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FOR HARYANA CLASS 12 PREPARATION
HBSE Class 12 Sample
Paper 2027 Hindustani Music
Instrumental (Melodic) with
Marking Scheme
EXAM YEAR TYPE SUBJECT
Haryana Class 12 2027 Sample Paper Music
Notes · Sample Papers · Previous Year Papers · Mock Tests
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Marking Scheme
s em BSEH Model Paper ( 2026-2027)
CLASS: 12th (Sr. Secondary)
a Code: A
Roll No.
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( Hindustani Music Instrument) Melodic
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(Hindi and English Medium)
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ACADEMIC / OPEN
(Time allowed: 2½ hours) (Maximum Marks: 30)
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[kaM ¼1½ वस्तुननष्ठ प्रकार के प्रश्न 1 ls 8
Section (1) Objective type questions
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¼01 X 08 = 08½
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प्रश्न 1: भारतीय संगीत में वर्ण ककतने प्रकार के होते हैं?
o उत्तर C) चार स्थायी, आरोही, अवरोही, और संचारी
प्रश्न 2: राग देश ककस ठाठ के अंतगणत आता है?
o उत्तर C) खमाज
प्रश्न 3: दो मुख्य ग्राम ______ और ______ हैं।
o उत्तर षड्ज ग्राम और मध्यम ग्राम
प्रश्न 4: झपताल में ______ मात्राएँ होती हैं।
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उत्तर 10 (दस
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c. o प्रश्न 5. कथन प्रत्येक राग का एक नननित आरोह और अवरोह होता है।
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s em कारर् प्रत्येक राग नननित ननयमों का पालन करता है।
gla उत्तर A) दोनों सही हैं और कारर्, कथन की सही व्याख्या करताaहै।
a नववरर् राग के ननमाणर् के नलए आरोह अवरोह स्वरों के चढ़ने और उतरने का क्रम होना
अननवायण है, और यह राग के उन नननित ननयमों वाकद संवाकद, जानत आकद का नहस्सा है
नजनका राग में सख्ती से पालन ककया जाता है।
प्रश्न 6. कथन एकताल में 12 मात्राएँ होती हैं।
कारर् यह छह नवभागों में नवभानजत है।
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उत्तर A) दोनों सही हैं और कारर्, कथन की सही व्याख्या करता है।
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नववरर् भारतीय संगीत ताल प्रर्ाली में, 'एकताल' में वास्तव में कु ल 12 मात्राएँ होती हैं
और इसकी रचना 2-2 मात्राओं के 6 नवभागों ताली खाली में नवभानजत होती है।
प्रश्न 7. गायकी अंग के नलए जाने जाने वाले प्रनसद्ध नसतार वादक का नाम बताइए
उत्तर उस्ताद नवलायत खान नवस्तार जानें
नववरर् उस्ताद नवलायत खान को 'गायकी अंग' (नसतार पर भारतीय शास्त्रीय गायन की
शैली और नमठास को उतारना का जनक और सबसे प्रनसद्ध प्रनतपादक माना जाता है।
प्रश्न 8. 'भारत की कोककला' (नाइटिंगेल ऑफ इं निया के रूप में ककसे जाना जाता है?
उत्तर सरोनजनी नायिू अनधक जानकारी
नववरर् सरोनजनी नायिू को उनकी उत्कृ ष्ट और मधुर कनवता शैली के कारर् 'भारत की
कोककला' की उपानध दी गई थी। (नोिं संगीत जगत में लता मंगेशकर को अक्सर 'स्वर
कोककला' कहा जाता है, लेककन सामान्य ज्ञान में 'भारत की कोककला' सरोनजनी नायिू को
ही माना जाता है।
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[kaM ¼2½ अनत लघुउत्तरात्मक प्रकार के प्रश्न 9 ls 12
Section (2) Very short answer type questions
¼02 X 02 = 04½
प्रश्न 9. वर्ण को पररभानषत कीनजए। अथवा ग्राम को पररभानषत कीनजए।
उत्तर गायन या बजाने की कक्रया को वर्ण कहते हैं。 राग के स्वरों का नवस्तार करने, उन्हें
चढ़ते उतरते क्रम में गाने और दोहराने की प्रकक्रया वर्ण कहलाती है。 यह चार प्रकार के
होते हैं स्थायी, आरोही, अवरोही और संचारी
(अथवा
ग्राम नननित श्रुनतयों पर स्थानपत सात स्वरों के समूह को ग्राम कहते हैं भारतीय संगीत में
तीन ग्राम माने गए हैं षड्ज ग्राम, मध्यम ग्राम और गांधार ग्राम वतणमान में के वल षड्ज
ग्राम का ही प्रचलन है
प्रश्न 10. गमक और मींि में अंतर स्पष्ट कीनजए। अथवा आलाप को पररभानषत कीनजए।
उत्तर
गमक यह स्वरों का एक शनिशाली और कलात्मक कं पन होता है。 इसमें स्वर को भारीपन
और गूंज के साथ नहलाकर गाया जाता है
मींि यह एक स्वर से दूसरे स्वर पर अिंू िं रूप से, कफसलते हुए जाने की कक्रया है。 इसमें
बीच के स्वरों को भी स्पशण ककया जाता है。
(अथवा
आलाप राग के स्वरूप, उसकी जानत और चलन को स्पष्ट करने के नलए स्वरों का नवलंनबत
धीमी लय में नवस्तार करना आलाप कहलाता है。 इसके द्वारा गायक या वादक श्रोताओं
में उस राग का भाव स्थानपत करता है。
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m 11. झपताल की नवशेषताएँ नलनखए। अथवा चौताल की व्याख्याmकीनजए।
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c. o प्रश्न
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उत्तर
झपताल की नवशेषताएँ
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इसमें कु ल 10 मात्राएँ होती हैं。
मात्राओं का नवभाजन \(2 + 3 + 2 + 3\) के रूप में 4 नवभागों में होता है।
पहली, तीसरी और आठवीं मात्रा पर ताली होती है।
छठी मात्रा पर खाली होती है।
(अथवा
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चौताल यह ध्रुपद गायन में प्रयोग की जाने वाली एक बहुत ही गंभीर और प्रनसद्ध ताल
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है。 इसकी मुख्य नवशेषताएँ हैं
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इसमें कु ल 12 मात्राएँ होती हैं。
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इसके 6 नवभाग होते हैं, और हर नवभाग में 2-2 मात्राएँ होती हैं \(2 + 2 + 2 + 2 + 2 +
2\))।
पहली, पांचवीं, नवीं और ग्यारहवीं मात्रा पर ताली होती है।
तीसरी और सातवीं मात्रा पर खाली होती है।
प्रश्न 12. भारतीय संगीत में उस्ताद नवलायत खान के योगदान को नलनखए। अथवा पंनित
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नवश्व मोहन भट्ट पर एक संनिप्त रिंप्पर्ी नलनखए।
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उत्तर
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उस्ताद नवलायत खान आप भारतीय शास्त्रीय संगीत के इनतहास में सबसे महान
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नसतारवादकों में से एक थे। आपका मुख्य योगदान 'गायकी अंग' (नसतार पर गायन शैली की
तरह सुर लगाना नवकनसत करना था। इसके अलावा, आपने नसतार में कु छ सुधार ककए
जैसे 'जवारी' के काम में बदलाव , नजससे वाद्ययंत्र की ध्वनन अनधक मधुर और गूंजने वाली
हो गई।
(अथवा
पंनित नवश्व मोहन भट्ट आप नवश्व प्रनसद्ध 'मोहन वीर्ा' के आनवष्कारक और वादक हैं।
आपने पारं पररक भारतीय वीर्ा और पनिमी स्लाइि नगिंार का नमश्रर् करके 'मोहन वीर्ा'
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का ननमाणर् ककया। भारतीय शास्त्रीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान कदलाने में
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c. o आपका अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। इस शानदार उपलनधध के नलए आपको प्रनतनष्ठत ग्रैमी
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पुरस्कार से भी सम्माननत ककया जा चुका है।
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[kaM ¼3½ लघुउत्तरात्मक प्रकार के प्रश्न 13 ls 15
Section (3) short answer type questions
¼ 03 X 03 = 09½
प्रश्न 13: ठािं और राग में अंतर
ठािं और राग हहदुस्तानी संगीत के दो मुख्य आधार हैं। ठािं वह क्रनमक स्वर समूह है नजससे
राग उत्पन्न होते हैं जैसे कल्यार्, नबलावल । ठािं कभी गाए नहीं जाते और इनमें आरोह
अवरोह होना आवश्यक नहीं है。 इसके नवपरीत, राग ककसी ठािं से उत्पन्न होता है, गाने
बजाने योग्य होता है और इसमें रं जकता मनमोहक गुर् व नननित आरोह अवरोह होते
हैं。
अथवा
एक वाद्य कलाकार वादक के गुर् और दोष
गुर् एक अच्छे वादक में लय ताल पर पूर्ण ननयंत्रर्, उँ गनलयों और नमजराब गज का सिंीक
संचालन, वाद्य यंत्र की उत्तम ध्वनन का ज्ञान, और रचना को नवस्तार देने की िमता होनी
चानहए।
दोष गलत या बेसुरा सुर लगाना, वाद्य यंत्र का खराब ट्यूहनग, लय से भिंक जाना, और
वादन के दौरान अनावश्यक भाव भंनगमाएं बनाना वादक के मुख्य दोष हैं।
भारतीय संगीत में थािं और राग के बीच के वैज्ञाननक और सैद्धांनतक अंतर को समझने के
नलए आप यह वीनियो देख सकते हैं
प्रश्न 14: राग भूपाली का शास्त्रीय पररचय
थािं कल्यार्
जानत औिव औिव आरोह और अवरोह दोनों में 5-5 स्वर
वादी स्वर गंधार ग
संवादी स्वर धैवत ध
वर्जजत स्वर मध्यम म और ननषाद नन
गायन समय रानत्र का प्रथम प्रहर
आरोह सा, रे , ग, प, ध, सां
अवरोह सां, ध, प, ग, रे , सा
पकड़ ग रे सा, ध, सा रे ग प, ग ध प ग रे सा
प्रकृ नत यह शांत और मधुर प्रकृ नत का राग है।
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m 15: मध्यकालीन भारतीय संगीत पर रिंप्पर्ी .co
c. o प्रश्न
e संगीत के नलए m
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se l फारसी संस्कृ नत के प्रभाव
मध्यकालीन भारतीय संगीत 8वीं से 18वीं शताधदी का काल भारतीय
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स्वर्ण युग और पररवतणनों का समय था। इस दौरान इस्लामी और
से हहदुस्तानी और कनाणिंक संगीत की धाराएँ अलग हो गईं। अलाउद्दीन नखलजी, अकबर
और शाहजहाँ जैसे मुगल सम्रािंों के संरिर् में संगीत ने काफी प्रगनत की। इसी काल में
ध्रुपद, खयाल, तराना जैसी गायन शैनलयाँ और नसतार व तबला जैसे वाद्य यंत्र अनस्तत्व में
आए।
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[kaM ¼4½ दीघण उत्तरात्मक प्रकार के प्रश्न 16
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c. oSection (4) Long answer type questions s e m
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la s ¼ 05 X 01 = 05 ½
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a राग देश Raag Desh) का नवस्तृत शास्त्रीय नववरर्
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प्रश्न 16:
1. स्वर
इस राग में गंधार ग और धैवत ध स्वर आरोह में वर्जजत होते हैं। आरोह में शुद्ध ननषाद
नन और अवरोह में कोमल ननषाद नन का प्रयोग ककया जाता है। इसके अलावा, ऋषभ
रे इस राग का कें द्र हबदु पकड़ है।
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2. गायन समय
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इस राग को गाने और बजाने का उपयुि समय रानत्र का नद्वतीय प्रहर रात 9 बजे से 12
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बजे तक माना जाता है।
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3. प्रकृ नत
यह बहुत ही मधुर, चंचल और श्रृंगार रस से पररपूर्ण राग है। इसे अनधकतर छोिंे खयाल,
ठु मरी, िंप्पा और लोकगीतों में गाया बजाया जाता है। हमारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम भी
इसी राग पर आधाररत है।
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अथवा
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c. oताल का नवस्तृत पररचय se
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s em यहाँ झपताल का नवस्तृत नववरर् और अन्य प्रमुख तालों की जानकारी
g l aदी गई है
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a 1. झपताल Jhaptaal)
मात्राएँ 10
नवभाग 4 (2, 3, 2, 3 के रूप में
ताली खाली पहली व तीसरी मात्रा पर ताली X, 2), छठी पर खाली 0), आठवीं मात्रा
पर तीसरी ताली 3)
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बोल धी ना | धी धी ना | ती ना | धी धी ना
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दुगुन दोगुनी लय इसे एक मात्रा में दो बोलों को रखकर नलखा पढ़ा जाता है।
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मात्रा Matra): 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10
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बोल Bol): धीना | धीधी | नाती | नाधी | धीना | धीना | धीधी | नाधी | नाधी | नाधी
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