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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 3: एक आशीवाद
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
36 – 44 17 28 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 26 pages
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 8 · हद · मल्हार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 3: एक आशीवाद
NCERT कक्षा 8 हद क पाठ्यपुस्तक मल्हार के पाठ 3 एक आशीवाद (क व — दुष्यंत कुमार) के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह मुक्त छं द म लखी
एक छोट -सी क वता है, जसम एक बड़ा कसी छोटे को यह आशीवाद दे ता है क उसके सपने बड़े ह — और साथ ही यह भी बताता है क बड़े सपने
केवल कल्पना नह होते, उन्ह पृथ्वी पर चलना भी सीखना पड़ता है। पृष्ठ 36 से 44 तक क हर ग त व ध — मेरी समझ से, मलकर कर मलान,
पं क्तय पर चचा, अनुमान और कल्पना से, क वता क रचना, सृजन, क वता का शीषक, भाषा क बात, आना-जाना, डायरी, आपक बात, सपन क
बात, हमारे सपने, सबके सपने, झरोखे से, साझी समझ और खोजबीन के लए — शीषक-दर-शीषक हल क गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
मल्हार (कक्षा 8) 36 – 44
खं ड प्रश्न
17 28
माध्यम
हन्द
मेरी समझ से — पृष्ठ 37 और 38
पाठ से
पाठ से
प्र.1 ★
(क) नम्न ल खत प्रश्न के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा ( ) बनाइए। कुछ प्रश्न के एक से अ धक उत्तर भी हो
सकते ह। 1. क वता म कसे संबो धत कया गया है? • युवा वग को • नाग रक को • ब को • श्र मक को
उपयुक्त उत्तर ह — युवा वग को और ब को। इन दोन के सामने तारा (★) बनाइए।
वकल्प सही / कारण
ग़लत
युवा वग सही ★ क वता का पहला शब्द ही “जा” है — यह कसी बड़े का उस व्य क्त से कहा गया वाक्य है जो अभी घर से
को नकल रहा है, जसके सामने पूरा जीवन पड़ा है। “अपने पाँव पर खड़े ह ” का आशीवाद उसी को दया जाता है
जो अभी आत्म नभर होने क दहलीज़ पर है।
नाग रक ग़लत क वता म दे श, समाज, कतव्य या अ धकार क कोई बात नह है। ‘नाग रक’ एक सामा जक-राजनी तक भू मका
को है; क वता व्य क्त के सपन क बात करती है।
ब को सही ★ क वता क सारी क्रयाएँ बचपन क ह — गोद से उतरना, चलना सीखना, रूठना-मचलना। इसी लए यह
आशीवाद ब पर भी उतना ही लागू होता है।
श्र मक ग़लत क वता म श्रम, मज़दूरी या कसी वशेष व्यवसाय का उल्लेख नह है। यह कसी एक वग क नह , हर उस
को व्य क्त क क वता है जो अभी बढ़ रहा है।
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क्य दो उत्तर सही ह: प्रश्न स्वयं कहता है क “कुछ प्रश्न के एक से अ धक उत्तर भी हो सकते ह।” क वता का ‘तू’
कसी नाम वाले व्य क्त का नह है — वह हर उस उम्र का है जसके सपने अभी बन रहे ह। इस लए ब ा और युवा,
दोन इस संबोधन म आते ह।
प्र.2 2. “तेरे स्वप्न बड़े ह ” पं क्त म ‘स्वप्न’ से क्या आशय है? • कल्पना क उड़ान भरना • आकांक्षाएँ और रु चयाँ
रखना • बहुत-सी उपल याँ पाना • बड़े लक्ष्य नधा रत करना
उपयुक्त उत्तर ह — बड़े लक्ष्य नधा रत करना और आकांक्षाएँ और रु चयाँ रखना। इनके सामने तारा (★) बनाइए।
वकल्प सही / कारण
ग़लत
कल्पना क उड़ान ग़लत क वता इसी से मना करती है। अगली ही पं क्त है — “भावना क गोद से उतरकर / जल्द पृथ्वी पर
भरना चलना सीख।” केवल उड़ती हुई कल्पना क व को स्वीकार नह ; वह चाहता है क सपना ज़मीन पर
उतरे।
आकांक्षाएँ और सही ★ “हर द ये क रोशनी दे खकर ललचाएँ” — यानी हर नई चीज़ क ओर मन खचे। यह रु च और
रु चयाँ रखना आकांक्षा का ही वणन है।
बहुत-सी उपल ब्धयाँ ग़लत क वता उपल ब्धय क गनती क नह , सपने के आकार क बात करती है — “बड़े ह ”, न क
पाना “बहुत ह ”। क व माँग रहा है क सपना ऊँचा हो, चाहे एक ही हो।
बड़े लक्ष्य नधा रत सही ★ यही पं क्त का सीधा अथ है — “चाँद-तार -सी अप्राप्य स ाइय ” के लए ज़द करना, अथात् वह
करना लक्ष्य चुनना जो पहली नज़र म असंभव लगे।
ध्यान द जए: ‘सपना’ शब्द के दो अथ ह — (1) न द म दखने वाला दृश्य, (2) जागते हुए मन म ठाना गया लक्ष्य।
क वता म दूसरा अथ है। यही बात पुस्तक के अंत म डॉ. कलाम भी कहते ह — “सपने वह होते ह जो आपको सोने
नह दे ते।”
प्र.3 3. “उँगली जलाएँ” पं क्त म उँगली जलाने का भाव है— • चुनौ तय को स्वीकार करना • प्रकाश का प्रसार करना
• अ ग्न के ताप का अनुभव करना • कष्ट से नह घबराना
उपयुक्त उत्तर ह — चुनौ तय को स्वीकार करना और कष्ट से नह घबराना। इनके सामने तारा (★) बनाइए।
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वकल्प सही / कारण
ग़लत
चुनौ तय को सही ★ द ये तक हाथ बढ़ाना ही जो खम उठाना है। जो केवल दूर से रोशनी दे खकर खुश रहता है, वह
स्वीकार करना कुछ पाता नह ; क व चाहता है क हाथ बढ़े , भले उँ गली जले।
प्रकाश का प्रसार ग़लत पं क्त म उजाला फैलाने क नह , उजाले तक पहुँचने क बात है। ‘ललचाएँ’ पाने क इ ा
करना दखाता है, दे ने क नह ।
अ ग्न के ताप का ग़लत यह पं क्त का शब्दशः अथ है, भाव नह । क वता म द या ान और लक्ष्य का प्रतीक है — असली
अनुभव करना आग का नह ।
कष्ट से नह घबराना सही ★ उँ गली जलने पर भी हाथ पीछे न ख चना ही यह भाव है — क सीखने और पाने म जो चोट लगे,
उसे सह लया जाए।
बात क जड़: क व ‘ललचाएँ’ और ‘जलाएँ’ को जान-बूझकर साथ रखता है। पहली क्रया इ ा है, दूसरी उसक
क़ मत। क वता कहती है क इ ा और क़ मत — दोन एक साथ आती ह, और दोन को स्वीकार करना ही बड़े
सपने क शत है।
प्र.4 4. “अपने पाँव पर खड़े ह ” पं क्त से क्या आशय है? • अपने पैर पर खड़े होना • सफलता प्राप्त करना •
क ठनाइय का सामना करना • आत्म नभर होना
सबसे उपयुक्त उत्तर है — आत्म नभर होना। इसके सामने तारा (★) बनाइए। ‘क ठनाइय का सामना करना’ को भी दूसरे उत्तर के
रूप म लया जा सकता है, क्य क आत्म नभरता क ठनाइय को अकेले झेले बना नह आती।
वकल्प सही / कारण
ग़लत
अपने पैर पर खड़े ग़लत यह उत्तर नह , वही पं क्त दूसरे शब्द म है। प्रश्न ‘आशय’ पूछता है, अथात् मुहावरे के पीछे का
होना भाव।
सफलता प्राप्त करना ग़लत सफलता प रणाम है, आत्म नभरता त। कोई व्य क्त दूसर के सहारे भी सफल दख सकता
है — पर क वता उससे संतुष्ट नह ।
क ठनाइय का सामना स्वीकाय ★ अपने पाँव पर खड़ा व्य क्त ही अपनी क ठनाइयाँ स्वयं झेलता है। इस लए यह भाव इस पं क्त
करना से जुड़ा हुआ है, यद्य प मुख्य भाव नह ।
आत्म नभर होना सही ★ ‘अपने पाँव पर खड़ा होना’ हद का प्र सद्ध मुहावरा है जसका अथ ही है — कसी के सहारे
के बना अपना जीवन चलाना।
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद
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क वता क बुनावट दे खए: क वता क शुरुआत ‘गोद’ से होती है और अंत ‘पाँव ’ पर। गोद से उतरकर, चलना
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सीखकर, गरकर, जलकर — तब जाकर पाँव पर खड़ा होना। यह क्रम अपने आप म एक पूरी वकास-यात्रा
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agl (ख) हो सकता है क आपके समूह के सा थय ने अलग-अलग उत्तर चुने ह । अपने मत्र के साथ चचा क जए
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क आपने ये उत्तर ही क्य चुने?
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यह चचा क ग त व ध है। इसका उ े श्य यह है क आप अपने उत्तर का कारण बता सक — क्य क क वता म अनेक उत्तर सही हो
सकते ह, पर हर उत्तर के पीछे क वता क कोई पं क्त होनी चा हए।
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चचा कस तरह क जए:
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1. हर साथी cअपना चुना हुआ वकल्प पढ़े और साथ म वह पं क्त बताए जसके आधार पर उसने l a
g वह वकल्प चुना।
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a e पू छए — “क्या यह पं क्त सचमुच यही कह रही है, या हम अपनी ओर से कुछ जोड़ रहे ह?”
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ag3. जन वकल्प को सबने छोड़ा, उनके छोड़ने का कारण भी बताइए। ग़लत वकल्प क्य ग़लत है — यह बताना भी उतना ही
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ज़रूरी है।
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4. अंत म समूह मलकर तय करे क कन प्रश्न म एक से अ धक उत्तर वास्तव म बनते ह।
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नमूना उत्तर: “मने पहले प्रश्न म ‘युवा वग को’ चुना, क्य क ‘जा’ कहकर कसी को घर से बाहर भेजा जा रहा है और ‘अपने पाँव
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पर खड़े ह ’ का आशीवाद युवा को ही दया जाता है। मेरी साथी ने ‘ब को’ चुना, क्य क ‘गोद’, ‘चलना सीख’ और ‘रूठना-
मचलना’ — ये सब बचपन के शब्द ह। चचा के बाद हम लगा क दोन उत्तर सही ह, क्य क क व ने कसी एक उम्र का नाम नह
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लया।”
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eहैmजसे क वता के शब्द सँभाल सक। चचा का असली काम यही जाँच करना है।
इससे क्या सीखते ह: क वता का अथ पाठक के साथ मलकर बनता है। पर हर अथ मान्य नह होता — मान्य वही
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मलकर कर मलान — पृष्ठ 38
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पाठ से
पाठ से
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क वता म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ स्तंभ 1 म द गई ह। उन पं क्तय के भाव sयाe संदभ स्तंभ 2 म दए गए ह।
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.c पं क्तय को उनके सही भाव अथवा संदभ से मलाइए। स्तंभ 1 — 1.agभावना
प्र.6
la क गोद से उतरकर जल्द पृथ्वी पर
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g l a चलना सीख 2. हर द ये क रोशनी दे खकर ललचाएँ 3. चाँद-तार -सी अप्राप्य स ाइय के लए रूठना-मचलना
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सीख 4. …हँस/मुसकराएँ/गाएँ | स्तंभ 2 — 1. व वध ान के प्र त आकृष्ट होना और उसे पाने क ललक होना
2. सपन को आनंद और मुस्कुराहट म बदल। क ठन प र तय म भी मनोबल बनाए रख। 3. भावनाओं म न
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बहकर वास्त वकता का सामना करना 4. असंभव से लगने वाले लक्ष्य के लए हठ और प्रयास करना
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सही मलान इस प्रकार है — 1 → 3, 2 → 1, 3 → 4, 4 → 2.
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क्रम स्तंभ 1 (क वता क स्तंभ 2 (भाव) मलान का आधार
पं क्त)
1. भावना की गोद से उतरकर 3. भावनाओं में न बहकर वास्तिवकता का ‘गोद’ भावना है और ‘पृथ्वी’ वास्त वकता। गोद से
जल्द पथ्ृ वी पर चलना सीखें सामना करना उतरना ही भावुकता से नकलकर ज़मीन पर आना
है।
2. हर दीये की रोशनी दे खकर 1. िविवध ान के पित आकृ ष्ट होना और ‘हर द या’ का अथ है — हर ोत, हर वषय। द या
ललचाएँ उसे पाने की ललक होना यहाँ ान का प्रतीक है और ‘ललचाना’ उसे पाने क
ललक।
3. चाँद -तारों-सी अपाप्य 4. असंभव से लगने वाले ल क्ष्यों के िलए ‘अप्राप्य’ का सीधा अथ है — जो मल न सके।
सच्चाइयों के िलए रूठना- हठ और पयास करना ‘रूठना-मचलना’ ब े क ज़द है, अथात् हठपूवक
मचलना सीखें लगे रहना।
4. …हँसे ं / मुस कराएँ / गाएँ 2. सपनों को आनंद और मुस्कु राहटों में हँसना, मुसकराना और गाना — तीन आनंद क
बदले ं। किठन पिरिस्थितयों में भी मनोबल क्रयाएँ ह। क व चाहता है क सपने का पीछा बोझ
बनाए रखें। न बने, उत्सव बने।
ध्यान दे ने क बात: चार भाव मलकर एक क्रम बनाते ह — पहले ज़मीन पर आना (यथाथ), फर ऊँचा लक्ष्य
चुनना (हठ), फर हर ओर से सीखने क ललक, और यह सब करते हुए मन का प्रसन्न रहना। क वता का आशीवाद
इन्ह चार बात का है।
पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 38 और 39
पाठ से
पाठ से
प्र.7 पाठ से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे द गई ह। इन्ह ध्यानपूवक प ढ़ए और इन पर वचार क जए। आपको इनका
क्या अथ समझ म आया? अपने वचार अपने समूह म साझा क जए और ल खए— (क) “जा, / तेरे स्वप्न बड़े
ह”
भावाथ: जा — और मेरी शुभकामना यह है क तेरे सपने छोटे न रह, बड़े ह । क व कसी को धन, सुख या सुरक्षा का आशीवाद नह
दे रहा; वह बड़े सपने का आशीवाद दे रहा है, क्य क आगे जो कुछ भी होगा वह सपने के आकार से ही तय होगा।
शल्प कैसे काम करता है:
पहला शब्द “जा” अकेला, एक पूरी पं क्त के बराबर खड़ा है। इससे वदाई का क्षण बन जाता है — कोई घर क दे हरी से बाहर
भेजा जा रहा है। य द इसे अगली पं क्त के साथ जोड़ दया जाता तो यह ठहराव और यह अथ दोन खो जाते।
‘बड़े ह ’ व ध/इच्छावाचक रूप है — यह आदे श नह , कामना है। इसी से क वता आशीवाद बनती है, उपदे श नह ।
यही दो पं क्तयाँ क वता के अंत म फर आती ह। इस आवृ त्त से क वता एक घेरा बन जाती है और बात मन पर टक जाती है।
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क व यह क्य कहता है: बड़ा सपना अपने साथ बड़ी मेहनत, बड़ी असफलता और बड़ी हम्मत — तीन लेकर
आता है। इस लए ‘सपने बड़े ह ’ कहने का अथ है — ‘तेरा जीवन बड़ा हो’। शेष पूरी क वता इसी एक वाक्य का
वस्तार है।
प्र.8 (ख) “जल्द पृथ्वी पर चलना सीख”
भावाथ: सपने भावना क गोद म ही न पड़े रह, ब ल्क जल्द से नीचे उतरकर ज़मीन पर चलना सीख जाएँ — अथात् सपना केवल
महसूस करने क चीज़ न रहकर जल्द से जल्द करने क चीज़ बन जाए।
चत्र कैसे बना है: क व ने सपने को गोद म पला हुआ छोटा ब ा बना दया है। ब ा पहले गोद म रहता है, फर उतरता है, फर
गरते-सँभलते चलना सीखता है। सपने क यात्रा भी ठ क यही है — पहले वह मन म सुखद लगता है, फर उसे व्यवहार म उतारना
पड़ता है, और तब कई बार गरना पड़ता है। यह मानवीकरण है — भाववाचक ‘स्वप्न’ को जी वत शशु क तरह दखाया गया।
‘जल्द’ शब्द क्य ज़रूरी है: इसे हटा द जए तो पं क्त केवल सलाह रह जाती है। ‘जल्द’ जोड़ते ही उसम समय क चेतावनी आ
जाती है — गोद का आराम जतना लंबा खचेगा, चलना उतना ही क ठन होगा।
अपने जीवन से जो ड़ए: ‘म डॉक्टर बनूँगा’ सोचते रहना गोद म रहना है। आज का पाठ आज पढ़ लेना — यह
पृथ्वी पर पहला क़दम है।
प्र.9 (ग) “चाँद-तार -सी अप्राप्य स ाइय के लए / रूठना-मचलना सीख”
भावाथ: जो स ाइयाँ चाँद-तार क तरह दूर और अप्राप्य लगती ह, सपने उनके लए भी ब े क तरह ज़द करना सीख जाएँ —
यानी असंभव दखने वाले लक्ष्य को भी माँग और उसके लए अड़ जाएँ।
दो अलंकार एक साथ:
अलंकार कहाँ वह क्या कर रहा है
उपमा “चाँद -तारों-सी अपाप्य ‘सी’ वाचक शब्द से स ाइय क तुलना चाँद-तार से क गई है — जो दखते तो ह, पर हाथ
सच्चाइयाँ” नह आते। इससे लक्ष्य क ऊँचाई और दूरी एक साथ आँख के सामने आ जाती है।
मानवीकरण “रूठना-मचलना रूठना और मचलना ब े करते ह। इन्ह सपन से करवाकर क व सपने को जी वत बना दे ता है
सीखें” और साथ ही ‘ ज़द’ को गुण बना दे ता है।
यहाँ ब े क ज़द ही उदाहरण क्य : चाँद माँगता हुआ ब ा तक नह सुनता — वह मानने को तैयार ही नह क कोई चीज़ नह
मल सकती। क व यही स्वभाव चाहता है। जो पहले ही मान ले क ‘यह मुझसे न होगा’, वह प्रयास ही शुरू नह करता। बड़ी
उपल ब्धयाँ पहले असंभव ही लगती ह — असंभव मानकर बैठ जाना ही असली रुकावट है।
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अनुमान और कल्पना से — पृष्ठ 39
पाठ से
पाठ से
प्र.10 अपने समूह म मलकर चचा क जए— (क) क वता म सपन के बड़े होने क बात क गई है। आपके अनुसार
बड़े सपने कौन-कौन से हो सकते ह और क्य ?
सीधा उत्तर: बड़ा सपना वह है जसका लाभ केवल सपना दे खने वाले तक सी मत न रहे, और जसे पूरा करने म वष का प रश्रम
लगे। ‘बड़ा’ का अथ महँगा या दखावट नह , ब ल्क दूरगामी है।
बड़ा सपना यह बड़ा क्य है
अपने गाँव या मोहल्ले के हर बच्चे को पढ़ ता हुआ दे खना इसका फल एक पीढ़ तक जाता है। इसम अपना लाभ नह , दूसर का
भ वष्य जुड़ा है।
वै ािनक बनकर िकसी बीमारी या पानी की समस्या का हल वष क पढ़ाई और अनेक असफल प्रयोग माँगता है — और सफल होने पर
खोजना हज़ार लोग का जीवन बदलता है।
दे श के िलए खेल ना या कोई कला (संग ीत, िचत्रकला, ले खन) रोज़ का क ठन अभ्यास चा हए। साथ ही यह दूसर को भी अपने सपने दे खने
सव च्च स्तर तक ले जाना का साहस दे ता है।
अपने आस-पास की नदी, तालाब या पेड़ों को बचाना इसका लाभ उन लोग को भी मलेगा जो अभी जन्मे भी नह ह।
अपने पिरवार को आत्मिनभर बनाना और पहला व्यिक्त बनना यह पूरे प रवार का रास्ता बदल दे ता है — “अपने पाँव पर खड़े ह ” का
जो उच्च िशक्षा तक पहच
ुँ े सीधा अथ यही है।
बड़े सपने ही क्य : छोटा लक्ष्य पूरा होते ही आदमी रुक जाता है; बड़ा लक्ष्य जीवन भर चलाता रहता है। दूसरी बात
— बड़े सपने के पीछे चलते हुए रास्ते म छोट सफलताएँ अपने आप मलती जाती ह, पर छोटे सपने के पीछे चलकर
कोई बड़ी जगह तक नह पहुँचता।
चचा के लए: समूह म हर साथी अपना एक सपना बताए और फर सब मलकर तय कर क वह ‘बड़ा’ कस अथ
म है — समय के अथ म, प रश्रम के अथ म, या उससे लाभ पाने वाल क संख्या के अथ म।
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प्र.11 (ख) “हर द ये क रोशनी दे खकर ललचाएँ/उँगली जलाएँ” पं क्त म सपन और लक्ष्य को पूरा करने के लए
ललक क बात क गई है। ललक के साथ और क्या-क्या होना आवश्यक है और क्य ? (संकेत— योजना, प्रयास
आ द)
सीधा उत्तर: केवल ललक से कोई लक्ष्य पूरा नह होता। ललक तो यात्रा शुरू करवाती है; उसे पूरा करने के लए योजना, नरंतर
प्रयास, धैय, अनुशासन, सही मागदशन और असफलता सहने क श क्त — इन सबका साथ चा हए।
ललक के साथ क्या क्य चा हए
चा हए
योजना ललक बताती है क ‘क्या’ चा हए, योजना बताती है ‘कैसे’। बड़े लक्ष्य को छोटे -छोटे चरण म बाँटे बना पहला
क़दम ही तय नह होता।
नरंतर प्रयास ललक कुछ दन म ठं डी पड़ जाती है; रोज़ का थोड़ा-थोड़ा काम ही अंत तक ले जाता है। क वता भी ‘ललचाएँ’ के
तुरंत बाद ‘जलाएँ’ रखती है — यानी इ ा के बाद क्रया।
धैय बड़े लक्ष्य का फल दे र से मलता है। धैय न हो तो व्य क्त बीच म ही रास्ता बदल दे ता है और कोई भी रास्ता पूरा
नह होता।
अनुशासन और समय- मन जस दन न चाहे उस दन भी काम करा दे ने वाली चीज़ अनुशासन ही है। ललक मन के मूड पर नभर है,
प्रबंधन अनुशासन नह ।
सही मागदशन शक्षक, पुस्तक या अनुभवी व्य क्त क सलाह वष क भटकन बचा दे ती है। अकेली ललक ग़लत दशा म भी
उतनी ही तेज़ दौड़ा सकती है।
असफलता सहने का ‘उँ गली जलाएँ’ का यही अथ है — चोट लगेगी। जो पहली चोट पर हाथ ख च ले, उसक ललक बेकार चली जाती
साहस है।
पं क्त से जोड़कर दे खए: ‘द ये क रोशनी दे खकर ललचाना’ भाव है, और ‘उँ गली जलाना’ उस भाव क क़ मत।
क व ने दोन को एक साथ रखा है — इसका अथ है क इ ा और प रश्रम अलग-अलग चीज़ नह , एक ही काम के
दो हस्से ह।
प्र.12 (ग) कल्पना क जए क आपका सपना ही आपका मत्र है। आपको उससे बातचीत करनी हो तो क्या बात
करगे?
यह कल्पना क ग त व ध है। इसे अ ा बनाने के लए सपने को व्य क्त क तरह संबो धत क जए — जैसे क वता म सपना
चलता, हँसता और मचलता है। बातचीत म तीन बात आनी चा हए — सपने से आपक अपेक्षा, आपक क ठनाई, और आपका
वादा।
नमूना उत्तर (संवाद के रूप म):
म: सुनो सपने, तुम मेरे साथ कब से हो? जब से मने पहली बार दूरबीन से चाँद दे खा था, तुम मेरी आँख म बस गए हो।
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद
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सपना: हाँ, पर तुम मुझे केवल रात म याद करते हो। दन म तुम मुझे भूल जाते हो।
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म: सच कहते हो। म तुम्ह सोचता तो बहुत ँ, पर करता कम ँ। तुम्ह ‘भावना क गोद’ से उतारना मुझे क ठन लगता है।
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सपना: तो मुझे रोज़ थोड़ा-सा चलाओ। मुझे एक दन म बड़ा मत बनाओ — एक अध्याय, एक प्रयोग, एक अभ्यास, बस इतना
काफ़ है।m
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और य द म असफल हो गया?
सपना: तब भी म तुम्हारे साथ र ँगा। जो सपना असफलता से डरकर छोड़ दया जाए, वह सपना था ही नह । बस तुम मुझसे
रूठना मत।
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म: ठ क है, म वादा करता ँ — रोज़ तुमसे थोड़ी दे र मलूँगा, और उस मलने म सफ़ बात नह , काम भी होगा। ag
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अपना उत्तर बनाते समय: अपने असली सपने का नाम ली जए ( शक्षक बनना, कसान बनना, संगीतकार बनना),
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उससे जुड़ी एक असली क ठनाई ल खए, और एक ऐसा वादा क जए जो आप कल से सचमुच नभा सक। यही
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उत्तर को स ा बनाता है।
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a प्र.13 (घ) य द आप कसी को आशीवाद दे ना चाहते ह तो आप कसे और क्या आशीवाद दगे और क्य ?
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अच्छे उत्तर म तीन बात होनी चा हए — (1) कसे, (2) क्या आशीवाद, (3) वही आशीवाद क्य । ध्यान र खए क इस क वता का
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आशीवाद वस्तु का नह , गुण का है — इस लए आपका आशीवाद भी ‘तुम्ह बहुत धन मले’ जैसा न होकर ‘तुम्हारे भीतर यह गुण
आए’ जैसा हो।
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बात पर ‘ऐसा क्य होता है?’ पूछती रहती है और लोग उसे चुप करा दे ते ह। जसके प्रश्न मर जाते ह,em
नमूना उत्तर: म अपनी छोट बहन को यह आशीवाद दूँ गी — “जा, तेरे प्रश्न कभी कम न ह ।” म यह इस लए दूँ गी क्य क वह हर
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coक या पद तो बदलते रहते ह, पर ज ासा जीवन भर काम आती है — और उसीagसेlनए सपने जन्म लेते ह।
उसका सीखना भी रुक जाता
है। धन,.अं
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ु eछ और आशीवाद जो आप चुन सकते ह:
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“तुम्ह ऐसा काम मले जसे करते हुए समय का पता न चले।” — क्य क रु च का काम कभी बोझ नह बनता।
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“तुम्ह हार से डर न लगे।” — क्य क हार से डरने वाला नई चीज़ आज़माता ही नह ।
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“तुम्हारे पास हमेशा एक स ा मत्र हो।” — क्य क क ठन दन म साथ ही सबसे बड़ा सहारा होता है।
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क वता से सीख: दुष्यंत कुमार ने भी सुख या सफलता का आशीवाद नह दया — उन्ह ने बड़े सपने का आशीवाद
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दया, क्य क सुख और सफलता तो सपने के पीछे अपने आप चली आती ह।
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a s emवता क रचना — पृष्ठ 39
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
पाठ से
प्र.14 इस क वता म सपने को मनुष्य क तरह हँसते, मुसकराते, गाते हुए बताया गया है। ध्यान से दे ख तो इस क वता
म इस प्रकार क अन्य वशेषताएँ भी दखाई दगी। उन्ह ल खए और कक्षा म उन पर चचा क जए।
प्रश्न म जस वशेषता क ओर संकेत है, वह मानवीकरण है — सपने को मनुष्य क तरह दखाना। क वता म इसके अलावा भी कई
रचना- वशेषताएँ ह:
वशेषता क वता म कहाँ वह क्या असर पैदा करती है
मानवीकरण “चलना सीखें”, “रूठना-मचलना सीखें”, सपना एक जीता-जागता ब ा बन जाता है — गोद से उतरता,
“हँसे ं/मुस कराएँ/गाएँ”, “उँ ग ली जलाएँ”, चलना सीखता, ज़द करता और अंत म अपने पैर पर खड़ा होता
“अपने पाँवों पर खड़े हों” हुआ। पूरी क वता म यही एक रूपक चलता रहता है।
उपमा “चाँद -तारों-सी अपाप्य सच्चाइयों” ‘सी’ वाचक शब्द से लक्ष्य क दूरी और चमक — दोन एक साथ
दख जाती ह।
प्रतीक “दीये की रोशनी” द या यहाँ सचमुच का द या नह — वह ान, अवसर और लक्ष्य का
प्रतीक है।
आवृ त्त “जा, / तेरे स्वप्न बड़े हों” — आरंभ में और क वता एक वृत्त बन जाती है; आशीवाद दोहराकर पक्का कया
(पुनरु क्त) अंत में जाता है, जैसे बड़े लोग वदा करते समय करते ह।
युग्म शब्द “रूठना-मचलना”, “चाँद -तारों”, “हँसे ं/ जोड़े म आए शब्द भाव को बढ़ा दे ते ह और पं क्त म लय पैदा करते
मुस कराएँ/गाएँ” ह।
मुक्त छं द और “हँसे ं”, “मुस कराएँ”, “गाएँ” — तीन अलग- एक-एक शब्द क पं क्त पढ़ने पर ठहराव लाती है, जससे हर क्रया
छोट पं क्तयाँ अलग पंिक्तयाँ अलग से सुनाई दे ती है। कोई न त तुक या मात्रा-गणना नह है।
संबोधन शैली “जा,” … “तेरे ” ‘तू’ के प्रयोग से क वता उपदे श नह , अपनापन बन जाती है — जैसे
कोई बड़ा सर पर हाथ रखकर कह रहा हो।
सबसे बड़ी वशेषता: पूरी क वता म क्रयाएँ ही क्रयाएँ ह और सं ा केवल एक — ‘स्वप्न’। इसी लए क वता र
नह लगती, चलती हुई लगती है — जैसे सपना सचमुच हमारे सामने बड़ा हो रहा हो।
सृजन — पृष्ठ 39
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
सृ ज न
प्र.15 इस क वता के आरंभ म एक ही सं ा शब्द है ‘स्वप्न’। इस शब्द को कद्र म रखते हुए अनेक क्रया शब्द का ताना-
बाना बुना गया है, जैसे— चलना, रूठना, मचलना, सीखना, हँसना, मुस्कुराना, गाना, ललचाना और इस प्रकार
क वता पूरी हो जाती है। आप भी कसी एक सं ा शब्द के साथ व भन्न क्रया शब्द का प्रयोग करते हुए अपनी
क वता बनाकर कक्षा म सुनाइए। उदाहरण के लए— बादल को / घरते दे खा है, / गरजते दे खा है, / बरसते
दे खा है, ____________ ।
कैसे बनाएँ — तीन क़दम:
1. एक सं ा चु नए जसे आपने सचमुच दे खा हो — नद , च ड़या, बीज, हवा, द या, रेल, बस्ता।
2. उसक 4–6 क्रयाएँ ल खए, और उन्ह उसी क्रम म र खए जस क्रम म वे होती ह (जैसे बादल — घरना, गरजना, बरसना,
छँ टना)। यही क्रम क वता को ग त दे ता है।
3. अं तम पं क्त म मोड़ लाइए — कोई ऐसी क्रया जो पाठक को सोचने पर मजबूर कर दे । क वता वह याद रह जाती है।
पुस्तक का उदाहरण पूरा क जए:
बादल को
िघरते दे खा है,
गरजते दे खा है,
बरसते दे खा है,
और बरसकर खाली हो जाने पर भी मुसकराते दे खा है।
नमूना क वता 1 — सं ा: बीज
बीज को
िम ी में दबते दे खा है,
अँधेरे में फूलते दे खा है,
चुपचाप जड़ े ं भे जते दे खा है,
पत्थर हटाकर उगते दे खा है,
और पेड़ बनकर उसी िम ी को थामते दे खा है।
नमूना क वता 2 — सं ा: नद
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद AglaSem · NCERT Solutions
नदी को
पहाड़ से िफसलते दे खा है,
पत्थरों से लड़ ते दे खा है,
खेत ों में फैलते दे खा है,
गाँव को पालते दे खा है,
और अपना नाम छोड़ कर समुद में िमलते दे खा है।
ध्यान र खए: तुक मलाना ज़रूरी नह है — यह क वता भी मुक्त छं द म है। ज़रूरी यह है क हर पं क्त एक क्रया
पर टके और सब क्रयाएँ मलकर एक ही चत्र पूरा कर।
क वता का शीषक — पृष्ठ 40
पाठ से
पाठ से
प्र.16 इस क वता का शीषक ‘एक आशीवाद’ है जो क वता म कह भी प्रयुक्त नह हुआ है। य द इस क वता क ही
कसी पं क्त या शब्द को क वता का शीषक बनाना हो तो आप कौन-सी पं क्त या शब्द चुनगे और क्य ?
मेरा चुनाव — “तेरे स्वप्न बड़े ह ”।
कारण: यही पं क्त क वता के आरंभ और अंत — दोन जगह आती है, इस लए यह पूरी क वता का सार है। इसम क वता के तीन
अंश आ जाते ह — ‘तेरे’ से संबोधन, ‘स्वप्न’ से वषय और ‘बड़े ह ’ से आशीवाद का भाव। शीषक का काम यही है क वह क वता
को एक साथ पकड़ ले।
अन्य संभा वत शीषक और उनके तक:
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद AglaSem · NCERT Solutions
संभा वत पक्ष म तक कमज़ोरी
शीषक
तेरे स्वप्न बड़ े हों पूरी किवता का कें द ीय वाक्य; आरंभ और अंत दोनों में कोई वशेष कमी नह — यही सबसे उपयुक्त है।
आता है।
जा क वता का पहला शब्द; वदाई और आशीवाद दोन अकेला यह शब्द वषय नह बताता — पढ़ने से पहले पता ही
का क्षण एक शब्द म आ जाता है। नह चलेगा क क वता कस बारे म है।
अपने पाँवों पर क वता का अं तम लक्ष्य — आत्म नभरता — यही है। यह अंत क बात है, आरंभ क नह ; सपने वाला मुख्य भाव
छू ट जाता है।
उँ ग ली जलाएँ च काने वाला शीषक; प रश्रम और जो खम क ओर पाठक को भ्रम हो सकता है क क वता कसी दुघटना या
सीधा संकेत। आग के बारे म है।
स्वप्न क वता क एकमात्र सं ा यही है। बहुत सामान्य है — इससे यह पता नह चलता क क वता
आशीवाद है।
क व ने ‘एक आशीवाद’ ही क्य रखा: क्य क यह शीषक क वता का वषय नह , उसका स्वर बताता है। पहली
पं क्त पढ़ने से पहले ही पाठक जान जाता है क आगे जो कुछ है वह उपदे श नह , शुभकामना है — और तब “जा”
शब्द कठोर नह , स्नेह भरा सुनाई दे ता है।
भाषा क बात — पृष्ठ 40
पाठ से
पाठ से
प्र.17 (क) नीचे दए गए रक्त ान म ‘स्वप्न’ से जुड़े शब्द अपने समूह म चचा करके ल खए— (पुस्तक म ‘स्वप्न’
को कद्र म रखकर एक शब्द-जाल दया गया है, जसम ऊपर क पं क्त म 4, बीच क पं क्त म 3 और नीचे क
पं क्त म 2 — कुल 9 रक्त खाने ह।)
‘स्वप्न’ से जुड़े शब्द तीन तरह के हो सकते ह — पयायवाची (वही अथ), भाव से जुड़े शब्द (सपने के साथ आने वाले भाव) और
क्रया-रूप (सपने के साथ चलने वाली क्रयाएँ)। नौ खाने भरने के लए इसी क्रम से च लए।
वग शब्द (शब्द-जाल म भरने के लए)
पयायवाची (ऊपर क पं क्त — 4 खाने) सपना · ़ वाब · क ल्पना · अिभलाषा
भाव से जुड़े शब्द (बीच क पं क्त — 3 खाने) आकांक्षा · ल क्ष्य · उ म्मीद (आशा)
क्रया / वशेषण रूप (नीचे क पं क्त — 2 खाने) स्वप्नदश · स्विप्नल
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद
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और भी शब्द जो आप चुन सकते ह: अरमान, मंसूबा, संकल्प, इ
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ा, चाह, ललक, दवास्वप्न, स्वप्नलोक, सपनीला, स्वप्नभंग,
सपने दे खना, सपना सँजोना, सपना साकार होना, सपना टू टना।
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वग करण क्य उपयोगी है: शब्द-जाल म ऊपर से नीचे क ओर शाखाएँ जाती ह। य द आप एक ही तरह के नौ
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aसेglभरने पर जाल सचमुच एक ‘शब्द-प रवार’ जैसा दखता है।
शब्द भर दगे तो जाल बनेगा ही नह । पहले पयायवाची, फर उनसे जुड़े भाव, फर उन भाव से बने शब्द — इस क्रम
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m वह ‘स्वप्न’ का वलोम है, पयाय नह । इसी बात क जाँच
ध्यान र खए: ‘यथाथ’ को इस जाल म मत जो ड़एe—
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अगले प्रश्न म भी होती है।
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.cघेरा बनाइए जो समान अथ न दे ते ह — पृथ्वी: धरा, वसुधा, अव न, सुताa|gचाँद: मधुकर, श श, नशाकर,
प्र.18 (ख) क वता म से चुनकर कुछ शब्द नीचे दए गए ह और उनके सामने कुछ अन्य शब्द भी दए गए ह। उन शब्द
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se मयंक | तारे: नक्षत्र, सोम, तारक, उडु गण | रोशनी: प्रकाश, ला लमा, उजाला, आलोक | स्वप्न: सपना, इच्छा,
पर
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agl यथाथ, कल्पना | द या: द न, ज्यो त, द पक, प्रद प
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जन शब्द पर घेरा बनाना है, वे नीचे नारंगी रंग म ह। (पुस्तक म पहली पं क्त का उत्तर सुता उदाहरण के रूप म पहले से घेरा हुआ
है।) a
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शब्द अन्य शब्द घेरा कारण
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बनाइए
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a s e थ्वी धरा · वसुध ा · सुता धरा, वसुधा और अव न — तीन पृथ्वी के पयायवाची ह। सुता का अथ है पुत्री / बेट ।
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अविन · सुता
चाँद मधुक र श श, नशाकर और मयंक — तीन चंद्रमा के नाम ह ( नशाकर = रात का करने वाला)।
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ु र · शिश ·
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िनशाकर · मयंक मधुकर का अथ है भ रा, जो मधु इक ा करता है।
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as नक्षत्र, तारक और उडु गण — तीन तार के लए ह (उडु गण = तार का समूह)। सोम
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तारे नक्षत्र · सोम · सोम
तारक · उडुग ण चंद्रमा का नाम है, तारे का नह ।
लािलमा
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प्रकाश, उजाला और आलोक — तीन रोशनी के पयायवाची ह। ला लमा का अथ है लाल
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रोशनी पकाश · लािलमा ·
रंग क आभा — यह रंग बताता है, रोशनी नह ।
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उजाला · आलोक
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स्वप्न यथाथ सपना और कल्पना स्वप्न के नकट ह। यथाथ का अथ है वास्त वकता — यह स्वप्न का
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यथाथ · कल्पना ठ क उलटा है। (‘इ ा’ भी पूरा पयायवाची नह है, इस लए कुछ वद्याथ उस पर भी घेरा
a बना सकते ह; पर सबसे स्पष्ट उत्तर यथाथ ही है।)
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om । ध्यान द जए — ‘द न’ और ‘द प’ केवल सुनने म मलते-जुलते ह, अथ म नह ।agla
द या दीन · ज्योित · दीन ज्यो त, द पक और प्रद प — तीन द ये या उसक लौ से जुड़े ह। द न का अथ है ग़रीब,
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दीपक · पदीप
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद AglaSem · NCERT Solutions
यह अभ्यास क्य : पयायवाची शब्द रटने क चीज़ नह , पहचानने क चीज़ ह। यहाँ हर पं क्त म एक शब्द जान-
बूझकर ऐसा रखा गया है जो सुनने म मेल खाता है पर अथ म नह — सुता/वसुधा, सोम/उडु गण, द न/द प। इससे
यह आदत बनती है क शब्द को ध्व न से नह , अथ से जाँचा जाए।
याद रखने क तरक ब: चंद्रमा के नाम प्राय: रात से बनते ह — नशाकर ( नशा = रात), श श, मयंक, सोम।
इस लए ‘सोम’ तार क पं क्त म दे खते ही खटक जाना चा हए।
आना-जाना — पृष्ठ 40
पाठ से
गतवध
प्र.19 ‘आना’ और ‘जाना’ दो महत्वपूण क्रयाएँ ह। कक्षा म दो समूह बनाइए। एक समूह का नाम ‘आना’ और दूसरे
समूह का नाम ‘जाना’ होगा। अब अपने-अपने समूह म इन दोन क्रयाओं का प्रयोग करते हुए साथक वाक्य
बनाइए और उन्ह चाट पेपर पर चपकाकर अपनी कक्षा म लगाइए।
यह कक्षा म करने क ग त व ध है। दोन समूह वाक्य बनाकर चाट पेपर पर लगाएँ। नीचे दोन समूह के लए नमूना वाक्य दए गए ह
— इनम क्रया के सामान्य प्रयोग और मुहावरेदार प्रयोग दोन रखे गए ह, क्य क ‘आना’ और ‘जाना’ हद म अनेक अथ म
चलते ह।
समूह ‘आना’ समूह ‘जाना’
दादी कल गाँव से आ रही है।
ं हम रिववार को नानी के घर जाएँग े।
मुझे तैर ना अच्छी तरह आता है। िबजली चली गई, इसिलए पंखा बंद हो गया।
परीक्षा का पिरणाम कल आ जाएगा। यह दाग़ धोने पर भी नही ं गया।
उसकी बात सुनकर मुझे हँस ी आ गई। मेर ा सारा िदन तैयारी में चला गया।
इस बार गेहू ँ की अच्छी फ़ सल आई है। किव कहता है — “जा, तेरे स्वप्न बड़े हों। ”
धीरे -धीरे उसे िहंद ी िलखनी आने लगी। ु दू र तक गया।
वह अपने सपने के पीछे बहत
ध्यान दे ने क बात: हद म ‘आना’ का अथ हमेशा ‘पास आना’ नह होता — “तैरना आता है” म इसका अथ है
ान होना, और “हँसी आ गई” म अपने आप हो जाना। इसी तरह ‘जाना’ का अथ केवल ‘दूर जाना’ नह —
“ बजली चली गई” म इसका अथ है समाप्त हो जाना। इसी लए इन्ह सहायक क्रया भी कहा जाता है।
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद AglaSem · NCERT Solutions
चाट कैसे बनाएँ: चाट को दो भाग म बाँ टए — ‘सीधा अथ’ और ‘दूसरे अथ’। हर वाक्य म क्रया को अलग रंग से
ल खए, ता क पूरी कक्षा एक नज़र म दे ख सके क एक ही क्रया कतने अथ दे रही है।
डायरी (हँस-मुसकराएँ-गाएँ) — पृष्ठ 41
पाठ से
गतवध
प्र.20 हँस-मुसकराएँ-गाएँ — अपने कसी एक दन क समस्त ग त व धय पर ध्यान द जए और अपनी डायरी म
ल खए क आप दनभर म कब-कब हँसे, कब-कब मुसकराए, कब-कब गाए, कब-कब रूठे , कब-कब मचले?
यह डायरी लखने क ग त व ध है। डायरी म तारीख़, समय और स ी घटना — तीन होने चा हए। सबसे अ डायरी वह है
जसम केवल यह न लखा हो क ‘क्या हुआ’, ब ल्क यह भी हो क ‘तब मुझे कैसा लगा’।
नमूना उत्तर (डायरी का एक पृष्ठ):
िदनाकं : 12 जुलाई, मंगलवार
हँसा — दोपहर में, जब मेरे िमत्र आिमर ने अपनी छतरी उलटी पकड़ ली और उसमें पानी भर गया। हम दोनों
बहुत दे र तक हँसते रहे।
मुसकराया — सुबह जब माँ ने बस्ते में मेरी पसंद का आम रख िदया था और कुछ कहा नही ं। मुझे बाद में िमला
तो अपने आप मुसकराहट आ गई।
गाया — शाम को छत पर, बािरश रुकने के बाद। कोई सुन नही ं रहा था, इसिलए मैनं े पूरी आवाज़ में गाया।
रूठा — जब बड़ े भाई ने मेरी साइिकल िबना पूछे ले ली। मैनं े आधे घंटे तक बात नही ं की।
मचला — रात के खाने पर, जब मैनं े िज़द की िक मुझे भी िव ान मेले के िलए िदल्ली जाना है। िपताजी ने कहा
— पहले चयन तो हो जाए!
आज का िवचार: िगनकर दे खा तो मै ं हँसा िसफ़ एक बार, पर मुसकराया चार बार। लगता है िदन बड़ ी-बड़ ी बातों
से नही ं, छोटी-छोटी बातों से अच्छा बनता है।
अपनी डायरी लखते समय ध्यान र खए:
घटना का समय ल खए (सुबह, मध्यावकाश, शाम) — इससे डायरी स ी लगती है।
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद AglaSem · NCERT Solutions
‘रूठना’ और ‘मचलना’ को छपाइए मत। डायरी अपने लए लखी जाती है, इस लए उसम अपनी कमज़ोरी लखने म संकोच
नह होना चा हए।
अंत म एक पं क्त अपने बारे म ल खए — यही डायरी को केवल सूची से अलग बनाती है।
क वता से संबंध: क वता कहती है — सपने “हँस / मुसकराएँ / गाएँ”। यह ग त व ध उसी को जीवन म उतारती
है। जब आप अपने दन को गनकर दे खते ह, तो पता चलता है क आनंद कोई बड़ी घटना नह — रोज़ के छोटे -छोटे
क्षण म बखरा रहता है।
आपक बात — पृष्ठ 41
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.21 (क) क वता के माध्यम से बड़े लक्ष्य नधा रत करने और उन्ह पूरा करने का आशीवाद दया गया है। दन-
प्र त दन के जीवन म आपको अपने माता- पता, अध्यापक एवं प रजन से कस तरह के आशीवाद मलते ह?
अपनी लेखन पु स्तका म ल खए।
यह आपके अपने अनुभव पर आधा रत प्रश्न है। अ ा उत्तर वही है जसम आशीवाद कसने, कस अवसर पर और कन शब्द म
दया — तीन बात ह ।
नमूना उत्तर:
कससे कब आशीवाद के शब्द उसका भाव
माँ रोज़ सुबह स्कूल जाते “ध्यान से जाना, मन लगाकर यह छोटा-सा वाक्य दन भर याद रहता है और कक्षा म
समय पढ़ ना।” ध्यान भटकते ही टोक दे ता है।
पताजी परीक्षा वाले दन “डरना मत, िजतना आता है उतना इससे प रणाम का बोझ हट जाता है और केवल प्रयास
अच्छा िलख दे ना।” पर ध्यान रह जाता है।
दाद त्योहार पर, सर पर “ख़ूब पढ़ ो, ख़ूब आगे बढ़ ो।” यह सबसे पुराना और सबसे सरल आशीवाद है — इसम
हाथ रखकर कोई शत नह होती।
अध्या पका प्रश्न ग़लत हो जाने पर “कोई बात नही ं, िफर से करो — यह असफलता को अंत नह , एक पड़ाव बना दे ता है।
तुम से हो जाएगा।” मेरे लए यह सबसे बड़ा आशीवाद है।
बड़े भाई वद्यालय क “जीत-हार छोड़, मज़े से खेल ।” घबराहट कम हो जाती है — और तब खेल सचमुच
प्र तयो गता से पहले अ ा होता है।
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद AglaSem · NCERT Solutions
ध्यान द जए: इनम से कसी भी आशीवाद म धन या वस्तु नह माँगी गई। सब आशीवाद गुण के ह — ध्यान,
नभयता, प रश्रम, फर से प्रयास करने का साहस। दुष्यंत कुमार का आशीवाद भी ठ क इसी तरह का है — “तेरे
स्वप्न बड़े ह ”, न क ‘तुझे बहुत कुछ मले’।
प्र.22 (ख) आप भी अपने से छोट के प्र त कसी न कसी प्रकार से शुभेच्छा प्रकट करते ह, उन्ह ल खए।
शुभे ा केवल शब्द से नह , व्यवहार से भी प्रकट होती है। उत्तर म दोन तरह के उदाहरण द जए।
नमूना उत्तर — शब्द से:
छोट बहन परीक्षा दे ने जाती है तो कहता ँ — “आराम से लखना, तुम्ह सब आता है।”
पड़ोस का ब ा पहली बार साइ कल चलाता है तो कहता ँ — “ गरना ज़रूरी है, गरकर ही आएगी।”
छोटे भाई के जन्म दन पर — “तुम्हारी हर पहेली का जवाब तुम्ह ख़ुद मले।”
अपने से छोट कक्षा के वद्याथ से — “जो समझ न आए, बे झझक पूछ लेना — पूछना कमज़ोरी नह है।”
नमूना उत्तर — व्यवहार से:
छोट बहन का ग णत का प्रश्न हल करवा दे ना, पर उत्तर बताकर नह — तरीक़ा समझाकर।
अपनी पुरानी पुस्तक छोट कक्षा के मत्र को दे दे ना।
छोटे भाई क चत्रकला क तारीफ़ करना और उसे द वार पर लगा दे ना।
खेल म छोटे ब को भी ट म म लेना और हारने पर उन्ह न डाँटना।
एक ज़रूरी बात: छोट को द गई सबसे बड़ी शुभे ा यह है क उनक बात ध्यान से सुनी जाए। जस ब े क बात
सुनी जाती है, वही आगे चलकर बड़े सपने दे खने का साहस करता है।
सपन क बात — पृष्ठ 41
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.23 (क) आप क्या करना चाहते ह और क्या पाना चाहते ह? उन्ह एक परची पर लख। परची पर अपना नाम लखना
आवश्यक नह है। अपने अध्यापक ारा लाए गए डब्बे म अपनी-अपनी परची को डाल द। अध्यापक एक-एक
करके इन पर चय पर लखे सपन को पढ़कर सुनाएँ। सभी व ाथ अपने-अपने सुझाव द क उन सपन को
पूरा करने के लए— • कस तरह के प्रयत्न करने ह गे? • कस तरह से योजना बनानी होगी? • कससे और कस
प्रकार का सहयोग लया जा सकता है? • लक्ष्य-प्रा प्त म संभा वत चुनौ तयाँ कौन-कौन सी हो सकती ह?
यह पूरी कक्षा क ग त व ध है। परची पर नाम न लखने का कारण यह है क तब हर वद्याथ बना संकोच अपना स ा सपना लख
पाता है, और कक्षा सपने पर बात करती है — व्य क्त पर नह ।
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद
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नमूना — एक परची और उस पर कक्षा के सुझाव
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परची पर लखा सपना: “म पशु- च कत्सक बनना चाहता/चाहती ँ, क्य क हमारे गाँव म बीमार पशुओं को दखाने 30 कलोमीटर
दूर जाना पड़ता है।” m a
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कक्षा के सुझाव
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कस तरह के प्रयत्न व ान, वशेषकर जीव व ान, म मज़बूत पकड़ बनानी होगी। कक्षा 10 के बाद व ान वग लेना होगा। गाँव के
करने ह गे?
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पशुओं का ध्यान से अवलोकन करना और पशुपालक से बातचीत करना अभी से शुरू कया जा सकता है।
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ag(4) पशु- च कत्सा महा वद्यालय। हर चरण के लए समय-सीमा और एक छोटा-सा
कस तरह से योजना लक्ष्य को चरण म बाँ टए — (1) कक्षा 8–10: व ान और ग णत मज़बूत; (2) कक्षा 11–12: जीव व ान; (3)
बनानी होगी? प्रवेश परीक्षा क तैयारी;
साप्ता हक लक्ष्य तय क जए।
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कससे और कस व ान के अध्यापक से मागदशन; नकटतम पशु- च कत्सालय के डॉक्टर से मलकर उनका काम दे खना;
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प्रकार का सहयोग? पुस्तकालय और इंटरनेट से जानकारी; प रवार से समय और पढ़ाई का सहयोग; छात्रवृ त्त क जानकारी वद्यालय
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से।
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aglसंभा वत चुनौ तयाँ गाँव म व ान वग वाले वद्यालय क दूरी; पढ़ाई का ख़च; प्रवेश परीक्षा क कड़ी प्र तस्पधा; बीच म मन का
डगमगाना। इनका उत्तर — छात्रवृ त्त क खोज, समय-सारणी का अनुशासन, और कसी ऐसे व्य क्त से जुड़े रहना
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जो इसी रास्ते से गुज़र चुका हो।
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यह ग त व ध क्य : क वता कहती है gकl सपने “भावना क गोद से उतरकर जल्द पृथ्वी पर चलना सीख”। परची म
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लखा सपना भावना है; प्रयत्न, योजना, सहयोग और चुनौती — ये चार प्रश्न ही उसे पृथ्वी पर चलाना सखाते ह।
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इसी लए पुस्तक ने ठ क यही चार प्रश्न चुने ह।
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सुझ.c o m l a
gमत का टए। कक्षा का काम रास्ता
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seसुझाना है, सपना छोटा करना नह ।
ाव दे ते समय: कसी के सपने को ‘बहुत बड़ा है’ या ‘नह हो पाएगा’ कहकर
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हमारे सपने — पृष्ठ 42
पाठ से आगे
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आपके माता- पता या अ भभावक आपक आवश्यकताओं और इच्छाओंaको
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seजानते-समझते ह। वे उन्ह पूरा
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ag से उनके ारा दे खे गए सपने और
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प्र.24
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इच्छाओं के बारे म पू छए क वे क्या-क्या करना चाहते थे या चाहते ह? नीचे द गई ता लका म उन सपन को
ल खए। आप इस ता लका को और बढ़ा सकते ह। (ता लका — ‘घर के सदस्य के सपने’: माता, पता, दादा,
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दाद , नाना, नानी, बहन, भाई)
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यह घर जाकर पूछकर भरने वाली ता लका है। पहले घर के सदस्य से बात क जए — तभी उत्तर स ा बनेगा। नीचे यह दखाने के
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लए एक भरी हुई ता लका द गई है क उत्तर कस तरह का होना चा हए।
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद AglaSem · NCERT Solutions
पूछने के लए तीन प्रश्न: (1) बचपन म आप क्या बनना चाहते थे? (2) वह सपना पूरा हुआ या नह — और क्य ? (3) अब
आपका कोई सपना है?
नमूना उत्तर — घर के सदस्य के सपने
सदस्य सपने और इच्छाएँ
माता वे अध्यािपका बनना चाहती थी ं। बारहवी ं के बाद पढ़ ाई छू ट गई। अब उनका सपना है िक मैं और मेर ी बहन दोनों उच्च िशक्षा तक
पहुच
ँ ें। वे िसलाई सीखकर घर पर छोटा काम शुरू करना चाहती है।
ं
पता वे से ना में जाना चाहते थे, पर दो बार चयन नही ं हुआ । अब वे खेत में िडप िसंचाई लगवाना चाहते है ं तािक पानी बचे और फ़ सल अच्छी
हो।
दादा वे गाँव में एक पुस्तकालय खुल वाना चाहते है,ं क्योंिक उनके समय में पढ़ ने के िलए िकताबे ं ही नही ं िमलती थी ं।
दाद वे लोकगीत बहुत अच्छे गाती है।
ं उनका सपना है िक गाँव की लड़िकयाँ ये गीत सीखें तािक वे खो न जाएँ।
नाना वे चाहते थे िक आम की एक नई िक़ स्म तैयार करे ं। आज भी वे बाग़ में तरह-तरह की कलम लगाते रहते है।
ं
नानी वे िलखना-पढ़ ना सीखना चाहती है।
ं अब वे पौढ़ िशक्षा कक्षा में जाकर अपना नाम िलखना सीख चुक ी है।
ं
बहन वह िज़ले की कब ी टीम में खेल ना चाहती है और रोज़ सुबह अभ्यास करती है।
भाई वह मोबाइल के छोटे-छोटे ऐप बनाना सीखना चाहता है और कहता है िक एक िदन गाँव के िलए मंडी-भाव बताने वाला ऐप बनाएगा।
इस ग त व ध का असली लाभ: बात करने पर पता चलता है क बड़ के भी सपने थे — और कई सपने
पर तय के कारण अधूरे रह गए। इससे दो बात समझ आती ह: एक, क सपना हर उम्र म रहता है; दूसरी, क
हमारे बड़े जस अवसर से चूक गए, वही अवसर हम दलाने के लए वे प रश्रम कर रहे ह।
सबके सपने — पृष्ठ 42
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.25 प्र त दन क आवश्यकताओं को पूरा करने म बहुत-से लोग सहयोग दे ते ह, जैसे— शाक वक्रेता, स्वच्छताकम ,
र ाचालक, सुरक्षाकम आ द। इनम से कसी एक से साक्षात्कार क जए और उनके सपन के वषय म
जा नए। साक्षात्कार के समय कौन-कौन से प्रश्न हो सकते ह? उनक एक सूची भी बनाइए।
साक्षात्कार से पहले तीन बात: (1) पहले अनुम त ली जए और अपना प रचय द जए; (2) उनके काम के समय म बाधा न
डा लए; (3) प्रश्न सरल और सम्मानजनक र खए — कसी क आय या मजबूरी सीधे मत पू छए।
साक्षात्कार के प्रश्न क सूची
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद AglaSem · NCERT Solutions
वग प्रश्न
प रचय आपका नाम क्या है? आप यह काम कब से कर रहे है?ं आप मूल रूप से कहाँ के है?ं
काम के बारे म आपका िदन िकतने बजे शुरू होता है? इस काम में आपको सबसे अच्छा क्या लगता है? सबसे किठन क्या लगता है?
सपन के बारे म बचपन में आप क्या बनना चाहते थे? वह सपना पूर ा हुआ या रह गया? आज आपका सबसे बड़ा सपना क्या है? अपने बच्चों के
िलए आप क्या सपना दे खते है?ं
सहयोग और अपने सपने को पूर ा करने में आपको िकससे सहायता िमली? कौन-सी किठनाई सबसे बड़ी रही?
चुनौती
हमारे लए हम िव ािथयों को आप क्या सलाह दे ना चाहेगं े? आपके काम को आसान बनाने के िलए हम क्या कर सकते है?ं
नमूना उत्तर (साक्षात्कार का सार): मने अपने मोहल्ले क सब्ज़ी वक्रेता शां त दे वी से बात क । वे रोज़ सुबह चार बजे मंडी जाती
ह और शाम सात बजे तक ठे ला लगाती ह। उन्ह ने बताया क वे बचपन म पढ़ना चाहती थ , पर तीसरी कक्षा के बाद वद्यालय छू ट
गया। उनका सपना है क उनक बेट नस बने — “म दन भर धूप म खड़ी रह लूँगी, पर वह कुस पर बैठकर काम करे।” सबसे बड़ी
क ठनाई उन्ह ने बताई — बरसात के दन म सब्ज़ी ख़राब हो जाना और उस दन क कमाई डू ब जाना। उनक सलाह थी — “पढ़ाई
एक दन भी मत छोड़ना, छू ट हुई पढ़ाई फर पकड़ म नह आती।”
इससे क्या समझ आता है: सपने केवल सु वधासंपन्न लोग के नह होते। जनका जीवन क ठन है, उनके सपने
अक्सर अपने लए नह , अगली पीढ़ के लए होते ह। क वता का “जा, तेरे स्वप्न बड़े ह ” सचमुच यही वाक्य है, जो
हर माता- पता अपने ब े से कहते ह।
झरोखे से — पृष्ठ 42 और 43
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.26 आपने पढ़ा क ‘एक आशीवाद’ क वता म सपन के बड़े होने क बात क गई है। अब आप प ढ़ए सुप्र सद्ध
वै ा नक और भारत के पूव राष्ट्रप त डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का एक प्रेरक उद् बोधन जसम वे न केवल
सपने दे खने क बात करते ह, ब ल्क सपन को पूरा करने क योजना और प्र क्रया के वषय म भी बताते ह—
(‘सपन क उड़ान’)
‘झरोखे से’ म दया गया यह गद्यांश डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उद् बोधन है, जसका शीषक है “सपन क उड़ान”। इसे
पढ़कर समझने योग्य बात ये ह —
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद AglaSem · NCERT Solutions
उद् बोधन क बात उसका अथ
“सपने वह नही ं होते जो आप नी ंद में दे खते है,ं सपने वह स ा सपना बेचैन कर दे ता है। जो सपना आराम से सोने दे , वह सपना नह , केवल
होते है ं जो आपको सोने नही ं दे ते। ” कल्पना है। यही बात क वता भी कहती है — सपना ‘भावना क गोद’ से उतरे।
“अपने सपने पूरे करने के िलए आपको जागते रहना होता जागना यहाँ केवल न सोना नह — सचेत रहना है। अवसर, जानकारी और अपनी
है, पूर ी तरह आँखें खोलकर जागते रहना होता है। ” क मय — तीन पर नज़र रखनी पड़ती है।
“आज िजतनी संभावनाएँ है,ं उतनी अब तक के समूचे इक्क सव सद म प्रौद्यो गक और नई खोज ने वे अवसर खोल दए ह जो पछली
इितहास में पहले कभी नही ं थी ं।” बीस शता ब्दय म असंभव माने जाते थे।
अवसर बढ़ रहे है,ं पर समय उतना ही है — यही आज के अवसर क संख्या बढ़ने से ही समस्या पैदा हुई है — दु नया का दायरा बढ़ता जा
युवा की दुिवधा है। रहा है, इस लए व्य क्त को अपने को कुछ खास वषय के संकरे दायरे म सी मत
करना पड़ रहा है। डॉ. कलाम को यह सही नह लगता।
इसे संभव बनाने के दो तरीक़े — (1) उपलब्ध समय को यही उद् बोधन का सबसे व्यावहा रक हस्सा है। दूसरा तरीक़ा हमारे हाथ म है —
बढ़ ाना, (2) उतने ही समय में िजतना काम िकया जा कुशलता, अभ्यास और अ योजना से एक ही घंटे म अ धक काम हो सकता है।
सकता है, उसकी मात्रा बढ़ ा दे ना।
“यही वह लंबी छलांग है िजसका मानवता को अब तक य द मनुष्य समय का उपयोग करना सीख ले तो यह वकास-क्रम का अगला चरण
इंतज़ार था।” होगा — बाक़ हर चीज़ तक पहुँचने के दरवाज़े अपने आप खुल जाएँगे।
क वता और इस उद् बोधन का संबंध: दुष्यंत कुमार सपने का आशीवाद दे ते ह; डॉ. कलाम उसी सपने क
प्र क्रया बताते ह। क वता कहती है “ललचाएँ / उँ गली जलाएँ”; कलाम बताते ह क ललक को समय-प्रबंधन और
योजना म कैसे बदला जाए। दोन मलकर एक ही बात पूरी करते ह — बड़ा सपना दे खो, और उसे ज़मीन पर चलना
सखाओ।
साझी समझ — पृष्ठ 44
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.27 आपने ‘एक आशीवाद’ क वता पढ़ और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उपयुक्त उद् बोधन भी पढ़ा। अब आप
इन दोन पर कक्षा म अपने सा थय के साथ चचा क जए।
चचा का आधार: दोन रचनाएँ एक ही वषय — सपने — पर ह, पर उनका रूप, स्वर और उ े श्य अलग-अलग है। तुलना करके
दे खए, तभी चचा म गहराई आएगी।
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद AglaSem · NCERT Solutions
आधार एक आशीवाद (दुष्यंत कुमार) सपन क उड़ान (डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम)
वधा क वता — मुक्त छं द, चत्रात्मक भाषा गद्य — प्रेरक उद् बोधन, तकपूण भाषा
स्वर स्नेह भरा आशीवाद — “जा, तेरे स्वप्न बड़े ह ” चुनौती भरा आ ान — “सपने वह होते ह जो आपको सोने नह
दे ते”
सपने क वह जो भावना क गोद से उतरकर पृथ्वी पर वह जो न द उड़ा दे और जागते रहने को ववश कर दे
प रभाषा चलना सीखे
क ठनाई पर दृ ष्ट “उँ गली जलाएँ” — चोट सहकर भी हाथ समय क कमी और वषय का संकरा दायरा — इन्ह योजना से
बढ़ाओ जीतो
समाधान हठ, ललक, प्रसन्नता और आत्म नभरता दो ठोस तरीक़े — उपलब्ध समय बढ़ाना, या उसी समय म काम
क मात्रा बढ़ाना
अंत वह लौटता है जहाँ से चला — आशीवाद आगे क ओर खुलता है — “लंबी छलांग” और “ वकास क्रम का
दोहराकर अगला चरण”
चचा के लए प्रश्न:
दोन म से कौन-सी बात आपको अ धक क ठन लगती है — बड़ा सपना दे खना, या उसके लए रोज़ काम करना? क्य ?
क वता कहती है क सपने “हँस/मुसकराएँ/गाएँ”, जब क कलाम कहते ह क सपना सोने नह दे ता। क्या ये दोन बात एक-
दूसरे के वरुद्ध ह, या एक-दूसरे को पूरा करती ह?
“समय उतना ही है” — इस समस्या का हल आप अपने दन म कैसे नकालगे?
नष्कष: दोन रचनाएँ वरोधी नह , पूरक ह। क वता प्रेरणा दे ती है और उद् बोधन व ध। केवल प्रेरणा हो तो सपना
गोद म ही रह जाता है, और केवल व ध हो तो चलने क इ ा ही नह जागती। बड़ा सपना + ठोस योजना — यही
दोन पाठ क साझी समझ है।
खोजबीन के लए — पृष्ठ 44
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद
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पाठ से आगे
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खोजबीन
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a s em व ान, राजनी त, खेलकूद, मनोरंजन आ द क्षेत्र म ख्या त प्राप्त करने वाले व्य क्तय ने अपने-अपने
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प्र.28
सपन को पूरा करने क संघष यात्रा के बारे म लखा है। उन्ह ने अपने सपन को साकार करने के लए कस तरह
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से योजना बनाई, क्या-क्या संघष कए? पुस्तकालय अथवा इंटरनेट क सहायता से ऐसे व्य क्तय के बारे म
प ढ़ए।
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यह पुस्तकालय और इंटरनेट से खोजने क ग त व ध है। खोजते समय केवल उपल ब्ध मत दे खए — यह दे खए क उस व्य क्त ने
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योजना कैसे बनाई और संघष क्या-क्या कया। पढ़ हुई बात को अपनी शब्द म एक पृष्ठ म ल खए और ोत का नाम अवश्य
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oु छmनाम और उनक आत्मकथाएँ / जीव नयाँ:
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पढ़ने के लएcक
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aglक्षेत्र व्य क्त क्या पढ़
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व ान डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल अि न की उड़ान (Wings of Fire) — अख़बार बेचने वाले बालक से ले क र रा पित तक की
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कलाम यात्रा।
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खेल मल्खा सह
a gद रेlस ऑफ़ माई लाइफ़ — िवभाजन की त्रासदी से िनकलकर ‘उड़न िसख’ बनने तक का संघष।
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खेल मैरी कॉम अनबेकेबल — मिणपुर के एक छोटे गाँव से िवश्व चैिं पयन तक; पिरवार के िवरोध और आिथक
किठनाई का सामना।
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खेल प्लेइंग इट माई वे — बचपन के कठोर अभ्यास और चोटों के बीच िनरंतरता।
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बछद्र पाल एवरे स्ट पर पहच
ु ँ ने वाली पहली भारतीय मिहला — पवतारोहण चुनने पर पिरवार और समाज का
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िवरोध।
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संगीत उस्ताद ब स्मल्लाह ख़ाँ काशी के घाटों पर वष ं का िरयाज़ और शहनाई को शास्त्रीय मंच तक पहच
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s वुमन’ — अि न-V पिरयोजना की िनदे शक; िव ान में मिहलाओं के िलए रास्ता बनाना।
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व ान टे सी थॉमस
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पढ़ते समय ये चार बात नोट क जए:
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1. सपना कब और कैसे जन्मा — कोई एक घटना जसने दशा तय क ।
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3.. संघष — पैसा, प रवार, स्वास्थ्य, असफलता — कौन-सी बाधा सबसे बड़ी थी।a
2. योजना — उन्ह ने कन चरण म काम कया, रोज़ का अभ्यास कैसा था।
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4. मोड़ — वह क्षण जब हार मानने का मन हुआ, और वे रुके क्य नह ।
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प्रस्तु त का सुझाव: कक्षा म एक ‘सपन क द वार’ बनाइए। हर वद्याथ अपने पढ़े हुए व्य क्त का चत्र, उनका एक
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वाक्य और उनक संघष-यात्रा क चार पं क्तयाँ लगाए। पूरी कक्षा एक साथ दे खेगी तो एक बात साफ़ दखेगी —
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सफलता क कहा नयाँ अलग-अलग ह, पर संघष का ढाँचा लगभग एक जैसा है।
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद AglaSem · NCERT Solutions
अध्याय — एक नज़र म
एक आशीवाद दुष्यंत कुमार क एक छोट क वता है। पूरी क वता एक ही वाक्य क तरह बहती है और उसी पं क्त पर
लौटकर समाप्त होती है जससे शुरू हुई थी — “जा, / तेरे स्वप्न बड़े ह ।” यही आवृ त्त क वता को आशीवाद का रूप दे ती है।
क व का प रचय पुस्तक म इस प्रकार है — दुष्यंत कुमार (1933–1975) हद के लोक प्रय रचनाकार म से एक ह। इनका
जन्म बजनौर (उत्तर प्रदे श) म हुआ था। साये म धूप इनका सवा धक च चत ग़ज़ल संग्रह है और संपूण रचना-संसार दुष्यंत
कुमार रचनावली चार खंड म प्रका शत है।
क वता का कद्र य वचार यह है क सपना केवल दे खने क चीज़ नह , करने क चीज़ है। इसी लए क व कहता है क सपने
“भावना क गोद से उतरकर जल्द पृथ्वी पर चलना सीख” — यानी भावुकता से उतरकर वास्त वकता म काम करना सीख।
क व साधारण सपन का नह , असंभव-से दखने वाले लक्ष्य का आशीवाद दे ता है — “चाँद-तार -सी अप्राप्य स ाइय के
लए / रूठना-मचलना सीख।” ब े क तरह ज़द करना ही यहाँ लगन और हठ का प्रतीक है।
“हर द ये क रोशनी दे खकर ललचाएँ / उँ गली जलाएँ” — हर नए ान और अवसर के प्र त ललक हो, और उसे पाने म जो
कष्ट आए उससे घबराहट न हो। अंत म “अपने पाँव पर खड़े ह ” — यानी आत्म नभरता।
भाषा- शल्प क दृ ष्ट से पूरी क वता म सं ा एक ही है — ‘स्वप्न’, और उसके चार ओर क्रयाओं का जाल बुना गया है —
चलना, रूठना, मचलना, सीखना, हँसना, मुसकराना, गाना, ललचाना, जलाना, खड़ा होना। इसी से सपना जी वत प्राणी-सा
लगने लगता है (मानवीकरण)।
क वता के बाद पुस्तक म झरोखे से शीषक के नीचे डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उद् बोधन “सपन क उड़ान” दया गया है,
जसक प्र सद्ध पं क्त है — “सपने वह नह होते जो आप न द म दे खते ह, सपने वह होते ह जो आपको सोने नह दे ते।”
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कक्षा 8 हद अध्याय 3 एक आशीवाद AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द / प्रयोग अथ क वता या पाठ क अपने वाक्य म प्रयोग
पं क्त
स्वप्न सपना; यहाँ — मन में ठाना गया बड़ा लक्ष्य “तेरे स्वप्न बड़े ह ” हर वद्याथ को अपना स्वप्न स्वयं
चुनना चा हए।
भावना क गोद भावुक ता का सहारा, जहाँ सपना के वल महसूस “भावना क गोद से भावना क गोद म बैठे-बैठे कोई
िकया जाता है, िकया नही ं जाता उतरकर” काम पूरा नह होता।
अप्राप्य जो आसानी से पाप्त न हो सके , दुल भ “चाँद-तार -सी अप्राप्य प रश्रम कसी भी अप्राप्य लक्ष्य को
स ाइय के लए” पास ले आता है।
रूठना-मचलना बच्चे की तरह िज़द करना और अड़ जाना; यहाँ — “रूठना-मचलना सीख” छोटा भाई खलौने के लए रूठ-
लक्ष्य के िलए हठ करना मचल रहा था।
ललचाना पाने की तीव इच्छा होना, मन िखंच जाना “हर द ये क रोशनी दे खकर पुस्तकालय क नई कताब दे खकर
ललचाएँ” मन ललचा गया।
उँ गली जलाना जोिखम उठाना, चोट सहकर भी आगे बढ़ ना “उँ गली जलाएँ” नई चीज़ सीखने म उँ गली जलाने से
(लाक्षिणक पयोग) डरना नह चा हए।
अपने पाँव पर आत्मिनभर होना, िकसी के सहारे न रहना “अपने पाँव पर खड़े ह ।” पढ़ाई पूरी करके वह अपने पाँव पर
खड़ा होना (मुहावरा) खड़ी हो गई।
आशीवाद बड़ों की शुभकामना, मंग लकामना क वता का शीषक — ‘एक दाद का आशीवाद लेकर वह परीक्षा
आशीवाद’ दे ने गया।
मुक्त छं द िबना िनिश्चत मात्रा-गणना और तुक -बंध न वाली पूरी क वता क रचना-शैली ‘एक आशीवाद’ मुक्त छं द म लखी
किवता गई क वता है।
मानवीकरण िनज व या भाववाचक वस्तु को मनुष्य की तरह “…हँस / मुसकराएँ / गाएँ” बादल का गरजना क वता म
िदखाना मानवीकरण है।
उपमा दो वस्तुओ ं की समानता िदखाना, िजसमें ‘सा/सी/ “चाँद-तार -सी अप्राप्य ‘चाँद-सा मुखड़ा’ म उपमा है।
जैस ा’ आता है स ाइयाँ”
उद् बोधन संबोधन करते हुए िदया गया पेर क भाषण ‘झरोखे से’ म डॉ. कलाम का प्राचाय के उद् बोधन से पूरी कक्षा
उद् बोधन उत्सा हत हो गई।
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