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CBSE Class 12 Sample Paper 2026 for Hindi Elective

Download CBSE Class 12 Sample Paper 2026 for Hindi Elective. Here at aglasem.com get latest CBSE Model Papers with Answers to prepare better for your upcoming board exam 2026. CBSE Class 12 Hindi Elective Sample Question Paper 2026 is given below. More Detail
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About CBSE Class 12 Sample Paper 2026 for Hindi Elective

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Frequently Asked Questions

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CBSE Class 12 Sample Paper 2026 for Hindi Elective – Text

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Page 1

CBSE BOARD

SAMPLE
PAPER
2026

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ह िंदी (ऐच्छिक) कोड सिंख्या (002)
प्रहिदर्श प्रश्न पत्र*
कक्षा – बार वी िं (2025-26)

हिर्ाशररि समय : 03 घिंटे अहर्किम अिंक : 80

सामान्य हिदे र् –
 इस प्रश्न-पत्र में र्ीन खांड हैं - खिंड- क, ख और ग ।
 णदए गए णनदे शोां का पालन करर्े हुए प्रश्नोां के उत्तर दीणजए।
 र्ीनोां खांडोां के कुल 13 प्रश्न हैं । र्ीनोां खांडोां के प्रश्नोां के उत्तर दे ना अणनवायत है ।
 यर्ासांभव र्ीनोां खांडोां के प्रश्नोां के उत्तर क्रम से णलखखए।

प्रश्न खिंड – क (अपहिि बोर्) 18 अिंक

1. णनम्नणलखखर् गद्ाां श को ध्यानपूवतक पढ़कर पूछे गए प्रश्नोां के उत्तर णलखखए- 10

सभ्य होने की प्रणक्रया मानवर्ा की सबसे अच्छी उपलखि है । इससे हम उन लक्षिोां को णिणिर् कर
लेर्े हैं , जो हमारे आदशों को सुिारु रूप से कायत करने में बाणिर् करर्े हैं । कोई भी, जो इस
प्रणक्रया से नहीां गुजरर्ा, 'णपछडा' ही रहर्ा है और सभ्य समाज में कोई स्र्ान नहीां बना पार्ा।
णवणभन्न गुिोां को णमलाकर एक पूित मानव का जन्म होर्ा है । लेणकन हमारी सांस्कृणर् यह िाहर्ी है
णक हम एक णनणिर् र्रीके से जीवन णजएँ , जो णक हमारी स्वयां की प्रकृणर् का एक छोटा सा स्वरूप
होर्ा है । इस प्रकार हमारी प्रकृणर् और जो कुछ हम हैं , उसके शेष भाग को नकार दे र्े हैं । हम
स्वयां को अपने स्वार्त और परछाईां में बाँ ट ले र्े हैं , क्ोांणक हमारी सांस्कृणर् हमें एक णवणशष्ट प्रकार
से जीने के णलए जोर दे र्ी है । ज्ञान का भांडार पा लेने के बाद वषों की सभ्यर्ा से शायद यही हमें
णवरासर् में णमला है ।
पूरे समाज के जीवन जीने के र्रीके को सांस्कृणर् कहर्े हैं । इसमें सखिणलर् हैं - आिरि के र्रीके,
पहनावा, भाषा, िमत, परां पराएँ , व्यवहार के र्रीके र्र्ा णविारोां से णवश्वास बनने की प्रिाली।
हमारे अां दर णछपे सािारि मानव को हमसे दू र करके सांस्कृणर् हमें एक जणटल सी शखि दे दे र्ी है ।
स्रोि - डॉ. ए.पी.जे . अब्दुल कलाम, पुस्तक-हवजयी भव से साभार

(क) सांस्कृणर् शब्द को पररभाणषर् णकया जा सकर्ा है :- 1
(i)सभ्य और सां स्कारी होना
(ii) उपलखियोां की प्राखि
(iii) आदशों के सार् जीवन
(iv) सामाणजक प्रणर्णिर् शैली

1

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(ख) णनम्नणलखखर् प्रश्न को पढ़कर नीिे णदए गए कर्नोां पर णविार कीणजए:- 1
लेखक के अनुसार सांस्कृणर् के र्त्त्व हैं :-
(I) सभ्य होना
(II) भाषा, िमत एवां परम्पराएँ
(III) खुद को स्वार्त और परछाई में बाँ ट लेना
(IV) व्यवहार की शैली, पहनावा
गद्ाां श के अनुसार कौन-सा/ से कर्न सही हैं ?

(i) केवल कर्न (I) सही है ।
(ii) केवल कर्न (II) और (IV) सही हैं ।
(iii) केवल कर्न (I) और (II) सही हैं ।
(iv) केवल कर्न (I) और (IV) सही हैं ।
(ग) णपछडे हुए समाज का आिारभूर् लक्षि माना जा सकर्ा है :- 1
(i)असभ्य होना
(ii)स्वार्ी होना
(iii)सु दृढ़ परां परा
(iv)सािारि मानव
(घ) मानव की सवोत्तम उपलखि क्ा है ? 1

(ङ) हमारी सांस्कृणर् हमसे से क्ा अपेक्षा रखर्ी है ? 2

(ि) हमें सांस्कृणर् शखि कैसे प्रदान करर्ी है ? 2

(छ) हम स्वयां को अपने स्वार्त और परछाईां में क्ोां बाँ ट ले र्े हैं ? 2

2. णनम्नणलखखर् कणवर्ा के अांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नोां के उत्तर णलखखए- 8

क़लम अपनी साि,
और मन की बार् णबलकुल ठीक कह एकाि।
यह णक र्ेरी-भर न हो र्ो कह,
और बहर्े बने सादे ढां ग से र्ो बह।
णजस र्रह हम बोलर्े हैं , उस र्रह र्ू णलख,
और इसके बाद भी हमसे बडा र्ू णदख।
िीज ऐसी दे णक णजसका स्वाद णसर िढ़ जाए
बीज ऐसा बो णक णजसकी बेल बन बढ़ जाए।
फल लगें ऐसे णक सुख-रस, सार और समर्त
प्राि-सांिारी णक शोभा-भर न णजनका अर्त।
टे ढ़ मर् पैदा करे गणर् र्ीर की अपना,
पाप को कर लक्ष्य,कर दे झूठ को सपना।

2

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णवांध्य, रे वा, फूल, फल, बरसार् या गमी,
प्यार णप्रय का, कष्ट-कारा, क्रोि या नरमी,
दे श या णक णवदे श, मेरा हो णक र्ेरा हो
हो णवशद णवस्तार, िाहे एक घेरा हो,
र्ू णजसे छू दे णदशा णदशा कल्याि हो उसकी,
र्ू णजसे गा दे सदा वरदान हो उसकी।
कणव- ‘भवानी प्रसाद णमश्र ‘

(क) कणवर्ा में ‘कलम’ णकसका प्रर्ीक है ? 1

(i) कणव
(ii) हणर्यार
(iii) समाज की आवाज
(iv) कणव के णविार
(ख) ‘णजस र्रह हम बोलर्े हैं , उस र्रह र्ू णलख’ पांखि में कणव क्ा सां देश दे ना िाहर्े हैं ? 1

(i) सरल भाषा में णलखना
(ii) सच्चाई को उजागर करना
(iii) बोली की भाषा में णलखना
(iv) सामान्य जन के भाव णलखना
(ग) णकन पांखियोां में लेखनी को असत्य और अन्याय के णवरुद्ध णलखने की बार् कह रहे हैं ? 1

(i) िीज ऐसी दे णक णजसका स्वाद णसर िढ़ जाए
(ii) पाप को कर लक्ष्य कर दे झूठ को सपना।
(iii) टे ढ़ मर् पैदा करे गणर् र्ीर की अपना
(iv) प्राि-सांिारी णक शोभा-भर न णजनका अर्त।
(घ) कणवर्ा में प्रकृणर् और मानवीय भावनाओां का समन्वय कैसे णकया गया है ? 1

(ङ) कणवर्ा में कलम से णकन बीजोां को बोने और िढ़ने की बार् कही है ? 2

(ि) कणवर्ा के माध्यम से कणव क्ा सांदेश दे ना िाहर्े हैं ? 2

खिंड- ख (अहभव्यच्छि और माध्यम पुस्तक के आर्ार पर ) 22 अिंक

3. णनम्नणलखखर् प्रश्नोां के उत्तर णलखखए - 5

(क) एां कर-णवजुअल क्ा है ? (शब्द सीमा - लगभग 20 शब्द) 1
(ख) टे लीणवजन समािार की भाषा पर णटप्पिी कीणजए। (शब्द सीमा-लगभग 40 शब्द) 2

(ग) मीणडया की भाषा में बीट से क्ा र्ात्पयत है ? (शब्द सीमा - लगभग 40 शब्द) 2

4. णनम्नणलखखर् प्रश्नोां में से णकन्ीां दो प्रश्नोां के उत्तर लगभग 60 शब्दोां में णलखखए - 2x3=6

3

Page 5

(क) णवशेष लेखन की भाषा-शैली पर प्रकाश डाणलए। 3

(ख) फीिर णलखर्े समय णकन बार्ोां का ध्यान रखना िाणहए? णलखखए। 3

(ग) समािार लेखन की णवशेष शैली का वितन कीणजए। 3

5. णनम्नणलखखर् र्ीन णवषयोां में से णकसी एक णवषय पर लगभग 100 शब्दोां में रिनात्मक 5

लेख णलखखए –

(क) जैसे ही मैं बस में िढ़ा /िढ़ी …........

(ख) कोहरे की वह सुबह

(ग) जब मैं आम के पेड पर िढ़ा /िढ़ी
6. णनम्नणलखखर् में से णकन्ीां दो प्रश्नोां के उत्तर लगभग 60 शब्दोां में णलखखए- 2x3=6

(क) कणवर्ा में णबांब और छां द के महत्व को स्पष्ट कीणजए। 3

(ख) कहानी के क्लाइमेक्स का णित्रि ध्यानपूवतक क्ोां करना िाणहए ? 3

(ग) नाटक का मात्र एक मौन,अांिकार या ध्वणन प्रभाव,कहानी या उपन्यास के बीस-पच्चीस पृिोां की 3

बराबरी कर सकर्ा है । इस कर्न का आशय स्पष्ट कीणजए।

खिंड- ग (पाठ्य पुस्तकोिं अिंिरा, अिंिराल के आर्ार पर) 40 अिंक

7. णनम्नणलखखर् पणठर् काव्याां श को पढ़कर प्रश्नोां के सवात णिक उपयुि णवकल्ोां का ियन कीणजए– 5x1=5

यह दीप अकेला स्नेह भरा
है गवत भरा मदमार्ा, पर इसको भी पांखि को दे दो।
यह जन है - गार्ा गीर् णजन्ें णफर और कौन गाएगा ?
पनडु ब्बा - ये मोर्ी सच्चे णफर कौन कृर्ी लाएगा ?
यह सणमिा - ऐसी आग हठीला णबरला सुलगाएगा ।
यह अणिर्ीय - यह मेरा-यह मैं स्वयां णवसणजतर् -
यह दीप, अकेला, स्नेह भरा
है गवत भरा मदमार्ा, पर इसको भी पांखि को दे दो।
यह मिु है - स्वयां काल की मौना का युग-सांिय,
यह गोरस-जीवन-कामिेनु का
अमृर्-पूर् पय
यह अांकुर-फोड िरा को रणव को र्कर्ा णनभतय,
यह प्रकृर्, स्वयांभू, ब्रह्म, अयुर्ः इसको भी शखि को दे दो।
(क) दीप' णकसका प्रर्ीक है ? 1

(i) व्यखि (ii) समाज

4

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(i) प्रकाश (iv) पररवार

(ख) णनम्नणलखखर् कर्न-कारि को ध्यानपूवतक पणढ़ए र्र्ा उत्तर के णलए सही णवकल् का ियन कीणजए। 1

कथि - यह गोरस-जीवन-कामिेनु की मौना का यु ग-सांिय।
कारण - णवश्वास रूपी दीपक अत्यणिक मािुयत से भरा हुआ है । दीप जीवन रूपी कामिेनु िारा
प्रदत्त अमृर् र्ुल्य पणवत्र दू ि के समान है ।

(i)कर्न गलर् है , णकांर्ु कारि सही है ।

(ii)कर्न और कारि दोनोां गलर् हैं ।
(iii)कर्न सही है णकांर्ु कारि कर्न की सही व्याख्या नहीां है ।
(iv)कर्न और कारि दोनोां सही हैं । कारि कर्न की सही व्याख्या है ।
(ग) पांखि' णकसका प्रर्ीक है ? 1
(i) कर्ार (ii) समणष्ट
(iii) व्यणष्ट (iv) अहां कार

(घ) 'दीप का पांखि में णवलय' का भाव है - दीप 1
(i) की सत्ता का सावतभौमीकरि ।
(ii) के अहां कार के मद को दू र करना ।
(iii) को पांखि में स्र्ान दे ना ।
(iv) के एकाकीपन को दू र करना।

(ङ) पनडु ब्बा से आप क्ा समझर्े हैं ? 1
(i) गोर्ाखोर (ii) बडी मछली
(iii) र्ैरने वाले पक्षी (iv) पाल वाली नाव

8. काव्य खांड पर आिाररर् णनम्नणलखखर् र्ीन प्रश्नोां में से णकन्ीां दो प्रश्नोां के उत्तर लगभग 2x2=4

40 शब्दोां में णलखखए-

(क) दे वसेना की हार या णनराशा के क्ा कारि हैं ? 2

(ख) ‘सरोज स्मृणर्’ कणवर्ा में सरोज के णववाह को अन्य णववाहोां से णभन्न कहने का कारि स्पष्ट कीणजए। 2

(ग) भरर् के णकन उद्गारोां से उनका राम के प्रणर् श्रद्धाभाव प्रकट होर्ा है , स्पष्ट कीणजए। 2

9. णनम्नणलखखर् काव्याां शोां में से णकसी एक की सप्रसां ग व्याख्या 100 शब्दोां में कीणजए। 6
(क) सुनर्े हैं णमट्टी में रस है णजससे उगर्ी दू ब है

अपने मन के मैदानोां पर व्यापी कैसी ऊब है
आिे आिे गाने

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र्ोडो र्ोडो र्ोडो

ये ऊसर बांजर र्ोडो
ये िरर्ी परर्ी र्ोडो

सब खेर् बनाकर छोडो
णमट्टी में रस होगा ही जब वह पोसेगी बीज को

हम इसको क्ा कर डालें इस अपने मन की खीज को?

गोडो गोडो गोडो

अथवा
(ख) के पणर्आ लए जाएर् रे मोरा णपअर्म पास ।

णहए नणह सहए असह दु ख रे भेल साओन मास ।।
एकसरर भवन णपआ णबनु रे मोणह रहलो न जाए ।

सखख अनकर दु ख दारुन रे जग के पणर् आए ।।
मोर मन हरर हर लए गेल रे अपनो मन गेल ।

गोकुल र्णज मिुपुर बस रे कन अपजस लेल ।।

सखख हे , णक पुछणस अनुभव मोए।

10. णनम्नणलखखर् गद्ाां श के आिार पर णदए गए बहुणवकल्ीय प्रश्नोां के उत्तर के णलए 5x1=5

उपयुि णवकल् का ियन कीणजए -

ये लोग आिुणनक भारर् के नए 'शरिार्ी' हैं , णजन्ें औद्ोगीकरि के झांझावार् ने घर-जमीन
से उखाडकर हमेशा के णलए णनवात णसर् कर णदया है । प्रकृणर् और इणर्हास के बीि गहरा अांर्र है ।
बाढ़ या भूकांप के कारि लोग अपना घरबार छोडकर कुछ अरसे के णलए बाहर िले जार्े हैं ,
णकांर्ु आफर् टलर्े ही वे दोबारा अपने जाने -पहिाने पररवेश में लौट भी आर्े हैं । णकांर्ु णवकास और
प्रगणर् के नाम पर जब इणर्हास लोगोां को उन्मू णलर् करर्ा है , र्ो वे णफर अपने घर वापस नहीां
लौट सकर्े। आिुणनक औद्ोगीकरि की आँ िी में णसर्फत मनुष्य ही नहीां उखड र्ा, बखि उसका
पररवेश और आवास स्र्ल भी हमेशा के णलए नष्ट हो जार्े हैं ।
एक भरे -पूरे ग्रामीि अांिल को णकर्नी नासमझी और णनमतमर्ा से उजाडा जा सकर्ा है । णसां गरौली
इसका ज्वलांर् उदाहरि है । अगर यह इलाका उजाड रे णगस्तान होर्ा र्ो शायद इर्ना क्षोभ नहीां
होर्ा; णकांर्ु णसांगरौली की भूणम इर्नी उवतरा और जां गल इर्ने समृद्ध हैं णक उनके सहारे शर्ाखब्दयोां
से हजारोां वनवासी और णकसान अपना भरि-पोषि करर्े आए हैं ।

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(क) गद्ाां श का वर्ण्त णवषय है - 1

(i) णवस्र्ापन की समस्या

(ii) वन-सांपदा की णवशेषर्ा

(iii) औद्ोगीकरि णवकास का पक्ष

(iv) ग्रामीि अांिल की उपयोणगर्ा

(ख) भरे -पूरे ग्रामीि अांिल को नासमझी से उजाडने का कारि है - 1

(i) अनुदारर्ा (ii) समरूपर्ा

(iii) स्वार्तलोलुपर्ा (iv) असामाणजकर्ा

(ग) गद्ाां श में णकस गाँ व के नष्ट होने की बार् की गई है - 1

(i) रे णगस्तान (ii) नवागाँ व

(iii) आिुणनक (iv) सरौली

(घ) 1
आिुणनक भारर् के नए शरिार्ी हैं -

(i) लेखक और उनके णमत्र

(ii) दू सरे दे शोां से आए लोग

(iii) अपने मूल स्र्ान से उजडे लोग

(iv) णवकास की दौड के प्रणर्भागी
(ङ) णनम्नणलखखर् कर्न-कारि को ध्यानपूवतक पणढ़ए र्र्ा उत्तर के णलए सही णवकल् का ियन कीणजए। 1

कथि - अगर यह इलाका उजाड रे णगस्तान होर्ा र्ो शायद इर्ना क्षोभ नहीां होर्ा।

कारण - रे णगस्तान में जनजीवन की बसावट नहीां होर्ी इसणलए लेखक की णिांर्ा और

व्याकुलर्ा उसके प्रणर् नहीां है ।

(i) कर्न गलर् है , णकांर्ु कारि सही है ।

(ii) कर्न और कारि दोनोां गलर् हैं ।

(iii)कर्न सही है णकांर्ु कारि कर्न की सही व्याख्या नहीां है ।

(iv) कर्न और कारि दोनोां सही हैं । कारि कर्न की सही व्याख्या है ।

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11 गद् खांड पर आिाररर् र्ीन में से णकन्ीां दो प्रश्नोां के उत्तर लगभग 40 शब्दोां में 2x2=4

णलखखए-

(क) भारर्ेंदु जी के मकान के नीिे का पररिय बहुर् शीघ्र गहरी मैत्री में पररिर् हो गया। ' पाठ के 2

आिार पर णलखखए।

(ख) 'दू सरा दे वदास' कहानी के आिार पर णलखखए णक पुजारी ने सांभव और पारो को 'युगल' 2

समझकर आशीवात द क्ोां णदया?

(ग) अरार्फार् िारा 'अणर्णर् दे वो भवः ' परां परा का वहन णकया जा रहा र्ा। पाठ के आिार पर णलखखए। 2

12. णनम्नणलखखर् गद्ाां शोां में से णकसी एक की सप्रसां ग व्याख्या 100 शब्दोां में कीणजए। 6

(क) एक णमल माणलक के णदमाग में अजीब-अजीब खयाल आया करर्े र्े जैसे सारा सांसार णमल हो
जाएगा, सारे लोग मजदू र और वह उनका माणलक या णमल में और िीजोां की र्रह आदमी भी
बनने लगेंगे, र्ब मजदू री भी नहीां दे नी पडे गी, वगैरा-वगैरा । एक णदन उसके णदमाग में खयाल
आया णक अगर मजदू रोां के िार हार् होां र्ो काम णकर्नी र्ेजी से हो और मुनार्फा णकर्ना ज़्यादा ।
लेणकन यह काम करे गा कौन ? उसने सोिा, वैज्ञाणनक करें गे, ये हैं णकस मजत की दवा । उसने
यह काम करने के णलए बडे वैज्ञाणनकोां को मोटी र्नख्वाहोां पर नौकर रखा और वे नौकर हो गए।
कई साल र्क शोि और प्रयोग करने के बाद वैज्ञाणनकोां ने कहा णक ऐसा असांभव है णक आदमी के
िार हार् हो जाएँ ।
अथवा
(ख) यह जो मेरे सामने कुटज का लहरार्ा पौिा खडा है वह नाम और रूप दोनोां में अपनी
अपराजेय जीवनी शखि की घोषिा कर रहा है । इसीणलए यह इर्ना आकषतक है । नाम
है णक हजारोां वषत से जीर्ा िला आ रहा है । णकर्ने नाम आए और गए। दु णनया उनको
भूल गई, वे दु णनया को भूल गए। मगर कुटज है णक सांस्कृणर् की णनरां र्र स्फीयमान
शब्दराणश में जो जमके बैठा, सो बैठा ही है । और रूप की र्ो बार् ही क्ा है !
बणलहारी है इस मादक शोभा की। िारोां ओर कुणपर् यमराज के दारुि णन:श्वास के
समान ििकर्ी लू में यह हरा भी है और भरा भी है , दु जतन के णित्त से भी अणिक
कठोर पाषाि की कारा में रुद्ध अज्ञार् जलस्रोर् से बरबस रस खीांिकर सरस बना हुआ
है । और मूखत के मखस्तष्क से भी अणिक सूने णगरर काां र्ार में भी ऐसा मस्त बना है णक
ईष्यात होर्ी है ।
13. णनम्नणलखखर् प्रश्नोां में से णकन्ीां दो प्रश्नोां के उत्तर लगभग 100 शब्दोां में णलखखए। 2x5=10

(क) 'र्ो हम भी सौ लाख बार बनाएँ गे ' सूरदास के इस कर्न में णनणहर् जीवन मूल्योां को स्पष्ट करर्े 5

हुए कर्न का भाव स्पष्ट कीणजए।

(ख) हमारी आज की सभ्यर्ा नणदयोां के प्रणर् उदासीन है । 'अपना मालवा खाऊ-उजाडू सभ्यर्ा में ' 5

पाठ के आिार पर कर्न की सार्तकर्ा णसद्ध कीणजए।

8

Page 10

(ग) 'णबस्कोहर की माटी' नामक पाठ हमें प्रकृणर् की ओर लौटने का सांदेश दे र्ा है । इससे 5

आप णकर्ना सहमर् हैं ? पाठ के आलोक में स्पष्ट कीणजए।

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Page 11

Study Materials
Notes

Model Papers Class 6 Notes

Sample Papers Class 7 Notes
Half Yearly Sample Papers Class 8 Notes

Class 9 Notes
Important Resources
Class 10 Notes
Periodic Table
Class 11 Notes
Writing Skills / Formats

Maps of India / World Class 12 Notes

Books and Solutions

NCERT Books
NCERT Book Solutions
HC Verma Chapter Wise Solutions
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Document Details

Board / OrgCBSE
ExamClass 12
TypeSample Paper
Pages11
Updated24 Sep 2026