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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 7: मत बाँधो
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
91 – 104 20 48 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 43 pages
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 8 · हद · मल्हार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 7: मत बाँधो
पाठ 7 महादे वी वमा क क वता मत बाँधो है। कव यत्री सपन क तुलना सुगंध, बीज, अ न और धुएँ से करती हुई कहती ह क सपना अकेला ऐसा है
जो ऊपर भी उठता है और लौटकर आँख म उतर भी आता है — इस लए उसके पंख मत काटो, उसक ग त मत बाँधो।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
मल्हार (कक्षा 8) 91 – 104
खं ड प्रश्न
20 48
माध्यम
हन्द
मेरी समझ से — पृष्ठ 92-93
पाठ से
पाठ से
प्र.1 ★
(क) नम्न ल खत प्रश्न के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा ( ) बनाइए। कुछ प्रश्न के एक से अ धक उत्तर भी हो
सकते ह। 1. आप इनम से क वता का मुख्य भाव कसे समझते ह? • सपने मात्र कल्पनाएँ ह • सपन को भूल
जाना चा हए • सपन क स्वतंत्रता बनी रहनी चा हए • सपने दे खना अ बात है
★ सपन क स्वतंत्रता बनी रहनी चा हए — यही मुख्य भाव है। ★ सपने दे खना अ बात है भी लया जा सकता है, पर वह
इस क वता का नष्कष है, कद्र नह ।
इन सपनों के पंख न काटो
इन सपनों की गित मत बाँधो!
क वता क पहली और आ ख़री दोन पं क्तयाँ यही ह। बीच क हर पं क्त भी कसी न कसी रूप म यही कहती है — मत रोको, मत
बाँधो, न काटो। कव यत्री यह नह समझा रह क सपने क्या होते ह; वे यह कह रही ह क सपन को खुला छोड़ दया जाए।
बाक़ वकल्प क्य नह : ‘सपने मात्र कल्पनाएँ ह’ क वता के ठ क वपरीत है — क वता तो कहती है क सपना
‘उड़कर आँख म आता है’, यानी कल्पना से नकलकर सच बनता है। ‘सपन को भूल जाना चा हए’ भी उलट बात
है; क वता उन्ह बचाने क प्राथना है।
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 2. ‘मत बाँधो’ क वता कसक स्वतंत्रता क बात करती है? • प्रेम क • शक्षा क • सपन क • अ धकार क
★ सपन क ।
पूरी क वता म जसे ‘इसका’, ‘इसको’, ‘यह’ कहा गया है, वह सपना ही है — ‘इसका आरोहण मत रोको’, ‘धरती से इसको मत
बाँधो!’। कव यत्री एक-एक करके वे सब बंधन गनाती ह जो सपने पर लगाए जा सकते ह — पंख काटना, ग त बाँधना, ऊपर जाने
से रोकना, धरती से बाँधना — और हर बार मना करती ह।
ध्यान द जए: क वता का असर आगे चलकर शक्षा और अ धकार तक पहुँचता है, क्य क सपने बच्च के ही होते
ह और उन्ह रोकने वाले बड़े। पर क वता का सीधा वषय सपन क स्वतंत्रता है।
प्र.3 3. “इन सपन के पंख न काटो” पं क्त म सपन के ‘पंख’ होने क कल्पना क्य क गई है? • सपने जीवन म कुछ
नया करने क प्रेरणा दे ते ह • सपने सफलता क ऊँचाइय तक ले जाते ह • सपने पंख क तरह उड़ान भर भ्रमण
करवाते ह • सपने पंख क तरह कोमल और अनेक प्रकार के होते ह
★ सपने पंख क तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते ह और ★ सपने सफलता क ऊँचाइय तक ले जाते ह — दोन सही ह। ★
सपने जीवन म कुछ नया करने क प्रेरणा दे ते ह भी स्वीकाय है।
‘पंख’ का चत्र कैसे काम करता है: कव यत्री ने सपने को पक्षी बना दया है — यह रूपक है। पंख का काम केवल
ऊपर उठाना नह , मनचाही दशा म ले जाना भी है। इसी लए ‘पंख काटना’ मुहावरे क तरह चुभता है: पंख कटे पक्षी
क जान नह जाती, उसक पहुँच चली जाती है। ठ क यही सपन के साथ होता है — रोका गया सपना मरता नह ,
बस कह पहुँचना बंद कर दे ता है।
चौथा वकल्प (‘कोमल और अनेक प्रकार के’) पंख क बनावट क बात करता है, उसके काम क नह — इस लए वह क वता के
भाव से मेल नह खाता।
प्र.4 4. “स्वग बनाने का फर कोई शल्प” पं क्त म ‘स्वग’ से आप क्या समझते ह? • जहाँ कसी प्रकार का शारी रक
कष्ट न हो • जहाँ अतुलनीय धन संप त्त हो • जहाँ परस्पर सहयोग एवं स ाव हो • जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के
प्र त संवेदनशील ह
★ जहाँ परस्पर सहयोग एवं स ाव हो और ★ जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्र त संवेदनशील ह — ये दोन उत्तर सही ह।
क वता का ‘स्वग’ मरने के बाद मलने वाला कोई लोक नह है। ध्यान द जए क वह बनाया जाने वाला है और उसका शल्प भू म
को सखाया जाना है — यानी यह स्वग इसी धरती पर, मनुष्य के हाथ बनना है।
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
क्य : जो चीज़ हाथ से बनानी हो, वह मलकर ही बनती है — इसी लए सहयोग और स ाव ही उसका कच्चा माल
ह। धन-संप त्त से ऐसा ान नह बनता, क्य क संप त्त बाँटती है, जोड़ती नह । ‘शारी रक कष्ट न हो’ केवल सु वधा
क बात है; क वता सु वधा नह , संबंध क बात कर रही है।
प्र.5 5. य द बीज धूल म गर जाए तो क्या हो सकता है? • वह बहुत तेजी से उड़ सकता है • वह और गहरा हो सकता
है • उसक उड़ान रुक सकती है • वह बढ़कर पौधा बन सकता है
★ उसक उड़ान रुक सकती है — क वता के संदभ म यही उत्तर है। ★ वह बढ़कर पौधा बन सकता है भी सही है, य द आप
बीज को प्रकृ त के नयम से दे ख।
बीज धूिल में िगर जाता जो
वह नभ में कब उड़ पाता है?
कव यत्री यहाँ बीज को उदाहरण क तरह ला रही ह। सौरभ केवल ऊपर जा सकता है, बीज केवल नीचे — दोन क ग त एक ही
दशा म बँधी है। इसी लए क वता के भीतर बीज का अथ है — गरा तो अब उड़ नह सकता।
दोन उत्तर एक साथ कैसे सही ह: धूल म गरा बीज सचमुच पौधा बनता है, पर वह भी नीचे से ऊपर क एक ही
यात्रा है — वह वापस बीज बनकर आकाश म नह उड़ता। सपना इसी लए इन सबसे अलग है: वह ऊपर भी जाता है
और लौटकर आँख म भी आता है।
प्र.6 (ख) हो सकता है क आपके समूह के सा थय ने अलग-अलग उत्तर चुने ह । अपने मत्र के साथ चचा क जए
क आपने ये उत्तर ही क्य चुने?
यह चचा का काम है। चचा तब साथक होती है जब हर साथी अपना उत्तर क वता क कसी पं क्त से जोड़कर बताए, केवल ‘मुझे
ऐसा लगा’ कहकर न छोड़े।
चचा का ढाँचा —
1. अपना चुना हुआ वकल्प बो लए।
2. क वता क वह पं क्त प ढ़ए जससे वह वकल्प नकलता है।
3. बताइए क दूसरा वकल्प आपने क्य छोड़ा।
4. अंत म दे खए क कन प्रश्न म एक से अ धक उत्तर सचमुच बनते ह।
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो
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नमूना उत्तर: “प्रश्न 3 म मने ‘सपने पंख क तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते ह’ चुना, क्य क क वता म सपना ‘मुक्त
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gl क वता म ह, इस लए
गगन म वचरण’ करता है — यानी वह केवल ऊपर नह जाता, घूमता भी है। मेरे साथी ने ‘सफलता
coचुना और उसका आधार ‘नभ तक जाने से मत रोको’ पं क्त थी। दोन पंaक्तयाँ
तक ले जाते .ह’
a s emकया क दोन उत्तर सही ह।”
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हमने तय
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यह ग त व ध क्य द गई है: बहु वकल्पी प्रश्न म एक उत्तर पर टक लगाकर काम ख़त्म हो जाता है। चचा करने पर
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पता चलता है क क वता म एक ही पं क्त के कई पाठ संभव ह — और अपना पाठ प्रमाण दे कर सद्ध करना ही
सा हत्य पढ़ना है।
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पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 93-94
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पाठ से
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प्र.1 क वता म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे द गई ह। इन्ह ध्यानपूवक प ढ़ए और इन पर वचार क जए। आपको
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इनका क्या अथ समझ म आया? अपने वचार
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जाता है नभ म / फर वह लौट कहाँla
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आता है? / बीज धू ल म गर जाता जो / वह नभ म कब उड़ पाता है?”
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भावाथ — फूल क सुगंध हवा म उड़कर आकाश म घुल जाती है; उड़ जाने के बाद वह फर उसी फूm
s e ल म लौटकर नह आती। दूसरी
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ओर बीज oमmम गर पड़ता है; एक बार गर जाने के बाद वह कभी आकाश म उड़ नह सकता।
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agl सौरभ — केवल ऊपर जा सकता है, लौट नही ं सकता।
बीज — के वल नीचे िगर सकता है, उड़ नही ं सकता।
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दोनों की गित एकतरफ़ा है।
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यह चत्र क वता म क्य है: ये चार पं क्तयाँ सीधे-सीधे सपन क बात नह करत , फर भी पूरी क वता इन्ह पर
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टक है। कव यत्री पहले संसार से दो उदाहरण उठाती ह और दखाती ह क प्रकृ त क अ धकतर चीज़ क ग त
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omह, ता क सपने क वशेषता उभरकर सामने आ जाए।
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एक ही दशा म बँधी होती है। इसके ठ क बाद वे कहती ह — ‘सपन म दोन ही ग त ह’। यानी उदाहरण तुलना के
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ag भाषा क बात — दोन वाक्य प्रश्न के रूप म ह, पर उत्तर माँगते नह । ‘लौट कहाँ आता है?’ और ‘कब उड़ पाता है?’ का अथ है
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‘लौटता ही नह ’, ‘उड़ पाता ही नह ’। यह प्रश्नालंकार (काव्य-प्रश्न) है — प्रश्न पूछकर उत्तर मनवा लेने क यु क्त। साथ ही ‘सौरभ…
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नभ’ और ‘बीज… धू ल’ म ऊपर-नीचे का वरोधाभासी चत्र बनता है, जो अगली ही पं क्तय म ‘आरोहण–अवरोहण’ बनकर
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लौटता है।
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प्र.2 (ख) “मुक्त गगन म वचरण कर यह / तार म फर मल जायेगा, / मेघ से रंग औ’ करण से / द प्त लए भू पर
आयेगा।”
भावाथ — य द सपने को खुला आकाश मल जाए तो वह वहाँ स्वच्छं द घूमेगा और तार म जा मलेगा। पर वह वह नह रह जाएगा
— लौटते समय बादल से रंग और सूरज क करण से चमक अपने साथ लेता आएगा, और धरती पर उतरेगा।
ऊपर जाना → तारों तक आरोहण
वहाँ से पाना → मेघों से रंग, िकरणों से दीिप्त
लौट आना → भू पर अवरोहण
बब कैसे काम करता है: यहाँ सपना पूरी तरह मानवीकृत हो गया है — वह घूमता है, मलता है, कुछ लेता है और
लौट आता है। सबसे सुंदर बात यह है क वह ख़ाली हाथ नह लौटता। ‘रंग’ और ‘द प्त’ का अथ है — कल्पना जब
स्वतंत्र होकर दूर तक जाती है, तो अनुभव और सुंदरता कमाकर लाती है। यही कमाई आगे ‘स्वग बनाने का शल्प’
बन जाती है।
भाषा क बात — ‘मुक्त गगन’ और ‘ वचरण’ शब्द मलकर बंधनहीनता का भाव बनाते ह। ‘मेघ से रंग’ और ‘ करण से द प्त’
— दोन क बनावट एक जैसी है; यह समांतर रचना पं क्त को गीत जैसी लय दे ती है। ‘औ’’ (और) का सं क्षप्त रूप छं द क मात्रा
साधने के लए आया है।
मलकर कर मलान — पृष्ठ 94
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पाठ से
पाठ से
प्र.1 क वता म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ स्तंभ 1 म द गई ह। उन पं क्तय के भाव या संदभ स्तंभ 2 म दए गए ह।
पं क्तय को उनके सही भाव अथवा संदभ से मलाइए। स्तंभ 1 — 1. इन सपन के पंख न काटो / इन सपन क
ग त मत बाँधो! 2. सपन म दोन ही ग त ह / उड़कर आँख म आता है! 3. इसका आरोहण मत रोको / इसका
अवरोहण मत बाँधो! 4. नभ तक जाने से मत रोको / धरती से इसको मत बाँधो! 5. स्वग बनाने का फर कोई
शल्प / भू म को सखलायेगा! स्तंभ 2 — 1. सपन के उठने (आरोहण) और उनके व्यवहार म वापस आने
(अवरोहण) म बाधा न डाल, क्य क स्वतंत्रता ही सपन को साकार करने क कुंजी है। 2. सपन को ऊँचाइय तक
जाने से मत रोको। उन्ह धरती से बाँधकर मत रखो। 3. कसी पक्षी के पंख काट दए जाएँ तो वह उड़ नह सकता,
वैसे ही अगर हम कसी के सपन को बा धत कर तो उसक कल्पनाशीलता और संभावनाएँ समाप्त हो जाएँगी। 4.
रचनात्मक और स्वतंत्र वचार समाज को सुंदर, समृद्ध और शां तपूण बना सकता है। 5. सपन म ऊपर उठने
(आरोहण) और नीचे आने (अवरोहण) दोन क वशेषता होती है। सपना वचार क तरह जन्म लेता है और फर
व्यवहार म पूरा होता है, तभी वह कल्पना से नकलकर स ाई बनता है।
स्तंभ 1 (पं क्त) सही क्य
मलान
1. इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों 3 दोन जगह पंख का ही चत्र है — पंख कटा पक्षी और बा धत सपना, दोन क
की गित मत बाँध ो! पहुँच ख़त्म हो जाती है।
2. सपनों में दोनों ही गित है ं / उड़कर 5 ‘दोन ही ग त’ का अथ ही आरोहण और अवरोहण है — सपना वचार बनकर
आँखों में आता है! उठता है और व्यवहार बनकर उतरता है।
3. इसका आरोहण मत रोको / इसका 1 यहाँ दोन ग तय म बाधा न डालने क सीधी प्राथना है; भाव म भी ‘बाधा न
अवरोहण मत बाँध ो! डाल’ ही कहा गया है।
4. नभ तक जाने से मत रोको / धरती से 2 ‘नभ तक जाने’ = ऊँचाइय तक जाना, ‘धरती से बाँधना’ = नीचे जकड़
इसको मत बाँध ो! रखना। भाव लगभग शब्दशः वही है।
5. स्वग बनाने का िफर कोई िशल्प / भूिम 4 ‘स्वग’ यानी सुंदर, समृद्ध, शां तपूण समाज; उसे बनाने का शल्प स्वतंत्र और
को िसखलायेग ा! रचनात्मक वचार से ही मलता है।
संक्षेप म — 1→3, 2→5, 3→1, 4→2, 5→4
मलान क कुंजी: हर बार वही जोड़ी बनती है जसम भाव-पक्ष पं क्त के मुख्य शब्द को खोलकर समझा रहा हो —
‘पंख’ के साथ पक्षी, ‘दोन ग त’ के साथ आरोहण-अवरोहण क व्याख्या, ‘नभ/धरती’ के साथ ऊँचाई-जकड़न, और
‘स्वग/ शल्प’ के साथ सुंदर समाज।
सोच- वचार के लए — पृष्ठ 94-95
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पाठ से
पाठ से
प्र.1 क वता को पुन: प ढ़ए, पता लगाइए और ल खए— (क) क वता म ‘मत बाँधो’, ‘पंख न काटो’ आ द संबोधन
कसके लए कए गए ह गे?
ये संबोधन उन सब बड़ के लए ह जनके हाथ म बच्च के सपन को रोकने क ताक़त होती है — माता- पता, शक्षक, प रवार के
बुजग, और आगे बढ़कर वह पूरा समाज तथा व्यव ा जो तय करती है क कौन क्या बन सकता है।
कैसे पता चलता है: क वता म क्रयाएँ मध्यम पुरुष म ह — ‘काटो’, ‘बाँधो’, ‘रोको’। यानी सामने कोई है, जससे
बात क जा रही है। और वही रोक सकता है जसके पास अ धकार हो। सपना दे खने वाला बच्चा अपने ही सपने के
पंख नह काटता — काटता वही है जो उससे ऊपर है।
ध्यान दे ने क बात यह है क कव यत्री ने कसी का नाम नह लया। यही क वता को बड़ा बनाता है — पाठक ख़ुद तय करता है क
वह इस पं क्त म सुनने वाला है या कहने वाला। बहुत बार यह प्राथना अपने-आप से भी है, क्य क डर और आत्म-संदेह भी सपन के
पंख काट दे ते ह।
प्र.2 (ख) क वता म सपन क ग त न बाँधने क बात क्य कही गई होगी?
क्य क सपने क सारी उपयो गता उसक ग त म ही है। बँधा हुआ सपना केवल एक इच्छा रह जाता है; चलता हुआ सपना काम बन
जाता है।
सपना उठता है → कल्पना/िवचार बनता है ( आरोहण)
सपना लौटता है → आँखों में, िफर व्यवहार में उतरता है ( अवरोहण)
गित बाँध दी → न कल्पना बने गी, न सच्चाई
कारण: क वता क पूरी दलील उदाहरण से बनी है। सौरभ, बीज, अ न और धूम — इन चार क ग त एक ही दशा
म बँधी है, इस लए इनम से कोई भी कुछ नया नह रच सकता। सपना अकेला ऐसा है जसम दोन ग तयाँ ह; इसी से
वह ‘मेघ से रंग’ और ‘ करण से द प्त’ लेकर धरती तक ला पाता है। ग त बाँध दे ने का अथ है — सपने को उन्ह
चीज़ जैसा बना दे ना जो कुछ नह बदल सकत ।
जोड़कर दे खए: इ तहास म जो कुछ बदला, पहले कसी के सपने म ही बना — स्वतंत्रता, सबके लए शक्षा, चाँद
तक पहुँचना। य द उन सपन क ग त बाँध द जाती, तो वे कभी व्यवहार म नह उतरते।
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प्र.3 (ग) क वता म सौरभ, बीज, धुआँ, अ ग्न जैसे उदाहरण के माध्यम से सपन को इनसे भन्न बताते हुए उसे वशेष
बताया गया है। आपक दृ ष्ट म इन सबसे अलग सपन क और कौन-सी वशेषताएँ हो सकती ह?
क वता जो अंतर बताती है वह है — दोहरी ग त। इसके अ त रक्त सपन क कुछ और वशेषताएँ इन उदाहरण से उन्ह अलग
करती ह:
सपना बाँटने से घटता नह , बढ़ता है। सुगंध बखर जाए तो कम हो जाती है; आग बाँटो तो ईंधन ख़च होता है। पर एक व्य क्त
का सपना जब दूसर तक पहुँचता है तो और मज़बूत होता है — जैसे स्वतंत्रता का सपना करोड़ का सपना बन गया।
सपना समय का बंधन नह मानता। बीज को उगने के लए ऋतु चा हए, आग को ईंधन। सपना बीते समय म भी जा सकता है
और आने वाले समय म भी।
सपना अपनी दशा ख़ुद चुनता है। धुआँ केवल वह जाएगा जहाँ हवा ले जाए। सपना जहाँ चाहे जाता है — ‘मुक्त गगन म
वचरण’ करता है।
सपना ख़त्म नह होता, अगली पीढ़ को मल जाता है। अ न बुझ जाती है, सुगंध उड़ जाती है; अधूरा सपना कसी और के
हाथ म जाकर पूरा हो जाता है।
सपना बदल सकता है। बीज से वही पौधा नकलेगा जसका वह बीज है। सपना रास्ते म सीखकर अपना रूप बदल लेता है —
‘मेघ से रंग’ लेकर लौटता है।
तक का ढं ग: इन उदाहरण को कव यत्री ने य ही नह चुना। चार दखाई या महसूस होने वाली चीज़ ह, फर भी
बँधी हुई ह। सपना दखाई नह दे ता, फर भी सबसे स्वतंत्र है — यही वरोधाभास क वता को धार दे ता है।
प्र.4 (घ) क वता म ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ दोन के महत्व क बात क गई है। उदाहरण दे कर बताइए क आपने
‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ को कब-कब साथक होते दे खा?
आरोहण और अवरोहण तभी साथक होते ह जब वे एक ही चक्र के दो हस्से ह — ऊपर जाना कुछ पाने के लए, नीचे आना उसे
काम म लाने के लए।
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो
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क्षेत्र आरोहण अवरोहण साथकता
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जल-चक्र भाप बनकर पानी का ऊपर वषा बनकर बरसना ऊपर उठे िबना बादल
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aसंgगीतl सा से सा तक आरोह ऊपर के सा से नीचे उतरना — राग दोनों से पूरा होता है; के वल चढ़ ता स्वर
अवरोह अधूरा लगता है
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पवतारोहण चोट तक चढ़ाई सुर क्षत उतरकर लौटना
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पढ़ ाई नई क ठन बात सीखना
agउसे सरल करके कसी और को
समझाना
समझाने पर ही पता चलता है िक सचमुच समझा
या नही ं
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भेजा गया आँकड़ ा ही उड़ ान.cको
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अंत रक्ष तक जाना चत्र और आँकड़े धरती पर भेजना
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agl था। पर काम तब पूरा हुआ जब मने वही बात घर पर सबको समझाई और हमने छत के पाइप को ग े तक जोड़
नमूना उत्तर: “हमारे वद्यालय म व ान-प्रदशनी के लए मने वषा-जल संचयन पर बहुत पढ़ा — यह मेरा आरोहण
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दया। सीखी हुई बात का इस तरह ज़मीन पर उतरना ही अवरोहण था।”
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प्र.5 (ङ) “सपन म दोन ही ग त है/उड़कर आँख म आता है!” क्या आप सहमत ह क सपने ‘आँख म लौटकर’
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वास्त वकता बन जाते ह? अपने अनुभव या आस-पास के अनुभव से कोई उदाहरण द जए।
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g टकता तब है जब वह ‘आँख म’ आ जाता है, यानी जब आँख रोज़ उसे देखने लगती ह।
हाँ इस शत के साथ क लौटने के बाद उस पर काम कया जाए। क वता क पं क्त यही कहती है — सपना ऊपर उड़ता है, पर
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‘आँख म आना’ का अथ: यह मुहावरा दो काम एक साथ करता है। पहला — जो चीज़ आँख के सामने रहती है,
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उसे भुलाया नह जा सकता। दूसरा — आँख शरीर का वह हस्सा है जससे हम दु नया को नापते ह; सपना आँख म
आ गया तो अब वह कल्पना नह , योजना है। इसी लए कव यत्री ने ‘मन म आता है’ नह , ‘आँख म आता है’ लखा।
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नमूना उत्तर: “हमारे मोहल्ले के एक बड़े भैया राष्ट्रीय स्तर पर कब ी खेलना चाहते थे। पहले यह केवल बात थी।
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agशुरू हुआ जस दन वह हर सुबह
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फर उन्ह ने अपने कमरे म एक तारीख़ लखकर चपका द और रोज़ सुबह पाँच बजे मैदान जाने लगे। दो साल बाद
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उनक आँख के सामने आ गया।”
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दूसरा पक्ष भी ल खए — हर सपना पूरा नह होता, और यह मान लेना भी ईमानदारी है। पर अधूरा रहा सपना भी बेकार नह
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जाता: वह रास्ता, अभ्यास और अनुभव छोड़ जाता है, जो कसी दूसरे काम म लग जाता है।
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
शीषक — पृष्ठ 95
पाठ से
पाठ से
प्र.1 क वता का शीषक है ‘मत बाँधो’। य द आपको इस क वता को कोई अन्य नाम दे ना हो तो क्या नाम दगे? आपने
यह नाम क्य सोचा? यह भी ल खए।
पहले दे खए क ‘मत बाँधो’ नाम इतना अ ा क्य है — यह क वता क टे क से लया गया है, केवल दो शब्द का है, और आदे श
तथा प्राथना दोन जैसा सुनाई दे ता है। नया शीषक चुनते समय यही तीन कसौ टयाँ काम आएँगी: छोटा हो, क वता के कद्र य भाव से
नकले, और कुछ बचा भी रहने दे ।
संभा वत शीषक कस पं क्त/भाव से नकला क्या पकड़ता है
सपनों के पंख इन सपन के पंख न काटो किवता का सबसे मज़ बूत िबंब
दोनों ही गित सपन म दोन ही ग त ह किवता का असली तक — आरोहण और अवरोहण
मुक्त गगन मुक्त गगन म वचरण कर यह वतंत्रता का भाव
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स्वग का िशल्प स्वग बनाने का फर कोई शल्प सपनों का सामािजक उपयोग
लौटता हुआ सपना उड़कर आँख म आता है! सपने का सच बनना
नमूना उत्तर: “म इस क वता को ‘दोन ही ग त’ नाम दूँ गा/दूँ गी। ‘मत बाँधो’ बताता है क क्या नह करना है, पर
‘दोन ही ग त’ बताता है क सपना है क्या — वह चीज़ जो ऊपर भी जाती है और लौटकर आँख म भी आती है।
सौरभ, बीज, अ न और धूम के चार उदाहरण इसी एक बात को सद्ध करने के लए आए ह, इस लए यही नाम
क वता के कद्र पर बैठता है।”
शीषक चुनने का नयम: अच्छा शीषक क वता का सारांश नह होता, उसका प्रवेश- ार होता है। ‘सपने अच्छे होते
ह’ जैसा नाम सब कुछ कहकर क वता पढ़ने क ज़रूरत ही ख़त्म कर दे ता है।
अनुमान और कल्पना से — पृष्ठ 95
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
पाठ से
प्र.1 (क) मान ली जए आप एक नया संसार बनाना चाहते ह। उस संसार म आप क्या-क्या रखना चाहगे और क्या-क्या
नह ? अपने उत्तर का कारण भी बताइए।
इस प्रश्न का अच्छा उत्तर सूची भर नह होता। हर चीज़ के साथ कारण ल खए, और कारण ऐसा हो जो कसी एक व्य क्त के लए
नह , सबके लए ठ क बैठे।
यह रखूँगा/रखूँगी क्य यह नह रखूँगा/ क्य नह
रखूँगी
सबके िलए खुल ा जहाँ सीखने का रास्ता सबके लए एक भेद भाव — जाित, धम, भेद भाव सबसे पहले िकसी के सपनों
िवद्यालय और पुस्तकालय जैसा हो, वह सपने बराबरी से उगते ह िलंग , भाषा या पैसे का के ही पंख काटता है
साफ़ निदयाँ, पेड़ और क वता का ‘स्वग’ केवल मनुष्य का वह िवकास जो जंग ल और जो चीज़ लौटाई न जा सके , उसे
पशु-पिक्षयों की जगह नह है नदी को िनगल जाए ले ना के वल आरोहण है, अवरोहण
नही ं
कला, संग ीत और िशल्प ‘स्वग बनाने का शल्प’ क वता म यही डर और अपमान से चलने डरा हुआ मन नई बात सोच ही नही ं
के िलए समय है वाली व्यवस्था पाता
ग़ ल ती करने और सुध ारने बना ग़लती के कोई नया काम शुरू ही युद्ध और हिथयार वे उसी को नष्ट करते है ं जो पीिढ़ यों
की छू ट नह होता में बना हो
नमूना उत्तर: “मेरे संसार म हर बस्ती के बीच एक बग़ीचा और एक पुस्तकालय होगा, ता क खेलने और पढ़ने के
लए कसी को दूर न जाना पड़े। वहाँ यह पूछा ही नह जाएगा क कौन कस घर से आया है। म वहाँ कूड़ा जलाना,
पानी बरबाद करना और कसी को नाम लेकर चढ़ाना — ये तीन चीज़ नह रखूँगा/रखूँगी, क्य क तीन से कसी
दूसरे का नुकसान होता है और अपना कुछ भला नह होता।”
प्र.2 (ख) क वता म शल्प और कला के महत्व क बात क गई है। कलाएँ हमारे आस-पास क दु नया को सुंदर बनाती
ह। आप अपने जीवन को सुंदर बनाने के लए कौन-सी कला सीखना चाहगे? उससे आपका जीवन कैसे सुंदर
बनेगा? अनुमान करके बताइए।
उत्तर म तीन बात होनी चा हए — कौन-सी कला, क्य वही, और उससे रोज़ के जीवन म क्या बदलेगा। अं तम बात सबसे
ज़रूरी है, क्य क प्रश्न ‘सुंदर बनेगा’ पूछ रहा है, ‘सीख लूँगा’ नह ।
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
कला क्या सखाती है जीवन म क्या बदलता है
िचत्रकला ध्यान से दे खना रोज़ की साधारण चीज़ ें — पेड़, छाया, बरतन — िदलचस्प लगने लगती है ं
संग ीत / वाद्य लय और धैय िरयाज़ िसखाता है िक सुधार धीरे -धीरे आता है; मन शांत रहता है
िम ी का काम (म ृित्तका हाथ से आकार गढ़ना िबगड़ ने पर िफर से गढ़ ने की आदत पड़ ती है — यही जीवन में भी काम आती
िशल्प) है
कढ़ ाई / बुनाई (वस्त्र िशल्प) बारीक और नय मतता पुराने कपड़ े नए रूप में काम आने लगते है;ं अपनी बनाई चीज़ पहनने का
संतोष िमलता है
नाटक / अिभनय दूसरे क जगह खड़े होकर बोलने का डर जाता है और दू सरों को समझना आसान हो जाता है
सोचना
नमूना उत्तर: “म म के बरतन बनाना सीखना चा ँगा/चा ँगी। मेरे गाँव म कुम्हार काका चाक चलाते ह और म
का ल दा उनके हाथ म कुछ ही मनट म घड़ा बन जाता है। मुझे यह बात अच्छ लगती है क य द आकार बगड़
जाए तो म बेकार नह होती — उसे फर से गूँधकर नया रूप दया जा सकता है। इससे मेरा जीवन इस तरह सुंदर
बनेगा क म अपने हाथ से कुछ बनाना सीखूँगा/सीखूँगी और यह भी सीखूँगा/सीखूँगी क पहली बार म न बन पाना
कोई हार नह है।”
प्र.3 (ग) “सौरभ उड़ जाता है नभ म / फर वह लौट कहाँ आता है?” य द आपके पास अपने बीते हुए समय म लौटने
का अवसर मले तो आप बीते हुए समय म क्या-क्या प रवतन करना चाहगे?
यह कल्पना का प्रश्न है, पर उत्तर म ईमानदारी ही उसे अच्छा बनाती है। जो बदलना चाहते ह, उसके साथ यह भी ल खए क उससे
क्या फ़क पड़ता।
जो बात कहनी थी पर कही नह — कसी को धन्यवाद, कसी से क्षमा, कसी क मदद का प्रस्ताव।
जो आदत दे र से पड़ी — रोज़ थोड़ा पढ़ना, समय पर सोना, हसाब से ख़च करना।
जसे चढ़ाया या जसका साथ नह दया — यह बदलने लायक़ सबसे ज़रूरी चीज़ होती है।
जो सीखना छोड़ दया — कोई खेल, कोई वाद्य, कोई भाषा, जसे बीच म छोड़ दया था।
क वता से जो ड़ए: पं क्त का असली भाव यही है क उड़ी हुई सुगंध लौटती नह — बीता समय वापस नह आता।
इसी लए यह प्रश्न वास्तव म अतीत के बारे म नह , आज के बारे म है। जो बात हम ‘बदलना चाहते’ ह, उसे आगे से
न दोहराना ही उस चाहत का सच्चा उत्तर है।
नमूना उत्तर: “कक्षा छह म मेरे साथ बैठने वाला एक साथी बहुत धीरे पढ़ता था और कुछ बच्चे उसक हँसी उड़ाते
थे। म चुप रह जाता था। य द म लौट सकूँ तो उस दन बोलूँगा। इससे उसका डर कम होता और शायद वह वद्यालय
छोड़कर न जाता। अब म इतना कर सकता ँ क आगे कभी ऐसी जगह चुप न र ँ।”
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प्र.4 (घ) “बीज धू ल म गर जाता जो / वह नभ म कब उड़ पाता है?” य द सपने बीज क तरह ह तो उन्ह उगने के
लए कन चीज क आवश्यकता होगी? (संकेत— धूप अथात मेहनत, पानी अथात लगन आ द।)
पुस्तक ने संकेत म ही रास्ता दे दया है — बीज को जो-जो चा हए, उसका एक-एक रूपक सपने के लए भी बनाइए।
बीज को सपने के लए उसका अथ क्य
चा हए
धूप मेहनत बना धूप के पौधा भोजन नह बना पाता; बना मेहनत के सपना आगे नह
बढ़ता
पानी लगन पानी रोज़ चा हए, एक दन बहुत-सा दे ने से काम नह चलता — लगन भी
रोज़ क चीज़ है
उपजाऊ िम ी अच्छी संगित और सहयोग दे ने वाला बीज पत्थर पर नह उगता; सपना भी चढ़ाने वाले माहौल म नह पनपता
पिरवार
खाद सही जानकारी और मागदशन शक्षक, पुस्तक और अनुभवी लोग वही करते ह जो खाद करती है
समय और धै य पतीक्षा करने की तैयारी बीज बोकर रोज़ खोदकर दे खने से पौधा नह नकलता
िनराई-ग ड
ु ़ ाई बुरी आदते ं और ध्यान भटकाने वाली चीज़ ें खरपतवार पौधे का ही भोजन खा जाती है
हटाना
बाड़ / सुर क्षा हतोत्सािहत करने वाली बातों से बचाव छोटा पौधा हर पैर से कुचल सकता है; नया सपना हर ताने से टू ट सकता है
रूपक का लाभ: बीज का उदाहरण एक बात बहुत सफ़ाई से समझा दे ता है — उगना धीरे-धीरे होता है और नीचे,
दखाई न दे ने वाली जगह से शुरू होता है। सपने के साथ भी यही होता है: बहुत दन कुछ दखता नह , फर एक दन
अंकुर नकल आता है।
प्र.5 (ङ) “स्वग बनाने का फर कोई शल्प / भू म को सखलायेगा!” य द अ े सपन या वचार से स्वग बनाया जा
सकता है तो बुरे सपन अथवा वचार से क्या होता होगा? बुरे सपन या वचार से कैसे बचा जा सकता है?
पहला भाग — य द अच्छा वचार धरती को स्वग बनाने का शल्प सखा सकता है, तो बुरा वचार उसे नरक बनाने का शल्प
सखाएगा। इ तहास इसका गवाह है: युद्ध, दं गे, छु आछू त और दूसर को नीचा समझने क व्यव ाएँ — सब पहले कसी के मन म
एक वचार ही थ ।
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो
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बनता है
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अच्छा िवचार → सहयोग → कु छ
बुरा िवचार → o
cडरmऔर घृणा → कुछ टू टता है g l as
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aglभाग — बचाव कैसे:
दूसरा
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वचार को पहचा नए। बुरा वचार अक्सर ‘ये लोग ऐसे ही होते ह’ जैसे वाक्य से शुरू होता है। जहाँ पूरे समूह के बारे म एक
जैसा फ़ैसला सुनाई दे , वहाँ रुक जाइए।
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अकेले मत र हए। बुरे वचार अकेलेपन और चुप्पी म बढ़ते ह। बात कसी बड़े या मत्र से कह दे ने पर वे अपना आकार खो दे ते
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मन को काम द जए। खेल, कला, पढ़ाई, कसी क मदद — व्यस्त मन म बुरा वचार जगह नह पाता।
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अ संग त और अ ा पढ़ना। जो सुनते-पढ़ते ह, वही सोचने लगते ह; इसी लए यह चुनना ज़रूरी है क क्या सुन और क्या
दे ख।
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बदले क भावना को टा लए। क्रोध के क्षण म लया गया नणय लगभग हमेशा ग़लत नकलता है।
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a g ध्यान द जए: मन म बुरा वचार आ जाना अपने-आप म अपराध नह है — वह सबके मन म आता है। अंतर इस
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बात से पड़ता है क हम उसे रोक लेते ह या उस पर चल पड़ते ह।
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प्र.6
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(च) “इन सपन के पंख न काटो /इन सपन क ग त मत बाँधो!” कल्पना क जए क हर कसी को सपने दे खने
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और उन्ह पूरा करने क पूरी स्वतंत्रता मल जाए, तब दु नया कैसी होगी? आपके अनुसार उस दु नया म कौन-सी
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बात महत्वपूण ह गी?
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se दु नया कैसी होगी — उसम प्र तभा कसी एक वग या एक शहर तक सी मत नह रहेगी। जस बच्चे को आज पढ़ाई छोड़नी
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पड़ती है, वह वै ा नक बन सकेगा; जो लड़क आज मैदान तक नह जा पाती, वह खेल सकेगी। नए वचार बहुत अ धक आएँगे,
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क्य क सोचने वाले लोग बहुत अ धक हो जाएँगे।
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उस दु नया म ये बात महत्वपूण ह गी —
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अवसर क बराबरी। केवल ‘सपना दे खने क छू ट’ काफ़ नह ; वद्यालय, पुस्तक, प्र शक्षण और समय भी सबको मलना
चा हए, वरना स्वतंत्रता केवल काग़ज़ पर रहेगी।
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दूसरे क स्वतंत्रता का ध्यान। मेरा सपना वह तक जा सकता है जहाँ कसी और का हक़ शुरू नह होता। यही एक सीमा
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ज़रूरी है।
om न उड़े, यह सबसे बड़ी शत होगी। g l as
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असफलता को सामान्य मानना। जहाँ बहुत लोग नए काम करगे, वहाँ बहुत असफलताएँ भी ह गी। असफल व्य क्त का
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ag धरती का ध्यान। सबके सपने पूरे करने का बोझ प्रकृ त पर पड़ेगा, इस लए कम म अ धक करने क समझ आवश्यक होगी।
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मलकर काम करना। क वता के अनुसार सपना अकेले नह , ‘ शल्प’ बनकर पूरी भू म को सखाता है — यानी बड़े सपने साझे
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प्रयास से ही पूरे होते ह।
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सावधानी: ‘पूरी स्वतंत्रता’ का अथ ‘कोई नयम नह ’ नह है। क वता भी बंधन-मु क्त माँगती है, अराजकता नह —
वह सपने क ग त क बात करती है, दूसर को कुचलने क नह ।
प्र.7 (छ) “इन सपन के पंख न काटो /इन सपन क ग त मत बाँधो!” आपके वचार से यह सुझाव है? आदे श है?
प्राथना है? या कुछ और है? यह बात कससे कही जा रही है?
यह मुख्यतः प्राथना है, जो आदे श के रूप म कही गई है। रूप दे खए तो ‘न काटो’, ‘मत बाँधो’ आ ाथक क्रयाएँ ह — यानी
व्याकरण क दृ ष्ट से यह आदे श है। पर भाव दे खए तो इसम कोई अ धकार जताता नह , कोई वनती करता सुनाई दे ता है।
रूप पक्ष म तक कतना ठ क
आदे श क्रयाएँ आ ाथक ह — काटो, बाँधो, रोको प में ठीक, भाव में नही ं — आदे श दे ने के िलए ताक़त चािहए,
रू
जो यहाँ बोलने वाले के पास नही ं है
पाथना पूरी क वता ‘मत’ और ‘न’ पर टक है; कुछ माँगा नह जा रहा, सबसे उपयुक्त
केवल न रोकने को कहा जा रहा है
सुझाव अंत म तक दया गया है — सपना लौटकर धरती को शल्प आंिशक रूप से ठीक; किवता कारण भी बताती है
सखाएगा
चेतावनी पंख काट दे ने का अथ है संभावनाओं का समाप्त हो जाना भीतर िछपी हुई है, कही नही ं गई
यह बात कससे कही जा रही है — उन सबसे जनके हाथ म सपन को रोकने क श क्त है: माता- पता, शक्षक, बड़े लोग और
समाज। और एक अथ म स्वयं सपना दे खने वाले से भी, क्य क अपने सपने के पंख सबसे पहले अक्सर हम ख़ुद ही काटते ह — यह
सोचकर क ‘यह मुझसे नह होगा’।
दोहराव का असर: ये दो पं क्तयाँ क वता के आरंभ और अंत — दोन जगह ह। बीच म तक चलता है, और तक
पूरा होने पर वही बात लौटकर आती है। पहली बार वह नवेदन लगती है; अंत म, कारण सुन लेने के बाद, वह सद्ध
क हुई बात लगने लगती है। यही टे क क ताक़त है।
क वता क रचना — पृष्ठ 96
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पाठ से
पाठ से
प्र.1 “सौरभ उड़ जाता है नभ म...” • “बीज धू ल म गर जाता जो...” • “अ ग्न सदा धरती पर जलती...” उपयुक्त
पं क्तय पर ध्यान द जए। इन पं क्तय को पढ़ते समय हमारी आँख के सामने कुछ चत्र उभर आते ह। कई बार
क व अपनी बात अथवा मुख्य भाव को समझाने या बताने के लए उदाहरण के माध्यम से शब्द- चत्र क लड़ी-
सी लगा दे ता है जससे क वता म वशेष प्रभाव उत्पन्न हो जाता है। इस क वता म भी ऐसी अनेक वशेषताएँ छपी
ह। (क) अपने समूह के साथ मलकर इन वशेषताओं क सूची बनाइए। अपने समूह क सूची को कक्षा म सबके
साथ साझा क जए।
समूह क सूची म ये वशेषताएँ आनी चा हए। हर एक के साथ क वता क पं क्त भी ल खए, तभी सूची प्रमाण के साथ खड़ी होगी।
वशेषता क वता से उदाहरण क्या असर पड़ता है
शब्द-िचत्रों की लड़ी सौरभ, बीज, अ न, धूम — चार चत्र एक बात कहने से पहले दृ श्य बन जाता है, इसिलए तक अपने-आप
के बाद एक मन में बैठ जाता है
िवपरीताथक शब्दों का पयोग आरोहण – अवरोहण; नभ – धरती; उड़ना ऊपर-नीचे का िखंचाव पूरी किवता में बना रहता है
– गरना
समानाथ शब्दों का पयोग नभ – गगन; भू – भू म एक ही अथ अलग ध्विन में आता है, दोहराव खटकता नही ं
एक ही शब्द का बार-बार ‘मत’ — मत बाँधो, मत रोको; ‘इसका’ — िनषेध की रट-सी बन जाती है, जो िनवेद न को गहरा करती है
आना दो बार
पश्न पूछना (पश्नालंक ार) फर वह लौट कहाँ आता है? / वह नभ म उ त्तर पाठक से मनवा िलया जाता है, थोपा नही ं जाता
कब उड़ पाता है?
संबोधन / आ ाथक िक्रयाएँ न काटो, मत बाँधो, मत रोको किवता िकसी से सीधी बात करती है, इसिलए पाठक को
लगता है वह भी सुना जा रहा है
मानवीकरण सपना वचरण करता है, रंग लेता है, भू म अमूत सपना एक जीता-जागता पात्र बन जाता है
को सखलाता है
रूपक सपन के ‘पंख’ ‘पंख काटना’ मुहावरे -सा चुभता है और अन्याय का भाव जगाता
है
टेक (दोहराई गई पंिक्तयाँ) पहली दो पं क्तयाँ अंत म फर किवता गीत जैसी बन जाती है और मुख्य भाव याद रह जाता है
तत्सम शब्दावली और छोटी सौरभ, वचरण, द प्त, आरोहण, अवरोहण भाषा में गिरमा आती है; छोटी पंिक्तयाँ लय तेज़ रखती है ं
पंिक्तयाँ
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प्रस्तु त का सुझाव: समूह अपनी सूची इस क्रम म सुनाए — पहले पं क्त पढ़े , फर वशेषता का नाम ले, फर एक
वाक्य म बताए क वह वशेषता वहाँ क्या काम कर रही है।
प्र.2 (ख) नीचे इस क वता क कुछ वशेषताएँ और वे पं क्तयाँ द गई ह जनम ये वशेषताएँ समा हत ह। वशेषताओं
का सही पं क्तय से मलान क जए। क वता क वशेषताएँ — 1. एक-दूसरे के वपरीत अथ वाले शब्द का
प्रयोग कया गया है। 2. एक ही शब्द का प्रयोग बार-बार कया गया है। 3. समानाथ शब्द का प्रयोग कया गया
है। 4. प्रश्न पूछा गया है। 5. संबोधन का प्रयोग कया गया है। 6. सपने को मनुष्य क तरह च त्रत कया गया है।
क वता क पं क्तयाँ — 1. वह नभ म कब उड़ पाता है? 2. इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत
बाँधो! 3. स्वग बनाने का फर कोई शल्प / भू म को सखलायेगा! 4. इन सपन के पंख न काटो 5. नभ तक जाने
से मत रोको / धरती से इसको मत बाँधो! 6. द प्त लए भू पर आयेगा। / स्वग बनाने का फर कोई शल्प / भू म
को सखलायेगा!
वशेषता पं क्त वह वशेषता वहाँ कैसे है
1. िवपरीत अथ वाले शब्द 2 आरोहण × अवरोहण — ऊपर चढ़ना और नीचे उतरना, ठ क उलटे अथ वाले दो शब्द
एक ही साथ
2. एक ही शब्द बार-बार 5 दोन पं क्तय म ‘मत’ दोहराया गया है — मत रोको, मत बाँधो
3. समानाथ शब्द 6 भू और भू म — दोन का अथ धरती; एक ही अंश म पास-पास आए ह
4. पश्न पूछा गया है 1 ‘कब उड़ पाता है?’ — प्रश्नवाचक पं क्त, जसका उत्तर ‘कभी नह ’ है
5. संबोधन का पयोग 4 ‘न काटो’ कसी सामने खड़े व्य क्त से कहा गया है — यही संबोधन है
6. सपने को मनुष्य की तरह िचित्रत 3 सखाना मनुष्य का काम है; यहाँ सपना ही भू म का गुरु बन जाता है — मानवीकरण
करना
संक्षेप म — 1→2, 2→5, 3→6, 4→1, 5→4, 6→3
दो जगह उलझन हो सकती है: पं क्त 2 म ‘इसका’ और ‘मत’ भी दोहराए गए ह, इस लए वह वशेषता 2 से भी
मलती दखती है। पर वपरीताथक जोड़ी केवल उसी पं क्त म है, जब क शब्द-दोहराव पं क्त 5 म भी है — इस लए
वही मलान बनता है जसम कोई वशेषता बना जोड़ी के न रह जाए। इसी तरह पं क्त 3 और 6 दोन म ‘स्वग बनाने
का…’ आता है; अंतर यह है क पं क्त 6 म भू भी है, इस लए समानाथ वाली वशेषता उसी पर बैठती है।
शब्द क बात — पृष्ठ 96-97
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पाठ से
पाठ से
प्र.1 “इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो!” उपयुक्त पं क्तय म रेखां कत शब्द पर ध्यान
द जए। ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ दोन एक-दूसरे के वपरीताथक शब्द ह। आरोहण का अथ है— नीचे से
ऊपर क ओर जाना या चढ़ना और अवरोहण का अथ है— ऊपर से नीचे क ओर आना या उतरना। (क) नीचे
दए रक्त ान म ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ का उपयुक्त प्रयोग करके वाक्य को पूरा क जए। • पवतारो हय
ने बीस दन तक पवत पर ______ कर वजय प्राप्त क । • न दयाँ वशाल पवत से ______ करते हुए सागर म मल
जाती ह। • अंकग णत म बड़ी संख्या से छोट संख्या क ओर लखने क प्र क्रया ______ क्रम कहलाती है। इसी
प्रकार से ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ शब्द के प्रयोग को दे खते हुए आप भी कुछ साथक वाक्य बनाइए।
पवतारो हय ने बीस दन तक पवत पर आरोहण कर वजय प्राप्त क ।
न दयाँ वशाल पवत से अवरोहण करते हुए सागर म मल जाती ह।
अंकग णत म बड़ी संख्या से छोट संख्या क ओर लखने क प्र क्रया अवरोहण क्रम कहलाती है।
कैसे तय कर: हर वाक्य म दे खए क ग त क दशा क्या है। पवतारोही नीचे से ऊपर जाते ह — आरोहण। नद
पवत से समुद्र क ओर, यानी ऊपर से नीचे — अवरोहण। संख्याएँ बड़ी से छोट क ओर घट रही ह, इस लए वहाँ भी
अवरोहण ( जसे अंग्रेज़ी म descending order कहते ह)। ‘बढ़ते क्रम’ को आरोहण क्रम कहगे।
अपने वाक्य —
राग भैरव म स्वर का आरोहण धीमा है और अवरोहण तेज़।
वमान ने उड़ान भरते ही तेज़ी से आरोहण कया और तीस मनट बाद अवरोहण आरंभ कर दया।
बुख़ार का आरोहण रात म हुआ और सुबह दवा लेने पर अवरोहण शुरू हुआ।
परीक्षा-प रणाम को अंक के अवरोहण क्रम म लगाया गया, इस लए सबसे अ धक अंक वाला नाम सबसे ऊपर था।
प्र.2 (ख) नीचे द गई क वता क पं क्तय के रेखां कत शब्द पर ध्यान द जए— “वह नभ म कब उड़ पाता है?” “धूम
गगन म मँडराता है।” ‘नभ’ और ‘गगन’ समान अथ वाले शब्द ह। रेखां कत शब्द के समानाथ शब्द का प्रयोग
करते हुए कुछ नई पं क्तय क रचना क जए और दे खए क पं क्तय म लय बनाए रखने के लए और कन
प रवतन क आवश्यकता पड़ती है?
‘नभ’ और ‘गगन’ के समानाथ — आकाश, अंबर, व्योम, आसमान, अंत रक्ष, शून्य।
नई पं क्तयाँ —
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वह अंबर में कब उड़ पाता?
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धुआ ँ आसमान में छाता है।
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aवह व्योम-लोक तक कब जाता?
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धूम गगन पर मँडराता है।
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लय के लए क्या-क्या बदलना पड़ा — a
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शब्द क लंबाई बदल जाती है। ‘नभ’ म दो अक्षर ह, ‘गगन’ म तीन, ‘अंबर’ और ‘आकाश’ म और अ धक भार है। शब्द
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बदलते ही पं क्त भारी हो जाती है, इस लए कह और से उतना ही भार घटाना पड़ता है — जैसे ‘कब उड़ पाता है?’ को ‘कब
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उड़ पाता?’ करना पड़ा।
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m .cरूप बदलना पड़ता है। ‘मँडराता है’ क जगह ‘छाता है’ रखने पर पं क्त फरaसेgनपी हुई हो जाती है।
e बचानी पड़ती है। मूल क वता म ‘मँडराता है / आता है’ क तुक है। शब्द बदलने पर अगली पं क्त का अंत भी उसी ध्व न
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a पर लाना पड़ता है, वरना जोड़ी टू ट जाती है।
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कभी शब्द-क्रम बदलना पड़ता है। ‘गगन म धूम मँडराता है’ और ‘धूम गगन म मँडराता है’ — अथ एक है, पर लय दूसरी।
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gl भी चुना जाता है — इसी लए महादे वी वमा ने एक ही अथ के लए कह
नष्कष: समानाथ शब्द अथ म बराबर होते ह, ध्व न और मात्रा म नह । क वता म शब्द केवल अथ के लए नह
चुना जाता, उसके भार और ध्व न केaलए
‘नभ’ रखा और कह ‘गगन’।
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 (ग) क वता म ‘मत’ शब्द के साथ ‘बाँधो’, ‘काटो’ क्रया लगाई गई है। आप ‘मत’ के साथ कौन-कौन सी क्रयाएँ
लगाना चाहगे? ल खए। (संकेत— ‘मत डरो’)
‘मत’ + क्रया वाक्य म
मत डरो मंच पर जाने से मत डरो, सब तुम्हारी ही तरह घबराते है।ं
मत रुको एक बार असफल हो गए तो वही ं मत रुको।
मत हारो अंितम गेंद तक मत हारो।
मत भूल ो िजसने किठन समय में साथ िदया, उसे मत भूल ो।
मत झुक ो अन्याय के आगे मत झुको।
मत तोड़ो बग़ ीचे की टहिनयाँ मत तोड़ ो।
मत िचढ़ ाओ िकसी को उसके नाम या रंग पर मत िचढ़ ाओ।
मत छोड़ो आधा सीखा हआ
ु काम बीच में मत छोड़ ो।
मत फें को कू ड़ ा सड़ क पर मत फे ं को।
मत थको ल क्ष्य पास है, अभी मत थको।
ध्यान दे ने लायक़ बात: ‘मत’ हमेशा आ ाथक क्रया के साथ आता है और कसी काम को रोकने के लए कहा
जाता है। ‘नह ’ इससे अलग है — वह सूचना दे ता है (‘वह नह आया’), जब क ‘मत’ नदश दे ता है (‘मत जाओ’)।
क वता क सारी श क्त इसी अंतर से आती है: कव यत्री सूचना नह दे रह , वे रोक रही ह।
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 (घ) आपक भाषा म ‘बाँधने’ के लए और कौन-कौन सी क्रयाएँ ह? अपने समूह म चचा करके ल खए और
उनसे वाक्य बनाइए। (संकेत— जोड़ना)
क्रया कस तरह का बाँधना वाक्य
जोड़ना दो चीज़ को मलाना टू टी डोर के दोनों िसरे जोड़ िदए गए।
कसना ढ ले को तंग करना गठरी की रस्सी अच्छी तरह कस दो।
गाँठ लगाना सर को अटकाना रूमाल में गाँठ लगाकर उसने बात याद रख ली।
जकड़ना ज़ोर से पकड़ रखना ठं ड ने पूरे गाँव को जकड़ िलया।
लपेटना चार ओर घुमाकर बाँधना दादी ने पैर पर प ी लपेट दी।
गूँथना बल दे कर आपस म मलाना उसने फू लों को गूँथकर माला बना ली।
नाथना पशु को रस्सी से बाँधना बैल ों को हल में नाथा गया।
टाँक ना / िसलना धागे से जोड़ना बटन टाँक िदया गया है।
बटोरना-बाँध ना (गठरी बाँध ना) समेटकर बाँधना यात्रा से पहले उसने गठरी बाँध ली।
सीिमत करना / रोकना लाक्ष णक अथ म बाँधना िनयमों ने उसकी कल्पना को सीिमत कर िदया।
मुहावरे भी दे खए: गाँठ बाँधना (बात याद रखना), समाँ बाँधना (माहौल जमा दे ना), मन बाँधना ( हम्मत बटोरना),
धरती से बाँधना (आगे न बढ़ने दे ना — इसी क वता म)। इन्ह दे खकर समझ आता है क ‘बाँधना’ केवल रस्सी का
काम नह है; क वता म तो वह पूरी तरह लाक्ष णक है।
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
प्र.5 (ङ) ‘मत’ शब्द को उलट कर लखने से शब्द बनता है ‘तम’ जसका अथ है ‘अँधेरा’। क वता म से कुछ ऐसे और
शब्द छाँ टए जन्ह उलट कर लखने से अथ दे ने वाले शब्द बनते ह।
क वता का शब्द उलटने पर अथ
मत तम अँधेरा (यह उदाहरण पुस्तक ने दया है)
जाता ताजा नया, बासी का उलटा
सदा दास सेवक
काटो टोका रोकना-टोकना; ‘टोका’ = रोका
कब बक बगुला; ‘बक’ बकना क्रया का रूप भी है
यह हय घोड़ा
यह खेल कैसे खेल: पूरे शब्द को उलटकर प ढ़ए — अक्षर-दर-अक्षर, वण-दर-वण नह । ‘जा + ता’ को उलटने पर
‘ता + जा’ बनता है। इसी लए दो अक्षर वाले शब्द म यह जल्द बनता है और लंबे शब्द म मु श्कल से।
Try This: क वता के बाहर से भी ऐसे जोड़े खो जए — राज–जरा, नाम–मान, कला–लक (नह बनता, इस लए
छोड़ द जए), गल–लग, नद –द न, रस–सर, कम–मक (नह ), दल–ल द (नह )। जो जोड़े बन, केवल वही सूची म
र खए — यही जाँच का असली हस्सा है।
काल प रवतन — पृष्ठ 97-98
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
पाठ से
प्र.1 “सौरभ उड़ जाता है नभ म” उपयुक्त पं क्त को ध्यान से दे खए। इस पं क्त क क्रया ‘जाता है’ से पता चलता है
क यह वतमान काल म लखी गई है। य द हम इसी पं क्त को भूतकाल और भ वष्य काल म लख तो यह
नम्न ल खत प्रकार से लखी जाएगी— भूतकाल— सौरभ उड़ गया है नभ म भ वष्य काल— सौरभ उड़ जाएगा
नभ म क वता म वतमान काल म लखी गई ऐसी अनेक पं क्तयाँ आई ह। उन पं क्तय को क वता म से ढूँ ढ़कर
भूतकाल और भ वष्य काल म ल खए।
वतमान काल (क वता क पं क्त) भूतकाल भ वष्य काल
सौरभ उड़ जाता है नभ में सौरभ उड़ गया है नभ म सौरभ उड़ जाएगा नभ में
िफर वह लौट कहाँ आता है? फर वह लौट कहाँ आया है? िफर वह लौट कहाँ आएगा?
बीज धूिल में िगर जाता जो बीज धू ल म गर गया जो बीज धूिल में िगर जाएगा जो
वह नभ में कब उड़ पाता है? वह नभ म कब उड़ पाया है? वह नभ में कब उड़ पाएगा?
अि न सदा धरती पर जलती (है) अ न सदा धरती पर जली है अि न सदा धरती पर जले गी
धूम गगन में मँडराता है! धूम गगन म मँडराया है! धूम गगन में मँडराएगा!
सपनों में दोनों ही गित है ं सपन म दोन ही ग त थ सपनों में दोनों ही गित होंगी
उड़ कर आँखों में आता है! उड़कर आँख म आया है! उड़ कर आँखों में आएगा!
काल कहाँ से बदलता है: वाक्य म केवल क्रया बदलती है, कता और बाक़ शब्द वैसे ही रहते ह — जाता है / गया
है / जाएगा। पुस्तक ने भूतकाल के लए ‘उड़ गया है’ रूप लया है, जो आसन्न भूत है (अभी-अभी हुआ काम)।
इसी पद्ध त से ऊपर क ता लका बनी है।
ध्यान र खए: ‘अ न’ और ‘ग त’ स्त्री लग ह, इस लए उनक क्रया भी स्त्री लग रूप लेगी — जली है, जलेगी; थ ,
ह गी। ‘धूम’ और ‘सौरभ’ पु ल्लंग ह, इस लए मँडराया, उड़ा। लग के अनुसार क्रया बदलना यहाँ सबसे आम ग़लती
है।
शब्दकोश से — पृष्ठ 98
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो
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पाठ से
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पाठ से
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a s emबनाने का फर कोई शल्प” शब्दकोश के अनुसार ‘ शल्प’ शब्द के नम्न ल खत अथ ह— 1. हाथ से कोई
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“स्वग
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प्र.1
चीज बनाकर तैयार करने का काम— दस्तकारी, कारीगरी या हुनर, जैसे— बरतन बनाना, कपड़े सलना, गहने
om
गढ़ना आ द। 2. कला संबंधी व्यवसाय। 3. दक्षता, कौशल। 4. नमाण, सजन, सृ ष्ट, रचना। 5. आकार, आवृ त्त।
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6. अनुष्ठान, क्रया, धा मक कृत्य। अब शब्दकोश से ‘ शल्प’ शब्द से जुड़े नम्न ल खत शब्द के अथ खोजकर
ल खए— 1. शल्पकार, शल्पी, शल्पजीवी,em
a s शल्पकारक, श ल्पक या शल्पकारी 2. शल्पकला 3.
a l शल्प व ा 6. शल्पशाला या शल्पालय
शल्पकौशल 4. शल्पगृह या शल्पगेहg5.
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m a e म प्रयोग
sवाक्य
शब्द
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अथ
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िशल्पकार, िशल्पी, हाथ के हुनर से वस्तुएँ बनाने वाला व्य क्त — कारीगर, दस्तकार। खजुराहो के मंिदरों को गढ़ ने
a िशल्पजीवी, िशल्पकारक, शल्पजीवी वह है जो शल्प से ही जी वका चलाता है; शल्पकारी शब्द वाले िशल्पकारों के नाम आज
कोई नही ं जानता।
s
िशिल्पक, िशल्पकारी कारीगर के लए और कारीगरी के काम — दोन के लए आता है।
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m.co बस्तर की ढोकरा िशल्पकला में agl
se
िशल्पकला हाथ से वस्तुएँ गढ़ने क कला; हस्तकला, दस्तकारी।
g l a मोम के साँचे से धातु की मूितयाँ
a बनती है।ं
com
िशल्पकौशल शल्प म नपुणता; कारीगरी क दक्षता। कोणाक के सूय मंिदर का पिहया
m .
भारतीय िशल्पकौशल का
om a se उदाहरण है।
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m ृह, िशल्पगेह agl
a s गाँव के िशल्पगृह में दस बुनकर
agl
िशल्पग वह भवन या ान जहाँ शल्प का काम होता है — कायशाला,
कारखाना। एक साथ करघे पर काम करते
है।ं
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com g l a
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पहले िशल्पिवद्या िपता से पुत्र को
a
िशल्पिवद्या शल्प का ान या शास्त्र; कारीगरी सखाने वाली वद्या।
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िमलती थी, अब उसके िलए
agl
संस्थान भी है।ं
शल्प सखाने या करने का ान — कायशाला, प्र शक्षण-कद्र। िवद्यालय की िशल्पशाला में हमने
िमom
िशल्पशाला, िशल्पालय
c
ी के दीये बनाना सीखा।
m .
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. cशब्द a glaहै क नया शब्द कसके बारे म है —
omबनने का नयम दे खए: ‘ शल्प’ के आगे जो शब्द जुड़ता है, वही बताता
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g l as कार/ई (करने वाला), कला (काम), कौशल ( नपुणता), गृह/शाला/आलय ( ान), वद्या ( ान)। यही रचना दूसरे
a c
.
शब्द म भी चलती है: चत्रकार, चत्रकला, चत्रशाला। एक बार यह ढाँचा पकड़ लेने पर नया शब्द भी अथ बता दे ता
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है।
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
Check it yourself: शब्दकोश म इन शब्द को ढूँ ढ़ते समय ध्यान द जए क सब एक ही जगह मलगे — ‘ श’
के अंतगत, ‘ शल्प’ के ठ क बाद। शब्दकोश अकारा द क्रम म चलता है, इस लए जुड़े हुए शब्द पास-पास ही रहते ह।
आपक बात — पृष्ठ 98
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 (क) क वता म ग त को न बाँधने क बात कही गई है। आप ‘बाँधने’ का प्रयोग कन- कन तय या वस्तुओं के
लए करते ह? बताइए। (संकेत— गाँठ बाँधना)
‘बाँधना’ दो तरह से आता है — सचमुच के बाँधने म और लाक्ष णक अथ म। क वता का ‘बाँधना’ दूसरे प्रकार का है।
प्रकार प्रयोग वाक्य
वस्तुओ ं के िलए गठरी, बोझ, रस्सी, जूते के फ ते, पगड़ी, राखी, प , गाय-बैल दादी ने चोट पर प ी बाँध दी।
िनम ण में बाँध बाँधना, मेड़ बाँधना, पुल क डोर बाँधना गाँव वालों ने नाले पर िम ी की मेड़ बाँध
दी।
समय-िनयम के समय बाँधना, सीमा बाँधना, दनचया बाँधना परीक्षा के िलए हमने पढ़ ने का समय बाँध
िलए िलया।
मुहावरों में गाँठ बाँधना (याद रखना), समाँ बाँधना (माहौल जमाना), मन बाँधना गायक ने ऐसा समाँ बाँधा िक कोई उठा ही
( हम्मत करना), बँधी मु (न बताया भेद) नही।ं
भाव या स्वतंत्र ता सपन क ग त बाँधना, कल्पना को बाँधना िकसी की कल्पना बाँध दे ना उसकी सबसे
के िलए बड़ ी हािन करना है।
अंतर सम झए: रस्सी से बाँधना सुरक्षा दे ता है — गठरी बखरती नह , घाव खुलता नह । पर वचार को बाँधना हा न
करता है, क्य क वचार का काम ही चलना है। क वता इसी दूसरी तरह के बाँधने के वरुद्ध है।
प्र.2 (ख) ‘स्वग’ शब्द से आशय है ‘सुखद ान’। अथात वह ान जहाँ सुख, शां त, समृ द्ध और आनंद क अनुभू त
हो। अपने घर, आस-पड़ोस और व ालय को सुखद ान बनाने के लए आप क्या-क्या प्रयास करगे? सूची
बनाइए और घर के सदस्य के साथ साझा क जए।
अच्छ सूची वह है जसम हर काम आपके अपने हाथ का हो — ‘सरकार को यह करना चा हए’ जैसी बात इसम नह आत ।
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जगह म क्या करूँगा/करूँगी इससे क्या बदलेगा
घर अपना सामान अपनी जगह रखना; छोटे भाई-बहन को पढ़ाना; बड़ से रोज़ बात घर में झगड़ े और खीझ कम होंगे;
करना; बजली-पानी बचाना सबका समय बचेगा
आस- कूड़ा कूड़ेदान म डालना; गली म पौधे लगाना और स चना; बुजग क छोट -मोट गली साफ़ रहेगी, हिरयाली बढ़ े गी,
पड़ोस मदद; त्योहार पर सबको साथ बुलाना लोग एक-दू सरे को नाम से जानेगं े
िवद्यालय कसी को चढ़ाना नह और चढ़ाने पर बोलना; कक्षा और शौचालय साफ़ रखना; डर कम होगा, इसिलए सबका मन
कमज़ोर साथी को पढ़ाई म साथ दे ना; पुस्तकालय क कताब समय पर लौटाना पढ़ ाई में लगेगा
नमूना उत्तर (साझा करने के लए): “मने तीन काम चुने ह — रोज़ रात को अपनी कताब जमाकर रखना, गली के
पीपल के पौधे को हर दूसरे दन पानी दे ना, और कक्षा म कसी को चढ़ाते दे खूँ तो चुप न रहना। ये तीन काम म
आज से शुरू कर सकता ँ/सकती ँ और इनके लए कसी से पैसे या अनुम त क ज़रूरत नह है।”
क वता से जोड़: ‘स्वग बनाने का शल्प’ का अथ यही है — स्वग कह से आता नह , बनाया जाता है, और वह भी
छोटे -छोटे हाथ के काम से।
प्र.3 (ग) क वता म सपन क बात क गई है। आपका कौन-सा सपना ऐसा है जो य द सच हो जाए तो वह दूसर क
सहायता कर सकता है? उसके वषय म बताइए।
अच्छे उत्तर म तीन बात होनी चा हए — सपना क्या है, कसक और कैसे मदद होगी, और आज से पहला क़दम क्या है।
तीसरी बात ही सपने को कल्पना से अलग करती है।
सपना कसक मदद आज का पहला क़दम
डॉक्टर बनकर अपने गाँव में काम जन्ह इलाज के लए तीस कलोमीटर िव ान में िनयिमत मेहनत; पाथिमक उपचार सीखना
करना जाना पड़ता है
मोहल्ले में एक िनःशुल्क पुस्तकालय वे बच्चे जनके घर म कताब नह ह अपनी पढ़ ी हुई िकताबे ं एक अलमारी में जमा करना और
सािथयों से भी माँगना
िशक्षक बनकर पहली पीढ़ ी के बच्चों वे बच्चे जनके घर म कोई पढ़ा- लखा अभी अपने से छोटे दो बच्चों को रोज़ आधा घंटा पढ़ ाना
को पढ़ ाना नह
वष -जल संचयन हर छत पर ग मय म पानी क कमी झेलने वाला अपने घर की छत के पाइप को ग े तक जोड़ ना और
पूरा मोहल्ला उसका पिरणाम िदखाना
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर: “मेरा सपना है क म अपने मोहल्ले म एक छोटा-सा पुस्तकालय बनाऊँ। यहाँ बहुत बच्चे ह जनके घर
म कहानी क एक भी कताब नह है। य द यह सपना सच हुआ तो शाम को खाली बैठे बच्च को पढ़ने के लए कुछ
मलेगा। इसके लए मने अभी से अपनी पुरानी कताब एक पेट म जमा करनी शुरू कर द ह और चार सा थय ने भी
अपनी कताब दे ने का वादा कया है।”
चचा-प रचचा — पृष्ठ 99
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 “सपन म दोन ही ग त है/उड़कर आँख म आता है।” कसी एक के ारा दे खा गया सपना बहुत से लोग का
सपना भी बन जाता है, जैसे— हमारे स्वतंत्रता सेना नय ारा भारत को स्वतंत्र कराने का सपना सभी भारतीय
का सपना बन गया। सा थय से चचा क जए क आपके कौन-से ऐसे सपने ह जन्ह पूरा करने के लए आप अन्य
लोग को भी जोड़ना चाहगे।
पहले यह पहचा नए क कौन-सा सपना अकेले पूरा नह हो सकता। जस काम म कई हाथ चा हए, वही सपना दूसर को जोड़ने
वाला होता है।
साझा सपना क्य अकेले नह होगा कसे जोड़गे
मोहल्ला कू ड़ा-मुक्त हो एक घर का कूड़ा उठा लेने से गली साफ़ नह होती सभी घर, सफ़ ाईकम , दुकानदार,
नगरपािलका
गाँव में कोई बच्चा िवद्यालय से बाहर माता- पता को समझाना और मदद करना कई लोग िशक्षक, पंचायत, बड़ े िवद्याथ , आँगनवाड़ ी
न रहे का काम है
तालाब और पेड़ बचें एक व्य क्त के लगाए पौधे क रखवाली अकेले नह िवद्यालय, गाम-सभा, युवा मंडल
होती
िवद्यालय में कोई िकसी को न िचढ़ ाए यह आदत पूरी कक्षा के मलकर तय करने से बदलती सहपाठी, कक्षा-िशक्षक, अिभभावक
है
इ तहास से सीख: स्वतंत्रता का सपना पहले कुछ ही लोग का था। वह जन-आंदोलन तब बना जब उसे सबक रोज़
क ज़दगी से जोड़ दया गया — नमक, खाद , वदे शी वस्त्र का ब हष्कार। इसी तरह कोई भी सपना तभी फैलता है
जब लोग को दखे क उसम उनका अपना हत भी है।
चचा का तरीक़ा: समूह म हर साथी एक सपना बताए; फर मलकर तय क जए क उनम से कौन-से दो सपने इस
साल वद्यालय म सचमुच शुरू कए जा सकते ह, और उनके लए पहला काम क्या होगा।
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सृजन — पृष्ठ 99-100
पाठ से आगे
पाठ से आगे गतवध
प्र.1 (क) वराम चह्न का फेरबदल— रोको मत, जाने दो रोको, मत जाने दो लेखन म वराम चह्न का वशेष महत्व
होता है। … नीचे कुछ चत्र दए गए ह। आप कन चत्र के लए ‘रोको मत, जाने दो’ या ‘रोको, मत जाने दो’ का
प्रयोग करगे? दए गए रक्त ान म ल खए और इन चत्र को शीषक भी द जए।
पहले नयम साफ़ कर ली जए। अल्प वराम जहाँ लगता है, वाक्य वह टू टता है और ‘मत’ कस शब्द के साथ जुड़ेगा, यही बदल
जाता है।
रोको मत , जाने दो → रोकना मना है — जाने दीिजए
रोको , मत जाने दो → जाना मना है — रोक लीिजए
चत्र (पृष्ठ 99) क्या हो रहा है सही संभा वत शीषक
वाक्य
1. सड़क पर ज़ेबा-क्रॉिसंग ; एक व्यिक्त बच्चे का हाथ कार नकलने तक बच्चे का रोको, मत सुरक्षा पहले / पहले
पकड़कर रोक रहा है, सामने से कार आ रही है सड़क पार करना ख़तरनाक है जाने दो दे खो, फर बढ़ो
2. जंग ल के िकनारे बोड — ‘यह बाघ िवचरण क्षेत्र है’; एक यह वन्य जीव का क्षेत्र है, भीतर रोको, मत यह जंगल उनका घर है
व्यिक्त भीतर जाने को है जाना जान-जो खम है जाने दो / चेतावनी प ढ़ए
3. सै िनक बेटी छु ी के बाद पीठ पर बैग िलए िवदा ले रही है; ूट पर लौटना कतव्य है, इसे रोको मत, कतव्य पहले / वदा,
पिरवार गले लगा रहा है (‘छु ि याँ समाप्त, सै िनक जाने को रोका नह जाना चा हए जाने दो फर मलगे
तैयार’)
4. मतदान कें द के बाहर पहचान-पत्र िलए स्त्री और बच्ची; मतदान हर नाग रक का अ धकार रोको मत, मेरा वोट, मेरा अ धकार
एक व्यिक्त कह रहा है ‘तुम मत जाओ…’ है; कसी को रोकना अनु चत है जाने दो / मतदान अवश्य
पहचानने क कुंजी: ख़ुद से पू छए — जाने म कसी का नुकसान है या भला? नुकसान है (कार आ रही है, बाघ
का क्षेत्र है) तो ‘रोको, मत जाने दो’। भला है या वह कसी का अ धकार/कतव्य है ( ूट , मतदान) तो ‘रोको मत,
जाने दो’। एक अल्प वराम क जगह बदलने से वाक्य का अथ ही उलट जाता है — इसी लए वराम- चह्न को ‘लेखन
का साँस लेना’ कहा जाता है।
Try This: इसी तरह के और वाक्य बनाइए — “खाओ मत, चलो” / “खाओ, मत चलो”; “पढ़ो मत, सो जाओ” /
“पढ़ो, मत सो जाओ”। और वह प्र सद्ध उदाहरण भी दे खए — “रोको मत, जाने दो” क तरह ही “क्षमा नह , दं ड
दो” और “क्षमा, नह दं ड दो” म अंतर आ जाता है।
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो
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(ख) क वता आगे बढ़ाएँ — नीचे द गई पं क्तय को आगे बढ़ाते हुए अपनी एक क वता तैयार क जए। “इन
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सपन के पंख न काटो इन सपन क ग त मत बाँधो।”
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पहले तीन बात तय क जए —
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लय: मूल पं क्तयाँ छोट और लगभग बराबर लंबाई क ह। अपनी पं क्तयाँ भी उतनी ही र खए, वरना गाते समय टू ट जाएँगी।
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ढाँचा: महादे वी वमा ने पहले उदाहरण दए, फर नवेदन
e mदोहराया। यही क्रम अपनाइए — दो-तीन चत्र, फर वही टेक।
aलौटा द जए — इसी से क वता गीत बनेगी।
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टे क: हर छं द के बाद ‘इन सपन के पंख न काटो’
नमूना क वता:
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eइनmसपनों की गित मत बाँधो।
इन सपनों के पंख न काटो
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नदी कभी पीछे कब लौटी?
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दीपक अपनी लौ कब रोके ?
पर सपना दोनों कर लेत ा —
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ऊपर उठकर आँख में टोके !
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mइसकी उड़ ान न छोटी कर दो a g
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ag इसके पाँव न िम ी बाँधो।
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यह जो लौटे तो लाएगा
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िचिड़ यों से स्वर, निदयों से गित,
िम ी को िफर से िसखलाएगा
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बीज उगाने की कोई युिक्त!
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इन सपनों के पंख न काटो
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इन सपनों की गित मत बाँधो।
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
इस नमूने म क्या-क्या मूल क वता से लया गया है: उदाहरण क लड़ी (नद , द पक), दोन ग तय का तक
(ऊपर उठना और लौटना), लौटते समय कुछ लेकर आना (‘ च ड़य से स्वर’ — जैसे मूल म ‘मेघ से रंग’), और अंत
म टे क क वापसी। अपनी क वता म आप अपने आस-पास के चत्र र खए — पतंग, रेल, बरगद, चाँद — पर यही
ढाँचा बनाए र खए।
खोया-पाया — पृष्ठ 100
पाठ से आगे
पाठ से आगे गतवध
प्र.1 मान ली जए आपका सपना कह खो गया है। उसके खो जाने क रपोट तैयार कर। आपको स्कूल प्रशासन को
यह रपोट भेजनी है। इसके लए स्कूल प्रशासन के नाम एक पत्र ल खए।
यह औपचा रक पत्र है, पर वषय कल्पना का है। मज़ा इसी म है — खोई हुई वस्तु क रपोट का ढाँचा वैसा ही र खए (कब खोया,
कहाँ खोया, पहचान क्या है, मलने पर क्या कर), पर उसम ‘वस्तु’ क जगह सपना रख द जए।
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नमूना पत्र:
सेवा म,
प्रधानाचाय महोदय,
राजक य उच्च माध्य मक वद्यालय,
बारीपाड़ा, ज़ला — मयूरभंज
वषय — खोए हुए सपने क सूचना दे ने हेतु।
महोदय,
स वनय नवेदन है क म कक्षा आठ ‘अ’ का वद्याथ ँ। मेरा एक सपना वगत कुछ महीन से खो गया है और बहुत
खोजने पर भी नह मला। इसक सूचना म वद्यालय प्रशासन को दे ना चाहता ँ।
खोई वस्तु का ववरण —
नाम: ‘गाँव म एक पुस्तकालय बनाने’ का सपना।
कब खोया: लगभग तब, जब आधे-वा षक परीक्षा के बाद कुछ लोग ने कहा क यह काम बच्च के बस का नह
है।
कहाँ खोया: ठ क-ठ क ान मालूम नह । संभवतः कक्षा और घर के बीच, उस चुप्पी म जहाँ मने अपनी बात
कहनी बंद कर द ।
पहचान: दे खने म छोटा, पर उठाने पर भारी। इसके साथ पुरानी कताब क एक पेट और चार सा थय के नाम
भी जुड़े हुए ह।
य द यह सपना कसी को मले तो कृपया उसे वद्यालय के सूचना-पट पर लगा द अथवा मुझे लौटा द। म आगे से इसे
और सँभालकर रखूँगा — रोज़ थोड़ा काम करके और अपनी बात कहकर।
आपसे यह भी नवेदन है क वद्यालय म ऐसे खोए हुए सपन के लए एक ‘खोया-पाया’ कोना बनाया जाए, जहाँ
वद्याथ अपने सपने लखकर लगा सक और साथी उनम जुड़ सक।
धन्यवाद।
दनांक — 12 अगस्त 20—
आपका आ ाकारी शष्य,
क.ख.ग.
कक्षा 8 ‘अ’, अनुक्रमांक 17
अ रपोट म क्या होना चा हए: औपचा रक पत्र का ढाँचा — सेवा म, वषय, संबोधन, वनम्र भाषा, ववरण,
नवेदन, धन्यवाद, दनांक और हस्ताक्षर। और लेखन क दृ ष्ट से इसक जान इस बात म है क आपने सपने क
‘पहचान’ और ‘खोने का ान’ कतनी कल्पनाशीलता से लखा — यही इस ग त व ध क असली परीक्षा है।
वाद- ववाद — पृष्ठ 100
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से आगे
पाठ से आगे गतवध
प्र.1 (क) कक्षा म पाँच-पाँच व ा थय के समूह बनाकर एक वाद- ववाद ग त व ध का आयोजन क जए। इसके लए
वषय है— “व्य क्त को बाँध सकते ह उसक कल्पना और वचार को नह ।” एक समूह वषय के वपक्ष म और
दूसरा समूह वषय के पक्ष म अपना तक दे गा। जैसे— समूह 1— व्य क्त क कल्पना और वचार पर नयंत्रण
आवश्यक है। समूह 2— स्वतंत्र वचार और कल्पना प्रग त के लए महत्वपूण ह।
वाद- ववाद म अंक तक को मलते ह, ऊँची आवाज़ को नह । नीचे दोन पक्ष के मज़बूत तक दए गए ह — अपने समूह के अनुसार
चु नए और हर तक के साथ एक उदाहरण र खए।
समूह 1 — नयंत्रण आवश्यक है समूह 2 — स्वतंत्र वचार आवश्यक ह
हर िवचार िनद ष नही ं होता; घ ृणा और िहंस ा फै लाने वाले िवचारों किवता का ही तक — बँधा हुआ सपना न ऊपर जाता है, न लौटकर काम
पर रोक ज़रूरी है। आता है।
झूठी ख़बरे ं और अफ़ वाहे ं भी ‘िवचार’ ही है,ं पर वे समाज को इितहास बताता है िक िनयंत्रण िटकता नही ं — गैल ीिलयो को रोका गया, पर
नुक सान पहच
ु ँ ाती है।
ं पथ्ृ वी घूमना बंद नही ं हुई।
बच्चों को सही-ग़ ल त िसखाना भी एक पकार का मागदशन है, जो िव ान, कला और सुधार-आंद ोलन सब ‘अलग सोचने’ से ही आए — पश्न
पूर ी छू ट से संभव नही ं। पूछे िबना कु छ नया नही ं बनता।
पूर ी स्वतंत्र ता में दू स रों की स्वतंत्र ता कु चली जा सकती है, िवचार को रोका नही ं जा सकता, के वल िछपाया जा सकता है — दबा हुआ
इसिलए कु छ सीमा रहनी चािहए। िवचार और तीखा होकर लौटता है।
संतु लत नष्कष (जो अंत म कहा जा सकता है): नयंत्रण आचरण पर हो सकता है, सोच पर नह । कसी को
नुकसान पहुँचाने वाले काम रोकना समाज का दा यत्व है; पर सोचने और कल्पना करने पर पहरा बैठाना न संभव है,
न उ चत। क वता भी यही कहती है — सपने क ग त मत बाँधो।
आयोजन का तरीक़ा: हर वक्ता को दो मनट; पहले पक्ष, फर वपक्ष; अंत म एक-एक मनट का प्रत्युत्तर।
नणायक तीन बात दे ख — तक का दम, उदाहरण, और दूसरे पक्ष को सुनकर उत्तर दे ने क क्षमता।
प्र.2 (ख) व ाथ वाद- ववाद के अनुभव पर एक अनु े द भी लख सकते ह।
अनुच्छेद म केवल यह मत ल खए क कौन जीता। ल खए क आपने क्या सीखा — कौन-सा तक आपको हला गया, कहाँ आप
अटक गए, और बहस के बाद आपक राय बदली या मज़बूत हुई।
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
नमूना अनु े द:
“हमारी कक्षा म ‘व्य क्त को बाँध सकते ह, उसक कल्पना और वचार को नह ’ वषय पर वाद- ववाद हुआ। म
समूह 2 म था, यानी स्वतंत्र वचार के पक्ष म। शुरू म मुझे लगा क यह पक्ष बहुत आसान है, क्य क क वता भी यही
कहती है। पर समूह 1 क एक साथी ने पूछा — ‘य द कोई अफ़वाह फैलाकर दं गा करवा दे , तो क्या उसका वचार
भी स्वतंत्र रहना चा हए?’ इस प्रश्न पर हमारा पूरा समूह कुछ दे र चुप रह गया। तब हमने तय कया क हम कहगे —
रोक वचार पर नह , नुकसान पहुँचाने वाले काम पर होनी चा हए। इस बहस से मने दो बात सीख । पहली, अपने
पक्ष के साथ-साथ दूसरे पक्ष के तक भी पहले से सोच लेने चा हए। दूसरी, वाद- ववाद हारने-जीतने का खेल नह है;
बहस के बाद मेरी अपनी राय पहले से अ धक साफ़ हो गई थी।”
अनुभव-अनु े द का ढाँचा: वषय और आपका पक्ष → तैयारी म क्या कया → बहस का सबसे क ठन क्षण →
आपने क्या सीखा। यही क्रम इसे डायरी से अलग और उपयोगी बनाता है।
दे खना-सुनना-समझना… — पृष्ठ 101
पाठ से आगे
पाठ से आगे गतवध
प्र.1 (क) “धूम गगन म मँडराता है।” सुगंध का अनुभव सूँघकर कया जाता है। धुए ँ को दे खा जा सकता है। वायु का
अनुभव स्पश ारा कया जा सकता है और अनुभव को बोलकर भी कहा या बताया जा सकता है जैसे क कोई
कम कर रहा हो। जो व्य क्त दे ख पाने म सक्षम नह है, आप उन्ह नम्न ल खत तय का अनुभव कैसे करवा
सकते ह— • वषा क बूँद का • धुए ँ के उड़ने का • खेल के रोमांच का
मूल वचार यह है — जो सूचना आँख से जाती थी, उसे बाक़ इं य और शब्द के रास्ते भे जए। और ध्यान रहे: सहायता करते
समय पहले पू छए, अचानक हाथ पकड़कर मत ख चए।
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो
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त स्पश से ध्व न / गंध से शब्द से (कम )
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दे.नcा; भीगी म और गीले पत्ते agअब आँगन म पानी क पतली
वष की हथेली बाहर नकालकर बूँद गरने छत की चादर पर बूदँ ों की “पहले दो-चार मोट बूँद गर , फर एक साथ
semछु आना; ठं डी हवा महसूस कराना
बूदँ े ं टपटप, नाली में बहते पानी की झड़ी लग गई;
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आवाज़ , गीली िम ी की सोंधी धार बह रही है।”
गंध
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लकड़ ी के जलने m की चटख;
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धुएँ की गं.ध, जो हवा चलने पर ag
ध एु ँ का चूल्हे या द ये के पास हवा क हल्क “धुएँ क एक पतली लक र सीधी ऊपर जा रही
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asआतीe -जाती है
उड़ना गरमी; धुएँ के ऊपर हाथ रखकर गरम है, फर हवा लगते ही वह टे ढ़ होकर बखर
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हवा का ऊपर उठना महसूस करना जाती है और कुछ ही दे र म दखना बंद हो जाती
है।”
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खेल का गद, बल्ला, स्टं प या कब ी क पाले दशकों का शोर, सीटी, गेंद के “गदबाज़ दौड़ रहा है… गद ऑफ़ क ओर…
रोमांच क रेखा हाथ से छु आना; ताली और बल्ले से टकराने की आवाज़ ,
सीमा रेखा के पार!eपू
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mरा मैदान खड़ा हो गया
बल्लेबाज़ आगे बढ़ा… हवा म गद… और वह
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अंितम क्षणों की चुप्पी
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मेज़ थपथपाकर लय बनाना
m . है।”
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अ कम का नयम: केवल घटना मत बताइए, क्रम, ग त और दशा बताइए — क्या पहले हुआ, कतनी तेज़ी
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से, कस ओर। यही तीन बात आँख करती है, और यही शब्द से लौटाई जा सकती ह।
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Did you know? दृ ष्टबा धत दशकglके लए फ़ल्म और खेल म ऑ डयो ड स्क्रप्शन क सु वधा द जाती है,
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जसम संवाद के बीच के ख़ाली समय म दृश्य का वणन बोला जाता है। पढ़ने के लए ेल ल प है, जसम उभरे
बदुओं को उँ ग लय से पढ़ा जाता है।
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a s em (ख) मूक अ भनय ारा क वता का भाव — व ा थय के बराबर-बराबर क संख्या म दो दल (ट म) बनाइए।
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दल के नाम रख— कल्पना और आकांक्षा। ‘कल्पना’ दल से एक प्र तभागी आगे आए और मूक अ भनय (हाव-
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भाव या संकेत) के माध्यम से इस क वता क कसी भी पं क्त का भाव प्रस्तुत कर। ‘आकांक्षा’ दल के
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प्र तभा गय को पहचानकर बताना होगा क अ भनय म कस पं क्त क बात क जा रही है। पहचानने क समय
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सीमा भी नधा रत क जाए। नधा रत समय सीमा पर सही उत्तर बताने वाले दल को अंक भी दए जा सकते ह।
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इस तरह से खेल को आगे बढ़ाया जाए।
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खेल क तैयारी — क वता क सभी पं क्तयाँ अलग-अलग पर चय पर लखकर एक कटोरे म m
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glaले तो 2 अंक, संकेत लेने पर 1 अंक।
coकmं ड सोचे, फर एक मनट का मूक अ भनय करे। दूसरा दल एक मनट म पहचान
रख ली जए। प्र तभागी परची उठाए,
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
पं क्त अ भनय म क्या दखाएँ
इन सपनों के पंख न काटो दोनों हाथ पंखों की तरह फै लाना; िफर कै ं ची का संकेत बनाकर उसे रोकते हुए ‘नही’ं में
िसर िहलाना
सौरभ उड़ जाता है नभ में फू ल सूँघने का अिभनय; िफर उँ गिलयों को ऊपर उठाते हुए हवा में घुल ने का संकेत
बीज धूिल में िगर जाता जो मु ी से बीज िगराना; ज़ मीन की ओर दे खना; िफर ऊपर दे खकर ‘नही’ं में िसर िहलाना
अि न सदा धरती पर जलती / धूम गगन में नीचे झुककर आग से ंकने का अिभनय; िफर उँ गिलयों को लहराते हुए धीरे -धीरे ऊपर ले
मँडराता है! जाना
इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत हाथ को सीढ़ ी की तरह ऊपर चढ़ ाना, िफर नीचे उतारना; दोनों बार हथेल ी िदखाकर रोकने
बाँध ो! से मना करना
मुक्त गगन में िवचरण कर यह / तारों में िफर िमल चारों ओर घूमने का अिभनय; ऊपर दे खकर उँ गली से िटमिटमाते तारे बनाना
जायेग ा
स्वग बनाने का िफर कोई िशल्प / भूिम को िम ी गूँधने और आकार गढ़ ने का अिभनय; िफर िकसी को िसखाने के हाव-भाव
िसखलायेग ा!
यह ग त व ध क्य उपयोगी है: मूक अ भनय म शब्द छन जाते ह, इस लए बचता है केवल भाव। पं क्त का
अ भनय करने से पहले उसका अथ पूरी तरह समझना पड़ता है — यही इस खेल क असली पढ़ाई है।
आपदा प्रबंधन — पृष्ठ 101
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से आगे
पाठ से आगे गतवध
प्र.1 “अ ग्न सदा धरती पर जलती / धूम गगन म मँडराता है!” आग, बाढ़, भूकंप जैसी आपदाएँ अचानक आ जाती
ह। सही जानकारी से आपदाओं क त म बचाव संभव हो जाता है। (क) कक्षा म अपने शक्षक के साथ चचा
क जए क क्या-क्या करगे य द— • कह अचानक आग लग जाए • आपके क्षेत्र म बाढ़ आ जाए • भूकंप आ
जाए
आपदा तुरंत क्या कर क्या कभी न कर
आग शोर मचाकर सबको सचेत कर; बाहर नकलने का रास्ता पकड़ और नीचे िल ़ ट का पयोग न करे ं; सामान ले ने वापस न
झुककर चल, क्य क धुआँ ऊपर रहता है; नाक-मुँह गीले कपड़े से ढक; लौटें; िबजली से लगी आग पर पानी न डाले ं
कपड़ म आग लगे तो रुक– गर–लुढ़क; बाहर नकलकर 101 (या 112)
पर सूचना द
बाढ़ ऊँची और पक्क जगह पर जाएँ; पीने का पानी उबालकर या क्लोरीन बहते पानी में पैद ल या वाहन से न उतरे ं — घुटने
डालकर ही पएँ; ज़रूरी काग़ज़, दवाइयाँ और टॉच एक थैले म पहले से रख; भर पानी भी बहा ले जाता है; िबजली के खंभों
रे डयो/सरकारी सूचना सुनते रह; मवे शय को खोलकर ऊँचे ान पर बाँध और िगरे तारों से दू र रहे;ं बाढ़ का पानी न िपएँ
भूकं प झुको–ढको–पकड़ो — मज़बूत मेज़ के नीचे जाएँ, सर-गरदन ढक, मेज़ का झटके के दौरान भागकर बाहर न िनकले ं; िल ़ ट
पाया पकड़; झटका रुकने पर सी ढ़य से खुले मैदान म जाएँ; बाहर ह तो का पयोग न करे ं; िखड़ की, अलमारी और शीशे
भवन, पेड़ और खंभ से दूर खुली जगह पर रह; गैस और बजली बंद कर द के पास न खड़ े हों
याद रखने योग्य नंबर: आपातकालीन सहायता — 112; अ नशमन — 101; एंबुलस — 102/108; पु लस —
100; राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन हेल्पलाइन — 1078। ये नंबर वद्यालय के सूचना-पट पर बड़े अक्षर म लखवाइए।
तीन म एक ही सद्धांत: आपदा म सबसे बड़ा ख़तरा घबराहट है। इसी लए हर त के लए एक छोटा, रटा हुआ
नयम बनाया गया है — आग म ‘नीचे झुककर बाहर’, भूकंप म ‘झुको–ढको–पकड़ो’, बाढ़ म ‘ऊँचाई क ओर’। रटा
हुआ नयम घबराहट के समय भी याद रहता है।
प्र.2 (ख) “म आपदा के समय क्या करूँगा या करूँगी?” — एक सूची या चत्र आधा रत योजना बनाइए।
योजना तीन हस्स म बाँ टए — पहले (तैयारी), दौरान (तुरंत का काम), बाद म (सँभालना)। यही ढाँचा कसी भी आपदा पर लागू
होता है।
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
कब म क्या करूँगा/करूँगी
पहले घर में एक आपात थैल ा तैयार रखूँगा/रखूँगी — टॉच, सीटी, पीने का पानी, िबस्कु ट, ज़ रूरी दवाइयाँ, पाथिमक उपचार पेटी, ज़ रूरी
(तैयारी) काग़ ज़ों की नक़ल , कु छ नक़द। घर के सब लोगों के फ़ ोन नंबर कागज़ पर िलखकर रखूँगा/रखूँगी। पिरवार के साथ तय करूँ गा/
करूँ गी िक िबछड़ जाने पर कहाँ िमले ंगे। घर के िनकलने के दोनों रास्ते याद रखूँगा/रखूँगी और भारी अलमारी दीवार से
कसवाऊँ गा/कसवाऊँ गी।
दौरान घबराऊँ गा/घबराऊँ गी नही;ं उस आपदा का िनयम अपनाऊँ गा/अपनाऊँ गी (झुको–ढको–पकड़ ो / नीचे झुककर बाहर / ऊँ चाई की
ओर)। छोटे भाई-बहन और बुज़गु ं को साथ लूँगा/लूँगी। सीटी बजाकर अपनी जगह बताऊँ गा/बताऊँ गी। अफ़ वाह न फै लाऊँ गा/
फै लाऊँ गी, के वल सरकारी सूचना सुनगूँ ा/सुनगूँ ी।
बाद में घायल को पाथिमक उपचार दू ँगा/दू ँगी और तुरंत सहायता बुल ाऊँ गा/बुल ाऊँ गी। क्षितगस्त भवन में वापस नही ं जाऊँ गा/जाऊँ गी। पानी
उबालकर िपऊँ गा/िपऊँ गी और सफ़ ाई का ध्यान रखूँगा/रखूँगी, तािक बीमारी न फै ले । जो अनुभव हुआ, उसे कक्षा में साझा करूँ गा/
करूँ गी तािक सबकी योजना बेहतर बने।
चत्र-आधा रत योजना का सुझाव: एक चाट पर घर का न ा बनाइए। हरे तीर से बाहर नकलने के रास्ते
दखाइए, लाल गोले से ख़तरे क जगह (गैस सलडर, भारी अलमारी, बजली का मीटर) और नीले तारे से वह ान
जहाँ प रवार मलेगा। नीचे कोने म आपातकालीन नंबर बड़े अक्षर म ल खए।
शल्प — पृष्ठ 102-103
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से आगे
पाठ से आगे
प्र.1 “स्वग बनाने का फर कोई शल्प / भू म को सखलायेगा!” हमारे दे श म हजार वष से अन गनत शल्प प्रच लत
ह। उनम से कुछ के बारे म आप पहले से जानते ह गे। इनके बारे म कक्षा म चचा क जए। (क) अपने समूह के
साथ मलकर नीचे दए गए शल्प-काय को उनके सही अथ या व्याख्या से मलाइए— शल्प-काय — 1. काष्ठ
शल्प 2. मृ त्तका शल्प 3. धातु शल्प 4. काँच शल्प 5. वस्त्र शल्प 6. कागज शल्प 7. पत्थर शल्प 8. चमड़ा
शल्प 9. बाँस और बत शल्प 10. मोती एवं आभूषण शल्प 11. लाख शल्प 12. शीशा शल्प 13. चत्रकला
शल्प 14. नक्काशी शल्प अथ या व्याख्या — 1. काँच से झूमर, सजावट वस्तुए ँ और रंगीन खड़ कयाँ आ द
बनाना 2. कपड़ पर कढ़ाई, बुनाई, छपाई, बंधेज आ द सजावट काय 3. कागज से खलौने, सजावट, लफाफे
और पेपर मेशी बनाना 4. लकड़ी से वस्तुए,ँ खलौने, मू तयाँ आ द बनाना 5. म से बतन, द ये, मू तयाँ और
सजावट चीज बनाना 6. ताँबा, पीतल, लोहे जैसी धातुओं से द पक, मू तयाँ, था लयाँ आ द बनाना 7. पारंप रक
चत्रकलाओं, जैसे मधुबनी, ग ड, वरली आ द से कलाकृ तयाँ बनाना 8. कपड़ या सजावट क वस्तुओं म शीशे
जोड़ना या जड़ाई करना 9. लाख से चू ड़याँ, खलौने, डब्बे और अन्य सजावट वस्तुए ँ बनाना 10. लकड़ी, पत्थर
या धातु पर बारीक खुदाई ारा डजाइन बनाना 11. बाँस और बत से टोक रयाँ, कु सयाँ, चटाई, पंखे आ द बनाना
12. चमड़े से जूते, बेल्ट, बैग और अन्य उपयोगी वस्तुए ँ बनाना 13. संगमरमर या अन्य पत्थर से मू तयाँ बनाना,
मं दर क सजावट करना आ द 14. रंग- बरंगे मो तय से हार, कंगन, झुमके आ द गहने बनाना
शल्प-काय सही अथ भारत म कहाँ प्र सद्ध है
1. काष्ठ िशल्प 4— लकड़ ी से वस्तुएँ, िखलौने, मूितयाँ बनाना चन्नपटना (कनाटक) के खलौने, सहारनपुर क नक़्क़ाशीदार
लकड़ी
2. म ृित्तका िशल्प 5— िम ी से बतन, दीये, मूितयाँ बनाना ख़ुजा और नीली म का जयपुरी काम, कुम्हार क हर गाँव
म परंपरा
3. धातु िशल्प 6— ताँबा, पीतल , लोहे से दीपक, मूितयाँ, मुरादाबाद का पीतल, बस्तर क ढोकरा ढलाई, तंजावुर क
थािलयाँ मू तयाँ
4. काँच िशल्प 1— काँच से झूमर, सजावटी वस्तुएँ, रंगीन फ़रोज़ाबाद (उत्तर प्रदे श) क चू ड़याँ और काँच का काम
िखड़ िकयाँ
5. वस्त्र िशल्प 2— कपड़ ों पर कढ़ ाई, बुनाई, छपाई, बंधेज बनारसी बुनाई, लखनऊ क चकनकारी, कच्छ का बंधेज,
बाग़रू क छपाई
6. कागज िशल्प 3— कागज से िखलौने, सजावट, िलफ़ ाफ़े , पेपर कश्मीर क पेपर मेशी, सांगानेर का हस्त न मत काग़ज़
मेशी
7. पत्थर िशल्प 13 — संगमरमर या पत्थरों से मूितयाँ, मंिदरों की मकराना का संगमरमर, महाब लपुरम क पत्थर-मू तयाँ
सजावट
8. चमड़ा िशल्प 12 — चमड़ े से जूते, बेल्ट, बैग कोल्हापुरी चप्पल, आंध्र क चमड़े क कठपुत लयाँ
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो
a g l AglaSem · NCERT Solutions
बाँस-बेतं से टोकिरयाँ, कु िसयाँ, चटाई,
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9. बाँस और बेतं िशल्प 11 — असम, त्रपुरा और पूव त्तर के राज्य
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पंखे
om 14 — मोितयों से हार, कं गन, झुमके बनाना l a
10. मोती एवं आभू.षcण ानgका मीनाकारी-जड़ाऊ काम
हैदराबाद के मोती, राज a
िशल्प se
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11. लाख िशल्प 9— लाख से चूिड़ याँ, िखलौने, िडब्बे जयपुर क लाख क चू ड़याँ, चन्नपटना के लाख-रँगे खलौने
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12. शीशा िशल्प 8— कपड़ ों या सजावट की वस्तुओं में शीशे कच्छ और राज ान का शीशा-कढ़ाई (आभला) का काम
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जड़ ना
13. िचत्रकला िशल्प
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7 — मधुबनी, गोंड, वरली जैस ी पारंपिरक म थला ( बहार), मध्य प्रदे श, महाराष्ट्र
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िचत्रकलाएँ
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लकड़ ी, पत्थर या धातु पर बारीक खुद ाई
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14. नक्काशी िशल्प 10 — सहारनपुर, ीनगर के अख़रोट-काष्ठ
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aेपsम — 1→4, 2→5, 3→6, 4→1, 5→2, 6→3, 7→13, 8→12, 9→11, 10→14, 11→9, 12→8, 13→7,
संlक्ष
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a 14→10
m a s
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मलान क कुंजी: हर शल्प का नाम उसके कच्चे माल से बना है — काष्ठ = लकड़ी, मृ त्तका = म , धातु, काँच,
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वस्त्र, चमड़ा, लाख। इस लए व्याख्या म जस सामग्री का नाम आया है, वही उत्तर है। केवल दो जगह ध्यान चा हए
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— काँच शल्प (काँच क वस्तुएँ बनाना) और शीशा शल्प (बनी हुई चीज़ म शीशे जड़ना) एक जैसे लगते ह, पर
एक म काँच सामग्री है और दूसरे म सजावट। इसी तरह नक्काशी कसी एक सामग्री का नाम नह , ब ल्क खुदाई क
co m
तकनीक है, इस लए उसक व्याख्या म लकड़ी, पत्थर और धातु — तीन आते ह।
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a s em
a gl प्र.2 (ख) अपने व ालय या प रवार के साथ हस्त शल्प से जुड़े कसी ान या कायशाला का भ्रमण क जए और उस
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हस्त शल्प के बारे म एक रपोट बनाइए। अथवा रा ीय हस्त शल्प संग्रहालय क नीचे द गई वेबसाइट म आपको
कौन-सा हस्त शल्प या कलाकृ त सबसे अ
c o mलगी और क्य , उसके वषय म ल खए।
g l a
m . a
gl ase
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यह भ्रमण और लेखन का काम है। रपोट म ये शीषक र खए —
co m
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1. कहाँ और कब गए — ान, त थ, कसके साथ।
se m
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2. शल्प का नाम और का माल — क्या बनता है, कस चीज़ से।
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3.cबनने
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क व ध — क्रम से, चरण दर चरण; कौन-से औज़ार लगते ह।
a se 4. कारीगर से बातचीत — यह काम कब से चल रहा है, कससे सीखा, एक वस्तु म कतना समय लगता है, कहाँ बकती है।
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5. क ठनाइयाँ — कच्चे माल का दाम, मशीन से बनी सस्ती वस्तुओं से मुक़ाबला, नई पीढ़ का इस काम म न आना।
6. आपको क्या अ ा लगा और आपने क्या सीखा — साथ म एक चत्र या रेखा चत्र।
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
नमूना रपोट (अंश): “हम श नवार को अपने शक्षक के साथ पास के कुम्हार-टोले गए। वहाँ रामप्यारी दे वी चाक
पर द ये बना रही थ । उन्ह ने बताया क पहले चकनी म को दो दन पानी म भगोया जाता है, फर पैर से गूँधा
जाता है, तब चाक पर आकार दया जाता है। सूखने के बाद द ये आँवाँ (भ ) म पकाए जाते ह। एक द ये म उन्ह
कुल मलाकर तीन दन लगते ह और वह दो रुपये म बकता है। सबसे क ठन काम म लाना है, क्य क तालाब क
म अब आसानी से नह मलती। मुझे सबसे अच्छ बात यह लगी क चाक पर म का ल दा दो मनट म बरतन
बन जाता है और य द आकार बगड़ जाए तो उसे फर से गूँधकर नया बनाया जा सकता है।”
वेबसाइट वाला वकल्प चुन तो: केवल ‘सुंदर लगी’ मत ल खए। कलाकृ त का नाम, वह कस राज्य क है, कस
सामग्री से बनी है, और उसक कौन-सी एक बात आपको वशेष लगी — यह चार बात अवश्य ल खए।
झरोखे से / साझी समझ — पृष्ठ 103
पाठ से आगे
पाठ से आगे गतवध
प्र.1 अभी आपने जो क वता पढ़ उसे लखा है महादे वी वमा ने। अब प ढ़ए इन्ह के ारा लखी एक कहानी ‘ गल्लू’
का अंश। — ‘ गल्लू’ कहानी को पुस्तकालय से ढूँ ढ़कर पूरी प ढ़ए और अपने सा थय के साथ मलकर चचा
क जए।
अंश म क्या है — महादे वी वमा बताती ह क उनके पास बहुत से पशु-पक्षी थे, पर कसी ने उनक थाली म साथ खाने क हम्मत
नह क । गल्लू (एक गलहरी) इसका अपवाद था। वे खाने के कमरे म पहुँचत और वह खड़क से नकलकर आँगन क द वार और
बरामदा पार करके मेज़ तक आ जाता। बड़ी क ठनाई से उन्ह ने उसे थाली के पास बैठना सखाया, जहाँ से वह एक-एक चावल
उठाकर सफ़ाई से खाता। काजू उसका प्रय भोजन था; कई दन काजू न मलने पर वह दूसरी चीज़ लेना बंद कर दे ता या झूले से नीचे
फक दे ता।
क वता से क्या जुड़ता है — दोन रचनाओं म ले खका कसी को बाँधती नह । गल्लू पजरे म नह , झूले म रहता है; वह अपनी
मरज़ी से आता है और अपनी नाराज़गी भी जताता है। यही ‘मत बाँधो’ का भाव है — स्नेह वही है जो दूसरे क स्वतंत्रता छ ने बना
दया जाए।
चचा के लए प्रश्न —
1. गल्लू का व्यवहार दूसरे पशु-प क्षय से अलग क्य था? ले खका ने इसे ‘अपवाद’ क्य कहा?
2. काजू न मलने पर गल्लू का दूसरी चीज़ फक दे ना — क्या यह केवल ज़द है, या इसम कुछ और भी है?
3. गद्य और क वता म महादे वी वमा क भाषा म क्या अंतर दखाई दे ता है? क वता म तत्सम शब्द अ धक ह और गद्य म रोज़ क
बोलचाल — ऐसा क्य ?
4. आपके घर या आस-पास कसी पशु-पक्षी से ऐसा लगाव रहा है? उसका कोई एक ऐसा व्यवहार बताइए जससे लगा क वह
आपको पहचानता है।
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कक्षा 8 हद अध्याय 7 मत बाँधो AglaSem · NCERT Solutions
पुस्तकालय के लए संकेत: ‘ गल्लू’ महादे वी वमा के रेखा चत्र के संग्रह म मलती है। उसी परंपरा क उनक अन्य
रचनाएँ भी दे खए — मेरा प रवार, अतीत के चल चत्र, स्मृ त क रेखाएँ, पथ के साथी।
खोजबीन के लए — पृष्ठ 103-104
पाठ से आगे
पाठ से आगे गतवध
प्र.1 नीचे द गई इंटरनेट क ड़य के माध्यम से आप महादे वी वमा और उनक रचनाओं के वषय म जान, समझ सकते
ह— • महादे वी वमा | कव यत्री | जीवन और लेखन | हद | भाग - 1 • महादे वी वमा | कव यत्री | जीवन और
लेखन | हद | भाग - 2 • क वता मंजरी, बारहमासा • गल्लू - महादे वी वमा • महादे वी वमा, भारतीय कव यत्री
यह खोजबीन का काम है — पुस्तक म दए क्यूआर कोड या क ड़य को शक्षक क दे खरेख म खो लए, और दे खते-सुनते समय एक
कॉपी म नोट बनाइए। नीचे वह ढाँचा है जसम आपके नोट रखे जा सकते ह। पाठ क ‘क व से प रचय’ म द गई जानकारी से
शुरुआत क जए।
क्या खोजना है पाठ म जो पहले से है खोजबीन म क्या जोड़ना है
जीवन जन्म फ़रुख़ाबाद, उत्तर प्रदे श; जीवनकाल 1907– िशक्षा, पयाग मिहला िवद्यापीठ से जुड़ाव, िचत्रकला और
1987; छोट उम्र से ही क वता लखना आरंभ कया संगीत में रुिच
बच्चों के िलए ‘बारहमासा’, ‘आज खरीदगे हम ज्वाला’, ‘अब यह इनमें से कोई एक पूरी पढ़ कर उसकी दो पसंद ीदा पंिक्तयाँ
िलखी किवताएँ च ड़या कहाँ रहेगी’ िलिखए
गद्य रचनाएँ मेरा प रवार, अतीत के चल चत्र, स्मृ त क रेखाएँ, पथ के िग लू जैसे िकसी एक रे खािचत्र का सारांश और उसका
‘ ल् ’
साथी पात्र
किवता-संग ह नीहार, र श्म, नीरजा, सांध्य गीत, द प शखा इनमें से िकसी एक संगह का पकाशन वष और उसकी
एक पिसद्ध किवता
सम्मान भारतीय ानपीठ पुरस्कार और कौन-कौन से सम्मान िमले — सूची बनाइए
और क्या-क्या थी ं बहुमुखी प्र तभा संपन्न; एक चत्रकार भी उनके बनाए िकसी िचत्र को दे िखए और िलिखए िक वह
उनकी किवता से िकस तरह िमलता-जुल ता लगा
प्रस्तु त का सुझाव: खोजबीन के बाद समूह मलकर एक चाट बनाए — बीच म महादे वी वमा का चत्र या डाक-
टकट, और चार ओर पाँच खाने: जीवन, क वता-संग्रह, गद्य, बच्च के लए रचनाएँ, सम्मान। हर खाने म केवल
तीन-तीन बात ल खए, ता क चाट पढ़ा जा सके।
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खोजबीन का नयम: इंटरनेट से ली गई हर बात दो जगह जाँ चए, और जो लख उसका ोत भी ल खए — कस
वी डयो या पृष्ठ से मला। यही आदत आगे क पढ़ाई म सबसे अ धक काम आती है।
अध्याय — एक नज़र म
क वता का मूल स्वर एक नषेधात्मक प्राथना है — ‘न काटो’, ‘मत बाँधो’, ‘मत रोको’। कव यत्री कुछ माँगती नह , केवल
इतना कहती ह क सपन के रास्ते म मत खड़े हो जाइए।
पहले चार उदाहरण आते ह — सौरभ (जो उड़कर लौटता नह ), बीज (जो गरकर उड़ नह पाता), अ न (जो धरती पर ही
जलती है) और धूम (जो केवल ऊपर उठता है)। हर उदाहरण म ग त एक ही दशा क है।
सपना इन सबसे अलग है, क्य क उसम दोन ग तयाँ ह — आरोहण (ऊपर उठना, कल्पना बनना) और अवरोहण (लौटकर
आँख म, यानी व्यवहार म उतरना)। यही क वता का कद्र य वचार है।
मुक्त सपना तार तक जाकर लौटता है तो मेघ से रंग और करण से द प्त लेता आता है, और धरती को ‘स्वग बनाने का
शल्प’ सखा दे ता है — अथात् स्वतंत्र कल्पना ही समाज को सुंदर बनाने क कारीगरी दे ती है।
क वता क भाषा म तत्सम शब्द (सौरभ, नभ, गगन, अ न, धूम, आरोहण, अवरोहण, वचरण, द प्त, भू, शल्प) अ धक ह
और पं क्तयाँ छोट तथा लयबद्ध ह। पहली दो पं क्तयाँ अंत म दोहराई गई ह — यह टे क क वता को गीत जैसा बना दे ती है।
अभ्यास क वता से आगे बढ़कर वराम- चह्न का महत्व, काल-प रवतन, समानाथ - वपरीताथक शब्द, भारत के पारंप रक
शल्प और आपदा-प्रबंधन तक ले जाता है।
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त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ क वता क पं क्त ध्यान दे ने क बात
सौरभ सुग ंध , महक सौरभ उड़ जाता है नभ म उड़ता है पर लौटता नह — एकतरफ़ा ग त
नभ / आकाश वह नभ म कब उड़ पाता है? / धूम दोन समानाथ शब्द ह; कव यत्री ने दोहराव से
गगन गगन म मँडराता है! बचने के लए दोन बरते
धू ल धूल , िम ी बीज धू ल म गर जाता जो गरता है पर उड़ता नह — फर एकतरफ़ा ग त
धूम धआ
ु ँ धूम गगन म मँडराता है! अ न नीचे, धूम ऊपर — आग और धुआँ भी बँटे
हुए ह
मँडराना चारों ओर घूम ना, ऊपर छाया रहना धूम गगन म मँडराता है! धुएँ का ऊपर टका रह जाना दखाता है क वह
लौट नह सकता
आरोहण नीचे से ऊपर की ओर जाना, चढ़ ना इसका आरोहण मत रोको सपने का वचार बनकर ऊपर उठना
अवरोहण ऊपर से नीचे की ओर आना, इसका अवरोहण मत बाँधो! सपने का लौटकर व्यवहार म उतरना; ‘आरोहण’
उतरना का वपरीताथक
वचरण स्वच्छंद घूम ना मुक्त गगन म वचरण कर यह ‘मुक्त’ के साथ आकर यह शब्द स्वतंत्रता का चत्र
बना दे ता है
मेघ बादल मेघ से रंग औ’ करण से बादल से रंग लेना — कल्पना जो अनुभव से
समृद्ध होकर लौटती है
द प्त चमक, आभा द प्त लए भू पर आयेगा। करण से ली गई चमक; ‘रंग’ और ‘द प्त’
लौटती हुई कमाई ह
भू / भू म धरती द प्त लए भू पर आयेगा। / भू म को दो समानाथ शब्द पास-पास — यही क वता क
सखलायेगा! एक वशेषता है
शल्प हाथ से कोई चीज़ बनाने का काम; स्वग बनाने का फर कोई शल्प ‘स्वग’ यहाँ सुखद ान है और ‘ शल्प’ उसे बनाने
कारीगरी, हुनर क वध
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