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NCERT Solutions Class 8 Hindi Chapter 6 एक टोकरी भर मिट्टी

AglaSem पर कक्षा 8 हिंदी पाठ 6 एक टोकरी भर मिट्टी (मल्हार) के NCERT समाधान की फ्री PDF डाउनलोड करें। नवीनतम NCERT पुस्तक (2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी प्रश्नों के चरण-दर-चरण, अभ्यास-वार हल। Free PDF of NCERT Solutions for Class 8 Hindi Chapter 6 (Malhar).
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About NCERT Solutions Class 8 Hindi Chapter 6 एक टोकरी भर मिट्टी

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NCERT Solutions Class 8 Hindi Chapter 6 एक टोकरी भर मिट्टी – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा8

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 6: एक टोकरी भर म

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

76 – 90 22 48 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 40 pages

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 8 · हद · मल्हार

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 6: एक टोकरी भर म
पाठ 6 माधवराव सप्रे क कहानी एक टोकरी भर म है — हद क सबसे पहली कहा नय म गनी जाने वाली रचना, जो आज से लगभग सवा सौ
साल पहले लखी गई थी। एक ज़म दार एक अनाथ वृद्धा क झ पड़ी अदालत के ज़ोर पर छ न लेता है, और फर म से भरी एक टोकरी उसे वह बात
सखा दे ती है जो कोई उपदे श नह सखा पाता।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

मल्हार (कक्षा 8) 76 – 90

खं ड प्रश्न

22 48

माध्यम

हन्द

मेरी समझ से — पृष्ठ 78
पाठ से

पाठ से

प्र.1 ★
(क) नम्न ल खत प्रश्न के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा ( ) बनाइए। कुछ प्रश्न के एक से अ धक उत्तर भी हो
सकते ह। (1) ज़म दार को झ पड़ी हटाने क आवश्यकता क्य लगी? • झ पड़ी जजर हो चुक थी • झ पड़ी रास्ते
म बाधा थी • वह अहाते का वस्तार करना चाहता था • वृद्धा से उसका कोई पुराना झगड़ा था

★ वह अहाते का वस्तार करना चाहता था।

“ज़मी ंदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ ी तक बढ़ ाने की इच् छा हुई।”

कहानी क तीसरी ही पं क्त म कारण साफ़ लखा है। महल पहले से है, अहाता पहले से है — ज़म दार को बस उसे और आगे तक
फैलाना है, और बीच म यह झ पड़ी पड़ती है।

एक शब्द पर ध्यान द जए: प्रश्न पूछता है ‘आवश्यकता क्य लगी’, पर लेखक ने ‘आवश्यकता’ लखा ही नह —
उसने लखा ‘इ ा हुई’। यही कहानी का पूरा नै तक ढाँचा तय कर दे ता है। वृद्धा के लए झ पड़ी ज़रूरत है,
ज़म दार के लए वह केवल शौक है। जब कसी क इ ा कसी क ज़रूरत को कुचल दे , वह से अन्याय शुरू होता
है।

बाक वकल्प क्य नह —

झ पड़ी जजर हो चुक थी — कहानी म उसक हालत के बारे म एक शब्द भी नह है।
झ पड़ी रास्ते म बाधा थी — कसी रास्ते क चचा नह ; बाधा अहाते के वस्तार म थी, आवागमन म नह ।

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

वृद्धा से कोई पुराना झगड़ा था — इसके उलट, पहले तो उसने ‘बहुतेरा कहा’ यानी समझा-बुझाकर हटाना चाहा। झगड़ा बाद
म उसक अपनी लालच से पैदा हुआ।

प्र.2 (2) वृद्धा ने म ले जाने क अनुम त कैसे माँगी? • क्रोध और झगड़ा करके • अदालत से अनुम त लेकर • वनती
और नम्रता से • चुपचाप उठाकर ले गई

★ वनती और नम्रता से।
कहानी म उसके व्यवहार के चार अलग-अलग संकेत ह, और चार एक ही ओर इशारा करते ह —

“पर वह िगड़ िगड़ ाकर बोली…”

“महाराज क्षमा करे ं तो एक िवनती है।”

“िफर हाथ जोड़ कर श्रीमान् से पाथ ना करने लगी…”

“…वह बार-बार हाथ जोड़ ने लगी और पैरों पर िगरने लगी…”

यह नम्रता कमज़ोरी नह है: वृद्धा जानती है क झ पड़ी अब कानूनन ज़म दार क है — वह खुद कहती है, “अब
तो झ पड़ी तुम्हारी ही हो गई है।” लड़ाई का रास्ता उसके पास बचा ही नह । इस लए वह वही रास्ता चुनती है जो
उसके पास है — वनती। और कहानी का कमाल यह है क इसी वनती के भीतर उसने वह जाल बुन रखा है जसम
ज़म दार का अहंकार फँसेगा। नम्रता यहाँ ह थयार बन जाती है।

‘क्रोध और झगड़ा’ उसके स्वभाव के भी वरुद्ध है और उसक त के भी। ‘अदालत से अनुम त’ लेने क ताकत उसम होती तो
वह झ पड़ी ही न हारती। और ‘चुपचाप उठाकर ले गई’ तो हो ही नह सकता — वह अनुम त माँगने ही आई थी।

प्र.3 (3) वृद्धा क पोती का व्यवहार कस भाव को दशाता है? • दया • लगाव • गुस्सा • डर

★ लगाव।

“…मेरी पोती ने खाना-पीना छोड़ िदया है। मैन
ं े बहुत कु छ समझाया, पर वह एक नही ं मानती। यही कहा करती

है िक अपने घर चल, वहीं रोटी खाऊँ गी।”

पाँच बरस क उम्र म जस घर म वह आई थी, वही उसका सारा संसार है। नया ठकाना उसे घर नह लगता, इस लए वहाँ क रोट
भी उसके गले नह उतरती।

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

भूख हड़ताल एक ब ी क : उसके पास न अदालत है, न वक ल, न आवाज़। वरोध का जो एक ही तरीका उसके
बस म है, वह उसी को अपनाती है — खाना छोड़ दे ना। इसी ज़द से पूरी कहानी चलती है: दाद को म माँगनी
पड़ती है, इसी लए वह ज़म दार तक पहुँचती है, इसी लए टोकरी उठती है। जो पात्र एक-दो पं क्तय म ही आता है,
वही कहानी को आगे ठे लता है।

अगर कसी ने ‘गुस्सा’ चुना हो: उसक बात मान ली जए, पर एक अंतर बताइए — गुस्सा कसी पर होता है, यहाँ
ब ी कसी पर नाराज़ नह है। यह हठ है, और हठ के नीचे लगाव है। ‘दया’ और ‘डर’ के लए कहानी म कोई
आधार नह ।

प्र.4 (4) कहानी का अंत कैसा है? • दुखद • सुखद • प्रेरणादायक • सकारात्मक

★ सुखद, ★ प्रेरणादायक और ★ सकारात्मक — तीन सही ह। यही वह प्रश्न है जसके ‘एक से अ धक उत्तर’ हो सकते ह।

“कृ तकम का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्ध ा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ ी वापस दे दी।”

सुखद — वृद्धा को उसका घर वापस मल जाता है; जो छना था, लौट आता है।
प्रेरणादायक — क्य क जीत ताकत क नह , ववेक क हुई। एक गरीब बु ढ़या ने बना लड़े, बना गाली दए एक ताकतवर
आदमी का मन बदल दया।
सकारात्मक — कहानी यह भरोसा छोड़ जाती है क गलती करने वाला आदमी भी सुधर सकता है। लेखक ज़म दार को
खलनायक बनाकर नह छोड़ता, उसे बदलने का मौका दे ता है।

‘दुखद’ क्य नह : कहानी का बीच का हस्सा ज़रूर दुखद है — प त, बेटा, बहू, फर घर, सब छनते जाते ह। पर
‘अंत’ का अथ है आ ख़री मोड़, और वहाँ प ाताप और क्षमा है। ध्यान र खए, कहानी सुखद इस लए नह है क सब
ठ क हो गया, ब ल्क इस लए क अन्याय करने वाले को अपने अन्याय का भार महसूस हुआ।

प्र.5 (ख) हो सकता है क आपके समूह के सा थय ने अलग-अलग उत्तर चुने ह । अपने मत्र के साथ चचा क जए
क आपने ये उत्तर ही क्य चुने?

यह चचा का काम है। इसम सही-गलत से ज़्यादा महत्व इस बात का है क आप अपने उत्तर के पीछे कहानी क कौन-सी पं क्त
रख पाते ह।
चचा का तरीका —

1. हर साथी पहले अपना उत्तर बताए, फर वह पं क्त पढ़े जससे उसे यह उत्तर मला।
2. जहाँ दो लोग के उत्तर अलग ह, वहाँ दे खए — क्या दोन क पं क्तयाँ अलग ह, या एक ही पं क्त के दो अथ नकाले गए ह?

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म
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3. अंत म तय क जए क कौन-सा उत्तर पाठ के सबसे नज़द क है और कौन-सा हमारी अपनी कल्पना से जुड़ गया है।
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नमूना उत्तर: “मने तीसरे प्रश्न म ‘लगाव’ चुना, क्य क पोती कहती है — ‘अपने घर चल, वह रोट खाऊँगी।’ मेरे

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साथी नीरज ने ‘गुस्सा’ चुना। बात करने पर हम दोन इस पर सहमत हुए क ब ी कसी पर नाराज़ नह है, वह

gl घर के लए अड़ी है — इस लए ‘लगाव’ पाठ के ज़्यादा नज़द क है, पर ‘गुस्सा’ भी बलकुल बेबु नयाद नह ,
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अपने
क खाना छोड़ना वरोध का ही एक रूप है।”

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मलकर कर मलान — पृष्ठ 79 a

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

पाठ से

पाठ से

प्र.1 (क) पाठ म से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दए गए ह। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो नष्कष दए गए ह। अपने समूह
म इन पर चचा क जए और इन्ह इनके सवा धक उपयुक्त नष्कष से मलाइए।

क्रम वाक्य सवा धक उपयुक्त क्य
नष्कष

1. अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल वृद्धावस्था में वृद्धा का सहारा ‘आधार’ का अथ है सहारा। वाक्य म ‘उसक ’ वृद्धा क
में एकमात्र आधार थी। उसकी पोती ही थी। ओर संकेत करता है — यानी सहारा वृद्धा को मल रहा है,
पोती से। दूसरा नष्कष वाक्य को उलट दे ता है।

2. बाल की खाल िनकालने वाले ज़मी ंदार ने वकीलों को पैसे ‘थैली गरम करना’ का अथ ही है रश्वत दे ना, और ‘बाल
वकीलों की थैल ी गरम कर उन्होंने दे क र कानूनी दावपेंच से क खाल नकालना’ का अथ है व्यथ क बारी कयाँ
अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना झोंपड़ी पर क ब्जा िकया। नकालना। दोन मुहावरे मलकर बताते ह क रास्ता
कब्जा कर िलया। कानूनी दखता ज़रूर था, पर न्यायपूण नह था।

3. आपसे एक टोकरी भर िम ी नही ं वृद्धा ने टोकरी को पतीक वृद्धा को ज़म दार क दे ह क ताकत नापने म कोई रु च
उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो बनाकर ज़मी ंदार को उसके नह थी। उसने एक टोकरी से हजार टोक रय तक का
हजारों टोकिरयाँ िम ी पड़ी है। अन्याय का अनुभव कराया। हसाब जोड़कर अन्याय के भार क बात कही।

4. ज़मी ंदार साहब धन-मद से गिवत हो धन और अहंक ार ने ज़मी ंदार ‘मद’ का अथ है नशा। धन का नशा उसे यह भुला बैठा क
अपना कतव्य भूल गए थे। को मानवीयता और क रुणा एक अनाथ वृद्धा के प्र त भी उसका कोई कतव्य है। दूसरा
से दू र कर िदया था। नष्कष वाक्य का ठ क उलटा कहता है।

5. कृ तकम का पश्चाताप कर उन्होंने अपने ारा िकए अन्याय पर ‘कृतकम’ = कया हुआ काम, और क्षमा माँगने वाले
वृद्धा से क्षमा माँग ी। पछताकर ज़मी ंदार ने क्षमा ‘उन्ह ने’ यानी ज़म दार ह। पछतावा और क्षमा दोन उसी
माँग ी। के ह, वृद्धा के नह ।

6. उसका भार आप जन्म-भर कै से वृद्धा ने पतीकात्मक रूप से ‘जन्म-भर’ शब्द ही ताला खोल दे ता है। म का बोझ तो
उठा सकें गे? कहा िक अन्याय का नैितक कुछ पल का होता है; जो बोझ जीवन-भर साथ चलता है,
भार उठाना आसान नही ं है। वह पाप का बोझ ही हो सकता है।

7. कृ पा करके इस टोकरी को ज़रा वृद्धा ने चतुर ाई से ज़मी ंदार ऊपर से यह मदद क वनती लगती है, पर आगे क
हाथ लगाइए िजससे िक मैं उसे को शिम दं ा करने की योजना घटनाएँ बताती ह क यह सोचा-समझा कदम था — वह
अपने िसर पर धर लूँ। बनाई। चाहती थी क ज़म दार अपने हाथ से भार उठाए, तभी
उसक बात दल तक पहुँचती।

8. उसे पुर ानी बातों का स्मरण हुआ झोंपड़ी में पवेश करते ही वृद्धा ‘स्मरण’ शब्द से साफ़ है क आँसू याद के ह, डर के नह ।
और उसकी आँखों से आँस ू की पुर ाने िदनों के कारण भावुक उसी झ पड़ी म उसका प त और बेटा गुज़रे थे।
धारा बहने लगी। हो गई।

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

7 नंबर पर एक ईमानदार बात: दूसरा नष्कष — ‘सहायता के लए वनम्र नवेदन’ — गलत नह है, वह वाक्य का
ऊपरी अथ है। पर प्रश्न ‘सवा धक उपयुक्त’ नष्कष माँगता है, और कहानी क बनावट दे खए: वृद्धा ने नौकर से
मदद नह माँगी, ज़म दार से माँगी; और टोकरी उठते ही उसने अन्याय क बात कह द । यानी नवेदन साधन था,
उ े श्य बोध कराना था। चचा म दोन पक्ष र खए — यही इस अभ्यास का असली उ े श्य है।

प्र.2 (ख) अपने मत्र के उत्तर से अपने उत्तर मलाइए और चचा क जए क आपने कौन-से नष्कष का चुनाव कया
है और क्य ?

मलान के बाद चचा म यह तरीका अपनाइए —

1. पहले सबूत, फर राय। हर नष्कष के साथ वाक्य का वह शब्द बताइए जसने आपको वहाँ पहुँचाया — जैसे 6 नंबर म ‘जन्म-
भर’, 2 नंबर म ‘थैली गरम कर’।
2. दूसरे नष्कष को खा रज करने का कारण भी द जए। ज़्यादातर जोड़ म एक नष्कष वाक्य को उलट दे ता है (1, 4, 5) —
यह पहचानना सबसे आसान परीक्षण है।
3. जहाँ असहम त बचे, वहाँ उसे लख ली जए। 3 और 7 नंबर पर कक्षा अक्सर बँट जाती है, और यही सबसे उपयोगी बहस
है।

नमूना उत्तर: “हमारे समूह म 7 नंबर पर मतभेद हुआ। र ज़या ने ‘ वनम्र नवेदन’ चुना, क्य क वृद्धा हाथ जोड़ रही
थी। मने ‘चतुराई से श मदा करने क योजना’ चुना, क्य क उसने ज़म दार से ही टोकरी उठवाई, जब क वहाँ नौकर
मौजूद थे। अंत म हम इस पर सहमत हुए क वनती ऊपर थी और योजना भीतर।”

पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 80
पाठ से

पाठ से

प्र.1 (क) “आपसे एक टोकरी भर म नह उठाई जाती और इस झ पड़ी म तो हजार टोक रयाँ म पड़ी है। उसका
भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकगे?”

यह कहानी क सबसे महत्वपूण पं क्त है — यह वृद्धा हारी हुई त से नकलकर ज़म दार से ऊपर आ जाती है।
सीधा अथ — आपने अभी-अभी दे खा क एक टोकरी म भी आपसे नह उठ । इस झ पड़ी म तो हजार टोक रय जतनी म
है। जो झ पड़ी आपने छ नी है, उसका बोझ आप जीवन-भर कैसे ढो पाएँगे?

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

तक कैसे बुना गया है: वृद्धा तीन कदम म बात पूरी करती है और तीन कदम ज़म दार के अपने अनुभव पर टके ह
—

पहला कदम — प्रमाण। ‘आपसे एक टोकरी नह उठाई जाती।’ यह आरोप नह , अभी-अभी घट घटना है।
इसका खंडन ज़म दार कर ही नह सकता।
दूसरा कदम — गुणा। एक से ‘हजार ’ तक। छोट -सी माप को हज़ार गुना करके वह अन्याय का आकार आँख
के सामने खड़ा कर दे ती है।
तीसरा कदम — छलाँग। ‘जन्म-भर’। यहाँ भार शरीर से उतरकर आत्मा पर चढ़ जाता है। म का बोझ कुछ
पल का होता है, पाप का बोझ उम्र-भर का।

और वह उत्तर नह दे ती — प्रश्न छोड़ दे ती है: “आप ही इस बात पर वचार क जए।” उपदे श दे ने पर आदमी बचाव
करता है, प्रश्न पूछने पर सोचता है। इसी लए ज़म दार क ‘आँख खुल गईं’।

ध्यान द जए: पूरी पं क्त म एक भी कड़वा शब्द नह है। वृद्धा ‘आप’ कहकर बोलती है, ‘महाराज’ कहकर बुलाती
है, और फर भी बात इतनी गहरी चुभती है क ज़म दार का पूरा जीवन बदल जाता है। यही इस कहानी क भाषा क
ताकत है।

प्र.2 (ख) “ज़म दार साहब पहले तो बहुत नाराज हुए, पर जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैर पर गरने लगी
तो उनके भी मन म कुछ दया आ गई। कसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने को आगे बढ़े । ज्य ही
टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्य ही दे खा क यह काम उनक श क्त के बाहर है।”

यह कहानी का मोड़ (ट नग पॉइंट) है। इन्ह तीन-चार पं क्तय म ज़म दार का मन पहली बार हलता है।
अथ — ज़म दार पहले चढ़ता है, फर वृद्धा क गड़ गड़ाहट दे खकर उसके मन म थोड़ी दया आती है। वह नौकर को न बुलाकर
खुद टोकरी उठाने आगे बढ़ता है, और उठाते ही समझ जाता है क यह उसके बस क बात नह ।

लेखक ने यह दृश्य ऐसा क्य रचा:

‘पहले तो बहुत नाराज हुए’ — बदलाव एक झटके म नह दखाया गया। पहले चढ़, फर दया, फर ल ा,
फर प ाताप — मन इसी क्रम से बदलता है, और यही कहानी को स ा बनाता है।
‘ कसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं’ — यह वाक्य पूरे मोड़ क धुरी है। अब तक ज़म दार का हर काम
नौकर से होता था (“उसे यहाँ से हटा दो”)। पहली बार वह अपने हाथ से कुछ करता है — और इसी क्षण वह
वृद्धा के बराबर क ज़मीन पर आ जाता है। य द टोकरी नौकर उठाता, तो सबक ज़म दार को कभी न मलता।
‘उनक श क्त के बाहर है’ — ‘श क्त’ शब्द दो अथ एक साथ उठाए हुए है। दे ह क श क्त भी, और नै तक
सामथ्य भी। जस आदमी को अपनी ताकत पर घमंड था, उसक हार एक बु ढ़या क टोकरी के सामने होती है
— वह भी उसके अपने नौकर के सामने।

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

छोटा-सा प्रयोग: कल्पना क जए क इस दृश्य म वृद्धा उपदे श दे ने लगती — ‘आपने पाप कया है’। क्या ज़म दार
सुनता? लेखक ने बोलने का काम टोकरी से करवाया, शब्द से नह । इसी को दखाना कहते ह, बताना नह ।

सोच- वचार के लए — पृष्ठ 80
पाठ से

पाठ से

प्र.1 (क) आपके वचार से कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र कौन है और क्य ?

सबसे प्रभावशाली पात्र वृद्धा है — इस लए नह क वह दुखी है, ब ल्क इस लए क कहानी म जो एक बड़ा प रवतन होता है, वह
उसी के कारण होता है।

उसके पास कुछ नह है, फर भी वह जीतती है। न धन, न घर, न कोई अपना — कहानी उसे ‘गरीब, अनाथ वृद्धा’ कहकर
शुरू होती है। सामने ज़म दार है, जसके पास महल, नौकर, वक ल और अदालत तक है।
वह ह थयार नह , ववेक चुनती है। टोकरी माँगने का बहाना, ज़म दार से ही उसे उठवाना, और फर एक प्रश्न — “उसका भार
आप जन्म-भर कैसे उठा सकगे?” इतना ही काफ़ है।
वह कसी को नीचा नह दखाती। जीतने के बाद भी वह ताना नह मारती। कहानी का अंत उसक वजय-घोषणा से नह ,
ज़म दार क क्षमा-याचना से होता है।

दूसरा उत्तर भी बनता है: कोई कहे क सबसे प्रभावशाली पात्र पोती है, तो उसक बात म दम है। वह पूरी कहानी म
एक बार भी मंच पर नह आती, सफ़ दाद के मुँह से उसका ज़क्र आता है — फर भी हर घटना उसी क ज़द से
चलती है। उसने खाना न छोड़ा होता तो दाद म माँगने न जाती, टोकरी न उठती, ज़म दार न बदलता। जो पात्र
दखता नह , वही कहानी चलाता है — यह लेखक क बड़ी कारीगरी है।

तीसरा पक्ष: ज़म दार को चुनने वाला यह कह सकता है क कहानी म सबसे ज़्यादा बदलता वही है — घमंडी से
ल त, ल त से प ातापी। जो उत्तर आप चुन, उसके साथ कहानी क एक पं क्त ज़रूर द जए।

प्र.2 (ख) वृद्धा क पोती ने खाना क्य छोड़ दया था?

क्य क उसे अपने घर से गहरा लगाव था और झ पड़ी छन जाने के बाद वह कसी और जगह को अपना घर मान ही नह पा रही थी।

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म
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“जब से यह झोंपड़ ी छू टी है, तब से मेरी पोती ने खाना-पीना छोड़ िदया है। मैन
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नही ं मानती। यही कहा करती है िक अपने घर चल, वहीं रोटी खाऊँ गी।”
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agपाँlच बरस क उम्र म माँ खो चुक थी; तब से वही झ पड़ी उसका सारा संसार थी। घर के साथ उसक माँ, पता और दादा क
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सारी याद भी जुड़ी थ । इस लए घर का छनना उसके लए केवल जगह बदलना नह था।

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इसे वरोध क तरह प ढ़ए: एक ब ी न अदालतeजा
s m सकती है, न वक ल कर सकती है, न कसी से लड़ सकती है।
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उसके पास वरोध का बस एक ही तरीका हैg—
उसका सत्याग्रह है। और यह काम कर जाता है: उसी ज़द के कारण दाद ज़म दार के सामने पहुँचती है, और वह से

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कहानी बदल जाती है।

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a s em(ग) ज़म दार ने झ पड़ी पर कब्जा कैसे कया?
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उसने दो चरण म कब्ज़ा कया — पहले समझाने-बुझाने
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glaक अपनी झ पड़ी हटा ले।” पर वृद्धा नह मानी, क्य क वह वहाँ कई ज़मान से
1. पहले कहा-सुनी — “वृद्धा से बहुतेराaकहा
बसी थी।

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2. फर ज़म दारी चाल — “श्रीमान् के सब प्रयत्न नष्फल हुए, तब वे अपनी ज़म दारी चाल चलने लगे।”
3. रश्वत — “बाल क खाल नकालने वाले वक ल क थैली गरम कर…” यानी बारीक नुक्ताचीनीm
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glaकर लया और वृद्धा को वहाँ से
comआदे श और बेदख़ली — “…उन्ह ने अदालत से उस झ पड़ी पर अपना कब्जा
करने वाले वक ल को घूस द ।

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semनकाल दया।”
4. अदालती

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दो मुहावरे, पूरा सच: लेखक ने यहाँ अन्याय का लंबा वणन नह कया — केवल दो मुहावरे रख दए। ‘बाल क
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खाल नकालना’ बताता है क वक ल ने कानून क बारी कय से रास्ता नकाला, और ‘थैली गरम करना’ बताता है
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क इसके पीछे पैसा था। इन दो मुहावर से यह साफ़ हो जाता है क कब्ज़ा कानूनी दखता था पर न्यायपूण नह

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था। कागज़ पर ज़म दार जीता, सच म वह हार चुका था।

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(घ) “महाराज क्षमा कर तो एक वनती है। ज़म दार साहब के सर हलाने पर उसने कहा…” यहाँ ज़म दार ारा
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सर हलाना यहाँ मौन स्वीकृ त है — यानी ‘ठ क है, कहो’। वृद्धा ने बात कहने क अनुम त माँगी थी, और ज़म दार ने बना बोले

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सर हलाकर अनुम त दे द ।

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

पर लेखक ने ‘हाँ कहा’ क्य नह लखा: क्य क सर हलाना और ‘हाँ’ कहना एक बात नह है। इस छोट -सी
क्रया म ज़म दार का पूरा स्वभाव खुल जाता है —

वह उससे बात करना भी ज़रूरी नह समझता। अभी-अभी उसने नौकर से कहा था, “उसे यहाँ से हटा दो”
— वृद्धा से नह , नौकर से। वह बु ढ़या से सीधे बोलता ही नह ।
यह रुतबे क भाषा है। बड़े लोग इशारे से काम चलाते ह; बोलने म समय और सम्मान दोन खच होते ह।
साथ ही, यह पूरा इनकार भी नह है। उसने सुनने से मना नह कया — यह दया क एक बहुत पतली दरार
दखती है, जो आगे चलकर चौड़ी होती जाएगी।

तुलना क जए: कहानी के अंत म यही आदमी ‘ल त होकर कहने लगे’ और फर ‘क्षमा माँगी’ — अब वह
बोलता है। शुरू म सर हलाना, अंत म क्षमा माँगना — इसी दूरी का नाम इस कहानी का कथानक है।

प्र.5 (ङ) “ कसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़े ।” यहाँ ज़म दार के व्यवहार म प रवतन का
आरंभ दखाई दे ता है। पहले ज़म दार का व्यवहार कैसा था? इस घटना के बाद उसके व्यवहार म क्या प रवतन
आया?

पहले — ज़म दार धन और रुतबे के घमंड से भरा था और दूसर क तकलीफ़ उसे दखती ही नह थी।

अहाता बढ़ाने क अपनी इ ा को उसने एक बु ढ़या क ज़रूरत से बड़ा माना।
“श्रीमान् ने उसको दे खते ही अपने नौकर से कहा क उसे यहाँ से हटा दो” — वह वृद्धा को व्य क्त नह , हटाने क चीज़
समझता था।
वक ल क थैली गरम करके अदालत से कब्ज़ा लेना उसे गलत नह लगा।
“ज़म दार साहब पहले तो बहुत नाराज हुए” — वनती पर भी पहली प्र त क्रया चढ़ ही थी।

बाद म — प रवतन एक झटके म नह , चार सी ढ़य म आता है:

दया — “उनके भी मन में कुछ दया आ गई।”
श्र म — “िकसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने को आगे बढ़ े ।”

लज्जा — “वह लिज्जत होकर कहने लगे िक, ‘नही ं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी।’”
बोध और पश्चाताप — “उनकी आँखे ं खुल गईं। कृतकम का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और
उसकी झोंपड़ ी वापस दे दी।”

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

‘आप ही स्वयं’ इतना महत्वपूण क्य है: इस कहानी म ज़म दार का हर काम अब तक कसी और के हाथ हुआ
था — नौकर के हाथ , वक ल के हाथ , अदालत के हाथ । जीवन म पहली बार वह अपने हाथ से कुछ उठाने
झुकता है। जस क्षण वह झुकता है, उसका घमंड टू टने लगता है। और जो सबक अपने शरीर से मलता है, वह कसी
उपदे श से नह मलता।

प्र.6 (च) “उन्ह ने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसक झ पड़ी वापस दे द ।” ज़म दार ने ऐसा क्य कया?

क्य क वृद्धा क बात ने उसे पहली बार अपने काम का असली वज़न महसूस करा दया।

“ज़मी ंदार साहब धन -मद से गिवत हो अपना कतव्य भूल गए थे पर वृद्ध ा के उपयुक्त वचन सुन ते ही उनकी आँखे ं

खुल गईं। कृतकम का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ ी वापस दे दी।”

तीन कारण एक साथ काम करते ह —

1. अनुभव — तक से नह , अपने हाथ क हार से उसे समझ आया क एक टोकरी म भी भारी है।
2. ल ा — यह हार नौकर के सामने हुई। जस रुतबे के बल पर वह अब तक चल रहा था, वही टू टा।
3. बोध — ‘आँख खुल गईं’ मुहावरा है — भ्रम टू टना, सच दखाई दे ने लगना। लेखक ने ठ क इसी जगह ‘कतव्य’ शब्द रखा है:
प ाताप तभी होता है जब आदमी को याद आ जाए क वह क्या करने के लए बना था।

प ाताप अधूरा नह छोड़ा गया: ज़म दार केवल ‘माफ़ कर दो’ कहकर नह रुकता — वह झ पड़ी लौटा दे ता है।
लेखक यहाँ एक ज़रूरी बात कह रहा है: स ा प ाताप वह है जो नुकसान क भरपाई भी करे। बना झ पड़ी लौटाए
माँगी गई क्षमा केवल शब्द होती।

अनुमान और कल्पना से — पृष्ठ 80-81
पाठ से

पाठ से

प्र.1 (क) य द वृद्धा क पोती ज़म दार से स्वयं बात करती तो वह क्या कहती?

यह कल्पना का प्रश्न है, पर कल्पना को कहानी से बँधा रहना चा हए — पोती पाँच-छह बरस क थी, इस लए वह वक ल और
अदालत क भाषा नह बोलेगी। वह वही कहेगी जो एक ब ा कहता है: सीधी, बना डरे, और इसी लए सबसे चुभने वाली बात।

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नमूना उत्तर:
“महाराज, आपके पास इतना बड़ा महल है। उसम कतने कमरे ह, आपको गनने भी नह आते ह गे। मेरे पास तो
बस एक कमरा था — उसी म मेरी माँ थी, उसी म मेरे बाबा थे। आप कहते ह क दूसरी जगह भी घर बन जाएगा। पर
घर तो वह होता है जहाँ अपने लोग रहे ह , है न? आपका महल आपसे कोई छ न ले तो क्या आप दूसरी जगह चले
जाएँगे? मुझे आपका महल नह चा हए, महाराज। मुझे मेरी झ पड़ी लौटा द जए। म आपके अहाते म एक कदम भी
नह रखूँगी।”

अ ा उत्तर कन बात से बनता है: (1) ब े जैसी सरल भाषा; (2) घर और महल क तुलना, क्य क यही
कहानी का मूल वरोध है; (3) एक ऐसा प्रश्न जसका उत्तर ज़म दार के पास न हो; (4) गाली या धमक बलकुल नह
— कहानी क वृद्धा भी बना कड़वाहट के ही जीतती है।

प्र.2 (ख) य द आप ज़म दार क जगह होते तो क्या करते?

पहले साफ़ पक्ष, फर कारण — यही इस तरह के प्रश्न का ढं ग है।

नमूना उत्तर: “म झ पड़ी हटवाने क सोचता ही नह । अहाता बढ़ाना मेरी इ ा थी, जब क उस झ पड़ी म रहना
वृद्धा क ज़रूरत थी। जहाँ कसी क इ ा और कसी क ज़रूरत आमने-सामने आ जाएँ, वहाँ ज़रूरत बड़ी होती
है। अगर अहाता बढ़ाना बहुत ज़रूरी होता तो म उसे दूसरी दशा म बढ़ाता, या वृद्धा से बात करके पहले उसके लए
उतनी ही अ जगह पर एक पक्का घर बनवाता और फैसला उसी पर छोड़ता — मानना या न मानना उसका हक़
होता। वक ल को पैसे दे कर अदालत से कब्ज़ा लेना मुझे जीत नह , धोखा लगता है, क्य क उसम कानून का
इस्तेमाल न्याय के ख़लाफ़ कया गया है।”

सोचने का सूत्र: यह पू छए क य द मेरी जगह कोई और होता और मेरा घर इस तरह छ ना जाता, तो मुझे कैसा
लगता? कहानी का ज़म दार यही एक प्रश्न अपने आप से नह पूछ पाया — और वृद्धा ने अंत म यही प्रश्न उसके हाथ
म टोकरी बनाकर पकड़ा दया।

प्र.3 (ग) ज़म दार को टोकरी उठाने म सफलता क्य नह मली होगी?

इसके दो स्तर ह, और दोन साथ-साथ चलते ह। अ े उत्तर म दोन आने चा हए।
1. व्यावहा रक कारण — टोकरी ऊपर तक म से भरी थी (“अपनी टोकरी म से भर ली”)। भरी हुई गीली म बहुत भारी
होती है — एक बड़ी टोकरी का बोझ आसानी से एक बोरे जतना हो सकता है। दूसरी बात, ज़म दार ने जीवन म कभी शारी रक श्रम
कया ही नह था; उसका हर काम नौकर करते थे। जो आदमी बोझ उठाने का अभ्यस्त ही नह , उसके लए ऐसी टोकरी सचमुच भारी
थी। वृद्धा उसे रोज़ उठाती रही होगी, इस लए उसके लए वह सामान्य बात थी।

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2. कहानी का असली कारण — लेखक ने यह असफलता जानबूझकर रची है। यहाँ टोकरी सफ़ टोकरी नह है —

एक टोकरी िम ी = वह छोटा-सा िहस्सा जो ज़मी ंदार ने ‘दान’ िकया

हजारों टोकिरयाँ िम ी = पूरी झोंपड़ ी, जो उसने छीन ली

दोनों का भार = अन्याय का भार

इसी लए वह ‘एक हाथ भी ऊँची न हुई’: लेखक लखता है — “यह काम उनक श क्त के बाहर है।” यह वाक्य
दो अथ एक साथ उठाता है। दे ह क श क्त भी, और नै तक सामथ्य भी। जस आदमी ने पूरी झ पड़ी उठा ली, वह
उसी झ पड़ी क एक टोकरी म नह उठा पाता — यही इस कहानी क सबसे बड़ी वडंबना है, और यही उसे याद
रखने लायक बनाती है।

प्र.4 (घ) “झ पड़ी म तो हजार टोक रयाँ म पड़ी है…” यहाँ केवल म क बात क जा रही है या कुछ और बात भी
छपी है? (संकेत— म कस बात का प्रतीक हो सकती है? म के बहाने वृद्धा क्या कहना चाहती है?)

बात केवल म क नह है। म यहाँ प्रतीक है — यानी एक ऐसी चीज़ जो अपने से बड़ी कसी बात क ओर इशारा करती है।

म कसका प्रतीक कहानी से आधार

घर िजस िम ी से झोंपड़ी बनी है, वही उसका घर है। पोती के िलए तो िम ी का चू ा ही ‘अपना घर’ है।

यादे ं और अपनापन उसी झोंपड़ी में उसका पित और इकलौता बेटा ग ज
ु ़ रा। भीतर जाते ही “पुर ानी बातों का स्मरण हआ
ु और आँखों
से आँस ू की धारा बहने लगी।”

जड़ें “वह तो कई ज़माने से वही ं बसी थी।” िम ी वह जगह है जहाँ पीिढ़ याँ जमी होती है।
ं

छीना गया हक़ और अन्याय “उसका भार आप जन्म -भर कै से उठा सकें गे?” — जो बोझ जीवन-भर चले , वह िम ी का नही ं, पाप का होता है।
का भार

म के बहाने वृद्धा क्या कह रही है: वह यह कह रही है क “आपने जो लया है, वह ज़मीन का टु कड़ा भर नह है
— वह मेरा घर, मेरी उम्र और मेरी सारी याद ह। और उसे लेकर आप हल्के नह हुए, भारी हुए ह।” सीधे यह कहती
तो झगड़ा होता। म के बहाने कहने पर ज़म दार को अपने ही हाथ से इसका प्रमाण मल गया। यही प्रतीक क
ताकत है — वह बात कहता नह , महसूस करा दे ता है।

शीषक पर लौ टए: कहानी का नाम ‘एक टोकरी भर म ’ है — नाम म ही वह वस्तु है जस पर पूरा अथ टका है।
अ े शीषक ऐसे ही होते ह।

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(ङ) यह कहानी आज से लगभग सवा सौ साल पहले लखी गई थी। इस कहानी के आधार पर बताइए क भारत
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म स्त्रय को कन- कन चुनौ तय का सामना करना पड़ता होगा?

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कहानी सीधे यह वषय नह उठाती, पर उसक एक-एक पं क्त म उस समय क स्त्री क त दखती है। हर चुनौती के साथ

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कहानी का आधार दे खए —

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चुनौती कहानी म इसका संकेत
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कमाने वाले पुरुष के िबना
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पित और इकलौते बेटे की म ृत्यु के बाद वृद्धा को कहानी ‘अनाथ’ कहती है — जबिक उसकी पोती साथ है। यानी

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कोई सहारा नही ं उस समाज में स्त्री तभी ‘सनाथ’ मानी जाती थी जब घर में कोई पुरुष हो।

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संपित्त पर पकड़ कमज़ोर
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वह ‘कई ज़माने से ’ वही ं बसी थी, िफर भी अदालत में अपना हक़ िसद्ध नही ं कर सकी।

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न्aयाय
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ज़मी ंदार ने वकील िकए, वृद्धा एक भी नही ं कर सकी। न पैस ा, न जानकारी, न कोई साथ दे ने वाला।

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आिथक िनभरता झोंपड़ी िछनते ही उसके पास कमाने या िठकाना बनाने का कोई साधन नही ं बचा — “पास-पड़ोस में कही ं जाकर

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रहने लगी।”

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िवनती के िसवा कोई रास्ता
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उसे िगड़िगड़ाना पड़ता है, हाथ जोड़ने पड़ते है,ं पैर ों पर िगरना पड़ता है — िम ी जैस ी मामूल ी चीज़ के िलए भी।
नही ं

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तीन पीिढ़ यों तक वही वृद्धा, उसकी पतोहू (जो जल्दी चल बसी) और पोती — तीनों िस्त्रयाँ है,ं और तीनों के पास कोई सुर क्षा नही ं।

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कमज़ोरी

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m क्या बदला: आज सं वधान स्त्री-पुरुष को समान अ धकार दे ता है; हदू उत्तरा धकार कानून म बेट को बेटे के
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agl बराबर हस्सा मलता है; गरीब और स्त्रय के लए नःशुल्क कानूनी सहायता क व्यव ा है और शकायत दज
कराने के लए सरकारी पोटल तथा हेल्पलाइन उपलब्ध ह। फर भी सबसे बड़ी बात कानून नह , जानकारी है —
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वृद्धा हारी इस लए नह क वह कमज़ोर थी, ब ल्क इस लए क उसे रास्ता मालूम ही नह था।
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बदली कहानी — पृष्ठ 81
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पाठ से

पाठ से गतवध

प्र.1 कल्पना क जए क कहानी कैसे आगे बढ़ती— • य द ज़म दार टोकरी उठाने से मना कर दे ता • य द ज़म दार
टोकरी उठा लेता • य द ज़म दार म दे ने से मना कर दे ता • य द ज़म दार एक स्त्री होती • य द पोती ज़म दार से
अपनी झ पड़ी वापस माँगती

हर त म कहानी का मोड़ बदल जाता है। नीचे पाँच के लए एक-एक संभा वत दशा द गई है — इन्ह अपनी कल्पना से आगे
बढ़ाइए।

य द… कहानी कस ओर मुड़ती

ज़मी ंदार टोकरी वृद्धा को टोकरी अके ले ही उठानी पड़ती। तब सबक ज़मी ंदार के शरीर तक न पहच
ु ँ ता। शायद वह अपनी बात शब्द ों में
उठाने से मना कर कहती — “जो भार आप छू भी नही ं सकते, वह मैं जीवन-भर उठाती रही। ” असर होता, पर उतना गहरा नही ं। कहानी
दे ता िसखाती है िक कु छ बाते ं सुनकर नही,ं करके समझ में आती है।
ं

ज़मी ंदार टोकरी तब कहानी का पूर ा पतीक ढह जाता। वृद्धा को दू स रा रास्ता खोजना पड़ता — शायद वह कहती, “यह तो एक टोकरी है,
उठा ले ता महाराज; अब हज़ार बार यही उठाइए , तब पूर ी झोंपड़ी बनेग ी। ” यानी बात िफर भी वही, पर चोट हल्की। मूल कहानी में
ले खक ने असफलता इसीिलए रखी है।

ज़मी ंदार िम ी दे ने तब घमंड और कठोर होकर िदखता। वृद्धा खाली हाथ लौटती, पोती और कमज़ोर होती जाती। कहानी दुखांत होती —
से मना कर दे ता और शायद पास -पड़ोस के लोग इक ा होकर आवाज़ उठाते। यह कहानी को एक व्यिक्त के हृ दय-पिरवतन से हटाकर
समाज के पितरोध की कहानी बना दे ता।

ज़मी ंदार एक स्त्री एक स्त्र ी शायद वृद्धा के दुख को पहले पहचान ले ती — िवधवा होने, बच्चों को खोने और घर से उजड़ने की पीड़ा उसके
होती अपने अनुभव के ज्य़ ादा पास होती। ऐसे में कहानी टोकरी तक पहच
ु ँ ने से पहले ही मुड़ सकती थी। पर यह मान ले ना भी
ठीक नही ं िक स त्त ा पाकर कोई भी नही ं बदलता — धन-मद स्त्र ी-पुरुष नही ं दे खता। दोनों िदशाओं में कहानी िलखी जा
सकती है।

पोती ज़मी ंदार से बच्ची न िवनती जानती है, न डर। वह सीधे पूछती — “यह घर मेर ा है, आपने क्यों िलया?” उसके सामने ज़मी ंदार को कोई
अपनी झोंपड़ी बहाना नही ं सूझता। कहानी छोटी और तेज़ हो जाती, पर टोकरी वाला वह अद् भतु दृ श्य हमें न िमलता।
वापस माँग ती

प्र.2 अपने समूह के साथ इनम से कसी एक त को चुनकर चचा क जए। इस बदली हुई कहानी को मलकर
ल खए।

कैसे लख —

1. एक त चु नए और तय क जए क कहानी कस पं क्त से बदलनी शुरू होगी। मूल कहानी वह तक जस-क -तस रहेगी।
2. पात्र का स्वभाव मत बद लए। वृद्धा वनम्र है, ज़म दार घमंडी पर पूरी तरह पत्थर- दल नह , पोती ज़ — नई कहानी म भी वे
ऐसे ही रह।

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3. कम-से-कम एक संवाद ज़रूर र खए; मूल कहानी का असर संवाद से ही बनता है।
4. अंत जल्द मत लपे टए — बताइए क बदलाव का प रणाम क्या हुआ।

नमूना उत्तर ( त — य द ज़म दार टोकरी उठा लेता):
…ज्य ही ज़म दार ने टोकरी को हाथ लगाया, त्य ही उन्ह ने ज़ोर लगाकर उसे उठा दया और वृद्धा के सर पर धर
दया। मन-ही-मन वे प्रसन्न हुए क बु ढ़या ने उन्ह कमज़ोर समझा था।
वृद्धा ने सर पर टोकरी सँभालते हुए धीरे से कहा, “महाराज, आपक बाँह म तो बड़ा बल है। एक टोकरी आपने उठा
ली। पर इस झ पड़ी म ऐसी हजार टोक रयाँ म पड़ी है। कल आप एक और उठाइएगा, परस एक और… जस
दन आप हजार उठा लगे, उस दन आपको पता चलेगा क आपने मुझसे कतना लया है।”
ज़म दार हँसकर आगे बढ़ गए। पर रात को न द नह आई। सुबह उठते ही वे झ पड़ी क ओर चले और वहाँ बहुत दे र
खड़े रहकर उसक द वार दे खते रहे। तीसरे दन उन्ह ने आदमी भेजकर वृद्धा को बुलवाया और कहा, “मने कल एक
टोकरी उठाई थी। रात-भर वही भारी होती गई। यह लो अपनी चाबी, और मुझे क्षमा कर दो।”

‘ क’ और ‘क ’ का उपयोग — पृष्ठ 81-82
पाठ से

पाठ से

प्र.1 अब नीचे दए गए वाक्य म इन दोन शब्द का उपयुक्त प्रयोग क जए— 1. वृद्धा ने कहा ______ वह झ पड़ी को
लेने नह आई है। 2. वह अपनी पोती ______ चता म दुखी हो गई थी। 3. वृद्धा ने प्राथना ______ ______ टोकरी को
ज़रा हाथ लगाइए। 4. पोती हमेशा कहती थी ______ वह अपने घर म ही खाना खाएगी। 5. झ पड़ी ______ म से
वृद्धा चूल्हा बनाना चाहती थी। 6. उसे वश्वास था ______ म का चूल्हा दे खकर पोती खाना खाने लगेगी। 7.
वृद्धा ______ आँख से आँसुओं ______ धारा बहने लगी। 8. उसने यह सोचा ______ झ पड़ी से म ले जाकर
चूल्हा बनाऊँगी। 9. वृद्धा के मन ______ पीड़ा उसक बात म झलक रही थी। 10. ज़म दार इतने ल त हुए
______ टोकरी उठाने क बात मान ली। 11. उस झ पड़ी ______ हर द वार वृद्धा ______ याद से भरी थी।

पहले नयम, फर उत्तर — तब कोई भी नया वाक्य आप स्वयं भर सकगे।

िक = संयोजक। दो वाक्यों को जोड़ ता है और बताता है — क्या कहा गया, क्या सोचा गया, क्या दे खा गया।
की = संबंधसूच क कारक। दो सं ाओं के बीच संबंध बताता है; इसके साथी शब्द है ं का और के ।

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क्रम पूरा वाक्य सही शब्द

1. वृद्धा ने कहा िक वह झोंपड़ी को ले ने नही ं आई है। िक

2. वह अपनी पोती की िचंता में दुखी हो गई थी। की

3. वृद्धा ने पाथना की िक टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए। की, िक

4. पोती हमेशा कहती थी िक वह अपने घर में ही खाना खाएगी। िक

5. झोंपड़ी की िम ी से वृद्धा चू ा बनाना चाहती थी। की

6. उसे िवश्वास था िक िम ी का चू ा दे खकर पोती खाना खाने लगेग ी। िक

7. वृद्धा की आँखों से आँस ुओ ं की धारा बहने लगी। की, की

8. उसने यह सोचा िक झोंपड़ी से िम ी ले जाकर चू ा बनाऊँगी। िक

9. वृद्धा के मन की पीड़ा उसकी बातों में झलक रही थी। की

10. ज़मी ंदार इतने लिज्जत हुए िक टोकरी उठाने की बात मान ली। िक

11. उस झोंपड़ी की हर दीवार वृद्धा की यादों से भरी थी। की, की

पहचानने के तीन आसान परीक्षण:

पहले का शब्द दे खए। य द उससे पहले कहा, सोचा, दे खा, सुना, वश्वास था, भरोसा है, लगा जैसा कोई शब्द
है, तो क आएगा — क्य क आगे उसी क बात बताई जा रही है (वाक्य 1, 4, 6, 8)।
दोन ओर सं ा है क्या? ‘पोती __ चता’, ‘झ पड़ी __ म ’, ‘मन __ पीड़ा’ — दोन ओर सं ा हो तो क
(वाक्य 2, 5, 7, 9, 11)।
का / के लगाकर दे खए। जहाँ ‘क ’ क जगह ‘का’ या ‘के’ फट बैठ सकता हो, वह ‘क ’ है — ‘झ पड़ी क
म / झ पड़ी का दरवाज़ा / झ पड़ी के कोने’। ‘ क’ क जगह ‘का’ कभी नह बैठेगा।

वाक्य 3 और 10 पर ध्यान: वाक्य 3 म दो-दो रक्त ान ह — पहला क्रया वाला ‘क ’ (प्राथना करना → प्राथना
क ), दूसरा जोड़ने वाला ‘ क’। और वाक्य 10 म ‘इतने… क’ एक जोड़ी है, जो प रणाम बताती है — जैसे ‘इतनी
तेज़ दौड़ा क गर पड़ा’।

मुहावरे — पृष्ठ 82

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पाठ से

पाठ से

प्र.1 “बाल क खाल नकालने वाले वक ल क थैली गरम कर उन्ह ने अदालत से झ पड़ी पर अपना कब्जा कर
लया।” (क) इस वाक्य म मुहावर क पहचान करके उन्ह रेखां कत क जए।

इस एक वाक्य म दो मुहावरे ह —

“बाल की खाल िनकालने वाले वकीलों की थै ली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ ी पर अपना कब्जा कर

िलया।”

मुहावरा अथ वाक्य म यह क्या बता रहा है

बाल की खाल व्यथ की बारीिकयाँ िनकालना, हर बात में मीन- वक ल कानून क छोट -से-छोट दरार पकड़कर रास्ता
िनकालना मेख करना नकालने वाले थे।

थैल ी गरम करना िरश्वत दे ना, घूस िखलाना ज़म दार ने उन वक ल को पैसे खलाए।

दो मुहावरे, पूरा सच: य द लेखक सीधे लखता क ‘ज़म दार ने वक ल को रश्वत द और मुकदमा जीत लया’, तो
बात सपाट रह जाती। इन दो मुहावर से एक साथ तीन बात आ जाती ह — वक ल का च रत्र, ज़म दार का तरीका,
और लेखक का व्यंग्य। ध्यान द जए क आगे लखा है ‘अदालत से… कब्जा कर लया’। अदालत तो न्याय क जगह
है, पर यहाँ वह अन्याय का साधन बन गई — और इसक सारी ज़म्मेदारी इन्ह दो मुहावर पर टक है।

ध्यान र खए: ‘कब्जा कर लेना’ मुहावरा नह , सामान्य क्रया है — उसका अथ वही है जो शब्द से नकलता है।
मुहावरा वही है जसका अथ उसके शब्द से अलग हो।

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म
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(ख) ‘बाल’ शब्द से जुड़े नम्न ल खत मुहावर का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए। • बाल बाँका न होना— कुछ
भी कष्ट या हा न न पहुँचना। पूण रूप से सुर क्षत रहना। • बाल बराबर— बहुत सूक्ष्म। बहुत e m या पतला। •
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co फक होना— ज़रा-सा भी भेद होना। सूक्ष्मतम अंतर होना। • बाल-बालaबचना— gl कोई वप त्त आने या
महीन

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बाल बराबर

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मुहावरा अथ

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बाल बाँक ा न होना कु छ भी कष्ट या हािन न पहच
ु ँ ना, पूर ी इतनी बड़ी दुघटना म बस पलट गई, पर ाइवर का बाल बाँका न हुआ।

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तरह सुर िक्षत रहना

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बाल बराबर
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बहुत सूक्ष्म , बहुत महीन या पतला
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द वार म बाल बराबर दरार थी, फर भी बरसात का पानी भीतर आ गया।

. co दोन जुड़वाँ बहन क आवाज़ म a glबराबर फक भी नह है, इसी लए
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बाल बराबर फक ज़रा-सा भी भेद होना, सूक्ष्म तम अंतर बाल

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होना होना फोन पर सब धोखा खा जाते ह।

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बाल -बाल बचना िवपित्त आने में बहुत थोड़ी कमी रह जाना गद ठ क खड़क क ओर आई, पर काँच टू टने से हम बाल-बाल बचे।

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glवह सबसे छोट , सबसे महीन चीज़ का माप बन जाता है। ‘बाल बराबर फक
‘बाल’ से जुड़ा एक और: ‘बाल क खाल नकालना’ — जो अभी इसी पाठ म आया है। ध्यान द जए क इन सभी
मुहावर म ‘बाल’ का काम एक ही हैa—
न होना’ यानी इतना भी अंतर नह जतना एक बाल; ‘बाल-बाल बचना’ यानी बचने और न बचने के बीच बस एक

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बाल क दूरी थी।

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g है, और उसका अथ अलग से
m .c बनाते समय: मुहावरे को वाक्य म उसी रूप म र खए जस रूप म वह चलता
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वाक्य

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मत ल खए। ‘वह बाल-बाल बच गया अथात् उसे थोड़ी चोट लगी’ — ऐसा लखना मुहावरे को मार दे ना है।

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काल — पृष्ठ 82-83
पाठ से

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पाठ से

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नीचे दए गए वाक्य को वतमान और भ वष्य काल म बद लए— (क) वहlaगड़ गड़ाकर बोली। (ख) श्रीमान् ने
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प्र.1
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l a s आ ा दे द । (ग) उसक आँख से आँसू क धारा बहने लगी। (घ) ज़म दार साहब को अपने महल का अहाता उस

ag झ पड़ी तक बढ़ाने क इ ा हुई। (ङ) उन्ह ने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसक झ पड़ी वापस दे द ।
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s e m है क काम पहले ही हो चुका है।
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पाँच वाक्य भूतकाल म ह — इनम बताया गया

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

भूतकाल (पाठ का वाक्य) वतमान काल भ वष्य काल

(क) वह िगड़िगड़ाकर बोली। वह िगड़िगड़ाकर बोलती है। वह िगड़िगड़ाकर बोले ग ी।

(ख) श्रीमान् ने आ ा दे दी। श्रीमान् आ ा दे दे ते है।ं श्रीमान् आ ा दे दे ंगे।

(ग) उसकी आँखों से आँस ू की धारा बहने उसकी आँखों से आँस ू की धारा बहने उसकी आँखों से आँस ू की धारा बहने
लगी। लगती है। लगेग ी।

(घ) ज़मी ंदार साहब को अपने महल का ज़मी ंदार साहब को अपने महल का अहाता ज़मी ंदार साहब को अपने महल का अहाता
अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ ाने की इच्छा उस झोंपड़ी तक बढ़ ाने की इच्छा होती है। उस झोंपड़ी तक बढ़ ाने की इच्छा होगी।
हुई।

(ङ) उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँग ी और उसकी वे वृद्धा से क्षमा माँग ते है ं और उसकी वे वृद्धा से क्षमा माँग ेंग े और उसकी झोंपड़ी
झोंपड़ी वापस दे दी। झोंपड़ी वापस दे दे ते है।
ं वापस दे दे ंग े।

बदलते समय ‘ने’ का क्या हुआ: (ख) और (ङ) म भूतकाल के वाक्य ‘श्रीमान् ने’, ‘उन्ह ने’ से शुरू होते ह, पर
वतमान और भ वष्य म ‘ने’ हट जाता है और ‘उन्ह ने’ लौटकर ‘वे’ हो जाता है। कारण यह है क हद म ‘ने’ केवल
भूतकाल क सकमक क्रयाओं के साथ आता है — ‘उसने लखा’ ठ क है, पर ‘उसने लखता है’ नह । इसी नयम
को ध्यान म रखकर वाक्य बद लए, वरना काल तो बदल जाएगा पर वाक्य अशुद्ध रह जाएगा।

याद र खए — क्रया के जस रूप से पता चले क काम कब हुआ, हो रहा है या होने वाला है, उसे काल कहते ह।
भूतकाल — काम पहले हो चुका (बोली, दे द , हुई)। वतमान काल — काम अभी हो रहा है या सामान्य रूप से होता
रहता है (बोलती है, दे ते ह)। भ वष्य काल — काम आने वाले समय म होगा (बोलेगी, दगे)।

वचन क पहचान — पृष्ठ 83
पाठ से

पाठ से

प्र.1 “उनके मन म कुछ दया आ गई।” / “उनक आँख खुल गईं।” ऊपर दए गए रेखां कत शब्द म क्या अंतर है और
क्य ? आपस म चचा करके पता लगाइए।

अंतर केवल एक अनुस्वार (◌ं) का है, पर वह पूरा वचन बदल दे ता है — गई एकवचन है और गईं बहुवचन।

वाक्य क्रया कसके अनुसार चलेगी वचन क्रया-रूप

उनके मन में कु छ दया आ गई। दया एकवचन गई

उनकी आँखें खुल गईं। आँख बहुवचन गईं

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

असली बात यह है क क्रया कससे मेल खाती है: दोन वाक्य म ‘उनके/उनक ’ आया है, इस लए लगता है क
क्रया ज़म दार के अनुसार चलेगी। पर ऐसा नह है। क्रया वाक्य के कता से मेल खाती है — पहले वाक्य म कता
‘दया’ है (एक भाव, एकवचन), दूसरे म ‘आँख’ ह (दो, बहुवचन)। इसी लए एक जगह ‘गई’ है और दूसरी जगह
‘गईं’।

एक और परत: ‘उनके’, ‘उनक ’ स्वयं आदरसूचक बहुवचन ह — ज़म दार एक ही व्य क्त है, फर भी लेखक उसके
लए ‘उन्ह ने’, ‘वे’ लखता है। हद म आदर दखाने के लए बहुवचन का प्रयोग होता है, जैसे ‘ पताजी आए ह’। पर
याद र खए — यह आदरसूचक बहुवचन क्रया के उस मेल को नह बदलता जो कता से बनता है।

प्र.2 नीचे दए गए रक्त ान म उपयुक्त शब्द भ रए— (क) वृद्धा झ पड़ी के भीतर ______ । (गई/गईं) (ख) वृद्धा
गड़ गड़ाकर ______ । (बोली/बोल ) (ग) पोती ने खाना-पीना छोड़ दया ______ । (है/ह) (घ) उसक आँख से
आँसू क धारा बहने लगी ______ । (थी/थ ) (ङ) उसने अपनी टोकरी म से भर ली और बाहर ले ______ ।
(आई/आईं) (च) झ पड़ी म बसी पुरानी याद वृद्धा को रुला ______ । (गई/गईं) (छ) पाठक दे ख सकते ह क कैसे
एक छोट -सी टोकरी ने बड़े बदलाव ला दए ______ । (है/ह)

पूरा वाक्य सही क्य
शब्द

(क) वृद्धा झोंपड़ी के भीतर गई। गई कता ‘वृद्धा’ — एक स्त्री, एकवचन।

(ख) वृद्धा िगड़िगड़ाकर बोली। बोली वही एक वृद्धा बोल रही है, इस लए एकवचन।

(ग) पोती ने खाना-पीना छोड़ िदया है। है कम ‘खाना-पीना’ एकवचन है; और पोती भी एक ही है।

(घ) उसकी आँखों से आँस ू की धारा बहने लगी थी। थी कता ‘धारा’ है, ‘आँख’ नह । धारा एक है — एकवचन।

(ङ) उसने अपनी टोकरी िम ी से भर ली और बाहर ले आई। आई लाने वाली एक ही वृद्धा है, और टोकरी भी एक —
एकवचन।

(च) झोंपड़ी में बसी पुर ानी यादे ं वृद्धा को रुला गईं। गईं कता ‘याद’ — बहुवचन। इस लए अनुस्वार लगेगा।

(छ) पाठक दे ख सकते है ं िक कै से एक छोटी-सी टोकरी ने बड़े है ं कम ‘बड़े बदलाव’ बहुवचन है — ‘बदलाव’ के साथ
बदलाव ला िदए है।
ं ‘बड़े’ लगा है, ‘बड़ा’ नह ।

सबसे ज़्यादा गलती (घ) म होती है: वाक्य म ‘आँख ’ शब्द पहले आ जाता है, इस लए बहुत लोग ‘थ ’ लख दे ते
ह। पर वाक्य से पू छए — बह क्या रही थी? उत्तर है ‘धारा’, आँख नह । आँख तो वह जगह ह जहाँ से धारा बह रही
है। क्रया हमेशा कता से मेल खाती है, बीच म आए हुए शब्द से नह ।

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

जाँचने का तरीका: क्रया से ठ क पहले ‘कौन’ या ‘क्या’ लगाकर प्रश्न पू छए — जो उत्तर मले, वही कता है। ‘कौन
रुला गईं?’ → याद (बहुवचन) → ‘गईं’। ‘कौन गई?’ → वृद्धा (एकवचन) → ‘गई’।

कहानी क रचना — पृष्ठ 84
पाठ से

पाठ से

प्र.1 “यह सुनकर वृद्धा ने कहा, “महाराज, नाराज न ह तो…”” इस पं क्त म लेखक ने जानबूझकर वृद्धा क कही हुई
बात को अधूरा छोड़ दया है। (क) आपको इस कहानी म ऐसी अनेक वशेषताएँ दखाई दगी। उन्ह अपने समूह के
साथ मलकर ढूँ ढ़ए और उनक सूची बनाइए।

पहले उसी उदाहरण को समझ ली जए जो पाठ ने दया है। ‘…’ लगाकर लेखक ने वृद्धा क बात बीच म रोक द । इससे पढ़ने वाला
एक क्षण रुककर सोचता है — अब यह क्या कहेगी? — और अगली पं क्त क चोट दुगुनी हो जाती है।
कहानी क अन्य वशेषताएँ (सूची) —

प्रतीक का प्रयोग — ‘एक टोकरी भर म ’ सफ़ म नह , छ ने गए घर और अन्याय के भार का प्रतीक है। शीषक भी वही
प्रतीक है।
दखाना, बताना नह — लेखक कह नह लखता क ‘अन्याय का बोझ भारी होता है’। वह टोकरी उठवाकर दखा दे ता है।
मुहावर से च रत्र गढ़ना — ‘बाल क खाल नकालने वाले वक ल क थैली गरम कर’ — दो मुहावर म पूरी बेईमानी आ गई।
छोटे , तेज़ वाक्य — ‘ बचारी अनाथ तो थी ही, पास-पड़ोस म कह जाकर रहने लगी।’ बड़ी त्रासद एक पं क्त म।
भाषा का मेल — तत्सम शब्द (मृतप्राय, नष्फल, कृतकम, प ाताप) और उदू-फ़ारसी शब्द (ज़म दार, अहाता, अदालत,
कब्ज़ा) साथ-साथ चलते ह।
व्यंग्य — छ नने वाले को लगातार ‘श्रीमान्’ और ‘महाराज’ कहा गया है — आदर के शब्द से बेइज़्ज़ती।
दृश्य पर टका मोड़ — पूरी कहानी एक ही दृश्य पर घूम जाती है — टोकरी का न उठना।
प्रश्न पर छोड़ना — ‘उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकगे? आप ही इस बात पर वचार क जए।’ उपदे श नह , प्रश्न।
सं क्षप्तता — पूरी कहानी दो पृष्ठ म — न कोई अ त रक्त पात्र, न कोई अ त रक्त घटना।

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

प्र.2 (ख) इस कहानी क कुछ वशेषताओं को नीचे दया गया है। इनके उदाहरण कहानी से चुनकर ल खए— 1.
प्रश्नोत्तरी शैली— कहानी म ऐसे प्रश्न ह जो पाठक को सोचने पर ववश कर दे ते ह। 2. वणनात्मकता— लेखक ने
जगह और भावनाओं का ऐसा चत्र ख चा है क पाठक दृश्य को दे ख सकता है। 3. भावात्मकता— कहानी म
करुणा, पछतावा और प्रेम जैसे गहरे भाव दखते ह। 4. संवादात्मकता— पात्र के संवाद से कहानी आगे बढ़ती है
और प्रभावी बनती है। 5. नाटक यता— कुछ दृश्य इतने प्रभावशाली ह क वे नाटक जैसे लगते ह। 6. च रत्र चत्रण
— पात्र के गुण, स्वभाव और मन क त स्पष्ट रूप से दखती है।

कहानी क कहानी से उदाहरण यह वहाँ क्या कर रहा है
वशेषताएँ

1. पश्नोत्त री शैल ी “उसका भार आप जन्म-भर कै से उठा सकें गे? आप ही इस बात प्रश्न ज़म दार से पूछा गया है, पर वह सीधे पाठक
पर िवचार कीिजए।” तक पहुँचता है। उत्तर लेखक नह दे ता — हम दे ना
पड़ता है।

2. वणनात्मकता “वृद्धा झोंपड़ी के भीतर गई। वहाँ जाते ही उसे पुर ानी बातों का जगह और भाव एक साथ खच जाते ह — भीतर
स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँस ू की धारा बहने लगी।” जाना, याद आना, आँसू बहना; तीन क्रयाएँ और पूरा
दृश्य आँख के सामने।

3. भावात्मकता “जब उसे अपनी पूविस्थित की याद आ जाती तो मारे दुख के पहले करुणा, फर पछतावा। कहानी म पोती का
फू ट-फू ट कर रोने लगती थी।” और अंत में — “कृ तकम का लगाव प्रेम को भी जोड़ दे ता है — “अपने घर चल,
पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँग ी।” वह रोट खाऊँगी।”

4. संवादात्मकता “महाराज, अब तो झोंपड़ी तुम्हारी ही हो गई है। मैं उसे ले ने नही ं यह से कहानी मुड़ती है। वृद्धा का हर वाक्य ज़म दार
आई हू।
ँ महाराज क्षमा करे ं तो एक िवनती है। ” को एक कदम आगे ख चता है — पहले सुनने पर,
फर टोकरी उठाने पर।

5. नाटकीयता “ज्यों ही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ही दे खा ‘ज्य ही… त्य ही’ से समय एकदम धीमा हो जाता
िक यह काम उनकी शिक्त के बाहर है… वहाँ से वह एक हाथ भी है। नौकर खड़े ह, मा लक ज़ोर लगा रहा है, टोकरी
ऊँची न हुई।” हलती नह — यह मंच का दृश्य है।

6. चिर त्र िचत्र ण “ज़मी ंदार साहब धन-मद से गिवत हो अपना कतव्य भूल गए एक ही पात्र के दो सरे दख जाते ह — शुरू म ‘धन-
थे। ” / “वह लिज्जत होकर कहने लगे…” / वृद्धा — मद से ग वत’, अंत म ‘ल त’। वृद्धा का च रत्र
“िगड़िगड़ाकर बोली”, “हाथ जोड़कर… पाथना करने लगी”। उसक क्रयाओं से बनता है, वशेषण से नह ।

ध्यान दे ने क बात: ये छह वशेषताएँ अलग-अलग खान म नह बँट ह — एक ही दृश्य म कई साथ चलती ह।
टोकरी वाला दृश्य नाटक य भी है, वणनात्मक भी, और उसी म ज़म दार का च रत्र भी खुलता है। अ कहानी म हर
वाक्य एक से ज़्यादा काम करता है — यही कारण है क इतनी छोट कहानी सवा सौ साल बाद भी पढ़ जाती है।

शब्दकोश का उपयोग — पृष्ठ 85

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म
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पाठ से
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पाठ से

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a s emकुछ शब्द के अनेक अथ शब्दकोश से चुनकर दए गए ह। इन शब्द के जो अथ इस कहानी के अनुसार
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नीचे
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प्र.1
सबसे उपयुक्त ह, उन पर घेरा बनाइए— 1. श्रीमान् के सब प्रयत्न नष्फल हुए — धनी, शोभायुक्त, शोभावान्,

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संप त्तशाली, संपन्न, पुरुष के नाम के पूव आदर सूचनाथ लगाया जाने वाला शब्द। 2. पतोहू भी एक पाँच बरस

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क कन्या को छोड़कर चल बसी थी। — अ ववा हत लड़क , एक रा श का नाम, लड़क , बड़ी इलायची। 3.

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ज़म दार साहब को अपने महल का अहाता उस
s emझ पड़ी तक बढ़ाने क इ ा हुई। — राजा या रईस आ द के रहने
a gl अंतःपुर, पत्नी, उतरने क जगह। 4. वह तो कई ज़माने से वह बसी
का बहुत बड़ा और ब ढ़या मकान, प्रासाद,
थी। — काल, बहुत अ धक समय, सौभाग्य का समय, संसार, जगत, राज्यकाल, अव ध, युग, कायकाल, वलंब,
दे र, अ तकाल। 5. यही उसक पोती इस वृद्धाकाल म एकमात्र आधार थी। — सहारा, आलंबन, पात्र (नाटक),
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em.
न व, बाँध, नहर, संबंध, बरतन, प र तयाँ, अ धष्ठान, आश्रय दे नेवाला, पालन करनेवाला।

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घेरा कस अथ पर वह क्य

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श्रीमान् पुरुषों के नाम के पूव आदर वाक्य म ‘श्रीमान्’ कसी क संप त्त नह बता रहा, ब ल्क ज़म दार को संबो धत कर रहा है —

s e mने आ ा दे द ’। कहानी म लेखक इसे व्यंग्य के साथ बरतता है: जो आदमी
la ’ कहलाता है, उसका काम श्रीमान जैसा नह है।
सूचनाथ लगाया जाने वाला जैसे ‘श्रीमान्
शब्द
ag‘श्रीमान्
लड़की यहाँ पाँच बरस क ब ी क बात है। ‘अ ववा हत लड़क ’ शब्दकोश म सही है, पर पाँच साल
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कन्या

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क ब ी के लए वह अथ अटपटा है; और ‘एक रा श का नाम’ या ‘बड़ी इलायची’ का यहाँ कोई
संबंध नह ।
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महल .c राजा या रईस आिद के रहने
m का बहतु बड़ा और बिढ़ या agहै — इस लए ‘पत्नी’ या ‘अंतःपुर’ जैसे
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वाक्य म महल का ‘अहाता’ है, यानी वह एक इमारत

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अथ यहाँ नह चलगे। यही अथ झ पड़ी के ठ क उलट खड़ा होकर कहानी का वरोध बनाता है।
मकान, पासाद

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ज़माना बहुत अिधक समय
comहै (‘ज़माना क्या कहेगा’), यहाँ नह ।
‘कई ज़माने से वह बसी थी’ — यानी बहुत लंबे समय से, पी ढ़य से। ‘संसार/जगत’ अथ दूसरे
प्रयोग म .चलता g l a
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आधार सहारा
agl ‘एकमात्र आधार थी’ — पोती वृद्धा का सहारा थी। ‘न व’, ‘बरतन’, ‘बाँध’ जैसे अथ भौ तक
चीज़ के लए ह; यहाँ बात भावनात्मक और व्यावहा रक सहारे क है।

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m अथ शब्दकोश तय नह
शब्दकोश इस्तेमाल करने का नयम: शब्दकोश एक शब्द के कई अथ दे ता है, पर eसही
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gl वह शब्द कसके बारे म बात कर
o — वाक्य तय करता है। इस लए पहले वाक्य प ढ़ए, फर दे खए कaउसम
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रहा है — व्य क्त के, वस्तु के, समय के या भाव के। फर उसी को ट का अथ चु नए। ‘ज़माना’ यहाँ समय बता रहा
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है, इस लए समय वाला अथ ही चलेगा।

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करके दे खए: ‘आधार’ के बाक अथ भी सही वाक्य म डालकर दे खए — “पुल का आधार मज़बूत है” (न व), agl
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“इस नाटक का मुख्य पात्र…” य करने से एक ही शब्द के कई चेहरे याद हो जाते ह।
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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

भाव क पहचान — पृष्ठ 86
पाठ से

पाठ से

प्र.1 “कृतकम का प ाताप कर उन्ह ने वृद्धा से क्षमा माँगी…” कहानी क इस पं क्त से कौन-कौन से भाव प्रकट हो रहे
ह? सही पहचाना, इस पं क्त से प ाताप और क्षमा के भाव प्रकट हो रहे ह। अब नीचे द गई पं क्तय म प्रकट हो
रहे भाव से उनका मलान क जए— (भाववाचक सं ाएँ: ममता/स्नेह · दुख/पीड़ा · वनम्रता/ वनय · अहंकार/
घमंड · बोध/आत्म ान · आ ा/ वश्वास · जुड़ाव/मोह · करुणा/दया · क्रूरता/अन्याय · ल ा/पछतावा)

क्रम पं क्तयाँ भाववाचक पहचान कहाँ से
सं ा

1. वह लिज्जत होकर कहने लगे— ‘नही ं, यह टोकरी हमसे न ल ज्जा / पछतावा ‘ल त’ शब्द ही सीधा संकेत है; नौकर के
उठाई जाएगी।’ सामने हार का शम।

2. वृद्धा के उपयुक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गईं। बोध / आ त्म ान ‘आँख खुलना’ मुहावरा है — भ्रम टू टना, सच
दखाई दे ना।

3. उनके मन में कु छ दया आ गई। क रुणा / दया दूसरे के दुख से मन का पघलना ही करुणा है।

4. इससे भरोसा है िक वह रोटी खाने लगेग ी। आ स्था / िवश्वास ‘भरोसा है’ — जो अभी हुआ नह , उस पर
यक न।

5. महाराज क्षमा करे ं तो एक िवनती है। िवनम ता / िवनय ‘क्षमा कर’ और ‘ वनती’ — दोन झुककर
बोले गए शब्द।

6. अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। ममता / स्नेह दाद और पोती का रश्ता — बड़े का छोटे के
प्र त प्रेम।

7. ज़मी ंदार साहब धन-मद से गिवत हो अपना कतव्य भूल गए अहंक ार / घमंड ‘मद’ = नशा, ‘ग वत’ = घमंड से भरा हुआ।
थे।

8. उस झोंपड़ी में उसका मन ऐसा कु छ लग गया था िक िबना जुड़ाव / मोह ‘मन लग जाना’ और मरने तक न छोड़ना —
मरे वहाँ से वह िनकलना ही नही ं चाहती थी। यह जगह से बँध जाना है।

9. जब उसे अपनी पूविस्थित की याद आ जाती तो मारे दुख के दुख / पीड़ा ‘मारे दुख के’ और ‘फूट-फूट कर रोना’ —
फू ट-फू ट कर रोने लगती थी। शब्द स्वयं बता रहे ह।

10. बाल की खाल िनकालने वाले वकीलों की थैल ी गरम कर ू रता / अन्याय रश्वत दे कर एक अनाथ बु ढ़या का घर छ नना
उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर िलया। — यह नदयता भी है और अन्याय भी।

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

भाववाचक सं ा क्या होती है: जो सं ा कसी भाव, दशा या गुण का नाम हो — दया, अहंकार, ल ा, वश्वास।
इन्ह छु आ नह जा सकता, केवल अनुभव कया जा सकता है। ध्यान द जए क ये अक्सर वशेषण या क्रया से
बनती ह: ल त→ल ा, दयालु → दया, वनम्र → वनम्रता, ग वत → गव। इसी सूत्र से आप कोई भी नई
भाववाचक सं ा बना सकते ह।

पूरी सूची एक साथ प ढ़ए: अहंकार → क्रूरता → करुणा → ल ा → बोध → प ाताप। यह केवल दस पं क्तय
क सूची नह , ज़म दार के मन क पूरी यात्रा है — और उसके आर-पार वृद्धा के भाव चलते ह: मोह, दुख, ममता,
वनय, वश्वास।

वाक्य वस्तार — पृष्ठ 86-87
पाठ से

पाठ से

प्र.1 अब इसी प्रकार नीचे दए गए वाक्य का कहानी को ध्यान म रखते हुए वस्तार क जए। प्रत्येक वाक्य म लगभग
15–20 शब्द हो सकते ह। 1. एक झ पड़ी थी। 2. श्रीमान् टहल रहे थे। 3. वह खाने लगेगी। 4. वृद्धा भीतर गई। 5.
आगे बढ़े ।

छोटा वाक्य वस्तार (लगभग 15–20 शब्द) क्या जोड़ा गया

1. एक झोंपड़ी िकसी श्रीमान् ज़मी ंदार के आलीशान महल के ठीक पास कहाँ थी, कसक थी, कस चीज़ क बनी थी — और महल
थी। िम ी और फू स की एक छोटी-सी पुर ानी झोंपड़ी थी। के पास रखकर वह वरोध भी आ गया जस पर कहानी
टक है।

2. श्रीमान् एक िदन सवेरे श्रीमान् ज़मी ंदार उस छू टी हुई झोंपड़ी के कब, कहाँ, और साथ म क्या कर रहे थे — ‘नौकर को काम
टहल रहे थे। आस -पास टहल रहे थे और नौकरों को काम बतला रहे बतला रहे थे’ से उनका रुतबा भी दख गया।
थे।

3. वह खाने दादी को पूर ा भरोसा था िक अपने घर की िम ी का चू ा कौन, कसके भरोसे, कस शत पर — पूरी घटना एक वाक्य
लगेग ी। दे खकर उसकी रूठी हुई पोती िफर से रोटी खाने लगेग ी। म आ गई।

4. वृद्धा भीतर आँस ू भरी आँखों और काँपते कदमों से वृद्धा अपनी छू टी कस दशा म, कसके भीतर, कस भाव के साथ — भाव
गई। हुई झोंपड़ी के भीतर पुर ानी यादों के बीच गई। जुड़ते ही वाक्य दृश्य बन गया।

5. आगे बढ़ े । िकसी नौकर से न कहकर ज़मी ंदार साहब स्वयं अपने कौन, क्य , कसके लए — और ‘ कसी नौकर से न कहकर’
हाथों से िम ी भरी वह भारी टोकरी उठाने के िलए आगे जोड़ते ही कहानी का मोड़ इसी वाक्य म आ गया।
बढ़ े ।

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

वस्तार करने का तरीका: छोटे वाक्य से बस पाँच प्रश्न पू छए — कौन? क्या? कहाँ? कब? कैसे या क्य ? हर उत्तर
एक वशेषण, क्रया- वशेषण या वाक्यांश बनकर जुड़ जाएगा। पर एक चेतावनी: वस्तार का अथ केवल लंबा करना
नह है। जो शब्द कोई नई जानकारी या नया भाव न जोड़े, वह वाक्य को कमज़ोर करता है। पाठ के उदाहरण को
दे खए — ‘थक हुई आँख और काँपते हाथ म टोकरी लए वृद्धा धीरे-धीरे दरवाजे पर पहुँची’ — यहाँ हर जोड़ा
हुआ शब्द उसक उम्र, थकान और बेबसी बता रहा है।

ध्यान र खए: प्रश्न कहता है ‘कहानी को ध्यान म रखते हुए’ — इस लए वस्तार म जो जोड़ वह कहानी से मेल
खाए। ‘वृद्धा हँसती हुई भीतर गई’ लखना व्याकरण से ठ क है, पर कहानी से गलत।

संवाद फोन पर — पृष्ठ 87
पाठ से

पाठ से गतवध

प्र.1 (क) कल्पना क जए क यह कहानी आज के समय क है। ज़म दार वृद्धा क पोती को समझाना चाहता है क वह
जद छोड़ दे और भोजन कर ले। उसने पोती को फोन कया है। अपनी कल्पना से दोन क बातचीत ल खए।

अ े संवाद म क्या होना चा हए — दोन क भाषा अलग हो (ज़म दार क भाषा रौबदार और समझाने वाली, ब ी क भाषा
सीधी और छोट ), बातचीत आगे बढ़े , और अंत म कुछ बदले — या तो कोई मान जाए या कोई सोचने लगे।

नमूना उत्तर:
ज़म दार — हैलो… बेट , म बोल रहा हूँ, तुम्हारे गाँव वाला… जनका बड़ा घर है।
पोती — जी, म जानती हूँ। आपने ही हमारा घर लया है।
ज़म दार — (ज़रा रुककर) दे खो, मने तुम्हारी दाद से सब बात कर ली है। तुम खाना क्य नह खा रही? इस उम्र म
खाना नह खाओगी तो बीमार पड़ जाओगी।
पोती — मुझे भूख लगती है, अंकल। पर वहाँ रोट अ नह लगती।
ज़म दार — रोट तो वही आटा, वही चूल्हा… स्वाद कैसे बदल जाएगा?
पोती — चूल्हा वही नह है। हमारा चूल्हा हमारे घर क म का था। उस पर माँ रोट बनाती थी।
ज़म दार — (चुप) …
पोती — अंकल, आपके घर म आपक माँ क कोई चीज़ है?
ज़म दार — हाँ… उनक एक चरखी है, लोहे क । म उसे कसी को छू ने नह दे ता।
पोती — कोई उसे उठा ले जाए तो?
ज़म दार — (लंबी साँस) बेट , आज खाना खा लो। कल सवेरे म खुद आऊँगा। और शायद… खाली हाथ नह
आऊँगा।

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

यह संवाद क्य काम करता है: ब ी कह भी झगड़ती नह । वह सफ़ एक प्रश्न पूछती है जससे ज़म दार को
अपनी बात अपने ऊपर लौटती हुई दखती है — ठ क वैसे ही जैसे मूल कहानी म दाद ने टोकरी से कया था।
कहानी क चाल वही र खए, बस साधन बदल द जए।

प्र.2 (ख) कल्पना क जए क ज़म दार और उसका कोई मत्र वृद्धा क झ पड़ी ह थयाने के बारे म मोबाइल पर ल खत
संदेश ारा चचा कर रहे ह। मत्र उसे समझा रहा है क वह झ पड़ी न हड़पे। उनक इस ल खत चचा को अपनी
कल्पना से भाव मु ा (इमोजी) के साथ ल खए।

ल खत संदेश छोटे होते ह, इस लए वाक्य छोटे र खए। इमोजी वह लगाइए जहाँ भाव बदले — हर पं क्त पर नह ।

नमूना उत्तर:
मत्र — सुना है तुम उस बु ढ़या क झ पड़ी वाली ज़मीन ले रहे हो? 🤨
ज़म दार — ले रहा नह , ले चुका हूँ। कागज़ तैयार ह। 😎
मत्र — कागज़ तो तैयार ह गे ही। वक ल को पैसे दोगे तो और क्या होगा।
ज़म दार — इस वचार को छोड़ दो, तुम्ह आ खर कस बात क कमी है? 🙂 — यही सब कहने वाले हो न?
मत्र — हाँ, यही। तुम्हारे पास बीस कमरे ह, उसके पास एक। 😔
ज़म दार — 😠 मुझे तुमसे उपदेश नह सुनना है।
मत्र — ठ क है, उपदे श नह । एक सवाल। उसक पोती वह जन्मी है न?
ज़म दार — तो?
मत्र — तो कल को कोई तुम्हारा महल ले ले और कहे क दूसरा बनवा लो — मानोगे? 🤔
ज़म दार — …
मत्र — जवाब मत दो। बस रात को सोचना। 🌙
ज़म दार — 😐 देखता हूँ।
इमोजी का काम: संदेश म आवाज़ नह होती, इस लए वहाँ भाव इमोजी से दखाया जाता है — 😎 घमंड, 😠
चढ़, 🤔 सोच, 😐 झझक। ध्यान द जए क इस बातचीत म ज़म दार का बदलाव आ ख़री दो पं क्तय म केवल
इमोजी से दखता है, शब्द से नह । यही इस माध्यम क अपनी भाषा है।

पोती क भावनाएँ — पृष्ठ 87-88

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म
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पाठ से
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पाठ से गतवध

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a s emकहानी म वृद्धा क पोती एक महत्वपूण पात्र है, भले ही उसका उल्लेख केवल एक-दो पं क्तय म ही हुआ है।
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(क)
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प्र.1
कल्पना क जए क आप ही वह पोती ह। आपको अपने घर से बहुत प्यार है। अपने घर को बचाने के लए

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जला धकारी को एक पत्र ल खए।

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agहै — सेवा म / वषय / संबोधन / वषय-वस्तु / प्राथना / भवद य। भाषा वनम्र

यह औपचा रक पत्र है, इस लए इसका ढाँचा तय
र खए, पर बात साफ़ और तथ्य के साथ क हए। भावुक बात एक-दो पं क्त म समेट द जए; अ धकारी को तथ्य और माँग चा हए।

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नमूना उत्तर:

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सेsवeा म,
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a श्रीमान् जला धकारी महोदय,

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जला — ………………
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वषय — पैतृक झ पड़ी पर कए गए अवैध कब्ज़े क शकायत तथा उसे वापस दलाने हेतु प्राथना-पत्र।

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महोदय,

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स वनय नवेदन है क म ……… गाँव क नवासी हूँ और अपनी दाद के साथ रहती हूँ। मेरे माता- पता और दादा का
दे हांत हो चुका है। हमारी छोट -सी झ पड़ी हमारे प रवार के पास कई पी ढ़य से थी और मेm
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है। om gla
रा जन्म भी उसी म हुआ

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agl हमारे पड़ोस के ज़म दार महोदय अपने महल का अहाता बढ़ाना चाहते थे। उन्ह ने पहले हमसे झ पड़ी खाली करने
को कहा और फर वक ल क सहायता से अदालत के ारा उस पर कब्ज़ा कर लया। मेरी दाद न पढ़ - लखी ह
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और न ही उनके पास मुकदमा लड़ने के साधन थे, इस लए हमारा पक्ष कह रखा ही नह जा सका। आज हम दूसर
m
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के आसरे रह रहे ह।

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महोदय, वह केवल एक झ पड़ी नह है। उसी घर म मेरी माँ ने अं तम साँस ली थी। म वह लौटना चाहती हूँ।

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m .
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अतः आपसे वनम्र प्राथना है क इस मामले क जाँच कराई जाए, संबं धत कागज़ात क पड़ताल क जाए और हम
m
.co a g l
हमारी झ पड़ी वापस दलाई जाए। साथ ही कृपया हम नःशुल्क कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई जाए, क्य क

s e m हम वक ल का व्यय नह उठा सकते।
agla
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आपक बड़ी कृपा होगी।
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भवद या,
……………… (नाम)
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ग्राम — ………, दनांक — ………

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m ase
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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

इस पत्र म ध्यान दे ने योग्य बात: (1) वषय एक पं क्त म पूरी बात कह दे ता है; (2) घटना क्रम से बताई गई है —
पहले क्या हुआ, फर क्या; (3) माँग साफ़ है और दो हस्स म है — जाँच और कानूनी सहायता; (4) कह भी
ज़म दार को गाली नह द गई। औपचा रक पत्र म क्रोध नह , प्रमाण काम आता है।

प्र.2 (ख) मान ली जए क वृद्धा क पोती दै नं दनी (डायरी) लखा करती थी। कहानी क घटनाओं के आधार पर
कल्पना क जए क उसने अपनी डायरी म क्या लखा होगा? स्वयं को पोती के ान पर रखते हुए वह दै नं दनी
ल खए। उदाहरण के लए— मेरी दै नं दनी 2 मई — आज दाद घर पर आईं तो बहुत परेशान थ । मने बहुत पूछा।
उन्ह ने बताया…

डायरी क भाषा पत्र से बलकुल अलग होती है — वह अपने आप से कही गई बात है। इस लए उसम दनांक, ‘म’, छोटे -छोटे वाक्य
और अधूरी बात भी चलती ह। कहानी क घटनाओं का क्रम बनाए र खए।

नमूना उत्तर:

मेरी दै नं दनी

2 मई — आज दाद घर पर आईं तो बहुत परेशान थ । मने बहुत पूछा। उन्ह ने बताया क बड़े घर वाले साहब हमारी
झ पड़ी माँग रहे ह। मने कहा — दे मत दे ना। दाद कुछ बोल नह , बस मेरे सर पर हाथ रखकर बैठ रह ।

19 मई — कागज़ आ गया है। दाद उसे पढ़ नह सकत , फर भी दे र तक दे खती रह । आज हम झ पड़ी छोड़नी
पड़ी। जाते समय मने दरवाज़े क चौखट को छू लया था। कसी ने दे खा नह ।

20 मई — यह घर नह है। यह कसी और का बरामदा है। रात-भर छत क तरफ़ दे खती रही। हमारी छत पर एक
जगह से चाँद दखता था।

21 मई — दाद रोट लाईं। मने नह खाई। उन्ह ने डाँटा, फर रोने लग । मुझे बुरा लगा, पर मने फर भी नह खाई।
मुझे अपने घर क रोट चा हए।

23 मई — आज दाद सुबह ही नकल गईं। हाथ म हमारी पुरानी टोकरी थी। मने पूछा — कहाँ? बोल , “तेरे लए
चूल्हा लाने।” मुझे समझ नह आया।

23 मई, रात — दाद लौट तो टोकरी उनके सर पर नह थी। पर उनका चेहरा… ऐसा चेहरा मने बहुत दन से नह
दे खा था। उन्ह ने कहा क साहब ने माफ़ माँगी है और हमारी झ पड़ी लौटा द है। मने पूछा — कैसे? दाद हँसकर
बोल , “एक टोकरी म ने कह दया, जो म साल म नह कह पाई।”

24 मई — आज हमने अपने चूल्हे पर रोट बनाई। मने तीन खाईं। दाद दे खती रह ।

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

अ डायरी कैसे बनती है: बड़ी घटना को छोट चीज़ से बताइए — छत का वह छे द जससे चाँद दखता था,
चौखट को छू ना, तीन रो टयाँ। कहानी म भी लेखक ने यही कया है: पूरा अन्याय एक टोकरी म म समेट दया।
भावना ‘म बहुत दुखी हूँ’ लखने से नह आती, ब्योरे से आती है।

आपक बात — पृष्ठ 88
पाठ से आगे

पाठ से आगे

प्र.1 (क) कहानी म वृद्धा क पोती अपने घर से बहुत प्यार करती थी। आपके घर से अपने लगाव का अनुभव बताइए।

यह आपका अपना अनुभव है, इस लए उत्तर आपके ही घर से आएगा। पर एक बात याद र खए — घर से लगाव द वार से नह ,
द वार म जमा याद से होता है। इस लए घर का वणन मत क जए, कोई एक याद बताइए।
सोचने के लए —

घर क कौन-सी एक जगह है जो सफ़ आपक है? (छत, सीढ़ का कोना, खड़क के पास क जगह)
घर क कौन-सी आवाज़ या गंध आपको सबसे पहले याद आती है?
कोई ऐसी चीज़ जो पुरानी है, काम क नह , फर भी घर से नकाली नह गई?
कह बाहर रहने पर आपको घर क कस चीज़ क सबसे ज़्यादा याद आई?

नमूना उत्तर: “हमारे घर के आँगन म एक अमरूद का पेड़ है, जो शायद मुझसे भी पुराना है। उसके फल छोटे और
ख े होते ह, बाज़ार वाले कह अ े मलते ह। पर गम क छु य म हम सब भाई-बहन उसी के नीचे बैठते ह।
पछले साल पड़ोसी ने कहा क इसे कटवा दो, धूप रुकती है। माँ ने मना कर दया। उस दन मुझे समझ आया क हम
उस पेड़ से अमरूद नह चा हए — हम वह छाया चा हए जसम हम बड़े हुए ह। पोती क बात मुझे इसी लए समझ म
आती है। उसे रोट नह चा हए थी, अपने घर क रोट चा हए थी।”

प्र.2 (ख) क्या कभी आपको कसी ान, वस्तु या व्य क्त से इतना लगाव हुआ है क उसे छोड़ना मु श्कल लगा हो?
अपना अनुभव साझा क जए।

इस प्रश्न म तीन दशाएँ खुली ह — ान, वस्तु या व्य क्त। कोई एक चु नए और उसी पर ट कए।
उत्तर म ये तीन बात आनी चा हए —

1. वह क्या था और आपके जीवन म उसक जगह क्या थी।
2. छोड़ने क घड़ी कैसी थी — उसी क्षण का एक ब्योरा द जए।
3. उसके बाद क्या बदला, और आपने क्या सीखा।

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

नमूना उत्तर: “ पताजी का तबादला होने पर हम अपना पुराना मकान छोड़ना पड़ा। सामान ट्रक म चढ़ चुका था। म
आ खरी बार खाली कमर म गया तो दे खा — द वार पर प सल से बनी वे लक र अब भी थ जनसे हर जन्म दन पर
मेरी लंबाई नापी जाती थी। सबसे नीचे वाली लक र तब क थी जब म तीन साल का था। मने बहुत दे र तक उन्ह
दे खा। मन हुआ क द वार का वह टु कड़ा साथ ले जाऊँ। नए घर म सब कुछ बेहतर है — बड़ा कमरा, नई खड़क ।
पर वे लक र वह रह गईं। तब मुझे समझ आया क हम जगह से नह , वहाँ बीते समय से बँधे होते ह। शायद इसी लए
वृद्धा बना मरे झ पड़ी से नकलना नह चाहती थी।”

प्र.3 (ग) कहानी म ज़म दार अपने कए पर प ाताप कर रहा है। क्या आपने कभी कसी को उनके कए पर पछताते
हुए दे खा है? उस घटना के बारे म बताइए। यह भी बताइए क उस प ाताप का क्या प रणाम नकला?

प्रश्न के दो हस्से ह और दोन का उत्तर दे ना ज़रूरी है — घटना और प रणाम। दूसरा हस्सा ही असली है, क्य क कहानी भी यही
कहती है क प ाताप तभी पूरा होता है जब वह कुछ बदल दे ।

नमूना उत्तर: “हमारी कक्षा म एक लड़के ने कसी और क कॉपी छपा द थी, मज़ाक म। जसक कॉपी थी, उसे
अगले दन गृहकाय न करने पर डाँट पड़ी और वह रो पड़ा। छपाने वाला उस समय चुप रहा। पर छु के बाद वह
अध्या पका के पास गया और खुद बता दया। उसे दं ड मला, पर उससे बड़ी बात यह हुई क उसने अपने साथी से
माफ़ माँगी और उसका पूरा गृहकाय साथ बैठकर लखवाया। आज वे दोन सबसे अ े दोस्त ह। य द वह चुप रह
जाता, तो शायद दोन कभी दोस्त न बनते।”

कहानी से जो ड़ए: ज़म दार ने भी केवल ‘क्षमा’ नह माँगी — उसने झ पड़ी वापस दे द । यही अंतर है कहने और
करने म। जस प ाताप के बाद कुछ लौटाया या सुधारा न जाए, वह सफ़ अपने मन का बोझ हल्का करना है।

प्र.4 (घ) क्या कभी ऐसा हुआ क आपने कोई काम गुस्से या अहंकार म कया हो और बाद म पछताए ह ? फर आपने
क्या कया? उस अनुभव से आपने क्या सीखा?

यह अपने ऊपर लौटकर दे खने वाला प्रश्न है। ईमानदारी से ल खए — इस तरह के उत्तर म अपनी गलती छपाना उत्तर को बेकार कर
दे ता है।
उत्तर का ढाँचा — क्या कया → क्य कया (गुस्सा या अहंकार) → कब समझ आया क गलत था → फर क्या कया → अब
क्या सीखा।

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

नमूना उत्तर: “एक बार खेल म मेरे छोटे भाई ने मुझे हरा दया। सबके सामने हारना मुझे बुरा लगा और गुस्से म मने
उसका बनाया हुआ म का कला तोड़ दया, जस पर वह दो दन से मेहनत कर रहा था। वह रोया नह , बस
चुपचाप बैठा रहा — और यही मुझे सबसे ज़्यादा चुभा। रात को मने उससे माफ़ माँगी और अगले दन उसके साथ
बैठकर वैसा ही कला दोबारा बनाया, पहले से बड़ा। उस दन मने सीखा क गुस्सा कुछ ही पल का होता है, पर
उसम कया गया काम बहुत दन तक याद रहता है। और यह भी क टू ट हुई चीज़ बनाई जा सकती है, बशत आप
उसे बनाने म खुद हाथ लगाएँ।”

कहानी क याद: ज़म दार ने भी अहंकार म एक घर छ ना और बाद म वही घर लौटाया। ध्यान द जए — भरपाई
उसने अपने हाथ से क , नौकर से नह करवाई। गलती सुधारने म भी वही अपने हाथ का काम चा हए जो टोकरी
उठाने म चा हए था।

न्याय और समता — पृष्ठ 88
पाठ से आगे

पाठ से आगे

प्र.1 कहानी म आपने पढ़ा क एक ज़म दार ने लालच के कारण एक स्त्री का घर छ न लया। (क) क्या आपने कसी
के साथ ऐसा अन्याय दे खा, पढ़ा या सुना है? उसके बारे म बताइए।

इस प्रश्न म तीन रास्ते खुले ह — दे खा (अपने आस-पास), पढ़ा (अख़बार, पुस्तक) या सुना (बड़ से)। कोई एक चु नए और घटना
क्रम से बताइए: क्या हुआ, कसके साथ हुआ, कसने कया, और आगे क्या हुआ।

नमूना उत्तर: “हमारे मोहल्ले म एक बुजग दं पती के मकान के आगे क खाली ज़मीन पर पड़ोसी ने धीरे-धीरे सामान
रखना शुरू कया, फर द वार खड़ी कर द । बुजग दं पती ने मना कया तो उन्ह डराया गया क कागज़ हमारे पास ह।
वे थाने जाने से घबराते थे। बाद म मोहल्ले के कुछ लोग ने मलकर बात क और नगरपा लका म शकायत दज
कराई। नाप-जोख हुई तो द वार हटानी पड़ी। मुझे तब लगा क उस कहानी क वृद्धा और ये दं पती एक जैसे ह —
दोन के पास हक़ था, पर आवाज़ नह थी। फ़क सफ़ इतना रहा क यहाँ मोहल्ला साथ खड़ा हो गया।”

ध्यान रखने क बात: ऐसे उत्तर म कसी असली व्य क्त का नाम मत ल खए और अपनी ओर से कसी को दोषी
घो षत मत क जए। घटना बताइए, नाम नह ।

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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(ख) ऐसी तय से नपटने के लए आप क्या-क्या कर सकते ह? आपके आस-पास के लोग क्या-क्या कर
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सकते ह?

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आप (एक व ाथ ) क्या कर सकते ह आस-पास के लोग क्या कर सकते ह

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घर के बड़ों को तुर ंत बताइए — अके ले िकसी से िभिड़ए मत।
s e m पीिड़ त के साथ जाकर बात कीिजए ; अके ला आदमी डरता है, चार लोग हों

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तो नही ं।

जो हआ
ु उसे तारीख़ के साथ िलख लीिजए — बाद में यही सबसे कागज़ात दे खने-समझने में मदद कीिजए ; जो पढ़ ना नही ं जानता, उसके िलए

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काम की चीज़ बनती है। पढ़ ना भी सहायता है।

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छोिड़ए। .co
पीिड़त का साथ दीिजए — बात सुिनए, उसे अके ला मत
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पंचायत, नगरपािलका, थाने या जनसुनवाई तक िशकायत ले जाने में साथ

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चिलए।

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aglिव ालय में िशक्षक या पधानाचाय को बताइए; वे सही जगह तक
बात पहच
ु ँ ा सकते है।
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िनःशुल्क कानूनी सहायता की जानकारी दीिजए — गरीब, वृद्ध और िस्त्र यों
को यह अिधकार से िमलती है।

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अफ़ वाह मत फै लाइए और सोशल मीिडया पर िकसी का नाम मत
m .co दोनों पक्षों की बात सुनकर पहले आपस में सुलझाने का पयास कीिजए। agl
डािलए।
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कहानी से सबसे बड़ा सबक: वृद्धा हारी इस लए नह क वह कमज़ोर थी, ब ल्क इस लए क वह अकेली थी और

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उसे रास्ता मालूम नह था। कहानी म एक भी पड़ोसी उसके साथ खड़ा नह होता — ‘पास-पड़ोस म कह जाकर

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रहने लगी’, बस इतना लखा है। अन्याय के समय चुप रह जाना भी अन्याय म हस्सा है।
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प्र.3 (ग) “स ी श क्त दया और न्याय म है।” इस कथन पर अपने वचार ल खए।
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यह कथन बलकुल सही है, और इसी कहानी से इसका सबसे अ ा प्रमाण मलता है।

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कहानी म दो तरह क श क्त आमने-सामने ह —

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ज़म दार क श क्त वृद्धा क श क्त

.धन, महल, नौकर, वकील, अदालत का आदे श a g
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के वल एक टोकरी, एक तक और एक पश्न

agl c
डर पैद ा करती है — “उसे यहाँ से हटा दो” सोचने पर मजबूर करती है — “आप ही इस बात पर िवचार कीिजए ”
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m झोंपड़ी लौटा भी दे ती है और ज़मी ंदार को बदल भी दे ती है a s e
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झोंपड़ी िदला दे ती है, पर चैन नही ं

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m as e
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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

तक: ज़म दार के पास ताकत बहुत थी, पर वह उधार क थी — पैसे क , पद क , कागज़ क । जस दन उसे अपने
बल पर एक टोकरी उठानी पड़ी, वह ताकत काम नह आई। वृद्धा के पास कुछ नह था, फर भी उसने वह जीत
हा सल क जो अदालत भी नह दला सकती थी — हारने वाले का मन बदल जाना। जो श क्त डर से चलती है, वह
डर हटते ही खत्म हो जाती है; जो श क्त न्याय पर टक है, वह उसके बाद भी बनी रहती है।

दूसरा पक्ष भी दे खए: कोई कह सकता है क दया और न्याय हमेशा नह जीतते — बहुत बार ताकतवर ही जीतता
है। बात सही है। पर ध्यान द जए, कहानी यह नह कहती क दया हमेशा जीतेगी; वह यह कहती है क जीत का जो
रूप टकाऊ है, वह यही है। इसी लए कहानी सवा सौ साल बाद भी पढ़ जाती है, जब क उस ज़म दार का अहाता
कब का मट चुका होगा।

घर-घर क कहानी — पृष्ठ 88-89
पाठ से आगे

पाठ से आगे गतवध

प्र.1 क्या आपको अपने घर क कहानी पता है? उसे कब बनाया गया? कैसे बनाया गया? उसे बनाने के लए कैसे-कैसे
प्रयास कए गए? च लए, अपने घर क कहानी क खोजबीन करते ह। अपने घर के बड़े-बूढ़ से उनके बचपन के
घर के बारे म साक्षात्कार ली जए। आज आप जस घर म रह रहे ह, उसम वे कब से रह रहे ह? इसम आने के पीछे
क्या कहानी है, इसके बारे म भी बातचीत क जए। कक्षा म अपनी-अपनी कहा नयाँ साझा क जए।

यह साक्षात्कार (इंटरव्यू) क ग त व ध है। बातचीत से पहले प्रश्न लखकर ले जाइए, वरना बात इधर-उधर भटक जाती है।
पूछने के लए प्रश्न —

आपके बचपन का घर कैसा था? क ा था या पक्का? कतने कमरे थे?
यह घर कब बना? कसने बनवाया? पैसे कहाँ से जुटाए गए?
बनाते समय क्या-क्या क ठनाई आई? कसने मदद क ?
इस मोहल्ले/गाँव म हमारा प रवार कब आया और क्य आया?
घर क कोई ऐसी चीज़ है जो पहले दन से आज तक है?
घर से जुड़ी कोई ऐसी घटना जो आपको आज भी याद है?

साक्षात्कार का ढं ग —

1. पहले अनुम त ली जए और बताइए क यह व ालय का काम है।
2. बीच म मत टो कए। बड़े लोग याद करते-करते बोलते ह, उन्ह समय द जए।
3. जो बताया जाए उसे उन्ह के शब्द म ल खए — एक-दो वाक्य ज्य -के-त्य र खए, वे सबसे अ े लगते ह।
4. हो सके तो उस समय क कोई तस्वीर या पुराना कागज़ भी दे खए।

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

नमूना उत्तर (एक हस्सा): “दाद बताती ह क उनके बचपन का घर क ा था और उसक छत खपरैल क थी।
बरसात म जहाँ-जहाँ पानी टपकता, वहाँ बरतन रख दए जाते थे और रात-भर टप-टप क आवाज़ आती रहती। यह
वाला घर 1978 म बना। दादाजी ने खेत का एक हस्सा बेचकर ईंट खरीद थ और गाँव के लोग बना मज़दूरी लए
द वार उठाने आए थे। दाद कहती ह — ‘घर पैसे से नह बनता बेटा, आदमी से बनता है।’ इस घर क सबसे पुरानी
चीज़ लकड़ी का वह दरवाज़ा है जो पुराने घर से नकालकर यहाँ लगाया गया था।”

यह ग त व ध इस पाठ के साथ क्य है: कहानी क वृद्धा का घर छन गया और उसके साथ उसक पूरी स्मृ त भी।
अपने घर क कहानी खोजते ही आपको समझ आएगा क हर घर के पीछे कसी क मेहनत, कसी का त्याग और
कई पी ढ़य क याद होती ह। तभी पता चलता है क कसी का घर छ नना असल म क्या छ नना है।

न्याय और करुणा से जुड़ी सहायता — पृष्ठ 89
पाठ से आगे

पाठ से आगे गतवध

प्र.1 “बाल क खाल नकालने वाले वक ल क थैली गरम कर उन्ह ने अदालत से झ पड़ी पर कब्जा कर लया।”
कहानी के इस प्रसंग को ध्यान म रखते हुए नाग रक शकायत प्र क्रया के वषय म जानकारी प्राप्त क जए। इसके
बारे म अपने घर और आस-पास के लोग को भी जागरूक क जए।

कहानी क वृद्धा के पास न वक ल था, न जानकारी। आज त अलग है — शकायत करने के लए कई रास्ते खुले ह और उनम से
कई नःशुल्क ह। पाठ म तीन उदाहरण दए गए ह; उन्ह समझ ली जए —

व्यव ा क्या है कब काम आती है

सावजिनक भारत सरकार का ऑनलाइन िशकायत पोटल, जहाँ कोई भी जब कसी सरकारी वभाग ने काम न कया हो,
िशकायत सुिवधा भारतीय कें द या राज्य सरकार के िकसी भी िवभाग से जुड़ी दे र क हो या गलत कया हो। शकायत का एक
िशकायत दज करा सकता है। भारत की 22 भाषाओं में िशकायत नंबर मलता है जससे उसक त दे खी जा
दज कराई जा सकती है। सकती है।

जनसुनवाई हर राज्य और कें द शािसत पदे श में शुरू की गई सुिवधा, िजसमें जब बात लखकर समझाना क ठन हो या तुरंत
अिधकारी तय िदन पर लोगों की िशकायते ं सीधे सुनते है।
ं इंटरनेट सुनवाई चा हए — जैसे ज़मीन, राशन, पशन या
के माध्यम से भी इसका उपयोग िकया जा सकता है। बजली-पानी के मामले।

सामािजक सुर क्षा वृद्धों, िवधवाओं, िदव्याग
ं ों और गरीब पिरवारों के िलए चलाई जा रही जब कसी के पास आय या सहारा न हो — ठ क
क ल्याण योजनाएँ सरकारी योजनाएँ — पेंशन, आवास, राशन आिद। इनकी वैसी त म जैसी कहानी क वृद्धा क थी।
जानकारी सरकार की वेबसाइट पर एक जगह िमलती है।

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

एक और ज़रूरी अ धकार: दे श म नःशुल्क कानूनी सहायता क व्यव ा भी है। स्त्रय , ब , वृद्ध और कम
आय वाले लोग को अदालत म अपना पक्ष रखने के लए सरकार क ओर से मुफ़्त वक ल मल सकता है। इसके
लए जला व धक सेवा प्रा धकरण (District Legal Services Authority) से संपक कया जाता है, जसका
कायालय हर ज़ला न्यायालय म होता है। वृद्धा हारी इस लए नह थी क उसका पक्ष कमज़ोर था — वह हारी क्य क
उसका पक्ष रखने वाला कोई नह था।

जागरूकता का काम कैसे क जए —

ऊपर क जानकारी का एक सादा पोस्टर बनाइए — बड़े अक्षर म, चत्र के साथ, अपनी भाषा म।
उसम केवल तीन बात र खए: शकायत कहाँ कर, कौन-से कागज़ चा हए, और सहायता कससे मलेगी।
व ालय क द वार प त्रका और मोहल्ले क दुकान या पंचायत भवन पर लगाइए।
घर के बड़ को बताइए — बहुत से लोग इस लए चुप रह जाते ह क्य क उन्ह रास्ता मालूम ही नह होता।

ध्यान र खए: वेबसाइट का पता, हेल्पलाइन नंबर और कायालय का समय बदलते रहते ह। पोस्टर बनाने से पहले
शक्षक क मदद से इन्ह सरकारी वेबसाइट पर जाँच ली जए — गलत जानकारी बाँटना मदद नह , नुकसान है।

आज क पहेली — पृष्ठ 89
पाठ से आगे

पाठ से आगे गतवध

प्र.1 नीचे दए गए अक्षर से साथक शब्द बनाइए— 1. ट् क र् ई ओ = टोकरी 2. य् आ द = 3. ई ल व क् = 4. झ् ओ ई
प ड़् अं = 5. ज द् आ म् ई र अं = 6. त् आ इ औ क ल् =

क्रम दए गए अक्षर साथक शब्द जोड़ने का क्रम

1. ट् क र् ई ओ टोकरी ट् + ओ = टो, क, र् + ई = री

2. य् आ द दया द + य् + आ = दया

3. ई ल व क् वकील व + क् + ई = क , + ल = वक ल

4. झ् ओ ई प ड़् अं झोंपड़ी झ् + ओ + अं (अनुस्वार) = झ , प, ड़् + ई = ड़ी

5. ज द् आ म् ई र अं ज़मी ंदार ज़ + म् + ई + अं = म , द् + आ = दा, र

6. त् आ इ औ क ल् इकलौता इ + क + ल् + औ = लौ, त् + आ = ता

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म AglaSem · NCERT Solutions

पहेली सुलझाने का तरीका: इन पहे लय म शब्द को उसक सबसे छोट इकाइय म तोड़ दया गया है — व्यंजन
आधे रूप म (ट् , क्, म्) और स्वर अलग (आ, ई, ओ, औ)। जोड़ते समय याद र खए क आधा व्यंजन हमेशा कसी
स्वर से जुड़कर ही पूरा होता है — ट् + ओ = टो, र् + ई = री। और ‘अं’ अकेला अक्षर नह , अनुस्वार है, जो कसी
अक्षर के ऊपर बद बनकर बैठता है — झ , म ।

ध्यान द जए: छह शब्द इसी कहानी के ह — टोकरी, दया, वक ल, झ पड़ी, ज़म दार, इकलौता। पहेली हल करते-
करते कहानी के मुख्य शब्द भी दोहरा लए जाते ह। यही इस अभ्यास का असली उ े श्य है।

खोजबीन के लए — पृष्ठ 90
पाठ से आगे

पाठ से आगे गतवध

प्र.1 हमारे दे श म हजार साल से कहा नयाँ सुनी-सुनाई जाती रही ह। सैकड़ साल पहले लखी गई कहा नय क
पुस्तक आज भी उपलब्ध ह। ऐसी ही एक अ त पुस्तक हतोपदे श है जो आज भी वश्व म मनोरंजन और ान
प्राप्त करने के उ े श्य से पढ़ -पढ़ाई जाती है। अपने पुस्तकालय से हतोपदे श क कहा नय क पुस्तक खोजकर
प ढ़ए और इसक कोई एक कहानी कक्षा म सुनाइए।

हतोपदे श के बारे म इतना जान ली जए —

यह संस्कृत म लखी गई कहा नय क पुस्तक है। इसके रच यता नारायण पं डत माने जाते ह।
‘ हतोपदे श’ का अथ ही है — हत क सीख। इसक कहा नयाँ मनोरंजन के साथ व्यवहार क समझ दे ती ह।
इसक बहुत-सी सामग्री पंचतंत्र से ली गई है। पुस्तक चार भाग म है — मत्रलाभ, सुहृ े द, वग्रह और सं ध।
इसम अ धकतर पात्र पशु-पक्षी ह, और हर कहानी के भीतर से दूसरी कहानी नकलती चली जाती है।
यह अनेक भाषाओं म अनू दत हुई है और भारत के बाहर भी पढ़ जाती है।

कक्षा म कहानी सुनाते समय —

1. छोट कहानी चु नए, जो तीन-चार मनट म पूरी हो जाए।
2. पहले उसे दो-तीन बार प ढ़ए और घटनाओं का क्रम याद कर ली जए — शब्द र टए मत।
3. पात्र क आवाज़ बदलकर बो लए; इसी से कहानी जी वत होती है।
4. सीख अंत म एक ही वाक्य म क हए, या श्रोताओं से पूछ ली जए क उन्ह क्या समझ आया।

नमूना (एक प्र सद्ध कथा का सार) — ‘एकता म बल’: जंगल म कबूतर का एक झुंड दाना चुगने उतरा और
बहे लये के जाल म फँस गया। सब अलग-अलग छटपटाने लगे, पर जाल नह टू टा। तब उनके मु खया चत्रग्रीव ने
कहा — “अलग-अलग उड़ने से कुछ नह होगा। सब एक साथ, एक ही दशा म ज़ोर लगाओ।” सारे कबूतर एक
साथ उड़े और जाल समेत आकाश म जा पहुँचे। बाद म उनके मत्र चूहे हरण्यक ने जाल कुतरकर सबको मुक्त कर
दया।
सीख — अकेले जो असंभव है, वह मलकर संभव हो जाता है।

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कक्षा 8 हद अध्याय 6 एक टोकरी भर म
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इस पाठ से जो ड़ए: ‘एक टोकरी भर म ’ भी उसी परंपरा क कहानी है — छोट , सीधी, और अंत म एक सीख

m a s emजी सीख को
glक जए।
छोड़ जाने वाली। अंतर यह है क हतोपदे श क कहा नयाँ सीख साफ़-साफ़ कह दे ती ह, जब क सप्रे
. co पाठक के हाथ म थमा दे ते ह और कहते ह — आप ही इस बात पर वचार
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टोकरी म रखकर

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अध्याय — एक नज़र म
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कहानी बहुत छोट है — मु श्कल से दो पृष्ठ — पर उसम अन्याय, मोह, प ाताप और क्षमा, चार आ जाते ह। लेखक

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माधवराव सप्रे (1871–1926) का जन्म दमोह (मध्य प्रदे श) म हुआ; उनक मातृभाषा मराठ थी और वे लोकमान्य बाल

se m.
गंगाधर तलक क प्रेरणा से हद म आए।

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.c कर अदालत से कब्ज़ा कर लेता है और उसे नकाल देता है।
कथा-सूत्र — ज़म दार अपने महल का अहाता बढ़ाना चाहता है; वृद्धा झ पड़ी छोड़ने से मना करती है; ज़म दार वक ल क

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se (ट नग पॉइंट) एक ही दृश्य म आता है — वृद्धा पोती के लए एक टोकरी म माँगती है और ज़म दार से उसे उठवाना
थैली गरम

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मोड़
चाहती है। ज़म दार पूरी ताकत लगाकर भी टोकरी एक हाथ भी ऊँची नह कर पाता।

omसकगे?” यहाँ भार शारी रक से नै तक हो जाता है। a s
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वृद्धा का प्रश्न ही कहानी का मम है — “आपसे तो एक टोकरी भर म उठाई नह जाती और इस झ पड़ी म तो हजार
टोक रयाँ म पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसेcउठा
.
म कहानी म केवल म नह है — वह घरsहैe, m
l a याद ह, पूवज क ज़मीन है और छ ने गए हक़ का बोझ भी। शीषक स्वयं
एक प्रतीक है। ag
भाषा क बनावट दे खने लायक है — छोटे वाक्य, आमने-सामने के संवाद, तत्सम शब्द (मृतप्राय, नष्फल, कृतकम, पूव त)

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के साथ उदू-फ़ारसी शब्द (ज़म दार, अहाता, अदालत, कब्ज़ा), मुहावरे और ‘…’ से अधूरी छोड़ी गई बात।
अभ्यास कहानी से आगे जाकर भाषा भी पक्क कराते ह — ‘ क’ और ‘क ’ का अंतर, काल केm
s e
c हावरे, शब्दकोश से सही अथ चुनना और भाववाचक सं ाओं क पहचान। agla
क्रया,oमुm
तीन भेद, वचन के अनुसार

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त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द / मुहावरा अथ कहानी म कहाँ आया आज क भाषा
म

अहाता मकान के चारों ओर िघरा हुआ खुल ा “ज़म दार साहब को अपने महल का अहाता उस झ पड़ी प रसर, कंपाउं ड
भाग, चारदीवारी तक बढ़ाने क इ ा हुई।”

पतोहू पुत्र वधू, बहू “पतोहू भी एक पाँच बरस क कन्या को छोड़कर चल बहू
बसी थी।”

मृतप्राय जो मरने जैस ा हो गया हो, अधमरा “तब से वह मृतप्राय हो गई थी।” जीते-जी मुरदा-सा

नष्फल िजसका कोई फल न िनकले , बेक ार “श्रीमान् के सब प्रयत्न नष्फल हुए।” नाकाम

ज़म दारी चाल ज़मी ंदारों जैस ी चालबाज़ी, रसूख का “तब वे अपनी ज़म दारी चाल चलने लगे।” रुतबे का इस्तेमाल
दाँव

बाल क खाल व्यथ की बारीिकयाँ िनकालना, हर बात में “बाल क खाल नकालने वाले वक ल …” बाल क खाल
नकालना मीन-मेख करना नकालना

थैली गरम करना िरश्वत दे ना, घूस िखलाना “…वक ल क थैली गरम कर उन्ह ने अदालत से…” घूस दे ना

गड़ गड़ाना दीन होकर बार-बार िगड़िगड़ाकर िवनती “पर वह गड़ गड़ाकर बोली…” हाथ-पैर जोड़ना
करना

पूव त पहले की दशा, बीता हुआ अच्छा समय “जब उसे अपनी पूव त क याद आ जाती…” पहले के दन

धन-मद धन का नशा, संपित्त का घमंड “ज़म दार साहब धन-मद से ग वत हो अपना कतव्य भूल पैसे का घमंड
गए थे।”

उपयुक्त ऊपर कहा हआ
ु “वृद्धा के उपयुक्त वचन सुनते ही उनक आँख खुल ऊपर कही गई
गईं।” बात

कृतकम िकया हआ
ु काम “कृतकम का प ाताप कर उन्ह ने वृद्धा से क्षमा माँगी।” अपने कए पर

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 8
TypeSolution
Pages41
Languagehindi
Updated19 Sep 2026