार मानकर बात करना
5. “अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर तुरंत मुक्त कर दे ना स्नेह — दं ड को ायी नह बनने दे ना
खेलो”
संकेत का उत्तर — यहाँ डर है या सम्मान? ऊपर से दे खने पर यह डर लगता है; लता जी स्वयं इसे “गुस्सा” कहती
ह जो “ बना कुछ कहे ही हम भाई-बहन को डरा दे ता था।” पर ध्यान द जए — यह डर पटाई का नह , पता क
नज़र गर जाने का था। जस डर क जड़ म प्रेम और आदर हो, वह भय नह , सम्मानज नत संकोच कहलाता है।
इसका प्रमाण यह है क बड़ी होकर लता जी उस प्रसंग को कड़वाहट से नह , सुख से याद करती ह —
साक्षात्कारकता ने पूछा ही यह था क कौन-सी स्मृ तयाँ “याद करना आपको सुख से भरता है।” जस अनुशासन को
बच्चा जीवन-भर सुख के साथ याद रखे, वह भय पर नह , सम्मान पर टका होता है।
आज के लए बात: यह प्रसंग बताता है क अनुशासन का अथ ऊँची आवाज़ या मार नह । जहाँ बच्चा स्वयं अपनी
गलती पहचान ले, वहाँ अनुशासन सफल हुआ; और जहाँ गलती के तुरंत बाद बच्चे को खेलने भेज दया जाए, वहाँ
स्नेह बचा रहा।
प्र.2 2. लता मंगेशकर पर अपने पताजी पं. द नानाथ मंगेशकर के व्य क्तत्व का क्या प्रभाव पड़ा? उनके कौन-कौन से
काय और व्यवहार म उनके पता का प्रभाव दखाई दे ता है?
पं. द नानाथ मंगेशकर का प्रभाव लता जी पर दो स्तर पर पड़ा — संगीत के स्तर पर और च रत्र के स्तर पर। पाठ म दूसरा प्रभाव
पहले से भी गहरा दखाई दे ता है।
Page 8 of 56
Page 10
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
पता का गुण पाठ का प्रमाण लता जी म उसका रूप
om a se
/ व्यवहार
काम म डू ब जाना.c “मेरे पताजी कमाल के आदमी थे, जन्ह मने हमेशा
l
aॉgडग के अलावा कसी दूसरी चीज
a s em अपने काम और संगीत म डू बा हुआ ही देखा।” “मुझे अपने गाने और रेक
agl
क सुध नह रहती थी।” — वही एकाग्रता, वही डू बना
स्वा भमान “अगर कोई बात तुम्ह सही लगती है, तो उसे करो और “मने कसी से यह नह कहा क आप मुझे पाँच सौ रुपये
m
.co ag
कसी के आगे झुकने क जरूरत नह है।” द जए…” — कसी से माँगा नह
emहालात म
“मने पताजी म यह बात दे खी थी कsहर
a
agl
हर हालात म सम “यह कह पाना मु श्कल होगा क मेरी प र तयाँ कभी
भाव कैसे रहना चा हए।” बहुत अच्छ या बुरी रही ह । म इन सब बात पर ध्यान नह
दे ती थी।”
co m
em.
प्रयोग करने का मराठ रंगमंच पर पहली बार कनाटक और पंजाब का नए संगीतकार — रहमान, ज तन-ल लत — के साथ भी
m l as
.co बना देना
साहस संगीत लाना; राग गाते-गाते सुर बदलकर नया राग उसी उत्साह से काम करना और उनक प्रशंसा करना
a g
se m
g l a
a क जड़
शास्त्रीय संगीत “उस दन सफ शास्त्रीय संगीत होता था”; पाँच वष क आयु म पता से पहली संगीत- शक्षा; फल्म-
एच.एम.वी. और मेगाफोन के रेकॉड संगीत म भी सुर क शुद्धता का आग्रह
om a s
em
. c agl
संस्कार और “उनका सख्त अनुशासन था”; धा मक और दे शभ क्त “बाबा ने जैसा सखाया था, उस पर हम सभी भाई-बहन ने
a s
अनुशासन क फल्म के सवा दे खने क मनाही चलने का प्रयास कया।”
agl
सबसे बड़ा प्रभाव: लता जी बार-बार पता को ‘बाबा’ कहकर याद करती ह और कहती ह — “जब म याद करती
. com
हूँ, तो लगता है क बाबा ऐसा कहते थे, बाबा ने यह कहा था, बाबा ने उस समय म इस तरह कोई नणय लया था।
m a s emकाम आने वाली
glका नाम, थोड़ा ही सही मगर,
यह सब मेरे बड़े काम आया है।” यानी पता उनके लए केवल स्मृ त नह , नणय लेते समय
. co बन गए। और उनक सबसे बड़ी संतु ष्ट भी यही है — “मने अपने पताजी
a
m
कसौट
aseआगे बढ़ाया।”
agl
se m
com g l a
m . a
e
s है या इससे कोई महत्वपूण उत्तरदा यत्व भी जुड़ा हुआ है?
3. “मने अपने पताजी का नाम, थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।” ‘नाम आगे बढ़ाने’ का लता जी के लए क्या
अथ है? क्या यह सफ प्र स द्ध a
प्र.3
a g l पाना
co m
m .
as e
लता जी के लए ‘नाम आगे बढ़ाना’ प्र स द्ध पाना नह है — यह एक उत्तरदा यत्व है, जो तीन काम एक साथ माँगता है: पता क
m l
.co g
कला को आगे ले जाना, उनके मूल्य पर चलते रहना, और उनके प रवार को सँभालना।
m a
l a se
ag
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 9 of 56
Page 11
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
‘नाम आगे बढ़ाना’ का पाठ से आधार
अथ
1. कला क परंपरा जारी पता शास्त्रीय गायक और रंगमंच के संगीतकार थे; लता जी ने वही संगीत-साधना दूसरे रूप — पाश्वगायन —
रखना म जारी रखी और सुर को कभी ढ ला नह छोड़ा।
2. मूल्य क रक्षा करना “बाबा ने जैसा सखाया था, उस पर हम सभी भाई-बहन ने चलने का प्रयास कया।” — नाम तभी बढ़ता है
जब आचरण उसे नीचा न करे।
3. प रवार का पता के नधन के बाद तेरह वष क आयु म माँ और छोटे भाई-बहन का भार अपने कंध पर लेना — “ कसी
उत्तरदा यत्व उठाना तरह बस मुझे अपने प रवार को दे खना है।”
4. स्वा भमान बनाए “ कसी के आगे जाकर हाथ नह पसारना है।” — बुरे दन म भी नाम पर आँच न आने दे ना।
रखना
यह प्र स द्ध क्य नह है: ध्यान द जए क यह वाक्य उन्ह ने कहाँ कहा — ठ क उस जगह जहाँ वे मृत्यु और
नश्वरता क बात कर रही ह और कहावत सुना रही ह, ‘गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’। जस क्षण उन्ह ‘अमर’
कहा गया, उस क्षण उन्ह ने अपने लए कुछ नह माँगा; उनक संतु ष्ट यह रही क पता का नाम बढ़ा। साथ ही
‘थोड़ा ही सही मगर’ जैसे शब्द वनम्रता के ह — प्र स द्ध का दावा करने वाला व्य क्त ऐसे नह बोलता। इस लए यहाँ
नाम का अथ ख्या त नह , प्र तष्ठा और साख है — वह पूँजी जो पीढ़ -दर-पीढ़ सँभालकर आगे बढ़ानी पड़ती है।
सो चए: प्र स द्ध व्य क्त के जीवन-भर क होती है और उसके साथ ही ढल जाती है; नाम (प्र तष्ठा) कम से बनता है
और कम के कारण बाद तक रहता है। इसी अंतर को कहावत ‘गाँव बह जाता है, नाम रह जाता है’ पकड़ती है।
प्र.4 4. कसी भी काय को पूरा करने म सहयो गय क भी महत्वपूण भू मका रहती है। साक्षात्कार के आधार पर
बताइए क लता जी के अपने सहयो गय के साथ संबंध कैसे थे?
लता जी के अपने सहयो गय से संबंध आत्मीय, आदरपूण और बराबरी के थे। वे कसी को अपने से छोटा नह मानत — न
कोरस क लड़ कय को, न वादक को — और अपने से बड़ को गुरुजन क तरह आदर दे ती ह।
Page 10 of 56
Page 12
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
सहयोगी संबंध कैसा पाठ का प्रमाण
कोरस गाने वाली लड़ कयाँ घर जैसा “वो बल्कुल मेरे घर जैसी थ । सबका ही घर म आना-जाना होता था।” स्टू डयो म
अपनापन, कु सयाँ कम पड़ने पर वे ज़मीन पर बैठत और “अकसर म भी रेकॉ डग म आकर
बराबरी वह जमीन पर बैठकर उन सभी के साथ बात करती थी।” मीना क शाद म
कोल्हापुर तक सब आए।
व रष्ठ संगीतकार (नौशाद, श्रद्धा और स्नेह द वाली के दन तड़के पाँच बजे नहा-धोकर सबके घर मठाई पहुँचाना; नौशाद
अ नल वश्वास, रोशनलाल, — शष्य जैसा साहब से कहना — “आप आशीवाद द जए क आगे भी जीवन म हर द वाली के
मदन मोहन, बमन दादा) भाव साथ म और मधुर से मधुर गीत गा सकूँ।”
सह-गायक (मुकेश, कशोर घरेलू आत्मीयता वे मुकेश जी को “मुकेश भैया” कहती ह — संबोधन ही रश्ते क गरमाहट बता दे ता
कुमार) है।
वादक कलाकार (उस्ताद आदर और कंसट म सबसे आगे बैठकर सुनना, फर ग्रीन रूम म जाकर मलना और उनक बात
अली अकबर खाँ) शष्य-भाव को “आज तक मुझे भूलती नह ” कहकर सँजोए रखना। वे उन्ह “अली अकबर
भाई” कहती ह और वे उन्ह “बहन”।
नए संगीतकार (रहमान, खुलापन, प्रशंसा, “जैसा सुंदर और स्तरीय संगीत आज के संगीतकार बना रहे ह…” — पुरानी पीढ़
ज तन-ल लत, शंकर-एहसान- कोई ईष्या नह क गा यका नई पीढ़ को खुले मन से सराहती है।
लॉय)
नष्कष: लता जी संगीत को अकेले का काम नह , मलकर बनने वाली रचना मानती ह। इसी लए नौशाद साहब क
वह बात उन्ह याद रह गई — “हम सारे संगीतकार को मलकर तो तुम्ह मठाई खलानी चा हए, जो तुमने हमारी
धुन म इतनी मठास घोली है।” धुन संगीतकार क , आवाज़ गा यका क , संगत वादक क और पृष्ठभू म कोरस क
— गीत तभी पूरा होता है। यही कारण है क इतनी बड़ी गा यका होकर भी वे कसी सहयोगी को नाम से भूली नह ।
साक्षात्कार से उभरता व्य क्तत्व/उभरती छ व — पृष्ठ 76
रचना से संवाद
रचना से सं वाद शब्द-चयन
प्र.1 साक्षात्कार से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे द गई ह। इन पं क्तय से लता मंगेशकर के व्य क्तत्व के कौन-कौन से
गुण या वशेषताएँ उभरकर सामने आती ह? चुनकर ल खए— [दृढ़ता, कृतज्ञता, दाश नकता, समपण,
उत्तरदा यत्व, स्पष्टता, एकाग्रता, साधना, स्पष्टवा दता, वनम्रता, कठोरता, सरलता, आत्म वश्वास, उत्सव प्रयता,
श्रद्धा, मानवता, अमरता, घमंड, स्वा भमान] — 1. “मुझे अपने गाने और रेकॉ डग के अलावा कसी दूसरी चीज
क सुध नह रहती थी।”
इस पं क्त से उभरने वाले गुण — एकाग्रता, समपण, साधना (और इनके साथ उत्तरदा यत्व भी)।
Page 11 of 56
Page 13
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
गुण पं क्त म वह कहाँ दखता है
एकागता “ कसी दूसरी चीज क सुध नह रहती थी” — ध्यान एक ही बदु पर टका है, चार ओर से हटकर।
समपण पूरा दन, पूरी श क्त और पूरा मन एक ही काम को स प दे ना।
साधना यह एक दन क बात नह — “सुबह से रात तक” वष तक चलने वाला अभ्यास। लगातार कया गया प रश्रम ही साधना
कहलाता है।
उत्तरदा यत्व इसी अनुच्छेद म आगे कारण भी है — “हमेशा यही बात दमाग म घूमती थी क कसी तरह बस मुझे अपने प रवार को दे खना
है।”
तक: इस वाक्य म लता जी अपने काम क तारीफ नह कर रह , केवल अपनी दनचया बता रही ह। जो व्य क्त बना
बड़ाई कए यह कह दे क काम के सवा कुछ याद ही नह रहता था, उसके भीतर का समपण वाक्य से अपने आप
झलक जाता है। ‘सुध न रहना’ मुहावरा ही एकाग्रता क चरम अव ा का सूचक है।
प्र.2 2. “अगर कोई बात तुम्ह सही लगती है, तो उसे करो और कसी के आगे झुकने क जरूरत नह है।”
इस पं क्त से उभरने वाले गुण — दृढ़ता, स्वा भमान, स्पष्टवा दता (और आत्म वश्वास)।
गुण पं क्त म वह कहाँ दखता है
दृ ढ़ता “उसे करो” — नणय पर टके रहने का आदे श; डगमगाने क कोई गुंजाइश नह ।
स्वािभमान “ कसी के आगे झुकने क जरूरत नह है” — अपनी प्र तष्ठा को सु वधा से ऊपर रखना।
स्पष्टवािदता जो सही लगे, उसे बना लाग-लपेट कहना और करना — यही स्पष्टवा दता है।
आत्म वश्वास ‘तुम्ह सही लगती है’ — अपने ववेक पर भरोसा करना ही आत्म वश्वास क जड़ है।
ध्यान र खए — यहाँ कठोरता या घमंड नह चुनना है, यद्य प शब्द-सूची म वे रखे गए ह। न झुकने और अकड़ने म
अंतर है: झुकना न पड़े, इसके लए लता जी ने माँगा ही नह — “मने कसी से यह नह कहा क आप मुझे पाँच सौ
रुपये द जए।” यह आत्म नभरता है, अहंकार नह । यह वाक्य मूलतः पता का है, जसे लता जी ने अपना बना लया
— इस लए इसम उनक श्रद्धा भी झलकती है।
Page 12 of 56
Page 14
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 3. “आप जैसे लोग अगर यह मानते ह क म अमर ँ, तो यह मुझे मलने वाले उस प्यार जैसा ही है।”
इस पं क्त से उभरने वाले गुण — वनम्रता, कृतज्ञता (और सरलता)।
गुण पं क्त म वह कहाँ दखता है
िवनम ता ‘अमर’ कहे जाने पर वे उसे स्वीकार नह करत , ‘आप जैसे लोग अगर मानते ह’ कहकर श्रेय सुनने वाल को लौटा दे ती ह।
कृ तज्ञ ता वे इस प्रशंसा को उपल ब्ध नह , प्यार मानती ह — “जो दु नया ने मुझे दया है।” इससे पहले भी वे कह चुक ह, “ जतना प्रेम मुझे
मला है, शायद गाकर उतना आभार म… जता नह पाई हूँ।”
सरलता इतनी बड़ी बात का उत्तर सीधे-सादे , रोज़मरा के शब्द म दया गया है।
‘घमंड’ और ‘अमरता’ क्य नह : शब्द-सूची म ये दोन जाल ह। य द लता जी घमंडी होत तो वे ‘हाँ, म अमर हूँ’
कह दे त । ‘अमरता’ भी उनका गुण नह — वह दूसर क द हुई उपा ध है, जसे वे स्वयं अगले ही वाक्य म सी मत
कर दे ती ह — “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नह ।” यही अंतर वनम्रता को घमंड से अलग करता है।
प्र.4 4. “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नह ।”
इस पं क्त से उभरने वाले गुण — दाश नकता, स्पष्टता, सरलता।
गुण पं क्त म वह कहाँ दखता है
दाशिनकता जीवन और मृत्यु, नश्वर और अनश्वर का भेद एक वाक्य म कर दे ना। वे इसे मराठ कहावत ‘गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’ से
जोड़ भी दे ती ह।
स्पष्टता कोई गोल-मोल बात नह — ‘गाना अमर’, ‘शरीर अमर नह ’; दो टू क वभाजन।
सरलता इतना गहरा वचार बना कसी भारी शब्द के, आम बोलचाल म।
वाक्य का शल्प: यह वाक्य वरोध पर टका है — ‘अमर है’ के सामने ‘अमर नह ’। पहले आधे म कला रखी है,
दूसरे म दे ह; और बीच म ‘पर’ आकर दोन को तौल दे ता है। इसी संतुलन से वह भाव नकलता है जसे वे आगे
कहती ह — “इस बात पर मुझे कोई अफसोस नह होता। वह तो होकर रहेगा।”
चार पं क्तय क एक साथ ता लका —
Page 13 of 56
Page 15
ase
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
क्र. पं क्त उभरते गुण
m as e
1
.co
“मुझे अपने गाने और रेकॉ डग के अलावा कसी दूसरी चीज क सुध नह रहती थी।”
a g l
एकागता, समपण, साधना, उ त्त रदाियत्व
a s em कोई बात तुम्ह सही लगती है, तो उसे करो और कसी के आगे झुकने क जरूरत
gl नह है।”
2 “अगर दृ ढ़ता, स्वािभमान, स्पष्टवािदता,
a आ त्मिवश्वास
m
.co ag
3 “आप जैसे लोग अगर यह मानते ह क म अमर हूँ…” िवनम ता, कृ तज्ञ ता, सरलता
a sem
agl
4 “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नह ।” दाशिनकता, स्पष्टता, सरलता
बचे हुए शब्द कहाँ लगगे: श्रद्धा और उत्सव प्रयता इन चार पं क्तय म नह , पर पाठ म और जगह मलती ह —
co m
e m.
द वाली पर संगीतकार के घर मठाई ले जाना (श्रद्धा + उत्सव प्रयता), गु ड़ पड़वा और मंगलागौर का उत्साह से
c o m g l as
वणन (उत्सव प्रयता), अंत क प्राथना “हर एक कलाकार और नेक इंसान के ऊपर भी रखना” (मानवता)। केवल
m . घमंड और अमरता ऐसे शब्द ह जो लता जी के व्य क्तत्व पर कह नह बैaठते।
s e
कठोरता,
a gla
m a s
मेरे प्रश्न — पृष्ठ 76 और 77
m.co agl
l a se
g
रचना से संवाद
रचना से सं वाद प्रश्न- नमाण a
co m
m .
प्र.1
as e
नीचे दए गए वाक्य को प ढ़ए— “संगीत म असीम श क्त और अप्रत्या शत रचने क क्षमता होती है।” इस वाक्य
m
.co a g l
के आधार पर अनेक प्रश्न बनाए जा सकते ह, जैसे– 1. लता मंगेशकर ने संगीत के वषय म क्या कहा?
a s em
agl उत्तर
लता मंगेशकर ने कहा क संगीत म असीम श क्त है और वह कुछ अप्रत्या शत अवश्य रच दे ता है। उनके अपने शब्द ह —
se m
com g l a
. a
“हालाँ क म यह मानती हूँ क संगीत म वह असीम श क्त है क कुछ अप्रत्या शत वह जरूर रच दे ता है, जसका अनुभव भी कई बार
m
ase
हम हुआ है।”
a gl
वे यह भी जोड़ती ह क तानसेन या ह रदास से जुड़ी चमत्कार-कथाओं को वे तथ्य के रूप म प्रमा णत नह कर सकत , क्य क वैसा
उनका अपना अनुभव नह है; पर संगीत क श क्त पर उन्ह संदेह नह । अपने पता पं. द नानाथ मंगेशकर को सुनते हुए भी उन्ह ने
कई बार कुछ अप्रत्या शत अनुभव कया था।
co m
m .
m as e
.co a g l
ध्यान द जए: यह पहला उदाहरण-प्रश्न सबसे खुला है — “क्या कहा?” इस लए इसका उत्तर पूरे प्रसंग का सार
a s em होगा। आगे के प्रश्न उत्तरोत्तर संकरे होते जाते ह। एक ही उत्तर से बने प्रश्न क यही खूबी है — प्रश्न का घेरा बदलता
agl है, उत्तर क जड़ वही रहती है।
.c
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 14 of 56
Page 16
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 2. लता मंगेशकर ने संगीत क क्या वशेषताएँ बताई ह?
लता मंगेशकर के अनुसार संगीत क मुख्य वशेषताएँ ये ह —
उसक श क्त असीम है — “संगीत म वह असीम श क्त है”; उसक कोई सीमा नह आँक जा सकती।
वह अप्रत्या शत रच दे ता है — जो सोचा न गया हो, वह घ टत हो जाता है।
वह स े सुर से जुड़ा है — “जब बहुत सुर म तार लगता है, तो टू ट जाता है”; शुद्ध स्वर का आघात तार तक नह सह पाता।
लता जी का नष्कष — “संगीत क सीमा इतनी अनंत है क तार भी शुद्ध स्वर के आघात को सह नह पाता।”
वह भाव और आत्मा से नकलता है — “उनक कला म कोई सच्चा सुर या आत्मा क आवाज़ लगी होगी।”
वह समाज को जोड़ता है — मंगलागौर, फाग, धमार, सोहर, बधावा, छठ के गीत — संगीत घर-मोहल्ले का साझा काम है।
प्र.3 3. लता मंगेशकर ने संगीत क क्षमता का आकलन करते हुए क्या कहा?
संगीत क क्षमता का आकलन करते हुए लता मंगेशकर ने कहा क संगीत क सीमा अनंत है — “इस प्रसंग से मुझे यह लगता है
क संगीत क सीमा इतनी अनंत है क तार भी शुद्ध स्वर के आघात को सह नह पाता, टू टकर अलग हो जाता है।”
पर उनका आकलन संतु लत है, अंध वश्वासी नह । वे दो बात साथ-साथ रखती ह —
वे क्या नह मानत वे क्या मानती ह
“यह न त ही हुआ होगा, यह कम से कम म नह कह “संगीत म वह असीम श क्त है क कुछ अप्रत्या शत वह जरूर रच दे ता है।”
सकती क्य क ऐसा मेरा कोई अनुभव नह है।”
द पक जल उठने या वषा हो जाने को वे प्रमा णत तथ्य अंत म अनुभव के बल पर कहती ह — “हो सकता है मयाँ तानसेन से कोई ऐसा
नह कहत — “ऐसा हम आदर म मान लेते ह।” सच्चा सुर जरूर लगा होगा क बा रश हो गई या द पक जल उठे !”
यही उनका आकलन-कौशल है: वे कवदं ती को न तो हँसी म उड़ाती ह, न आँख मूँदकर मान लेती ह। वे उसे अपने
अनुभव क कसौट पर रखती ह — और चूँ क सरोद का तार टू टता उन्ह ने स्वयं दे खा है, इस लए वे इतना कहने का
साहस करती ह क ऐसा कुछ संभव हो सकता है।
प्र.4 4. उस्ताद अली अकबर खाँ और पं डत र वशंकर के कंसट म हुई घटना से संगीत के बारे म क्या पता चलता है?
उस घटना से पता चलता है क स े सुर म इतनी श क्त होती है क वाद्य का तार तक उसका आघात नह सह पाता — यानी
संगीत केवल सुनने क वस्तु नह , एक जीवंत श क्त है।
घटना क्रम म —
Page 15 of 56
Page 17
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
1. लता जी मुंबई म उस्ताद अली अकबर खाँ और पं डत र वशंकर का कंसट सुनने श्रोताओं क सबसे अगली पं क्त म बैठ थ ।
2. अली अकबर खाँ “अत्यंत मंत्रमुग्ध कस्म का वादन” कर रहे थे। लगभग पचास-साठ मनट बाद अचानक सरोद का एक तार टू ट
गया और बजाना बंद करना पड़ा।
3. ग्रीन रूम म मलने पर लता जी ने कहा — “काश क यह तार न टू टता और हम पूरी तरह राग को अंत तक सुन पाते।”
4. उस्ताद जी ने उत्तर दया — “बहन, जब बहुत सुर म तार लगता है, तो टू ट जाता है।”
इसका अथ: तार तभी टू टता है जब उसे उसक पूरी सामथ्य तक कसा जाए। संगीत म यही ‘कसाव’ है — पूण
तन्मयता, पूण शुद्धता। लता जी क व्याख्या यह है क “उन्ह ने अपने सुर को इतने प वत्र भाव से इतना डू बकर
लगाया क सरोद का तार टू ट गया।” इसी लए इस घटना ने उनके भीतर तानसेन वाली कथा पर वश्वास करने का
मन जगा दया — साधारण घटना से असाधारण नष्कष तक पहुँचने का यही रास्ता है।
चार प्रश्न का एक ही उत्तर: ऊपर के चार प्रश्न अलग-अलग ढं ग से पूछे गए ह, पर सबक जड़ एक ही वाक्य म है
— “संगीत म असीम श क्त और अप्रत्या शत रचने क क्षमता होती है।” यही पुस्तक का संकेत है क अनेक प्रश्न
का एक ही उत्तर हो सकता है।
प्र.5 अब नीचे दए गए उत्तर से अ धक से अ धक प्रश्न बनाइए (कम से कम दो)— 1. उत्तर : ‘मंगलागौर’ जैसे लोक
पव म स्त्रय के बीच गीत, नृत्य और सौहाद का भाव झलकता था।
इस उत्तर से कम से कम दो प्रश्न बनाने थे; यहाँ आठ दए जा रहे ह। प्रश्न बनाते समय ध्यान र खए क उत्तर के हर मुख्य शब्द —
मंगलागौर, लोक पव, स्त्रयाँ, गीत-नृत्य, सौहाद — से एक अलग प्रश्न नकल सकता है।
क्र. प्रश्न कस शब्द से बना
1 मंगलागौर क्या है और वह कस अवसर पर मनाया जाता है? ‘मंगलागौर’
2 मंगलागौर के अवसर पर स्त्रयाँ क्या-क्या करती थ ? ‘गीत, नृत्य’
3 लोक पव म स्त्रय के बीच कैसा भाव झलकता था? ‘सौहाद’
4 महाराष्ट्र के कस उत्सव म स्त्रय क सामू हक भागीदारी दखाई दे ती है? ‘लोक पव’ + क्षेत्र
5 लता मंगेशकर ने मंगलागौर का वणन कन शब्द म कया है? वक्ता क ओर से
6 ‘ बल्कुल ठे ठ गँवई अंदाज’ कस उत्सव के लए कहा गया है और क्य ? पाठ क पं क्त से
7 मंगलागौर से भारतीय समाज क कौन-सी परंपरा उजागर होती है? नष्कष क ओर
8 संगीत क सामा जक भू मका का एक उदाहरण पाठ से दे कर समझाइए। सामान्य से वशेष क ओर
Page 16 of 56
Page 18
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
प्रश्न बनाने का सूत्र: उत्तर के कसी एक शब्द को हटा द जए और उसक जगह क्या / कौन / कब / कहाँ / कैसे /
क्य रख द जए — प्रश्न बन जाएगा। जतने शब्द, उतने प्रश्न।
प्र.6 2. उत्तर : लता जी का मानना था क तकनीक प्रग त के बावजूद पुराने संगीतकार क सादगी और गहराई
अ तीय थी।
इस उत्तर से बनने वाले प्रश्न —
क्र. प्रश्न कस शब्द से
बना
1 पुराने संगीतकार के वषय म लता जी का क्या मानना था? ‘पुराने संगीतकार’
2 तकनीक प्रग त के बावजूद लता जी कस बात को अ तीय मानती थ ? ‘तकनीक प्रग त’
3 पुराने संगीतकार क कौन-सी वशेषताएँ लता जी को वशेष लगती थ ? ‘सादगी और
गहराई’
4 लता जी के अनुसार आज के और पहले के संगीत म क्या अंतर है? तुलना क ओर
5 ‘आएगा आने वाला’ क रेकॉ डग कन क ठनाइय म हुई थी? उदाहरण क ओर
6 अ नल वश्वास, श्याम सुंदर, स ाद हुसैन, स लल चौधरी और सी. रामचंद्र ने गीत म प्रभाव पैदा करने के नाम क ओर
लए क्या कया था?
इस उत्तर का पाठ म आधार: लता जी बताती ह क “आएगा आने वाला” म उन्ह “हॉल म बहुत दूर से चलकर दबे
पाँव रेकॉ डग वाले माईक तक आना पड़ता था” — क्य क तब तकनीक वक सत नह थी। पुराने संगीतकार ने
“कुछ नए तरीके और अजीबोगरीब टोटके आजमाए थे, जनसे गीत म वह प्रभाव पैदा हो सका।” और वे यह भी
जोड़ती ह क य द उन्ह लोग को आज क तकनीक मलती, “तब तो कमाल ही हो गया होता।” यानी उनक दृ ष्ट
तुलनात्मक है, पक्षपाती नह — वे न पुराने को घटाती ह, न नए को।
मेरे अनुभव मेरे वचार — पृष्ठ 77
Page 17 of 56
Page 19
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
रचना से संवाद
रचना से सं वाद अपने अनु भ व से
प्र.1 अपने अनुभव के आधार पर नम्न ल खत प्रश्न के उत्तर द जए— 1. “अगर कोई बात तुम्ह सही लगती है, तो
उसे करो और कसी के आगे झुकने क जरूरत नह है।” क्या आप कसी ऐसी त से गुजरे ह जब आपको
कसी सही बात पर अकेले खड़ा होना पड़ा हो? कब और क्य ?
यह प्रश्न आपके अपने अनुभव का है, इस लए उत्तर आपका अपना ही होगा। एक अच्छे उत्तर म तीन बात अवश्य होनी चा हए —
(1) घटना कब और कहाँ हुई, (2) आपने कौन-सा पक्ष लया और सामने कौन-कौन थे, (3) उसका प रणाम क्या रहा और आपने
उससे क्या सीखा। घटना छोट हो तो भी चलेगी — सही बात पर खड़ा होना बड़ी घटना क माँग नह करता।
नमूना उत्तर: पछले वष हमारी कक्षा म एक अधवा षक परीक्षा के बाद कुछ सा थय ने तय कया क वे शक्षक से मलकर कहगे
क प्रश्नपत्र पाठ्यक्रम से बाहर था, जब क वास्तव म वह पूरा पाठ्यक्रम के भीतर से ही था। उन्ह ने मुझसे भी साथ चलने को कहा।
मुझे यह बात सही नह लगी, क्य क हम अपनी कम तैयारी का दोष शक्षक पर डाल रहे थे। मने साफ मना कर दया। दो-तीन दन
तक मत्र ने मुझसे बात नह क और मुझे बहुत अकेला लगा। फर जब शक्षक ने कक्षा म हर प्रश्न का पाठ-संदभ दखाया, तब
सबको अपनी बात का खोखलापन समझ आया। मुझसे कसी ने कुछ कहा तो नह , पर उस दन के बाद मुझे लगा क अकेले रह
जाना उतना क ठन नह होता, जतना अपनी नज़र म गर जाना। मने यह सीखा क सही बात पर खड़े होते समय आवाज़ ऊँची करने
क ज़रूरत नह होती — शांत रहकर मना कर दे ना भी काफ होता है।
लखते समय ध्यान र खए: ऐसा उदाहरण चु नए जसम आपको कुछ खोना पड़ा हो — मत्र क नाराज़गी, कसी
क डाँट, या अकेलापन। जहाँ कुछ खोना न पड़े, वहाँ ‘अकेले खड़े होने’ क परीक्षा ही नह होती।
प्र.2 2. “बाबा ने जैसा सखाया था, उस पर हम सभी भाई-बहन ने चलने का प्रयास कया।” आपके प रवार म भी
कोई ऐसी सीख या नयम अवश्य ह गे जनका पालन आप कसी के याद दलाए बना स्वत: करते ह गे, उनके
वषय म बताइए।
ऐसी सीख प्रायः छोट और रोज़ क होती ह, इसी लए वे आदत बन जाती ह। उत्तर लखते समय दो-तीन नयम गनाइए, हर नयम
के साथ यह भी बताइए क वह घर म कससे आया और आप उसे क्य मानते ह।
नमूना उत्तर: हमारे घर म कुछ बात कभी लखी नह गईं, फर भी सब मानते ह —
थाली म जूठन नह छोड़ना। दाद कहती ह क अन्न कसी के पसीने से आया है। अब म उतना ही परोसता/परोसती हूँ जतना
खा सकूँ।
घर आए कसी भी व्य क्त को — डा कया हो या मस्त्री — पानी के लए पूछना। यह माँ से आया है।
बड़ के सामने से गुज़रते समय ‘अनुम त’ लेकर नकलना और नाम के साथ आदर लगाना।
कसी से उधार न माँगना; जो अपने पास है, उसी म काम चलाना। यह नयम पताजी का है और लता जी वाली बात से
बलकुल मलता है — “ कसी के आगे जाकर हाथ नह पसारना है।”
पढ़ाई क मेज़ रात को समेटकर सोना — नानी कहती थ क बखरी मेज़ बखरे मन क नशानी है।
Page 18 of 56
Page 20
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
ये सीख बना याद दलाए क्य नभ जाती ह? क्य क इन्ह कहकर नह , करके सखाया गया। लता जी के घर म
m a s emलया। जो सीख
gl
भी यही हुआ — पता ने भाषण नह दया, बस स्वयं वैसा जीवन जया, और बच्च ने दे खकर सीख
दे खकर आती.cहैo, वह याद दलाने क मोहताज नह रहती।
em a
a s
agl
co m
ag
3. “पहले दन गु ड़ बाँधने के बाद नौ दन तक उत्सव मनाया जाता है।” आप भी अपने घर म कसी पारंप रक
.
प्र.3
e m
as
पव को वशेष तरीके से मनाते ह गे। उसका वणन क जए।
a g l
वणन लखते समय इस क्रम से च लए — पव का नाम और त थ → तैयारी → उस दन क व ध → वशेष पकवान →
com
e m.
as
कौन-कौन जुटता है → उस परंपरा के पीछे क कथा या कारण। लता जी ने गु ड़ पड़वा का वणन ठ क इसी क्रम म कया है,
m l
.co g
इस लए उनका उत्तर एक अच्छा नमूना है।
m a
a se
नमूना उत्तर (छठ पूजा): हमारे घर म सबसे बड़ा पव छठ है, जो का तक मास म द वाली के छह दन बाद पड़ता है और चार दन
g l
a दूसरे दन ‘खरना’ पर दन-भर उपवास रहता है और शाम को गुड़ क खीर और रोट का प्रसाद बनता है; यह प्रसाद बलकुल शां त
चलता है। पहले दन ‘नहाय-खाय’ होता है — घर क सफाई के बाद माँ अरवा चावल, चने क दाल और लौक क सब्ज़ी बनाती ह।
m a s
.co agl
म बनाया जाता है, कोई ऊँची आवाज़ म नह बोलता। तीसरे दन बाँस के सूप म ठे कुआ, गन्ना, ना रयल, केला और मूली सजाकर
se m
सब लोग नद -घाट जाते ह और डू बते सूय को अ य दे ते ह। चौथे दन तड़के, अँधेरे म ही, घाट पर द ये जलते ह और उगते सूय को
g l a
अ य दे कर व्रत खोला जाता है। पूरे मोहल्ले क स्त्रयाँ एक साथ छठ के गीत गाती ह और घाट तक कोई कसी को जूता-चप्पल
पहनकर नह जाने दे ता। a
. com
इसम वशेष क्या है: छठ संसार के उन थोड़े-से पव म है जनम डू बते सूय को भी उतना ही आदर दया जाता है
m a s eृ mत का अंग है। साथ ही इस
gl जक जुड़ाव है जैसा लता जी ने
जतना उगते सूय को। इससे यह सीख मलती है क ढलते हुए का सम्मान करना भी संस्क
पव .मco
m a
कोई पुरो हत नह होता — घाट पर सब बराबर होते ह। यह ठ क वैसा ही सामा
aseमंगलागौर म दे खा।
agl
se m
com
अपने पव पर लखते समय: उस एक छोट बात को ज़रूर ल खए जो सफ आपके घर म होती है — जैसे लता
g l a
m . a
ase
जी के घर क ‘गुड़वड़’। ऐसा ही ब्योरा वणन को सच्चा बनाता है।
agl
. c om
4. “ बल्कुल ठे ठ गँवई अंदाज म यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है, मगर आ हस्ता-आ हस्ता वह भी अब
m से जुड़ी अनेक परंपराएँ
प्र.4
s e
comबदल la करके पता लगाइए क व भन्न
खत्म हो रहा है।” पाठ म आपने पढ़ा क लता मंगेशकर के बचपन से अब तक उत्सव
. a g
रही ह। कौन-कौन सी परंपराएँ बदल गई ह? अपने घर-प रवार म बातचीत
as em त्योहार को मनाने के तरीक म कौन-कौन से बदलाव आ रहे ह?
agl c
m .
s e
m a
. co agl
पहला भाग — पाठ के अनुसार जो परंपराएँ बदल :
e m
g l as
a
com
m .
m ase
.co
a g l Page 19 of 56
Page 21
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
परंपरा पहले अब (पाठ के अनुसार)
मंगलागौर नई बहू के आने पर पड़ोस क स्त्रयाँ जुटत , “आ हस्ता-आ हस्ता वह भी अब खत्म हो रहा है।”
गाती-नाचत , नौटं क -तमाशा-सा करत
होली घर म गुड़वड़ (हो लका क राख से खेलना) और लता जी ने होली खेलना ही बंद कर दया; “यह होली जो
रंग-पंचमी पर केसर छड़कना आजकल प्रच लत है, इसका कोई प्रभाव हमारे घर म नह था।”
कोरस क कोरस और मुख्य गायक का गाना एक साथ अस्सी के बाद कोरस पहले रेकॉड होने लगा, गायक बाद म
रेकॉ डग रेकॉड होता था आकर गाने लगे — साथ बैठने का रश्ता ही टू ट गया
मेडल पहनकर कलाकार अपने मले हुए मेडल कपड़ पर बाईं अब यह प्रचलन नह रहा
गाना ओर लगाकर बैठते थे (जैसे कुमार गंधव)
द वाली पर मठाई लता जी तड़के पाँच बजे संगीतकार के घर यह चलन उन्ह ने कुछ ही वष तक चलाया
ले जाना मठाई लेकर पहुँचत
दूसरा भाग — घर म बातचीत से पता लगाइए। दादा-दाद , नाना-नानी या मोहल्ले के कसी बुजग से तीन प्रश्न पू छए — (1)
आपके बचपन म यह त्योहार कैसे मनता था? (2) उसम क्या-क्या अब नह होता? (3) आपको सबसे ज्यादा कस बात क कमी
लगती है? उत्तर ता लका बनाकर ल खए।
नमूना उत्तर (घर से पता लगाई गई बात):
त्योहार पहले अब
द वाली म के द ये, घर म बने लड्डू-मठरी, पड़ोस म थाली भेजना बजली क ल ड़याँ, बाज़ार के डब्बाबंद उपहार, फोन पर
शुभकामना
होली टे सू के फूल से बना प्राकृ तक रंग, फाग-मंडली, घर-घर रासाय नक रंग, रकॉड कया संगीत, सोसाइट म एक जगह
जाकर गाना का आयोजन
ववाह कई दन तक स्त्रय के गीत (सोहर, बधावा, बन्ना-बन्नी), घर एक दन का आयोजन, बड और डी.जे., बाहर के रसोइए
पर ही रसोई
तीज- घर के आँगन म सामू हक आयोजन वी डयो कॉल पर प रवार का जुड़ना, बाहर रह रहे सदस्य क
त्योहार अनुप त
बदलाव के कारण और उसका दूसरा पहलू: कारण साफ़ ह — गाँव से शहर क ओर पलायन, छोटे होते घर और
प रवार, समय क कमी, बाज़ार का बढ़ता दखल और मनोरंजन के नए साधन। पर बदलाव को केवल हा न मानना
ठ क नह । कुछ बदलाव अच्छे भी ह — रंग अब सुर क्षत मलने लगे ह, पटाख का चलन घटा है, और दूर बैठे
प रजन वी डयो कॉल पर त्योहार म शा मल हो जाते ह। ध्यान इस बात का रखना चा हए क जो चीज़ त्योहार को
सामू हक बनाती थ — साथ गाना, साथ बनाना, साथ बैठना — वे न छू ट, क्य क वही तो त्योहार का प्राण ह।
साक्षात्कार क पड़ताल — पृष्ठ 77 और 78
Page 20 of 56
Page 22
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
वधा से संवाद
वधा से सं वाद साक्षात्कार क पहचान
प्र.1 1. ‘ऐसी भी बात होती ह’ एक साक्षात्कार है। साक्षात्कार म एक व्य क्त प्रश्न पूछता है और दूसरा व्य क्त उन प्रश्न
के उत्तर दे ता है। साक्षात्कार वधा के कुछ मुख्य बदु आगे दए गए ह। इस साक्षात्कार म से इन मुख्य बदुओं को
रेखां कत करने वाली पं क्तय को ढूँ ढ़कर ल खए। [साक्षात्कार के मुख्य बदु — • साक्षात्कार लेने वाले का नाम
और जसका साक्षात्कार लया गया, उसका नाम • प्रश्नोत्तर • भावनात्मक वातावरण • आमंत्रण, स्वागत और
प रचय • उत्तर दे ने क शैली का संकेत • वचार और उदाहरण • संस्मरण • समापन]
पुस्तक म यह ता लका आधी भरी है — बाएँ खाने म वधा के आठ बदु दए ह और दाएँ खाने म आपको पाठ क पं क्तयाँ भरनी ह।
पूरी भरी हुई ता लका इस प्रकार बनेगी —
Page 21 of 56
Page 23
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
साक्षात्कार का मुख्य पाठ क पं क्त / अंश वह इस बदु को कैसे रेखां कत करता है
बदु
साक्षात्कार लेने वाले शीषक के नीचे — “ऐसी भी बात होती ह (लता साक्षात्कार म हर कथन के आगे बोलने वाले का
का नाम और जसका मंगेशकर से साक्षात्कार)”; और पूरे पाठ म हर बार — नाम लखा जाता है, ता क पाठक को कसी क्षण
साक्षात्कार लया गया, “यत द्र मश्र : …” तथा “लता मंगेशकर : …” संदेह न रहे क यह कसक आवाज़ है। नाटक के
उसका नाम संवाद भी इसी तरह छपते ह।
प्रश्नोत्तर “यत द्र मश्र : पताजी से संगीत के अलावा आपने क्या- यही साक्षात्कार का आधार-ढाँचा है — एक प्रश्न,
क्या और सीखा?” एक उत्तर, और फर अगला प्रश्न। पूरा पाठ इसी
“लता मंगेशकर : सबसे ज्यादा तो स्वा भमान से जीने क जोड़ी म आगे बढ़ता है।
प्रेरणा।”
भावनात्मक वातावरण “(हँसते हुए) अरे! यह तो हम सब भाई-बहन बहुत करते कोष्ठक म दए गए ये संकेत बताते ह क उस
थे।”; “( खल खलाकर हँसती ह)”; “(हँसते हुए) बड़ा समय वातावरण कैसा था। ल खत शब्द हँसी,
मजेदार प्रश्न है आपका।”; “इस पर वे लाड़ से भरकर बोले ठहराव या भावुकता को नह पकड़ पाते, इस लए
—”; “उन्ह ने एक बड़ी मा मक बात कही, जो आज तक साक्षात्कारकता उन्ह कोष्ठक म दज करता है।
मुझे भूलती नह ।”
आमंत्रण, स्वागत और “द द , आपके संगीत क अप्र तम यात्रा पर बातचीत यह साक्षात्कार का आरं भक कथन (भू मका)
प रचय शुरू करते ह… आप अगर तैयार ह , तो म ऐसे असंख्य है। इसम तीन काम एक साथ होते ह — बात
शुभ चतक … क ओर से प्रणाम करते हुए आपसे प्रश्न करने क अनुम त माँगना, अ त थ का स्वागत
पूछना चाहूँगा…” करना और पाठक को यह बताना क यह
उत्तर — “जी, जरूर। आपका बेहद शु क्रया क आपका बातचीत क्य हो रही है।
ऐसा कुछ करने का मन है। आप पू छए, म आपके प्रश्न
का जवाब दे ने के लए तैयार हूँ।”
उत्तर दे ने क शैली का “म को शश करूँगी क जो कुछ भी मने संगीत म रहते ये वाक्य बताते ह क उत्तर कस मनोदशा से दए
संकेत हुए जाना है, उसे आपको बता सकूँ।”; “कहना जा रहे ह — बना दावे के, अनुभव के आधार
मु श्कल है इस पर क्या बोलूँ?”; “यह कह पाना मु श्कल पर, और जहाँ न पता हो वहाँ साफ़ मना करते
होगा क…”; “ऐसी कोई खास बात मुझे याद नह आती। हुए। इसी को ‘उत्तर दे ने क शैली’ कहते ह।
अलबत्ता इतना जरूर कहूँगी…”
वचार और उदाहरण वचार — “संगीत म वह असीम श क्त है क कुछ अच्छे साक्षात्कार म उत्तर दे ने वाला वचार को
अप्रत्या शत वह जरूर रच दे ता है।” हवा म नह छोड़ता — उसे कसी घट हुई घटना
उदाहरण — उस्ताद अली अकबर खाँ का सरोद का तार से बाँध दे ता है। इसी से बात पाठक के मन म
टू टना और उनका कथन “बहन, जब बहुत सुर म तार उतरती है।
लगता है, तो टू ट जाता है।”
संस्मरण (क) द वाली क सुबह साढ़े पाँच बजे नौशाद साहब के घर संस्मरण साक्षात्कार का सबसे जीवंत अंग है। ये
मठाई लेकर पहुँचना और उनका कहना — “हम सारे बीते हुए दृश्य ह, जन्ह बोलने वाला अपनी स्मृ त
संगीतकार को मलकर तो तुम्ह मठाई खलानी चा हए, से ख चकर सामने रख दे ता है — इससे व्य क्त
जो तुमने हमारी धुन म इतनी मठास घोली है।” का च रत्र आँकड़ से नह , चत्र से खुलता है।
(ख) ‘संत तुकाराम’ फल्म क नकल — त कये जमाकर
स्वग बनाना और उस पर बैठकर गाना।
(ग) कुमार गंधव को काली शेरवानी म मेडल लगाए
दे खना।
Page 22 of 56
Page 24
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
साक्षात्कार का मुख्य पाठ क पं क्त / अंश वह इस बदु को कैसे रेखां कत करता है
बदु
समापन “आज मुझे लगता है क हे प्रभु! तुमने जो भी दया, साक्षात्कार अं तम प्रश्न के उत्तर पर ही समाप्त
वह बहुत दया, दूसर से कह ज्यादा दया। अपनी नह होता; अच्छा समापन उसे एक ऊँचाई दे कर
कृपा क छाया से जैसे मुझे छाँह द है, वैसे ही हर एक छोड़ता है। यहाँ बात व्य क्तगत से उठकर सब
कलाकार और नेक इंसान के ऊपर भी रखना… यही कलाकार के लए प्राथना बन जाती है — इसी
प्राथना है।” को समापन का उठान कहते ह।
इस ता लका से क्या सीखने को मलता है: साक्षात्कार केवल ‘सवाल-जवाब’ नह है। एक अच्छे साक्षात्कार का
ढाँचा तीन हस्स का होता है — भू मका (प रचय और स्वागत), मुख्य भाग (प्रश्नोत्तर, जनम वचार, उदाहरण और
संस्मरण गुँथे रहते ह) और समापन। इनके बीच कोष्ठक म दए गए भाव-संकेत वातावरण बनाते ह। इन्ह आठ
बदुओं क मौजूदगी इस पाठ को कहानी या रेखा चत्र से अलग करके साक्षात्कार सद्ध करती है।
प्र.2 2. “म को शश करूँगी क जो कुछ भी मने संगीत म रहते हुए जाना है, उसे आपको बता सकूँ।” इस कथन से
साक्षात्कार क शैली के वषय म क्या पता चलता है— क्या यह औपचा रक संवाद है या आत्मीय बातचीत? अपने
वचार तक स हत ल खए।
यह मूलतः आत्मीय बातचीत है, जसे औपचा रक साक्षात्कार का ढाँचा भर दया गया है। ढाँचा औपचा रक है — नाम
लखकर प्रश्नोत्तर छपे ह, वषय पहले से तय ह। पर जस लहजे म बात हो रही है, वह घर क बैठक का है, मंच का नह ।
दए गए कथन से क्या पता चलता है —
“म को शश करूँगी” — यह वनम्र और अ न त वाक्यांश है। औपचा रक साक्षात्कार म उत्तर दे ने वाला अ धकारपूवक
बोलता है; यहाँ लता जी अपनी सीमा पहले ही स्वीकार कर रही ह।
“जो कुछ भी मने संगीत म रहते हुए जाना है” — वे शास्त्र या सद्धांत नह , अपना अनुभव दे ने का वचन दे रही ह। ‘संगीत म
रहते हुए’ का अथ है — संगीत को जया है, केवल सीखा नह ।
“उसे आपको बता सकूँ” — ‘आपको’ यानी सामने बैठे एक व्य क्त को, न क कसी अनजान भीड़ को। संबोधन का यह
अकेलापन ही आत्मीयता बनाता है।
Page 23 of 56
Page 25
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
आत्मीयता के प्रमाण (पाठ से) औपचा रकता के प्रमाण (पाठ से)
as e
. coध m — छपे साक्षात्कार क औपचा a g l
संबोधन ‘द द ’ — साक्षात्कारकता पहले ही वाक्य म रश्ते का नाम ले हर कथन से पहले पूरा नाम — ‘यत द्र मश्र :’, ‘लता मंगेशकर :’
e m
asम हँसी के संकेत — “(हँसते हुए)”, “( खल खलाकर हँसती
लेता है, पद या उपा का नह । रक री त।
a g l
कोष्ठक प्रश्न का सु नयो जत क्रम — पता, बचपन, संघष, संगीतकार,
ह)”। त्योहार, कोरस, परंपरा, अंत म जीवन-दशन।
. comसाक्षात्कारकता का लंबा, तैयार कया हुआ प्रश्न — जसम खेमचंद ag
em
लता जी का उलटकर प्रश्न पूछ लेना — “म आपसे प्रश्न करती हूँ क
g l aह।s
जो मेरे गाने रहमान ने बनाए… तो आपके लहाज से वह कस तरह प्रकाश, शंकर-जय कशन, हुस्नलाल-भगतराम और तीन गीत के
a
बनता?” आत्मीय बातचीत म भू मकाएँ इसी तरह पलटती नाम गनाए गए ह। यह पहले से कया गया गृहकाय है।
बोलचाल क भाषा और उदू-मराठ के घरेलू शब्द — ‘वाकया’,
co
“इसी समय वषय प रवतन करते हुए आपसे कुछ व्य क्तगत
m
e m.
‘खै रयत’, ‘अलबत्ता’, ‘गुड़वड़’, ‘तड़के’। सवाल पूछने का मन हो रहा है” — वषय बदलने से पहले अनुम त
com l as
लेना, जो औपचा रक शष्टाचार है।
. a g
m
ase
agl
अधूरे वाक्य और तीन बदु (…) — “कल नह तो परस या कसी न अंत का प्राथना-वाक्य, जो साक्षात्कार को व्यव त समापन दे ता
कसी दन…”; बातचीत ठ क ऐसे ही रुकती-चलती है। है।
m a s
.co agl
नष्कष और तक: साक्षात्कारकता ने जानबूझकर औपचा रक ढाँचा और अनौपचा रक लहजा साथ रखा है, और
a s em
यही इस साक्षात्कार क सफलता है। य द लहजा भी औपचा रक होता तो उत्तर सधे-सधाए और रटे हुए मलते —
agl उलटा हुआ: त कय का स्वग, गुड़वड़, नौशाद साहब का डर जाना, ज़मीन
पुरस्कार क सूची, गीत क संख्या। यहाँ
पर बैठकर कोरस क लड़ कय से बात — ये सब बात कोई तभी बताता है जब वह सामने वाले को अपना मान ले।
co m
.
इस लए इसे आत्मीय बातचीत कहना ही ठ क है। यही कारण है क पाठ का शीषक भी सूचनात्मक नह , बातचीत
e m
as
जैसा है — ‘ऐसी भी बात होती ह’।
m l
m .co a g
l a se
g
a आपका साक्षात्कार — पृष्ठ 78
se m
वधा से संवाद
com g l a
m . a
ase
agl
वधा से सं वाद कल्पना
“आप पू छए, म आपके प्रश्न का जवाब दे ने के लए तैयार ँ।” प्रस्तुत पाठ म वश्व-प्र सद्ध व्य क्तत्व का
m
प्र.1
साक्षात्कार दया गया है। कल्पना क जए क आप भी लता मंगेशकर के इस साक्षात्कार म उप
. co त ह। आप लता
e m
m as
जी से कौन-कौन से अलग प्रश्न पूछते और क्य ?
.co a g l
a s emउत्तर
agl
.c
पहले यह तय क जए क प्रश्न कैसा हो। एक अच्छा साक्षात्कार-प्रश्न तीन शत पूरी करता है —
s e m
m a
co agl
वह ‘हाँ/नह ’ म न नपटे । ‘क्या आपको संगीत पसंद है?’ जैसा प्रश्न बातचीत मार दे ता है।
m .
se
वह ऐसी बात पूछे जो केवल यही व्य क्त बता सकता हो — जसका उत्तर कसी पुस्तक या इंटरनेट पर पहले से न मलता
हो।
l a
g बढ़े । साक्षात्कार सूची नह , धागा होता है।
वह पछले उत्तर से जुड़करaआगे
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 24 of 56
Page 26
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर — म ये प्रश्न पूछता/पूछती:
क्र. प्रश्न क्य पूछता/पूछती
1 द द , तेरह वष क उम्र म जब पूरे घर का बोझ आप पर पाठ म तथ्य तो है (1942, 13 वष), पर उस समय उन्ह कैसा लगा
आया, तब बचपन कहाँ चला गया? क्या कभी लगा क — यह कह नह है। साक्षात्कार का काम तथ्य के पीछे का भाव
आपसे कुछ छन गया? नकालना है।
2 आपने हज़ार गीत गाए ह। कोई एक ऐसा गीत, जसे गाते हुए यह प्रश्न ‘सबसे प्रय गीत’ से बेहतर है, क्य क यह गीत नह , एक
आपक आवाज़ काँपी हो? क्षण माँगता है। ‘ऐ मेरे वतन के लोगो’ जैसा उत्तर स्वयं एक कहानी
खोल दे गा।
3 रेकॉ डग से पहले आप क्या करती थ — कोई अभ्यास, कोई कलाकार क दनचया से उसक साधना का पता चलता है। पाठ म
नयम, कोई अंध वश्वास? मेहनत क बात है, पद्ध त क नह ।
4 आपने कहा क सफ़ेद साड़ी पहनती ह और रंग से परहेज यह पछले उत्तर से जुड़कर आगे बढ़ता प्रश्न है — साक्षात्कार का
करती ह। क्या सादगी एक चुनाव है या स्वभाव? ‘धागा’ यही बनाता है।
5 जब कोई नया गायक आपसे सीखने आता है, तो आप सबसे इसका उत्तर पूरी पीढ़ के काम आएगा — वद्या थय के लए
पहले उसे क्या सुधारने को कहती ह? सबसे उपयोगी प्रश्न वही है जसका उत्तर सलाह बन जाए।
6 आपके पताजी राग गाते हुए सुर बदलकर नया राग बना दे ते यह प्रश्न पाठ के भीतर से उठाया गया है और उसे आगे ले जाता है
थे। क्या आपने भी कभी गाते-गाते ऐसा कुछ कया जो पहले —अ ा साक्षात्कारकता वही होता है जो ध्यान से सुनता है।
से तय नह था?
7 मंगलागौर जैसे उत्सव खत्म हो रहे ह। इन लोकगीत को यह प्रश्न बात को अतीत से उठाकर आज और आगे क ओर
बचाने के लए हम वद्याथ क्या कर सकते ह? मोड़ता है।
8 ‘नाम रह जाता है’ — तो आप चाहती ह क सौ साल बाद यह समापन-प्रश्न है। साक्षात्कार का अं तम प्रश्न ऐसा हो जो व्य क्त
आपका नाम कस बात के लए लया जाए? को अपने पूरे जीवन पर एक बार पीछे मुड़कर दे खने का अवसर दे ।
ये प्रश्न न पू छए: ‘आपको कतने पुरस्कार मले?’ (उत्तर पहले से उपलब्ध है), ‘आप कतना कमाती ह?’ ( नजी
और अ शष्ट), ‘आपको कौन-सा गायक बुरा लगता है?’ ( कसी क नदा कराने वाला प्रश्न)। साक्षात्कार म सम्मान
पहली शत है — यत द्र मश्र ने भी व्य क्तगत प्रश्न पूछने से पहले अनुम त ली थी।
वषय से संवाद — पृष्ठ 78 और 79
Page 25 of 56
Page 27
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
वषय से संवाद
वषय से सं वाद कल्पना और अनु भ व
प्र.1 1. “एक स्टू डयो से दूसरे और तीसरे स्टू डयो के चक्कर म ही पूरा दन बीत जाता था।” सन् 1942 म अपने पता
क मृत्यु के बाद लता मंगेशकर ने अकेले अपनी माँ, छोटे भाई-बहन क दे खभाल क और अपने घर को सँभाला।
उस समय उनक आयु मात्र 13 वष थी। तब म हलाओं का फल्म म काम करना अ ा नह माना जाता था। उस
समय सुबह से रात तक एक स्टू डयो से दूसरे स्टू डयो भागते हुए लता जी के एक दन क कल्पना क जए। इस
भागदौड़ म वे कन- कन चुनौ तय का सामना करती ह गी? (संकेत– भोजन, यात्रा-भाड़ा, सुरक्षा, थकान आ द)
तेरह-चौदह वष क एक लड़क , जसके कंध पर पूरे प रवार का भार है और जो सुबह से रात तक मुंबई के स्टू डयो नापती है —
उसके सामने क चुनौ तयाँ इस प्रकार रही ह गी:
चुनौती उसका रूप
भोजन रेकॉ डग का समय पहले से तय नह होता था, इस लए भोजन का कोई समय नह । घर से लाया गया ठं डा खाना, या
दन-भर सफ चाय। गले पर सीधा असर — गा यका के लए भूखा या ठं डा खाकर गाना सबसे बड़ा जो खम है।
यात्रा और भाड़ा अपनी गाड़ी नह थी। लोकल े न, बस या पैदल — और उस पर भाड़े का खच, जो कमाई म से ही जाता। एक स्टू डयो
से दूसरे तक पहुँचने म समय का सट क हसाब रखना पड़ता, क्य क दे र होने पर पूरे दन का काम बगड़ता।
सुरक्षा दे र रात लौटना, वह भी अकेले — “तब म हलाओं का फल्म म काम करना अच्छा नह माना जाता था।” इस लए
सुरक्षा के साथ-साथ समाज क टे ढ़ नज़र भी झेलनी पड़ती। लोग क बात, ताने और घूरती नगाह — यह चुनौती
शारी रक नह , मान सक थी।
थकान “मेरी रेकॉ डग सुबह से रात तक चलती रहती थी।” शरीर क थकान गले पर उतरती है; फर भी हर टे क म आवाज़ वैसी
क वैसी रखनी पड़ती थी, क्य क श्रोता को थकान सुनाई नह दे नी चा हए।
पढ़ाई और इस उम्र म वद्यालय, खेल और सहे लयाँ छू ट गईं। वह उम्र जो सीखने क थी, कमाने म लग गई।
बचपन का छू टना
मान सक दबाव “हमेशा यही बात दमाग म घूमती थी क कसी तरह बस मुझे अपने प रवार को दे खना है।” साथ ही यह चता —
“आने वाले कल म मेरे कतने गीत रेकॉड होने ह”, “नए कॉन् े क्ट… कब रेकॉड करने ह।” काम रुका तो घर का चूल्हा
रुकेगा — यह डर सबसे भारी था।
तकनीक क तब एक भी गलती पर पूरा गीत दोबारा गाना पड़ता था, क्य क टु कड़ म जोड़ने क सु वधा नह थी। ‘आएगा आने
क ठनाई वाला’ म तो हॉल के दूसरे छोर से चलकर दबे पाँव माइक तक आना पड़ता था — यानी गाना और अ भनय, दोन एक
साथ।
नमूना उत्तर (एक दन क कल्पना): सुबह पाँच बजे उठना, रयाज़, फर माँ के साथ मलकर छोटे भाई-बहन को तैयार करना।
सात बजे घर से नकलकर लोकल पकड़ना। पहले स्टू डयो म साढ़े आठ से बारह तक रेकॉ डग — बीच म संगीतकार के धुन बदल
दे ने पर वही पं क्त ग्यारह बार गाना। दोपहर म डब्बे का ठं डा खाना, जल्द -जल्द , क्य क दूसरा स्टू डयो दूर है। तीन से छह वहाँ,
फर शाम को तीसरे स्टू डयो म कोरस के साथ। कु सयाँ कम पड़ तो सबके साथ ज़मीन पर बैठ जाना। रात दस बजे लौटना, और
लौटते समय यह हसाब लगाना क इस महीने का कराया और भाई-बहन क फ स नकलेगी या नह । सोने से पहले कल का गीत
एक बार पढ़ लेना — क्य क थकान कल क रेकॉ डग का बहाना नह बन सकती।
Page 26 of 56
Page 28
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
इस कल्पना से क्या समझ आता है: जस आवाज़ को हम आज सहज और मधुर सुनते ह, उसके पीछे यह पूरा
श्रम खड़ा है। यही कारण है क लता जी कहती ह — “मुझे रेकॉ डग से या उसक तकलीफ से इतना फक नह
पड़ता था, जतना इस बात से क आने वाले कल म मेरे कतने गीत रेकॉड होने ह।” तकलीफ उन्ह नह खलती थी;
काम का रुक जाना खलता था।
प्र.2 2. “पहले के दौर म पुरुष और स्त्री आवाज़ के कोरस हम लोग के गीत के साथ ही रेकॉड होते थे। भले ही वह
गाना डु एट हो या फर कोई सोलो सांग।” अपने घर, आस-पड़ोस, समुदाय, वद्यालय म होने वाले उन काय के
वषय म बताइए जसम सहयोग और सामू हकता क आवश्यकता होती है।
जो काम एक व्य क्त के बस का नह होता, वह सामू हकता से ही पूरा होता है। नीचे चार दायर म ऐसे काम गनाए गए ह —
दायरा सहयोग से होने वाले काम सामू हकता वहाँ क्य ज़रूरी है
घर रसोई और सफाई का बँटवारा, त्योहार क तैयारी, बीमार सदस्य घर एक इकाई है — एक सदस्य का काम छू टे तो बोझ
क दे खभाल, छोटे भाई-बहन क पढ़ाई, घर क मरम्मत दूसरे पर आ जाता है। लता जी का पूरा प रवार इसी
बँटवारे से खड़ा रहा।
आस- गली क सफाई, वषा म नाली खुलवाना, कसी के यहाँ ववाह ये काम कसी एक घर के नह , साझे ह। मंगलागौर म पूरा
पड़ोस या शोक म जुटना, बच्च को साथ वद्यालय भेजना, मोहल्ले का पड़ोस जुटता था — यही पड़ोस क ताक़त है।
पूजा-पंडाल
समुदाय तालाब या कुएँ क सफाई, वृक्षारोपण, रक्तदान श वर, बाढ़ या इनम लागत और श्रम इतना बड़ा है क अकेला व्य क्त
आग म राहत, गाँव क सड़क का श्रमदान, सहकारी स म त नह उठा सकता; और लाभ सबका है, इस लए भागीदारी
भी सबक होनी चा हए।
वद्यालय प्रभात-सभा, वा षकोत्सव का नाटक, समूह-गान और कोरस, यहाँ हर व्य क्त का हस्सा अलग है पर प रणाम एक है
व ान प्रदशनी का मॉडल, द वार-प त्रका, खेल क ट म, — ठ क कोरस क तरह।
स्वच्छता अ भयान, पुस्तकालय-व्यव ा
पाठ से जुड़ाव — कोरस इसका सबसे सुंदर उदाहरण क्य है: कोरस म गाने वाली लड़ कय का नाम फल्म के
परदे पर नह आता, पर उनके बना गीत अधूरा रह जाता है। मुख्य गा यका क आवाज़ तभी उभरती है जब पीछे
कोरस का आधार हो। और तब सब एक साथ, एक ही समय पर रेकॉड करते थे — यानी कसी एक क गलती पूरे
गीत को दोहराने पर मजबूर कर दे ती। सामू हकता का यही अथ है — साझा श्रेय और साझी ज़म्मेदारी। इसी लए
लता जी उन लड़ कय के नाम आज तक नह भूल ।
करके दे खए: अपनी कक्षा से एक ऐसा काम चु नए जो अब तक एक-दो लोग करते आए ह (जैसे द वार-प त्रका),
और उसे पाँच हस्स म बाँटकर पाँच समूह को द जए। महीने के अंत म तुलना क जए — काम कतनी जल्द
हुआ, और कतने नए वचार आए।
Page 27 of 56
Page 29
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
शास्त्रीय संगीत — पृष्ठ 79
वषय से संवाद
वषय से सं वाद शब्द-खोज
प्र.1 1. “ फर उसम लंबी-लंबी रागदारी वाले गायन क भी परंपरा थी।” रागदारी वाले गायन का अथ है भारतीय
शास्त्रीय संगीत। आपने इस पाठ म संगीत से जुड़े अनेक शब्द को पढ़ा है। शब्दकोश, इंटरनेट, पुस्तकालय और
अपने शक्षक क सहायता से इनके अथ और उदाहरण खोजकर ल खए— राग, सुर, बं दश, अभंग, सोहर,
फाग, बधावा
ये सात शब्द एक ही संसार के ह, पर दो अलग धाराओं के — पहले तीन शास्त्रीय संगीत के, और बाद के चार लोक संगीत के।
शब्द अथ उदाहरण
राग स्वर का वह नयमबद्ध क्रम जससे एक वशेष भाव जगता है। हर राग राग भैरव (प्रातःकाल), राग यमन (संध्या), राग
के आरोह-अवरोह, वाद -संवाद स्वर और गाने का समय न त होता मल्हार (वषा), राग जयजयवंती — पाठ के अनुसार
है। पुस्तक क शब्द-संपदा म — “ व शष्ट ताल-लययुक्त ध्व न, मन को पं. द नानाथ मंगेशकर ने इसी राग का एक रेकॉड
प्रसन्न करना, प्री त, अनुराग।” बनाया था।
सुर संगीत क मूल ध्व न, स्वर। सात शुद्ध स्वर ह — सा, रे, ग, म, प, ध, “जब बहुत सुर म तार लगता है, तो टू ट जाता है” —
न। ‘सुर म होना’ का अथ है ठ क ऊँचाई पर आवाज़ लगना। उस्ताद अली अकबर खाँ। पताजी “एक राग गाते
समय कसी भी सुर को षड् ज बनाकर” राग बदल दे ते
थे।
बं दश कसी राग म ताल के साथ बँधी हुई रचना — शब्द, स्वर और ताल तीन ख्याल गायक म वलं बत और द्रुत — दो बं दश गाई
का बँधा हुआ रूप। इसी को ‘चीज़’ भी कहते ह। बं दश के दो हस्से जाती ह। ‘बं दश’ शब्द ही बताता है क रचना कसी
होते ह — ायी और अंतरा। बंधन (ताल) म बँधी है।
अभंग महाराष्ट्र का भ क्तगीत — वठोबा ( वट्ठल) क स्तु त म मराठ म रचा संत तुकाराम के अभंग। पाठ म ‘संत तुकाराम’ फल्म
गया छं द। संत ानेश्वर, नामदे व, एकनाथ और तुकाराम इसके प्रमुख का जो गीत आया है — ‘अमी जातो अमचा गावा,
रच यता ह। ‘अभंग’ अथात् जो भंग न हो, अखंड। अमचा राम-राम ध्यावा’ — वह इसी परंपरा का है।
सोहर बच्चे के जन्म के अवसर पर गाया जाने वाला मंगलगीत। उत्तर प्रदे श, जन्माष्टमी और रामनवमी पर ईश्वर के जन्म के कारण
बहार और झारखंड म स्त्रयाँ इसे समूह म गाती ह। भी सोहर गाया जाता है — यह बात पाठ म
साक्षात्कारकता ने कही है।
फाग फागुन मास म, वशेषकर होली पर गाया जाने वाला गीत; होली का “होली के मौके पर फाग और धमार” — पाठ क
राग-रंग। ब्रज और बुंदेलखंड म फाग-मंड लयाँ ढोलक-मंजीरे के साथ पं क्त। ब्रज का प्र सद्ध फाग — “होरी खेलन आयो
गाती ह। इसी का एक भेद धमार है, जो चौदह मात्राओं क धमार ताल श्याम…”
म गाया जाता है।
बधावा मंगलाचार, बधाई का गीत; और बच्चे के जन्म आ द के अवसर पर भेजा “जन्माष्टमी और रामनवमी म ईश्वर के जन्म के कारण
जाने वाला उपहार भी। राज ान और मालवा म ववाह-जन्म के अवसर सोहर और बधावा आ द गाने का मामला” — पाठ
पर बधावा गाया जाता है। से।
Page 28 of 56
Page 30
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
ध्यान दे ने क बात: पहले तीन शब्द (राग, सुर, बं दश) संगीत के व्याकरण के ह — इन्ह सीखना पड़ता है, गुरु
चा हए। बाद के चार (अभंग, सोहर, फाग, बधावा) अवसर के गीत ह — इन्ह कोई सखाता नह ,eयेm
m a s
gकl रागदारी भी है और
घर-आँगन म
. coह। पाठ क खूबी यही है क उसम दोन धाराएँ साथ चलती ह — पताजी
a
emके गीत भी।
सुनकर आ जाते
a s
agl
मंगलागौर
co m
em . ag
as
प्र.2 2. “त्योहार के संदभ म एक बात और ध्यान म आती है क अ धकांश प्रदे श म पव व अनुष्ठान से संद भत घर-
a g l
घर गीत गाए जाने का प्रचलन रहा है।” आपने पढ़ा क भारत म त्योहार पर फाग, धमार, सोहर, बधावा, छठ के
गीत आ द गाने क परंपरा है। अपने क्षेत्र म गाए जाने वाले ऐसे गीत के वषय म अपने घर म पता क जए और
m
एक गीत अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए।
co
se m.
o m g l a
.c है, इस लए उत्तर आपके अपने क्षेत्र का होगा। कैसे क जए —
m a
se
यह खोज-काय
l a
g1. घर क सबसे बुजग म हला सदस्य से पू छए — वे प्रायः इन गीत क सबसे बड़ी जानकार होती ह।
a
s
2. पू छए क यह गीत कस अवसर पर गाया जाता है, कौन गाता है, और उसम कौन-सा वाद्य बजता है।
m a
.co agl
3. गीत को बोलकर गवाइए और साथ-साथ ल खए। जो शब्द समझ न आएँ, उनका अथ भी वह पूछ ली जए — लोकगीत म
s
पुराने और क्षेत्रीय शब्द बहुत होते ह।
a em
4. हो सके तो मोबाइल से रकॉड कर ली जए,lता क लय भी सुर क्षत रहे। लोकगीत का आधा स दय उसक लय म होता है।
ag
5. अंत म ल खए — गीत का नाम, अवसर, भाषा/बोली, गाने वाले का नाम और आपको उसम सबसे अच्छ लगी पं क्त।
co m
.
अपने क्षेत्र के गीत खोजने के लए संकेत-सूची —
em
m l as
.co a g
eब्रजm/ बुंदेलखंड
क्षेत्र लोकगीत अवसर
a s
agl फाग, र सया, धमार होली, फागुन
se m
com a
अवध / भोजपुर सोहर, कजरी, बरहा, चैता जन्म, सावन, वरह, चैत
. a g l
m
ase
बहार छठ के गीत छठ पूजा
राज ान / मालवा agl
बधावा, बन्ना-बन्नी, माँड ववाह, जन्म
co m
.
महाराष्ट्र मंगलागौर के गीत, अभंग, ओवी, लावणी नई बहू का स्वागत, भ क्त, श्रम
e m
m l as
.co g
पंजाब सुहाग, घो ड़याँ, बो लयाँ ववाह, वैसाखी
em गुजरात a
a s
gl
गरबा, रास के गीत नवरा त्र
a c
m .
e
असम / बंगाल बहू गीत, भ टयाली बहू, नाव खेते समय
m a s
उत्तराखंड / हमाचल
m . co
मंगल गीत, झोड़ा, नाट
e
ववाह, मेले
agl
g l as
a
नमूना उत्तर (ब्रज क्षेत्र का प्रच लत फाग):
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 29 of 56
Page 31
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
“होरी खेलन आयो श्याम आधी रात,
भर पचकारी सन्मुख मारी, अँ गया भजोय गयो सारी…”
अवसर — होली / फागुन का मास। कौन गाता है — मोहल्ले क फाग-मंडली, स्त्री और पुरुष अलग-अलग टो लय
म। वाद्य — ढोलक, मंजीरा, झाँझ। भाव — कृष्ण और राधा क होली का चंचल वणन, जसम हँसी- ठठोली और
रंग क उमंग है।
यह काम क्य ज़रूरी है: लोकगीत कसी पुस्तक म नह , स्मृ त म रहते ह — इसी लए वे उस पीढ़ के साथ चले
जाते ह जो उन्ह जानती है। लता जी ने यही चता जताई थी — “आ हस्ता-आ हस्ता वह भी अब खत्म हो रहा है।”
आपका लखा हुआ एक गीत भी उस परंपरा को कुछ वष और जी वत रख सकता है।
साइबर सुरक्षा — पृष्ठ 79
वषय से संवाद
वषय से सं वाद कक्षा-चचा
प्र.1 “आज, जो त है और जस तरह हमारी तकनीक वक सत हो चुक है, उसम अगर इन लोग को काम करने
का मौका मलता, तब तो कमाल ही हो गया होता।” • आज तकनीक वकास इतना अ धक हो चुका है क अनेक
धोखेबाज/ठग कृ त्रम बु द्धमत्ता का प्रयोग करके अपनी आवाज़ बदलकर लोग के साथ धोखाधड़ी करते ह। कक्षा
म चचा क जए और बताइए क साइबर सुरक्षा नयम का प्रयोग करते हुए इस प्रकार क धोखाधड़ी से कस
प्रकार बचा जा सकता है?
पहले सम झए क यह ठगी होती कैसे है। कृ त्रम बु द्धमत्ता (आ ट फ शयल इंटे लजस) आज कसी व्य क्त क थोड़ी-सी रकॉड
क गई आवाज़ से उसक हूबहू नकली आवाज़ बना सकती है — इसे ‘वॉइस क्लो नग’ कहते ह। ठग कसी के सोशल मी डया
वी डयो से आवाज़ उठाते ह, फर उसके प रजन को फोन करके रोती हुई आवाज़ म कहते ह — “म मुसीबत म हूँ, तुरंत पैसे भेजो।”
घबराहट म लोग जाँच कए बना पैसे भेज दे ते ह।
बचाव के नयम —
Page 30 of 56
Page 32
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
नयम कैसे काम करता है
1. घबराइए नह , रु कए हर ठगी क पहली शत जल्दबाजी है — “अभी भेजो, कसी को बताना मत।” जहाँ यह वाक्य सुनाई दे ,
वह समझ ली जए क कुछ गड़बड़ है। दो मनट रुकना ही आधा बचाव है।
2. फोन काटकर स्वयं उसी नंबर पर उत्तर मत द जए। फोन का टए और अपने पास सुर क्षत रखे उस व्य क्त के असली नंबर पर
मलाइए स्वयं कॉल क जए। नकली आवाज़ आपका कया हुआ कॉल नह उठा सकती।
3. प रवार का ‘गुप्त शब्द’ घर म एक ऐसा शब्द या प्रश्न तय र खए जो केवल प रवार जानता हो — जैसे “दाद के गाँव का नाम क्या
(कोड वड) तय क जए है?” संकट के फोन पर वही पू छए। आवाज़ नकली हो सकती है, स्मृ त नह ।
4. ओ.ट .पी., पासवड और कोई भी सच्चा बक, पु लस या सरकारी कायालय फोन पर ओ.ट .पी. नह माँगता। यह नयम बना
बक ववरण कभी न बताइए अपवाद है।
5. अनजान लक और ऐप से ‘लॉटरी लगी है’, ‘केवाईसी अपडेट कर’, ‘ बजली कटने वाली है’ — इन संदेश के लक मत खो लए। ऐप
ब चए केवल आ धका रक स्टोर से ही ली जए, और स्क्र न-शेय रग वाले ऐप कसी के कहने पर बलकुल मत
डा लए।
6. अपनी आवाज़ और सावज नक खात पर ढे र सारे वी डयो डालना ठग को कच्चा माल दे ना है। खाते ‘प्राइवेट’ र खए और
तस्वीर सोच-समझकर साझा अनजान लोग क मत्रता- वनती स्वीकार मत क जए।
क जए
7. वी डयो कॉल पर भी अब चेहरा तक बदला जा सकता है (डीपफेक)। य द चत्र म पलक झपकना, ह ठ क हरकत या आवाज़
सतक र हए का मेल अजीब लगे, तो कॉल काटकर सत्यापन क जए।
8. तुरंत शकायत क जए ठगी हो जाए तो 1930 (राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन) पर फोन क जए या
cybercrime.gov.in पर शकायत दज क जए, और अपने बक को सू चत क जए। पहला घंटा
सबसे क मती होता है — इसे ‘गोल्डन आवर’ कहते ह।
9. घर के बड़ को बताइए ऐसी ठगी के सबसे आसान शकार बुजग होते ह। उन्ह ये नयम सरल भाषा म समझाना वद्या थय का
काम है।
पाठ से इसका क्या संबंध है: लता जी क पहचान ही उनक आवाज़ थी — “मेरी आवाज़ ही पहचान है!” जस
युग म तकनीक कसी क भी आवाज़ क नकल बना सकती है, उस युग म यह प्रश्न और गहरा हो जाता है क
पहचान क रक्षा कैसे हो। लता जी तकनीक के वरोध म नह थ — वे कहती ह क पुराने संगीतकार को आज क
तकनीक मलती तो “कमाल ही हो गया होता।” तकनीक बुरी नह होती; उसका दुरुपयोग बुरा होता है। इस लए
उत्तर तकनीक छोड़ना नह , सावधानी सीखना है।
हम ऐसे भी बोलते ह — पृष्ठ 80
Page 31 of 56
Page 33
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
वषय से संवाद
वषय से सं वाद अनु भ व
प्र.1 “वे बस हमको गंभीरता से दे खते थे… मगर हम सभी समझ जाते थे क हमको बुलाया कस लए गया है।” 1. क्या
आपके जीवन म भी कोई ऐसा व्य क्त है जो बना कुछ बोले सफ नजर या संकेत (हाव-भाव) से ही आपको
समझा दे ता है? उस अनुभव के वषय म बताइए।
यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। अच्छे उत्तर म यह होना चा हए — वह व्य क्त कौन है, संकेत क्या था, आपने उसे कैसे
समझा, और उस समय आपके मन म क्या चला।
नमूना उत्तर: मेरे जीवन म यह व्य क्त मेरी नानी ह। जब घर म मेहमान आए ह और म कुछ ऐसा कहने लगूँ जो नह कहना चा हए,
तो वे बस एक बार मेरी ओर दे ख लेती ह — न भ ह चढ़ाती ह, न सर हलाती ह। बस दे खती ह। और म बीच वाक्य म रुक जाता/
जाती हूँ। इसी तरह जब म थाली म कुछ छोड़ने लगूँ, तो वे थाली क ओर एक बार दे खती ह और म समझ जाता/जाती हूँ। सबसे
अच्छा संकेत तब होता है जब म कोई अच्छा काम कर लूँ — तब वे कसी से कुछ कहती नह , बस हल्का-सा सर हलाकर मुस्करा
दे ती ह, और वह मुस्कान कसी भी तारीफ़ से बड़ी लगती है।
हमारे वद्यालय म भी ऐसा ही होता है। हमारी हद क श क्षका जब कक्षा म शोर होने पर बोलना बंद कर दे ती ह और चुपचाप खड़ी
रहती ह, तो दो-तीन क्षण म पूरी कक्षा चुप हो जाती है। कभी-कभी चुप्पी डाँट से अ धक असर करती है।
यह संकेत काम क्य करता है: ऐसे संकेत वह समझ आते ह जहाँ पहले से रश्ता और भरोसा हो। लता जी के
पता को कुछ कहना नह पड़ता था, क्य क बच्चे जानते थे क वे क्या चाहते ह और क्य चाहते ह। जहाँ यह जान-
पहचान नह होती, वहाँ वही नज़र केवल डरावनी लगेगी, समझाने वाली नह । इसी लए बना बोले समझाना केवल
भाषा का नह , संबंध का कौशल है।
प्र.2 2. य द कोई व्य क्त बना बोले (संकेत भाषा म) आपको कुछ समझा रहा है, तो वह आपके साथ और आप उसके
साथ कैसा व्यवहार करगे? (संकेत– धैय, जज्ञासा, समानुभू त आ द)
संकेत भाषा (साइन लग्वेज) एक पूरी भाषा है — उसका अपना व्याकरण है, अपने शब्द ह। इस लए बात करते समय व्यवहार भी
वैसा ही सम्मानपूण होना चा हए जैसा कसी और भाषा म होता है।
Page 32 of 56
Page 34
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
गुण म क्या करूँगा/करूँगी क्या नह करूँगा/करूँगी
धैय पूरा संकेत पूरा होने दूँ गा/दूँ गी; बात समझने म समय लगे तो लगने बीच म टोकना, जल्द -जल्द सर हलाकर ‘समझ
दूँ गा/दूँ गी। गया’ कह दे ना, जब क समझा न हो।
जज्ञासा कुछ संकेत सीखने क को शश करूँगा/करूँगी — कम-से-कम यह मान लेना क यह भाषा मेरे काम क नह ।
‘नमस्ते’, ‘धन्यवाद’, ‘आपका नाम क्या है’। इससे सामने वाला
अकेला नह पड़ता।
समानुभू त उन्ह ‘बेचारा’ नह , बराबर का साथी मानूँगा/मानूँगी। उनसे सीधे बात दया दखाना, ऊँची आवाज़ म बोलना (इससे कोई
करूँगा/करूँगी, उनके साथ आए व्य क्त से नह । लाभ नह होता), या पीठ पीछे उनके बारे म बात
करना।
ध्यान आमने-सामने खड़ा होकर, चेहरे पर रोशनी रखते हुए बात करूँगा/ मुँह फेरकर, चलते-चलते या मुँह ढककर बात
करूँगी, क्य क संकेत भाषा म हाथ के साथ चेहरे के भाव भी अथ करना।
दे ते ह।
सरल बात न बने तो कागज़ पर लखकर, चत्र बनाकर या मोबाइल पर हार मानकर बातचीत बीच म छोड़ दे ना।
उपाय टाइप करके काम चलाऊँगा/चलाऊँगी।
सम्मान वे जस ग त से बताना चाह, उसी ग त से सुनूँगा/सुनूँगी; अंत म यह उनके संकेत क नकल उतारना या हँसना — यह
पूछ लूँगा/लूँगी क जो समझा वह ठ क है या नह । अपमान है।
पाठ से जोड़कर दे खए: लता जी के पता बना बोले समझा दे ते थे और बच्चे बना कहे समझ जाते थे। इससे यह
सद्ध होता है क भाषा का काम शब्द नह , अथ पहुँचाना है — और अथ आँख, हाथ, मुद्रा और चुप्पी से भी पहुँच
सकता है। इसी लए संकेत भाषा को कम भाषा मानना गलत है; वह केवल दूसरा माध्यम है, कम माध्यम नह ।
करके दे खए: कक्षा म एक खेल कराइए — दो-दो के जोड़े बनाइए और एक साथी को केवल हाव-भाव से कोई
वाक्य समझाना है (जैसे ‘कल वद्यालय बंद रहेगा’)। फर पू छए क कसे क ठनाई हुई और क्य । इससे धैय और
समानुभू त दोन का अभ्यास हो जाएगा।
सृजन — पृष्ठ 80
Page 33 of 56
Page 35
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह
a g l AglaSem · NCERT Solutions
सृजन
co m
e m.
m as
सृ ज न ले ख न
.co a g l
s m हम समय के चक्र (टाइम मशीन) को घुमाकर सन् 1949-50 म ले जाएँ”, कल्पना क जए क आपके
e“अगर
gl a1.
a
प्र.1
पास टाइम मशीन है। 1940–50 के दशक म जाकर लता जी से म लए और उनके साथ बताए गए एक दन का
m
वणन डायरी के रूप म ल खए। उस समय क वेशभूषा, भोजन, संगीत आ द का वणन अवश्य क जए।
. co ag
se m
l a
डायरी लखने क व ध — ऊपर दाईं ओर तaथ,g दन और ान; फर उत्तम पुरुष (‘म’) म लेखन; भूतकाल म, पर भाव क
ताज़गी के साथ; अंत म उस दन क एक सीख या एक भाव। डायरी कसी और के लए नह , अपने लए लखी जाती है — इस लए
co m
m.
उसम बनावट नह होनी चा हए। इस प्रश्न म तीन चीज़ का वणन अ नवाय है — वेशभूषा, भोजन और संगीत।
m as e
.co l
नमूना उत्तर:
a g
s m 1949, गुरुवार — मुंबई
eअगस्त
gl a
18
a
m
आज का दन म जीवन-भर नह भूलूँगा/भूलूँगी। सुबह जब टाइम मशीन रुक , तो म मुंबई क एक तंग गली म खड़ा/
a s
m .co
खड़ी था/थी। सड़क पर घोड़ागा ड़याँ और काली-पीली टै क्सयाँ थ , और कह -कह ाम क पट रयाँ चमक रही थ ।
agl
l a se
कोई मोबाइल नह , कोई चमकता हो डग नह — बस द वार पर चपके फल्म के हाथ से बने पोस्टर।
a g
वेशभूषा — लता जी सफ़ेद सूती साड़ी म थ , कनारे पर हल्क -सी धारी। दो चो टयाँ, माथे पर छोट -सी बद , कान
. c om
म साधारण बुंदे और पैर म साद चप्पल। न कोई गहना, न कोई तड़क-भड़क। स्टू डयो म पुरुष सफ़ेद कुरता-पाजामा
m a s emथा।
या पतलून-कमीज़ म थे, कई ने टोपी लगा रखी थी; संगीतकार जी ने बंद गले का कोट पहना
. co a gl
m
aseस्टू डयो — कमरे क द वार पर मोटा कपड़ा टँगा था ता क गूँज न हो। बीच म एक ही बड़ा माइक, और उसके चार
agl ओर अधचंद्राकार बैठे वादक — तबला, हारमो नयम, सारंगी, बाँसुरी, वाय लन और मडो लन। कु सयाँ कम थ ,
इस लए कोरस क लड़ कयाँ ज़मीन पर बैठ थ और लता जी भी उन्ह के बीच बैठकर हँसते हुए बात कर रही थ ।
se m
com g l a
. a
मुझे सबसे अचरज इस बात पर हुआ क पूरा गाना एक ही बार म, सबको एक साथ रेकॉड करना पड़ता है —
m
ase
कसी एक क चूक से सबको फर से शुरू करना पड़ता है। एक पं क्त ग्यारह बार गाई गई और लता जी के माथे पर
एक बल तक नह आया।
agl
c o m
.
भोजन — दोपहर म सबने साथ खाया — घर से लाया हुआ ट फन, जसम रोट , आलू क सूखी सब्ज़ी, थोड़ा
s e
अचार और गुड़ था। लता जी ने बहुत कम खाया; कहा क भरे पेट गाना ठ क नह आता।m बाद म कड़क मीठ चाय
काँचmके गलास म आई और सबने कुल्हड़ जैसे बरतन म पी। a
m .co agl
l a se
ag संगीत — शाम को वे रयाज़ पर बैठ — तानपूरे क खरज पर लंबे-लंबे ‘सा’। फर पताजी क सखाई एक बं दश
.c
गुनगुनाईं। मने पूछा क इतनी मेहनत के बाद थकान नह होती? वे हँस द और बोल — “थकती तो हूँ, पर कल
s e m
m a
. co agl
कतने गीत रेकॉड होने ह, यह सोचकर न द अच्छ आती है।”
e m
g l as
a
आज मने यह सीखा क प्र स द्ध से पहले अनुशासन आता है। जस आवाज़ को हम आज घर-घर म सुनते ह, वह
चमक-दमक से नह , ज़मीन पर बैठकर, बार-बार दोहराकर बनी है।
com
m .
m ase
.co
a g l Page 34 of 56
Page 36
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
क्य यही ब्योरे चुने गए: डायरी को सच्चा वही ब्योरा बनाता है जो पाठ से ही नकले — सफ़ेद साड़ी और रंग से
परहेज़, कोरस का साथ-साथ रेकॉड होना, ज़मीन पर बैठना, ‘कल कतने गीत रेकॉड होने ह’ क चता। कल्पना तभी
वश्वसनीय होती है जब उसक जड़ तथ्य म ह ।
प्र.2 2. “आप जैसे लोग अगर यह मानते ह क म अमर ँ, तो यह मुझे मलने वाले उस प्यार जैसा ही है।” कल्पना
क जए क यह लता जी का अं तम संदेश है— आप उस पर अपनी भावनात्मक प्र त क्रया एक अनु े द के रूप
म व्यक्त क जए।
अनु े द लखने क व ध — एक ही अनुच्छेद, कोई शीषक नह , कोई बदु नह । पहले वाक्य म अपनी भावना क हए, बीच म
उस भावना का कारण द जए (पाठ से जोड़कर), और अं तम वाक्य म एक संकल्प या एक ायी वचार पर समाप्त क जए।
नमूना उत्तर:
जब म इन शब्द को अं तम संदेश मानकर पढ़ता/पढ़ती हूँ, तो सबसे पहले मन भर आता है और उसके तुरंत बाद
एक अजीब-सी शां त उतर आती है। भर इस लए आता है क जस आवाज़ के साथ हमारे घर क सुबह होती रह ,
वह अपने बारे म भी इतनी हल्क -सी बात कहकर चली जाती है — न कोई दावा, न कोई शकायत। और शां त
इस लए मलती है क वे ‘अमर’ होने का श्रेय अपने पास रखती ही नह ; वे उसे लौटा दे ती ह — कहती ह, यह तो उस
प्यार जैसा ही है जो दु नया ने मुझे दया। मुझे लगता है, यही उनक सबसे बड़ी बात है। जो व्य क्त जीवन-भर सबसे
ऊँचे ान पर रहा हो, वह अंत म यह कहे क “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नह ” — तो वह हम डराता
नह , हल्का कर दे ता है। इस संदेश ने मुझे यह सखाया क जीवन को नापने का पैमाना यह नह है क हम कतने
दन रहे, ब ल्क यह है क हमारे बाद क्या रह गया — कोई गीत, कोई काम, कोई भला नाम। इसी लए वे मराठ
कहावत सुनाती ह — गाँव बह जाता है, नाम रह जाता है। आज उनका शरीर नह है, पर हर बार जब कह ‘ऐ मेरे
वतन के लोगो’ बजता है और अजन बय क आँख एक साथ भर आती ह, तब वह कहावत अपने आप सच होती
दखाई दे ती है। म इस संदेश से यह लेकर जाता/जाती हूँ क जो भी काम मुझे मले, उसे इतनी सच्चाई से करूँ क
वह मेरे बाद भी कसी के काम आ सके।
भाषा क बात: इस अनुच्छेद म भाव को बना नारेबाज़ी के रखा गया है। भावनात्मक लेखन म सबसे बड़ी भूल है
— बड़े-बड़े वशेषण भर दे ना (‘महानतम’, ‘अ तीय’, ‘स्वर-को कला’)। भाव वशेषण से नह , ठोस चत्र से
बनता है — जैसे ‘घर क सुबह’ और ‘अजन बय क एक साथ भर आती आँख’।
व्याकरण क बात — मुहावरे — पृष्ठ 80
Page 35 of 56
Page 37
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
भाषा से संवाद
भाषा से सं वाद मु हावरे
प्र.1 “मगर कसी के आगे जाकर हाथ नह पसारना है।” उपयुक्त वाक्य म रेखां कत अंश मुहावरा है। हाथ पसारना या
फैलाना का अथ है— कुछ माँगना या याचना करना। हाथ से जुड़े अनेक मुहावरे आपने पढ़े और सुने ह गे। ऐसे ही
कुछ मुहावरे नीचे दए गए ह। इनका प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए— • हाथ म आना
हाथ म आना — प्राप्त हो जाना; वश या अ धकार म आ जाना।
वाक्य — महीन क खोज के बाद वह दुलभ पांडु ल प आ खर हमारे हाथ म आ ही गई।
दूसरा वाक्य — इतने वष के अभ्यास के बाद अब सतार क म ड उसके हाथ म आ गई है।
ध्यान द जए: ‘हाथ म आना’ म हाथ का शा ब्दक अथ नह है — पांडु ल प सचमुच हथेली पर नह रखी गई।
मुहावरे क यही पहचान है — शब्द का सीधा अथ छोड़कर एक बना-बनाया लाक्ष णक अथ लेना। मुहावरा वाक्य म
क्रया के रूप म ढल जाता है (आया, आएगी, आ गई), जब क कहावत ज्य -क -त्य रहती है।
प्र.2 • हाथ का मैल होना
हाथ का मैल होना — अत्यंत तुच्छ या महत्वहीन होना (प्रायः धन-संप त्त के लए, जो आती-जाती रहती है)।
वाक्य — दादाजी हमेशा कहते ह क पैसा तो हाथ का मैल है, असली कमाई तो अच्छा नाम है।
दूसरा वाक्य — जसने ईमानदारी नह छोड़ी, उसके लए धन हाथ का मैल ही रहा।
पाठ से जो ड़ए: लता जी क सोच भी यही है — “आज मेरे पास पैसे ह और नाम है। हम आज जहाँ रहते ह, वह
भले ही इतना छोटा-सा घर है, पर उसम हम लोग बहुत खुश ह।”
प्र.3 • हाथ से हाथ मलाना
हाथ से हाथ मलाना — साथ दे ना, मलकर काम करना, सहयोग करना।
वाक्य — गाँव के सभी प रवार ने हाथ से हाथ मलाया और दो ही महीन म तालाब क सफाई पूरी कर ली।
दूसरा वाक्य — य द वद्यालय के सभी वद्याथ हाथ से हाथ मला ल, तो वा षकोत्सव क तैयारी क ठन नह रहेगी।
Page 36 of 56
Page 38
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से जो ड़ए: कोरस क रेकॉ डग इसी मुहावरे का जीता-जागता रूप है — मुख्य गायक, कोरस और वादक सब
एक साथ, एक ही समय पर। एक भी हाथ हट जाए तो गीत अधूरा।
प्र.4 • हाथ साफ करना
हाथ साफ करना — चोरी कर लेना, चुपके से माल उड़ा लेना। (दूसरा, कम प्रच लत अथ — कसी काम म अपनी कुशलता
दखाना, जैसे ‘तलवार पर हाथ साफ करना’।)
वाक्य — भीड़ का लाभ उठाकर जेबकतरे ने एक यात्री के बटु ए पर हाथ साफ कर दया।
दूसरे अथ म वाक्य — मेले क नशानेबाजी म उसने ऐसा हाथ साफ कया क सारे इनाम जीत लए।
सावधानी: एक ही मुहावरे के दो अथ ह तो वाक्य का प्रसंग ही तय करता है क कौन-सा अथ लया जाए। ऊपर के
पहले वाक्य म ‘भीड़’ और ‘बटु आ’ चोरी का अथ पक्का कर दे ते ह।
प्र.5 • हाथ से नकल जाना
हाथ से नकल जाना — अ धकार या नयंत्रण से बाहर हो जाना; अवसर चूक जाना।
वाक्य — टालमटोल करते रहने से छात्रवृ त्त का आवेदन करने का अवसर हाथ से नकल गया।
दूसरा वाक्य — अं तम ओवर म दो कैच छू टते ही मैच हमारे हाथ से नकल गया।
अंतर सम झए: ‘हाथ से नकल जाना’ म वस्तु पहले हमारे पास थी और अब नह रही; जब क ‘हाथ म आना’
इसका ठ क उलटा है। दोन को एक साथ याद र खए — वपरीत जोड़े बनाकर मुहावरे जल्द याद होते ह।
प्र.6 • हाथ धो बैठना
हाथ धो बैठना — कसी बहुमूल्य वस्तु को सदा के लए खो दे ना, गँवा बैठना।
वाक्य — लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण वह अपने एक पैर से ही हाथ धो बैठा।
दूसरा वाक्य — झूठ गवाही दे कर उसने अपनी वष क साख से हाथ धो लया।
सभी मुहावर क एक साथ ता लका —
Page 37 of 56
Page 39
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
मुहावरा अथ वाक्य
हाथ पसारना / फैलाना कुछ माँगना, याचना करना माँ का संस्कार यही था क कसी के आगे हाथ नह पसारना है।
हाथ म आना प्राप्त होना, वश म आना वह दुलभ पांडु ल प आ खर हमारे हाथ म आ गई।
हाथ का मैल होना तुच्छ, महत्वहीन होना पैसा तो हाथ का मैल है, असली कमाई अच्छा नाम है।
हाथ से हाथ मलाना सहयोग करना, साथ दे ना गाँव ने हाथ से हाथ मलाया और तालाब साफ हो गया।
हाथ साफ करना चोरी करना; कुशलता दखाना जेबकतरे ने बटु ए पर हाथ साफ कर दया।
हाथ से नकल जाना नयंत्रण से बाहर होना, अवसर चूकना अं तम ओवर म मैच हाथ से नकल गया।
हाथ धो बैठना खो दे ना, गँवा दे ना वह अपने एक पैर से ही हाथ धो बैठा।
‘हाथ’ के कुछ और मुहावरे: हाथ बँटाना (सहायता करना), हाथ मलना (पछताना), हाथ -हाथ लेना (बहुत आदर से
स्वागत करना), हाथ ख च लेना (सहायता बंद कर दे ना), हाथ लगना ( मल जाना), हाथ तंग होना (धन क कमी
होना), हाथ-पाँव फूलना (घबरा जाना)। इन्ह भी वाक्य म बरतकर दे खए।
हमारी भाषाएँ — पृष्ठ 81
भाषा से संवाद
भाषा से सं वाद अनु वाद
प्र.1 1. “‘गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’। मतलब गाँव तो बह जाता है, ले कन जो नाम है, वह रह जाता है।” आपने
एक कहावत और उसका हद म अथ पढ़ा। इस कहावत के अथ को अपने घर या क्षेत्र क भाषा अथवा भाषाओं
म ल खए।
यह कहावत मराठ क है। इसका भाव है — वस्तु और शरीर नष्ट हो जाते ह, पर नाम और कम बचे रहते ह। इसे अपने घर क
भाषा म लखते समय शब्दशः अनुवाद मत क जए, भाव का अनुवाद क जए।
नमूना उत्तर — कुछ भाषाओं म यही भाव:
Page 38 of 56
Page 40
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
भाषा / बोली वाक्य
m as e
मराठ (मूल)
.co
गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन।
a g l
se m
g
हद
l a गाँव तो बह जाता है, पर नाम रह जाता है।
a
भोजपुरी गाँव त ब ह जाला, बा कर नाम र ह जाला।
co m
अवधी
e m .
गाँव तौ ब ह जात है, नाउँ र ह जात है। ag
g l as
ब्रज
a
गाँव तौ ब ह जात है, नाम र ह जात है।
co m
राज ानी गाँव तो बह ज्यावै, पण नाम रह ज्यावै।
e m.
com l as
पंजाबी पड रुड़्ह जांदा ए, पर नां रह जांदा ए।
. a g
m
ase
गुजराती ગામ તણાઈ જાય છે , પણ નામ રહી જાય છે ।
aglबांग्ला গাম ভেস যায়, নাম থেক যায়।
m a s
आप क्या क जए: ऊपर क सूची केवल नमूनm
e
. c o agl
s
ा है। अपने घर म जो भाषा या बोली बोली जाती है, उसम यह वाक्य
घर के कसी बड़े से बुलवाकर ल खएl—
g a जैसा वे बोल, ठ क वैसा। यही सबसे प्रामा णक उत्तर होगा। साथ म यह
a
भी पू छए क आपक भाषा म इसी भाव क कोई अपनी कहावत है क्या।
co m
m .
o m l a se
प्र.2 .c
a g
m
2. लता जी ने मराठ कहावत को हद म समझाया। अब आप अपनी मातृभाषा क कोई कहावत चु नए और
e उसका हद म अनुवाद क जए। अनुवाद के बाद भाव म क्या प रवतन आया? ल खए।
aglas
se m
com a
. a g l
m
नमूना उत्तर —
ase
मूल कहावत (मराठ )
agl शब्दशः हद अनुवाद भाव के अनुसार हद रूप
उथळ पाण्याला खळखळाट फार। उथले पानी म शोर बहुत होता है।
co m
थोथा चना बाजे घना।
m .
m as e
.co
अनुवाद के बाद भाव म क्या बदला —
a g l
se m अथ वही रहा, बब बदल गया। दोन कहावत का आशय एक है — जसम ान कम होता है, वही सबसे अ धक बोलता है।
g l a
a पर मराठ म बब पानी का है और हद म चना का। इससे उस क्षेत्र का जीवन झलकता है — जहाँ न दयाँ और झरने ह, वहाँ
c
m .
e
पानी का बब; जहाँ खेत और अनाज ह, वहाँ चने का।
m a s
co agl
ध्व न-स दय कम हो गया। ‘खळखळाट’ शब्द स्वयं पानी के शोर क नकल है (अनुकरणात्मक शब्द)। ‘थोथा चना बाजे घना’
m .
as e
म तुक तो है, पर वह ध्व न-अनुकरण नह ।
a g l
शब्दशः अनुवाद कहावत नह रह जाता। ‘उथले पानी म शोर बहुत होता है’ हद म केवल एक सूचना बनकर रह जाती है —
उसम कहावत जैसी चोट और लय नह आती।
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 39 of 56
Page 41
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
यही अनुवाद का सबसे बड़ा पाठ है: कहावत केवल अथ नह होती — उसम अथ + बब + लय + उस समाज का
अनुभव सब घुला रहता है। अनुवाद अथ को तो पार ले जाता है, पर बब और लय प्रायः पीछे छू ट जाते ह। इसी लए
अच्छा अनुवादक शब्द नह , समकक्ष कहावत ढूँ ढ़ता है। लता जी ने भी यही कया — उन्ह ने ‘गाव गेला वाहुन’ का
शब्दशः अनुवाद नह दया, उसका मतलब समझाया।
और उदाहरण आज़माइए: भोजपुरी — “नाच न जाने आँगन टे ढ़”; त मल — “यानै कु ओरु कालम्, पूनै कु ओरु
कालम्” (हाथी का भी समय आता है, बल्ली का भी); पंजाबी — “ जन्ने मूँह ओ न्नयाँ गल्लां”। हर बार दे खए क
अनुवाद म क्या बचा और क्या छू ट गया।
प्र.3 3. एक ‘सेतु चत्र’ बनाइए जसम दो कनारे ह — एक कनारे पर हद और दूसरे कनारे पर अपने घर या क्षेत्र क
भाषा। दोन कनार के बीच म ऐसे शब्द ल खए जो दोन भाषाओं म समान अथ रखते ह।
बनाने क व ध — कागज़ के दोन छोर पर दो कनारे (तट) बनाइए। बाएँ पर ल खए हद , दाएँ पर अपनी भाषा का नाम। बीच
म एक पुल ख चए और पुल के पाट पर वे शब्द ल खए जो दोन भाषाओं म लगभग एक-से ह। नीचे नद बनाइए और उसम वे
शब्द डा लए जो दोन म अलग-अलग ह — इससे यह भी दख जाएगा क भाषाएँ कहाँ मलती ह और कहाँ अलग होती ह।
नमूना सेतु चत्र ( हद ↔ मराठ ):
दोनों मे ं एक-से शब्द
संगीत राग
नाम दे श
िहंदी मराठी
अलग शब्द — पानी / पाणी, हाथ / हात, गाँव / गाव
सेतु चत्र — पुल पर वे शब्द जो हद और मराठ दोन म एक-से ह; नद म वे जो थोड़े बदल जाते ह।
पुल पर लखे जाने योग्य शब्द ( हद ↔ मराठ ) —
बलकुल एक-से थोड़े बदले हुए ( हद / मराठ )
नाम, संगीत, राग, दे श, गीत, मन, सूय, आकाश, पुस्तक, पानी / पाणी, हाथ / हात, गाँव / गाव, दूध / दूध, आँख / डोळा, घर /
वद्यालय, मत्र, सत्य घर, माँ / आई
Page 40 of 56
Page 42
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
ऐसे शब्द एक-से क्य ह: हद , मराठ , गुजराती, बांग्ला, पंजाबी, ओ ड़आ आ द सब एक ही प रवार क भाषाएँ ह
और इनका बहुत-सा शब्द-भंडार संस्कृत से आया है। इसी लए ‘संगीत’ शब्द भाषा संगम क सूची म लगभग हर
भाषा म एक-सा दखाई दे ता है। जो शब्द रोज़मरा के ह (पानी, हाथ, आँख), वे बोलचाल म घसकर अलग-अलग हो
गए; जो शब्द पढ़ाई और शास्त्र के ह, वे लगभग वैसे ही बचे रहे। यह पुल बताता है क भारतीय भाषाएँ अलग
नह , एक ही नद क धाराएँ ह।
ग त व धयाँ — पृष्ठ 81
भाषा से संवाद
भाषा से सं वाद गतवध
प्र.1 1. ‘नाम रह जाएगा’ वाक्य के लए एक सुंदर पोस्टर बनाइए। इसके ऊपर ‘नाम रह जाता है…’ ल खए और नीचे
व भन्न भारतीय भाषाओं म ‘नाम’ शब्द (जैसे– नाव, नालो, नांउ, नाउँ, मङ् , पेरु, नामम् आ द) ल खए। साथ ही
कक्षा म सब वद्याथ मलकर एक प्र तज्ञा ल— ‘हम हर भाषा का सम्मान करगे।’
पोस्टर बनाने क व ध — पोस्टर म तीन ही चीज़ होनी चा हए — एक बड़ा शीषक, एक चत्र और थोड़े-से शब्द। भीड़ मत
क जए; पोस्टर दूर से पढ़ा जाना चा हए।
सबसे ऊपर बड़े अक्षर म — “नाम रह जाता है…”
बीच म चत्र — एक पेड़ या एक बहती नद , जसके कनारे धुँधले ह पर पानी पर तैरता हुआ एक शब्द चमक रहा हो —
‘नाम’। (या एक माइक, जसक ध्व न-तरंग म अलग-अलग भाषाओं के अक्षर बखरे ह ।)
नीचे भाषाओं म ‘नाम’ — नीचे द गई सूची अक्षर के अलग-अलग रंग म ल खए।
सबसे नीचे प्र तज्ञा — “हम हर भाषा का सम्मान करगे।” — इसे सबसे बड़े अक्षर म मत ल खए; इसे शांत र खए, तभी
उसका वज़न बना रहेगा।
Page 41 of 56
Page 43
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
भाषा ‘नाम’ शब्द
हद / संस्कृत नाम / नामन्
मराठ नाव
ओ ड़आ नाम
अवधी / भोजपुरी नाउँ / नाँव
क कणी नांव
म णपुरी मङ्
तेलुगु पेरु
त मल / मलयालम पेयर् / पेरु
कन्नड़ हेसरु
बांग्ला / अस मया नाम
पंजाबी नां
गुजराती नाम
उदू नाम
प्र तज्ञा कैसे ली जए: पोस्टर कक्षा क द वार पर लगाइए और सब मलकर एक स्वर म क हए — “हम हर भाषा
का सम्मान करगे। हम कसी क बोली पर हँसगे नह ।” दूसरा वाक्य जोड़ना ज़रूरी है, क्य क भाषा का अपमान
प्रायः हँसी के रूप म ही होता है।
प्र.2 2. कागज पर एक पेड़ का चत्र बनाइए। इसे नाम द जए— भाषा-वृक्ष। इसक जड़ म ल खए— ‘भारतीय
संस्कृ त’; तने पर और शाखाओं पर ल खए— हद , मराठ , त मल, बांग्ला, गुजराती आ द। हर शाखा पर उस
भाषा का एक प्यारा शब्द जो ड़ए।
बनाने क व ध — बड़ा कागज़ ली जए। नीचे मोट जड़ बनाइए और उनम ल खए ‘भारतीय संस्कृ त’। तने पर ल खए ‘भारत
क भाषाएँ’। ऊपर से कई शाखाएँ नका लए — हर शाखा एक भाषा। हर शाखा के पत्ते पर उस भाषा का एक सुंदर शब्द और
उसका अथ ल खए।
Page 42 of 56
Page 44
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
शाखा (भाषा) एक प्यारा शब्द अथ
हद उजास प्रकाश, उजाला
मराठ माया ममता, स्नेह
संस्कृत स तम् संगीत
बांग्ला भालोबासा प्रेम
गुजराती मीठास मठास
पंजाबी चढ़द कला सदा ऊँचा उत्साह
त मल अन्बु प्रेम
तेलुगु पाट गीत
कन्नड़ नन्नु ड मेरी बोली
मलयालम स्नेहम् स्नेह
अस मया बहू असम का प्रमुख उत्सव
ओ ड़आ जगन्नाथ जगत के स्वामी
कश्मीरी वुछुन दे खना
उदू ख़ुलूस नश्छल प्रेम, सच्चाई
यह वृक्ष क्या सखाता है: जड़ एक है — भारतीय संस्कृ त; शाखाएँ अनेक ह। शाखा जड़ से अलग होकर जी वत
नह रह सकती और जड़ बना शाखाओं के फल नह दे सकती। यही ‘अनेकता म एकता’ का सही अथ है — एकता
का मतलब सबका एक जैसा होना नह , सबका एक जड़ से जुड़ा होना है।
प्र.3 3. समूह म मलकर कसी वषय पर एक छोटा समाचार बुले टन तैयार क जए जसम हद , अंग्रेजी और कसी
क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग हो। उदाहरण के लए, एक वषय हो सकता है— ‘कला जो जोड़ती है, बाँटती नह ।’
तैयारी क व ध — पाँच-छह के समूह बनाइए और काम बाँट ली जए — एक समाचार-वाचक हद म, एक अंग्रेज़ी म, एक क्षेत्रीय
भाषा म; एक संवाददाता जो ‘मौके से’ रपोट दे ; एक साक्षात्कार लेने वाला; और एक जो समय व क्रम सँभाले। बुले टन पाँच से सात
मनट का र खए।
नमूना बुले टन — वषय: ‘कला जो जोड़ती है, बाँटती नह ’
Page 43 of 56
Page 45
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह
a g l AglaSem · NCERT Solutions
[शीषक-संगीत, फर वाचक-1 — हद ]
. com
m a s em— हमारे
co‘भाषा संगम दवस’ म नौ भाषाओं के गीत एक ही मंच पर गाए गए।” agl
“नमस्कार। आप दे ख-सुन रहे ह ‘स्वर सेतु’ — कक्षा नौ का समाचार बुले टन। आज क मुख्य ख़बर
.
em
वद्यालय म हुए
a s
gl
a[वाचक-2 — English]
“Good morning. In today’s bulletin: students from Classes 8 and 9 presented songs
co m
.
in nine Indian languages. The message was simple — art unites, it does not divide.”
em ag
[वाचक-3 — क्षेत्रीय भाषा, जैसे मराठa]gl
as
“नमस्कार. आजची मुख्य बातमी — आमच्या शाळे त नऊ भाषांमधली गाणी एकाच मंचावर सादर झाली. कला
co m
m.
जोडते, तोडत नाही.”
m as e
.co a g l
m समय वद्यालय के प्रांगण म हूँ। यहाँ मंच पर अभी-अभी एक मराठ अभंग समाप्त हुआ है और अब भोजपुरी
[संवाददाता — मौके से]
a s eइस
gl का सोहर शुरू होने वाला है। दशक म वे वद्याथ भी ताली बजा रहे ह जन्ह इन गीत क भाषा नह आती — और
“म
a
s
यही आज क सबसे बड़ी ख़बर है।”
m a
em
.co agl
[साक्षात्कार — संगीत शक्षक से]
a s
a
प्रश्न: “सर, अलग-अलग भाषाओं के गीतgl एक मंच पर लाने का वचार कैसे आया?”
उत्तर: “लता जी ने छत्तीस से अ धक भाषाओं म गाया। उन्ह सुनते हुए लगा क सुर कसी भाषा का मोहताज नह
होता। बच्च को यही दखाना था।”
co m
m .
m as e
.co
[समापन — हद ]
a g l
s e m थ आज क मुख्य ख़बर। अंत म लता मंगेशकर क एक बात — ‘गाँव तो बह जाता है, ले कन जो नाम है, वह
la रह जाता है।’ नमस्कार।”
“यही
ag
se m
o m g l a
m
बुले टन म ध्यान रखने योग्य बात: समाचार क
.c भाषा छोट , सीधी और तथ्यपू ण होती है — उसम राय नह मलाई
a
जाती। हर ख़बर म चार बात अवश्य ह s —e क्या, कब, कहाँ और कसने। और भाषा बदलते समय अनुवाद मत
l a
ag द जए, वरना सुनने वाला ऊब जाएगा।
दोहराइए; हर भाषा म नई जानकारी
co m
m .
m4. भाषाई स्मृ त पोटली — अपने प रवार म प्रयुक्त अलग-अलग भाषाओंaकs
e
o g l
.c दाद मराठ बोलती ह , माँ हद )। उन्ह एक ‘शब्द पोटली’ म काड परaसजाइए।
प्र.4 े पाँच शब्द एकत्र क जए (जैसे–
se m
g l a
a c
m .
e
m a s
. co agl
करने क व ध — रंगीन कागज़ के छोटे -छोटे काड का टए। हर काड पर चार बात ल खए — (1) शब्द, (2) वह कस भाषा/बोली
e m
as
का है, (3) उसका अथ, (4) वह घर म कससे सुना। सब काड एक कपड़े क छोट पोटली म र खए और पोटली पर ल खए —
‘मेरी भाषाई स्मृ त’।
a g l
नमूना उत्तर — मेरी पोटली के काड:
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 44 of 56
Page 46
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
शब्द भाषा / बोली अथ कससे सुना
अंगना अवधी आँगन दाद , जब वे गाँव क बात करती ह
माया मराठ ममता, दुलार नानी, जब वे छोटे भाई को गोद म लेती ह
बहान भोजपुरी सवेरा, अगली सुबह बाबा, “ बहान चलब”
ठ क बा भोजपुरी ठ क है चाचा, फोन पर
चल्लो पंजाबी चलो पड़ोस क आंट
तड़का हद (रसोई क भाषा) छक माँ, हर दन
पोटली को जी वत र खए: हर महीने एक-दो काड और जो ड़ए। साल के अंत म ग नए क आपके घर म कतनी
भाषाओं के शब्द रहते ह — प्रायः यह संख्या तीन-चार से कम नह नकलती। हर घर अपने आप म एक छोटा भाषा
संगम है।
प्र.5 5. स्वर-कोलाज — लता जी के जीवन के प्रेरक वाक्य और गीत का चत्रमय कोलाज बनाइए।
बनाने क व ध — एक चाट पेपर ली जए। बीच म लता जी का चत्र या माइक का चत्र चपकाइए। उसके चार ओर काग़ज़ क
प चय पर उनके प्रेरक वाक्य और गीत क पं क्तयाँ लखकर चपकाइए। प त्रकाओं-अख़बार से काटे गए चत्र, संगीत के चह्न
(♪), पुराने फल्मी पोस्टर क नकल — इन सबको मलाकर कोलाज बनता है। रंग सादे र खए — सफ़ेद, सुनहरा और हल्का नीला
— क्य क वषय स्वयं सादगी का है।
कोलाज म डालने योग्य वाक्य (सब पाठ से) —
“मेरी आवाज़ ही पहचान है!”
“सबसे ज्यादा तो स्वा भमान से जीने क प्रेरणा।”
“अगर कोई बात तुम्ह सही लगती है, तो उसे करो और कसी के आगे झुकने क जरूरत नह है।”
“मुझे अपने गाने और रेकॉ डग के अलावा कसी दूसरी चीज क सुध नह रहती थी।”
“बहन, जब बहुत सुर म तार लगता है, तो टू ट जाता है।” — उस्ताद अली अकबर खाँ
“तुमने हमारी धुन म इतनी मठास घोली है।” — नौशाद
“मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नह ।”
“गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन।”
“मने अपने पताजी का नाम, थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।”
गीत क पं क्तयाँ / नाम (पाठ म उ ल्ल खत) — ‘आएगा आने वाला’ (महल), ‘हवा म उड़ता जाए मोरा लाल दुप ा मलमल का’
(बरसात), ‘चले जाना नह नैन मला के’ (बड़ी बहन), ‘मेरे ख्वाब म जो आए’ ( दलवाले दुल्ह नया ले जाएँगे), और ‘अमी जातो
अमचा गावा’ (संत तुकाराम)।
Page 45 of 56
Page 47
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
कोलाज का नयम: कोलाज म खाली जगह भी एक तत्व है। सब कुछ भर दे ने से आँख कह टकती नह । एक
वाक्य को सबसे बड़ा र खए — जैसे “मेरी आवाज़ ही पहचान है!” — और बाक को उसके चार ओर छोटा र खए।
प्र.6 6. समय-रेखा — लता जी के जीवन क महत्वपूण घटनाएँ कालानुक्रम म दशाइए।
बनाने क व ध — कागज़ पर बाएँ से दाएँ एक सीधी रेखा ख चए। उस पर बराबर दूरी पर बदु लगाइए और हर बदु के ऊपर वष
तथा नीचे घटना ल खए। जो घटनाएँ पाठ से मली ह, उन्ह एक रंग से; जो खोजबीन से मल , उन्ह दूसरे रंग से ल खए — इससे
पता चलता रहेगा क कौन-सी जानकारी कहाँ से आई।
Page 46 of 56
Page 48
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
वष घटना ोत
1929 28 सतंबर को इंदौर (मध्य प्रदे श) म जन्म; पता पं. द नानाथ मंगेशकर, माता शेवंती (शुद्धमती) पाठ क भू मका
+ खोजबीन
लगभग मात्र पाँच वष क आयु म पता से संगीत क प्रारं भक शक्षा पाठ से
1934
1942 पता का नधन; 13 वष क आयु म माँ और छोटे भाई-बहन (मीना, आशा, उषा, हृदयनाथ) का पाठ से
उत्तरदा यत्व; आजी वका के लए अ भनय व गायन
1942–48 छह-सात फल्म म अ भनय, जो उन्ह कभी अच्छा नह लगा — “मुझे कभी अच्छा नह लगा पाठ से
मेकअप करना”
1949–50 नणायक वष — ‘आएगा आने वाला’ (महल, संगीत खेमचंद प्रकाश), ‘हवा म उड़ता जाए’ पाठ से
(बरसात, शंकर-जय कशन), ‘चले जाना नह नैन मला के’ (बड़ी बहन, हुस्नलाल-भगतराम)। एक
नए युग का सूत्रपात
पचास का द वाली के दन तड़के संगीतकार के घर मठाई पहुँचाने का चलन; ‘तराना’, ‘बाजार’, ‘संग दल’ के पाठ से
दशक लए पाश्वगायन
1960 कोरस गाने वाल का जो समूह मला, वह लगभग अस्सी तक साथ चला; ‘मुगल-ए-आजम’ का पाठ + खोजबीन
‘प्यार कया तो डरना क्या’
1963 27 जनवरी को नई दल्ली म ‘ऐ मेरे वतन के लोगो’ का पहला गायन — 1962 के युद्ध म शहीद खोजबीन
सै नक क स्मृ त म
1969 पद्म भूषण खोजबीन
1980 के रेकॉ डग क पद्ध त बदली — कोरस पहले, मुख्य गायन बाद म पाठ से
आस-पास
1989 दादासाहेब फाल्के पुरस्कार खोजबीन
1999 पद्म वभूषण खोजबीन
2001 भारत रत्न — दे श का सव च्च नाग रक सम्मान पाठ क भू मका
+ खोजबीन
2007 ांस का सव च्च नाग रक सम्मान ‘ऑ फ़सर ऑफ़ द लीजन ऑफ़ ऑनर’ खोजबीन
2022 6 फरवरी को मुंबई म नधन खोजबीन
ध्यान र खए: समय-रेखा बनाते समय हर त थ को कसी वश्वसनीय ोत से मलाकर ही ल खए — पाठ्यपुस्तक,
वश्वकोश, या सरकारी पुरस्कार-सूची। इंटरनेट पर एक ही घटना क अलग-अलग त थयाँ मल सकती ह; ऐसे म दो-
तीन ोत मलाकर दे खए।
Page 47 of 56
Page 49
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
भाषा संगम — पृष्ठ 82
भाषा से संवाद
भाषा से सं वाद भाषा सं ग म
प्र.1 “उस दन घर म संगीत क सभा होती थी।” नीचे ‘संगीत’ शब्द के लए सं वधान क आठव अनुसूची म
स म्म लत कुछ भारतीय भाषाओं म प्रयुक्त शब्द क सूची द गई है। • इनके अ त रक्त य द आप ‘संगीत’ शब्द
को कसी और भाषा म भी जानते ह तो उस भाषा म भी ल खए।
पुस्तक म द गई सूची पहले ठ क से दे ख ली जए —
भाषा ‘संगीत’ भाषा ‘संगीत’
हद संगीत नेपाली संगीत
संस्कृत स तम् बांग्ला संगीत
पंजाबी संगीत अस मया संगीत
उदू मूसीक , मौ सक म णपुरी ईशै
कश्मीरी मूसीक , संगीत ओ ड़आ संगीत
सधी संगीत तेलुगु संगीतमु
मराठ संगीत कला त मल संगीतम्, इशै
गुजराती संगीतकळा (ला) मलयालम संगीतम्
क कणी संगीत कन्नड़ संगीत
इनके अ त रक्त — और भाषाओं म ‘संगीत’ (नमूना उत्तर):
Page 48 of 56
Page 50
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
भाषा शब्द
m as e
.co
भोजपुरी / अवधी / ब्रज संगीत, गीत-बाजा
a g l
se m
g l a
मै थली संगीत
a
बोडो / संताली संगीत (ओनसाय / सेरेञ — गीत के अथ म)
co m
m . ag
se
डोगरी संगीत
l a
अंग्रेज़ी
ag music
co m
फ़ारसी / अरबी मूसीक़
e m.
m l as
.co a g
इस सूची से क्या दखाई दे ता है: उन्नीस म से लगभग चौदह भाषाओं म एक ही शब्द है — संगीत, क्य क वह
कृm
संस्e
a s
gl — उदू और कश्मीरी म मूसीक अरबी-फ़ारसी से आया है, और म णपुरी का ईशै तथा त मल का इशै एक ही मूल के
त के स तम् से आया है (सम् + गीत = साथ-साथ गाया हुआ)। जहाँ शब्द अलग है, वहाँ भी कारण साफ़ है
a
s
ह। यानी भाषाएँ अलग ह, पर शब्द के रास्ते आपस म मलते-जुलते चलते ह — ठ क वैसे ही जैसे राग अलग-अलग
m a
.co agl
ह, पर सुर सात वही ह।
se m
g l a
a
m
• उपयुक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा म भी ल खए।
co
प्र.2
m .
m as e
.co a g l
a s em
वाक्य है — “उस दन घर म संगीत क सभा होती थी।” इसे अपनी मातृभाषा म ल खए। कुछ भाषाओं म नमूना नीचे दया है;
agl आप अपनी भाषा का रूप घर के कसी बड़े से पूछकर ल खए।
se m
com g l a
m . a
ase
agl
co m
m .
m as e
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 49 of 56
Page 51
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
भाषा / बोली वाक्य
हद उस दन घर म संगीत क सभा होती थी।
मराठ त्या दवशी घरात संगीताची मैफल होत असे।
भोजपुरी ओह दन घरे म संगीत के सभा होत रहे।
अवधी वा दन घरै मा संगीत कै सभा होत रही।
राज ानी वा दन घर म संगीत री सभा होवती।
पंजाबी उस दन घर वच संगीत द मह फ़ल हुंद सी।
गुजराती ते दवसे घरमां संगीतनी सभा थती हती।
बांग्ला सेइ दन बा ड़ते संगीतेर आसर बसतो।
संस्कृत त स्मन् दने गृहे स तसभा भव त स्म।
अनुवाद करते समय ध्यान द जए: हर भाषा म ‘सभा’ के लए अपना शब्द है — मराठ म मैफल, पंजाबी म
मह फ़ल, बांग्ला म आसर। य द आप इन्ह छोड़कर हर जगह ‘सभा’ ही लख दगे, तो वाक्य व्याकरण से ठ क रहेगा
पर उस भाषा जैसा नह लगेगा। अनुवाद म यही सबसे बारीक बात होती है।
खोजबीन — लता मंगश
े कर से जान-पहचान — पृष्ठ 82
खोजबीन
खोजबीन प रयोजना
प्र.1 1. “जब म बड़ी हो जाऊँगी, तब मुझे भी ऐसे ही मेडल मलगे।” लता जी ने बचपन म मेडल पाने क कल्पना क
और जीवन म अन गनत पुरस्कार और मेडल प्राप्त भी कए। पता क जए क उन्ह ने जीवन-भर म कौन-कौन से
‘मेडल’ और पुरस्कार प्राप्त कए?
बचपन म कुमार गंधव को काली शेरवानी पर मेडल लगाए दे खकर लता जी के मन म जो इच्छा जगी थी, वह जीवन-भर म कई गुना
पूरी हुई। मुख्य सम्मान इस प्रकार ह —
Page 50 of 56
Page 52
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
वष सम्मान कसका
1969 पद्म भूषण भारत सरकार — तीसरा सव च्च नाग रक सम्मान
1989 दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सनेमा का सव च्च सम्मान
1997 महाराष्ट्र भूषण महाराष्ट्र सरकार
1999 पद्म वभूषण भारत सरकार — दूसरा सव च्च नाग रक सम्मान
2001 भारत र त्न दे श का सव च्च नाग रक सम्मान — यह पाने वाली
वे संगीत जगत क गनी-चुनी वभू तय म ह
2007 ऑ फ़सर ऑफ़ द लीजन ऑफ़ ऑनर ांस सरकार का सव च्च नाग रक सम्मान
व भन्न राष्ट्रीय फ़ल्म पुरस्कार — सवश्रेष्ठ पाश्वगा यका (तीन बार) भारत सरकार
वष
व भन्न फ़ल्मफेयर सवश्रेष्ठ पाश्वगा यका पुरस्कार (अनेक बार) तथा 1974 के बाद उन्ह ने नए गायक को अवसर दे ने
वष फ़ल्मफेयर लाइफ़टाइम अचीवमट के लए यह पुरस्कार लेना स्वयं बंद कर दया
— अनेक राज्य तथा वश्व वद्यालय क मानद उपा धयाँ; मध्य प्रदे श —
सरकार ने उन्ह के नाम पर ‘लता मंगेशकर पुरस्कार’ आरंभ कया
खोजबीन कैसे क जए: पुरस्कार क सूची के लए सबसे भरोसेमंद ोत ह — भारत सरकार के पद्म पुरस्कार का
सरकारी पृष्ठ, राष्ट्रीय फ़ल्म पुरस्कार क वा षक ववर णका, और पुस्तकालय का कोई वश्वकोश। एक ही तथ्य कम-
से-कम दो ोत से मलाइए, क्य क इंटरनेट पर वष अकसर गलत मलते ह।
सोचने क बात: बचपन म जस मेडल क कल्पना क थी, वह मल जाने के बाद भी उन्ह ने उसे कभी पहनकर नह
दखाया — वे साद सफ़ेद साड़ी म ही मंच पर आती रह । इससे उनके व्य क्तत्व का वही पक्ष उजागर होता है जो पूरे
साक्षात्कार म दखता है — उपल का सुख, पर प्रदशन का मोह नह ।
प्र.2 2. पाठ म लता मंगेशकर ने कई फल्म और गीत का उल्लेख कया है। इंटरनेट क सहायता से इनम से कसी
एक फल्म और गीत को दे खकर उसके वषय म अपने वचार ल खए। आपको यह फल्म और गीत कैसा लगा
और क्य ?
पाठ म उ ल्ल खत फ़ल्म और गीत —
Page 51 of 56
Page 53
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
फ़ल्म गीत संगीतकार
महल (1949) ‘आएगा आने वाला’ खेमचंद प्रकाश
बरसात (1949) ‘हवा म उड़ता जाए मोरा लाल दुप ा मलमल का’ शंकर-जय कशन
बड़ी बहन (1949) ‘चले जाना नह नैन मला के’ हुस्नलाल-भगतराम
दलवाले दुल्ह नया ले जाएँगे (1995) ‘मेरे ख्वाब म जो आए’ ज तन-ल लत
संत तुकाराम (मराठ ) ‘अमी जातो अमचा गावा, अमचा राम-राम ध्यावा’ प्रभात फ़ल्म कंपनी क फ़ल्म
छत्रप त शवाजी अं तम गीत क दो पं क्तयाँ लता जी ने स्वयं गाईं नदशक भालजी पढारकर
तराना, बाजार, संग दल पाश्वगायन —
नमूना उत्तर — गीत: ‘आएगा आने वाला’ ( फ़ल्म ‘महल’, 1949)
यह गीत सुनते ही समझ आ जाता है क इसे ‘नए युग का सूत्रपात’ क्य कहा गया। इसक सबसे बड़ी वशेषता है इसका आरंभ —
आवाज़ पहले बहुत दूर से, धुँधली-सी सुनाई दे ती है और धीरे-धीरे पास आती जाती है। लता जी ने पाठ म इसका रहस्य स्वयं बताया
है — “मुझे हॉल म बहुत दूर से चलकर दबे पाँव रेकॉ डग वाले माईक तक आना पड़ता था और उसी अनुपात म रेकॉ डग के माईक
पर स्वर का उतार-चढ़ाव कैद कया जाता था।” आज यह काम कंप्यूटर पर एक क्लक से हो जाता है; तब यह पाँव से चलकर कया
गया था।
मुझे यह गीत इस लए अच्छा लगा क इसम आवाज़ स्वयं अ भनय कर रही है। फ़ल्म म परदे पर मधुबाला ह, पर डर, प्रतीक्षा और
रहस्य — तीन भाव गले से पैदा होते ह, चेहरे से नह । गीत क धुन म बहुत कम वाद्य ह, इस लए आवाज़ के चार ओर एक
खालीपन बना रहता है, जो भू तया वातावरण को और गहरा कर दे ता है। यह गीत सखाता है क प्रभाव साधन क अ धकता से
नह , उनके सही चुनाव से बनता है।
अपना उत्तर लखते समय: केवल ‘अच्छा लगा’ मत ल खए। तीन बात अवश्य ल खए — (1) गीत/ फ़ल्म कस
बारे म है, (2) उसम आपको कौन-सी एक चीज़ सबसे वशेष लगी (धुन, शब्द, आवाज़, दृश्य), और (3) वह वशेष
क्य लगी। तीसरी बात ही आपका अपना वचार है।
प्र.3 3. अब आप नीचे द गई इंटरनेट कड़ी क सहायता से लता मंगेशकर ारा गाया हुआ गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगो’
सुन सकते ह।
यह ग त व ध सुनने क है — पुस्तक चाहती है क आप गीत को केवल पढ़ नह , सुन। सुनने से पहले इतना जान ली जए, तो गीत
कह गहरा उतरेगा —
Page 52 of 56
Page 54
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
बात ववरण
गीतकार क व प्रद प
संगीतकार सी. रामचंद्र — जनका नाम पाठ म भी आया है
गा यका लता मंगेशकर
पहला गायन 27 जनवरी 1963, नई दल्ली — गणतंत्र दवस के अगले दन हुए समारोह म
पृष्ठभू म सन् 1962 के भारत-चीन युद्ध म शहीद हुए सै नक क स्मृ त म। यह कसी फ़ल्म का गीत नह है — यह एक
श्रद्धांज ल-गीत है।
प्र सद्ध “ऐ मेरे वतन के लोगो, ज़रा आँख म भर लो पानी / जो शहीद हुए ह उनक , ज़रा याद करो क़रबानी”
पं क्तयाँ
प्र सद्ध प्रसंग कहा जाता है क यह गीत सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू क आँख भर आई थ ।
सुनते समय इन बात पर ध्यान द जए —
गीत क ग त बहुत धीमी है। तेज़ लय जोश जगाती है, धीमी लय शोक और आदर — यहाँ दूसरा भाव चा हए था।
पहली पं क्त म ही ‘आँख म भर लो पानी’ कहकर श्रोता से कुछ माँगा गया है। गीत उपदे श नह दे ता, नवेदन करता है —
इसी लए वह चुभता नह , भीतर उतर जाता है।
पूरे गीत म गा यका क आवाज़ कह ऊँची नह होती। शोक को चल्लाकर नह , ठहरकर व्यक्त कया गया है।
पुस्तक के इस अंश म एक बात खटकती है: प्रश्न कहता है “नीचे द गई इंटरनेट कड़ी क सहायता से”, पर मु द्रत
पृष्ठ 82 पर उसके नीचे कोई कड़ी या क्यू-आर कोड छपा नह है। ऐसे म वद्यालय के पुस्तकालय, शक्षक क
सहायता, या पाठ के आरंभ (पृष्ठ 62) पर दए गए क्यू-आर कोड से काम चलाइए। सुनने के बाद अपनी लेखन-
पु स्तका म तीन-चार वाक्य ल खए क गीत सुनते समय आपको क्या महसूस हुआ।
इस गीत का लता जी के जीवन म ान: उन्ह ने हज़ार प्रेमगीत गाए, पर जस गीत से उनका नाम सबसे अ धक
जुड़ा, वह न फ़ल्म का है, न प्रेम का — वह शहीद का है। यही उस बात को सद्ध करता है जो वे साक्षात्कार के अंत
म कहती ह — “मेरा गाना अमर है।” गीत तभी अमर होता है जब वह कसी एक व्य क्त का न रहकर पूरे दे श का
हो जाए।
अध्याय — एक नज़र म
रचनाकार — यत द्र मश्र का जन्म सन् 1977 म अयोध्या (उत्तर प्रदे श) म हुआ। उन्ह ने लखनऊ वश्व वद्यालय से हद म
एम.ए. कया। क वता, संगीत और अन्य ल लत कलाओं के साथ-साथ समाज और संस्कृ त के व वध क्षेत्र म उनक गहरी
रु च है। उनके तीन काव्य-संग्रह ह — यदा-कदा, अयोध्या तथा अन्य क वताएँ और ोढ़ पर आलाप। शास्त्रीय गा यका
ग रजा दे वी पर उन्ह ने ग रजा पुस्तक लखी, ‘ जदे व’ क ग्रंथावली (2000) का सह-संपादन कया, और स्पक मैके के
Page 53 of 56
Page 55
as e
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co
वरासत-2001 के लए रूपंकर कलाओं पर क द्रत थाती का संपादन कया। वे अद्धवा षक प त्रका स हत का संपादन करते
m
ह।
se m.
o m l a
c देता है, और छपते समय दोन के नाम के साथ पूरी बातचीत ज्य -क -त्य दagजाती है। यहाँ प्रश्न पूछने वाले
है और दूसरा.उत्तर
वधा — यह पाठ कहानी या नबंध नह , साक्षात्कार (इंटरव्यू) है। साक्षात्कार वह गद्य- वधा है जसम एक व्य क्त प्रश्न पूछता
m
sद्रe मश्र (साक्षात्कारकता) और उत्तर देने वाली ह लता मंगेशकर (साक्षात्काय / साक्षात्कार-दाता)। पाठ का शीषक भी
a
हlयत
agलता जी के ही एक वाक्य-भाव से उठाया गया है।
com
बातचीत का आरंभ — यत द्र मश्र ‘द द ’ संबोधन से बात शुरू करते ह और कहते ह क उनका प्रयास लता जी के जीवन क
m .
‘दुलभ छ वय ’ से उन करोड़ प्रशंसक को मलवाना है जो उन्ह सुनकर अपना जीवन साथक ढं ग से शुरू करने क प्रेरणा पाते
e ag
s
gla
ह। लता जी उत्तर दे ती ह — “आप पू छए, म आपके प्रश्न का जवाब दे ने के लए तैयार हूँ” और यह भी क जतना प्रेम उन्ह
मला, उतना आभार वे गाकर भी नह जताaपाईं।
पता क स्मृ तयाँ — साक्षात्कार का सबसे भरा-पूरा हस्सा पं. द नानाथ मंगेशकर का है। वे बना डाँटे, केवल गंभीरता से
c o m
.
दे खकर बच्च को समझा दे ते थे — “समझ गए न?” उनक ामा कंपनी के नाटक रात नौ बजे से दे र रात दो-तीन बजे तक
s e mबनाकर राग बदल देते
चलते थे, उनम पाँच अंक और लंबी रागदारी वाला गायन होता था। वे राग गाते हुए कसी सुर को षड् ज
. c
और फर उसी omसुर म लौट आते थे। मराठ रंगमंच पर कनाटक और पंजाब का संगीत पहली a g laवही लाए। उनके शास्त्रीय
बार
s e mके रेकॉड एच.एम.वी. से नकले और राग जयजयवंती का एक रेकॉड मेगाफोन कंपनी ने बाजार म उतारा।
glaमूल्य और उत्तरदा यत्व — पता से लता जी ने सबसे अ धक स्वा भमान सीखा — “अगर कोई बात तुम्ह सही लगती है, तो
गायन
a उसे करो और कसी के आगे झुकने क जरूरत नह है।” माँ का भी वही संस्कार था — “कैसे भी स्वा भमान के साथ जी लेना
m a s
.co agl
है, मगर कसी के आगे जाकर हाथ नह पसारना है।” सन् 1942 म पता के नधन के बाद, मात्र 13 वष क आयु म, उन्ह ने
se m
माँ और छोटे भाई-बहन का भार उठाया; रेकॉ डग सुबह से रात तक चलती और एक स्टू डयो से दूसरे-तीसरे स्टू डयो के चक्कर
म पूरा दन बीत जाता।
g l a
a
त्योहार, लोक और परंपरा — लता जी बताती ह क उनके घर होली उस रूप म नह मनती थी; हो लका क राख से खेले
om
जाने वाले खेल को वे ‘गुड़वड़’ कहते थे और पाँचव दन रंग-पंचमी पर माँ- पताजी केसर छड़कते थे। महाराष्ट्र म नवरा त्र
. c
‘गु ड़ पड़वा’ से आरंभ होती है और वहाँ यह पव दुगा-आराधना नह , राम-आगमन मानकर मनाया जाता है। ववाह के बाद नई
m a s emहो रहा है।
बहू के आने पर होने वाला मंगलागौर स्त्रय का गीत-नृत्य का उत्सव है, जो अब धीरे-धीरे समाप्त
o सार के संस्मरण — द वाली क सुबह साढ़े पाँच बजे मठाई लेकर नौशादaसाहब
संगcीत-सं
. gl के घर पहुँचने का वाकया, और
a semनौशाद साहब का वह वाक्य — “तुमने हमारी धुन म इतनी मठास घोली है” — साक्षात्कार का सबसे आत्मीय क्षण है। कोरस
agl क लड़ कय (क वता, गांधारी, कल्याणी, सुमन, रेखा) के साथ वे ज़मीन पर बैठकर बात करती थ । उस्ताद अली अकबर खाँ
के सरोद का तार टू टने पर उनका कथन — “बहन, जब बहुत सुर म तार लगता है, तो टू ट जाता है” — पाठ का मम-वाक्य है,
se m
com g l a
.
जससे लता जी यह मानती ह क संगीत म असीम श क्त है।
e m a
रaा s
मूल संवेदना — साक्षात्कार के अंत म लता जी मराठ कहावत सुनाती ह — ‘गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’ (गाँव तो
a g l
बह जाता है, पर नाम रह जाता है)। ‘मे गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नह ’ कहकर वे मृत्यु को सहजता से स्वीकार करती
ह और अंत म हर कलाकार तथा नेक इंसान के लए प्राथना करती ह। पूरे पाठ से जो छ व बनती है, वह सादगी, समपण और
m
आत्मसम्मान क है — प्र स द्ध क नह ।
. co
se m
अभ्यास क्या माँगता है — इस पाठ का अभ्यास चार तरह का काम कराता है — (1) रचना से संवाद म तक स हत वकल्प
o m l a
चुनना, पं क्तय से व्य क्तत्व-गुण पहचानना और एक उत्तर से अनेक प्रश्न बनाना; (2) वधा से संवाद म साक्षात्कार के आठ
.cमुख्य बदुओं क पं क्तयाँ पाठ म से ढूँ ढ़ना और यह तय करना क यह औपचा aरकgसंवाद है या आत्मीय बातचीत; (3) वषय
m से संवाद म शास्त्रीय संगीत, लोकगीत, सामू हकता और साइबर सुरक्षा पर सोचना; और (4) भाषा से संवाद म ‘हाथ’ के
l a se
ag
.c
मुहावरे, कहावत का अनुवाद और भाषा संगम।
s e m
m a
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 54 of 56
Page 56
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
अप्र तम बेजोड़, अनुपम “द द , आपके संगीत क अप्र तम यात्रा भीमसेन जोशी क गायक
पर बातचीत शुरू करते ह…” अप्र तम थी।
आकंठ कं ठ तक, पूण रूप से “संगीत म आकंठ डू बे हुए आपके महान वह अपने काम म आकंठ डू बा
जीवन…” रहता है।
सम पत समपण िकया हुआ , िदया हुआ , सौंपा हुआ “द वानगी क हद तक सम पत वे जीवन-भर शक्षा के काम को
श्रोताओं…” सम पत रहे।
स्मरण याद, स्म ृित “वे कौन-सी स्मृ तयाँ ह, जो आज भी दाद क कही बात आज भी मेरे
आपके स्मरण म जी वत ह?” स्मरण म है।
रागदारी ठीक राग गाने का ढं ग या ि या “ फर उसम लंबी-लंबी रागदारी वाले गायन मंच पर रागदारी गायन सुनकर
क भी परंपरा थी।” श्रोता मंत्रमुग्ध रह गए।
राग िविशष्ट ताल-लययुक्त ध्विन; मन को पसन्न करना, “एक रेकॉड उन्ह ने राग जयजयवंती का राग भैरव प्रातःकाल गाया जाता
पीित, अनुर ाग भी बनाया था।” है।
स्वा भमान आत्मसम्मान, अपनी पितष्ठा का अिभमान “सबसे ज्यादा तो स्वा भमान से जीने क स्वा भमान बेचकर मली
प्रेरणा।” सफलता कस काम क ?
बैकुंठ स्वग “तुकाराम सदे ह बैकुंठ जाते ह…” भक्त-कथाओं म संत बैकुंठ को
जाते बताए गए ह।
अनुयायी पीछे चलने वाला, अनुग ामी “ये तीन तुकाराम के अनुयायी बनकर रोते गांधीजी के अनुयायी दे श-भर म
थे।” फैले थे।
माफ़त माध्यम से , के ज़िरए “जब फल्म क दु नया म अ भनय के यह पत्र मुझे मेरे मत्र क माफ़त
माफ़त ही आई।” मला।
सबब कारण, हेत ु “वैसे ही हमेशा क तरह एक चुनौती का दे र से पहुँचने का सबब बताइए।
सबब बनी रह ?”
अलबत्ता िनस्संदे ह, हाँ ज़रूर “अलबत्ता म उस जमाने से लेकर बाद तक खेल क ठन था, अलबत्ता हम
बहुत मेहनत से काम करती थी।” हारे नह ।
सूत्रपात काय का आरंभ “इससे एक नए युग का सूत्रपात होता है।” इस भाषण से आंदोलन का
सूत्रपात हुआ।
आमद आना, आगमन; आय “उस समय ‘आएगा आने वाला’ क आमद नई फ़सल क आमद से बाज़ार
कैसी होती?” भर गया।
पाश्वगायन िकसी अिभनेता या अिभने ी के बदले नेपथ्य में “…जैसी फल्म के लए पाश्वगायन कया पाश्वगायन म आवाज़ ही
बैठकर गाना, स्वरदान था।” अ भनय करती है।
Page 55 of 56
Page 57
कक्षा 9 हद अध्याय 4 ऐसी भी बात होती ह AglaSem · NCERT Solutions
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
परहेज िकसी वस्तु से बचना “आपने रंग से हमेशा परहेज कया है।” मीठे से परहेज करना ही अच्छा
है।
वाकया घटना “एक बार बड़ा मजेदार वाकया हुआ…” यह वाकया मुझे आज भी याद
है।
खै रयत कु शल, भलाई “लता बाई सब खै रयत तो है?” घर से खै रयत का समाचार आ
गया।
फाग फाग नु में गाया जाने वाला गीत; होली का राग-रंग “होली के मौके पर फाग और धमार…” होली आते ही गाँव म फाग
गूँजने लगे।
धमार फाग का एक भेद (संग ीत), एक ताल “होली के मौके पर फाग और धमार…” धमार ताल चौदह मात्राओं क
होती है।
सोहर बच्चे के जन्म के अवसर पर गाया जाने वाला “ईश्वर के जन्म के कारण सोहर और भाई के जन्म पर दाद ने सोहर
मंग लगीत बधावा…” गाया।
बधावा मंग लाचार, बधाई; जन्म आिद के अवसर पर भेजा “…सोहर और बधावा आ द गाने का पड़ोस से बधावा और मठाई
जाने वाला उपहार मामला।” आई।
मसलन उदाहरण के रूप में “मसलन स्वामी ह रदास और तानसेन के मसलन, यही दे खए क पानी
युग क बहुत सारी कथाओं म…” कतना बरबाद होता है।
अप्रत्या शत िजसकी आशा न रही हो, आकिस्मक “संगीत म वह असीम श क्त है क कुछ प रणाम बल्कुल अप्रत्या शत
अप्रत्या शत वह जरूर रच दे ता है।” नकला।
अ तरेक आवश्यकता से अिधक, आिधक्य “अगर म अ तरेक नह कर रहा…” प्रशंसा का अ तरेक झूठा लगने
लगता है।
वा जब उिचत “…तो यह कहना वा जब है क आप अमर आपक माँग बल्कुल वा जब
ह।” है।
मंगलागौर महारा में िववाह के बाद नई बहू के आने पर होने “यह मंगलागौर कहलाता है।” मंगलागौर म मोहल्ले क सब
वाली पूजा, िजसमें िस् याँ गाती-नाचती है ं स्त्रयाँ जुट ।
गु ड़ पड़वा महारा में नववष का पव, िजसमें घर के बाहर “नवरा त्र के पहले दन हम ‘गु ड़ पड़वा’ गु ड़ पड़वा पर हर घर के बाहर
‘ग िु ड़’ बाँध ी और कलश-स्थापना की जाती है मनाते ह।” गु ड़ सजी थी।
Page 56 of 56