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NCERT Solutions for Class 8 Hindi (वसंत) Chapter 7 कबीर की साखियॉं

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NCERT Solutions for Class 8 Hindi (वसंत) Chapter 7 कबीर की साखियॉं - Page 1 of 4

About NCERT Solutions for Class 8 Hindi (वसंत) Chapter 7 कबीर की साखियॉं

NCERT Solutions for Class 8 Hindi (वसंत) Chapter 7 कबीर की साखियॉं is available here for free download. Published by NCERT for Class 8, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (4 pages). Candidates preparing for Class 8 can use NCERT Solutions for Class 8 Hindi (वसंत) Chapter 7 कबीर की साखियॉं to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

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Yes. NCERT Solutions for Class 8 Hindi (वसंत) Chapter 7 कबीर की साखियॉं can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

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NCERT Solutions for Class 8 Hindi (वसंत) Chapter 7 कबीर की साखियॉं – Text

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Page 1

NCERT
SOLUTIONS
CLASS - 8TH

aglase .co

Page 2

Book : Vasant Ncert Solutions | Chapter - 9 Hindi

Class : 8th

Subject : वसंत

Chapter : 9

Chapter Name : कबीर की साखियााँ

Q1 ‘तलवार का महत्व होता है म्यान का नहीं’ - उक्त उदाहरण से कबीर क्या कहना चाहते हैं ? स्पष्ट कीजिए।

Answer. ‘तलवार का महत्व होता है म्यान का नहीं’ - उक्त उदाहरण से कबीर कहना चाहते हैं जक असली चीज़ की
क़द्र करनी चाजहये| जकसी मनुष्य की पहचान उसके ज्ञान से करनी चाजहए, उसकी िाजत के आधार पर नहीं| मनुष्य के
ज्ञान का महत्त्व होता हैं |

Page : 52, Block Name : पाठ से

Q2 पाठ की तीसरी सािी-जिसकी एक पंखक्त है 'मनुवााँ तो दहाँ जदजस जिरै , यह तो सुजमरन नाजहं' के द्वारा कबीर क्या
कहना चाहते हैं ?

Answer. कबीरदास िी इस पंखक्त के द्वारा यह कहना चाहते हैं जक ईश्वर की भखक्त के जलए एकाग्रजचत होना आवश्यक
है । केवल माला िपने से या मुाँह से राम नाम का िाप करने से ही ईश्वर की प्राखि नहीं होती हैं । यजद हमारा मन चारों
जदशाओं में भटक रहा हैं और मुि से हरर का नाम ले रहे हैं तो वह सच्ची भखक्त नहीं हैं ।

Page : 52, Block Name : पाठ से

Q3 कबीर घास की जनंदा करने से क्यों मना करते हैं । पढ़े हए दोहे के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

Answer. कबीर घास की जनंदा करने से मना करते हैं क्योंजक जकसी को भी छोटा समझकर हमें िुद पर घमंड नहीं
करना चाजहए| यजद उसी घास का एक जतनका भी उड़कर हमारी आाँ ि में चला िाये तो हमें बहत कष्ट होता हैं |

Page : 52, Block Name : पाठ से

Q4 मनुष्य के व्यवहार में ही दू सरों को जवरोधी बना लेने वाले दोष होते हैं । यह भावार्थ जकस दोहे से व्यक्त होता है ?

Answer. मनुष्य के व्यवहार में ही दू सरों को जवरोधी बना लेने वाले दोष होते हैं । यह भावार्थ जनम्नजलखित दोहे से व्यक्त
होता है –

''िग में बैरी कोइ नहीं, िो मन सीतल होय।

या आपा को डारर दे , दया करै सब कोय||''

Page : 52, Block Name : पाठ से

Q1 ''या आपा को डारर दे , दया करै सब कोय।''

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Page 3

Book : Vasant Ncert Solutions | Chapter - 9 Hindi

''ऐसी बानी बोजलए मन का आपा िोय।''

इन दोनों पंखक्तयों में 'आपा' को छोड़ दे ने या िो दे ने की बात की गई है । 'आपा' जकस अर्थ में प्रयुक्त हआ है ? क्या
'आपा' स्वार्थ के जनकट का अर्थ दे ता है या घमंड का?

Answer. यह ‘आपा’ शब्द का अर्थ घमंड हैं | घमंड के कारण ही मनुष्य दू सरों को िुद से छोटा समझता हैं |

Page : 52, Block Name : पाठ से आगे

Q2 आपके जवचार में आपा और आत्मजवश्वास में तर्ा आपा और उत्साह में क्या कोई अंतर हो सकता है ? स्पष्ट करें ।

Answer. आपा का अर्थ अहंकार/ घमंड होता है िबजक आत्मजवश्वास का अर्थ हैं िुद पर जवश्वास करना|

आपा का अर्थ घमंड होता है और उत्साह का अर्थ जकसी कायथ को करने की िुशी या इच्छा से है ।

Page : 52, Block Name : पाठ से आगे

Q3 सभी मनुष्य एक ही प्रकार से दे िते-सुनते हैं पर एकसमान जवचार नहीं रिते। सभी अपनी-अपनी मनोवृजियों के
अनुसार कायथ करते हैं । पाठ में आई कबीर की जकस सािी से उपयुथक्त पंखक्तयों के भाव जमलते हैं,एकसमान होने के
जलए आवश्यक क्या है ? जलखिए।

Answer. कबीर की जनम्न सािी से उपयुथक्त पंखक्तयों के भाव जमलते हैं –

''आवत गारी एक है , उलटत होइ अनेक।

कह कबीर नजहं उलजटए, वही एक की एक||''

सभी मनुष्य एक ही प्रकार से दे िते-सुनते हैं पर एकसमान जवचार नहीं रिते। एकसमान होने के जलए सभी के जवचार
एक िैसे होने चाजहये|

Page : 52, Block Name : पाठ से आगे

Q4 कबीर के दोहों को सािी क्यों कहा िाता हैं ? ज्ञात कीजिए।

Answer. कबीर के दोहों को सािी इसजलए कहा िाता हैं क्योंजक इनमें श्रोता को साक्षात् ज्ञान जदया िाता हैं | सािी
का अर्थ होता हैं साक्षी या साक्षात्| कबीर ने िो कुछ आाँ िों से दे िा उसे अपने शब्दों में व्यक्त करके लोगों को
समझाया।

Page : 52, Block Name : पाठ से आगे

Q5 बोलचाल की क्षेत्रीय जवशेषताओं के कारण शब्दों के उच्चारण में पररवतथन होता है िैसे वाणी शब्द बानी बन िाता
है । मन से मनवा, मनुवा आजद हो िाता है । उच्चारण के पररवतथन से वतथनी भी बदल िाती है। नीचे कुछ शब्द जदए िा
रहे हैं उनका वह रूप जलखिए जिससे आपका पररचय हो। ग्यान, िीजभ, पाउाँ , तजल, आाँ खि, बरी।

Answer.

· ग्यान – ज्ञान

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Page 4

Book : Vasant Ncert Solutions | Chapter - 9 Hindi

· िीजभ – िीभ

· पाउाँ – पााँ व

· तजल – तले

· आाँ खि - आाँ ि

· बरी - वैरी

Page : 53, Block Name : भाषा की बात

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 8
TypeSolution
Pages4
Languagehindi
Updated11 Aug 2026