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FOR CBSE CLASS 10 EXAM PREPARATION
CBSE Class 10 2026
Question Paper
Solution · Hindi Course
B
EXAM YEAR TYPE SUBJECT
CBSE Class 10 2026 Question Paper Solution Hindi Course B
Notes · Sample Papers · Previous Year Papers · Mock Tests
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m .co s em
se la ्ቚयोग हेतु
अत्यतं गोपनीय-के वल आतं रिक एवं सीमित
g
a
सेकेंडिी स्कूल समटिमिके ट पिी्षा, 2025-26
अंक-योजना
महंदी ‘ब’ मवषय कोड - 085
्ቚ्-प्ቔ कोड-- 4/1/1, 4/1/2, 4/1/3 m
m .co
सामान्य नि्शेश:-
.co
m यों िे उनित आिलि िे नलए उ्तर-पनु ततिाओ ं िा मलू यांिि एि महቈኚवपर्ू ि ्ऺनिया e m
s है ।
1. आप जािते हैं नि eपरी्षानथि
s l a
gअध्यापि-
l a a
ag िर सिती है । इससे बििे िे नलए अिरु ोध निया जाता है नि मलू यांिि ्ऺारंभ िरिे से पूवि ही आप
मलू यांिि में एि छोटी-सी भल
ू भी गभं ीर समतया िो जन्म ्शे सिती है, जो परी्षानथियों िे भनवष्य, नश्षा- ्ऺर्ाली और
व्यवतथा िो भी ्ऺभानवत
मलू याि
ं ि नि्शेशों िो पढ़ और समझ लें ।
2. मलू यांिि िीनत एि गोपिीय िीनत है क्योंनि यह आयोनजत परी्षाओ ं िी गोपिीयता, निये गए मलू यांिि तथा िई अन्य
पहलओु ं से संबंनधत है । इसिा निसी भी तरह से साविजनिि रूप से लीि होिा परी्षा-्ऺर्ाली िे पटरी से उतरिे िा िारर् बि
सिता है और लाखों परी्षानथियों िे जीवि और भनवष्य िो ्ऺभानवत िर सिता है । इस िीनत / ्शततावेज िो निसी िे साथ साझा
िरिा, निसी पनििा में ्ऺिानशत िरिा और समािार पि / वेबसाइट आन्श में छापिा भारतीय न्याय संनहता (BNS) िे तहत
m
िायिवाही िो आमनं ित िर सिता है । co .
3. ं -योजिा में न्शए गए नि्शेशों िे अिसु ार ही मलू याsंि
अि m
e ि निया जािा िानहए, अपिी व्यनिगत व्याख्या या निसी अन्य
धारर्ा िे अिसु ार िहीं । यह अनिवायि है नि अिं -योजिाgिाlaअिपु ालि परू ी तरह और नि्ीापवू िि निया जाए । मलू यांिि िरते समय
िवीितम सिू िा और ्ञाि पर आधाररत अथवा िवािार a पर आधाररत उ्तरों िो उििी सत्यता और उपयिु ता िो परखते हुए परू े
अि
ं न्शए जाएँ ।
4. मख्ु य परी्षि ्ऺत्येि मलू याि
ं ििताि िे ्षारा पहले न्शि जाँिी गई उ्तर-पनु ततिाओ ं िे मलू याि
ं ि िी जाँि ध्यािपवू ि
ि िरे
और आ्षतत हो नि मलू यांिि-योजिा में न्शए गए नि्शेशों िे अिसु ार ही मलू यांिि निया जा रहा है । परी्षिों िो और उ्तर- पनु ततिाएँ
तभी ्शी जाएँ जब वह आ्षतत हो नि उििे अि ं ि में िोई नभन्िता िहीं है ।
परी्षि सही उ्तर पर सही (√) और गलत उ्तर पर गलत (×) िा निशाि लगाएँ । परी्षि ्षारा ऐसाom नि्ቡ ि लगािे से ऐसा
c
5.
. c om है नि उ्तर सही है परंतु उस पर अिं िहीं न्शए गए । परी्षिों ्षारा यह भलू सवािनधि िी जाती
समझ में आता
e m . है ।
s
6.em यमद मकसी ्ቚ् का उपभाग हो तो कृपया ्ቚ्ों के उपभागों के उ्तिों पि अंत िेंaदायीं ओि अंक मदए जाएँ । बाद
l ृ त कि मदया जाए । इसका
l asिें इन उपभागों के अं क ों का योग बायीं ओि के हामिये के ्ቚािं भ िें मलखकि a g
उसे गोलाक
ag अनुपालन दृढ़तापूविक मकया जाए ।
7. यमद मकसी ्ቚ् का कोई उपभाग न हो तो बायीं ओि के हामिये के ्ቚािंभ िें अंक मदए जाएँ औि उन्हें गोलाकृत
मकया जाए। इसके अनपु ालन िें भी दृढ़ता बिती जाए ।
8. यमद पिी्षा्वी ने मकसी ्ቚ् का उ्ति दो स््वानों पि मलख मदया है औि मकसी को काटा नहीं है तो मजस उ्ति पि
अमिक अंक ्ቚा् हो िहे हों, उस पि अंक दें औि दूसिे को काट दें । यमद पिी्षा्वी ने अमतरि्ሹ ्ቚ् / ्ቚ्ों का उ्ति दे मदया
है तो मजन उ्तिों पि अमिक अंक ्ቚा् हो िहे हों उन्हें ही स्वीकाि किें / उन्हीं पि अंक दें ।
o m m .
c
. हो तो उसे अि्शेखा िरें और उस पर अिं ि िाटे जाएँ । s e
9.
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एि ही ्ऺिार िी अशनु ि बार-बार
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l a s ag
4-1-1 to 3
a g 1
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10. यहाँ यह ध्याि रखिा होगा नि मलू यांिि में संपर्ू ि अंि पैमािे 0 – 80 (उ्शाहरर् 0-80 अि
ं जैसा नि ्ऺ्ा-पि में न्शया गया
है) िा ्ऺयोग अभी्ि है अथाित परी्षाथी िे यन्श सभी अपेन्षत उ्तर-नबं्शओ
ु ं िा उललेख निया है तो उसे परू े अि
ं ्शेिे में संिोि ि
िरें ।
11. ्ቚत्येक पिी्षक को पर्ू ि कायि-अवमि िें अ्वाित 8 घटं े ्ቚमतमदन अमनवायि रूप से िूलयांकन कायि किना है । (मवस्तृत
मवविर् ‘स्पॉट गाइडलाइन’ िें मदया गया है)
12. यह सनु िनित िरें नि आप निम्िनलनखत ्ऺिार िी िनु टयाँ ि िरें जो नपछले व्षों में होती रही हैं-
• उ्तर पनु ततिा में निसी उ्तर या उ्तर िे अश
ं िो जाँिे नबिा छोड़ ्शेिा ।
• उ्तर िे नलए निधािररत अि
ं ों से अनधि या िम अि
ं ्शेिा ।
• उ्तर में न्शए गए अंिों िा योग ठीि ि होिा ।
• उ्तर-पनु ततिा िे अ्शं र न्शए गए अि
ं ों िा मख
ु पृ्ी पर सही अतं रर् ि होिा ।
• मख
ु पृ्ी पर ्ऺ्ाािसु ार योग िरिे में अशनु ि ।
• योग िरिे में अि
ं ों और शब््शों में अतं र होिा ।
• उ्तर-पनु ततिाओ ं से ऑिलाइि अि
ं -सिू ी में सही अतं रर् ि होिा ।
• िुल अि
ं ों िे योग में अशनु ि ।
• उ्तरों पर सही िा नि्ቡ (√) लगािा निंतु अि
ं ि ्शेिा ।
13. परी्षि यह भी सनु िनित िरें नि सभी उ्तरों िा मलू यांिि निया जाए, मख
ु पृ्ी पर िी गई ्ऺनवन्ि सही हो तथा ्ऺाप्ांि िो
अिं ों और शब््शों में नलखा जाए ।
14. परी्षाथी निधािररत ्ऺसतं िरर् शलु ि िे भगु ताि पर अिरु ोध िर उ्तर-पनु ततिा िी फोटोिॉपी ्ऺाप् िरिे िे हि्शार हैं । अतः
सभी मख्ु य परी्षिों / अनतररि मख्ु य परी्षिों / परी्षिों / समन्वयिों िो एि बार नफर से या्श न्शलाया जाता है नि उन्हें यह
सनु िनित िरिा िानहए नि मलू यािं ि योजिा में न्शए गए ्ऺत्येि उ्तर िे नलए मलू य-नब्शं ओ
ु ं िे अिसु ार ही मलू याि
ं ि निया जाए ।
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se Series: MK1LN la कोड 4/1/1, 4/1/2, 4/1/3
्ቚ्-प्ቔ
g
a
अंक योजना
मनिािरित सिय : 3 घटं े महंदी ‘ब’(085) अनधितम अंि : 80
्ቚ् स.ं 4/1/1 4/1/2 4/1/3 िूलयांकन मबंदु अंक
खंड - क (14)
(अपमित बोि) m
1 mअपमित गद्ांि पर आधाररत ्ऺ्ाों िे उ्तर : (7).co
co बहुमवकलपीय - m
1 1 2
.
m (C) तवात्य सरु ्षा िे ्ऺनत उ्शासीिता न्शखािे लगते हैं । s e
(i) se (i) g l a 1
(i)
l
(ii) g(ii)
a (A) (I) और (III) सही हैं । a 1
(iii)
a (iii)
(ii)
(iii) (D) िथि तथा िारर् ्शोिों सही हैं और िारर् िथि िी सही व्याख्या 1
िरता है ।
वस्तुपिक-
(iv) (iv) (iv) लू से अनभ्ऺाय- गरनमयों में िलिे वाली गमि और शष्ु ि हवा 1+1
िारर्-
m
शरीर िा तापमाि .सcंतoनु लत रहे
मािनसि और s em
शारीररि तवात्य बिा रहे
laन्षत)
(िोई एि नबं्शgु अपे
a
(v) (v) (v) राष्रीय ्षमताओ ं िो मज़बतू िरिा (िाबिि उत्सजिि एवं ्ऺ्श्षू र् आन्श 2
पर नियंिर्)
घर और उसिे आस-पास हरे -भरे ्षेिों िो बढ़ावा ्शेिा
अपमित गद्ांि पर आधाररत ्ऺ्ाों िे उ्तर : (7)
2 2 1 2
m
m बहुमवकलपीय - c. o
c. o (i) (i) (i) (C) ि्िों िे बा्श ही सख
ु िा अिभु व होता है।
s em 1
e m la
las (ii) (ii) (ii) (C) I (ii), II (i), III (iii)
g
(B) जीवि निखारिे िे नलए ि्िों िा महቈኚवaसमझािे हेतु
1
ag (iii) (iii) (iii)
वस्तुपिक-
1
(iv) (iv) (iv) जीवि में ि्िों िो तवीिार िरते हुए खश
ु रहिा और सफल होिा 2
(v) (v) (v) 2
जीवि में सुख और ्शख
ु ्शोिों िा समाि महቈኚव
सफलता िे साथ असफलता िो भी सहज रूप से तवीिार िरिा
m .
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4-1-1 to 3 g la ag
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3
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खडं – ख (16)
(व्यावहारिक व्याकिर्)
3 3 3 3 ‘पदबंि’ पर आधाररत पाँि ्ऺ्ाों में से निन्हीं चाि ्ऺ्ाों िे उ्तर अपेन्षत : (4x1
=4)
(i) - - मेहिती और हँसमख ु लड़िा - स्ञं ा प्शबधं ½+½
मेहिती और हँसमख ु - नवशे्षर् प्शबंध
(िोई एि उ्तर तवीिायि)
(ii) - - नियानवशे्षर् प्शबंध 1
(iii) - - बहुत-सा बाल और ्ऺौढ़ / बाल और ्ऺौढ़ 1
(iv) - - उ्शाहरर्- शोर मिािे वाले तमु शातं क्यों हो ? 1
(अन्य उपयि ु उ्शाहरर् भी तवीिायि)
(v) - - पहिाि-निया प्शों िा समहू , शी्षि प्श - निया ½+½
उ्शाहरर् : बच्िे िाि-गा रहे हैं ।
- (i) - आधी बाँह िी सफ़े ्श िमीज़ - सं्ञा प्शबंध 1
आधी बाँह िी सफ़े ्श - नवशे्षर् प्शबंध
पहिे था- निया प्शबधं
(िोई भी एि उ्तर तवीिायि)
- (ii) - नियानवशे्षर् प्शबधं 1
- (iii) - ईमाि्शार और मेहिती 1
- (iv) - उ्शाहरर् – वह दौड़ता चला गया । 1
(अन्य उपयि ु उ्शाहरर् भी तवीिायि)
- (v) - पहिाि : शी्षि प्श - सवििाम ½ +½
नवततार - अन्य प्श
उ्शाहरर् : दूसिों की सहायता किने वाला वह िला गया ।
(अन्य उपयि ु उ्शाहरर् भी तवीिायि)
- - (i) भरू े रंग िा परु ािा जतू ा- सं्ञा प्शबंध ½ +½
भरू े रंग िा परु ािा - नवशे्षर् प्शबंध
पहिे था – निया प्शबंध
(िोई भी एि उ्तर तवीिायि)
- - (ii) नियानवशे्षर् प्शबधं 1
- - (iii) बड़ी िोमल और मीठी 1
- - (iv) पहिाि : शी्षि प्श - सवििाम ½ +½
नवततार - अन्य प्श
उ्शाहरर् : दूसिों की सहायता किने वाला वह िला गया ।
(अन्य उपयि ु उ्शाहरर् भी तवीिायि)
- - (v) निया प्शबंध 1
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4 4 4 4 ‘िचना के आिाि पि वाक्य भेद’ परaआधाररत पाँि ्ऺ्ाों में से निन्हीं चाि (4x1
्ऺ्ाों िे उ्तर अपेन्षत : =4)
(i) - - संयिु वाक्य 1
(ii) - - नम्ቦ वाक्य : िगर िा जो एि ऊँिा ततंभ था, उस पर राजिुमार िी ्ऺनतमा थी । 1
या
राजिुमार िी जो ्ऺनतमा थी, वह िगर िे एि ऊँिे ततंभ पर थी ।
तवच्छ पािी िो लेिर बहिे वाली िन्शयाँ आज सख ू रही हैं । 1 m
1.co
(iii) - -
- mसंयि
(iv) -
o ु वाक्य: न्शिभर गौरे या उड़ी और रात िो िगर िे समीप पहुिँ ी ।
- c एि उ्देश्य और एि नवधेय / एि या एि से अनधि िताि और एि मख्ु य निया e½+½
. m
(v) -
em उ्शाहरर् : गाँव में एि ठािुरबारी थी । l as
l as ag
g
a (अन्य उपय ि
ु उ्शाहरर् भी तवीिायि )
- (i) - सरल वाक्य 1
- (ii) - नम्ቦ वाक्य: िगर िे जो लोग थे, वे राजिुमार िी ्ऺनतमा िी तारीफ िरते थे । 1
या
राजिुमार िी जो ्ऺनतमा थी, िगर िे लोग उसिी तारीफ िरते थे ।
o
सरल वाक्य: पेड़ों िी टहनियाँ बिाव m िे नलए पिु ारते उसिे हजारों हाथ हैं । 1
c
- (iii) -
- - संयिु वाक्य में ्शो या ्शो m . तवतंि उपवाक्य निसी योजि (और, परंत,ु
अनधि ½+½
eसे परतपर जड़ु े रहते हैं ।
(iv)
इसनलए, अथवा आन्श)
as
उ्शाहरर् : ि्षाgसेl एि अध्यानपिा गई ंऔर ्शसू री आ गई ं।
(अन्य उपयि
a
ु उ्शाहरर् भी तवीिायि)
- (v) - सयं िु वाक्य: वह ि्शी पर से गजु रा / गजु र रहा था और उसिे जहाज िे नशखरों पर 1
लटिते हुए आिाश्शीप ्शेखे ।
- - (i) सयं िु वाक्य 1
- - (ii) नम्ቦ वाक्य : तलवार िी जो मठू थी उसमें एि बड़ा-सा लाल जड़ा था । 1
सरल वाक्य: हवा िलिे पर / िलते ही पेड़ ्ऺसन्ि होिर झमू िे लगतेc oहैंm। 1
m . उपवाक्य । ्ऺधाि
- - (iii)
. co - - (iv)
s
m
पहिाि- नम्ቦ वाक्य में एि ्ऺधाि उपवाक्य होता है, शे्ष आन्ቦत
eआन्श योजि शब््शों से ½+½
e m और आन्ቦत उपवाक्य 'नि, जो, जैसा, जब, नजतिा, य्यनप
l a
l as जड़ु े रहते हैं । a g
ag उ्शाहरर् : यन्श परर्ቦम िरोगे तो सफल होगे ।
(अन्य उपयि ु उ्शाहरर् भी तवीिायि)
- - (v) संयि ु वाक्य: वह टूटे-फूटे मिाि िे समीप पहुिँ ा और उसिे भीतर िी ओर झाँिा । 1
5 5 5 5 ‘सिास’ पर आधाररत पाँि ्ऺ्ाों में से निन्हीं चाि ्ऺ्ाों िे उ्तर अपेन्षत : (4x1
=4)
(i) - -
o m
समततप्श िे प्शों िो अलग िरिे िी ्ऺनिया ½+½
m .
.c : समततप्श - रोगमिु , समास नव्ቇह - रोग से मिु
उ्शाहरर्
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4-1-1 to 3 g la ag
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5
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(अन्य उपयि ु उ्शाहरर् भी तवीिायि)
(ii) - - नतथनत िे अिसु ार - अव्ययीभाव समास ½+½
(iii) - - उ्तरप्श (तट) ्ऺधाि और पवू ि प्श (गगं ा) गौर्, िारि नि्ቡ (िा) िा लोप 1
(iv) - - महाि है आत्मा नजसिी अथाित व्यनि नवशे्ष 1
(v) - - सप्न्षि 1
- (i) - समतत प्श- पवू ि प्श और उ्तर प्श िे मेल से बिे िये शब््श ½+½
उ्शाहरर्: रे खा से अनं ित - रे खानं ित
(अन्य उपयि ु उ्शाहरर् भी तवीिायि)
- (ii) - नजतिा शी्ቈ हो सिे - अव्ययीभाव समास ½+½
- (iii) - उ्तरप्श (घर) ्ऺधाि और पवू ि प्श (रसोई) गौर्, िारि नि्ቡ (िे नलए) िा लोप 1
नव्ቇह - रसोई िे नलए घर
- (iv) - िीला है िंठ नजसिा (नशव) 1
- (v) - हथघड़ी / हाथघड़ी 1
- - (i) अव्ययीभाव समास िी पहिाि- पवू ि प्श अव्यय और ्ऺमखु ½+½
उ्शाहरर्- आजीवि
(अन्य उपयि ु उ्शाहरर् भी तवीिायि)
- - (ii) नव्या से हीि, भे्श-तत्परुु ्ष समास ½+½
- - (iii) 'सतसई' प्श में पवू ि प्श 'सत' (सात) सख्ं यावािी 1
- - (iv) पीत (पीला) है जो अबं र 1
- - (v) छािावास 1
6 6 6 6 ‘िुहाविे’ पर आधाररत पाँि ्ऺ्ाों में से निन्हीं चाि ्ऺ्ाों िे उ्तर अपेन्षत : (4x1
=4)
(i) - - पाँव जमीि पर ि पड़िा 1
(अन्य उपयि ु उ्शाहरर् भी तवीिायि)
(ii) - - गाँठ बाँधिा 1
(अन्य उपयि ु उ्शाहरर् भी तवीिायि)
(iii) - - सधु -बधु खोिा ½+½
(उनित वाक्य-्ऺयोग पर अि ं न्शए जाएँ)
(iv) - - घड़ों पािी पड़िा / जमीि में गड़ जािा 1
(अन्य उनित महु ावरे भी तवीिायि)
(v) - - जमीि आसमाि िा अतं र - बहुत अनधि अतं र ½+½
उन्िीस-बीस िा अंतर - बहुत िम अतं र
(अथि अथवा वाक्य-्ऺयोग ्षारा अतं र तप्ि िरिे पर अि
ं न्शए जाएँ)
- (i) - नसर आँखों पर बैठािा / पलिों पर बैठािा 1
(अन्य उनित महु ावरे भी तवीिायि)
4-1-1 to 3 6
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se - (ii) -
g la / ग्शग्श होिा
िौ ्शो ग्यारह होिा / रफूिक्िर होिा / िंपत होिा 1
(अन्य उनित महु ावरे भी तवीिायि) a
- (iii) - लिीर िा फिीर होिा ½+½
(उनित अथिपर्ू ि वाक्य-्ऺयोग पर अि ं न्शए जाएँ)
- (iv) - होश आिा / आँखों से पर्शा हटिा 1
(अन्य उनित महु ावरे भी तवीिायि)
- (v) - अक्ल पर पत्थर पड़िा- िुछ समझ ि आिा ½+½
अक्ल िे घोड़े ्शौड़ािा – समझ्शारी से िाम लेिा m
co
m(अथि अथवा वाक्य-्ऺयोग ्षारा अतं र तप्ि िरिे पर अिं न्शए जाएँ) m .co
m . s e
s e l a
g a
l- (i) हाथ-पाँव फूल जािा ag 1
a
-
(अन्य उपयि ु महु ावरा भी तवीिायि)
- - (ii) घाव / जले पर िमि नछड़ििा (्ऺ्ा पि में वतििीगत अशनु ि) 1
(िोट – यन्श नव्याथी ‘नछड़ििे’ िे सं्शभि में ‘नझड़ििे’ शब््श िा ्ऺयोग िरें , तो अि
ं
न्शए जाएँ)
- - (iii) डेरा डालिा ½+ ½
(उपयि ु अथिपर्ू ि वाक्य-्ऺयोग पर अि
ं न्शया जाए)
धल ू िटािा / छक्िे छुड़ािा om 1
- - (iv)
(अन्य उपयि c
. )
ु महु ावरा भीmतवीिायि
अक्ल िा अधं ा- मख e
ूasि होिा
gl समय पर बुनि िा ्ऺयोग ि िर पािा
- - (v) ½+ ½
अक्ल िरिे जािा-
a
(अथि अथवा वाक्य-्ऺयोग ्षारा अतं र तप्ि िरिे पर अि ं न्शए जाएँ)
खंड – ग (28)
(पाि्यपुस्तक एवं पूिक पाि्यपुस्तक)
7 7 8 10 ‘पमित गद्ांि’ पर आधाररत बहुनविलपीय ्ऺ्ाों िे उ्तर :
o m 5x1
m (B) उसिे पिड़ में ि आिे िे िारर् . c
c. o(ii)
(i) (i) (i) =5
e m
m (ii) (ii) (B) (II) और (IV)
as
la se (iii) (iii) (iii)
a g l िी सही व्याख्या िरता
(D) िथि तथा िारर् ्शोिों सही हैं तथा िारर् िथि
ag है ।
(iv) (iv) (iv) (B) रहतय
(v) (v) (v) (C) उसिे माध्यम से अवध पर िब्ज़ा जमािा िाहते थे ।
m .
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s em l a
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a
7
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8 8 7 11 ‘गद् खंड’ पर आधाररत निन्हीं तीन ्ऺ्ाों िे उ्तर अपेन्षत (लगभग 25-30 (3x2
शब््शों में ) – = 6)
(i) - - ‘बड़े भाई साहब’ पाठ में भाई साहब िो नजस ्ऺिार अ्ቇं ेजी पढ़िा िनठि 1+1
और बोनझल लगता था वैसे ही मझु े (नव्षय िा िाम)...
िोई ्शो िारर्
(उनित एवं तिि पर्ू ि मि
ु उ्तर तवीिायि)
(ii) - - 1+1
क्या-
िाििू ी धाराओ ं िे अतं गित मोिमु टें िे िीिे सभा आयोनजत िरिे िी
मिाही
इस सभा में भाग लेिे वाले सरिारी िमििाररयों िो ्शो्षी समझा जािा
उ्देश्य-
्शेश वानसयों िो अ्ቇं ेज सरिार िे नवरूि एिनित होिे से रोििा
(iii) - - हाँ / िहीं 2
(उनित िारर् िे साथ तिि पर्ू ि मि
ु उ्तर तवीिायि)
(iv) - - 1+1
नफलम िी असफलता िे खतरों से आगाह निया ।
नवशे्षता-
सच्िे और नहतै्षी नमि
अिभु वी एवं व्यावसानयि सझू -बझू से पर्ू ि
(निसी एि नवशे्षता िा उललेख अपेन्षत)
- (i) - 1+1
बड़े भाई साहब िी िाररनिि नवशे्षताएँ-
ि्तिव्यनि्ी, अध्ययिशील, अिश ु ासि न्ऺय, परर्ቦमी, आ्शशिवा्शी
(नव्यानथियों ्षारा न्शए गए अन्य उपयि
ु तिि पर्ू ि उ्तर भी तवीिायि)
- (ii) - अ्ቇं ेजों िे अत्यािार और नहसं ा िे बावज्शू सभा िा आयोजि, ध्वजारोहर् 2
और ्ऺनत्ञा िा पढ़ा जािा आन्श
मनहलाओ ं िा भी लाठी िाजि सहिा और नगरफ्तार होिा
(पाठ में वनर्ित अन्य घटिाओ ं िा उललेख भी तवीिायि)
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se - (iii) - वतिमाि भारत में इस नतथनत में सधु ार-
g l a 2
िाििू ी दृन्ि से मान्य a
्ऺगनतशील नविार
जीविसाथी ििु िे िी तवतंिता
2
- (iv) - राजिपरू ्षारा नफलम िो तवीिारिे िे िारर्-
सच्िा और नहतै्षी नमि होिा m
m
c. o नफलम िी िहािी पसं्श आिा
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s em (नव्यानथियिहािी िे िायि िो पर्शे पर जीवतं िरिा
l a
g l a ों ्षारा न्शए गए अन्य उनित तिि भी तवीिायि) ag
a
- - (i) 2
व्यावहाररि बनु ि और अिभु व िा ्ऺयोग -
घर संिालि में
सीनमत आनथिि संसाधिों में परू े पररवार िा भरर्-पो्षर्
आपातिाल में धैयिपवू ि ि निर्िय लेिे िी ्षमता
m
co िा उललेख अपेन्षत)
.
(पाठ से संबंनधत उ्शाहरर्ों
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- - (ii) िोनटस - l a s 1+1
g
मोिaमु टें िे िीिे िार बजिर िौबीस नमिट पर झडं ा फहरािा
तवतंिता िी ्ऺनत्ञा पढ़िा
सविसाधारर् िी उपनतथनत अनिवायि
(िोई एि नबं्शु अपेन्षत)
उ्देश्य-
बंगाल ्षारा ्ऺथम तवतंिता न्शवस िे अवसर पर अपे्षािृ त िम भागी्शारी
m
m िे िलंि िो नमटािा c. o
m .co अ्ቇं ेज सरिार िे ्ऺनत नवरोध जतािा se
m
s e g la
g la उ्देश्य - a
a - - (iii)
साधि से अनधि भाव और िमि िा महቈኚव होिा
2
रूनढ़यों िो तोड़िर सामानजि पररवतिि लािे िा ्ऺयास िरिा
अडं माि और नििोबार ्षीपों िी वतिमाि भौगोनलि नतथनत िे नव्षय
में लोि-नव्षास िो बतािा
m .
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- - (iv) शैलें्श िी िाररनिि नवशे्षताएँ- 2
आ्शशिवा्शी एवं भाव-्ऺवर् िनव
िला िे ्ऺनत समपिर् एवं ्शानयत्व बोध
अपिे सृजि पर नव्षास
समझौता ि िरिे िी ्ऺवृन्त
(निन्हीं ्शो नबं्शओ
ु ं िा उललेख अपेन्षत)
9 9 10 8 ‘पमित काव्यांि’ पर आधाररत बहुनविलपीय ्ऺ्ाों िे उ्तर : 5x1
(i) (i) (i) (C) उििे ्शशििों िा लाभ उठािा िाहती है । =5
(ii) (ii) (ii) (B) ्शशिि, तमरर् और भनि िा
(iii) (iii) (iii) (A) िृ ष्र् िा गर्ु गाि िरते हुए धेिु िरािा
(iv) (iv) (iv) (B) िाम- तमरर्
(v) (v) (v) (B) िे वल (III) सही है ।
अथवा
(D) (III) और (IV) सही हैं ।
(िोट- ्शोिों नविलपों में से निसी एि नविलप पर अि ं न्शए जाएँ)
10 10 9 9 ‘काव्य खडं ’ पर आधाररत निन्हीं तीन ्ऺ्ाों िे उ्तर अपेन्षत (लगभग 25-30 (3x2
शब््शों में ) – =6)
(i) (i) (i) िबीर िे अिसु ार ्ञाि ्ऺानप् ही सच्िा सख ु और अ्ञािता से बड़ा िोई 2
्शख
ु िहीं
सामान्य मिष्ु य ्षारा भौनति संप्शा, खािे और सोिे जैसे निजी तवाथों
िी पनू ति में ही सख
ु तलाशिा
(ii) (ii) (ii) 2
मृत्यु निनित ही है तो उससे भयभीत क्यों होिा
मृत्यु िे पिात भी मािवता और परोपिार से मिष्ु य िी िीनति बिे रहिा
(iii) (iii) (iii) ‘पवित ्ऺ्शेश में पावस’ 1+1
रंग- नबरंगे पष्ु प, ्शपिर्-से ताल में अपिे महािार िो ्शेखते नवशाल
पवित, मोती िी लनड़यों-से झरते स्शंु र झरिे, आिाश िो छूते ऊँिे वृ्ष
(iv) (iv) (iv) 2
जागरूि और सिेत रहिर अपिी नवरासत िो सभं ालिा
तवतिं ता सेिानियों िे बनल्शाि से सीख लेिर मातृभनू म िी र्षा िरिे
िा भाव
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se 11 11 7
g la दो ्ऺ्ाों िे उ्तर लगभग 40 –
परू ि पाठ्य-पतु ति ‘संियि’ पर आधाररत निन्हीं (2x3
50 शब््शों में अपेन्षत - a =6)
पाररवाररि जीवि में परतपर ्ऺेम, िरुर्ा और सहािभु नू त िा अभाव
(i) (i) (i) 3
ररश्तों से अनधि धि िो महቈኚव ्शेिा
जमीि िे लालि में सेवा िा न्शखावा और ि नमलिे पर हररहर िािा िी उपे्षा
और ्शव्ु यिवहार
m
(ii) (ii) (ii) m 1+2.co
m .co हाँ, s e m
s e l a
g l a भावि ु , सवं ्शे िशील और भे्शभाव से रनहत
ag
a उ् िे बंधि से मि ु ्ऺेम िी भा्षा समझिा
्ऺेम, नमिता, अिे लापि, डर, ईष्याि, नव्शोह िे भाव
(िोट – बाल-मिोनव्ञाि िे उपयिि ु नब्शं ओ
ु ं पर आधाररत नव्यानथियों िे तिि पर्ू ि
उ्तर तवीिायि)
(iii) (iii) (iii) दृन्ििोर्- 1+2
o m
नश्षा िे ्ऺनत उ्शासीि . c
e m
िारर् –
la s
g
नव्यालयीa नश्षा - समय और धि िी बबाि्शी
व्यापाररि पृ्ीभनू म
खंड – घ (22)
(िचनात्िक लेखन)
12 12 15 12 निसी एक नव्षय पर सि
ं े त-नब्शं ओ
ु ं िे आधार पर लगभग 120 शब््शों
o m में अिच्ु छे ्श 1 x 5
m . c
.co
लेखि :
m
=5
m ● नव्षय-वततु s e
s e – 3 अि ं
g l a
g la ● भा्षा – 1 अि ं a
a ● ्ऺततनु त – 1 अि ं
13 13 14 14 निसी एक नव्षय पर लगभग 100 शब््शों में औपिाररि पि लेखि: 1x5
● आरंभ व अतं िी औपिाररिताएँ – 1 अिं =5
● नव्षय-वततु – 3 अि ं
● भा्षा – 1 अि ं
m .
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a
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14 14 13 13 निसी एक नव्षय पर लगभग 60 शब््शों में सिू िा लेखि: 1x4
● नव्षय-वततु – 2 अि ं =4
● ्ऺारूप – 1 अि ं
● भा्षा – 1 अि ं
15 15 12 16 निसी एक नव्षय पर लगभग 40 शब््शों में नव्ञापि : 1x3
● नव्षय-वततु – 1 अि ं =3
● ्ऺततनु त – 1 अि ं
● भा्षा – 1 अि ं
16 16 16 15 लघि
ु था लेखि अ्ववा ई-मेल लेखि : 1x5
=5
लघि
ु था लेखि (लगभग 100 शब््शों में) –
● मौनलि नव्षय-वततु – 3 अि
ं
● भा्षा – 1 अि
ं
● ्ऺभाव – 1 अि
ं
अ्ववा
ई-मेल लेखि (लगभग 80 शब््शों में ) -
● नव्षय-वततु – 3 अि
ं
● ्ऺारूप – 1 अि
ं
● भा्षा – 1 अि
ं
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