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केवल अभ्यास हे तु नमूना प्रश्न पत्र
Sample Question Paper for Practice only
हायर सेकेण्डरी परीक्षा – 2026
Higher Secondary Examination-2026
ववषय - वहन्दी
Subject - Hindi
Total Question Total Printed Pages Time Maximum Marks
23 5 3 hours 80
वनर्दे श :-
i. सभी प्रश्न अनिवार्य हैं |
ii. प्रत्येक प्रश्न के निए आवं नित अंक उसके सम्मुख अंनकत हैं |
iii. प्रश्न क्रमां क 1 से 5 तक 32 वस्तु निष्ठ प्रश्न हैं | प्रत्येक उप-प्रश्न पर 1 अंक निर्ाय ररत हैं |
iv. प्रश्न क्रमां क 6 से 15 तक कुि 10 प्रश्न हैं | प्रत्येक प्रश्न पर 2 अंक निर्ाय ररत हैं | शब्द सीमा िगभग 30 शब्द हैं |
v. प्रश्न क्रमां क 16 से 19 तक कुि 4 प्रश्न हैं | प्रत्येक प्रश्न पर 3 अंक निर्ाय ररत हैं | शब्द सीमा िगभग 75 शब्द हैं |
vi. प्रश्न क्रमां क 20 से 23 तक कुि 4 प्रश्न हैं | प्रत्येक प्रश्न पर 4 अंक निर्ाय ररत हैं | शब्द सीमा िगभग 120 शब्द हैं |
vii. प्रश्न क्रमां क 6 से 23 तक सभी प्रश्ननं के आं तररक नवकल्प निए गए हैं |
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1. सही ववकल्प का चयन कर वलखिए - (1x6=6)
i. ‘कनवता एक उडाि है ’ कनव िे नकसके बहािे कहा है ?
(अ) पतं ग के (ब) निनडर्ा के (स) बच्नं के (ि) फूिनं के
ii. काव्य में जहााँ उपमेर् कन उपमाि से श्रेष्ठ बतार्ा जाता है , वहााँ अिंकार हनता है -
(अ) सं िेह (ब) नवरनर्ाभास (स) भ्ां नतमाि (ि) व्यनतरे क
iii. से वक र्मय में भक्तिि स्पर्ाय करती है -
(अ) िक्ष्मण से (ब) अंगि से (स) हिुमाि से (ि) सु ग्रीव से
iv. निम्न निक्तखत शब्दनं में से नवज्ञाि सं बंर्ी तकिीकी शब्द िही ं है -
(अ) िानभक (ब) त्वरण (स) पर्य वेक्षक (ि) गु रुत्वाकर्यण
v. र्शनर्र बाबू का तीसरा बे िा स्कॉिरनशप िेकर ििा गर्ा था-
(अ) अमरीका (ब) इं ग्लैड (स) जापाि (ि) रूस
vi. आमतौर पर रे नडर्न िािक की अवनर् हनती है -
(अ) 10-20 नमनिि (ब) 15-30 नमनिि (स) 20-40 नमनिि (ि) 40-60 नमनिि
2. ररक्त स्थान ों की पूवति कर वलखिए – (1x6=6)
i. सबसे ते ज बौछारें गर्ी.ं ................... गर्ा। (सावि/भािनं)
ii. ओज गु ण..................... में पार्ा जाता है । (वीर रस / करुण रस)
iii. ऋनर् - मुनिर्नं िे............................ कन सबसे ऊाँिा स्थाि निर्ा है । (िर्ा / िाि)
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iv. ‘पेि में िूहे कूि रहे हैं ' वाक्य में............................... शब्द शक्ति है । (िक्षणा / व्यं जिा)
v. राखाििास बिजी मुअिजन-िडन............................. में आए। (1922 / 1924)
vi.............................. कनवता का अनिवार्य तत्त्व है । (छं ि / वाक्य)
3. वनम्नवलखित कथन ों के समक्ष सत्य या असत्य वलखिए – (1x6=6)
i. नजिआर्ा बािक आाँ गि में ठु िक रहा है ।
ii. सनरठा एक वनणय क छन्द है ।
iii. शेर के बच्े का असि िाम िााँ ि नसं ह था।
iv. ‘हाँ सिा-रनिा’ पूणय पुिरुि शब्द र्ु ग्म का उिाहरण है ।
v. वसं त पािीि िाम का िडका शरीर से िु बिा-पतिा था।
vi. पत्रकाररता जल्दी में निखा गर्ा सानहत्य है ।
4. सही ज ड़ी का वमलान कर वलखिए – (1x7=7)
स्तम्भ (अ) स्तम्भ (ब)
i ‘कबीर सम्माि’ (क) प्रर्नगवाि
ii िर्े नबम्ब , िर्े प्रतीक (ख) शमशेरबहािु र नसं ह
iii स्मृनत की रे खाएाँ (ग) अिुभाव
iv आश्रर् की बाह्य शारीररक िेष्टाएाँ (घ) भक्तिि
v शुभकामिाएाँ , आशीवाय ि (ि) शब्दनं का स्थानर्त्व
vi मुनित माध्यमनं की नवशेर्ता (छ) िक्ष्मी - िारार्ण
vii. असीक के फूि (ज) इच्छावािक वाक्य
5. वनम्नवलखित प्रश्न ों के उत्तर एक वाक्य में वलखिए – (1x7=7)
i. रघुवीर सहार् नकस तार सप्तक के कनव हैं ?
ii. पंनडतराज जगन्नाथ के अिु सार काव्य की पररभार्ा निक्तखए।
iii. 'मूकिार्क' 'जिता' पनत्रका के सं पािक का िाम निक्तखए।
iv. नहन्दी गिर् का जिक नकसे मािा गर्ा है ?
v. ‘जूझ’ उपन्यास के नहन्दी अिुवािक क िाम निक्तखए।
vi. िाट्यशास्त्र के अिुसार िािक का शरीर नकसे कहा गर्ा?
vii. 'पािी-पािी हनिा' मुहावरे का वाक्यनं में प्रर्नग कर निक्तखए।
6. रीनतकाि की कनई - िन नवशेर्ताएाँ निक्तखए। (2)
िई कनवता की कनई - िन नवशेर्ताएाँ निक्तखए।
7. निशाओं कन मृिंग की तरह बजािे से क्या तात्पर्य है ? (2)
भार्ा कन सहूनिर्त से बरतिे से क्या अनभप्रार् है ?
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8. सां गरूपक अिंकार की पररभार्ा उिाहरण सनहत निक्तखए। (2)
मुिक काव्य की पररभार्ा उिाहरण सनहत निक्तखए।
9. सवै र्ा छं ि नकसे कहते हैं ? उिाहरण सनहत निक्तखए। (2)
नबंब नवर्ाि नकसे कहते हैं ? उिाहरण सनहत निक्तखए।
10. रे खानित्र एवं सं स्मरण में कनई - िन अंतर निक्तखए। (2)
िािक एवं एकां की में कनई - िन अंतर निक्तखए।
11. 'भक्तिि की कहािी अर्ू री है ' िेक्तखका महािे वी िे ऐसा क्यनं कहा है ? (2)
िेखक िे नशरीर् कन कािजर्ी अवर्ू त क्यनं कहा है ?
12. मुहावरे एवं िनकनक्ति में िन प्रमुख अंतर निक्तखए। (2)
राष्टरभार्ा एवं राजभार्ा में िन प्रमुख अंतर निक्तखए।
13. रििा के आर्ार पर वाक्य नकतिे प्रकार के हनते हैं ? उिके िाम एवं उिाहरण निक्तखए। (2)
निम्ननिक्तखत वाक्यनं कन शुद्ध करके निक्तखए।
i. आपका भविीर् ।
ii. रार्ा एक फूिनं की मािा बाजार से िाई।
14. मुअिजन-िडन की जि सं स्कृनत की िन नवशेर्ताएाँ निक्तखए। (2)
'जूझ' शीर्यक का औनित्य क्या है ? निक्तखए।
15. इं िरिेि की िन प्रमुख सीमाएाँ निक्तखए। (2)
एक अच्छे िेखि की िन प्रमुख नवशेर्ताएाँ निक्तखए।
16. सू र्यकान्त नत्रपाठी ‘निरािा’ अथवा उमाशंकर जनशी की काव्यगत नवशेर्ताएाँ निम्ननिक्तखत नबन्िु ओं के आर्ार पर निक्तखए –
i. िन रििाएाँ ii. भावपक्ष iii. सानहत्य में स्थाि (3)
17. फणीश्वरिाथ रे णु अथवा र्मयवीर भारती की सानहक्तत्यक नवशेर्ताएाँ निम्ननिक्तखत नबन्िु ओं के आर्ार पर निक्तखए – (3)
i. िन रििाएाँ ii. भार्ा-शैिी iii. सानहत्य में स्थाि
18. ‘र्ु वा िररत्र' नवर्र् पर सारगनभय त अिु च्छेि निक्तखए | (3)
सडक सु रक्षा जागरुकता हेतु एक नवज्ञापि बिाकर निक्तखए।
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19. निम्ननिक्तखत अपनठत गद्ां श अथवा काव्यां श कन पढ़कर िीिे निखे प्रश्ननं के उत्तर निक्तखए। (3)
कई िनग समझते हैं नक अिुशासि और स्वतं त्रता में नवरनर् है , नकन्तु वास्तव में र्ह भ्म है । अिुशासि द्वारा स्वतं त्रता िही ं
छीिी जाती, बक्ति िू सरनं की स्वतं त्रता की रक्षा हनती है । सडक पर िििे के निर्े हम स्वतं त्र हैं । हमें बाईं तरफ से िििा
िानहए, नकंतु िाहें तन बीि में भी िि सकते हैं । इससे हम अपिे प्राण तन सं कि में डािते हैं , िू सरनं की स्वतं त्रता भी छीिते हैं ।
नवद्ाथी भारत के भावी-राष्टर निमाय ता हैं । उन्हें अिुशासि के गु णनं का अभ्यास अभी से करिा िानहए नजससे वे भारत के सच्े
सपूत कहिा सकें।
प्रश्न- i. उपर्ुय ि गद्ां श का उपर्ु ि शीर्यक निक्तखए।
ii. उपर्ुय ि गद्ां श का सारां श निक्तखए।
iii. राष्टर-निमाय ता का वाक्य में प्रर्नग कर निक्तखए।
कि जन हमारी सभ्यता पर थे हाँ से अज्ञाि से ,
वे आज िक्तित हन रहे हैं अनर्क अिुसंर्ाि से ।
जन आज प्रेमी हैं हमारे भि कि हनंगे वही,
जन आज व्यथय नवरि हैं अिुरि कि हनंगे वही।
सब िे श नवद्ा प्राक्तप्त कन सतत र्हां आते रहे ,
सु रिनक में भी गीत ऐसे िे व-गण गाते रहे -
"हैं र्न्य भारतवर्यवासी र्न्य भारत वर्य है ,
सु रिनक से भी सवय था उसका अनर्क उत्कर्य है "।।
प्रश्न- i. प्रस्तु त काव्यां श का शीर्यक निक्तखए।
ii. प्रस्तु त काव्यां श का भाव स्पष्ट कर निक्तखए।
iii. िे व-गण कैसे गीत गाते रहे हैं ?
20. निम्ननिक्तखत काव्यां श का संिभय -प्रसं ग, काव्य सौंिर्य सनहत भावाथय निक्तखए- (4)
मैं और, और जग और कहााँ का िाता,
मैं बिा-बिा नकतिे जग रनज़ नमिाता;
जग नजस पृथ्वी पर जनडा करता वै भव,
मैं प्रनत पग से उस पृथ्वी कन ठु कराता !
र्ू त कहौ, अवर्ू त कहौ, रजपूतु कहौ, जनिहा कहौ कनऊ ।
काहू की बे िीसनं बे िा ि ब्याहब, काहूकी जानत नबगार ि सनऊ ।।
तु िसी सारिाम गु िामु है राम कन, जाकन रुिै सन कहै कछु ओऊ ।
मााँ नग कै खैबन, मसीत कन सनइबन, िैबनंकन एकु ि िै बकन िनऊ ।।
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21. निम्ननिक्तखत गद्ां श की सं िभय -प्रसं ग एवं नवशेर् सनहत व्याख्या निक्तखए- (4)
मैं सनिता हूाँ नक पुरािे की र्ह अनर्कार-निप्सा क्यनं िही ं समर् रहते सावर्ाि हन जाती? जरा और मृत्यु र्े िनिनं ही जगत के
अनतपररनित और अनतप्रामानणक सत्य हैं । तु िसीिास िे अफसनस के साथ इिकी सच्ाई पर मुहर िगाई थी- ‘र्रा कन प्रमाि
र्ही तु िसी जन फरा सन झरा, जन बरा सन बु तािा !’
उस बि कन िाम जन िन, पर वह निश्चर् उस स्थि की वस्तु िही ं है जहां पर सं सारी वै भव फिता-फूिता है । वह कुछ अपर
जानत का तत्त्व है । िनग ररस्पररिुअि कहते हैं , आक्तिक, र्ानमयक, िैनतक कहते हैं । मुझे र्नग्यता िही ं नक मैं उि शब्दनं में अंतर
िे खूाँ और प्रनतपािि करू
ाँ । मुझे शब्द से सरनकार िही।ं मैं नवद्वाि िही ं नक शब्दनं पर अिकूं। िेनकि इतिा तन है नक जहां
तृ ष्णा है , बिनर रखिे की स्पृहा है , वहां उस बि का बीज िही ं है । बक्ति र्नि इस बि कन सच्ा मािकर बात की जाए तन
कहिा हनगा नक सं िर् की तृ ष्णा और वै भव की िाह में व्यक्ति की निबय िता ही प्रमानणत हनती है। निबय ि ही र्ि की ओर
झुकता है । वह अबिता है ।
22. उत्तर पुक्तस्तका की पुिगय णिा हे तु सनिव माध्यनमक नशक्षा मंडि भनपाि कन आवे िि पत्र निक्तखए। (4)
राज्यस्तरीर् बािरं ग निबं र् प्रनतर्ननगता में प्रथम स्थाि प्राप्त करिे पर नमत्र कन बर्ाई पत्र निक्तखए।
23. निम्ननिक्तखत में से नकसी एक नवर्र् पर रूपरे खा सनहत सारगनभय त निबं र् निक्तखए। (4)
i. िै निक जीवि में इं िरिेि का महत्त्ि।
ii. समािार पत्रनं की उपर्ननगता।
iii. स्वच्छता अनभर्ाि ।
iv. नबिु पािी सब सू ि।
v. नवद्ाथी जीवि में अिुशासि ।
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