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HBSE Class 12 Sample Paper 2027 Hindustani Music Vocal with Marking Scheme

Download the HBSE Class 12 Sample Paper 2027 Hindustani Music Vocal with Marking Scheme PDF for free at AglaSem. This is the official model question paper released by the Board of School Education Haryana (BSEH) for the 2026-27 session (exam 2027). Practise with it to understand the latest exam pattern, question types and marks distribution.
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About HBSE Class 12 Sample Paper 2027 Hindustani Music Vocal with Marking Scheme

HBSE Class 12 Sample Paper 2027 Hindustani Music Vocal with Marking Scheme is available here for free download. Published by Haryana Board for Class 12, this sample paper can be viewed online or downloaded as a PDF (6 pages). Candidates preparing for Class 12 can use HBSE Class 12 Sample Paper 2027 Hindustani Music Vocal with Marking Scheme to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

How can I download HBSE Class 12 Sample Paper 2027 Hindustani Music Vocal with Marking Scheme?

Open this page and click the Download button to save HBSE Class 12 Sample Paper 2027 Hindustani Music Vocal with Marking Scheme as a PDF. It is completely free on AglaSem Docs.

Is HBSE Class 12 Sample Paper 2027 Hindustani Music Vocal with Marking Scheme free to download?

Yes. HBSE Class 12 Sample Paper 2027 Hindustani Music Vocal with Marking Scheme can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

How many pages does HBSE Class 12 Sample Paper 2027 Hindustani Music Vocal with Marking Scheme have?

HBSE Class 12 Sample Paper 2027 Hindustani Music Vocal with Marking Scheme contains 6 pages, which you can read online or download together as a single PDF.

Where can I find more Class 12 study material?

You can find more Class 12 question papers, sample papers, syllabus, and answer keys on AglaSem Docs.

HBSE Class 12 Sample Paper 2027 Hindustani Music Vocal with Marking Scheme – Text

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Page 1

FOR HARYANA CLASS 12 PREPARATION

HBSE Class 12 Sample
Paper 2027 Hindustani
Music Vocal with
Marking Scheme
EXAM YEAR TYPE SUBJECT

Haryana Class 12 2027 Sample Paper Music

Notes · Sample Papers · Previous Year Papers · Mock Tests

Page 2

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Marking Scheme
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BSEH Model Paper ( 2026-2027)
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CLASS: 12 ( Sr. Secondary)
a Code: A
Roll No.

fganqLrkuh laxhr xk;u
( Hindustani Music Vocal)
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(Hindi and English Medium)
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s em ACADEMIC / OPEN
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(Time allowed: 2½ hours) (Maximum Marks: 30)

[kaM ¼1½ वस्तुनन्ष ्ቚकार के ्ቚ्ा 1 ls 8
Section (1) Objective type questions
¼01 X 08 = 08½
iz”u 1- ्षुपद गायन शैली का सबसे ्ቚाचीन रूप माना जाता है—
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(A) ठु मरी B) ्षुपद C) टप्पा D) ग़ज़ल
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mÙkj 01- (B) ्षुपद
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iz”u 2 राग देश का वादी स्वर है—
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(A) रे B) म C) प D) ध

mÙkj 02 (A) रे

iz”u 3 झपताल में ______ मा्ቔाएँ होती हैं।
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c. omÙkj 03 झपताल में 10 मा्ቔाएँ होती हैं। m.co
m iz”u 4 ्ቇाम के ______ ्ቚकार माने गए हैं। s e
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ag mÙkj 04 ्ቇाम के 3 ्ቚकार षड्ज ्ቇाम, मध्यम ्ቇाम और गाांधार ्ቇाम माने गए हैं।

iz”u 5-. Assertion (A): गमक गायन की शोभा बढाता है।

Reason (R): गमक स्वर की नवशेष गनत है।

mÙkj 05 (A) दोनों सत्य तथा R, A की सही ्िाख्या है।
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Assertion (A): भूपाली में सभी स्वर शु्ቍ होते हैं।
iz”u 6-
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Reason (R): इसमें मध्यम और ननषाद व़्जत हैं।
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mÙkj 06 (A) दोनों सत्य तथा R सही ्िाख्या है।

iz”u 7 भारतीय स्वरनलनप प्ቍनत के ्ቚमुख ्ቚवततक कौन हैं?

mÙkj 07 भारतीय सांगीत में आधुननक स्वरनलनप प्ቍनत Notation System) के ्ቚमुख
्ቚवततक पां० नवष्णु नारायण भातखांडे और पां० नवष्णु ददगम्बर पलुस्कर हैं उन्होंने सांगीत को
नलनखत रूप देने के नलए ्ቅमब्ቍ प्ቍनतयाँ नवकनसत कीं

iz”u 8 "स्वर कोदकला दकसे कहा जाता है?

mÙkj 08 भारत र्ቌ लता मांगेशकर को स्वर कोदकला कहा जाता है।

[kaM ¼2½ अनत लघुउ्ቈरात्मक ्ቚकार के ्ቚ्ा

Section (2) Very short answer type questions

iz”u 9- वणत की पररभाषा नलनखए। अथवा मींड क्या है?

mÙkj 09 वणत

 पररभाषा राग में स्वरों के गायन या वादन करने की द्ቅया या प्ቍनत को 'वणत' कहा जाता
है。
 ्ቚकार वणत चार ्ቚकार के होते हैं
1. स्थायी वणत एक ही स्वर की बार बार आवृन्ቈ
2. आरोही वणत स्वरों का चढता ्ቅम
3. अवरोही वणत स्वरों का उतरता ्ቅम
4. सांचारी वणत स्थायी, आरोही और अवरोही तीनों का नमनित रूप
अथवा
मींड Meend)
एक स्वर से दूसरे स्वर तक नबना ध्वनन को खांनडत दकए अटू ट रूप से सहज गनत से जाने
की द्ቅया को 'मींड' कहते हैं इसमें बीच के स्वरों का स्पशत करते हुए जाया जाता है लेदकन
उन्हें अलग अलग उ्ሴाररत नहीं दकया जाता

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.दीनजए।

c. o iz”u 10- ्षुपद की दो नवशेषताएँ नलनखए। अथवा तराना की पररभाषा
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se mÙkj 10 ्षुपद की दो नवशेषताएँ
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1. गांभीरता और लयकारी ्षुपद गायकी अत्यांत गांभीर ्ቚकृ नत की होती है और इसमें 'लयकारी'
(ताल का गनणतीय ्ቚयोग को नवशेष स्थान ्ቚा्቎ है。
2. चार भाग ्षुपद रचना के चार मुख्य खांड होते हैं स्थायी, अांतरा, सांचारी और अभोग。
इसमें मुख्य रूप से 'पखावज' और 'तांबूरा' की सांगत होती है。
अथवा
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तराना Tarana)
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यह हहदुस्तानी सांगीत की एक ्शुत तेज लय वाली गायन शैली है, नजसकी उत्पन्ቈ का िेय
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अमीर खुसरो को जाता है。 इसमें शब्दों के अथत के स्थान पर कु छ नवशेष अथतहीन अ्षरों
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जैसे ता, ना, ददर, तोम, तदीम आदद का ्ቚयोग कर आकषतक और ्शुत लयब्ቍता ्ቚस्तुत
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की जाती है

iz”u 11 थाट और राग में दो अांतर नलनखए। अथवा वाग्गेयकार दकसे कहते हैं?

mÙkj 11 थाट और राग में दो अांतर
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1. गाय बजा थाट का के वल ्ቅमानुसार सा से नन तक नवस्तार होता है और इसे
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गाया बजाया नहीं जाता, जबदक राग की रचना सुर ताल में होती है और इसे नननित रूप
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से गाया बजाया जाता है स्वरों का ननयम थाट में के वल 7 मूल स्वर होते हैं और इसमें
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आरोह अवरोह नहीं होता。 राग में कम से कम 5 स्वर होने आवश्यक हैं और इसमें आरोह
अवरोह और वादी सांवादी की ्िवस्था होती है。
अथवा
वाग्गेयकार
वह ्िनि जो गीत सानहनत्यक पद और सांगीत स्वर रचना दोनों की रचना में समान रूप
से ननपुण हो, वाग्गेयकार कहलाता है。 अथातत,् जो शब्दों को भी नलख सके और उन्हें अपने
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सुरों में नपरोकर एक सुांदर धुन या बांददश भी तैयार कर सके
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g la iz”u 12- पांनडत ओंकारनाथ ठाकु र का सांन्ष्቎ पररचय दीनजए। a
अथवा पांनडत जसराज का
a पररचय नलनखए।

mÙkj 12 पांनडत ओंकारनाथ ठाकु र का पररचय
पांनडत ओंकारनाथ ठाकु र ग्वानलयर घराने के एक शीषतस्थ हहदुस्तानी शाኚᮌीय गायक और
सांगीत नव्ቛान थे वे बनारस हहदू नव्ቫनव्यालय BHU) के सांगीत सांकाय के ्ቚथम डीन
बने。 उनकी आवाज़ में अद्भुत शनि थी; नवशेषकर 'वांदे मातरम्' के रा्िभनिपूणत गायन
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और मीरा भजनों के नलए वे अमर हैं。
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अथवा em l as
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पांनडत जसराज का पररचय
हररयाणा के नहसार नजले में जन्मे पांनडत जसराज भारतीय शाኚᮌीय सांगीत के मूधतन्य गायक
और 'मेवाती घराने' के ्ቚमुख सांवाहक थे。 उनका सांगीतमय सफर 75 वषों तक चला और
उन्होंने अपनी गायकी में अध्यात्म तथा भनि का अनूठा रस घोला उन्हें प्म नवभूषण जैसे
सवो्ሴ सम्मानों से नवाजा गया था

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[kaM ¼3½ लघुउ्ቈरात्मक ्ቚकार के ्ቚ्ा
Section (3) short answer type questions
____________________________________________________________

iz”u 13- राग भूपाली का शाኚᮌीय पररचय नलनखए। अथवा राग देश का पररचय
नलनखए।

mÙkj 13 राग भूपाली हहदुस्तानी सांगीत का अत्यांत लोकन्ቚय और मधुर राग है। इसका
नववरण नन्ቖनलनखत है

 थाट कल्याण थाट।
 जानत औडव औडव आरोह और अवरोह दोनों में ५ ५ स्वर लगते हैं ।
 व़्जत स्वर मध्यम म और ननषाद नन ।
 वादी स्वर गांधार ग ।
 सांवादी स्वर धैवत ध ।
 गायन समय रान्ቔ का ्ቚथम ्ቚहर।
 आरोह सा, रे , ग, प, ध, साां।
 अवरोह साां, ध, प, ग, रे , सा।
 पकड़ ग, रे , सा, ध, सा, रे , ग, प, ग, ध, प, ग, रे , सा।

iz”u 14 समय नस्ቍाांत का वणतन कीनजए। अथवा पूवत राग एवां उ्ቈर राग का अांतर
नलनखए।
mÙkj 14 पूवत राग एवां उ्ቈर राग का अांतर

सांगीत में स्቎क को दो भागों में बाांटा गया है सा से म पूवाांग और प से साां उ्ቈराांग । इसके आधार पर
दोनों में मुख्य अांतर यह है

गुण ल्षण पूवत राग Poorvanga / Poorva Raga) उ्ቈर राग Uttarang / Uttar Raga)
ये राग ददन के 12 बजे से रात के 12 बजे तक ये राग रात के 12 बजे से ददन के 12 बजे
गायन समय
गाए जाते हैं। तक गाए जाते हैं।
वादी स्वर की इन रागों का वादी स्वर स्቎क के पहले भाग इन रागों का वादी स्वर स्቎क के दूसरे भाग
नस्थनत अथातत् सा, रे , ग, म में से होता है। अथातत् प, ध, नन में से होता है।
्षे्ቔ ्ቚभाव इन रागों का नवस्तार मुख्यतः मां्श और मध्य इन रागों का नवस्तार मध्य और तार स्቎क

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m में अनधक होता है। . c

.co m नबहाग।
स्቎क में अनधक होता है।

m s eराग
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उदाहरण राग भूपाली, राग यमन। राग नबलावल,
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iz”u 15 झपताल का ठे का तथा दुगुन नलनखए। अथवा एकताल का ठे का नलनखए।

mÙkj 15 झपताल का ठे का तथा दुगुन

झपताल सांगत की एक ्ቚनस्ቍ ताल है , नजसमें १० मा्ቔाएां, ४ नवभाग और
तालीस ताली खाली का ्ቅम होता है। m
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1. झपताल का ठे क
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 मा्ቔाएँ 1,a2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10
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 बोल धीa ना | धी धी ना | ती ना | धी धी ना
 ताली खाली 1, 3, 8 मा्ቔा पर ताली और 6 मा्ቔा पर खाली है।

2. झपताल की दुगुन
दुगुन का अथत है एक मा्ቔा में दो बोल बोलना।
 मा्ቔाएँ 1, 2, 3, 4, 5
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बोल (धी ना धी धी ना | (ती ना धी धी
em


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[kaM ¼4½ दीघत उ्ቈरात्मक ्ቚकार के ्ቚ्ा

Section (4) Long answer type questions

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c. oiz”u 16- मध्यकाल से आधुननक काल तक भारतीय सांगीत के इनतहास काsवणतmन कीनजए तथा .co
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s em सांगीत पाररजात का महत्व बताइए। g l a
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ag अथवा

राग नबहाग का सम्पूणत शाኚᮌीय पररचय नलनखए—

आरोह, अवरोह, पकड़, वादी, सांवादी, जानत, गायन समय, दो आलाप, दो तान

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mÙkj 16 भाग 1: मध्यकाल से आधुननक काल तक भारतीय सांगीत का इनतहास एवां सांगीत पाररजात का
महत्व

भारतीय सांगीत का मध्यकाल लगभग १२वीं से १७वीं शताब्दी सांगीत के नवकास का एक स्वणत युग था,
नजसमें फारसी अरबी ्ቚभावों ने इसे हहदुस्तानी और कनातटक सांगीत के रूप में नवभानजत दकया। आधुननक
काल १८वीं शताब्दी से अब तक में सांगीत राजदरबारों से ननकलकर आम जनता तक पहुँचा, जहाँ 'ख्याल'
गायकी को अत्यनधक लोकन्ቚयता नमली और नई तकनीकों का समावेश हुआ।

सांगीत पाररजात का महत्व

'सांगीत पाररजात' की रचना १६५० ई० में पांनडत अहोबल ्ቛारा की गई। भारतीय सांगीत के इनतहास में इस
्ቇांथ का अत्यांत महत्वपूणत स्थान है
Wikipedia +1
 वीणा के तार पर स्वरों की स्थापना पांनडत अहोबल पहले ऐसे सांगीतकार थे, नजन्होंने िुनतयों की
काल्पननक माप के स्थान पर वीणा के तार की नननित लांबाई मापकर शु्ቍ और नवकृ त स्वरों की वै्ञाननक
स्थापना की।
 स्वरों का स्प्िीकरण इस ्ቇांथ में १२ स्वरों का नवस्तृत नववरण ददया गया है, जो आधुननक सांगीत प्ቍनत से
बहुत मेल खाता है।

 सांगीत के अांग इसमें कु ल ५०० ्शोक हैं और आठ अध्याय जैसे स्वर, ्ቇाम, मूछतना, जानत, राग आदद
शानमल हैं, जो ्ቚाचीन और आधुननक सांगीत को जोड़ने वाली एक कड़ी है।
राग नबहाग का सांपूणत शाኚᮌीय पररचय

राग नबहाग अत्यांत मधुर, गांभीर और रोमाांरटक ्ቚकृ नत का राग है। यह िृांगार रस
्ቚधान राग है जो रान्ቔ के समय गाया जाता है।
राग नबहाग का शाኚᮌीय पररचय नन्ቖ है

 थाट नबलावल
 जानत औडव सम्पूणत आरोह में ५ स्वर और अवरोह में ७ स्वर ्ቚयोग होते हैं
 वादी स्वर गांधार ग
 सांवादी स्वर ननषाद नन
 गायन समय रान्ቔ का दूसरा ्ቚहर रात ९ बजे से १२ बजे तक
 व़्जत स्वर आरोह में ऋषभ रे और धैवत ध व़्जत होते हैं
आरोह, अवरोह और पकड़

 आरोह नीऺ सा ग म प, नन साां
 अवरोह साां नन ध प, म प ग म ग, रे सा
 पकड़ नीऺ सा ग म प, म प ग म ग, रे सा
दो आलाप

1. नीऺ सा ग म प — प म प ग — ग म ग रे सा
2. नीऺ सा ग म प नन साां — साां नन ध प — म प ग म ग रे सा
दो तान

1. सा ग म प नन साां, साां नन ध प, म प ग म ग रे सा, नीऺ सा ग म प नन साां
2. ग म प नन साां नन साां, साां नन ध प म प ग म ग रे सा, ध नन साां नन ध प म प ग म ग रे सा

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Document Details

Board / OrgHaryana Board
ExamClass 12
TypeSample Paper
Pages6
Updated03 Nov 2026