Page 1
F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा8
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 5: कबीर के दोहे
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
63 – 75 16 55 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 38 pages
Page 2
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 8 · हद · मल्हार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 5: कबीर के दोहे
पाठ 5 म संत कबीर के आठ दोहे संक लत ह। दो-दो पं क्तय क इन छोट रचनाओं म कबीर सत्य, गुरु, संतु लत वाणी, आलोचना, ववेक और संग त
जैसे बड़े वषय को खजूर के पेड़, सूप, साबुन और पंछ जैसे रोज़ के चत्र के सहारे कह जाते ह — इसी लए ये दोहे कहावत क तरह लोग क ज़बान
पर चढ़ गए।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
मल्हार (कक्षा 8) 63 – 75
खं ड प्रश्न
16 55
माध्यम
हन्द
मेरी समझ से — पृष्ठ 64-66
पाठ से
पाठ से
प्र.1 ★
(क) नम्न ल खत प्रश्न के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा ( ) बनाइए। कुछ प्रश्न के एक से अ धक उत्तर भी हो
सकते ह। (1) “गुरु गो वद दोऊ खड़े काके लाग पाँय। ब लहारी गुरु आपने गो वद दयो बताय॥” इस दोहे म
कसके वषय म बताया गया है? • श्रम का महत्व • गुरु का महत्व • ान का महत्व • भ क्त का महत्व
★ गुरु का महत्व — यही मुख्य उत्तर है। ★ ान का महत्व भी लया जा सकता है, क्य क गुरु का बड़प्पन उनके दए ज्ञान से ही
बनता है।
“गुरु गोिवंद दोऊ खड़ े, काके लागौं पाँय।
बिलहारी गुरु आपने , गोिवंद िदयो बताय॥”
भाव — शष्य के सामने एक ही समय गुरु और गो वद (ईश्वर) दोन खड़े ह। वह उलझन म है — पहले कसके चरण छु ए? वह गुरु
को चुनता है और कहता है, ‘म अपने गुरु पर न्योछावर ँ, क्य क गो वद का पता तो उन्ह ने ही बताया।’
यु क्त कैसे काम करती है: कबीर यहाँ कोई उपदे श नह दे ते। वे एक दृश्य खड़ा कर दे ते ह — दो लोग, एक क्षण,
एक नणय। उत्तर उसी दृश्य के भीतर छपा है, इस लए वह याद रह जाता है। ‘ब लहारी’ (ब ल जाना, न्योछावर
होना) शब्द बताता है क यह तक नह , कृतज्ञता है।
Page 1 of 38
Page 3
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
‘श्रम का महत्व’ और ‘भ क्त का महत्व’ ठ क नह ह। दोहे म प रश्रम क चचा है ही नह , और भ क्त यहाँ वषय नह — वषय यह
है क भ क्त तक पहुँचाने वाला कौन है।
प्र.2 (2) “अ त का भला न बोलना अ त का भला न चूप। अ त का भला न बरसना अ त क भली न धूप॥” इस दोहे
का मूल संदेश क्या है? • हमेशा चुप रहने म ही हमारी भलाई है • बा रश और धूप से बचना चा हए • हर प र त
म संतुलन होना आवश्यक है • हमेशा मधुर वाणी बोलनी चा हए
★ हर प र त म संतुलन होना आवश्यक है।
“अित का भला न बोलना, अित का भला न चूप।
अित का भला न बरसना, अित की भली न धूप॥”
भाव — कसी भी बात क हद पार कर जाना नुकसान करता है। बहुत बोलना भी ठ क नह , बलकुल चुप रह जाना भी ठ क नह ।
दृ ांत कैसे काम करता है: दोहे के चार भाग ‘अ त’ से शुरू होते ह। पहली पं क्त म मनुष्य के व्यवहार क दो
अ तयाँ ह — बोलना और चुप्पी। दूसरी पं क्त म प्रकृ त क दो अ तयाँ ह — वषा और धूप। कसान जानता है क
लगातार बरसात म फ़सल गल जाती है और लगातार धूप म सूख जाती है; दोन अ तय का नतीजा एक ही है —
नुकसान। कबीर इसी जानी-पहचानी बात को उठाकर व्यवहार पर रख दे ते ह। यही दृ ांत अलंकार है — उदाहरण
दे कर बात समझाना।
ध्यान द जए: ‘हमेशा मधुर वाणी बोलनी चा हए’ दूसरे दोहे (‘ऐसी बानी बो लए’) का संदेश है, इसका नह । और
‘बा रश और धूप से बचना चा हए’ दोहे को अक्षरशः पढ़ लेना है — वषा और धूप यहाँ उदाहरण ह, वषय नह ।
प्र.3 (3) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नह फल लागै अ त दूर॥” यह दोहा कस जीवन
कौशल को वक सत करने पर बल दे ता है? • समय का सदुपयोग करना • दूसर के काम आना • प रश्रम और
लगन से काम करना • सभी के प्र त उदार रहना
★ दूसर के काम आना — यह मुख्य उत्तर है। ★ सभी के प्र त उदार रहना भी सही है; पाठ क मलान-ता लका म इसी दोहे का
अथ दया गया है — ‘बड़ा होने के साथ व्य क्त को उदार भी होना चा हए।’
“बड़ ा हुआ तो क्या हुआ , जै से पेड़ खजूर।
पंथ ी को छाया नही ं, फल लागै अित दू र॥”
भाव — केवल ऊँचा या संपन्न हो जाना कोई बड़ी बात नह , य द उस बड़प्पन से कसी दूसरे को कुछ न मले।
Page 2 of 38
Page 4
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
उपमा कैसे काम करती है: ‘जैसे’ वाचक शब्द से व्य क्त क तुलना खजूर के पेड़ से क गई है। अब दे खए क
तुलना कतनी सट क है — खजूर सबसे ऊँचे पेड़ म है, पर उसके पत्ते इतने पतले और ऊपर होते ह क नीचे छाया
नह बनती, और उसके फल इतनी ऊँचाई पर लगते ह क थका हुआ राही उन तक पहुँच नह सकता। यानी पेड़ के
पास दे ने को दोन चीज़ ह — छाया और फल — पर दोन कसी के काम नह आत । ऊँचाई है, उपयो गता नह ।
जसके पास पद और धन है पर जससे कसी को लाभ नह , वह ऐसा ही खजूर है।
तुलना क जए: बरगद या नीम खजूर से नीचे होते ह, पर राही उन्ह के नीचे बैठता है। कबीर बड़ाई को ऊँचाई से
नह , काम आने से नापते ह।
प्र.4 (4) “ऐसी बानी बो लए मन का आपा खोय। औरन को सीतल करै आपहुँ सीतल होय॥” इस दोहे के अनुसार
मधुर वाणी बोलने का सबसे बड़ा लाभ क्या है? • लोग हमारी प्रशंसा और सम्मान करने लगते ह • दूसर और स्वयं
को मान सक शां त मलती है • कसी से ववाद होने पर उसम जीत हा सल होती है • सुनने वाल का मन इधर-
उधर भटकने लगता है
★ दूसर और स्वयं को मान सक शां त मलती है।
“ऐसी बानी बोिलए, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय॥”
भाव — ऐसी वाणी बो लए जसम से अपना अहंकार नकल चुका हो। वह वाणी सुनने वाले को भी ठं डक दे ती है और बोलने वाले
को भी।
चत्र कैसे काम करता है: कबीर ने मीठे बोल के लए ‘सीतल’ (शीतलता) शब्द चुना — जैसे गरमी म कोई पानी
छड़क दे । और छड़कने वाले के अपने हाथ भी भीगते ह; इसी लए ‘औरन को सीतल करै’ के तुरंत बाद ‘आपहुँ
सीतल होय’ आता है। शत एक ही है — ‘मन का आपा खोय’। आपा यानी अहंकार, ‘म’ का भाव। जब तक बात म
‘म’ बैठा है, शब्द चाहे नरम ह , चुभगे।
‘लोग प्रशंसा करने लगते ह’ और ‘ ववाद म जीत मलती है’ — ये दोन बाहरी लाभ ह, और अहंकार को बढ़ाते ह। कबीर इसका
ठ क उलटा कह रहे ह: लाभ भीतर का है, बाहर का नह ।
Page 3 of 38
Page 5
ase
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
m साधना से कम
(5) “साँच बराबर तप नह झूठ बराबर पाप। जाके हरदे साँच है ता हरदे गुरु आप॥” इस दोहे से क्या नष्कष
नकाला जा सकता है? • सत्य और झूठ म कोई अंतर नह होता है • सत्य का पालन करना e
प्र.5
m a s
o प र तयाँ ही जीवन म सफलता तय करती ह • सत्य महत्वपूण जीवन gl मूल्य है जससे हृदय
कसी
नह है •.cबाहरी
emशत होता है a
a s
gl
प्रका
a
omनह है और ★ सत्य महत्वपूण जीवन मूल्य है जससे
★ सत्य का पालन करना कसी साधना से.cकम ag
sem
दो उत्तर सही ह —
a
agl
हृदय प्रका शत होता है।
m
“साँच बराबर तप नही ं, झूठ बराबर पाप।
co
em.
as
जाके िहरदे साँच है, ता िहरदे गुरु आप॥”
m l
m .co a g
l a se
भाव — सत्य के बराबर कोई तप नह और झूठ के बराबर कोई पाप नह । जसके हृदय म सत्य है, उसी हृदय म स्वयं गुरु वराजते
a gह।
om a s
. c agl
तुलना कैसे काम करती है: ‘बराबर’ शब्द दो बार आया है और दोन बार वह एक कसौट खड़ी करता है। तप क
सारी क ठन साधनाएँ एक तराज़ू म रख द जए m
s e
द जए — झूठ उनके बराबर बैठ जाताgहैl।aकबीर कह रहे ह क सच बोलना कोई साधारण अ ाई नह , वह अपने
— सत्य उनके बराबर बैठ जाता है। सभी पाप एक तराज़ू म रख
a
आप म तपस्या है, क्य क उसम नुकसान उठाना पड़ता है।
co m
दूसरी पं क्त और आगे जाती है: स ा हृदय ही वह जगह है जहाँ गुरु बसते ह — यानी जसके भीतर स ाई है, उसे
m .
as e
मागदशन बाहर ढूँ ढ़ने नह जाना पड़ता।
m l
m .co a g
a se
‘सत्य और झूठ म कोई अंतर नह होता’ दोहे का उलटा अथ है — ‘बराबर’ का अथ यहाँ ‘समान’ नह , ‘उतना बड़ा’ है।
ag l
se m
com g l a
. a
(6) “ नदक नयरे रा खए आँगन कुट छवाय। बन पानी साबुन बना नमल करै सुभाय॥” यहाँ जीवन म कस
m
प्र.6
ase
दृ कोण को अपनाने क सलाह द गई है? • आलोचना से बचना चा हए • आलोचक को दूर रखना चा हए •
agl
आलोचक को पास रखना चा हए • आलोचक क नदा करनी चा हए
co m
.
★ आलोचक को पास रखना चा हए। em
m l as
.co
m “िनंदक िनयरे रािखए, आँगन कुटी छवाय। a g
l a se
ag
.c
m
िबन पानी साबुन िबना, िनमल करै सुभ ाय॥”
s e
. c om a g la
s e mमत क जए — उसे अपने आँगन म झ पड़ी छवाकर बसा ली जए, क्य क वह बना
a कर देता है।
भाव — जो आपक क मयाँ बताता है, उसे दूर
agl
पानी और साबुन के आपका स्वभाव साफ़
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 4 of 38
Page 6
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
रूपक कैसे काम करता है: कबीर स्वभाव के दोष को मैल मान लेते ह। मैल धोने के लए दो चीज़ चा हए — पानी
और साबुन। नदक इन दोन के बना वही काम कर दे ता है, केवल गलती बता दे ने भर से। इस लए वह मुफ़्त का
धोबी है — और मुफ़्त क सेवा को कोई दूर क्य भेजे?
‘आँगन कुट छवाय’ पूरे चत्र को ठोस बना दे ता है। कबीर यह नह कहते क नदक क बात सुन ली जए; वे कहते ह
उसे रहने क जगह द जए — यानी आलोचना को कभी-कभार बरदाश्त करना नह , उसे अपने जीवन का ायी
हस्सा बनाना है।
आज के लए: जो शक्षक आपक उत्तर-पु स्तका म सबसे ज़्यादा लाल नशान लगाते ह, अक्सर वही आपको सबसे
अ धक सुधारते ह।
प्र.7 (7) “साधू ऐसा चा हए जैसा सूप सुभाय। सार-सार को ग ह रहै थोथा दे इ उड़ाय॥” इस दोहे म ‘सूप’ कसका
प्रतीक है? • मन क कल्पनाओं का • सुख-सु वधाओं का • ववेक और सूझबूझ का • कठोर और क्रोधी स्वभाव
का
★ ववेक और सूझबूझ का।
“साधू ऐसा चािहए, जै सा सूप सुभ ाय।
सार सार को गिह रहै, थोथा दे इ उड़ ाय॥”
भाव — अ े व्य क्त का स्वभाव सूप जैसा होना चा हए — जो साथक है उसे रख ले और जो नस्सार है उसे उड़ा दे ।
उपमा कैसे काम करती है: सूप बाँस या स क का बना वह चौड़ा पात्र है जससे कसान अनाज फटकता है। फटकने
पर भारी और भरा दाना (सार) सूप म ही रह जाता है और हल्का, खोखला भूसा (थोथा) हवा म उड़ जाता है। ध्यान
द जए — सूप कुछ फकता नह , वह केवल हलता है; अलग होने का काम दाने और भूसे का अपना भारीपन कर
दे ता है। ववेक भी ऐसा ही है: वह लड़ता नह , बस पहचान लेता है क कसम वज़न है और कसम नह ।
‘जैसा’ वाचक शब्द के कारण यह उपमा है; और चूँ क सूप पूरे दोहे म ववेक के ान पर खड़ा है, वह ववेक का
प्रतीक भी बन जाता है।
आज के लए: इंटरनेट पर हर दन जतनी सूचना आती है, उसम ‘सार’ थोड़ा और ‘थोथा’ बहुत होता है। सूप वाला
स्वभाव ही उसे छानता है।
Page 5 of 38
Page 7
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
प्र.8 (ख) हो सकता है क आपके समूह के सा थय ने अलग-अलग उत्तर चुने ह । अपने मत्र के साथ चचा क जए
क आपने ये उत्तर ही क्य चुने?
यह चचा का प्रश्न है। चचा म हर साथी को केवल अपना उत्तर नह , उत्तर का आधार बताना चा हए — दोहे क कौन-सी पं क्त या
कौन-सा शब्द उसे वहाँ ले गया।
अ चचा म ये तीन बात आनी चा हए —
पं क्त से प्रमाण: ‘मने ‘संतुलन’ इस लए चुना क्य क दोहे के चार भाग ‘अ त’ से शुरू होते ह।’
दूसरे वकल्प को नकारने का कारण: ‘मने ‘बा रश और धूप से बचना’ नह चुना, क्य क वषा और धूप यहाँ उदाहरण ह,
वषय नह ।’
एक से अ धक उत्तर क गुंजाइश: कुछ प्रश्न म दो उत्तर सही हो सकते ह (जैसे प्रश्न 3 और 5) — तब यह दे खए क दोन म
कौन-सा दोहे के अ धक नकट है।
नमूना उत्तर: “हमारे समूह म तीन सा थय ने प्रश्न 3 का उत्तर ‘दूसर के काम आना’ चुना और दो ने ‘सभी के प्र त
उदार रहना’। चचा म हमने पाया क दोन एक ही बात के दो रूप ह — उदारता भाव है और दूसर के काम आना
उसका व्यवहार। कसी ने ‘प रश्रम और लगन’ नह चुना, क्य क दोहे म प रश्रम क चचा ही नह है।”
मलकर कर मलान — पृष्ठ 66-67
Page 6 of 38
Page 8
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
पाठ से
प्र.1 (क) पाठ से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे स्तंभ 1 म द गई ह। अपने समूह म इन पर चचा क जए और इन्ह स्तंभ 2
म दए गए इनके सही अथ या संदभ से मलाइए। इसके लए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शक्षक क
सहायता ले सकते ह।
स्तंभ 1 (पं क्त) स्तंभ 2 (सही अथ) क्य
1. ग रु
ु गोिवंद दोऊ खड़े, काके 3. ग रु
ु िशष्य का मागदशन करते है ं और िशष्य शष्य पहले गुरु के चरण छू ता है, क्य क गो वद तक
लागौं पाँय। गरु
ु का आदर करते है।
ं का रास्ता गुरु ने बताया।
2. अित का भला न बोलना, अित ु न महत्वपूण है।
5. जीवन में संतल दोन अ तयाँ — बहुत बोलना और बलकुल चुप रहना
का भला न चूप। — समान रूप से हा नकारक ह।
3. ऐसी बानी बोिलए, मन का 6. हमें मध रु वाणी बोलनी चािहए िजससे मन को ‘सीतल’ शब्द ही शां त क ओर संकेत करता है —
आपा खोय। शांित पाप्त हो सके । दूसर क भी, अपनी भी।
4. िनंद क िनयरे रािखए, आँग न 8. आलोचकों को अपने पास रखना चािहए। वे ‘ नयरे’ का अथ ही नकट है; ‘कुट छवाय’ उसे ायी
कु टी छवाय। हमें हमारी गलितयाँ बताते है।
ं रूप से पास बसाना है।
5. साधू ऐसा चािहए, जैस ा सूप 7. िववेक शील व्यिक्त को अच्छे और बुरे की सूप सार रखता है और थोथा उड़ाता है — यही
सुभाय। पहचान होती है। पहचानने क श क्त ववेक है।
6. किबरा मन पंछी भया, भावै 4. मन को िनयंित्र त करना और सही िदशा में ले पंछ क तरह मन जहाँ चाहे उड़ जाता है, इसी लए
तहवाँ जाय। जाना महत्वपूण है। उसे दशा दे नी पड़ती है।
7. साँच बराबर तप नही ं, झूठ 1. स त्य का पालन किठन है और झूठ पाप के सत्य को ‘तप’ कहना ही बताता है क उसका पालन
बराबर पाप। समान है। आसान नह ।
8. बड़ा हुआ तो क्या हुआ , जैसे 2. बड़ा होने के साथ व्यिक्त को उदार भी होना खजूर ऊँचा है पर छाया और फल कसी को नह दे ता
पेड़ खजूर । चािहए। — ऊँचाई बना उदारता व्यथ है।
तरीका: मलान म पहले वह पं क्त उठाइए जसका कोई एक शब्द ही अथ खोल दे ता है — जैसे ‘ नयरे’ ( नकट) या
‘अ त’। ऐसी दो-तीन जो ड़याँ बन जाने पर बाक अपने आप छँ ट जाती ह।
प्र.2 (ख) नीचे स्तंभ 1 म द गई दोह क पं क्तय को स्तंभ 2 म द गई उपयुक्त पं क्तय से जो ड़ए—
हर दोहे क दूसरी पं क्त पहली पं क्त का कारण या प रणाम बताती है — इसी सूत्र से जोड़ी बनती है।
Page 7 of 38
Page 9
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
स्तंभ 1 (पहली पं क्त) स्तंभ 2 (दूसरी पं क्त)
1. ग रु
ु गोिवंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय। 8. बिलहारी ग रु
ु आपने, गोिवंद िदयो बताय॥
2. अित का भला न बोलना, अित का भला न चूप। 6. अित का भला न बरसना, अित की भली न धूप॥
3. ऐसी बानी बोिलए, मन का आपा खोय। 2. औरन को सीतल करै , आपहु ँ सीतल होय॥
4. िनंद क िनयरे रािखए, आँग न कु टी छवाय। 1. िबन पानी साबुन िबना, िनम ल करै सुभाय॥
5. साधू ऐसा चािहए, जैस ा सूप सुभाय। 4. सार सार को गिह रहै, थोथा दे इ उड़ाय॥
6. किबरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। 7. जो जैस ी संग ित करै , सो तैस ा फल पाय॥
7. बड़ा हुआ तो क्या हुआ , जैसे पेड़ खजूर । 5. पंथी को छाया नही,ं फल लागै अित दू र ॥
8. साँच बराबर तप नही ं, झूठ बराबर पाप। 3. जाके िहरदे साँच है, ता िहरदे ग रु
ु आप॥
जोड़ने क दो कुं जयाँ: (1) तुक — दोहे क दोन पं क्तय का अंत एक-सी ध्व न पर होता है: पाँय–बताय, चूप–
धूप, खोय–होय, छवाय–सुभाय, सुभाय–उड़ाय, जाय–पाय, खजूर–दूर, पाप–आप। (2) अथ क लड़ी — पहली
पं क्त सवाल या दावा रखती है, दूसरी उसका उत्तर दे ती है। ‘काके लाग पाँय?’ पूछने के बाद ‘ब लहारी गुरु आपने’
ही आ सकता है।
पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 67
पाठ से
पाठ से
प्र.1 (क) “क बरा मन पंछ भया भावै तहवाँ जाय। जो जैसी संग त करै सो तैसा फल पाय”
अथ — कबीर कहते ह क मन तो पंछ बन गया है; जहाँ उसका जी चाहता है, वह उड़ जाता है। और जो जैसी संग त करता है, उसे
वैसा ही फल मलता है।
रूपक कैसे काम करता है: यहाँ ‘मन पंछ के समान है’ नह कहा गया — कहा गया है ‘मन पंछ भया’, यानी मन
पंछ ही बन गया। जब उपमेय (मन) और उपमान (पंछ ) म भेद ही मटा दया जाए, तो वह रूपक होता है।
पंछ का चत्र दो बात एक साथ कह दे ता है। पहली — पंछ को कोई द वार नह रोकती; उसे बाँधा नह जा सकता,
केवल दशा द जा सकती है। मन भी ऐसा ही बेरोक है। दूसरी — पंछ जस पेड़ पर बैठता है, उसी पेड़ का फल
खाता है। इसी लए अगली पं क्त म ‘फल’ शब्द आता है। ‘संग त का फल’ कोई अलग मुहावरा नह , वह उसी पंछ -
पेड़ के चत्र का स्वाभा वक अगला कदम है। यही कबीर क कारीगरी है — दोन पं क्तयाँ एक ही चत्र के भीतर
रहती ह।
Page 8 of 38
Page 10
as e
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co
जीवन से जोड़कर — मन को रोकना क ठन है, इस लए कबीर उसे रोकने को नह कहते। वे कहते ह क पेड़ चुन ली जए — यानी
m
em.
संग त चुन ली जए। संग त ही तय कर दे गी क मन कहाँ बैठेगा और कौन-सा फल खाएगा। पढ़ाई म मन न लगने क शकायत करने
m l as
.co g
वाला व ाथ अक्सर यह नह दे खता क वह कन सा थय के बीच बैठता है।
m a
l a se
a g
ध्यान द जए: इस दोहे क दूसरी पं क्त इतनी लोक प्रय हुई क वह कहावत बन गई — ‘जैसा संग वैसा रंग’।
. com ag
m े हरदे साँच है ता हरदे गुरु आप॥”
(ख) “साँच बराबर तप नह झूठ बराबर पाप।eजाक
s
a
agl
प्र.2
m
co
e m.
अथ — सत्य के बराबर कोई तपस्या नह है और झूठ के बराबर कोई पाप नह । जसके हृदय म सत्य बसा है, उसी के हृदय म गुरु
m l as
.co
स्वयं वराजमान ह।
a g
a s em कैसे काम करती है: पहली पं क्त म दो तराज़ू ह और दोन म ‘बराबर’ शब्द तौल का काम करता है। एक
gl
बनावट
a ओर सारे तप रख द जए — सत्य उनके बराबर उतरता है। दूसरी ओर सारे पाप रख द जए — झूठ उनके बराबर
m a s
agl
उतरता है। दोन वाक्य आमने-सामने रखे गए ह, इस लए सत्य क ऊँचाई और झूठ क गरावट दोन एक साथ
दखती ह।
m .co
l a se
g
सत्य को तप कहना बहुत सोचकर चुना गया है। तप का अथ है कष्ट सहकर क गई साधना। सच बोलने म भी
a
नुकसान उठाना पड़ता है — डाँट, हार, अकेलापन। इसी लए वह मामूली अ ाई नह , तपस्या है।
. c om
दूसरी पं क्त म कबीर कदम और आगे बढ़ाते ह। मं दर, तीथ या बाहरी आडंबर क जगह वे हृदय को गुरु का नवास बना दे ते ह।
m a
यानी जो भीतर से स ा है, उसे सही रास्ता बताने वाला कोई बाहर से नह चा हए — उसक स ाई
s emही उसका गुरु है। पहली पं क्त
सत्य का cमूo
. a gl
em
ल्य बताती है, दूसरी उसका पुरस्कार।
a s
agl भाषा: ‘साँच’ (सत्य), ‘ हरदे ’ (हृदय), ‘जाके’ ( जसके), ‘ता’ (उसी) — ये ब्रज रूप ह। इनसे पं क्त छोट और
लयदार बनी रहती है।
se m
com g l a
m . a
gl ase
a
सोच- वचार के लए — पृष्ठ 67-68
पाठ से
co m
m .
पाठ से
m as e
.co a g l
a s emप्र.1
gl
(क) “गुरु गो वद दोऊ खड़े काके लाग पाँय।” इस दोहे म गुरु को गो वद (ईश्वर) से भी ऊपर ान दया गया है।
a c
.
क्या आप इससे सहमत ह? अपने वचार ल खए।
s e m
m a
e m . co agl
g l as
हाँ, म सहमत ँ — पर एक स्प ीकरण के साथ। कबीर गुरु को ईश्वर से बड़ा नह कह रहे; वे गुरु को पहला कह रहे ह। क्रम क
बात है, आकार क नह । a
com
m .
m as e
.co
a g l Page 9 of 38
Page 11
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
तक सीधा है। शष्य ईश्वर को पहचानता ही तब है जब गुरु उसे बताते ह — ‘गो वद दयो बताय’। जो हाथ आपको कसी तक
पहुँचाता है, कृतज्ञता म पहला नमन उसी को जाता है। ठ क वैसे ही जैसे कसी अनजान शहर म रास्ता बताने वाले को हम पहले
धन्यवाद कहते ह, फर मं ज़ल पर पहुँचते ह।
दूसरा पक्ष भी दे खए: कोई कह सकता है क ईश्वर से ऊपर कसी को रखना उ चत नह । पर ध्यान द जए, दोहे म
गुरु ‘व्य क्त’ के रूप म ऊपर नह ह — गुरु का काम ऊपर है, यानी ज्ञान दे ना। इसी लए यह दोहा कसी व्य क्त क
पूजा नह सखाता, ज्ञान का आदर सखाता है। यह अंतर समझ लेने पर दोन बात एक साथ सही रह जाती ह।
आज के संदभ म — गुरु केवल व ालय के शक्षक नह । जसने भी आपको कुछ सखाया — माता- पता, बड़ा भाई-बहन, कोई
कारीगर, कोई पुस्तक — वह उस बात का गुरु है। कबीर का दोहा उन सबके प्र त आभार सखाता है।
प्र.2 (ख) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।” इस दोहे म कहा गया है क सफ बड़ा या संपन्न होना ही पयाप्त
नह है। बड़े या संपन्न होने के साथ-साथ मनुष्य म और कौन-कौन सी वशेषताएँ होनी चा हए? अपने वचार
साझा क जए।
बड़प्पन तभी साथक है जब उसके साथ ये गुण ह —
उपयो गता — जैसे बरगद क छाया। पद, धन या ज्ञान से कसी दूसरे का काम बनना चा हए, वरना वह खजूर क ऊँचाई भर
है।
सुलभता — खजूर का दोष केवल ऊँचाई नह , पहुँच से बाहर होना है। बड़ा आदमी वही है जस तक छोटा आदमी बना डरे
पहुँच सके।
उदारता — दे ने म संकोच न हो। पाठ क मलान-ता लका भी इसी दोहे का अथ ‘बड़ा होने के साथ व्य क्त को उदार भी होना
चा हए’ बताती है।
वनम्रता — ‘मन का आपा खोय’ वाली बात यहाँ भी लागू है। अहंकार सबसे पहले पहुँच को खत्म करता है।
संवेदनशीलता — यह पहचानना क सामने वाले को इस समय कसक ज़रूरत है — छाया क या फल क ।
क्य : दोहे म ‘पंथी’ शब्द बहुत अथपूण है। पंथी यानी चलता हुआ राही — थका, प्यासा, आगे जाने वाला। पेड़ क
क मत उसके अपने कद से नह , उस थके राही के काम आने से तय होती है। यही कसौट कबीर मनुष्य पर लगाते ह।
प्र.3 (ग) “ऐसी बानी बो लए मन का आपा खोय।” क्या आप मानते ह क शब्द का प्रभाव केवल दूसर पर ही नह
स्वयं पर भी पड़ता है? आपके बोले गए शब्द ने आपके या कसी अन्य के स्वभाव या मनोदशा को कैसे प रव तत
कया? उदाहरण स हत बताइए।
हाँ, शब्द बोलने वाले को भी बदलते ह — और दोहा यही कहता है: ‘औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।’
ऐसा क्य होता है — कठोर शब्द बोलने के लए भीतर पहले गुस्सा तैयार करना पड़ता है, और बोलने के बाद वह गुस्सा तुरंत नह
उतरता; उसके साथ पछतावा भी जुड़ जाता है। इसके उलट नरम शब्द बोलने के लए भीतर का ‘आपा’ (अहंकार) एक क्षण के लए
रखना पड़ता है — और वह क्षण मन को शांत कर दे ता है। इसी लए कबीर ने पहले शत रखी ‘मन का आपा खोय’, फर प रणाम
Page 10 of 38
Page 12
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
बताया।
नमूना उत्तर: “खेल के मैदान म मेरे मत्र से कैच छू ट गया और हम मैच हार गए। मने गुस्से म कह दया — ‘तुम्हारे
कारण हारे।’ वह चुपचाप चला गया। उस पूरी शाम मेरा भी मन खराब रहा; मुझे खेल का मज़ा भी नह आया। अगले
दन मने कहा — ‘कैच तो कसी से भी छू ट सकता है, तुम्हारी बल्लेबाज़ी के कारण ही हम इतनी दूर पहुँचे थे।’
उसका चेहरा खल गया और मेरे मन का बोझ भी उतर गया। तब समझ आया क पहले दन मने जो कहा था, उसक
चोट मुझे भी लगी थी।”
लखते समय ध्यान र खए: उत्तर म एक ठोस घटना, उसम बोला गया वास्त वक वाक्य, सामने वाले पर उसका असर और अपने
ऊपर उसका असर — चार बात आनी चा हए।
प्र.4 (ङ) “जो जैसी संग त करै सो तैसा फल पाय॥” हमारे वचार और काय पर संग त का क्या प्रभाव पड़ता है?
उदाहरण स हत बताइए।
संग त हम सीधे नह बदलती — वह पहले हमारी आदत बदलती है, आदत वचार बदलती ह और वचार कम बदल दे ते ह।
संगित → रोज़ का साथ और बातचीत
→ छोटी-छोटी आदते ं (कब उठना, क्या पढ़ ना, िकस पर हँसना)
→ सोचने का ढं ग
→ फल — परीक्षा का पिरणाम, स्वभाव, पितष्ठा
प्रभाव कन- कन रूप म —
भाषा पर: जन सा थय के बीच रहते ह, उन्ह के शब्द और मुहावरे अनजाने म हमारी ज़बान पर आ जाते ह।
रु च पर: पढ़ने वाले समूह म बैठने पर पुस्तक अपने आप हाथ म आ जाती है; केवल मोबाइल दे खने वाले समूह म बैठने पर
मोबाइल।
साहस पर: अ संग त गलत काम पर टोक दे ती है; बुरी संग त उसी गलत काम को साधारण बना दे ती है — और यही सबसे
बड़ा खतरा है।
नमूना उत्तर: “हमारी कक्षा का एक व ाथ ग णत से घबराता था। छमाही के बाद वह दो ऐसे सा थय के साथ बैठने
लगा जो रोज़ आधा घंटा अभ्यास करते थे। तीन महीने म उसने वही आधा घंटा अपना लया और उसके अंक 40 से
बढ़कर 72 हो गए। कसी ने उसे पढ़ाया नह था — बस उसका पेड़ बदल गया था।”
पुस्तक का ध्यान द जए: इस शीषक के नीचे पुस्तक म (क), (ख), (ग) के बाद सीधे (ङ) छपा है — (घ) मु द्रत
नह है। इस लए इस भाग म कुल चार प्रश्न ही ह।
Page 11 of 38
Page 13
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
दोहे क रचना — पृष्ठ 68
पाठ से
पाठ से गतवध
प्र.1 (क) दोह क उन पं क्तय को चुनकर ल खए जनम— (1) एक ही अक्षर से प्रारंभ होने वाले (जैसे— राजा,
रस्सी, रात) दो या दो से अ धक शब्द एक साथ आए ह।
पाठ म ऐसी कई पं क्तयाँ ह —
“गुरु गो वद दोऊ खड़े, काके लाग पाँय।”
“ब लहारी गुरु आपने, गो वद दयो बताय॥”
“ न◌ंदक नयरे रा खए, आँगन कुट छवाय।”
“ बन पानी साबुन बना, नमल करै सुभाय॥”
“साधू ऐसा चा हए, जैसा सूप सुभाय।”
“सार सार को ग ह रहै, थोथा दे इ उड़ाय॥”
“जो जैसी संग त करै, सो तैसा फल पाय॥”
यह क्या है: एक ही वण क बार-बार आवृ त्त को अनुप्रास अलंकार कहते ह। इसका काम केवल सजावट नह है
— दोहराई गई ध्व न पं क्त को गाने लायक बना दे ती है। कबीर के दोहे लखकर नह , गा-गाकर फैले थे; ‘ नदक
नयरे’ या ‘सार सार’ जैसी ध्व नयाँ ही उन्ह कान म टकाए रखती ह।
प्र.2 (2) एक शब्द एक साथ दो बार आया है। (जैसे— बार-बार)
“सार सार को ग ह रहै, थोथा दे इ उड़ाय॥”
यह क्य दोहराया गया: ‘सार सार’ का अथ केवल ‘सार’ नह , ‘जो-जो सार है, वह सब’ है। शब्द को दो बार रखने
से मात्रा बढ़ जाती है — यानी ववेक व्य क्त एक-दो अ बात नह छाँटता, हर अ बात छाँट लेता है। इस
दोहराव को पुनरु क्त कहते ह।
नकट का उदाहरण: ‘अ त का भला न बोलना, अ त का भला न चूप।’ म ‘अ त का भला न’ पूरा वाक्यांश दोहराया
गया है, पर वह लगातार नह आया — इस लए वह इस को ट म नह आएगा।
Page 12 of 38
Page 14
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 (3) लगभग एक जैसे शब्द, जनम केवल एक मात्रा भर का अंतर है (जैसे— जल, जाल) एक ही पं क्त म आए ह।
“ बन पानी साबुन बना, नमल करै सुभाय॥” — बन / बना (केवल ‘आ’ क मात्रा का अंतर)
“अ त का भला न बरसना, अ त क भली न धूप॥” — का / क और भला / भली
इससे क्या बनता है: दो लगभग एक-से शब्द पास-पास आने पर पं क्त म एक हल्का झूला-सा बन जाता है —
सुनने वाले को लगता है वही शब्द लौट आया, पर वह ज़रा बदला हुआ है। ‘भला/भली’ म तो अंतर व्याकरण का है
(पु ल्लंग/स्त्री लग), फर भी कान को वह लय जैसा लगता है।
प्र.4 (4) एक ही पं क्त म वपरीताथक शब्द (जैसे— अ ा-बुरा) का प्रयोग कया गया है।
“साँच बराबर तप नह , झूठ बराबर पाप।” — साँच × झूठ
“अ त का भला न बोलना, अ त का भला न चूप।” — बोलना × चुप रहना
“अ त का भला न बरसना, अ त क भली न धूप॥” — वषा × धूप
“सार सार को ग ह रहै, थोथा दे इ उड़ाय॥” — सार × थोथा, और पकड़ना × उड़ा दे ना
कबीर यह क्य करते ह: दोहे म केवल चार चरण होते ह — समझाने क जगह नह होती। वलोम शब्द जोड़ी
बनाकर दोन छोर एक साथ दखा दे ते ह, और बीच का रास्ता पाठक स्वयं नकाल लेता है। ‘सार × थोथा’ म तो पूरा
दोहा ही दो शब्द म समट आता है।
प्र.5 (5) कसी क तुलना कसी अन्य से क गई है। (जैसे— दूध जैसा सफेद)
“बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।” — बड़े आदमी क तुलना खजूर के पेड़ से
“साधू ऐसा चा हए, जैसा सूप सुभाय।” — साधु के स्वभाव क तुलना सूप से
“साँच बराबर तप नह , झूठ बराबर पाप।” — सत्य क तुलना तप से, झूठ क पाप से
“जो जैसी संग त करै, सो तैसा फल पाय॥” — संग त और फल क तुलना
यह उपमा अलंकार है। पहचान का सूत्र — जहाँ ‘जैसे’, ‘जैसा’, ‘सम’, ‘बराबर’ जैसा वाचक शब्द मौजूद हो और
दो अलग चीज़ म कोई एक साझा गुण दखाया जा रहा हो, वहाँ उपमा होती है। जैसे खजूर और अहंकारी धनी म
साझा गुण है — ऊँचाई तो है, काम आना नह ।
Page 13 of 38
Page 15
as e
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
(6) कसी को कोई अन्य नाम दे दया गया है। (जैसे— मुख चंद्र है)
e
प्र.6
m l as
.co a g
a s em
a बराl मन पंछ भया, भावै तहवाँ जाय।”
“क g
o m
. c ag
यह रूपक अलंकार है। यहाँ ‘मन पंछ के समान है’ नह कहा गया — कहा गया ‘मन पंछ बन गया’। जब उपमेय
s
(मन) पर उपमान (पंछ ) को इस तरह चढ़ा दया जाए
e mक दोन का भेद ही मट जाए, तब उपमा नह , रूपक होता
a लगता है — पंछ पेड़ पर बैठता है और उसी का फल खाता है।
है। इसी लए अगली पं क्त म ‘फल’ शब्द भी lसहज
ag
.
एक और, छपा हुआ: ‘ नदक… बन पानी साबुन बना, नमल करै सुभाय’ म नदक को कह ‘धोबी’ कहा नह
com
m a s
गया, पर पानी और साबुन का उल्लेख उसे धोने वाला बना ही दे ता है — यह नाम दए बना दयाemगया रूपक है।
. co a gl
a s em
gl
a प्र.7 (7) कसी शब्द क वतनी थोड़ी अलग है। (जैसे— ‘चुप’ के ान पर ‘चूप’)
m a s
m.co agl
l a se
a g
दोहे का शब्द आज क हद म पं क्त
co m
चूप चुप
m .
अ त का भला न चूप।
m as e
.co सच / स त्य
a g l
साँच बराबर तप नह
m
साँच
a s eिहरदे
agl हृदय जाके हरदे साँच है
दोनों गुरु गो वद दोऊ खड़े
se m
a
दोऊ
. com a g l
m
ase
पाँय पाँव / चरण काके लाग पाँय।
सीतल
l
agशीतल औरन को सीतल करै
स्वयं भी
co
आपहुँ सीतल होय॥
m
.
आपहु ँ
em
m l as
.co g
िनयरे िनकट नदक नयरे रा खए
m सुभाय a
l a se स्वभाव नमल करै सुभाय॥
ag
.c
m
तहवाँ वही ं भावै तहवाँ जाय।
m a s e
m . co agl
किबरा कबीर क बरा मन पंछ भया
as e
a g l
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 14 of 38
Page 16
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
वतनी क्य बदली: कबीर क भाषा को सधुक्कड़ी कहा जाता है — उसम ब्रज, अवधी, राज ानी और खड़ी बोली
के शब्द घुले- मले ह। ये बदले हुए रूप गलती नह ह; दो कारण से ह — (1) उस समय क बोली म शब्द ऐसे ही
बोले जाते थे, और (2) दोहे क मात्रा और तुक बनी रहती है। ‘चुप’ लख दे ते तो ‘धूप’ के साथ तुक नह मलती;
‘चूप’ से मल जाती है।
प्र.8 (8) उदाहरण ारा कही गई बात को समझाया गया है।
“बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नह , फल लागै अ त दूर॥” — बड़प्पन क बात खजूर के पेड़ के
उदाहरण से।
“साधू ऐसा चा हए, जैसा सूप सुभाय। सार सार को ग ह रहै, थोथा दे इ उड़ाय॥” — ववेक क बात सूप से अनाज फटकने के
उदाहरण से।
“अ त का भला न बरसना, अ त क भली न धूप॥” — संतुलन क बात वषा और धूप के उदाहरण से।
“ नदक नयरे रा खए… बन पानी साबुन बना, नमल करै सुभाय॥” — आलोचना का लाभ बना साबुन-पानी कपड़ा साफ़
होने के उदाहरण से।
यह दृ ांत अलंकार है — जहाँ कही गई बात को समझाने के लए उसके समान कोई दूसरा उदाहरण रख दया
जाए। कबीर पढ़े - लखे श्रोताओं के लए नह लखते थे; वे कसान, बुनकर और राहगीर से बात कर रहे थे। इसी लए
उनके सारे उदाहरण रोज़ क आँख -दे खी चीज़ से आते ह — खेत, सूप, खजूर, धुलता कपड़ा, उड़ता पंछ । जो चीज़
पहले से दे खी हुई है, उससे जोड़ी गई बात कभी भूलती नह ।
प्र.9 (ख) अपने समूह क सूची को कक्षा म सबके साथ साझा क जए।
यह ग त व ध है। सूची इस तरह बनाइए क साझा करते समय हर बात का प्रमाण साथ हो।
Page 15 of 38
Page 17
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
वशेषता पाठ से उदाहरण क्या नाम है
एक ही अक्षर से शुरू होते शब्द नदक नयरे; सार सार; गुरु गो वद अनुपास
शब्द का दोहराव सार सार पुनरुिक्त
िवलोम शब्द एक पंिक्त में साँच × झूठ; बोलना × चूप िवरोध का पयोग
तुल ना जैसे पेड़ खजूर; जैसा सूप सुभाय उपमा
दू स रा नाम दे दे ना मन पंछ भया रूपक
उदाहरण से समझाना बन पानी साबुन बना… दृ ष्टांत
तुक पाँय–बताय, चूप–धूप, खोय–होय तुक ांत
एक-सी लय हर पं क्त बोलने म लगभग बराबर समय मात्र ा का संतल
ु न
प्रस्तु त का सुझाव: हर समूह अपनी सूची म से केवल दो वशेषताएँ चुनकर बोले और उन्ह पं क्त गाकर दखाए —
तब पूरी कक्षा को आठ वशेषताएँ सुनने को मलगी और समय भी नह लगेगा।
अनुमान और कल्पना से — पृष्ठ 68-69
पाठ से
पाठ से
प्र.1 अपने समूह म मलकर चचा क जए— (क) “गुरु गो वद दोऊ खड़े काके लाग पाँय।” • य द आपके सामने यह
त होती तो आप क्या नणय लेते और क्य ? • य द संसार म कोई गुरु या शक्षक न होता तो क्या होता?
• य द यह त होती — म भी पहले गुरु के चरण छू ता। कारण कबीर का ही है: गो वद तक पहुँचने क समझ मुझे गुरु ने द । जो
व्य क्त मुझे कसी बड़ी चीज़ तक ले जाता है, कृतज्ञता म पहला नमन उसी का बनता है। यह गो वद का अपमान नह — गुरु के
चरण छू ना असल म उस ज्ञान का आदर है जसने गो वद को पहचानने योग्य बनाया।
• य द संसार म कोई गुरु या शक्षक न होता — हर पीढ़ को सब कुछ शून्य से शुरू करना पड़ता।
भाषा, ल प और गनती एक पीढ़ से दूसरी तक न पहुँचत ; ज्ञान इक ा ही नह हो पाता।
बीज बोने से लेकर बीमारी क दवा तक — हर खोज हर बार नए सरे से करनी पड़ती, और अ धकांश लोग उसे कर ही नह
पाते।
सीखना केवल अपनी गल तय से होता, जो बहुत धीमा और कभी-कभी खतरनाक रास्ता है। शक्षक का काम ही यह है क हम
दूसर क गल तय से सीखने का मौका मल जाए।
Page 16 of 38
Page 18
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
चचा का सुझाव: ‘गुरु’ को केवल व ालय तक सी मत मत र खए। खाना बनाना, साइ कल चलाना, कोई खेल —
इनम से हर एक कसी न कसी ने सखाया है। समूह म सब अपने-अपने ‘गुरु’ गनाएँ; सूची लंबी नकलेगी।
प्र.2 (ख) “अ त का भला न बोलना, अ त का भला न चूप।” • य द कोई व्य क्त बहुत अ धक बोलता है या बहुत चुप
रहता है तो उसके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? • य द वषा आवश्यकता से अ धक या कम हो तो क्या
प रणाम हो सकते ह? • आवश्यकता से अ धक मोबाइल या मल्ट मी डया का प्रयोग करने से क्या प रणाम हो
सकते ह?
• बहुत बोलने या बहुत चुप रहने का असर —
अत क्या होता है
बहुत अिधक बात का वज़न घट जाता है; लोग सुनना बंद कर दे ते ह; बना सोचे बोलने से भेद खुल जाते ह और संबंध बगड़ते ह; सुनने
बोलना क आदत ही नह बन पाती।
बहत
ु अिधक चुप ज़रूरी बात समय पर नह कह पाते; अपने अ धकार और अपनी परेशानी दोन अनकही रह जाती ह; लोग गलतफ़हमी
रहना पाल लेते ह; भीतर घुटन जमा होती जाती है।
• वषा क अ त — आवश्यकता से अ धक वषा म बाढ़ आती है, खेत क म बह जाती है, फ़सल गल जाती है और घर-रास्ते डू ब
जाते ह। आवश्यकता से कम वषा म सूखा पड़ता है, कुएँ-तालाब सूख जाते ह, बुआई नह हो पाती और चारे के अभाव म पशु मरते
ह। दोन का नतीजा एक ही है — फ़सल का नाश। यही कबीर का तक है।
• मोबाइल या मल्ट मी डया क अ त —
आँख म जलन, सरदद और दे र रात तक जागने से न द पूरी न होना।
ध्यान टु कड़ म बँट जाता है — लंबा पाठ पढ़ना या एक काम दे र तक करना क ठन हो जाता है।
घर के लोग और मत्र से आमने-सामने क बातचीत घट जाती है; खेल का समय खत्म हो जाता है।
बना जाँचे सूचना पर भरोसा करने क आदत पड़ जाती है।
पर ध्यान रहे: कबीर मोबाइल छोड़ दे ने को नह कहगे — वे ‘बोलना बंद कर दो’ भी नह कहते। उनका उत्तर मात्रा
तय करना है। दन म एक न श्चत समय, एक न श्चत काम — यही ‘अ त’ से बचाव है।
प्र.3 (ग) “साँच बराबर तप नह , झूठ बराबर पाप।” • झूठ बोलने पर आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? •
कल्पना क जए क आपके शक्षक ने आपके कसी गलत उत्तर के लए अंक दे दए ह, ऐसी प र त म आप
क्या करगे?
• झूठ का असर — एक झूठ अकेला नह रहता। उसे बचाने के लए दूसरा झूठ बोलना पड़ता है, फर तीसरा; धीरे-धीरे याद रखना
पड़ता है क कससे क्या कहा था। इससे तीन नुकसान होते ह —
Page 17 of 38
Page 19
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
वश्वास टू टता है — और एक बार टू टा वश्वास लौटने म वष लगते ह। सच बोलने वाले क एक बात मान ली जाती है, झूठे क
स ी बात भी जाँची जाती है।
भीतर बेचैनी रहती है — पकड़े जाने का डर मन को ठहरने नह दे ता।
सुधार का रास्ता बंद हो जाता है — जो गलती छपा ली गई, वह ठ क भी नह हो पाती।
• गलत उत्तर पर अंक मल जाएँ तो — म स्वयं जाकर शक्षक को बताऊँगा क यह उत्तर गलत है और ये अंक मेरे नह ह।
यही ‘तप’ है: यहाँ चुप रह जाना बहुत आसान है — कसी को पता भी नह चलेगा, और अंक भी बढ़े रहगे। बताने
म सीधा नुकसान है। कबीर सत्य को तप इसी लए कहते ह — तप वही है जसम कष्ट उठाना पड़े। और लाभ भी
असली है: जो उत्तर गलत था, वह अब सही सीखने को मलेगा, और अपने सामने अपनी नज़र नह झुकेगी। ‘जाके
हरदे साँच है, ता हरदे गुरु आप’ का यही अथ है।
प्र.4 (घ) “ऐसी बानी बो लए, मन का आपा खोय।” • य द सभी मनुष्य अपनी वाणी को मधुर और शां त दे ने वाली
बना ल तो लोग म क्या प रवतन आ सकते ह? • क्या कोई ऐसी प र त हो सकती है जहाँ कटु वचन बोलना
आवश्यक हो? अनुमान लगाइए।
• सबक वाणी मधुर हो जाए तो — झगड़ क संख्या घट जाएगी, क्य क अ धकतर झगड़े बात से नह , बात कहने के ढं ग से शुरू
होते ह। घर और कक्षा म लोग एक-दूसरे क बात पूरी सुनगे; डर के कारण छपाई जाने वाली बात खुलकर कही जा सकगी; और
सबसे बड़ी बात — बोलने वाल को भी शां त मलेगी, क्य क ‘आपहुँ सीतल होय’।
• क्या कटु वचन कभी आवश्यक ह — मधुर वाणी का अथ ‘हर बात म हाँ’ नह है। कुछ तय म कठोर या स्पष्ट स्वर ज़रूरी
हो जाता है —
जब कसी के साथ अन्याय हो रहा हो और चुप्पी अन्याय करने वाले क मदद बन जाए।
जब कोई तुरंत खतरे म हो — तेज़ आवाज़ म रोकना ही उसे बचाता है।
जब बार-बार नरमी से समझाने पर भी कोई अपनी गलत आदत न छोड़े।
पर अंतर सम झए: कठोर होना और अपमानजनक होना एक बात नह । ‘तुमने गलत कया’ कठोर है; ‘तुम बेकार
हो’ अपमानजनक। कबीर क शत ‘मन का आपा खोय’ दोन जगह लागू रहती है — कठोर बात भी तब ठ क है जब
उसके पीछे अहंकार नह , सुधार क इ ा हो।
Page 18 of 38
Page 20
as e
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
(ङ) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।” • य द कोई व्य क्त अपने बड़े होने का अहंकार रखता हो तो आप
eगmे? • खजूर,
प्र.5
m a s
o द ऊँचे वृक्ष अनुपयोगी नह होते ह। वे कस प्रकार से उपयोगी हो सकतेagह?l बताइए। • आप अपनी
इस दोहे का उपयोग करते हुए उसे ‘बड़े होने या संपन्न होने’ का क्या अथ बताएँगे या समझाएँ
ना रयल.cआ
semका कक्षा नायक या ना यका (मॉनीटर) चुनने के लए कसी व ाथ क कन- कन वशेषताओं पर ध्यान
aकक्षा
agl दगे?
co m
m . ag
l a se
• अहंकारी व्य क्त को कैसे समझाएँगे — म उससे क ँगा: “ऊँचाई नापने का पैमाना अपना कद नह , दूसर को मली छाया है।
खजूर सबसे ऊँचे पेड़ म है, फर भी थका राही a g े नीचे नह बैठता — क्य क छाया नह मलती और फल हाथ नह आते।
उसक
बरगद उससे नीचा है, पर पूरा गाँव उसी के नीचे बैठता है। इस लए बड़ा होना यह नह क आपके पास कतना है; बड़ा होना यह है
क आपके पास से कतन का काम बनता है।”
. c om
• खजूर और ना रयल क्या सचमुच अनुपयोगी ह — बलकुल नह । कबीर ने केवल एक बात (छाया नm
s e
cm gla
दे ना) उठाई है, पूरा
फ़ैसला नह सुनoाया।
. a
a s em
g l खजू र — खजूर और छु हारा खाए जाते ह; उसके रस से गुड़ बनता है; पत्त से चटाई, झाड़ू, टोकरी और छप्पर बनते ह; तना
a लकड़ी देता है; और रे गस्तान म यह पेड़ म को बहने से रोकता है।
m a s
ना रयल — पानी और गरी भोजन ह; तेल नकलता है; जटा से रस्सी, चटाई और ग े बनते ह; खोल से बतन और
.co agl
कलाकृ तयाँ; पत्त से छप्पर; और समुद्र-तट पर यह पेड़ हवा और कटाव दोन रोकता है।
a s em
l एक कमी से पूरा नह आँकना चा हए। दोहा खजूर क नदा नह करता
इससे सीख: कसी को उसके एक गुaणgया
— वह खजूर को एक उदाहरण क तरह उधार लेता है। यही दृष्टांत क सीमा भी है, और यह पहचानना कक्षा 8 के
co m
.
पाठक का काम है।
em
m l as
.co a g
• कक्षा नायक/ना यका चुनते समय — म इन बात पर ध्यान दूँ गा: (1) सबक बात सुनने का धैय, (2) पक्षपात न करना — मत्र
a s emअन्य व ाथ दोन के लए एक नयम, (3) अपनी गलती मान लेने का साहस, (4) समय पर काम करने क आदत, (5)
gl कमज़ोर साथी क मदद करने का स्वभाव, (6) शांत स्वर म बात कहने क क्षमता। ध्यान द जए, इनम ‘सबसे अ धक अंक लाना’
और
a
se m
नह है — वह खजूर क ऊँचाई है, बरगद क छाया नह ।
com g l a
m. a
gl ase
प्र.6
a
(च) “ नदक नयरे रा खए, आँगन कुट छवाय।” • य द कोई आपक गल तय को बताता रहे तो आपको उससे
क्या लाभ होगा? • य द समाज म कोई भी एक-दूसरे क गल तयाँ न बताए तो क्या होगा?
co m
m .
m as e
.co
• गल तयाँ बताने वाले से लाभ —
a g l
se m गलती जल्द पकड़ म आ जाती है, इस लए उसे सुधारना आसान और सस्ता रहता है। जो गलती महीन चलती रहे, वह आदत
g l a
a c
.
बन जाती है।
s e m
m a
अपनी क मयाँ हम स्वयं दखाई नह दे त — जैसे अपनी पीठ। दूसरा ही वह दपण है।
m . co
आलोचना सुनने का अभ्यास हो जाने पर आत्म वश्वास घटता नह , बढ़ता है — क्य क डर खत्म हो जाता है।
e agl
g l as
• य द कोई कसी क गलती न बताए — गल तयाँ चुपचाप दोहराई जाती रहगी और बड़ी होती जाएँगी। लोग एक-दूसरे के मुँह पर
a
प्रशंसा और पीठ पीछे नदा करने लगगे, जससे रश्त म बनावट आ जाएगी। सुधार रुक जाएगा — न व ाथ क कॉपी सुधरेगी, न
m
कारीगर का काम, न व्यव ा क खा मयाँ। समाज वह का वह खड़ा रह जाएगा।
. co
e m
m l as
.co a g
Page 19 of 38
Page 21
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
दोहे क शत: कबीर नदक को ‘सुन ली जए’ नह कहते, ‘आँगन म कुट छवाकर बसा ली जए’ कहते ह — यानी
आलोचना को कभी-कभार सहना नह , उसे अपने रोज़ के जीवन म जगह दे ना है। साथ ही याद र खए क हर
आलोचना सही नह होती; उसे भी ‘सूप’ से फटकना पड़ता है — सार र खए, थोथा उड़ा द जए।
प्र.7 (छ) “साधू ऐसा चा हए, जैसा सूप सुभाय।” • कल्पना क जए क आपके पास ‘सूप’ जैसी वशेषता है तो
आपके जीवन म कौन-कौन से प रवतन आएँगे? • य द हम बना सोचे-समझे हर बात को स्वीकार कर ल तो
उसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
• ‘सूप’ जैसा स्वभाव हो तो —
पढ़ते समय म मुख्य बात और भरती अलग कर पाऊँगा; नोट् स छोटे और काम के बनगे।
कसी के कहे म से सुधार क बात रख लूँगा और अपमान क बात छोड़ दूँ गा — इससे आलोचना चुभेगी नह ।
इंटरनेट पर मली सूचना म से जाँची हुई बात रखूँगा, अफ़वाह उड़ा दूँ गा।
मत्र क सलाह म से अ सलाह मानूँगा, केवल इस लए नह मानूँगा क सब मान रहे ह।
मन हल्का रहेगा, क्य क हर बात ढोनी नह पड़ेगी।
• बना सोचे हर बात मान लेने का असर — नणय हमारे नह रह जाएँगे; जो जस समय समझा दे गा, हम उसी दशा म मुड़
जाएँगे। अफ़वाह और गलत सूचनाएँ आसानी से भीतर घर कर लगी, और उन्ह हम आगे भी फैलाएँगे। बार-बार गलत रास्ते पर जाने
से आत्म वश्वास टू टेगा और लोग हमारा लाभ उठाने लगगे।
सूप कैसे छाँटता है: सूप ज़ोर नह लगाता — वह बस हलता है, और भारीपन तथा हल्कापन अपना काम कर दे ते
ह। ववेक भी ऐसा ही है: वह हर बात से बहस नह करता, बस जाँचता है क बात म वज़न है या नह — प्रमाण क्या
है, कहने वाला कौन है, कहने से कसे लाभ है।
प्र.8 (ज) “क बरा मन पंछ भया, भावै तहवाँ जाय।” • य द मन एक पंछ क तरह उड़ सकता तो आप उसे कहाँ ले
जाना चाहते और क्य ? • संग त का हमारे जीवन पर क्या-क्या प्रभाव पड़ सकता है?
• मन उड़ सकता तो कहाँ — यह कल्पना का प्रश्न है, इसम अपनी बात ल खए और कारण ज़रूर द जए, क्य क उत्तर क जान
कारण म है।
नमूना उत्तर: “म अपने मन को हमालय के कसी शांत गाँव म ले जाना चा ँगा, जहाँ शोर न हो। कारण यह है क
शहर म मेरा मन दन भर हज़ार दशाओं म दौड़ता रहता है; म दे खना चाहता ँ क जब बाहर शां त हो तो भीतर क्या
सुनाई दे ता है। उसके बाद म उसे अपने व ालय क पुस्तकालय क खड़क पर बठाना चा ँगा — क्य क कबीर के
अनुसार पंछ जस पेड़ पर बैठता है, वही फल पाता है।”
• संग त का प्रभाव —
Page 20 of 38
Page 22
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
आदत पर: उठने-सोने का समय, पढ़ने का समय, खेलने क आदत — सब सा थय जैसी हो जाती है।
भाषा और व्यवहार पर: जनके बीच रहते ह, उनके शब्द और शष्टाचार अनजाने म उतर आते ह।
लक्ष्य पर: जो समूह आगे पढ़ने क बात करता है, उसम बैठा व ाथ भी आगे पढ़ने क सोचने लगता है।
सही-गलत क सीमा पर: यह सबसे गहरा असर है — बुरी संग त गलत काम को ‘सब करते ह’ कहकर साधारण बना दे ती है।
ध्यान द जए: कबीर मन को बाँधने को नह कहते — पंछ बाँधा नह जाता। वे चुपचाप पेड़ चुनने क बात कर दे ते
ह। संग त चुनना ही मन को दशा दे ने का व्यावहा रक तरीका है।
वाद- ववाद — पृष्ठ 70
पाठ से
पाठ से गतवध
प्र.1 “अ त का भला न बोलना, अ त का भला न चूप। अ त का भला न बरसना, अ त क भली न धूप॥” (क) इस दोहे
का आज के समय म क्या महत्व है? इसके बारे म कक्षा म एक वाद- ववाद ग त व ध का आयोजन क जए। एक
समूह के साथी इसके पक्ष म अपने वचार प्रस्तुत करगे और दूसरे समूह के साथी इसके वपक्ष म बोलगे। एक
तीसरा समूह नणायक बन सकता है।
आज के समय म महत्व — यह दोहा आज पहले से अ धक काम का है, क्य क आज ‘अ त’ के अवसर पहले से कह ज़्यादा ह।
सूचना क अ त: मोबाइल पर दन भर आती ख़बर और वी डयो — न सब दे खना ठ क, न सबसे कटकर रहना ठ क।
बोलने क अ त: सोशल मी डया पर हर वषय पर तुरंत राय दे दे ना, बना जाने।
चुप्पी क अ त: गलत होते दे खकर भी कुछ न कहना।
उपभोग क अ त: ज़रूरत से ज़्यादा खरीदना और फकना; और प्रकृ त क ओर लौट तो — अ त वषा से बाढ़, अ त गरमी से
सूखा। जलवायु प रवतन कबीर के दूसरे चरण को अक्षरशः सच कर रहा है।
आयोजन का तरीका: वषय स्पष्ट ल खए — “हर त म संतुलन ही सही रास्ता है।” तीन समूह बनाइए (पक्ष,
वपक्ष, नणायक)। हर वक्ता को 2 मनट द जए। नणायक समूह तीन बात दे खे — तक म प्रमाण है या नह ,
उदाहरण ठोस है या नह , और वक्ता ने दूसरे पक्ष क बात का उत्तर दया या नह ।
Page 21 of 38
Page 23
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 (ख) पक्ष और वपक्ष के समूह अपने-अपने मत के लए तक प्रस्तुत करगे, जैसे— • पक्ष – वाणी पर संयम रखना
आवश्यक है। • वपक्ष – अत्य धक चुप रहना भी उ चत नह है।
पक्ष — वाणी पर संयम आवश्यक है वपक्ष — अत्य धक चुप रहना भी उ चत नह
िबना सोचे कही बात वापस नही ं ली जा सकती; तीर और बोल दोनों अन्याय के समय चुप्पी अन्याय करने वाले का साथ दे ती है।
लौटते नही ं।
कम बोलने वाले की बात का वज़न अिधक होता है; लोग ध्यान से जो अपनी बात नही ं कहता, उसकी परे शानी िकसी को पता नही ं चलती
सुनते है।
ं और समाधान भी नही ं िमलता।
संयम से बोलने पर झगड़े टलते है ं और सोचने का समय िमल जाता चुप्पी को कई बार सहमित मान िलया जाता है, िजससे गलतफ़ हमी बढ़ ती
है। है।
‘ऐसी बानी बोिलए’ वाला दोहा भी यही कहता है — शब्द दू स रों को ु चुप रहने वाले में आ त्मिवश्वास और बोलने का अभ्यास दोनों घट
बहत
और स्वयं को शीतल करे ं। जाते है।
ं
नष्कष कहाँ नकलता है: ध्यान द जए, दोन पक्ष सही ह — और यही दोहे का असली संदेश है। कबीर बोलने के
पक्ष म नह ह, चुप्पी के पक्ष म भी नह ; वे ‘अ त’ के वपक्ष म ह। इस लए अ े वाद- ववाद का अंत ‘कौन जीता’
पर नह , इस समझ पर होना चा हए क कब बोलना है और कब रुकना है।
प्र.3 (ग) पक्ष और वपक्ष म प्रस्तुत तक क सूची अपनी लेखन-पु स्तका म लख ली जए।
सूची को उपयोगी बनाने के लए इसे केवल वाक्य क कतार मत बनाइए। चार खान क ता लका बनाइए —
क्रम तक पक्ष / वपक्ष उसका प्रमाण या उदाहरण
1 बना सोचे कही बात लौटती नह पक्ष गुस्से म कहा गया एक वाक्य वष क मत्रता तोड़ दे ता है
2 अन्याय पर चुप्पी अन्याय बढ़ाती है िवपक्ष कक्षा म कसी को चढ़ाया जा रहा हो और कोई न बोले
इसी ढाँचे म शेष तक भरते जाइए। अंत म दो पं क्तय का अपना नष्कष ज़रूर ल खए — कस तक ने आपको सबसे अ धक
प्रभा वत कया और क्य ।
क्य उपयोगी: तक के साथ प्रमाण लखने क आदत ही आगे चलकर नबंध और उत्तर-लेखन को मज़बूत बनाती है।
बना उदाहरण का तक केवल राय है।
Page 22 of 38
Page 24
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
शब्द से जुड़े शब्द — पृष्ठ 70
पाठ से
पाठ से
प्र.1 नीचे दए गए ान म कबीर से जुड़े शब्द पाठ म से चुनकर ल खए और अपने मत्र के साथ चचा क जए—
(कद्र म ‘कबीर’ और उससे जुड़े सात खाने, जनम एक म ‘बानी’ पहले से दया गया है।)
पुस्तक म कद्र के ‘कबीर’ से सात खाने जुड़े ह और उनम से एक म बानी पहले से भरा है। शेष छह खाने पाठ म आए शब्द से इस
तरह भरे जा सकते ह —
दोहे बानी गुरु
साँच िनंदक साधू संगित
कबीर
‘कबीर’ से जुड़े शब्द — बीच वाला ‘बानी’ पुस्तक म पहले से दया गया है।
ये शब्द क्य —
Page 23 of 38
Page 25
as e
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
शब्द कबीर से क्या संबंध
m बानी बो लए’ — कबीर क सबसे बड़ी चता ही वाणी है। as e
बानी
.co
‘ऐसी
a g l
se m कबीर क पहचान का छं द; पूरा पाठ आठ दोह का है।
g l a
a
दोहे
ग रु
ु ‘गुरु गो वद दोऊ खड़े’ — कबीर के यहाँ गुरु का ान सबसे ऊँचा है।
co m
साँच
e m .
‘साँच बराबर तप नह ’ — सत्य कबीर का कद्र य मूल्य है। ag
g l as
िनंद क
a
‘ नदक नयरे रा खए’ — आलोचक को अपना बनाने क सीख।
co m
साधू ‘साधू ऐसा चा हए’ — कबीर का आदश व्य क्त।
e m.
com l as
संग ित ‘जो जैसी संग त करै’ — जीवन का फल तय करने वाली चीज़।
. a g
e m
s भी चलगे: सूप, पंछ , सीतल, हरदे , काशी, करघा, भजन, कबीर ंथावली — ये सब भी पाठ म आए ह।
aऔर
agl अपने खाने भरते समय हर शब्द के आगे यह ल खए क वह पाठ म कहाँ आया है; तभी चचा म उसका बचाव कर
m a s
.co agl
पाएँगे।
se m
g l a
a
दोहे और कहावत — पृष्ठ 70-71
co m
.
पाठ से
em
m l as
.co g
पाठ से
em a
a s
agl प्र.1 अब आप ऐसी अन्य कहावत का प्रयोग करते हुए अपने मन से कुछ वाक्य बनाकर ल खए।
se m
com g l a
m . a
ase
agl
पहले याद र खए क पुस्तक ने कहावत क प रभाषा दे द है — ‘ऐसे वाक्य जन्ह लोग अपनी बात को अ धक प्रभावशाली बनाने के
लए प्रयोग करते ह; इनम जीवन के गहरे अनुभव को सरल और संक्षेप म बता दया जाता है।’ कहावत वाक्य म तभी जँचती है जब
उसके पहले घटना हो और कहावत उस घटना का नचोड़ बने।
co m
m .
m ase
.co a g l
se m
g l a
a c
m .
m a s e
e m . co agl
g l as
a
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 24 of 38
Page 26
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
कहावत अथ वाक्य
जैस ा संग वैस ा रंग व्य क्त अपनी संग त जैसा बन जाता पहले वह पढ़ ाई से भागता था, पर अच्छे साथी िमलते ही रोज़
है पुस्तकालय जाने लगा — जैस ा संग वैस ा रंग।
अब पछताए होत क्या, जब समय नकल जाने पर पछताना बेकार परीक्षा के एक िदन पहले पूर ी पुस्तक खोलकर बैठने से क्या होगा
िचिड़या चुग गई खेत है — अब पछताए होत क्या, जब िचिड़या चुग गई खेत।
दू र के ढोल सुहावने दूर से हर चीज़ अ लगती है, पास शहर के िव ालय की चच सुनकर वह उ त्सािहत था, पर वहाँ
जाकर स ाई पता चलती है पहुच
ँ कर बोला — दू र के ढोल सुहावने।
एक हाथ से ताली नही ं बजती झगड़े म दोन पक्ष का हाथ होता है िशक्षक ने दोनों को समझाया िक के वल एक को दोष नही ं िदया जा
सकता, एक हाथ से ताली नही ं बजती।
नाच न जाने आँग न टेढ़ा अपनी कमी छपाने के लए बहाना वह हर बार कहता है िक कलम ठीक नही ं है — नाच न जाने आँगन
बनाना टेढ़ा।
बूदँ -बूदँ से घड़ा भरता है छोटे -छोटे प्रयास मलकर बड़ा रोज़ दस शब्द याद करते-करते उसकी अंगेज़ी अच्छी हो गई —
प रणाम दे ते ह बूदँ -बूदँ से घड़ा भरता है।
कबीर के दोहे कहावत क्य बन गए: उनम तीन बात एक साथ ह — छोटा आकार (दो पं क्तयाँ), लय (जो याद
रखने म मदद करती है) और रोज़ क चीज़ से बना चत्र (खजूर, सूप, पंछ )। इसी लए ‘जो जैसी संग त करै, सो
तैसा फल पाय’ लोग क ज़बान पर चढ़कर ‘जैसा संग वैसा रंग’ बन गया।
सबक प्रस्तु त — पृष्ठ 71
पाठ से
पाठ से गतवध
प्र.1 पाठ के कसी एक दोहे को चुनकर अपने समूह के साथ मलकर भन्न- भन्न प्रकार से कक्षा के सामने प्रस्तुत
क जए। उदाहरण के लए— • गायन करना, जैसे लोकगीत शैली म। • भाव-नृत्य प्रस्तु त। • क वता पाठ करना। •
संगीत के साथ प्रस्तुत करना। • अ भनय करना, जैसे एक दोस्त गुस्से म आकर कुछ गलत कह दे ता है ले कन
दूसरा दोस्त उसे समझाता है क मधुर भाषा का कतना प्रभाव पड़ता है। (ऐसी बानी बो लए, मन का आपा
खोय।)
यह समूह-ग त व ध है। अ प्रस्तु त म तीन बात होनी चा हए — दोहा साफ़ सुनाई दे , उसका भाव दखे, और प्रस्तु त के अंत
म एक पं क्त म संदेश कहा जाए।
तैयारी के चरण —
1. दोहा चु नए और उसका अथ पूरे समूह को समझा द जए। अथ समझे बना अ भनय बनावट लगता है।
2. प्रस्तु त का रूप चु नए — गायन, नृत्य, अ भनय या काव्य-पाठ। समूह म जो जसम सहज हो, उसे वही भू मका द जए।
3. दोहे क लय पक ड़ए। दोहे क हर पं क्त बोलने म लगभग बराबर समय लेती है — गाते समय यही लय ताल बन जाती है।
Page 25 of 38
Page 27
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
4. दो बार पूवाभ्यास क जए और समय 3 मनट के भीतर र खए।
नमूना योजना (अ भनय) — दोहा: “ऐसी बानी बो लए, मन का आपा खोय।”
दृश्य 1: मैदान म मैच हारने पर एक खलाड़ी साथी पर चल्लाता है — “तुम्हारे कारण हारे!” साथी सर झुकाकर
चला जाता है।
दृश्य 2: अगले दन वही खलाड़ी अकेला बैठा है; उसका मन भी खराब है। तीसरा साथी आकर दोहा गुनगुनाता है।
दृश्य 3: वह साथी के पास जाकर कहता है — “कल मुझसे गलत कहा गया। कैच कसी से भी छू ट सकता है।”
दोन हँसकर खेलने चले जाते ह।
समापन: पूरा समूह मलकर दोहा बोलता है और एक व ाथ कहता है — “मीठा बोल सुनने वाले को ही नह ,
बोलने वाले को भी ठं डक दे ता है।”
गायन क्य सबसे उपयुक्त है: कबीर के दोहे लखकर नह , गा-गाकर लोग तक पहुँचे थे। आज भी वे भजन और
लोकगीत के रूप म गाए जाते ह। लोकगीत शैली म गाकर आप वही परंपरा दोहरा रहे ह गे जससे ये दोहे सैकड़ वष
तक जी वत रहे।
आपक बात — पृष्ठ 71
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 (क) “गुरु गो वद दोऊ खड़े, काके लाग पाँय।” क्या आपके जीवन म कोई ऐसा व्य क्त है जसने आपको सही
दशा दखाने म सहायता क हो? उस व्य क्त के बारे म बताइए।
यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है, इस लए उत्तर आपका ही होना चा हए। पर अ ा उत्तर बनाने के लए इन चार बात को क्रम
से र खए —
1. वह व्य क्त कौन है और आपसे उसका क्या संबंध है।
2. कौन-सी एक ठोस घटना — कब, कहाँ, क्या हुआ। सामान्य बात (“वे बहुत अ े ह”) उत्तर को कमज़ोर करती ह।
3. उन्ह ने क्या कहा या कया, और उससे आपम क्या बदला।
4. दोहे से जोड़ - वे आपके लए कस अथ म ‘गुरु’ ह।
नमूना उत्तर: “छठ कक्षा म म ग णत से इतना डरता था क प्रश्न दे खते ही कॉपी बंद कर दे ता था। हमारे शक्षक श्री
रमेश जी ने एक दन मुझे रोककर कहा — ‘उत्तर मत सोचो, पहला कदम सोचो।’ फर उन्ह ने रोज़ भोजनावकाश के
दस मनट मुझे केवल पहला कदम लखवाना सखाया। तीन महीने बाद म पूरा प्रश्न स्वयं हल करने लगा। उन्ह ने मुझे
ग णत नह सखाया था — उन्ह ने डर के सामने खड़ा होना सखाया था। मेरे लए वे ही कबीर वाले गुरु ह, क्य क
रास्ता उन्ह ने ही दखाया।”
Page 26 of 38
Page 28
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
ध्यान द जए: ‘गुरु’ केवल व ालय का शक्षक नह होता। माता- पता, दाद , कोई कारीगर, कोई खलाड़ी-
प्र शक्षक या कोई पुस्तक भी उस काम क गुरु हो सकती है जो उसने सखाया।
प्र.2 (ख) “ नदक नयरे रा खए, आँगन कुट छवाय।” क्या कभी कसी ने आपक क मय या गल तय के वषय म
बताया है जनम आपको सुधार करने का अवसर मला हो? उस अनुभव को साझा क जए।
यह भी अनुभव का प्रश्न है। उत्तर म यह ज़रूर आना चा हए क पहली प्र त क्रया क्या थी — क्य क आलोचना सुनते ही अ
लगे, ऐसा कम होता है। स ाई से लखा गया उत्तर ही असर करता है।
ढाँचा: गलती क्या थी → कसने बताई और कैसे बताई → आपको उस समय कैसा लगा → आपने क्या कया → अब पीछे मुड़कर
दे खने पर क्या लगता है।
नमूना उत्तर: “मुझे लगता था क म वाद- ववाद म अ ा बोलता ँ। एक दन मेरी सहेली ने कहा — ‘तुम बोलते
समय कसी क बात पूरी नह सुनत , बीच म काट दे ती हो।’ मुझे बहुत बुरा लगा और दो दन मने उससे बात नह
क । फर अगली प्र तयो गता क रकॉ डग दे खी तो सचमुच मने तीन बार दूसर को टोका था। मने तय कया क जब
तक सामने वाला रुक न जाए, म नह बोलूँगी। अगली बार नणायक ने मेरी ‘सुनने क क्षमता’ क तारीफ़ क । उस
दन समझ आया क जो सच बता दे , वह मत्र है — इसी लए कबीर उसे आँगन म बसाने को कहते ह।”
इसम सीखने क बात: ध्यान द जए क इस उत्तर म आलोचना पहले चुभी और बाद म काम आई। कबीर भी यही
मानते ह — नदक सुख नह दे ता, सफ़ाई दे ता है; और सफ़ाई म थोड़ी रगड़ लगती ही है।
प्र.3 (ग) “क बरा मन पंछ भया, भावै तहवाँ जाय।” क्या आपने कभी अनुभव कया है क आपक संग त (जैसे—
मत्र) आपके वचार और आदत या व्यवहार को प्रभा वत करती है? अपने अनुभव साझा क जए।
अपने अनुभव म एक बदलाव चु नए और उसे नापकर बताइए — क्या पहले था, क्या बाद म हुआ, और बीच म कसक संग त
थी। संग त का असर तभी दखता है जब पहले और बाद क तुलना हो।
नमूना उत्तर: “ पछले वष तक म व ालय से लौटकर सीधे मोबाइल उठा लेता था। इस वष हमारे मोहल्ले म दो
लड़के शाम को मैदान म खो-खो खेलने लगे और मुझे भी बुला लया। पहले हफ़्ते म मन मारकर गया, फर आदत बन
गई। अब म रोज़ एक घंटा खेलता ँ, रात को समय पर न द आ जाती है और सुबह पढ़ने म मन लगता है। कसी ने
मुझे मोबाइल छोड़ने को नह कहा था — बस मेरा ‘पेड़’ बदल गया।”
संग त का असर सीधा नह होता: कोई मत्र यह नह कहता क ‘अब से ऐसा करो’। असर साथ बताए समय से
आता है — जो लोग जस काम म समय लगाते ह, हमारा समय भी उधर मुड़ जाता है। इसी लए मत्र चुनना असल म
यह चुनना है क आपका समय कधर जाएगा।
Page 27 of 38
Page 29
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
दूसरा पक्ष भी लख सकते ह: य द कसी संग त ने आपक कोई आदत बगाड़ी हो और आपने उसे पहचानकर
बदला हो, तो वह भी उतना ही अ ा उत्तर है — ब ल्क उसम आपक अपनी समझ भी दखती है।
सृजन — पृष्ठ 71-72
पाठ से आगे
पाठ से आगे गतवध
प्र.1 (क) “साँच बराबर तप नह , झूठ बराबर पाप।” इस दोहे पर आधा रत एक कहानी ल खए जसम कसी व्य क्त
ने क ठन प र तय म भी सत्य का साथ नह छोड़ा। (संकेत— कसी खेल म आपक ट म ारा नयम के
उल्लंघन का आपके ारा वरोध कया जाना।)
कहानी म क्या-क्या होना चा हए —
एक ऐसी त जसम सच बोलने म नुकसान हो। यही कहानी क जान है; बना क मत के सत्य म कोई कहानी नह बनती।
पात्र के मन क उलझन — वह क्षण जब चुप रह जाना आसान लग रहा हो।
नणय और उसका तुरंत प रणाम (जो अक्सर बुरा होता है)।
अंत म वह लाभ जो दखाई नह दे ता — भरोसा, आत्मसम्मान, चैन।
नमूना कहानी — आ ख़री गद
अंतर- व ालय क्रकेट का फ़ाइनल था। आ ख़री गद पर दो रन चा हए थे। मने गद को हवा म उछाला और दौड़ पड़ा।
वपक्षी क्षेत्ररक्षक ने कैच पकड़ा, पर गद ज़मीन छू कर उसके हाथ म आई थी — यह केवल मने दे खा था, क्य क म
सबसे पास था। अंपायर ने मुझे नॉट आउट दे कर हमारी ट म को वजेता घो षत कर दया।
मेरे साथी दौड़कर मुझसे लपट गए। पर मुझे वह क्षण याद आ रहा था जब गद घास से टकराई थी। मने अंपायर के
पास जाकर कहा — “सर, वह कैच पूरा नह था, पर म उससे पहले क्र ज़ पार कर चुका था; रन हमारा है। म चाहता
ँ क आप एक बार दोबारा दे ख ल।” अंपायर ने दोन ट म को बुलाया, वी डयो दे खा और नणय बदल दया। हम
एक रन से हार गए।
लौटते समय हमारी ट म चुप थी और मेरा मन भारी था। पर वपक्षी ट म का कप्तान मेरे पास आया और बोला —
“तुमने हम ॉफ़ नह द , तुमने खेल को बचा लया।” अगले वष जब हमारे व ालय ने ट म का कप्तान चुना, तो
कोच ने मेरा नाम लया और कहा — “कप्तान वही होगा जसक बात पर सब भरोसा कर सक।”
उस दन मुझे कबीर क पं क्त का अथ समझ आया — साँच बराबर तप नह । तप का अथ ही यह है क कुछ
खोकर कुछ पाया जाए।
Page 28 of 38
Page 30
as e
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
कहानी क बनावट पर ध्यान द जए: यहाँ सत्य बोलने पर तुरंत हार मली और लाभ बहुत बाद म। य द सच
m a s em‘तप’ कहता है,
gl
बोलते ही इनाम मल जाता, तो कहानी उपदे श बन जाती। दोहे क गहराई इसी म है क वह सत्य को
‘सौदा’ नह ।.co
em a
a s
agl
co m
ag
(ख) “गुरु गो वद दोऊ खड़े, काके लाग पाँय।” इस दोहे को ध्यान म रखते हुए अपने कसी प्रेरणादायक शक्षक
.
प्र.2
e m
as
से साक्षात्कार क जए और उनके योगदान पर एक नबंध ल खए।
a g l
चरण 1 — साक्षात्कार क तैयारी। पहले से समय ली जए और प्रश्न लखकर ले जाइए। ऐसे प्रश्न पू छए जनका उत्तर ‘हाँ/नह ’ म
co m
e m.
as
न हो —
m l
.co a g
emे अपने कोई ऐसे गुरु रहे जन्ह ने आपको बदला हो?
आपने शक्षक बनने का नश्चय कब और क्य कया?
a s
gl पढ़ाते समय आपक सबसे बड़ी चुनौती क्या रही है?
आपक
a
s
कोई एक व ाथ जसका बदलना आपको आज भी याद है?
m a
.co agl
आज के व ा थय से आप क्या कहना चाहगे?
a s em
aglअसर करते ह। अनुम त लेकर रकॉड भी कर सकते ह।
चरण 2 — नोट लेना। उत्तर सुनते समय पूरे वाक्य लखने क को शश मत क जए; मुख्य शब्द और उनके अपने दो-तीन वाक्य ज्य
के त्य लख ली जए — नबंध म उद्धरण बहुत
m
चरण 3 — नबंध का ढाँचा —
. co
em
com l as
भाग उसम क्या
. a g
e m
as
agl
शीषक जैसे — “गोिवंद िदयो बताय : ीमती सुनीता शम से बातचीत”
दोहे की पंिक्त से आरंभ; िशक्षक का पिरचय, िकतने वष ं से पढ़ ा रहे है ं
m
भूिमका
a se
बीच का भाग
. com
साक्षात्कार से िमली बाते ं — उनका रास्ता, उनकी किठनाइयाँ, उनकी पढ़ ाने की शैल ी, कोई एक घटना; बीच-बीच में उनके
a g l
m
ase
अपने शब्द उ द्धरण िचह्न ों में
आपका agl
उनसे आपने व्यिक्तगत रूप से क्या पाया — एक ठोस उदाहरण
अनुभव
co m
m .
e
दोहे पर लौिटए — गरु
ु ‘गोिवंद ’ यानी ल क्ष्य तक का रास्ता कै से बताते है ं
as
िनष्कष
m l
.co
m सुझाव: नबंध पूरा होने पर एक प्र त उन शक्षक को भी द जए। साक्षात्कार का शष्टाचार यही है — और वह a g
l a se
ag
.c
आपक अगली बातचीत का रास्ता भी खोल दे ता है।
s e m
m a
e m . co agl
las
कबीर हमारे समय म — पृष्ठ 72
ag
co m
m .
m as e
.co
a g l Page 29 of 38
Page 31
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 (क) कल्पना क जए क कबीर आज के समय म आ गए ह। वे आज कन- कन वषय पर क वता लख सकते
ह? उन वषय क सूची बनाइए।
कबीर का ढं ग याद र खए — वे उन्ह बात पर लखते थे जो रोज़ दखती ह और जनम दखावा या असंतुलन हो। उसी कसौट
पर आज के वषय ह गे —
मोबाइल और स्क्र न क अ त — ‘अ त का भला न’ का सीधा वस्तार।
अफ़वाह और झूठ ख़बर — बना जाँचे आगे भेज दे ना; ‘साधू ऐसा चा हए, जैसा सूप सुभाय’ यह काम आता है।
दखावे क चमक — फ़ोटो म सुखी दखना और भीतर बेचैन रहना।
पानी और पेड़ क बरबाद — नद , कुआँ, कटते जंगल।
कचरा और प्ला स्टक — खरीदने-फकने क अ त।
जा त, धम और भाषा के भेद — कबीर का सबसे पुराना और सबसे ज़रूरी वषय।
परीक्षा और अंक का दबाव — ब के मन पर बोझ।
बुजग का अकेलापन — घर भरे हुए, पर बात करने वाला कोई नह ।
ऑनलाइन गाली-गलौज — ‘ऐसी बानी बो लए’ का आज का मैदान।
सूची बनाते समय कसौट : ऐसा वषय चु नए जसम कोई रोज़ क चीज़ उदाहरण बन सके — मोबाइल, बोतल,
पंखा, नल। कबीर क ताकत बड़े वचार म नह , छोट चीज़ को उदाहरण बना दे ने म थी।
प्र.2 (ख) इन वषय पर आप भी दो-दो पं क्तयाँ ल खए।
दोहे क तरह लखने के लए दो नयम पयाप्त ह: (1) दोन पं क्तय का अंत मलती-जुलती ध्व न पर हो, और (2) पहली पं क्त बात
कहे, दूसरी उसका कारण या उदाहरण दे ।
Page 30 of 38
Page 32
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
मोबाइल पर —
हाथ भरा है यंत्र से, आँख भरी है धूल।
पास िबठाकर भूलना, यही समय की भूल॥
झूठी ख़बर पर —
सुन ी बात को तोिलए, िफर आगे बढ़ जाय।
िबन परखे जो बाँट ता, सो भी दोषी थाय॥
पानी पर —
नल टपकै िदन-रात भर, बूदँ -बूदँ बह जाय।
प्यासे को जब खोिजए, कु आँ नही ं िमल पाय॥
पेड़ पर —
छाया माँगे हर कोई, पौधा रोपे कौन।
जो बोवै सो पावई, बाकी बैठे मौन॥
भे द भाव पर —
एक हवा सब साँस ले,ं एक धरा सब गाँव।
ऊँ च-नीच की बात क्यों, एक-सी सबकी छाँव॥
अपनी पं क्तयाँ लखते समय: पहले तुक वाले शब्द क जोड़ी सोच ली जए (भूल–धूल, जाय–पाय, कौन–मौन),
फर उनके चार ओर पं क्त बनाइए। शुरुआत म तुक ठ क न मले तो चता मत क जए — बात का साफ़ होना तुक
से अ धक ज़रूरी है।
साइबर सुरक्षा और दोहे — पृष्ठ 72
Page 31 of 38
Page 33
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 नीचे दए गए प्रश्न पर कक्षा म वचार- वमश क जए और साझा क जए— (क) “अ त का भला न बोलना, अ त
का भला न चूप।” इंटरनेट पर अनावश्यक सूचनाएँ साझा करने के क्या-क्या संकट हो सकते ह?
इंटरनेट पर ‘बोलना’ भी अ त हो सकता है — और वहाँ बोली हुई बात मटती नह , दज हो जाती है। खतरे ये ह —
नजी जानकारी का दुरुपयोग: घर का पता, व ालय का नाम, रोज़ का समय, यात्रा क योजना, माता- पता के काम क
जानकारी — इनसे कोई अजनबी आपक दनचया जान सकता है।
फ़ोटो का गलत उपयोग: साझा क गई तस्वीर बदलकर या गलत संदभ म फैलाई जा सकती है।
बक और पासवड संबंधी ठगी: जन्म त थ, व ालय का नाम या पालतू का नाम अक्सर पासवड और सुरक्षा-प्रश्न म होते ह।
ायी रकॉड: गुस्से म लखी एक टप्पणी वष बाद भी खोजी जा सकती है — इंटरनेट भूलता नह ।
अफ़वाह फैलाने म भागीदारी: बना जाँचे आगे भेजी गई बात से कसी नद ष को नुकसान हो सकता है, और भेजने वाला भी
ज़म्मेदार माना जाता है।
ध्यान और समय क हा न: हर बात पर प्र त क्रया दे ने क आदत पढ़ाई का समय खा जाती है।
दोहा यहाँ कैसे लागू है: कबीर चुप्पी क भी वकालत नह करते। इंटरनेट पर दूसरी अ त भी है — गलत होते
दे खकर कुछ न कहना, या साइबर बदमाशी क शकायत न करना। संतुलन यह है: नजी बात मत साझा क जए, पर
गलत काम क सूचना बड़ और शक्षक को ज़रूर द जए।
एक सरल कसौट : पोस्ट करने से पहले पू छए — “क्या यह बात म कक्षा म सबके सामने बोड पर लख सकता
ँ?” उत्तर ‘नह ’ हो तो साझा मत क जए।
प्र.2 (ख) “साधू ऐसा चा हए, जैसा सूप सुभाय।” कसी भी वेबसाइट, ईमेल या मी डया पर उपलब्ध जानकारी को
‘सूप’ क तरह छानने क आवश्यकता क्य है? कैसे तय कर क कौन-सी सूचना उपयोगी है और कौन-सी
हा नकारक?
छानने क ज़रूरत क्य — इंटरनेट पर कुछ भी डालने से पहले कोई जाँच नह होती, जैसे पुस्तक छपने से पहले होती है। इस लए
वहाँ ‘सार’ और ‘थोथा’ आपस म मले-जुले पड़े रहते ह। साथ ही बहुत-सी साम ी कसी उ े श्य से बनाई जाती है — कुछ बेचने के
लए, कुछ डराने के लए, कुछ केवल क्लक पाने के लए। बना छाने सब स्वीकार कर लेने पर हम गलत सूचना पर नणय ले बैठते
ह और उसे आगे फैलाकर दूसर को भी भटकाते ह।
कैसे तय कर — जाँच क छह कसौ टयाँ:
Page 32 of 38
Page 34
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
कसौट क्या दे ख
ोत िकसने पकािशत िकया? सरकारी (.gov.in), शैिक्षक (.edu, ncert.nic.in) या पितिष्ठत संस्था का पष्ृ ठ अिधक भरोसे म ंद
है।
ले खक नाम िदया है या नही?ं िबना नाम की सामगी की जवाबदे ही िकसी की नही ं होती।
ितिथ कब की जानकारी है? पुर ानी संख्या और िनयम आज गलत हो सकते है।
ं
पमाण आँक ड़े के साथ ोत िदया है? या के वल दावा है?
दू स री जगह वही बात दो-तीन स्वतंत्र भरोसे म ंद स्थानों पर िमलती है या नही ं।
जाँच
भाषा का स्वर “तुर ंत सबको भेजें”, “यह सच कोई नही ं बताएगा”, बहुत सारे िवस्मयािदबोधक िचह्न — ये अफ़ वाह के पक्के ल क्षण है।
ं
सूप का रूपक यहाँ ठ क क्य बैठता है: सूप कुछ फकता नह , वह हलाकर भारीपन जाँचता है। जाँच भी यही
करती है — दावे को हलाइए, यानी उसका प्रमाण पू छए। जसम वज़न होगा वह टक जाएगा, थोथा अपने आप उड़
जाएगा।
आज के समय म — पृष्ठ 72-73
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 नीचे कुछ घटनाएँ द गई ह। इन्ह पढ़कर आपको कबीर के कौन-से दोहे याद आते ह? घटनाओं के नीचे दए गए
रक्त ान पर उन दोह को ल खए— 1. अ मत का मन पढ़ाई म नह लगता था और वह गलत संग त म चला
गया। कुछ समय बाद जब उसके अंक कम आए तो उसे समझ म आया — “संग त का असर जीवन पर पड़ता
है।”
“किबरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।
जो जै सी संगित करै, सो तै सा फल पाय॥”
क्य यही दोहा — घटना म दो चीज़ ह जो सीधे इस दोहे से मलती ह। पहली, अ मत का मन कह टकता नह — यही ‘मन पंछ
भया, भावै तहवाँ जाय’ है। दूसरी, कम अंक कोई अलग दं ड नह , वे उसक संग त का फल ह — ‘सो तैसा फल पाय’। ध्यान द जए
क अ मत को कसी ने सज़ा नह द ; प रणाम अपने आप आया, जैसे पेड़ पर बैठे पंछ को उसी पेड़ का फल मलता है।
Page 33 of 38
Page 35
as e
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
2. एक व ाथ इंटरनेट पर लगातार सूचनाएँ खोज रहा था। उसके पता ने कहा — “हर जानकारी सही नह
e
प्र.2
m l as
.co
होती, सही बात को चुनो और बेकार छोड़ दो।”
a g
se m
g l a
a
“साधू ऐसा चािहए, जै सा सूप सुभ ाय।
co m
e m . ag
as
सार सार को गिह रहै, थोथा दे इ उड़ ाय॥”
a g l
क्य यही दोहा — पता क सलाह के दोन हस्से दोहे क दूसरी पं क्त के दो हस्से ह — ‘सही बात को चुनो’ = सार सार को ग ह
co m
m.
रहै, ‘बेकार छोड़ दो’ = थोथा दे इ उड़ाय। इंटरनेट क ढे र सारी सूचना ठ क वैसी ही है जैसा फटकने से पहले का अनाज — दाना और
भूसा एक साथ। छाँटने का काम कोई और नह कर सकता, वह अपने ववेक से ही होता है।
m as e
.co a g l
se m
g l a
a प्र.3 3. आपका एक मत्र आपक कसी गलत बात पर आपक आलोचना करता है। आप पहले परेशान होते ह,
s
ले कन फर आपने सोचा — “आलोचना मुझे सुधरने का मौका दे ती है, मुझे इन बात का बुरा नह मानना चा हए।
m a
.co agl
इसे सकारात्मक रूप से लेना चा हए।”
se m
g l a
a
co m
“िनंद क िनयरे रािखए, आँगन कु टी छवाय।
m .
m as e
.co
िबन पानी साबुन िबना, िनमल करै सुभ ाय॥”
a g l
a s em
agl क्य यही दोहा — घटना म जो बदलाव आया है, वही दोहे का मम है: पहले बुरा लगना और फर लाभ दखना। मत्र ने न कोई पानी
se m
लगाया, न साबुन — केवल गलती बता द , और स्वभाव का मैल साफ़ होने लगा। इसी लए कबीर ऐसे मत्र को दूर नह , आँगन म
बसाने क सलाह दे ते ह।
com g l a
m . a
gl ase
प्र.4
a
4. रीमा ने अपने गुस्से म सहकम को बुरा-भला कह दया, जससे वातावरण बगड़ गया। बाद म उसने समझा क
अगर वह शां त से बात करती तो समस्या हल हो जाती।
co m
m .
m as e
.co
a g l
se m
g l a
a “ऐसी बानी बोिलए, मन का आपा खोय।
c
m .
m a s e
agl
औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय॥”
. co
e m
g l as
a
co m
m .
m ase
.co
a g l Page 34 of 38
Page 36
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
क्य यही दोहा — रीमा क गलती बात कहने म नह , गुस्से के साथ कहने म थी — यानी ‘आपा’ बीच म आ गया। और प रणाम भी
दोहे जैसा ही उल्टा हुआ: वातावरण बगड़ने से केवल सहकम परेशान नह हुआ, रीमा को भी बाद म पछतावा हुआ। जो दूसर को
शीतल नह कर पाती, वह स्वयं भी शीतल नह रह पाती।
प्र.5 5. कक्षा म मोहन ने बहुत अ धक बोलकर सबको परेशान कर दया, जब क रमेश बल्कुल चुप रहा। गुरुजी ने
कहा — “बोलचाल म संतुलन आवश्यक है, न अ धक बोलो, न अ धक चुप रहो।”
“अित का भला न बोलना, अित का भला न चूप।
अित का भला न बरसना, अित की भली न धूप॥”
क्य यही दोहा — यह घटना तो दोहे क पहली पं क्त का जीता-जागता चत्र है — मोहन ‘अ त बोलना’ है और रमेश ‘अ त चूप’।
गुरुजी क बात दोहे का ही सार है। और दूसरी पं क्त याद दलाती है क यह कोई नई सीख नह — प्रकृ त भी यही सखाती है, जहाँ
न लगातार वषा भली है, न लगातार धूप।
प्र.6 6. सुरेश को जब ‘प्र तभा सम्मान’ मला तो उसने कहा — “इसम मेरे प रश्रम के साथ मेरे गुरुजन का मागदशन
भी स म्म लत है।”
“गुरु गोिवंद दोऊ खड़ े, काके लागौं पाँय।
बिलहारी गुरु आपने , गोिवंद िदयो बताय॥”
क्य यही दोहा — सम्मान मलने का क्षण वही क्षण है जब ‘आपा’ सबसे आसानी से सर उठाता है। सुरेश उसी क्षण म पहला श्रेय
गुरु को दे ता है — ठ क वैसे ही जैसे दोहे का शष्य गो वद के सामने खड़ा होकर भी पहले गुरु के चरण छू ता है। उसने अपना प रश्रम
नकारा नह ; उसने केवल यह माना क प रश्रम को दशा कसने द ।
छह घटनाओं का सार: ध्यान द जए, पाठ के आठ म से छह दोहे यहाँ काम आ गए — यही बताता है क ये दोहे
कसी पुराने समय क बात नह , आज क साधारण घटनाओं क भाषा ह।
खोजबीन के लए — पृष्ठ 74
Page 35 of 38
Page 37
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से आगे
पाठ से आगे गतवध
प्र.1 अपने प रजन , मत्र , शक्षक , पुस्तकालय या इंटरनेट क सहायता से कबीर के भजन , गीत , लोकगीत को
खो जए और सु नए। कसी एक गीत को अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए। कक्षा के सभी समूह ारा एक त्रत
गीत को जोड़कर एक पु स्तका बनाइए और कक्षा के पुस्तकालय म उसे स म्म लत क जए। (पुस्तक म NCERT
OFFICIAL यू ूब चैनल क क ड़याँ द गई ह — संत कबीर, कबीर वाणी, कबीर क सा खयाँ, तथा ‘दोहे —
कबीर, रहीम, तुलसी’।)
यह खोजबीन क ग त व ध है। इसे व्यव त ढं ग से क जए —
चरण 1 — कहाँ खोज। दाद -नानी और घर के बुजग सबसे अ े ोत ह, क्य क कबीर के पद अक्सर ल खत नह , सुनकर सीखे
हुए मलते ह। इसके बाद व ालय का पुस्तकालय (कबीर ंथावली, कबीर वचनावली) और फर पुस्तक म द गई NCERT
OFFICIAL क क ड़याँ।
चरण 2 — कन प्र सद्ध पद से शुरू कर। इनक पहली पं क्तयाँ खोज म सहायक ह गी —
“मोको कहाँ ढूँ ढ़े रे बंदे, म तो तेरे पास म।”
“झीनी झीनी बीनी चद रया।”
“मन लागो मेरो यार फक री म।”
“रहना न ह दे स बराना है।”
पूरा पद पुस्तक या रकॉ डग से मलाकर ही ल खए — सुनी हुई पं क्तय म अक्सर पाठ-भेद होता है।
चरण 3 — लेखन-पु स्तका म क्या-क्या लख। केवल गीत मत ल खए; उसके साथ ये भी दज क जए —
क्या लख उदाहरण
गीत/पद का पूर ा पाठ जैस ा सुना या पढ़ ा, ज्यों का त्यों
ोत िकससे सुना / िकस पुस्तक या कड़ी से िलया
किठन शब्दों के अथ जैसे — चदिरया = शरीर ; िबराना = पराया
दो पंिक्तयों में भाव पद क्या कहना चाहता है
गायन शैल ी भजन, िनगण
ु , लोकगीत — जैस ा सुना
चरण 4 — पु स्तका। सभी समूह के पन्ने इक ा क जए, वषय के अनुसार क्रम लगाइए (गुरु, सत्य, संग त, वाणी), आरंभ म
वषय-सूची और अंत म ोत क सूची जो ड़ए, फर उसे कक्षा-पुस्तकालय म र खए।
यह ग त व ध क्य : कबीर क रचनाएँ छपने से पहले सैकड़ वष गाकर ही एक पीढ़ से दूसरी तक पहुँच । घर के
बुजग से पद इक ा करके आप उसी परंपरा क अगली कड़ी बन रहे ह — और यह कसी वेबसाइट से नकल कर
लेने से कह अ धक मूल्यवान है।
Page 36 of 38
Page 38
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
अध्याय — एक नज़र म
पाठ म कबीर के आठ दोहे ह — साँच बराबर तप नह ; बड़ा हुआ तो क्या हुआ; गुरु गो वद दोऊ खड़े; अ त का भला न
बोलना; ऐसी बानी बो लए; नदक नयरे रा खए; साधू ऐसा चा हए; क बरा मन पंछ भया।
दोहा दो पं क्तय का छं द है और हर पं क्त के दो-दो भाग (चरण) होते ह। हर पं क्त को बोलने म लगभग एक-सा समय लगता
है — यही उसक लय है।
कबीर क भाषा सधुक्कड़ी है — ब्रज, अवधी और खड़ी बोली के शब्द मले-जुले ह: साँच, हरदे , दोऊ, लाग , पाँय, सीतल,
नयरे, तहवाँ, थोथा।
कबीर बात सीधे नह कहते, चत्र बनाकर कहते ह — बड़प्पन के लए खजूर का पेड़, ववेक के लए सूप, आलोचक के लए
बना पानी-साबुन धोने वाला धोबी, चंचल मन के लए पंछ ।
पाठ के अभ्यास दोह को आज के जीवन से जोड़ते ह — इंटरनेट पर सूचना छाँटना, मोबाइल का अ त-प्रयोग, आलोचना को
सकारात्मक लेना, कक्षा-नायक का चुनाव।
क व प रचय के अनुसार कबीर का जन्म चौदहव शताब्द म काशी म माना जाता है; वे करघे पर कपड़ा बुनते थे और उनक
रचनाएँ मुख्यतः कबीर ंथावली म संगृहीत ह। पाठ का ोत कबीर वचनावली (संपादक — अयोध्या सह उपाध्याय ‘ह रऔध’)
है।
Page 37 of 38
Page 39
कक्षा 8 हद अध्याय 5 कबीर के दोहे AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
दोहा क द्र य भाव कस यु क्त से कहा क ठन शब्द
(पहली
पं क्त)
साँच बराबर सत्य सबसे बड़ी साधना है; सच्चे तुलना — ‘बराबर’ शब्द से सत्य को साँच = सत्य; हरदे = हृदय; ता = उसी
तप नह हृदय में ग रु
ु स्वयं बसते है ं तप के और झूठ को पाप के बराबर
रखा
बड़ा हुआ तो के वल बड़ा या संपन्न होना व्यथ है, यिद उपमा — ‘जैसे पेड़ खजूर’ पंथी = राही; लागै = लगते ह; अ त दूर = बहुत
क्या हुआ उससे िकसी का भला न हो ऊँचाई पर
गुरु गो वद ग रु
ु का स्थान पहले , क्योंिक ईश्वर नाटक य त — असमंजस का दोऊ = दोन ; काके = कसके; लाग पाँय =
दोऊ खड़े तक का रास्ता उन्होंने ही बताया एक क्षण खड़ा कर दया चरण छु ऊँ; ब लहारी = न्योछावर
अ त का भला हर बात में संतल
ु न आवश्यक है — न दृष्टांत — मनुष्य के व्यवहार को वषा अ त = हद से ज़्यादा; चूप = चुप
न बोलना अित बोलना, न अित चुप्पी और धूप क अ त से समझाया
ऐसी बानी अहंक ार छोड़कर बोला गया मीठा रूपक-सा प्रयोग — मीठे बोल को बानी = वाणी; आपा = अहंकार; सीतल =
बो लए वचन दू स रों को भी शांित दे ता है और ‘शीतलता’ बना दया शीतल; आपहुँ = स्वयं भी
स्वयं को भी
नदक नयरे आलोचक को पास रिखए, वह हमारे रूपक — नदक बना पानी-साबुन नयरे = नकट; कुट छवाय = झ पड़ी छवा
रा खए दोष मु ़ त में िदखा दे ता है के धोने वाला धोबी द जए; सुभाय = स्वभाव
साधू ऐसा अच्छे व्यिक्त में सार ग हण करने और उपमा — ‘जैसा सूप सुभाय’; सूप सूप = अनाज फटकने का छाज; ग ह रहै =
चा हए िनस्सार छोड़ने का िववेक हो ववेक का प्रतीक पकड़ रखता है; थोथा = खोखला भूसा; दे इ
उड़ाय = उड़ा दे ता है
क बरा मन मन चंचल है और जैस ी संग ित में जाता रूपक — ‘मन पंछ भया’; और भावै = मन चाहे; तहवाँ = वह ; तैसा = वैसा ही
पंछ भया है, वैस ा ही फल पाता है फल का चत्र उसी पेड़-पंछ से जुड़ा
Page 38 of 38