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NCERT
SOLUTIONS
CLASS - 8TH
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Book : Vasant Ncert Solutions | Chapter - 7 Hindi
Class : 8th
Subject : वसंत
Chapter : 7
Chapter Name : क्या निराश हुआ जाए
Q1 लेखक िे स्वीकार नकया है नक लोगों िे उन्हें भी धोखा निया है निर भी वह निराश िहीं हैं । आपके नवचार से इस
बात का क्या कारण हो सकता है ?
Answer. लेखक के अिुसार बहुत कम स्थािों पर नवश्वासघात िाम की चीज़ नमलती हैं | केवल उन्हीं बातों का नहसाब
रखा जाये नजिमें धोखा खाया हैं , तो जीवि कष्टकारी होगा| क्योंनक ऐसी भी अिेक घटिायें हैं जब लोगों िे नबिा वजह
भी सहायता की हैं | लेखक के मि में अभी भी आशा की नकरण हैं |
Page : 42 , Block Name : आपके नवचार से
Q2 समाचार पत्ों, पनत्काओं और टे लीनवज़ि पर आपिे ऐसी अिेक घटिाएँ िे खी-सुिी होंगी नजिमें लोगों िे नबिा
नकसी लालच के िू सरों की सहायता की हो या ईमाििारी से काम नकया हो। ऐसे समाचार तथा लेख एकनत्त करें
और कम-से-कम िो घटिाओं पर अपिी नटप्पणी नलखें।
Answer. छात् अपिे अिुभव के आधार पर नलखे |
Page : 42 , Block Name : आपके नवचार से
Q3 लेखक िे अपिे जीवि की िो घटिाओं में रे लवे नटकट बाबू और बस कंडक्टर की अच्छाई और ईमाििारी की
बात बताई है । आप भी अपिे या अपिे नकसी पररनचत के साथ हुई नकसी घटिा के बारे में बताइए नजसमें नकसी िे
नबिा नकसी स्वाथथ के भलाई, ईमाििारी और अच्छाई के कायथ नकए हों।
Answer. छात् अपिे अिुभव के आधार पर नलखे |
Page : 43 , Block Name : आपके नवचार से
Q1 िोषों का पिाथ फ़ाश करिा कब बुरा रूप ले सकता है ?
Answer. लेखक के अिुसार, िोषों का पिाथ फ़ाश करिा बुरी बात िहीं होती है ।परन्तु, बुरा तब होता है जब हम उसकी
बुराई में तो रस ले लेते हैं पर अच्छाई को भुला िे ते हैं । हमारा िू सरों के िोषोि् घाटि को अपिा कर्त्थव्य माि लेिा सही
िहीं है ।
Page : 43, Block Name : पिाथ फ़ाश
Q2 आजकल के बहुत से समाचार पत् या समाचार चैिल 'िोषों का पिाथ फ़ाश' कर रहे हैं । इस प्रकार के समाचारों
और कायथक्रमों की साथथकता पर तकथ सनहत नवचार नलखखए।
Answer. टीवी चैिल व समाचार पत् द्वारा नजस प्रकार 'िोषों का पिाथ फ़ाश' नकया जा रहा है वो पहले नकसी सीमा
तक सही हुआ करता था। परन्तु, आज टीवी चैिलों और समाचार पत्ों की भरमार के कारण उिके बीच श्रेष्ठ निखिे
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Book : Vasant Ncert Solutions | Chapter - 7 Hindi
की होड़ िे इसे धंधा बिा निया है । इससे लोग िोिों पक्ों की सच्चाई जािे नबिा ही अपिी तरफ़ से िोषारोपण आरम्भ
कर िे ते है । और इस बात का नकसी को भी ध्याि िहीं है नक इससे नकसी के जीवि पर बुरा असर पड़ सकता है।
Page : 43, Block Name : पिाथ फ़ाश
Q6 निम्ननलखखत के संभानवत पररणाम क्या-क्या हो सकते हैं? आपस में चचाथ कीनजए, जैसे - "ईमाििारी को मूखथता
का पयाथ य समझा जािे लगा है।" पररणाम – भ्रष्टाचार बढे गा।
I. "सच्चाई केवल भीरू और बेबस लोगों के नहस्से पड़ी है ।" …………………….
II. "झूठ और िरे ब का रोज़गार करिेवाले िल-िूल रहे हैं ।"……………………….
III. "हर आिमी िोषी अनधक निख रहा है, गुणी कम।" ………………………
I. तािाशाही बढे गी
II. भ्रष्टाचार बढे गा।
III. अनवश्वास बढे गा
Page : 43, Block Name : कारण बताए
Q7 आपिे इस लेख में एक बस की यात्ा के बारे में पढा। इससे पहले भी आप एक बस यात्ा के बारे में पढ चुके हैं ।
यनि िोिों बस-यात्ाओं के लेखक आपस में नमलते तो एक-िू सरे को कौि-कौि सी बातें बताते? अपिी कल्पिा से
उिकी बातचीत नलखखए।
Answer. छात् स्वयं नलखे |
Page : 43, Block Name : िो लेखक और बस यात्ा
Q1 लेखक िे लेख का शीषथक 'क्या निराश हुआ जाए' क्यों रखा होगा? क्या आप इससे भी बेहतर शीषथक सुझा सकते
हैं ?
Answer. लेखक िे इस लेख का शीषथक 'क्या निराश हुआ जाए' उनचत रखा है क्योंनक यह उस सत्य को उजागर
करता है जो हम अपिे आसपास घटते िे खते रहते हैं । अगर हम एक-िो बार धोखा खािे पर यही सोचते रहें नक इस
संसार में ईमाििार लोगों की कमी हो गयी है तो यह सही िहीं होगा। आज भी ऐसे कई लोग हैं नजन्होंिे अपिी
ईमाििारी को बरकरार रखा है । लेखक िे इसी आधार पर लेख का शीषथक 'क्या निराश हुआ जाए' रखा है ।
Page : 43, Block Name : साथथक शीषथक
Q2 यनि 'क्या निराश हुआ जाए' के बाि कोई नवराम नचन्ह लगािे के नलए कहा जाए तो आप निए गए नचह्ों में से कौि-
सा नचन्ह लगाएँ गे? अपिे चुिाव का कारण भी बताइए। -, । . ! ? . ; - , .... ।
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''आिशों की बातें करिा तो बहुत आसाि है पर उि पर चलिा बहुत कनठि है।'' क्या आप इस बात से सहमत हैं ?
तकथ सनहत उर्त्र िीनजए।
Answer. 'क्या निराश हुआ जाए' के बाि मैं प्रश्न नचन्ह 'क्या निराश हुआ जाए?' लगािा उनचत समझता हँ । समाज में
व्याप्त बुराइयों के बीच रहते हुए भी जीवि जीिे के नलए सकारात्मक दृनष्ट जरूरी है । मैं यह नचन्ह इसनलए लगािा
चाहँ गी नक मैं उि लोगों से प्रश्न कर सकूँ जो कहते हैं नक अब ईमाििारी और इं सानियत खत्म हो गई है । क्या उिके
जीवि में कभी कोई ऐसी घटिा िहीं घटी होगी जब नकसी िे उिकी सहायता नबिा नकसी स्वाथथ के की हो?
''आिशों की बातें करिा तो बहुत आसाि है पर उि पर चलिा बहुत कनठि है ।'' मैं इस बात से सहमत हँ | क्योंनक
व्यखि जब आिशों की राह पर चलिा आसाि िहीं होता| कनठिाइयों और लोगों का सामिा अकेले करिा होता हैं |
Page : 44, Block Name : साथथक शीषथक
Q1 आपके नवचार से हमारे महाि नवद्वािों िे नकस तरह के भारत के सपिे िे खे थे? नलखखए।
Answer. हमारे महाि मनिनषयों िे एक आिशथ और बुराइयों से रनहत भारत की कल्पिा की थी। एक ऐसा भारत जहाँ
लोगों में आपसी भाईचारे तथा परोपकार की भाविा सवोपरर हो। भारत महाि ऋनष-मुनियों का िे श रहा है । यहाँ के
मनिनषयों िे अपिे त्याग से लोगों को िया जीवि निया है।
Page : 44, Block Name : सपिों का भारत
Q2 आपके सपिों का भारत कैसा होिा चानहए? नलखखए।
Answer. हमारे सपिों का भारत नहं सा तथा बुराइयों से रनहत होिा चानहए। लोगों में आपसी संबंध अच्छे होिे चानहए।
लोग एक िू सरे की सहायता करिे को तत्पर रहें । इस प्रकार अनहं सा के मागथ पर चलकर ही हम अपिे सपिो के भारत
का निमाथ ण कर सकते हैं ।
Page : 44, Block Name : सपिों का भारत
Q1 िो शब्ों के नमलिे से समास बिता है । समास का एक प्रकार है -द्वं द्व समास। इसमें िोिों शब् प्रधाि होते हैं । जब
िोिों भाग प्रधाि होंगे तो एक-िू सरे में द्वं द्व (स्पधाथ, होड़) की संभाविा होती है। कोई नकसी से पीछे रहिा िहीं चाहता,
जैसे - चरम और परम = चरम-परम, भीरु और बेबस = भीरू-बेबस। निि और रात = निि-रात।
'और' के साथ आए शब्ों के जोड़े को 'और' हटाकर (-) योजक नचह् भी लगाया जाता है। कभी-कभी एक साथ भी
नलखा जाता है । द्वं द्व समास के बारह उिाहरण ढू ँ ढकर नलखखए।
I. माता और नपता = माता-नपता
II. सुख और िु ुःख = सुख-िु ुःख
III. भला और बुरा = भला-बुरा
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Book : Vasant Ncert Solutions | Chapter - 7 Hindi
IV. रात और निि = रात-निि
V. पाप और पुण्य = पाप-पुण्य
VI. राजा और प्रजा = राजा-प्रजा
VII. सीता और राम = सीता-राम
VIII. छोटा और बड़ा = छोटा-बड़ा
IX. िे श और नविे श = िे श – नविे श
X. अपिा और पराया = अपिा – पराया
XI. ऊँच और िीच = ऊँच – िीच
XII. रुपया और पैसा = रुपया - पैसा
Page : 44, Block Name : भाषा की बात
Q2 पाठ से तीिों प्रकार की संज्ञाओं के उिाहरण खोजकर नलखखए।
· व्यखिवाचक संज्ञा - रबींद्रिाथ टै गोर, मििमोहि मालवीय, नतलक, महात्मा गाँ धी
· जानतवाचक संज्ञा – बस, यात्ी, मिुष्य, डर ाइवर, कंडक्टर, नहन्िू , पनत, पनि
· भाववाचक संज्ञा - ईमाििारी, सच्चाई, झूठ, चोर, डकैत|
Page : 44, Block Name : भाषा की बात
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