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Haryana Board
Syllabus
2023-24
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ह रयाणा व यालय श ा बोड
पा य म एवं अ यायवार अंको का वभाजन (2023-24)
क ा-बारहवीं वषय: ह द (ऐि छक) कोड:523
सामा य नदश:
1. संपूण पा य म के आधार पर एक वा षक पर ा होगी।
2. वा षक पर ा 80 अंक क होगी और आंत रक मू यांकन 20 अंक का होगा।
3. आंत रक मू यांकन के लए:
न नानुसार आव धक मू यांकन होगा:
क) 4 अंक के लए दो SAT पर ा आयोिजत क जाएगी िजनका अं तम
आंत रक मू यांकन के लए 04 अंक का भारांक होगा।
ख) 2 अंक के लए एक अध वा षक पर ा आयोिजत क जाएगी िजसका
अं तम आंत रक मू यांकन के लए 02 अंक का भारांक होगा।
ग) 2 अंक के लए वषय श क CRP (क ा क क भागीदार ) के लए
मू यांकन करगे और अ धकतम 02 अंक दगे।
घ) 2 अंक के लए एक ी-बोड पर ा आयोिजत क जाएगी िजसका अं तम
आंत रक मू यांकन के लए 02 अंक का भारांक होगा।
ङ) 5 अंक के लए छा वारा एक प रयोजना काय कया जाएगा िजसका
अं तम आंत रक मू यांकन के लए 05 अंक का भारांक होगा।
च) 5 अंक के लए व यथ क उपि थ त के न नानुसार 05 अंक दान
कए। जाएँगे :-
75% से 80% तक - 01 अंक
80% से अ धक से 85% तक - 02 अंक
85% से अ धक से 90% तक - 03 अंक
90% से अ धक से 95% तक - 04 अंक
95% से अ धक से 100% तक - 05 अंक
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पा य म संरचना (2023-24)
क ा- बारहवीं वषय: ह द (ऐि छक) कोड:523
पु तक का नाम अ याय अंक
रचना मक बोध अप ठत ग यांश 10
अप ठत प यांश
अंतरा भाग-2 रामचं शु ल - ेमघन क छाया - मृ त 19
(ग य खंड) पं डत चं धर शमा गल
ु ेर - सु म रनी के मनके
फणी वरनाथ 'रे ण'ु - संव दया
भी म साहनी - गांधी, नेह और या सेर अराफ़ात
असगर वजाहत – शेर,पहचान,चार हाथ, साझा
नमल वमा – जहां कोई वापसी नह ं
ममता का लया- दस
ू रा दे वदास
हजार साद ववेद – कुटज
अंतरा भाग-2 जयशंकर साद - (क) दे वसेना का गीत 20
(ख) कान लया का गीत
(का य खंड)
सूयकांत पाठ ' नराला'- सरोज मृ त
सि चदानंद ह रानंद वा यायन- 'अ ेय'
(क)यह द प अकेला
(ख) मने दे खा, एक बूँद
केदारनाथ संह - (क) बनारस
(ख) दशा
रघुवीर सहाय - (क) वसंत आया
(ख) तोड़ो
तुलसीदास - (क) भरत राम का ेम
(ख) पद
म लक मह
ु मद जायसी - बारहमासा
व याप त - पद
घनानंद - क व
अंतराल भाग -2 सूरदास क झोपड़ी 6
ब कोहर क माट
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अपना मालवा
अ भ यि त और 1) व भ न मा यम के लए लेखन 15
2) प कार य लेखन के व भ न प और लेखन या
मा यम
3) वशेष लेखन- व प और कार
4) कैसे बनती है क वता
5) नाटक लखने का याकरण
6) कैसे लख कहानी
7) कैसे कर कहानी का ना य पांतरण
8) कैसे बनता है रे डयो नाटक
9) नए और अ या शत वषय पर लेखन
नै तक श ा 1. ईश व दना 10
2. भि तयोग
3. सिू त सौरभ
4. हवलदार अ दल
ु हमीद
5. अ टादश लोक गीता
6. दग
ु ा भाभी
7. व ानाचाय डॉ. जगद श च बसु
8. अ हंसा के साधक महा मा बु ध
9. मदन लाल ढ ंगरा
10. शा वत नै तक मू य
11. गो वामी तुलसीदास
12. संगठन-सू त
13. लौहपु ष सरदार व लभभाई पटे ल
14. करतार संह सराबा
15. तीन मछ लयाँ
16. व छता
17. हे मच व मा द य
18. जगत ् क उ प
19. पार प रक स भावना
कुल योग 80
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अंतरा भाग-2 (ग य खंड):
1) ेमघन क छाया म ृ त सं मरणा मक नबंध म शु ल जी ने हंद भाषा एवं सा ह य
के त अपने ारं भक झान का बड़ा रोचक वणन कया है। ेमघन के यि त व
ने शु ल जी क समवय क मंडल को कस तरह भा वत कया, हंद के त कस
कार आक षत कया तथा कसी रचनाकार के यि त व नमाण आ द से संबं धत
पहलुओं का बड़ा च ाकषक च ण इस नबंध म कया गया है।
2) पं डत चं धर शमा गल
ु ेर सु म रनी के मनके नाम से तीन लघु नबंध-बालक बच गया,
घड़ी के पुज और ढे ले चुन लो पा यपु तक म दए गए ह। बालक बच गया नबंध का
मूल तपा य है श ा हण क सह उ । लेखक मानता है क हम यि त के मानस
के वकास के लए श ा को तुत करना चा हए, श ा के लए मनु य को नह ं।
हमारा ल य है मनु य और मनु यता को बचाए रखना मनु य बचा रहे गा तो वह समय
आने पर श त कया जा सकेगा। लेखक ने अपने समय क श ा णाल और
श क क मान सकता को कट करने के लए अपने जीवन के अनुभव को हमारे
सामने अ यंत यावहा रक प म रखा है। घड़ी के पज
ु म लेखक ने धम के रह य को
जानने पर धम उपदे शक वारा लगाए गए तबंध को घड़ी के टांत वारा बड़े ह
रोचक ढं ग से तुत कया है। ढे ले चुन लो म लोक व वास म न हत अंध व वासी
मा यताओं पर चोट क गई है। तीन नबंध समाज क मूल सम याओं पर वचार
करने वाले ह। इनक भाषा शैल सरल, बोलचाल क होते हुए भी गंभीर ढं ग से वषय
वतन करने वाल ह।
3) फणी वर नाथ रे णु संव दया कहानी म मानवीय संवेदना क गहन एवं वल ण पहचान
तत
ु हुई है। असहाय और सहनशील नार मन के कोमल तंतु क , उसके दख
ु और
क णा क , पीड़ा तथा यातना क ऐसी सू म पकड़ रे णु जैसे ‘आ मा के श पी’ वारा
ह संभव है। रे णु ने बड़ी बहु रया क पीड़ा को उसके भीतर के हाहाकार को संव दया के
मा यम से अपनी पूर सहानुभू त दान क है। लोकभाषा क नींव पर खड़ी संव दया
कहानी पहाड़ी झरने क तरह ग तमान है। उसक ग त, लय, वाह, संवाद और संगीत
पढ़ने वाले के रोम-रोम म झंकृत होने लगता है।
4) भी म साहनी - गांधी, नेह और या सेर अराफ़ात उनक आ मकथा आज के अतीत
का एक अंश है। जो क एक सं मरण है। इसम लेखक ने कशोराव था से ौढ़ाव था
तक के अपने अनुभव को म ृ त के आधार पर श दब ध कया है। भावशाल श द
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च के मा यम से तत
ु कया है। तत
ु सं मरण अ यंत रोचक, सरस एवं पठनीय
बन पड़ा है य क भी म साहनी ने अपने रोचक अनुभव को बीच-बीच म जोड़ दया
है । इस पाठ के मा यम से रचनाकार के यि त व के अ त र त रा यता, दे श ेम
और अंतररा य मै ी जैसे मु दे भी पाठक के सामने उजागर हो जाते ह।
5) असगर वजाहत - शेर, पहचान, चार हाथ और साझा नाम से उनक चार लघुकथाएँ द
गई ह। शेर तीका मक और यं या मक लघुकथा है। शेर यव था का तीक है िजसके
पेट म जंगल के सभी जानवर कसी न कसी लोभन के चलते समाते चले जा रहे ह।
पहचान म राजा क बहर , गँूगी और अंधी जा पसंद आती है जो बना कुछ बोले बना
कुछ सुने और बना कुछ दे खे उसक आ ा का पालन करती रहे। कहानीकार ने इसी
यथाथ क पहचान कराई है। भूमंडल करण और उदार करण के दौर म इ ह ग त और
उ पादन से जोड़कर संगत और उर भी ठहराया जा रहा है। चार हाथ पँज
ू ीवाद यव था
म मजदरू के शोषण को उजागर करती है। पँज
ू ीप त भाँ त-भाँ त के उपाय कर मजदरू
को पंगु बनाने का यास करते ह।साझा म उ योग पर क जा जमाने के बाद पँज
ू ीप तय
क नजर कसान क जमीन और उ पाद पर जमी है। गाँव का भु वशाल वग भी
इसम शा मल है । वह कसान को साझा खेती करने का दे ता है और उसक सार फसल
हड़प लेता है । कसान को पता भी नह ं चलता और उसक सार कमाई हाथी के पेट म
चल जाती है। यह हाथी और कोई नह ं बि क समाज का बना और भु वशाल वग है
जो कसान को भीख म डालकर उसक सार मेहनत को हजम करता है। यह कहानी
आजाद के बाद कसान क बदहाल का वणन करते हुए उसके कारण क पहल करती
है ।
6) नमल वमा- जहाँ कोई वापसी नह ं या ा-व ृ ांत धुंध से उठती धन
ु सं ह से लया गया
है । उसम लेखक ने पयावरण संबंधी सरोकार को ह नह ं, वकास के नाम पर पयावरण
वनाश से उपजी व थापन संबंधी मनु य क यातना को भी रे खां कत कया है। यह
पाठ व था पत क अनेक सम याओं का दय पश च तत
ु करता है। इस स य
को भी उ घा टत करता है क आधु नक औ योगीकरण क आँधी म सफ़ मनु य ह
नह ं उखड़ता, बि क उसका प रवेश, सं कृ त और आवास थल भी हमेशा के लए न ट
हो जाते ह।
7) ममता का लया- दस
ू रा दे वदास कहानी म ले खका ने इस तरह घटनाओं का संयोजन
कया है क अनजाने म ेम का थम अंकुरण संभव और पारो के दय म बड़ी अजीब
प रि थ तय म उ प न होता है। कहानी के मा यम से ले खका ने ेम को बंबईया
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फ म क प रपाट से अलग हटाकर उसे प व और थायी व प दान कया है।
क य, वषयव तु, भाषा और श प क ि ट से कहानी बेजोड़ है।
8) हजार साद ववेद - कुटज हमालय पवत क ऊँचाई पर सूखी शलाओं के बीच उगने
वाला एक जंगल पौधा है, िजसम फूल लगते ह। इसी फूल क कृ त पर यह नबंध
कुटज लखा गया है। कुटज म न वशेष स दय है, न सुगंध, फर भी लेखक ने उसम
मानव के लए एक संदेश पाया है। कुटज म अपराजेय जीवनशि त है, वावलंबन है,
आ म व वास है और वषम प रि थ तय म भी शान के साथ जीने क मता है। वह
समान भाव से सभी प रि थ तय को वीकारता है। सामा य से सामा य व तु म भी
वशेष गुण हो सकते ह यह जताना इस नबंध का अभी ट है।
अंतरा भाग-2 (का य खंड) :॰
1) जयशंकर साद:- कान लया का गीत -यह गीत चं गु त नाटक का स ध गीत है ।
स यूकस क बेट कान लया के वारा भारत के ाकृ तक स दय वह गौरव गाथा का
वणन कया गया है। दे वसेना का गीत-यह गीत साद जी के नाटक कंद गु त से
लया गया है इसम दे वसेना कक पीड़ा के ण का वणन कया गया है
2) सूयकांत पाठ नराला :- सरोज म ृ त-सरोज म ृ त क वता नराला क दवंगत पु ी
सरोज पर क त है। यह क वता बेट के दवंगत होने पर पता का वलाप है। पता के
इस वलाप म क व को कभी शकंु तला क याद आती है कभी अपनी वग य प नी क ।
बेट के प रं ग म प नी का प रं ग दखाई पड़ता है, िजसका च ण नराला ने कया
है । यह नह ं इस क वता म एक भा यह न पता का संघष, समाज से उसके संबंध,
पु ी के त बहुत कुछ न कर पाने का अकम यता बोध भी कट हुआ है। इस क वता
के मा यम से नराला का जीवन-संघष भी कट हुआ है। वे कहते ह- ‘दख
ु ह जीवन
क कथा रह , या कहूँ आज जो नह ं कह ं’।
3) सि चदानंद ह रानंद वा यायन अ ेय:- यह द प अकेला-यह द प अकेला क वता म
अ ेय ऐसे द प क बात करते ह जो नेह भरा है, गव भरा है, मदमाता भी है कं तु
अकेला है । अहं कार का मद हम अपन से अलग कर दे ता है। मने दे खा एक बंद
ू मैने
दे खा एक बँूद क वता म अ ेय ने समु से अलग तीत होती बँद
ू क णभंगरु ता को
या या यत कया है। इस क वता के मा यम से क व ने जीवन म णभंगरु ता के
मह व को समझाया है।
4) केदारनाथ संह:- बनारस क वता म ाचीनतम शहर बनारस के सां कृ तक वैभव के
साथ ठे ठ बनारसीपन पर भी काश डाला गया है। बनारस शव क नगर और गंगा के
साथ व श ट आ था का क है। बनारस म गंगा, गंगा के घाट, मं दर तथा मं दर
और घाट के कनारे बैठे भखा रय के कटोरे िजनम वसंत उतरता है-का च बनारस
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क वता म अं कत है दशा क वता बाल मनो व ान से संबं धत है िजसम पतंग उड़ाते
ब चे से क व पछ
ू ता है हमालय कधर है। बालक का उ र बाल सल
ु भ है क हमालय
उधर है िजधर उसक पतंग भागी जा रह है। हर यि त का अपना यथाथ होता है,
ब चे यथाथ को अपने ढं ग से दे खते ह। क व को यह बाल सल
ु भ सं ान मोह लेता है।
5) रघव
ु ीर सहाय:- वसंत आया क वता कहती है क आज मनु य का कृ त से र ता टूट
गया है। वसंत ऋतु का आना अब अनुभव करने के बजाय कैलडर से जाना जाता है।
ऋतुओं म प रवतन पहले क तरह ह वभावतः घ टत होते रहते ह। प े झड़ते ह,
कोपल फूटती ह, हवा बहती है, ढाक के जंगल दहकते ह, कोमल मर अपनी म ती म
झूमते ह। वा तव म क व ने आज के मनु य क आधु नक जीवन शैल पर यं य
कया है इस क वता क भाषा म जीवन क वडंबना छपी हुई है । कृ त से अंतरं गता
को य त करने के लए क व ने दे शज, त भव श द और याओं का भरपूर योग
कया है । अशोक, मदन मह ना, पंचमी, नंदनवन, जैसे परं परा म रचे-बसे जीवनानुभव
क भाषा ने इस क वता को आधु नकता के सामने एक चन
ु ौती क तरह खड़ा कर दया
है । क वता म बंब और तीक का भी सुंदर योग हुआ है। तोड़ो उ बोधनपरक क वता
है । इसम क व सज
ृ न हेतु भू म को तैयार करने के लए च टान, ऊसर और बंजर को
तोड़ने का आ वान करता है।
6) तुलसीदास :- पा यपु तक म तुत चौपाई और दोह को रामच रतमानस के अयो या
कांड से लया गया ह। इन छं द म राम वनगमन के प चात ् भरत क मनोदशा का
वणन कया गया है। भरत भावुक दय से बताते ह क राम का उनके त अ य धक
ेमभाव है । वे बचपन से ह भरत को खेल म भी सहयोग दे ते रहते थे और उनका मन
कभी नह ं तोड़ते थे।
7) म लक मोह मद जायसी:- स ध रचना प मावत के ‘बारहमासा’ के कुछ अंश दए
गए ह। तुत पाठ म क व ने ना यका नागमती के वरह का वणन कया है। क व ने
शीत के अगहन और पूस माह म ना यका क वरह दशा का च ण कया है। थम
अंश म ेम के वयोग म ना यका वरह क अि न म जल रह है और भवरे तथा काग
के सम अपनी ि थ तय का वणन करते हुए नायक को संदेश भेज रह है। वतीय
अंश म वर हणी ना यका के वणन के साथ-साथ शीत से उसका शर र काँपने तथा
वयोग से दय काँपने का संद
ु र च ण है।
8) व याप त :- इस पा यपु तक म व याप त के तीन पद लए गए ह। पहले म वर हणी
के दय के उ गार को कट करते हुए उ ह ने उसको अ यंत दख
ु ी और कातर बताया
है । दस
ू रे पद म यतमा स ख से कहती है क म ज म-ज मांतर से अपने यतम
का प ह दे खती रह परं तु अभी तक ने संतु ट नह ं हुए ह। उनके मधुर बोल कान
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म गँज
ू ते रहते ह। तीसरे पद म क व ने वर हणी यतमा का दख
ु भरा च तत
ु
कया है ।
9) घनानंद दल :- तत
ु पु तक म क व घनानंद के थम क वत म क व ने अपनी
े मका सज
ु ान के दशन क अ भलाषा कट करते हुए कहा है क सज
ु ान के दशन के
लए हो ये ाण अब तक अटके हुए ह।
अंतराल भाग-2 :-
1. सूरदास क झ पड़ी - सूरदास क झ पड़ी ेमचंद के उप यास रं गभू म का एक
अंश है । एक ि टह न यि त िजतना बेबस और लाचार जीवन जीने को
अ भश त होता है, सूरदास का च र ठ क इसके वपर त है। सूरदास अपनी
प रि थ तय से िजतना दख
ु ी व आहत है उससे कह ं अ धक आहत है भैर और
जगधर वारा कए जा रहे अपमान व उनक ई या से है। सूरदास के च र क
वशेषता यह है क झ पड़ी के जला दए जाने के बावजद
ू वह कसी से तशोध
लेने म व वास नह ं करता बि क पुन नमाण म व वास करता है। इसी लए
वह मठुआ के सवाल-" जो कोई सौ लाख बार झ पड़ी को आग लगा दे तो" के
जवाब म ढ़ता के साथ उ र दे ता है- “तो हम भी सौ लाख बार बनाएँगे"।
2. ब कोहर क माट - तुत पाठ ब कोहर क माट व वनाथ पाठ क
आ मकथा नंगातलाई का गाँव का एक अंश है। आ मकथा मक शैल म लखा
गया यह पाठ अपनी अ भ यंजना म अ यंत रोचक और पठनीय है। लेखक ने
उ के कई पड़ाव पार करने के बाद अपने जीवन म माँ, गाँव और आसपास के
ाकृ तक प रवेश का वणन करते हुए ामीण जीवन शैल , लोक कथाओं, लोक
मा यताओं को पाठक तक पहुँचाने क को शश क है।
3. अपना मालवा (खाऊ-उजाडू स यता म)- भाष जोशी का अपना मालवा-खाऊ-
- उजाडू स यता म पाठ जनस ा, 1 अ टूबर 2006 के कागद कारे तंभ से
लया गया है। इस पाठ म लेखक ने मालवा दे श क म ट , वषा, न दय क
ि थ त, उ गम एवं व तार तथा वहाँ के जनजीवन एवं सं कृ त को च त
कया है । पहले के मालवा ‘मालव धरती गहन गंभीर, डग-डग रोट पग-पग नीर'
क अब के मालवा ‘नद नाले सख
ू गए, पग-पग नीर वाला मालवा सख
ू ा हो
गया' से तल
ु ना क है । जो मालवा अपनी सख
ु -सम ृ ध एवं संप नता के लए
व यात था वह अब खाऊ - उजाडू स यता म फँसकर उलझ गया है। यह
खाऊ-उजाडू स यता यरू ोप और अमे रका क दे न है िजसके कारण वकास क
औ यो गक स यता उजाड़ क अपस यता बन गई है। इससे परू द ु नया भा वत
हुई है , पयावरण बगड़ा है।
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अ भ यि त और मा यम :-
1) व भ न मा यम के लए लेखन – जनसंचार के व भ न मा यम क खू बयाँ
और ख़ा मयाँ, मु त मा यम म लेखन के लए यान रखने यो य बात,रे डयो
समाचार क संरचना,रे डयो के लए समाचार लेखन, टे ल वज़न खबर के व भ न
चरण, रे डयो और टे ल वजन समाचार क भाषा और शैल , इंटरनेट प का रता का
इ तहास और भारत म इंटरनेट प का रता, ह द नेट संसार।
2) प कार य लेखन के व भ न प और लेखन या – प कार य लेखन या
है?समाचार कैसे लखा जाता है? समाचार लेखन और छह ककार, फ़ चर या है?
फ़ चर कैसे लख? वशेष रपोट कैसे लखे? वचारपरक लेखन -लेख,
टि प णयाँ,संपादक य लेखन, तंभ लेखन, संपादक के नाम प , सा ा कार।
3) वशेष लेखन- व प और कार – वशेष लेखन या है? वशेष लेखन क भाषा
और शैल , वशेष लेखन के े , कैसे हा सल कर वशेष ता।
4) कैसे बनती है- क वता- क वता या है? क वता कैसे बनती है? क वता म श द
का चयन, क वता म बंब और छं द, क वता क संरचना, क वता के घटक।
5) नाटक लखने का याकरण- नाटक और अ य वधाएँ, नाटक म समय का बंधन,
नाटक के त व, नाटक के वषय, नाटक म वीकार और अ वीकार क अवधारणा,
नाटक क श प संरचना।
6) कैसे लख कहानी – कहानी या है? कहानी के त व।
7) नाटक कैसे कर कहानी का ना य पांतरण – कहानी और नाटक का संबंध, कहानी
को नाटक कैसे बनाएँ? ना य पांतरण क चन
ु ौ तयाँ।
8) कैसे बनता है रे डयो नाटक – रे डयो नाटक क परं परा, सनेमा,रं गमंच और रे डयो
नाटक – समानता और असमानता,रे डयो नाटक म व न संकेत क मह ा।
9) नए और अ या शत वषय पर लेखन - अ या शत वषय पीर लेखन या
है? या इसक कोई तकनीक हो सकती है?कैसे कर तैयार ?
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मा सक पा य म श ण योजना (2023-24)
क ा- बारहवीं वषय: ह द (ऐि छक) कोड:523
मास पु तक का नाम वषय- व तु श ण दोहराई
कालांश कालांश
अ ैल अंतरा भाग -2 रामचं शु ल - ेमघन क छाया – मृ त 4
जयशंकर साद - (क) दे वसेना का गीत 4
(ख) कान लया का गीत
अ भ यि त और व भ न मा यम के लए लेखन 5
मा यम प कार य लेखन के व भ न प और लेखन 5
या
नै तक श ा ईश व दना 1
भि तयोग 1
सूि त सौरभ 1
मई अंतरा भाग -2 पं डत चं धर शमा गुलेर - सु म रनी के मनके 5 4
सूयकांत पाठ ' नराला'- सरोज मृ त 5
अ भ यि त और वशेष लेखन- व प और कार 5
मा यम
नै तक श ा हवलदार अ दल
ु हमीद 1
अ टादश लोक गीता 1
दग
ु ा भाभी 1
जन
ू
ी मकाल न अवकाश (प रयोजना काय)
जल
ु ाई अंतरा भाग -2 फणी वरनाथ 'रे ण'ु - संव दया
सि चदानंद ह रानंद वा यायन- 'अ ेय'
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(क)यह द प अकेला 5
(ख) मने दे खा, एक बद
ूँ 5
अ भ यि त और कैसे बनती है क वता 5
मा यम
नै तक श ा व ानाचाय डॉ. जगद श च बसु 1
अ हंसा के साधक महा मा बु ध 1
अग त अंतरा भाग -2 भी म साहनी – 5 4
गांधी, नेह और या सेर अराफ़ात
केदारनाथ संह - (क) बनारस
(ख) दशा
अ भ यि त और नाटक लखने का याकरण 5
मा यम
अंतराल भाग -2 सरू दास क झोपड़ी 4
नै तक श ा मदन लाल ढ ंगरा 1
शा वत नै तक मू य 1
गो वामी तुलसीदास 1
सतंबर अध-वा षक पर ा के लए पन
ु राव ृ 8
अध-वा षक पर ा
अंतरा भाग -2 असगर वजाहत – शेर,पहचान,चार हाथ, साझा 4
रघुवीर सहाय - (क) वसंत आया 4
(ख) तोड़ो
अ भ यि त और ---- -
मा यम
नै तक श ा संगठन-सू त 1
अ तू ब र अंतरा भाग -2 नमल वमा – जहां कोई वापसी नह ं 4
तल
ु सीदास - (क) भरत राम का ेम 5
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(ख) पद
अंतराल भाग-2 ब कोहर क माट 4
अ भ यि त और कैसे लख कहानी 3
मा यम कैसे कर कहानी का ना य पांतरण 4
नै तक श ा लौहपु ष सरदार व लभभाई पटे ल 1
करतार संह सराबा 1
तीन मछ लयाँ 1
नवंबर अंतरा भाग -2 ममता का लया- दस
ू रा दे वदास 4
म लक मह
ु मद जायसी – बारहमासा 4
अ भ यि त और कैसे बनता है रे डयो नाटक 4
मा यम
नै तक श ा व छता 1
हे मच व मा द य 1
दसंबर अंतरा भाग -2 हजार साद ववेद – कुटज 5 3
व याप त - पद 4
अंतराल भाग-2 अपना मालवा 3
अ भ यि त और नए और अ या शत वषय पर लेखन 6
मा यम
नै तक श ा जगत ् क उ प 1
पार प रक स भावना 1
जनवर अंतरा भाग -2 घनानंद - क व 3
पा य म पुनराव ृ
फ़रवर पा य म पुनराव ृ
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माच वा षक पर ा
नोट:
वषय श क को सलाह द जाती है क वे छा को श दावल या अवधारणा क
प टता को बढ़ाने के लए अ याय म उपयोग क जाने वाल श दावल / प रभाषा मक
श द क नोटबुक तैयार करने के लए नद शत कर।
नधा रत पु तक:
1. अंतरा भाग-2 (NCERT काशन)
2. अंतराल भाग -2 परू क पु तक (NCERT काशन)
3. अ भ यि त और मा यम (NCERT काशन)
4. नै तक श ा – क ा 12 के लए (ह रयाणा व यालय श ा बोड वारा का शत)
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न प ा प (2023-24)
क ा- बारहवीं वषय: ह द (ऐि छक) कोड:523
अ याय अंक न ववरण कुल
सं या अंक
रचना मक बोध 5 5 अप ठत ग यांश (1x5=5) 10
अप ठत प यांश (1x5=5)
5 5
अंतरा भाग-2 1 10 बहु वक पीय न (1x10=10) 19
(ग य खंड) ग यांश पर आधा रत न (1x5=5)
1 5
पाठ पर आधा रत न (2x2=4)
2 2 (तीन म कोई दो)
अंतरा भाग-2 1 10 बहु वक पीय न (1x10=10) 20
(ग य खंड) 6 1 स संग या या (दो म कोई एक) (6x1=6)
2 2 क वताओं पर आधा रत न (2x2=4)
(तीन म से कोई दो)
अंतराल भाग-2 2 3 पाठ पर आधा रत न (2x4=6) 6
अ भ यि त और 1 4 अ तलघु रा मक न (1x4=4) 15
मा यम 3 2 लघु रा मक (3x2=6)
5 1 द घउ रा मक(दो म से कोई एक) (5x1=5)
नै तक श ा 2 5 लघु रा मक न (2x5=10) 10
कुल 80
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