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NCERT Solutions Class 8 Hindi Chapter 1 स्वदेश

AglaSem पर कक्षा 8 हिंदी पाठ 1 स्वदेश (मल्हार) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 1 (Malhar).
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Frequently Asked Questions

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NCERT Solutions Class 8 Hindi Chapter 1 स्वदेश – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा8

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 1: स्वदे श

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

1 – 12 16 37 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 31 pages

Page 2

कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 8 · हद · मल्हार

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 1: स्वदे श
NCERT कक्षा 8 हद क पाठ्यपुस्तक मल्हार के पाठ 1 स्वदे श के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ (1883–1972) क एक
आ ान क वता है, जसक टे क है — “वह हृदय नह है पत्थर है, जसम स्वदे श का प्यार नह ।” पृष्ठ 1 से 12 तक क हर ग त व ध — मेरी समझ से,
मलकर कर मलान, पं क्तय पर चचा, सोच- वचार के लए, अनुमान और कल्पना से, क वता क रचना, आपक क वता, भाषा क बात, क वता का
शीषक, आपक बात, हमारे अस्त्र-शस्त्र, अपनी भाषा अपने गीत, तरंगा झंडा, झरोखे से, साझी समझ और खोजबीन के लए — शीषक-दर-शीषक
हल क गई है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

मल्हार (कक्षा 8) 1 – 12

खं ड प्रश्न

16 37

माध्यम

हन्द

मेरी समझ से — पृष्ठ 3 और 4
पाठ से

पाठ से

प्र.1 ★
(क) नम्न ल खत प्रश्न के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा ( ) बनाइए। कुछ प्रश्न के एक से अ धक उत्तर भी हो
सकते ह। 1. “वह हृदय नह है पत्थर है” इस पं क्त म हृदय के पत्थर होने से तात्पय है— • सामा जकता से •
संवेदनहीनता से • कठोरता से • नै तकता से

तारा (★) दो वकल्प पर लगेगा — संवेदनहीनता से और कठोरता से।

वकल्प सही / कारण
ग़लत

सामा जकता से ग़लत सामा जकता एक गुण है। पत्थर बनना कोई गुण नह , कमी है। क व यहाँ नदा कर रहा है, प्रशंसा नह ।

संवेदनहीनता सही ★ पत्थर म कोई भाव, कोई अनुभू त नह होती। क व स्वयं कहता है — “जो भरा नह है भाव से, बहती
से जसम रस-धार नह ” — यानी भावशून्य होना ही पत्थर होना है।

कठोरता से सही ★ पत्थर क दूसरी पहचान है उसका कड़ापन — वह पघलता नह , पसीजता नह । क वता म आगे यही
कहा गया है — “उस पर है नह पसीजा जो”।

नै तकता से ग़लत नै तकता भी एक गुण है। जस हृदय को क व पत्थर कह रहा है, उसम गुण नह , अभाव है।

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श AglaSem · NCERT Solutions

क्य दो उत्तर: ‘पत्थर’ एक रूपक है और रूपक एक साथ एक से अ धक गुण उधार दे ता है। पत्थर महसूस नह
करता — इससे संवेदनहीनता आई; पत्थर पघलता नह — इससे कठोरता आई। इसी लए प्रश्न म कहा गया है क
कुछ प्रश्न के एक से अ धक उत्तर भी हो सकते ह।

प्र.2 2. नम्न ल खत म से कौन-सा वषय इस क वता का मुख्य भाव है? • दे श क प्रग त • दे श के प्र त प्रेम • दे श क
सुरक्षा • दे श क स्वतंत्रता

मुख्य भाव है — दे श के प्र त प्रेम। इसी वकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।

कैसे तय कर: क वता का मुख्य भाव वह होता है जो पूरी क वता म बार-बार लौटे , केवल एक जगह आकर चला न
जाए। यहाँ टे क — “वह हृदय नह है पत्थर है, जसम स्वदे श का प्यार नह ” — तीन बार आती है। क वता का
शीषक भी ‘स्वदे श’ है।

दे श क प्रग त — क वता म आई ज़रूर है (“ जसने क खजाने खोले ह”), पर वह प्रेम जगाने का साधन है, वषय नह ।
दे श क सुरक्षा — केवल एक जगह संकेत मलता है (“क्या तोप नह तलवार नह ”), और वहाँ भी क व ह थयार क नह ,
अपने हाथ क बात कर रहा है।
दे श क स्वतंत्रता — क वता स्वतंत्रता आंदोलन के दन क है, इस लए उसक छाया तो है, पर क व ने कह ‘स्वतंत्रता’ शब्द
तक नह लखा। वह दे श-प्रेम जगाना चाहता है, स्वतंत्रता उसका प रणाम है।

प्र.3 3. “हम ह जसके राजा-रानी” — इस पं क्त म ‘हम’ शब्द कसके लए आया है? • दे श के प्राकृ तक संसाधन के
लए • दे श क शासन व्यव ा के लए • दे श के समस्त नाग रक के लए • दे श के सभी प्रा णय के लए

‘हम’ आया है — दे श के समस्त नाग रक के लए। इसी के सामने तारा (★) बनाइए।

पं क्त के आस-पास से प्रमाण: इससे ठ क पहले क व कहता है — “ जसक म म उगे बढ़े , पाया जसम दाना-
पानी। ह माता- पता बंधु जसम…”। जो उगा-बढ़ा है, जसने दाना-पानी पाया है, जसके माता- पता और बंधु इसी
दे श म ह — वह दे श का नाग रक ही हो सकता है। ‘हम’ म क व अपने आपको और पढ़ने वाले, दोन को शा मल कर
लेता है।

बाक़ वकल्प क्य नह : प्राकृ तक संसाधन बोलते नह , इस लए वे ‘हम’ नह कह सकते। शासन व्यवस्था के लए भी नह —
क व तो शासन क नह , जनता क बात कर रहा है; यही इस पं क्त क चोट है क राजा-रानी कोई और नह , हम स्वयं ह। ‘सभी
प्रा णय ’ वाला उत्तर भावना क दृ ष्ट से बुरा नह , पर क वता का सीधा संदभ मनुष्य का है।

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श AglaSem · NCERT Solutions

प्र.4 4. क वता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है? • जसम साहस क कमी है • जसम स्नेह का भाव नह
है • जसम दे श-प्रेम का भाव नह है • जसम ू त और उमंग नह है

सबसे पक्का उत्तर है — जसम दे श-प्रेम का भाव नह है। इस पर तारा (★) अवश्य लगाइए। इसके साथ जसम स्नेह का भाव
नह है पर भी तारा लगाया जा सकता है — क वता म उसका भी आधार मौजूद है।

वकल्प नणय क वता से आधार

जसम साहस क कमी है नह साहस छोड़ने वाले के बारे म क व कहता है — “वह पहुँच सकेगा पार नह ।” उसे पत्थर
नह कहा गया।

जसम स्नेह का भाव नह लगाया जा सकता “जो भरा नह है भाव से, बहती जसम रस-धार नह । वह हृदय नह है पत्थर है” —
है है ★ यहाँ टे क सीधे भावहीनता के बाद आई है।

जसम दे श-प्रेम का सही ★ यही क वता क टे क है — “वह हृदय नह है पत्थर है, जसम स्वदे श का प्यार नह ।”
भाव नह है तीन बार यही पं क्त दोहराई गई है।

जसम ू त और उमंग नह “जो जी वत जोश जगा न सका” वाले के लए क व कहता है — “उस जीवन म कुछ सार
नह है नह ”, पत्थर नह कहता।

ध्यान द जए: इस तरह के प्रश्न म उत्तर छाँटने का तरीक़ा यह है क दे खए — टे क कस बात के तुरंत बाद आई
है। क व ने ‘पत्थर’ शब्द केवल दो जगह जोड़ा है: दे श-प्रेम के अभाव से, और भाव के अभाव से।

प्र.5 (ख) हो सकता है क आपके समूह के सा थय ने अलग-अलग उत्तर चुने ह । अपने मत्र के साथ वचार क जए
क आपने ये उत्तर ही क्य चुने?

इस ग त व ध म उत्तर बदलना ज़रूरी नह है — अपने उत्तर के पीछे का कारण बता पाना ज़रूरी है। चचा का तरीक़ा यह र खए:

1. हर साथी अपना चुना हुआ वकल्प पढ़े और क वता क वह पं क्त भी पढ़े जसके कारण उसने वह वकल्प चुना। बना पं क्त
के दया गया कारण नह गना जाएगा।
2. जन प्रश्न म एक से अ धक उत्तर संभव ह (जैसे प्रश्न 1 और 4), वहाँ सबके उत्तर मलाकर दे खए — प्रायः सब मलकर पूरा
अथ बनाते ह।
3. अंत म तय क जए क कस उत्तर के पक्ष म सबसे सीधा प्रमाण है, और कसके पक्ष म केवल अनुमान।

नमूना उत्तर: “मने प्रश्न 1 म ‘संवेदनहीनता’ और ‘कठोरता’ दोन चुने, क्य क पत्थर क दोन पहचान क वता म
अलग-अलग जगह आई ह — भाव का अभाव और न पसीजना। मेरे मत्र ने केवल ‘कठोरता’ चुना था; पर ‘उस पर
है नह पसीजा जो’ पं क्त सुनकर उसने माना क दोन ठ क ह। प्रश्न 4 म हम दोन का उत्तर एक ही था, क्य क टे क
क वता म तीन बार आई है और वह दे श-प्रेम क ही बात करती है।”

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श
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मलकर कर मलान — पृष्ठ 4
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पाठ से
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पाठ से मलान

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क वता म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे स्तंभ 1 म द गई ह। उन पं क्तय के भाव या संदभ स्तंभ 2 म दए गए ह।
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प्र.1

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पं क्तय का उनके सही अथ या संदभ से मलान क जए। स्तंभ 1 — 1. जसने साहस को छोड़ दया, वह पहुँच
m उस जीवन म कुछ सार नह । 3. जस पर ानी भी मरते ह,
सकेगा पार नह । 2. जो जी वत जोश जगा नeसका,
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जस पर है दु नया द वानी। 4. सब कुछlहै अपने हाथ म, क्या तोप नह तलवार नह । स्तंभ 2 — 1. जस दे श क
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ान-संपदा से समूचा वश्व प्रभा वत है। 2. जस प्रकार युद्ध म तोप और तलवार क आवश्यकता होती है, उसी
प्रकार मनुष्य क प्रग त के लए साहस और इ
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ाश क्त क आवश्यकता होती है। 3. जसने कसी काय को करने
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का साहस छोड़ दया हो वह कसी लक्ष्य को प्राप्त नह कर सकता। 4. जो स्वयं के साथ ही दूसर को भी प्रे रत

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और उत्सा हत नह कर सकते उनका जीवन नष्फल और अथहीन है।

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a सही मलान — 1 → 3, 2 → 4, 3 → 1, 4 → 2।

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क्रम स्तंभ 1 (पं क्त) स्तंभ मलान क्य
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1. जसने साहस को
a ‘पार पहुँचना’ का अथ है लक्ष्य तक पहुँचना। साहस छू टा तो यात्रा बीच म ही रुक गई — स्तंभ
3
छोड़ दया, 2 का तीसरा कथन ठ क यही कहता है।
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वह पहुँच सकेगा

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पार नह ।

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l a se 2. जो जी वत जोश 4 ‘जोश जगाना’ कसी और के भीतर जगाया जाता है। जो अपने साथ दूसर म भी उत्साह न

a g जगा न सका, भर सके, उसका जीवन ‘सार’ से ख़ाली — यानी नष्फल और अथहीन है।

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उस जीवन म कुछ

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सार नह ।

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asजससे पूरा वश्व प्रभा वत है।
3. जस पर ानी भी ‘ ानी मरते ह’ यानी व ान भी इस पर मुग्ध ह — बात दे श क ान-संपदा क हो रही है,

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मरते ह,
जस पर है दु नया

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द वानी।

क व पूछता है — क्या हमारे हाथ ही तोप-तलवार नह m . c o
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सब कुछ है अपने 2
वैसे ही जीवन क प्रग त के लए साहस और इ as
eह? यानी जैसे युद्ध म ह थयार चा हए,
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हाथ म, ाश क्त चा हए।

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क्या तोप नह

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तलवार नह ।

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मलान करने का तरीक़ा: पहले हर पं क्त म से एक कुंजी-शब्द पक ड़ए — ‘साहस’, ‘जोश जगाना’, ‘ ानी’,

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‘तोप-तलवार’। फर स्तंभ 2 म वही शब्द या उसका पयाय ढूँ ढ़ए। चार म यह शब्द ज्य का त्य मल जाता है,

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इस लए यह मलान बना उलझन के हो जाता है।

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श AglaSem · NCERT Solutions

पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 5
पाठ से

पाठ से भाव-ग्रहण

प्र.1 क वता से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे द गई ह। इन्ह ध्यानपूवक प ढ़ए और इन पर वचार क जए। आपको इनका
क्या अथ समझ म आया? अपने वचार अपने समूह म साझा क जए और ल खए। (क) “ न त है नस्संशय
न त, है जान एक दन जाने को। है काल-द प जलता हरदम, जल जाना है परवान को॥”

भावाथ — यह बलकुल तय है, इसम रत्ती भर संदेह नह , क एक दन प्राण जाने ही ह। समय का द पक नरंतर जलता रहता है
और परवाने का भाग्य यही है क वह उस द पक पर जलकर मट जाए।

क व यहाँ कस बात पर चोट कर रहा है: दे श के लए कुछ न करने का सबसे बड़ा बहाना है — डर। क व उसी
बहाने क जड़ काट दे ता है। वह कहता है क मृत्यु तो आनी ही है, वह कसी के बचने से टलती नह । तो फर डरकर
बचा हुआ जीवन भी अंत म जाएगा ही। जब जाना न त है, तो जीवन को कसी बड़े काम म लगा दे ना ही
समझदारी है।

भाषा और अलंकार —

रूपक — ‘काल-द प’ म काल पर द पक का आरोप है, और मनुष्य पर ‘परवाने’ का। परवाना द पक क ओर खचा चला जाता
है, यह जानते हुए भी क वहाँ जल जाना है — दे शभक्त का च रत्र ठ क ऐसा ही है।
अनुप्रास और पुनरु क्त — “ न त है नस्संशय न त” म ‘ न’ ध्व न तीन बार आई है और ‘ न त’ शब्द दो बार। इससे
बात पर हथौड़े जैसी चोट पड़ती है — क व कह रहा है क इस पर बहस क गुंजाइश ही नह ।
पदक्रम — ‘है’ पं क्त के आरंभ म रखा गया है (“है जान…”, “है काल-द प…”), जससे गद्य जैसी सपाटता हटकर गीत जैसी
लय आ जाती है।

प्र.2 (ख) “सब कुछ है अपने हाथ म, क्या तोप नह तलवार नह । वह हृदय नह है, पत्थर है, जसम स्वदे श का प्यार
नह ॥”

भावाथ — दे श के लए जो करना है, उसक श क्त हमारे अपने हाथ म है। क व पूछता है — क्या ये हाथ ही हमारी तोप और
तलवार नह ह? और जस हृदय म अपने दे श का प्रेम नह , वह हृदय कहलाने योग्य नह , वह पत्थर है।

पं क्त क असली चोट: लोग कहते ह — “हमारे पास साधन कहाँ ह?” क व उत्तर दे ता है क साधन बाहर नह ,
अपने भीतर और अपने हाथ म ह — प रश्रम, संगठन, संकल्प। यह क वता स्वतंत्रता आंदोलन के दन क है, जब
ह थयार जनता के पास थे ही नह ; तब यही कहना सबसे बड़ी हम्मत क बात थी क ह थयार न होना कोई बहाना
नह ।

भाषा और अलंकार —

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श AglaSem · NCERT Solutions

प्रश्न-शैली — “क्या तोप नह तलवार नह ” वास्तव म प्रश्न नह है; उत्तर पहले से तय है। ऐसा प्रश्न पाठक को अपने भीतर
झाँकने पर मजबूर करता है, इस लए कथन से कह अ धक असर करता है।
रूपक — हाथ को ही तोप-तलवार कह दे ना।
टे क क आवृ त्त — अं तम दो पं क्तयाँ पूरी क वता म तीन बार लौटती ह। हर बार वे एक नए तक के बाद आती ह, इस लए हर
बार उनका वज़न बढ़ जाता है।

प्र.3 (ग) “जो भरा नह है भाव से, बहती जसम रस-धार नह । वह हृदय नह है पत्थर है, जसम स्वदे श का प्यार
नह ॥”

भावाथ — जो हृदय भावनाओं से भरा नह है, जसके भीतर कोमल रस क धारा नह बहती, वह हृदय नह — पत्थर है। ठ क वैसे
ही जैसे उस हृदय को हृदय नह कहा जा सकता जसम अपने दे श का प्रेम नह ।

‘रस-धार’ का बब क्य : क व ने भाव क तुलना बहती हुई धारा से क है। धारा क दो वशेषताएँ ह — वह रुकती
नह , और वह जहाँ जाती है वहाँ ह रयाली लाती है। भाव भी ऐसे ही ह: वे भीतर ठहरते नह , दूसर तक पहुँचते ह,
और जहाँ पहुँचते ह वहाँ जीवन ले आते ह। इसके ठ क उलट है पत्थर — उसम न पानी रसता है, न वह पघलता है,
न उस पर कुछ उगता है।

भाषा और अलंकार —

रूपक — हृदय पर पत्थर का आरोप, और भाव पर रस-धारा का।
वरोध का स दय — एक ही चौपाई म दो उलट वस्तुएँ आमने-सामने रख द गई ह: बहता हुआ रस और सूखा पत्थर। इसी
टकराव से पं क्त चुभती है।
तक का ढाँचा — क व पहले कारण दे ता है (“जो भरा नह है भाव से”) और फर नणय सुनाता है (“वह हृदय नह है पत्थर
है”)। पूरी क वता इसी ‘पहले शत, फर फ़ैसला’ के साँचे म ढली है।

सोच- वचार के लए — पृष्ठ 5
पाठ से

पाठ से

प्र.1 क वता को पुन: ध्यान से प ढ़ए, पता लगाइए और ल खए। (क) “हम ह जसके राजा-रानी” पं क्त म राजा-रानी
कसे और क्य कहा गया है?

राजा-रानी कहा गया है — दे श के नाग रक को, यानी हम सब भारतवा सय को।
क्य — इससे पहले क पं क्तय म क व दे श को एक घर और प रवार क तरह च त्रत करता है — “ जसक म म उगे बढ़े , पाया
जसम दाना-पानी। ह माता- पता बंधु जसम”। जब दे श हमारा अपना घर है, तो उस घर म हम कराएदार या मेहमान नह ह — हम
उसके स्वामी ह। यही बात क व ‘राजा-रानी’ शब्द से कहता है।

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श AglaSem · NCERT Solutions

इस शब्द-चुनाव म तीन बात एक साथ आ जाती ह:

अ धकार — दे श पर हमारा उतना ही हक़ है जतना राजा का अपने राज्य पर। यह बात उस समय कही जा रही
थी जब दे श पर कसी और का शासन था; इस लए यह पं क्त एक चुनौती भी है।
गौरव — क व नाग रक को छोटा नह , सबसे ऊँचा पद दे ता है। इससे पढ़ने वाले के भीतर स्वा भमान जागता है।
ज़म्मेदारी — राजा-रानी केवल भोगते नह , अपने राज्य क रक्षा भी करते ह। क व याद दला रहा है क दे श क
दे खभाल कसी और का नह , हमारा काम है।

ध्यान द जए: ‘राजा-रानी’ एक रूपक है। क व सचमुच कसी को राजा नह बना रहा — वह नाग रक और दे श के
रश्ते को स्वामी और अपने घर के रश्ते क तरह दखा रहा है।

प्र.2 (ख) ‘संसार-संग’ चलने से आप क्या समझते ह? जो व्य क्त ‘संसार-संग’ नह चलता, संसार उसका क्य नह हो
पाता है?

‘संसार-संग’ चलना यानी दु नया के साथ क़दम मलाकर चलना। इसके तीन अथ नकलते ह —

समय के साथ चलना — नई जानकारी, नई वद्या, नए तौर-तरीक़े सीखते रहना; पुरानी बात से चपके न रह जाना।
लोग के साथ चलना — दूसर के सुख-दुख म शा मल होना, मलकर काम करना, अकेले-अकेले न रहना।
समाज के काम म हाथ बँटाना — केवल अपना हत न दे खना।

संसार उसका क्य नह हो पाता — क्य क संबंध एकतरफ़ा नह बनते। संसार उसी को अपना मानता है जो पहले संसार को
अपना माने। जो व्य क्त सबसे कटकर, केवल अपने लए जीता है, वह धीरे-धीरे सबक स्मृ त से बाहर हो जाता है — न कोई उसे
पुकारता है, न कसी काम म उसे गनता है। जीते-जी वह अकेला पड़ जाता है।

क वता के भीतर का सूत्र: क व क पूरी क वता इसी नयम पर टक है — जो दे ता है, उसी को मलता है। दे श ने
हम म , दाना-पानी, माता- पता और ान दया; अब लौटाने क बारी हमारी है। जो लौटाता नह , उसका दावा भी
नह बनता। इसी लए अगली ही पं क्तय म क व कहता है — जससे जा त का उद्धार न हुआ, उसका अपना उद्धार
भी नह होगा।

प्र.3 (ग) “उस पर है नह पसीजा जो/क्या है वह भू का भार नह ।” पं क्त से आप क्या समझते ह? बताइए।

अथ — जस व्य क्त का हृदय अपने दे श के लए द्र वत नह होता, जो दे श क दशा दे खकर पघलता ही नह , वह धरती पर बोझ के
सवा और कुछ नह है।
‘उस पर’ कस पर? — इससे पहले क चार-चार पं क्तय म क व दे श क दे न गनाता चला आया है: म , दाना-पानी, माता- पता
और बंधु, खुले हुए खजाने, लासानी नव रत्न, वह ान-संपदा जस पर दु नया द वानी है। ‘उस पर’ यानी इस पूरे दे श पर, इतना सब
पाने के बाद भी।

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श AglaSem · NCERT Solutions

‘भू का भार’ का बल कहाँ है: क व यह नह कहता क ऐसा व्य क्त बुरा है। वह इससे कड़ी बात कहता है — ऐसा
व्य क्त व्यथ है। पेड़ छाया दे ता है, नद पानी दे ती है, कसान अन्न दे ता है — धरती पर हर चीज़ कुछ न कुछ लौटाती
है। जो कुछ नह लौटाता, वह केवल जगह घेरता है। मुहावरे क तरह बरता गया यह प्रयोग बहुत तीखा है।

शल्प: क व ने इसे प्रश्न बनाकर पूछा है — “क्या है वह भू का भार नह ।” सीधा कथन होता तो आरोप लगता; प्रश्न
बनने से पाठक स्वयं अपने बारे म उत्तर दे ने लगता है। यह प्रश्न-शैली इस क वता क बड़ी वशेषता है।

प्र.4 (घ) क वता म दे श-प्रेम के लए बहुत-सी बात आई ह। आप ‘दे श-प्रेम’ से क्या समझते ह? बताइए।

दे श-प्रेम का अथ है — अपने दे श के प्र त लगाव, जो केवल भावना तक न रुके, ब ल्क रोज़ के काम और व्यवहार म दखाई
दे । नारे लगाना या त्योहार के दन झंडा लगा लेना दे श-प्रेम क शुरुआत हो सकती है, पूरा रूप नह ।
क वता म दे श-प्रेम कन बात से बना है —

क वता क पं क्त दे श-प्रेम का वह रूप

“जो जी वत जोश जगा न सका” दूसर म उत्साह भरना, नराशा न फैलाना

“जो चल न सका संसार-संग” समाज के साथ मलकर चलना

“ जसने साहस को छोड़ दया” क ठन काम से पीछे न हटना

“ जससे न जा त-उद्धार हुआ” अपने समाज को ऊपर उठाना

“जो भरा नह है भाव से” संवेदनशील बने रहना

“सब कुछ है अपने हाथ म” बहाने छोड़कर स्वयं काम म लगना

नमूना उत्तर: “मेरे लए दे श-प्रेम का मतलब है — जो काम मेरे हस्से आया है उसे ईमानदारी से करना। वद्याथ ँ,
तो मन लगाकर पढ़ना। पानी और बजली बरबाद न करना, क्य क वे भी दे श क संप त्त ह। सावज नक जगह —
बस, रेल, पाक, स्मारक — को गंदा या ख़राब न करना। अपनी भाषा बोलने म शरमाना नह , और कसी दूसरी भाषा
या प्रदे श के व्य क्त को छोटा न समझना। दे श केवल नक़्शा नह है, उसम रहने वाले लोग भी दे श ह; इस लए लोग के
साथ अच्छा व्यवहार भी दे श-प्रेम ही है।”

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श
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(ङ) यह रचना एक आ ान गीत है जो हम दे श-प्रेम के लए प्रे रत और उत्सा हत करती है। इस रचना क अन्य
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वशेषताएँ ढूँ ढ़ए और ल खए।

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‘आ ान गीत’ यानी पुकारने और ललकारने वाला गीत। यह क वता उसी काम के लए गढ़ गई है, और उसका असर बढ़ाने के लए

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क व ने ये उपाय कए ह —

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1. टे क ( ुवपं क्त) क आवृ त्त — “वह हृदय नह है पत्थर है, जसम स्वदे श का प्यार नह ” तीन बार लौटती है। हर बार वह

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कसी नए तक के बाद आती है, इस लए हर बार अ धक भारी लगती है। यही पं क्त गीत को सामू हक रूप से गाने लायक़
बनाती है।

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2. सरल खड़ी बोली और छोटे शब्द — हृदय, पत्थर, जोश, साहस, तोप, तलवार। क ठन शब्द (लासानी, नस्संशय) गने-चुने ह।
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जुलूस या सभा म गाया जाने वाला गीत सरल ही होना चा हए।

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g सोचता है क कह वह भी उन्ह
3. ‘नह ’ क बार-बार आवृ त्त — क व सीधे उपदे श नह दे ता क ‘दे श से प्रेम करो’। वह उलट ओर से चलता है — “ जसम…

m .c नह ”। इस नषेध से एक चुनौती का स्वर पैदा होता है, और पढ़ने वाला घबराकर
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नह ”, “वह…

g l a तो नह ।
a 4. ओज गुण / वीर भाव — जोश, साहस, पार, उद्धार, तोप, तलवार, परवाने — शब्द का चुनाव ही उत्साह भरता है।
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5. प्रश्न-शैली — “क्या है वह भू का भार नह ।”, “क्या तोप नह तलवार नह ।” प्रश्न पाठक को उत्तर दे ने पर मजबूर करता है,
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इस लए वह सुनकर चुप नह रह पाता।

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a l कह ठोकर नह लगती।
6. तुक और लय — नह /नह क समान तुक, और दूसरे भाग म पानी–रानी–लासानी–द वानी क मधुर तुक। सब पं क्तयाँ
लगभग बराबर लंबाई क ह, इस लए गानेgम
7. पदक्रम बदलना — “है जान एक दन जाने को”, “है काल-द प जलता हरदम” — ‘है’ को आगे लाकर क व ने गद्य जैसी

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सपाटता तोड़ी है।

s e m काल-द प। ये जोड़े बोलने म
8. युग्म शब्द क भरमार — दाना-पानी, माता- पता, राजा-रानी, संसार-संग, रस-धार, जा त-उद्धार,

. c om देते ह, जससे लय बनी रहती है।
एक झटका-सा
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la याद रह जाती ह।
9. सू क्त जैसी पं क्तयाँ — “सब कुछ है अपने हाथ म” जैसी पं क्तयाँ अलग करके भी पूरी बात कह दे ती ह और आसानी से

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अनुमान और कल्पना से — पृष्ठ 6
पाठ से
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पाठ से कल्पना

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e ह” अनुमान करके बताइए क
sखोले m
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.c इस पं क्त म कस प्रकार के खजाने क बात क गई होगी? ag
प्र.1 अपने समूह म मलकर चचा क जए और ल खए। (क) “ जसने क खजाने

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अनुमान लगाने का सूत्र अगली पं क्तय म ही मल जाता है — “नव रत्न दये ह लासानी। जस पर ानी भी मरते ह, जस पर है

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दु नया द वानी।” जब पास ही ‘नव रत्न’ और ‘ ानी’ आए ह , तो खजाने का अथ केवल सोना-चाँद नह हो सकता।

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श AglaSem · NCERT Solutions

खजाने का प्रकार उसम क्या-क्या पं क्त से जुड़ाव

ान का खजाना वेद-उप नषद, ग णत का शून्य और दशमलव, आयुवद, योग, खगोल- “ जस पर ानी भी मरते ह” — व ान
शास्त्र, नालंदा-तक्ष शला जैसे वश्व वद्यालय इसी पर मुग्ध होते ह

प्र तभाओं का क व, वै ा नक, कलाकार, वीर — दे श क अनमोल वभू तयाँ “नव रत्न दये ह लासानी” — लासानी
खजाना यानी बे मसाल

प्राकृ तक खजाना उपजाऊ म , न दयाँ, वन, ख नज, समुद्र, हमालय “ जसक म म उगे बढ़े , पाया जसम
दाना-पानी”

कला-संस्कृ त का संगीत, नृत्य, स्थापत्य, अनेक भाषाएँ और लोककलाएँ “ जस पर है दु नया द वानी” — वश्व
खजाना इन्ह पर मो हत है

‘खजाने खोले ह’ म ‘खोलना’ शब्द क्य : खजाना बंद रखा जाता है, उस पर पहरा होता है। क व कहता है क इस
दे श ने अपना खजाना खोल दया — यानी अपना ान और अपनी संपदा दु नया से छपाई नह , बाँट द । इसी
उदारता के कारण दु नया इस पर द वानी है।

प्र.2 (ख) “ जसक म म उगे बढ़े ” पं क्त म ‘उगे-बढ़े ’ कसके लए और क्य कहा गया होगा?

‘उगे-बढ़े ’ कहा गया है — हम मनुष्य के लए, यानी दे श के नाग रक के लए। अगली पं क्त इसे पक्का कर दे ती है — “पाया
जसम दाना-पानी। ह माता- पता बंधु जसम”।
क्य — ‘उगना’ शब्द साधारणतः पेड़-पौध के लए बरता जाता है; मनुष्य के लए हम ‘जन्म लेना’ या ‘पलना-बढ़ना’ कहते ह।
क व ने जानबूझकर पौधे वाला शब्द चुना है, क्य क इससे एक साथ तीन बात आ जाती ह —

जड़ का रश्ता — पौधा अपनी म म जमा होता है। वैसे ही मनुष्य क जड़ अपनी जन्मभू म म ह।
पोषण का रश्ता — पौधा म से ही खुराक लेता है। हम भी अन्न, जल, वायु इसी दे श से मले — “पाया जसम दाना-पानी”।
चेतावनी — पौधे को म से उखाड़ द जए, वह सूख जाएगा। इसी तरह जो अपनी भू म और अपने लोग से कट जाता है, वह
भीतर से सूखने लगता है।

अलंकार: यह रूपक है — मनुष्य पर पौधे का आरोप और दे श पर म का। एक ही शब्द ‘उगे’ से दे श और
नाग रक का संबंध वैसा सजीव बन जाता है जैसा म और पेड़ का होता है। यही कारण है क आगे क व दे श को
‘माता- पता बंधु’ वाला घर कह पाता है।

प्र.3 (ग) “वह हृदय नह है पत्थर है” पं क्त म ‘हृदय’ के लए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग क्य कया गया होगा?

क्य क पत्थर हृदय का ठ क उलटा है — और क व जो बात कहना चाहता है, वह उलटा दखाने से सबसे साफ़ हो जाती है।

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श AglaSem · NCERT Solutions

पत्थर का गुण हृदय से उलट क वता म कहाँ

कोई अनुभू त नह होती हृदय अनुभव करता है, दुख-सुख समझता है “जो भरा नह है भाव से”

पघलता नह , पसीजता नह हृदय दूसर का दुख दे खकर द्र वत हो जाता है “उस पर है नह पसीजा जो”

उसम कुछ बहता नह हृदय म भाव क रस-धार बहती है “बहती जसम रस-धार नह ”

कड़ा और नज व हृदय कोमल और जीवंत होता है “जो जी वत जोश जगा न सका”

और एक बात: पत्थर छाती म भी रखा जा सकता है — पर वह वहाँ कसी काम का नह होता। क व यही कहना
चाहता है क ऐसे व्य क्त के सीने म कुछ है तो सही, पर वह हृदय का काम नह करता। यह रूपक अलंकार है, और
साथ ही एक नणय भी — क व सीधे कह दे ता है क उसे हृदय मानने से ही इनकार है।

Tip: हद म ‘पत्थर- दल’ और ‘ दल पसीजना’ दोन मुहावरे चलते ह। क व इन्ह प र चत मुहावर को उठाकर
क वता का आधार बना दे ता है, इसी लए पं क्त पहली ही बार म समझ आ जाती है और याद भी रह जाती है।

प्र.4 (घ) कल्पना क जए क पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा है। वो आपसे क्या-क्या बात करेगा और आप उसे
क्या-क्या कहगे? (संकेत— पत्थर— जब म नद म था तो नद क धारा मुझे बदलती भी थी।…)

यह कल्पना का काम है, इस लए इसका कोई एक उत्तर नह । पर अ ा उत्तर वही होगा जो क वता से जुड़ा रहे — यानी
बातचीत घूम- फरकर इस बात पर आए क पत्थर कठोर क्य है और क्या वह कभी पघल सकता है।
लखने का तरीक़ा —

संवाद के रूप म ल खए: पत्थर— … म— …
पत्थर से उसका सफ़र कहलवाइए — पहाड़ से टू टना, नद म लुढ़कना, घसते- घसते चकना होना, कनारे आ लगना।
अंत म उस मोड़ पर पहुँ चए जहाँ पत्थर और मनुष्य क तुलना बनती है।

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श AglaSem · NCERT Solutions

नमूना उत्तर:
पत्थर— कभी म भी इस पहाड़ का हस्सा था। एक दन पानी ने मुझे तोड़कर नीचे गरा दया।
म— दुख नह हुआ तुम्ह?
पत्थर— बहुत। पर फर नद मली। जब म नद म था तो नद क धारा मुझे बदलती भी थी — मेरे नुक ले कोने
घसकर गोल हो गए। जो चोट लगती थी, वही मुझे सुंदर बनाती गई।
म— तो तुम कठोर क्य कहलाते हो?
पत्थर— यह लोग का बनाया नाम है। मुझे दे खो — म मं दर क मू त भी बना ँ और घर क न व भी। सड़क म
बछा ँ तो तुम्हारे पाँव सँभालता ँ।
म— फर क व ने पत्थर-हृदय को बुरा क्य कहा?
पत्थर— इस लए क म कसी का दुख दे खकर पघल नह सकता। मेरी यही मजबूरी है। पर तुम मनुष्य हो — तुम्हारे
पास वह हृदय है जो पघल सकता है। उसे मेरे जैसा मत बना लेना।
म— यह बात याद रखूँगा, मत्र। तुम अपनी जगह उपयोगी हो; पर मुझे तुम्हारी तरह नह होना।

प्र.5 (ङ) दे श-प्रेम क भावना दे श क सुरक्षा से ही नह , ब ल्क संरक्षण से भी जुड़ी होती है। अनुमान करके बताइए क
दे श के कन- कन संसाधन या वस्तुओं आ द को संरक्षण क आवश्यकता है और क्य ?

सुरक्षा का अथ है बाहर के ख़तरे से बचाना; संरक्षण का अथ है जो हमारे पास है उसे सँभालकर रखना और नष्ट न होने दे ना। दूसरा
काम सीमा पर नह , हमारे अपने रोज़ के व्यवहार म होता है।

कसका संरक्षण क्य ज़रूरी हम क्या कर सकते ह

जल पृथ्वी का बहुत थोड़ा पानी ही पीने योग्य है; भूजल का स्तर नल बंद रखना, वषा-जल संग्रह, टपकते नल
लगातार गर रहा है क मरम्मत

वन और वन्य जीव वन वषा लाते ह, म थामते ह, प्राणवायु दे ते ह; एक बार पेड़ लगाना, जंगल म कूड़ा न छोड़ना, वन्य
लुप्त हुई प्रजा त लौटती नह जीव क वस्तुएँ न ख़रीदना

म एक इंच उपजाऊ म बनने म सैकड़ वष लगते ह; कटाव से मेड़बंद , अ धक रसायन का प्रयोग न करना,
खेती चौपट हो जाती है खाली ज़मीन पर घास

ख नज और ईंधन कोयला, पे ोल, ख नज सी मत ह — एक बार नकाल लए बजली बचाना, पैदल-साइ कल-बस का
तो दुबारा नह बनते प्रयोग, पुनचक्रण

ऐ तहा सक इमारत ये दे श क ‘नव रत्न’ जैसी संपदा ह; द वार पर नाम लखने से स्मारक पर कुछ न लखना, गंदगी न फैलाना
और धरोहर जो बगड़ता है, वह ठ क नह होता

भाषाएँ और बहुत-सी बो लयाँ बोलने वाले घटते जा रहे ह; भाषा मरने पर अपनी बोली म बात करना, लोकगीत-
लोककलाएँ उसका पूरा ान-भंडार मर जाता है कहा नयाँ लखकर सँभालना

दे शी बीज और नस्ल स्थानीय बीज और पशु-नस्ल यहाँ क जलवायु के लए बनी बीज-बक, दे शी अनाज (बाजरा, रागी) को
ह; ये सूखे और रोग सहती ह भोजन म जगह

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श AglaSem · NCERT Solutions

क वता से जो ड़ए: क व ने दे श क दे न गनाई है — म , दाना-पानी, खजाने, नव रत्न। संरक्षण का अथ है इन्ह
दे न को अगली पीढ़ के लए बचाकर रखना। जो इन्ह बरबाद करता है, वह भी अपने ढं ग से “भू का भार” ही है।

क वता क रचना — पृष्ठ 6
पाठ से

पाठ से भाषा क बात

प्र.1 “ जसक म म उगे बढ़े , पाया जसम दाना-पानी। ह माता- पता बंधु जसम, हम ह जसके राजा-रानी॥” इन
पं क्तय के अं तम शब्द को ध्यान से दे खए। ‘दाना-पानी’ और ‘राजा-रानी’ इन शब्द क अं तम ध्व न एक-सी
है। इस वशेषता को ‘तुक मलाना’ कहते ह। अब नीचे दए गए प्रश्न पर पाँच-पाँच के समूह म मलकर चचा
क जए और उनके उत्तर ल खए। (क) शब्द के तुक मलाने से क वता म क्या वशेष प्रभाव पड़ा है?

तुक मलने से क वता म लय बनती है — पढ़ते समय कान को हर दूसरी पं क्त के अंत पर एक जानी-पहचानी ध्व न सुनाई दे ती है,
इस लए पं क्तयाँ अलग-अलग नह , एक धागे म गुँथी हुई लगती ह।
इस क वता के तुक —

पं क्तय के अं तम शब्द एक-सी ध्व न

दाना-पानी / राजा-रानी / लासानी / द वानी –आनी

पार नह / उद्धार नह / सार नह / भार नह / तलवार नह / प्यार नह –आर नही ं

जाने को / परवान को –ओ

तुक से चार लाभ हुए —

1. गेयता — क वता गाई जा सकती है। यह आ ान गीत है, इस लए सामू हक स्वर म गाया जाना इसक सबसे बड़ी ज़रूरत थी।
2. याद रह जाना — तुक कान को अगला शब्द पहले ही बता दे ता है, इस लए पं क्त जल्द कंठस्थ हो जाती है।
3. बल — तुक वाला शब्द पं क्त के अंत म आकर ठहरता है, इस लए उसी पर ज़ोर पड़ता है। यहाँ ‘नह ’ बार-बार तुक बनकर
आता है और पूरी क वता का नषेध-भाव उसी एक शब्द पर टक जाता है।
4. बँधाव — दो-दो पं क्तयाँ जुड़कर एक इकाई बन जाती ह, जससे भाव टु कड़ म नह बखरता।

प्र.2 (ख) क वता को प्रभावशाली बनाने के लए और क्या-क्या प्रयोग कए गए ह?

तुक के अलावा क व ने ये प्रयोग कए ह —

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श
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प्रयोग क वता से उदाहरण प्रभाव

m हृदय नह है पत्थर है, जसम स्वदेश का प्यार नह ” — as e
टे क क
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“वह
बार गहरी उतरती a g l
बात हर बार नए तक के बाद लौटती है, इस लए हर
आवृ त्त
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aरूपक पत्थर (हृदय), काल-द प (समय), परवाने (मनुष्य), राजा-रानी क ठन भाव एक प र चत चत्र बनकर सामने आ
(नाग रक) जाता है

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अनुप्रास
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“ न त है नस्संशय न त”, “ज◌ो जी वत जोश जगा”. एक ही ध्व न लौटने से पं क्त म ठोकर-सी पड़ती है, ag
g l as जो जोश जगाती है

युग्म शब्द
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दाना-पानी, माता- पता, राजा-रानी, संसार-संग, रस-धार, बोलने म ग त और संतुलन बनता है

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जा त-उद्धार, तोप-तलवार

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प्रश्न-शैली “क्या है वह भू का भार नह ।”, “क्या तोप नह तलवार नह ।” पाठक उत्तर दे ने पर मजबू र होता है, सुनकर चुप नह

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रह पाता

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पदक्रम “है जान एक दन जाने को”, “है काल-द प जलता हरदम” ‘है’ आगे आने से गद्य जैसी सपाटता टू टती है और
बदलना लय आती है

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नषेध का ‘नह ’ शब्द दस से अ धक बार उपदे श क जगह चुनौती का स्वर बनता है

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ढाँचा

सरल खड़ी a g
हृदय, पत्थर, जोश, साहस, हाथ
l गीत हर व्य क्त तक पहुँचता है, चाहे वह पढ़ा- लखा
बोली हो या नह

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जाने.cलायक़ और मन म गड़ जाने लायक़ बनाना। आ ान गीत क सफलता इसी gबात से नापी जाती है।
ध्यान र खए: ये सब अलग-अलग सजावट नह ह। सब मलकर एक ही काम कर रहे ह — क वता को सभा म गाए

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आपक क वता — पृष्ठ 6 और 7
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पाठ से

पाठ से ले ख न

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दे श-प्रेम से जुड़े अपने वचार को आधार बनाते हुए क वता को आगे बढ़ाइए— “वह हृदय नह है पत्थर है,
mजसम स्वदे श का प्यार नह ।” ______
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agl उत्तर
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यह आपक अपनी रचना है, इस लए उत्तर हर वद्याथ का अलग होगा। पर क वता को आगे बढ़ाते समय तीन बात क व जैसी ही
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रखनी ह —

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1. वाक्य का साँचा — “जो / जसने / जसम … , वह / उसका … नह ।” पूरी क वता इसी साँचे म चलती है।
क्तg‘–आर नह ’ पर समाप्त हो (पार नह , सार नह , उद्धार नह , भार नह , प्यार नह )।
2. तुक — दूसरी और चौथी पं a
3. अंत म टे क — अपनी पं क्तय के बाद वही दो पं क्तयाँ लौटाइए जो क व हर बार लौटाता है।

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श AglaSem · NCERT Solutions

नमूना उत्तर:
वह हृदय नह है पत्थर है,
जसम स्वदे श का प्यार नह ।
जो अपनी भाषा भूल गया,
उसका कोई घर-बार नह ।

जसने न बचाई बूँद एक,
उसका जल पर अ धकार नह ।
जो श्रम से जी चुराता है,
उसके हस्से त्यौहार नह ।

जो पेड़ काटकर हँसता है,
उससे बढ़कर बीमार नह ।
वह हृदय नह है पत्थर है,
जसम स्वदे श का प्यार नह ॥

यह नमूना ठ क क्य बैठता है: हर जोड़े म पहले शत है और फर फ़ैसला — ठ क क व क तरह। तुक हर बार ‘–
आर नह ’ पर आकर ठहरता है, इस लए इसे मूल क वता के साथ मलाकर गाया जा सकता है। और वषय भी वही
रहे ह जो एक वद्याथ के अपने जीवन से जुड़ते ह — भाषा, पानी, श्रम, पेड़।

भाषा क बात — पृष्ठ 7 और 8
पाठ से

पाठ से भाषा क बात

प्र.1 (क) शब्द से जुड़े शब्द — नीचे दए गए रक्त ान म ‘स्वदे श’ से जुड़े शब्द अपने समूह म चचा करके ल खए।
फर मत्र से मलाकर अपनी सूची बढ़ाइए —

पुस्तक म ‘स्वदे श’ के चार ओर नौ ख़ाली खाने बने ह। उन्ह इस तरह भरा जा सकता है —

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श AglaSem · NCERT Solutions

मातभृ िू म जन्मभूिम रा

वतन स्वदे श स्वदे शी

दे शभिक्त स्वराज ितरंगा मातभृ ाषा

‘स्वदे श’ से जुड़े नौ शब्द — जैसे पुस्तक के शब्द-जाल म भरे जाने ह।

सूची और बढ़ाइए — दे शवासी, नाग रक, स्वा भमान, स्वतंत्रता, राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राष्ट्रभाषा, राष्ट्रीय ध्वज, सीमा, सै नक, सं वधान,
स्वदे श-प्रेम, दे श हत, जननी-जन्मभू म।

शब्द चुनने का ढं ग: तीन दशाओं म सो चए — (1) पयाय: वतन, राष्ट्र, मातृभू म, जन्मभू म; (2) ‘स्व’ से बने
शब्द: स्वदे शी, स्वराज, स्वतंत्रता, स्वा भमान; (3) दे श क पहचान: तरंगा, राष्ट्रगान, मातृभाषा, सं वधान। इसी तरह
कसी भी शब्द का जाल आसानी से भरा जा सकता है।

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 (ख) वराम चह्न को समझ — “जो चल न सका संसार-संग” “बहती जसम रस-धार नह ” “पाया जसम
दाना-पानी” “ह माता- पता बंधु जसम” “हम ह जसके राजा-रानी” “ जससे न जा त-उद्धार हुआ” — क वता
म आई हुई उपयुक्त पं क्तय को ध्यानपूवक प ढ़ए। इनम कुछ शब्द के बीच एक चह्न (-) लगा है। इसे योजक
चह्न कहते ह। योजक चह्न दो शब्द म परस्पर संबंध स्पष्ट करने तथा उन्ह जोड़कर लखने के लए प्रयोग कए
जाते ह। क वता म संदभ के अनुसार योजक चह्न के ान पर का, क , के और म से कौन-से शब्द जोड़गे जससे
अथ स्पष्ट हो सके। ल खए। (संकेत— ‘जो चल न सका संसार के संग’)

क वता क पं क्त योजक वाला जोड़ा अथ स्पष्ट करने वाला रूप

“जो चल न सका संसार-संग” संसार-संग जो चल न सका संस ार के संग

“बहती जसम रस-धार नह ” रस-धार बहती िजसमें रस की धार नही ं

“ जससे न जा त-उद्धार हुआ” जा त-उद्धार िजससे न जाित का उ ार हुआ

“पाया जसम दाना-पानी” दाना-पानी पाया जसम दाना और पानी

“ह माता- पता बंधु जसम” माता- पता ह माता और पता, बंधु जसम

“हम ह जसके राजा-रानी” राजा-रानी हम ह जसके राजा और रानी

यहाँ सबसे ज़रूरी बात: छह जोड़े एक जैसे नह ह। पहले तीन म दूसरा शब्द मुख्य है और पहला उसका संबंधी —
इस लए वहाँ का / क / के लगता है (रस क धार, जा त का उद्धार, संसार के संग)। पछले तीन म दोन शब्द
बराबर के ह — दाना भी, पानी भी; माता भी, पता भी। ऐसे जोड़ म का/क /के नह , ‘और’ लगेगा। पहले तरह के
समास को तत्पुरुष और दूसरी तरह के को द्वं द्व कहते ह।

Check it yourself: पुस्तक ने चार शब्द दए ह — का, क , के, म। इनम से ‘म’ इन छह पं क्तय म कह नह
लगता। यह जाँचने का अच्छा तरीक़ा है क आप शब्द केवल भरने के लए नह , अथ दे खकर चुन रहे ह या नह ।

प्र.3 (ग) शब्द- मत्र — “है जान एक दन जाने को” “है काल-द प जलता हरदम” उपयुक्त पं क्तय पर ध्यान द जए।
इन दोन पं क्तय म ‘है’ शब्द पहले आया है जसके कारण क वता म लयात्मकता आ गई है। य द ‘है’ का प्रयोग
पं क्त के अंत म कया जाए तो यह गद्य जैसी लगने लगेगी, जैसे— ‘जान एक दन जाने को है।’ ‘काल-द प हरदम
जलता है।’ • अब आप क वता म से ऐसी पं क्तय को चु नए जनम ‘है’ शब्द का प्रयोग पहले हुआ है। चुनी हुई
पं क्तय म शब्द के ान बदलकर पुनः ल खए।

क वता म ‘है / ह’ आगे रखकर लखी गई पं क्तयाँ और उनका सीधा (गद्य जैसा) रूप —

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श AglaSem · NCERT Solutions

क वता क पं क्त (‘है’ पहले) शब्द के ान बदलकर

“ह माता- पता बंधु जसम,” िजसमें माता-िपता और बंध ु है।ं

“हम ह जसके राजा-रानी॥” हम िजसके राजा-रानी है।ं

“ जस पर है दु नया द वानी॥” िजस पर दुिनया दीवानी है।

“उस पर है नह पसीजा जो,” जो उस पर पसीजा नही ं है।

“क्या है वह भू का भार नह ।” क्या वह भू का भार नही ं है?

“ न त है नस्संशय न त,” िनस्संशय यह िनि चत है।

“जल जाना है परवान को॥” परवानों को जल जाना है।

“सब कुछ है अपने हाथ म,” सब कु छ अपने हाथों में है।

अंतर पर ध्यान द जए: दा हने स्तंभ के वाक्य ग़लत नह ह — पर उन्ह पढ़ते ही लगता है क हम क वता नह ,
कोई सूचना पढ़ रहे ह। कारण यह है क हद म साधारण वाक्य क्रया पर समाप्त होता है; जब हर पं क्त उसी ढं ग से
समाप्त हो, तो ध्व न एकसार हो जाती है और लय मर जाती है। क व ‘है’ को आगे लाकर पं क्त का अंत कसी भारी
शब्द के लए खाली छोड़ दे ता है — द वानी, हरदम, राजा-रानी — और वही शब्द तुक बनाता है।

प्र.4 • अब नीचे द गई पं क्तय म ‘है, ह’ शब्द का प्रयोग पहले करके पं क्तय को पुनः ल खए और दे खए क इससे
पं क्तय के स दय म क्या प रवतन आया है। अपने सा थय से चचा क जए। “ जस पर ानी भी मरते ह, जस
पर है दु नया द वानी॥”

‘ह’ आगे रखकर —

िजस पर है ं ानी भी मरते ,

िजस पर है दुिनया दीवानी॥

स दय म क्या प रवतन आया —

दोन पं क्तयाँ एक ही साँचे क हो गईं — “ जस पर ह…” और “ जस पर है…”। पहले केवल दूसरी पं क्त म ‘है’ आगे था,
अब दोन म। इस समानांतर बनावट से जोड़ी बहुत कसी हुई लगती है और गाने म जुड़वाँ जैसी सुनाई दे ती है।
बल बदल गया — मूल पं क्त म ज़ोर ‘मरते ह’ पर था, यानी क्रया पर। बदले हुए रूप म ज़ोर ‘ जस पर’ पर आ गया — यानी
उस दे श पर, जसक प्रशंसा क व कर रहा है। क वता का ध्यान भी वह ले जाना चा हए।
प्रवाह बढ़ा — दोन पं क्तयाँ अब बना रुके एक साँस म पढ़ जा सकती ह, क्य क दोन का आरंभ एक-सा है।

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श
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पर एक हा न भी है — ‘मरते’ अब पं क्त के अंत म आ गया, और वह ‘द वानी’ से तुक नह मलाता। मूल रूप म ‘ह’ अंत म
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था, जो अगली पं क्त के भारी शब्द को रास्ता दे कर हट जाता था। इसी लए क व ने पहली पं क्त म ‘ह’ पीछे और दूसरी म आगे

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रखा — दोन तरह का स्वाद एक ही जोड़ी म।

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aगाने म सु वधा होती है; जहाँ बनावट थोड़ी बदले, वहाँ क वता ऊबाऊ होने से बच जाती है। अच्छा क व दोन का
चचा के लए: अपने समूह म दोन रूप ज़ोर से पढ़कर दे खए। जहाँ क वता म एक-सी बनावट बार-बार आए, वहाँ

संतुलन रखता है।
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प्र.5 (घ) समानाथ शब्द — क वता से चुनकर कुछ शब्द नम्न ता लका म दए गए ह। दए गए शब्द से इनके

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समानाथ शब्द ढूँ ढ़कर ता लका म दए गए रक्त ान म ल खए। (ता लका के शब्द — भू, द प, हृदय, तलवार,

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दु नया, पत्थर; दए गए शब्द — दल, पाहन, प्रद प, धरा, जग, अ स, पृथ्वी, संसार, कृपाण, जी, द पक, पाषाण)
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उत्तर em

g l asशब्द दए गए ह और छह खान के नीचे दो-दो रक्त स्थान ह — इस लए हर शब्द के ठ क दो समानाथ बैठगे।
a बारह

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क वता का शब्द समानाथ 1 समानाथ 2 पहचानने का सूत्र

पथ्ृ वी ase
m तीन का अथ ‘धरती’ — “क्या है वह भू का भार नह ”
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भू धरा

दप पदीप दीपक तीन म ‘द प’ ही मूल है — “है काल-द प जलता हरदम”

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हृदय िदल जी ‘ दल’ उदू से, ‘जी’ बोलचाल का — “वह हृदय नह है पत्थर है”

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m . अिस कृ पाण ag तोप नह तलवार नह ”
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तलवार दोन धारदार शस्त्र के नाम — “क्या

agl दु नया जग संस ार तीन ‘ वश्व’ के लए — “ जस पर है दु नया द वानी”

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पाहन पाषाण
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पत्थर ‘पाहन’ ब्रज-अवधी का, ‘पाषाण’ संस्कृत का — “वह हृदय नह है पत्थर है”

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g l asमलाइए जो साफ़ ह — द प/प्रद प/द पक एक ही मूल से बने ह, इस लए
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बचे हुए शब्द कैसे छाँट: पहले वे जोड़े
सबसे पहले पकड़ म आते ह। फर ‘अ स’ और ‘कृपाण’ — दोन शस्त्र-नाम ह, और क वता म शस्त्र केवल तलवार

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है। अंत म जो बचे — ‘पाहन’ और ‘पाषाण’ — वे अपने-आप पत्थर के खाने म चले जाते ह। क ठन शब्द अंत म
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छाँ टए, आसान पहले — यही तरीक़ा हर मलान-प्रश्न म काम आता है।
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m Did you know? ‘जी’ आज हम आदर के लए बरतते ह (रामजी, पताजी), पर उसका मूल अथ ‘जीव / मन /
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हृदय’ ही है — इसी लए हम कहते ह “मेरा जी नह लगता” या “जी भर आया”।

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क वता का शीषक — पृष्ठ 8 las
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पाठ से

पाठ से ले ख न

प्र.1 “वह हृदय नह है पत्थर है, जसम स्वदे श का प्यार नह ।” इस क वता का शीषक है ‘स्वदे श’। कई बार क व
क वता क कसी पं क्त को ही क वता का शीषक बनाते ह। य द आपको भी इस क वता क कसी एक पं क्त को
चुनकर नया शीषक दे ना हो तो आप कौन-सी पं क्त चुनगे और क्य ?

अच्छा शीषक तीन कसौ टय पर खरा उतरना चा हए — वह छोटा हो, पूरी क वता का भाव समेटे, और सुनते ही उत्सुकता
जगाए। इन कसौ टय पर तीन पं क्तयाँ सबसे आगे ह —

संभा वत शीषक पक्ष म कमी

“सब कुछ है अपने यह पूरी क वता क माँग है — बहाने छोड़ो, काम म लगो। पढ़ते ही इसम ‘स्वदे श’ शब्द नह आता, इस लए
हाथ म” उत्साह जगता है, और यही आ ान गीत का काम है। वषय का संकेत सीधा नह मलता।

“वह हृदय नह है यह क वता क टे क है और तीन बार लौटती है। च काने वाली भी है अकेले पढ़ने पर यह कसी और वषय क
पत्थर है” — पढ़ने वाला ठठककर सोचता है क कसका हृदय? क वता भी लग सकती है।

“ जसम स्वदे श का इसम वषय (स्वदे श) और भाव (प्यार) दोन आ जाते ह। अधूरे वाक्य जैसा लगता है, क्य क यह
प्यार नह ” टे क का उत्तराध है।

नमूना उत्तर: “म शीषक चुनूँगा — ‘सब कुछ है अपने हाथ म’। कारण यह है क ‘स्वदे श’ शीषक केवल बताता है
क क वता कस वषय पर है, जब क यह पं क्त बताती है क क वता हमसे क्या चाहती है। पूरी क वता म क व
पहले क मयाँ गनाता है और अंत म यही समाधान दे ता है क श क्त हमारे अपने हाथ म है। शीषक अगर यही हो, तो
पाठक क वता पढ़ने से पहले ही जान लेगा क यह उलाहना नह , हौसला दे ने वाली क वता है।”

Tip — शीषक चुनते समय पू छए: क्या यह पं क्त क वता म एक से अ धक बार आई है? क्या इसे अलग करके
पढ़ने पर भी वह अपने-आप म पूरी बात कहती है? जस पं क्त के दोन उत्तर ‘हाँ’ ह , वही सबसे अच्छा शीषक
बनती है।

आपक बात — पृष्ठ 9 और 10

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पाठ से आगे

पाठ से आगे गतवध

प्र.1 ✓
(क) नीचे कुछ चत्र दए गए ह। उन चत्र पर सही ( ) का चह्न लगाइए जन्ह आप ‘स्वदे श प्रेम’ क श्रेणी म
रखना चाहगे?

पुस्तक म पृष्ठ 9 और 10 पर पंद्रह चत्र दए गए ह। जन काम से दे श, दे श क संप त्त या दे शवा सय का भला होता है, उन पर सही
(✓) लगेगी; जनसे नुक़सान होता है, उन पर नह ।

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चत्र चत्र म क्या है ✓/ क्य
✗
1 लड़क क्यारी के पौध को पानी दे रही है ✓ ह रयाली बढ़ाना दे श क धरती क सेवा है

2 रेल के डब्बे म यात्री छलके-कागज़ फ़श पर फक ✗ रेल सावज नक संप त्त है; उसे गंदा करना दे श क चीज़ बगाड़ना
रहे ह, एक ब ा खड़क से बाहर फक रहा है है

3 स्टे डयम म भारतीय पहलवान वदे शी खलाड़ी से ✓ खेल म दे श का प्र त न धत्व करना और नाम रोशन करना
कुश्ती लड़ रही है

4 गाँव के हडपंप पर लोग पानी भर रहे ह; व्हीलचेयर ✓ दे शवा सय क सहायता; दे श केवल भू म नह , उसम रहने वाले
पर बैठ म हला क सहायता क जा रही है लोग भी ह

5 ब ी सै नक को फूल का गुलदस्ता भट कर रही है ✓ दे श क रक्षा करने वाल का सम्मान

6 ब े बाग़ से कूड़ा उठाकर थैले म भर रहे ह और ✓ स्वच्छता — सावज नक स्थान क दे खभाल
झाड़ू लगा रहे ह

7 कसान ै क्टर से खेत जोत रहा है ✓ दे श के लए अन्न उपजाना; “ जसक म म उगे बढ़े ”

8 लड़क बुजग म हला को ज़ेबरा क्रॉ सग से सड़क ✓ संवेदनशीलता और नाग रक कतव्य
पार करा रही है

9 लाठ टे ककर बैठे बुजग के पास दो ब े खड़े ह ? य द ब े उनका हाल पूछ रहे या सहारा दे रहे ह तो ✓; य द हँसी
उड़ा रहे ह तो ✗ — अपनी पुस्तक म चत्र दे खकर तय क जए

10 लड़का ऐ तहा सक मीनार क द वार पर दल ✗ धरोहर बगाड़ना; यही तो दे श का “खजाना” है जस पर दु नया
बनाकर लख रहा है द वानी है

11 वद्यालय म तरंगे के सामने पं क्तबद्ध खड़े वद्याथ ✓ राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान

12 बक म खजांची क खड़क पर एक म हला पं क्त ✗ क़तार तोड़ना दूसर का हक़ छ नना है; अनुशासन भी दे श-प्रेम
तोड़कर आगे खड़ी है का हस्सा है

13 ‘फूल न तोड़’ का बोड लगा है, फर भी लड़क फूल ✗ नयम तोड़ना और सावज नक बाग़ को नुक़सान पहुँचाना
तोड़ रही है

14 ख़ाली कायालय म बल्ब, पंखा-एसी, मेज़-लप और ✗ बजली और पानी क बरबाद — दोन दे श के सी मत संसाधन
कंप्यूटर चालू, नल भी खुला — कमरे म कोई नह ह

15 सावज नक नल पर बाल्ट लए बालक दूसर को ✓ जल-संरक्षण; ग़लत होते दे खकर चुप न रहना
पानी बहता छोड़ने पर टोक रहा है

तय करने का सूत्र: हर चत्र पर एक ही प्रश्न पू छए — “यह काम अगर दे श के सब लोग करने लग तो दे श का भला
होगा या बुरा?” पौध को पानी सब दे ने लग — दे श हरा-भरा हो जाएगा (✓)। सब रेल म कूड़ा फकने लग — पूरी
रेल गंद हो जाएगी (✗)। यह कसौट हर बार सही उत्तर दे ती है।

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प्र.2 (ख) अब आप अपने उत्तर के पक्ष म तक भी द जए।

तक दे ते समय तीन बात कहनी चा हए — काम क्या है, उससे कसका लाभ या हा न है, और उसका दे श से क्या रश्ता है। कुछ
नमूने —

सै नक को फूल दे ने पर ✓ — “दे श क सीमा पर खड़ा सै नक अपने प रवार से दूर रहकर हमारी न द क रक्षा करता है।
उसका सम्मान करना उसके साहस को स्वीकार करना है। क वता भी कहती है — ‘सब कुछ है अपने हाथ म’; सै नक यही कर
दखाता है।”
बाग़ क सफ़ाई पर ✓ — “बाग़ कसी एक का नह , सबका है। जो सबका है उसक दे खभाल भी सबको करनी है। जो अपने
आस-पास साफ़ नह रख सकता, वह दे श साफ़ रखने क बात कैसे करेगा?”
स्मारक पर लखने पर ✗ — “यह इमारत सैकड़ साल पुरानी है और उसे बनाने वाले कारीगर अब नह ह। द वार पर लखा
नाम कुछ दन म मट जाएगा, पर पत्थर पर पड़ा नशान नह मटे गा। जो चीज़ दुबारा नह बन सकती, उसे बगाड़ना सबसे बड़ी
हा न है।”
रेल म कूड़ा फकने पर ✗ — “रेल हमारे ही कर के पैसे से चलती है। उसे गंदा करके हम अपनी ही चीज़ बगाड़ते ह, और उसी
डब्बे म बैठे दूसरे या त्रय का भी अपमान करते ह।”
क़तार तोड़ने पर ✗ — “क़तार का अथ है — जो पहले आया, उसका पहला हक़। क़तार तोड़ना उन सब लोग का समय चुराना
है जो नयम मानकर खड़े ह। एक दे श तभी चलता है जब उसके नाग रक छोटे -छोटे नयम मान।”
बजली-पानी चालू छोड़ने पर ✗ — “ जस दफ़्तर म कोई नह है, वहाँ जलती बत्ती कसी काम नह आती — पर बजली
बनाने म कोयला जलता है और कोयला सी मत है। जो व्यथ बहा दया गया, वह कसी और के हस्से से गया।”

चचा के लए: ऐसा भी हो सकता है क कसी चत्र पर आपके और आपके मत्र के उत्तर अलग ह — जैसे कुश्ती
वाले चत्र पर कोई कहे क यह तो केवल खेल है। तब बहस मत क जए, कारण पू छए। जसका कारण ठोस हो,
उसका उत्तर बेहतर माना जाएगा।

हमारे अस्त्र-शस्त्र — पृष्ठ 11
पाठ से आगे

पाठ से आगे

प्र.1 “सब कुछ है अपने हाथ म, क्या तोप नह तलवार नह ।” दे श क सीमा पर सै नक सुरक्षा प्रहरी क भाँ त खड़े
रहते ह। वे बुरी भावना से अ तक्रमण करने वाले का सामना तोप, तलवार, बंदूक आ द से करते ह। आप बताइए
क नम्न ल खत स्वदे श प्रे मय के अस्त्र-शस्त्र क्या ह गे? • वद्याथ • अध्यापक • कृषक • च कत्सक • वै ा नक
• श्र मक • पत्रकार

‘अस्त्र-शस्त्र’ यहाँ रूपक है। हर व्य क्त का ह थयार वही है जससे वह अपना काम करता है और दे श को आगे बढ़ाता है।

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स्वदे श प्रेमी उसके अस्त्र-शस्त्र वह कससे लड़ता है

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वद्याथ
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पुस्तक, कलम, ज ासा, अनुशासन और प रश्रम
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अ ान और आलस्य से

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अध्यापक ान, धैय, अपना च रत्र और प्रेरणा दे ने क श क्त अंध वश्वास और भेदभाव से
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कृषक हल और ै क्टर, बीज, खाद-पानी, म क समझ और अथक श्रम भूख से

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च कत्सक
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च कत्सा- ान, औष ध, शल्य-उपकरण और सेवा-भाव . रोग और महामारी से ag
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वै ा नक
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प्रयोगशाला, तक, नरीक्षण और नए-नए आ वष्कार पछड़ेपन और अंध वश्वास से

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श्र मक अपने हाथ, हुनर, औज़ार और श्रम- नष्ठा अभाव और बेकारी से

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a s em और भ्रष्टाचार से
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पत्रकार कलम, स ाई, नभ कता और सही प्रश्न पूछने का साहस झूठ, अन्याय

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aयही तो क वता कह रही है: क व पूछता है — “क्या तोप नह तलवार नह ।” उसका उत्तर यही है क ह थयार
agl बाहर से नह आते। जो काम आपके हस्से आया है, उसे पूरी नष्ठा से करना ही आपका ह थयार है। इसी लए यह
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क वता स्वतंत्रता आंदोलन के दन म उन लाख लोग तक पहुँच सक जनके पास कोई ह थयार नह था।

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a glअपनी ओर से जो ड़ए — जैसे कलाकार (उसका अस्त्र क्या होगा?) और
Try This: इसी ता लका म दो पं क्तयाँ
सै नक क माँ। सो चए क उनका ह थयार क्या हो सकता है।

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अपनीmभाषा .co अपने गीत — पृष्ठ 11 a g l
l a sसेeआगे
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पाठ

पाठ से आगे प रयोजना
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प्र.1 (क) कक्षा म सभी वद्याथ अपनी-अपनी भाषा म दे श-प्रेम से संबं धत क वताओं और गीत का संकलन कर।

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यह कक्षा क प रयोजना है। इसे इस तरह क जए —

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1. हर वद्याथ अपनी मातृभाषा या घर म बोली जाने वाली बोली म एक दे श-प्रेम का गीत चुने। घर के बड़ , दाद -नानी या पड़ोस के

a s em लोग से पू छए — प्रायः उन्ह ऐसे गीत याद होते ह जो कताब म नह मलते।
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2. हर गीत के लए एक पृष्ठ बनाइए, जसम हो — गीत का नाम, रच यता, भाषा, कुछ पं क्तयाँ और हद म उनका भाव।

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3. सब पृष्ठ मलाकर कक्षा का एक संकलन बनाइए और उसे कोई नाम द जए, जैसे ‘हमारी भाषाएँ, हमारा दे श’।
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भाषा रचना रच यता

हद झंडा ऊँचा रहे हमारा श्यामलाल गुप्त ‘पाषद’

हद झाँसी क रानी सुभद्राकुमारी चौहान

उदू सारे जहाँ से अच्छा (तराना-ए- हद ) मुहम्मद इक़बाल

उदू सरफ़रोशी क तमन्ना ब स्मल अज़ीमाबाद

बांग्ला वंदे मातरम् बं कमचंद्र च ोपाध्याय

बांग्ला जन गण मन रव द्रनाथ ठाकुर

मराठ ने मजसी ने परत मातृभूमीला वनायक दामोदर सावरकर

त मल भारत समुदायम् सुब्रह्मण्य भारती

पंजाबी मेरा रंग दे बसंती चोला लोकप्रच लत (भगत सह से जुड़ा)

Tip: संकलन म हर गीत के नीचे एक पं क्त यह भी ल खए क वह गीत कब और कस अवसर पर गाया जाता था।
इससे पता चलेगा क अलग-अलग भाषाओं के लोग एक ही भावना को अपने-अपने ढं ग से कह रहे थे।

प्र.2 (ख) कसी एक गीत क कक्षा म संगीतात्मक प्रस्तु त भी कर।

प्रस्तु त क तैयारी इस क्रम म क जए —

1. गीत चु नए — ऐसा गीत ली जए जसक तुक और लय साफ़ हो, ता क पूरा समूह एक साथ गा सके। ‘स्वदे श’ स्वयं इसके लए
बहुत उपयुक्त है, क्य क इसक टे क तीन बार लौटती है।
2. ताल तय क जए — ता लय से भी काम चल जाएगा। चाह तो ढोलक, मंजीरा, खंजरी या डेस्क पर हल्क थाप का प्रयोग
क जए।
3. टे क और अंतरा बाँ टए — टे क (“वह हृदय नह है पत्थर है…”) पूरी कक्षा मलकर गाए और बीच क पं क्तयाँ दो-तीन
वद्याथ बारी-बारी से। सामू हक टे क ही आ ान गीत का प्राण है।
4. उ ारण साफ़ र खए — गाते समय ‘ नस्संशय’, ‘लासानी’ जैसे शब्द जल्दबाज़ी म न नगल।
5. अंत म भाव बताइए — गाने के बाद दो वाक्य म बताइए क गीत कस अवसर के लए लखा गया था। इससे सुनने वाल को
गीत और गहरा लगेगा।

क्य गाकर दे खना ज़रूरी है: यह क वता पढ़ने के लए नह , गाने के लए बनी है। जब आप इसे स्वर म गाएँगे तो
स्वयं समझ जाएँगे क क व ने ‘है’ को पं क्त के आरंभ म क्य रखा और तुक को इतना कसकर क्य बाँधा — गाते
समय वही जगह सबसे आसान लगगी।

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तरंगा झंडा — कब प्रसन्न और कब उदास — पृष्ठ 11
पाठ से आगे

पाठ से आगे गतवध

प्र.1 रा ीय ध्वज ( तरंगा झंडा) दे श का सम्मान है। कसी एक दन सोने से पहले अपने पूरे दन के काय को याद
क जए और वचार क जए क आपके कन काय से तरंगा झंडा उदास हुआ होगा और कन काय से तरंगे झंडे
को प्रसन्नता हुई होगी।

यह आत्म- नरीक्षण क ग त व ध है, इस लए उत्तर अपने ही दन का ल खए — कसी और का नह । तरीक़ा यह र खए:

1. सोने से पहले दन को सुबह से रात तक क्रम से याद क जए — घर, रास्ता, वद्यालय, खेल का मैदान, फर घर।
2. हर काम पर एक ही प्रश्न पू छए — “यह काम अगर सब भारतवासी कर तो दे श बेहतर बनेगा या बगड़ेगा?”
3. दो स्तंभ बनाकर ल खए। शाम को केवल गनना नह है — कल के लए एक सुधार भी तय क जए।

दन का काम तरंगा प्रसन्न / उदास क्य

ब्रश करते समय नल खुला छोड़ दया उदास दे श के जल क व्यथ बरबाद

बस म बुजग को अपनी सीट दे द पस न्न दे शवासी का आदर

टॉफ़ का रैपर सड़क पर फक दया उदास सावज नक स्थान गंदा कया

कक्षा का काम समय पर और मन लगाकर कया पस न्न वद्याथ का अस्त्र उसक पढ़ाई ही है

दूसरे प्रदे श से आए साथी क भाषा का मज़ाक उड़ाया उदास दे श क भाषा- व वधता का अपमान

कमरे से नकलते समय पंखा और बत्ती बंद क पस न्न बजली क बचत

घर के पौध को पानी दया और एक नया पौधा लगाया पस न्न दे श क धरती को हरा कया

कतार तोड़कर पानी क टं क से पहले पानी भर लया उदास दूसर का हक़ छ ना, नयम तोड़ा

नमूना उत्तर (एक वाक्य म): “आज तरंगा दो बार उदास हुआ — जब मने नल खुला छोड़ा और जब रैपर सड़क
पर फका; और चार बार प्रसन्न हुआ — बस म सीट दे ने पर, समय पर काम करने पर, बत्ती बंद करने पर और पौधा
लगाने पर। कल से म नल हमेशा बंद करके ही जाऊँगा।”

इस ग त व ध का असली उ े श्य: तरंगे का सम्मान केवल 15 अगस्त और 26 जनवरी का काम नह है। क व भी
यही कह रहा है — दे श-प्रेम कोई बड़ा अवसर नह माँगता, वह रोज़ के छोटे -छोटे काम म दखता है।

झरोखे से — पृष्ठ 11 और 12

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पाठ से आगे

पाठ से आगे

प्र.1 आपने दे श-प्रेम से संबं धत ‘स्वदे श’ क वता पढ़ । अब आप स्वदे शी कपड़े ‘खाद ’ से संबं धत सोहनलाल द्ववेद
क क वता ‘खाद गीत’ का एक अंश प ढ़ए। — “खाद के धागे-धागे म / अपनेपन का अ भमान भरा, / माता
का इसम मान भरा, / अन्यायी का अपमान भरा; // खाद के रेशे-रेशे म / अपने भाई का प्यार भरा, / माँ-बहन
का सत्कार भरा, / ब का मधुर दुलार भरा; // खाद क रजत चं का जब, / आकर तन पर मुसकाती है, /
तब नवजीवन क नई ज्यो त / अंतस्तल म जग जाती है;”

भावाथ — क व सोहनलाल वेद कहते ह क खाद केवल कपड़ा नह है। उसके एक-एक धागे म अपनेपन का गौरव बुना हुआ है,
उसम भारत माता का मान है और अन्याय करने वाले ( वदे शी शासन) का अपमान है। उसके एक-एक रेशे म भाई का प्रेम, माँ-बहन
का सत्कार और ब का दुलार भरा है। और जब चाँदनी जैसी उजली खाद शरीर पर आकर मुस्कराती है, तब भीतर, हृदय क
गहराई म एक नए जीवन क नई ज्यो त जग उठती है।

खाद इतनी बड़ी बात क्य थी: अंग्रेज़ी शासन म भारत का क ा कपास वदे श जाता था और वहाँ क मल का
बना कपड़ा यहाँ बकता था — इससे यहाँ के बुनकर बेकार हो गए। गांधीजी ने चरखा और खाद को इसका उत्तर
बनाया। खाद पहनने का अथ था — वदे शी कपड़े का ब हष्कार और अपने ही दे श के हाथ को काम। इसी लए
क व इस साधारण मोटे कपड़े म मान, प्रेम और नई ज्यो त दे ख पाता है।

शल्प क बात —

पुनरु क्त — ‘धागे-धागे’, ‘रेशे-रेशे’; इससे लगता है क कपड़े का कोई एक हस्सा नह , पूरा का पूरा भाव से भरा है।
अनुप्रास और तुक — अ भमान भरा, मान भरा, अपमान भरा; प्यार भरा, सत्कार भरा, दुलार भरा। ‘भरा’ हर पं क्त के अंत म
लौटता है — यह टे क जैसा काम करता है।
रूपक — ‘खाद क रजत चं द्रका’, यानी खाद को चाँद जैसी उजली चाँदनी कहा गया।
मानवीकरण — खाद ‘मुसकाती है’ — नज व कपड़े को जी वत व्य क्त क तरह दखाया गया।

साझी समझ — पृष्ठ 12
पाठ से आगे

पाठ से आगे

प्र.1 आपने ‘स्वदे श’ क वता और ‘खाद गीत’ का उपयुक्त अंश पढ़ा। स्वतंत्रता आंदोलन के समय लखी गई दोन
क वताओं म दे श-प्रेम कस प्रकार अ भव्यक्त हुआ है? सा थय के साथ मलकर चचा क जए। साथ ही ‘खाद
गीत’ पूरी क वता को पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँ ढ़कर प ढ़ए।

दोन क वताएँ स्वतंत्रता आंदोलन के दन क ह और दोन का लक्ष्य एक है — दे श-प्रेम जगाना। पर दोन का रास्ता अलग है।

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आधार स्वदे श — गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ खाद गीत — सोहनलाल द्ववेद

दे श-प्रेम कस हृदय क एक भावना और एक कसौट — जसम यह एक ठोस वस्तु के रूप म — खाद का कपड़ा, जसे
रूप म भाव नह , वह हृदय ही नह पहनकर दे श-प्रेम जया जाता है

स्वर ललकार और चुनौती का — क व झकझोरता है प्रेम और कोमलता का — क व पुचकारता है

तरीक़ा नषेध से — “ जसम… नह ”, “वह… नह ” वधान से — “भरा”, “भरा”, “भरा”

मुख्य बब पत्थर, काल-द प, परवाना, तोप-तलवार — कठोर और धागा, रेशा, चाँदनी, मुसकान — कोमल और घरेलू बब
वीर बब

पाठक से माँग साहस दखाओ, जोश जगाओ, समाज के साथ चलो स्वदे शी अपनाओ, वदे शी वस्त्र छोड़ो

रश्ता कससे दे श से — म , दाना-पानी, माता- पता, नव रत्न प रवार से — माता, भाई, माँ-बहन, ब े
जोड़ा

दोन म जो एक-सा है: दोन क व दे श को प रवार क तरह दे खते ह — ‘सनेही’ कहते ह “ह माता- पता बंधु
जसम”, वेद कहते ह “अपने भाई का प्यार भरा, माँ-बहन का सत्कार भरा”। दोन म टे क जैसी आवृ त्त है
(‘नह ’ और ‘भरा’), दोन क भाषा सरल है, और दोन गाए जाने के लए बने ह। यही उस युग क क वता क
पहचान थी — वह पढ़ नह , गाई जाती थी, क्य क उसे पढ़े - लखे लोग तक ही नह , सब तक पहुँचना था।

Try This: ‘खाद गीत’ क पूरी क वता पुस्तकालय, क वता-कोश या NCERT के ई-पाठशाला जैसे ोत से
ढूँ ढ़कर प ढ़ए। पढ़ते समय ग नए क ‘भरा’ शब्द कतनी बार आया है — और सो चए क क व ने एक ही शब्द
इतनी बार क्य दोहराया।

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प्र.1 नीचे द गई इंटरनेट क ड़य का प्रयोग कर आप दे श-प्रेम और स्वतंत्रता आंदोलन से संबं धत रचनाएँ पढ़ सकते ह
— • सारे जहाँ से अ ा • द वान क हस्ती • झाँसी क रानी

पुस्तक म तीन रचनाओं के लए क्यू-आर कोड / क ड़याँ द गई ह। पढ़ने से पहले हर रचना के बारे म इतना जान ली जए —

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श
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रचना रच यता कस बारे म प्र सद्ध पं क्त

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agहमारा, हम बुलबुल ह इसक ,
सारे जहाँ मुहम्मद इक़बाल भारत क सुंदरता, उसक न दय -पवत और उसक मली-जुली “सारे जहाँ से अच्छा हदोस्ताँ

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से अ ा 1904) संस्कृ त का गीत। इसम कहा गया है क यहाँ अनेक धम और

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(तराना-ए- भाषाएँ होते हुए भी हम सब एक ह। यह गु लसताँ हमारा”

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द वान क भगवतीचरण वमा मस्तमौला, नभय और स्वच्छं द जीवन का गीत — जो कह “हम द वान क क्या हस्ती, ह

emका भाव देश-प्रेम से जोड़कर पढ़ा गया।
हस्ती टकते नह , जो दे कर जाते ह, लेकर नह । स्वतंत्रता के दन म आज यहाँ कल वहाँ चले”
यही नभ कता औरsत्याग
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झाँसी क सुभद्राकुमारी
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सन् 1857 के संग्राम म लड़ने वाली रानी लक्ष्मीबाई क वीर- “ख़ूब लड़ी मदानी वह तो
रानी चौहान गाथा। यह वीर रस क सबसे लोक प्रय हद क वता मानी जाती
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झाँसी वाली रानी थी”

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है।

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पुस्तक म दए क्यू-आर कोड को स्कैन क जए, या वद्यालय के पुस्तकालय से इन क वय के संग्रह माँ गए। ये तीन रचनाएँ
अ धकतर हद काव्य-संग्रह म मल जाती ह।

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इंटरनेट पर खोजते समय ध्यान र खए क रच यता का नाम भी मलाकर दे ख, क्य क एक ही नाम क और भी रचनाएँ हो
सकती ह।
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पढ़ने के बाद अपनी कॉपी म हर रचना के लए तीन बात ल खए — वह कस भाव क क वता है, उसम सबसे अच्छ लगी
पं क्त, और ‘स्वदे श’ से उसका क्या मेल है। a

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तुलना के लए एक संकेत: ‘स्वदे श’ कहती है — “ जसने साहस को छोड़ दया, वह पहुँच सकेगा पार नह ।” अब
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coकmवताएँ इस तरह एक-दूसरे को खोल दे ती ह। l
‘झाँसी क रानी’ प ढ़ए और दे खए क रानी लक्ष्मीबाई उसी साहस का जीता-जागता उदाहरण कैसे बन जाती ह। दो
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अलग

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अध्याय — एक नज़र म
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स्वदे श एक क वता है, गद्य पाठ नह । इसके रच यता गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ (1883–1972) ह, जनका जन्म उत्तर प्रदे श

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के उन्नाव जनपद म हुआ। उन्ह ने ब्रजभाषा म क वता लखना आरंभ कया और बाद म खड़ी बोली के श्रेष्ठ क वय म अपना

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स्थान बनाया।

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.c त्रशूल तरंग, राष्ट्रीय मंत्र और कृषक क्रंदन उनक उल्लेखनीय रचनाएँ ह। राष्ट्र-प्रेaमgके साथ-साथ उन्ह ने कसान, मजदूर और
सरकारी नौकरी के कारण उन्ह ‘सनेही’ के अ त रक्त दूसरा उपनाम ‘ त्रशूल’ रखना पड़ा — यह बात उन्ह ने स्वयं कही है।

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सामा जक कुरी तय पर भी लखा।

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क वता क टे क ( ुवपं क्त) है — “वह हृदय नह है पत्थर है, जसम स्वदे श का प्यार नह ।” यही पं क्त क वता के आरंभ,

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बीच और अंत म लौटती है और हर बार भाव को गहरा करती जाती है।

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क व पहले शत गनाता है — जो जी वत जोश न जगा सका, जो संसार-संग न चल सका, जसने साहस छोड़ दया, जससे

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फर वह दे श क दे न गनाताaहैg— जसक म म हम उगे-बढ़े , जसने दाना-पानी दया, जसम माता- पता और बंधु ह,
जा त का उद्धार न हुआ, जो भाव से भरा नह — ऐसे हृदय को वह हृदय मानने से इनकार कर दे ता है।

जसने खजाने खोले और लासानी (बे मसाल) नव रत्न दए, जसक ान-संपदा पर दु नया द वानी है। इतना पाकर भी जो न

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श AglaSem · NCERT Solutions

पसीजे, वह ‘भू का भार’ है।
अंत म क व मृत्यु का भय हटाता है — जाना तो न त है, काल-द प हरदम जलता है और परवान को जलना ही है; इस लए
डरो मत। और वह ह थयार न होने का बहाना भी छ न लेता है — “सब कुछ है अपने हाथ म, क्या तोप नह तलवार
नह ।”
भाषा क दृ ष्ट से यह पाठ तुक, योजक चह्न (-), पदक्रम बदलने से बनी लयात्मकता (‘है’ का पं क्त के आरंभ म प्रयोग)
और समानाथ शब्द का अभ्यास कराता है।

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कक्षा 8 हद अध्याय 1 स्वदे श AglaSem · NCERT Solutions

त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द अथ क वता क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग

स्वदे श अपना दे श, जन्मभूिम “ जसम स्वदे श का प्यार नह ।” स्वदे श के लए काम करना ही स ी
सेवा है।

सार तत्व, मूल बात, महत्त्व “उस जीवन म कुछ सार नह ।” बना उ े श्य के जीवन म कोई सार नह
रहता।

संसार-संग संस ार के साथ, दुिनया के साथ कदम िमलाकर “जो चल न सका संसार-संग,” जो संसार के संग नह चलता, वह पीछे
छू ट जाता है।

जा त यहाँ — अपना समाज, जन-समूह, रा (उस युग “ जससे न जा त-उद्धार हुआ,” भारतदु युग के लेखक जा त के उत्थान
के किव इसी अथ में इसे बरतते थे) क बात करते थे।

उद्धार ऊपर उठाना, संक ट से िनकालना “होगा उसका उद्धार नह ॥” शक्षा ही कसी समाज के उद्धार का
रास्ता है।

रस-धार रस की धारा — यहाँ कोमल भावों का पवाह “बहती जसम रस-धार नह ।” उसके गीत म रस क धार बहती है।

लासानी बेिमसाल, िजसके जोड़ का दू स रा न हो (उदू ‘ला- “नव रत्न दये ह लासानी।” ताजमहल क सुंदरता लासानी है।
सानी’)

नव रत्न नौ रत्न — यहाँ दे श की अनमोल िवभूितयाँ, िव ान “नव रत्न दये ह लासानी।” अकबर के दरबार के नव रत्न प्र सद्ध
और कलाकार ह।

पसीजना द िवत होना, दया या भाव से िपघल जाना “उस पर है नह पसीजा जो,” भखारी क दशा दे खकर उसका मन
पसीज गया।

भू का भार धरती पर बोझ — व्यथ जीवन जीने वाला (मुहावरे “क्या है वह भू का भार नह ।” जो कसी के काम न आए, वह भू का
जैस ा पयोग) भार ही है।

नस्संशय िबना िकसी संदे ह के , िनि चत रूप से “ न त है नस्संशय न त,” प रश्रम का फल नस्संशय मलता है।

काल-द प काल (समय/म ृत्यु) रूपी दीपक — एक रूपक “है काल-द प जलता हरदम,” काल-द प जलता रहता है, समय कसी
के लए नह रुकता।

परवाना पतंग ा, जो दीपक पर जल मरता है; िमट जाने “जल जाना है परवान को॥” दे शभक्त परवान क तरह अपना सब
वाला पेम ी कुछ न्योछावर कर दे ते ह।

आ ान पुक ारने वाला, ललकारने वाला गीत जो कु छ “यह रचना एक आ ान गीत है” ‘झंडा ऊँचा रहे हमारा’ एक आ ान
गीत करने के िलए पेिरत करे गीत है।

तुक पंिक्तयों के अंितम शब्दों की एक-सी ध्विन “‘दाना-पानी’ और ‘राजा-रानी’ … बाल क वताओं म तुक मलाने से मज़ा
अं तम ध्व न एक-सी है” बढ़ जाता है।

योजक दो शब्दों को जोड़ने वाला (-) िचह्न “संसार-संग”, “रस-धार”, “राजा- ‘माता- पता’ म योजक चह्न लगा है।
चह्न रानी”

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 8
TypeSolution
Pages32
Languagehindi
Updated19 Sep 2026